Blog

  • Ram Mandir में बढ़ी सख्ती…. 13 नए कैमरों से चढ़ावे की निगरानी, 27 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात

    Ram Mandir में बढ़ी सख्ती…. 13 नए कैमरों से चढ़ावे की निगरानी, 27 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात


    अयोध्या।
    श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) ने चढ़ावे की सुरक्षा और गणना प्रक्रिया को पहले से अधिक सख्त बना दिया है। नई व्यवस्था के तहत गणनास्थल की निगरानी बढ़ाने के लिए 13 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे (13 Additional CCTV Cameras) लगाए गए हैं, जबकि दान पेटियों को मंदिर परिसर से गणना केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए 27 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों ( 27 Additional Security Personnel ) की तैनाती की गई है।

    नई व्यवस्था के अनुसार अब गणनास्थल पर कुल 43 अधिकृत लोग मौजूद रहेंगे। जिन स्थानों पर पहले कैमरों का कवरेज नहीं था, वहां अतिरिक्त सीसीटीवी लगाए गए हैं, ताकि पूरी गणना प्रक्रिया लगातार निगरानी में रहे। दान पेटियों को मंदिर से गणनास्थल तक ले जाने के लिए 27 सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। ये सभी सुरक्षाकर्मी एसआईएस के हैं।

    इसके अलावा पुलिस बल की तैनाती भी दान पेटी और गणनास्थल के बीच विभिन्न पिलरों पर कर दी गई। विशेष रूप से पिलर नंबर-34 पर तीन अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, क्योंकि इसी स्थान पर गुप्त दान पेटी रखी गई है। पहले पुलिस कर्मियों को सुरक्षा में नहीं लगाया गया था। पूरी जिम्मेदारी ट्रस्ट व बैंक के कर्मी ही संभालते थे। ट्रस्ट ने वित्तीय लेन-देन की व्यवस्था भी बदल दी है।

    अब किसी भी बैंक ट्रांजैक्शन के लिए राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, मुख्य अभियंता जगदीश आफले और चार्टर्ड अकाउंटेंट चंदन राय के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। इससे पहले यह व्यवस्था डॉ. अनिल मिश्रा देखते थे और बैंक संबंधी दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर होते थे, जबकि कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी के डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग किया जाता था।


    अभी भी हाउसकीपिंग कर्मी कर रहे दान राशि की गणना

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जेल भेजे गए गणनाकर्मियों को छोड़कर अन्य सभी पुराने गणनाकर्मी ही दान राशि का हिसाब-किताब कर रहे हैं। ये सभी वही कर्मचारी हैं, जिनको सैनिक सिक्योरिटी कंपनी की तरफ से हाउसकीपिंग के काम के लिए नियुक्त किया गया था। सवाल है कि आखिर इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद इन सभी को क्यों नहीं बदला गया।

    दरअसल, ट्रस्ट की सिफारिश पर 46 कर्मियों को आउटसोर्सिंग कंपनी के जरिए नियुक्त करने के लिए बैंक ने कंपनी को पत्र भेजा था। सैनिक सिक्योरिटी कंपनी ने सभी की नियुक्ति कर दी थी। नियुक्त किए गए कर्मियों को बतौर हाउसकीपिंग के काम के लिए रखा गया था। लेकिन, वहां पर इन सभी को गणना जैसे संवेदनशील काम में लगा दिया गया।

    सूत्रों के मुताबिक, घटना का खुलासा होने और आरोपियों के जेल जाने के बाद अन्य किसी गणनाकर्मी को नहीं हटाया गया। वह जस का तस गणना के कार्य में लगे हैं। सवाल है कि आखिर इन सभी को क्यों नहीं बदला गया, जिससे गणना प्रक्रिया में और पारदर्शिता लाई जा सके।


    केवल ये कदम उठाए

    अब तक नियमों को ताक पर रखकर गणना होती थी। अब बाकायदा तय ड्रेस में गणनाकर्मी गणना कर रहे हैं। सभी बिना जेब वाले कपड़े पहन रहे हैं। वीडियोग्राफी भी हो रही है। वहीं, निगरानी बढ़ाई गई है। लेकिन, पूरा स्टाफ नहीं बदला गया है। सूत्र बताते हैं कि एसओपी की कुछ शर्तों को पूरा कर मामला दुरुस्त करने का दावा किया जा रहा है। सवाल है कि कंपनी से करार खत्म कर मानक के अनुरूप गणनाकर्मियों की तैनाती क्यों नहीं की जा रही है।


