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  • मंगल बदलेंगे नक्षत्र, इन 5 राशियों को करियर-धन से जुड़े मामलों में मिलेगा लाभ

    मंगल बदलेंगे नक्षत्र, इन 5 राशियों को करियर-धन से जुड़े मामलों में मिलेगा लाभ


    नई दिल्ली। सितंबर की शुरुआत में मंगल की चाल में बदलाव होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों के राशि परिवर्तन के साथ नक्षत्र परिवर्तन का भी राशियों पर प्रभाव पड़ता है। मंगल 2 सितंबर 2026 को देवगुरु बृहस्पति के स्वामित्व वाले पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 24 सितंबर तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। मंगल और गुरु की यह स्थिति कुछ राशियों के लिए शुभ मानी जा रही है। इस अवधि में करियर, कारोबार, धन और संपत्ति से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने के योग बन सकते हैं।

    मेष राशि

    मंगल का नक्षत्र परिवर्तन मेष राशि के लोगों के लिए आर्थिक लिहाज से फायदेमंद रह सकता है। अचानक धन लाभ के अवसर बन सकते हैं। कारोबारियों को काम के विस्तार का मौका मिल सकता है, जबकि नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने की संभावना है। परिवार से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। लंबे समय से किसी काम के लिए किए जा रहे प्रयास भी सफल हो सकते हैं।

    कर्क राशि

    कर्क राशि के जातकों के लिए मंगल का यह बदलाव परिवार और संपत्ति से जुड़े मामलों में राहत ला सकता है। पुरानी पारिवारिक परेशानियों का समाधान निकलने की उम्मीद है। पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ हो सकता है। मकान, जमीन या वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए समय अनुकूल रह सकता है। करियर में किसी प्रभावशाली व्यक्ति का सहयोग भी मिल सकता है।

    वृश्चिक राशि

    वृश्चिक राशि वालों के लिए मंगल का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश कार्यक्षेत्र में नए अवसर लेकर आ सकता है। काम में आ रही बाधाएं कम हो सकती हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी या पद मिलने के योग बन सकते हैं। अधिकारियों की ओर से आपके काम की तारीफ हो सकती है। साथ ही आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं।

    धनु राशि

    धनु राशि के लोगों के लिए यह अवधि नई शुरुआत के लिहाज से बेहतर साबित हो सकती है। किसी महत्वपूर्ण काम में सफलता मिलने की संभावना है। जीवनसाथी और परिवार का साथ मिलेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और निवेश के नए अवसर सामने आ सकते हैं। लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने से भी राहत मिल सकती है।

    मीन राशि

    मीन राशि के जातकों के लिए मंगल का पुनर्वसु नक्षत्र में जाना सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जा रहा है। कारोबार बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं। कामकाज की बाधाएं दूर होने से तनाव कम हो सकता है। नौकरी और रोजगार से जुड़े मामलों में तरक्की के योग बन सकते हैं। इस दौरान किसी खास व्यक्ति से मुलाकात भी भविष्य में लाभ दे सकती है।

    मंगल के नक्षत्र परिवर्तन को क्यों माना जा रहा खास?

    ज्योतिषीय मान्यताओं में मंगल को साहस, ऊर्जा, पराक्रम, भूमि और संपत्ति का कारक माना गया है। वहीं पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। ऐसे में मंगल का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश कुछ राशियों के लिए नई शुरुआत, प्रगति और उन्नति से जोड़कर देखा जाता है।

  • एमपी के पूर्वी हिस्से में 4 दिन रहेगा बारिश का दौर, 7 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी

    एमपी के पूर्वी हिस्से में 4 दिन रहेगा बारिश का दौर, 7 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में बारिश का दौर फिलहाल पूर्वी हिस्से तक सीमित रहने के आसार हैं। शनिवार को रीवा, सीधी, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में तेज बारिश हो सकती है। राजधानी भोपाल में रिमझिम बारिश होने की संभावना है, जबकि इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर-चंबल संभाग में तेज बारिश के आसार कम हैं।

    जबलपुर, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, सतना, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा। इन इलाकों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    लो प्रेशर एरिया और मानसून ट्रफ एक्टिव

    मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार प्रदेश के ऊपर लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) और मानसून ट्रफ सक्रिय हैं। हालांकि इन सिस्टम का प्रभाव पूरे मध्य प्रदेश में नहीं है। इसी कारण सभी जिलों में एक समान बारिश होने की संभावना नहीं है। पूर्वी हिस्से में अगले चार दिन बारिश का दौर बने रहने के आसार हैं।

    सामान्य से 2.6 इंच कम बारिश

    प्रदेश में अब तक 683.9 मिमी यानी 26.9 इंच बारिश दर्ज की गई है। यह इस अवधि की सामान्य बारिश 750.9 मिमी यानी 29.5 इंच से 2.6 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से 9% कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में बारिश 6% और पश्चिमी हिस्से में 12% कम रही है।

