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  • पीओके में 1971 जैसा जनविद्रोह: ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में पाकिस्तानी फौज को चुनौती, मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी के बीच उठी भारत में विलय की मांग

    पीओके में 1971 जैसा जनविद्रोह: ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में पाकिस्तानी फौज को चुनौती, मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी के बीच उठी भारत में विलय की मांग

    नई दिल्ली । वर्ष 1971 में पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों और सैन्य बर्बरता के परिणामस्वरूप तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में विद्रोह की जो आग भड़की थी, उसने इतिहास की दिशा बदलते हुए बांग्लादेश को जन्म दिया था। आज करीब 55 साल बाद, इतिहास एक बार फिर खुद को दोहराता हुआ प्रतीत हो रहा है। इस बार बगावत का यह मुख्य केंद्र पूर्वी पाकिस्तान नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला कश्मीर यानी पीओके बना हुआ है। पिछले कई दिनों से जारी भारी विरोध प्रदर्शनों के कारण स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण हो गई है और राजनीतिक विश्लेषक अब पाकिस्तान के एक और संभावित विभाजन की अटकलें लगाने लगे हैं।

    पीओके के मुजफ्फरराबाद, डड्याल, रावलकोट और मीरपुर जैसे प्रमुख शहरों में स्थानीय अवाम अपनी बुनियादी जरूरतों जैसे आटा, चावल और सस्ती बिजली की मांग को लेकर सड़कों पर उतरी है। इस शांतिपूर्ण नागरिक प्रदर्शन को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना और सरकार द्वारा अत्यधिक दमनकारी नीतियां अपनाई जा रही हैं। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सैन्य बलों ने प्रमुख पुलों और रास्तों को अपने नियंत्रण में ले लिया है और भीड़ पर सीधे गोलीबारी की है। इस सैन्य कार्रवाई में अब तक दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं और कई नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जिससे क्षेत्र में आक्रोश की अग्नि और अधिक धधक गई है।

    वर्तमान में पीओके के भीतर जो परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं, वे काफी हद तक 1971 के घटनाक्रम से मेल खाती हैं। उस दौर में जिस प्रकार तत्कालीन केंद्र सरकार पूर्वी पाकिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर उसे पश्चिमी हिस्से के विकास में लगाती थी, ठीक वैसा ही व्यवहार आज पीओके के साथ किया जा रहा है। क्षेत्र में स्थित जलविद्युत बांधों से बड़े पैमाने पर बिजली का उत्पादन तो किया जाता है, परंतु उसका लाभ स्थानीय निवासियों को देने के बजाय पाकिस्तान के अन्य प्रांतों को भेज दिया जाता है, जिससे पूरा पीओके अक्सर अंधेरे में डूबा रहता है।

    इस दमन और शोषण के विरुद्ध लड़ रहे लोगों की आवाज को संगठित करने के लिए वहां ‘ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) नामक संस्था प्रमुख भूमिका निभा रही है, जिसकी तुलना जानकार 1971 की ‘मुक्ति वाहिनी’ से कर रहे हैं। हालांकि, इस ऐतिहासिक घटनाक्रम और वर्तमान आंदोलन में एक बड़ा वैचारिक अंतर भी साफ देखा जा सकता है। 1971 में पूर्वी पाकिस्तान एक स्वतंत्र राष्ट्र की मांग कर रहा था, जबकि आज पीओके की जनता न केवल पाकिस्तान से पूर्ण मुक्ति चाहती है, बल्कि वे सार्वजनिक रूप से भारत के पक्ष में नारे लगाते हुए भारत सरकार से सैन्य व कूटनीतिक हस्तक्षेप की गुहार लगा रहे हैं।

    इस बेहद गंभीर मानवीय संकट के बावजूद, वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों का ढोल पीटने वाले कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और प्रमुख पश्चिमी मीडिया संस्थानों ने इस विषय पर पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। कश्मीर के नाम पर अक्सर भारत के खिलाफ नकारात्मक प्रचार करने वाले वैश्विक मंच और समाचार एजेंसियां पीओके में हो रहे इस दमन पर मौन हैं। दूसरी ओर, भारत का रुख इस मामले पर हमेशा से अत्यंत स्पष्ट रहा है कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और पीओके भारत का अभिन्न अंग है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की उपेक्षा के बीच एलओसी के उस पार से उठ रही यह पुकार आने वाले समय में दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को एक नया मोड़ दे सकती है।

  • बदरीनाथ चढ़ावा विवाद में नया खुलासा, आरोपी कर्मचारी को मिला प्रमोशन और नोट गिनने की जिम्मेदारी

    बदरीनाथ चढ़ावा विवाद में नया खुलासा, आरोपी कर्मचारी को मिला प्रमोशन और नोट गिनने की जिम्मेदारी


