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  • संत रविदास के समानता और सामाजिक समरसता के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प, नितिन नवीन ने गिनाई प्राथमिकताएं

    संत रविदास के समानता और सामाजिक समरसता के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प, नितिन नवीन ने गिनाई प्राथमिकताएं

    नई दिल्ली । भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित समरसता संकल्प अभियान के पावन माटी कलश वंदन एवं वितरण कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य संत रविदास के सामाजिक समरसता, समानता और निष्काम कर्म के विचारों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सभी वर्गों को साथ लेकर वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने का संकल्प लिया गया है।

    नितिन नवीन ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर पार्टी उनके विचारों और सामाजिक संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, समाज में समानता और आपसी सद्भाव की भावना को मजबूत करना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी का भी उन्होंने स्वागत किया।

    उन्होंने बताया कि समरसता संकल्प अभियान की शुरुआत 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर की गई थी। अभियान के आरंभ से ही देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। नवीन ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के दिन अभियान शुरू करने का उद्देश्य संत रविदास से जुड़े इस कार्यक्रम को गुरु परंपरा के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से आगे बढ़ाना था।

    भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भारत की परंपरा संतों और महापुरुषों के विचारों से समृद्ध रही है। उनके मुताबिक, जब समाज के सामने असमानता या कठिन परिस्थितियां आईं, तब संतों और महापुरुषों ने लोगों को सामाजिक एकता और सुधार का रास्ता दिखाया। उन्होंने संत रविदास के विचारों को इसी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

    नितिन नवीन ने कहा कि संत रविदास ने ऐसे समय में सामाजिक समानता की बात की, जब समाज कई तरह की ऊंच-नीच और कुप्रथाओं से प्रभावित था। उनके विचारों ने सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने और समाज में समरसता की भावना मजबूत करने का काम किया। भाजपा इसी संदेश को अभियान के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही कल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य गरीब और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने दावा किया कि करीब 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सरकार की योजनाओं की भूमिका रही है।

    कोरोना महामारी के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने का उल्लेख करते हुए नवीन ने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई व्यक्ति भूखा न सोए। उन्होंने इसे सामाजिक सरोकार और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने की नीति से जोड़ा।

    नितिन नवीन ने कहा कि सामाजिक समरसता केवल किसी एक वर्ग का विषय नहीं है, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है। उनके मुताबिक, यही भावना विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बनेगी।

    भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी संत रविदास के आदर्शों और प्रधानमंत्री मोदी के विकास दृष्टिकोण को साथ लेकर सामाजिक एकता और देश के विकास की दिशा में काम करेगी। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग को जोड़कर 2047 तक विकसित भारत का सपना पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

  • सरकार ने गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात से हटाई पाबंदी, बेहतर उत्पादन और स्टॉक के बीच बड़ा फैसला


    नई दिल्ली ।केंद्र सरकार ने गेहूं से बने कई प्रमुख उत्पादों के निर्यात को लेकर बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने गेहूं या मेस्लिन आटा, मैदा, सूजी, होलमील आटा और मिश्रित गेहूं के आटे को प्रतिबंधित निर्यात श्रेणी से हटाकर मुक्त श्रेणी में डाल दिया है। अब इन उत्पादों का निर्यात बिना पहले लगाए गए प्रतिबंधों के किया जा सकेगा।

    विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से सोमवार को जारी अधिसूचना में निर्यात नीति में किए गए इस बदलाव की जानकारी दी गई। इस फैसले से गेहूं आधारित उत्पादों के कारोबार से जुड़े निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी और वे मांग के अनुसार इन उत्पादों की विदेशी बाजारों में आपूर्ति कर सकेंगे।

    सरकार ने वर्ष 2022 में घरेलू खाद्य सुरक्षा और कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से गेहूं तथा गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात पर कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं। 13 मई 2022 को गेहूं की निर्यात नीति को मुक्त श्रेणी से प्रतिबंधित श्रेणी में कर दिया गया था।

    इसके बाद अगस्त 2022 में गेहूं के आटे के निर्यात पर भी प्रतिबंध लागू किया गया था। उस समय वैश्विक बाजार में गेहूं की आपूर्ति को लेकर दबाव बना हुआ था। रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई थी, जिससे भारतीय गेहूं की विदेशी मांग में बढ़ोतरी हुई और घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी थी।

