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  • J&K: खामेनेई की मौत के बाद जारी प्रदर्शनों के बीच घाटी में तनावपूर्ण शांति, स्कूल-कॉलेज 7 मार्च तक बंद

    J&K: खामेनेई की मौत के बाद जारी प्रदर्शनों के बीच घाटी में तनावपूर्ण शांति, स्कूल-कॉलेज 7 मार्च तक बंद


    जम्मू।
    ईरान के सर्वोच्च नेता (Iran’s Supreme Leader) अयातुल्ला अली खामनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की हमले में मौत के विरोध में कश्मीर (Kashmir) में जारी प्रदर्शनों के बीच मंगलवार को तनावपूर्ण शांति रही। पाबंदियां लागू रहीं तो शिक्षण संस्थान बंद रहे। घाटी में स्कूल-कॉलेज की दो दिन की बंदी को एहतियात के तौर पर बढ़ाकर सात मार्च तक कर दिया गया है। राजोरी और पुंछ में बंद शांतिपूर्ण रहा। लद्दाख के कारगिल के बाजार भी बंद रहे।

    मंगलवार को श्रीनगर के सिविल लाइन इलाके में कुछ दुकानें खुली दिखीं और सड़कों पर वाहन चलते नजर आए। डाउनटाउन और शिया बहुल इलाकों में प्रदर्शन हुए। लाल चौक पर घंटा घर को अभी सील ही रखा गया है। इसके चारों ओर बैरिकेड लगे हुए हैं। शहर में बड़ी संख्या में पुलिस और सीआरपीएफ के जवान तैनात हैं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक बुधवार को भी प्रतिबंध जारी रहेंगे। इंटरनेट सेवाएं भी बाधित रहेंगी। पुलिस ने लोगों से हिंसा और उकसावे से बचने की अपील की है।

    राजोरी शहर व आसपास के इलाकों में मुस्लिम संगठनों ने दुकानें बंद रखीं। पहाड़ी इलाकों में भी मुस्लिम समुदाय की ही दुकानें बंद रहीं। पुलिस की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रही। कहीं भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। पुंछ पूरी तरह से बंद रहा। इस दौरान हिंदू-सिख के धार्मिक, सामाजिक और व्यावसायिक संगठनों ने भी बंद को अपना समर्थन दिया।

    शांति बनाए रखना और समाज की तरक्की को बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है। अफसर हाई अलर्ट पर रहें। शांति बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाए। -मनोज सिन्हा, उपराज्यपाल

    कुछ लोग माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के लोगों से गुजारिश है कि वे संयम रखें। गुस्सा-नाराजगी, दुख-दर्द का इजहार करें लेकिन कानून हाथ में न लें। -उमर अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री

  • Iran war: पश्चिम एशिया में फंसे लोगो की वापसी की तैयारी में जुटी सरकार.. आज 58 फ्लाइट्स भरेंगी उड़ान

    Iran war: पश्चिम एशिया में फंसे लोगो की वापसी की तैयारी में जुटी सरकार.. आज 58 फ्लाइट्स भरेंगी उड़ान

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे तनाव के कारण हवाई सेवाओं पर बड़ा असर पड़ा है। इस बीच केंद्र सरकार (Central Government) ने मंगलवार को जानकारी दी कि एयरलाइनों ने अपनी उड़ानों के शेड्यूल में सावधानीपूर्वक बदलाव किए हैं और 4 मार्च को कुल 58 उड़ानें संचालित करने की योजना बनाई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने बताया कि फंसे हुए यात्रियों की मदद के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर एयरलाइंस अतिरिक्त उड़ानें चला रही हैं और विदेशी विमानन प्राधिकरणों तथा भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर काम कर रही हैं, ताकि यात्रियों की सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।

    मंत्रालय के अनुसार, आज भारतीय एयरलाइनों की तरफ से 24 उड़ानें संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा पिछले 24 घंटों में खाड़ी देशों से एमिरेट्स और एतिहाद एयरवेज ने 9 उड़ानें संचालित की हैं। सरकार ने कहा कि वह लगातार एयरलाइनों के संपर्क में है और हवाई किरायों पर नजर रख रही है, ताकि इस संकट के समय टिकट की कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी न हो। मंत्रालय ने बताया कि भारतीय एयरलाइनों ने लंबी दूरी और अति लंबी दूरी की उड़ानों को वैकल्पिक मार्गों से धीरे-धीरे फिर से शुरू करना शुरू कर दिया है।


    क्या है चार मार्च की योजना?

