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  • 2.30 घंटे का धैर्य टेस्ट! ‘चांद मेरा दिल’ में प्यार तो है, लेकिन कहानी और लेखन ने किया निराश

    2.30 घंटे का धैर्य टेस्ट! ‘चांद मेरा दिल’ में प्यार तो है, लेकिन कहानी और लेखन ने किया निराश

    नई दिल्ली ।  ‘चांद मेरा दिल’ को सबसे खतरनाक यूजलेस फिल्म क्या बनाता है? क्या वो पिक्चर की खराब कहानी है? या उसके क्रिंज डायलॉग या फिर डायरेक्टर विवेक सोनी की ऑडेसिटी जो ये सोच रहे थे कि वो इस जमाने की सबसे बेहतरीन रोमांटिक फिल्म बना रहे हैं? इसका जवाब है- सबकुछ.
    बॉलीवुड में बीते काफी वक्त से रीमेक और सीक्वल बन रहे हैं. ऐसे में कोई नई कहानी ऑडियंस को परोसना मेकर्स के लिए शायद मुश्किल हो गया है, या फिर हमने पूरी तरह से कोशिश करना छोड़ दिया है. जो भी है…
    ओटीटी के जमाने में जनता को फिल्म देखने के लिए थिएटर तक खींचना बड़ी बात हो गई है. ऐसे में आपकी पिक्चर एकदम बेदम हो तो चीजें और खराब हो जाती हैं.कुछ कहानियां आइडिया में बहुत अच्छी लगती हैं. मगर इसका मतलब यह नहीं है कि वो पर्दे परभी उतनी ही खूबसूरत लगें, जितनी पन्ने पर लग रही थी. ‘चांद मेरा दिल’ भी कुछ ऐसी ही है. किसी नए राइटर की नई-सी किताब में अगर इस कहानी को पढ़ा होता तो 14-15 साल की बच्चियां फिर भी इसे पचा लेतीं. पर हमसे ये न हो पाई, भैया!

    क्या है फिल्म की कहानी?