    नए एसपी सुरक्षा को पूरी तरह मिली कमान

    अयोध्या में तैनात रहे एसपी सुरक्षा बलरामाचारी का 25 मई को यूपी-112 तबादला हुआ था। लेकिन, तब से वह रिलीव नहीं हुए थे। तीन जुलाई को नवागत एसपी सुरक्षा विजय शंकर मिश्रा ने बतौर एसपी सुरक्षा ज्वॉइन कर लिया था। चूंकि ट्रस्ट की बैठक थी, इसलिए बलरामाचारी को रिलीव नहीं किया गया था। मंगलवार को वह रिलीव हो गए। अब सुरक्षा व्यवस्था की पूरी कमान विजय शंकर मिश्रा के पास है।

  • मानसून का बड़ा हमला देशभर में बारिश का कहर कई राज्यों के लिए भारी वर्षा और तेज हवाओं की चेतावनी

    मानसून का बड़ा हमला देशभर में बारिश का कहर कई राज्यों के लिए भारी वर्षा और तेज हवाओं की चेतावनी


    मध्यप्रदेश । 10 जुलाई का दिन देश के कई राज्यों के लिए मौसम के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार मानसून पूरे जोर के साथ सक्रिय है और इसका असर उत्तर भारत मध्य भारत और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में देखने को मिलेगा। कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की ओर से जारी दिशा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

    मध्य प्रदेश में मानसून का असर लगातार बना रहेगा। भोपाल इंदौर जबलपुर उज्जैन ग्वालियर सागर रीवा शहडोल और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर तेज बारिश के कारण जलभराव की स्थिति बन सकती है जबकि नदी नाले उफान पर आ सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए यह बारिश फसलों के लिए लाभदायक मानी जा रही है लेकिन अत्यधिक वर्षा वाले इलाकों में नुकसान की आशंका भी बनी हुई है।

    उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड और छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भी गरज चमक के साथ बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। राजस्थान के पूर्वी हिस्सों और दिल्ली एनसीआर में भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा। दिनभर बादल छाए रह सकते हैं और कई स्थानों पर तेज बारिश लोगों को गर्मी और उमस से राहत देगी। हालांकि बारिश के साथ तेज हवाएं चलने से पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने जैसी घटनाएं भी सामने आ सकती हैं।

    मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। इसके साथ ही आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है। लोगों से अपील की गई है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदान पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। यात्रा के दौरान मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही घर से निकलें।

    पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और सड़कें बंद होने का खतरा बना हुआ है। पर्यटकों को सावधानी बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

    कृषि क्षेत्र के लिए यह बारिश काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि खरीफ फसलों की बुआई का समय चल रहा है। पर्याप्त वर्षा से खेतों में नमी बढ़ेगी और धान सोयाबीन मक्का तथा अन्य फसलों को फायदा मिलेगा। वहीं शहरों में जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं भी लोगों की परेशानी बढ़ा सकती हैं।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय बना रहेगा और कई राज्यों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने सुरक्षित स्थानों पर रहने और प्रशासन की ओर से जारी हर अपडेट पर नजर रखने की जरूरत है। सतर्कता और सावधानी ही खराब मौसम के दौरान सबसे बड़ा बचाव साबित होगी।

  • चुनौतीपूर्ण माहौल में TCS के तिमाही नतीजे जारी, मुनाफे में हल्की गिरावट के बावजूद 12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का ऐलान

    चुनौतीपूर्ण माहौल में TCS के तिमाही नतीजे जारी, मुनाफे में हल्की गिरावट के बावजूद 12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का ऐलान

    नई दिल्ली । देश की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी कर दिए हैं। कंपनी ने तिमाही आधार पर शुद्ध लाभ में हल्की गिरावट दर्ज की है, जबकि सालाना आधार पर लाभ और राजस्व दोनों में वृद्धि देखने को मिली है। साथ ही कंपनी ने अपने शेयरधारकों को 12 रुपये प्रति इक्विटी शेयर का अंतरिम डिविडेंड देने की घोषणा भी की है, जिससे निवेशकों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

    अप्रैल से जून 2026 की अवधि में टीसीएस का समेकित शुद्ध लाभ 13,349 करोड़ रुपये रहा, जो पिछली तिमाही की तुलना में लगभग तीन प्रतिशत कम है। हालांकि, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कंपनी के लाभ में करीब पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक आईटी उद्योग पर आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक चुनौतियों का प्रभाव बना हुआ है।

    कंपनी की परिचालन आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। पहली तिमाही में टीसीएस का राजस्व बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत अधिक है। वहीं, तिमाही आधार पर भी कंपनी की आय में करीब दो प्रतिशत का इजाफा हुआ। इससे संकेत मिलता है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद कंपनी की सेवाओं की मांग बनी हुई है और उसका कारोबार स्थिर गति से आगे बढ़ रहा है।

