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  • पुतिन ने PM मोदी की जमकर की तारीफ, भारतीय किसानों के लिए रूस देगा पर्याप्त मात्रा में उर्वरक

    पुतिन ने PM मोदी की जमकर की तारीफ, भारतीय किसानों के लिए रूस देगा पर्याप्त मात्रा में उर्वरक

    नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के रिश्तों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। सोमवार को मॉस्को में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में पीएम मोदी की व्यक्तिगत भूमिका अहम रही है। उन्होंने जयशंकर से प्रधानमंत्री मोदी तक अपना गर्मजोशी भरा अभिवादन पहुंचाने को भी कहा।

    मुलाकात के दौरान पुतिन ने भारत के कृषि क्षेत्र को लेकर भी अहम भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि रूस भारत को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक यानी खाद उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है। इससे भारतीय किसानों के लिए खाद की उपलब्धता को लेकर राहत की उम्मीद बढ़ी है।

    भारत-रूस व्यापार में फिर दिख रही तेजी

    पुतिन ने कहा कि 2025 में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में कुछ गिरावट आई थी, लेकिन अब इसमें सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने व्यापारिक रिश्तों में दोबारा तेजी आने के पीछे कई वजहों का जिक्र किया और प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत ध्यान को खास तौर पर रेखांकित किया।

    रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि पीएम मोदी भारत-रूस संबंधों के विकास में व्यक्तिगत रुचि लेते हैं और यही दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    मोदी से जल्द मुलाकात की उम्मीद

    पुतिन ने जयशंकर के सामने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की इच्छा भी जाहिर की। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों नेताओं की मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (SCO) से जुड़े कार्यक्रम के दौरान हो सकती है। इसके अलावा कार्यक्रम और समय-सारिणी के अनुसार साल के अंत में भी दोनों नेताओं की मुलाकात की संभावना जताई गई।

    भारतीय किसानों के लिए रूस का बड़ा भरोसा

    बैठक में उर्वरक आपूर्ति का मुद्दा भी अहम रहा। पुतिन ने कहा कि रूस भारत की कृषि जरूरतों को पूरा करने के लिए खाद की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है।

    भारत के लिए यह आश्वासन महत्वपूर्ण है, क्योंकि उर्वरकों की उपलब्धता सीधे खेती की लागत और उत्पादन से जुड़ी है। खासकर बुवाई के मौसम में खाद की समय पर उपलब्धता किसानों के लिए बेहद अहम होती है।

    सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं है सहयोग

    पुतिन ने भारत और रूस के बीच सहयोग को केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं बताया। दोनों देश परमाणु ऊर्जा, हाईटेक, रक्षा और रणनीतिक तकनीक समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं।

    भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत साझेदारी रही है। अब दोनों देश व्यापार और आर्थिक सहयोग को भी नए क्षेत्रों तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

    मोदी की तारीफ का क्या है मतलब?

    जयशंकर के साथ मुलाकात के दौरान पुतिन की ओर से पीएम मोदी की व्यक्तिगत भूमिका का उल्लेख ऐसे समय हुआ है, जब भारत और रूस अपने पारंपरिक रणनीतिक रिश्तों को आर्थिक और तकनीकी सहयोग के नए क्षेत्रों में विस्तार देने की कोशिश कर रहे हैं।

    ऐसे में एक तरफ पुतिन का मोदी की नेतृत्वकारी भूमिका की तारीफ करना और दूसरी तरफ भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरक आपूर्ति बढ़ाने का भरोसा देना, दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।

  • झुर्रियों के लिए घरेलू नुस्खा अपनाने से पहले जानें अलसी और एलोवेरा मिश्रण बनाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

    झुर्रियों के लिए घरेलू नुस्खा अपनाने से पहले जानें अलसी और एलोवेरा मिश्रण बनाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । उम्र बढ़ने के साथ त्वचा में प्राकृतिक बदलाव दिखाई देना सामान्य है। समय के साथ त्वचा की लोच कम हो सकती है और चेहरे पर फाइन लाइन्स तथा झुर्रियां नजर आने लगती हैं। इन्हें कम करने के लिए लोग अलग-अलग एंटी-एजिंग उत्पादों और घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं। अलसी, एलोवेरा जेल और बादाम तेल से तैयार किया जाने वाला मिश्रण भी इसी तरह के घरेलू स्किन केयर उपायों में शामिल है।

    इस मिश्रण को तैयार करने के लिए सबसे पहले अलसी के बीजों से जेल बनाया जाता है। इसके लिए दो बड़े चम्मच अलसी के बीज लेकर उन्हें एक कप पानी में डालें और मध्यम आंच पर करीब पांच से सात मिनट तक पकाएं। जब पानी गाढ़ा और कुछ चिपचिपा दिखाई देने लगे, तब गैस बंद कर दें।

    अलसी और पानी के इस मिश्रण को गर्म रहते हुए बारीक छलनी या साफ सूती कपड़े से छान लें। इससे बीज अलग हो जाएंगे और जेल जैसा पदार्थ बच जाएगा। इसके बाद इस जेल को पूरी तरह ठंडा करना जरूरी है, ताकि आगे इसमें मिलाए जाने वाले दूसरे पदार्थों का टेक्सचर प्रभावित न हो।