    नई दिल्ली । उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच के बीच सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोपों के घेरे में आए कर्मचारी को मंदिर समिति में लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती रहीं। यही नहीं, उन्हें पदोन्नति देकर चढ़ावे की गणना जैसे संवेदनशील कार्य में भी लगाया गया था, जिससे पूरे मामले पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के मुताबिक संबंधित कर्मचारी की नियुक्ति वर्ष 2014 में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के रूप में हुई थी। यह ऐसा पद था, जहां पदोन्नति की व्यवस्था नहीं थी। इसके बावजूद वर्ष 2018 में उन्हें व्यक्तिगत सहायक के पद पर समायोजित किया गया। बाद में नियमों में संशोधन कर उनके लिए जनसंपर्क विशेष अधिकारी पद तक पदोन्नति का रास्ता भी तैयार किया गया। इसी दौरान उन्हें मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गणना की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

    जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार

    मामले की जांच के लिए गठित समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, हालांकि समिति के सभी सदस्य अब तक बदरीनाथ नहीं पहुंचे हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    बीकेटीसी अध्यक्ष ने क्या कहा

    बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र या प्रशासनिक जांच भी कराई जा सकती है। उनका कहना है कि संबंधित कर्मचारी मंदिर समिति का स्थायी कर्मचारी है और विभिन्न अध्यक्षों के साथ कार्य कर चुका है। शिकायत मिलने के दिन ही जांच समिति गठित कर संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया था।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे बदले जरूर गए हैं, लेकिन पुराने कैमरों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया है। यात्रा सीजन में कर्मचारियों की कमी के कारण कई बार अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी दी जाती हैं।

    संपत्ति की भी होगी जांच

    मंदिर समिति ने संकेत दिए हैं कि संदेह के घेरे में आए कर्मचारियों की संपत्ति की भी जांच की जाएगी। समिति के अनुसार चढ़ावे की राशि प्रतिदिन बैंक में जमा होती है और उसकी गणना बैंक प्रतिनिधि, गणना अधिकारी तथा तीर्थयात्रियों की मौजूदगी में की जाती है। अब तक रिकॉर्ड में किसी तरह की ओवरराइटिंग सामने नहीं आई है।

    कांग्रेस ने उठाए निष्पक्ष जांच पर सवाल

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने जांच समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों पर आरोप हैं, उनसे जुड़े अधिकारियों को ही जांच में शामिल करना उचित नहीं है। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच विधानसभा की संयुक्त समिति या उच्च न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के बिना श्रद्धालुओं का विश्वास बहाल नहीं हो सकता। अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारियों का निर्धारण किया जाएगा।

  • योगिनी एकादशी व्रत की तारीख और शुभ मुहूर्त घोषित: दो दिन तिथि होने से गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय के लिए अलग-अलग नियम, दशमी से ही शुरू हो जाएंगे कड़े नियम

    योगिनी एकादशी व्रत की तारीख और शुभ मुहूर्त घोषित: दो दिन तिथि होने से गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय के लिए अलग-अलग नियम, दशमी से ही शुरू हो जाएंगे कड़े नियम


    नई दिल्ली ।
    हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है, जिसमें आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘योगिनी एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। पौराणिक ग्रंथों और पद्मपुराण के अनुसार, इस व्रत को विधि-विधान के साथ करने से व्रती को 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस व्रत को सच्चे मन से रखने पर व्यक्ति के समस्त संचित पाप नष्ट हो जाते हैं। इस वर्ष एकादशी तिथि दो दिनों में विभाजित होने के कारण आम जनमानस में व्रत की सही तारीख को लेकर काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, जिसे पंचांग की गणनाओं के आधार पर स्पष्ट कर दिया गया है।

    द्रिक पंचांग के विश्लेषण के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि की शुरुआत 10 जुलाई, शुक्रवार को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर होने जा रही है। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 11 जुलाई, शनिवार को सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर होगा। इस बार विशेष स्थिति यह बन रही है कि दोनों ही दिन एकादशी तिथि सूर्योदय के समय पूर्ण रूप से व्याप्त नहीं है। शनिवार 11 जुलाई को सुबह 5 बजकर 22 मिनट के बाद ही द्वादशी तिथि का प्रारंभ हो जाएगा, जिससे ज्योतिषीय गणना के अनुसार 11 जुलाई को एकादशी तिथि का क्षय माना गया है। शास्त्रों में वर्णित नियमों के अनुसार, जब दोनों दिन सूर्यकाल में एकादशी तिथि व्याप्त न हो, तब पहले दिन ही व्रत रखना श्रेयस्कर होता है।

