

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य प्रबंधक संतोषकृष्ण अन्नावरपु की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर की गई। दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2013 से 2017 के दौरान अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के तत्कालीन अधिकारियों ने बैंक से लिया गया लगभग 1085 करोड़ रुपये का ऋण नियमों के विपरीत तरीके से इस्तेमाल किया।
बैंक का कहना है कि कंपनी ने यह ऋण वापस करने की स्पष्ट मंशा के बिना लिया था और प्राप्त धनराशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में किया गया। बैंक के अनुसार यह कृत्य धोखाधड़ी और विश्वास के आपराधिक उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
प्राथमिकी में अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के अलावा कुछ अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो अब इस मामले में धन के उपयोग, संभावित वित्तीय हेरफेर और लेन-देन से जुड़ी कड़ियों की विस्तृत जांच करेगी।


शाम करीब 4 बजे बाबा अचलनाथ की सवारी राम मंदिर पहुंची, जहां बाबा ने भगवान राम के साथ रंग और गुलाल से होली खेली। इसके अतिरिक्त, सनातन धर्म मंदिर में चक्रधर भगवान के साथ भी रंगोत्सव का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर एक दानदाता ने मंदिर के स्तंभों के लिए 5 किलो चांदी का दान भी किया। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि आज सभी दानपेटियां भी खोली जाएंगी। इस भव्य रंगपंचमी आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं।

वीडियो में 62 वर्षीय सिबानंद भंजा और उनकी पत्नी बसबी भंजा को दिखाया गया है, जिन्होंने बैंक की नौकरी से रिटायर होने के बाद एक कार में यात्रा कर पूरे भारत का भ्रमण शुरू किया। दंपति ने अब तक 55 हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी कर ली है और होटल के बजाय खुद भोजन बनाकर खाते हैं। दिग्विजय ने इस वीडियो के माध्यम से अपने रिटायरमेंट के अंदाज को दर्शाया।
राज्यसभा चुनाव को लेकर भी दिग्विजय पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे राज्यसभा की सीट लेने से इनकार कर चुके हैं। जून में उनका दूसरा कार्यकाल पूरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा जाने का विकल्प छोड़कर एमपी में कांग्रेस की स्थिति पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
इतिहास पर नजर डालें तो दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन 2003 में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने 10 साल तक चुनाव न लड़ने का संकल्प लिया। 2014 में वे राज्यसभा सदस्य बने और 2020 में दूसरी बार राज्यसभा सांसद चुने गए।
आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके रिटायरमेंट और भविष्य की योजनाओं का खुलासा होने की उम्मीद है, जिससे मध्य प्रदेश की राजनीति और कांग्रेस के रणनीतिक बदलाव पर नई बहस शुरू हो सकती है।

राष्ट्रपति ने कहा, ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं।
राष्ट्रपति कार्यक्रम स्थल विवाद ने प्रशासन और राजनीतिक स्तर पर हलचल मचा दी है। गृह मंत्रालय ने बंगाल सरकार से रिपोर्ट तलब कर जांच शुरू कर दी है, वहीं आदिवासी समुदाय और देशभर में लोग इस मुद्दे पर संवेदनशील प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