    कहानी है आरव रावत (लक्ष्य) और चांदनी प्रसाद (अनन्या पांडे) की. 21 साल की उम्र में इंजीनियरिंग कॉलेज में मिले आरव और चांदनी को एक-दूसरे से प्यार हो जाता है. मगर एक दूसरे की आंखों में खोए, मैसेज में एम्बेरेसिंग बातें करने वाले ‘आरु और चांद’ नहीं जानते कि जिंदगी में सिर्फ प्यार काफी नहीं होता. दोनों एकदम अलग परिवारों से आए हैं. चांदनी ऐसे घर में पली-बढ़ी है, जिसमें उसने अपनी मां को घरेलू हिंसा का शिकार होते देखा है. तो वहीं आरव के मां-बाप को हमेशा से अपने बच्चों से ज्यादा इमेज की चिंता रही है. अपने घरों में अनदेखे हुए और कम प्यार पाकर जिए आरव-चांदनी एक दूसरे के लिए ‘दुनिया खूबसूरत’ बना रहे हैं.
    दोनों की जिंदगी में एक क्राइसिस आता है और परिवार उनसे मुंह फेर लेता है. अब आरव और चांदनी दुनिया में एक दूसरे का सहारा हैं. उनके पास बड़ी जिम्मेदारी है, जिसके बोझ तले वो दब रहे हैं. एक दिन वो होता है, जो किसी ने नहीं सोचा और दोनों की जिंदगी बदल जाती है. इमेजिन करने में कहानी प्यारी लग रही है, है न? देखने में नहीं है! देखने में ये बॉलीवुड की बहुत ही पुराने जमाने की कहानी है, जिसमें बच्चे खुद को समझदार समझकर बड़े फैसले ले लेते हैं और फिर उन्हें समझ आता है कि अब हमारे बस की तो ये है नहीं, अब हम फंस गए. ऐसी कहानियां हम बहुत बार बॉलीवुड में बनते देख चुके हैं. अगर ये कोई शॉर्ट फिल्म भी होती तो शायद खूबसूरत लगती. मगर एक पूरी लगभग 2.30 घंटे की पिक्चर के रूप में ‘चांद मेरा दिल’, बोरिंग, प्रेडिक्टेबल और क्रिंज है.
    परफॉरमेंस
    आरव के रोल में लक्ष्य ने बढ़िया काम किया है. वो अच्छे एक्टर हैं, इस बात में कोई दोराय नहीं है. मगर ये फिल्म उनके टैलेंट के हिसाब की है ही नहीं. ‘किल’ और ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ के साथ लक्ष्य ने अपने एक्टिंग टैलेंट को साबित किया है. ‘चांद मेरा दिल’ में उनका किरदार फिर भी समझदार था. अनन्या पांडे ने भी पिक्चर में अच्छा काम किया है. मगर उनका किरदार चांदनी इतना इरिटेटिंग है कि आपका उसपर चिल्लाने का मन करता है. चांदनी इस रिश्ते में टॉक्सिक इंसान है. वो डेलुलु में जीती है और कन्फ्यूज ही रहती है. बेवकूफी भरी हरकत करती है, लेकिन अगर कोई बोल दे दो तो उसे बुरा लग जाता है. फिल्म में मनीष चौधरी और चारु शंकर संग अन्य कलाकारों ने भी काम किया है. उनका काम लिमिटेड था और सही भी रहा.
    सब्र का लेगी इम्तिहान
    डायरेक्टर विवेक सोनी और तुषार परांजपे का स्क्रीनप्ले काफी खराब और बोरिंग है. इसको और खराब बनाते हैं पिक्चर के डायलॉग. आरव और चांदनी, दोनों के ही किरदार आपको शुरुआत से पसंद नहीं आते. दोनों बेहद चीजी हरकतें करते हैं, बचपना दिखाते हैं और फिर आप सोचते हो कि अभी तो ये बच्चे हैं कोई बात नहीं. मगर इस सबका अंत कहीं नहीं होता. पिक्चर की कहानी आप बैठे-बैठे जो सोच रहे हैं वही जाती है.
    आपको ये जानने के लिए इसे देखने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी कि इसमें आखिर क्या हुआ. ‘चांद मेरा दिल’ शुरुआत से ही आपका ध्यान अपनी ओर खींचने में नाकाम होती है. इंटरवल आते-आते आप सोचने लगते हैं कि क्या इसे छोड़कर घर वापस लौट जाना चाहिए. आप खुद को इसे अंत तक देखने के लिए फोर्स करते हैं और फिर आरव और चांदनी के बीच एक बात आपकी हिट करती है. पिक्चर के अंत में आरव, चांदनी से पूछता है, ‘कहीं हम गलती तो नहीं कर रहे?’ वो कहती है, ‘अगर गलत है तो गलत सही.’ यहां थिएटर में बैठे आप सोचते हो, ‘गलती तो मैंने कर दी इस मूवी को देखने आकर.’
    ‘चांद मेरा दिल’ की अच्छी बात सिर्फ उसके गाने हैं. इस फिल्म को देखने के एक्सपीरिएंस की सबसे अच्छी बात थी चांद देखना. नहीं, फिल्म में किसी चांद को नहीं, बल्कि थिएटर से बाहर निकलकर घर आते हुए असली चांद को. वो सुंदर लग रहा था.
  • कम रेटिंग समझकर जिन हॉरर फिल्मों को लोगों ने किया नजरअंदाज, अब वही बन रही हैं डर की सबसे बड़ी वजह, दर्शकों ने कहा- रातभर नहीं आई नींद

    कम रेटिंग समझकर जिन हॉरर फिल्मों को लोगों ने किया नजरअंदाज, अब वही बन रही हैं डर की सबसे बड़ी वजह, दर्शकों ने कहा- रातभर नहीं आई नींद


