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  • Iran-Israel War: कतर में फंसे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी, एयरस्पेस बंद और एयरपोर्ट न जाएं

    Iran-Israel War: कतर में फंसे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी, एयरस्पेस बंद और एयरपोर्ट न जाएं

    नई दिल्ली। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान बौखला गया है और खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कुवैत, सऊदी अरब, यूएई और बहरीन तक ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों के अलावा सिविलियन जगहों पर भी मिसाइलें दागनी शुरू कर दी हैं। इस कारण खाड़ी देशों में ज्यादातर देशों ने अपने हवाई ऑपरेशंस पर फिलहाल रोक लगा दी है। ऐसे समय बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक मिडिल ईस्ट के अलग-अलग देशों में फंस गए हैं। इसी बीच कतर में स्थित भारतीय दूतावास ने कतर में फंसे भारतीय नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। इसमें बताया गया है कि इजरायल-ईरान जंग के बीच भारतीय नागरिक किन दिशा-निर्देशों का पालन करें।

    बहुत जरूरी होने पर ही घर से निकलें
    कतर के दोहा में भारतीय दूतावास ने ट्वीट के माध्यम से कहा कि भारतीय समुदाय से अनुरोध है कि वे कतर के अधिकारियों द्वारा ऑफिशियल चैनलों से जारी की गई खबरों और गाइडलाइंस को ध्यानपूर्वक फॉलो करें। निवासियों से कहा गया है कि वे केवल वेरिफाइड और ऑफिशियल जानकारी पर भरोसा करें और केवल बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। सभी भारतीय नागरिकों से सख्ती से निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया है।

    कब शुरू होगा फ्लाइट ऑपरेशन
    भारतीय दूतावास ने बताया कि कतर सिविल एविएशन अथॉरिटी ने पुष्टि की है कि कतर का एयरस्पेस फिलहाल बंद है। इसी कारण हमाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सभी फ्लाइट ऑपरेशन रोक दिए गए हैं। एयरस्पेस को सुरक्षित रूप से फिर से खोलने की घोषणा के बाद ही फ्लाइट संचालन फिर से शुरू होंगे। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरपोर्ट पर न जाएं और लेटेस्ट अपडेट के लिए अपनी एयरलाइन से लगातार संपर्क बनाए रखें।

    इस एडवाइजरी के माध्यम से कतर में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रहने और केवल आधिकारिक चैनलों से जानकारी लेने की हिदायत दी गई है, ताकि किसी तरह की अफवाह या गलत सूचना का असर न पड़े।

  • IND vs ENG T20 World Cup: 41 साल पुराना संयोग, जो टीम इंडिया को फाइनल में दे सकता है तीसरी ट्रॉफी

    IND vs ENG T20 World Cup: 41 साल पुराना संयोग, जो टीम इंडिया को फाइनल में दे सकता है तीसरी ट्रॉफी


    नई दिल्ली। टी20 विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में 5 मार्च को वानखेड़े स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड आमने-सामने होंगे। इस मुकाबले को सिर्फ फाइनल में जगह बनाने की लड़ाई ही नहीं, बल्कि एक 41 साल पुराने ‘अजब-गजब’ संयोग की कहानी भी जोड़ रही है। इतिहास कहता है कि जब भी टीम इंडिया ने इंग्लैंड को सेमीफाइनल में हराया है, तब वह टूर्नामेंट का खिताब जीतती रही है। बता दें कि 8 मार्च को मुकाबले का फाइनल मैच खेला जाएगा।

    5वीं भिड़ंत और तीसरी ट्रॉफी का मौका
    आईसीसी टूर्नामेंट्स के रिकॉर्ड के अनुसार, भारत और इंग्लैंड अब तक चार बार सेमीफाइनल में भिड़ चुके हैं। 2-2 के परिणाम के साथ 5वीं भिड़ंत तय करेगी कि कौन आगे बढ़ेगा। अगर टीम इंडिया इस बार जीतती है, तो यह उसका तीसरा खिताब होगा। इसका आधार यही है कि भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ 1983 और 2024 के सेमीफाइनल में जीत दर्ज की और दोनों बार टूर्नामेंट जीतने में सफल रहा।

