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  • Ind vs Eng: टी-20 सीरीज का चौथा मुकाबला आज ब्रिस्टल में…. जीत के इरादे से उतरेगी टीम इंडिया

    Ind vs Eng: टी-20 सीरीज का चौथा मुकाबला आज ब्रिस्टल में…. जीत के इरादे से उतरेगी टीम इंडिया


    नई दिल्ली।
    इंडिया वर्सेस इंग्लैंड (India vs England) 5 मैच की टी20 सीरीज (T20 Series) का चौथा मुकाबला आज यानी गुरुवार, 9 जुलाई को ब्रिस्टल में खेला जाना है। श्रेयस अय्यर की अगुवाई वाली टीम इंडिया (Team India) के पास अब इस सीरीज को जीतने का तो कोई मौका नहीं है, वह बस अब ज्यादा से ज्यादा ड्रॉ करा सकती है। IND vs ENG टी20 सीरीज का पहला मैच बारिश की वजह से धुल गया था, वहीं दूसरे और तीसरे मुकाबले में मेजबानों ने भारत को धूल चटाई। भारत बनाम इंग्लैंड आज के मैच की टाइमिंग को लेकर भी सवाल है। इस सीरीज के मैच भारतीय समयानुसार काफी देरी से शुरू हो रहे हैं, वहीं एक मैच शाम 7 बजे भी खेला गया था। तो आईए मैच से जुड़ी कुछ अहम जानकारियों पर एक नजर डालते हैं-

    India vs England चौथा टी20 आज यानी गुरुवार, 9 जुलाई को खेला जाएगा।
    इंडिया वर्सेस इंग्लैंड चौथा टी20 ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड में खेला जाएगा।
    IND vs ENG 4th T20I भारतीय समयानुसार रात 10 बजे ही शुरू होगा, जबकि टॉस के लिए दोनों कप्तान आधा घंटा पहले मैदान पर उतरेंगे।


    इंडिया वर्सेस इंग्लैंड चौथा टी20 फ्री में कैसे देखें लाइव?

    भारतीय फैंस DD स्पोर्ट्स पर इंडिया बनाम इंग्लैंड क्रिकेट मैच लाइव देख सकते हैं। हालांकि, फ्री लाइव टेलीकास्ट सिर्फ उन दर्शकों के लिए उपलब्ध है जो DD फ्री डिश और टेरेस्ट्रियल नेटवर्क के जरिए चैनल एक्सेस कर रहे हैं। ब्रॉडकास्टिंग राइट्स की पाबंदियों के कारण यह एयरटेल, टाटा प्ले, या डिश टीवी जैसे प्राइवेट DTH प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं है।


    IND vs ENG 4th T20I की लाइव स्ट्रीमिंग और टीवी पर कैसे देखें लाइव?

    India vs England चौथे टी20 का मजा आप टीवी पर स्टार स्पोर्ट्स पर उठा सकते हैं। वहीं इस मैच की लाइव स्ट्रीमिंग दो प्लेटफॉर्म डिज्नी प्लस हॉटस्टार और सोनी लिव पर होगी। आप कहीं भी भारत बनाम इंग्लैंड मैच लाइव देख सकते हैं। इसके अलावा लाइव स्कोर और मैच से जुड़ी अहम जानकारियों के लिए लाइवहिंदुस्तान के क्रिकेट पेज पर विजिट कर सकते हैं।


    इंडिया वर्सेस इंग्लैंड स्क्वॉड

    इंडिया स्क्वॉड: अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, इशान किशन (विकेट कीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, हर्षित राणा, प्रिंस यादव, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती, संजू सैमसन, प्रसिद्ध कृष्णा, वाशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, सूर्यांश शेडगे

    इंग्लैंड स्क्वॉड: फिलिप सॉल्ट, जोस बटलर (विकेट कीपर), हैरी ब्रूक (कप्तान), जैकब बेथेल, टॉम बैंटन, सैम करन, विल जैक्स, जोफ्रा आर्चर, लियाम डॉसन, आदिल राशिद, जोश टंग, सोनी बेकर, रेहान अहमद, जॉर्डन कॉक्स, साकिब महमूद, ल्यूक वुड

  • ट्रंप ने खुद को बताया ईरान का 'नंबर वन टारगेट'…. बोले- उनकी हत्या की रच रहा साजिश!

    ट्रंप ने खुद को बताया ईरान का 'नंबर वन टारगेट'…. बोले- उनकी हत्या की रच रहा साजिश!


