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  • सेंसर बोर्ड की आपत्तियों और ऑनलाइन लीक के नुकसान से उबरी 'जन नायकन', 'ए' सर्टिफिकेट के साथ सिनेमाघरों में दस्तक देने को तैयार थलपति विजय की अंतिम फिल्म

    सेंसर बोर्ड की आपत्तियों और ऑनलाइन लीक के नुकसान से उबरी 'जन नायकन', 'ए' सर्टिफिकेट के साथ सिनेमाघरों में दस्तक देने को तैयार थलपति विजय की अंतिम फिल्म


    नई दिल्ली ।
    तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और राजनेता थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित और आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने महीनों से चले आ रहे लंबे इंतजार और विवादों के बाद आखिरकार इस फिल्म को हरी झंडी दे दी है। सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलने के साथ ही फिल्म की संभावित रिलीज डेट भी सामने आ गई है, जिसके अनुसार यह फिल्म आगामी 24 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। यह फिल्म थलपति विजय के अभिनय करियर की अंतिम फिल्म है, जिसे देखने के लिए उनके प्रशंसक लंबे समय से बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

    सेंसर बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट से मिली जानकारी के मुताबिक, ‘जन नायकन’ को सीबीएफसी की तरफ से ‘ए’ (वयस्क) सर्टिफिकेट जारी किया गया है। इसके साथ ही फिल्म की समयावधि यानी रनटाइम को लेकर भी स्थिति साफ हो गई है, यह फिल्म 3 घंटे और 3 मिनट लंबी होने वाली है। हालांकि, सेंसर वेबसाइट पर जारी किए गए इस सर्टिफिकेट में फिल्म की मुख्य कहानी की रूपरेखा या बोर्ड द्वारा लगाए गए कट्स और बदलावों के बारे में फिलहाल कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। इस सर्टिफिकेशन के पूरा होने के साथ ही फिल्म की रिलीज के रास्ते में आ रही सबसे बड़ी कानूनी अड़चन दूर हो गई है।

    इस फिल्म को थलपति विजय की आखिरी फिल्म इसलिए माना जा रहा है क्योंकि वे अब अभिनय की दुनिया को पूरी तरह अलविदा कहकर एक पूर्णकालिक राजनेता के रूप में सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बना चुके हैं। अभिनेता ने हाल ही में 10 मई 2026 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, जिसके बाद से उनके राजनीतिक दायित्व काफी बढ़ गए हैं। यही वजह है कि फैंस के बीच इस फिल्म को लेकर एक अलग ही स्तर का उत्साह और भावुकता देखने को मिल रही है। प्रशंसक इस बात से बेहद खुश हैं कि कई महीनों से अधर में लटकी उनकी पसंदीदा स्टार की अंतिम फिल्म अब बड़े पर्दे पर प्रदर्शित होने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    ‘जन नायकन’ में थलपति विजय के साथ-साथ मनोरंजन जगत के कई अन्य बड़े और लोकप्रिय चेहरे भी मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म के कलाकारों की सूची में बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल, अभिनेत्री पूजा हेगड़े और ममिता बैजू जैसे नाम शामिल हैं, जो फिल्म के आकर्षण को और ज्यादा बढ़ाते हैं। हालांकि मेकर्स की ओर से अभी रिलीज डेट का कोई भव्य आधिकारिक ऐलान होना बाकी है, लेकिन व्यापार विश्लेषकों और अंदरूनी सूत्रों की रिपोर्टों के अनुसार, फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर्स ने 24 जुलाई को ही सिनेमाघरों में उतारने की पूरी तैयारी कर ली है।

    इस फिल्म का रिलीज तक पहुंचने का सफर बेहद उतार-चढ़ाव और भारी आर्थिक नुकसान से भरा रहा है। मूल रूप से यह फिल्म इसी साल की शुरुआत में 9 जनवरी 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन सैन्य बलों के चित्रण और कुछ दृश्यों से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने की शिकायतों के बाद सेंसर बोर्ड ने इसे रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया था। इस विवाद के बीच 9 अप्रैल को यह फिल्म ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लीक हो गई, जिससे मेकर्स को करीब 300 से 400 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा और अमेजन प्राइम वीडियो ने भी अपनी 120 करोड़ रुपये की बड़ी ओटीटी डील रद्द कर दी थी। इन सभी चुनौतियों को पार कर अब यह फिल्म सिनेमाघरों में आने को तैयार है।

  • कड़ाही में बचे हुए इस्तेमाल शुदा तेल को फेंकने की न करें भूल, सेहत के लिए नुकसानदायक कुकिंग ऑयल घर के इन 4 कामों के लिए साबित होगा 'वरदान

    कड़ाही में बचे हुए इस्तेमाल शुदा तेल को फेंकने की न करें भूल, सेहत के लिए नुकसानदायक कुकिंग ऑयल घर के इन 4 कामों के लिए साबित होगा 'वरदान


