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  • Women’s Day 2026: रात में कार ड्राइव करते समय महिलाएं अपनाएं ये 5 सेफ्टी टिप्स, सफर होगा सुरक्षित

    Women’s Day 2026: रात में कार ड्राइव करते समय महिलाएं अपनाएं ये 5 सेफ्टी टिप्स, सफर होगा सुरक्षित



    नई दिल्ली। गाड़ी चलाते समय हर व्यक्ति को ट्रैफिक नियमों और सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी होता है। लेकिन जब महिलाएं ड्राइव कर रही हों, खासकर रात के समय, तो उन्हें अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत होती है। कई महिलाएं देर रात ऑफिस से घर लौटती हैं या अन्य कामों के लिए यात्रा करती हैं, ऐसे में कुछ जरूरी सावधानियां उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं। इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर जानते हैं कि महिलाओं को रात में कार चलाते समय किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।

    1. गाड़ी के सभी दरवाजे लॉक रखें

    ड्राइविंग शुरू करते ही कार के सभी दरवाजों को लॉक कर लेना चाहिए। सिर्फ ड्राइविंग सीट का दरवाजा लॉक करना पर्याप्त नहीं होता। रास्ते में किसी अनजान व्यक्ति को लिफ्ट देने से बचना भी सुरक्षित रहता है।

    2. सुनसान रास्तों से बचें

    रात के समय शॉर्टकट के चक्कर में सुनसान या कम आवाजाही वाले रास्तों से बचना बेहतर होता है। यदि नेविगेशन का उपयोग कर रहे हैं तो छोटे रास्तों की बजाय मुख्य सड़क या हाईवे का चयन करना अधिक सुरक्षित हो सकता है।

    3. कार की स्थिति पहले से जांच लें

    ड्राइव पर निकलने से पहले वाहन की स्थिति जरूर जांच लें। कार की समय पर सर्विसिंग हो, बैटरी सही हो, टायर में पर्याप्त हवा हो और हेडलाइट समेत सभी जरूरी सिस्टम ठीक से काम कर रहे हों।

    4. सेफ्टी टूल्स साथ रखें

    कार में कुछ जरूरी सुरक्षा उपकरण रखना फायदेमंद हो सकता है। जैसे पेपर स्प्रे, इलेक्ट्रिक शॉक रॉड या अन्य सेल्फ डिफेंस टूल्स, जो जरूरत पड़ने पर काम आ सकें।

    5. फोन और लोकेशन हमेशा एक्टिव रखें

    रात में यात्रा करते समय मोबाइल फोन पूरी तरह चार्ज होना चाहिए। अपनी लाइव लोकेशन परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति के साथ शेयर करना भी सुरक्षित कदम है। इसके अलावा मोबाइल के डायल पैड पर पुलिस या किसी करीबी का नंबर सबसे ऊपर सेव रखें ताकि आपात स्थिति में तुरंत कॉल किया जा सके।

    इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर महिलाएं रात में भी ज्यादा सुरक्षित तरीके से ड्राइव कर सकती हैं।

  • Women’s Day Special: 30 की उम्र के बाद महिलाएं क्या खाएं, स्किन ग्लो और कोलेजन के लिए डाइट टिप्स

    Women’s Day Special: 30 की उम्र के बाद महिलाएं क्या खाएं, स्किन ग्लो और कोलेजन के लिए डाइट टिप्स


    नई दिल्ली।  हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए नहीं बल्कि उनकी सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी बेहद खास माना जाता है। अक्सर महिलाएं घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को पीछे छोड़ देती हैं। लेकिन 30 की उम्र के बाद शरीर में कई ऐसे बदलाव शुरू हो जाते हैं जिन पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार 30 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कोलेजन का स्तर धीरे धीरे कम होने लगता है। कोलेजन एक महत्वपूर्ण प्रोटीन होता है जो त्वचा को मजबूत, लचीला और चमकदार बनाए रखने में मदद करता है। जब शरीर में इसकी कमी होने लगती है तो त्वचा पर झुर्रियां दिखाई देने लगती हैं, त्वचा ढीली पड़ सकती है और प्राकृतिक ग्लो भी कम हो सकता है।

