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  • 256 घंटे की बारीक कारीगरी, दुर्लभ रूबी और 40 हीरों का अनोखा संगम, आमिर खान की ओर से गौरी स्प्रैट को मिली खास वेडिंग रिंग बनी चर्चा का केंद्र

    256 घंटे की बारीक कारीगरी, दुर्लभ रूबी और 40 हीरों का अनोखा संगम, आमिर खान की ओर से गौरी स्प्रैट को मिली खास वेडिंग रिंग बनी चर्चा का केंद्र


    नई दिल्ली ।
    अभिनेता आमिर खान और गौरी स्प्रैट की सादगीपूर्ण शादी के बाद अब उनकी वेडिंग रिंग चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है। परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी में संपन्न हुए निजी विवाह समारोह के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार, आमिर ने गौरी के लिए विशेष रूप से तैयार करवाई गई एक कस्टम वेडिंग रिंग भेंट की है। अपनी अनूठी डिजाइन, दुर्लभ रत्न और महीनों की कारीगरी के कारण यह अंगूठी सोशल मीडिया और फिल्म जगत में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    बताया जा रहा है कि इस वेडिंग रिंग के केंद्र में मेडागास्कर का दुर्लभ प्राकृतिक रूबी लगाया गया है। इस रूबी के चारों ओर 40 हीरे जड़े गए हैं, जो अंगूठी को आकर्षक और संतुलित स्वरूप प्रदान करते हैं। डिजाइन को साधारण रखने के बजाय इसे सोने के ताज जैसी संरचना पर तैयार किया गया है, जिससे पूरी अंगूठी को शाही और विशिष्ट रूप मिला है। बारीक नक्काशी और सूक्ष्म फिनिशिंग इसे सामान्य वेडिंग रिंग से अलग पहचान देती है।

    जानकारी के अनुसार, इस विशेष रूबी की तलाश में लगभग तीन महीने का समय लगा। बताया जाता है कि इतनी उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक रूबी विश्व स्तर पर बेहद सीमित संख्या में उपलब्ध होते हैं। इसी कारण उपयुक्त रत्न का चयन इस पूरी प्रक्रिया का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना गया। रत्न मिलने के बाद उसके अनुरूप अंगूठी का डिजाइन तैयार किया गया ताकि उसकी प्राकृतिक सुंदरता पूरी तरह उभरकर सामने आ सके।

    इस अंगूठी को तैयार करने में 256 घंटे से अधिक समय लगा। डिजाइन तैयार करने से लेकर अंतिम फिनिशिंग तक कुल 131 कुशल कारीगरों ने अलग-अलग चरणों में काम किया। प्रत्येक हिस्से को हाथ से तराशा गया और हीरों की जड़ाई तथा धातु की नक्काशी में विशेष सावधानी बरती गई। यही कारण है कि यह अंगूठी केवल आभूषण नहीं बल्कि उत्कृष्ट हस्तकला का भी उदाहरण मानी जा रही है।

    यह पहली बार नहीं है जब आमिर खान ने गौरी स्प्रैट के लिए विशेष आभूषण तैयार करवाया हो। इससे पहले भी गौरी एक ऐसी अंगूठी पहने दिखाई दी थीं, जिसमें ब्राजील का दुर्लभ एक्वामरीन रत्न लगा था और उसके चारों ओर भी 40 हीरे जड़े गए थे। माना जाता है कि वह आभूषण भी विशेष रूप से उनके लिए तैयार कराया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि व्यक्तिगत पसंद और विशिष्ट डिजाइन को प्राथमिकता देते हुए आभूषण तैयार करवाना इस जोड़ी की खास पहचान बनती जा रही है।

    आमिर खान और गौरी स्प्रैट ने अपने विवाह समारोह को पूरी तरह निजी रखा। समारोह में केवल परिवार के सदस्य और बेहद करीबी मित्र ही शामिल हुए। शादी के दौरान परिवार के बच्चों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे समारोह का माहौल और अधिक आत्मीय बना रहा। निजी आयोजन होने के बावजूद शादी की झलकियां और उससे जुड़ी जानकारियां सामने आने के बाद प्रशंसकों में उत्सुकता बढ़ गई।

    गौरी स्प्रैट का ब्राइडल लुक भी लोगों का ध्यान आकर्षित करने में सफल रहा। उन्होंने हल्के रंग का पारंपरिक परिधान चुना, जिस पर बारीक कढ़ाई की गई थी। इसके साथ उन्होंने पारंपरिक आभूषण, हल्का मेकअप और सादगीपूर्ण हेयरस्टाइल अपनाया। उनकी वेडिंग रिंग और संपूर्ण ब्राइडल लुक ने इस विवाह को सादगी, शालीनता और उत्कृष्ट कारीगरी का सुंदर उदाहरण बना दिया।