    नई दिल्ली ।
    मानसून के इस खुशनुमा मौसम में अक्सर हर घर के भीतर पूड़ी, पकौड़े, समोसे और पापड़ जैसी तली-भुनी चीजें बड़े चाव से बनाई जाती हैं। इन सभी पकवानों को तलने के बाद कड़ाही में अक्सर थोड़ा-बहुत तेल बच जाता है, जो एक बेहद सामान्य बात है। ज्यादातर लोग इस बचे हुए तेल को दोबारा खाना पकाने में इस्तेमाल करने से कतराते हैं, क्योंकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार तेल को बार-बार गर्म करके खाना सेहत के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है। ऐसे में अधिकतर लोग इस इस्तेमाल किए गए तेल को बेकार समझकर सिंक या नाली में बहा देते हैं, जो कि बिल्कुल भी समझदारी भरा फैसला नहीं है।

    रसोई के जानकारों और घरेलू विशेषज्ञों के मुताबिक, कड़ाही में बचा हुआ यह तेल खाने के योग्य भले ही न बचा हो, लेकिन यह घर के कई छोटे-मोटे और मुश्किल कामों को मिनटों में आसान बना सकता है। अगर अब तक आप भी इस बचे हुए कुकिंग ऑयल को कचरा समझकर फेंकते आ रहे थे, तो इसके कुछ बेहद असरदार और जबरदस्त फायदों के बारे में जानना बेहद जरूरी है। इस तेल का सही तरीकों से उपयोग करके आप न केवल पैसों की बचत कर सकते हैं, बल्कि अपने घर की कई कीमती चीजों को खराब होने से भी बचा सकते हैं।

    इस तेल का सबसे पहला और बेहतरीन इस्तेमाल बर्तनों या अन्य सतहों से जिद्दी स्टिकर और गोंद हटाने के लिए किया जा सकता है। अक्सर नई कांच की बोतलों, प्लास्टिक के डिब्बों या नए बर्तनों पर लगे स्टिकर को निकालने के बाद वहां एक चिपचिपी गोंद की परत रह जाती है, जो आसानी से साफ नहीं होती। ऐसे में उस चिपचिपी जगह पर थोड़ा सा बचा हुआ तेल लगाकर करीब 10 मिनट के लिए छोड़ देना चाहिए। इसके बाद किसी कपड़े या स्पंज की मदद से हल्के हाथों से रगड़कर साफ करने पर वह जिद्दी गोंद बेहद आसानी से बिना किसी निशान के बाहर निकल जाता है।

    इसके अलावा, घर में रखे पुराने लकड़ी के फर्नीचर जैसे टेबल, कुर्सी, अलमारी या दरवाजों की खोई हुई चमक को वापस लाने में भी यह तेल बेहद मददगार साबित होता है। जब भी लकड़ी के फर्नीचर की चमक फीकी पड़ने लगे, तो एक साफ और मुलायम कपड़े पर इस इस्तेमाल किए गए तेल की कुछ बूंदें लें और उसे लकड़ी की सतह पर हल्के हाथों से रगड़ें। इसके बाद एक दूसरे सूखे और साफ कपड़े से अतिरिक्त तेल को अच्छी तरह पोंछ लें। ऐसा करने से लकड़ी का पुराना फर्नीचर एक बार फिर से बिल्कुल नए जैसा साफ और चमकदार दिखाई देने लगता है।

    घर की साफ-सफाई और मरम्मत के अलावा, यह बचा हुआ तेल एक बेहतरीन लुब्रिकेंट के रूप में भी काम करता है। घरों में अक्सर पुराने स्क्रू, नट या बोल्ट पर जंग लग जाता है, जिसके कारण उन्हें टूल्स की मदद से भी खोलना बेहद मुश्किल या नामुमकिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में जंग लगे हिस्सों पर थोड़ा सा बचा हुआ तेल डालकर कुछ समय के लिए छोड़ देना चाहिए। तेल के लुब्रिकेशन के प्रभाव से जंग ढीला पड़ जाता है और स्क्रू बिना किसी मशक्कत के आसानी से खुल जाते हैं।

    चमड़े से बनी कीमती चीजों जैसे बेल्ट, बैग, जैकेट या जूतों की देखभाल के लिए भी इस तेल का उपयोग किया जा सकता है। जब चमड़े के उत्पादों की चमक कम होने लगे या उनमें सूखापन आने लगे, तो बेहद कम मात्रा में तेल को सूती कपड़े पर लेकर चमड़े की सतह को पोंछना चाहिए, जिससे उनकी चमक लौट आती है। हालांकि, इन सभी प्रयोगों के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि यदि तेल पूरी तरह जल चुका हो या उसमें से तेज दुर्गंध आ रही हो, तो उसे तुरंत नष्ट कर देना चाहिए और भूलकर भी दोबारा भोजन बनाने में इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

  • आईपीएल के 'नेट हीरो' वैभव सूर्यवंशी इंटरनेशनल पिच पर हुए फेल, जोफ्रा आर्चर की सिर्फ 13 गेंदों ने खोली 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज की तकनीकी पोल

    आईपीएल के 'नेट हीरो' वैभव सूर्यवंशी इंटरनेशनल पिच पर हुए फेल, जोफ्रा आर्चर की सिर्फ 13 गेंदों ने खोली 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज की तकनीकी पोल