वारदात: सुबह 5 बजे, टॉयलेट के पास ‘बॉडी बिल्डर’ का हमला
आशुतोष महाराज के अनुसार, वे वेस्ट यूपी संयोजक सुधांशु सोम के साथ सफर कर रहे थे। सुबह करीब 5 बजे जब ट्रेन फतेहपुर और सिराथू के बीच थी, तब वे बाथरूम की ओर जा रहे थे। तभी एक ‘नकाबपोश नहीं बल्कि खुले चेहरे’ वाले हट्टे-कट्टे हमलावर ने उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमलावर ने उनकी नाक काटने की कोशिश की और चेहरे व हाथ पर कई वार किए। आशुतोष ने बताया कि उन्होंने जान बचाने के लिए हमलावर से हाथापाई की और किसी तरह खुद को बाथरूम में लॉक कर लिया। वे तब तक बाहर नहीं आए जब तक जीआरपी की टीम मौके पर नहीं पहुँच गई।
आरोप: “कोर्ट में सबूत न दे पाऊं, इसलिए रची गई हत्या की साजिश”
अस्पताल के बेड से आशुतोष महाराज ने सीधे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों पर उंगली उठाई है। उन्होंने दावा किया कि:
वजह: पॉक्सो एक्ट के तहत उन्होंने जो एफआईआर दर्ज कराई है, उसके पुख्ता सबूत वे कोर्ट में पेश न कर पाएं, इसलिए यह हमला कराया गया।
इनाम की घोषणा: उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी नाक काटने के लिए एक लाख रुपये के इनाम का ऐलान किया गया था, जिसमें दिनेश फलाहारी और मुकुंदानंद जैसे नाम शामिल हैं।
फेसबुक पोस्ट का रहस्य: इस हमले की कथित जिम्मेदारी ‘डॉ. स्वाति अघोरी’ नाम के फेसबुक अकाउंट से ली गई है, जिसमें लिखा गया— “बोला था न हमारे लोगों के हत्थे मत चढ़ना।” पुलिस अब इस अघोरी साधक के प्रोफाइल की सत्यता की जांच कर रही है।
पलटवार: “यह सब सुरक्षा पाने का बनावटी ड्रामा है”
वहीं, दूसरी ओर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को ‘मीडिया अटेंशन’ पाने का तरीका बताया है। उन्होंने कहा कि:
बनावटी हमला: शंकराचार्य के अनुसार, अटेंडेंट का कहना है कि बाथरूम जाने तक वे ठीक थे, फिर अचानक यह हाल कैसे हो गया? यह सब सरकारी सुरक्षा हासिल करने का प्रपंच है।
रेलवे सुरक्षा पर सवाल: उन्होंने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि क्या अब भारत की ट्रेनें सुरक्षित नहीं रह गई हैं? जीआरपी कहाँ थी?
ध्यान भटकाने की कोशिश: उन्होंने इसे अपनी धार्मिक यात्रा से लोगों का ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी कोशिश करार दिया।
वर्तमान स्थिति: मेडिकल जांच और पुलिसिया शिकंजा
फिलहाल आशुतोष महाराज का प्रयागराज के काल्विन अस्पताल में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने उनके चेहरे के गहरे घावों को देखते हुए CT स्कैन और एक्स-रे कराया है। आशुतोष ने सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की है और वे सहारे के बिना चल भी नहीं पा रहे हैं। जीआरपी ने उनकी शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और प्रयागराज सर्किट हाउस से लेकर अस्पताल तक भारी पुलिस बल तैनात है।
निष्कर्ष
“चलती ट्रेन के सुरक्षित कोच में इस तरह का हमला न केवल रेलवे सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि धर्म और कानून की इस जंग में ‘नाक’ का सवाल अब जान पर बन आया है। पुलिस के लिए अब दूध का दूध और पानी का पानी करना एक बड़ी चुनौती है।”

तेहरान में हेल्थ केयर वर्कर्स ने गांधी अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया जहां हाल ही में एयर स्ट्राइक हुई थी। अस्पताल परिसर में ईरान का झंडा लहराते हुए लोग घायल मरीजों और खोए हुए लोगों की याद में खड़े थे। इसी बीच जैनब साहेबी नाम की एक मासूम बच्ची की कब्र को फूलों से सजाया गया और उस पर ईरान का झंडा रखा गया। महिलाएं उसकी कब्र तक उसका शव लेकर गईं हर कदम पर मातम और दर्द नजर आ रहा था।
शहरों में फैली तबाही ने लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। आपातकालीन केंद्रों और राहत शिविरों में लोग पानी भोजन और दवाइयों के लिए इंतजार कर रहे हैं। कई परिवारों ने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह से खो दी है कई बच्चों की पढ़ाई और भविष्य अस्थायी तौर पर थम गया है।
दुनिया भर में इस जंग के खिलाफ और समर्थन में प्रदर्शन हुए। ब्रिटेन में शनिवार को ईरान समर्थक और अमेरिका समर्थक दोनों ही समूहों ने मार्च निकाला। विरोध-समर्थन के ये विरोध मार्च वैश्विक स्तर पर इस जंग के राजनीतिक और सामाजिक असर को दर्शा रहे हैं। साथ ही लेबनान में भी इजराइल और ईरान समर्थक ग्रुप हिज़बुल्लाह के बीच हिंसक टकराव जारी है। शहरों में धमाके हवाई हमले और सड़क संघर्ष ने आम नागरिकों की जिंदगी को पूरी तरह से अस्थिर कर दिया है।
इन हालातों के बीच बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों की कहानियां सबसे ज्यादा दिल दहला रही हैं। जैनब साहेबी की तस्वीरें घायल मरीज बिखरी हुई सड़कें और मलबे में फंसे लोग इस जंग की भयंकर तस्वीर पेश कर रहे हैं। वैश्विक समुदाय की नजरें ईरान अमेरिका और इजराइल के राजनीतिक फैसलों पर टिकी हुई हैं। राहत कार्य मानवाधिकार संगठन और स्वास्थ्य कर्मचारी लगातार संघर्षरत नागरिकों की मदद में जुटे हैं लेकिन जंग की भयावहता के बीच राहत की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण है।