    निदेशक मंडल ने निवेशकों के लिए 12 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी दी है। इसके लिए 15 जुलाई 2026 को रिकॉर्ड डेट निर्धारित की गई है, जबकि पात्र निवेशकों को 31 जुलाई 2026 को डिविडेंड का भुगतान किया जाएगा। कंपनी के इस फैसले को निवेशकों के प्रति सकारात्मक संकेत माना जा रहा है और इससे शेयरधारकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक के. कृतिवासन ने कहा कि वैश्विक बाजार में अनिश्चितताओं के बावजूद टीसीएस ने मजबूत कारोबारी प्रदर्शन बनाए रखा है। उन्होंने बताया कि पहली तिमाही में कंपनी को 9.5 अरब डॉलर के नए ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित बड़े ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट भी शामिल हैं, जो भविष्य में कंपनी की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी के एआई कारोबार का वार्षिक राजस्व रन रेट बढ़कर 2.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ते अवसरों को दर्शाता है।

    परिचालन प्रदर्शन की बात करें तो पहली तिमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 24 प्रतिशत और नेट मार्जिन 19.2 प्रतिशत रहा। परिचालन गतिविधियों से कंपनी ने 12,412 करोड़ रुपये का नकद प्रवाह अर्जित किया, जो उसके शुद्ध लाभ का लगभग 93 प्रतिशत है। तिमाही के अंत तक टीसीएस में कुल 5,93,798 कर्मचारी कार्यरत थे, जबकि आईटी सेवाओं के कारोबार में पिछले 12 महीनों की एट्रिशन दर 13.6 प्रतिशत दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत ऑर्डर बुक, एआई क्षेत्र में बढ़ती हिस्सेदारी और स्थिर वित्तीय प्रदर्शन आने वाली तिमाहियों में कंपनी की विकास यात्रा को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • शुक्रवार के दिन इन खास उपायों से करें व्रत धन वैभव और खुशहाली के खुलेंगे नए रास्ते

    शुक्रवार के दिन इन खास उपायों से करें व्रत धन वैभव और खुशहाली के खुलेंगे नए रास्ते


    नई दिल्ली । सनातन परंपरा में शुक्रवार का दिन धन की अधिष्ठात्री मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत करने से जीवन में आर्थिक उन्नति सुख शांति और वैभव का आगमन होता है। केवल व्रत रखना ही पर्याप्त नहीं माना गया है बल्कि यदि इसके साथ कुछ विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक उपाय भी अपनाए जाएं तो इसका शुभ प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु शुक्रवार को मां लक्ष्मी की आराधना के साथ कई पारंपरिक उपाय भी करते हैं।

    शुक्रवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ सफेद या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें और मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित कर पूजा आरंभ करें। पूजा में कमल का फूल सफेद पुष्प सुगंधित धूप दीप और खीर या मिश्री का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। श्रद्धा से श्रीसूक्त लक्ष्मी चालीसा या कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    व्रत के दौरान मन और वाणी की पवित्रता बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। क्रोध झूठ कटु वचन और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी वहीं निवास करती हैं जहां स्वच्छता शांति और सद्भाव का वातावरण होता है। इसलिए घर और कार्यस्थल दोनों स्थानों पर साफ सफाई बनाए रखना लाभकारी माना जाता है।

    यदि आर्थिक परेशानियां लंबे समय से बनी हुई हैं तो शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को ग्यारह कौड़ियां हल्दी और केसर अर्पित करें। पूजा के बाद इन कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने की परंपरा है। इसे धन वृद्धि और आर्थिक स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।

    शुक्रवार को जरूरतमंद लोगों को सफेद वस्तुओं का दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। चावल चीनी दूध दही सफेद मिठाई या सफेद वस्त्र का दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है और जीवन में आने वाली कई बाधाएं दूर होने की मान्यता है। इसके साथ ही किसी कन्या या सुहागिन महिला को श्रृंगार सामग्री भेंट करना भी शुभ फलदायी माना जाता है।

    संध्या के समय घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाना चाहिए। यदि संभव हो तो कमल के बीज की माला से मां लक्ष्मी के मंत्र का जाप करें। इससे मानसिक शांति के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ता है। पूजा के बाद पूरे परिवार के साथ आरती करना घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है।

    जो लोग व्यापार या नौकरी में उन्नति की कामना करते हैं वे शुक्रवार को अपनी तिजोरी या कार्यस्थल पर श्री यंत्र स्थापित कर नियमित पूजा कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे सफलता के नए अवसर प्राप्त होते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

