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  • क्या बिल्ली पालने से बढ़ सकता है मानसिक बीमारी का खतरा? नई स्टडी ने चौंकाए वैज्ञानिक सावधानी बरतने की दी सलाह

    क्या बिल्ली पालने से बढ़ सकता है मानसिक बीमारी का खतरा? नई स्टडी ने चौंकाए वैज्ञानिक सावधानी बरतने की दी सलाह


    नई दिल्ली । घर में बिल्ली पालना आजकल केवल शौक नहीं बल्कि कई लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। पालतू जानवरों से लगाव तनाव कम करने और मानसिक सुकून देने के लिए भी जाना जाता है। हालांकि हाल ही में सामने आई एक वैज्ञानिक स्टडी ने बिल्ली पालने वालों का ध्यान एक संभावित स्वास्थ्य जोखिम की ओर खींचा है। शोध में दावा किया गया है कि बिल्लियों के संपर्क और एक गंभीर मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया के बीच संभावित संबंध देखा गया है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि इसका मतलब यह नहीं है कि बिल्ली पालने से हर व्यक्ति को यह बीमारी हो जाएगी।

    ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कई वर्षों में प्रकाशित विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों का विश्लेषण किया। इस समीक्षा में अलग अलग देशों के शोध आंकड़ों को शामिल किया गया। अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि जिन लोगों का बिल्लियों से अधिक संपर्क रहा उनमें सिजोफ्रेनिया से जुड़े जोखिम कुछ मामलों में अधिक दिखाई दिए। हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी माना कि इस संबंध को पूरी तरह साबित करने के लिए अभी और विस्तृत शोध की आवश्यकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार इस संभावित संबंध का कारण टोक्सोप्लाज्मा गोंडी नामक एक सूक्ष्म परजीवी माना जाता है। यह परजीवी मुख्य रूप से संक्रमित बिल्लियों के मल में पाया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति उचित स्वच्छता का पालन नहीं करता और किसी तरह यह परजीवी शरीर में प्रवेश कर जाए तो कुछ मामलों में यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। हालांकि अधिकांश स्वस्थ लोगों में संक्रमण होने पर भी कोई गंभीर लक्षण दिखाई नहीं देते।

    डॉक्टरों का कहना है कि सिजोफ्रेनिया एक जटिल मानसिक बीमारी है जिसके पीछे केवल एक कारण जिम्मेदार नहीं होता। आनुवंशिक प्रवृत्ति मानसिक तनाव मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन पर्यावरणीय प्रभाव और कई अन्य जैविक कारण भी इस बीमारी के विकास में भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए केवल बिल्ली पालने को इस बीमारी का सीधा कारण मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि आप घर में बिल्ली पालते हैं तो घबराने की आवश्यकता नहीं है बल्कि कुछ सामान्य सावधानियां अपनाना ही पर्याप्त है। बिल्ली का लिटर बॉक्स साफ करने के बाद हमेशा साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं। घर और पालतू जानवर दोनों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। नियमित रूप से पशु चिकित्सक से बिल्ली का स्वास्थ्य परीक्षण कराएं और गर्भवती महिलाओं कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों तथा छोटे बच्चों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि टोक्सोप्लाज्मा संक्रमण इन समूहों के लिए अधिक जोखिम पैदा कर सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पालतू जानवरों से मिलने वाले भावनात्मक और मानसिक लाभ भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। इसलिए किसी एक अध्ययन के आधार पर बिल्ली पालना छोड़ देने की जरूरत नहीं है। जरूरी यह है कि वैज्ञानिक तथ्यों को समझते हुए स्वच्छता और जिम्मेदार देखभाल को प्राथमिकता दी जाए। संतुलित जानकारी और सावधानी ही आपको और आपके पालतू साथी दोनों को सुरक्षित रख सकती है।

  • एचआईवी का नया हॉटस्पॉट बनता पंजाब! युवाओं में बढ़ रहे संक्रमण ने बढ़ाई चिंता जीएमसी जम्मू की लैब पर बढ़ा दबाव