  • फीफा विश्व कप 2026: सैबारी की चोट ने मोरक्को को दिया झटका, फ्रांस के खिलाफ नहीं उतरेंगे मैदान में

    फीफा विश्व कप 2026: सैबारी की चोट ने मोरक्को को दिया झटका, फ्रांस के खिलाफ नहीं उतरेंगे मैदान में


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल मुकाबले से पहले मोरक्को की टीम को बड़ा झटका लगा है। टीम के प्रमुख फॉरवर्ड इस्माइल सैबारी हैमस्ट्रिंग चोट के कारण फ्रांस के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले में नहीं खेल पाएंगे। उनकी गैरमौजूदगी मोरक्को के लिए बड़ा नुकसान मानी जा रही है, क्योंकि मौजूदा टूर्नामेंट में उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई है।

    मोरक्को के मुख्य कोच मोहम्मद ओआबी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैबारी के बाहर होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि कनाडा के खिलाफ राउंड ऑफ-16 मुकाबले के दौरान सैबारी की हैमस्ट्रिंग में चोट लगी थी। मेडिकल टीम की कोशिशों के बावजूद वह समय पर पूरी तरह फिट नहीं हो सके। हालांकि कोच ने उम्मीद जताई कि यदि मोरक्को सेमीफाइनल में जगह बनाता है तो 25 वर्षीय खिलाड़ी वापसी कर सकते हैं।

    ओआबी ने कहा कि सैबारी फिलहाल खेलने के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन उन्हें विश्वास है कि उनका विश्व कप अभियान यहीं खत्म नहीं होगा और वह आगे टीम के लिए उपलब्ध हो सकते हैं।

    सैबारी इस विश्व कप में मोरक्को के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने ग्रुप चरण के तीनों मुकाबलों में गोल दागे, जबकि नॉकआउट दौर में नीदरलैंड के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में निर्णायक गोल कर टीम को क्वार्टर फाइनल तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया। ऐसे में उनके बाहर होने से फ्रांस के खिलाफ मोरक्को के आक्रमण की धार कमजोर पड़ सकती है और टीम को अधिक रक्षात्मक रणनीति अपनानी पड़ सकती है।

    इस मुकाबले से पहले रेफरी नियुक्ति को लेकर भी चर्चा तेज है। फीफा ने फ्रांस और मोरक्को के क्वार्टर फाइनल के लिए पूरी तरह अर्जेंटीना के अधिकारियों की टीम नियुक्त की है। मौजूदा विश्व कप में यह पहला मौका है जब किसी मैच का संचालन एक ही देश के रेफरी पैनल द्वारा किया जाएगा। हालांकि मोरक्को के कोच ने इस पर किसी तरह की चिंता जताने से इनकार किया।

    उन्होंने कहा कि अनुभवी रेफरी बड़े मुकाबलों को संभालना जानते हैं और उनकी टीम पूरी तरह अपने प्रदर्शन पर ध्यान दे रही है। ओआबी ने कहा कि रेफरी का काम निष्पक्ष फैसले लेना है और उन्हें भरोसा है कि मैच का संचालन भी उसी स्तर पर होगा।

    फ्रांस और मोरक्को के बीच अब तक छह अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले गए हैं। इनमें फ्रांस ने चार मैच जीते हैं, एक मुकाबला ड्रॉ रहा है, जबकि मोरक्को को सिर्फ एक जीत मिली है। दोनों टीमें 2022 फीफा विश्व कप के सेमीफाइनल में भी आमने-सामने थीं, जहां फ्रांस ने 2-0 से जीत दर्ज कर फाइनल में प्रवेश किया था। ऐसे में इस बार मोरक्को के पास पुरानी हार का हिसाब चुकता करने का मौका होगा, हालांकि सैबारी की अनुपस्थिति उसके लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

  • जाह्नवी कपूर की मेहंदी में दिखा 'शिखू' नाम, बॉयफ्रेंड शिखर पाहाड़िया के साथ रिश्ते को लेकर फिर तेज हुई शादी की चर्चाएं

    जाह्नवी कपूर की मेहंदी में दिखा 'शिखू' नाम, बॉयफ्रेंड शिखर पाहाड़िया के साथ रिश्ते को लेकर फिर तेज हुई शादी की चर्चाएं

