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  • पन्ना में बड़ा खुलासा: व्यापारी से 95 हजार वसूले, टीआई समेत 4 पर FIR

    पन्ना में बड़ा खुलासा: व्यापारी से 95 हजार वसूले, टीआई समेत 4 पर FIR

    मध्य प्रदेश । पन्ना में पुलिस विभाग को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सर्राफा व्यापारी से गांजा तस्करी के झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर 95 हजार रुपए वसूलने का गंभीर आरोप टीआई समेत चार लोगों पर लगा है। जांच के बाद आरोप सही पाए गए, जिसके बाद FIR दर्ज कर ली गई है और सभी आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

    Panna में सामने आए इस मामले ने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत के अनुसार, रीवा के तरहटी गांव निवासी सर्राफा व्यापारी मोहनलाल सोनी 14 मई को अपनी कार से बागेश्वर धाम जा रहे थे। इसी दौरान मड़ला क्षेत्र के एक पेट्रोल पंप के पास सिविल ड्रेस में दो युवकों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर उन्हें रोका। दोनों ने व्यापारी पर गांजा तस्करी का आरोप लगाते हुए एक काली पॉलिथीन दिखाई और कहा कि यह मामला गंभीर है।

    इसके बाद आरोपियों ने व्यापारी को “मैटर निपटाने” की बात कहते हुए अपने साथ बैठा लिया और पास की शराब दुकान पर ले गए। यहां पहले से मौजूद एक पुलिसकर्मी वर्दी में पहुंचा और मामले को और गंभीर बताते हुए दबाव बनाया। व्यापारी को दुकान के पीछे ले जाकर करीब दो घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया।

    एक लाख की मांग, 95 हजार में तय हुआ सौदा
    पीड़ित के मुताबिक, आरोपियों ने उसे झूठे केस से बचाने के लिए एक लाख रुपए की मांग की। बाद में बातचीत के बाद यह रकम 95 हजार रुपए पर तय हुई। व्यापारी ने 45 हजार रुपए नकद दिए, जबकि 50 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए। पैसे मिलने के बाद उसे छोड़ा गया। शिकायत में बताया गया कि इस पूरे घटनाक्रम में मड़ला थाना प्रभारी रचना पटेल, हेड कांस्टेबल रज्जाक खान, कांस्टेबल रामशरण अहिरवार और एक अन्य व्यक्ति बृजेश यादव शामिल थे।

    जांच में आरोप सही पाए गए, FIR दर्ज
    पीड़ित ने पूरे मामले की शिकायत एसपी को सौंपी। इसके बाद उच्च स्तरीय जांच कराई गई, जिसमें आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित पुलिसकर्मियों और अन्य आरोपी के खिलाफ साजिश, अवैध वसूली और आपराधिक धमकी की धाराओं में FIR दर्ज की गई है। इससे पहले तीन पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच भी किया गया था। अब सभी आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।

    व्यापारी का आरोप और पुलिस की कार्रवा
    व्यापारी का कहना है कि उन्हें पूरी तरह से झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और जबरन पैसे वसूले गए। मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर भी कार्रवाई की मांग उठी थी। एसपी ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच आगे बढ़ा दी है और विभागीय स्तर पर भी सख्त कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।

  • सरकार का बड़ा फैसला: सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8% हिस्सेदारी OFS के जरिए बिक्री पर, निवेशकों की नजर

    सरकार का बड़ा फैसला: सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8% हिस्सेदारी OFS के जरिए बिक्री पर, निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली । सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग सेक्टर में विनिवेश की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में अपनी हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से बिक्री के लिए पेश कर दी है। इस कदम के तहत सरकार कुल मिलाकर बैंक में अपनी 8 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना पर काम कर रही है, जिससे निवेशकों के बीच बाजार में हलचल बढ़ गई है।

    विनिवेश विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार पहले चरण में बैंक में अपनी 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही ग्रीन शू विकल्प के तहत अतिरिक्त 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का प्रावधान भी रखा गया है, जिससे कुल बिक्री 8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यह पूरी प्रक्रिया सरकार की उन नीतियों का हिस्सा है, जिसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में हिस्सेदारी घटाकर बाजार आधारित संरचना को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

