Blog

  • भारी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, 24,000 के करीब पहुंचा निफ्टी लेकिन वैश्विक तनाव से ऊपरी स्तरों पर दबाव कायम

    भारी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, 24,000 के करीब पहुंचा निफ्टी लेकिन वैश्विक तनाव से ऊपरी स्तरों पर दबाव कायम

    नई दिल्ली । बुधवार की तेज गिरावट के बाद गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार ने राहत की सांस ली और शुरुआती कारोबार में सकारात्मक रुख के साथ शुरुआत की। शुरुआती घंटों में निवेशकों की चुनिंदा खरीदारी के दम पर प्रमुख सूचकांक बढ़त में दिखाई दिए। हालांकि बाजार में रिकवरी के संकेत जरूर मिले, लेकिन निवेशकों का विश्वास अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुआ है। वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच बाजार की चाल अब भी सतर्कता का संकेत दे रही है।

    कारोबार की शुरुआत में निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ने बढ़त दर्ज की। निफ्टी शुरुआती कारोबार में 24,000 के करीब पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स भी हरे निशान में कारोबार करता दिखाई दिया। पिछले कारोबारी सत्र में आई भारी गिरावट के बाद यह तेजी निवेशकों के लिए कुछ राहत लेकर आई, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शुरुआती बढ़त को स्थायी मजबूती का संकेत नहीं माना जा सकता।

    तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के सामने ऊपरी स्तरों पर अब भी मजबूत प्रतिरोध मौजूद है। यदि सूचकांक 24,000 के आसपास मजबूती के साथ टिककर कारोबार करता है और कुछ समय तक स्थिरता बनाए रखता है, तभी आगे की रिकवरी को मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली का दबाव भी लगातार बना रह सकता है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहने की संभावना है।

    बाजार की दिशा पर वैश्विक घटनाक्रम का भी स्पष्ट प्रभाव दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि ऊर्जा लागत लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है तो महंगाई, कंपनियों के परिचालन खर्च और कॉर्पोरेट आय पर दबाव बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी।

    गुरुवार के कारोबार में कुछ बड़े शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। चुनिंदा लार्जकैप कंपनियों में खरीदारी के कारण प्रमुख सूचकांकों को शुरुआती मजबूती मिली। विशेष रूप से फार्मा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही, जबकि रियल एस्टेट सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। इसके विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों पर दबाव बना रहा, जिससे इस सेक्टर का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दिया।

    विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल निवेशक व्यापक खरीदारी के बजाय गुणवत्ता वाले और मजबूत मूलभूत आधार वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति पहले की तुलना में सीमित बनी हुई है और अधिकांश निवेशक वैश्विक संकेतों पर करीबी नजर रख रहे हैं। यही वजह है कि हर बढ़त पर सीमित मुनाफावसूली भी देखने को मिल रही है।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक माहौल में स्थिरता आती है और घरेलू बाजार महत्वपूर्ण स्तरों के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे मजबूत हो सकता है। फिलहाल बाजार में सावधानी के साथ निवेश की रणनीति अपनाई जा रही है और विशेषज्ञ भी चुनिंदा क्षेत्रों में संतुलित निवेश की सलाह दे रहे हैं।

  • Ather Energy पर विदेशी ब्रोकरेज का बड़ा दांव, Nomura ने बढ़ाया ₹1,470 का टारगेट; EV सेक्टर की तेज ग्रोथ से लंबी छलांग की उम्मीद

    Ather Energy पर विदेशी ब्रोकरेज का बड़ा दांव, Nomura ने बढ़ाया ₹1,470 का टारगेट; EV सेक्टर की तेज ग्रोथ से लंबी छलांग की उम्मीद


    नई दिल्ली ।
    भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में तेजी से बढ़ती संभावनाओं के बीच Ather Energy को लेकर निवेशकों का भरोसा मजबूत होता दिखाई दे रहा है। विदेशी ब्रोकरेज Nomura ने कंपनी पर अपनी ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए शेयर का लक्ष्य मूल्य बढ़ाकर 1,470 रुपये कर दिया है। यह मौजूदा बाजार मूल्य की तुलना में उल्लेखनीय बढ़त की संभावना दर्शाता है। ब्रोकरेज का मानना है कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग आने वाले वर्षों में तेज गति से बढ़ेगी और इसका सीधा लाभ उन कंपनियों को मिलेगा जो पूरी तरह इस क्षेत्र पर केंद्रित हैं।

    Nomura के अनुसार भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट अब विकास के ऐसे चरण में पहुंच चुका है जहां अगले कुछ वर्षों में बाजार का विस्तार पहले के अनुमानों से भी अधिक तेज हो सकता है। ब्रोकरेज ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2030 तक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बाजार हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे पूरे उद्योग में मजबूत वार्षिक वृद्धि दर देखने को मिल सकती है और Ather Energy जैसी कंपनियां इस बदलाव का प्रमुख लाभ उठा सकती हैं।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि Ather Energy की सबसे बड़ी ताकत उसका पूर्ण रूप से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर व्यवसाय पर केंद्रित होना है। कंपनी ने हाल के वर्षों में अपने बाजार हिस्से को स्थिर बनाए रखा है और प्रीमियम सेगमेंट में मजबूत पहचान बनाई है। हालांकि फिलहाल कंपनी को उत्पादन क्षमता और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन आने वाले समय में इन समस्याओं के कम होने की संभावना जताई गई है।

    ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी अगले वित्तीय वर्षों में अपेक्षाकृत कम कीमत वाला नया इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में उतार सकती है। यह मॉडल ऐसे मूल्य वर्ग को लक्षित करेगा जहां सबसे अधिक मांग मौजूद है। इससे Ather Energy को नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने और बिक्री में तेज बढ़ोतरी हासिल करने का अवसर मिलेगा। साथ ही कंपनी का नया विनिर्माण संयंत्र शुरू होने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और मौजूदा आपूर्ति बाधाएं काफी हद तक दूर हो सकती हैं।

    Nomura ने कंपनी की बिक्री को लेकर भी सकारात्मक अनुमान पेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार अगले तीन वर्षों में वाहन बिक्री में लगातार मजबूत वृद्धि देखने को मिल सकती है। बढ़ती मांग, नए उत्पाद और विस्तारित उत्पादन क्षमता के कारण कंपनी का कारोबार तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है। इससे राजस्व में भी लगातार सुधार देखने को मिल सकता है।