    अंकारा।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बुधवार को खुलकर कहा कि वे ईरान (Iran) के नंबर वन टारगेट हैं और तेहरान उनकी हत्या की साजिश रच रहा है। ट्रंप ने NATO समिट के दौरान यह बयान देते हुए कहा कि ईरानी लीडरशिप (Iranian Leadership) उनसे बदला लेने पर तुली हुई है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि ईरान के साथ कोई समझौता अब संभव नहीं है। उनके इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या इसी डर के चलते उन्होंने ईरान के साथ चल रही डील को पूरी तरह खत्म कर दिया?


    ट्रंप ने क्या कहा?

    ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान उनकी हत्या की साजिश रच रहा है। इस दौरान उन्होंने खुद को ईरान का ‘नंबर वन टारगेट’ बताया। तुर्की की राजधानी अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि उनके कुछ लीडर थे जो अब नहीं रहे। उनके पास कुछ और लीडर थे जो शायद अब नहीं रहे। मैं भी शायद जाऊं, क्योंकि मैं उनका नंबर वन टारगेट हूं। वे घटिया लोग हैं। उन्होंने 47 साल से ऐसा ही किया है।

    इस दौरान ट्रंप ने ईरान की पिछली नेतृत्व व्यवस्था को दुश्मन करार दिया, लेकिन कहा कि मौजूदा लीडरशिप थोड़ी ज्यादा समझदारी से काम कर रही दिख रही है। उन्होंने साफ कहा कि वे तनाव बढ़ाने के बजाय ईरान मुद्दे को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं। बता दें कि यह बयान दोनों देशों के बीच हालिया सैन्य टकराव के बाद वॉशिंगटन और तेहरान के बढ़ते तनाव के बीच आया है।


    समझौता का प्रयास खत्म

    गौरतलब है कि ट्रंप ने कुछ घंटे पहले ही घोषणा की कि ईरान के साथ चल रही बातचीत और समझौते की कोशिशें पूरी तरह खत्म हो गई हैं। उन्होंने कहा कि उनके साथ डील करना बस समय की बर्बादी है। NATO समिट में ट्रंप ने आगे कहा कि हम आज रात उन्हें कड़ी टक्कर देंगे। वे हर दिन समझौते का उल्लंघन करते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या युद्धविराम अभी भी लागू है, तो उन्होंने जवाब दिया कि जहां तक मेरा सवाल है, यह खत्म हो चुका है।


    ईरान का जवाबी हमला

    इस बीच, ईरान ने ताजा अमेरिकी हमलों के जवाब में बुधवार को फारस की खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोन से जवाबी हमला किया। ईरानी सशस्त्र बलों ने कहा कि उन्होंने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके बाद दोनों देशों में हवाई हमले के सायरन बजाये गये। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने इस पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। उधर, कतर की मंत्रिपरिषद ने ओमान तट के निकट उसके तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) वाहक जहाज पर हुए हमले के बाद ईरान से होर्मुज में खतरनाक गतिविधियां बंद करने की मांग की है।

    कतर सरकार ने बयान में कहा कि देश अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। कतर अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज ने भी जहाज परिचालकों से फिलहाल होर्मुज से जहाज नहीं भेजने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे फारस की खाड़ी में फंसे लगभग 6000 नाविकों की सुरक्षा को अनावश्यक खतरा हो सकता है।

  • TMC के पार्टी फंड में 440 करोड़ पर ED की बड़ी कार्रवाई! हेलीकॉप्टर और चार्टर विमान खरीद में गड़बड़ी का दावा

    TMC के पार्टी फंड में 440 करोड़ पर ED की बड़ी कार्रवाई! हेलीकॉप्टर और चार्टर विमान खरीद में गड़बड़ी का दावा


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई ने हलचल मचा दी है। प्रवर्तन निदेशालय ने तृणमूल कांग्रेस के पार्टी फंड से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन में बड़ी अनियमितताओं का दावा करते हुए पार्टी के तीन बैंक खातों में जमा 440.42 करोड़ रुपए को फ्रीज करने का आदेश दिया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि पार्टी के आधिकारिक खाते से करोड़ों रुपए एक चार्टर विमान कंपनी को ट्रांसफर किए गए जिनका इस्तेमाल हेलीकॉप्टर और लग्जरी विमान खरीदने में किया गया। इसके बाद उन्हीं विमानों और हेलीकॉप्टरों को पार्टी की ओर से किराए पर लिया गया और इसके लिए अलग से भुगतान भी किया गया। ईडी को आशंका है कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिए पार्टी फंड के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया गया।

    मामले की जांच के दौरान ईडी ने कोलकाता और आसपास के पांच अलग अलग ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें चार्टर विमान कंपनी के कार्यालय उसके मालिक का आवास न्यू टाउन स्थित एक परिसर एक ट्रस्ट का दफ्तर और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट का कार्यालय शामिल है। कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने कई अहम दस्तावेज डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं जिनकी जांच की जा रही है।