    सरकार ने उस समय देश की बड़ी आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और गेहूं तथा गेहूं के आटे की कीमतों को नियंत्रित रखने को प्राथमिकता दी थी। हालांकि, प्रतिबंधों के दौरान कुछ विशेष परिस्थितियों में गेहूं से बने चुनिंदा उत्पादों के निर्यात की अनुमति भी दी जाती रही।

    अब परिस्थितियों में बदलाव के बाद सरकार ने निर्यात नीति में ढील देने का फैसला किया है। इस वर्ष फरवरी में बेहतर स्टॉक उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं और अतिरिक्त पांच लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी।

    इस फैसले की पृष्ठभूमि में देश में गेहूं और कुल खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 5.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 37.6563 करोड़ टन रहने का अनुमान है। वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 35.7732 करोड़ टन था।

    फसलवार आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में चावल का उत्पादन 15.4024 करोड़ टन रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के 15.0184 करोड़ टन के मुकाबले अधिक है। इसी तरह गेहूं का उत्पादन भी बढ़ने का अनुमान है।

    वर्ष 2025-26 में गेहूं का उत्पादन 12.0657 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह 11.7945 करोड़ टन था। उत्पादन में इस बढ़ोतरी और बेहतर स्टॉक उपलब्धता ने सरकार को गेहूं आधारित उत्पादों के निर्यात पर लगी पाबंदियों में बदलाव की गुंजाइश दी है।

    नीति में बदलाव से आटा, मैदा और सूजी जैसे उत्पादों के निर्यात कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही भारतीय कृषि उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच बढ़ाने का अवसर भी बनेगा। हालांकि, घरेलू बाजार में कीमतों और उपलब्धता पर सरकार की निगरानी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

  • पत्नी की दूसरी शादी के बाद क्या पहले पति की एलिमनी खत्म हो जाती है, जानिए भारतीय कानून में गुजारा भत्ते का नियम

    पत्नी की दूसरी शादी के बाद क्या पहले पति की एलिमनी खत्म हो जाती है, जानिए भारतीय कानून में गुजारा भत्ते का नियम


    नई दिल्ली ।
    तलाक के बाद पत्नी को मिलने वाले गुजारा भत्ते यानी एलिमनी को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर महिला दोबारा शादी कर ले तो क्या पहले पति को पहले की तरह आर्थिक सहायता देते रहना होगा। भारतीय कानून में इस स्थिति को लेकर अलग-अलग प्रावधान मौजूद हैं और दूसरी शादी के बाद पूर्व पति की जिम्मेदारी पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

    सामान्य कानूनी स्थिति यह है कि तलाकशुदा महिला के दोबारा विवाह करने के बाद पहले पति से मिलने वाला नियमित गुजारा भत्ता जारी रहने का आधार खत्म हो सकता है। इसकी वजह यह है कि पुनर्विवाह के बाद महिला के भरण-पोषण की परिस्थितियां बदल जाती हैं। हालांकि, किसी मामले में अंतिम स्थिति संबंधित कानून, अदालत के आदेश और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

    हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 स्थायी गुजारा भत्ता और भरण-पोषण से संबंधित प्रावधान देती है। इसके तहत अदालत परिस्थितियों में बदलाव होने पर पहले दिए गए आदेश में बदलाव कर सकती है। पत्नी के पुनर्विवाह को भी ऐसे महत्वपूर्ण बदलावों में माना जा सकता है, जिसके आधार पर पूर्व पति अदालत से एलिमनी के आदेश में संशोधन या उसे समाप्त करने की मांग कर सकता है।

    इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल दूसरी शादी की जानकारी सामने आते ही हर स्थिति में भुगतान अपने आप समाप्त मान लिया जाएगा। यदि पहले पति के पक्ष में कोई एलिमनी आदेश मौजूद है, तो उसके प्रभाव और उसे बदलने की प्रक्रिया को संबंधित न्यायालय के आदेश के अनुसार देखा जाता है। इसलिए किसी व्यक्ति को अपने स्तर पर भुगतान बंद करने के बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनाना जरूरी हो सकता है।

    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 144 भी पत्नी, बच्चों और माता-पिता के भरण-पोषण से संबंधित प्रावधान देती है। इस व्यवस्था में भी तलाकशुदा महिला के पुनर्विवाह की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, किसी विशेष मामले में लागू कानूनी प्रावधान और न्यायालय के आदेश के आधार पर परिणाम अलग हो सकते हैं।

    मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं के मामलों में भी पुनर्विवाह का पहले पति से मिलने वाले भरण-पोषण पर प्रभाव पड़ता है। हालांकि, व्यक्तिगत कानून और मामले की परिस्थितियों के कारण कानूनी स्थिति को हमेशा संबंधित प्रावधानों और न्यायिक आदेशों के संदर्भ में समझना चाहिए।

    सबसे महत्वपूर्ण बात बच्चों के भरण-पोषण को लेकर है। यदि तलाकशुदा पत्नी ने दूसरी शादी कर ली है, लेकिन पहले पति से उसके बच्चे हैं, तो बच्चों की जिम्मेदारी केवल मां की दूसरी शादी के कारण खत्म नहीं होती। बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और आवश्यक खर्चों की जिम्मेदारी उनके जैविक पिता पर बनी रह सकती है।

    इसलिए पत्नी की दूसरी शादी और बच्चों के अधिकार को अलग-अलग कानूनी मुद्दों के रूप में देखा जाता है। पूर्व पत्नी को मिलने वाली एलिमनी पर पुनर्विवाह का प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन बच्चों के भरण-पोषण का अधिकार स्वतंत्र विषय है।

    एलिमनी से जुड़े मामलों में आय, आर्थिक स्थिति, अदालत का पूर्व आदेश, पुनर्विवाह की स्थिति और बच्चों की जिम्मेदारी जैसे कई तथ्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए किसी भी मामले में केवल सामान्य नियम के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित अदालत के आदेश और लागू कानून को देखना जरूरी है। यही वजह है कि एलिमनी बंद करने या बदलने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

  • सपा के साथ आम आदमी पार्टी की संभावित एंट्री से INDIA गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस के सामने नई चुनौती

    सपा के साथ आम आदमी पार्टी की संभावित एंट्री से INDIA गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस के सामने नई चुनौती

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पहले ही साथ चुनाव लड़ने की तैयारी का संकेत दे चुके हैं, लेकिन अब आम आदमी पार्टी की संभावित एंट्री ने विपक्षी गठबंधन की रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि अगर सपा और आप के बीच सीटों को लेकर सहमति बनती है तो कांग्रेस के सामने गठबंधन के भीतर नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

    सियासी हलकों में चर्चा है कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी को विधानसभा चुनाव के लिए करीब 15 से 20 सीटें देने पर विचार कर सकती है। इस संभावना को सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आप नेता संजय सिंह के बीच हुई मुलाकातों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद यूपी की चुनावी रणनीति को लेकर अटकलें तेज हुई हैं।

    संजय सिंह और अखिलेश यादव की इसी साल अप्रैल में मुलाकात हुई थी। इसके बाद 23 अगस्त को भी दोनों नेताओं के बीच मुलाकात हुई। सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 15 से 20 सीटों की मांग कर सकती है। हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

    सपा और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन के बीच आप को साथ लाने की कोशिश कांग्रेस के लिए आसान नहीं मानी जा रही है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि 2027 में उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब और गोवा में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पहले से मौजूद है। ऐसे में दोनों दलों को एक ही गठबंधन में लाने का फैसला कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता है।

    इसके अलावा आम आदमी पार्टी के INDIA गठबंधन से दूरी बनाने वाले बयानों ने भी स्थिति को जटिल बनाया है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद आप की उत्तर प्रदेश में प्रत्यक्ष चुनावी भूमिका नहीं रही थी। पार्टी ने यूपी में अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे और समाजवादी पार्टी को समर्थन दिया था।

    2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 349 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी को कुल 3 लाख 47 हजार 187 वोट मिले थे। हालांकि उसका प्रदर्शन व्यापक रूप से प्रभावी नहीं रहा, लेकिन कुछ विधानसभा क्षेत्रों में उसे अपेक्षाकृत अधिक मत मिले थे। रुधौली में आप उम्मीदवार को 24,367 और खलीलाबाद में 25,123 वोट मिले थे।

    इसके अलावा लोनी, साहिबाबाद, नोएडा और मोहनलालगंज जैसे क्षेत्रों में भी पार्टी के उम्मीदवारों को पांच हजार से अधिक वोट मिले थे। यही कारण है कि आगामी चुनाव में आप इन क्षेत्रों को संभावित सीट दावेदारी के आधार के रूप में देख सकती है। यदि सपा इन क्षेत्रों में आप को जगह देती है तो सीट बंटवारे की प्रक्रिया में कांग्रेस की भूमिका और रणनीति महत्वपूर्ण हो जाएगी।