    नई दिल्ली ।  अक्सर जब हम कोई नई हॉरर फिल्म देखने बैठते हैं, तो सबसे पहले उसकी IMDb रेटिंग चेक करते हैं। अगर रेटिंग 6 या 6.5 के आसपास हो, तो हम मान लेते हैं कि फिल्म ठीक ठाक होगी और उसे स्किप कर देते हैं। लेकिन हॉरर जॉनर के साथ ऐसा करना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है।सिनेमा लवर्स सोशल मीडिया पर ऐसी तीन फिल्में रीकमंड कर रहे हैं जिनकी रेटिंग कम है, लेकिन डर के मामले में बेस्ट है। ये फिल्में लोगों के पसीने छुड़ा दे रही हैं। आइए आपको बताते हैं कि इन तीन फिल्मों की खास बात क्या है।
    द टेकिंग ऑफ डेबोरा लोगान (The Taking of Deborah Logan)
    क्यों देखें ये फिल्म?: अगर आपको लगता है कि आपने सबकुछ देख लिया है और अब आपको डर नहीं लगता, तो ये फिल्म आपका भ्रम तोड़ देगी। ये फिल्म ‘फाउंड फुटेज’ स्टाइल में बनी है, जिससे स्क्रीन पर दिखने वाली हर घटना एकदम असली महसूस होती है।
    कहानी और डर का फैक्टर: कहानी एक मेडिकल टीम की है जो अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित एक बुजुर्ग महिला पर डॉक्यूमेंट्री बना रही है। शुरुआत में ये एक इमोशनल लगती है, लेकिन धीरे-धीरे अल्जाइमर पेशेंट की हरकतें इतनी अजीब और खौफनाक होने लगती हैं कि पूरी टीम की जान पर बन आती है।
    लोग क्या बोल रहे: सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि फिल्म का आखिरी का 20 मिनट का एक सीन इतना भयानक और डिस्टर्बिंग है कि कमजोर दिल वाले उसे झेल नहीं पाएंगे।
    2. द डार्क एंड द विक्ड (The Dark and The Wicked)

    क्यों देखें ये फिल्म?: यह कोई आम भूतिया फिल्म नहीं है जहां अचानक कोई सामने आकर आपको डराए, बल्कि ये एक ऐसी साइकोलॉजिकल हॉरर फिल्म है जो आपके दिमाग से खेलती है।
    कहानी और डर का फैक्टर: इस फिल्म में दो भाई-बहन की कहानी दिखाई गई है जो अपने बीमार पिता की देखभाल करने के लिए एक बेहद सुनसान फार्महाउस पर जाते हैं। वहां पहुंचते ही उन्हें महसूस होता है कि कोई बेहद खतरनाक ताकत उनके पूरे परिवार को खत्म करना चाहती है।
    लोग क्या बोल रहे: लोग कह रहे हैं कि ये फिल्म थोड़ी स्लो है, जिसकी वजह से इसकी रेटिंग कम रह गई। हालांकि हॉरर फिल्में देखने वालों के लिए ये मास्टरपीस है।

    यहां देखिए फिल्म का ट्रेलर
    क्यों देखें ये फिल्म?: थाईलैंड के काले जादू, ओझा और अंधविश्वास पर बनी ये फिल्म रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी है। इसे मॉक्युमेंट्री स्टाइल में शूट किया गया है यानी आपको ऐसा लगेगा जैसे आप कोई असली घटना लाइव देख रहे हैं।
    कहानी और डर का फैक्टर: ये फिल्म थाईलैंड के एक छोटे से गांव की कहानी है, जहां एक लड़की पर किसी प्राचीन और बहुत ही दुष्ट आत्मा का साया आ जाता है। फिल्म का पहला पार्ट धीरे-धीरे सस्पेंस बनाता है, लेकिन सेकेंड हाफ और इसका क्लाइमेक्स इतना ज्यादा खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला है कि इसे अकेले या अंधेरे में देखने की गलती बिल्कुल न करें।
  • पहली ही फिल्म से मिला ऐसा नाम, जिसने राजीव भाटिया को बना दिया बॉलीवुड का सुपरस्टार अक्षय कुमार

    पहली ही फिल्म से मिला ऐसा नाम, जिसने राजीव भाटिया को बना दिया बॉलीवुड का सुपरस्टार अक्षय कुमार

    अक्षय कुमार ने आखिर क्यों बदला अपना असली नाम?
     नई दिल्ली ।  बॉलीवुड इंडस्ट्री में कई स्टार्स ऐसे हैं, जिन्होंने अपने असली नाम की जगह किसी और नाम से अपनी पहचान बनाई। इस लिस्ट में दिलीप कुमार से लेकर अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान जैसे सुपरस्टार्स का नाम शामिल है। वहीं, इस लिस्ट में बॉलीवुड खिलाड़ी यानी अक्षय कुमार का नाम भी शामिल है।

    अक्षय कुमार का असली नाम ये है
    अक्षय कुमार का असली नाम राजीव हरिओम भाटिया है। उन्होंने फिल्मों में आने से पहले अपना नाम बदल कर अक्षय कुमार कर लिया।

    जानते हैं क्यों अक्षय कुमार ने बदला नाम
    लेकिन इसके पीछे का मजेदार किस्सा शायद ही आप जानते होंगे। अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं आखिर किस वजह से अक्षय ने अपना नाम चेंज किया।