    ये उड़ानें उन हवाई क्षेत्रों से बचकर चलाई जा रही हैं, जो फिलहाल बंद या प्रतिबंधित हैं। बता दें कि 4 मार्च को कुल 58 उड़ानों की योजना बनाई गई है। इनमें 30 उड़ानें इंडिगो की तरफ से और 23 उड़ानें एअर इंडिया तथा एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा संचालित की जाएंगी। भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच विदेशी एयरलाइंस भी सीमित संख्या में उड़ानें चला रही हैं, जो संचालन और हवाई क्षेत्र की स्थिति पर निर्भर हैं। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ा है।


    डीजीसीए ने दी जानकारी

    मंत्रालय के अनुसार, अब तक भारतीय एयरलाइनों की 1,221 उड़ानें और विदेशी एयरलाइनों की 388 उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं। केवल मंगलवार को ही भारतीय एयरलाइनों ने 104 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कीं। 28 फरवरी से अब तक तीन दिनों में कुल 1,117 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हुई हैं। सरकार ने सभी एयरलाइनों को निर्देश दिया है कि वे यात्रियों को स्पष्ट और समय पर जानकारी दें तथा रिफंड, री-शेड्यूलिंग और अन्य सहायता से जुड़े नियमों का पालन करें।


    एअर इंडिया ने क्या जानकारी दी?

    इस बीच एअर इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि पश्चिम एशिया की स्थिति को देखते हुए उसने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इस्राइल और कतर के लिए अपनी अधिकांश उड़ानों को 4 मार्च 2026 की रात 11:59 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया है। एयरलाइन ने कहा है कि वह क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे की स्थिति के अनुसार निर्णय लेगी। इसके साथ ही सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह एयरलाइनों, एयरपोर्ट ऑपरेटरों, नियामक संस्थाओं और विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रही है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और सेवाओं को धीरे-धीरे सामान्य किया जा सके।

  • T20 WC 2026 : आज SA और NZ के बीच पहला सेमीफाइनल कोलकाता में…

    T20 WC 2026 : आज SA और NZ के बीच पहला सेमीफाइनल कोलकाता में…


    कोलकाता।
    दक्षिण अफ्रीका (South Africa) और न्यूजीलैंड (New Zealand) के बीच बुधवार को कोलकाता के ईडेन गार्डेंस (Eden Gardens, Kolkata) पर टी20 विश्व कप (T20 World Cup) के पहले सेमीफाइनल मैच खेला जाएगा। यह रोमांचक मुकाबला होने की संभावना है जिसमें दोनों टीम के कप्तानों की भूमिका अहम होगी। दक्षिण अफ्रीका के कप्तान एडेन मार्करम और न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सैंटनर इस समय शानदार फॉर्म में हैं। अमूमन ऐसा नहीं होता कि दोनों टीमों के कप्तान ही सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी हों। ऐसे में मार्करम और सैंटनर के बीच मुकाबला दिलचस्प होगा जो ईडन गार्डंस में हजारों दर्शकों को रोमांच से भर देगा।

    मार्करम बनाम सैंटनर
    इस मुकाबले के केंद्र में दो ऐसे कप्तान हैं, जिनकी अक्सर उतनी प्रशंसा या चर्चा नहीं होती जितनी होनी चाहिए थी क्योंकि वह रणनीतिक और तकनीकी रूप से उन कप्तानों से कहीं बेहतर हैं जिनकी कहीं अधिक प्रशंसा की जाती है। मार्करम ने अभी तक इस टूर्नामेंट में 175 से अधिक के स्ट्राइक रेट से 268 रन बनाए हैं। उन्होंने पावरप्ले में गेंदबाजों को अच्छी तरह से निशाना बनाया है। दूसरी तरफ सैंटनर ने 6.35 की इकॉनमी रेट के साथ बल्लेबाजों को बांधे रखा है। उन्होंने बल्लेबाजी में भी कमाल दिखाया है। कुल मिलाकर कई ऐसे कारक हैं जिससे पहला सेमीफाइनल रोमांचक होने की संभावना है।