    जांच एजेंसी के अनुसार वर्ष 2023 से 2026 के बीच तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों से केयरवेल एविएशन नामक चार्टर विमान कंपनी के खाते में करीब 160 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। इसके बाद इस कंपनी ने करीब 82.96 करोड़ रुपए एक अन्य नई कंपनी को भेजे। ईडी का दावा है कि करीब 112 करोड़ रुपए की राशि का उपयोग एक एम्ब्रेयर लेगेसी जेट 600 विमान और एक अगस्ता वेस्टलैंड 109 एसपी हेलीकॉप्टर खरीदने में किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि हेलीकॉप्टर की खरीद के लिए वर्ष 2023 में केमैन आइलैंड्स की एक विदेशी कंपनी से कर्ज भी लिया गया था।

    सूत्रों के मुताबिक यह चार्टर कंपनी तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की हवाई यात्रा की व्यवस्था करती थी। जांच एजेंसी फिलहाल यह पता लगाने में जुटी है कि विमान और हेलीकॉप्टर खरीद में इस्तेमाल हुई राशि का वास्तविक स्रोत क्या था और इन संसाधनों का उपयोग किन परिस्थितियों में किया गया। इसी वजह से पूरे लेनदेन की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।

    इस मामले की शुरुआत भी बेहद दिलचस्प तरीके से हुई। जून महीने में पार्टी के एक विधायक ने साइबर धोखाधड़ी से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों की शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष ने भी आंतरिक विवाद का हवाला देते हुए पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज करने की मांग की। स्थानीय पुलिस की प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपए के संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका के आधार पर मामला ईडी के पास पहुंचा।

    दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की पूरी कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि जांच एजेंसी विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। फिलहाल ईडी 150 करोड़ रुपए से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और उससे जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

  • E20 विवाद के बीच नितिन गडकरी का जवाब, बताई एथनॉल कारोबार में अपनी हिस्सेदारी

    E20 विवाद के बीच नितिन गडकरी का जवाब, बताई एथनॉल कारोबार में अपनी हिस्सेदारी


    नई दिल्ली। E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि एथनॉल उत्पादन में उनकी हिस्सेदारी बेहद मामूली है और इससे उन्हें कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि एथनॉल प्रोडक्शन में उनकी हिस्सेदारी केवल 0.07 प्रतिशत है।

    गडकरी ने कहा, “एथनॉल पॉलिसी से मुझे कोई फायदा नहीं मिल रहा है। इतनी छोटी हिस्सेदारी के आधार पर किसी बड़े आर्थिक लाभ की बात करना सही नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह आरोप पूरी तरह निराधार है कि एथनॉल नीति उनके निजी हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

    किसानों को फायदा पहुंचाने का दावा
    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह केवल एथनॉल ही नहीं, बल्कि वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल के समर्थक रहे हैं। उन्होंने कहा कि एथनॉल के बढ़ते उपयोग से किसानों को आर्थिक लाभ मिल सकता है। गडकरी ने स्पष्ट किया कि एथनॉल नीति किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं था। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पेट्रोलियम मंत्रालय, केंद्रीय मंत्रिमंडल और वैज्ञानिक शोध की प्रक्रिया के बाद लिया गया है।

    परिवार की कंपनियों पर भी दी सफाई
    गडकरी ने उन आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें कहा जा रहा था कि उनके परिवार से जुड़ी कंपनियां एथनॉल उत्पादन में शामिल हैं और इसी वजह से वह E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों की चीनी मिलें जरूर हैं, लेकिन उनकी कंपनियां एथनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं।

    मक्के से एथनॉल उत्पादन से किसानों को लाभ का दावा
    गडकरी ने कहा कि देश में एथनॉल की उपलब्धता बढ़ी है और मक्के से एथनॉल बनाने के फैसले का फायदा किसानों को मिला है। उन्होंने दावा किया कि इस कदम से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को करीब 45,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है।

    उन्होंने बताया कि मक्के से एथनॉल उत्पादन का फैसला लेने से पहले मक्के की बाजार कीमत करीब 1,200 रुपये प्रति क्विंटल थी, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,800 रुपये प्रति क्विंटल था। इसके बाद मक्के की कीमत बढ़कर करीब 2,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई।

    E20 पेट्रोल पर दिया था चैलेंज
    इससे पहले गडकरी ने E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा था कि इसके कारण किसी वाहन में खराबी आने का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा था कि अगर किसी कार में E20 पेट्रोल से समस्या आई है तो उसका उदाहरण बताया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिक एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है और इसके पीछे एक अभियान चलाया जा रहा है।