    इंटरव्यू में बताया दिलचस्प किस्सा
    Galatta Plus के साथ एक इंटरव्यू में, बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार (जिनका जन्म राजीव भाटिया के रूप में हुआ था) ने अपना नाम बदलने के पीछे की दिलचस्प कहानी बताई। आम धारणा के विपरीत, उन्होंने नाम बदलने का ये फैसला किसी पंडित या ज्योतिषीय सलाह से प्रभावित होकर नहीं लिया था।


    महज 8 मिनट का रोल

    Galatta Plus के साथ एक इंटरव्यू में, बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार (जिनका जन्म राजीव भाटिया के रूप में हुआ था) ने अपना नाम बदलने के पीछे की दिलचस्प कहानी बताई। आम धारणा के विपरीत, उन्होंने नाम बदलने का ये फैसला किसी पंडित या ज्योतिषीय सलाह से प्रभावित होकर नहीं लिया था।


    एक्ट्रेस को सिखाते हैं मार्शल आर्ट

    इंटरव्यू में अक्षय ने बताया, ‘उन्होंने महेश भट्ट की फिल्म ‘आज’ में महज 8 सेकंड का एक छोटा सा रोल किया था। इस फिल्म में वो 8 सेकंड के लिए आते हैं और एक्ट्रेस को मार्शल आर्ट सिखाते हैं और चले जाते हैं।’


    कुमार गौरव की वजह से बदला नाम

    अक्षय ने आगे कहा, ‘उस फिल्म में शायद ही किसी ने मुझे नोटिस किया हो। इस फिल्म में मेन लीड एक्टर कुमार गौरव थे और फिल्म में उनका नाम ‘अक्षय’ था। तो ये मुझे बहुत अच्छा लगा कि यार ये मेरी पहली फिल्म है और कुमार गौरव का नाम अक्षय है तो मैंने सोचा कि मैं अपना नाम बदल लेता हूं।’

    ऐसे राजीव से अक्षय बने एक्टर
    बस फिर क्या था ये राजीव भाटिया से वो बॉलीवुड के चमकते सितारे अक्षय कुमार बन गए। आज पूरी दुनिया उन्हें इसी नाम से जानती है।

    भूत बंगला के बाद इस फिल्म में आएंगे नजर
    अक्षय कुमार ने अपने करियर में कई सुपरहिट फिल्में दी हैं। हाल ही में अक्षय कुमार की फिल्म ‘भूत बंगला’ रिलीज हुई थी। वहीं, इन दिनों अक्षय कुमार अपनी अपकमिंग मूवी ‘वेलकम टू द जंगल’ को लेकर सुर्खियों में हैं। ‘वेलकम टू द जंगल’ 26 जून, 2026 को सिनेमाघरों में आएगी

  • आईपीएल 2026: SRH के खिलाफ हार बनी CSK के लिए टर्निंग पॉइंट, ऋतुराज गायकवाड़ का बयान

    आईपीएल 2026: SRH के खिलाफ हार बनी CSK के लिए टर्निंग पॉइंट, ऋतुराज गायकवाड़ का बयान


    नई दिल्ली। IPL 2026 में पांच बार की चैंपियन टीम चेन्नई सुपर किंग्स का प्रदर्शन इस बार उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा और टीम प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो गई। टीम के कप्तान Ruturaj Gaikwad ने हार के बाद बड़ा बयान देते हुए बताया कि इस सीजन में एक खास मैच ने पूरी कहानी बदल दी।

    ऋतुराज के मुताबिक गुजरात टाइटंस के खिलाफ मिली हार और उसके बाद सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मुकाबला टीम के लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। खासकर SRH के खिलाफ हार के बाद टीम का आत्मविश्वास टूट गया और वहीं से अभियान बिखरता चला गया। इस हार ने न सिर्फ पॉइंट्स टेबल में नुकसान पहुंचाया बल्कि टीम की रणनीति और मानसिक मजबूती पर भी असर डाला।

    मीडिया रिपोर्ट्स और विश्लेषणों के अनुसार गुजरात टाइटंस के खिलाफ बड़ा अंतर से मिली हार के बाद CSK का नेट रन रेट प्रभावित हुआ और टीम पर दबाव बढ़ गया। इसके बाद सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मुकाबले में मिली हार ने स्थिति को और खराब कर दिया, जिससे प्लेऑफ की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं।