    ध्यान रखें कि किसी भी धार्मिक उपाय का वास्तविक महत्व केवल आस्था तक सीमित नहीं होता बल्कि उसके साथ अच्छे कर्म ईमानदारी परिश्रम और सकारात्मक सोच भी आवश्यक है। जब श्रद्धा के साथ सत्कर्म जुड़ते हैं तब जीवन में सफलता और संतुलन का मार्ग और अधिक आसान हो जाता है। शुक्रवार का व्रत और इन सरल उपायों का उद्देश्य भी व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि और आध्यात्मिक संतुलन लाना है।

  • CM विजय धर्मांतरण कर मुस्लिम बने लोगों को आरक्षण दिलाने के पक्ष में, सुप्रीम कोर्ट पहुंची तमिलनाडु सरकार

    CM विजय धर्मांतरण कर मुस्लिम बने लोगों को आरक्षण दिलाने के पक्ष में, सुप्रीम कोर्ट पहुंची तमिलनाडु सरकार


    नई दिल्‍ली । अभिनेता से नेता बने विजय थलपति धर्मांतरण कराकर मुस्लिम बने लोगों को भी आरक्षण दिला के पक्ष में हैं। यही वजह है कि तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया था कि धर्मांतरण के बाद इस्लाम अपनाने वाला कोई भी व्यक्ति पिछड़ा वर्ग मुस्लिम के दर्जे का दावा नहीं कर सकता है। हाईकोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी साल 2024 के एक आदेश को असंवैधानिक घोषित कर दिया था।

    तमिलनाडु की सरकार के सचिव की ओर से दायर इस अपील में मूल याचिकाकर्ता समीर अहमद एन, जिला कलेक्टर, राजस्व मंडल अधिकारी और तहसीलदार को प्रतिवादी बनाया गया है। इन प्रतिवादियों ने शीर्ष अदालत में पहले ही कैविएट दाखिल कर रखी है।

    क्या है पूरा मामला?
    यह कानूनी विवाद साल 2022 में थूथुकुडी जिले के एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका से शुरू हुआ था। हिंदू माता-पिता के घर जन्मे इस व्यक्ति ने इस्लाम धर्म अपना लिया था और अपना नाम बदलकर समीर अहमद एन रख लिया था। साल 2015 में जारी एक प्रमाण पत्र में पुष्टि की गई थी कि याचिकाकर्ता ने इस्लाम स्वीकार कर लिया है।

    इसके बाद याचिकाकर्ता ने कयातुर के तहसीलदार के समक्ष आवेदन देकर मुस्लिम लेब्बाई समुदाय का प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की। उनका दावा है कि वह इसी उप-जाति की प्रथाओं का पालन करते हैं। हालांकि, तहसीलदार ने इस आवेदन को खारिज कर दिया। बाद में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

    क्या था सरकार का 2024 का आदेश?
    इस मामले के लंबित रहने के दौरान ही तमिलनाडु सरकार ने साल 2024 में एक सरकारी आदेश जारी किया था। इस आदेश में कहा गया कि यदि पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, विमुक्‍त जनजातियों या अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस्लाम अपनाता है तो उसे आरक्षण का लाभ देने के लिए पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) यानी BC (Muslim) के रूप में माना जाना चाहिए।

    मद्रास हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी
    मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के इस तर्क और आदेश को खारिज कर दिया था। अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया कि जब कोई हिंदू व्यक्ति इस्लाम में परिवर्तित होता है तो वह अपनी पिछली हिंदू जाति या उप-जाति के लाभों को आगे नहीं ले जा सकता है। इस्लाम में किसी व्यक्ति की स्थिति इस बात से तय नहीं होती कि धर्मांतरण से पहले वह किस जाति का हिस्सा था। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “ईसाई मिशनरियों और इस्लामी प्रचारकों का हमेशा से यह रुख रहा है कि उनके धर्म हिंदू धर्म के विपरीत सामाजिक समानता प्रदान करते हैं।”

    हाईकोर्ट ने आगे कहा, “धर्मांतरण कराने के लिए ऐसा स्टैंड लेने के बाद अब यह दावा करना पूरी तरह से कपटपूर्ण है कि इस्लाम में भी जातिगत पदानुक्रम मौजूद है। हमारी नजर में कुछ संप्रदायों को पिछड़ा और शेष को अगड़ा के रूप में वर्गीकृत करना कुरान के आदेशों के विपरीत है। इस्लाम एक समतावादी समाज की स्थापना करना चाहता है, जहां ईश्वर की नजर में हर कोई समान है और वहां कोई सामाजिक पदानुक्रम नहीं है।”