    ISMA ने भी दावों को बताया गलत
    भारतीय चीनी एवं जैव ऊर्जा विनिर्माता संघ (ISMA) ने भी E20 पेट्रोल को लेकर किए जा रहे कुछ दावों को गलत और भ्रामक बताया है। संगठन ने कहा कि E20 से गाड़ियों को नुकसान, बीमा अमान्य होने या ईंधन में सीधे गन्ने का रस मिलाने जैसे दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, भारत का एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम वैज्ञानिक परीक्षणों, निगरानी और विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसमें पेट्रोलियम कंपनियों, वाहन निर्माताओं और ईंधन जांच एजेंसियों की भूमिका शामिल है।

  • Health Alert: अगर बार बार सूज रहे हैं पैर तो हो जाएं सतर्क शरीर दे रहा है गंभीर बीमारी का संकेत

    Health Alert: अगर बार बार सूज रहे हैं पैर तो हो जाएं सतर्क शरीर दे रहा है गंभीर बीमारी का संकेत


    नई दिल्ली । पैरों में सूजन आना एक ऐसी समस्या है जिसे अधिकतर लोग थकान लंबे समय तक खड़े रहने या अधिक चलने का परिणाम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि यदि यह परेशानी बार बार हो रही है या कई दिनों तक बनी रहती है तो इसे हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पैरों में लगातार रहने वाली सूजन शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकती है। इसलिए केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय समय रहते डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरूरी है।

    पैरों में सूजन तब होती है जब शरीर के ऊतकों में जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ जमा होने लगता है। इसे चिकित्सकीय भाषा में एडिमा कहा जाता है। कई बार यह समस्या लंबे समय तक बैठे रहने यात्रा करने या अधिक नमक खाने के कारण भी हो सकती है लेकिन यदि सूजन रोजाना होने लगे दर्द के साथ हो या केवल एक पैर में दिखाई दे तो यह चिंता का विषय बन सकता है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि हृदय की कार्यक्षमता कमजोर होने पर शरीर में रक्त का संचार प्रभावित होता है जिससे पैरों और टखनों में सूजन दिखाई देने लगती है। इसी तरह किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित होने पर शरीर अतिरिक्त पानी और नमक को बाहर नहीं निकाल पाता जिससे सूजन बढ़ सकती है। लीवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों में भी शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है और पैरों में सूजन दिखाई देने लगती है।

    इसके अलावा नसों की कमजोरी वैरिकोज वेन्स लिम्फ संबंधी समस्याएं थायरॉयड की गड़बड़ी मोटापा मधुमेह और कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव भी पैरों में सूजन का कारण बन सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान भी कई महिलाओं में पैरों में सूजन देखी जाती है लेकिन यदि इसके साथ सिरदर्द धुंधला दिखना या रक्तचाप बढ़ा हुआ हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी होता है।

    अगर सूजन के साथ सांस लेने में तकलीफ सीने में दर्द तेज बुखार त्वचा का रंग बदलना या अचानक वजन बढ़ने जैसी समस्याएं भी महसूस हों तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं और तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता हो सकती है।

    पैरों की सूजन से बचाव के लिए नियमित व्यायाम करना पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना और नमक का सीमित सेवन करना लाभदायक माना जाता है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने या खड़े रहने से बचें और बीच बीच में पैरों को हिलाते रहें। आराम करते समय पैरों को हल्का ऊंचा रखकर लेटना भी सूजन कम करने में मदद कर सकता है। यदि डॉक्टर ने किसी विशेष बीमारी का इलाज बताया है तो दवाओं का नियमित सेवन और समय समय पर जांच कराना भी जरूरी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर अक्सर छोटी छोटी समस्याओं के जरिए बड़ी बीमारियों का संकेत देता है। इसलिए यदि पैरों की सूजन बार बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है तो स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेकर आवश्यक जांच कराना सबसे सुरक्षित कदम है। समय पर पहचान और सही उपचार गंभीर जटिलताओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • फ्रांस की अर्थव्यवस्था पर संकट, बढ़ा कर्ज का दबाव, विशेषज्ञों की चेतावनी- समय रहते कदम नहीं उठाए तो…

    फ्रांस की अर्थव्यवस्था पर संकट, बढ़ा कर्ज का दबाव, विशेषज्ञों की चेतावनी- समय रहते कदम नहीं उठाए तो…


