Blog

  • न्यूजीलैंड के बल्लेबाज फिन एलन ने जड़ा टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास का सबसे तेज शतक, बनाए 5 बड़े रिकॉर्ड्स

    न्यूजीलैंड के बल्लेबाज फिन एलन ने जड़ा टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास का सबसे तेज शतक, बनाए 5 बड़े रिकॉर्ड्स


    नई दिल्ली। न्यूजीलैंड के स्टार सलामी बल्लेबाज फिन एलन ने कोलकाता के ईडन गार्डन्स में साउथ अफ्रीका के गेंदबाजों को बुरी तरह हरा दिया। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका ने न्यूजीलैंड के सामने 170 रनों का लक्ष्य रखा, जिसे कीवी टीम ने मात्र 12.5 ओवर में 9 विकेट रहते हासिल कर लिया। इस मैच में फिन एलन ने 33 गेंदों पर तूफानी शतक जड़कर टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास का सबसे तेज शतक बनाया और वेस्टइंडीज के पूर्व धाकड़ बल्लेबाज क्रिस गेल का 10 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया।

    सबसे तेज शतक और नॉकआउट की धाक
    फिन एलन ने 33 गेंदों में शतक बनाकर टी20 वर्ल्ड कप की सबसे तेज सेंचुरी का नया रिकॉर्ड कायम किया। इससे पहले क्रिस गेल ने 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ 47 गेंदों में शतक लगाया था। इसके अलावा फिन एलन टी20 वर्ल्ड कप नॉकआउट में शतक लगाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। इससे पहले श्रीलंका के तिलकरत्ने दिलशान का 2009 सेमीफाइनल में 96 रनों का रिकॉर्ड था।

    फुल मेंबर टीम के खिलाफ शतक और बाउंड्री का जलवा
    फिन एलन टी20 क्रिकेट में किसी फुल मेंबर टीम के खिलाफ सबसे कम गेंदों में शतक लगाने वाले बल्लेबाज भी बन गए। इससे पहले डेविड मिलर ने 35 गेंदों पर बांग्लादेश और रोहित शर्मा ने 35 गेंदों पर श्रीलंका के खिलाफ शतक बनाया था। इस पारी में फिन एलन ने 18 बाउंड्री (10 चौके और 8 छक्के) मारी, जो टी20 वर्ल्ड कप की किसी पारी में सबसे ज्यादा हैं। उनके आठ छक्के न्यूजीलैंड के लिए किसी पारी में सबसे ज्यादा हैं और यह टी20 वर्ल्ड कप के नॉकआउट मैच में किसी खिलाड़ी के लिए भी सर्वाधिक हैं।

    बाउंड्री रन का रिकॉर्ड
    फिन एलन ने 88 रन बाउंड्री से बनाकर टी20 वर्ल्ड कप की किसी पारी में सबसे ज्यादा बाउंड्री रन का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। इससे पहले क्रिस गेल ने 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ 88 रन बाउंड्री से बनाए थे।

  • सऊदी से रक्षा समझौते के बाद भी खामोश पाकिस्तान, ईरानी हमलों पर नहीं दिखी सैन्य प्रतिक्रिया

    सऊदी से रक्षा समझौते के बाद भी खामोश पाकिस्तान, ईरानी हमलों पर नहीं दिखी सैन्य प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुआ संघर्ष अब कई देशों को प्रभावित करता नजर आ रहा है। इसी बीच आशंका जताई जा रही है कि इसका असर पाकिस्तान तक भी पहुंच सकता है। इसकी वजह पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुआ सुरक्षा समझौता है, जिसके मुताबिक किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा। हालांकि हालिया हालात में पाकिस्तान इस समझौते के अनुरूप कदम उठाता नजर नहीं आ रहा है। ईरान पहले ही सऊदी अरब के कई इलाकों पर हमले कर चुका है।

    क्या है समझौते की शर्तें
    सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता (SMDA) हुआ था, जिसने दोनों देशों के सुरक्षा सहयोग को औपचारिक रूप दिया। समझौते के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया था कि किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा और दोनों मिलकर उसका जवाब देंगे।

    रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते में यह भी प्रावधान है कि यदि किसी तीसरे देश द्वारा पाकिस्तान पर हमला होता है, तो उसे सऊदी अरब पर हमला माना जाएगा और सऊदी अरब को भी जवाब देने का अधिकार होगा।

    ईरान के हमले, लेकिन पाकिस्तान की चुप्पी
    हाल के समय में ईरान ने सऊदी अरब के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। सऊदी अरब की रिफाइनरी को भी निशाना बनाया गया। इसके बावजूद पाकिस्तान की ओर से समझौते के तहत किसी तरह की सैन्य कार्रवाई या जवाबी कदम सामने नहीं आए हैं।

    अपने ही समझौते में उलझा पाकिस्तान?
    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन हमलों की निंदा करते हुए सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई है। हालांकि उन्होंने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने या ईरान के खिलाफ कार्रवाई की कोई घोषणा नहीं की। इससे यह संदेश जा रहा है कि पाकिस्तान फिलहाल इस समझौते को पूरी तरह लागू करने से बच रहा है।

    विदेश मंत्री ने क्या कहा
    पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने मंगलवार को कहा कि संघर्ष शुरू होने के समय वह सऊदी अरब और ईरान के नेताओं के संपर्क में थे। उन्होंने इस्लामाबाद में मीडिया को बताया कि उस समय वह इस्लामी सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेने के लिए सऊदी अरब में मौजूद थे और उन्होंने सऊदी अरब तथा ईरान के विदेश मंत्रियों से बातचीत की।

    डार के मुताबिक उन्होंने अपने ईरानी समकक्ष को बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ पारस्परिक रक्षा समझौता है। इस पर ईरानी पक्ष ने उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा कि सऊदी अरब की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न हो।

    उन्होंने दावा किया कि इस बातचीत के बाद सऊदी अरब पर युद्ध का प्रभाव बेहद सीमित रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस संघर्ष को खत्म करने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