    2024 के लोकसभा चुनाव में आप ने उत्तर प्रदेश से उम्मीदवार नहीं उतारे थे और सपा को समर्थन दिया था। चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल ने लखनऊ में अखिलेश यादव के साथ प्रेस वार्ता भी की थी। वहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान सपा ने कांग्रेस के बजाय आम आदमी पार्टी का समर्थन किया था।

    ऐसे में उत्तर प्रदेश में सपा, कांग्रेस और आप के संभावित समीकरण को लेकर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। यदि आप की गठबंधन में औपचारिक एंट्री होती है तो सीटों के बंटवारे के साथ-साथ तीनों दलों के बीच क्षेत्रीय प्रभाव और चुनावी रणनीति को लेकर भी बातचीत करनी होगी। फिलहाल सपा और आप के बीच संभावित तालमेल की चर्चा ने यूपी की विपक्षी राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।

  • प्रयागराज में अशरफ की कुर्क जमीन पर अवैध कब्जे और प्लाटिंग का खुलासा, तीन बिल्डरों पर एफआईआर दर्ज

    प्रयागराज में अशरफ की कुर्क जमीन पर अवैध कब्जे और प्लाटिंग का खुलासा, तीन बिल्डरों पर एफआईआर दर्ज


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद के भाई अशरफ की गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क की गई जमीन पर कथित अवैध कब्जे और प्लाटिंग का मामला सामने आया है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद इस मामले में तीन बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित जमीन को पहले ही कुर्क किया जा चुका था और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर तय थी।

    मामला एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के शाहा उर्फ पीपल गांव से जुड़ा है। दर्ज एफआईआर के मुताबिक, आराजी संख्या 1115 की करीब 0.4680 हेक्टेयर जमीन गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क की गई थी। इस जमीन को सरकारी अभिरक्षा में रखा गया था और संबंधित थाना प्रभारी को इसका कस्टोडियन बनाया गया था।

    आरोप है कि मोहम्मद मुस्लिम, मोहम्मद नसरत और मोहम्मद आफताब अहमद ने इस जमीन पर कब्जा कर वहां अवैध तरीके से प्लाटिंग शुरू कर दी। आरोप यह भी है कि जमीन को प्लॉट के रूप में विकसित कर उसे बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। तीनों को अतीक अहमद के कथित फाइनेंसर के तौर पर भी बताया गया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

    प्रशासन को जब जमीन पर कथित कब्जे और प्लाटिंग की जानकारी मिली तो अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। 22 अगस्त को एसडीएम सदर की मौजूदगी में बुलडोजर कार्रवाई की गई और जमीन पर की गई कथित अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया गया। इसके बाद मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

    सोमवार को लेखपाल मनीष कुमार की ओर से तीनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। अब जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कुर्क जमीन पर कब्जा किस तरह किया गया और वहां प्लाटिंग की गतिविधियां कब से चल रही थीं।

    इस घटना ने कुर्क संपत्तियों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। जब जमीन गैंगस्टर एक्ट के तहत पहले से कुर्क थी और उसकी देखरेख के लिए जिम्मेदारी निर्धारित थी, तब कथित तौर पर वहां निर्माण और प्लाटिंग की गतिविधियां कैसे शुरू हुईं, यह जांच का अहम हिस्सा रहेगा। प्रशासन यह भी देखेगा कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों और बिक्री की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही।

    मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में यदि किसी अन्य व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन का ध्यान जमीन की स्थिति, कथित कब्जे और प्लाटिंग से जुड़े रिकॉर्ड की जांच पर है।

    अतीक अहमद और अशरफ की हत्या 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में उस समय हुई थी, जब दोनों को चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था। दोनों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे और उनकी कई संपत्तियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। ऐसे में कुर्क जमीन पर कथित कब्जे का यह मामला प्रशासनिक निगरानी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अब जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कुर्क संपत्ति पर कब्जा और प्लाटिंग किस अवधि में हुई, इसमें किन लोगों की भूमिका रही और जमीन से संबंधित गतिविधियों को रोकने में प्रशासनिक स्तर पर कोई चूक हुई या नहीं। फिलहाल तीनों नामजद आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

  • कमजोर वैश्विक संकेतों और पश्चिम एशिया तनाव के बीच शेयर बाजार गिरा, सेंसेक्स 172 अंक टूटा और निफ्टी 24,220 पर बंद

    कमजोर वैश्विक संकेतों और पश्चिम एशिया तनाव के बीच शेयर बाजार गिरा, सेंसेक्स 172 अंक टूटा और निफ्टी 24,220 पर बंद