    37 जिलों में 1 से 49% तक कम बारिश

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश 19% तक कम हुई है। बालाघाट, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़, डिंडौरी और निवाड़ी में 1% से 49% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 4% से 50% तक कम पानी गिरा है।

    18 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश

    मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • रक्षाबंधन पर सबसे पहले महाकाल को बांधी राखी, 2 फीट की विशेष राखी पहनाई, लड्डुओं का लगाया महाभोग

    रक्षाबंधन पर सबसे पहले महाकाल को बांधी राखी, 2 फीट की विशेष राखी पहनाई, लड्डुओं का लगाया महाभोग


    उज्जैन। रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत धार्मिक नगरी उज्जैन में भगवान महाकाल के दरबार से हुई। शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे हुई भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल को 2 फीट लंबी विशेष राखी अर्पित की। इसके साथ ही भगवान को सवा लाख शुद्ध देसी घी के लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। इसे देश में सबसे पहले भगवान को राखी अर्पित करने की परंपरा के रूप में देखा जाता है।

    भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल को रक्षासूत्र बांधकर देश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। मान्यता है कि सनातन परंपरा के प्रमुख पर्वों का शुभारंभ राजाधिराज महाकाल के आंगन से होता है।

    राखी बांधने के लिए पुजारी ओम गुरु और राजेश शर्मा के परिवार की महिलाएं रात करीब 2 बजे ही मंदिर पहुंच गई थीं। भस्म आरती में बाबा महाकाल को भस्म अर्पित किए जाने के बाद 2 फीट लंबी विशेष राखी भगवान के स्वरूप पर समर्पित की गई। पूरे सावन व्रत रखने वाली महिलाओं ने महाकाल का प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोला और बाद में भाइयों की कलाई पर राखी बांधी।

    सवा लाख लड्डुओं का लगाया भोग

    रक्षाबंधन और श्रावणी पूर्णिमा के मौके पर बाबा महाकाल को सवा लाख शुद्ध देसी घी के लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूरे सावन उपवास रखने वाले श्रद्धालु पूर्णिमा पर महाकाल के लड्डू प्रसाद को ग्रहण करने के बाद व्रत पूर्ण करते हैं। भक्तों में प्रसाद वितरण के लिए मंदिर समिति और पुजारियों की ओर से बड़े पैमाने पर लड्डू तैयार कराए गए।

    एक सप्ताह में तैयार हुई विशेष राखी

    पुजारी आकाश गुरु के मुताबिक, करीब 2 फीट लंबी यह विशेष राखी पुजारी परिवार की महिलाओं ने लगभग एक सप्ताह की मेहनत से तैयार की। राखी बनाते समय महिलाएं लगातार ‘जय महाकाल’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करती रहीं।

    राखी को रेशमी वस्त्र, रेशमी धागों, कांच वर्क और आभूषणों से सजाया गया। इसमें भगवान महाकाल के प्रिय त्रिनेत्र, ‘ॐ’, त्रिपुंड और रुद्राक्ष को शामिल किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख और गौ माता के प्रतीक चिन्ह भी राखी में लगाए गए।

  • नेपाल विदेश मंत्री बोले- दोनों जरूरी, ‘बाप की जगह मां नहीं ले सकती’

    नेपाल विदेश मंत्री बोले- दोनों जरूरी, ‘बाप की जगह मां नहीं ले सकती’


    काठमांडू।
    नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच भारत की ओर से राहत और बचाव के लिए लगातार मदद पहुंचाई जा रही है। इसी दौरान नेपाल की विदेश नीति और भारत-चीन संबंधों को लेकर विदेश मंत्री शिसिर खनाल का बयान सामने आया है। उन्होंने साफ कहा कि नेपाल भारत और चीन में से किसी एक को चुनकर दूसरे को नजरअंदाज नहीं कर सकता। दोनों देश नेपाल के लिए महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं और काठमांडू अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर दोनों के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है।

    एनडीटीवी के एक कार्यक्रम में भारत और चीन के बीच नेपाल के झुकाव को लेकर सवाल पूछे जाने पर खनाल ने बेहद दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि नेपाल के लिए दोनों देशों की अपनी-अपनी अहमियत है और कोई एक दूसरे की जगह नहीं ले सकता।

    उन्होंने कहा, “जैसे कोई अपने पिता से यह नहीं कह सकता कि वह उन्हें मां से बदल देगा या मां से यह नहीं कह सकता कि वह उन्हें पिता से बदल देगा।” उनके मुताबिक, नेपाल के भारत और चीन दोनों के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं और वह इन्हें आगे भी बनाए रखना चाहता है।

    ‘विदेश नीति राष्ट्रीय हित के आधार पर’