    भारत-इंग्लैंड सेमीफाइनल का ऐतिहासिक रिकार्ड
    पहला सेमीफाइनल (1983 वनडे वर्ल्ड कप): कपिल देव की कप्तानी में ‘अंडरडॉग’ भारत ने मेजबान इंग्लैंड को 6 विकेट से हराया। इंग्लैंड 213 रन पर ऑलआउट हुई, जबकि भारत ने 217 रन बनाकर जीत दर्ज की।

    दूसरा सेमीफाइनल (1987 वनडे वर्ल्ड कप): इंग्लैंड ने भारत को 254 रन बनाकर रोक दिया और भारत 219 रनों पर आउट हो गई। ग्राहम गूच ने 136 रनों की पारी खेली। यह मैच सुनील गावस्कर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच भी था।

    तीसरा सेमीफाइनल (2022 टी20 वर्ल्ड कप): इंग्लैंड ने भारत को 10 विकेट से करारी हार दी। भारत ने 168 रन बनाए, लेकिन जोस बटलर और एलेक्स हेल्स की साझेदारी ने लक्ष्य सिर्फ 16 ओवर में पूरा कर दिया।

    चौथा सेमीफाइनल (2024 टी20 वर्ल्ड कप): टीम इंडिया ने इंग्लैंड को 68 रनों से हराया। भारत ने 171 रन बनाए, जबकि इंग्लैंड 103 रन पर ऑलआउट हुई। रोहित शर्मा ने 57 रन बनाए और कुलदीप यादव तथा अक्षर पटेल ने 3-3 विकेट लिए।

    क्या इतिहास फिर से दोहराया जाएगा?
    अगर टीम इंडिया इस बार इंग्लैंड को हराती है, तो 41 साल पुराने संयोग को सही ठहराते हुए तीसरी ट्रॉफी भी उसके नाम दर्ज हो जाएगी। इस बार का मुकाबला केवल फाइनल के टिकट की नहीं, बल्कि टीम इंडिया की जीत की परंपरा और इतिहास दोहराने की चुनौती भी लेकर आया है।

  • धरती की समृद्धि का उत्सव! पीएम मोदी ने विश्व वन्यजीव दिवस पर रखा पर्यावरण संरक्षण पर जोर

    धरती की समृद्धि का उत्सव! पीएम मोदी ने विश्व वन्यजीव दिवस पर रखा पर्यावरण संरक्षण पर जोर


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए संदेश में कहा कि विश्व वन्यजीव दिवस हमारे ग्रह को समृद्ध करने वाली अद्भुत जैव विविधता का उत्सव मनाने का अवसर है। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पित व्यक्तियों के योगदान की सराहना की और कहा कि हमें वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि हमारा वन्य जीवन फलता-फूलता रहे।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला: संरक्षण हमारा संवैधानिक दायित्व
    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन एक-दूसरे के पूरक हैं। जैव विविधता का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की सुरक्षा का आधार है। उन्होंने भारत में वन और वन्यजीव संरक्षण की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में रामसर आर्द्रभूमियों की संख्या लगभग 100 तक पहुंच गई है। बिरला ने वन्यजीवों की रक्षा को कानूनी और नैतिक दायित्व बताते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध पर्यावरण सुनिश्चित करने का संकल्प साझा किया।

    जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा: सतत विकास और तालमेल
    जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि विश्व वन्यजीव दिवस पर हमें वन्य जीवन बचाने, इकोसिस्टम की रक्षा करने और इंसानी तरक्की तथा प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्रियों के संदेश
    केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि विश्व वन्यजीव दिवस मनाते हुए हमें अपनी जैव विविधता को खतरों से बचाने और पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि जंगलों से लेकर समुद्रों तक, हर प्रजाति प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। वन्यजीवों की रक्षा करना केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा फर्ज है।