    टी20 में भारी है दक्षिण अफ्रीकी का पलड़ा

    न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 में दक्षिण अफ्रीका का पलड़ा भारी है। दोनों टीमों के बीच अब तक टी20 में कुल 19 मुकाबले खेले गए हैं जिसमें से दक्षिण अफ्रीका ने 12 मुकाबले जीते हैं, जबकि सात मैच न्यूजीलैंड के नाम रहे हैं। मौजूदा टूर्नामेंट में दक्षिण अफ्रीका की टीम अबतक अजेय बनी हुई है और उसने एक भी मैच नहीं गंवाया है। वहीं, न्यूजीलैंड को पिछले ही मैच में इंग्लैंड से हार का सामना करना पड़ा था।

    टी20 विश्व कप के प्रसारण अधिकार स्टार स्पोर्ट्स के पास है और दर्शक इसके मुकाबले स्टार स्पोर्ट्स के चैनलों पर देख सकेंगे। इसके अलावा मैच की लाइव स्ट्रीमिंग जियोहॉटस्टार एप पर होगी।

  • Assam Elections: कांग्रेस ने जारी की पहली लिस्ट, गौरव गोगोई समेत 42 उम्मीदवारों के नाम शामिल

    Assam Elections: कांग्रेस ने जारी की पहली लिस्ट, गौरव गोगोई समेत 42 उम्मीदवारों के नाम शामिल


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस (Congress) ने आगामी असम विधानसभा चुनाव (Assam Assembly Elections) के लिए पहली लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें कुल 42 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। इस सूची के अनुसार, असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई (Gaurav Gogoi) जोरहाट विधानसभा क्षेत्र (Jorhat Assembly Constituency) से चुनाव लड़ेंगे। यह कदम चुनाव की आधिकारिक घोषणा से पहले उम्मीदवारों के नाम सामने लाकर कांग्रेस की रणनीतिक तैयारी को दर्शाता है। असम में 2016 से सत्ता से बाहर रही कांग्रेस राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही है। पार्टी ने विभिन्न क्षेत्रों से प्रभावशाली और स्थानीय स्तर पर मजबूत नेता चुने हैं, ताकि मतदाताओं के बीच अच्छी पैठ बनाई जा सके।

    सूची में कांग्रेस विधायक दल के नेता देबब्रत सैकिया को नजीरा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रिपुन बोरा को बरचल्ला सीट से टिकट मिला है। इसके अलावा अब्दुस सोबहान अली सरकार गौरीपुर, मार्कलाइन मराक गोलपारा वेस्ट (अनुसूचित जनजाति आरक्षित), गिरीश बरुआ बोंगाईगांव और महानंद सरकार बरपेटा (अनुसूचित जाति आरक्षित) से चुनाव लड़ेंगे। रामेन सिंह राभा बोको-चायगांव (ST), नंदिता दास हाजो-सुआलकुची (SC) और सत्यब्रत कलिता कमलपुर सीट से मैदान में होंगे। इन नामों के चयन में पार्टी ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर खास ध्यान दिया है।


    किसे कहां से मिला टिकट

    प्रमुख उम्मीदवारों में मीरा बोरठाकुर गोस्वामी को डिस्पुर, दिगंत बर्मन को बरखेत्री और अशोक कुमार शर्मा को नलबाड़ी से टिकट दिया गया है। कांग्रेस ने आरक्षित सीटों पर भी मजबूत प्रत्याशी उतारे हैं, जो अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों के बीच पार्टी की पकड़ बढ़ाने में सहायक साबित हो सकते हैं। यह सूची पार्टी की संगठनात्मक ताकत और चुनावी तैयारियों को दिखाती है। कांग्रेस ने उम्मीदवारों की घोषणा में तेजी दिखाकर सत्ताधारी दल को संकेत दिया है कि वह इस बार असम में कड़ी चुनौती पेश करेगी।


    रणनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश

    असम विधानसभा की 126 सीटों के लिए चुनाव अप्रैल महीने में होने की संभावना है। पिछले कई वर्षों से भारतीय जनता पार्टी के शासन वाले इस राज्य में कांग्रेस वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पहले उम्मीदवारों की सूची जारी करके पार्टी ने रणनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश की है। विश्लेषकों का मानना है कि आगे आने वाली सूचियां और संगठनात्मक प्रयास मिलकर कांग्रेस की स्थिति को मजबूत कर सकते हैं। यह चुनाव असम की राजनीति में अहम मोड़ साबित हो सकता है, जहां कांग्रेस पुरानी ताकत वापस हासिल करने की कोशिश में जुटी है।

  • MP: चंद्रगहण के दौरान दतिया के इस प्रसिद्ध मंदिर के पट नहीं हुए बंद, जानिए इसकी वजह?