    इस पंचांगीय नियम के आधार पर सभी गृहस्थ लोगों के लिए 10 जुलाई को ही योगिनी एकादशी का व्रत रखना पूरी तरह से मान्य और शास्त्रसम्मत होगा। दूसरी ओर, वैष्णव संप्रदाय से जुड़े श्रद्धालु और संत समाज के लोग अगले दिन यानी 11 जुलाई को इस एकादशी का व्रत अनुष्ठान कर सकते हैं। तिथि के इस विभाजन के कारण दोनों ही पक्षों के लिए व्रत के पारण का समय भी अलग-अलग निर्धारित किया गया है, जिसका कड़ाई से पालन करना व्रत की पूर्णता के लिए आवश्यक माना जाता है।

    जो श्रद्धालु 10 जुलाई, शुक्रवार को योगिनी एकादशी का उपवास रखेंगे, वे अगले दिन 11 जुलाई को अपने व्रत का पारण करेंगे। गृहस्थों के लिए 11 जुलाई को पारण का शुभ समय दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 36 मिनट तक निर्धारित किया गया है। इसके विपरीत, जो वैष्णव जन 11 जुलाई, शनिवार को एकादशी का व्रत रखेंगे, उनके लिए पारण की समय अवधि अगले दिन यानी 12 जुलाई की सुबह 5 बजकर 32 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। व्रत खोलने के इस नियत समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत का पालन करने वाले श्रद्धालुओं को दशमी तिथि से ही कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। इसके तहत दशमी तिथि यानी 9 जुलाई की शाम से ही केवल सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और भोजन में लहसुन, प्याज, बैंगन, मूंग तथा मसूर की दाल जैसी वस्तुओं का त्याग कर देना चाहिए। व्रत के मुख्य दिन बाल, नाखून काटना और बाल धोना पूरी तरह से वर्जित माना गया है। व्रतियों को इस दिन अन्न का पूरी तरह त्याग कर केवल फलाहार करना चाहिए और पूरे विधि-विधान से भगवान विष्णु की आराधना में समय बिताना चाहिए।

  • जब अस्पताल के बिस्तर से मीना कुमारी ने गुलजार को दी थीं अपनी डायरियां, अमर हो गई दोस्ती

    जब अस्पताल के बिस्तर से मीना कुमारी ने गुलजार को दी थीं अपनी डायरियां, अमर हो गई दोस्ती


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की ‘ट्रेजडी क्वीन’ कही जाने वाली मीना कुमारी अपनी दमदार अदाकारी के साथ-साथ संवेदनशील शायरी के लिए भी जानी जाती थीं। पर्दे पर दर्द को जीवंत करने वाली मीना कुमारी की निजी जिंदगी भी अकेलेपन और संघर्षों से भरी रही। उनके जीवन के अंतिम दिनों से जुड़ा एक भावुक किस्सा आज भी फिल्म प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय है।

    शायरी ने जोड़े थे मीना और गुलजार

    मीना कुमारी की शादीशुदा जिंदगी में दूरियां बढ़ने लगी थीं। इसी दौर में फिल्म ‘बेनजीर’ के दौरान उनकी मुलाकात लेखक, गीतकार और फिल्मकार गुलजार से हुई। दोनों के बीच साहित्य, कविता और शायरी को लेकर गहरा जुड़ाव बना। गुलजार ने मीना कुमारी के भीतर छिपी कवयित्री को पहचानते हुए उन्हें लगातार लिखने के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे यह रिश्ता आपसी सम्मान, संवेदनाओं और शब्दों की दुनिया में गहरी दोस्ती में बदल गया।

    गंभीर बीमारी के बीच भी निभाया काम का वादा

    जीवन के अंतिम वर्षों में मीना कुमारी लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। इसके बावजूद उन्होंने अपने पेशेवर दायित्व निभाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने गुलजार की पहली निर्देशित फिल्म ‘मेरे अपने’ की शूटिंग पूरी की।

    आखिरी वक्त की सबसे अनमोल सौगात

    31 मार्च 1972 को मीना कुमारी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। कहा जाता है कि अस्पताल में अपने अंतिम दिनों के दौरान उन्होंने अपनी सबसे प्रिय धरोहर अपनी निजी डायरियां गुलजार को सौंप दी थीं। इन डायरियों में उनकी लिखी नज्में, गजलें और निजी भावनाएं दर्ज थीं। मीना कुमारी का विश्वास था कि उनके शब्दों की असली अहमियत अगर कोई समझ सकता है, तो वह गुलजार ही हैं।

    गुलजार ने निभाया भरोसा

    मीना कुमारी के निधन के बाद गुलजार ने उनकी डायरियों को सहेजकर रखा और बाद में उनकी रचनाओं को पुस्तक के रूप में प्रकाशित कराया। इन प्रकाशित रचनाओं ने दुनिया को यह बताया कि मीना कुमारी सिर्फ एक महान अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि बेहद संवेदनशील और प्रतिभाशाली शायरा भी थीं।