    इसी वजह से 30 की उम्र के बाद महिलाओं के लिए सही और संतुलित डाइट लेना बेहद जरूरी हो जाता है। अगर खानपान में जरूरी पोषक तत्व शामिल किए जाएं तो न केवल कोलेजन का स्तर बेहतर बना रहता है बल्कि शरीर भी लंबे समय तक स्वस्थ रहता है।

    डाइट में सबसे पहले प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना जरूरी है। क्योंकि कोलेजन खुद एक प्रकार का प्रोटीन है और इसकी पर्याप्त मात्रा शरीर को मिलना बेहद आवश्यक है। इसके लिए महिलाएं अपनी डाइट में पनीर, दही, मूंग दाल, राजमा, चना, सोयाबीन, टोफू और विभिन्न प्रकार के ड्राई फ्रूट्स और नट्स शामिल कर सकती हैं। ये खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ स्किन और मसल्स को भी मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

    इसके अलावा शरीर के लिए बायोटिन और जिंक भी बेहद जरूरी पोषक तत्व माने जाते हैं। इनकी कमी होने पर त्वचा पर दाग धब्बे दिखने लगते हैं, बाल कमजोर हो सकते हैं और नाखून भी टूटने लगते हैं। इसलिए डाइट में बादाम, कद्दू के बीज, तिल, मशरूम और अंडे की सफेदी जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल करना फायदेमंद माना जाता है।

    ओमेगा 3 फैटी एसिड भी महिलाओं की सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह शरीर में सूजन को कम करने, हड्डियों को मजबूत रखने और जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद करता है। ओमेगा 3 की पर्याप्त मात्रा पाने के लिए डाइट में अलसी के बीज, चिया सीड्स, अखरोट और सूरजमुखी के बीज जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल किया जा सकता है।

    विटामिन C भी कोलेजन के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। अगर शरीर में विटामिन C की कमी हो जाए तो इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है और त्वचा भी जल्दी डैमेज होने लगती है। इसलिए महिलाओं को अपनी डाइट में आंवला, संतरा, नींबू, कीवी, स्ट्रॉबेरी और शिमला मिर्च जैसे विटामिन C से भरपूर फूड्स जरूर शामिल करने चाहिए।

    संतुलित आहार के साथ पर्याप्त पानी पीना, नियमित व्यायाम करना और अच्छी नींद लेना भी महिलाओं की सेहत के लिए उतना ही जरूरी है। सही डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर महिलाएं 30 की उम्र के बाद भी अपनी त्वचा को स्वस्थ और शरीर को ऊर्जावान बनाए रख सकती हैं।

    महिला दिवस का संदेश भी यही है कि महिलाएं अपने परिवार की देखभाल के साथ साथ अपनी सेहत को भी उतनी ही प्राथमिकता दें ताकि वे लंबे समय तक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकें।

  • चैत्र अमावस्या 2026: क्यों होगा पितरों का श्राद्ध एक दिन पहले? जानिए तारीख, मुहूर्त और महत्व

    चैत्र अमावस्या 2026: क्यों होगा पितरों का श्राद्ध एक दिन पहले? जानिए तारीख, मुहूर्त और महत्व


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चैत्र अमावस्या का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह महीने की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आता है और इस दिन स्नान दान तर्पण पिंडदान और श्राद्ध जैसे कार्य पितरों के लिए किए जाते हैं। इस वर्ष विशेष बात यह है कि पितरों के लिए श्राद्ध कर्म चैत्र अमावस्या से एक दिन पहले यानी 18 मार्च बुधवार को किए जाएंगे।