    MP: चंद्रगहण के दौरान दतिया के इस प्रसिद्ध मंदिर के पट नहीं हुए बंद, जानिए इसकी वजह?


    दतिया।
    सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) या चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) के दौरान एक तरफ जहां देशभर के अधिकांश मंदिरों के पट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं वहीं मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के दतिया स्थित श्री पीताम्बरा मंदिर (Shri Pitambara Temple) में परंपरा अलग है। यहां ग्रहणकाल में भी मंदिर के पट बंद नहीं होते और मां बगुलामुखी स्वरूपा पीताम्बरा माई (Mother Bagulamukhi Swarupa Pitambara Mai) अपने भक्तों को प्रतिदिन की तरह दर्शन देती हैं।

    आमतौर पर ग्रहण को शास्त्रों में विशेष काल माना गया है। इस दौरान मंदिरों में पूजा-पाठ रोक दिया जाता है और ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण की प्रक्रिया के उपरांत ही दर्शन शुरू होते हैं। लेकिन दतिया की पीताम्बरा पीठ में वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार ग्रहणकाल को साधना और मंत्र-जाप के लिए अत्यंत सिद्ध समय माना जाता है। मंदिर से जुड़े संतों और श्रद्धालुओं के अनुसार यह परंपरा श्री स्वामीजी महाराज के समय से चली आ रही है। उसी कालखंड से ग्रहण के दौरान मंदिर में अनवरत जाप और साधना की परंपरा स्थापित हुई जो आज भी निरंतर जारी है।


    चंद्रगहण पर क्यों बंद नहीं होता पीतांबरा पीठ में दर्शन

    ग्रहण शुरू होते ही मंदिर परिसर में विशेष मंत्रोच्चार प्रारंभ हो जाता है और ग्रहण समाप्ति तक बिना रुके जाप चलता रहता है मां बगुलामुखी, जिन्हें दशमहाविद्याओं में से एक माना जाता है तंत्र-साधना की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि ग्रहणकाल में किया गया जाप और साधना कई गुना अधिक फलदायी होता है। यही कारण है कि देशभर से साधक और भक्त ग्रहण के समय विशेष रूप से दतिया पहुंचते हैं और मां के दरबार में साधना करते हैं। ग्रहण के दौरान मंदिर में अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं। श्रद्धालु शांतिपूर्वक मां के दर्शन करते हैं और साधना में लीन रहते हैं। जैसे ही ग्रहण समाप्त होता है वैदिक विधि विधान के साथ विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की जाती है।


    खंडवा में दादाजी धूनीवाले मंदिर के कपाट भी बंद नहीं

    चंद्रगहण के दौरान खंडवा स्थित दादाजी धूनीवाले का मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए खुला रहा। सूर्यग्रहण हो या चंद्रग्रहण यहां मंदिर बंद करने की परंपरा कभी नहीं रही। मंदिर की ट्रस्टी मदन ठाकरे के अनुसार, यह स्थल अवधूत संत दादाजी धूनीवाले की पावन समाधि है। मान्यता है कि इस समाधि स्थल पर किसी भी ग्रह और नक्षत्र का प्रभाव नहीं पड़ता। यही कारण है कि मंदिर के पट दिन-रात खुले रहते हैं। आधी रात को भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर दर्शन कर सकते हैं। ग्रहण काल में भी मंदिर में नियमित आरती, पूजन और समाधि सेवा का क्रम जारी रहा।