    विदेश मंत्री ने कहा कि नेपाल एक संवेदनशील समाज है, लेकिन विदेश नीति के मामलों में उसे तार्किक दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेपाल किसी तीसरे देश के दबाव में अपनी विदेश नीति तय नहीं करता, बल्कि उसके फैसलों का आधार राष्ट्रीय हित है।

    खनाल ने भारतीय मीडिया में चल रही उन चर्चाओं को भी खारिज किया, जिनमें नेपाल के चीन के प्रभाव में आने की बात कही जा रही थी। उन्होंने कहा कि चीन के साथ नेपाल के पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि नेपाल किसी एक देश के नियंत्रण में है।

    नेपाल के व्यापार में भारत की बड़ी हिस्सेदारी

    नेपाल के आर्थिक रिश्तों का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत उसके लिए सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। उनके मुताबिक, नेपाल के कुल व्यापार का करीब दो-तिहाई हिस्सा भारत के साथ होता है।

    उन्होंने कहा कि अगर चीन की कंपनियां नेपाल में अपनी आर्थिक गतिविधियां बढ़ा रही हैं तो नेपाल भारतीय कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ाना चाहता है। उन्होंने भारतीय निवेशकों को नेपाल में कारोबार और निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि सरकार उन्हें जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

    BRI को लेकर क्या बोले खनाल?

    चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को लेकर भी नेपाली विदेश मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि नेपाल ने वर्ष 2017 में BRI फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन इसके बाद करीब एक दशक में नेपाल को BRI परियोजनाओं के तहत शून्य डॉलर की वित्तीय सहायता मिली है।

    उनके इस बयान को चीन के साथ नेपाल के आर्थिक संबंधों को लेकर चल रही चर्चाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारतीय निवेशकों को नेपाल का न्योता

    शिसिर खनाल ने कहा कि नेपाल भारत के साथ आर्थिक सहयोग को और आगे बढ़ाना चाहता है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच नेपाल से 10,000 मेगावाट बिजली निर्यात को लेकर ढांचागत समझौता हो चुका है।

    उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल से हाल के वर्षों में करीब एक अरब डॉलर की आईटी और टेक सेवाओं का निर्यात हुआ है। ऐसे में तकनीक और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं।

    विदेश मंत्री के मुताबिक, नेपाल को हवाई और सड़क संपर्क बेहतर करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है और इस क्षेत्र में भारतीय कंपनियों के लिए भी पर्याप्त अवसर मौजूद हैं।

    भारत-चीन के बीच संतुलन की नीति

    नेपाल भौगोलिक रूप से भारत और चीन के बीच स्थित है। ऐसे में काठमांडू के लिए दोनों पड़ोसियों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखना हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। खनाल के ताजा बयान से भी यही संकेत मिलता है कि नेपाल किसी एक खेमे में जाने के बजाय भारत और चीन दोनों के साथ अपने हितों के अनुरूप रिश्ते बनाए रखने की नीति पर जोर दे रहा है।

  • पाकिस्तान सीमा से शुरू होगी सरकार की ‘स्मार्ट बॉर्डर’ योजना

    पाकिस्तान सीमा से शुरू होगी सरकार की ‘स्मार्ट बॉर्डर’ योजना

    नई दिल्ली। देश की सीमाओं को और अभेद्य बनाने के लिए केंद्र सरकार अब तकनीक का सहारा लेने जा रही है। गृह मंत्रालय सभी भूमि सीमाओं के लिए एक आधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम तैयार कर रहा है। इसके तहत सीमावर्ती इलाकों में तैनात निगरानी उपकरणों से मिलने वाली सूचनाओं को कमांड सेंटरों के नेटवर्क के जरिए सीधे नई दिल्ली स्थित केंद्रीय मुख्यालय तक पहुंचाया जाएगा।

    अधिकारियों के मुताबिक, इस व्यवस्था का मकसद सीमा पर निगरानी को मजबूत करने के साथ-साथ किसी भी संभावित खतरे पर रियल टाइम में तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना है। नई सीमा प्रबंधन नीति के तहत खास तौर पर उन इलाकों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां पारंपरिक तरीके से बाड़ लगाना मुश्किल है। इस महत्वाकांक्षी योजना का पायलट प्रोजेक्ट पाकिस्तान सीमा से शुरू होने की संभावना है।

    AI से ड्रोन तक, एक सिस्टम में जुड़ेंगी कई तकनीकें

    प्रस्तावित ‘स्मार्ट बॉर्डर’ व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंसर, कैमरे, ड्रोन, निगरानी उपकरण और इमेज प्रोसेसिंग तकनीक को एक साथ जोड़ा जाएगा।

    इन अलग-अलग माध्यमों से मिलने वाले इनपुट को एक साझा परिचालन तस्वीर में बदला जाएगा। इससे सुरक्षा एजेंसियों को घुसपैठ, तस्करी, ड्रोन गतिविधियों और अन्य सुरक्षा खतरों की पहचान करने तथा उन पर तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