    वैदिक पंचांग के अनुसार 2026 में चैत्र अमावस्या तिथि की शुरुआत 18 मार्च सुबह 8:25 बजे से हो रही है और समाप्ति 19 मार्च गुरुवार को सुबह 6:52 बजे होगी। अमावस्या तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे समाप्त हो जाने के कारण पितरों के श्राद्ध और तर्पण का मुहूर्त 18 मार्च के दिन ही आता है। इसे दर्श अमावस्या कहा जाता है। इस समय में 11:30 बजे से लेकर दोपहर 2:30 बजे के बीच श्राद्ध पिंडदान और दान आदि किए जा सकते हैं।

    चैत्र अमावस्या के दिन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 बजे से 5:39 बजे तक है जो स्नान और धार्मिक क्रियाओं के लिए उत्तम माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। इस बार अमावस्या शुक्ल योग और उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में है। शुक्ल योग प्रातः से देर रात 1:17 बजे तक रहेगा जबकि उत्तर भाद्रपद नक्षत्र प्रातः से 20 मार्च को सुबह 4:05 बजे तक रहेगा।

    चैत्र अमावस्या और दर्श अमावस्या दोनों ही दिन राज पंचक में आते हैं। राज पंचक इस वर्ष 16 मार्च सोमवार शाम 6:14 बजे से प्रारंभ होकर 19 मार्च तक चलेगा। इसे शुभ फलदायी पंचक माना जाता है जो दान और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद लाभकारी है।

    धार्मिक मान्यता है कि चैत्र अमावस्या के दिन पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ दोष की शांति होती है। इससे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है। वहीं जो लोग पितरों को तृप्त नहीं करते उन्हें जीवन में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

    स्नान और दान करना इस दिन विशेष पुण्य का कार्य माना जाता है। इस दिन लोग पितरों को तृप्त कर पुण्य अर्जित करते हैं और अपने जीवन में सुख-समृद्धि और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस प्रकार इस वर्ष चैत्र अमावस्या और दर्श अमावस्या का यह समय पितृ पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • चावल खाने से नहीं बढ़ता पेट, एक्सपर्ट ने बताया सही तरीका, बस इन 5 आयुर्वेदिक नियमों का रखें ध्यान

    चावल खाने से नहीं बढ़ता पेट, एक्सपर्ट ने बताया सही तरीका, बस इन 5 आयुर्वेदिक नियमों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली। भारतीय भोजन में चावल का बहुत खास स्थान है। देश के अधिकांश घरों में लंच और डिनर में चावल जरूर बनाया जाता है। दाल चावल, राजमा चावल या अलग अलग तरह की करी के साथ चावल खाना लोगों को बेहद पसंद होता है। हालांकि कई लोग यह मानते हैं कि चावल खाने से पेट बाहर निकल आता है और वजन तेजी से बढ़ने लगता है। इसी डर की वजह से कई लोग अपनी डाइट से चावल को पूरी तरह हटाने का फैसला कर लेते हैं।

    लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि चावल खुद मोटापा नहीं बढ़ाता बल्कि इसे गलत तरीके से खाने या गलत किस्म के चावल चुनने से पाचन पर असर पड़ सकता है और शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा हो सकती है। इसलिए चावल खाने से पहले कुछ जरूरी आयुर्वेदिक नियमों को समझना जरूरी है।

    आयुर्वेद में चावल की उम्र को बहुत महत्व दिया गया है। आमतौर पर लोग बाजार से नया चावल खरीद कर इस्तेमाल करने लगते हैं। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार नया चावल भारी माना जाता है और इसे पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। नया चावल कफ बढ़ा सकता है और पाचन को धीमा कर सकता है। जिन लोगों को अक्सर सुस्ती महसूस होती है या जिनका पाचन कमजोर है उन्हें नया चावल खाने से बचना चाहिए।

    इसके विपरीत एक साल पुराना चावल हल्का और सुपाच्य माना जाता है। पुराने चावल की तासीर ऐसी हो जाती है कि वह पेट पर ज्यादा बोझ नहीं डालता और शरीर को जल्दी ऊर्जा देता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि संभव हो तो एक साल पुराना चावल ही इस्तेमाल करना चाहिए।

