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  • गोवा वेकेशन गाइड समुद्र तट वाटर स्पोर्ट्स स्वादिष्ट भोजन और शानदार सनसेट के साथ बनाएं यादगार छुट्टियां

    गोवा वेकेशन गाइड समुद्र तट वाटर स्पोर्ट्स स्वादिष्ट भोजन और शानदार सनसेट के साथ बनाएं यादगार छुट्टियां


    नई दिल्ली । अगर आप रोजमर्रा की भागदौड़ से कुछ दिन दूर सुकून और रोमांच दोनों का आनंद लेना चाहते हैं तो गोवा आपके लिए बेहतरीन डेस्टिनेशन साबित हो सकता है। अरब सागर के किनारे बसा यह राज्य अपने सुनहरे समुद्र तट प्राकृतिक खूबसूरती पुर्तगाली विरासत रंगीन बाजारों स्वादिष्ट सी फूड और शानदार नाइट लाइफ के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। हर साल लाखों पर्यटक यहां छुट्टियां बिताने पहुंचते हैं। चाहे आप परिवार के साथ घूमने जा रहे हों दोस्तों के साथ एडवेंचर ट्रिप की योजना बना रहे हों या फिर हनीमून मनाना चाहते हों गोवा हर तरह के यात्रियों को खास अनुभव देता है।

    गोवा घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और बीच एक्टिविटी का भरपूर आनंद लिया जा सकता है। अगर आपका बजट कम है तो मानसून के दौरान भी गोवा की हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता देखने लायक होती है। इस मौसम में होटल और रिसॉर्ट भी अपेक्षाकृत सस्ते मिल जाते हैं।

    गोवा पहुंचने के लिए हवाई रेल और सड़क तीनों विकल्प उपलब्ध हैं। देश के लगभग सभी बड़े शहरों से गोवा के लिए सीधी फ्लाइट मिल जाती है। ट्रेन से यात्रा करने वाले पर्यटक मडगांव या थिविम रेलवे स्टेशन उतर सकते हैं। सड़क मार्ग से भी मुंबई पुणे बेंगलुरु और अन्य शहरों से आरामदायक सफर किया जा सकता है।

    घूमने की शुरुआत नॉर्थ गोवा से करें जहां बागा कलंगुट अंजुना और कैंडोलिम बीच सबसे अधिक लोकप्रिय हैं। यहां वाटर स्पोर्ट्स पैरासेलिंग जेट स्की बनाना राइड और स्कूबा डाइविंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है। शाम के समय बीच शैक में बैठकर समुद्र के किनारे सनसेट देखना किसी यादगार अनुभव से कम नहीं होता।

    अगर आप शांति और प्राकृतिक वातावरण पसंद करते हैं तो साउथ गोवा आपके लिए बेहतर विकल्प है। पालोलेम कोलवा और अगोंडा बीच अपनी साफ सफाई और शांत माहौल के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां भीड़ कम होती है और परिवार या कपल्स आराम से समय बिता सकते हैं।

    गोवा की ऐतिहासिक पहचान भी बेहद खास है। बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस चर्च से कैथेड्रल और फोर्ट अगुआड़ा जैसे स्थान इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करते हैं। पुराने गोवा की गलियों में घूमते हुए आपको पुर्तगाली संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है। वहीं स्थानीय बाजारों में हस्तशिल्प मसाले कपड़े और पारंपरिक वस्तुएं खरीदने का अलग ही आनंद मिलता है।

    गोवा यात्रा के दौरान स्थानीय भोजन का स्वाद जरूर लें। यहां सी फूड गोअन करी फिश थाली और पारंपरिक मिठाइयां पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। शाकाहारी यात्रियों के लिए भी अनेक स्वादिष्ट विकल्प आसानी से उपलब्ध हैं।

    अगर बजट की बात करें तो सामान्य ट्रिप के लिए प्रति व्यक्ति लगभग पंद्रह हजार से तीस हजार रुपए का खर्च आ सकता है। इसमें यात्रा होटल स्थानीय परिवहन भोजन और घूमने का खर्च शामिल हो सकता है। होटल पहले से बुक करने और ऑफ सीजन में यात्रा करने से अच्छी बचत की जा सकती है।