    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। सप्ताह के पहले कारोबारी सत्र में शुरुआती बढ़त के बावजूद प्रमुख सूचकांक कारोबार के अंत तक लाल निशान में पहुंच गए। निवेशकों के बीच बॉन्ड यील्ड बढ़ने और ईरान से जुड़े घटनाक्रम को लेकर सतर्कता दिखाई दी, जिसका असर बाजार की धारणा पर पड़ा।

    कारोबार समाप्त होने पर 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 171.72 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,369.11 पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 32.95 अंक यानी 0.14 प्रतिशत फिसलकर 24,219.05 पर पहुंच गया। इस तरह दोनों प्रमुख सूचकांकों ने दिन का कारोबार गिरावट के साथ समाप्त किया।

    हालांकि, बाजार ने सोमवार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की थी। सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 77,540.83 के स्तर के मुकाबले 88.72 अंक की बढ़त लेकर 77,629.56 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 248.56 अंक चढ़कर 77,789.40 के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ने से सेंसेक्स 339.17 अंक गिरकर 77,201.66 के निचले स्तर तक भी पहुंच गया।

    निफ्टी 50 भी 24,252 के पिछले बंद स्तर से मामूली बढ़त के साथ 24,285.05 पर खुला। कारोबार के दौरान सूचकांक ने 24,313 का इंट्रा-डे उच्चतम स्तर बनाया। इसके बाद इसमें गिरावट आई और निफ्टी 24,144.30 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि कारोबार के अंतिम चरण में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला और यह 24,220 के करीब बंद हुआ।

    व्यापक बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.13 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि बड़ी कंपनियों के साथ-साथ छोटे और मध्यम शेयरों में भी निवेशकों की धारणा पूरी तरह मजबूत नहीं रही।

    क्षेत्रीय सूचकांकों में आईटी, एनर्जी, मेटल और रियल एस्टेट को छोड़कर ज्यादातर सूचकांक गिरावट में बंद हुए। पीएसयू बैंक इंडेक्स में करीब एक प्रतिशत की गिरावट रही। निजी बैंक, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स क्षेत्र भी दबाव में रहे। वहीं धातु और ऊर्जा से जुड़े शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई दी।

    निफ्टी 50 में एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टीएमपीवी के शेयरों में प्रमुख गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर जेएसडब्ल्यू स्टील, हिंडाल्को, टाटा स्टील, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, डॉ. रेड्डीज और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती मजबूती के बाद ट्रेडर्स ने ईरान पर संभावित नए अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले अपनी पोजीशन कम की। निफ्टी कारोबार के दौरान 24,200 के अहम सपोर्ट स्तर से नीचे गया, लेकिन बंद होने तक इस स्तर के आसपास वापस आ गया।

    आने वाले सत्र में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। ईरान पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंध और उसके जवाब में आने वाली प्रतिक्रिया बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा एनएसई की मासिक एफएंडओ एक्सपायरी भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटना होगी।

    तकनीकी स्तर पर 24,200 से 24,000 के बीच निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं 24,350 का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है। इस स्तर के ऊपर टिकने पर बाजार में तेजी मजबूत हो सकती है, जबकि सपोर्ट टूटने पर दबाव बढ़ने की संभावना रहेगी।

  • मलेरिया से बचना है तो आज से बदलें ये आदतें, मच्छरों की रोकथाम से लेकर बचाव तक जानें जरूरी बातें

    मलेरिया से बचना है तो आज से बदलें ये आदतें, मच्छरों की रोकथाम से लेकर बचाव तक जानें जरूरी बातें


    नई दिल्ली। बारिश का मौसम आते ही मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इनमें मलेरिया भी एक प्रमुख बीमारी है जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। मलेरिया से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि मच्छरों की संख्या को नियंत्रित किया जाए और उनके काटने से खुद को सुरक्षित रखा जाए। खासकर बरसात में घर के आसपास जमा पानी पर नजर रखना जरूरी है क्योंकि ठहरा हुआ पानी मच्छरों के पनपने की जगह बन सकता है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर मलेरिया के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    मलेरिया से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों के काटने से बचाव करना है। शाम और रात के समय जब मच्छरों की गतिविधि बढ़ सकती है तब पूरी बांह के कपड़े पहनना बेहतर रहता है। घर में खिड़कियों और दरवाजों पर मच्छररोधी जाली लगाई जा सकती है। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल भी उपयोगी है। जरूरत के अनुसार मच्छर भगाने वाली क्रीम या अन्य मच्छररोधी साधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। बच्चों को मच्छरों से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