    ब्रोकरेज का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार होगा। लागत प्रबंधन, बेहतर उत्पाद मिश्रण और कीमतों में संतुलित वृद्धि के चलते परिचालन मार्जिन मजबूत होने की संभावना है। इसके साथ ही कंपनी वित्त वर्ष 2029 तक लाभप्रदता के स्तर पर पहुंच सकती है। यदि प्रतिस्पर्धी कंपनियों को मिलने वाले कुछ प्रोत्साहन समाप्त होते हैं तो Ather Energy के लिए प्रतिस्पर्धी स्थिति और अधिक मजबूत हो सकती है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक परिस्थितियां भी इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। यदि भविष्य में ईंधन की कीमतों में दोबारा बढ़ोतरी होती है तो पारंपरिक वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग और तेज हो सकती है। ऐसे परिदृश्य में Ather Energy का प्रदर्शन मौजूदा अनुमानों से भी बेहतर रहने की संभावना बन सकती है।

    शेयर बाजार में भी कंपनी के स्टॉक में सकारात्मक रुझान देखने को मिला। कारोबार के दौरान शेयर हल्की बढ़त के साथ खुले और निवेशकों की नजर अब कंपनी की आगामी रणनीति, नए उत्पादों और उत्पादन विस्तार पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी अपनी विकास योजनाओं को समय पर लागू करती है तो आने वाले वर्षों में उसका प्रदर्शन निवेशकों की अपेक्षाओं के अनुरूप रह सकता है।

  • Jefferies की नई रिपोर्ट से फार्मा सेक्टर में बढ़ी हलचल, Dr Reddy's और Cipla पर सतर्क रुख बरकरार, Mankind Pharma बनी सबसे मजबूत पसंद

    Jefferies की नई रिपोर्ट से फार्मा सेक्टर में बढ़ी हलचल, Dr Reddy's और Cipla पर सतर्क रुख बरकरार, Mankind Pharma बनी सबसे मजबूत पसंद


    नई दिल्ली ।
    ग्लोबल ब्रोकरेज Jefferies की ताजा रिसर्च रिपोर्ट के बाद गुरुवार को फार्मा सेक्टर एक बार फिर निवेशकों के केंद्र में आ गया। रिपोर्ट में देश की तीन प्रमुख दवा कंपनियों Dr Reddy’s Laboratories, Cipla और Mankind Pharma का विस्तृत मूल्यांकन करते हुए अलग-अलग निवेश राय दी गई है। इस आकलन ने बाजार में इन शेयरों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है और शुरुआती कारोबार में तीनों कंपनियों के शेयरों में अलग-अलग रुख देखने को मिला।

    Jefferies ने अपनी रिपोर्ट में Dr Reddy’s Laboratories पर पहले की तरह अंडरपरफॉर्म रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का मानना है कि मौजूदा बाजार मूल्य की तुलना में इस शेयर में आकर्षक रिटर्न की संभावना सीमित दिखाई देती है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के लिए सबसे अनुकूल कारोबारी परिस्थितियां भी बन जाएं तो संभावित बढ़त सीमित रह सकती है। इसी कारण मौजूदा वैल्यूएशन को निवेश के लिहाज से अधिक आकर्षक नहीं माना गया है।

    Cipla को लेकर भी Jefferies का नजरिया फिलहाल सतर्क बना हुआ है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी के भविष्य का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार में कुछ महत्वपूर्ण दवाओं की नियामकीय मंजूरी पर निर्भर करता है। यदि इन मंजूरियों में अपेक्षा से अधिक समय लगता है तो कंपनी की आय और शेयर प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। इसी संभावना को देखते हुए ब्रोकरेज ने इस शेयर पर भी अंडरपरफॉर्म रेटिंग बनाए रखी है और निवेशकों को फिलहाल सावधानी बरतने की सलाह दी है।

    इसके विपरीत Mankind Pharma को Jefferies ने अपनी सबसे पसंदीदा पसंद के रूप में बनाए रखा है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी में कारोबार सुधार के शुरुआती संकेत दिखाई दे रहे हैं और आने वाले समय में इसका सकारात्मक प्रभाव वित्तीय प्रदर्शन पर देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के लिए जोखिम सीमित नजर आता है, जबकि संभावित रिटर्न अपेक्षाकृत बेहतर हो सकता है। इसी आधार पर ब्रोकरेज ने इस शेयर पर बाय रेटिंग दोहराते हुए सकारात्मक दृष्टिकोण कायम रखा है।

    रिपोर्ट का असर शेयर बाजार में भी साफ दिखाई दिया। कारोबार के दौरान Dr Reddy’s Laboratories के शेयर में गिरावट दर्ज की गई, जबकि Cipla के शेयर में हल्की मजबूती देखने को मिली। दूसरी ओर Mankind Pharma के शेयर में अच्छी बढ़त दर्ज हुई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों ने ब्रोकरेज की सकारात्मक राय को गंभीरता से लिया।

    हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी ब्रोकरेज की रिपोर्ट निवेश का अंतिम आधार नहीं हो सकती। निवेशकों को कंपनी के वित्तीय नतीजों, उद्योग की स्थिति, नियामकीय बदलाव, उत्पाद पाइपलाइन और दीर्घकालिक विकास क्षमता जैसे अन्य पहलुओं का भी मूल्यांकन करना चाहिए। फार्मा सेक्टर में प्रतिस्पर्धा, वैश्विक मांग, अमेरिकी बाजार की नीतियां और दवा अनुमोदन की प्रक्रिया जैसे कारक शेयरों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले तिमाही नतीजे और प्रबंधन की भविष्य की रणनीति इन तीनों कंपनियों के प्रदर्शन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब आगामी वित्तीय परिणामों और आगे आने वाली कारोबारी घोषणाओं पर बनी रहेगी, क्योंकि वही यह तय करेंगे कि Jefferies के मौजूदा अनुमान भविष्य में कितने सटीक साबित होते हैं।

  • Q1 नतीजों से पहले मोतीलाल ओसवाल का बड़ा दांव, BSE से हिंडाल्को तक 5 शेयरों को मॉडल पोर्टफोलियो में दी जगह

    Q1 नतीजों से पहले मोतीलाल ओसवाल का बड़ा दांव, BSE से हिंडाल्को तक 5 शेयरों को मॉडल पोर्टफोलियो में दी जगह

    नई दिल्ली । वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजों का दौर शुरू होने के साथ ही भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की नजर प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन पर टिक गई है। इसी बीच ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने अपने मॉडल पोर्टफोलियो में बदलाव करते हुए पांच प्रमुख कंपनियों के शेयरों को शामिल किया है। फर्म का मानना है कि आने वाले तिमाही नतीजों में इन कंपनियों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत मजबूत रह सकता है, जिससे निवेशकों के लिए बेहतर अवसर बन सकते हैं।