    अधिकारियों के अनुसार, भूमि सीमाओं पर कई छोटे कमांड सेंटर बनाए जाएंगे। इन्हें क्षेत्रीय फील्ड मुख्यालयों से जोड़ा जाएगा और आगे इनका नेटवर्क दिल्ली स्थित केंद्रीय मुख्यालय से कनेक्ट होगा।

    लाइव फीड से सीमा पर रखी जाएगी नजर

    नई व्यवस्था में लाइव निगरानी फीड महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे सीमा सुरक्षा बलों को वास्तविक समय में अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति देखने में मदद मिलेगी। जरूरत के हिसाब से जवानों और दूसरे संसाधनों को तुरंत उस इलाके में भेजा जा सकेगा, जहां खतरा दिखाई देगा।

    इससे उन इलाकों में हर समय बड़ी संख्या में जवानों की भौतिक गश्त पर निर्भरता भी कम हो सकती है, जहां तकनीकी निगरानी ज्यादा प्रभावी साबित हो सकती है।

    पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन चुनौती पर खास फोकस

    पाकिस्तान सीमा से इस परियोजना की शुरुआत किए जाने के पीछे ड्रोन के जरिए होने वाली तस्करी और निगरानी की बढ़ती चुनौती भी अहम वजह मानी जा रही है।

    सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से हथियार, मादक पदार्थ और अन्य प्रतिबंधित सामान भेजने की कोशिशें सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में नई तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली में ड्रोन गतिविधियों की पहचान और उस पर तत्काल प्रतिक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है।

    चीन से लगी 3,488 किमी सीमा भी होगी फोकस में

    भारत की सभी सीमाएं एक जैसी भौगोलिक परिस्थितियों से नहीं गुजरतीं। कहीं रेगिस्तान है तो कहीं पहाड़, नदी, जंगल और घनी आबादी वाले इलाके। इसलिए सरकार ऐसी तकनीकी व्यवस्था तैयार कर रही है, जिसे स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक इस्तेमाल किया जा सके।

    चीन के साथ भारत की करीब 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा भी इस योजना के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में शामिल है। लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक कई हिस्सों में भौगोलिक परिस्थितियां और सीमांकन की स्थिति पारंपरिक बाड़ लगाने को मुश्किल बनाती है।

    बांग्लादेश सीमा पर बाढ़ वाले इलाकों में तकनीक बनेगी सहारा

    बांग्लादेश सीमा के कई हिस्से नदी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं। ऐसे इलाकों में हर जगह स्थायी भौतिक बाड़ लगाना व्यावहारिक नहीं है।

    इसलिए यहां तकनीक आधारित निगरानी, सेंसर, कैमरों और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि जिन जगहों पर भौतिक सुरक्षा ढांचा सीमित है, वहां तकनीकी निगरानी उसकी कमी पूरी कर सके।

    सीमावर्ती राज्यों की पुलिस भी होगी सिस्टम का हिस्सा

    सीमा सुरक्षा को लेकर सरकार केवल सीमा सुरक्षा बलों पर निर्भर रहने के बजाय सीमावर्ती समुदायों और स्थानीय पुलिस को भी नई व्यवस्था का हिस्सा बनाने की योजना पर काम कर रही है।

    9 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में पहली बार भूमि सीमा से जुड़े जिलों के पुलिस अधीक्षकों का सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसमें पाकिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार से सीमा साझा करने वाले 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 119 सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षक शामिल हुए थे।

    अधिकारियों के मुताबिक, राज्यों से दिसंबर तक इस प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर सुझाव मांगे गए हैं।

    अगले डेढ़ साल में तैयार करने की योजना

    सरकार प्रस्तावित चतुष्कोणीय सीमा सुरक्षा व्यवस्था में सीमा सुरक्षा बलों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस और सीमावर्ती आबादी की भूमिका को भी शामिल करना चाहती है।

    अधिकारियों के अनुसार, राज्यों से मिलने वाले सुझावों और विभिन्न सीमावर्ती क्षेत्रों की जरूरतों के आधार पर योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसे अगले करीब डेढ़ वर्ष में पूरी तरह तैयार करने की योजना है।

    इस व्यवस्था के लागू होने के बाद सरकार का लक्ष्य सीमा निगरानी को अधिक तकनीक आधारित, एकीकृत और रियल टाइम बनाने का है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी स्थानीय स्तर से लेकर दिल्ली स्थित केंद्रीय तंत्र तक तेजी से पहुंच सके।

  • अमिताभ बच्चन ने शूटिंग के बीच डायरेक्टर को ही कर दिया सेट से बाहर

    अमिताभ बच्चन ने शूटिंग के बीच डायरेक्टर को ही कर दिया सेट से बाहर

    मुंबई। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन अपने अनुशासन और प्रोफेशनल अंदाज के लिए जाने जाते हैं। शूटिंग के दौरान वह अपने काम पर पूरी तरह फोकस रखने के लिए भी मशहूर रहे हैं। लेकिन एक दौर में एक ऐसा दिलचस्प किस्सा हुआ, जब अमिताभ बच्चन ने अपनी फिल्म के डायरेक्टर को ही सेट से बाहर जाने के लिए कह दिया था। खास बात यह है कि इसके पीछे कोई गुस्सा या विवाद नहीं, बल्कि डायरेक्टर की हंसी वजह बनी थी।