    हाईकोर्ट के इसी फैसले के बाद अब तमिलनाडु सरकार ने देश की सर्वोच्च अदालत का रुख किया है, जहां इस बात पर अंतिम फैसला होना है कि क्या धर्मांतरित मुस्लिमों को पिछड़ी जाति के तहत आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए या नहीं।

  • बरसात में जामुन खाना क्यों है फायदेमंद? इम्यूनिटी बढ़ाने, वजन नियंत्रित रखने और हृदय को स्वस्थ रखने में मिल सकता है लाभ

    बरसात में जामुन खाना क्यों है फायदेमंद? इम्यूनिटी बढ़ाने, वजन नियंत्रित रखने और हृदय को स्वस्थ रखने में मिल सकता है लाभ

    नई दिल्ली । बरसात के मौसम में मिलने वाला जामुन केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि अपने पोषण गुणों के कारण भी विशेष महत्व रखता है। गहरे बैंगनी रंग का यह मौसमी फल विटामिन सी, फाइबर, आयरन, पोटैशियम और कई प्रकार के प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मौसमी फलों को संतुलित आहार में शामिल करने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। जामुन भी ऐसे ही फलों में शामिल है, जिसका सीमित और नियमित सेवन कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकता है।

    जामुन का उपयोग लंबे समय से पारंपरिक खानपान और आयुर्वेद में किया जाता रहा है। हालांकि इसे किसी बीमारी का उपचार नहीं माना जाता, लेकिन यह स्वस्थ जीवनशैली और संतुलित भोजन का उपयोगी हिस्सा बन सकता है। विशेष रूप से ब्लड शुगर को संतुलित रखने में इसकी भूमिका को लेकर कई अध्ययन किए गए हैं। जामुन का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम माना जाता है और इसमें मौजूद फाइबर भोजन के बाद रक्त शर्करा के स्तर में अचानक वृद्धि को धीमा करने में मदद कर सकता है। फिर भी मधुमेह से पीड़ित लोगों को इसका सेवन डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए और इसे दवाओं का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

    पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में भी जामुन लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने, कब्ज जैसी समस्याओं को कम करने और भोजन के पाचन में सहायता कर सकता है। नियमित रूप से उचित मात्रा में इसका सेवन पेट को हल्का रखने और पाचन तंत्र को सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकता है। स्वस्थ पाचन का सीधा संबंध शरीर के समग्र स्वास्थ्य से माना जाता है।

    जामुन में पाए जाने वाले विटामिन सी और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में सहायक हो सकते हैं। ये तत्व शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने, कोशिकाओं की सुरक्षा करने और संक्रमण से लड़ने की प्राकृतिक क्षमता को बेहतर बनाने में भूमिका निभाते हैं। मौसम बदलने के दौरान संतुलित आहार के साथ जामुन का सेवन शरीर को अतिरिक्त पोषण प्रदान कर सकता है।

    हृदय स्वास्थ्य के लिए भी जामुन को लाभकारी फल माना जाता है। इसमें मौजूद पोटैशियम रक्तचाप को संतुलित रखने में मदद कर सकता है, जबकि एंटीऑक्सीडेंट्स रक्त वाहिकाओं की सुरक्षा और हृदय की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने में योगदान दे सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित व्यायाम और संतुलित जीवनशैली के साथ ऐसे पौष्टिक फलों का सेवन हृदय संबंधी जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है।

    त्वचा की देखभाल और वजन नियंत्रण के लिहाज से भी जामुन उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को फ्री-रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं, जिससे त्वचा स्वस्थ और प्राकृतिक रूप से दमकती हुई दिखाई दे सकती है। वहीं इसकी कम कैलोरी और अधिक फाइबर की मात्रा लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास कराती है, जिससे बार-बार भूख लगने की संभावना कम हो सकती है। यही कारण है कि संतुलित डाइट और सक्रिय जीवनशैली अपनाने वाले लोगों के लिए जामुन एक पौष्टिक और उपयोगी मौसमी फल माना जाता है।

  • योगिनी एकादशी: पढ़ें पौराणिक व्रत कथा, जानें पूजा विधि और इसका महत्‍व

    योगिनी एकादशी: पढ़ें पौराणिक व्रत कथा, जानें पूजा विधि और इसका महत्‍व


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में प्रत्येक एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, लेकिन आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली योगिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत, पूजा और कथा का श्रवण करने से हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस व्रत से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और साधक को पापों से मुक्ति के साथ सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