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का इंग्लैंड दौरा और उनका अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में आयरलैंड और इंग्लैंड के दौरे पर गई भारतीय टीम के साथ जुड़े वैभव को भविष्य का एक उभरता हुआ सितारा माना जा रहा था। हालांकि, आयरलैंड के खिलाफ मैच खेलने का मौका न मिलने के बाद जब उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ टी20 श्रृंखला में पदार्पण का अवसर मिला, तो वे इंग्लिश पिचों की रफ्तार और अतिरिक्त उछाल के सामने लगातार संघर्ष करते हुए नजर आए। इस श्रृंखला ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी तकनीकी कमियों को उजागर कर दिया है।

    दिलचस्प बात यह है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 के दौरान वैभव सूर्यवंशी और इंग्लैंड के स्टार तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर दोनों ही राजस्थान रॉयल्स फ्रेंचाइजी का हिस्सा थे। उस दौरान अभ्यास सत्रों के कई ऐसे वीडियो सामने आए थे, जिसमें वैभव नेट्स पर आर्चर की तेजतर्रार गेंदों के खिलाफ बेहद बेखौफ होकर बड़े शॉट्स खेलते हुए दिखाई दिए थे। यही नहीं, आईपीएल के मुख्य मुकाबलों में भी इस युवा खिलाड़ी ने जसप्रीत बुमराह, मिचेल स्टार्क और पैट कमिंस जैसे दुनिया के सबसे घातक और अनुभवी तेज गेंदबाजों के खिलाफ बिना किसी डर के बल्लेबाजी की थी और कई शानदार छक्के भी जड़े थे।

    मगर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की असली चुनौती आईपीएल के नेट्स और भारतीय पिचों से बिल्कुल अलग साबित हुई। इंग्लैंड की तेज और अतिरिक्त उछाल वाली पिचों पर जोफ्रा आर्चर ने वैभव के खिलाफ अपनी गति और सटीक बाउंस का बेहतरीन इस्तेमाल किया। श्रृंखला के पहले टी20 मैच में भले ही वैभव स्पिनर विल जैक्स की गेंद पर आउट हुए थे, लेकिन उस मुकाबले में भी आर्चर ने अपनी शॉर्ट पिच गेंदों से उन्हें फ्रंट फुट पर आने का कोई मौका नहीं दिया था। इसके बाद दूसरे और तीसरे टी20 मुकाबले में आर्चर ने इसी रणनीति को आगे बढ़ाया और दोनों ही बार वैभव को शॉर्ट गेंद के जाल में फंसाकर अपना शिकार बनाया।

    मैच के आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं कि जोफ्रा आर्चर ने इस युवा बल्लेबाज के खिलाफ एक सोची-समझी रणनीति के तहत गेंदबाजी की। आर्चर ने इस टी20 श्रृंखला में वैभव सूर्यवंशी के खिलाफ कुल मिलाकर सिर्फ 13 गेंदें फेंकीं। इन 13 गेंदों के भीतर ही उन्होंने वैभव को दो बार आउट कर पवेलियन की राह दिखाई। इस दौरान वैभव आर्चर के खिलाफ केवल 18 रन ही बनाने में कामयाब हो सके, जिसमें दो छक्के शामिल थे। आर्चर की इस घातक और अनुशासित गेंदबाजी ने वैभव को क्रीज पर खुलकर खेलने की आजादी बिल्कुल नहीं दी।

    इंग्लैंड दौरे पर खेले गए तीनों टी20 मुकाबलों में वैभव सूर्यवंशी को अच्छी शुरुआत तो मिली, लेकिन वे उसे किसी बड़ी और मैच जिताऊ पारी में तब्दील करने में पूरी तरह नाकाम रहे। उन्होंने इन मैचों में क्रमशः 14, 13 और 15 रनों का स्कोर बनाया। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव की प्रतिभा और क्षमता पर किसी को कोई शक नहीं है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लंबी रेस का घोड़ा बनने के लिए उन्हें शॉर्ट पिच गेंदों के खिलाफ अपनी तकनीक, फुटवर्क और शॉट चयन में भारी सुधार करना होगा, क्योंकि विदेशी दौरों पर यही तकनीक बल्लेबाजों की असली परीक्षा लेती है।

  • गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला का 9 साल पुराना रिश्ता टूटने की कगार पर: रियलिटी शो में हुआ बायसेक्सुअलिटी और तलाक की वजहों का बड़ा खुलासा

    गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला का 9 साल पुराना रिश्ता टूटने की कगार पर: रियलिटी शो में हुआ बायसेक्सुअलिटी और तलाक की वजहों का बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली । टेलीविजन उद्योग के जाने-माने अभिनेता गौरव खन्ना और उनकी पत्नी आकांक्षा चमोला के बीच पिछले कुछ समय से चल रहे अलगाव की खबरें अब आधिकारिक रूप से सामने आ चुकी हैं। दोनों कलाकारों का लगभग 9 साल पुराना वैवाहिक रिश्ता अब कानूनी रूप से खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। हाल ही में एक मशहूर रियलिटी शो ‘लॉक अप 2’ के मंच पर दोनों का सामना हुआ, जहां उन्होंने अपनी निजी जिंदगी, आपसी मतभेदों और इंटरनेट पर चल रही तमाम अटकलों पर खुलकर बात की। इस मुलाकात के दौरान दोनों ही कलाकार काफी भावुक नजर आए और उन्होंने समाज व सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाओं पर अपनी चिंता व्यक्त की।