    कप्तान ऋतुराज ने स्वीकार किया कि टीम कई मौकों पर मैच में नियंत्रण बनाए रखने में नाकाम रही। बल्लेबाजी क्रम लगातार अस्थिर रहा और बड़े स्कोर बनाने में भी टीम को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। डेथ ओवर्स में रन रेट गिरना और शुरुआती ओवरों में विकेट गिरना भी हार की बड़ी वजह बनी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस सीजन में CSK की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी बल्लेबाजी रही। कई अनुभवी खिलाड़ी भी लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए, जिससे टीम दबाव में आती गई। वहीं कप्तानी की जिम्मेदारी और टीम को नई दिशा देने का दबाव भी ऋतुराज के प्रदर्शन पर असर डालता दिखा।

    गुजरात टाइटंस के खिलाफ मिली भारी हार ने पूरे सीजन की दिशा बदल दी थी, जबकि SRH के खिलाफ मैच ने लगभग प्लेऑफ की उम्मीदों पर अंतिम मुहर लगा दी। इन दोनों मैचों को अब CSK के सीजन का निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

    हालांकि ऋतुराज ने यह भी कहा कि टीम भविष्य के लिए सीख लेकर आगे बढ़ेगी और गलतियों को सुधारकर वापसी करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि CSK अगले सीजन में मजबूत रणनीति और बेहतर संतुलन के साथ वापसी की तैयारी करेगी।

    कुल मिलाकर IPL 2026 CSK के लिए एक कठिन सीजन साबित हुआ, जहां एक-दो अहम मुकाबलों ने पूरी कहानी बदल दी और एक मजबूत टीम को प्लेऑफ से बाहर कर दिया।

  • जब मोहब्बत हार गई धर्म की दीवारों से, हसरत जयपुरी के दर्द ने जन्म दिया हिंदी सिनेमा के सबसे भावुक गीत को

    जब मोहब्बत हार गई धर्म की दीवारों से, हसरत जयपुरी के दर्द ने जन्म दिया हिंदी सिनेमा के सबसे भावुक गीत को

    नई दिल्ली ।  हिंदी सिनेमा के दिग्गज लिरिसिस्ट कुछ ऐसे गाने लिख गए जिन पर आज भी चर्चा होती है। ऐसा ही एक गाना है हसरत जयपुरी का लिखा गाना दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर। यह गाना शम्मी कपूर पर फिल्माया गया है। वह शूट के वक्त मुश्किल से अपने आंसू रोक पाए थे। कम लोग जानते हैं कि हसरत जयपुरी ने जिस दिन यह गाना लिखा था, उनकी प्रेमिका की शादी थी। वह जिसे पसंद करते थे वह हिंदू थी। धर्म की वजह से दोनों नहीं मिल सके और उसकी डोली उठी तो हसरत ने उसकी यादों को दुलहन बनाकर दिल के पास रखने का फैसला लिया।
    लड़कपन में लिखा था गाना
    हसरत जयपुरी ने हिंदी सिनेमा को कई बेहतरीन गाने दिए। वह छोटी उम्र से ही गीत लिखने लगे थे। जब बड़े हुए तो कच्ची उम्र के प्यार के दौरान लिखे गए गाने उन्होंने फिल्मों में दे दिए। ऐसा ही एक गाना था दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर। हसरत जयपुरी को उनके पड़ोस में रहने वाली लड़की से प्यार था। उस जमाने का प्यार बस आंखों-आंखों में और लव-लेटर वाला होता था। हसरत राधा के लिए लव-लेटर और गाने लिखते लेकिन दे नहीं पाते थे। इसी डर में उन्होंने लिख डाला था, ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर कि तुम नाराज ना होना।

    धर्म की वजह से नहीं बनी बात
    दोनों एक-दूसरे को पसंद करते थे। लेकिन धर्म अलग था तो राहें अलग होनी ही थीं। एक दिन आया जब राधा की शादी हो गई। हसरत को कुछ कर नहीं सकते थे लेकिन अपने दर्द को उन्होंने गाने का रूप दिया। उन्होंने लिखा, दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर, यादों को तेरी मैं दुलहन बनाकर, रखूंगा मैं दिल के पास, मत हो मेरी जां उदास…शम्मी कपूर की फिल्म ब्रह्मचारी की सिचुएशन पर यह गाना फिट बैठ गया। हसरत ने यह गाना दिया।