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में अपनी बहन अंशुला कपूर के वेडिंग रिसेप्शन में शामिल हुईं जाह्नवी की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों में उनके पारंपरिक लुक के साथ-साथ हाथों की मेहंदी ने सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया। मेहंदी के डिजाइन के बीच लिखा हुआ ‘शिखू’ नाम लोगों की नजर में आते ही सोशल मीडिया पर उनके और शिखर पाहाड़िया के रिश्ते को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गईं।

    तस्वीरों में दिखाई दे रहा ‘शिखू’ नाम शिखर पाहाड़िया का निकनेम माना जाता है। इसे देखकर प्रशंसकों ने दोनों के रिश्ते को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने मजाकिया अंदाज में यह सवाल भी पूछा कि क्या अब दोनों जल्द शादी करने वाले हैं। हालांकि इस तरह की चर्चाओं के बीच जाह्नवी कपूर या शिखर पाहाड़िया की ओर से विवाह को लेकर कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि सामने नहीं आई है।

    यह पहला अवसर नहीं है जब जाह्नवी कपूर ने सार्वजनिक रूप से शिखर पाहाड़िया के प्रति अपने विशेष लगाव के संकेत दिए हों। इससे पहले भी वह कई मौकों पर ‘शिखू’ नाम वाला कस्टम ज्वेलरी एक्सेसरी पहने नजर आ चुकी हैं। इसके अलावा दोनों को पारिवारिक समारोहों, धार्मिक स्थलों, सामाजिक आयोजनों और विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में कई बार साथ देखा गया है। इन सभी मौकों ने उनके रिश्ते को लेकर लगातार चर्चा बनाए रखी है।

    मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि जाह्नवी और शिखर लंबे समय से एक-दूसरे को जानते हैं। पिछले कुछ वर्षों में दोनों कई महत्वपूर्ण पारिवारिक आयोजनों और निजी समारोहों में साथ दिखाई दिए हैं। इसी वजह से उनके रिश्ते को लेकर समय-समय पर विभिन्न तरह की अटकलें सामने आती रही हैं। हालांकि दोनों ने अपने निजी संबंधों को लेकर सार्वजनिक रूप से सीमित ही प्रतिक्रिया दी है।

    अंशुला कपूर के वेडिंग रिसेप्शन की तस्वीरों ने एक बार फिर इस चर्चा को नई गति दे दी है। फैशन और पारंपरिक परिधान के साथ जाह्नवी की मेहंदी भी सोशल मीडिया पर चर्चा का प्रमुख विषय बन गई। प्रशंसकों ने तस्वीरों पर बड़ी संख्या में टिप्पणियां करते हुए दोनों की जोड़ी की सराहना की और भविष्य को लेकर अपनी उत्सुकता भी व्यक्त की।

    शिखर पाहाड़िया एक कारोबारी परिवार से आते हैं और विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त की है और निवेश संबंधी क्षेत्रों में भी सक्रिय बताए जाते हैं। पिछले कुछ समय से उनका नाम लगातार जाह्नवी कपूर के साथ जोड़ा जाता रहा है, हालांकि दोनों ने अपने रिश्ते को लेकर सीमित सार्वजनिक टिप्पणियां ही की हैं।

    फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन तस्वीरों ने प्रशंसकों के बीच उत्सुकता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन शादी को लेकर किसी भी प्रकार की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में विवाह संबंधी सभी चर्चाओं को अभी केवल अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है और प्रशंसकों की नजर अब दोनों की ओर से आने वाली किसी आधिकारिक जानकारी पर बनी हुई है।

  • 'तारक मेहता' के बाघा ने बयां किया अभिनय का दर्द, बोले- किरदार की बॉडी लैंग्वेज ने सेहत पर डाला असर

    'तारक मेहता' के बाघा ने बयां किया अभिनय का दर्द, बोले- किरदार की बॉडी लैंग्वेज ने सेहत पर डाला असर


    नई दिल्ली । लोकप्रिय कॉमेडी धारावाहिक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में बाघा का किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता तन्मय वेकारिया ने अपने अभिनय से जुड़ी एक ऐसी चुनौती साझा की है, जिसने उनके प्रशंसकों को भी हैरान कर दिया। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक एक विशेष शारीरिक मुद्रा में अभिनय करने की वजह से अब उन्हें लगातार कमर दर्द की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