    आज भी उनकी कविताएं और नज्में पाठकों के बीच उतनी ही लोकप्रिय हैं, जितनी उनकी फिल्में दर्शकों के बीच हैं। मीना कुमारी और गुलजार की यह दोस्ती हिंदी सिनेमा और साहित्य की दुनिया में विश्वास, सम्मान और संवेदनाओं की एक अनूठी मिसाल मानी जाती है।

  • अगर सस्पेंस थ्रिलर पसंद है तो मिस न करें 'जुबली', 8.3 IMDb रेटिंग वाली दमदार सीरीज

    अगर सस्पेंस थ्रिलर पसंद है तो मिस न करें 'जुबली', 8.3 IMDb रेटिंग वाली दमदार सीरीज


    नई दिल्ली । अगर आप ऐसी वेब सीरीज की तलाश में हैं जिसमें सिर्फ एक्शन या गोलीबारी नहीं, बल्कि दमदार कहानी, शानदार अभिनय और लगातार बना रहने वाला सस्पेंस हो, तो ‘जुबली’ आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है। साल 2023 में रिलीज हुई यह पीरियड ड्रामा-सस्पेंस सीरीज दर्शकों और समीक्षकों दोनों की सराहना बटोर चुकी है।

    अमेजन प्राइम वीडियो पर उपलब्ध इस 10 एपिसोड की सीरीज की कहानी भारत की आजादी से ठीक पहले और उसके बाद के दौर की फिल्म इंडस्ट्री के इर्द-गिर्द घूमती है। इसमें 1940 और 50 के दशक की मुंबई, फिल्म स्टूडियो, पुरानी कारें और उस दौर की चमक-दमक को बेहद बारीकी से पर्दे पर उतारा गया है।

    क्या है कहानी?

    कहानी की शुरुआत मशहूर रॉय टॉकीज स्टूडियो से होती है, जहां एक नए हीरो की तलाश चल रही है। इसी दौरान फिल्मी दुनिया के रिश्ते, महत्वाकांक्षा, प्यार, विश्वासघात और सत्ता की राजनीति कहानी को अप्रत्याशित मोड़ों तक पहुंचा देती है।

    एक तरफ स्टूडियो का मालिक अपनी प्रतिष्ठा बचाने की कोशिश करता है, तो दूसरी ओर एक साधारण लैब असिस्टेंट हालात के चलते अपनी पहचान बदलने का सपना देखने लगता है। इसी के समानांतर कराची से आया एक शरणार्थी युवक फिल्म निर्देशक बनने का सपना लेकर मुंबई पहुंचता है, जबकि लखनऊ से आई एक डांसर भी अपनी किस्मत बदलने की जद्दोजहद में जुट जाती है।

    इन सभी किरदारों की किस्मत एक-दूसरे से इस तरह जुड़ती है कि साजिश, धोखा और महत्वाकांक्षा की परतें धीरे-धीरे खुलती जाती हैं। सीरीज का क्लाइमेक्स कई दर्शकों के लिए अप्रत्याशित साबित होता है।

    क्यों देखें यह सीरीज?

    ‘जुबली’ सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि सफलता पाने की चाह इंसान को किस हद तक बदल सकती है। इसकी सिनेमैटोग्राफी, बैकग्राउंड म्यूजिक और पीरियड सेट डिजाइन इसकी सबसे बड़ी खूबियों में शामिल हैं। कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और हर एपिसोड के साथ रोमांच बढ़ता जाता है।

    स्टारकास्ट और रेटिंग

    सीरीज में प्रोसेनजीत चटर्जी, अपारशक्ति खुराना, सिद्धांत गुप्ता, अदिति राव हैदरी, वामिका गब्बी और राम कपूर ने दमदार अभिनय किया है। IMDb पर इसे 8.3/10 की रेटिंग मिली है, जो इसे हाल के वर्षों की चर्चित भारतीय वेब सीरीज में शामिल करती है।

    ओटीटी प्लेटफॉर्म: अमेजन प्राइम वीडियो

  • ट्रंप प्रशासन के भव्य स्वतंत्रता दिवस समारोह का पर्यावरण पर असर: 8.5 लाख पटाखे दागने के दावे के बीच वॉशिंगटन में 'कोड पर्पल' अलर्ट, पीएम 2.5 का स्तर मानकों से कई गुना ऊपर पहुंचा

    ट्रंप प्रशासन के भव्य स्वतंत्रता दिवस समारोह का पर्यावरण पर असर: 8.5 लाख पटाखे दागने के दावे के बीच वॉशिंगटन में 'कोड पर्पल' अलर्ट, पीएम 2.5 का स्तर मानकों से कई गुना ऊपर पहुंचा

