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  • 8 मार्च की कहानी: कैसे बन गया International Women’s Day महिलाओं के अधिकारों का प्रतीक

    8 मार्च की कहानी: कैसे बन गया International Women’s Day महिलाओं के अधिकारों का प्रतीक


    नई दिल्ली: दुनिया में हर साल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है, जो महिलाओं की उपलब्धियों और उनके अधिकारों के लिए चल रहे संघर्ष का सम्मान करने का दिन है। यह दिन सिर्फ उत्सव नहीं बल्कि समाज में महिलाओं की स्थिति और उनके योगदान को पहचानने का अवसर भी है। साल 2026 के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम ‘Give To Gain’ रखी गई है। इसका संदेश यह है कि जब हम महिलाओं को शिक्षा, प्रशिक्षण, मेंटरशिप, न्याय, सुरक्षा और बराबर अवसर देते हैं, तो उसका लाभ पूरे समाज को मिलता है।

    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास 20वीं सदी की शुरुआत से जुड़ा हुआ है। 1908 में कामकाजी महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया। उनका उद्देश्य महिलाओं के लिए बेहतर कामकाजी माहौल और समान अधिकार सुनिश्चित करना था। धीरे-धीरे यह दिन दुनिया भर में महिलाओं के अधिकार, मतदान के अधिकार और समानता का प्रतीक बन गया।

    1911 में जर्मनी, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और स्विट्जरलैंड में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया, जिसमें लाखों लोगों ने भाग लिया और महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में रैलियां निकाली। ऑस्ट्रेलिया में 25 मार्च 1928 को महिलाओं ने समान काम के लिए समान वेतन, आठ घंटे का कार्यदिवस और बेरोजगारों के लिए बुनियादी वेतन की मांग करते हुए बड़े मार्च किए।

    शुरुआत में महिला दिवस अलग-अलग तारीखों पर मनाया जाता था। 1922 में सोवियत संघ के नेता व्लादिमीर लेनिन ने 8 मार्च को आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित किया। इसके बाद धीरे-धीरे यह दिन दुनिया के कई देशों में मान्यता प्राप्त कर गया। 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने भी इसे आधिकारिक रूप से मान्यता दी और तभी से 8 मार्च पूरी दुनिया में महिलाओं के अधिकारों और समानता के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बन गया।

    इस दिन समाज में महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक योगदान को पहचानने के साथ-साथ लैंगिक भेदभाव, कार्यस्थल पर असमानता, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और शिक्षा और अवसरों की कमी जैसे मुद्दों की ओर भी ध्यान दिलाया जाता है। सरकारें, संस्थाएं और समाज के लोग कार्यक्रम आयोजित करके महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान करते हैं और उन्हें बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए जागरूकता फैलाते हैं।

    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हमें यह याद दिलाता है कि महिलाओं को समान अवसर देना सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के विकास के लिए जरूरी है। जब महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलता है, तो समाज अधिक मजबूत और विकसित बनता है। 2026 की थीम ‘Give To Gain’ इस बात पर जोर देती है कि महिलाओं को समर्थन और संसाधन देने से पूरे समाज को लाभ होता है और समानता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए जा सकते हैं।
  • पीएनबी के 1085 करोड़ रुपये के ऋण घोटाले में अनिल अंबानी पर सीबीआई ने दर्ज किया नया मामला

    पीएनबी के 1085 करोड़ रुपये के ऋण घोटाले में अनिल अंबानी पर सीबीआई ने दर्ज किया नया मामला


    नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत के आधार पर उद्योगपति अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के कुछ पूर्व अधिकारियों के खिलाफ 1085 करोड़ रुपये के ऋण घोटाले को लेकर नया मामला दर्ज किया है। यह मामला धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ा बताया गया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य प्रबंधक संतोषकृष्ण अन्नावरपु की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर की गई। दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2013 से 2017 के दौरान अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के तत्कालीन अधिकारियों ने बैंक से लिया गया लगभग 1085 करोड़ रुपये का ऋण नियमों के विपरीत तरीके से इस्तेमाल किया।

    बैंक का कहना है कि कंपनी ने यह ऋण वापस करने की स्पष्ट मंशा के बिना लिया था और प्राप्त धनराशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में किया गया। बैंक के अनुसार यह कृत्य धोखाधड़ी और विश्वास के आपराधिक उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