    तन्मय वेकारिया कई वर्षों से इस चर्चित किरदार को निभा रहे हैं। बाघा की पहचान उसकी अलग बॉडी लैंग्वेज, झुकी हुई कमर और अनोखे अंदाज से जुड़ी रही है। दर्शकों को यह शैली बेहद पसंद आती है, लेकिन अभिनेता के अनुसार इस किरदार को लगातार निभाने की कीमत उन्हें अपनी सेहत से चुकानी पड़ रही है। लंबे समय तक एक जैसी शारीरिक मुद्रा बनाए रखने से उनकी कमर पर लगातार दबाव पड़ा है।

    अभिनेता ने बताया कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि कई बार उन्हें सामान्य रूप से सीधा खड़े होने में भी तकलीफ महसूस होती है। इसके बावजूद जब कैमरा चालू होता है और वह बाघा के किरदार में पूरी तरह उतर जाते हैं, तब उनका पूरा ध्यान केवल अभिनय पर रहता है। उनका कहना है कि दर्शकों का प्यार और अपने काम के प्रति लगाव उन्हें हर दिन नई ऊर्जा देता है।

    तन्मय का मानना है कि किसी भी लोकप्रिय किरदार को लंबे समय तक जीवंत बनाए रखना आसान नहीं होता। केवल संवाद ही नहीं, बल्कि हाव-भाव, चलने का तरीका और शरीर की भाषा भी उस किरदार की पहचान बन जाते हैं। यही वजह है कि कलाकारों को कई बार अपनी शारीरिक सुविधा से समझौता करना पड़ता है ताकि दर्शकों को वही अनुभव मिलता रहे, जिससे वे वर्षों से जुड़े हुए हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि शूटिंग के दौरान दर्द की परवाह किए बिना वह पूरी लगन के साथ काम करते हैं। उनके अनुसार, सेट पर पहुंचते ही उनका ध्यान केवल अपने किरदार और दर्शकों का मनोरंजन करने पर होता है। यही समर्पण पूरी टीम को बेहतर एपिसोड बनाने की प्रेरणा देता है और शो की लोकप्रियता को लगातार बनाए रखने में मदद करता है।

    हाल के दिनों में तन्मय वेकारिया का निजी जीवन भी कठिन दौर से गुजरा है। कुछ समय पहले उनके पिता का निधन हो गया था। उनके पिता अरविंद वेकारिया गुजराती रंगमंच और मनोरंजन जगत का जाना-पहचाना नाम रहे हैं। इस व्यक्तिगत क्षति के बावजूद तन्मय अपने पेशेवर दायित्वों को पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभा रहे हैं।

    मनोरंजन जगत में कलाकारों के सामने आने वाली शारीरिक चुनौतियां अक्सर पर्दे के पीछे ही रह जाती हैं। तन्मय वेकारिया का अनुभव इस बात की याद दिलाता है कि किसी लोकप्रिय किरदार को वर्षों तक जीवंत बनाए रखने के लिए केवल अभिनय प्रतिभा ही नहीं, बल्कि अनुशासन, धैर्य और शारीरिक सहनशक्ति की भी बड़ी भूमिका होती है। उनके इस खुलासे के बाद प्रशंसकों ने उनके समर्पण की सराहना करते हुए उनके जल्द स्वस्थ रहने की कामना भी व्यक्त की।

  • हाईकोर्ट सख्त, आदेश नहीं मानने पर ACS मनीष रस्तोगी समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ वारंट

    हाईकोर्ट सख्त, आदेश नहीं मानने पर ACS मनीष रस्तोगी समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ वारंट


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और लगातार गैरहाजिर रहने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए बड़ा संदेश दिया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने अवमानना मामले में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनीष रस्तोगी, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेलवेन्द्रम और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के संचालक अजय गुप्ता के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने तीनों अधिकारियों को 15 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।

    यह मामला कृषि विभाग, जबलपुर के सेवानिवृत्त उप संचालक देवदत्त विश्वकर्मा की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के अनुसार 30 जून 2023 को सेवानिवृत्ति के समय उनसे 2.10 लाख रुपए की वसूली की गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने 8 मई 2024 को आदेश दिया था कि वसूली गई पूरी राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस की जाए। आरोप है कि स्पष्ट न्यायिक आदेश के बावजूद संबंधित विभाग ने राशि वापस नहीं की, जिसके चलते अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद तीनों वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए। एसीएस मनीष रस्तोगी की ओर से न तो कोई अधिवक्ता अदालत में उपस्थित हुआ और न ही व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए कोई आवेदन दिया गया। वहीं अन्य दो अधिकारियों की ओर से अधिवक्ता तो मौजूद रहे, लेकिन अधिकारी स्वयं कोर्ट नहीं पहुंचे। अदालत ने इसे न्यायालय के आदेशों की गंभीर अवहेलना माना।

    हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि तीनों अधिकारियों के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी किए जाएं। साथ ही संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के माध्यम से इन वारंटों की तामील सुनिश्चित की जाए, ताकि अगली सुनवाई पर सभी अधिकारी अदालत में उपस्थित हों।

    सुनवाई के दौरान कृषि विस्तार अधिकारी एस.के. निगम और संभागीय पेंशन अधिकारी नमिता भी प्रारंभिक रूप से कोर्ट में उपस्थित नहीं थे। इस पर न्यायालय ने राज्य शासन के अधिवक्ता को तत्काल दोनों अधिकारियों से फोन पर संपर्क कर अदालत में बुलाने के निर्देश दिए। बाद में उनके उपस्थित होने पर अदालत ने उनसे भी यह स्पष्ट करने को कहा कि पहले से आदेश होने के बावजूद वे समय पर कोर्ट में क्यों नहीं पहुंचे।

    हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 तय करते हुए निर्देश दिए हैं कि 8 मई 2024 के मूल आदेश का पूर्ण अनुपालन करते हुए विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति भी अनिवार्य रहेगी। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसे मामलों में और कठोर रुख अपनाया जा सकता है।

  • उमरिया में दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रक में घुसी कार; सरपंच, हेड कॉन्स्टेबल समेत 4 की मौत, युवती की CPR से बची जान

    उमरिया में दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रक में घुसी कार; सरपंच, हेड कॉन्स्टेबल समेत 4 की मौत, युवती की CPR से बची जान


    उमरिया मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में गुरुवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे ने एक पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। नेशनल हाईवे-43 पर तेज रफ्तार अर्टिगा कार सड़क किनारे खड़े ट्रक में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार चार लोगों की मौके पर या इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से घायल एक युवती की अस्पताल में समय रहते सीपीआर देने से सांसें लौट आईं। उसकी हालत गंभीर होने पर उसे जबलपुर रेफर किया गया है।

    यह हादसा कोतवाली थाना क्षेत्र की सिविल लाइन चौकी के पास भरौला स्थित सिद्ध बाबा क्षेत्र में तड़के करीब तीन से चार बजे के बीच हुआ। पुलिस के अनुसार कार में सवार सभी लोग अनूपपुर जिले के लीला गांव के निवासी थे और परिवार की युवती खुशबू मार्को को परीक्षा दिलाने के लिए चित्रकूट जा रहे थे।

    हादसे में लीला गांव के सरपंच कुलपत सिंह, उनकी पत्नी और हेड कॉन्स्टेबल सविता सिंह मार्को, तीन वर्षीय पुत्र रुद्र प्रताप तथा कुलपत सिंह के भाई की बेटी प्रियंका सिंह की मौत हो गई। वहीं खुशबू मार्को गंभीर रूप से घायल हो गई। डॉक्टरों के अनुसार अस्पताल पहुंचने तक उसकी सांसें थम चुकी थीं, लेकिन तत्काल सीपीआर देने के बाद उसकी धड़कनें फिर से चलने लगीं। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए जबलपुर रेफर किया गया।

    हादसे के बाद कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए पुलिस और 108 एंबुलेंस की टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। एक व्यक्ति कार के अंदर बुरी तरह फंसा हुआ था, जिसे रेस्क्यू कर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बाद में इलाज के दौरान एक अन्य घायल ने भी दम तोड़ दिया।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार के कारण चालक का वाहन पर नियंत्रण खोना हादसे की वजह माना जा रहा है। पुलिस दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    कार चालक ददन सिंह से जब पुलिस और मीडिया ने घटना के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसे हादसे की कोई जानकारी याद नहीं है। उसके कपड़ों पर खून के निशान थे और वह बार-बार यही पूछता रहा कि आखिर क्या हुआ और वह अस्पताल कैसे पहुंचा।

    इस दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत से गांव में शोक का माहौल है, जबकि घायल युवती के जल्द स्वस्थ होने की सभी कामना कर रहे हैं।

  • शरद पवार की शिंदे के केबिन में मौजूदगी से तेज हुई सियासी चर्चाएं, दोनों पक्षों ने बताया महज शिष्टाचार और सुविधाजनक मुलाकात

    शरद पवार की शिंदे के केबिन में मौजूदगी से तेज हुई सियासी चर्चाएं, दोनों पक्षों ने बताया महज शिष्टाचार और सुविधाजनक मुलाकात