    चावल बनाने का तरीका भी सेहत पर असर डाल सकता है। आजकल ज्यादातर लोग कुकर में चावल बनाना पसंद करते हैं क्योंकि इससे समय की बचत होती है। लेकिन आयुर्वेद में कुकर में बने चावल को उतना अच्छा नहीं माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार चावल को खुले बर्तन में ज्यादा पानी के साथ पकाना चाहिए और पकने के बाद उसका माड़ यानी अतिरिक्त पानी निकाल देना चाहिए। इससे चावल हल्का और पचने में आसान हो जाता है।

    इसके अलावा आयुर्वेद में शरीर की प्रकृति के अनुसार भी खानपान को महत्व दिया गया है। हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है और उसी के अनुसार चावल खाने का तरीका भी अलग हो सकता है।

    जिन लोगों की वात प्रकृति होती है उन्हें अक्सर जोड़ों में दर्द, गैस या त्वचा में रूखापन जैसी समस्याएं रहती हैं। ऐसे लोगों को चावल खाते समय उसमें थोड़ा सा घी मिलाकर खाना चाहिए। इससे पाचन बेहतर होता है और शरीर को संतुलन मिलता है।

    पित्त प्रकृति वाले लोगों को अक्सर एसिडिटी, सीने में जलन या ज्यादा गर्मी महसूस होती है। ऐसे लोगों के लिए दूध के साथ चावल या चावल की खीर खाना फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह शरीर की गर्मी को संतुलित करने में मदद करता है।

    वहीं कफ प्रकृति वाले लोगों का वजन जल्दी बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है और उन्हें सर्दी खांसी की समस्या भी हो सकती है। ऐसे लोगों को हमेशा पुराना चावल खाना चाहिए और चावल का माड़ निकाल कर ही सेवन करना चाहिए।

    इस तरह सही प्रकार का चावल चुनकर और सही तरीके से पकाकर खाने से न केवल पाचन बेहतर रहता है बल्कि वजन बढ़ने का खतरा भी कम हो सकता है। इसलिए चावल को पूरी तरह छोड़ने के बजाय उसे सही नियमों के साथ खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

  • रंगपंचमी पर सबसे पहले महाकाल को चढ़ा रंग, भस्म आरती में केसर जल अर्पित, शिव परिवार को लगाया हर्बल गुलाल

    रंगपंचमी पर सबसे पहले महाकाल को चढ़ा रंग, भस्म आरती में केसर जल अर्पित, शिव परिवार को लगाया हर्बल गुलाल


    उज्जैन। रंगपंचमी के अवसर पर रविवार तड़के विश्व प्रसिद्ध उज्‍जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को सबसे पहले रंग अर्पित कर पर्व की शुरुआत की गई। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद भस्म आरती के दौरान भगवान महाकालेश्वर का विशेष पूजन किया गया और उन्हें एक लोटा केसर युक्त जल अर्पित किया गया। इसके बाद भगवान का त्रिपुंड, मुंडमाल और रजत आभूषणों से राजा स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया।
    शिव परिवार को लगाया हर्बल रंग

    रंगपंचमी के मौके पर भस्म आरती के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई। पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का पूजन कर सबसे पहले भगवान महाकाल को रंग अर्पित किया। इस दौरान भगवान महाकाल के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी को भी हर्बल रंग चढ़ाया गया।

    पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर मंत्रोच्चार के साथ हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद भगवान का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड लगाकर विशेष श्रृंगार किया गया।

    श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को रजत मुकुट, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित कर फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

    सुरक्षा के चलते रंग लाने पर रोक

    दो साल पहले धुलेंडी के दिन गर्भगृह में आग लगने की घटना को देखते हुए इस बार भी मंदिर में श्रद्धालुओं, पंडे-पुजारियों को रंग लाने की अनुमति नहीं दी गई। दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को सख्त जांच के बाद ही मंदिर में प्रवेश दिया गया।

    पहले हर साल श्रद्धालु रंग-गुलाल लेकर मंदिर पहुंचते थे, जिससे पूरा माहौल ब्रज की होली जैसा दिखाई देता था। इस बार भगवान को अर्पित किया जाने वाला केसर युक्त जल भी मंदिर की कोठार शाखा से ही पुजारियों को उपलब्ध कराया गया।

    मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह, नंदी मंडपम, गणेश मंडपम, कार्तिकेय मंडपम और पूरे मंदिर परिसर में रंग या गुलाल ले जाने, उड़ाने या लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है। साथ ही किसी भी उपकरण से रंग उड़ाने की भी अनुमति नहीं दी गई है।

    शाम की आरती में भी चढ़ेगा रंग

    संध्या आरती के दौरान भगवान महाकाल को एक लोटा केसर युक्त जल और लगभग 500 ग्राम गुलाल अर्पित किया जाएगा। यह सामग्री मंदिर की कोठार शाखा द्वारा भस्म आरती और शासकीय पुजारियों को उपलब्ध कराई जाएगी।

  • Odisha: दो हादसों में 5 स्कूली छात्रों की तालाब में डूबने से मौत

    Odisha: दो हादसों में 5 स्कूली छात्रों की तालाब में डूबने से मौत


    भुवनेश्वर।
    ओडिशा (Odisha) के कोरापुट और मयूरभंज जिलों (Koraput and Mayurbhanj districts) में शनिवार को अलग-अलग घटनाओं में पांच स्कूली छात्रों (Five School Students) की डूबने से मौत हो गई। इन दुखद घटनाओं ने राज्य को झकझोर कर रख दिया है, और घटनाओं पर बीजू जनता दल (बीजद) और विपक्षी कांग्रेस ने गहरा शोक व्यक्त किया है।


    कोरापुट में तीन छात्रों की दर्दनाक मौत

    कोरापुट जिले में, कोलंब तालाब में कक्षा 10 के तीन छात्रों की डूबने से मौत हो गई। ये छात्र अपने स्कूल से निकले थे और कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएं खत्म होने के बाद अपने माता-पिता के आने का इंतजार कर रहे थे। परीक्षा पूरी होने की खुशी में वे पानी में खेलने चले गए, जहां वे डूब गए। स्थानीय लोगों ने छात्रों को बचाने की कोशिश की और उन्हें कोरापुट के शहीद लक्ष्मण नायक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस के अनुसार, यह घटना दोपहर 3 बजे से 3:30 बजे के बीच हुई। मरने वाले छात्रों की पहचान लिंगराज खिल (16), स्वस्तिक (15) और ओम प्रकाश (16) के रूप में हुई है। मृतकों के परिवार वालों ने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है और घटना की जांच की मांग की है।


    मयूरभंज में दो बालिकाओं की डूबने से मौत

    मयूरभंज जिले में एक अन्य घटना में, कप्तपाड़ा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के नछीपुर गांव के पास एक तालाब में नहाते समय दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली दो बालिकाओं की डूबने से मौत हो गई। सात वर्षीय सुभाषसंध्या नायक और आठ वर्षीय राजलक्ष्मी संखुआल, स्कूल से लौटने के बाद तालाब में नहाने गई थीं। जब परिवार वालों को घटना का पता चला, तो वे तुरंत तालाब की ओर भागे और दोनों बालिकाओं को बाहर निकाला। उन्हें कप्तपाड़ा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


    राजनीतिक पार्टियों ने दी प्रतिक्रिया

    इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने ट्वीट कर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ‘कोरापुट नवोदय विद्यालय के तीन छात्रों के तालाब में डूबने से हुई मौत की खबर दिल दहला देने वाली है। मैं दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं। मैं शोक संतप्त परिवारों और प्रियजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं, क्योंकि वे इस दुखद समय का सामना कर रहे हैं।’

    ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी सोशल मीडिया पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा, ‘कोरापुट के कोलंब जलाशय में डूबने से नवोदय विद्यालय के तीन छात्रों की दुखद मृत्यु से मैं बहुत आहत हूं। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं। ईश्वर उन्हें इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति प्रदान करे।’

  • Women's Day: महिलाओं के सम्मान का दिन…. हाउसमेकर हो कामकाजी, जानें अपने ये 5 अधिकार