    नई दिल्ली। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल फ्रांस पर बढ़ता सार्वजनिक कर्ज चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते प्रभावी वित्तीय सुधार नहीं किए, तो आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था गंभीर दबाव में आ सकती है। बढ़ती उधारी लागत और राजनीतिक अनिश्चितता को लेकर निवेशकों और अर्थशास्त्रियों ने भी चिंता जताई है।

    फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज फिलहाल करीब 3.5 ट्रिलियन यूरो तक पहुंच चुका है और विशेषज्ञों का मानना है कि अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले राजनीतिक परिस्थितियों के कारण राजकोषीय सुधारों की संभावना कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में कर्ज का बोझ और बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।

    ‘स्नोबॉल इफेक्ट’ से बढ़ सकती है मुश्किल
    अर्थशास्त्रियों ने फ्रांस के सामने ‘स्नोबॉल इफेक्ट’ का खतरा बताया है। इसका मतलब ऐसी स्थिति से है, जब सरकारी बॉन्ड पर चुकाई जाने वाली ब्याज दर आर्थिक विकास की गति से अधिक हो जाती है। इससे सरकार का कर्ज लगातार बढ़ता जाता है और अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में उसका बोझ तेजी से बढ़ने लगता है। यदि सरकार लगातार प्राथमिक बजट अधिशेष (प्राइमरी सरप्लस) हासिल नहीं कर पाती, तो इस स्थिति से बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो सकता है।

    2050 तक GDP के 203% तक पहुंच सकता है कर्ज
    विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मौजूदा हालात में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ तो फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज वर्ष 2050 तक उसकी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 203 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह चेतावनी आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) के महासचिव मैथियास कोरमैन के हालिया बयान के आधार पर दी गई है। अनुमान है कि वर्ष 2029 तक केवल ब्याज भुगतान का खर्च ही लगभग 100 अरब यूरो तक पहुंच सकता है।

    निवेशकों और रेटिंग एजेंसियों की बढ़ी चिंता
    क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सारा कार्लसन ने भी कहा है कि सार्वजनिक कर्ज पर बढ़ता ब्याज भुगतान फ्रांस के लिए सबसे बड़ी आर्थिक चुनौतियों में से एक बन सकता है। वहीं निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली ने वित्तीय जोखिमों का हवाला देते हुए अपने ग्राहकों को फ्रांसीसी सरकारी कर्ज में निवेश कम करने की सलाह दी है।

    कोविड के बाद भी कम नहीं हुआ कर्ज
    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की पहली तिमाही में फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज 3.5 ट्रिलियन यूरो (करीब 4 ट्रिलियन डॉलर) से अधिक हो गया, जो देश की GDP का 117.5 प्रतिशत है। फ्रांस की ऑडिट संस्था कोर्ट डेस कॉम्प्टेस के मुताबिक यह स्तर कोविड-19 महामारी के दौरान बने रिकॉर्ड के करीब पहुंच चुका है। संस्था का कहना है कि यूरोजोन में फ्रांस ऐसा प्रमुख देश है, जिसने महामारी के बाद अपने कर्ज के बोझ को उल्लेखनीय रूप से कम नहीं किया।

    ब्याज भुगतान बना सबसे बड़ा खर्च
    वर्ष 2025 में फ्रांस ने अपने कर्ज पर ब्याज चुकाने के लिए करीब 66 अरब यूरो खर्च किए, जो शिक्षा और रक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों के बजट से भी अधिक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2029 तक यह राशि बढ़कर 100 अरब यूरो तक पहुंच सकती है।

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि तेज आर्थिक विकास या लगातार प्राथमिक बजट अधिशेष के जरिए इस संकट से बाहर निकला जा सकता है, लेकिन फिलहाल ऐसे संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। कोर्ट डेस कॉम्प्टेस की वरिष्ठ अधिकारी कैरिन कैम्बी ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए तो फ्रांस कर्ज के ब्याज के बढ़ते बोझ तले दब सकता है और इस स्थिति से बाहर निकलने में कई वर्ष लग सकते हैं।

    चुनाव से पहले बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
    बढ़ता सार्वजनिक कर्ज अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले फ्रांस की राजनीति का भी अहम मुद्दा बन गया है। प्रमुख सेंट्रिस्ट नेता एडुआर्ड फिलिप और गैब्रियल अट्टल ने इसे अपने चुनावी एजेंडे का प्रमुख हिस्सा बनाया है। वहीं सांसद केविन मौविएक्स का कहना है कि कर्ज का बढ़ता स्तर गंभीर चेतावनी है और यदि सुधार में देर की गई तो इसके परिणाम और अधिक गंभीर हो सकते हैं।