    गौरव खन्ना ने रियलिटी शो के मंच पर पहुंचकर अपनी पत्नी आकांक्षा से मुलाकात की और बताया कि उनके अलगाव की खबर सार्वजनिक होने के बाद से वे मानसिक रूप से काफी परेशान हैं। अभिनेता ने कहा कि बाहर की दुनिया में इस खबर को लेकर बहुत तरह की बातें की जा रही हैं, जिसके कारण वे मीडिया और जनता का सामना करने से बच रहे हैं। उन्होंने इस बात पर गहरा दुख जताया कि कई लोग उनके इतने सालों के वास्तविक रिश्ते को महज पब्लिसिटी स्टंट या नकली मान रहे हैं। गौरव के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया है और उनके पास बाहर किसी से अपनी स्थिति साझा करने का कोई जरिया नहीं बचा था, इसलिए वे शो के मंच पर आए।

    दूसरी तरफ, आकांक्षा चमोला ने स्पष्ट किया कि वे दोनों पिछले एक साल से एक-दूसरे से अलग रह रहे थे। उन्होंने बताया कि इस रियलिटी शो का हिस्सा बनने से पहले ही उनके तलाक की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। आकांक्षा ने गौरव को समझाया कि वे सोशल मीडिया की टिप्पणियों या लोगों की राय को ज्यादा महत्व नहीं देती हैं, क्योंकि उनका मानना है कि उनके रिश्ते की सच्चाई को समझना हर किसी के बस की बात नहीं है। उन्होंने शो में रोने और अपने दिल की बात साझा करने के पीछे की वजह को अपनी वास्तविक परेशानी बताया, क्योंकि शो के भीतर हर कोई एक गेम खेल रहा है और वहां उनका कोई करीबी नहीं है।

    इस बातचीत के दौरान आकांक्षा चमोला की सेक्शुअलिटी को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। जब शो के दौरान गौरव से पूछा गया कि क्या वे आकांक्षा के बायसेक्सुअल होने की सच्चाई से वाकिफ थे, तो उन्होंने सकारात्मक जवाब दिया। आकांक्षा ने बताया कि गौरव एक बेहद खुले विचारों वाले इंसान हैं और उन्हें शादी से पहले से ही इस बात की पूरी जानकारी थी। गौरव ने इस सच को स्वीकार करते हुए हमेशा उनका साथ दिया। अभिनेता का मानना है कि यदि आप किसी व्यक्ति को पसंद करते हैं, तो आपको उसे उसकी पूरी सच्चाई और पहचान के साथ स्वीकार करना चाहिए, और उन्होंने हमेशा इसी सोच का पालन किया।

    दोनों कलाकारों की शादी साल 2016 में हुई थी, जो अब करीब 9 वर्षों के बाद खत्म होने जा रही है। इस अलगाव का एक मुख्य कारण परिवार के विस्तार को लेकर दोनों के विचारों में भिन्नता होना बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, गौरव खन्ना पिता बनना चाहते हैं और अपने परिवार को आगे बढ़ाना चाहते हैं, जबकि आकांक्षा चमोला फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं हैं। इस वैचारिक मतभेद और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के कारण दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का कठिन फैसला लिया है। आकांक्षा ने कहा कि वे इस शो को जीतकर अपने करियर की एक नई शुरुआत करना चाहती हैं ताकि वे अपनी एक स्वतंत्र पहचान बना सकें।

  • बंगाल में भ्रष्टाचार की परतें खोलेगी सरकार टीएमसी के 15 साल के कार्यकाल पर तैयार होगा व्हाइट पेपर

    बंगाल में भ्रष्टाचार की परतें खोलेगी सरकार टीएमसी के 15 साल के कार्यकाल पर तैयार होगा व्हाइट पेपर


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने तृणमूल कांग्रेस के पिछले 15 वर्षों के शासनकाल के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय कुप्रबंधन की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। सरकार इस पूरे कार्यकाल का लेखा जोखा जनता के सामने रखने के लिए एक श्वेत पत्र तैयार करेगी जिसमें विभिन्न विभागों में सरकारी धन के उपयोग और कथित अनियमितताओं का विस्तृत ब्यौरा शामिल रहेगा। इस दिशा में गठित मंत्रियों के उच्च स्तरीय समूह ने राज्य सचिवालय नबन्ना में अपनी पहली बैठक कर आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की।