    प्राथमिकी में अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के अलावा कुछ अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो अब इस मामले में धन के उपयोग, संभावित वित्तीय हेरफेर और लेन-देन से जुड़ी कड़ियों की विस्तृत जांच करेगी।

  • MP में 9 दिन लगेगा कुंवारों के देवता बिल्लम बावजी का दरबार, पान और नारियल अर्पित कर लगाई जाती है शादी की अर्जी

    MP में 9 दिन लगेगा कुंवारों के देवता बिल्लम बावजी का दरबार, पान और नारियल अर्पित कर लगाई जाती है शादी की अर्जी

    नीमच । मध्यप्रदेश के नीमच जिले के जावद में कुंवारों के देवता के रूप में प्रसिद्ध बिल्लम बावजी का अनोखा दरबार हर साल रंग पंचमी से शुरू होकर रंग तेरस तक चलता है। इस दौरान हजारों अविवाहित युवक-युवतियां और उनके परिजन विवाह की मनोकामना लेकर बावजी के दर्शन करने पहुंचते हैं।

    करीब 30 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के अनुसार, बावजी की प्रतिमा को गणेश मंदिर की कुई से लाकर जावद के पुरानी धान मंडी क्षेत्र में स्थापित किया जाता है। इसके बाद नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना और मन्नतों का दौर चलता है।

    स्थानीय मान्यता है कि यहां पान और नारियल अर्पित कर अर्जी लगाने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं और जल्द ही योग्य जीवनसाथी मिल जाता है। जिस युवक या युवती की शादी की अर्जी लगाई जाती है, उसे चढ़ाया हुआ पान खाना होता है। इसके बाद शीघ्र ही विवाह का रिश्ता तय होने की बात कही जाती है। कई श्रद्धालुओं ने बावजी की कृपा से मनोकामना पूरी होने के उदाहरण साझा भी किए हैं।

    बताया जाता है कि करीब 30 वर्ष पहले गणेश मंदिर की कुई की सफाई के दौरान यह प्रतिमा मिली थी। इसके बाद इसे कुई के थारे पर विराजित कर दिया गया और धीरे-धीरे इसकी ख्याति कुंवारों के देवता के रूप में फैलने लगी। आज यह दरबार लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है।

    हर साल देश के कोने-कोने से हजारों युवक-युवतियां अपने जीवनसाथी की कामना लेकर बावजी के दरबार में माथा टेकते हैं। नौ दिन तक चलने वाले इस अनोखे उत्सव में पान, नारियल और अर्जी के माध्यम से मनोकामनाएं पूरी होने की उम्मीद के साथ श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। बल्लम बावजी का यह दरबार न केवल विवाह की कामना के लिए बल्कि आस्था और परंपरा का प्रतीक भी बन चुका है।

  • भोपाल में महिला कार रैली: साहस और आत्मविश्वास की चलती-फिरती मिसाल

    भोपाल में महिला कार रैली: साहस और आत्मविश्वास की चलती-फिरती मिसाल


    भोपाल। शनिवार दोपहर बंसल प्लाज़ा से तिरंगा झंडा लहराया गया, और यह केवल एक कार रैली की शुरुआत नहीं थी बल्कि पहियों पर सवार एक क्रांति थी। एग्रोहा क्लब द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की भव्य रैली नारी तू नारायणी ने शहर की सड़कों को महिलाओं के साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक बना दिया। इस आयोजन ने भोपाल की महिलाओं को अपनी ताकत और संभावनाओं का अहसास कराया।

    दोपहर 3 बजे रैली शुरू हुई और पूरा माहौल उत्साह और ऊर्जा से भर गया। सड़कों पर गूंजते नारों और रंग-बिरंगी कारों ने स्पष्ट संदेश दिया कि महिलाएं अब अपनी राह खुद तय कर रही हैं। “नारी तू नारायणी” केवल नारा नहीं बल्कि आंदोलन बनकर सड़कों पर उतर आया।

    इस रैली में हर महिला ने किसी प्रसिद्ध महिला व्यक्तित्व का रूप धारण किया और अपनी कार को उसी थीम पर सजाया। रैली एक चलती-फिरती प्रदर्शनी बन गई जिसमें इतिहास और प्रेरणा का संगम दिखाई दिया। कुछ महिलाओं ने रानी लक्ष्मीबाई का रूप धारण किया, हाथ में तलवार लिए और साहस का परिचय दिया। कुछ प्रतिभागियों ने भारत महिला क्रिकेट टीम की जर्सी पहनकर उनकी उपलब्धियों को सलाम किया, तो कुछ महिलाओं ने अंतरिक्ष यात्री बनकर उन भारतीय बेटियों को याद दिलाया जिन्होंने आसमान से भी आगे जाकर इतिहास रचा।