    ठंडे अलसी जेल में दो बड़े चम्मच एलोवेरा जेल मिलाया जा सकता है। इसके बाद इसमें एक छोटा चम्मच बादाम तेल डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं। चम्मच या छोटे व्हिस्कर की सहायता से मिश्रण को कुछ मिनट तक फेंटने पर इसका टेक्सचर अपेक्षाकृत चिकना और क्रीमी हो सकता है।

    तैयार मिश्रण को साफ और सूखे कांच के छोटे कंटेनर में रखना चाहिए। इसमें पानी और पौधों से प्राप्त ताजा सामग्री होती है तथा इसमें सामान्य कॉस्मेटिक प्रिजर्वेटिव मौजूद नहीं होते। इसलिए इसे लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखना उचित नहीं है। फ्रिज में रखने के बावजूद खराब होने के संकेतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    रंग, गंध या टेक्सचर में बदलाव नजर आए तो मिश्रण का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। घरेलू मिश्रण के लिए एक निश्चित अवधि तक सुरक्षित रहने की गारंटी नहीं दी जा सकती, क्योंकि इसकी स्वच्छता, सामग्री और भंडारण की स्थिति के आधार पर इसकी गुणवत्ता बदल सकती है।

    अगर त्वचा इस मिश्रण को सहन करती है तो रात में चेहरा साफ करने के बाद थोड़ी मात्रा लगाई जा सकती है। हल्के हाथों से चेहरे और गर्दन पर इसे लगाया जा सकता है। हालांकि इसे लगाने से झुर्रियां खत्म होने या त्वचा में कोलेजन उत्पादन बढ़ने की गारंटी नहीं है।

    दरअसल, अलसी, एलोवेरा और बादाम तेल से बने इस घरेलू मिश्रण को सीधे तौर पर कोलेजन बढ़ाने वाली प्रमाणित क्रीम कहना सही नहीं होगा। इनके त्वचा को मॉइश्चराइज करने या मुलायम बनाए रखने से जुड़े संभावित फायदे हो सकते हैं, लेकिन एंटी-एजिंग और कोलेजन उत्पादन पर मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।

    इस मिश्रण का इस्तेमाल शुरू करने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है। थोड़ी मात्रा हाथ या कान के पीछे की त्वचा पर लगाकर देखें। लालिमा, खुजली, जलन या किसी अन्य प्रतिक्रिया की स्थिति में इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। संवेदनशील त्वचा, एलर्जी या पहले से त्वचा संबंधी समस्या होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

    त्वचा की देखभाल में पर्याप्त मॉइश्चराइजिंग के साथ धूप से बचाव और नियमित स्किन केयर अधिक महत्वपूर्ण हैं। झुर्रियों या उम्र से जुड़े त्वचा परिवर्तन को लेकर किसी खास उपचार की जरूरत हो तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना अधिक सुरक्षित विकल्प है।

  • महाकाल की नगरी में कुर्सी की रस्साकशी और प्रशासनिक किस्से

    महाकाल की नगरी में कुर्सी की रस्साकशी और प्रशासनिक किस्से


    उज्जैन । महाकाल की नगरी उज्जैन में इन दिनों राजनीति और प्रशासनिक गलियारों की चर्चाएं लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। खास तौर पर एक नियुक्ति को लेकर सामने आए घटनाक्रम ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। चर्चा है कि पिछड़े वर्ग से जुड़े एक पद पर नियुक्ति का पत्र जारी होने के बाद ही विरोध के स्वर उठने लगे। इसके बाद महज 48 घंटे के भीतर नई सूची सामने आई और उसमें संबंधित नाम दिखाई नहीं दिया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और इसे प्रभावशाली नेताओं की आपत्ति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि पूरे मामले को लेकर आधिकारिक स्तर पर अलग अलग दावे सामने आने की चर्चा है।

    उधर हिम्मतगढ़ की पहाड़ी से जुड़ा एक मामला भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि हाल में हुई लाखों रुपये की लूट के बाद पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने में तेजी दिखाई। चर्चा तो यहां तक है कि वारदात के बाद आरोपी कथित तौर पर उसी इलाके में फिर एकत्र हो गए जहां पुलिस को उनकी मौजूदगी का सुराग मिल गया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की। इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली और आरोपियों की कथित लापरवाही दोनों पर तरह तरह की बातें कही जा रही हैं।

    नागपंचमी के दौरान शिवाजी भवन से जुड़ा एक प्रसंग भी चर्चा में रहा। धार्मिक आयोजन के बीच एक श्रद्धालु को रोके जाने की बात सामने आने के बाद मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर भी सवाल उठे। हालांकि ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान को ही आधार माना जाना चाहिए।

    प्रशासनिक गलियारों में नामांतरण से जुड़े कथित लेनदेन की चर्चाओं ने भी माहौल गर्म किया हुआ है। एक अधिकारी पर प्रति बीघा रकम मांगने के आरोपों की चर्चा है। यदि इस तरह के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय हो सकता है। दूसरी ओर एक अधिकारी द्वारा कथित सिफारिश पर सख्त प्रतिक्रिया दिए जाने की चर्चा भी सामने आई है। बताया जाता है कि सिफारिश के जवाब में नोटिस जारी करने तक की बात कही गई। इससे यह संदेश गया कि प्रशासनिक कामकाज में दबाव और सिफारिश को लेकर अब सख्ती बरती जा रही है।