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के बीच वरिष्ठ नेता शरद पवार की उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय में मौजूदगी ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। विधानसभा परिसर में हुई इस मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में संभावित नए समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गईं। हालांकि कुछ ही समय बाद दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया कि यह मुलाकात किसी राजनीतिक बदलाव का संकेत नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुरूप हुई एक सामान्य और शिष्टाचार आधारित बैठक थी।

    जानकारी के अनुसार शरद पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद से संबंधित उच्चस्तरीय समिति की बैठक में भाग लेने के लिए विधानसभा पहुंचे थे। समिति की बैठक समाप्त होने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी एनसीपी (एसपी) के विधायकों से मुलाकात की। यह बैठक उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के केबिन में आयोजित हुई, जिसके बाद राजनीतिक चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। बाद में एकनाथ शिंदे भी वहां पहुंचे और उन्होंने शरद पवार का स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त बातचीत भी हुई, लेकिन उसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।

    एनसीपी (एसपी) के नेताओं ने इस घटनाक्रम को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि बैठक के पीछे कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं था। पार्टी नेताओं के अनुसार शरद पवार को लंबी दूरी तक पैदल चलने में असुविधा होती है। इसी कारण निकास द्वार के निकट स्थित उपमुख्यमंत्री के कार्यालय को बैठक के लिए उपयुक्त स्थान के रूप में चुना गया। उनका कहना है कि जब शरद पवार वहां पहुंचे, उस समय एकनाथ शिंदे अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे और बाद में उन्हें जानकारी मिलने पर उन्होंने शिष्टाचारवश मुलाकात की।

    उधर, एकनाथ शिंदे खेमे ने भी इस मुलाकात को सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार का हिस्सा बताया। सरकार की ओर से कहा गया कि महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा में वरिष्ठ नेताओं का सम्मान किया जाता है और इसी भावना के तहत उनका स्वागत किया गया। इस मुलाकात का किसी संभावित राजनीतिक गठबंधन, दल परिवर्तन या नए समीकरण से कोई संबंध नहीं है।

    मुलाकात के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या राज्य की राजनीति में कोई नया मोड़ आने वाला है। हालांकि एनसीपी (एसपी) ने इन सभी अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। पार्टी नेतृत्व ने कहा कि उनका महा विकास अघाड़ी के प्रति रुख पहले जैसा ही है और किसी अन्य राजनीतिक गठबंधन में शामिल होने या किसी प्रकार के विलय की चर्चाओं में कोई तथ्य नहीं है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र की राजनीति में वरिष्ठ नेताओं की हर मुलाकात स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाती है। विशेष रूप से विधानसभा सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच होने वाली मुलाकातों को अक्सर राजनीतिक संकेतों के रूप में देखा जाता है। हालांकि कई बार ऐसी मुलाकातें केवल प्रशासनिक, औपचारिक या व्यक्तिगत शिष्टाचार तक ही सीमित होती हैं।

    फिलहाल दोनों पक्षों के आधिकारिक बयानों के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि इस मुलाकात को किसी नए राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बावजूद राज्य की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • कलकत्ता हाई कोर्ट से TMC को बड़ी राहत, फ्रीज बैंक खातों के संचालन की मिली अनुमति, निगरानी के लिए स्पेशल ऑफिसर नियुक्त

    कलकत्ता हाई कोर्ट से TMC को बड़ी राहत, फ्रीज बैंक खातों के संचालन की मिली अनुमति, निगरानी के लिए स्पेशल ऑफिसर नियुक्त

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को पार्टी फंड से जुड़े विवाद के बीच कलकत्ता हाई कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। अदालत ने पार्टी के तीन फ्रीज बैंक खातों के संचालन के लिए एक स्पेशल ऑफिसर नियुक्त करने का आदेश दिया है। इस व्यवस्था के तहत तृणमूल कांग्रेस अपने आवश्यक वित्तीय लेनदेन कर सकेगी, लेकिन सभी गतिविधियां अदालत द्वारा नियुक्त अधिकारी की निगरानी में संपन्न होंगी।

    यह मामला पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज किए जाने से जुड़ा है। संबंधित खातों पर रोक लगाए जाने के बाद पार्टी की नियमित वित्तीय और संगठनात्मक गतिविधियां प्रभावित होने लगी थीं। अदालत ने सुनवाई के दौरान इस पहलू पर विचार करते हुए कहा कि जांच प्रक्रिया जारी रहने के बावजूद किसी राजनीतिक दल के नियमित प्रशासनिक और वित्तीय कार्य पूरी तरह बाधित नहीं होने चाहिए। इसी आधार पर निगरानी व्यवस्था के साथ खातों के संचालन की अनुमति दी गई।