    Women's Day: महिलाओं के सम्मान का दिन…. हाउसमेकर हो कामकाजी, जानें अपने ये 5 अधिकार


    नई दिल्ली।
    हर साल की तरह आज भी 8 मार्च को पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) मनाया जा रहा है। ये दिन हर महिला को सम्मान (Women Respect) देने के लिए होता है, भले ही वो हाउसमेकर (Housemaker) हो, या फिर कामकाजी महिला (Working Woman) हों।

    महिला दिवस केवल उत्सव और सम्मान का दिन नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा और सशक्तिकरण के महत्व को समझने का अवसर भी है। सही जानकारी और जागरूकता ही महिलाओं को अपने जीवन में स्वतंत्र निर्णय लेने, समान अवसर पाने और समाज में सम्मान सुनिश्चित करने में मदद करती है।

    आज हम आपको पांच ऐसे अहम अधिकारों के बारे में बताएंगे, जिनका हर महिला को पता होना चाहिए। ये अधिकार न केवल उन्हें सशक्त बनाते हैं, बल्कि घर और समाज में उनकी सुरक्षा और सम्मान भी सुनिश्चित करते हैं। महिला दिवस पर इन अधिकारों को जानना और अपनाना हर महिला के लिए एक जरूरी कदम है।


    1. शिक्षा का अधिकार

    भारतीय संविधान की अनुच्छेद 15(1) और 15(3) महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को रोकते हैं और शिक्षा के समान अवसर सुनिश्चित करते हैं। ऐसे में कोई भी परिवार ये नहीं कह सकता कि वो सिर्फ अपने घर के लड़कों को पढ़ने भेजेगा, और लड़कियों को नहींं।


    2. स्वास्थ्य का अधिकार

    भारतीय कानून के तहत महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मिलना अनिवार्य है। मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 सुरक्षित प्रसव और मातृत्व अवकाश सुनिश्चित करता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति और प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा को कानूनी मान्यता दी गई है।


    3. समान वेतन और रोजगार का अधिकार

    भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39(a) और 39(d) समान वेतन और काम के समान अवसर सुनिश्चित करता है। इसके अलावा भेदभाव उन्मूलन अधिनियम 1976 के तहत पुरुष और महिला कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन देना अनिवार्य है।


    4. सुरक्षा का अधिकार

    भारतीय संविधान की अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देती है। इसके अलावा महिला सुरक्षा कानून जैसे घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, शोषण रोकथाम अधिनियम और धारा 498A महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।


    5. संपत्ति और आर्थिक स्वतंत्रता का अधिकार

    भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 2005 के तहत बेटियों को पिता की संपत्ति में बराबर हिस्सा मिलता है। इसके अलावा अनुच्छेद 15 और 19 महिलाओं को आर्थिक निर्णय और व्यापार करने का अधिकार भी सुनिश्चित करते हैं। महिलाएं अपने बैंक खाता और निवेश पर स्वतंत्र निर्णय ले सकती हैं।

  • इंदौर में आज पारंपरिक गेर में मिसाइलों से उड़ेगा रंग, टेसू के फूलों से बने गुलाल से सजेगा राजवाड़ा

    इंदौर में आज पारंपरिक गेर में मिसाइलों से उड़ेगा रंग, टेसू के फूलों से बने गुलाल से सजेगा राजवाड़ा


    इंदौर।
    मालवा की सांस्कृतिक राजधानी इंदौर में आज रविवार को रंगों का सबसे बड़ा और भव्य उत्सव देखने को मिलेगा। पारंपरिक गेर के साथ पूरा पश्चिम क्षेत्र रंगों से सराबोर हो जाएगा। लाखों लोग इस अनूठे रंगोत्सव में शामिल होकर गुलाल और रंगों की बौछारों का आनंद लेंगे।

    गेर के साथ ही शहर में फागयात्रा भी निकलेगी, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होंगी। आयोजकों ने इस भव्य आयोजन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। कार्यक्रम के दौरान हजारों किलो गुलाल उड़ाया जाएगा, जिससे शहर का माहौल पूरी तरह रंगमय हो जाएगा।