    विदेश मंत्री ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उन्होंने तुर्की, बांग्लादेश, फिलिस्तीन, ईरान, उज्बेकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, ओमान, इराक, बहरीन और अजरबैजान के विदेश मंत्रियों के अलावा यूरोपीय संघ के उपाध्यक्ष और संयुक्त अरब अमीरात के उपप्रधानमंत्री से भी फोन पर बातचीत की है।

  • 13 मार्च को शनि होंगे अस्त, साढ़ेसाती के कठोर प्रभाव से मिलेगी राहत, इन राशियों को होगा फायदा

    13 मार्च को शनि होंगे अस्त, साढ़ेसाती के कठोर प्रभाव से मिलेगी राहत, इन राशियों को होगा फायदा



    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्मों का फल देने वाला ग्रह माना जाता है। यह ग्रह सबसे धीमी गति से चलता है और एक राशि में लगभग ढाई साल तक ठहरता है, जिससे इसका प्रभाव लंबे समय तक रहता है। इस समय शनि मीन राशि में हैं और 2 जून 2027 तक यहीं रहेंगे। इस दौरान शनि मार्गी, वक्री और अस्त-उदय की अवस्थाओं में रहेंगे।

    शनि अस्त का समय
    द्रिक पंचांग के अनुसार, 13 मार्च 2026, शुक्रवार को शाम 7:13 बजे शनि मीन राशि में अस्त हो जाएंगे। वे लगभग 40 दिनों तक अस्त रहेंगे और 22 अप्रैल 2026, बुधवार को सुबह 4:49 बजे दोबारा उदित होंगे। ज्योतिषियों के अनुसार, शनि के अस्त होने से उनके कठोर प्रभाव कुछ हद तक कम हो जाते हैं और कुछ राशियों को राहत और लाभ मिल सकते हैं।

    मेष राशि
    मेष राशि वालों के लिए शनि का अस्त होना राहत देने वाला साबित हो सकता है। शनि आपके बारहवें भाव में अस्त होंगे, जहां पहले से साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। इस दौरान खर्चों पर नियंत्रण आ सकता है, आर्थिक स्थिति सुधर सकती है और स्वास्थ्य में राहत मिल सकती है। विदेश से जुड़े कामों में सफलता और लंबे समय से अटके कामों में प्रगति देखने को मिल सकती है। कार्यस्थल पर विवादों से दूर रहना आवश्यक है।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि का अस्त कई मामलों में फायदेमंद रहेगा। शनि आपके पांचवें भाव में अस्त होंगे, जिससे आत्मविश्वास बढ़ेगा और रुके हुए काम फिर से शुरू हो सकते हैं। नौकरी और व्यापार में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं, प्रमोशन या नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। व्यापारियों को नए ऑर्डर या डील मिल सकती हैं। हालांकि, पढ़ाई और संतान से जुड़ी चिंताओं पर ध्यान देना आवश्यक है, और खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।

    कुंभ राशि
    कुंभ राशि वालों के लिए शनि का अस्त मिलाजुला असर देगा, लेकिन कुल मिलाकर लाभ के संकेत हैं। शनि आपके दूसरे भाव में अस्त होंगे और साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। इस दौरान आमदनी के नए रास्ते खुल सकते हैं और मेहनत का फल मिल सकता है। नौकरी में सराहना मिलेगी और संपत्ति से लाभ हो सकता है। हालांकि बोलचाल में सख्ती और खर्चों पर नियंत्रण बनाए रखना आवश्यक है, ताकि रिश्तों में तनाव न बढ़े।

  • मिडिल ईस्ट वॉर और यश की 'टॉक्सिक' का क्या है कनेक्शन? जानें क्यों 19 मार्च की जगह अब 4 जून को मचेगा गदर!

    मिडिल ईस्ट वॉर और यश की 'टॉक्सिक' का क्या है कनेक्शन? जानें क्यों 19 मार्च की जगह अब 4 जून को मचेगा गदर!


    नई दिल्ली । कन्नड़ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक’ की रिलीज डेट अचानक बदलने से फिल्म जगत और फैंस के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है। “रॉकिंग स्टार” यश ने एक आधिकारिक बयान जारी कर फिल्म को 19 मार्च के बजाय अब 4 जून को रिलीज करने का फैसला लिया है। इस फैसले के पीछे का सबसे प्रमुख और चौंकाने वाला कारण मिडिल ईस्ट क्राइसिस (US-Israel-Iran तनाव) बताया गया है। अक्सर लोग यह सोच सकते हैं कि सात समंदर पार चल रहे युद्ध या तनाव का एक भारतीय फिल्म की रिलीज से क्या लेना-देना हो सकता है, लेकिन इसके पीछे एक बहुत ही गहरा व्यापारिक और रणनीतिक कारण छिपा है।

    मिडिल ईस्ट: भारतीय फिल्मों का नया ‘पावर हाउस’
    आज के दौर में दुबई, सऊदी अरब और कतर जैसे देश भारतीय फिल्मों, खासकर साउथ और बॉलीवुड की एक्शन फिल्मों के लिए दुनिया के सबसे बड़े ओवरसीज मार्केट्स में से एक बन चुके हैं। बड़े बजट की फिल्मों, जैसे ‘KGF 2’, ‘जवान’ और ‘पठान’ की कुल कमाई का लगभग 15% से 25% हिस्सा अकेले इसी क्षेत्र से आता है। यश जानते हैं कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सिनेमाघर बंद होते हैं या दर्शक सुरक्षा कारणों से बाहर नहीं निकलते, तो फिल्म को सीधे तौर पर 100 से 200 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो सकता है।

    सिर्फ भारत का बॉक्स ऑफिस अब काफी नहीं
    आज की ‘पैन-इंडिया’ फिल्में 300 से 500 करोड़ के भारी बजट पर तैयार होती हैं। ऐसे में केवल भारतीय बॉक्स ऑफिस के भरोसे मुनाफा कमाना मुश्किल होता जा रहा है। यश ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि ‘टॉक्सिक’ को कन्नड़ और अंग्रेजी में शूट किया गया है, जिसका सीधा अर्थ है कि उनकी नजर केवल भारत पर नहीं, बल्कि वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर है। जब कोई निर्माता ‘ग्लोबल सिनेमा’ बनाने का दावा करता है, तो उसके लिए दुनिया की स्थिरता और सुरक्षा पहली प्राथमिकता बन जाती है।