    कारों पर प्रेरक संदेश और महान महिलाओं की तस्वीरें सजाई गईं जिनमें शामिल थीं – द्रौपदी मुर्मू भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति, निर्मला सीतारमण देश की वित्त मंत्री, लता मंगेशकर जिनकी आवाज करोड़ों दिलों की धड़कन बनी, सुधा मूर्ति समाजसेवा और शिक्षा की प्रेरक हस्ती, किरण बेदी भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी, सुष्मिता सेन मिस यूनिवर्स का ताज जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली।

    कारों पर लिखे संदेश भी उतने ही प्रेरक थे-गांव की पगडंडियों से देश की अगुवाई तक, Each One Teach One, नारी शक्ति का यह कारवां छुएगा आसमान।

    पूरे आयोजन में नई पीढ़ी की ऊर्जा स्पष्ट दिखाई दी। महिलाएं कारों से हाथ हिलातीं, नारे लगातीं और मुस्कुराते हुए आगे बढ़ती रहीं। हर सजी हुई कार साहस, आत्मविश्वास और सपनों की कहानी कह रही थी। यह वही पीढ़ी है जो दंगल और मैरी कॉम जैसी कहानियां देखकर बड़ी हुई और अब अपनी जगह खुद बना रही है।

    दिन का सबसे प्रेरक संदेश तब आया जब एक प्रतिभागी, अंतरिक्ष यात्री की पोशाक में, बोली -महिलाएं सिर्फ घर से बाहर ही नहीं निकल सकतीं, वे अंतरिक्ष तक भी पहुंच सकती हैं। आज महिला दिवस पर हम उन बेटियों को सलाम करते हैं जिन्होंने अपने सपनों के लिए सब कुछ दे दिया – कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स। उनका साहस और समर्पण हमें हमेशा प्रेरित करेगा।

    रैली के समापन पर बेस्ट ड्रेस्ड पर्सनालिटी, बेस्ट एम्पावरमेंट स्लोगन और बेस्ट डेकोरेटेड कार जैसी श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए। एग्रोहा क्लब की नारी तू नारायणी महिला कार रैली 2026 ने दिखा दिया कि महिला दिवस सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि प्रेरणा का माध्यम भी बन सकता है। भोपाल की महिलाओं ने इंतजार नहीं किया, उन्होंने स्टीयरिंग अपने हाथों में ली और नारी शक्ति का संदेश पूरे शहर में फैलाया।
  • ग्वालियर में बाबा अचलनाथ की भव्य रंगपंचमी नगर यात्रा: फूलों और गुलाल से होली, 5 किलो चांदी का दान, श्रद्धालुओं ने किया उत्साहपूर्वक स्वागत

    ग्वालियर में बाबा अचलनाथ की भव्य रंगपंचमी नगर यात्रा: फूलों और गुलाल से होली, 5 किलो चांदी का दान, श्रद्धालुओं ने किया उत्साहपूर्वक स्वागत


    ग्वालियर। रंगपंचमी के अवसर पर बाबा अचलनाथ की नगर यात्रा निकली, पूजा-अर्चना के बाद शुरू हुआ भव्य चल समारोह। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए बाबा अचलनाथ की सवारी के साथ श्रद्धालु फूलों और गुलाल से होली खेलते नजर आए। यात्रा की शुरुआत अचलेश्वर महादेव मंदिर से हुई और इसमें डीजे और बैंड की धुनों पर लोग नाचते-गाते शामिल हुए।
    नगर भ्रमण सवारी दल बाजार, लोहिया बाजार, दौलतगंज, महाराज बाड़ा और सराफा बाजार से होकर गुजरी।

    शाम करीब 4 बजे बाबा अचलनाथ की सवारी राम मंदिर पहुंची, जहां बाबा ने भगवान राम के साथ रंग और गुलाल से होली खेली। इसके अतिरिक्त, सनातन धर्म मंदिर में चक्रधर भगवान के साथ भी रंगोत्सव का आयोजन किया गया।