    70 साल पुरानी परंपरा

    यह परंपरागत गेर राजवाड़ा से निकाली जाती है और इसका इतिहास करीब सात दशक पुराना है। शुरुआत में बड़े कड़ावों में रंग भरकर लोगों को भिगोने की परंपरा थी। समय के साथ यह आयोजन बैलगाड़ियों और ट्रैक्टरों से होते हुए डीजे और आधुनिक तकनीक तक पहुंच गया। अब गेर में रंग बरसाने के लिए विशेष मिसाइल तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे रंग और पानी करीब 200 फीट तक हवा में उछाला जाएगा।

    लाखों लोग बनेंगे रंगोत्सव के साक्षी

    पिछले तीन वर्षों से गेर में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 5 लाख से अधिक रही है। यही वजह है कि यह आयोजन देश के सबसे बड़े रंगोत्सवों में गिना जाने लगा है। इस बार भी लाखों लीटर पानी और हजारों किलो गुलाल उड़ाने की तैयारी की गई है। राजवाड़ा और आसपास के 5 से 6 किलोमीटर क्षेत्र में रंग, गुलाल और पानी की बौछारें देखने को मिलेंगी।

    टेसू के फूलों से बने गुलाल से बनेगा तिरंगा

    इस आयोजन की खास बात यह है कि करीब 8 हजार किलो टेसू के फूलों से तैयार गुलाल का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे राजवाड़ा पर तिरंगा बनाया जाएगा, जो उत्सव का विशेष आकर्षण होगा।

    ढोल-ताशे, झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

    गेर में बैंड, ढोल-ताशे, आकर्षक झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी देखने को मिलेंगी। गेर और फागयात्रा अपने-अपने तय मार्गों से निकलकर शहरवासियों को रंगों के इस महासागर में डुबो देंगी।

  • मुख्यमंत्री आज रंगपंचमी पर उज्जैन में श्री कृष्ण-सुदामा रंग उत्सव में होंगे शामिल

    मुख्यमंत्री आज रंगपंचमी पर उज्जैन में श्री कृष्ण-सुदामा रंग उत्सव में होंगे शामिल


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज रविवार को रंग पंचमी के अवसर पर उज्जैन में आयोजित श्री कृष्ण-सुदामा रंग उत्सव कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव सुबह 09 बजे श्री कृष्ण सुदामा रंग उत्सव गेर (चल समारोह) में सिंधी कॉलोनी से सम्मिलित होकर टॉवर चौराहे तक जाएंगे। टॉवर चौराहे पर मुख्य कार्यक्रम आयोजित होंगे। इन सभी कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री सम्मिलित होंगे। रंग उत्सव कार्यक्रम में सामाजिक संस्थाओं द्वारा स्वागत द्वार, मंच लगाकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्र से आने वाली मंडली, झांकियां, फाग उत्सव करने वाले संस्थाओं के द्वारा विशेष आयोजन भी किए जाएंगे। लाइव झांकियां भी इस कार्यक्रम में सम्मिलित होगी।

  • DIY होम डेकोर ट्रिक: 20 लीटर की पुरानी पानी की केन से बनाएं मिनी पॉन्ड, फ्री में मिलेगा गार्डन जैसा लुक

    DIY होम डेकोर ट्रिक: 20 लीटर की पुरानी पानी की केन से बनाएं मिनी पॉन्ड, फ्री में मिलेगा गार्डन जैसा लुक

    नई दिल्ली।आजकल लोग अपने घर और गार्डन को सजाने के लिए महंगे डेकोरेशन आइटम खरीदते हैं लेकिन कई बार घर में मौजूद बेकार सामान से भी बेहद खूबसूरत सजावट की जा सकती है। अगर आप भी घर को नेचुरल और यूनिक लुक देना चाहते हैं तो एक साधारण 20 लीटर की पानी की केन से शानदार मिनी पॉन्ड बनाया जा सकता है। यह एक आसान और क्रिएटिव DIY आइडिया है जो कम मेहनत में आपके घर की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा सकता है।