    एक तीर से दो निशाने: क्लैश का खतरा टला
    रिलीज डेट आगे बढ़ाने का फायदा केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि भारतीय बॉक्स ऑफिस पर भी मिलेगा। 19 मार्च को रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2’ के साथ क्लैश होने से दोनों फिल्मों का बिजनेस बंटने का खतरा था। अब ‘टॉक्सिक’ के हटने से ‘धुरंधर 2’ को सोलो रिलीज का मौका मिलेगा, जिससे क्लैश की वजह से होने वाला घाटा कम होगा। साथ ही, यश अब जून में बिना किसी बड़े मुकाबले के हिंदी दर्शकों को अधिक प्रभावी ढंग से आकर्षित कर पाएंगे।

    4 जून ही क्यों?
    फिल्म जानकारों का मानना है कि जून तक मिडिल ईस्ट के हालात सुधरने की उम्मीद है, जिससे फिल्म को एक बड़ी ‘विंडो’ मिल सकेगी। इसके अलावा, 4 जून के आसपास कोई बड़ी हाइप वाली फिल्म रिलीज नहीं हो रही है, जिससे ‘टॉक्सिक’ को लंबी रनिंग और रिकॉर्ड तोड़ कमाई का अवसर मिलेगा।

    मिडिल ईस्ट में भारतीय फिल्मों का जलवा (पिछला रिकॉर्ड)
    खाड़ी देशों में भारतीय फिल्मों की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ‘पठान’ ने पहले पांच दिनों में वहाँ से 26.20 मिलियन डॉलर का बिजनेस किया था, जबकि ‘जवान’ ने UAE से लगभग 9.2 मिलियन कमाए थे। खुद यश की ‘KGF: चैप्टर 2’ ने UAE में 8.15 मिलियन डॉलर का रिकॉर्ड बनाया था।

    सार: रचनात्मकता के साथ ग्लोबल बिजनेस विजन

    फिल्म ‘टॉक्सिक’ को पोस्टपोन करना पूरी तरह से एक सधा हुआ बिजनेस डिसीजन है। यह साफ दिखाता है कि आज का भारतीय फिल्म निर्माता केवल अपनी कला तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक ग्लोबल बिजनेसमैन की तरह सोच रहा है। मिडिल ईस्ट में शांति केवल राजनीति के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के ‘1000 करोड़ी क्लब’ के सपने को पूरा करने के लिए भी बेहद जरूरी है।

  • चैत्र नवरात्रि का 3 शुभ योगों में होगा शुभारंभ, जानें तारीख और घटस्थापना का समय

    चैत्र नवरात्रि का 3 शुभ योगों में होगा शुभारंभ, जानें तारीख और घटस्थापना का समय


    नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह नवरात्रि मार्च या अप्रैल में आती है। इस साल चैत्र नवरात्रि मार्च में पड़ रही है, इसलिए इसे लोग “मार्च की नवरात्रि” कह रहे हैं। होली के समापन के बाद यह बड़ा धार्मिक पर्व आता है, जिसमें कलश स्थापना और मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा होती है। पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है।

    चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत
    हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च, गुरुवार को सुबह 6:52 बजे से शुरू हो रही है। यह प्रतिपदा तिथि अगले दिन 20 मार्च, शुक्रवार को सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। व्रत के लिए इस तिथि की उदयातिथि को शुभ माना गया है। 19 मार्च को कलश स्थापना के साथ पहला व्रत रखा जाएगा।

    3 शुभ योग बन रहे हैं
    चैत्र नवरात्रि 2026 पर तीन शुभ योग शुक्ल, ब्रह्म और सर्वार्थ सिद्धि बन रहे हैं। ये सभी योग विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं।

    कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं:
    सुबह का मुहूर्त: 6:52 बजे से 7:43 बजे तक (50 मिनट)
    दोपहर का मुहूर्त: 12:05 बजे से 12:53 बजे तक (48 मिनट)

    सुबह के मुहूर्त में कलश स्थापना करना उत्तम माना जाता है। यदि सुबह यह समय न मिले तो दोपहर के अभिजीत मुहूर्त का उपयोग कर सकते हैं।

    पहले दिन के अन्य शुभ मुहूर्त

    ब्रह्म मुहूर्त: 4:51 बजे – 5:39 बजे
    प्रातः संध्या मुहूर्त: 5:15 बजे – 6:26 बजे
    विजय मुहूर्त: 2:30 बजे दोपहर – 3:18 बजे
    गोधूलि मुहूर्त: 6:29 बजे शाम – 6:53 बजे शाम
    सायाह्न संध्या: 6:32 बजे – 7:43 बजे
    अमृत काल: 11:32 बजे रात – 1:03 बजे
    निशिता मुहूर्त: 12:05 बजे रात – 12:52 बजे

    इस प्रकार, इस साल चैत्र नवरात्रि 2026 का शुभारंभ अत्यंत शुभ समय में हो रहा है और कलश स्थापना के लिए सुबह या दोपहर दोनों समय उपयोगी हैं।

  • T20 वर्ल्ड कप 2026: फिन एलन ने रचा इतिहास, सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका को रौंदा; रन बनाने की रेस में सूर्या को पछाड़ा!

    T20 वर्ल्ड कप 2026: फिन एलन ने रचा इतिहास, सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका को रौंदा; रन बनाने की रेस में सूर्या को पछाड़ा!