    विश्व वन्यजीव दिवस केवल जश्न का दिन नहीं, बल्कि जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का अवसर है। भारत में नेतृत्वकर्ता और नागरिक मिलकर वन्य जीवन, पारिस्थितिकी तंत्र और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने का संकल्प ले रहे हैं। यह दिन हर व्यक्ति को याद दिलाता है कि पृथ्वी की समृद्धि और संतुलन बनाए रखना हमारा साझा दायित्व है।

  • खाली पेट शराब पीना क्यों बन सकता है जानलेवा खतरा लिवर स्पेशलिस्ट की सख्त चेतावनी

    खाली पेट शराब पीना क्यों बन सकता है जानलेवा खतरा लिवर स्पेशलिस्ट की सख्त चेतावनी


    नई दिल्ली :शराब का सेवन सेहत के लिए हानिकारक माना जाता है लेकिन जब इसे खाली पेट पिया जाता है तो इसका खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अक्सर लोग पार्टियों या त्योहारों के दौरान बिना कुछ खाए ही शराब पीना शुरू कर देते हैं और यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार खाली पेट शराब शरीर में बहुत तेजी से असर दिखाती है और यह तेजी ही सबसे बड़ा खतरा बन जाती है।

    नई दिल्ली स्थित एक गैस्ट्रो और लिवर विभाग के डॉ .के अनुसार जब पेट में भोजन नहीं होता तब शराब पेट में ठहरने के बजाय सीधे छोटी आंत में पहुंच जाती है। छोटी आंत शराब को बेहद तेजी से अवशोषित कर लेती है और वह तुरंत रक्त प्रवाह में मिल जाती है। इससे ब्लड अल्कोहल कंसंट्रेशन अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। यही वजह है कि खाली पेट शराब पीने वाला व्यक्ति जल्दी नशे में आ जाता है उसका मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है उसे चक्कर आ सकते हैं और कई मामलों में बेहोशी तक हो सकती है।

    खाली पेट शराब पीने का सबसे बड़ा असर लिवर पर पड़ता है। लिवर का मुख्य कार्य खून में मौजूद विषैले तत्वों को फिल्टर करना है। जब शराब तेजी से अवशोषित होकर लिवर तक पहुंचती है तो उसे कम समय में अधिक मात्रा में अल्कोहल को प्रोसेस करना पड़ता है। इससे लिवर पर अचानक दबाव बढ़ जाता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर फैटी लिवर हेपेटाइटिस और लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन की परत न होने पर शराब की तीव्रता लिवर कोशिकाओं को सीधे नुकसान पहुंचा सकती है।

    सिर्फ लिवर ही नहीं बल्कि पेट भी इससे बुरी तरह प्रभावित होता है। शराब की अम्लीय प्रकृति पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाती है। जब पेट खाली होता है तो शराब और पाचक अम्ल मिलकर गैस्ट्राइटिस अल्सर और तेज जलन का कारण बन सकते हैं। कई लोगों को उल्टी मतली और पेट दर्द की शिकायत होने लगती है। यदि यह आदत लंबे समय तक जारी रहे तो पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है और शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण भी प्रभावित हो सकता है।

    खाली पेट शराब का असर दिमाग पर भी तेजी से होता है। ब्लड में अल्कोहल की मात्रा अचानक बढ़ने से मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और ब्लैकआउट जैसी स्थिति भी बन सकती है। पोषक तत्वों की कमी के कारण नर्वस सिस्टम पर इसका प्रभाव और ज्यादा गहरा होता है जिससे भविष्य में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