    अर्निंग सीजन की शुरुआत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की बड़ी कंपनी के तिमाही नतीजों के साथ हो रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार कंपनियों की आय और लाभ में स्थिर सुधार देखने को मिल सकता है। इसी अनुमान के आधार पर ब्रोकरेज फर्म ने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों की आय वृद्धि को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया है। फर्म का अनुमान है कि लार्जकैप कंपनियां सालाना आधार पर लगभग 17 प्रतिशत, मिडकैप कंपनियां 15 प्रतिशत और स्मॉलकैप कंपनियां 16 प्रतिशत तक राजस्व वृद्धि दर्ज कर सकती हैं।

    मॉडल पोर्टफोलियो में शामिल कंपनियों में अरविंद फैशन्स को मजबूत उपभोक्ता मांग और मौजूदा स्टोर्स की बिक्री में सुधार का लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के राजस्व में अच्छी बढ़ोतरी के साथ लाभप्रदता में भी सुधार देखने को मिल सकता है। परिचालन मार्जिन और ग्रॉस मार्जिन में सुधार की संभावना को भी सकारात्मक संकेत माना गया है।

    एचडीएफसी एएमसी को लेकर फर्म का आकलन अपेक्षाकृत संतुलित है। अनुमान है कि कंपनी के प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा, जिससे राजस्व वृद्धि सीमित रह सकती है। इसके बावजूद मजबूत परिचालन दक्षता और ऊंचे ईबीआईटीडीए मार्जिन के कारण कंपनी की वित्तीय स्थिति स्थिर बनी रहने की संभावना व्यक्त की गई है।

    ब्रोकरेज ने बीएसई को भी अपने पसंदीदा शेयरों में शामिल किया है। उसका मानना है कि नकद और डेरिवेटिव बाजार में बढ़ती गतिविधियों से कंपनी के ट्रांजैक्शन आधारित राजस्व में सुधार हो सकता है। साथ ही परिचालन लागत पर नियंत्रण और बेहतर दक्षता के कारण कंपनी के मार्जिन में भी सकारात्मक बदलाव आने की संभावना जताई गई है।

    किर्लोस्कर ऑयल इंजन्स के बारे में ब्रोकरेज का अनुमान है कि घरेलू कारोबार में मजबूत मांग कंपनी की आय को सहारा दे सकती है। निर्यात क्षेत्र में फिलहाल कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन आने वाली तिमाहियों में अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार की उम्मीद व्यक्त की गई है। निवेशकों की नजर कंपनी के जेनरेटर सेट कारोबार, मूल्य निर्धारण रणनीति, उच्च क्षमता वाले उत्पादों और विस्तार योजनाओं की प्रगति पर बनी रहेगी।

    हिंडाल्को को लेकर भी ब्रोकरेज ने सकारात्मक रुख अपनाया है। फर्म का मानना है कि वैश्विक बाजार में एल्युमीनियम की कीमतों में मजबूती और घरेलू कारोबार का स्थिर प्रदर्शन कंपनी के परिणामों को समर्थन दे सकता है। हालांकि विदेशी इकाई के एक संयंत्र में हुई आग की घटना के कारण कुछ परिचालन दबाव बने रहने की संभावना भी जताई गई है। इसके बावजूद समग्र कारोबार को मजबूत माना गया है।

    अर्निंग सीजन के दौरान कंपनियों के वास्तविक वित्तीय नतीजे और भविष्य को लेकर दिए जाने वाले प्रबंधन के संकेत बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ऐसे में निवेशकों की निगाह केवल मुनाफे और आय पर ही नहीं, बल्कि कंपनियों की भविष्य की रणनीति, मांग के रुझान और विस्तार योजनाओं पर भी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि तिमाही परिणामों के आधार पर आने वाले दिनों में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और निवेशकों को सोच-समझकर निर्णय लेने की आवश्यकता होगी।

  • रामोजी फिल्म सिटी में प्रभास की फिल्म की शूटिंग के दौरान हुआ हादसा, डॉक्टरों ने कहा- फेफड़ों तक इन्फेक्शन पहुंचा तो जान को खतरा

    रामोजी फिल्म सिटी में प्रभास की फिल्म की शूटिंग के दौरान हुआ हादसा, डॉक्टरों ने कहा- फेफड़ों तक इन्फेक्शन पहुंचा तो जान को खतरा


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के जाने-माने और दिग्गज अभिनेता राजेश शर्मा की तबीयत अचानक बेहद खराब होने के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अपनी आगामी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में व्यस्त चल रहे अभिनेता को सेट पर किसी बेहद जहरीले कीड़े ने काट लिया, जिसके बाद से उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। इस समय डॉक्टरों की एक विशेष टीम उन पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखे हुए है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह खतरनाक संक्रमण उनके फेफड़ों (लंग्स) तक पहुंच गया, तो स्थिति और अधिक चिंताजनक और जानलेवा हो सकती है। इस खबर के सामने आने के बाद से ही बॉलीवुड और बंगाली सिनेमा जगत के साथ-साथ उनके प्रशंसकों में गहरी चिंता व्याप्त है।

    ‘भूत बंगला’, ‘भूल भुलैया 2’, ‘भूल भुलैया 3’, ‘क्रू’, ‘लक्ष्मी’ और ‘डार्लिंग्स’ जैसी कई सुपरहिट और कद्दावर फिल्मों में अपनी बेहतरीन अदाकारी का लोहा मनवा चुके राजेश शर्मा को फिलहाल पश्चिम बंगाल के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में वेंटिलेशन और गहन चिकित्सा इकाई की निगरानी में रखा गया है। अभिनेत्री सुदीपा चटर्जी ने राजेश शर्मा के परिवार की ओर से सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक पोस्ट साझा करते हुए उनके स्वास्थ्य की ताजा स्थिति (हेल्थ अपडेट) के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में किसी को यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें किसी सांप, बिच्छू या मकड़ी में से किसने काटा है, लेकिन इस बाइट का असर पूरी बॉडी पर बेहद घातक साबित हुआ।