    एचआईवी का नया हॉटस्पॉट बनता पंजाब! युवाओं में बढ़ रहे संक्रमण ने बढ़ाई चिंता जीएमसी जम्मू की लैब पर बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली । पंजाब में एचआईवी संक्रमण के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि राज्य को संक्रमण के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में गिना जाने लगा है। बीते पांच महीनों के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब के आठ जिलों से हर महीने करीब 2500 एचआईवी जांच के नमूने राजकीय मेडिकल कॉलेज जीएमसी जम्मू की अत्याधुनिक वायरोलॉजी लैब भेजे जा रहे हैं। यहां जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट संबंधित जिलों को भेजी जाती है। लगातार बढ़ती जांच और सामने आ रहे मामलों ने संकेत दिया है कि संक्रमण की चुनौती अब पहले से कहीं अधिक गंभीर होती जा रही है।

    जीएमसी जम्मू की माइक्रोबायोलॉजी लैब को इस वर्ष फरवरी में नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज की मान्यता मिलने के बाद इसकी जांच क्षमता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्य करने वाली यह प्रदेश की पहली एनएबीएल मान्यता प्राप्त वायरोलॉजी लैब है। इसी वजह से पंजाब के होशियारपुर पठानकोट जालंधर रोपड़ मोगा बटाला नवांशहर और कपूरथला जैसे जिलों के एचआईवी जांच नमूनों की जिम्मेदारी भी इसी लैब को सौंपी गई है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जांच रिपोर्टों में सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि संक्रमण के मामलों में बड़ी संख्या 25 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की है। इसके अलावा महिलाओं और बच्चों में भी संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नशीले पदार्थों का इंजेक्शन के माध्यम से सेवन संक्रमण फैलने का एक प्रमुख कारण बनकर उभरा है। इसके साथ ही असुरक्षित यौन संबंध और समय पर जांच नहीं कराना भी संक्रमण बढ़ने की अहम वजह मानी जा रही है।

    अधिकारियों का कहना है कि जीएमसी जम्मू में केवल सैंपलों की जांच की जाती है जबकि संक्रमित मरीजों का उपचार पंजाब में ही किया जाता है। जांच के बाद रिपोर्ट संबंधित स्वास्थ्य विभाग को भेज दी जाती है ताकि समय पर इलाज शुरू किया जा सके और संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।

    एनएबीएल मान्यता मिलने के बाद जीएमसी जम्मू की जांच क्षमता में भी बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 90 नमूनों की जांच हो पाती थी वहीं अब आधुनिक तकनीक और नई सुविधाओं की मदद से 24 घंटे में 1200 से अधिक नमूनों की जांच संभव हो गई है। इससे न केवल जम्मू कश्मीर बल्कि दूसरे राज्यों के सैंपलों की भी तेजी से जांच की जा रही है। भविष्य में नई मशीनों के जुड़ने के बाद यह क्षमता और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए समय पर जांच जागरूकता और सुरक्षित व्यवहार सबसे प्रभावी उपाय हैं। साथ ही नशे की रोकथाम नियमित स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है। यदि संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को समय रहते नहीं रोका गया तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। इसलिए सरकार स्वास्थ्य विभाग और समाज सभी को मिलकर जागरूकता अभियान तेज करने और जोखिम वाले समूहों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर विशेष ध्यान देना होगा।

  • US की H-1B वीजा फर्जीवाड़े पर बड़ी कार्रवाई….. भारतीय दिग्गज IT समेत कई बड़ी कंपनियां रडार पर

    US की H-1B वीजा फर्जीवाड़े पर बड़ी कार्रवाई….. भारतीय दिग्गज IT समेत कई बड़ी कंपनियां रडार पर


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) ने H-1B और पर्म (PERM) वर्क वीजा में चल रही कथित धोखाधड़ी के खिलाफ एक बड़ा जांच अभियान छेड़ दिया है। अमेरिकी श्रम विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि इस बड़े फर्जीवाड़े की जांच के रडार पर दिग्गज भारतीय आईटी कंपनी ‘कॉग्निजेंट’ (Leading Indian IT company ‘Cognizant’) समेत कई बड़ी कंपनियां शामिल हैं।


    उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में हुआ एक्शन

    वीजा से जुड़े इस बड़े गोरखधंधे के खिलाफ यह सख्त कदम अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (US Vice President JD Vance) के नेतृत्व वाली ‘टास्क फोर्स टू एलिमिनेट फ्रॉड’ के तहत उठाया गया है।


    कैसे खुला फर्जीवाड़े का राज?