    गोवा यात्रा के दौरान पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है। समुद्र तटों पर प्लास्टिक न फैलाएं स्थानीय नियमों का पालन करें और समुद्र में सुरक्षा निर्देशों का पालन करते हुए ही वाटर स्पोर्ट्स का आनंद लें। सही योजना और थोड़ी तैयारी के साथ गोवा की यात्रा जीवनभर याद रहने वाला खूबसूरत अनुभव बन सकती है।

  • केन्या में अदाणी एनर्जी की ट्रांसमिशन परियोजना से भारत-अफ्रीका सहयोग को नई रफ्तार, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी होगी मजबूत

    केन्या में अदाणी एनर्जी की ट्रांसमिशन परियोजना से भारत-अफ्रीका सहयोग को नई रफ्तार, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी होगी मजबूत

    नई दिल्ली । केन्या में अदाणी एनर्जी को प्रस्तावित बिजली ट्रांसमिशन परियोजना की मंजूरी भारत और केन्या के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक सहयोग के नए दौर का संकेत मानी जा रही है। लगभग 117 अरब केन्याई शिलिंग की इस परियोजना से केवल बिजली अवसंरचना को मजबूती मिलने की उम्मीद नहीं है, बल्कि इसे दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक विकास साझेदारी और निवेश सहयोग के विस्तार के रूप में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत की अफ्रीका नीति और केन्या की ऊर्जा विकास रणनीति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    केन्या ने पिछले कुछ वर्षों में जियोथर्मल, पवन और सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। हालांकि उत्पादन क्षमता बढ़ने के बावजूद देश का बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क उसी गति से विकसित नहीं हो पाया, जिसके कारण उपलब्ध ऊर्जा का पूरा उपयोग संभव नहीं हो सका। प्रस्तावित आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क इस कमी को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और नवीकरणीय ऊर्जा को अधिक प्रभावी ढंग से उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में सहायता करेगा।

    इस परियोजना को केन्या की व्यापक आर्थिक रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है। लंबे समय तक अफ्रीका में बड़े बुनियादी ढांचा निवेश मुख्य रूप से पश्चिमी वित्तीय संस्थानों और चीन के सहयोग से संचालित होते रहे हैं। ऐसे समय में भारत की बढ़ती भागीदारी केन्या के लिए एक अतिरिक्त विकल्प प्रस्तुत करती है। इससे प्रतिस्पर्धी निवेश, तकनीकी विशेषज्ञता और विविध अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर उपलब्ध हो सकते हैं, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अधिक संतुलन और लचीलापन आने की संभावना है।

    विश्लेषकों का मानना है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी इस मॉडल की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। निजी निवेश और तकनीकी दक्षता के माध्यम से बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने का प्रयास दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक लाभ का आधार बन सकता है। इससे परियोजनाओं के वित्तपोषण, संचालन और तकनीकी प्रबंधन में भी नए विकल्प विकसित होने की संभावना है।

    भारत के लिए केन्या केवल एक व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि पूर्वी अफ्रीका और हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी माना जाता है। दोनों देशों के बीच व्यापार, समुद्री संपर्क, निवेश और विकास सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऊर्जा अवसंरचना में निवेश को भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत अफ्रीकी देशों के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने, संपर्क बढ़ाने और दीर्घकालिक विकास सहयोग को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    भारत और केन्या के बीच ऐतिहासिक संबंध भी इस साझेदारी को मजबूत आधार प्रदान करते हैं। व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भारतीय मूल के समुदाय की सक्रिय भूमिका ने दशकों से दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाए रखा है। यही कारण है कि नई ऊर्जा परियोजनाओं को केवल व्यावसायिक निवेश नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और साझा विकास के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है।

    ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजना निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ती है तो इससे केन्या की बिजली आपूर्ति व्यवस्था अधिक सक्षम होगी और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग का मार्ग प्रशस्त होगा। साथ ही भारत और केन्या के बीच तकनीकी सहयोग, निवेश और आर्थिक संबंधों को भी नई गति मिलेगी। आने वाले वर्षों में इस प्रकार की परियोजनाएं दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

  • ईरान मुद्दे पर मतभेद के बावजूद इटली की प्रधानमंत्री की तारीफ, डोनाल्ड ट्रंप बोले- मेलोनी मुझे बहुत पसंद, रिश्तों में आई नरमी के संकेत

    ईरान मुद्दे पर मतभेद के बावजूद इटली की प्रधानमंत्री की तारीफ, डोनाल्ड ट्रंप बोले- मेलोनी मुझे बहुत पसंद, रिश्तों में आई नरमी के संकेत