  • BJP के मिशन 2027 की हरिद्वार से होगी शुरुआत, अमित शाह 7 मार्च को करेंगे शंखनाद

    BJP के मिशन 2027 की हरिद्वार से होगी शुरुआत, अमित शाह 7 मार्च को करेंगे शंखनाद


    देहरादून।
    भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) मिशन 2027 का बिगुल हरिद्वार (Haridwar) से फूंकने जा रही है। इसीलिए पार्टी ने विशेष रणनीति के तहत सरकार के चार साल पर आयोजित किए जा रहे जश्न के कार्यक्रमों की शुरूआत हरिद्वार से करने का निर्णय लिया है। सात मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) मिशन 2027 के लिए रोडमैप तय करेंगे।


    हरिद्वार ही क्यों चुना

    दरअसल, 2022 के विधानसभा चुनावों में हरिद्वार से भाजपा बुरी तरह पिछड़ गई थी। राज्य की सत्ता में लौटने के बावजूद हरिद्वार में भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और 11 विधानसभा सीटों में से पार्टी महज तीन सीटों पर सिमट कर रह गई। लोकसभा चुनावों में पार्टी ने हरिद्वार में अपने प्रदर्शन को सुधारा। लेकिन पार्टी की असल परीक्षा अभी विधानसभा चुनावों में होनी है। इसीलिए भाजपा ने हरिद्वार पर विशेष फोकस शुरू कर दिया है। पिछले दिनों हुई पार्टी कोर ग्रुप की बैठक में हारी हुई सीटों पर फोकस करने का निर्णय लिया गया था।


    अमित शाह की शीर्ष नेताओं संग बैठक

    जिसके लिए सबसे पहले हरिद्वार को चुना गया है। सरकार के चार साल पर आयोजित होने वाले जश्न के कार्यक्रमों की शुरूआत भी इसी रणनीति के तहत हरिद्वार से की जा रही है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सात मार्च को हरिद्वार में विशाल जनसभा को संबोधित करने के साथ ही संगठन के शीर्ष नेताओं के साथ भी बैठक करेंगे। जिसमें आगामी रणनीति पर मुहर लगाई जाएगी।


    हार के बावजूद कांग्रेस का अच्छा रहा प्रदर्शन

    हरिद्वार में 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा जहां सिर्फ तीन सीटों पर सिमट गई वहीं कांग्रेस ने पांच सीटें जीत ली थी। बाद में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने मंगलौर सीट भी अपने कब्जे में कर ली। इस समय कांग्रेस के पास हरिद्वार जिले की ज्वालापुर, भगवानपुर, झबरेड़ा, पिरान कलियर, मंगलौर और हरिद्वार ग्रामीण सीटों को मिलाकर कुल छह विधायक हैं। इसके अलावा हरिद्वार में एक सीट बसपा और एक निर्दलीय ने जीती थी।


    हरिद्वार में सिर्फ तीन सीटें जीती थी

    2022 के विधानसभा चुनावों में हरिद्वार में भाजपा सिर्फ तीन सीटों को जीत पाई थी। उनमें हरिद्वार, बीएचईएल रानीपुर और रुड़की हैं। जबकि अन्य सीटों पर कांग्रेस, बसपा और निर्दलीय उम्मीदवार जीतकर आए हैं।

  • Iran War: 3 दिन में एक हजार से अधिक फ्लाइट्स हुई रद्द, जानें दिल्ली Airport के हाल?

    Iran War: 3 दिन में एक हजार से अधिक फ्लाइट्स हुई रद्द, जानें दिल्ली Airport के हाल?


    नई दिल्ली।
    ईरान युद्ध (Iran War) के कारण दिल्ली एयरपोर्ट (Delhi Airport) से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं। मंगलवार को परिचालन संबंधी बाधाओं की वजह से 80 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें (International Flights) रद्द करनी पड़ीं जिनमें 36 प्रस्थान और 44 आगमन उड़ानें शामिल थीं। पिछले तीन दिनों में कुल 1,117 उड़ानें प्रभावित हुई हैं। दिल्ली एयरपोर्ट प्रशासन डायल ने फंसे हुए यात्रियों की सुविधा के लिए बैठने की अतिरिक्त व्यवस्थाएं अधिक चिकित्सा दल और सफाई टीमें तैनात की हैं ताकि यात्रियों को कम परेशानी हो।

    एक अधिकारी ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण मंगलवार सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर कुल 80 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। इनमें 36 प्रस्थान और 44 आगमन उड़ानें शामिल हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि एमिरेट्स जैसी कुछ एयरलाइन्स ने पश्चिम एशिया के लिए अपनी सेवाएं आंशिक रूप से फिर से शुरू कर दी हैं।