    यह दर्दनाक हादसा हैदराबाद की रामोजी फिल्म सिटी में हुआ, जहां राजेश शर्मा सुपरस्टार प्रभास की मुख्य भूमिका वाली एक बड़ी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। शूटिंग का पैकअप होने के बाद राजेश फिल्म सिटी के पास स्थित घने जंगलों से घिरे एक सुनसान इलाके में स्थानीय तकनीशियनों के साथ किसी विषय पर चर्चा कर रहे थे, तभी अचानक उन्हें अपने पैर में किसी जीव के काटने का तीखा अहसास हुआ। शुरुआती पलों में यह मामला बहुत गंभीर नहीं लगा, जिसके चलते उन्होंने सेट पर मौजूद टीम से कोई तात्कालिक मेडिकल सपोर्ट नहीं लिया और लगातार अपना काम करते रहे। उनकी यही लापरवाही बाद में उन पर भारी पड़ गई।

    हादसे के करीब 6 घंटे बीत जाने के बाद अभिनेता राजेश शर्मा को अपने दाएं पैर में असहनीय और तेज दर्द महसूस होने लगा, जिसके साथ ही उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी। सेहत में आ रही इस गिरावट के बावजूद उन्होंने कोलकाता वापस लौटने के लिए फ्लाइट पकड़ी। हवाई सफर के दौरान ही उन्हें अत्यधिक तेज बुखार ने जकड़ लिया और शरीर में भारी बेचैनी होने लगी। अगले दिन सुबह स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होने पर उन्हें आनन-फानन में कोलकाता के ढाकुरिया स्थित मणिपाल हॉस्पिटल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत एडमिट कर इलाज शुरू कर दिया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उनका तेज बुखार कम नहीं हो रहा है और उन्हें सांस लेने में भी भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।

    मध्य प्रदेश। अस्पताल से आ रही ताजा चिकित्सकीय रिपोर्ट के अनुसार, जहरीला इन्फेक्शन अब उनके दाएं पैर की उंगलियों से लेकर घुटने तक बहुत तेजी से फैल चुका है। शरीर के जिस-जिस हिस्से में यह जहर और संक्रमण पहुंच रहा है, वहां त्वचा पर बड़े-बड़े और दर्दनाक छाले पड़ गए हैं। मुख्य चिकित्सक डॉ. अविजित भट्टाचार्य और उनकी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार अभिनेता की स्थिति को स्थिर करने के प्रयास में जुटी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि राजेश शर्मा खतरे से पूरी तरह बाहर हैं, क्योंकि संक्रमण के चलते उनके शरीर के भीतर ब्लड क्लॉट (खून के थक्के) बनने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है।

    चिकित्सकीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ये ब्लड क्लॉट्स खून के बहाव के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं, तो यह पल्मोनरी एम्बोलिज़्म जैसी घातक स्थिति पैदा कर सकता है जो सीधे तौर पर जानलेवा साबित होती है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन और उनके पारिवारिक सदस्य लगातार डॉक्टरों के संपर्क में हैं और उन्हें हर संभव बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर सुदीपा चटर्जी की इस भावुक पोस्ट के वायरल होने के बाद से ही फिल्म इंडस्ट्री के तमाम सह-कलाकार, निर्देशक और फैंस राजेश शर्मा के शीघ्र स्वस्थ होने और उनके सुरक्षित दीर्घायु जीवन के लिए लगातार प्रार्थनाएं कर रहे हैं।

  • शाहरुख खान की फिल्म 'किंग' के 450 करोड़ के भारी-भरकम बजट पर निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने तोड़ी चुप्पी, सोशल मीडिया पर दिया करारा जवाब

    शाहरुख खान की फिल्म 'किंग' के 450 करोड़ के भारी-भरकम बजट पर निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने तोड़ी चुप्पी, सोशल मीडिया पर दिया करारा जवाब

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान की आने वाली फिल्म ‘किंग’ को लेकर इन दिनों सिनेमा जगत और सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा बनी हुई है। इस फिल्म को शाहरुख खान के पूरे फिल्मी करियर की अब तक की सबसे महंगी और भव्य फिल्म बताया जा रहा था। मीडिया और सिनेमाई गलियारों में लगातार यह दावा किया जा रहा था कि इस मेगा-प्रोजेक्ट का कुल बजट लगभग 450 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। इन तमाम कयासों और बड़ी खबरों के बीच अब फिल्म के निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने खुद सामने आकर सच्चाई बयां की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इन दावों को पूरी तरह से सिरे से खारिज करते हुए एक बड़ा बयान दिया है, जिसने फैंस के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है।

    फिल्म ‘किंग’ की रिलीज का प्रशंसक काफी समय से बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इस फिल्म के जरिए शाहरुख खान लगभग तीन साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर मुख्य भूमिका में बड़े पर्दे पर धमाकेदार वापसी करने जा रहे हैं। इसी भारी उत्सुकता के बीच एक हालिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि यह फिल्म बजट के मामले में भारतीय सिनेमा के पिछले कई बड़े रिकॉर्ड तोड़ देगी और इसका निर्माण 450 करोड़ रुपये की अभूतपूर्व लागत से किया जा रहा है। बजट की यह खबर जैसे ही इंटरनेट पर वायरल हुई, वैसे ही फिल्म को लेकर तरह-तरह की वित्तीय चर्चाएं शुरू हो गईं।

    मध्य प्रदेश। इन तमाम उड़ती खबरों और दावों के बीच बुधवार रात को फिल्म के निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक बेहद संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली ट्वीट किया। उन्होंने बजट से जुड़ी खबरों की ओर इशारा करते हुए अपने ट्वीट में सिर्फ एक शब्द लिखा— ‘गलत’। इसके अलावा सिद्धार्थ ने अपने पोस्ट में कोई अन्य स्पष्टीकरण या विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। हालांकि, उनका यह एक शब्द का साफ जवाब इंटरनेट यूज़र्स और समीक्षकों के लिए यह समझने के लिए काफी था कि शाहरुख खान की फिल्म ‘किंग’ का वास्तविक बजट 450 करोड़ रुपये नहीं है और मीडिया में चल रहे आंकड़े महज कोरी अफवाह हैं।

    अगर शाहरुख खान की अब तक की सबसे महंगी फिल्मों के इतिहास पर नजर डालें, तो उनके करियर में साल 2023 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘जवान’ इस सूची में सबसे ऊपर काबिज है। इस एक्शन-थ्रिलर फिल्म का कुल निर्माण बजट लगभग 400 करोड़ रुपये आंका गया था। वहीं, उनके करियर की दूसरी सबसे बड़ी और महंगी फिल्म ‘पठान’ मानी जाती है, जिसका कुल बजट 350 करोड़ रुपये के आसपास दर्ज किया गया था। यही वजह थी कि कयास लगाए जा रहे थे कि आगामी फिल्म ‘किंग’ इन दोनों ही फिल्मों के बजट रिकॉर्ड को आसानी से पार कर जाएगी, लेकिन निर्देशक के ट्वीट ने इन अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है।