    नगर भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं ने जगह-जगह बाबा अचलनाथ का उत्साहपूर्वक स्वागत किया और प्रसादी वितरित की गई।

    इस अवसर पर एक दानदाता ने मंदिर के स्तंभों के लिए 5 किलो चांदी का दान भी किया। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि आज सभी दानपेटियां भी खोली जाएंगी। इस भव्य रंगपंचमी आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं।

  • दिग्विजय सिंह आज कर सकते हैं रिटायरमेंट का ऐलान: शाम 4 बजे भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस, राज्यसभा से पहले ही इनकार

    दिग्विजय सिंह आज कर सकते हैं रिटायरमेंट का ऐलान: शाम 4 बजे भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस, राज्यसभा से पहले ही इनकार



    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आज अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर सकते हैं। दिग्विजय ने शाम 4 बजे भोपाल स्थित अपने सरकारी आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। तीन दिन पहले उन्होंने फेसबुक पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, “मेरा रिटायरमेंट प्लान? शायद, क्यों नहीं…”।

    वीडियो में 62 वर्षीय सिबानंद भंजा और उनकी पत्नी बसबी भंजा को दिखाया गया है, जिन्होंने बैंक की नौकरी से रिटायर होने के बाद एक कार में यात्रा कर पूरे भारत का भ्रमण शुरू किया। दंपति ने अब तक 55 हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी कर ली है और होटल के बजाय खुद भोजन बनाकर खाते हैं। दिग्विजय ने इस वीडियो के माध्यम से अपने रिटायरमेंट के अंदाज को दर्शाया।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर भी दिग्विजय पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे राज्यसभा की सीट लेने से इनकार कर चुके हैं। जून में उनका दूसरा कार्यकाल पूरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा जाने का विकल्प छोड़कर एमपी में कांग्रेस की स्थिति पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

    इतिहास पर नजर डालें तो दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन 2003 में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने 10 साल तक चुनाव न लड़ने का संकल्प लिया। 2014 में वे राज्यसभा सदस्य बने और 2020 में दूसरी बार राज्यसभा सांसद चुने गए।

    आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके रिटायरमेंट और भविष्य की योजनाओं का खुलासा होने की उम्मीद है, जिससे मध्य प्रदेश की राजनीति और कांग्रेस के रणनीतिक बदलाव पर नई बहस शुरू हो सकती है।

  • राष्ट्रपति मुर्मू का सिलीगुड़ी कार्यक्रम विवाद: बंगाल सरकार पर गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट तलब की, आदिवासी समुदाय की उपेक्षा का आरोप

    राष्ट्रपति मुर्मू का सिलीगुड़ी कार्यक्रम विवाद: बंगाल सरकार पर गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट तलब की, आदिवासी समुदाय की उपेक्षा का आरोप


    नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम स्थल परिवर्तन को लेकर पश्चिम बंगाल में विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने बंगाल के मुख्य सचिव से इस घटना की रिपोर्ट तलब की है और निर्देश दिए हैं कि इसे आज शाम 5 बजे तक गृह मंत्रालय को भेजा जाए। 7 मार्च को होने वाले 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति को आमंत्रित किया गया था।
    मूल रूप से यह कार्यक्रम सिलीगुड़ी के बिधाननगर में होना तय था, लेकिन सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारणों का हवाला देते हुए इसे बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोपालपुर में शिफ्ट कर दिया गया। राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बदलाव पर नाराजगी जताई और कहा कि उन्हें लगता है कि बंगाल सरकार आदिवासियों का भला नहीं चाहती। नॉर्थ बंगाल दौरे के दौरान न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री उनका स्वागत करने आए।