    उड़ानों पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘फ्लाइटरडार24 डॉट कॉम’ पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दुबई जा रही एमिरेट्स की उड़ान ईके-513 हवाई क्षेत्र के प्रतिबंधों की वजह से दिल्ली वापस आ गई। दिल्ली एयरपोर्ट प्रशासन डायल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि पश्चिम एशिया की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के कारण पश्चिम की ओर जाने वाली कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में देरी हो रही है या समय-सारिणी में बदलाव किया जा रहा है।

    पिछले 3 दिन में पश्चिम एशिया संकट की वजह से भारतीय एयरलाइनों ने 1,117 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी हैं। इसी दौरान एयर इंडिया ने मंगलवार को दुबई से दिल्ली के लिए एक उड़ान भरी जिसमें 149 यात्री शामिल थे। एयरलाइन ने एक्स पर जानकारी दी कि वे उड़ान एआई 916डी से दुबई से आए यात्रियों और चालक दल का स्वागत करते हैं। पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात के बीच यह किसी भारतीय एयरलाइन की पहली उड़ान है जो आज 149 यात्रियों और चालक दल के आठ सदस्यों के साथ नई दिल्ली पहुंची।

    दुबई में फंसे एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के 143 क्रू सदस्य मंगलवार को एअर इंडिया की विशेष उड़ान एआई918डी से दिल्ली लौट आए। इसके साथ ही दुबई से एमिरेट्स की एक अन्य उड़ान ईके512 भी मंगलवार तड़के दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरी जबकि संकट के कारण रद्द हुई उड़ानों के यात्रियों की मदद के लिए डायल ने कई जरूरी कदम उठाए हैं। अधिकारी ने बताया कि फंसे हुए यात्रियों के लिए बैठने की 400 से अधिक अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गई हैं। यही नहीं दो अतिरिक्त मेडिकल टीम भी तैनात की गई हैं।

  • शुगर के मरीज रोज कितनी चीनी खा सकते हैं ज्यादा मिठास बन सकती है गंभीर खतरा

    शुगर के मरीज रोज कितनी चीनी खा सकते हैं ज्यादा मिठास बन सकती है गंभीर खतरा


    नई दिल्ली :भारत में खुशी के हर मौके पर मुंह मीठा कराने की परंपरा रही है। त्योहार हो या कोई शुभ अवसर मिठाइयों के बिना जश्न अधूरा माना जाता है। लेकिन यही मिठास कई लोगों के लिए खतरे की घंटी बन सकती है खासकर उन लोगों के लिए जो डायबिटीज से जूझ रहे हैं। रिफाइंड शुगर यानी साधारण चीनी का ज्यादा सेवन ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकता है और लंबे समय में गंभीर जटिलताओं की वजह बन सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज के मरीजों के लिए चीनी की कोई तय सुरक्षित न्यूनतम मात्रा नहीं है। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ फिजीशियन डॉ अनिल बंसल के मुताबिक डायबिटीज के मरीजों का शरीर ग्लूकोज को प्रभावी तरीके से प्रोसेस नहीं कर पाता। ऐसे में थोड़ी सी अतिरिक्त चीनी भी ब्लड शुगर को असंतुलित कर सकती है। यही कारण है कि अधिकतर विशेषज्ञ शुगर के मरीजों को रिफाइंड शुगर से पूरी तरह दूरी बनाने की सलाह देते हैं।

    हालांकि जिन मरीजों का ब्लड शुगर पूरी तरह नियंत्रित है वे कभी कभी सीमित मात्रा में चीनी ले सकते हैं लेकिन यह भी डॉक्टर की सलाह के बाद ही होना चाहिए। आम तौर पर दिनभर में एक से दो छोटी चम्मच से अधिक चीनी लेने की सिफारिश नहीं की जाती और कई मामलों में इसे भी टालने की सलाह दी जाती है। क्योंकि शरीर को आवश्यक शुगर फलों दूध और अन्य प्राकृतिक स्रोतों से मिल जाती है इसलिए अलग से रिफाइंड शुगर लेने की जरूरत नहीं होती।