देखते ही देखते करीब 300 बच्चे घाट की सीढ़ियों पर बैठ गए और वही बच्चे कुछ देर पहले दुकानों पर सामान बेच रहे थे। सामने लगे डिजिटल बोर्ड और छोटे साउंड सिस्टम के माध्यम से पराग भैया बच्चों को पढ़ा रहे थे। माहौल ऐसा था कि घाट पर मौजूद श्रद्धालु भी रुककर इस अनोखी क्लास को देखने लगे। छोटे छोटे बच्चे मैथ्स और विज्ञान के कठिन सवाल हल कर रहे थे।
पराग भैया बताते हैं कि यह विचार उनकी मां के निधन के बाद आया। 2016 में मां की अस्थियां नर्मदा में विसर्जित करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि अब उनका परिवार यही बच्चे हैं। शुरुआत सिर्फ 5 बच्चों से हुई थी लेकिन धीरे धीरे संख्या बढ़कर 200 से अधिक हो गई। शुरुआत में बच्चों को पढ़ाने के लिए 10 20 रुपए देने पड़ते थे लेकिन अब बच्चे स्वयं नियमित पढ़ाई के लिए घाट पर आते हैं।
इस प्रयास में कई लोग मदद कर रहे हैं। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने डिजिटल बोर्ड उपलब्ध कराया वहीं 26 जनवरी को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने 60 बच्चों को टैबलेट दिए जिससे डिजिटल पढ़ाई आसान हो गई।
इन बच्चों के माता पिता अक्सर नाव चलाते हैं या घाट किनारे दुकाने लगाते हैं। कई बच्चे खुद भी दिनभर 60 70 रुपए तक कमाते हैं। 8वीं कक्षा की परी यादव बताती हैं कि वह दिनभर नारियल प्रसाद बेचती हैं शाम को बैग लेकर पढ़ने आती हैं। पहले पराग भैया उन्हें 20 रुपए देकर पढ़ाते थे अब वह बिना किसी पैसे के नियमित पढ़ाई में शामिल होती हैं।
तीसरी कक्षा की खुशी खिलौनों की दुकान संभालती है और चौथी कक्षा की आराधना रिमोट कार चलवाती है। फिर भी दोनों शाम को पढ़ाई के लिए घाट पर जुटती हैं। इसी तरह 10वीं की छात्रा सान्या उईके जिसकी फीस न जमा होने के कारण एडमिट कार्ड नहीं मिला था पराग भैया के प्रयास से परीक्षा दे पाने में सफल हुई।
पराग भैया की पराग ट्यूटोरियल कोचिंग 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए चलती है और आईआईटी नीट की तैयारी भी कराई जाती है। उनका लक्ष्य आगे ऐसा स्कूल खोलने का है जहां बड़े छात्र छोटे छात्रों को पढ़ाएं जिससे परिवारिक सैलरी और शिक्षा का लाभ सीधे छात्रों और उनके परिवार तक पहुंचे। यह अनोखी पहल न केवल बच्चों की शिक्षा के लिए प्रेरक है बल्कि यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियों में भी उत्साह अनुशासन और समर्पण से शिक्षा को आगे बढ़ाया जा सकता है।