    ऑफर फॉर सेल की शुरुआत नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए 22 मई से कर दी गई है। इस दौरान संस्थागत निवेशकों को निर्धारित समय के भीतर अपनी बोलियां लगाने का अवसर दिया गया है। सरकार ने इस इश्यू के लिए न्यूनतम मूल्य 31 रुपये प्रति शेयर तय किया है, जो पिछले बंद भाव की तुलना में लगभग 9.4 प्रतिशत कम है। इस मूल्य निर्धारण को निवेशकों को आकर्षित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    रिटेल निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 25 मई से शुरू होगी। इस दिन आम निवेशक और पात्र कर्मचारी निर्धारित बाजार समय के दौरान अपनी बोलियां लगा सकेंगे। नियमों के अनुसार, कुल ऑफर किए गए शेयरों का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित रहेगा, जिससे छोटे निवेशकों को भी इस विनिवेश प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिल सके।

    ऑफर डॉक्यूमेंट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बैंक के कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से 75 लाख इक्विटी शेयर आरक्षित किए गए हैं। यह कदम कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    सरकार की योजना के अनुसार, प्रारंभिक चरण में 36.21 करोड़ शेयरों की बिक्री की जाएगी, जो 4 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। यदि ग्रीन शू विकल्प का पूरा उपयोग किया जाता है, तो अतिरिक्त 36.21 करोड़ शेयर और बेचे जाएंगे, जिससे कुल बिक्री दोगुनी होकर लगभग 72.41 करोड़ शेयर तक पहुंच सकती है। इस स्थिति में कुल इश्यू साइज लगभग 2,244 करोड़ रुपये तक हो सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के OFS से बैंक के शेयरों में निकट भविष्य में अस्थिरता देखने को मिल सकती है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह प्रक्रिया निवेशकों के लिए अवसर भी पैदा कर सकती है। वहीं, सरकार के इस कदम को विनिवेश लक्ष्य पूरा करने और बैंकिंग सेक्टर में हिस्सेदारी संरचना को संतुलित करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।

  • रीवा में ट्रांसफार्मर के नीचे मिला अज्ञात युवक का शव, जांच में जुटी पुलिस

    रीवा में ट्रांसफार्मर के नीचे मिला अज्ञात युवक का शव, जांच में जुटी पुलिस



    मध्य प्रदेश । रीवा जिले के गुढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत बंजारी गांव में शुक्रवार दोपहर उस समय सनसनी फैल गई जब ग्रामीणों ने एक अज्ञात युवक का शव विद्युत ट्रांसफार्मर के नीचे पड़ा देखा। अचानक हुई इस घटना से पूरे गांव में दहशत और चर्चा का माहौल बन गया।

    सूचना मिलते ही गुढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। पुलिस ने आसपास के ग्रामीणों से पूछताछ की, लेकिन मृतक युवक की पहचान के संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी। शुरुआती जांच में युवक की उम्र लगभग 25 वर्ष के आसपास बताई जा रही है।

    इसके बाद पुलिस ने शव को डायल 112 की मदद से रीवा स्थित संजय गांधी अस्पताल की मर्चुरी में सुरक्षित रखवा दिया है, जहां आगे की कानूनी और पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया की जाएगी।

    पुलिस का कहना है कि युवक की पहचान उसके कपड़ों और हुलिये के आधार पर करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही आसपास के सभी थानों को सूचना भेज दी गई है, ताकि यदि किसी गुमशुदा व्यक्ति की रिपोर्ट दर्ज हो तो उसकी जानकारी से मिलान किया जा सके।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई है। क्या यह हादसा है या किसी अन्य कारण से हुई मौत, इस पर पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है।

    गुढ़ थाना पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को इस युवक के बारे में कोई जानकारी हो या हाल ही में कोई युवक लापता हुआ हो, तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें। इसके लिए दो संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं-
    • सहायक उप निरीक्षक सुरेश साकेत: 62329 81933
    • प्रधान आरक्षक अयोध्या प्रजापति: 91746 97575

    पुलिस का कहना है कि आम नागरिकों की छोटी सी जानकारी भी किसी परिवार को उनके अपनों तक पहुंचाने में बड़ी मदद कर सकती है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस जल्द ही पहचान और मौत के कारणों का खुलासा करने की उम्मीद जता रही है।