    विशेषज्ञों की साफ सलाह है कि यदि कोई व्यक्ति शराब का सेवन करता भी है तो उसे पहले पर्याप्त भोजन करना चाहिए और साथ में पर्याप्त पानी पीना चाहिए। इससे शराब का अवशोषण धीमा होता है और शरीर पर अचानक पड़ने वाला दबाव कम हो सकता है। खाली पेट शराब पीना शरीर के साथ गंभीर खिलवाड़ है जिसके परिणाम लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकते हैं।

  • अजित पवार के बेटे ने वीडियो शेयर कर VSR वेंचर्स की उड़ानों पर रोक की मांग की

    अजित पवार के बेटे ने वीडियो शेयर कर VSR वेंचर्स की उड़ानों पर रोक की मांग की


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता Ajit Pawar के बेटे जय पवार ने 28 जनवरी 2026 को हुए विमान हादसे के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड की उड़ानों को तुरंत रोकने की मांग की है। इस हादसे में उनके पिता का निधन हुआ था, जिसे लेकर जय पवार ने गंभीर सुरक्षा और लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

    वीडियो में कंपनी के मालिक रोहित सिंह मुख्य पायलट सीट पर उड़ान के दौरान सोते हुए दिखाई दे रहे हैं। जय पवार ने लिखा कि “मैंने अपने पिता को खो दिया है… यह पीड़ा जिंदगी भर मेरे साथ रहेगी। ऐसे लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।” उन्होंने DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) से अपील की है कि VSR की सभी उड़ानों को ग्राउंड किया जाए और रोहित सिंह के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

    DGCA की जांच के मुताबिक, 28 जनवरी को बारामती में VSR वेंचर्स के Learjet 45 (VT-SSK) विमान के क्रैश के बाद स्पेशल सेफ्टी ऑडिट कराया गया। ऑडिट में एयरवर्दीनेस, एयर सेफ्टी और फ्लाइट ऑपरेशन के नियमों के कई उल्लंघन सामने आए। इसके बाद DGCA ने चार एयरक्राफ्ट  को तुरंत ग्राउंड कर दिया।

    जय पवार ने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि महाराष्ट्र में हुए इस हादसे की पूरी और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। उन्होंने VSR वेंचर्स की उड़ानों पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जोरदार मांग की।

    यह मामला न केवल पवार परिवार के लिए बल्कि देश की नागरिक हवाई सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है। DGCA ने नियमों का उल्लंघन सामने आने के बाद सख्त कदम उठाए हैं और जांच जारी है।

  • मंत्रालय में मार्च माह के प्रथम कार्य दिवस पर हुआ सामूहिक राष्ट्र-गीत एवं राष्ट्र-गान गायन

    मंत्रालय में मार्च माह के प्रथम कार्य दिवस पर हुआ सामूहिक राष्ट्र-गीत एवं राष्ट्र-गान गायन


    भोपाल। मार्च माह के प्रथम शासकीय कार्य दिवस पर मंत्रालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने राष्ट्र गीत वंदे मातरम और राष्ट्र गान जन गण मन का सामूहिक गायन किया। यह कार्यक्रम मंत्रालय के सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में आयोजित किया गया।

    सामूहिक गान के दौरान पुलिस बैंड ने मधुर धुनों के माध्यम से कार्यक्रम को और आकर्षक बनाया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव सचिव एम. रघुराज मंत्रालय वल्लभ भवन सतपुड़ा विंध्याचल भवन के अधिकारी कर्मचारी और पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

    इस आयोजन का उद्देश्य कर्मचारियों में राष्ट्रीय भावना को जागृत करना और शासकीय कार्यों के प्रति प्रतिबद्धता को बढ़ावा देना बताया गया। अधिकारियों ने सामूहिक रूप से राष्ट्र गीत और राष्ट्र गान गाकर देशभक्ति की अनुभूति साझा की।

  • विद्युत समाधान योजना 2025-26 की अवधि 31 मार्च तक बढ़ी, एकमुश्त भुगतान पर 90% तक सरचार्ज माफी