    नई दिल्ली । फिन एलन का ऐतिहासिक शतक और रनों की रेस का रोमांचटी20 वर्ल्ड कप 2026 अपने अंतिम पड़ाव पर है और मैदान पर रनों की ऐसी बारिश हो रही है जिसने क्रिकेट जगत के समीकरण बदल कर रख दिए हैं। टूर्नामेंट अब अपने खिताबी मुकाबले की ओर बढ़ रहा है, लेकिन दर्शकों की निगाहें न केवल ट्रॉफी पर, बल्कि ‘गोल्डन बैट’ की उस रेस पर भी टिकी हैं जहाँ हर मैच के साथ बड़े उलटफेर देखने को मिल रहे हैं।
    इस रेस में ताज़ा और सबसे बड़ा धमाका न्यूज़ीलैंड के सलामी बल्लेबाज फिन एलन ने किया है। साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेले गए पहले सेमीफाइनल मुकाबले में एलन ने ऐसी पारी खेली, जिसे क्रिकेट इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।170 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूज़ीलैंड की टीम के लिए फिन एलन ने “वन मैन आर्मी” की तरह प्रदर्शन किया।

    उन्होंने विपक्षी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए मात्र 33 गेंदों पर नाबाद 100 रन कूट डाले। यह न केवल उनकी टीम को फाइनल में ले जाने वाली पारी थी, बल्कि टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास का सबसे तेज़ शतक भी बन गया है। इस तूफानी पारी के दम पर फिन एलन अब 289 रनों के साथ टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में तीसरे स्थान पर पहुँच गए हैं।

    एलन की इस धमाकेदार एंट्री ने भारतीय प्रशंसकों को थोड़ा निराश किया है, क्योंकि इसका सीधा असर भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव की रैंकिंग पर पड़ा है। सूर्यकुमार यादव, जो अब तक भारत की ओर से सबसे सफल बल्लेबाज रहे हैं, इस सूची में टॉप-5 से बाहर होकर अब सातवें पायदान पर खिसक गए हैं। सूर्या ने टूर्नामेंट के 7 मैचों में 38.50 की औसत से 231 रन बनाए थे, लेकिन न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाजों के फॉर्म ने उन्हें पीछे छोड़ दिया है।सिर्फ फिन एलन ही नहीं, बल्कि उनके साथी खिलाड़ी टिम साइफर्ट ने भी सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 58 रनों की जुझारू पारी खेलकर टॉप-5 में अपनी जगह पक्की कर ली है।

    साइफर्ट अब 274 रनों के साथ पांचवें स्थान पर काबिज हैं। फिलहाल इस लिस्ट में पाकिस्तान के साहिबजादा फरहान 383 रनों के साथ टॉप पर बने हुए हैं, जबकि जिम्बाब्वे के ब्रायन बेनेट 292 रनों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। हालांकि, इन दोनों की टीमें टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी हैं, जिससे फिन एलन के पास फाइनल मैच में नंबर-1 बनने का सुनहरा मौका है।टी20 वर्ल्ड कप 2026: सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 बल्लेबाजबल्लेबाजटीमकुल रनसाहिबजादा फरहानपाकिस्तान383ब्रायन बेनेटजिम्बाब्वे292फिन एलनन्यूज़ीलैंड289एडन मारक्रमसाउथ अफ्रीका286टिम साइफर्टन्यूज़ीलैंड274

  • नेपाल में बड़ा बदलाव…. आज हो रहा मतदान, ओली के गढ़ में चुनौती बने Gen Z नेता बालेन

    नेपाल में बड़ा बदलाव…. आज हो रहा मतदान, ओली के गढ़ में चुनौती बने Gen Z नेता बालेन


    काठमांडु।
    नेपाल (Nepal) में आज (गुरुवार) मतदान (Voting) हो रहा है और इस बार हिमालयी देश के राजनीतिक माहौल में एक बड़ा पीढ़ीगत बदलाव (Big Generational Change) देखने को मिल रहा है। यह चुनाव मुख्य रूप से नेपाल के पारंपरिक नेतृत्व और बदलाव की मांग कर रहे युवा मतदाताओं (Young Voters) के बीच का संघर्ष बन गया है।


    युवा आक्रोश और झापा-5 का महामुकाबला

    काठमांडू और नेपाल के अन्य शहरों में, ‘जेन जी’ यानी युवा मतदाताओं का वर्ग नेपाल के पुराने और पारंपरिक नेतृत्व से निराश व बेचैन हो चुका है। यह वही युवा वर्ग है जिसने केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था और 35 वर्षीय बालेन शाह जैसे युवा नेताओं को राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया था।

    तमाम उथल-पुथल के बावजूद, केपी शर्मा ओली नेपाल की राजनीति के सबसे कद्दावर और स्थायी चेहरों में से एक बने हुए हैं। पूर्वी नेपाल में भारत की सीमा से लगा उनका चुनाव क्षेत्र ‘झापा-5’ दशकों से उनके राजनीतिक करियर का मजबूत गढ़ रहा है। इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प है क्योंकि युवा नेता बालेन ने सीधे तौर पर झापा-5 से ओली को चुनौती देने का फैसला किया है, मानो वे कोई बड़ा संदेश देना चाहते हों।


    विद्रोही से सत्ता के शिखर तक का सफर

    1952 में जन्मे ओली का राजनीतिक सफर नेपाल के ‘पंचायत युग’ के दौरान शुरू हुआ, जब देश में राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध था। 1970 में एक किशोर कम्युनिस्ट कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने राजशाही की दल-विहीन व्यवस्था का कड़ा विरोध किया। अक्टूबर 1973 में ‘झापा विद्रोह’ और राजशाही विरोधी गतिविधियों के लिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने अपनी जिंदगी के 14 साल जेल में बिताए, जिनमें से चार साल उन्हें कालकोठरी में रखा गया था। 2018 में एक विश्लेषक ने बताया था कि पंचायत युग की जेलों से निकले नेताओं का मानना था कि सत्ता का प्रयोग निर्णायक रूप से होना चाहिए, क्योंकि उन्होंने देखा था कि इसे कितनी आसानी से कुचला जा सकता है।


    लोकतंत्र की बहाली और ओली का उदय

    1990 के जन आंदोलन के बाद जब नेपाल में बहुदलीय लोकतंत्र बहाल हुआ, तो ओली ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी UML के जरिए खुली राजनीति में प्रवेश किया। संसद में उन्होंने जल्द ही अपनी स्पष्ट बयानबाजी और तीखे व्यंग्य के लिए पहचान बना ली। वे राजनीतिक बहसों को शांतिपूर्ण समझौते के बजाय “सहनशक्ति और हाजिरजवाबी की प्रतियोगिता” के रूप में देखते थे।