    बैठक की अध्यक्षता राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने की। इसमें विभिन्न विभागों से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया समय सीमा और रिपोर्ट तैयार करने के प्रारूप पर विस्तार से विचार किया गया। सरकार का कहना है कि यह दस्तावेज केवल आरोपों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि विभागवार आधिकारिक रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया जाएगा ताकि पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार श्वेत पत्र में उन मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जहां सरकारी धन के दुरुपयोग हेरफेर या अनियमित खर्च की आशंका है। खास तौर पर केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए मिले फंड के उपयोग की गहन समीक्षा होगी। यह भी देखा जाएगा कि जिन योजनाओं के लिए धन स्वीकृत किया गया था क्या वह उसी उद्देश्य पर खर्च हुआ या फिर किसी अन्य कार्य में उसका इस्तेमाल किया गया। जिन परियोजनाओं में धन खर्च ही नहीं किया गया उनकी भी अलग से समीक्षा की जाएगी।

    सरकार ने सभी विभागों को अपने पुराने रिकॉर्ड वित्तीय दस्तावेज और संबंधित फाइलों की जांच कर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। विभागों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर मंत्रियों का समूह एक प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार करेगा जिसे मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपा जाएगा। इसके बाद आवश्यक परीक्षण और समीक्षा पूरी होने पर अंतिम श्वेत पत्र सार्वजनिक किया जाएगा।

    बैठक में वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता के अलावा मंत्री दिलीप घोष तापस रॉय अरूप दास और दीपक बर्मन भी मौजूद रहे। सभी मंत्रियों ने संबंधित विभागों से पारदर्शी और तथ्य आधारित जानकारी जुटाने पर जोर दिया ताकि रिपोर्ट विश्वसनीय और प्रमाणिक बन सके।

    यह कदम राज्य सरकार द्वारा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान की गई घोषणा के बाद उठाया गया है। सरकार पहले ही संकेत दे चुकी थी कि पिछले शासनकाल में हुए कथित वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के मामलों का पूरा ब्यौरा तैयार कर जनता के सामने रखा जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होगी और भविष्य में सरकारी धन के उपयोग में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

    दूसरी ओर इस पहल को लेकर राज्य की राजनीति भी गर्म होने लगी है। आने वाले समय में श्वेत पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि विभागों से जुटाए गए दस्तावेजों और आंकड़ों के आधार पर तैयार होने वाली रिपोर्ट में कौन कौन से तथ्य सामने आते हैं और उसका राज्य की राजनीति पर कितना व्यापक प्रभाव पड़ता है।

  • दिलजीत दोसांझ की सतलुज पर सियासी संग्राम तेज अकाली दल ने हर गांव में स्क्रीनिंग का किया ऐलान

    दिलजीत दोसांझ की सतलुज पर सियासी संग्राम तेज अकाली दल ने हर गांव में स्क्रीनिंग का किया ऐलान


    नई दिल्ली । पंजाबी अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद पंजाब में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। फिल्म को रिलीज के कुछ समय बाद ही प्लेटफॉर्म से हटाए जाने पर कई संगठनों ने सवाल उठाए हैं। इसी बीच शिरोमणि अकाली दल ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह इस फिल्म को पंजाब के हर गांव और हर क्षेत्र में लोगों तक पहुंचाएगा ताकि नई पीढ़ी राज्य के इतिहास के उस दौर से परिचित हो सके जिसे लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है।

    शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि फिल्म में जिन घटनाओं और परिस्थितियों को दिखाया गया है उन्हें समाज के सामने आना चाहिए। उनका कहना है कि पंजाब के कठिन दौर को समझना आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है और इसी उद्देश्य से पार्टी गांव गांव में फिल्म की स्क्रीनिंग करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास से जुड़े विषयों को लोगों तक पहुंचने से रोकना उचित नहीं माना जा सकता।

    यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष से प्रेरित बताई जा रही है। फिल्म में 1990 के दशक के दौरान पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों और लापता लोगों से जुड़े मामलों की पृष्ठभूमि को दिखाया गया है। खालड़ा ने उस समय कथित तौर पर ऐसे मामलों की जांच कर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखने का दावा किया था। यही विषय फिल्म के केंद्र में है और इसी कारण यह चर्चा का विषय बनी हुई है।

    फिल्म के ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने की मांग उठाई जबकि कुछ संगठनों ने सार्वजनिक प्रदर्शन की घोषणा की। इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं जिससे मामला और अधिक चर्चा में आ गया।

    इसी क्रम में सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने भी 14 जुलाई को विशेष अरदास आयोजित करने की घोषणा की है। यह कार्यक्रम हरीके पत्तन स्थित सतलुज नदी के किनारे आयोजित किया जाएगा जहां उन लोगों की आत्मा की शांति और उनके परिवारों के लिए न्याय की प्रार्थना की जाएगी जिनका उल्लेख उस दौर की घटनाओं के संदर्भ में किया जाता है। धार्मिक सभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

    दूसरी ओर फिल्म को हटाने के फैसले को लेकर भी अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों की समीक्षा जरूरी है जबकि अन्य इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। इसी बीच यह भी जानकारी सामने आई है कि संबंधित मामले की परिस्थितियों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित किए जाने की बात कही गई है ताकि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा सके।

    फिलहाल सतलुज फिल्म केवल मनोरंजन का विषय नहीं रह गई है बल्कि यह इतिहास राजनीति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन चुकी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर होने वाले फैसले और घटनाक्रम पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।