    विद्युत समाधान योजना 2025-26 की अवधि 31 मार्च तक बढ़ी, एकमुश्त भुगतान पर 90% तक सरचार्ज माफी


    भोपाल। प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि मध्यप्रदेश सरकार की विद्युत समाधान योजना 2025-26 के द्वितीय एवं अंतिम चरण की अवधि 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी गई है। पहले यह योजना 28 फरवरी तक लागू थी। अब तीन माह से अधिक समय से बकाया रखने वाले उपभोक्ता 31 मार्च तक एकमुश्त भुगतान कर 90 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट का लाभ ले सकेंगे।

    ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने बताया कि योजना की शुरुआत 3 नवम्बर 2025 को की गई थी। इसका उद्देश्य ऐसे उपभोक्ताओं को राहत देना है जो सरचार्ज की अधिक राशि के कारण मूलधन जमा नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने अपील की है कि जो उपभोक्ता अभी तक योजना से नहीं जुड़ पाए हैं वे निर्धारित अवधि के भीतर पंजीयन कराकर इस विशेष छूट का लाभ उठाएं।

    21 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को राहत

    28 फरवरी 2026 तक 21 लाख 67 हजार बिजली उपभोक्ता इस योजना का लाभ ले चुके हैं। योजना के तहत कुल 1043 करोड़ 53 लाख रुपये की राशि जमा हुई है जबकि 388 करोड़ 77 लाख रुपये का सरचार्ज माफ किया गया है।मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के तहत 6 लाख 38 हजार जमादार लाभार्थियों ने पंजीयन कराया। कंपनी को 616 करोड़ 42 लाख रुपये की मूल राशि प्राप्त हुई और 285 करोड़ 39 लाख रुपये का सरचार्ज माफ किया गया।

    इसी प्रकार पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 8 लाख से अधिक लाभार्थियों ने लाभ लिया। यहां 222 करोड़ 82 लाख रुपये जमा हुए और 73 करोड़ 7 लाख रुपये का सरचार्ज माफ किया गया। वहीं पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 7 लाख 29 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ उठाया। कंपनी के खाते में 204 करोड़ 29 लाख रुपये जमा हुए और 30 करोड़ 31 लाख रुपये का सरचार्ज माफ किया गया।

    एकमुश्त भुगतान पर अधिक लाभ

    समाधान योजना जल्दी आएं एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। एकमुश्त भुगतान करने पर 70 से 90 प्रतिशत तक तथा किस्तों में भुगतान करने पर 50 से 60 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट दी जा रही है।योजना में शामिल होने के लिए उपभोक्ताओं को संबंधित विद्युत वितरण कंपनी के पोर्टल पर पंजीयन करना होगा।
    घरेलू एवं कृषि उपभोक्ताओं को कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर-घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं को 25 प्रतिशत राशि जमा कर पंजीयन कराना होगा। विस्तृत जानकारी संबंधित कंपनी की वेबसाइट या विद्युत वितरण केंद्र से प्राप्त की जा सकती है। सरकार का मानना है कि यह योजना बकायादार उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है और समय पर भुगतान की संस्कृति को भी बढ़ावा दे रही है।

  • चैती छठ 2026: 22 मार्च से शुरू होगा महापर्व, जानिए नहाय खाय से पारण तक की सटीक तिथियां

    चैती छठ 2026: 22 मार्च से शुरू होगा महापर्व, जानिए नहाय खाय से पारण तक की सटीक तिथियां


    नई दिल्ली । चैत्र मास की शुरुआत के साथ ही लोक आस्था का महापर्व चैती छठ आने वाला है। सूर्योपासना को समर्पित यह चार दिवसीय व्रत विशेष रूप से बिहार झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। छठ पर्व में भगवान Surya और Chhathi Maiya की उपासना की जाती है। मान्यता है कि यह व्रत संतान सुख दीर्घायु और परिवार की समृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी होता है। पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में चैती छठ की शुरुआत 22 मार्च से होगी और 25 मार्च को उषा अर्घ्य व पारण के साथ इसका समापन होगा।