    राष्ट्रपति ने कहा, ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं।

    मैं भी बंगाल की बेटी हूं। अगर कार्यक्रम बिधाननगर में होता तो बेहतर होता। वहां अधिक जगह थी और ज्यादा लोग कार्यक्रम में शामिल हो सकते थे।” उन्होंने बताया कि गोशाईपुर में जगह छोटी होने के कारण कई लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। कार्यक्रम स्थल पर पहुँचने पर केवल सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब ही उनका स्वागत करने मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विवाद पर कहा कि राष्ट्रपति का पद पॉलिटिक्स से ऊपर है और इसकी गरिमा हमेशा बनी रहनी चाहिए। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल पर टिप्पणी करने से पहले राष्ट्रपति को BJP शासित राज्यों की स्थिति भी देखनी चाहिए।
    राष्ट्रपति ने अपने भाषण में संथाल युवाओं से भाषा, परंपरा और शिक्षा को बचाने की अपील की और स्वतंत्रता संग्राम में संथाल समुदाय के योगदान को याद दिलाया। उन्होंने पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा 1925 में बनाई गई ओल चिकी लिपि का स्मरण किया और आदिवासी युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास और सांस्कृतिक संरक्षण पर ध्यान देने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि संथाल समुदाय ने सदियों से लोक संगीत, नृत्य और परंपराओं को सुरक्षित रखा है और आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा और संस्कृति के संतुलन पर ध्यान देना चाहिए।

    राष्ट्रपति कार्यक्रम स्थल विवाद ने प्रशासन और राजनीतिक स्तर पर हलचल मचा दी है। गृह मंत्रालय ने बंगाल सरकार से रिपोर्ट तलब कर जांच शुरू कर दी है, वहीं आदिवासी समुदाय और देशभर में लोग इस मुद्दे पर संवेदनशील प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

  • रीवा एक्सप्रेस में 'खूनी' साजिश: शंकराचार्य पर केस करने वाले आशुतोष महाराज पर हमला, नाक काटने की कोशिश

    रीवा एक्सप्रेस में 'खूनी' साजिश: शंकराचार्य पर केस करने वाले आशुतोष महाराज पर हमला, नाक काटने की कोशिश


    प्रयागराज। गाजियाबाद से प्रयागराज जा रही रीवा एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी (H1) कोच में रविवार सुबह उस वक्त दहशत फैल गई, जब आशुतोष महाराज पर एक अज्ञात हमलावर ने चाकू से हमला कर दिया। हमला इतना सोची-समझी साजिश का हिस्सा जान पड़ता है कि आरोपी ने सीधे चेहरे और नाक को निशाना बनाया। लहूलुहान हालत में आशुतोष महाराज ने ट्रेन के टॉयलेट में छिपकर अपनी जान बचाई और वहीं से जीआरपी (GRP) को फोन कर खुद के ‘मर्डर’ की साजिश का खुलासा किया।

    वारदात: सुबह 5 बजे, टॉयलेट के पास ‘बॉडी बिल्डर’ का हमला
    आशुतोष महाराज के अनुसार, वे वेस्ट यूपी संयोजक सुधांशु सोम के साथ सफर कर रहे थे। सुबह करीब 5 बजे जब ट्रेन फतेहपुर और सिराथू के बीच थी, तब वे बाथरूम की ओर जा रहे थे। तभी एक ‘नकाबपोश नहीं बल्कि खुले चेहरे’ वाले हट्टे-कट्टे हमलावर ने उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमलावर ने उनकी नाक काटने की कोशिश की और चेहरे व हाथ पर कई वार किए। आशुतोष ने बताया कि उन्होंने जान बचाने के लिए हमलावर से हाथापाई की और किसी तरह खुद को बाथरूम में लॉक कर लिया। वे तब तक बाहर नहीं आए जब तक जीआरपी की टीम मौके पर नहीं पहुँच गई।

    आरोप: “कोर्ट में सबूत न दे पाऊं, इसलिए रची गई हत्या की साजिश”
    अस्पताल के बेड से आशुतोष महाराज ने सीधे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों पर उंगली उठाई है। उन्होंने दावा किया कि:

    वजह: पॉक्सो एक्ट के तहत उन्होंने जो एफआईआर दर्ज कराई है, उसके पुख्ता सबूत वे कोर्ट में पेश न कर पाएं, इसलिए यह हमला कराया गया।

    इनाम की घोषणा: उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी नाक काटने के लिए एक लाख रुपये के इनाम का ऐलान किया गया था, जिसमें दिनेश फलाहारी और मुकुंदानंद जैसे नाम शामिल हैं।

    फेसबुक पोस्ट का रहस्य: इस हमले की कथित जिम्मेदारी ‘डॉ. स्वाति अघोरी’ नाम के फेसबुक अकाउंट से ली गई है, जिसमें लिखा गया— “बोला था न हमारे लोगों के हत्थे मत चढ़ना।” पुलिस अब इस अघोरी साधक के प्रोफाइल की सत्यता की जांच कर रही है।