  • उज्जैन में बोलेरो से 19 लाख कैश बरामद, इनकम टैक्स टीम करेगी जांच

    उज्जैन में बोलेरो से 19 लाख कैश बरामद, इनकम टैक्स टीम करेगी जांच


    मध्य प्रदेश । उज्जैन से लगभग 48 किलोमीटर दूर महिदपुर रोड क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब पुलिस ने एक बोलेरो वाहन से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की। तलाशी के दौरान वाहन से करीब 19 लाख रुपए कैश मिला, जिससे मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।

    पुलिस के अनुसार, उन्हें सूचना मिली थी कि एक वाहन में भारी मात्रा में नकदी ले जाई जा रही है। सूचना के आधार पर तत्काल कार्रवाई करते हुए वाहन को रोका गया और गहन तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान जब नकदी सामने आई तो पुलिस भी चौंक गई।

    बरामद रकम कहां से लाई जा रही थी और इसका गंतव्य क्या था, इस पर अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। वाहन चालक से पूछताछ की जा रही है, लेकिन वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे आयकर विभाग तक पहुंचाया गया है। उज्जैन इनकम टैक्स विभाग की टीम तुरंत महिदपुर रोड के लिए रवाना हो गई है। टीम के पहुंचने के बाद पूरे मामले की गहन जांच की जाएगी और कैश के स्रोत तथा उपयोग की पुष्टि की जाएगी।

    सूत्रों के मुताबिक, जिस बोलेरो वाहन से यह नकदी बरामद हुई है, वह नागदा स्थित गोल्डन केमिकल कंपनी से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    फिलहाल पुलिस और प्रशासन दोनों ही स्तर पर जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इतनी बड़ी रकम किस उद्देश्य से ले जाई जा रही थी और क्या इसके पीछे कोई वित्तीय अनियमितता या संदिग्ध लेनदेन शामिल है।

  • अस्थिर बाजार में भी चुनिंदा बड़े शेयर दे सकते हैं बेहतर रिटर्न, विशेषज्ञों ने वॉचलिस्ट में रखने की सलाह दी

    अस्थिर बाजार में भी चुनिंदा बड़े शेयर दे सकते हैं बेहतर रिटर्न, विशेषज्ञों ने वॉचलिस्ट में रखने की सलाह दी


    नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार में इस समय उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है, जहां निवेशकों को लगातार अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि इसी अनिश्चितता के बीच कुछ चुनिंदा लार्जकैप स्टॉक्स ऐसे भी हैं, जिन पर बाजार विशेषज्ञों का भरोसा बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत फंडामेंटल्स और स्थिर बिजनेस मॉडल के चलते ये कंपनियां आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं और निवेशकों को आकर्षक रिटर्न देने की क्षमता रखती हैं।

    बाजार में हाल के दिनों में जिस तरह की हलचल देखने को मिल रही है, उसमें कई बार बड़ी और मजबूत कंपनियों के शेयर भी दबाव में आ जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसका कारण कंपनियों की आंतरिक स्थिति नहीं, बल्कि वैश्विक फंड फ्लो और विदेशी निवेश से जुड़ी गतिविधियां होती हैं। जब विदेशी संस्थागत निवेशक अपनी पोजीशन में बदलाव करते हैं या उभरते बाजारों में निवेश घटाते हैं, तो उसका असर ब्लूचिप कंपनियों पर भी देखने को मिलता है। इसी कारण वर्तमान समय में बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है, लेकिन इसे दीर्घकालिक नजरिए से अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।

    इसी बीच कुछ लार्जकैप स्टॉक्स को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं, जिनमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और नेस्ले इंडिया जैसे मजबूत नाम शामिल हैं। इन कंपनियों को अपने-अपने सेक्टर में स्थिर प्रदर्शन और मजबूत बिजनेस मॉडल के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्तरों पर इन शेयरों में आगे चलकर अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है और कुछ मामलों में यह तेजी लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना भी जताई जा रही है।