    नागपंचमी की भीड़ और आगामी सिंहस्थ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी प्रशासन की प्राथमिकता बनी हुई है। इसी क्रम में बड़ी संख्या में बैरिकेडिंग और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों को लेकर अधिकारियों की सक्रियता चर्चा में रही। रात तक व्यवस्थाओं की निगरानी किए जाने और संभावित भीड़ वाले क्षेत्रों में पहले से इंतजाम करने की कोशिश को प्रशासनिक तैयारी के तौर पर देखा गया।

    इसी बीच एक बड़े राजनीतिक चेहरे के अचानक उज्जैन दौरे और वीआईपी गेस्ट हाउस में बैठकों की खबर ने भी सियासी चर्चाओं को हवा दे दी। कार्यक्रम की सूचना को लेकर कुछ नेताओं के नाराज होने की बात कही गई लेकिन बाद में दौरा अचानक तय होने की जानकारी सामने आने के बाद स्थिति सामान्य होने की चर्चा है। हेलीपैड से लेकर बैठकों तक नेताओं के बीच हल्के फुल्के तंज और राजनीतिक बातचीत का दौर भी चलता रहा।

    सिंहस्थ की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण और शहर के विकास से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे में उज्जैन का सियासी माहौल आने वाले दिनों में और गर्म रहने की संभावना है। बाबा की नगरी में फिलहाल राजनीति प्रशासन और सिंहस्थ की तैयारियां एक साथ चर्चा के केंद्र में हैं और यही वजह है कि यहां हर छोटा बड़ा घटनाक्रम राजनीतिक गलियारों में नई कहानी को जन्म दे रहा है।

  • चींटियों की गंध पहचानने की क्षमता पर असर डालते हैं ये घरेलू उपाय, जानिए रसोई में कैसे करें इस्तेमाल

    चींटियों की गंध पहचानने की क्षमता पर असर डालते हैं ये घरेलू उपाय, जानिए रसोई में कैसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली ।
    रसोई और घर में चींटियों का दिखाई देना आम समस्या है। खासकर गर्मी और बारिश के मौसम में खाने-पीने की चीजों के आसपास इनकी संख्या बढ़ सकती है। चीनी, मिठाई और अन्य मीठी चीजें चींटियों को जल्दी आकर्षित करती हैं। कई बार खाने के छोटे कण या चिपचिपे अवशेष अच्छी तरह सफाई करने के बाद भी रह जाते हैं, जिनकी गंध चींटियों को उस स्थान तक पहुंचा देती है।

    एक बार चींटियां किसी जगह पर लगातार आने लगें तो उन्हें रोकना आसान नहीं होता। ऐसे में केवल उन्हें हटाने के बजाय उस जगह की नियमित सफाई करना और उनके आने के रास्ते को बाधित करना ज्यादा प्रभावी तरीका हो सकता है। कुछ घरेलू चीजों की तेज गंध भी चींटियों की गतिविधि को कम करने में मदद कर सकती है।

    लौंग को चींटियों को दूर रखने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी तेज खुशबू उन स्थानों पर रखी जा सकती है जहां चींटियां बार-बार दिखाई देती हैं। खासतौर पर चीनी या अन्य मीठी चीजों के डिब्बों के आसपास लौंग रखने से चींटियों की आवाजाही को रोकने में मदद मिल सकती है।

    तेजपत्ता भी रसोई में आसानी से उपलब्ध होने वाला विकल्प है। तेजपत्ते को हल्का तोड़कर उन जगहों पर रखा जा सकता है जहां से चींटियां आती हैं। इसकी गंध चींटियों के लिए अप्रिय मानी जाती है और यह उनके आने वाले रास्ते को बदलने में मदद कर सकती है।

    दालचीनी का इस्तेमाल भी इसी तरह किया जा सकता है। इसे पाउडर के रूप में रसोई के दरवाजे, खिड़की या उन दरारों के पास रखा जा सकता है जहां से चींटियां अंदर आती हैं। इसकी तेज खुशबू चींटियों को उस रास्ते से दूर रखने में मदद कर सकती है।

    हल्दी भी एक घरेलू उपाय है। इसे उन जगहों पर हल्की रेखा के रूप में रखा जा सकता है जहां से चींटियों के घर के अंदर आने की संभावना होती है। हालांकि, इसका इस्तेमाल साफ और सूखी सतह पर करना बेहतर रहता है, ताकि रसोई में गंदगी न फैले।

    नींबू का रस भी चींटियों की गंध आधारित राह को प्रभावित करने में मदद कर सकता है। इसके लिए नींबू के रस को पानी में मिलाकर उन स्थानों पर छिड़का जा सकता है जहां चींटियां दिखाई देती हैं। रसोई के फर्श, खिड़की और दरवाजे के आसपास सफाई के बाद इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