    2015 का संकट और ‘राष्ट्रवादी’ छवि

    राष्ट्रीय स्तर पर उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक छलांग 2015 में आई। जब नेपाल ने अपना नया संविधान अपनाया, तो भारत के साथ उसके रिश्ते काफी खराब हो गए। दक्षिणी सीमा पर हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण नेपाल में ईंधन, दवाओं और जरूरी चीजों की भारी कमी हो गई, जिसे नेपाल में भारत की ‘अघोषित नाकेबंदी’ के रूप में देखा गया। ओली ने इस संकट को नेपाल की संप्रभुता और राष्ट्रीय गौरव का मुद्दा बना दिया। इसी राष्ट्रवादी लहर के दम पर वामपंथी गठबंधन ने 2017 के चुनावों में भारी जीत हासिल की और ओली एक दुर्लभ संसदीय बहुमत के साथ सत्ता में लौटे।


    संवैधानिक संकट और सत्ता से बाहर

    उनके द्वारा किया गया राजनीतिक स्थिरता का वादा ज्यादा दिन नहीं टिक सका। अपनी ही पार्टी में विरोध का सामना करते हुए, ओली ने दिसंबर 2020 में संसद भंग कर दी (जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बाद में बहाल किया)। मई 2021 में उन्होंने फिर से संसद भंग कर दी, जिससे एक नया संवैधानिक संकट पैदा हुआ और आखिरकार उन्हें सत्ता से बाहर होना पड़ा। आलोचकों का कहना था कि जिस नेता ने राज्य की सत्ता का विरोध करते हुए वर्षों जेल में बिताए, वही अब सत्ता में बने रहने के लिए संवैधानिक सीमाओं को लांघ रहा था।


    बालेन का राजनीतिक सफर

    बालेन्द्र शाह (जिन्हें नेपाल में लोकप्रिय रूप से ‘बालेन’ कहा जाता है) का राजनीतिक सफर नेपाल के आधुनिक इतिहास की सबसे दिलचस्प कहानियों में से एक है। एक अंडरग्राउंड रैपर और स्ट्रक्चरल इंजीनियर से लेकर नेपाल के प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार बनने तक का उनका सफर, पारंपरिक राजनीति को सीधी चुनौती देने वाला रहा है। बालेन का जन्म 27 अप्रैल 1990 को काठमांडू में हुआ था। राजनीति में आने से पहले वे एक पेशेवर इंजीनियर रहे हैं। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया और फिर भारत (कर्नाटक) से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री (MTech) हासिल की। वर्तमान में वे काठमांडू विश्वविद्यालय से अपनी पीएचडी (PhD) भी कर रहे हैं।


    रैपर के रूप में लोकप्रियता और सामाजिक चेतना

    म्यूजिक और ‘रैप बैटल’: 2013 के आसपास नेपाल के अंडरग्राउंड हिप-हॉप और ‘रैप बैटल’ (जैसे ‘Raw Barz’) के जरिए बालेन को खासी पहचान मिली। उनके गानों के बोल कोई सामान्य गीत नहीं थे; वे अक्सर भ्रष्टाचार, असमानता और राजनीतिक कुव्यवस्था पर तीखा प्रहार करते थे। इसी संगीत ने उन्हें पहली बार युवाओं के बीच एक विद्रोही आइकन के रूप में स्थापित किया। राजनीति में उनका असली उदय 2022 के स्थानीय चुनावों में हुआ, जब उन्होंने एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर पद का चुनाव लड़ा।

    बिना किसी राजनीतिक पार्टी के समर्थन के, उन्होंने नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल (CPN-UML) जैसी मजबूत पार्टियों के दिग्गज उम्मीदवारों को भारी अंतर से हराकर पूरे देश की राजनीति में भूचाल ला दिया। मेयर के रूप में बालेन ने कई कड़े और मुखर फैसले लिए। उन्होंने अवैध कब्जों को हटाने के लिए अभियान चलाया, दशकों पुरानी कचरा प्रबंधन की समस्या को सुलझाने की कोशिश की और नेपाल में पहली बार नगर निगम की बैठकों का सीधा प्रसारण शुरू किया। हालांकि, उनके कुछ आक्रामक फैसलों की आलोचना भी हुई, लेकिन युवाओं में उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई।

    ‘Gen Z’ विरोध प्रदर्शन और राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम
    जब नेपाल में भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ युवाओं (Gen Z) का भारी विरोध प्रदर्शन हुआ- जिसके कारण अंततः केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से बाहर होना पड़ा- तो बालेन ने मुखर होकर इस युवा क्रांति का समर्थन किया। प्रदर्शनों के दौरान वे एक अघोषित नेता के रूप में उभरे। हालांकि कई युवाओं ने उन्हें अंतरिम नेतृत्व संभालने को कहा, लेकिन बालेन ने स्पष्ट किया कि वे सत्ता हथियाने के बजाय लोकतांत्रिक तरीके (बैलेट बॉक्स) से व्यवस्था में बदलाव लाना चाहते हैं।

    2026 का राष्ट्रीय चुनाव: पुराने दिग्गजों को सीधी चुनौती
    राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति करने के इरादे से, बालेन ने जनवरी 2026 में काठमांडू के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पूर्व टीवी होस्ट रबि लामिछाने के नेतृत्व वाली युवाओं की लोकप्रिय ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ (RSP) के साथ गठबंधन किया और इस चुनाव में पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बन गए। किसी आसान या सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के बजाय, बालेन ने नेपाल के कद्दावर नेता और चार बार के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को उनके ही गढ़ ‘झापा-5’ में चुनौती देने का साहसिक फैसला किया।