  • Rainy Season Health Care: बारिश में रोज पिएं अदरक की चाय शरीर रहेगा गर्म पाचन होगा बेहतर और बीमारियां रहेंगी दूर

    Rainy Season Health Care: बारिश में रोज पिएं अदरक की चाय शरीर रहेगा गर्म पाचन होगा बेहतर और बीमारियां रहेंगी दूर


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं हरियाली और सुहाना माहौल लेकर आता है लेकिन यही मौसम सर्दी खांसी वायरल संक्रमण गले की खराश और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा देता है। ऐसे समय में अगर खानपान का सही ध्यान रखा जाए तो कई मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है। भारतीय घरों में बरसों से अदरक की चाय को बारिश के मौसम का सबसे भरोसेमंद घरेलू पेय माना जाता है। इसकी गर्म तासीर और औषधीय गुण शरीर को भीतर से मजबूत बनाने में मदद करते हैं और यही कारण है कि मानसून में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है।

    अदरक में प्राकृतिक रूप से ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। नियमित और संतुलित मात्रा में अदरक वाली चाय पीने से मौसमी संक्रमण का खतरा कम हो सकता है। बारिश के दिनों में वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं ऐसे में अदरक का सेवन शरीर को संक्रमण से लड़ने में सहायक माना जाता है।

    बरसात के दौरान सर्दी जुकाम और गले में खराश की समस्या सबसे आम होती है। अदरक की गर्माहट गले को आराम देती है और बलगम को बाहर निकालने में मदद करती है। अगर चाय में तुलसी या काली मिर्च भी मिला दी जाए तो इसका असर और अधिक प्रभावी हो सकता है। यही वजह है कि कई लोग हल्की सर्दी महसूस होते ही सबसे पहले अदरक की चाय का सहारा लेते हैं।

    बारिश के मौसम में पाचन तंत्र भी अक्सर कमजोर पड़ जाता है। बाहर का भोजन या दूषित पानी पेट खराब होने की वजह बन सकता है। अदरक पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है और गैस अपच तथा पेट फूलने जैसी समस्याओं से राहत दिला सकता है। भोजन के बाद एक कप हल्की अदरक वाली चाय शरीर को आराम देने के साथ पाचन प्रक्रिया को भी बेहतर बना सकती है।

    अदरक की चाय शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने और ठंड महसूस होने की स्थिति में शरीर को गर्म रखने में भी सहायक मानी जाती है। बारिश में भीगने के बाद एक कप गर्म अदरक की चाय शरीर को तुरंत सुकून देती है और थकान कम करने में मदद करती है। इसके अलावा इसमें मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में भी भूमिका निभाते हैं।

    हालांकि अदरक की चाय का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अत्यधिक सेवन से कुछ लोगों को एसिडिटी या पेट में जलन की शिकायत हो सकती है। जिन लोगों को ब्लड प्रेशर ब्लड थिनर दवाओं या किसी गंभीर बीमारी की समस्या है उन्हें नियमित रूप से अधिक मात्रा में अदरक लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही इसका सेवन करना चाहिए।

    बरसात के मौसम में केवल अदरक की चाय पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। संतुलित भोजन स्वच्छ पानी पर्याप्त नींद और साफ सफाई का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। यदि अदरक की चाय को स्वस्थ जीवनशैली के साथ शामिल किया जाए तो यह मानसून के दौरान शरीर को ऊर्जा देने रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने और मौसमी बीमारियों से बचाव में उपयोगी साबित हो सकती है।:

  • पांढुर्णा में तीन दिन तक 350 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर बैठा रहा युवक, SDRF और पुलिस ने सुरक्षित उतारा

    पांढुर्णा में तीन दिन तक 350 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर बैठा रहा युवक, SDRF और पुलिस ने सुरक्षित उतारा


    पांढुर्णा। मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में पिछले तीन दिनों से चल रहा हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन बुधवार शाम सफलतापूर्वक समाप्त हो गया। करीब 350 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़े एक युवक को पुलिस और SDRF की टीम ने लगभग 51 घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित नीचे उतार लिया। इस दौरान प्रशासन, पुलिस और बचाव दल लगातार मौके पर तैनात रहे।

    जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम एक युवक हाथ में शराब की बोतल लेकर अचानक मोबाइल टावर पर चढ़ने लगा। स्थानीय लोगों ने उसे रोकने और नीचे आने के लिए आवाज लगाई, लेकिन उसने किसी की बात नहीं सुनी और टावर के सबसे ऊपरी व संकरे हिस्से पर जाकर बैठ गया। घटना की सूचना मिलते ही पांढुर्णा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई।