    फिल्म के जॉनर और मेकिंग की बात करें तो ‘किंग’ एक हाई-ऑक्टेन एक्शन और स्टंट-बेस्ड फिल्म होने वाली है, जिसमें शाहरुख खान एक बार फिर अपने खतरनाक एक्शन अवतार में दिखाई देंगे। फिल्म की भव्यता को बढ़ाने के लिए इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टंट्स और कई शानदार विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) सीक्वेंसेज का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस पर मेकर्स पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। यही कारण है कि फिल्म के बजट को लेकर इतनी बड़ी-बड़ी रिपोर्ट्स सामने आ रही थीं।

    बजट के अलावा यह फिल्म अपनी बेहतरीन और कद्दावर स्टार कास्ट को लेकर भी लगातार सुर्खियों बटोर रही है। इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी यह है कि इसमें शाहरुख खान पहली बार अपनी बेटी सुहाना खान के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करते हुए नजर आने वाले हैं। इसके अलावा फिल्म की मुख्य स्टार कास्ट में बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री रानी मुखर्जी, दीपिका पादुकोण, जयदीप अहलावत, अभिषेक बच्चन और अनिल कपूर जैसे प्रतिभावान और बड़े सितारे भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे, जो इस प्रोजेक्ट को इस साल की सबसे बड़ी मल्टीस्टारर फिल्म बनाते हैं।

    फिल्म की रिलीज टाइमलाइन को लेकर जो जानकारियां सामने आ रही हैं, उसके मुताबिक शाहरुख खान की यह बहुप्रतीक्षित फिल्म इस साल के अंत में बड़े पर्दे पर दस्तक दे सकती है। मेकर्स इसे दिसंबर के महीने में क्रिसमस के खास और बड़े मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज करने की पूरी योजना बना रहे हैं। फिलहाल, निर्देशक सिद्धार्थ आनंद के इस तीखे खंडन के बाद अब फैंस और ट्रेड एक्सपर्ट्स के बीच इस बात की नई बहस छिड़ गई है कि अगर फिल्म का बजट 450 करोड़ रुपये नहीं है, तो आखिर असल लागत कितनी है।

  • रोहित शेट्टी के शो 'खतरों के खिलाड़ी 15' की रिलीज डेट टली, अब इस नई तारीख से शुरू होगा डर का सफर

    रोहित शेट्टी के शो 'खतरों के खिलाड़ी 15' की रिलीज डेट टली, अब इस नई तारीख से शुरू होगा डर का सफर


    नई दिल्ली ।
    टेलीविजन के सबसे चर्चित और रोमांचक स्टंट बेस्ड रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ का बेसब्री से इंतजार कर रहे दर्शकों को बड़ा झटका लगा है। मशहूर फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के इस शो की रिलीज डेट को ऐन वक्त पर आगे बढ़ा दिया गया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह रियलिटी शो इसी महीने 25 जुलाई से ऑन-एयर होने वाला था, लेकिन कुछ तकनीकी और प्रशासनिक कारणों के चलते मेकर्स ने इसे पोस्टपोन करने का फैसला लिया है। अब यह शो अगस्त के पहले हफ्ते से दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए टेलीविजन स्क्रीन पर दस्तक देगा। इस अचानक हुए बदलाव की वजह से फैंस को अपने पसंदीदा सितारों को हैरतअंगेज स्टंट करते देखने के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा।

    शो की रिलीज डेट टलने के पीछे मुख्य वजह देश में चल रहा ‘टीआरपी ब्लैकआउट’ बताया जा रहा है। दरअसल, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक जब तक टीवी चैनल्स और शोज को नया लाइसेंस प्राप्त नहीं हो जाता और वे नई टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी 2026 के सभी नियमों का पूरी तरह पालन नहीं करने लगते, तब तक शोज की टीआरपी रेटिंग्स सार्वजनिक नहीं की जाएंगी। इस प्रशासनिक गतिरोध और तकनीकी बदलाव के कारण ही चैनल और मेकर्स ने शो की लॉन्चिंग को कुछ दिनों के लिए टालना ही बेहतर समझा।

    चैनल की ओर से जारी किए गए नए आधिकारिक प्रोमो के साथ अब शो की नई रिलीज डेट का भी ऐलान कर दिया गया है। ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ अब 1 अगस्त से हर शनिवार और रविवार रात 9 बजे प्रसारित किया जाएगा। नए प्रोमो को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए मेकर्स ने कैप्शन में लिखा है कि ‘लगेगी जान की बाजी, क्योंकि शुरू हो रहा है डर का नया दौर।’ इस नए प्रोमो के सामने आने के बाद दर्शकों के बीच शो को लेकर उत्साह और ज्यादा बढ़ गया है। यह शो इस बार कलर्स टीवी के साथ-साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म जियो हॉटस्टार पर भी स्ट्रीम किया जाएगा।

    मध्य प्रदेश। इस बीच शो से जुड़ी एक राहत भरी खबर यह है कि ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ की पूरी शूटिंग सफलता के साथ पूरी हो चुकी है। इस बार रोमानिया की खूबसूरत और खतरनाक लोकेशंस पर कंटेस्टेंट्स ने रोहित शेट्टी के कड़े इम्तिहानों का सामना किया है। इस सीजन की सबसे खास बात यह है कि इसमें कुछ बिल्कुल नए चेहरों के साथ-साथ शो के इतिहास के कुछ बेहद मजबूत पुराने कंटेस्टेंट्स की भी वापसी कराई गई है। नए और पुराने खिलाड़ियों के बीच होने वाली यह सीधी टक्कर इस सीजन को बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण बनाने वाली है।

    इस साल डर का सामना करने वाले कन्फर्म कंटेस्टेंट्स की बात करें तो शो में गौरव खन्ना, इंटरनेट सेंसेशन ओरी, स्टैंडअप कॉमेडियन हर्ष गुजराल, अविका गौर, विशाल आदित्य सिंह, शगुन शर्मा, पूर्व विनर रुबीना दिलैक, जैस्मिन भसीन, फरहाना भट्ट, रितविक धनजानी, अविनाश मिश्रा और करण वाही जैसे बड़े नाम शामिल हैं। सभी कंटेस्टेंट्स अपना-अपना सफर पूरा करके भारत वापस लौट चुके हैं। सोशल मीडिया पर इन खिलाड़ियों के अनुभव और स्टंट्स को लेकर अभी से कई तरह की चर्चाएं और कयास लगाए जाने शुरू हो गए हैं।