  • निवेशकों और ग्राहकों के लिए जरूरी खबर सोने चांदी के ताजा भाव ने बढ़ाई हलचल जानें आज का पूरा बाजार हाल

    निवेशकों और ग्राहकों के लिए जरूरी खबर सोने चांदी के ताजा भाव ने बढ़ाई हलचल जानें आज का पूरा बाजार हाल


    नई दिल्ली । सोना और चांदी भारतीय परिवारों की परंपरा के साथ साथ निवेश का भी सबसे भरोसेमंद माध्यम माने जाते हैं। शादी विवाह का मौसम हो या त्योहारों की खरीदारी बाजार में इन दोनों की मांग हमेशा बनी रहती है। ऐसे में हर दिन बदलने वाले सोने और चांदी के भाव आम लोगों से लेकर निवेशकों तक सभी के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार चढ़ाव डॉलर की मजबूती कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का सीधा असर घरेलू सर्राफा बाजार पर भी दिखाई देता है। यही वजह है कि खरीदारी से पहले ताजा रेट की जानकारी लेना बेहद जरूरी माना जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बीते कुछ समय से वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और भू राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग लगातार बनी हुई है। जब भी शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ती है या वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव आता है तब निवेशक बड़ी संख्या में सोने की ओर रुख करते हैं। इससे इसकी कीमतों में तेजी देखने को मिलती है। वहीं चांदी की कीमतों पर निवेश के साथ साथ औद्योगिक मांग का भी बड़ा असर पड़ता है क्योंकि इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स सोलर एनर्जी और कई उद्योगों में किया जाता है।

    यदि आप आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं तो केवल कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं होगा। हमेशा प्रमाणित हॉलमार्क वाले सोने की खरीदारी करें ताकि उसकी शुद्धता सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और जीएसटी की जानकारी पहले ही प्राप्त कर लें क्योंकि कई बार यही अतिरिक्त खर्च कुल कीमत को काफी बढ़ा देता है। अलग अलग शहरों और ज्वेलर्स के अनुसार मेकिंग चार्ज में अंतर हो सकता है।

    निवेश के नजरिए से भी सोना लंबे समय में बेहतर विकल्प माना जाता है। हालांकि बाजार में लगातार उतार चढ़ाव बना रहता है इसलिए एकमुश्त बड़ी खरीदारी करने के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति अधिक सुरक्षित मानी जाती है। डिजिटल गोल्ड सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्प भी निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। वहीं जिन लोगों को भौतिक धातु पसंद है उनके लिए सोने और चांदी के सिक्के तथा बार भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं।

    चांदी की बात करें तो इसकी मांग भी लगातार बढ़ रही है। आभूषणों के अलावा धार्मिक कार्यों औद्योगिक उपयोग और निवेश के कारण इसकी कीमतों में भी समय समय पर तेजी और गिरावट देखने को मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोलर सेक्टर और इलेक्ट्रिक उपकरणों की बढ़ती मांग चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

    बाजार विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खरीदारी या निवेश का निर्णय केवल भाव देखकर नहीं बल्कि अपनी जरूरत और बजट को ध्यान में रखकर लेना चाहिए। यदि उद्देश्य लंबे समय का निवेश है तो छोटी छोटी मात्रा में नियमित खरीदारी बेहतर रणनीति साबित हो सकती है। वहीं शादी या अन्य पारिवारिक जरूरतों के लिए खरीदारी करने वाले ग्राहकों को बाजार के रुझान पर नजर रखते हुए सही समय का इंतजार करना चाहिए।

    सोने और चांदी के दाम प्रतिदिन बदलते रहते हैं इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर के सर्राफा बाजार या अधिकृत ज्वेलर्स से ताजा कीमत की पुष्टि जरूर कर लें। सही जानकारी और सोच समझकर लिया गया फैसला न केवल बेहतर निवेश साबित हो सकता है बल्कि आपकी बचत को भी सुरक्षित रखने में मदद करेगा।

  • ओमकारा की शूटिंग का अनसुना किस्सा सैफ अली खान ने बताया क्यों ठुकराया विशाल भारद्वाज का बोल्ड सीन

    ओमकारा की शूटिंग का अनसुना किस्सा सैफ अली खान ने बताया क्यों ठुकराया विशाल भारद्वाज का बोल्ड सीन


    नई दिल्ली । विशाल भारद्वाज की फिल्म ओमकारा को हिंदी सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है। इस फिल्म में सैफ अली खान ने लंगड़ा त्यागी का किरदार निभाकर दर्शकों और समीक्षकों दोनों का दिल जीत लिया था। फिल्म को रिलीज हुए अब 20 साल पूरे हो चुके हैं और इसी मौके पर सैफ ने शूटिंग के दौरान का एक ऐसा किस्सा साझा किया है जिसने सभी का ध्यान खींच लिया।