    जब शम्मी कपूर नहीं रोक पाए अपने आंसू
    इस गाने की शूटिंग से जुड़ा किस्सा भी इंट्रेस्टिंग है। इंडियन आइडल के एपिसोड में मनोज मुंतशिर ने बताया था कि गाना गाने के लिए शम्मी कपूर ने पहले मना कर दिया था। उन्होंने जब गाना सुना तो इस सिचुएशन को विजुअलाइज किया। वह इमोशंस कंट्रोल नहीं कर पाए और उनके आंसू आने लगे। उन्होंने गाना सुनकर मना कर दिया और बोले, प्लीज इसे बदल दो। दरअसल इस सीन में उनको रोना नहीं था। शम्मी को लग रहा था कि सीन में घुस गए तो आंसू रोकना मुश्किल हो जाएगा।

  • पेट्रोल, दूध के बाद अब दवाओं पर महंगाई का असर, 384 जरूरी दवाएं हो सकती हैं महंगी

    पेट्रोल, दूध के बाद अब दवाओं पर महंगाई का असर, 384 जरूरी दवाएं हो सकती हैं महंगी

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के दवा बाजार पर भी पड़ सकता है। केंद्र सरकार 384 आवश्यक और जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों में एक बार की ‘आपातकालीन बढ़ोतरी’ करने पर विचार कर रही है। हालांकि यह बढ़ोतरी अस्थायी होगी और हालात सामान्य होने पर कीमतें फिर से घटाई जा सकती हैं। बीते कुछ समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब दवाओं के महंगे होने की आशंका ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।

    कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल
    दवा उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के चलते कई जरूरी रसायनों और कच्चे माल की कीमतों में 200 से 300 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही पैकेजिंग सामग्री और परिवहन लागत भी तेजी से बढ़ी है, जिसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण, फार्मास्यूटिकल्स विभाग और वाणिज्य मंत्रालय के बीच लगातार चर्चा जारी है।

    किन दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं
    सूत्रों के मुताबिक, जिन 384 दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव है, उनमें कई जरूरी और जीवन रक्षक दवाएं शामिल हैं।

    इनमें शामिल हैं:-
    एंटीबायोटिक्स: एमॉक्सिसिलिन, एजिथ्रोमाइसिन
    हृदय रोग की दवाएं: एम्लोडिपाइन, एटोरवास्टेटिन
    दर्द निवारक दवाएं: पैरासिटामोल
    स्टेरॉयड: डेक्सामेथासोन
    विटामिन सप्लीमेंट्स: एस्कॉर्बिक एसिड

    अस्थायी होगी कीमतों में बढ़ोतरी
    सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह बढ़ोतरी स्थायी नहीं होगी। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति सामान्य होगी और सप्लाई चेन बहाल होगी, कीमतों को वापस नियंत्रित किया जाएगा।

    पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी
    हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक सप्ताह से भी कम समय में यह दूसरी बढ़ोतरी है। नई कीमतों के बाद नई दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

    सरकार के बचत उपाय और ऊर्जा नीति
    ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार ने ऊर्जा और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए कई कदमों की बात कही है। प्रधानमंत्री की ओर से ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, गैर-जरूरी विदेश यात्राओं को टालने और सोने की खरीद में संयम बरतने की अपील की गई है।

    पर्याप्त भंडार का दावा
    पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। भारत में डीजल उत्पादन खपत से अधिक है, जबकि एलपीजी की 60 प्रतिशत मांग आयात पर निर्भर है, जिसमें बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया मार्ग से आता है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आपूर्ति व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है और फिलहाल किसी गंभीर कमी की स्थिति नहीं है।

  • खरबपति बनने की ओर एलन मस्क, दौलत में बड़ा उछाल, 722 अरब डॉलर के पार नेटवर्थ

    खरबपति बनने की ओर एलन मस्क, दौलत में बड़ा उछाल, 722 अरब डॉलर के पार नेटवर्थ

    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क की संपत्ति में तेज रफ्तार से बढ़ोतरी जारी है। गुरुवार को उनकी नेटवर्थ में एक ही दिन में 45 अरब डॉलर का इजाफा हुआ, जिसके बाद कुल संपत्ति बढ़कर 722 अरब डॉलर तक पहुंच गई। इस उछाल के साथ मस्क अब ट्रिलियनेयर यानि खरबपति बनने की दिशा में और करीब माने जा रहे हैं। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, दूसरे स्थान पर मौजूद लैरी पेज की संपत्ति मस्क के मुकाबले आधे से भी कम है।