    पलटवार: “यह सब सुरक्षा पाने का बनावटी ड्रामा है”
    वहीं, दूसरी ओर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को ‘मीडिया अटेंशन’ पाने का तरीका बताया है। उन्होंने कहा कि:

    बनावटी हमला: शंकराचार्य के अनुसार, अटेंडेंट का कहना है कि बाथरूम जाने तक वे ठीक थे, फिर अचानक यह हाल कैसे हो गया? यह सब सरकारी सुरक्षा हासिल करने का प्रपंच है।

    रेलवे सुरक्षा पर सवाल: उन्होंने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि क्या अब भारत की ट्रेनें सुरक्षित नहीं रह गई हैं? जीआरपी कहाँ थी?

    ध्यान भटकाने की कोशिश: उन्होंने इसे अपनी धार्मिक यात्रा से लोगों का ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी कोशिश करार दिया।

    वर्तमान स्थिति: मेडिकल जांच और पुलिसिया शिकंजा
    फिलहाल आशुतोष महाराज का प्रयागराज के काल्विन अस्पताल में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने उनके चेहरे के गहरे घावों को देखते हुए CT स्कैन और एक्स-रे कराया है। आशुतोष ने सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की है और वे सहारे के बिना चल भी नहीं पा रहे हैं। जीआरपी ने उनकी शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और प्रयागराज सर्किट हाउस से लेकर अस्पताल तक भारी पुलिस बल तैनात है।

    निष्कर्ष
    “चलती ट्रेन के सुरक्षित कोच में इस तरह का हमला न केवल रेलवे सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि धर्म और कानून की इस जंग में ‘नाक’ का सवाल अब जान पर बन आया है। पुलिस के लिए अब दूध का दूध और पानी का पानी करना एक बड़ी चुनौती है।”

  • जंग की 9वीं सुबह: मासूमों की मौत, शहरों में तबाही और दुनिया में विरोध-समर्थन की लहर

    जंग की 9वीं सुबह: मासूमों की मौत, शहरों में तबाही और दुनिया में विरोध-समर्थन की लहर


    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी संघर्ष का रविवार को नौवां दिन है। इस जंग ने ईरान के कई शहरों को तबाह कर दिया है और अब तक 1,400 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। घरों और मोहल्लों में मलबा सड़कों पर खून और अस्पतालों में घायल लोग इस जंग की भयावहता बयान कर रहे हैं।

    तेहरान में हेल्थ केयर वर्कर्स ने गांधी अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया जहां हाल ही में एयर स्ट्राइक हुई थी। अस्पताल परिसर में ईरान का झंडा लहराते हुए लोग घायल मरीजों और खोए हुए लोगों की याद में खड़े थे। इसी बीच जैनब साहेबी नाम की एक मासूम बच्ची की कब्र को फूलों से सजाया गया और उस पर ईरान का झंडा रखा गया। महिलाएं उसकी कब्र तक उसका शव लेकर गईं हर कदम पर मातम और दर्द नजर आ रहा था।

    शहरों में फैली तबाही ने लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। आपातकालीन केंद्रों और राहत शिविरों में लोग पानी भोजन और दवाइयों के लिए इंतजार कर रहे हैं। कई परिवारों ने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह से खो दी है कई बच्चों की पढ़ाई और भविष्य अस्थायी तौर पर थम गया है।

    दुनिया भर में इस जंग के खिलाफ और समर्थन में प्रदर्शन हुए। ब्रिटेन में शनिवार को ईरान समर्थक और अमेरिका समर्थक दोनों ही समूहों ने मार्च निकाला। विरोध-समर्थन के ये विरोध मार्च वैश्विक स्तर पर इस जंग के राजनीतिक और सामाजिक असर को दर्शा रहे हैं। साथ ही लेबनान में भी इजराइल और ईरान समर्थक ग्रुप हिज़बुल्लाह के बीच हिंसक टकराव जारी है। शहरों में धमाके हवाई हमले और सड़क संघर्ष ने आम नागरिकों की जिंदगी को पूरी तरह से अस्थिर कर दिया है।

    इन हालातों के बीच बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों की कहानियां सबसे ज्यादा दिल दहला रही हैं। जैनब साहेबी की तस्वीरें घायल मरीज बिखरी हुई सड़कें और मलबे में फंसे लोग इस जंग की भयंकर तस्वीर पेश कर रहे हैं। वैश्विक समुदाय की नजरें ईरान अमेरिका और इजराइल के राजनीतिक फैसलों पर टिकी हुई हैं। राहत कार्य मानवाधिकार संगठन और स्वास्थ्य कर्मचारी लगातार संघर्षरत नागरिकों की मदद में जुटे हैं लेकिन जंग की भयावहता के बीच राहत की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण है।