    सैफ अली खान ने एक इंटरव्यू में बताया कि फिल्म के एक महत्वपूर्ण दृश्य को लेकर निर्देशक विशाल भारद्वाज की सोच बेहद अलग थी। उस सीन में एक लंबा संवाद था जिसे आईने के सामने फिल्माया जाना था। विशाल चाहते थे कि यह पूरा दृश्य बिना कपड़ों के शूट किया जाए ताकि किरदार की मानसिक स्थिति और असुरक्षा को अधिक प्रभावी ढंग से दिखाया जा सके।

    सैफ ने बताया कि निर्देशक का यह सुझाव उन्हें दिलचस्प तो लगा लेकिन सेट पर मौजूद बड़ी संख्या में लोगों की वजह से वह सहज महसूस नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में उन्होंने विशाल भारद्वाज के सामने एक मजेदार शर्त रख दी। सैफ ने कहा कि अगर निर्देशक भी उसी तरह बिना कपड़ों के उन्हें डायरेक्ट करेंगे तो वह यह सीन करने के लिए तैयार हैं। इस पर विशाल भारद्वाज ने मुस्कुराते हुए मना कर दिया और बात वहीं खत्म हो गई।

    हालांकि अब जब सैफ उस पल को याद करते हैं तो उन्हें लगता है कि शायद उन्हें वह दृश्य कर लेना चाहिए था। उनके मुताबिक उस सीन को पीछे की ओर से फिल्माया जा सकता था और इससे किरदार की गंभीरता और प्रभाव दोनों बढ़ जाते। उन्होंने कहा कि आज के समय में फिल्मों में नए तरह के प्रयोग हो रहे हैं और अगर आज ऐसा प्रस्ताव मिलता तो शायद वह इसे स्वीकार कर लेते।

    सैफ ने यह भी बताया कि शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले विशाल भारद्वाज ने उस पूरे दृश्य में बड़ा बदलाव कर दिया। पहले जहां लंबा संवाद रखा गया था वहीं बाद में निर्देशक ने तय किया कि इस दृश्य में कोई संवाद नहीं होगा। इसके बजाय सैफ को आईने के सामने खड़े होकर एक भारी धातु की वस्तु से शीशा तोड़ना था। इस दौरान उनके हाथ से खून बहता दिखाया जाना था ताकि किरदार के भीतर का गुस्सा और टूटन बिना शब्दों के दर्शकों तक पहुंच सके।

    सैफ के अनुसार विशाल भारद्वाज की यही खासियत है कि वह अंतिम समय तक अपने दृश्यों पर काम करते रहते हैं और यदि उन्हें कोई बेहतर विचार आता है तो वह पूरी पटकथा में बदलाव करने से भी नहीं हिचकते। यही कारण है कि ओमकारा आज भी अपने दमदार निर्देशन बेहतरीन अभिनय और प्रभावशाली दृश्यों के लिए याद की जाती है।

    ओमकारा ने न केवल सैफ अली खान के अभिनय करियर को नई पहचान दी बल्कि यह भी साबित किया कि चुनौतीपूर्ण किरदार निभाने से कलाकार की प्रतिभा और निखरकर सामने आती है। फिल्म के 20 साल बाद सामने आया यह किस्सा दर्शाता है कि पर्दे पर दिखने वाले हर यादगार दृश्य के पीछे कई रोचक कहानियां छिपी होती हैं।

  • टॉक्सिक के तबाही गाने का धमाका 24 घंटे में करोड़ों दर्शक बोल्ड रोमांस और रिकॉर्ड व्यूज ने बढ़ाई फिल्म की चर्चा

    नई दिल्ली । साउथ सुपरस्टार यश और अभिनेत्री कियारा आडवाणी की बहुप्रतीक्षित फिल्म टॉक्सिक रिलीज से पहले ही जबरदस्त चर्चा में है। फिल्म का नया गाना तबाही सामने आते ही सोशल मीडिया और यूट्यूब पर छा गया है। रिलीज के महज 24 घंटे के भीतर इस गाने ने 16 मिलियन से अधिक व्यूज हासिल कर लिए और यूट्यूब ट्रेंडिंग में पहला स्थान भी अपने नाम कर लिया। अलग अलग भाषाओं में रिलीज हुए इस गाने को भी दर्शकों का शानदार समर्थन मिल रहा है जिससे फिल्म को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है।

    गाने में यश और कियारा आडवाणी की रोमांटिक केमिस्ट्री ने दर्शकों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचा है। दोनों के बीच फिल्माए गए कई बोल्ड और इंटेंस रोमांटिक दृश्य सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बन गए हैं। कुछ दर्शकों ने इसे डार्क रोमांस का बेहतरीन उदाहरण बताया तो कुछ ने सेंसर बोर्ड को लेकर सवाल उठाते हुए मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने कमेंट करते हुए लिखा कि ऐसा कंटेंट लंबे समय बाद देखने को मिला है जबकि कुछ लोगों ने पुराने दौर की रोमांटिक फिल्मों और कलाकारों की याद भी ताजा कर दी।