    श्रम विभाग के तहत काम करने वाले ‘ऑफिस ऑफ द इंस्पेक्टर जनरल’ (OIG) ने बड़े स्तर पर चल रहे इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। OIG के आधिकारिक बयान में जांच से जुड़ी कई अहम बातें सामने आई हैं।

    कई नियोक्ताओं और लेबर ब्रोकर्स ने मिलकर वीजा के लिए फर्जी आवेदन जमा किए। विदेशी कामगारों का शोषण किया गया, उनसे जबरन कम वेतन पर काम कराया गया और उनके पैसों में अवैध कटौती की गई। कम मजदूरी वाले विदेशी कर्मचारियों से बाजार को भर दिया गया, जिसका सीधा नुकसान अमेरिकी कामगारों को हुआ और उनकी नौकरियां छिन गईं।


    ‘दर्जनों कंपनियों को जारी किए गए समन’

    बुधवार को फॉक्स बिजनेस से बातचीत के दौरान श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथोनी डी एस्पोसिटो ने इस कार्रवाई को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “हमने इस मामले में पहले ही दर्जनों समन जारी कर दिए हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हम जांच में मिले हर एक सुराग की तह तक जाएं।”

    आईटी दिग्गज कॉग्निजेंट का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया, “हमारे पास ऐसे व्हिसलब्लोअर्स मौजूद हैं जो ‘कॉग्निजेंट’ जैसी कुछ सबसे बड़ी कंपनियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। ये कंपनियां पर्म और H-1B वीजा से जुड़े मुद्दों में पहले से ही काफी चर्चा में रही हैं।”


    अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों से समझौता नहीं

    OIG ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि ऐसे जालसाज उन श्रम कार्यक्रमों की साख को नुकसान पहुंचाते हैं, जिन्हें देश में श्रमिकों की वास्तविक कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है। इन कार्यक्रमों का मकसद अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों की कीमत पर भ्रष्ट लोगों की जेब भरना बिल्कुल नहीं है।

    जांच एजेंसी ने कहा कि वह विदेशी गेस्ट वर्कर वीजा सिस्टम का गलत इस्तेमाल करने वाले मानव तस्करी और जबरन मजदूरी कराने वाले पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्था का साफ कहना है कि वह उन सभी साजिशों को जड़ से खत्म करेगी जो मजबूर मजदूरों का शोषण करते हैं और अमेरिकी नागरिकों के हक की नौकरियां छीनते हैं।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस…. आरोपियों ने उगले राज…. पूछताछ में बताया हेराफेरी का तरीका

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस…. आरोपियों ने उगले राज…. पूछताछ में बताया हेराफेरी का तरीका


    लखनऊ/अयोध्या।
    राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Offering Theft) मामले में रिमांड पर लिए गए तीनों आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि चोरी के रुपये वह अपने करीबियों और रिश्तेदारों को भेजते थे और फिर उनसे अपने खातों में रकम ट्रांसफर करवाते थे, ताकि रकम का स्रोत छिपा रहे और शक न हो। बैंक डिटेल से इसकी पुष्टि भी हुई है। पूछताछ में तीनों आरोपियों अनुकल्प मिश्रा (Anukalp Mishra), लवकुश मिश्रा (Lav-Kush Mishra) और करुणेश पांडेय (Karunesh Pandey) ने कई और राज उगले हैं। बृहस्पतिवार को रकम, जेवर की बरामदगी हो सकती है।

    कोर्ट की अनुमति के बाद पुलिस ने बुधवार सुबह करीब सात बजे जिला जेल से आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लिया। आरोपियों ने चोरी स्वीकारते हुए बताया कि टिन्नू व गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव की मिलीभगत होने से रकम पार करने में दिक्कत नहीं होती थी। आरोपियों ने बताया है कि नकदी व जेवर छिपाकर रखे हैं।