    विभिन्न सेक्टरों से जुड़े अन्य प्रमुख लार्जकैप शेयरों पर भी एनालिस्ट्स की नजर बनी हुई है, जहां उन्हें मध्यम से लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की उम्मीद दिखाई दे रही है। बाजार जानकारों का कहना है कि इस समय निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि अस्थिरता के दौर में गुणवत्ता वाले स्टॉक्स ही बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन यह स्थिति उन निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकती है जो लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करते हैं। मजबूत बैलेंस शीट, स्थिर आय और भरोसेमंद बिजनेस मॉडल वाली कंपनियां इस तरह के माहौल में अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती हैं।

    कुल मिलाकर, मौजूदा बाजार परिदृश्य भले ही अनिश्चितता से भरा हो, लेकिन कुछ चुनिंदा लार्जकैप स्टॉक्स निवेशकों के लिए उम्मीद की किरण बने हुए हैं, जहां सही रणनीति अपनाकर बेहतर रिटर्न हासिल किए जा सकते हैं।

  • सन टीवी नेटवर्क के कमजोर नतीजे: तिमाही मुनाफा 37% लुढ़का, स्टॉक में तेज गिरावट

    सन टीवी नेटवर्क के कमजोर नतीजे: तिमाही मुनाफा 37% लुढ़का, स्टॉक में तेज गिरावट


    नई दिल्ली । भारत की प्रमुख क्षेत्रीय मीडिया कंपनियों में शामिल सन टीवी नेटवर्क को वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में कमजोर वित्तीय प्रदर्शन का सामना करना पड़ा है। कंपनी के ताजा नतीजों के अनुसार, जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान उसका शुद्ध लाभ 37.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 232.02 करोड़ रुपये पर आ गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ 370.79 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। इस गिरावट ने निवेशकों और बाजार विश्लेषकों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

    कंपनी के प्रदर्शन में केवल मुनाफे की ही नहीं बल्कि राजस्व की भी कमी देखने को मिली है। इस तिमाही में सन टीवी नेटवर्क का कुल रेवेन्यू 882.51 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 941.81 करोड़ रुपये था। यानी रेवेन्यू में भी सालाना आधार पर 6.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। कारोबार के प्रमुख संकेतकों में यह कमजोरी ऐसे समय आई है जब मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर पहले से ही प्रतिस्पर्धा और बदलते उपभोक्ता व्यवहार की चुनौतियों से जूझ रहा है।

    ऑपरेटिंग प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी का EBITDA भी दबाव में रहा। इस तिमाही में EBITDA 8.9 प्रतिशत घटकर 390.7 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि EBITDA मार्जिन भी पिछले वर्ष के 45.5 प्रतिशत से घटकर 44.3 प्रतिशत रह गया। यह संकेत देता है कि कंपनी की लाभप्रदता पर लागत और अन्य वित्तीय दबावों का असर पड़ा है।

    कंपनी ने अपने नतीजों में बताया कि मुनाफे में आई गिरावट के पीछे कुछ असाधारण और गैर-आवर्ती कारण भी जिम्मेदार रहे हैं। इनमें म्यूचुअल फंड निवेश पर मार्क-टू-मार्केट प्रोविजन और रेडियो निवेश से जुड़े एक संस्थान में हुए नुकसान शामिल हैं। इसके अलावा पिछले वर्ष की समान तिमाही में प्राप्त ब्याज आय का इस बार अनुपस्थित रहना भी अन्य आय में कमी का कारण बना, जिससे कुल लाभ पर असर पड़ा।

    हालांकि कमजोर तिमाही नतीजों के बावजूद कंपनी ने अपने मुख्य कारोबार को स्थिर बताया है। प्रबंधन के अनुसार, चुनौतीपूर्ण बाजार परिस्थितियों के बावजूद कंपनी का कोर बिजनेस मजबूत स्थिति में बना हुआ है। विशेष रूप से घरेलू सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू में वृद्धि दर्ज की गई है, जो वित्त वर्ष 2026 में 9.7 प्रतिशत बढ़कर 1,891.7 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह संकेत देता है कि लंबी अवधि में कंपनी का मुख्य राजस्व मॉडल अभी भी स्थिरता बनाए हुए है।

    बाजार में इस कमजोर प्रदर्शन का असर भी साफ दिखाई दिया, जहां कंपनी के शेयरों में शुक्रवार को 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने कमजोर तिमाही परिणामों के बाद सतर्क रुख अपनाया, जिससे स्टॉक पर दबाव बढ़ गया।