    गाने की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कमेंट सेक्शन में हजारों प्रतिक्रियाएं लगातार आ रही हैं। किसी ने यश की स्क्रीन प्रेजेंस की तारीफ की तो किसी ने कियारा आडवाणी के ग्लैमरस अवतार को फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण बताया। कई दर्शकों ने दोनों कलाकारों की जोड़ी को बेहद प्रभावशाली बताया और फिल्म रिलीज होने का इंतजार जताया। वहीं कुछ लोगों ने यह भी अनुमान लगाया कि गाने में दिखाए गए दृश्य फिल्म की कहानी से गहराई से जुड़े हो सकते हैं और यह केवल रोमांस नहीं बल्कि भावनात्मक मोड़ का हिस्सा भी है।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे फनी मीम्स और कमेंट्स ने भी इस गाने की लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी है। कुछ यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में कियारा के पति सिद्धार्थ मल्होत्रा का जिक्र किया तो कई लोगों ने यश की तुलना बॉलीवुड के पुराने रोमांटिक सितारों से कर दी। इन प्रतिक्रियाओं ने गाने को केवल संगीत प्रेमियों तक सीमित नहीं रखा बल्कि आम सोशल मीडिया यूजर्स के बीच भी चर्चा का विषय बना दिया।

    फिल्म टॉक्सिक का टीजर पहले ही यह संकेत दे चुका था कि इसकी कहानी पारंपरिक मसाला फिल्मों से अलग होगी। अब तबाही गाने ने यह साफ कर दिया है कि फिल्म में रोमांस के साथ इमोशन और डार्क टोन का भी खास मिश्रण देखने को मिलेगा। यही वजह है कि दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है।

    फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है। इसमें यश और कियारा आडवाणी के अलावा नयनतारा और तारा सुतारिया भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगी। फिल्म की रिलीज डेट पहले कई बार बदली जा चुकी है लेकिन अब इसके अगस्त में सिनेमाघरों में आने की उम्मीद जताई जा रही है। तब तक तबाही गाना दर्शकों के बीच अपनी लोकप्रियता का सिलसिला लगातार जारी रखे हुए है और यह साफ संकेत दे रहा है कि टॉक्सिक साल की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हो सकती है।

  • संसदीय समिति की चौंकाने वाली रिपोर्ट जेलों के भीतर मोबाइल और प्रतिबंधित सामान का खेल नहीं थम रहा

    संसदीय समिति की चौंकाने वाली रिपोर्ट जेलों के भीतर मोबाइल और प्रतिबंधित सामान का खेल नहीं थम रहा


    नई दिल्ली । देश की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि मोबाइल फोन समेत कई प्रतिबंधित सामान बड़ी आसानी से जेलों के भीतर पहुंच रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि आधुनिक सुरक्षा उपकरण जैमर और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के बावजूद यह सिलसिला थम नहीं रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में जेल स्टाफ के साथ अस्पताल से जुड़े कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है जिससे जेल सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।

    समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जेलों में लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनात रहने वाले कर्मचारियों और कैदियों के बीच नजदीकियां बढ़ जाती हैं। यही कारण है कि कई मामलों में सांठगांठ विकसित हो जाती है और प्रतिबंधित सामान अंदर पहुंचाने का रास्ता आसान बन जाता है। समिति ने सुझाव दिया है कि जेल कर्मचारियों का नियमित अंतराल पर तबादला किया जाए ताकि इस तरह की मिलीभगत की संभावना कम हो सके।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश की अधिकांश जेलों में आधुनिक सुरक्षा संसाधनों की कमी है। कई स्थानों पर लगे जैमर प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहे हैं जबकि सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। इसलिए गृह मंत्रालय से सिफारिश की गई है कि राज्यों को पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए ताकि डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर हैंड हेल्ड स्कैनर बैगेज स्कैनर बॉडी वॉर्न कैमरे आधुनिक सीसीटीवी सिस्टम और अन्य सुरक्षा उपकरण खरीदे जा सकें। साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कैदियों की पेशी को बढ़ावा देने की भी सलाह दी गई है जिससे जेल से बाहर ले जाने की जरूरत कम हो सके।

    हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने जेल सुरक्षा पर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल के भीतर से मोबाइल फोन और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए आपराधिक नेटवर्क संचालित करने के आरोपों ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी भी पहले कई बार यह संकेत दे चुकी है कि कुछ संगठित अपराधी जेल के भीतर से ही उगाही ड्रग तस्करी हवाला और टारगेट किलिंग जैसी गतिविधियों का संचालन करते रहे हैं।

    पूर्व वरिष्ठ जेल अधिकारियों का भी मानना है कि जेल मैनुअल में समय के अनुसार बदलाव की जरूरत है। उनका कहना है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं होगा क्योंकि कई मामलों में प्रभावशाली लोगों का संरक्षण भी ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी और भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी तब तक सुधार की प्रक्रिया अधूरी रहेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जेल केवल अपराधियों को बंद रखने का स्थान नहीं बल्कि सुधार गृह भी हैं। यदि जेलों के भीतर ही आपराधिक गतिविधियां संचालित होती रहेंगी तो कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए खतरा बढ़ेगा। ऐसे में संसदीय समिति की सिफारिशों को गंभीरता से लागू करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है ताकि जेलों की सुरक्षा मजबूत हो सके और अपराधियों के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।