    सफेद सिरके और पानी का घोल भी चींटियों की आवाजाही वाले स्थानों की सफाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे फर्श, खिड़की, दरवाजे और डस्टबिन के आसपास छिड़कने से चींटियों के छोड़े हुए गंध संकेत कम करने में मदद मिल सकती है।

    पुदीने या पेपरमिंट की तेज खुशबू भी चींटियों को दूर रखने के लिए इस्तेमाल की जाती है। पानी में थोड़ी मात्रा में पेपरमिंट एसेंशियल ऑयल मिलाकर चींटियों के आने वाले रास्तों पर हल्का स्प्रे किया जा सकता है। हालांकि, इसे खाने की चीजों, बर्तनों और बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए।

    इन उपायों के साथ रसोई में मीठी और खाने की वस्तुओं को अच्छी तरह बंद डिब्बों में रखना, गिरे हुए खाद्य पदार्थों को तुरंत साफ करना और पानी या नमी जमा न होने देना जरूरी है। अगर चींटियों का प्रकोप लगातार बना रहे या बड़ी संख्या में चींटियां घर में फैल जाएं, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय उचित कीट नियंत्रण उपाय अपनाना अधिक प्रभावी हो सकता है।

  • गोविंदा और सुनीता आहूजा ने इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को किया अनफॉलो, तलाक की पुरानी चर्चाओं ने फिर पकड़ा जोर

    गोविंदा और सुनीता आहूजा ने इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को किया अनफॉलो, तलाक की पुरानी चर्चाओं ने फिर पकड़ा जोर

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा एक बार फिर अपनी शादीशुदा जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। दोनों के इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फॉलो न करने की बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके रिश्ते को लेकर तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों ने हाल में एक-दूसरे को अनफॉलो किया है या वे पहले से ही सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को फॉलो नहीं करते थे।

    सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुनीता आहूजा की फॉलोइंग लिस्ट में गोविंदा का नाम दिखाई नहीं दे रहा है। वहीं गोविंदा की फॉलोइंग लिस्ट में भी सुनीता का नाम नजर नहीं आने की बात कही जा रही है। हालांकि, सुनीता गोविंदा से जुड़े एक फैन पेज को फॉलो करती हैं। इसी सोशल मीडिया गतिविधि को लेकर दोनों के रिश्ते में कथित दूरी की चर्चाएं फिर शुरू हो गई हैं।

    गोविंदा और सुनीता के रिश्ते को लेकर पहले भी कई बार खबरें सामने आती रही हैं। पिछले कुछ समय में दोनों के बीच कथित अनबन और तलाक की चर्चाओं ने खासा ध्यान खींचा था। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सुनीता ने दिसंबर 2024 में तलाक की अर्जी दाखिल की थी। इसमें बेवफाई, मानसिक प्रताड़ना और साथ छोड़ने जैसे आरोपों का उल्लेख होने की बात कही गई थी।

    बाद में गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा की ओर से कहा गया था कि सुनीता ने तलाक का मामला वापस ले लिया है। इसके बाद दोनों के रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं में कुछ समय के लिए कमी आई थी। हालांकि, अब इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फॉलो नहीं करने की बात सामने आने के बाद पुरानी अटकलें फिर चर्चा में आ गई हैं।

    सुनीता ने एक बातचीत के दौरान तलाक का मामला वापस लेने की वजह को लेकर भी अपनी बात रखी थी। उन्होंने गोविंदा के दोबारा शादी करने की योजना से जुड़ी बात कही थी और इस मामले में राखी सावंत से समर्थन मांगा था। हालांकि, गोविंदा के मैनेजर की ओर से दूसरी शादी से जुड़ी खबरों को लेकर अलग रुख सामने आया था। ऐसे में इस मामले में दोनों पक्षों की बातें अलग-अलग रही हैं।

    हाल ही में गोविंदा अपनी को-स्टार कोमल रानी स्वर्णकार के साथ नजर आए थे। दोनों की तस्वीरें सामने आने के बाद सुनीता ने नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने गोविंदा और कोमल की साथ में मौजूदगी पर टिप्पणी करते हुए अपने पति से जुड़े इस मामले पर सवाल उठाए थे। सुनीता की प्रतिक्रिया के बाद भी दोनों के रिश्ते को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हुआ था।

    गोविंदा और सुनीता ने वर्ष 1987 में गुपचुप शादी की थी। बताया जाता है कि अभिनेता ने अपने फिल्मी करियर को देखते हुए लंबे समय तक अपनी शादी को सार्वजनिक नहीं किया था। बाद में दोनों की शादी और पारिवारिक जीवन बॉलीवुड में चर्चा का विषय बना रहा।

    फिलहाल इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फॉलो नहीं करने की खबर को लेकर दोनों की ओर से रिश्ते में किसी नई परेशानी या तलाक की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए सोशल मीडिया पर सामने आई इस जानकारी के आधार पर उनके रिश्ते को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिलहाल इतना जरूर है कि इस घटना ने गोविंदा और सुनीता की शादी से जुड़ी पुरानी चर्चाओं को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

  • भारत-भूटान संबंधों में रणनीतिक सहयोग बढ़ा, आर्थिक विकास, जलविद्युत, सीमा संपर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी को मिली नई गति