    थाना प्रभारी अमित दाणी ने बताया कि युवक अत्यधिक शराब के नशे में था। पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से कई बार उसे नीचे उतरने की अपील की, लेकिन उसने किसी भी प्रयास का जवाब नहीं दिया।

    सुरक्षा के लिए किए गए विशेष इंतजाम
    संभावित हादसे को देखते हुए प्रशासन ने टावर के चारों ओर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। यदि युवक नीचे गिर जाए तो उसकी जान बचाई जा सके, इसके लिए टावर के नीचे गद्दे बिछाए गए और सुरक्षा जाल (नेट) लगाया गया। स्थानीय स्तर पर प्रयास सफल नहीं होने पर तत्काल SDRF की टीम को बुलाया गया।

    चुनौतीपूर्ण रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
    टावर की ऊंचाई और युवक की अस्थिर स्थिति के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। रात के समय अंधेरा और तेज ऊंचाई के बीच युवक लगातार खतरनाक हरकतें करता रहा, जिससे उसके गिरने का खतरा बना हुआ था। पुलिस और SDRF की टीम ने लगातार धैर्य के साथ बातचीत कर उसे शांत रखने की कोशिश की और पूरी रणनीति के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखा।

    बुधवार शाम सुरक्षित उतारा गया युवक
    करीब 51 घंटे तक चले अभियान के बाद बुधवार शाम लगभग 7 बजे SDRF और पुलिस की टीम ने तकनीकी कौशल और सतर्कता के साथ युवक को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया और नीचे उतार लिया। उसके सुरक्षित जमीन पर पहुंचते ही मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और बड़ी संख्या में एकत्र लोगों ने राहत की सांस ली।

    फिलहाल युवक की चिकित्सकीय जांच कराई जा रही है। पुलिस उसके पूरी तरह होश में आने का इंतजार कर रही है, ताकि उसकी पहचान और मोबाइल टावर पर चढ़ने के पीछे की वजह का पता लगाया जा सके।

  • आज बाजार में दिख सकता है उतार चढ़ाव विदेशी संकेतों के बीच समझदारी से निवेश करने की सलाह

    आज बाजार में दिख सकता है उतार चढ़ाव विदेशी संकेतों के बीच समझदारी से निवेश करने की सलाह


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में आज नौ जुलाई को कारोबार की शुरुआत सतर्क माहौल के बीच हल्की मजबूती के साथ होने की संभावना जताई जा रही है। वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों के कारण निवेशक पूरे दिन सोच समझकर कदम उठा सकते हैं। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी सीमित बढ़त के साथ खुल सकते हैं लेकिन दिनभर बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और मजबूत कंपनियों में ही निवेश की सलाह दे रहे हैं।

    बीते कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार ने स्थिर प्रदर्शन किया था जबकि विदेशी बाजारों में अलग अलग रुख देखने को मिला। अमेरिकी बाजारों में सीमित बढ़त दर्ज की गई जबकि एशियाई बाजारों में मिला जुला कारोबार देखने को मिला। इसका असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर भी दिखाई दे सकता है। निवेशकों की नजर आज वैश्विक आर्थिक संकेतों कच्चे तेल की कीमतों डॉलर की चाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद बिक्री पर बनी रहेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी बैंकिंग एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर के शेयर आज बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि इन क्षेत्रों में खरीदारी का माहौल बना रहता है तो प्रमुख सूचकांक मजबूती के साथ कारोबार कर सकते हैं। दूसरी ओर मुनाफावसूली बढ़ने पर बाजार में दबाव भी देखने को मिल सकता है। इसलिए हर तेजी को लंबी अवधि का संकेत मानना फिलहाल उचित नहीं होगा।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल तय करने में अहम रहेंगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं वैश्विक स्तर पर किसी भी नकारात्मक खबर या आर्थिक अनिश्चितता का असर भारतीय बाजार पर तुरंत दिखाई दे सकता है। इसलिए निवेशकों को हर बड़ी खबर पर नजर बनाए रखने की जरूरत होगी।

    विश्लेषकों का कहना है कि छोटे और मझोले शेयरों में भी अच्छी गतिविधि देखने को मिल सकती है लेकिन इनमें जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहता है। ऐसे शेयरों में निवेश केवल पर्याप्त जानकारी और रणनीति के साथ ही करना बेहतर माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का सुझाव है कि अल्पकालिक उतार चढ़ाव से घबराने के बजाय निवेशक अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार निर्णय लें।

    दीर्घकालिक निवेश करने वालों के लिए मौजूदा बाजार अभी भी कई अच्छे अवसर उपलब्ध करा सकता है। मजबूत वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों के शेयरों में चरणबद्ध निवेश भविष्य में बेहतर रिटर्न दे सकता है। वहीं इंट्रा डे ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को बाजार खुलने के बाद शुरुआती रुझान को ध्यान से समझकर ही कोई बड़ा फैसला लेना चाहिए।