    योगिनी एकादशी की पौराणिक कथा
    धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इस व्रत की महिमा और कथा धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी। प्राचीन समय में स्वर्गलोक में अलकापुरी नाम की एक सुंदर नगरी थी, जहां धन के देवता कुबेर का शासन था। कुबेर भगवान शिव के परम भक्त थे और उनकी पूजा के लिए हेम नाम का एक माली प्रतिदिन ताजे फूल लाकर अर्पित करता था।

    हेम अपनी पत्नी विशालाक्षी से अत्यधिक प्रेम करता था। एक दिन वह मानसरोवर से फूल तो ले आया, लेकिन पत्नी के साथ समय बिताने में इतना मग्न हो गया कि समय पर भगवान शिव की पूजा के लिए फूल नहीं पहुंचा सका। जब यह बात कुबेर को पता चली तो वे क्रोधित हो गए और हेम को श्राप दे दिया कि वह अपनी पत्नी से बिछड़ जाएगा और पृथ्वी पर कोढ़ी के रूप में जीवन बिताएगा।

    श्राप के प्रभाव से हेम तत्काल स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गिरा। उसका शरीर कोढ़ से ग्रसित हो गया और पत्नी भी उससे अलग हो गई। लंबे समय तक कष्ट झेलने के बाद एक दिन वह महर्षि मार्कण्डेय के आश्रम पहुंचा। ऋषि ने उसकी दयनीय अवस्था का कारण पूछा, तब हेम ने पूरी घटना उन्हें बताई।

    हेम की व्यथा सुनने के बाद महर्षि मार्कण्डेय ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने का उपदेश दिया। हेम ने श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उसका श्राप समाप्त हो गया, वह पुनः अपने दिव्य स्वरूप को प्राप्त कर अपनी पत्नी के साथ सुखपूर्वक रहने लगा। तभी से योगिनी एकादशी को पापों का नाश करने और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला व्रत माना जाता है।

    योगिनी एकादशी व्रत की पूजा विधि
    योगिनी एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा करें। भगवान को फूल, फल और प्रसाद अर्पित करें, दीप प्रज्वलित कर आरती करें तथा गुड़ और चने का भोग लगाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा और व्रत करने से भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, समृद्धि एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

  • मानसून में हेयर फॉल और डैंड्रफ से हैं परेशान तो अपनाएं ये असरदार घरेलू हेयर मास्क बाल बनेंगे मजबूत और चमकदार

    मानसून में हेयर फॉल और डैंड्रफ से हैं परेशान तो अपनाएं ये असरदार घरेलू हेयर मास्क बाल बनेंगे मजबूत और चमकदार


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं यह बालों के लिए कई नई परेशानियां भी लेकर आता है। वातावरण में बढ़ी नमी धूल और प्रदूषण के कारण बाल चिपचिपे हो जाते हैं उनकी जड़ें कमजोर पड़ने लगती हैं और हेयर फॉल डैंड्रफ तथा स्कैल्प इंफेक्शन जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में केवल शैंपू करना ही काफी नहीं होता बल्कि बालों को अतिरिक्त पोषण और सुरक्षा की जरूरत होती है। इसके लिए प्राकृतिक हेयर मास्क सबसे बेहतर विकल्प माने जाते हैं क्योंकि इनमें मौजूद पोषक तत्व बालों को भीतर से मजबूत बनाते हैं और बिना किसी नुकसान के उनकी प्राकृतिक चमक बनाए रखते हैं।

    मानसून के दौरान दही और मेथी का हेयर मास्क काफी असरदार माना जाता है। रातभर भिगोई हुई मेथी को पीसकर उसमें दही मिलाएं और इस पेस्ट को बालों की जड़ों से लेकर सिरों तक लगाएं। लगभग आधे घंटे बाद हल्के शैंपू से बाल धो लें। यह मास्क स्कैल्प को ठंडक देता है डैंड्रफ कम करने में मदद करता है और बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है।

    यदि बाल रूखे और बेजान हो गए हैं तो केला और शहद का हेयर मास्क अच्छा विकल्प हो सकता है। पका हुआ केला मैश करके उसमें एक चम्मच शहद मिलाएं और बालों पर लगाएं। यह मिश्रण बालों को गहराई से मॉइस्चराइज करता है जिससे बाल मुलायम और चमकदार नजर आते हैं। यह खासतौर पर फ्रिजी हेयर की समस्या को कम करने में मददगार माना जाता है।