    नई दिल्ली । संयुक्त राज्य अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी वॉशिंगटन डीसी में आयोजित एक भव्य समारोह के बाद वहां की वायु गुणवत्ता में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में आयोजित इस भव्य जश्न के दौरान हुई अत्यधिक आतिशबाजी के कारण पर्यावरण को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस आतिशबाजी से उत्पन्न हुए सघन धुएं और हानिकारक कणों के चलते कुछ घंटों के लिए अमेरिकी राजधानी वॉशिंगटन दुनिया का सबसे अधिक प्रदूषित प्रमुख शहर बन गया, जिसने पर्यावरणविदों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंताओं को अत्यधिक बढ़ा दिया है।

    इस विशाल आयोजन की जिम्मेदारी व्हाइट हाउस की ‘फ्रीडम 250’ पहल के तहत ‘पायरोटेक्निको’ नामक कंपनी को सौंपी गई थी। इस कंपनी ने समारोह के दौरान लगभग 8.5 लाख आतिशबाजियां एक साथ दागकर एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने का लक्ष्य रखा था। वायु गुणवत्ता की निगरानी करने वाली वैश्विक संस्था ‘आईक्यूएयर’ (IQAir) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस विशाल और सघन आतिशबाजी के प्रदर्शन के तुरंत बाद ही शहर का वायु प्रदूषण सूचकांक अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया, जिसने वॉशिंगटन को वैश्विक प्रदूषण रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचा दिया।

    यह पूरा आयोजन प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के बीच संपन्न हुआ। 4 जुलाई को क्षेत्र में भीषण गर्मी का प्रकोप था और शाम के समय आए तेज गरज-चमक वाले तूफान के कारण मुख्य आतिशबाजी कार्यक्रम अपने निर्धारित समय से एक घंटे से अधिक की देरी से, मध्यरात्रि के आसपास शुरू हो सका। स्थानीय स्तर पर पहले से ही आतिशबाजी के कारण हवा खराब हो रही थी, लेकिन मुख्य शो शुरू होते ही आसमान में धुएं का गुबार छा गया। हवा के रुख के कारण यह हानिकारक धुआं सीधे दर्शकों की ओर फैल गया, जिससे कई प्रमुख इलाकों में दृश्यता बेहद कम हो गई।

    शहर के विभिन्न वायु निगरानी केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, वातावरण में बेहद सूक्ष्म और हानिकारक प्रदूषक कणों यानी पीएम 2.5 (PM2.5) का स्तर एक समय पर 200 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से भी ऊपर दर्ज किया गया। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) द्वारा तय किए गए 24 घंटे के सुरक्षित औसत मानक 35 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की तुलना में यह स्तर कई गुना अधिक और बेहद चिंताजनक था। ये सूक्ष्म कण मानव स्वास्थ्य, विशेषकर फेफड़ों और श्वसन तंत्र के लिए अत्यंत घातक माने जाते हैं।

    प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर को देखते हुए प्रशासन को वॉशिंगटन और उसके आस-पास के क्षेत्रों में ‘कोड पर्पल’ श्रेणी का अलर्ट जारी करना पड़ा। इसका सीधा अर्थ यह है कि हवा की गुणवत्ता इतनी खराब हो चुकी थी कि वह सामान्य नागरिकों के स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती थी। इस वायु प्रदूषण का व्यापक असर न केवल राजधानी तक सीमित रहा, बल्कि इसके पड़ोसी राज्यों वर्जीनिया और मैरीलैंड के कई हिस्सों में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई।

    वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रविवार को समय पर बारिश नहीं हुई होती, तो स्थिति और भी अधिक गंभीर हो सकती थी। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के वायुमंडलीय वैज्ञानिक रसेल डिकरसन के अनुसार, बारिश ने वातावरण में फैले इस अत्यधिक धुएं और प्रदूषण को साफ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे रविवार दोपहर तक वायु गुणवत्ता पुनः सामान्य स्तर पर आ सकी। इसके बाद वॉशिंगटन प्रदूषण रैंकिंग में नीचे खिसक गया। वहीं दूसरी ओर, इस आतिशबाजी के जरिए पूर्व में फिलीपींस द्वारा बनाए गए 8.11 लाख आतिशबाजी के रिकॉर्ड को तोड़ने के दावे पर ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ ने कहा है कि साक्ष्यों की पूरी समीक्षा के बाद ही आधिकारिक पुष्टि की जाएगी।

  • जम्मू-कश्मीर के डोडा में प्रकृति का भीषण प्रकोप: बादल फटने से थाथरी कस्बे में मची भारी तबाही, राष्ट्रीय राजमार्ग बंद और कई घर-वाहन क्षतिग्रस्त