    कुल मिलाकर आज भारतीय शेयर बाजार में हल्की सकारात्मक शुरुआत की उम्मीद है लेकिन पूरे कारोबारी सत्र के दौरान उतार चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे माहौल में धैर्य संतुलित रणनीति और सोच समझकर किया गया निवेश ही बेहतर परिणाम देने की संभावना रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अफवाहों के बजाय आधिकारिक आंकड़ों और विश्वसनीय बाजार संकेतों के आधार पर लिया गया निर्णय निवेशकों के लिए अधिक लाभदायक साबित होगा।

  • कर्ज से परेशान लोगों के लिए मंगलवार का विशेष उपाय, ज्योतिष में बताए गए सरल धार्मिक उपायों से आर्थिक बाधाएं कम होने की मान्यता

    कर्ज से परेशान लोगों के लिए मंगलवार का विशेष उपाय, ज्योतिष में बताए गए सरल धार्मिक उपायों से आर्थिक बाधाएं कम होने की मान्यता

    नई दिल्ली । बढ़ती महंगाई, ऋण, ईएमआई और आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण बड़ी संख्या में लोग वित्तीय दबाव का सामना कर रहे हैं। कई बार लगातार आय होने और मेहनत करने के बावजूद कर्ज का बोझ कम नहीं हो पाता, जिससे मानसिक तनाव भी बढ़ने लगता है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसी परिस्थितियों के लिए कुछ धार्मिक उपायों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें आस्था और नियमितता के साथ करने से सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है। हालांकि इन उपायों के साथ विवेकपूर्ण वित्तीय योजना, आय-व्यय का संतुलन और निरंतर प्रयास को भी समान रूप से महत्वपूर्ण माना गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार का दिन भगवान हनुमान और मंगल ग्रह को समर्पित माना जाता है। ज्योतिष में मंगल ग्रह को साहस, भूमि, ऊर्जा और ऋण का कारक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल कमजोर या प्रतिकूल स्थिति में हो तो उसे आर्थिक कठिनाइयों, बढ़ते कर्ज या धन संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण मंगलवार को मंगल ग्रह और भगवान हनुमान की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है।

    ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार मंगलवार की सुबह स्नान के बाद भगवान हनुमान की पूजा कर ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नियमित रूप से इसका पाठ करने से मानसिक दृढ़ता बढ़ती है और आर्थिक चुनौतियों से बाहर निकलने के लिए नए अवसर बनने लगते हैं। इसके साथ ही श्रद्धालु हनुमान मंदिर में सिंदूर और चमेली के तेल का चोला अर्पित करते हैं तथा मीठा पान चढ़ाने की भी परंपरा निभाते हैं।

    शाम के समय गाय के घी या चमेली के तेल का दीपक जलाकर सुंदरकांड का पाठ करने की भी मान्यता है। यदि समय की कमी हो तो हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ किया जा सकता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार इससे मनोबल मजबूत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं में मंगलवार के दिन नया कर्ज लेने से बचने की सलाह भी दी जाती है। वहीं कुछ परंपराओं में यह माना जाता है कि यदि पुराने ऋण की पहली किस्त मंगलवार को चुकाई जाए तो ऋण समाप्त करने की दिशा में शुभ शुरुआत मानी जाती है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इसे धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखा जाता है।

    दान-पुण्य को भी आर्थिक और आध्यात्मिक संतुलन से जोड़ा गया है। मंगलवार के दिन गुड़ और चने का दान या जरूरतमंद लोगों की सहायता करना शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त भगवान श्रीगणेश, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की नियमित पूजा तथा श्रीसूक्त या कनकधारा स्तोत्र का पाठ भी समृद्धि की कामना से किया जाता है।

    कुछ ज्योतिषाचार्य मंगलवार को लाल चंदन की माला से विशेष मंत्र का जप करने की भी सलाह देते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना अधिक धैर्य के साथ कर पाता है। हालांकि यह समझना आवश्यक है कि धार्मिक और ज्योतिषीय उपाय आस्था का विषय हैं और इनके परिणामों का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति कर्ज की समस्या से जूझ रहा है तो धार्मिक आस्था के साथ-साथ खर्चों पर नियंत्रण, नियमित बचत, समय पर ऋण भुगतान और सही वित्तीय योजना अपनाना सबसे प्रभावी उपाय है। आस्था मानसिक संबल दे सकती है, जबकि आर्थिक अनुशासन ही दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता का वास्तविक आधार बनता है।