    सन टीवी नेटवर्क, जो भारत की सबसे बड़ी क्षेत्रीय टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों में से एक है, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, बांग्ला, मराठी और हिंदी भाषाओं में अपने चैनल संचालित करती है। इसके अलावा कंपनी रेडियो, ओटीटी प्लेटफॉर्म और फिल्म निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय है। कंपनी की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर काव्या मारन हैं, जो इसके प्रमुख प्रमोटर कलानिधि मारन की पुत्री हैं।

  • बाबा महाकाल की भस्म आरती: आभूषणों से हुआ भव्य श्रृंगार, भक्त हुए भावविभोर

    बाबा महाकाल की भस्म आरती: आभूषणों से हुआ भव्य श्रृंगार, भक्त हुए भावविभोर


    मध्य प्रदेश । विश्व प्रसिद्ध उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। जैसे ही मंदिर के कपाट खोले गए, पूरे परिसर में मंत्रोच्चार और घंटियों की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो उठा। सबसे पहले सभा मंडप में वीरभद्रजी के कान में स्वस्तिवाचन किया गया और भगवान से अनुमति लेकर चांदी के पट खोले गए।

    इसके बाद गर्भगृह में प्रवेश कर पुजारियों ने भगवान महाकाल का पारंपरिक श्रृंगार उतारा और पंचामृत पूजन की विधि शुरू की। दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से भगवान का अभिषेक किया गया, जिसके बाद कर्पूर आरती संपन्न हुई। नंदी हॉल में नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और विधिवत पूजन कर वातावरण को और अधिक पवित्र बनाया गया।

    भस्म आरती के इस विशेष अवसर पर भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार रजत चंद्र, त्रिशूल और मुकुट से किया गया। साथ ही उन्हें रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष माला और सुगंधित पुष्पों से सजाया गया। भांग, चंदन, सूखे मेवे और भस्म अर्पित कर विशेष पूजा संपन्न की गई। इसके बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्ति रस में डूब गया।

    इस अवसर पर महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरा अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसे श्रद्धालु अत्यंत शुभ और दुर्लभ मानते हैं।

    भस्म आरती में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। भक्तों के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। यह दृश्य हर दिन की तरह इस दिन भी श्रद्धा, आस्था और परंपरा की जीवंत मिसाल बन गया।

  • पेट्रोल-डीजल को लेकर हड़कंप: एमपी में बढ़ी खपत, वितरण पर कड़ा नियंत्रण

    पेट्रोल-डीजल को लेकर हड़कंप: एमपी में बढ़ी खपत, वितरण पर कड़ा नियंत्रण


    मध्य प्रदेश । भोपाल समेत पूरे मध्य प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती खपत के बीच अब तेल कंपनियों ने अपने सिस्टम को और सख्त कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब यदि किसी पेट्रोल पंप से एक बार में ₹5000 से अधिक का पेट्रोल या ₹10,000 से ज्यादा का डीजल दिया जाता है, तो उसकी पूरी जानकारी दर्ज करनी होगी कि ईंधन किसे और किस उद्देश्य से दिया गया है। इस कदम के बाद प्रदेश के पेट्रोल पंपों पर निगरानी और तेज हो गई है।

    तेल कंपनियों का कहना है कि प्रदेश में किसी भी तरह की ईंधन की कमी नहीं है, बल्कि कुछ जगहों पर अचानक मांग बढ़ने के कारण पंप अस्थायी रूप से खाली हो रहे हैं। कंपनियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह स्थिति “शॉर्टेज” नहीं मानी जाएगी।

    इस पूरे सिस्टम में अब इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियां बड़े ट्रांजैक्शन पर खास नजर रख रही हैं। मप्र पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के अनुसार इंडियन ऑयल ₹10,000 और बीपीसीएल ₹19,000 से अधिक के डीजल वितरण पर विशेष मॉनिटरिंग कर रही हैं। उनका कहना है कि कई भारी वाहनों और टैंकरों की क्षमता ज्यादा होती है, ऐसे में बड़ी मात्रा में ईंधन भरना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अब हर ट्रांजैक्शन पर पूछताछ हो रही है।