  • जबलपुर ग्वारीघाट पर 200 बच्चों की अनोखी क्लास: दिन में दुकान, शाम को पढ़ाई

    जबलपुर ग्वारीघाट पर 200 बच्चों की अनोखी क्लास: दिन में दुकान, शाम को पढ़ाई


    जबलपुर । गुरुवार की शाम करीब 6 बजे जब नर्मदा घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ नर्मदा आरती देखने जुटी थी उसी समय घाट किनारे छोटे छोटे बच्चे अपनी दुकानों पर बैठे थे। फूल प्रसाद खिलौने और अन्य सामान बेचते ये बच्चे कंधों पर स्कूल बैग टंगे हुए थे। परंतु जैसे ही शाम की आरती खत्म हुई घाट की सीढ़ियों पर बच्चों की आवाज़ें गूंजने लगीं। भारत माता की जय।

    देखते ही देखते करीब 300 बच्चे घाट की सीढ़ियों पर बैठ गए और वही बच्चे कुछ देर पहले दुकानों पर सामान बेच रहे थे। सामने लगे डिजिटल बोर्ड और छोटे साउंड सिस्टम के माध्यम से पराग भैया बच्चों को पढ़ा रहे थे। माहौल ऐसा था कि घाट पर मौजूद श्रद्धालु भी रुककर इस अनोखी क्लास को देखने लगे। छोटे छोटे बच्चे मैथ्स और विज्ञान के कठिन सवाल हल कर रहे थे।

    पराग भैया बताते हैं कि यह विचार उनकी मां के निधन के बाद आया। 2016 में मां की अस्थियां नर्मदा में विसर्जित करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि अब उनका परिवार यही बच्चे हैं। शुरुआत सिर्फ 5 बच्चों से हुई थी लेकिन धीरे धीरे संख्या बढ़कर 200 से अधिक हो गई। शुरुआत में बच्चों को पढ़ाने के लिए 10 20 रुपए देने पड़ते थे लेकिन अब बच्चे स्वयं नियमित पढ़ाई के लिए घाट पर आते हैं।

    इस प्रयास में कई लोग मदद कर रहे हैं। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने डिजिटल बोर्ड उपलब्ध कराया वहीं 26 जनवरी को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने 60 बच्चों को टैबलेट दिए जिससे डिजिटल पढ़ाई आसान हो गई।

    इन बच्चों के माता पिता अक्सर नाव चलाते हैं या घाट किनारे दुकाने लगाते हैं। कई बच्चे खुद भी दिनभर 60 70 रुपए तक कमाते हैं। 8वीं कक्षा की परी यादव बताती हैं कि वह दिनभर नारियल प्रसाद बेचती हैं शाम को बैग लेकर पढ़ने आती हैं। पहले पराग भैया उन्हें 20 रुपए देकर पढ़ाते थे अब वह बिना किसी पैसे के नियमित पढ़ाई में शामिल होती हैं।

    तीसरी कक्षा की खुशी खिलौनों की दुकान संभालती है और चौथी कक्षा की आराधना रिमोट कार चलवाती है। फिर भी दोनों शाम को पढ़ाई के लिए घाट पर जुटती हैं। इसी तरह 10वीं की छात्रा सान्या उईके जिसकी फीस न जमा होने के कारण एडमिट कार्ड नहीं मिला था पराग भैया के प्रयास से परीक्षा दे पाने में सफल हुई।

    पराग भैया की पराग ट्यूटोरियल कोचिंग 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए चलती है और आईआईटी नीट की तैयारी भी कराई जाती है। उनका लक्ष्य आगे ऐसा स्कूल खोलने का है जहां बड़े छात्र छोटे छात्रों को पढ़ाएं जिससे परिवारिक सैलरी और शिक्षा का लाभ सीधे छात्रों और उनके परिवार तक पहुंचे। यह अनोखी पहल न केवल बच्चों की शिक्षा के लिए प्रेरक है बल्कि यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियों में भी उत्साह अनुशासन और समर्पण से शिक्षा को आगे बढ़ाया जा सकता है।