    क्या विद्रोही का भविष्य अब भी बाकी है?
    ओली 2024 में गठबंधन सरकार के हिस्से के रूप में एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी पर लौटे। लेकिन पिछले साल सितंबर में हुए हिंसक ‘जेन जी’ विरोध प्रदर्शनों के दौरान उन्हें भारी जनआक्रोश का सामना करना पड़ा और अंततः उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। कई लोगों का मानना था कि उनका राजनीतिक करियर अब खत्म हो गया है। इसके बावजूद, ओली झापा-5 से एक बार फिर चुनावी मैदान में डटे हैं। जेल, राजनीतिक उथल-पुथल और सत्ता विरोधी लहरों को मात देने वाले इस नेता का सामना अब उन युवा मतदाताओं से है, जो यह तय करेंगे कि नेपाल की राजनीति में इस कद्दावर नेता का अब कोई भविष्य बचा है या नहीं।

  • T20 World Cup: दूसरा सेमीफाइनल आज भारत- इंग्लैंड के बीच मुम्बई में… जानें कैसा रहेगा पिच का मिजाज

    T20 World Cup: दूसरा सेमीफाइनल आज भारत- इंग्लैंड के बीच मुम्बई में… जानें कैसा रहेगा पिच का मिजाज


    मुम्बई।
    इंडिया वर्सेस इंग्लैंड (India vs England) टी20 वर्ल्ड कप 2026 ( T20 World Cup 2026) का दूसरा सेमीफाइनल (Semi Finals 2) आज यानी गुरुवार, 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाना है। India vs England सेमीफाइनल भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस के लिए दोनों कप्तान -सूर्यकुमार यादव और हैरी ब्रूक- आधा घंटा पहले यानी साढ़े 6 बजे मैदान पर उतरेंगे। टी20 वर्ल्ड कप में यह लगातार तीसरा मौका है जब भारत और इंग्लैंड की टीमें सेमीफाइनल में भिड़ रही है।

    इससे पहले 2024 और 2022 टी20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में भी भारत और इंग्लैंड की टीमों का आमना-सामना हुआ था। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले दो वर्ल्ड कप विजेता इस सेमीफाइनल को जीतने वाली टीम बनी थी। अब देखना होगा कि 2026 में बाजी कौन मारता है। आईए एक नजर इंडिया वर्सेस इंग्लैंड पिच रिपोर्ट (Pitch Report) पर डालते हैं-

    IND vs ENG पिच रिपोर्ट
    वानखेड़े स्टेडियम की पिच को आमतौर पर बैटिंग-फ्रेंडली माना जाता है। छोटी बाउंड्री और सही बाउंस से स्ट्रोक खेलना आसान हो जाता है, जिससे बैट्समैन आसानी से रन बना सकते हैं। हालांकि शुरुआती ओवरों में पेसर कुछ मूवमेंट कर सकते हैं, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, हालात बैट्समैन के पक्ष में हो जाते हैं।

    पिच पर हल्की घास है, लेकिन मोर्ने मोर्कल को उम्मीद है कि मैच हाई-स्कोरिंग होगा। इसी विरोधी टीम के खिलाफ, इसी जगह पर, अभिषेक शर्मा ने एक साल पहले शानदार सेंचुरी बनाई थी। भारत अपने ओपनर से भी ऐसे ही धमाके की उम्मीद करेगा। इंग्लैंड ने ठीक उसी पिच पर खेला है जो इस सेमीफ़ाइनल के लिए रिज़र्व है। पिछली बार वे वेस्ट इंडीज़ से हार गए थे, जिसमें वेस्ट इंडीज़ ने 196 रन का टारगेट डिफेंड किया था। इस पिच पर खेला गया दूसरा मैच शायद इटली के क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा मैच है, जिसमें उन्होंने नेपाल पर 10 विकेट से जीत हासिल की थी। इंग्लैंड के सैम करन ने कहा कि इस गेम में कंडीशन उनके लिए नई नहीं होंगी। वानखेड़े को बैटर-फ्रेंडली माना जाता है और ऐसा लगता नहीं है कि इंडिया अपनी टीम में कोई बदलाव करेगा।

    इस मैदान पर पहले बैटिंग करते हुए औसत स्कोर 187 का रहा है, यहां टीमें चेज करना पसंद करती है। ऐसे में IND vs ENG सेमीफाइनल में भी टॉस जीतने वाला कप्तान पहले फील्डिंग चुन सकता है।

    वानखेड़े स्टेडियम T20I रिकॉर्ड
    मैच- 16

    – पहले बैटिंग करते हुए जीते गए मैच- 8 (50.00%)
    – टारगेट का पीछा करते हुए जीते गए मैच- 8 (50.00%)
    – टॉस जीतकर जीते गए मैच- 10 (62.50%)
    – टॉस हारकर जीते गए मैच- 6 (37.50%)
    – हाईएस्ट स्कोर- 254/6 (वेस्टइंडीज़) 23/02/2026 v ज़िम्बाब्वे
    — लोएस्ट स्कोर- 97 (इंग्लैंड) 02/02/2025 v इंडिया
    – हाईएस्ट स्कोर इन चेज- 230/8 (इंग्लैंड) 18/03/2016 v साउथ अफ्रीका
    – एवरेज रन पर विकेट- 27.62
    – एवरेज रन पर ओवर- 9.13
    – एवरेज स्कोर पहले बैटिंग करते हुए- 187


    IND vs ENG T20I हेड टू हेड

    भारत और इंग्लैंड के बीच अभी तक कुल 29 टी20 मैच खेले गए हैं, जिसमें से 17 मैच जीतकर टीम इंडिया ने दबदबा बनाया हुआ है, वहीं इंग्लैंड को भारत के खिलाफ 12 जीत मिली है। पिछले 5 मुकाबलों में भारत ने 4 बार इंग्लिश टीम को धूल चटाई है।

    IND vs ENG स्क्वॉड
    इंडिया स्क्वॉड:
    अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेट कीपर), ईशान किशन, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), तिलक वर्मा, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज, रिंकू सिंह, वॉशिंगटन सुंदर
    इंग्लैंड स्क्वॉड: फिलिप सॉल्ट, जोस बटलर (विकेट कीपर), हैरी ब्रूक (कप्तान), जैकब बेथेल, टॉम बैंटन, सैम करन, विल जैक्स, रेहान अहमद, लियाम डॉसन, जोफ्रा आर्चर, आदिल राशिद, बेन डकेट, ल्यूक वुड, जोश टंग, जेमी ओवरटन