    नई दिल्ली ।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ हाल के मतभेदों को स्वीकार करते हुए उनके प्रति सकारात्मक रुख भी जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़े मुद्दे पर दोनों देशों के बीच असहमति जरूर रही, लेकिन इसके बावजूद वह मेलोनी को पसंद करते हैं और उन्हें एक अच्छी नेता मानते हैं। ट्रंप के इस बयान को दोनों नेताओं के संबंधों में नरमी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान से जुड़े घटनाक्रम के दौरान इटली ने अमेरिका की अपेक्षित मदद नहीं की, जिससे दोनों नेताओं के रिश्तों में कुछ तनाव पैदा हुआ था। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में दोनों के बीच बातचीत सकारात्मक रही है और संबंधों में सुधार की संभावना बनी हुई है।

    ट्रंप ने कहा कि जॉर्जिया मेलोनी एक अच्छी इंसान हैं और उनके साथ व्यक्तिगत स्तर पर उनके संबंध सकारात्मक रहे हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद जारी रहा। उनके अनुसार किसी एक मुद्दे पर असहमति का अर्थ यह नहीं है कि व्यापक द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हो जाएं।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में दोहराया कि ईरान से जुड़े हालिया संकट के दौरान उन्होंने इटली से सहयोग की अपेक्षा की थी। उनका कहना था कि अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने से उन्हें निराशा हुई। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर इटली की सरकार पर किसी प्रकार का अत्यधिक दबाव नहीं बनाया और प्रत्येक देश अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होता है।

    पिछले कुछ सप्ताहों में दोनों नेताओं के संबंधों को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान, नाटो और अन्य वैश्विक मुद्दों को लेकर दोनों देशों की प्राथमिकताओं में अंतर दिखाई दिया था। इसके अलावा कुछ सार्वजनिक टिप्पणियों के बाद दोनों नेताओं के बीच दूरी बढ़ने की अटकलें भी लगाई जा रही थीं।

    जॉर्जिया मेलोनी को लंबे समय तक ट्रंप के करीबी सहयोगियों में गिना जाता रहा है। दोनों नेताओं के बीच कई वैश्विक मुद्दों पर पहले भी समान दृष्टिकोण देखने को मिला था। हालांकि हालिया घटनाक्रम के दौरान ईरान से जुड़े फैसलों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रुख को लेकर दोनों के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आए।

    विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के ताजा बयान का उद्देश्य मतभेदों को स्वीकार करने के साथ-साथ सहयोग की संभावनाओं को भी खुला रखना है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सहयोगी देशों के बीच कई मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण होना सामान्य माना जाता है, लेकिन संवाद और कूटनीतिक संपर्क बनाए रखना संबंधों की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण होता है।

    आने वाले समय में अमेरिका और इटली के बीच रक्षा, व्यापार, नाटो सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर होने वाली बातचीत दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करेगी। फिलहाल ट्रंप के बयान से यह संकेत मिला है कि मतभेदों के बावजूद दोनों पक्ष संवाद बनाए रखने और भविष्य में सहयोग बढ़ाने की संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं।

  • बोरियों में भरकर लाया ₹10 के सिक्के, ₹1.10 लाख की बाइक खरीदने पहुंचे ग्राहक ने शोरूम कर्मचारियों को कर दिया हैरान

    बोरियों में भरकर लाया ₹10 के सिक्के, ₹1.10 लाख की बाइक खरीदने पहुंचे ग्राहक ने शोरूम कर्मचारियों को कर दिया हैरान

    नई दिल्ली । तेलंगाना के यादाद्री-भुवनगिरी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहां एक व्यक्ति ने नई मोटरसाइकिल खरीदने के लिए पूरे ₹1.10 लाख का भुगतान केवल ₹10 के सिक्कों में किया। बड़ी मात्रा में सिक्कों से भरी बोरियां लेकर जब वह शोरूम पहुंचा तो वहां मौजूद कर्मचारी कुछ देर के लिए हैरान रह गए। बाद में सिक्कों की गिनती शुरू हुई, जिसमें कर्मचारियों को कई घंटे तक मेहनत करनी पड़ी।