    जम्मू-कश्मीर के डोडा में प्रकृति का भीषण प्रकोप: बादल फटने से थाथरी कस्बे में मची भारी तबाही, राष्ट्रीय राजमार्ग बंद और कई घर-वाहन क्षतिग्रस्त


    नई दिल्ली ।
    जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय क्षेत्रों में मानसूनी सीजन के दौरान प्रकृति का भीषण प्रकोप देखने को मिला है। राज्य के डोडा जिले के थाथरी इलाके में अचानक बादल फटने की एक बेहद गंभीर घटना सामने आई है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है, जिसने स्थानीय जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। बादल फटने की इस घटना के बाद ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों से भारी मात्रा में कीचड़, बड़े-बड़े पत्थर और मलबा तीव्र गति से रिहायशी इलाकों की तरफ बहकर आ गया, जिसने थाथरी शहर और उसके आस-पास के निचले क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लिया।

    इस अचानक आई बाढ़ और मलबे के बहाव के कारण थाथरी का मुख्य बाजार और स्थानीय जामिया मस्जिद क्षेत्र सबसे गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। मलबे के तीव्र प्रवाह की वजह से बाजार में खड़ी कई गाड़ियां मलबे में दबकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, जबकि कई स्थानीय निवासियों के घरों को भी भारी नुकसान पहुंचने की खबर है। गनीमत यह रही कि इस पूरी अनहोनी में फिलहाल किसी भी व्यक्ति के हताहत होने या जान जाने की सूचना नहीं मिली है, जिसे एक बड़ी राहत माना जा रहा है। हालांकि, भौतिक संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचा है।

    इस प्राकृतिक आपदा का सीधा असर क्षेत्र के परिवहन तंत्र पर भी पड़ा है। बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए मलबे के कारण बटोटे-डोडा-किश्तवाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-244) पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। सड़क पर भारी मात्रा में कीचड़ और पत्थर जमा हो जाने की वजह से प्रशासन को एहतियात के तौर पर इस हाईवे को यातायात के लिए पूरी तरह बंद करना पड़ा है। हाईवे बंद होने के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं और मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह से ठप हो गया है।

    मध्य प्रदेश। घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस और अन्य संबंधित विभागों ने तत्परता दिखाते हुए प्रभावित क्षेत्र में तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय राजमार्ग को साफ करने और क्षेत्र में सामान्य कनेक्टिविटी को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए भारी अर्थ-मूविंग मशीनरी और जेसीबी मशीनों को काम पर लगाया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने आम जनता और यात्रियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि जब तक सड़क को वाहनों की आवाजाही के लिए पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता, तब तक इस मार्ग पर गैर-जरूरी यात्रा से पूरी तरह परहेज करें।

    इधर जम्मू-कश्मीर के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर और इगतपुरी जैसे पश्चिमी हिस्सों में बादल फटने जैसी अत्यधिक भारी बारिश की आशंका को देखते हुए हाई अलर्ट जारी किया है। सुरक्षा के मद्देनजर वहां स्कूल, कॉलेज और प्रमुख मंदिरों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही ओडिशा में भी भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने के कारण मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। डोडा में फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी नुकसान का सटीक आकलन करने में जुटे हुए हैं।

  • रियलिटी शो में छिड़ा जुबानी युद्ध: पुराने विवादों को लेकर घिरीं एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे, बेबाक अंदाज में जवाब देकर गोविंदा की पत्नी सुनीता ने बटोरीं सुर्खियां

    रियलिटी शो में छिड़ा जुबानी युद्ध: पुराने विवादों को लेकर घिरीं एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे, बेबाक अंदाज में जवाब देकर गोविंदा की पत्नी सुनीता ने बटोरीं सुर्खियां

    नई दिल्ली । रियलिटी टीवी शो ‘लॉकअप सीजन 2’ इन दिनों दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा का केंद्र बना हुआ है। शो में कंटेस्टेंट्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप ने मनोरंजन के पारे को काफी बढ़ा दिया है। इस शो में मशहूर अभिनेता गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा अपने प्रवेश के बाद से ही अपने बेबाक और स्पष्टवादी अंदाज के लिए लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। उन्होंने शो के दौरान अपनी व्यक्तिगत जिंदगी से जुड़े कई अहम और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे दर्शक उनकी तरफ काफी आकर्षित हुए हैं।

    इसी बीच शो में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट के रूप में शामिल हुईं टेलीविजन अभिनेत्री शिल्पा शिंदे के आने से माहौल और भी गरमा गया है। ‘बिग बॉस’ जैसे बड़े रियलिटी शो का हिस्सा रह चुकीं शिल्पा शिंदे ने जेल में एंट्री लेते ही अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन बहुत ही कम समय में उनका मुकाबला सुनीता आहूजा के साथ हो गया। दोनों के बीच हुई इस तीखी भिड़ंत का एक नया प्रोमो वीडियो भी सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर आते ही तहलका मचा दिया है।

    इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब शिल्पा शिंदे ने सुपरस्टार गोविंदा की विशाल फैन फॉलोइंग का हवाला देते हुए सुनीता आहूजा पर उनके बयानों को लेकर सवाल उठाए। शिल्पा ने सीधे तौर पर सुनीता को घेरते हुए पूछा कि वह सार्वजनिक मंच पर गोविंदा के बारे में इस तरह की बातें कैसे कह सकती हैं और क्या उनके फैसले पूरी तरह से उनके अपने होते हैं। शिल्पा के इन तीखे सवालों का सुनीता आहूजा ने बेहद कड़े और बेबाक लहजे में जवाब दिया। सुनीता ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब किसी पर खुद ऐसी परिस्थितियां गुजरती हैं, तभी सच्चाई का अहसास होता है, इसलिए बिना सोचे-समझे बकवास करने की जरूरत नहीं है।

    सुनीता आहूजा द्वारा बिना समय गंवाए शिल्पा शिंदे को दिए गए इस करारे जवाब को सोशल मीडिया पर दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। इंटरनेट यूजर्स सुनीता के इस व्यावहारिक और आक्रामक दृष्टिकोण की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कमेंट सेक्शन में लोग सुनीता के समर्थन में उतर आए हैं और उनका मानना है कि शिल्पा को इस तरह का कड़ा जवाब मिलना बेहद जरूरी था। दर्शकों का एक बड़ा वर्ग सुनीता की इस बेबाकी को सही ठहरा रहा है और उनके आत्मविश्वास की सराहना कर रहा है।

    इस पूरे विवाद के बीच शिल्पा शिंदे के पुराने बयानों को लेकर भी सोशल मीडिया पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। हाल ही में शिल्पा शिंदे अपने उस कबूलनामे के कारण विवादों में घिर गई थीं, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि अतीत में एक मशहूर टीवी शो के निर्माता पर लगाए गए उनके यौन उत्पीड़न के आरोप पूरी तरह से असत्य और मनगढ़ंत थे। इस खुलासे के बाद से ही जनता का एक बड़ा हिस्सा उनके प्रति नाराजगी जता रहा है।

    दर्शकों का कहना है कि किसी भी प्रतिष्ठित सार्वजनिक मंच पर इस तरह के गंभीर और झूठे आरोप लगाने वाले व्यक्ति को जगह नहीं मिलनी चाहिए। यही कारण है कि शो के भीतर जब सुनीता आहूजा ने शिल्पा को आड़े हाथों लिया, तो दर्शकों ने इसे एक सही कार्रवाई के रूप में देखा। फिलहाल इस शो में दोनों के बीच की यह जंग आने वाले दिनों में क्या नया मोड़ लेती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

  • 1982 फिल्मफेयर में हुआ बड़ा उलटफेर, नसीरुद्दीन शाह के आगे फीके पड़े अमिताभ और राजेश खन्ना

    1982 फिल्मफेयर में हुआ बड़ा उलटफेर, नसीरुद्दीन शाह के आगे फीके पड़े अमिताभ और राजेश खन्ना


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में 1982 का फिल्मफेयर अवॉर्ड समारोह उन यादगार मौकों में गिना जाता है, जब स्टारडम से ज्यादा अभिनय को महत्व मिला। उस दौर में अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, कमल हासन और दिलीप कुमार जैसे सितारों का दबदबा था, लेकिन बेस्ट एक्टर का पुरस्कार नसीरुद्दीन शाह ने अपनी दमदार अदाकारी के दम पर जीत लिया।

    साल 1981 में अमिताभ बच्चन की ‘नसीब’, ‘लावारिस’ और ‘याराना’ जैसी सुपरहिट फिल्में रिलीज हुई थीं। वहीं राजेश खन्ना, कमल हासन और अन्य बड़े सितारों की फिल्में भी दर्शकों के बीच खूब पसंद की गईं। इसके बावजूद 29वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में नसीरुद्दीन शाह ने फिल्म ‘चक्र’ के लिए बेस्ट एक्टर का सम्मान अपने नाम किया।

    उस वर्ष बेस्ट एक्टर की दौड़ में अमिताभ बच्चन को ‘लावारिस’ और ‘सिलसिला’, राजेश खन्ना को ‘दर्द’ तथा कमल हासन को ‘एक दूजे के लिए’ के लिए नामांकन मिला था। हालांकि निर्णायकों ने नसीरुद्दीन शाह के यथार्थवादी और प्रभावशाली अभिनय को सर्वश्रेष्ठ माना।