    भारत-भूटान संबंधों में रणनीतिक सहयोग बढ़ा, आर्थिक विकास, जलविद्युत, सीमा संपर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी को मिली नई गति


    नई दिल्ली ।
    भारत और भूटान के बीच लंबे समय से कायम मित्रता अब विकास सहयोग से आगे बढ़कर व्यापक और भविष्य केंद्रित रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रही है। दोनों देशों के बीच पिछले एक वर्ष के दौरान आर्थिक योजना, ऊर्जा परिवर्तन, क्षेत्रीय संपर्क और ज्ञान साझाकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिली है।

    भारत और भूटान के संबंध 1949 और 2007 की मैत्री संधियों की भावना पर आधारित हैं। समय के साथ दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ा है और भारत की विकास भागीदारी अब केवल अलग-अलग परियोजनाओं तक सीमित नहीं रह गई है। इसे भूटान की दीर्घकालिक राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के साथ जोड़ा जा रहा है।

    हाल में हुई पांचवीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता में भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना 2024-29 के लिए भारत की ओर से घोषित 10,000 करोड़ रुपये की सहायता की समीक्षा की गई। इस सहयोग पैकेज का बड़ा हिस्सा प्राथमिकता वाली विकास परियोजनाओं के लिए निर्धारित किया गया है।

    इसमें 6,860 करोड़ रुपये 82 उच्च प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए निर्धारित हैं। इन परियोजनाओं में स्वास्थ्य सेवाएं, शहरी बुनियादी ढांचा और आपदा प्रतिरोधी विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। शेष राशि भूटान के आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम के लिए बजटीय सहायता के रूप में उपलब्ध कराई जा रही है।

    भारत-भूटान सहयोग की एक प्रमुख विशेषता यह है कि विकास परियोजनाओं को भूटान की अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे स्थानीय स्वामित्व मजबूत होने और योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। भारत की जेएसडब्ल्यू एनर्जी और भूटान की ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन ने 920 मेगावाट की पुनात्सांगछू-III जलविद्युत परियोजना के विकास के लिए संयुक्त उद्यम बनाया है। इसमें भूटानी कंपनी की 51 प्रतिशत और भारतीय कंपनी की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

    इसके अलावा, भूटान सरकार और भारतीय निर्यात-आयात बैंक के बीच 4,000 करोड़ रुपये की अम्ब्रेला ऋण सुविधा सक्रिय हुई है। इसका इस्तेमाल नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाना है। इससे भूटान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और क्षमता विस्तार को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

    दोनों देश सीमा क्षेत्र को केवल भौगोलिक संपर्क के बजाय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण गलियारे के रूप में विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। दक्षिण-पूर्वी भूटान के सामरंग और असम के उदालगुड़ी जिले के बीच नया भूमि सीमा शुल्क मार्ग विकसित किया जा रहा है।

    इस मार्ग से कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं के आवागमन को सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही भूटान के दक्षिणी क्षेत्रों और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के बीच संपर्क बेहतर होगा तथा वैकल्पिक परिवहन मार्ग उपलब्ध होंगे।

    भारत-भूटान सहयोग का विस्तार डिजिटल और डाक सेवाओं तक भी हुआ है। गुवाहाटी में शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय डाक सहयोग पहल के तहत इंडिया पोस्ट और भूटान पोस्ट के बीच सहयोग को औपचारिक रूप दिया गया है। इसमें यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की पॉसट्रांसफर व्यवस्था को भारत की यूपीआई प्रणाली से जोड़ने की पहल शामिल है।

    रेल संपर्क भी भविष्य के सहयोग का अहम हिस्सा है। भूटान के पास अभी घरेलू रेल नेटवर्क नहीं है, लेकिन भारत सीमा तक रेल संपर्क के विस्तार पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में भूटानी माल ढुलाई को तेज, कम लागत वाला और अधिक कुशल परिवहन विकल्प उपलब्ध कराना है।

    इस तरह भारत और भूटान के रिश्ते अब पारंपरिक विकास सहायता से आगे बढ़कर ऊर्जा, व्यापार, डिजिटल सेवाओं, बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय संपर्क के साझा हितों पर आधारित व्यापक साझेदारी में बदल रहे हैं। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत कर सकता है।

  • 41 साल पुरानी फिल्म का वो भावुक गाना, जिसमें मालिक की मौत पर कुत्ते मोती की वफादारी ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं

    41 साल पुरानी फिल्म का वो भावुक गाना, जिसमें मालिक की मौत पर कुत्ते मोती की वफादारी ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गीत रहे हैं, जो केवल कहानी का हिस्सा नहीं बने बल्कि अपने भाव और प्रस्तुति के कारण दर्शकों की यादों में लंबे समय तक कायम रहे। 1985 में रिलीज हुई फिल्म तेरी मेहरबानियां का टाइटल ट्रैक भी ऐसा ही गीत है, जिसने इंसान और कुत्ते के बीच वफादारी तथा भावनात्मक लगाव को बेहद मार्मिक अंदाज में पेश किया।