    चैती छठ 2026 की प्रमुख तिथियां

    नहाय खाय 22 मार्च 2026 पहला दिन इस दिन व्रती पवित्र नदी या घर में स्नान कर शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। परंपरागत रूप से कद्दू भात कद्दू की सब्जी और चावल बनाया जाता है। इसी के साथ व्रत की औपचारिक शुरुआत होती है।

    खरना 23 मार्च 2026 दूसरा दिन

    व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर पूजा की जाती है। प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत आरंभ हो जाता है।

    संध्या अर्घ्य 24 मार्च 2026 तीसरा दिन

    इस दिन अस्ताचलगामी सूर्य को नदी तालाब या जलाशय के किनारे अर्घ्य अर्पित किया जाता है। यह छठ पर्व का सबसे भावनात्मक और भव्य दृश्य होता है जब घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

    उषा अर्घ्य एवं पारण 25 मार्च 2026 चौथा दिन

    अगली सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके साथ ही व्रत का समापन होता है और प्रसाद ग्रहण कर पारण किया जाता है।
    चैती छठ का धार्मिक महत्व
    यह पर्व शुद्धता संयम और अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। मान्यता है कि व्रत करने से संतान सुख और परिवार की खुशहाली प्राप्त होती है। चैत्र मास में होने के कारण इसे विशेष आध्यात्मिक फल देने वाला माना जाता है।छठ पूजा में बनाया जाने वाला ठेकुआ मुख्य प्रसाद होता है जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। चैती छठ प्रकृति सूर्य और जल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। चार दिनों तक चलने वाला यह व्रत आत्मसंयम भक्ति और पारिवारिक एकता का संदेश देता है।

  • फाल्गुन पूर्णिमा 2026: इस विधि से रखें व्रत, बरसेगी विष्णु लक्ष्मी की असीम कृपा

    फाल्गुन पूर्णिमा 2026: इस विधि से रखें व्रत, बरसेगी विष्णु लक्ष्मी की असीम कृपा


    नई दिल्ली । फाल्गुन मास की पूर्णिमा सनातन परंपरा में अत्यंत पावन मानी गई है। इसे वसंत पूर्णिमा और होली पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह हिंदू वर्ष की अंतिम पूर्णिमा होती है और इस दिन भगवान Vishnu माता Lakshmi भगवान Narasimha तथा Radha Krishna की पूजा का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से व्रत और पूजा करने से सुख समृद्धि सौभाग्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

    फाल्गुन पूर्णिमा 2026 का शुभ मुहूर्त

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5:55 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को शाम 5:07 बजे तक रहेगी। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और सूतक लगने के कारण पूजा में बाधा रहेगी इसलिए 2 मार्च 2026 को व्रत रखना अधिक शुभ माना गया है।

    फाल्गुन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

    पूर्णिमा व्रत को अत्यंत फलदायी बताया गया है। इस दिन स्नान दान जप और पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे धन धान्य में वृद्धि होती है और कुंडली में चंद्र दोष होने पर मानसिक शांति मिलती है। व्रत करने वालों को अगले दिन स्नान दान अवश्य करना चाहिए तभी व्रत पूर्ण फलदायी माना जाता है।
    फाल्गुन पूर्णिमा व्रत विधि
    प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें। संभव हो तो पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें। सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें। घर में स्वच्छ स्थान पर लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। तिलक पुष्प और वस्त्र अर्पित करें।  ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। भोग लगाकर पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल में कच्चा दूध मिलाकर अर्घ्य दें। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें। अगले दिन दान पुण्य अवश्य करें।