  • इंग्लैंड के खिलाफ आज प्लेइंग XI में बदलाव कर सकती है टीम इंडिया… अभिषेक और रिंकू पर नजरें

    इंग्लैंड के खिलाफ आज प्लेइंग XI में बदलाव कर सकती है टीम इंडिया… अभिषेक और रिंकू पर नजरें


    मुम्बई।
    इंडिया वर्सेस इंग्लैंड (India vs England) टी20 वर्ल्ड कप 2026 ( T20 World Cup 2026) का दूसरा सेमीफाइनल (Semi Finals 2) आज यानी गुरुवार, 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाना है। India vs England सेमीफाइनल भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस के लिए दोनों कप्तान -सूर्यकुमार यादव और हैरी ब्रूक- आधा घंटा पहले यानी साढ़े 6 बजे मैदान पर उतरेंगे। टी20 वर्ल्ड कप में यह लगातार तीसरा मौका है जब भारत और इंग्लैंड की टीमें सेमीफाइनल में भिड़ रही है।

    लाख टके का सवाल यह है कि क्या भारतीय टीम आज को इंग्लैंड के ख‍िलाफ अपनी प्लेइंग 11 में बदलाव करेगी. क्योंकि टीम इंड‍िया के लिए अभी च‍िंता का व‍िषय प्लेइंग 11 में टॉप ऑर्डर है. वो तो भला हो वेस्टइंडीज के ख‍िलाफ सुपर-8 मुकाबले में संजू सैमसन की 97 रनों की पारी आ गई. क्योंकि उस मुकाबले में अभ‍िषेक शर्मा (10 रन, 11 गेंद) पर आउट हो गए थे. इस तरह भारत को को पहला झटका 29 रन पर लगा था. इसके बाद ईशान किशन भी टीम के 42 रन के स्कोर पर 10 रन बनाकर चलते बने.

    ध्यान रहे संजू की टी0 वर्ल्ड कप में री-एंट्री ज‍िम्बाब्वे के ख‍िलाफ हुए सुपर-8 मुकाबले में हुई (उससे पहले वो नामीब‍िया के ख‍िलाफ एकमात्र मैच अभ‍िषेक के बीमार होने की वजह से द‍िल्ली में खेले ), उसके बाद ईशान किशन के बैट‍िंग ऑर्डर में ड‍िमोशन हुआ, लेकिन अभ‍िषेक शर्मा ओपन‍िंग पोजीशन में ही रहे.

    अब सवाल है क्या अब जब मौका इंग्लैंड के ख‍िलाफ सेमीफाइनल का है तो क्या भारतीय टीम बदलेगी? क्योंकि भारतीय टीम अपनी प्लेइंग 11 में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं करती है. क्योंकि इस समय कोई भी बदलाव अगर सही साब‍ित नहीं हुआ तो टीम के साथ पूरा मैनेजमेंट सवालों के घेरे में होगा.

    भारत और इंग्लैंड के बीच गुरुवार (5 मार्च) को मुंबई के वानखेड़े स्टेड‍ियम में खेले जाने वाले दूसरे सेमीफाइनल से पहले पूर्व भारतीय हेड कोच रवि शास्त्री ने प्लेइंग इलेवन को लेकर अहम राय दी है. शास्त्री का मानना है कि टीम प्रबंधन को मौजूदा फॉर्म को ध्यान में रखते हुए एक बदलाव पर विचार करना चाहिए.

    शास्त्री ने कहा कि अगर टीम मैनेजमेंट को लगता है कि अभिषेक शर्मा मानसिक रूप से सहज नहीं हैं और लगातार कम स्कोर का असर उनके आत्मविश्वास पर पड़ा है, तो इस पर गंभीरता से फैसला लेना चाहिए.

    उन्होंने कहा कि यह आकलन नेट्स में उनकी बल्लेबाजी, बॉडी लैंग्वेज और बातचीत के आधार पर किया जाना चाहिए.अभिषेक शर्मा ने टूर्नामेंट में अब तक 6 पारियों में सिर्फ 80 रन बनाए हैं. उनका औसत 13.13 और स्ट्राइक रेट 131.15 रहा है. ऐसे में नॉकआउट मुकाबले से पहले उनकी फॉर्म चिंता का विषय बनी हुई है.


    ईशान को ओपनिंग, रिंकू को फिनिशर की भूमिका?

    शास्त्री ने सुझाव दिया कि यदि बदलाव किया जाता है तो ईशान किशन को संजू सैमसन के साथ पारी की शुरुआत करनी चाहिए. इसके साथ ही रिंकू सिंह को प्लेइंग इलेवन में वापस लाकर निचले क्रम में शामिल किया जा सकता है. ईशान किशन ने इस टूर्नामेंट में 7 पारियों में 224 रन बनाए हैं. उनका औसत 32 और स्ट्राइक रेट 185.13 का है. खास बात यह है कि उनके दोनों अर्धशतक ओपनिंग करते हुए आए हैं. हालांकि, संजू सैमसन की वापसी कबाद ईशान को नंबर-3 पर बल्लेबाजी करनी पड़ी.


    जब वानखेड़े में अभ‍िषेक ने बनाए 54 गेंदों में 135 रन

    अभिषेक शर्मा का इंग्लैंड के खिलाफ पिछला रिकॉर्ड शानदार रहा है. पिछले साल वानखेड़े में खेले गए पांचवें टी20 में उन्होंने 54 गेंदों पर 135 रन की विस्फोटक पारी खेली थी. इस पारी की याद दिलाए जाने पर शास्त्री ने साफ किया कि उनका सुझाव सिर्फ मौजूदा फॉर्म और टीम की बैटिंग में विस्फोटक विकल्प को ध्यान में रखकर है.हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह पूरी तरह अभिषेक को बाहर करने के पक्ष में नहीं हैं. उनके मुताबिक, भारतीय बल्लेबाजी क्रम में पर्याप्त फायरपावर है और ऐसे में टीम चाहें तो अभिषेक पर भरोसा कायम रख सकती है.