    सिर्फ नसीरुद्दीन शाह ही नहीं, स्मिता पाटिल ने भी फिल्म ‘चक्र’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता। उन्होंने हेमा मालिनी, जया बच्चन, रेखा और राखी जैसी दिग्गज अभिनेत्रियों को पीछे छोड़ दिया। ‘चक्र’ को कुल छह श्रेणियों में नामांकन मिला था, जिनमें से तीन पुरस्कार फिल्म ने अपने नाम किए। दिलचस्प बात यह रही कि अमिताभ बच्चन की चर्चित फिल्मों को उस वर्ष कोई फिल्मफेयर अवॉर्ड नहीं मिला।

    समाज का आईना थी ‘चक्र’

    निर्देशक रवींद्र धर्मराज की फिल्म ‘चक्र’ मुंबई की झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले गरीब परिवारों के संघर्ष को बेहद यथार्थवादी अंदाज में दिखाती है। फिल्म में स्मिता पाटिल ने ‘अम्मा’ का किरदार निभाया है, जो पति की मौत के बाद अपने बेटे का पालन-पोषण करने के लिए संघर्ष करती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात नसीरुद्दीन शाह द्वारा निभाए गए ‘लुक्का’ के किरदार से होती है। गरीबी, सामाजिक असमानता और जीवन के कठोर यथार्थ को दिखाने वाली इस फिल्म को भारतीय समानांतर सिनेमा की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है।

    आज भी ‘चक्र’ को नसीरुद्दीन शाह और स्मिता पाटिल के करियर की बेहतरीन फिल्मों में शामिल किया जाता है। अभिनय की बारीकियों और मजबूत कहानी के कारण यह फिल्म समय के साथ एक क्लासिक का दर्जा हासिल कर चुकी है।

  • 'बिग बॉस' ने बदल दी जुबैर खान की जिंदगी, डिप्रेशन और आत्महत्या के विचारों का किया खुलासा

    'बिग बॉस' ने बदल दी जुबैर खान की जिंदगी, डिप्रेशन और आत्महत्या के विचारों का किया खुलासा


    नई दिल्ली । रियलिटी शो ‘बिग बॉस 11’ के पूर्व प्रतियोगी जुबैर खान ने एक बार फिर शो के बाद अपनी जिंदगी में आए कठिन दौर को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने दावा किया कि शो में हुई घटनाओं और उसके बाद पैदा हुए विवादों का उनकी मानसिक, सामाजिक और पेशेवर जिंदगी पर गहरा असर पड़ा।

    साल 2017 में प्रसारित हुए ‘बिग बॉस 11’ में जुबैर खान ने बतौर कंटेस्टेंट हिस्सा लिया था। शो के दौरान उन्होंने खुद को अंडरवर्ल्ड से जुड़े परिवार का सदस्य बताया था, जिसके बाद वह सुर्खियों में आ गए। बाद में साथी प्रतियोगी अर्शी खान के साथ उनकी तीखी बहस और अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर विवाद हुआ।

    वीकेंड का वार एपिसोड में शो के होस्ट सलमान खान ने जुबैर खान की कड़ी आलोचना की थी। इसके बाद जुबैर की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भी भेजा गया। बाद में कम वोट मिलने के कारण वह शो से बाहर हो गए।

    शो से बाहर आने के बाद जुबैर ने सलमान खान के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि शो में हुई घटनाओं के कारण उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा और उन्हें काम मिलना बंद हो गया।

    हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में जुबैर खान ने कहा कि शो के बाद वह लंबे समय तक डिप्रेशन से जूझते रहे। उनके अनुसार, निजी जीवन भी प्रभावित हुआ और पारिवारिक रिश्तों में दूरियां आ गईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस दौर में उन्हें कई बार आत्महत्या के विचार आए और मानसिक तनाव से उबरने के लिए उन्हें दवाइयों का सहारा लेना पड़ा।

    जुबैर ने कहा कि एक टीवी एपिसोड के आधार पर लोगों ने उनके बारे में धारणा बना ली, जिससे उनकी सामाजिक और पेशेवर छवि को भारी नुकसान पहुंचा। उनका कहना है कि उन्होंने इस पूरे विवाद में बहुत कुछ खोया, लेकिन हासिल कुछ नहीं हुआ।

    हालांकि, यह जुबैर खान के व्यक्तिगत दावे हैं। इन दावों पर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग समय पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी सामने आती रही हैं। यदि किसी व्यक्ति को डिप्रेशन, आत्महत्या के विचार या गंभीर मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा हो, तो उसे तुरंत किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, विश्वसनीय परिजन या स्थानीय हेल्पलाइन से सहायता लेनी चाहिए।