    इंटरनेट पर लीक हुई कुछ शुरुआती रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि इस सीजन में अविनाश मिश्रा, फरहाना भट्ट और रितविक धनजानी ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर टॉप 3 में जगह बना ली है, जबकि टीवी के मशहूर अभिनेता करण वाही चौथे नंबर पर रहे हैं। वहीं, कुछ दूसरी मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिनाले का मुख्य मुकाबला करण वाही और फरहाना भट्ट के बीच देखने को मिलेगा और यही दोनों इस सीजन के टॉप 2 कंटेस्टेंट्स बनकर उभरे हैं। हालांकि, इन दावों पर अभी तक मेकर्स या चैनल की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    पिछले सीजन की याद दिलाते हुए बताते चलें कि ‘खतरों के खिलाड़ी 14’ की ट्रॉफी अभिनेता करणवीर मेहरा ने अपने नाम की थी, जिन्होंने बाद में बिग बॉस के घर में भी अपनी जीत का परचम लहराया था। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि नई रेटिंग्स पॉलिसी के दौर में शुरू हो रहा यह नया सीजन दर्शकों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है और इस बार रोहित शेट्टी के खतरनाक स्टंट्स को मात देकर कौन सा खिलाड़ी सीजन 15 का अल्टीमेट विनर बनता है।

  • रियालिटी शो 'लॉकअप 2' में गौरव खन्ना की धमाकेदार एंट्री, पत्नी आकांक्षा चमोला को सामने देख छलके आंसू

    रियालिटी शो 'लॉकअप 2' में गौरव खन्ना की धमाकेदार एंट्री, पत्नी आकांक्षा चमोला को सामने देख छलके आंसू

    नई दिल्ली । ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के मशहूर और विवादित रियलिटी शो ‘लॉकअप 2’ का आगामी एपिसोड बेहद धमाकेदार और भावनाओं से भरपूर होने वाला है। शो के मेकर्स द्वारा जारी किए गए नए प्रोमो वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। इस वीडियो में टीवी जगत के मशहूर अभिनेता गौरव खन्ना विजिटर के तौर पर अपनी पत्नी आकांक्षा चमोला से मिलने के लिए जेल के भीतर दाखिल होते हुए नजर आ रहे हैं। पिछले काफी समय से अपनी निजी जिंदगी और आपसी मतभेदों को लेकर चर्चा में चल रहे इस कपल का शो के भीतर आमना-सामना होते ही माहौल पूरी तरह से भावुक हो गया। लंबे समय बाद एक-दूसरे को अपने सामने पाकर दोनों ही कलाकार अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए।

    गौरव खन्ना की इस शो में एंट्री को बेहद फिल्मी और भव्य अंदाज में फिल्माया गया है। प्रोमो में गौरव खन्ना का चेहरा सामने आने से पहले बैकग्राउंड में उनकी ही आवाज में एक बेहद दर्दभरी और दिल छू लेने वाली शायरी गूंजती है। गौरव कहते हैं कि एक समंदर है जो काबू में है, लेकिन एक कतरा है जो मुझसे संभाला नहीं जाता। एक उम्र बितानी है उसके बगैर और एक लम्हा है जो मुझसे गुजारा नहीं जाता। इस बेहद भावुक शायरी के बाद गौरव खन्ना सीधे कैदियों की सेल की तरफ कदम बढ़ाते हैं और अपनी पत्नी आकांक्षा की सेल के पास जाकर रुक जाते हैं। आकांक्षा को देखते ही उनके मुंह से पहला वाक्य निकलता है कि ‘बैंड बजा दिया तूने’, जिसे सुनकर आकांक्षा खुद को संभाल नहीं पाती हैं।

    दरअसल, गौरव खन्ना के जेल में पहुंचने से ठीक पहले वाले एपिसोड में आकांक्षा चमोला का एक बेहद उग्र और हिंसक रूप दर्शकों को देखने को मिला था। जेल के अंदर सह-प्रतियोगी श्रेया कालरा और आकांक्षा चौधरी के बीच किसी बात को लेकर तगड़ी बहस शुरू हो गई थी। यह आपसी विवाद देखते ही देखते इतना बढ़ गया कि इस हाथापाई के दौरान आकांक्षा के चेहरे पर गंभीर चोट लग गई। चेहरे पर चोट लगते ही आकांक्षा ने पूरी तरह से अपना आपा खो दिया और जेल के नियमों को ताक पर रखकर भारी बवाल काट दिया। उन्होंने गुस्से में आकर श्रेया का पूरा बिस्तर बेड से उठाकर नीचे फेंक दिया और वहां मौजूद माधुरी के बेड को भी पानी डालकर पूरी तरह गीला कर दिया।

    आकांक्षा का यह हिंसक और आक्रामक रवैया देखकर जेल में मौजूद अन्य सभी कैदी और टीवी दर्शक पूरी तरह हैरान रह गए। इतना ही नहीं, उन्होंने शिल्पा शिंदे और श्रेया पर बेहद तीखे पर्सनल अटैक भी किए। आकांक्षा ने शिल्पा के अतीत पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर उनके खुद के बच्चे होते तो उन्हें समझ आता कि एक मां पर क्या बीतती है। वहीं दूसरी तरफ, उन्होंने श्रेया को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि वह उनके सारे राज दुनिया के सामने खोल देंगी और उनके बाहरी संबंधों का पर्दाफाश कर देंगी। जेल में मचे इस अभूतपूर्व उपद्रव के बाद जब शो की होस्ट फराह खान वहां पहुंचीं, तो उन्होंने सभी कैदियों को कड़ी फटकार लगाई और साफ किया कि इस दुर्व्यवहार के लिए उन्हें बख्शा नहीं जाएगा और इसका फैसला जजमेंट डे पर होगा।

    मध्य प्रदेश। जेल के भीतर मचे इस भारी बवाल के तुरंत बाद गौरव खन्ना की एंट्री ने इस शो के रोमांच को दोगुना कर दिया है। दर्शक इस कड़वे मोड़ पर गौरव के आने से बेहद उत्साहित हैं, क्योंकि इसी शो के दौरान आकांक्षा ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया था कि वह और गौरव खन्ना पिछले एक साल से एक-दूसरे से अलग रह रहे हैं। आकांक्षा ने शो के सह-प्रतियोगी राम कपूर से बात करते हुए यह भी साफ कर दिया था कि गौरव से तलाक लेने के बाद वह अपनी पूरी जिंदगी अकेले गुजारेंगी और दोबारा कभी शादी नहीं करेंगी। उन्होंने राम कपूर से इंडस्ट्री में दोबारा काम शुरू करने के लिए मार्गदर्शन और मदद भी मांगी थी, जिस पर राम कपूर ने उन्हें पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया था।