    जब बिग बी के डायलॉग पर बार-बार हंस रहे थे डायरेक्टर

    यह किस्सा साल 1982 में आई फिल्म ‘नमक हलाल’ की शूटिंग से जुड़ा है। फिल्म में अमिताभ बच्चन का एक डायलॉग बेहद लोकप्रिय हुआ था—‘आई कैन टॉक इंग्लिश, आई कैन वॉक इंग्लिश’।

    बताया जाता है कि यह डायलॉग अमिताभ बच्चन ने शूटिंग के दौरान अपने अंदाज में इम्प्रोवाइज किया था। जब भी वह इस संवाद को बोलते, फिल्म के निर्देशक प्रकाश मेहरा को हंसी आ जाती थी।

    डायरेक्टर की हंसी से अमिताभ बच्चन का फोकस प्रभावित होने लगा। ऐसे में उन्होंने प्रकाश मेहरा से कुछ देर के लिए सेट से बाहर जाने को कह दिया।

    गुस्से में नहीं, सीन पूरा करने के लिए उठाया कदम

    अमिताभ बच्चन का यह फैसला किसी नाराजगी की वजह से नहीं था। वह चाहते थे कि शूटिंग के दौरान माहौल शांत रहे और वह अपना सीन पूरी एकाग्रता के साथ पूरा कर सकें।

    प्रकाश मेहरा ने भी अभिनेता की बात मानी और सेट से बाहर चले गए। इसके बाद अमिताभ ने अपना सीन पूरा किया। यही छोटा-सा किस्सा आज भी ‘नमक हलाल’ की शूटिंग से जुड़े दिलचस्प किस्सों में गिना जाता है।

    ‘नमक हलाल’ में अमिताभ का अंदाज बना यादगार

    ‘नमक हलाल’ में अमिताभ बच्चन के साथ शशि कपूर, स्मिता पाटिल, परवीन बाबी और वहीदा रहमान जैसे कलाकार नजर आए थे। फिल्म में अमिताभ का किरदार गांव से शहर आए एक सीधे-सादे युवक का था, जिसके बोलने का अंदाज और कॉमिक टाइमिंग दर्शकों को खूब पसंद आई।

    फिल्म का ‘आई कैन टॉक इंग्लिश…’ वाला संवाद आज भी अमिताभ के सबसे चर्चित कॉमिक डायलॉग्स में शामिल है।

    उस दौर में बिग बी के सामने थी ‘हीरोइन क्राइसिस’

    ‘नमक हलाल’ के दौर को लेकर यह भी कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन के सामने लीडिंग एक्ट्रेसेज को लेकर कुछ चुनौतियां थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस समय उन्होंने रेखा के साथ काम करना बंद कर दिया था। राखी ज्यादा मैच्योर किरदार निभा रही थीं, जबकि परवीन बाबी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण लगातार काम नहीं कर पा रही थीं।

    नीतू सिंह भी फिल्मी करियर से दूरी बनाने की तैयारी में थीं। वहीं रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि अमिताभ मौसमी चटर्जी और शबाना आजमी के साथ काम करने के इच्छुक नहीं थे। ऐसे में उस दौर में उनके लिए उपयुक्त हीरोइन तलाशना आसान नहीं था।

    शशि कपूर के साथ लीड हीरो के तौर पर आखिरी फिल्म

    ‘नमक हलाल’ अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की बतौर लीड हीरो साथ में आखिरी फिल्मों में से एक थी। इसके बाद दोनों ‘अकेला’ में नजर आए, लेकिन उसमें शशि कपूर का किरदार छोटा था और अमिताभ मुख्य भूमिका में थे।

    बाद में शशि कपूर ने फिल्म ‘अजूबा’ का निर्देशन किया, जिसमें अमिताभ बच्चन ने भी अभिनय किया था। इस तरह दोनों की जोड़ी ने पर्दे पर अभिनय के साथ-साथ एक निर्देशक-अभिनेता के रूप में भी साथ काम किया।

  • शादी के बाद पहली बार पर्दे पर साथ दिखेंगे विजय देवरकोंडा-रश्मिका मंदाना

    शादी के बाद पहली बार पर्दे पर साथ दिखेंगे विजय देवरकोंडा-रश्मिका मंदाना

    हैदराबाद। विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की जोड़ी को पर्दे पर देखने का इंतजार कर रहे फैंस के लिए बड़ी खबर है। दोनों की मच अवेटेड फिल्म ‘राणाबली’ की रिलीज डेट आखिरकार सामने आ गई है। मेकर्स ने गुरुवार, 27 अगस्त को फिल्म का नया पोस्टर जारी करते हुए इसकी ग्लोबल थिएट्रिकल रिलीज का ऐलान कर दिया।