    अगर डायबिटीज का मरीज जरूरत से ज्यादा चीनी खाता है तो उसका ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है। लंबे समय तक हाई शुगर रहने से आंखों पर असर पड़ता है जिससे रेटिनोपैथी का खतरा होता है। किडनी प्रभावित हो सकती है जिससे नेफ्रोपैथी की समस्या पैदा होती है और नसों को नुकसान पहुंच सकता है जिसे न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसके अलावा ज्यादा चीनी शरीर में सूजन बढ़ाती है जिससे घाव भरने में देरी होती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

    सिर्फ डायबिटीज के मरीज ही नहीं बल्कि सामान्य लोगों को भी चीनी का सेवन सीमित रखना चाहिए। American Heart Association के अनुसार स्वस्थ पुरुषों को प्रतिदिन 36 ग्राम यानी लगभग 9 चम्मच से ज्यादा चीनी नहीं लेनी चाहिए जबकि महिलाओं के लिए यह सीमा 25 ग्राम यानी करीब 6 चम्मच है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि इस सीमा में केवल चाय या मिठाई में डाली गई चीनी ही शामिल नहीं है बल्कि फलों दूध और प्रोसेस्ड फूड में मौजूद छिपी हुई शुगर भी गिनी जाती है।

    अधिक चीनी का सेवन इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ा सकता है जिससे भविष्य में डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर प्रीडायबिटीज से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। जितनी कम रिफाइंड शुगर का सेवन होगा उतना ही बेहतर ब्लड शुगर कंट्रोल रहेगा और बीमारी का खतरा कम होगा।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि मीठा खाने की इच्छा होने पर प्राकृतिक विकल्प जैसे फल या सीमित मात्रा में ड्राई फ्रूट्स का सेवन किया जा सकता है। संतुलित आहार नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के साथ ही डायबिटीज को नियंत्रित रखा जा सकता है। मिठास जीवन में जरूरी है लेकिन समझदारी से ली गई मिठास ही सेहत के लिए सुरक्षित होती है।

  • ईरान-इजरायल युद्ध लंबा चला तो भारत में खाद और उर्वरक की हो सकती है किल्लत

    ईरान-इजरायल युद्ध लंबा चला तो भारत में खाद और उर्वरक की हो सकती है किल्लत


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब सिर्फ तेल और गैस पर ही नहीं, बल्कि भारत के कृषि और व्यापार क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच जंग लंबी खिंचती है और खाड़ी देशों में तनाव बढ़ता है, तो भारत को पेट्रोलियम उत्पादों के साथ-साथ उर्वरक, खाद्य सामग्री और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की सप्लाई में भी समस्या हो सकती है।
    उर्वरक की आपूर्ति हो सकती है प्रभावित
    भारत यूरिया और फॉस्फेट जैसे उर्वरकों के बड़े हिस्से के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है। विशेष रूप से डीएपी और यूरिया का करीब 46 प्रतिशत आयात अकेले ओमान से होता है। अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है, तो उर्वरक की कमी के कारण कृषि क्षेत्र पर सीधे असर पड़ेगा और कीमतों में तेजी आएगी।

    सोना और अन्य आयातित उत्पाद महंगे हो सकते हैं
    संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों से भारत में सोने का आयात होता है। शिपिंग लागत बढ़ने से सोने की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसके अलावा खजूर और कुछ प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पादों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। भारत अपनी कुल खजूर का लगभग 80-90 प्रतिशत खाड़ी देशों से आयात करता है, खासकर यूएई और ओमान से। तनाव बढ़ने और समुद्री मार्ग बंद होने की स्थिति में इन उत्पादों की कीमतों में उछाल आ सकता है।

    निर्यात क्षेत्र भी होगा प्रभावित
    भारत के निर्यात पर भी खाड़ी देशों में तनाव का असर पड़ेगा। प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं:-

    खाद्यान्न और चावल: सऊदी अरब, ईराक, यूएई और ओमान भारत के बड़े खरीदार हैं। समुद्री मार्ग बंद होने पर शिपमेंट में देरी होगी, नई आपूर्ति रूट लंबा होगा और ढुलाई लागत बढ़ेगी। भारत का लगभग 50 प्रतिशत बासमती निर्यात खाड़ी देशों और ईरान को जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 60 लाख टन बासमती निर्यात किया, जिसकी कीमत लगभग 50,312 करोड़ रुपये थी।