    कंपनियों ने साफ निर्देश दिए हैं कि रिटेल पंपों से औद्योगिक उपयोग के लिए बल्क सप्लाई नहीं दी जाए। इसके साथ ही हर पंप से होने वाली बिक्री पर अब ऑनलाइन निगरानी रखी जा रही है, जिससे हर लेन-देन का रिकॉर्ड सीधे कंपनियों तक पहुंच रहा है।

    वहीं दूसरी ओर पेट्रोल पंप संचालक इस व्यवस्था से नाराज हैं। उनका कहना है कि नियमों का बोझ केवल उन्हीं पर डाला जा रहा है, जबकि कंपनियां एक तरफ सप्लाई पर्याप्त होने का दावा करती हैं और दूसरी तरफ लिमिटेशन लागू कर रही हैं। संचालकों का आरोप है कि कई बार बड़े वाहन एक ही बार में ज्यादा ईंधन भरवाते हैं, जिससे ग्राहकों से विवाद की स्थिति बन जाती है।

    पंप संचालकों ने यह भी बताया कि अब क्रेडिट सिस्टम पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पहले तेल कंपनियां सप्लाई के लिए क्रेडिट देती थीं, लेकिन अब पहले भुगतान और इंडेंट दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि शाम 5 बजे तक भुगतान नहीं होता, तो अगले दिन टैंकर नहीं भेजा जाता। इससे कई जगह सप्लाई प्रभावित हो रही है।

    कई पंप संचालकों का यह भी कहना है कि समय पर टैंकर न मिलने की वजह से कुछ पंप अस्थायी रूप से ड्राय हो रहे हैं। हालांकि कंपनियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सप्लाई व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है और किसी भी प्रकार की कमी नहीं है।

    फिलहाल स्थिति यह है कि एक ओर कंपनियां निगरानी और नियंत्रण को जरूरी बता रही हैं, वहीं दूसरी ओर पंप संचालक इसे अतिरिक्त दबाव मान रहे हैं। बढ़ती मांग और सख्त नियमों के बीच सिस्टम की यह खींचतान अब प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है।

  • नाम की गड़बड़ी ने बदला खेल, Parle Industries के शेयर 3 दिन से अपर सर्किट पर, ‘मेलोडी’ टॉफी बनी मार्केट सेंसेशन

    नाम की गड़बड़ी ने बदला खेल, Parle Industries के शेयर 3 दिन से अपर सर्किट पर, ‘मेलोडी’ टॉफी बनी मार्केट सेंसेशन


    नई दिल्ली।
    शेयर बाजार में कई बार कंपनियों की असली परफॉर्मेंस से ज्यादा असर उनके नाम, चर्चा और सोशल मीडिया ट्रेंड का देखने को मिलता है। ऐसा ही एक दिलचस्प मामला इन दिनों Parle Industries के शेयरों में देखने को मिल रहा है, जहां लगातार तीसरे कारोबारी दिन अपर सर्किट लग गया है। इस तेजी के पीछे कंपनी का बिजनेस नहीं, बल्कि एक वायरल ‘मेलोडी मोमेंट’ और नाम की गफलत को बड़ी वजह माना जा रहा है।

    दरअसल हाल ही में एक कूटनीतिक मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा इटली की प्रधानमंत्री को ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की गई थी। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यह टॉफी चर्चा का विषय बन गई। इटली की प्रधानमंत्री ने भी इस टॉफी की सराहना की, जिससे इसकी लोकप्रियता और बढ़ गई। इस पूरे घटनाक्रम ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर ‘मेलोडी’ नाम को अचानक सुर्खियों में ला दिया।

    इसी वायरल चर्चा के बीच शेयर बाजार में एक दिलचस्प भ्रम की स्थिति बन गई। कई निवेशकों ने टॉफी बनाने वाली कंपनी को समझने में गलती करते हुए Parle Industries के शेयर खरीदने शुरू कर दिए, जबकि वास्तविक टॉफी बनाने वाली कंपनी एक अलग अनलिस्टेड FMCG इकाई है। नाम में समानता होने की वजह से यह भ्रम और बढ़ गया और बाजार में खरीदारी का दबाव अचानक तेज हो गया।

    Parle Industries का असली बिजनेस टॉफी या बिस्किट से जुड़ा नहीं है। यह कंपनी मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। इसके अलावा कंपनी कागज कचरे के रीसाइक्लिंग से जुड़े कारोबार में भी सक्रिय है। लेकिन सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा और ‘पारले’ नाम की पहचान ने इसे अनजाने में एक अलग वजह से सुर्खियों में ला दिया।