    पुलिस तीनों आरोपियों को 14 कोसी परिक्रमा मार्ग स्थित उसी बाग में लेकर गई जहां चोरी की रकम का बंटवारा किया जाता था। इस स्थान का खुलासा पहले रिमांड पर रहे आरोपी अविनाश शुक्ला ने किया था। तीनों आरोपियों से मौके पर ले जाकर इसका सत्यापन कराया गया। पुलिस ने आरोपियों के बयानों का मिलान भी किया।

    फर्जी रसीदें छपवाई थीं
    आरोपियों ने एक दान राशि संबंधी पर्ची बरामद कराई है। आरोपियों ने बताया कि जब दान लेकर पर्ची दी जाती थी, तो उन्होंने फर्जी रसीदें छपवाई थीं। लोगों से चंदे के नाम पर रकम लेकर फर्जी रसीदें पकड़ा देते थे और रकम अपनी जेब में रख लेते थे।

  • Report: दुनिया की 99% आबादी ले रही है प्रदूषित हवा में सांस…. WHO ने चेताया

    Report: दुनिया की 99% आबादी ले रही है प्रदूषित हवा में सांस…. WHO ने चेताया


    न्यूयार्क।
    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) (World Health Organization – WHO) की वर्ल्ड हेल्थ स्टेटिस्टिक्स 2026 रिपोर्ट (World Health Statistics 2026 Report) हैरान करने वाली है। इसके मुताबिक, दुनिया की 99 प्रतिशत आबादी अब भी सुरक्षित सीमा से अधिक प्रदूषित हवा में सांस ले रही है। वर्ष 2021 में 66 लाख मौतें घरेलू और बाहरी वायु प्रदूषण से जुड़ी थीं।

    भारत जैसे देशों के लिए यह सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए वर्ष 2030 तक हर व्यक्ति को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं (यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज) उपलब्ध कराने का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की रफ्तार पिछले कुछ वर्षों में काफी धीमी पड़ गई है।


    रिपोर्ट में किया गया क्या दावा?

    रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2015 से 2023 के बीच दुनिया का यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (यूएचसी) सर्विस कवरेज इंडेक्स केवल 68 से बढ़कर 71 तक पहुंचा। यह 2000 से 2015 के मुकाबले करीब एक-तिहाई गति से हुई प्रगति है। अगर यही रफ्तार जारी रही तो 2030 तक यह सूचकांक केवल 74 तक ही पहुंच पाएगा, जिससे सभी लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का वैश्विक लक्ष्य अधूरा रह सकता है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र, जिसमें भारत भी शामिल है, ने स्वास्थ्य सेवाओं के कवरेज में अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर सुधार दर्ज किया है। 2015 के बाद इस क्षेत्र के यूएचसी इंडेक्स में 7 अंकों की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन 2030 का लक्ष्य हासिल करने के लिए यह गति भी पर्याप्त नहीं मानी जा रही।


    स्वास्थ्य खर्च से 1.6 अरब लोग गरीबी की चपेट में

    रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की करीब एक-चौथाई आबादी इलाज पर अपनी जेब से खर्च करने के कारण आर्थिक बोझ झेल रही है। वर्ष 2022 तक लगभग 1.6 अरब लोग स्वास्थ्य खर्च की वजह से गरीबी में जी रहे थे या गरीबी की ओर धकेले गए।

    कई देशों में खसरे के संक्रमण का खतरा
    डब्ल्यूएचओ ने बच्चों के नियमित टीकाकरण की रफ्तार को लेकर भी चेतावनी दी है। कई प्रमुख टीकों का कवरेज अभी भी 90 प्रतिशत के वैश्विक लक्ष्य से नीचे है। खासकर खसरे (मीजल्स) की दूसरी डोज का कवरेज 2024 में केवल 76 प्रतिशत रहा, जिससे कई देशों में संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।

    सरकारों को स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ाना होगा निवेश
    डब्ल्यूएचओ का कहना है कि अगर 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करना है तो सरकारों को स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाना होगा। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना होगा, टीकाकरण का दायरा बढ़ाना होगा और लोगों का इलाज पर होने वाला निजी खर्च कम करना होगा।