    एलोवेरा और नारियल तेल का मिश्रण भी मानसून में बालों की देखभाल के लिए बेहद उपयोगी है। ताजा एलोवेरा जेल में थोड़ा नारियल तेल मिलाकर स्कैल्प पर हल्के हाथों से मसाज करें। कुछ समय बाद बाल धो लें। इससे स्कैल्प को पोषण मिलता है खुजली कम होती है और बालों की प्राकृतिक नमी बनी रहती है।

    आंवला और दही से तैयार हेयर मास्क भी बालों के लिए फायदेमंद माना जाता है। आंवला पाउडर में दही मिलाकर पेस्ट तैयार करें और इसे बालों पर लगाएं। इसमें मौजूद विटामिन सी बालों की जड़ों को मजबूत करता है और समय से पहले सफेद होने की प्रक्रिया को धीमा करने में भी मदद कर सकता है। नियमित उपयोग से बाल अधिक घने और स्वस्थ दिखाई देते हैं।

    अंडा और ऑलिव ऑयल का हेयर मास्क भी प्रोटीन की कमी पूरी करने के लिए लोकप्रिय घरेलू उपाय है। अंडे में मौजूद प्रोटीन बालों को मजबूती देता है जबकि ऑलिव ऑयल उन्हें पोषण और चमक प्रदान करता है। जिन लोगों को अंडे की गंध पसंद नहीं है वे इसमें कुछ बूंदें नींबू का रस मिला सकते हैं।

    बारिश के मौसम में हेयर मास्क लगाने के साथ कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। बालों को लंबे समय तक गीला न रखें क्योंकि इससे फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। बारिश में भीगने के बाद साफ पानी से बाल जरूर धोएं और पूरी तरह सुखाने के बाद ही बांधें। सप्ताह में एक या दो बार हेयर मास्क का इस्तेमाल पर्याप्त माना जाता है। जरूरत से ज्यादा उत्पादों का उपयोग करने से भी बाल कमजोर हो सकते हैं।

    यदि लंबे समय तक अत्यधिक हेयर फॉल खुजली या स्कैल्प में संक्रमण बना रहे तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा या बालों के विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। सही खानपान पर्याप्त पानी नियमित देखभाल और प्राकृतिक हेयर मास्क की मदद से मानसून में भी बालों को मजबूत स्वस्थ और चमकदार बनाए रखा जा सकता है।

  • खीरे से पाएं नैचुरल ग्लो और बेदाग त्वचा गर्मियों में स्किन केयर का सबसे आसान और असरदार घरेलू उपाय

    खीरे से पाएं नैचुरल ग्लो और बेदाग त्वचा गर्मियों में स्किन केयर का सबसे आसान और असरदार घरेलू उपाय


    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही तेज धूप पसीना धूल और प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर हमारी त्वचा पर दिखाई देने लगता है। चेहरा बेजान नजर आने लगता है टैनिंग बढ़ जाती है और कई बार मुंहासे तथा जलन जैसी समस्याएं भी परेशान करने लगती हैं। ऐसे में यदि बिना किसी महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट के त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाना चाहते हैं तो खीरा सबसे बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प साबित हो सकता है। खीरे में लगभग 95 प्रतिशत पानी होता है जो त्वचा को गहराई तक हाइड्रेट रखता है। इसके साथ ही इसमें विटामिन सी विटामिन के एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी मिनरल्स मौजूद होते हैं जो त्वचा को पोषण देने के साथ उसे तरोताजा बनाए रखते हैं।

    खीरा त्वचा को ठंडक पहुंचाने के लिए जाना जाता है। तेज धूप में रहने के बाद यदि चेहरे पर जलन या लालिमा महसूस हो रही हो तो ताजा खीरे के स्लाइस कुछ देर चेहरे पर रखने से तुरंत राहत मिल सकती है। यह सनबर्न के असर को कम करने में भी मदद करता है और त्वचा को आराम देता है। नियमित रूप से खीरे का इस्तेमाल करने से चेहरे की नमी बनी रहती है जिससे त्वचा मुलायम और चमकदार दिखाई देती है।

    यदि आंखों के नीचे सूजन या काले घेरे की समस्या है तो खीरा इसमें भी काफी लाभदायक माना जाता है। ठंडे खीरे के स्लाइस आंखों पर 10 से 15 मिनट रखने से सूजन कम होती है और आंखों को ताजगी मिलती है। लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन पर काम करने वालों के लिए भी यह आसान और असरदार उपाय है।