     इस अप्रत्याशित खरीदारी के चलते कंपनी के शेयर लगातार तीसरे कारोबारी दिन 5 प्रतिशत के अपर सर्किट पर पहुंच गए। पिछले तीन दिनों में शेयर में लगभग 16 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की तेजी अक्सर तब देखने को मिलती है जब किसी स्टॉक को लेकर अचानक चर्चा बढ़ जाती है और निवेशक बिना पूरी जानकारी के खरीदारी करने लगते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि आज के समय में सोशल मीडिया और वायरल ट्रेंड्स का असर शेयर बाजार पर कितना तेजी से पड़ सकता है। एक साधारण उपहार से शुरू हुई चर्चा ने न केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ध्यान खींचा, बल्कि शेयर बाजार में भी अस्थायी हलचल पैदा कर दी।

     फिलहाल निवेशकों की दिलचस्पी के चलते Parle Industries के शेयरों में तेजी जारी है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे ट्रेंड आधारित मूवमेंट लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होते। असली दिशा कंपनी के मूल व्यवसाय और वित्तीय प्रदर्शन पर ही निर्भर करती है, जबकि इस मामले में तेजी का कारण पूरी तरह भावनात्मक और भ्रम पर आधारित दिखाई देता है।

  • भोपाल से जबलपुर तक गरमाया केस: समर्थ सिंह की जमानत पर टिकी निगाहें

    भोपाल से जबलपुर तक गरमाया केस: समर्थ सिंह की जमानत पर टिकी निगाहें


    मध्य प्रदेश । भोपाल और जबलपुर से जुड़ा मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत का मामला अब एक बड़े कानूनी और प्रशासनिक मोड़ पर पहुंच गया है। मध्य प्रदेश सरकार ने इस संवेदनशील मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने पर अपनी सहमति दे दी है। सरकार का यह कदम मामले में निष्पक्ष और गहराई से जांच सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    इस पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहले ही पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया था कि राज्य सरकार हर संभव सहायता करेगी और जरूरत पड़ने पर मामले को केंद्रीय एजेंसी को सौंपा जाएगा। इसी आश्वासन के बाद अब औपचारिक रूप से CBI जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    मामले की मुख्य पात्र ट्विशा शर्मा की मौत ने पूरे प्रदेश में सवाल खड़े कर दिए थे। उनके परिजनों ने शुरू से ही जांच की निष्पक्षता पर संदेह जताया और लगातार CBI जांच की मांग कर रहे थे। अब सरकार की मंजूरी के बाद यह मांग काफी हद तक पूरी होती दिख रही है।

    उधर, इस केस में एक और बड़ा घटनाक्रम जबलपुर हाईकोर्ट में देखने को मिला, जहां ट्विशा के पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हो रही थी। हालांकि महाधिवक्ता द्वारा केस डायरी पेश करने के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने के कारण सुनवाई को 2:30 बजे के बाद तक के लिए स्थगित कर दिया गया। मामले की सुनवाई वैकेशन बेंच में चल रही है, जिससे इसकी संवेदनशीलता और बढ़ गई है।

    ट्विशा के पिता ने एक बार फिर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जांच को प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही हैं। उनका दावा है कि केस से जुड़े कुछ लोग प्रभावशाली पदों पर रहे हैं और वे जांच को दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और कई स्तरों पर निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई है।

    दूसरी ओर समर्थ सिंह के वकील ने अदालत में कहा कि दंपती के बीच संबंध सामान्य थे और घरेलू जीवन में किसी बड़े विवाद के संकेत नहीं मिलते। उन्होंने यह भी दलील दी कि शादी के बाद शुरुआती समय में छोटे-छोटे मतभेद सामान्य हैं और इसे आपराधिक एंगल से नहीं देखा जाना चाहिए।

    इस पूरे मामले में अब नजर इस बात पर टिकी है कि CBI जांच औपचारिक रूप से कब शुरू होती है और हाईकोर्ट में जमानत पर क्या निर्णय आता है। राजनीतिक, कानूनी और सामाजिक स्तर पर यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है और आने वाले दिनों में इसमें और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।