    यह मामला चित्याला मंडल के वेलिमिनेंदु गांव के निवासी कोंडे रघुपति से जुड़ा है। उन्होंने नई मोटरसाइकिल खरीदने का फैसला किया और स्थानीय शोरूम पहुंचकर स्प्लेंडर प्लस मॉडल का चयन किया। वाहन की ऑन-रोड कीमत लगभग ₹1.10 लाख थी। आमतौर पर इतनी बड़ी राशि का भुगतान ऑनलाइन ट्रांसफर, बैंक चेक या बड़े मूल्य के नोटों के माध्यम से किया जाता है, लेकिन रघुपति अपने साथ केवल ₹10 के सिक्के लेकर पहुंचे।

    बताया गया कि सिक्के अलग-अलग बोरियों और थैलों में भरकर शोरूम लाए गए थे। जब भुगतान का समय आया तो शोरूम कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इतनी बड़ी मात्रा में सिक्कों की गिनती करना थी। कर्मचारियों ने सिक्कों को अलग-अलग ढेरों में बांटकर उनकी गड्डियां बनाईं और एक-एक करके पूरी राशि का मिलान किया। इस प्रक्रिया में काफी समय लगा और कर्मचारियों को लंबे समय तक लगातार गिनती करनी पड़ी।

    सिक्कों की संख्या अधिक होने के कारण शोरूम का सामान्य कामकाज भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। हालांकि सभी सिक्के वैध पाए गए और पूरी राशि सही निकलने के बाद शोरूम प्रबंधन ने भुगतान स्वीकार कर लिया। इसके बाद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ग्राहक को उनकी पसंद की नई बाइक सौंप दी गई।

    घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। वीडियो में शोरूम कर्मचारी फर्श और टेबल पर बैठकर सिक्कों की गिनती करते दिखाई दे रहे हैं। बड़ी संख्या में रखे गए सिक्कों को व्यवस्थित तरीके से गिनने का दृश्य लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया और कई लोगों ने इस अनोखे भुगतान पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं।

    भारतीय मुद्रा प्रणाली के अनुसार सिक्के भी वैध मुद्रा हैं और निर्धारित नियमों के तहत उनका उपयोग भुगतान के लिए किया जा सकता है। हालांकि इतनी बड़ी राशि का भुगतान केवल सिक्कों में किया जाना बेहद दुर्लभ माना जाता है। यही कारण है कि यह घटना स्थानीय स्तर से निकलकर सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा का विषय बन गई।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि वैध मुद्रा चाहे नोटों के रूप में हो या सिक्कों के रूप में, उसे स्वीकार किया जा सकता है। हालांकि व्यावहारिक तौर पर इतनी बड़ी मात्रा में सिक्कों का लेन-देन समय और श्रम दोनों की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण साबित होता है। फिलहाल तेलंगाना की यह अनोखी खरीदारी लोगों के बीच उत्सुकता और चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव से वैश्विक तेल बाजार में उछाल, कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब; भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट

    अमेरिका-ईरान तनाव से वैश्विक तेल बाजार में उछाल, कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब; भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ी अनिश्चितता के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में छह प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जिससे ब्रेंट क्रूड लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। तेल बाजार में आई इस तेजी का प्रभाव वैश्विक निवेशकों की धारणा पर भी पड़ा और भारतीय शेयर बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिली।

    बाजार के आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत में लगभग 6.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी उल्लेखनीय तेजी के साथ करीब 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी आशंकाओं ने तेल की कीमतों को ऊपर धकेलने में प्रमुख भूमिका निभाई है। निवेशकों को आशंका है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।

    तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमलों की जानकारी देते हुए कहा कि हालिया घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम प्रभावी नहीं रहा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व की तीखी आलोचना करते हुए भविष्य में किसी समझौते या वार्ता की संभावना पर भी संदेह व्यक्त किया।

    होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या सुरक्षा जोखिम अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों पर तत्काल प्रभाव डालता है। निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों की नजर फिलहाल इस क्षेत्र की स्थिति पर बनी हुई है, क्योंकि आगे की घटनाएं तेल की कीमतों की दिशा तय कर सकती हैं।

    कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेजी का असर भारतीय वित्तीय बाजारों पर भी दिखाई दिया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स में 1,600 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी दो प्रतिशत से ज्यादा फिसल गया। इसके साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी उल्लेखनीय कमजोरी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची तेल कीमतें आयात लागत बढ़ा सकती हैं, जिससे महंगाई, चालू खाते के घाटे और कॉर्पोरेट लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता जारी रह सकती है। ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर परिवहन, विनिर्माण और अन्य तेल-निर्भर क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल निवेशकों की निगाहें मध्य पूर्व की स्थिति, कूटनीतिक प्रयासों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े आगामी घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर आने वाले दिनों में तेल बाजार और शेयर बाजार की दिशा तय होगी।

  • E20 पेट्रोल पर सियासी बहस तेज, अरविंद केजरीवाल ने 29 ऑटो कंपनियों से मांगा जवाब, माइलेज और इंजन सुरक्षा पर उठाए सवाल

    E20 पेट्रोल पर सियासी बहस तेज, अरविंद केजरीवाल ने 29 ऑटो कंपनियों से मांगा जवाब, माइलेज और इंजन सुरक्षा पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । एथनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को लेकर देश में नई बहस शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखकर E20 ईंधन के उपयोग से वाहनों के माइलेज, इंजन की कार्यक्षमता और उपभोक्ताओं को दी जा रही तकनीकी जानकारी पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कंपनियों से इन मुद्दों पर स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब देने की मांग की है।

    केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने विभिन्न वाहन निर्माताओं को अलग-अलग पत्र भेजे हैं। उनके अनुसार कुछ प्रमुख ऑटो कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हाल ही में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में कहा था कि वर्ष 2023 से पहले निर्मित वाहनों में भी E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन को कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा और माइलेज में केवल तीन से पांच प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि यदि कंपनियों का यही आधिकारिक रुख है तो इसे स्पष्ट रूप से उपभोक्ताओं के सामने भी रखा जाना चाहिए।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कई कंपनियों के वाहन उपयोग पुस्तिका में E10 से अधिक एथनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर अलग प्रकार की सावधानियों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि तकनीकी दस्तावेजों में अलग निर्देश दिए गए हैं तो सार्वजनिक मंचों पर कंपनियों के प्रतिनिधि अलग संदेश क्यों दे रहे हैं। उनका कहना है कि इस विषय पर उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति नहीं रहनी चाहिए और कंपनियों को तथ्यात्मक जानकारी साझा करनी चाहिए।

    केजरीवाल ने यह भी कहा कि वह अगले दिन दिल्ली के विभिन्न पेट्रोल पंपों और सर्विस सेंटरों का दौरा करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि वहां उपलब्ध ईंधन और उससे संबंधित जानकारी का जायजा लिया जाएगा। उनका कहना है कि यदि वाहन मालिकों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक या तकनीकी प्रभाव पड़ने की संभावना है तो उसके बारे में पहले से स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।

    दूसरी ओर केंद्र सरकार एथनॉल मिश्रित ईंधन कार्यक्रम को ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानती है। सरकार का कहना है कि भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और एथनॉल मिश्रण बढ़ाने से कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही जैव ईंधन के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और घरेलू कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराने का भी लक्ष्य रखा गया है।

    ऊर्जा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि E20 ईंधन की सफलता काफी हद तक वाहन तकनीक, निर्माता कंपनियों के दिशा-निर्देश और उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई जाने वाली जानकारी पर निर्भर करेगी। नई तकनीक के अनुरूप तैयार वाहनों और पुराने मॉडलों की आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं। ऐसे में वाहन मालिकों को अपने वाहन निर्माता की आधिकारिक सलाह का पालन करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या से बचा जा सके।

    E20 पेट्रोल को लेकर शुरू हुई यह बहस अब केवल तकनीकी विषय तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक नीति, उपभोक्ता हित और ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ गई है। आने वाले दिनों में ऑटो कंपनियों की प्रतिक्रिया और सरकार की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण इस पूरे मुद्दे की दिशा तय कर सकते हैं। फिलहाल वाहन मालिकों की नजर इस बात पर बनी हुई है कि E20 ईंधन के व्यापक उपयोग से उनके वाहनों के प्रदर्शन, माइलेज और रखरखाव पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है।

  • मुंबई एयरपोर्ट पर टला बड़ा विमान हादसा, एक ही रनवे पर आमने-सामने आए एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान

    मुंबई एयरपोर्ट पर टला बड़ा विमान हादसा, एक ही रनवे पर आमने-सामने आए एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान

    नई दिल्ली । मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक बड़ा विमान हादसा उस समय टल गया, जब एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के दो विमान एक ही रनवे पर आमने-सामने आ गए। घटना के दौरान कुछ समय के लिए हवाई अड्डे पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई, लेकिन एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) की त्वरित कार्रवाई और दोनों विमानों के पायलटों की सतर्कता के कारण संभावित टक्कर टाल दी गई। इस घटना में किसी यात्री या चालक दल के सदस्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और सभी सुरक्षित रहे।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार देर रात लगभग 10 बजे की है। सिलीगुड़ी से मुंबई पहुंची एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान AIX 1547 लैंडिंग के बाद निर्धारित समय पर रनवे खाली नहीं कर सकी थी। इसी दौरान मुंबई से दिल्ली के लिए रवाना होने वाली एयर इंडिया की उड़ान AI 816 उसी रनवे से टेकऑफ की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में थी। कुछ ही क्षणों में दोनों विमान एक ही रनवे पर आमने-सामने की स्थिति में आ गए, जिससे संभावित दुर्घटना का खतरा उत्पन्न हो गया।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने तत्काल हस्तक्षेप किया और टेकऑफ की अनुमति वापस लेते हुए एयर इंडिया के विमान को तुरंत रोकने का निर्देश दिया। पायलटों ने बिना किसी देरी के एटीसी के निर्देशों का पालन किया, जिसके बाद विमान को सुरक्षित रूप से रनवे से हटाकर बे में ले जाया गया। समय रहते उठाए गए इस कदम ने संभावित बड़ी दुर्घटना को टाल दिया।

    घटना के बाद संबंधित विमान के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत आवश्यक तकनीकी और परिचालन संबंधी जांच शुरू करने की तैयारी की गई है। विमान के सिस्टम, रनवे संचालन और पूरी घटनाक्रम की समीक्षा की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ऐसी स्थिति कैसे बनी और भविष्य में इसे रोकने के लिए किन सुधारात्मक कदमों की आवश्यकता है।

    एयर इंडिया ने घटना के बाद जारी बयान में कहा कि यात्रियों की सुरक्षा कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। एयरलाइन ने बताया कि प्रभावित यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई और सभी आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरी घटना की आंतरिक समीक्षा की जाएगी और संबंधित अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग किया जाएगा।

    विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, हवाई अड्डों पर रनवे संचालन अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया होती है, जहां प्रत्येक विमान की आवाजाही एयर ट्रैफिक कंट्रोल की निगरानी में होती है। किसी भी संभावित जोखिम की स्थिति में एटीसी के त्वरित निर्देश और पायलटों की समय पर प्रतिक्रिया बड़े हादसों को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाती है। यही कारण है कि इस घटना में भी सतर्कता के चलते किसी प्रकार की जनहानि या विमान को नुकसान नहीं हुआ।

    फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि रनवे पर दोनों विमान एक साथ कैसे पहुंचे और क्या परिचालन प्रक्रिया में किसी स्तर पर चूक हुई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधार लागू किए जाएंगे।

  • कच्चे तेल में उछाल और वैश्विक तनाव का असर, तीन महीने की सबसे बड़ी गिरावट के साथ धड़ाम हुए सेंसेक्स-निफ्टी

    कच्चे तेल में उछाल और वैश्विक तनाव का असर, तीन महीने की सबसे बड़ी गिरावट के साथ धड़ाम हुए सेंसेक्स-निफ्टी


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और निवेशकों की सतर्कता के चलते घरेलू बाजार में पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बिकवाली हावी रही। दिन के अंत में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके साथ ही पिछले कई कारोबारी सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला भी थम गया और निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी दर्ज की गई।

    बाजार बंद होने पर बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,677.12 अंक यानी 2.15 प्रतिशत टूटकर 76,503.60 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 50 भी 516.65 अंक यानी 2.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,882.05 अंक पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान दोनों सूचकांकों ने दिन का निचला स्तर भी छुआ और पिछले तीन महीनों की सबसे बड़ी दैनिक गिरावट दर्ज की।

    गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी उल्लेखनीय कमजोरी के साथ बंद हुए। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि बिकवाली लगभग सभी वर्गों के शेयरों में फैली रही और निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाना उचित समझा।

    सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो बैंकिंग, निजी बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, एफएमसीजी, मीडिया, ऑटो, ऑयल एंड गैस तथा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक दबाव रहा। हालांकि फार्मा और मेटल क्षेत्र में भी गिरावट दर्ज हुई, लेकिन अन्य क्षेत्रों की तुलना में नुकसान अपेक्षाकृत कम रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौरान निवेशक रक्षात्मक क्षेत्रों की ओर झुकाव दिखाते हैं, जिससे कुछ सेक्टरों में गिरावट सीमित रही।

    दिनभर की बिकवाली का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव माना गया। हालिया घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में हालात फिर से संवेदनशील हो गए हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों में छह प्रतिशत से अधिक की तेजी ने आयातक देशों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की महंगाई का असर महंगाई, व्यापार घाटे और कॉर्पोरेट लागत पर पड़ सकता है।

    विदेशी घटनाक्रम का असर भारतीय मुद्रा पर भी दिखाई दिया। रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर बंद हुआ, जिससे आयात लागत बढ़ने की आशंका और मजबूत हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर टिकती हैं तो भारतीय बाजारों में निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

    तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 23,780 से 23,750 अंक का दायरा महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर से नीचे टिकता है तो गिरावट और गहरी हो सकती है। वहीं 24,020 से 24,050 अंक का स्तर निकट अवधि में प्रमुख प्रतिरोध रहेगा। बाजार की अगली दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाने और अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • ईडी की बड़ी कार्रवाई, पीएमएलए के तहत टीएमसी के 440 करोड़ रुपये के बैंक फंड पर रोक, वित्तीय लेन-देन की जांच तेज

    ईडी की बड़ी कार्रवाई, पीएमएलए के तहत टीएमसी के 440 करोड़ रुपये के बैंक फंड पर रोक, वित्तीय लेन-देन की जांच तेज

    नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रही जांच के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े तीन बैंक खातों में जमा लगभग 440.42 करोड़ रुपये की राशि के लेन-देन पर रोक लगाने की कार्रवाई की है। एजेंसी का कहना है कि यह कदम कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन के प्रवाह की जांच के तहत उठाया गया है। समाचार लिखे जाने तक इस कार्रवाई पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

    ईडी के अनुसार, यह कार्रवाई पीएमएलए की धारा 17(1-ए) के तहत की गई है। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान मिले प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर संबंधित बैंक खातों में मौजूद राशि के लेन-देन को फिलहाल प्रतिबंधित किया गया है ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में वित्तीय दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और विभिन्न कंपनियों के बीच हुए लेन-देन की विस्तृत जांच जारी है।

    जांच के क्रम में ईडी ने कोलकाता स्थित कई परिसरों पर तलाशी अभियान भी चलाया। इनमें केयरवेल समूह से जुड़े कार्यालय भी शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से लगभग 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे संबंधित एक अन्य कंपनी को स्थानांतरित किए गए। एजेंसी इन लेन-देन की प्रकृति, उद्देश्य और वैधानिक प्रक्रिया की जांच कर रही है।

    ईडी के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित कंपनी ने लगभग 82.96 करोड़ रुपये एक नवगठित कंपनी को हस्तांतरित किए। एजेंसी का दावा है कि इस नई कंपनी के खातों में बड़ी मात्रा में धनराशि पहुंची, जिसके उपयोग की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर धन के पूरे प्रवाह को समझने का प्रयास किया जा रहा है।

    प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि जांच के दौरान प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 112 करोड़ रुपये का उपयोग एक बिजनेस जेट और एक हेलीकॉप्टर की खरीद में किया गया। एजेंसी का दावा है कि बाद में इन विमानन परिसंपत्तियों का उपयोग किराये की सेवाओं के माध्यम से किया गया। हालांकि इन आरोपों की न्यायिक स्तर पर अभी पुष्टि होना बाकी है और मामले की जांच जारी है।

    कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पीएमएलए के तहत की जाने वाली ऐसी कार्रवाई जांच के प्रारंभिक चरण का हिस्सा होती है और इसका उद्देश्य संदिग्ध वित्तीय संपत्तियों तथा लेन-देन को सुरक्षित रखना होता है। अंतिम निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों, जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होता है। इसलिए किसी भी पक्ष की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायालय के अंतिम निर्णय के आधार पर ही माना जाएगा।