    मांस और समुद्री उत्पाद: जमी हुई मछली और झींगा जैसी वस्तुएं खाड़ी देशों में बड़ी मांग में हैं। लॉजिस्टिक बाधाओं से निर्यात घट सकता है।

    फार्मास्यूटिकल्स: भारत जेनेरिक दवाओं का बड़ा सप्लायर है। आपूर्ति बाधित होने पर निर्यात राजस्व प्रभावित होगा और कंपनियों को सामान पहुंचाने में मुश्किलें आएंगी।

    इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स: मशीनरी, ऑटो पार्ट्स और निर्माण सामग्री की खेप में देरी से विशेषकर एमएसएमई प्रभावित होंगे। जनवरी में खाड़ी देशों को मशीनरी निर्यात में 16 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी।

    कपड़ा और परिधान: खाड़ी देशों का बाजार रेडीमेड गारमेंट और टेक्सटाइल निर्यात के लिए अहम है। भारत का खाड़ी देशों को कुल परिधान निर्यात लगभग 1.79 बिलियन डॉलर का है। शिपिंग लागत बढ़ने से प्रतिस्पर्धा घट सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चलता है और हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव जारी रहता है, तो किसानों और निर्यातक दोनों के लिए चुनौतियां गंभीर रूप से बढ़ सकती हैं।

  • अफगान-पाक संघर्ष: तालिबान का दावा- 5 दिन में मारे 150 PAK सैनिक, 40 पोस्ट पर किया कब्जा

    अफगान-पाक संघर्ष: तालिबान का दावा- 5 दिन में मारे 150 PAK सैनिक, 40 पोस्ट पर किया कब्जा


    नई दिल्ली। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच दुर्गम डूरंड लाइन पर चल रहा तनाव अब खुले सशस्त्र संघर्ष में बदल चुका है। अफगान सीमा बलों के प्रवक्ता अबीदुल्लाह उकाब ने बताया कि बीते पांच दिनों में अफगान-तालिबान डिफेंस फोर्सेज ने पाकिस्तान की सेना को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उनके अनुसार इस लड़ाई में अब तक लगभग 150 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, करीब 200 घायल हुए हैं और पाकिस्तान के 40 पोस्ट तालिबान-अफगान लड़ाकों के कब्जे में आ गए हैं।
    अफगान-तालिबान का दावा
    अफगान सीमा बलों के प्रवक्ता अबीदुल्लाह उकाब ने मंगलवार को बताया कि अफगान डिफेंस मिनिस्टर के हवाले से कहा गया है कि तालिबान- अफगान फोर्सेज पाकिस्तान की हरकतों का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तानी सेना की कई पोस्टों को बम के जरिए नष्ट किया गया।

    ड्रोन भी हुए तबाह
    अफगान फोर्स ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान द्वारा भेजे गए कई ड्रोन को नष्ट कर दिया गया। इनमें छोटे इंटेलिजेंस ड्रोन भी शामिल हैं, जो अफगान फोर्सेज की गतिविधियों की जासूसी के लिए भेजे गए थे।

    सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
    अफगान-तालिबान ने कुछ वीडियो भी जारी किए हैं, जिनमें उनके लड़ाके पाकिस्तानी पोस्ट पर कब्जा करते हुए दिख रहे हैं। वीडियो में अफगान लड़ाके हथियार, वायरलेस सेट और अन्य सैन्य सामग्री लूटते नजर आए। कई पाकिस्तानी सैनिक हाथ उठाकर भागते हुए दिखे, और उनके उपकरण अफगान कब्जे में चले गए। ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच प्रचार युद्ध को और बढ़ा रहे हैं।

    पाकिस्तानी पक्ष का जवाब
    अफगान दावों पर पाकिस्तान की सेना या सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। वहीं पाकिस्तानी अधिकारियों ने अफगान पक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी कार्रवाई में अफगान तालिबान के सैकड़ों लड़ाके मारे गए हैं और कई ठिकानों पर पाकिस्तान ने कब्जा किया है। वर्तमान में सीमा पर तनाव चरम पर है और अफगान फोर्स अपनी जीत का दावा मजबूत कर रही है।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
    संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है। इस संघर्ष ने क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है और हजारों नागरिक विस्थापित हो चुके हैं।