  • योगिनी एकादशी का महापर्व कब रखें व्रत 9 या 10 जुलाई उदया तिथि का भ्रम हुआ दूर जानें लक्ष्मी नारायण की कृपा पाने का शुभ समय

    योगिनी एकादशी का महापर्व कब रखें व्रत 9 या 10 जुलाई उदया तिथि का भ्रम हुआ दूर जानें लक्ष्मी नारायण की कृपा पाने का शुभ समय

    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। प्रत्येक माह आने वाली दोनों एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती हैं और श्रद्धालु पूरे विधि विधान के साथ इनका पालन करते हैं। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी को विशेष रूप से पापों के नाश और सुख समृद्धि प्रदान करने वाला व्रत माना गया है। इस बार योगिनी एकादशी को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि व्रत 9 जुलाई को रखा जाए या फिर 10 जुलाई को। धार्मिक मान्यताओं और पंचांग के अनुसार इस बार उदया तिथि के आधार पर व्रत 10 जुलाई शुक्रवार को रखा जाएगा।

    पंचांग के अनुसार आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 9 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 45 मिनट से होगा जबकि इसका समापन 10 जुलाई को दोपहर 1 बजकर 20 मिनट पर होगा। चूंकि व्रत के लिए उदया तिथि का विशेष महत्व माना जाता है इसलिए योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई को करना धार्मिक दृष्टि से श्रेष्ठ और मान्य रहेगा।

    इस वर्ष योगिनी एकादशी कई शुभ और कल्याणकारी संयोगों के साथ आ रही है। इस दिन सुकर्मा योग और धृति योग का निर्माण हो रहा है जो धार्मिक कार्यों और भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। इतना ही नहीं शुक्रवार के दिन एकादशी होने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की संयुक्त कृपा प्राप्त होने का दुर्लभ अवसर भी बन रहा है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से लक्ष्मी नारायण की पूजा करने वाले भक्तों के जीवन में धन समृद्धि सुख शांति और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।

    योगिनी एकादशी का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है बल्कि इसे आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व भी माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस व्रत को करने से व्यक्ति के जाने अनजाने में हुए पापों का नाश होता है। भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख समृद्धि तथा खुशहाली बनी रहती है। ऐसा भी कहा गया है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने वाला व्यक्ति सांसारिक सुखों का आनंद लेने के बाद अंत में मोक्ष की प्राप्ति करता है।

    व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को प्रातःकाल स्नान के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाकर पीले फूल तुलसी दल फल और पंचामृत अर्पित करना चाहिए। विष्णु सहस्रनाम श्री विष्णु चालीसा और एकादशी व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। दिनभर सात्विक आचरण रखते हुए भगवान के नाम का स्मरण करना चाहिए और जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र या धन का दान करने से भी विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

    योगिनी एकादशी व्रत का पारण 11 जुलाई शनिवार को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 5 बजकर 32 मिनट से सुबह 8 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार द्वादशी तिथि के भीतर ही व्रत का पारण करना आवश्यक माना गया है। समय पर पारण करने से ही व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

    धार्मिक दृष्टि से योगिनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं बल्कि आत्मसंयम भक्ति सेवा और सकारात्मक जीवन का संदेश देने वाला पावन पर्व है। यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन किया जाए तो भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से जीवन में सुख समृद्धि और मानसिक शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

  • ईडी ने TMC के 440 करोड़ रुपये किए फ्रीज….पार्टी बोली- राजनीति से प्रेरित कार्रवाई

    ईडी ने TMC के 440 करोड़ रुपये किए फ्रीज….पार्टी बोली- राजनीति से प्रेरित कार्रवाई


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल चुनाव (West Bengal Elections) में हार के साथ सत्ता गंवाने के बाद अपने नेताओं की बगावत (Rebellion) झेल रही ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) अब एक नई मुश्किल में घिर गई है. प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) यानी ईडी ने टीएमसी के बैंक खातों में जमा 440 करोड़ रुपये धनराशि फ्रीज कर दी है. ईडी ने इस कार्रवाई के पीछे एविएशन कंपनी केयरवेल और उससे जुड़ी एक कंपनी के खाते में 2023 से 2026 के बीच 160 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जाने को वजह बताया है।