    स्पेसएक्स IPO से और बढ़ सकती है दौलत
    एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अमेरिका में IPO लाने की तैयारी में है। यह कंपनी रॉकेट निर्माण और स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लिए जानी जाती है। माना जा रहा है कि यह IPO वॉल स्ट्रीट के इतिहास में सबसे बड़े इश्यू में से एक हो सकता है और अगले महीने SPCX कोड के तहत लॉन्च किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, स्पेसएक्स की अनुमानित वैल्यू 1.25 ट्रिलियन डॉलर तक हो सकती है, जिसमें मस्क की हिस्सेदारी का मूल्य 600 अरब डॉलर से अधिक आंका जा सकता है। इसके बाद उनकी कुल संपत्ति 1 ट्रिलियन डॉलर से भी ऊपर जा सकती है।

    5 महीने में 103 अरब डॉलर की बढ़ोतरी
    रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अब तक एलन मस्क की संपत्ति में 103 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। यह राशि भारत के शीर्ष उद्योगपतियों की दौलत से भी अधिक है। तुलना के अनुसार, मुकेश अंबानी की कुल संपत्ति 88.10 अरब डॉलर है, जबकि गौतम अडानी की नेटवर्थ लगभग 108 अरब डॉलर के आसपास है।

    अरबपतियों की रेस में मस्क सबसे आगे
    ब्लूमबर्ग रैंकिंग के अनुसार, इस साल संपत्ति बढ़ाने वाले अरबपतियों की सूची में मस्क शीर्ष पर हैं। उनके बाद लैरी पेज, सर्गी ब्रिन, माइकल डेल, जेफ बेजोस, जेनसेन हुआंग और गौतम अडानी जैसे नाम शामिल हैं, जिनकी संपत्ति में अरबों डॉलर का इजाफा दर्ज किया गया है।

    ट्रिलियनेयर बनने की ओर कदम
    स्पेसएक्स की संभावित लिस्टिंग के बाद एलन मस्क इतिहास में पहले ऐसे व्यक्ति बन सकते हैं जिनकी संपत्ति 1 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच जाएगी। इससे वैश्विक अरबपति सूची में उनकी बढ़त और भी मजबूत हो जाएगी।

  • अजय देवगन का भोजपुरी कनेक्शन: मनोज तिवारी के साथ सुपरहिट फिल्म का जलवा

    अजय देवगन का भोजपुरी कनेक्शन: मनोज तिवारी के साथ सुपरहिट फिल्म का जलवा


    नई दिल्ली।  बॉलीवुड के दमदार अभिनेता Ajay Devgn अपनी बहुआयामी अदाकारी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में एक्शन, रोमांस और कॉमेडी जैसे हर जॉनर में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अजय देवगन ने भोजपुरी सिनेमा में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी और वहां भी दर्शकों के बीच जबरदस्त प्रभाव छोड़ा था।

    साल 2006 में आई भोजपुरी फिल्म ‘धरती कहे पुकार के’ में अजय देवगन ने स्पेशल अपीयरेंस किया था। इस फिल्म में उनके साथ भोजपुरी सुपरस्टार Manoj Tiwari मुख्य भूमिका में नजर आए थे। फिल्म में अजय देवगन के साथ बॉलीवुड एक्ट्रेस शर्बानी मुखर्जी भी अहम किरदार में थीं। फिल्म का निर्देशन असलम शेख ने किया था।

    फिल्म की कहानी एक ग्रामीण परिवेश पर आधारित थी, जहां एक गांव को एक अत्याचारी विलेन “वीर मंगिया” के जुल्मों से परेशान दिखाया गया। इसी संघर्ष में मनोज तिवारी और अजय देवगन मिलकर गांव की रक्षा करते हैं और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं। अजय देवगन ने फिल्म में एक पुलिस अधिकारी एसपी कुणाल सिंह का किरदार निभाया था, जो कहानी में निर्णायक मोड़ लेकर आता है।

    फिल्म का एक खास सीन आज भी दर्शकों को याद है, जिसमें मनोज तिवारी पर हमला होता है और अजय देवगन की एंट्री होती है। वह अपनी जान पर खेलकर उन्हें बचाते हैं और गुंडों का सामना करते हैं। यही सीन फिल्म का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ था।