    घर और आसपास पानी जमा न होने देना मलेरिया की रोकथाम का दूसरा महत्वपूर्ण तरीका है। गमलों की प्लेटों कूलर की टंकियों बाल्टियों पुराने टायरों छतों और अन्य स्थानों पर जमा पानी को नियमित रूप से खाली करें। पानी की टंकियों और ऐसे सभी बर्तनों को ढककर रखें जिनमें पानी जमा रहता है। कूलर का पानी भी नियमित रूप से बदलें और उसकी सफाई करें। अगर आसपास किसी जगह लंबे समय से पानी जमा है तो उसे हटाने या संबंधित स्थानीय निकाय को इसकी सूचना देने की कोशिश करें।

    मलेरिया के शुरुआती लक्षणों को पहचानना भी जरूरी है। बुखार ठंड लगना सिरदर्द शरीर में कमजोरी पसीना आना और बदन दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में मतली या उल्टी जैसी परेशानी भी हो सकती है। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर मलेरिया की पुष्टि नहीं की जा सकती। ऐसे लक्षण होने पर स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करके आवश्यक जांच करानी चाहिए।

    मलेरिया के इलाज में देरी करना नुकसानदायक हो सकता है। खासकर तेज बुखार लगातार कमजोरी बेहोशी सांस लेने में परेशानी दौरे या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। बच्चों गर्भवती महिलाओं बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है इसलिए इनके मामले में लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    मलेरिया से बचाव केवल व्यक्तिगत सावधानी तक सीमित नहीं है। पूरे समुदाय को मिलकर मच्छरों के प्रजनन स्थल कम करने होंगे। घर के आसपास सफाई रखना नालियों में पानी जमा न होने देना और लंबे समय तक खुले में पानी न छोड़ना सामूहिक रूप से बीमारी के खतरे को कम कर सकता है। बारिश के मौसम में साफ सफाई और मच्छर नियंत्रण को लेकर जागरूकता सबसे जरूरी हथियार है।

    ध्यान रखें कि मलेरिया से बचने का सबसे अच्छा तरीका मच्छरों के काटने से सुरक्षा और मच्छरों के प्रजनन को रोकना है। यदि बुखार या मलेरिया से जुड़े लक्षण दिखाई दें तो खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह और जांच कराना बेहतर है। सही समय पर पहचान और इलाज से गंभीर जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है।

  • केला कब खाएं और किस तरह? नाश्ते से लेकर रात तक जानिए सही समय, फायदे और जरूरी सावधानियां

    केला कब खाएं और किस तरह? नाश्ते से लेकर रात तक जानिए सही समय, फायदे और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली। केला ऐसा फल है जो स्वादिष्ट होने के साथ आसानी से उपलब्ध भी होता है। यही वजह है कि इसे लोग नाश्ते से लेकर वर्कआउट के पहले और बाद तक अलग अलग समय पर खाते हैं। लेकिन केला खाने के सही समय को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं। कुछ लोग मानते हैं कि सुबह खाली पेट केला खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद है जबकि कुछ लोग रात में केला खाने से बचने की सलाह देते हैं। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो केले को खाने का कोई एक तय समय नहीं है। इसे व्यक्ति अपनी दिनचर्या और शरीर की जरूरत के अनुसार खा सकता है।

    केला कार्बोहाइड्रेट फाइबर पोटैशियम और विटामिन बी6 जैसे जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देने में मदद करता है और यही कारण है कि इसे वर्कआउट से पहले या बाद में भी स्नैक के तौर पर खाया जाता है। पोटैशियम मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज के साथ शरीर में तरल पदार्थों के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं विटामिन बी6 शरीर की कई जरूरी जैविक प्रक्रियाओं में मदद करता है। हालांकि केवल केला खाने से शरीर की सभी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं होतीं इसलिए इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाना बेहतर माना जाता है।

    सुबह खाली पेट केला खाने की बात करें तो अगर किसी व्यक्ति को इससे पेट में परेशानी नहीं होती है तो वह इसे नाश्ते में शामिल कर सकता है। लेकिन कुछ लोगों को खाली पेट फल खाने के बाद पेट फूलने भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है। ऐसे लोगों के लिए केले को अकेले खाने के बजाय ओट्स दही या किसी अन्य संतुलित नाश्ते के साथ लेना बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे भोजन में दूसरे जरूरी पोषक तत्व भी शामिल हो जाते हैं।