    ईडी अब वित्तीय लेनदेन में धोखाधड़ी के एंगल से जांच की बात कह रही है. वहीं, ईडी के इस एक्शन को टीएमसी ने राजनीति से प्रेरित, मनमानी और अवैध बताया है. टीएमसी ने ईडी के इस एक्शन को लेकर बयान जारी कर कहा है कि खातों में जमा धनराशि की पूरी जानकारी पार्टी चुनाव आयोग और आयकर विभाग को पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराती रही है।

    टीएमसी की ओर से कहा गया है कि पार्टी ने चंदे से संबंधित जानकारी समय-समय पर चुनाव आयोग् और आयकर विभाग को दी है. हर साल पार्टियों के चंदे से जुड़ी जानकारियां चुनाव आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक भी की जाती है. टीएमसी ने दावा कहा है कि इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारियां केंद्र सरकार के पास भी पहले से ही उपलब्ध हैं. ये बॉन्ड भारतीय स्टेट बैंक की ओर से जारी किए गए थे और बाद में इनका विवरण सुप्रीम कोर्ट को भी दिया गया था।

    टीएमसी ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के उपयोग का आरोप लगाया और कहा कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं और निष्पक्ष राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिए लेवल प्लेइंग फील्ड के सिद्धांत पर गंभीर हमला है. गौरतलब है कि ईडी ने यह कार्रवाई ऐसे समय की है, जब टीएमसी में पार्टी के नाम-निशान पर कब्जे की जंग छिड़ी हुई है।

    ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले गुट ने पार्टी संगठन, इसके नाम और निशान पर दावा किया है. बागी गुट ने नेतृत्व की लड़ाई पर फैसला होने तक बैंकों से पार्टी खाते से लेनदेन रोकने की भी अपील की थी. अब ईडी ने ही जमा धनराशि फ्रीज कर दी है।

  • वास्तु शास्त्र के ये प्रभावी उपाय बदल सकते हैं आपके घर का माहौल धन उन्नति और खुशहाली के लिए आज ही अपनाएं

    वास्तु शास्त्र के ये प्रभावी उपाय बदल सकते हैं आपके घर का माहौल धन उन्नति और खुशहाली के लिए आज ही अपनाएं


    नई दिल्ली । भारतीय संस्कृति में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व माना गया है। यह केवल भवन निर्माण की पद्धति नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और संतुलित जीवन का विज्ञान भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि घर में ऊर्जा का प्रवाह सही रहता है तो परिवार के सदस्यों को सुख शांति समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है। वहीं घर में वास्तु दोष होने पर आर्थिक परेशानियां मानसिक तनाव पारिवारिक विवाद और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। हालांकि हर समस्या का समाधान बड़े बदलाव से ही हो यह जरूरी नहीं है। कुछ छोटे और सरल वास्तु उपाय अपनाकर भी घर के वातावरण को बेहतर बनाया जा सकता है।

    सबसे पहले घर की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। वास्तु शास्त्र में माना गया है कि जहां स्वच्छता रहती है वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। घर के मुख्य द्वार को हमेशा साफ रखें और उसके आसपास अनावश्यक सामान जमा न होने दें। मुख्य प्रवेश द्वार पर सुंदर तोरण या शुभ चिन्ह लगाने से सकारात्मक वातावरण बनने की मान्यता है।

    पूजा घर को हमेशा उत्तर पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। प्रतिदिन सुबह और शाम दीपक जलाने से घर का वातावरण शांत और सकारात्मक बना रहता है। नियमित रूप से पूजा करने और घर में सुगंधित धूप या कपूर जलाने से नकारात्मक ऊर्जा कम होने की धार्मिक मान्यता है।