    अब जब गौरव खन्ना खुद इस शो का हिस्सा बनकर आकांक्षा के सामने आ चुके हैं, तो हर कोई यह जानने के लिए बेताब है कि वह अपनी टूटती शादी और तलाक के फैसले पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या इस शो के मंच पर दोनों के बीच की कड़वाहट दूर होगी या फिर दूरियां और ज्यादा बढ़ जाएंगी, यह आने वाले एपिसोड में साफ हो जाएगा। फिलहाल, गौरव को अपनी सेल के सामने खड़ा देखकर आकांक्षा बुरी तरह टूट गईं और रोते हुए अपने आंसू पोंछती नजर आईं। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और पारिवारिक इमोशन्स के कॉम्बिनेशन ने ‘लॉकअप 2’ की टीआरपी और दर्शकों की उत्सुकता को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

  • मराठी फिल्म 'देऊल बंद 2' के डीसीपी बिल माफी को लेकर विवादों में आए शाहरुख खान, डायरेक्टर बोले- "अच्छा इंसान सिर्फ इंसान होता है"

    मराठी फिल्म 'देऊल बंद 2' के डीसीपी बिल माफी को लेकर विवादों में आए शाहरुख खान, डायरेक्टर बोले- "अच्छा इंसान सिर्फ इंसान होता है"


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान इन दिनों एक मराठी फिल्म की मदद करने को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों के निशाने पर आ गए हैं। हाल ही में रिलीज हुई सुपरहिट मराठी फिल्म ‘देऊल बंद 2’ के डिजिटल सिनेमा पैकेज (डीसीपी) के लाखों रुपये के बिल को अपनी कंपनी के माध्यम से माफ करने के बाद शाहरुख खान को ट्रोल किया जा रहा है। कुछ कट्टरपंथी यूज़र्स ने सोशल मीडिया पर यह सवाल उठाने शुरू कर दिए कि एक मुस्लिम अभिनेता ने हिंदू देवता और संस्कृति पर आधारित फिल्म की वित्तीय सहायता क्यों की। इस पूरे विवाद और बढ़ती बहस को देखते हुए अब फिल्म के निर्देशक प्रवीण तारडे खुलकर शाहरुख खान के समर्थन में आ गए हैं और उन्होंने नफरत फैलाने वालों को करारा जवाब दिया है।

    यह कोई पहला मौका नहीं है जब शाहरुख खान को इस फिल्म से जुड़े किसी मामले में निशाना बनाया गया हो। इससे पहले जब फिल्म के डायरेक्टर प्रवीण तारडे ने एक इंटरव्यू के दौरान सुपरस्टार की इस दिलदारी और आर्थिक मदद का पहली बार खुलासा किया था, तब भी सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर काफी हंगामा हुआ था कि आखिर शाहरुख को इस फिल्म की सफलता का श्रेय क्यों दिया जा रहा है। अब एक बार फिर जब यह मुद्दा सोशल मीडिया पर गरमाया, तो प्रवीण तारडे ने एक पॉडकास्ट के जरिए ट्रोल्स की क्लास लगाते हुए अभिनेता का बचाव किया और फिल्म उद्योग के भीतर के भाईचारे को सर्वोपरि बताया।

    प्रवीण तारडे ने एक प्रसिद्ध पॉडकास्ट में बात करते हुए साफ शब्दों में कहा कि इस पूरे मामले में हिंदू और मुस्लिम का मुद्दा कहां से आ जाता है। उन्होंने कहा कि शाहरुख खान भी इसी फिल्म इंडस्ट्री का एक सम्मानित हिस्सा हैं और वह खुद भी इसी बिरादरी से आते हैं। तारडे ने फिल्म के निर्माण के समय आए आर्थिक संकट का जिक्र करते हुए बताया कि जब फिल्म रिलीज के लिए तैयार थी, तब उनकी टीम के पास सिर्फ 12 से 13 लाख रुपये ही बचे थे, जबकि तकनीकी काम का कुल बिल लगभग 43 लाख रुपये के आसपास पहुंच गया था। ऐसी विकट स्थिति में वे मदद की उम्मीद लेकर शाहरुख खान की कंपनी के पास पहुंचे थे।

    डायरेक्टर ने आगे बताया कि जब यह मामला शाहरुख खान के सामने आया, तो उन्होंने सबसे पहले अपनी तकनीकी टीम से फिल्म की गुणवत्ता और उसकी कहानी के बारे में फीडबैक मांगा। टीम की ओर से फिल्म को बेहद शानदार बताए जाने के बाद शाहरुख ने बिना किसी देरी के अपनी टीम को आदेश दिया कि फिल्म की डीसीपी तुरंत निर्माताओं को सौंप दी जाए ताकि फिल्म की रिलीज में कोई बाधा न आए। शाहरुख ने साफ कहा था कि पैसों का हिसाब-किताब बाद में आराम से देख लिया जाएगा। प्रवीण तारडे ने सवाल किया कि क्या किसी संकटग्रस्त फिल्म निर्माता के लिए ऐसा सोचना और तुरंत मदद करना एक बड़े दिल वाले इंसान की दरियादिली को नहीं दर्शाता है।

    ट्रोल्स को आड़े हाथों लेते हुए प्रवीण तारडे ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति इतने बड़े और साफ दिल से किसी की मदद के लिए आगे आता है, तो क्या सिर्फ उसकी जाति या मजहब देखकर उसकी भलाई और अच्छाई को नजरअंदाज कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे समय पर मदद करने वाले इंसान का शुक्रिया अदा करना हर किसी का नैतिक कर्तव्य बनता है। जहां तक हिंदुत्व या अपनी विचारधारा का सवाल है, उन्हें समाज में किसी भी व्यक्ति के सामने खुद को सही साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। शाहरुख खान का आभार व्यक्त करने का उनकी व्यक्तिगत विचारधारा से कोई टकराव नहीं है, क्योंकि एक अच्छा इंसान हमेशा अच्छा इंसान ही रहता है।

    गौरतलब है कि तमाम विवादों और सोशल मीडिया पर चल रही नकारात्मकता के बावजूद फिल्म ‘देऊल बंद 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया है। धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर आधारित इस मराठी फिल्म ने दुनिया भर के सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगभग 100 करोड़ रुपये का ग्रॉस बिजनेस किया है। इसके साथ ही यह फिल्म मराठी सिनेमा के इतिहास की सबसे सफल और सबसे ज्यादा कमाई करने वाली चुनिंदा फिल्मों की सूची में शामिल हो गई है। फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है, जिसने यह साबित कर दिया है कि कला और अच्छी कहानी को दर्शकों के बीच किसी भी प्रकार के विवाद से प्रभावित नहीं किया जा सकता।