    खीरे का रस चेहरे के लिए एक प्राकृतिक टोनर की तरह काम करता है। इसे कॉटन की मदद से चेहरे पर लगाने से अतिरिक्त तेल कम होता है और खुले रोमछिद्र साफ होने में मदद मिलती है। ऑयली स्किन वाले लोगों के लिए यह खासतौर पर फायदेमंद माना जाता है। यदि खीरे के रस में थोड़ा एलोवेरा जेल मिलाकर लगाया जाए तो त्वचा को अतिरिक्त नमी और पोषण मिलता है।

    टैनिंग हटाने के लिए भी खीरे का उपयोग किया जा सकता है। खीरे के रस में थोड़ा दही या गुलाब जल मिलाकर फेस पैक तैयार करें और 15 से 20 मिनट तक चेहरे पर लगाएं। इसके बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। नियमित इस्तेमाल से त्वचा का रंग साफ नजर आने लगता है और चेहरे पर प्राकृतिक चमक दिखाई देती है।

    खीरे से बना हल्का स्क्रब भी त्वचा के लिए फायदेमंद होता है। कद्दूकस किए हुए खीरे में ओट्स या चावल का आटा मिलाकर हल्के हाथों से चेहरे की मसाज करें। इससे मृत त्वचा हटती है और नई त्वचा को सांस लेने का मौका मिलता है। हालांकि स्क्रब का उपयोग सप्ताह में केवल एक या दो बार ही करना चाहिए।

    ध्यान रखें कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले हाथ के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट जरूर करें। यदि त्वचा पर जलन या एलर्जी महसूस हो तो उसका उपयोग बंद कर दें। संतुलित आहार पर्याप्त पानी और नियमित स्किन केयर के साथ खीरे का सही इस्तेमाल आपकी त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ ताजा और प्राकृतिक रूप से दमकता हुआ बनाए रखने में मदद कर सकता है।

  • मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का अचूक उपाय शुक्रवार व्रत की पूरी विधि पूजा नियम और शुभ फल

    मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का अचूक उपाय शुक्रवार व्रत की पूरी विधि पूजा नियम और शुभ फल


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखकर मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं उनके जीवन में आर्थिक समृद्धि सुख शांति और वैभव का आगमन होता है। यह व्रत केवल धन प्राप्ति का माध्यम नहीं बल्कि मन की शुद्धि सकारात्मक ऊर्जा और परिवार में सुखद वातावरण स्थापित करने का भी महत्वपूर्ण साधन माना गया है।

    शुक्रवार के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ और विशेष रूप से सफेद या हल्के रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के पूजा स्थान की साफ सफाई कर मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। पूजा स्थल पर सफेद या लाल वस्त्र बिछाकर मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं और धूप अगरबत्ती अर्पित करें। इसके बाद कमल का फूल गुलाब या सुगंधित पुष्प अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मां को खीर बताशे मिश्री सफेद मिठाई नारियल और मौसमी फल का भोग लगाया जाता है।

    पूजा के दौरान श्रीसूक्त लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र कनकधारा स्तोत्र अथवा लक्ष्मी चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करना लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही ओम श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है। पूजा के अंत में मां लक्ष्मी की आरती करें और पूरे परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें।

    व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर सात्विक आचरण अपनाते हैं। कई लोग केवल फलाहार करते हैं जबकि कुछ श्रद्धालु एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। इस दिन लहसुन प्याज मांस मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। साथ ही किसी का अपमान करने कटु वचन बोलने या क्रोध करने से भी बचना चाहिए क्योंकि मां लक्ष्मी को शांति स्वच्छता और सदाचार अत्यंत प्रिय माने गए हैं।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार शुक्रवार के दिन जरूरतमंद लोगों को सफेद वस्त्र चावल चीनी दूध दही या मिठाई का दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली आर्थिक परेशानियां धीरे धीरे दूर होने लगती हैं। घर में स्वच्छता बनाए रखना और शाम के समय मुख्य द्वार पर दीपक जलाना भी शुभ फलदायी माना गया है।

    ज्योतिष के अनुसार शुक्रवार का संबंध शुक्र ग्रह से भी माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र कमजोर हो तो शुक्रवार का व्रत और मां लक्ष्मी की आराधना लाभदायक मानी जाती है। इससे वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और जीवन में भौतिक सुख सुविधाओं की प्राप्ति होने की मान्यता है।

    धार्मिक आस्था के साथ किया गया शुक्रवार का व्रत व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना जाता है। नियमित रूप से इस व्रत का पालन करने से आत्मविश्वास बढ़ता है मन को शांति मिलती है और परिवार में प्रेम सौहार्द तथा समृद्धि का वातावरण बनता है। श्रद्धा विश्वास और सच्चे मन से मां लक्ष्मी की आराधना करने वाले भक्तों पर उनकी कृपा सदैव बनी रहती है।