    मामले की शुरुआत उस शिकायत से हुई थी जिसमें पार्टी फंड के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था। शिकायत के आधार पर जांच शुरू की गई और उसके बाद संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई की गई। इस निर्णय के कारण पार्टी के नियमित भुगतान और अन्य वित्तीय दायित्वों के निर्वहन में कठिनाइयां सामने आने लगी थीं।

    हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि स्पेशल ऑफिसर की निगरानी में ही खातों से लेनदेन किया जाएगा। इसका उद्देश्य एक ओर जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखना है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के आवश्यक प्रशासनिक कार्यों को भी जारी रखना है। अदालत की यह व्यवस्था जांच और नियमित वित्तीय संचालन के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आदेश तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रशासनिक दृष्टि से राहत लेकर आया है। पार्टी अब अपने संगठनात्मक खर्च, नियमित भुगतान और अन्य आवश्यक वित्तीय दायित्वों को अदालत की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरा कर सकेगी। हालांकि मामले की जांच पहले की तरह जारी रहेगी और अंतिम निष्कर्ष जांच के आधार पर ही सामने आएंगे।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक दलों के वित्तीय प्रबंधन और फंड संचालन से जुड़े नियमों पर भी ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का आदेश यह सुनिश्चित करता है कि जांच प्रभावित हुए बिना आवश्यक वित्तीय गतिविधियां भी बाधित न हों। इससे जांच एजेंसियों और संबंधित पक्षों के बीच संतुलित प्रक्रिया बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश के बाद तृणमूल कांग्रेस को अपने फ्रीज बैंक खातों के सीमित संचालन की अनुमति मिल गई है। अब सभी वित्तीय लेनदेन अदालत द्वारा नियुक्त स्पेशल ऑफिसर की देखरेख में किए जाएंगे। आने वाले समय में मामले की जांच की प्रगति और अदालत में होने वाली अगली सुनवाई इस पूरे विवाद की आगे की दिशा तय करेगी।

  • 'दरवाजा खोला तो सामने तेंदुआ बैठा था', इंदौर में दहशत की रात, रिहायशी इलाके में घुसा वन्यजीव

    'दरवाजा खोला तो सामने तेंदुआ बैठा था', इंदौर में दहशत की रात, रिहायशी इलाके में घुसा वन्यजीव


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र में मंगलवार रात उस समय दहशत फैल गई, जब देवगुराड़िया की पहाड़ियों से भटककर एक तेंदुआ रिहायशी इलाके में पहुंच गया। तेंदुए ने पहले सड़क से गुजर रहे दो बाइक सवारों पर झपट्टा मारा और इसके बाद एक मकान के बाथरूम में जा घुसा। इस दौरान घर में मौजूद बुजुर्ग महिला मुन्नीबाई और उनका मानसिक रूप से बीमार पोता करीब एक घंटे तक घर के भीतर कैद रहने को मजबूर हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग देर रात तक दहशत में रहे।

    मुन्नीबाई ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह घर में खाना बना रही थीं। तभी बाहर अचानक शोर सुनाई दिया। जब उन्होंने दरवाजे से झांककर देखा तो सामने तेंदुआ बैठा था। यह नजारा देखते ही उन्होंने तुरंत घर के दोनों दरवाजे बंद कर दिए। उस समय उनका मानसिक रूप से बीमार पोता भी घर में मौजूद था। दोनों करीब एक घंटे तक घर से बाहर नहीं निकल सके। बाहर लोगों की आवाजें और चीख-पुकार सुनाई देती रही, लेकिन डर के कारण बाहर जाने की हिम्मत नहीं हुई।

    जानकारी के अनुसार यह घटना बिचौली मर्दाना इलाके में रात करीब साढ़े आठ बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेंदुए ने पहले सड़क से गुजर रहे एक बाइक सवार पर हमला किया। युवक किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकला। इसके बाद तेंदुआ भागते हुए पास के एक मकान में घुस गया और बाथरूम के पास जाकर बैठ गया। इससे पूरे परिवार में दहशत फैल गई।

    घटना की सूचना मिलते ही आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए, लेकिन तेंदुए के डर से कोई भी घर के करीब जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। लोगों ने तुरंत पुलिस और वन विभाग को सूचना दी। हालांकि वन विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही तेंदुआ बाथरूम के पास बनी दीवार फांदकर बाहर निकल गया और श्रीजी वैली की दिशा में चला गया।

    वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे घर की तलाशी ली। जब अधिकारियों को पूरी तरह भरोसा हो गया कि तेंदुआ वहां से जा चुका है, तब परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली।

    स्थानीय निवासी अभिषेक जाधव ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि कोई बड़ी बिल्ली होगी, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चला कि वह तेंदुआ है। इसके बाद लोगों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को सतर्क किया और पुलिस तथा वन विभाग को सूचना दी।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जंगल से सटे रिहायशी इलाकों में वन विभाग की नियमित गश्त बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

    वन विभाग के रेंजर योगेश के अनुसार तेंदुआ संभवतः देवगुराड़िया की पहाड़ियों से भटककर आबादी वाले इलाके में आ गया था। घटनास्थल जंगल से करीब आधा किलोमीटर दूर है और इस क्षेत्र में पहले भी तेंदुओं की आवाजाही होती रही है। विभाग का मानना है कि तेंदुआ रात में ही वापस जंगल की ओर लौट गया और बुधवार सुबह तक उसके दोबारा दिखाई देने की कोई सूचना नहीं मिली।

  • राजा रघुवंशी हत्याकांड में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल, सोनम की जमानत पर फैसला टला

    राजा रघुवंशी हत्याकांड में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल, सोनम की जमानत पर फैसला टला


    इंदौर । इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अहम कानूनी सवाल सामने आया। अदालत ने पूछा कि क्या गिरफ्तारी मेमो में हुई केवल टाइपिंग की गलती के आधार पर किसी आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध मान लिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सोनम रघुवंशी की जमानत पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया और मामले पर आगे विचार करने के संकेत दिए।

    जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर अलग-अलग न्यायिक फैसले मौजूद हैं और कानून की स्पष्ट व्याख्या आवश्यक है। अदालत ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर इस कानूनी प्रश्न को बड़ी बेंच के पास भी भेजा जा सकता है, ताकि भविष्य के मामलों के लिए स्पष्ट दिशा तय हो सके।

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय पुलिस को निर्देश दिया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को दिए गए मूल दस्तावेजों की स्पष्ट और पढ़ने योग्य प्रतियां अदालत में पेश की जाएं। अदालत यह जानना चाहती है कि गिरफ्तारी के समय सोनम रघुवंशी को किन धाराओं और किन आधारों की जानकारी दी गई थी।

    मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि हत्या जैसे गंभीर मामले में केवल गिरफ्तारी मेमो में टाइपिंग की गलती के आधार पर जमानत देना कानून की गलत व्याख्या होगी। उन्होंने दलील दी कि आरोपी को गिरफ्तारी के समय सभी जरूरी जानकारी दी गई थी और गलत धारा का उल्लेख केवल लिपिकीय त्रुटि थी, जिससे पूरी गिरफ्तारी अवैध नहीं हो जाती।

    दूसरी ओर, सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में खुद को निर्दोष बताया है। उसने दावा किया कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है और उसने जांच से लेकर न्यायिक प्रक्रिया तक हर स्तर पर पूरा सहयोग किया है।

    इससे पहले मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून को सोनम को जमानत देते हुए कहा था कि गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता की हत्या से संबंधित धारा 103(1) के स्थान पर गलती से धारा 403 दर्ज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने इसे जांच एजेंसी की गंभीर चूक माना और कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के वास्तविक आधार की सही जानकारी नहीं दी गई।

    अब सुप्रीम कोर्ट सबसे पहले यह तय करेगा कि क्या ऐसी लिपिकीय त्रुटि गिरफ्तारी को अवैध बनाने के लिए पर्याप्त आधार हो सकती है। यदि सर्वोच्च अदालत हाईकोर्ट की व्याख्या से सहमत नहीं होती है तो सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द होने की संभावना भी बन सकती है।

    इस बीच हाल ही में राजा रघुवंशी के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने आरोप लगाया था कि सोनम जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर नेपाल भाग गई है और मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। हालांकि सोनम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह शिलॉन्ग में ही मौजूद है और अदालत तथा जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है।

    गौरतलब है कि मई 2025 में इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की मेघालय में हनीमून के दौरान हत्या कर दी गई थी। जांच में पुलिस ने आरोप लगाया कि हत्या की साजिश उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी और उसके कथित सहयोगियों ने रची थी। यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना था और फिलहाल इसकी सुनवाई विभिन्न अदालतों में जारी है।