    तेरी मेहरबानियां फिल्म में इंसान और उसके वफादार कुत्ते के रिश्ते को कहानी के केंद्र में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया था। फिल्म के टाइटल गीत तेरी मेहरबानियां, तेरी कदरदानियां को शब्बीर कुमार ने अपनी आवाज दी थी। गीत के भावनात्मक बोल और फिल्म में दिखाए गए दृश्यों ने इसे दर्शकों के बीच खास पहचान दिलाई।

    कहानी में मोती नाम का कुत्ता अपने मालिक राम से बेहद जुड़ा हुआ दिखाया गया है। राम की मौत के बाद मोती का अपने मालिक के प्रति लगाव और उसकी वफादारी कहानी को भावुक मोड़ देता है। अंतिम संस्कार से जुड़े दृश्यों में मोती की प्रतिक्रिया को इस तरह प्रस्तुत किया गया कि दर्शकों के लिए वह दृश्य बेहद मार्मिक बन गया।

    फिल्म का निर्देशन बी. विजय रेड्डी ने किया था, जबकि इसका निर्माण के.सी. बोकाड़िया ने किया। यह फिल्म 1984 में बनी कन्नड़ फिल्म थालिया भाग्य का हिंदी रीमेक थी। हिंदी संस्करण में कहानी को उस दौर के लोकप्रिय कलाकारों और संगीत के साथ प्रस्तुत किया गया, जिसने फिल्म को अलग पहचान दिलाई।

    तेरी मेहरबानियां में जैकी श्रॉफ ने राम की भूमिका निभाई थी और पूनम ढिल्लों बिजली के किरदार में नजर आई थीं। अमरीश पुरी ने ठाकुर विजय सिंह की भूमिका निभाई थी। राज किरण, स्वप्ना, असरानी, सदाशिव अमरापुरकर और सत्येन कप्पू भी फिल्म का हिस्सा थे। हालांकि, मोती का किरदार निभाने वाले कुत्ते का प्रदर्शन दर्शकों के बीच विशेष रूप से चर्चित रहा।

    फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने संभाली थी, जबकि गीत के बोल एस.एच. बिहारी ने लिखे थे। शब्बीर कुमार की आवाज ने टाइटल ट्रैक को भावनात्मक प्रभाव दिया। गीत के जरिए वफादारी, अपनापन और बिछड़ने के दर्द को सामने रखा गया, जिसकी वजह से यह गाना फिल्म की पहचान से जुड़ गया।

    तेरी मेहरबानियां 18 अक्टूबर 1985 को रिलीज हुई थी। फिल्म में करीब 140 मिनट की कहानी के दौरान पारिवारिक भावनाओं, संघर्ष और इंसान-पशु के रिश्ते को प्रमुखता दी गई। उस दौर में फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा प्रदर्शन किया और इसे सफल फिल्मों में गिना गया।

    फिल्म की सबसे खास बात यह रही कि मोती का किरदार केवल एक पशु पात्र तक सीमित नहीं रहा। कहानी में उसकी वफादारी को इंसानी रिश्तों के समान भावनात्मक महत्व दिया गया। यही वजह है कि कई दशक बीतने के बाद भी फिल्म का टाइटल गीत पुराने हिंदी फिल्म संगीत और भावुक सिनेमाई दृश्यों को याद करने वाले दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाए हुए है।

  • अक्षय खन्ना के खौफनाक शुक्राचार्य अवतार ने बढ़ाई महाकाली की चर्चा, फिल्म में दिखेगा पौराणिक संघर्ष का भव्य संसार

    अक्षय खन्ना के खौफनाक शुक्राचार्य अवतार ने बढ़ाई महाकाली की चर्चा, फिल्म में दिखेगा पौराणिक संघर्ष का भव्य संसार


    नई दिल्ली ।
    भारतीय पौराणिक कथाओं से प्रेरित आगामी फिल्म महाकाली को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। फिल्म की पहली झलक सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा अक्षय खन्ना के किरदार की हो रही है। अभिनेता फिल्म में शुक्राचार्य की भूमिका निभाते नजर आएंगे और जारी किए गए ग्लिम्प्स में उनका लुक बेहद गंभीर और प्रभावशाली दिखाई देता है।

    करीब 2 मिनट 55 सेकंड लंबे ग्लिम्प्स में फिल्म की कहानी की पूरी जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन इसके जरिए उस दुनिया की झलक जरूर दिखाई गई है जिसमें धर्म और अधर्म के बीच बड़ा संघर्ष देखने को मिलेगा। वीडियो में भव्य सेट, युद्ध से जुड़े दृश्य और बड़े स्तर पर तैयार किए गए विजुअल इफेक्ट्स फिल्म के पैमाने का संकेत देते हैं।

    अक्षय खन्ना का शुक्राचार्य अवतार ग्लिम्प्स का प्रमुख आकर्षण है। अभिनेता का गंभीर हावभाव और स्क्रीन प्रेजेंस उनके किरदार को रहस्यमय और प्रभावशाली बनाता है। शुक्राचार्य को पौराणिक कथाओं में असुरों के गुरु के रूप में जाना जाता है और फिल्म में इस किरदार की भूमिका कहानी के लिहाज से महत्वपूर्ण नजर आ रही है।