    यह मामला एक बार फिर राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता और चुनावी वित्तपोषण से जुड़े मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में ईडी की जांच, संबंधित पक्षों के जवाब और न्यायिक प्रक्रिया इस मामले की आगे की दिशा तय करेंगे। फिलहाल एजेंसी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और संबंधित संस्थाओं की भूमिका की विस्तृत जांच में जुटी हुई है, जबकि सभी आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

  • प्राकृतिक सुंदरता, शांत झीलें और ऐतिहासिक धरोहरें, फैमिली वेकेशन के लिए माउंट आबू की ये जगहें हैं बेहतरीन विकल्प

    प्राकृतिक सुंदरता, शांत झीलें और ऐतिहासिक धरोहरें, फैमिली वेकेशन के लिए माउंट आबू की ये जगहें हैं बेहतरीन विकल्प

    नई दिल्ली । यदि आप परिवार के साथ शांत, प्राकृतिक और यादगार छुट्टियां बिताने की योजना बना रहे हैं तो राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू बेहतरीन विकल्प हो सकता है। अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा यह पर्यटन स्थल अपनी हरियाली, ठंडी जलवायु, ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां हर उम्र के पर्यटकों के लिए कुछ न कुछ खास मौजूद है, जिससे पारिवारिक यात्रा सुखद और यादगार बन जाती है।

    माउंट आबू की सबसे लोकप्रिय जगहों में नक्की झील का नाम सबसे पहले आता है। चारों ओर पहाड़ियों से घिरी यह झील शांत वातावरण और मनमोहक दृश्यों के लिए जानी जाती है। यहां बोटिंग का आनंद लेने के साथ-साथ झील के किनारे शाम की सैर भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। आसपास मौजूद स्थानीय बाजार और पारंपरिक व्यंजनों की दुकानें भी यात्रा का अनुभव और बेहतर बना देती हैं।

    इतिहास और स्थापत्य कला में रुचि रखने वालों के लिए दिलवाड़ा जैन मंदिर विशेष आकर्षण का केंद्र है। संगमरमर पर की गई बारीक नक्काशी और उत्कृष्ट वास्तुकला इस मंदिर को देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों में शामिल करती है। यहां की कलात्मक सुंदरता पर्यटकों को लंबे समय तक प्रभावित करती है।

    प्रकृति प्रेमियों के लिए गुरु शिखर एक ऐसा स्थान है, जहां से अरावली पर्वतमाला का विस्तृत और मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। यह अरावली की सबसे ऊंची चोटी है और यहां पहुंचकर बादलों के बीच फैले प्राकृतिक नजारों का आनंद लिया जा सकता है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह स्थान बेहद लोकप्रिय माना जाता है।

    माउंट आबू का सनसेट पॉइंट भी पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में शामिल है। यहां शाम के समय डूबते सूरज का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। परिवार के साथ बैठकर सूर्यास्त का आनंद लेना और यादगार तस्वीरें लेना इस यात्रा को और खास बना देता है। इसी तरह टॉड रॉक अपनी अनोखी प्राकृतिक आकृति के कारण पर्यटकों के बीच विशेष पहचान रखता है। यहां तक पहुंचने के लिए हल्की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है, लेकिन ऊपर से दिखाई देने वाला नक्की झील का दृश्य पूरे सफर की थकान दूर कर देता है।

    यदि आप भीड़भाड़ से दूर कुछ समय शांति के बीच बिताना चाहते हैं तो पीस पार्क एक आदर्श स्थान है। हरियाली से घिरा यह पार्क ध्यान, विश्राम और परिवार के साथ सुकून भरे पल बिताने के लिए उपयुक्त माना जाता है। साफ-सुथरा वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य यहां आने वाले पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करता है।

    माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य भी इस पर्यटन स्थल का प्रमुख आकर्षण है। यहां विभिन्न प्रकार के वन्यजीव, पक्षी और दुर्लभ वनस्पतियां देखने को मिलती हैं। प्रकृति और वन्यजीवों में रुचि रखने वाले लोगों के साथ-साथ बच्चों के लिए भी यह स्थान ज्ञान और रोमांच से भरपूर अनुभव देता है।

    माउंट आबू की यात्रा प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और शांत वातावरण का अनूठा संगम प्रस्तुत करती है। यदि यात्रा की सही योजना बनाकर इन प्रमुख स्थानों को अपने कार्यक्रम में शामिल किया जाए तो परिवार के साथ बिताया गया हर पल यादगार बन सकता है और छुट्टियों का आनंद कई गुना बढ़ जाता है।