    केला और दूध का शेक या स्मूदी भी काफी लोकप्रिय है। केला शरीर को कार्बोहाइड्रेट देता है जबकि दूध से प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्व मिल सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को दूध और केला दोनों आसानी से पचते हैं तो यह संयोजन सामान्य डाइट का हिस्सा हो सकता है। हालांकि जिन लोगों को दूध में मौजूद लैक्टोज से परेशानी होती है उन्हें गैस या पेट फूलने जैसी समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में परेशानी का कारण केवल केला मानना सही नहीं होगा।

    अब सवाल आता है कि क्या रात में केला खाना नुकसानदायक है। सामान्य तौर पर रात में केला खाने पर कोई सार्वभौमिक रोक नहीं है। अगर किसी व्यक्ति को रात में केला खाने से पेट भारी या असहज महसूस नहीं होता तो वह इसे खा सकता है। लेकिन अगर सोने से पहले केला खाने के बाद पाचन संबंधी परेशानी महसूस होती है तो इसे दिन के समय लेना बेहतर रहेगा।

    कुछ लोगों को केला खाते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए। डायबिटीज वाले लोगों को केले की मात्रा और अपनी पूरी डाइट का ध्यान रखना जरूरी है क्योंकि इसमें प्राकृतिक शर्करा और कार्बोहाइड्रेट मौजूद होते हैं। वहीं किडनी की बीमारी वाले लोगों को पोटैशियम की मात्रा को लेकर डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लेनी चाहिए। कुल मिलाकर केला किसी एक खास समय का फल नहीं है। अपनी पाचन क्षमता और जरूरत के अनुसार इसे नाश्ते वर्कआउट के आसपास या दिन के किसी अन्य समय लिया जा सकता है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए केले के साथ दूसरे फलों सब्जियों साबुत अनाज दाल और प्रोटीन स्रोतों को भी डाइट में शामिल करना जरूरी है।

  • कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचे मुख्य निर्वाचन आयुक्त, पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को समझाई जिम्मेदारी

    कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचे मुख्य निर्वाचन आयुक्त, पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को समझाई जिम्मेदारी

    नई दिल्ली ।भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार सोमवार को लखनऊ स्थित अपने पुराने विद्यालय कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचे। कभी जिस संस्थान में उन्होंने विद्यार्थी के रूप में शिक्षा हासिल की थी, वहीं लौटकर उन्होंने कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान उनका अंदाज शिक्षक जैसा रहा और उन्होंने छात्रों को लोकतंत्र, चुनाव, मताधिकार तथा जिम्मेदार नागरिकता से जुड़े विषयों की जानकारी दी।

    अपने छात्र जीवन को याद करते हुए ज्ञानेश कुमार ने कहा कि विद्यालय केवल किताबी ज्ञान हासिल करने की जगह नहीं होता, बल्कि यह व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। उनके अनुसार, अच्छे शिक्षक, अनुशासन और विद्यालय का वातावरण विद्यार्थियों के सोचने और आगे बढ़ने के तरीके को प्रभावित करते हैं। उन्होंने अपने जीवन में विद्यालय से मिली सीख को भी याद किया।

    उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि स्कूल और कॉलेज का समय जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दौर में शामिल होता है। इसी दौरान व्यक्ति के विचार, व्यवहार और भविष्य की दिशा तय होने लगती है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने शिक्षकों की बातों और विद्यालय में मिलने वाले अनुभवों को गंभीरता से लें और उनसे सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखें।

    विद्यार्थियों के साथ बातचीत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मतदान केवल संवैधानिक अधिकार नहीं है, बल्कि देश के भविष्य के निर्माण में नागरिकों की भागीदारी का माध्यम भी है। जागरूक और जिम्मेदार मतदाता लोकतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    ज्ञानेश कुमार ने विद्यार्थियों को मताधिकार से जुड़ी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि कक्षा 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाले कई विद्यार्थी आने वाले वर्षों में पहली बार मतदान करने की उम्र में पहुंचेंगे। ऐसे में उनके लिए अभी से चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ विकसित करना उपयोगी होगा।

    संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने चुनाव प्रक्रिया, मतदाता बनने की पात्रता, मतदान और निष्पक्ष चुनाव से जुड़े सवाल पूछे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने उनकी जिज्ञासाओं का जवाब देते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं में युवाओं की सक्रिय भागीदारी के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों का जागरूक होना आवश्यक है।

    कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज पहुंचने पर ज्ञानेश कुमार ने अपने पुराने दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ से उनका पुराना और गहरा संबंध रहा है। शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाया और अब लंबे अंतराल के बाद उसी विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच लौटना उनके लिए विशेष अनुभव रहा।

    उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि जीवन के अलग-अलग चरण व्यक्ति को अलग-अलग अनुभव देते हैं। वर्तमान समय उनके लिए सीखने और अपने भविष्य की नींव मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि विद्यालय से मिलने वाली शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुशासन, चुनौतियों का सामना करने का साहस और सही विचारों को अपनाने की क्षमता भी विकसित करती है।

    इस मुलाकात को ज्ञानेश कुमार ने अतीत और वर्तमान के बीच संवाद जैसा अनुभव बताया। एक समय वह स्वयं इसी विद्यालय के विद्यार्थी थे और अब उसी परिसर में विद्यार्थियों को लोकतंत्र और नागरिक जिम्मेदारियों के बारे में बता रहे थे। कार्यक्रम में चुनावी साक्षरता और जागरूक मतदाता बनने का संदेश प्रमुख रहा। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए युवा विद्यार्थियों के बीच लोकतांत्रिक जागरूकता बढ़ाने की यह पहल विशेष महत्व रखती है।

  • मंगलवार की जगह सोमवार को होगी महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक, वर्षा बंगले पर महायुति नेताओं के डिनर ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चाएं

    मंगलवार की जगह सोमवार को होगी महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक, वर्षा बंगले पर महायुति नेताओं के डिनर ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चाएं


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र में साप्ताहिक कैबिनेट बैठक के कार्यक्रम में अचानक बदलाव ने राज्य की राजनीति में चर्चाओं को तेज कर दिया है। नियमित रूप से मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक अब सोमवार दोपहर सह्याद्री गेस्ट हाउस में आयोजित की जाएगी। बैठक के कार्यक्रम में हुए इस बदलाव की आधिकारिक वजह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का मंगलवार को मुंबई से बाहर धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होना बताई गई है।

    कैबिनेट बैठक के दिन में बदलाव अपने आप में प्रशासनिक कारणों से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन इसके तुरंत बाद होने वाली महायुति के प्रमुख नेताओं की बैठक ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास वर्षा बंगले पर सोमवार को गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के लिए डिनर का कार्यक्रम रखा गया है।

    इस कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े प्रमुख नेताओं की मौजूदगी रहने की संभावना है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के बीच भी चर्चा प्रस्तावित है। ऐसे में कैबिनेट बैठक और उसके बाद होने वाली राजनीतिक बैठक को लेकर गठबंधन के भीतर समन्वय और रणनीति से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की संभावना जताई जा रही है।

    मुख्यमंत्री फडणवीस का हालिया दिल्ली दौरा भी इस पूरे घटनाक्रम के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। दिल्ली दौरे के बाद राज्य में राजनीतिक गतिविधियों के बढ़ने और अब कैबिनेट बैठक के कार्यक्रम में बदलाव के कारण सत्ता के गलियारों में संभावित बदलावों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।

    हालांकि, अभी तक सरकार या महायुति की ओर से किसी बड़े राजनीतिक बदलाव, मंत्रिमंडल फेरबदल या गठबंधन के समीकरण में परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए मौजूदा परिस्थितियों को फिलहाल राजनीतिक गतिविधियों और आपसी समन्वय के संदर्भ में ही देखा जा रहा है।

    सरकारी स्तर पर कैबिनेट बैठक और गठबंधन नेताओं की बातचीत का उद्देश्य सरकार के कामकाज में बेहतर तालमेल, आपसी मतभेदों को दूर करना और प्रशासनिक फैसलों में तेजी लाना बताया जा रहा है। महायुति सरकार के सामने विभिन्न राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर समन्वय बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

    सोमवार को होने वाली बैठक में सरकार से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय लिए जाने की संभावना है। इसके बाद वर्षा बंगले पर होने वाली बैठक में गठबंधन के नेताओं के बीच राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर विचार-विमर्श हो सकता है।

    महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के बीच समन्वय सत्ता के संचालन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में शीर्ष नेताओं का एक साथ बैठना राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। हालांकि, बैठक के एजेंडे को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिलहाल कैबिनेट बैठक को एक दिन पहले करने का कारण प्रशासनिक कार्यक्रम बताया गया है, जबकि उसके बाद होने वाली महायुति नेताओं की बैठक ने संभावित राजनीतिक फैसलों को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में इस बैठक के बाद सामने आने वाले फैसलों और नेताओं के बयानों से तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।