    16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में आएगी फिल्म

    माइथ्री मूवी मेकर्स के बैनर तले बन रही ‘राणाबली’ 16 अक्टूबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म को राहुल सांक्रित्यायन निर्देशित कर रहे हैं।

    फिल्म की कहानी एक भव्य पीरियड बैकड्रॉप पर आधारित बताई जा रही है। फर्स्ट लुक, किरदारों की झलक और म्यूजिक से जुड़े अपडेट पहले ही दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा चुके हैं।

    शादी के बाद पहली बार साथ नजर आएगी जोड़ी

    ‘राणाबली’ की सबसे बड़ी खासियत विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की जोड़ी है। दोनों को रियल लाइफ में साथ पसंद करने वाले फैंस के लिए यह फिल्म इसलिए भी खास है क्योंकि शादी के बाद दोनों पहली बार एक साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे।

    विजय और रश्मिका की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री को लेकर पहले से ही दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता है। ऐसे में फिल्म की रिलीज डेट सामने आने के बाद फैंस का इंतजार और बढ़ गया है।

    सामने आया विजय का इंटेंस लुक

    रिलीज डेट के ऐलान के साथ मेकर्स ने फिल्म का नया पोस्टर भी शेयर किया है। इसमें विजय देवरकोंडा का रॉ और इंटेंस पीरियड लुक दिखाई दे रहा है। उनके हाथ में एक भारी घुमावदार हथियार भी नजर आ रहा है, जो फिल्म के एक्शन और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की झलक देता है।

    पोस्टर के साथ मेकर्स ने लिखा, ‘हमारे इतिहास का सबसे अंधकारमय अध्याय इस अक्टूबर में खुलेगा। राणाबली की 16.10.26 को दुनिया भर में ग्रैंड रिलीज होगी।’

    दशहरे के आसपास रिलीज का लिया फैसला

    फिल्म को दशहरे के आसपास रिलीज किया जा रहा है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है और फिल्म की कहानी में भी अच्छाई और बुराई के संघर्ष की झलक मिलने की बात कही जा रही है। ऐसे में मेकर्स ने रिलीज के लिए इस खास समय को चुना है।

    अजय-अतुल का म्यूजिक और इंटरनेशनल स्टार भी

    बड़े बजट और भव्य स्तर पर तैयार की जा रही ‘राणाबली’ में शानदार विजुअल्स के साथ संगीतकार जोड़ी अजय-अतुल का म्यूजिक भी सुनने को मिलेगा। फिल्म में इंटरनेशनल अभिनेता अर्नोल्ड वॉस्लू भी अहम भूमिका में नजर आएंगे।

    इन तमाम वजहों से ‘राणाबली’ को 2026 के आखिरी महीनों की चर्चित फिल्मों में शामिल किया जा रहा है। अब देखना होगा कि विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की जोड़ी बड़े पर्दे पर दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।

  • अमाल मलिक ने म्यूजिक से लिया ब्रेक, बोले- पहले खुद को ठीक करना जरूरी

    अमाल मलिक ने म्यूजिक से लिया ब्रेक, बोले- पहले खुद को ठीक करना जरूरी

    मुंबई। मशहूर म्यूजिक कंपोजर और सिंगर अमाल मलिक ने अपने फैंस को चौंकाते हुए म्यूजिक इंडस्ट्री से ब्रेक लेने का ऐलान किया है। 27 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट शेयर कर अमाल ने बताया कि फिलहाल उन्हें अपने दिमाग, शरीर और आत्मा को आराम देने की जरूरत है। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि वह करीब एक साल तक नए म्यूजिक प्रोजेक्ट्स से दूर रहेंगे।

    ‘मैं बिल्कुल ठीक हूं, बस खुद के लिए समय चाहिए’

    अमाल मलिक ने अपनी पोस्ट में फैंस को भरोसा दिलाया कि वह ठीक हैं। उन्होंने कहा कि इस बार वह वही करना चाहते हैं जो उनके स्वास्थ्य और दिल के लिए बेहतर है।

    सिंगर ने बताया कि मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ होने के लिए उन्हें ब्रेक की जरूरत महसूस हुई। उनका कहना है कि उन्हें खुद को संभालना है, ठीक होना है और इसके बाद पहले से ज्यादा ऊर्जा के साथ संगीत की दुनिया में लौटना है।

    अगले साल तक नया फिल्म म्यूजिक नहीं

    अमाल ने स्पष्ट किया कि ब्रेक के दौरान वह किसी नए काम का हिस्सा नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि अगले साल तक उनका कोई नया फिल्म म्यूजिक रिलीज नहीं होगा।