    रसोई घर को भी वास्तु में विशेष महत्व दिया गया है। भोजन बनाते समय पूर्व दिशा की ओर मुख रखना शुभ माना जाता है। रसोई को साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए क्योंकि यह घर की समृद्धि और स्वास्थ्य से जुड़ा स्थान माना जाता है। पानी और अग्नि से जुड़े उपकरणों को उचित दूरी पर रखना भी लाभकारी माना जाता है।

    शयन कक्ष में बिस्तर इस प्रकार रखें कि सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रहे। माना जाता है कि इससे अच्छी नींद आती है और मानसिक तनाव कम होता है। बेड के सामने टूटा हुआ शीशा या अव्यवस्थित सामान नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे नकारात्मक प्रभाव पड़ने की मान्यता है।

    घर में सूखे पौधे टूटे हुए बर्तन बंद घड़ियां और बेकार वस्तुएं लंबे समय तक नहीं रखनी चाहिए। वास्तु के अनुसार ऐसी चीजें नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती हैं। इसके स्थान पर हरे भरे पौधे जैसे तुलसी मनी प्लांट या अन्य सजावटी पौधे लगाने से घर का वातावरण ताजगी और सकारात्मकता से भर जाता है।

    आर्थिक समृद्धि के लिए उत्तर दिशा को साफ और खुला रखना शुभ माना जाता है। इस दिशा में भारी सामान रखने से बचने की सलाह दी जाती है। वहीं घर में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का पर्याप्त प्रवेश भी सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

    वास्तु शास्त्र यह भी सिखाता है कि केवल दिशाएं ही नहीं बल्कि घर के लोगों का व्यवहार भी सुख और समृद्धि का आधार होता है। परिवार में प्रेम सम्मान और मधुर वाणी का वातावरण किसी भी वास्तु उपाय से अधिक प्रभावी माना जाता है। इसलिए घर में सकारात्मक सोच बनाए रखें नियमित रूप से ईश्वर का स्मरण करें और स्वच्छता अनुशासन तथा सद्भाव को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। इन सरल उपायों को अपनाकर घर के वातावरण को अधिक सुखद शांत और ऊर्जावान बनाया जा सकता है।

  • Monsoon Alert: उत्तर से दक्षिण तक सक्रिय हुआ मानसून आज इन राज्यों में तेज बारिश और आंधी की संभावना

    Monsoon Alert: उत्तर से दक्षिण तक सक्रिय हुआ मानसून आज इन राज्यों में तेज बारिश और आंधी की संभावना


    मध्यप्रदेश । देशभर में आज मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आएगा। मानसून की सक्रियता के चलते कई राज्यों में अच्छी बारिश होने की संभावना है जबकि कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं और गरज चमक भी देखने को मिल सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत मध्य भारत पूर्वी भारत और पश्चिमी तटीय इलाकों में मानसून मजबूत स्थिति में बना हुआ है जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि भारी बारिश वाले इलाकों में जलभराव फिसलन और यातायात प्रभावित होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

    दिल्ली एनसीआर उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश राजस्थान बिहार झारखंड छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में आज बादल छाए रहने के साथ रुक रुक कर बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज बारिश के साथ बिजली चमकने और तेज हवा चलने की भी संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है जिससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को उमस से राहत मिलेगी।

    मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है इसलिए लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। वहीं राजस्थान के पूर्वी हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है जबकि पश्चिमी क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रह सकता है। बिहार और झारखंड में भी कई स्थानों पर गरज चमक के साथ अच्छी बारिश होने के आसार हैं।

    पश्चिमी तट की बात करें तो महाराष्ट्र गोवा कर्नाटक और केरल में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। इन राज्यों में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और नदी नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बरतने की अपील की है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में भी तेज बारिश के कारण भूस्खलन और सड़क बाधित होने की संभावना बनी हुई है।

    पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश का दौर जारी रहेगा। असम मेघालय अरुणाचल प्रदेश नागालैंड और मिजोरम में कई स्थानों पर अच्छी बारिश होने की संभावना है। किसानों के लिए यह बारिश खरीफ फसलों की बुवाई और विकास के लिहाज से लाभदायक मानी जा रही है लेकिन अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में खेतों में जलभराव की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।

    मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। तेज बारिश के दौरान वाहन सावधानी से चलाएं और जलभराव वाले रास्तों पर जाने से परहेज करें। जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है वहां स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना जरूरी है। कुल मिलाकर आज का दिन देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश और बदलते मौसम के नाम रहेगा जिससे गर्मी से राहत तो मिलेगी लेकिन सावधानी बरतना भी उतना ही आवश्यक होगा।

  • अयोध्या में क्या होने वाला है बड़ा फैसला? चंपत राय के लेटर से मची हलचल संतों की महाबैठक की तैयारी

    अयोध्या में क्या होने वाला है बड़ा फैसला? चंपत राय के लेटर से मची हलचल संतों की महाबैठक की तैयारी


    नई दिल्ली । अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के दो दिनों के भीतर सामने आए पत्रों ने न केवल संगठन के भीतर हलचल बढ़ा दी है बल्कि संत समाज और रामभक्तों के बीच भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लगातार हो रही बैठकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों की सक्रियता ने इस बात के संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ट्रस्ट की व्यवस्था और कार्यप्रणाली को लेकर कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है। हालांकि अब तक किसी भी स्तर पर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    सूत्रों के अनुसार चंपत राय के पत्र सार्वजनिक होने के बाद ट्रस्ट के नए महासचिव कृष्ण मोहन और कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी ने उनसे मुलाकात की। इसके बाद कई प्रमुख संत महंत और ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ लोगों ने भी अलग अलग बैठकों में हिस्सा लिया। इन मुलाकातों को सामान्य प्रक्रिया से अलग माना जा रहा है क्योंकि इनका उद्देश्य ट्रस्ट में बने मौजूदा हालात पर चर्चा और आगे की रणनीति तय करना बताया जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि महासचिव पद से हटाए जाने के बाद चंपत राय खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। हाल ही में जारी उनके पत्रों में भी उनकी पीड़ा झलकने की बात कही जा रही है। पत्रों के सार्वजनिक होने के बाद संगठन के भीतर यह कोशिश तेज हो गई है कि किसी तरह विवाद और अधिक न बढ़े तथा स्थिति को सामान्य बनाया जाए। इसी कारण लगातार संवाद और बैठकों का सिलसिला जारी है।

    जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी चंपत राय से संपर्क किया है। उनसे संगठनात्मक मर्यादा बनाए रखने और पूरे मामले को शांतिपूर्वक सुलझाने का आग्रह किया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सभी पक्षों के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास और तेज होगा।

    इधर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी से कई प्रमुख संतों ने विस्तृत चर्चा की। बैठक के बाद संतों ने संकेत दिए कि निकट भविष्य में ऐसा परिवर्तन देखने को मिल सकता है जिसकी व्यापक स्तर पर सराहना होगी। संत समाज का कहना है कि राम मंदिर आंदोलन में संतों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है इसलिए ट्रस्ट की व्यवस्था में भी उनका प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि भविष्य में निर्णय प्रक्रिया में संतों की अधिक भागीदारी से संगठन और अधिक मजबूत होगा।

    सूत्रों के अनुसार 22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक से पहले संतों की एक बड़ी बैठक आयोजित की जा सकती है जिसमें देशभर से सैकड़ों संत और महंत शामिल हो सकते हैं। इस बैठक का उद्देश्य हाल के विवादों के बाद समाज में बने भ्रम को दूर करना और राम मंदिर ट्रस्ट के प्रति सकारात्मक संदेश देना बताया जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि कथित अनियमितताओं में पूरे ट्रस्ट की भूमिका नहीं बल्कि केवल कुछ व्यक्तियों पर कार्रवाई की गई है।

    फिलहाल अयोध्या में लगातार हो रही बैठकों और बढ़ी गतिविधियों ने यह साफ कर दिया है कि राम मंदिर ट्रस्ट आने वाले दिनों में संगठनात्मक स्तर पर कुछ अहम फैसले ले सकता है। हालांकि इन बैठकों का अंतिम परिणाम क्या होगा और संभावित बदलाव किस रूप में सामने आएंगे इसका जवाब आने वाले समय में ही मिल सकेगा।