    ग्लिम्प्स में दिखाई गई फिल्म की दुनिया काफी विस्तृत नजर आती है। युद्ध के दृश्यों और बड़े विजुअल्स के माध्यम से निर्माताओं ने कहानी के संघर्ष को भव्य रूप देने की कोशिश की है। हालांकि, फिल्म के कथानक से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ग्लिम्प्स के अंतिम हिस्से में दिखाए गए दृश्य आने वाले बड़े संघर्ष की ओर संकेत करते हैं।

    महाकाली में अक्षय खन्ना के अलावा श्रीया रेड्डी, भूमि शेट्टी और रोहित सराफ भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। ग्लिम्प्स में श्रीया रेड्डी की झलक भी देखने को मिलती है। उनके किरदार को लेकर फिलहाल ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है, जिससे फिल्म की कहानी को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।

    फिल्म की रिलीज डेट का भी आधिकारिक ऐलान ग्लिम्प्स के साथ कर दिया गया है। महाकाली 8 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। रिलीज की तारीख सामने आने के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा और तेज हो गई है। खास तौर पर अक्षय खन्ना के अलग तरह के किरदार ने फिल्म की ओर ध्यान खींचा है।

    महाकाली प्रशांत वर्मा के सिनेमैटिक यूनिवर्स का हिस्सा है। इस यूनिवर्स की शुरुआत हनु-मैन से हुई थी। हनु-मैन को दर्शकों की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी बेहतर प्रदर्शन किया था। अब इसी सिनेमाई दुनिया को महाकाली के जरिए आगे बढ़ाने की तैयारी है।

    फिल्म के ग्लिम्प्स से यह संकेत जरूर मिलता है कि निर्माताओं ने पौराणिक कहानी को बड़े स्तर के विजुअल ट्रीटमेंट के साथ पेश करने की तैयारी की है। हालांकि, कहानी के प्रमुख मोड़ और किरदारों के बीच संबंधों को फिलहाल गोपनीय रखा गया है। ऐसे में रिलीज से पहले फिल्म को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

    अक्षय खन्ना का शुक्राचार्य अवतार इस समय महाकाली की सबसे बड़ी चर्चा बना हुआ है। अभिनेता ने इससे पहले भी अलग-अलग तरह के किरदारों में अपनी अभिनय क्षमता दिखाई है और इस फिल्म में उनका पौराणिक किरदार उनके करियर से अलग तरह की भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। अब 8 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में फिल्म की रिलीज के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि पौराणिक कथा और आधुनिक सिनेमाई प्रस्तुति का यह मेल दर्शकों को कितना प्रभावित करता है।

  • एयर इंडिया की AI 1741 फ्लाइट लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकरा गई। पायलट ने विमान को सुरक्षित उतारा और सभी 164 यात्री सुरक्षित रहे।

    एयर इंडिया की AI 1741 फ्लाइट लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकरा गई। पायलट ने विमान को सुरक्षित उतारा और सभी 164 यात्री सुरक्षित रहे।

    नई दिल्ली ।दिल्ली से पटना आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 1741 के साथ सोमवार सुबह लैंडिंग के दौरान बर्ड हिट की घटना सामने आई। विमान में 164 यात्री सवार थे। पटना के जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने से पहले विमान के दाहिने हिस्से में एक पक्षी टकरा गया। स्थिति को देखते हुए पायलट ने तुरंत सतर्कता बरती और विमान को सुरक्षित तरीके से रनवे पर उतार लिया।

    विमान ने सुबह करीब 7:43 बजे पटना एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। विमान के जमीन पर उतरने के बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित टर्मिनल भवन तक पहुंचाया गया। घटना के दौरान किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है। पायलट की तत्परता और समय पर लिए गए फैसले से स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।

    लैंडिंग से पहले विमान के दाहिने इंजन के आसपास पक्षी के टकराने का पता चला। इसके बाद पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल और हवाई अड्डे के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। जानकारी मिलते ही एयरपोर्ट प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए आपातकालीन व्यवस्था सक्रिय कर दी।

    किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए रनवे के आसपास दमकल वाहनों और चिकित्सा दलों को तैयार रखा गया। विमान के सुरक्षित उतरने के बाद यात्रियों को बाहर निकाला गया और इसके बाद तकनीकी टीम ने विमान की विस्तृत जांच शुरू की।

    ग्राउंड इंजीनियरिंग और तकनीकी विशेषज्ञों ने विमान के बाहरी हिस्से के साथ दोनों इंजनों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान बर्ड हिट की पुष्टि हुई। शुरुआती तकनीकी निरीक्षण में विमान के मुख्य इंजन और टरबाइन में किसी बड़े आंतरिक या संरचनात्मक नुकसान की जानकारी नहीं मिली।

    सुरक्षा मानकों के तहत विमान की दोबारा उड़ान से पहले आवश्यक तकनीकी जांच और प्रक्रियाएं पूरी की गईं। विमान को उड़ान के लिए उपयुक्त पाए जाने के बाद आगे के संचालन की अनुमति दी गई। इस प्रक्रिया के कारण विमान के निर्धारित कार्यक्रम पर असर पड़ा।