    हालांकि, इस दौरान उनके कुछ पुराने और अप्रकाशित गाने रिलीज हो सकते हैं। अमाल ने बताया कि इनमें कम बजट की कुछ ऐसी फिल्मों के गाने भी शामिल हैं, जिन्हें अच्छी नीयत के साथ बनाया गया था, लेकिन उन्हें आसानी से स्क्रीन नहीं मिल पाती। इसलिए इन फिल्मों और उनके गानों का भविष्य फिलहाल निश्चित नहीं है।

    फैंस से बोले- मुझे परेशान न करें

    अमाल मलिक ने अपने फैंस और शुभचिंतकों से इस दौरान उन्हें निजी स्पेस देने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि आगे जब भी कोई अपडेट होगा, वह खुद इसके बारे में जानकारी देंगे।

    उन्होंने अपने पोस्ट में भावुक अंदाज में लिखा कि संगीत से सिनेमा तक का सफर उन्हें बहुत दूर तक ले आया है और अब वह कुछ समय के लिए संगीत की ओर वापस लौटने की तैयारी कर रहे हैं। इसी के साथ उन्होंने कहा, ‘अब मुझे विदा करो… मैं जल्द वापस आऊंगा।’

    ‘बिग बॉस 19’ में भी आए थे नजर

    वर्कफ्रंट की बात करें तो अमाल मलिक को आखिरी बार सलमान खान के शो ‘बिग बॉस 19’ में देखा गया था। शो के दौरान उन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। इस दौरान भोजपुरी अभिनेत्री नीलम गिरी के साथ उनकी बॉन्डिंग और केमिस्ट्री भी चर्चा में रही थी।

    अब अमाल के ब्रेक के ऐलान के बाद उनके फैंस को उनके नए संगीत के लिए करीब एक साल तक इंतजार करना पड़ सकता है।

  • सोनिया गांधी की किताब पर पेंगुइन ने क्यों खींचे हाथ? इन हिस्सों में बदलाव चाहता था प्रकाशक

    सोनिया गांधी की किताब पर पेंगुइन ने क्यों खींचे हाथ? इन हिस्सों में बदलाव चाहता था प्रकाशक


    नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘बिलोंगिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ के भारतीय संस्करण के प्रकाशन से पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने हाथ खींच लिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रकाशक पांडुलिपि के एक खास हिस्से में संपादकीय बदलाव के साथ कुछ अंश हटाना चाहता था। सोनिया गांधी ने बदलाव या कटौती करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रकाशन का समझौता आगे नहीं बढ़ सका।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पेंगुइन के पीछे हटने के बाद कई बड़े प्रकाशक इस पुस्तक के भारतीय संस्करण के अधिकार हासिल करने की कोशिश में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हार्पर कॉलिंस इंडिया किताब के प्रकाशन का समझौता अंतिम रूप देने के करीब है।

    भारत को छोड़कर दुनिया के अन्य देशों में यह किताब 10 नवंबर को जारी होगी। पुस्तक के प्रकाशन की घोषणा सबसे पहले अमेरिकी प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नोपफ ने की थी, जो पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक डिवीजन है। नोपफ के मुताबिक, किताब की शुरुआती एक लाख प्रतियां प्रकाशित की जाएंगी।

    छह दशक की निजी कहानी

    सोनिया गांधी पहले भी किताबें लिख चुकी हैं, लेकिन उनके करीबियों के अनुसार ‘बिलोंगिंग’ उनके जीवन का सबसे निजी और प्रामाणिक विवरण है। इसमें 1965 में कैम्ब्रिज में राजीव गांधी से उनकी पहली मुलाकात से लेकर नेहरू-गांधी परिवार का हिस्सा बनने तक के सफर को शामिल किया गया है।

    किताब में संजय गांधी की मृत्यु और इंदिरा गांधी तथा राजीव गांधी की हत्या के दौरान झेले व्यक्तिगत दुखों का भी जिक्र है। इसके अलावा 2004 में कांग्रेस को जनादेश मिलने के बावजूद प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले के पीछे की परिस्थितियों और कारणों पर भी सोनिया गांधी ने अपनी बात रखी है।

    सोनिया गांधी ने पुस्तक के बारे में कहा कि उनके परिवार पर काफी कुछ लिखा गया है, लेकिन बहुत कम लेखन ऐसा है जो उनके परिवार के सदस्यों की भावनाओं, फैसलों और मानवीय कमजोरियों को वास्तविक रूप में सामने रखता है। उनके मुताबिक, यह किताब पिछले छह दशकों के सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को भी एक अलग नजरिए से देखने का मौका देती है।

    पेंगुइन के फैसले पर फिर उठे सवाल

    पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का किसी चर्चित पुस्तक से पीछे हटने का यह पहला मामला नहीं है। इसी साल प्रकाशक ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को प्रकाशित करने से इनकार किए जाने की बात कही थी। हालांकि, राहुल गांधी ने संसद में इस किताब की हार्ड कॉपी दिखाई थी।