    विशेष मंत्र और महाउपाय

    फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 108 बार जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही जरूरतमंदों को अन्न वस्त्र या धन का दान करने से लक्ष्मी कृपा स्थायी होती है।यह दिन भक्ति श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। विधि विधान से श्री लक्ष्मीनारायण की आराधना करने पर जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

  • Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को दिखेगा ब्लड मून, जानिए ग्रहण से जुड़ी 15 जरूरी बातें

    Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को दिखेगा ब्लड मून, जानिए ग्रहण से जुड़ी 15 जरूरी बातें


    नई दिल्ली । 3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। यह खगोलीय घटना इसलिए खास है क्योंकि इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। भारत में भी यह ग्रहण देखा जा सकेगा। आइए ग्रहण से जुड़े 15 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सरल भाषा में समझते हैं।

    चंद्र ग्रहण कब लगेगा?

    3 मार्च 2026 मंगलवार को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। भारत में ग्रहण का समय क्या रहेगा? भारतीय समयानुसार ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा और शाम 6:47 बजे समाप्त होगा। भारत में यह मुख्यतः चंद्रोदय के समय दिखाई देगा।

    क्या यह पूरे भारत में दिखेगा?

    हाँ, पूरे भारत में देखा जा सकेगा, लेकिन अधिकांश जगहों पर इसका अंतिम आंशिक चरण ही दिखाई देगा। पूर्वोत्तर राज्यों में दृश्य अधिक स्पष्ट रहेगा।

    सूतक काल कब से लगेगा?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू होता है। यानी सुबह लगभग 6:20 बजे से सूतक मान्य होगा।

    ब्लड मून क्या होता है?

    पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुँचती, बल्कि पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर लाल प्रकाश चंद्रमा तक जाता है। इससे चंद्रमा तांबे या लाल रंग का दिखता है इसे ही ब्लड मून कहते हैं।

    क्या चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देख सकते हैं?

    हाँ, चंद्र ग्रहण को बिना किसी विशेष उपकरण के सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है।

    क्या इसे देखने के लिए चश्मा जरूरी है?
    नहीं। सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण देखने के लिए विशेष चश्मे की जरूरत नहीं होती।

    क्या गर्भवती महिलाओं को सावधानी रखनी चाहिए?
    वैज्ञानिक रूप से कोई हानिकारक प्रभाव सिद्ध नहीं है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    क्या ग्रहण के दौरान खाना खा सकते हैं?

    वैज्ञानिक दृष्टि से खाना खाने पर कोई रोक नहीं है। धार्मिक मान्यताओं में सूतक काल में भोजन न करने की परंपरा है।

    मंदिर कब बंद होंगे?
    अधिकांश मंदिर सूतक काल से ही बंद कर दिए जाते हैं और ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण के पश्चात खुलते हैं।

    क्या ग्रहण का असर राशियों पर पड़ता है?
    ज्योतिष के अनुसार कुछ राशियों पर प्रभाव बताया जाता है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से इसका कोई प्रमाण नहीं है।

    ग्रहण कितनी देर का होगा?
    कुल अवधि लगभग 3 घंटे 27 मिनट की रहेगी, लेकिन भारत में पूरा चरण दिखाई नहीं देगा।

    क्या यह साल का इकलौता चंद्र ग्रहण है?
    नहीं, 2026 में अन्य ग्रहण भी लग सकते हैं, लेकिन 3 मार्च का यह पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा।

    ग्रहण क्यों लगता है?
    जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है।

    यह घटना क्यों खास है?
    पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा का लाल रंग में बदलना एक दुर्लभ और आकर्षक दृश्य होता है, जिसे देखने के लिए खगोल प्रेमी विशेष इंतजार करते हैं। 3 मार्च की शाम आसमान में दिखने वाला ब्लड मून विज्ञान और आस्था दोनों के लिए खास अनुभव होगा। यदि मौसम साफ रहा तो यह नजारा बेहद मनमोहक होगा।