    ‘धरती कहे पुकार के’ सिर्फ अपनी कहानी के कारण ही नहीं, बल्कि अपने गानों और संगीत के कारण भी सुपरहिट रही। फिल्म के गाने मनोज तिवारी, पामेला जैन, मधुश्री, अनुराधा पौडवाल, कैलाश खेर, सोनू कक्कड़ और उदित नारायण जैसे बड़े गायकों ने गाए थे। संगीत निर्देशन धनंजय मिश्रा ने किया था और गीत विनय बिहारी ने लिखे थे।

    फिल्म का बजट लगभग 2 करोड़ रुपये बताया जाता है, जबकि इसका कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन करीब 7 करोड़ रुपये तक पहुंचा था, जिससे यह उस समय की सुपरहिट भोजपुरी फिल्मों में शामिल हो गई। IMDb पर भी फिल्म को अच्छी रेटिंग मिली है।

    आज भी यह फिल्म यूट्यूब पर उपलब्ध है और करोड़ों दर्शक इसे देख चुके हैं। टी-सीरीज के भोजपुरी चैनल पर मौजूद इस फिल्म को अब तक 1 करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है, जो इसकी लोकप्रियता को साबित करता है।

    कुल मिलाकर, अजय देवगन का यह भोजपुरी अवतार उनके करियर का एक अनोखा और यादगार हिस्सा बन गया, जिसने साबित किया कि असली स्टारडम भाषा या इंडस्ट्री का मोहताज नहीं होता।

  • पुरुषोत्तम मास में सावधानी: घर में न रखें ये वस्तुएं, सुख-शांति पर पड़ सकता है असर

    पुरुषोत्तम मास में सावधानी: घर में न रखें ये वस्तुएं, सुख-शांति पर पड़ सकता है असर


    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग में Purushottam Maas को अत्यंत पवित्र और विशेष महीना माना जाता है। यह अवधि भगवान विष्णु को समर्पित होती है, जिसमें श्रद्धालु पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि इस महीने किए गए शुभ कार्य कई गुना फल देते हैं, लेकिन इसी के साथ वास्तु शास्त्र में कुछ विशेष सावधानियां भी बताई गई हैं।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषोत्तम मास के दौरान घर में रखी कुछ वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती हैं और परिवार की सुख-शांति पर असर डाल सकती हैं। इसलिए इस अवधि में विशेष रूप से घर की सफाई और अनावश्यक वस्तुओं को हटाने पर जोर दिया जाता है।

    सबसे पहले जिन चीजों से बचने की सलाह दी गई है, वे हैं टूटी हुई देवी-देवताओं की मूर्तियां। घर में किसी भी प्रकार की खंडित मूर्ति रखना वास्तु दोष का कारण माना जाता है। ऐसी मूर्तियां नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं और पारिवारिक शांति को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए इन्हें नदी या पवित्र जल में विसर्जित करने की सलाह दी जाती है।

    इसके अलावा सूखे या मुरझाए हुए पौधे भी इस पवित्र माह में अशुभ माने गए हैं। घर में रखे सूखे पौधे न केवल वातावरण की ताजगी को कम करते हैं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को भी बढ़ाते हैं। इसके स्थान पर हरे-भरे पौधे, विशेषकर तुलसी का पौधा, अत्यंत शुभ माना गया है क्योंकि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाता है।

    वास्तु शास्त्र में टूटे-फूटे कांच के बर्तनों को भी अशुभ बताया गया है। ऐसे बर्तन घर में रखने से आर्थिक परेशानियों और बाधाओं का संकेत मिलता है। इसलिए पुरुषोत्तम मास में इन्हें तुरंत घर से बाहर कर देना चाहिए ताकि घर में समृद्धि और स्थिरता बनी रहे।

    इसी तरह बंद पड़ी या खराब घड़ियां भी नकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती हैं। समय रुकना प्रगति में बाधा का संकेत माना जाता है, और वास्तु के अनुसार यह परिवार के विकास और तरक्की को प्रभावित कर सकता है। इसलिए ऐसी घड़ियों को या तो ठीक करवा लेना चाहिए या फिर घर से हटा देना चाहिए।

    पुरुषोत्तम मास में धार्मिक आस्था के साथ-साथ घर के वातावरण को भी शुद्ध और सकारात्मक बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि इस अवधि में किया गया हर छोटा सुधार भी जीवन में बड़े बदलाव ला सकता है।

    कुल मिलाकर यह पवित्र महीना भक्तों के लिए भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का अवसर है, और साथ ही यह समय घर को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त करने और सकारात्मकता बढ़ाने का भी संदेश देता है।