    जून में पेंगुइन ने ग्राफिक उपन्यासकार जो सैको की मुजफ्फरनगर दंगों पर आधारित किताब ‘द वंस एंड फ्यूचर रायट’ का प्रकाशन भी रद्द कर दिया था। इसके पीछे कानूनी जांच और नक्शे में सीमाओं से जुड़े मुद्दों को वजह बताया गया था।

  • BJP के बाद अब संघ में भी पीढ़ीगत बदलाव की तैयारी, ‘कॉकरोच प्रोटेस्ट’ के बाद Gen-Z पर बढ़ेगा फोकस

    BJP के बाद अब संघ में भी पीढ़ीगत बदलाव की तैयारी, ‘कॉकरोच प्रोटेस्ट’ के बाद Gen-Z पर बढ़ेगा फोकस


    नई दिल्ली। भाजपा ने अपनी नई संगठनात्मक टीम के जरिए बदलते राजनीतिक और सामाजिक माहौल के अनुरूप पार्टी को पुराने ढांचे से नए स्वरूप में ढालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सबसे अहम बदलाव यह है कि नए नेतृत्व को फैसले लेने में अधिक स्वतंत्रता दी गई है। वरिष्ठ नेता अब मुख्य रूप से मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे और संगठन को जरूरत पड़ने पर उनकी सलाह और सहयोग लिया जाएगा। राजनीतिक दलों में समय-समय पर होने वाले पीढ़ीगत बदलाव की इसी कड़ी का असर अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में भी दिखाई दे सकता है। हालांकि, संघ प्रमुख के पद में बदलाव को लेकर फिलहाल कोई चर्चा नहीं है।

    आमतौर पर किसी राजनीतिक दल के विपक्ष में रहने के दौरान संगठनात्मक प्रयोगों के लिए ज्यादा गुंजाइश होती है। सत्ता में रहते हुए बड़े बदलावों से बचने की प्रवृत्ति रहती है। इसके बावजूद भाजपा ने केंद्र में एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद भी अपने संगठन में बदलाव की शुरुआत की है। पार्टी के युवा अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नई टीम में युवा चेहरों के साथ अनुभवी नेताओं को भी जगह दी है, लेकिन निर्णय लेने की स्वतंत्रता अपने स्तर पर बनाए रखी है।

    हर दशक में बदलता रहा भाजपा का संगठन

    भाजपा के 1980 में गठन के बाद करीब-करीब हर दशक में पार्टी के संगठन में बदलाव देखने को मिले हैं। पिछली सदी के अंतिम दशक में तत्कालीन संगठन प्रमुख लालकृष्ण आडवाणी ने 1992 से 1995 के बीच बड़ी संख्या में युवाओं को पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी थीं। उस दौर में नरेंद्र मोदी भी प्रमुख युवा चेहरों में शामिल थे। 21वीं सदी के पहले और दूसरे दशक में भी संगठन में इसी तरह बदलाव हुए। हालांकि, उस समय वरिष्ठ नेताओं की भूमिका अधिक प्रभावी थी और वे नई टीमों को नेतृत्व देने के साथ उनका मार्गदर्शन भी करते थे।

    इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। पार्टी का नेतृत्व युवा है और निर्णय लेने की जिम्मेदारी भी उसी के हाथों में रखी गई है। सूत्रों के मुताबिक, संगठन को मजबूत करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका भी अहम बनी रहेगी। वरिष्ठ नेता नई टीम को मजबूती देने और जरूरत के मुताबिक सलाह देने की भूमिका में रहेंगे।

    अगले साल संघ में भी बड़े बदलाव की संभावना

    भाजपा के संगठनात्मक बदलाव के बाद अब उसकी वैचारिक और संगठनात्मक ताकत के प्रमुख केंद्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी अगले साल महत्वपूर्ण परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है। ‘कॉकरोच प्रोटेस्ट’ के बाद संघ का फोकस Gen-Z पर बढ़ने की बात कही जा रही है। संघ की ओर से अपने शताब्दी वर्ष के बाद नई पीढ़ी को लेकर संकेत भी दिए गए हैं।

    इसका व्यापक असर भाजपा के संगठन पर भी दिखाई दे सकता है। जेन-Z और जेन-अल्फा को लेकर बदलते सामाजिक माहौल के बीच भाजपा और संघ अपने नेतृत्व तथा कार्यकर्ताओं में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे सकते हैं।

    हालांकि, संघ प्रमुख को बदलने की कोई चर्चा नहीं है। मौजूदा सरसंघचालक मोहन भागवत 2009 से इस पद पर हैं। संघ में सरसंघचालक के चुनाव की व्यवस्था नहीं है। इस पद पर नियुक्ति आम सहमति से होती है। मौजूदा संघ प्रमुख किसी नाम का सुझाव देते हैं तो संगठन के भीतर उस नाम पर सहमति बनाई जा सकती है।