    सेमीफाइनल से पहले बड़ा फैसला?

    अब नजर टीम मैनेजमेंट पर होगी कि वह अनुभव और पिछला रिकॉर्ड देखती है या मौजूदा फॉर्म के आधार पर साहसिक फैसला लेती है. मुंबई के वानखेड़े में होने वाला यह मुकाबला भारत के लिए फाइनल का टिकट तय करेगा, ऐसे में प्लेइंग इलेवन का चयन बेहद अहम साबित हो सकता है.

    भारत की संभावित प्लेइंग XI बनाम इंग्लैंड: ईशान किशन, संजू सैमसन, त‍िलक वर्मा , सूर्यकुमार यादव, हार्दिक पंड्या, रिंकू सिंह/ अभ‍िषेक शर्मा, श‍िवम दुबे, अक्षर पटेल, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह

  • टैरिफ विवाद पर ट्रंप का बड़ा झटका…. कोर्ट ने दिए रिफंड के आदेश, कहा- कंपनियों को लौटाएं पैसे

    टैरिफ विवाद पर ट्रंप का बड़ा झटका…. कोर्ट ने दिए रिफंड के आदेश, कहा- कंपनियों को लौटाएं पैसे


    न्यूयॉर्क।
    अमेरिका (America) में टैरिफ विवाद (Tariff Dispute) में बड़ा मोड़ आ गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (American Supreme Court) के फैसले के बाद अब न्यूयॉर्क की संघीय अदालत ने भी ट्रंप प्रशासन को झटका दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जिन कंपनियों ने ट्रंप सरकार की तरफ से लगाए गए आयात टैरिफ का भुगतान किया था, उन्हें अब पैसा वापस किया जाएगा। यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के जज रिचर्ड ईटन ने कहा कि सभी आयातक कंपनियां यूएस सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का लाभ पाने की हकदार हैं, जिसमें पिछले महीने ट्रंप के कई टैरिफ को असंवैधानिक बताया गया था।

    फैसला सुनाते हुए यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में न्यायाधीश रिचर्ड ईटन ने कहा कि सभी आयातक रिकॉर्ड के मालिक इस फैसले का लाभ पाने के हकदार हैं। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय के बाद आया, जिसमें अमेरिकी टैरिफ को अवैध बताते हुए कहा गया था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1977 की अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (आईईईपीए) के तहत लगाए गए टैरिफ संविधान के खिलाफ हैं।


    सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर एक नजर

    इतना ही नहीं अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी जोड़ा था कि राष्ट्रपति अकेले टैरिफ तय और बदल नहीं सकते, क्योंकि कर लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस का है। इस फैसले में पारस्परिक टैरिफ, जो लगभग सभी देशों पर लगाए गए थे, को भी अवैध घोषित किया गया।


    कंपनियों के रिफंड पर कोर्ट सख्त

    न्यायाधीश ईटन ने अपने फैसले में कहा कि वह अकेले आईईईपीए टैरिफ की वापसी के मामलों को सुनेंगे। इससे यह साफ हुआ कि कंपनियों को टैरिफ लौटाने की प्रक्रिया कैसे होगी, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इसका जिक्र नहीं किया। इसपर वकील रयान मेजरस ने कहा कि सरकार शायद इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी या वापसी की प्रक्रिया को रोकने के लिए समय मांगेगी।


    ट्रंप ने 130 बिलियन अमेरिकी डॉलर इकट्ठा किए थे

    बता दें कि अमेरिका सरकार ने अब तक इन टैरिफ से 130 बिलियन अमेरिकी डॉलर इकट्ठा किए थे। विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार को कुल 175 बिलियन डॉलर तक की वापसी करनी पड़ सकती है। ऐसे में यह फैसला विशेष रूप से एटमस निस्पंदन, नाशविल, टेनेसी की कंपनी के मामले पर आया है, जिसने टैरिफ की वापसी का दावा किया था। यह कंपनी फिल्टर्स और अन्य फिल्ट्रेशन प्रोडक्ट बनाती है।

    इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि जब कोई सामान अमेरिका में आता है, तो यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन उसका अंतिम हिसाब करती है, जिसे लिक्विडेशन कहते हैं। लिक्विडेशन के बाद आयातकों को 180 दिन का समय मिलता है, जिसके अंदर वे टैरिफ पर आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद यह हिसाब कानूनी रूप से अंतिम माना जाता है।


    न्यायाधीश ने कस्टम्स को दिए ये निर्देश

    न्यायाधीश ने आगे आदेश दिया कि कस्टम्स उन टैरिफ को इकट्ठा करना बंद करें, जो सुप्रीम कोर्ट ने अवैध घोषित किए। और यदि कोई सामान पहले ही लिक्विडेशन प्रक्रिया से गुजर चुका है, तो उसका हिसाब बिना टैरिफ के फिर से किया जाएगा। कोर्ट के इस फैसले के बाद न्यूयॉर्क लॉ स्कूल के प्रोफेसर बैरी एप्पलटन ने कहा कि यह आयातकों और उपभोक्ताओं के लिए बहुत अच्छा फैसला है। इससे कस्टम्स ब्रोकरों की भी बहुत व्यस्तता बढ़ेगी और कोर्ट के लिए प्रक्रिया आसान होगी।


    पिछले सोमवार को भी संघीय अदालत ने दिया था फैसला

    गौरतलब है कि पिछले सोमवार को एक अन्य संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन की वापसी रोकने की कोशिश को खारिज कर दिया। इसके बाद अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने इसे न्यूयॉर्क ट्रेड कोर्ट में भेजा, ताकि वहां वापसी की अगली प्रक्रिया शुरू हो सके। अब यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन को यह तय करना होगा कि बड़ी मात्रा में टैरिफ की वापसी कैसे की जाए। वकील एलेक्सिस अर्ली के मुताबिक, “कस्टम्स आमतौर पर गलती होने पर टैरिफ लौटाते हैं, लेकिन उनका सिस्टम बड़े पैमाने पर वापसी के लिए नहीं बना है। यहां सबसे बड़ी चुनौती प्रशासनिक प्रक्रिया की होगी।