    AI 1741/1852 विमान को पटना से दिल्ली के लिए सुबह 8:45 बजे रवाना होना था। हालांकि, बर्ड हिट के बाद की गई अनिवार्य सुरक्षा जांच और तकनीकी परीक्षण के चलते विमान को करीब डेढ़ घंटे की देरी से दिल्ली के लिए रवाना किया गया।

    बर्ड स्ट्राइक विमानन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौती मानी जाती है, खासकर टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान जब विमान अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर होता है। पक्षी के इंजन या विमान के किसी महत्वपूर्ण हिस्से से टकराने की स्थिति में तकनीकी समस्या पैदा हो सकती है। ऐसे मामलों में पायलट की सतर्कता के साथ एयरपोर्ट पर मौजूद आपातकालीन सेवाओं की तत्परता भी महत्वपूर्ण होती है।

    पटना एयरपोर्ट पर हुई इस घटना में विमान को सुरक्षित उतारने के बाद यात्रियों को टर्मिनल तक पहुंचाया गया और तकनीकी जांच के जरिए विमान की उड़ान क्षमता सुनिश्चित की गई। घटना के कारण कुछ समय के लिए संचालन प्रभावित हुआ, लेकिन सभी 164 यात्रियों के सुरक्षित रहने से बड़ी चिंता टल गई। सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद विमान ने निर्धारित मार्ग पर अपनी अगली उड़ान भरी।

  • ट्रंप के अचानक बदलते रवैये से सतर्क था भारतीय प्रतिनिधिमंडल, मीडिया सवालों को लेकर अमेरिका के दावे पर भारत ने दी सफाई

    ट्रंप के अचानक बदलते रवैये से सतर्क था भारतीय प्रतिनिधिमंडल, मीडिया सवालों को लेकर अमेरिका के दावे पर भारत ने दी सफाई

    नई दिल्ली । जी-7 बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद मीडिया बातचीत को लेकर नया विवाद सामने आया है। अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया कि बैठक के बाद पत्रकारों को सवाल पूछने से रोकने का अनुरोध भारत की तरफ से किया गया था। इस दावे के बाद भारत की ओर से भी अपना पक्ष सामने रखा गया है।

    सर्जियो गोर के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात के बाद भारत की ओर से मीडिया को लेकर विशेष अनुरोध किया गया था। उनका दावा है कि विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि पत्रकारों को बैठक के बाद बुलाया जा सकता है, लेकिन पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं होनी चाहिए। साथ ही पत्रकारों को सवाल पूछने की अनुमति नहीं देने की बात भी कही गई थी।

    गोर के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस व्यवस्था पर सहमति जताई थी। हालांकि, बैठक समाप्त होने के बाद ट्रंप ने कैमरे की ओर देखकर पत्रकारों से सवाल करने की बात कह दी। इसके बाद मीडिया बातचीत का स्वरूप पहले तय किए गए तरीके से अलग हो गया।

    भारत की ओर से सामने आए सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने किसी असामान्य स्थिति से बचने के लिए पहले से तैयारी की थी। सूत्रों का कहना है कि ट्रंप के साथ बैठकों के दौरान सावधानी बरतना जरूरी माना जाता है, क्योंकि वह बातचीत के दौरान अचानक कोई नया मुद्दा उठा सकते हैं या चर्चा का रुख बदल सकता है।

    भारतीय पक्ष के अनुसार, ट्रंप के साथ पहले हुई कुछ बैठकों में भी बातचीत के दौरान अप्रत्याशित मुद्दे सामने आए हैं। दक्षिण अफ्रीका और यूक्रेन के नेताओं के साथ उनकी बातचीत के दौरान भी ऐसी स्थिति देखने को मिलने का हवाला दिया गया है। इसी कारण प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की मुलाकात के दौरान मीडिया बातचीत को लेकर भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पहले से तैयारी की थी।

    जी-7 बैठक के दौरान मोदी और ट्रंप के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, वहां मौजूद भारतीय नाविकों की सुरक्षा और भारत-अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े विषय प्रमुख रहे। होर्मुज क्षेत्र में जारी परिस्थितियों को देखते हुए वहां काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा रही।

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और उनकी सुरक्षित स्थिति सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। बातचीत के दौरान ट्रंप की ओर से भी भारत के साथ खड़े रहने का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई है। इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग के महत्व को भी रेखांकित किया गया।

    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार का मुद्दा भी दोनों नेताओं की बातचीत में शामिल रहा। दोनों देशों के संबंधों में व्यापार और आर्थिक सहयोग लगातार महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं। ऐसे में जी-7 बैठक के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात को कई स्तरों पर अहम माना गया।

    सर्जियो गोर के बयान के बाद अब प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भारत और अमेरिका के पक्षों में अंतर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राजदूत ने मीडिया सवालों को लेकर भारत के अनुरोध का जिक्र किया, जबकि भारतीय पक्ष ने इसे प्रतिनिधिमंडल की पूर्व तैयारी और ट्रंप के अप्रत्याशित रवैये को ध्यान में रखकर बरती गई सावधानी से जोड़ा है। इस घटनाक्रम ने मोदी-ट्रंप मुलाकात से जुड़े राजनीतिक और कूटनीतिक पहलुओं को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।