  • फीफा विश्व कप के बीच अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ पर एफबीआई का शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से मेसी की टीम की बढ़ी मुश्किलें

    फीफा विश्व कप के बीच अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ पर एफबीआई का शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से मेसी की टीम की बढ़ी मुश्किलें

    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 के रोमांच के बीच डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना की मुश्किलें मैदान के बाहर काफी बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। मिस्र के खिलाफ हुए मुकाबले में वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) के विवादास्पद फैसलों को लेकर चल रही बहस अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ (एएफए) एक गंभीर कानूनी संकट में घिर गया है। अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई ने महासंघ की वित्तीय गतिविधियों और संदिग्ध लेन-देन को लेकर एक व्यापक जांच शुरू कर दी है। इस जांच के सामने आने के बाद वैश्विक फुटबॉल जगत में हड़कंप मच गया है और टूर्नामेंट के बीच अर्जेंटीना की टीम पर मानसिक दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ ने अमेरिकी बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली का उपयोग करके सैकड़ों मिलियन डॉलर की राशि को किस प्रकार स्थानांतरित किया। एफबीआई इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या इन भारी-भरकम वित्तीय लेन-देन के पीछे मनी लॉन्ड्रिंग अथवा कोई अन्य वित्तीय अपराध छिपा हुआ है। अमेरिकी कानूनों के उल्लंघन के संदेह में शुरू हुई इस कार्रवाई ने एएफए के शीर्ष नेतृत्व को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया है। इस वित्तीय नेटवर्क के तार अमेरिका के फ्लोरिडा से लेकर अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स तक फैले हुए हैं।

    इस पूरे मामले में अमेरिका के फ्लोरिडा में स्थित एक निजी कंपनी मुख्य संदिग्ध के रूप में उभरकर सामने आई है। यह कंपनी विदेशों में अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ की तमाम वित्तीय जिम्मेदारियों और व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन करती है। दस्तावेजों के विश्लेषण से पता चला है कि इस कंपनी के मालिकों ने अमेरिका के पांच प्रमुख वित्तीय संस्थानों में खाते खोल रखे थे। इन खातों के माध्यम से बीते कुछ समय में सैकड़ों मिलियन डॉलर का लेन-देन किया गया, जिसने अमेरिकी सुरक्षा और वित्तीय निगरानी एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

    वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, इस निजी कंपनी ने महासंघ की करीब 260 मिलियन अमेरिकी डॉलर की भारी-भरकम आय का प्रबंधन किया था। हालांकि, बैंक रिकॉर्ड की प्रारंभिक समीक्षा में यह बात सामने आई है कि इस विशाल राशि का केवल एक छोटा हिस्सा ही फुटबॉल महासंघ के वास्तविक संचालन और आवश्यक खर्चों में इस्तेमाल हुआ दिखाई देता है। इसके विपरीत, लगभग 57 मिलियन डॉलर की एक बड़ी रकम विभिन्न अज्ञात कंपनियों और लाभार्थियों को स्थानांतरित कर दी गई। इस विशाल ट्रांसफर के पीछे दस्तावेजों में कोई स्पष्ट आर्थिक कारण या व्यावसायिक औचित्य नजर नहीं आ रहा है, जिससे संदेह और गहरा गया है।

    जांचकर्ताओं को शक है कि जिन कंपनियों को करोड़ों डॉलर भेजे गए, उनमें से कई कागजी थीं और उनकी तरफ से किसी भी प्रकार की वास्तविक सेवा प्रदान करने का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, कुछ संदिग्ध कंपनियों का नियंत्रण ऐसे व्यक्तियों के हाथों में पाया गया है जो ब्यूनस आयर्स और बारिलोचे जैसे क्षेत्रों में रहते हैं और सरकारी सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। एक तरफ जहां देश की आम जनता सरकारी मदद पर निर्भर है, वहीं उनके नाम पर चल रही कंपनियों के खातों में करोड़ों डॉलर का यह संदिग्ध लेन-देन मिलना गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है।

    एएफए के अध्यक्ष क्लाउडियो टैपिया इस मेगा इवेंट से पहले ही कई तरह के विवादों के कारण लगातार आलोचनाओं का सामना कर रहे थे। उनके कार्यकाल में घरेलू लीग के ढांचे में किए गए अलोकप्रिय बदलाव और विश्व कप की तैयारियों के दौरान बेहद कमजोर टीमों के खिलाफ खेले गए मैत्री मैचों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों और प्रशंसकों ने गंभीर सवाल उठाए थे। अब एफबीआई की इस ताजा कार्रवाई ने उनके नेतृत्व पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। टैपिया पर पहले से ही भ्रष्टाचार से जुड़ी कुछ अन्य आंतरिक जांचों का साया मंडरा रहा था।

    इसके अलावा, 58 वर्षीय क्लाउडियो टैपिया का अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई के साथ भी लंबे समय से तीखा टकराव चल रहा है। दोनों के बीच अर्जेंटीना के फुटबॉल क्लबों के मालिकाना हक और उनके व्यावसायिक मॉडल को लेकर गंभीर वैचारिक मतभेद हैं। कुछ समय पहले ही सरकार की ओर से दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद टैपिया पर टैक्स चोरी के गंभीर आरोप भी लगे थे। इस राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध के कारण घरेलू मैदानों पर भी टैपिया को भारी विरोध का सामना करना पड़ा है, जहां एक मुकाबले के दौरान दर्शकों ने सार्वजनिक रूप से उनकी हूटिंग की थी।

    मैदान के भीतर अर्जेंटीना की टीम ने क्वार्टर फाइनल में जगह बनाकर अपनी खेल क्षमता का प्रदर्शन तो किया है, लेकिन कप्तान लियोनेल मेसी और मिस्र के कोच के बीच हुई तीखी बहस और रेफरी के फैसलों पर मचे बवाल ने पहले ही टीम को विवादों में रखा था। अब इस सब के बीच एएफए की वित्तीय गड़बड़ियों पर एफबीआई की इस बड़ी जांच ने अर्जेंटीना फुटबॉल के भविष्य और उसकी प्रतिष्ठा पर एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में यदि अमेरिकी एजेंसियां कोई सख्त कदम उठाती हैं, तो इसका सीधा असर विश्व कप में टीम के अभियान और खिलाड़ियों के मनोबल पर पड़ना तय माना जा रहा है।