    सोशल मीडिया पर इन दिनों ऐसे कई DIY आइडिया वायरल हो रहे हैं जिनमें बेकार सामान को इस्तेमाल कर नई चीजें बनाई जा रही हैं। इसी तरह एक वीडियो में दिखाया गया है कि किस तरह साधारण वाटर केन को एक खूबसूरत प्लांटेड मिनी पॉन्ड में बदला जा सकता है। अगर आप गार्डनिंग के शौकीन हैं तो यह आइडिया आपके लिए बेहद काम का साबित हो सकता है।

    मिनी पॉन्ड बनाने के लिए सबसे पहले एक खाली 20 लीटर की पानी की केन लें और उसे अच्छी तरह साफ कर लें। केन जितनी साफ होगी अंदर का दृश्य उतना ही साफ और आकर्षक दिखाई देगा। इसके बाद केन के निचले हिस्से को सावधानी से काट लें ताकि वह खुला टैंक जैसा दिखने लगे।

    इसके बाद केन के ढक्कन में एक छोटा सा छेद करें और उसमें एक प्लास्टिक की टोटी फिट कर दें। यह टोटी बाद में पानी निकालने और सफाई करने के काम आएगी। जब टोटी फिट हो जाए तो ढक्कन को केन में अच्छी तरह बंद कर दें।

    मिनी पॉन्ड बनाते समय सबसे बड़ी समस्या पानी के रिसाव की हो सकती है। इसलिए ढक्कन को बंद करने से पहले उस पर टेफ्लॉन टेप अच्छी तरह लपेट दें ताकि पानी बाहर न निकले। इसके अलावा सुरक्षा के लिए ढक्कन और टोटी वाली जगह को एम सील से भी सील कर सकते हैं। इससे पानी का रिसाव पूरी तरह रुक जाता है।

    इसके बाद केन को उल्टा करके सेट करें और उसमें पानी भर दें। अब इसमें छोटे-छोटे जलीय पौधे लगाए जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर रोटाला रोटुंडिफोलिया ग्रीन नाम का पौधा छोटे प्लास्टिक कंटेनर में एक्वेरियम सॉइल के साथ लगाया जा सकता है। इसके अलावा एनुबियास जैसे पौधे भी इसमें लगाए जा सकते हैं। एनुबियास की खासियत यह है कि इसे मिट्टी की जरूरत नहीं होती और यह पत्थर या लकड़ी के सहारे भी आसानी से बढ़ जाता है।

    अगर आप चाहें तो इस मिनी पॉन्ड में छोटी मछलियां और झींगे भी रख सकते हैं। लेकिन चूंकि इसमें कोई फिल्टर नहीं लगाया जाता इसलिए बहुत ज्यादा जीव नहीं रखने चाहिए। इसमें एम्बर टेट्रा जैसी छोटी मछलियां और कुछ झींगे रखना बेहतर माना जाता है ताकि पानी ज्यादा गंदा न हो और बायोलोड कम बना रहे।

    पौधों को सही तरीके से बढ़ने के लिए रोशनी भी जरूरी होती है। इसके लिए एक साधारण एक्वेरियम एलईडी लाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है जिसे रोजाना लगभग सात घंटे तक जलाया जा सकता है। इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और मिनी पॉन्ड देखने में भी बेहद खूबसूरत लगता है।

    पानी की सफाई के लिए केन में लगी टोटी काफी मददगार होती है। जब भी पानी बदलना हो तो नीचे लगे टैप को खोलकर आसानी से पानी निकाला जा सकता है और नया पानी डाला जा सकता है।

    इस तरह घर में पड़ी एक साधारण और बेकार पानी की केन को इस्तेमाल कर आप बेहद खूबसूरत मिनी पॉन्ड बना सकते हैं। यह न केवल घर की सजावट को खास बनाता है बल्कि गार्डनिंग के शौकीनों के लिए भी एक शानदार और किफायती आइडिया साबित होता है।