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  • भाजपा नेता का कथित धमकी भरा ऑडियो वायरल: टोल मैनेजर को दी चेतावनी

    भाजपा नेता का कथित धमकी भरा ऑडियो वायरल: टोल मैनेजर को दी चेतावनी


    मध्य प्रदेश । रतलाम (मध्यप्रदेश) डेस्क। रतलाम जिले में भाजपा युवा मोर्चा के एक पदाधिकारी का कथित धमकी भरा ऑडियो सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। मामला चिकलिया फोरलेन टोल प्लाजा का है, जहां भाजयुमो आईटी सेल प्रभारी Shubham Gurjar पर टोल मैनेजर को फोन पर धमकाने, गाली-गलौज करने और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की चेतावनी देने के आरोप लगे हैं। टोल मैनेजर Arijit Das Gupta ने इस मामले की शिकायत रतलाम एसपी और बिलपांक थाने में की है। शिकायत के साथ कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी पुलिस को सौंपी गई है। बताया जा रहा है कि यह बातचीत 18 मई की दोपहर हुई थी।

    “नेतागीरी नहीं चलेगी… उलटा टांग दूंगा”
    वायरल ऑडियो में कथित तौर पर शुभम गुर्जर टोल कर्मचारियों पर स्थानीय लोगों की गाड़ियां रोकने का आरोप लगाते हुए आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते सुनाई दे रहे हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि “भागते फिरोगे एसपी और टीआई के पास”, “लॉ एंड ऑर्डर बिगाड़ दूंगा” और “ज्यादा होशियारी दिखाई तो उलटा टांग दूंगा” जैसी धमकियां दीं। ऑडियो में टोल मैनेजर उन्हें शांत करने की कोशिश करते सुनाई देते हैं, लेकिन कथित तौर पर भाजपा नेता लगातार गुस्से में अपशब्द बोलते रहते हैं।

    टोल मैनेजर ने लगाए गंभीर आरोप
    शिकायत में टोल मैनेजर ने आरोप लगाया है कि शुभम गुर्जर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रोजाना करीब 100 बाहरी वाहनों को बिना टोल शुल्क दिए निकलवाते हैं। जब टोल कर्मचारी नियमों के अनुसार शुल्क मांगते हैं तो वाहन चालक शुभम गुर्जर से फोन पर बात करवाते हैं और इसके बाद स्टाफ पर दबाव बनाया जाता है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस तरह की गतिविधियों से एमपीआरडीसी को प्रतिदिन लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

    पहले भी विवादों में रह चुके हैं शुभम गुर्जर
    मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि शुभम गुर्जर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2024 में भी बिलपांक थाने में उनके खिलाफ टोल प्लाजा पर कर्मचारियों को पिस्टल दिखाकर धमकाने और मारपीट करने का केस दर्ज हुआ था।

    उस समय सामने आए सीसीटीवी फुटेज के बाद तत्कालीन एसपी ने कार्रवाई कर मामला दर्ज कराया था और उन्हें भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। बाद में कोर्ट में सरेंडर करने के बाद वे जमानत पर बाहर आए थे। करीब दो महीने पहले उन्हें फिर से भाजयुमो आईटी सेल प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी।

    टोल कर्मचारियों ने मांगी सुरक्षा
    टोल प्रबंधन ने पुलिस से मांग की है कि शुभम गुर्जर के खिलाफ सरकारी काम में बाधा, धमकी, गाली-गलौज और राजस्व हानि पहुंचाने की धाराओं में केस दर्ज किया जाए। साथ ही टोल कर्मचारियों और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है। मामले को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से फिलहाल विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन शिकायत और ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच शुरू कर दी गई है।

  • UP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपियों को पुलिस नौकरी नहीं

    UP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपियों को पुलिस नौकरी नहीं



    नई दिल्ली। इलाहाबाद उच्च न्यायालयकी लखनऊ पीठ ने पुलिस भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी व्यक्तियों को पुलिस सेवा में नियुक्ति नहीं दी जा सकती, चाहे उनकी दोषसिद्धि अभी तक न हुई हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग केवल रोजगार का माध्यम नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था और जनता के भरोसे से जुड़ी संवेदनशील सेवा है।

    यह फैसला न्यायमूर्ति Amitabh Kumar Rai की एकल पीठ ने शेखर नामक अभ्यर्थी की याचिका खारिज करते हुए दिया। याची ने अदालत में दलील दी थी कि उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला दुर्भावनापूर्ण है और अभी अदालत ने उसे दोषी नहीं ठहराया है, इसलिए उसे पुलिस भर्ती से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

    हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि केवल दोषसिद्धि न होना किसी उम्मीदवार को स्वतः सरकारी नौकरी पाने का अधिकार नहीं देता। विशेष रूप से पुलिस जैसे अनुशासित बल में भर्ती के लिए अभ्यर्थी का चरित्र, आचरण और सामाजिक छवि अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

    न्यायालय ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर प्रकृति के आपराधिक मामले लंबित हैं, तो संबंधित प्राधिकारी उसके चरित्र सत्यापन और पृष्ठभूमि का मूल्यांकन कर उसे नियुक्ति के लिए अनुपयुक्त मान सकता है। अदालत ने माना कि पुलिस बल समाज में कानून लागू करने वाली संस्था है और यदि गंभीर आरोपों से घिरा व्यक्ति इसमें शामिल होता है तो इससे विभाग की साख और जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है।

    अपने फैसले में अदालत ने Supreme Court of India के कई पूर्व निर्णयों का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि सरकारी सेवाओं, खासकर पुलिस विभाग में भर्ती के दौरान चरित्र सत्यापन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और राज्य सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को सेवा में शामिल होने से रोके।

    अदालत के इस फैसले को पुलिस भर्ती और सरकारी नौकरियों में चरित्र सत्यापन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
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  • रतलाम में राजनीतिक हलचल: कोठारी बोले- सुनवाई नहीं हुई तो पार्टी छोड़ दूंगा

    रतलाम में राजनीतिक हलचल: कोठारी बोले- सुनवाई नहीं हुई तो पार्टी छोड़ दूंगा


    रतलाम (मध्यप्रदेश)। मध्यप्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता Himmat Kothari बुधवार को रतलाम एसपी ऑफिस में अचानक धरने पर बैठ गए। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर आम जनता और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे आमरण अनशन करेंगे और जरूरत पड़ी तो पार्टी भी छोड़ देंगे।

    दरअसल मामला उनके बचपन के साथी और मीसाबंदी बसंत पुरोहित की जमीन पर कथित कब्जे से जुड़ा है। पूर्व मंत्री का आरोप है कि इस संबंध में पहले थाने में शिकायत की गई थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कुछ दिन पहले स्वयं एसपी अमित कुमार से मिलकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन फिर भी मामला आगे नहीं बढ़ा।

    बुधवार दोपहर हिम्मत कोठारी सीधे एसपी कार्यालय पहुंचे और एसपी के चेंबर के बाहर जमीन पर बैठकर विरोध जताने लगे। अचानक हुई इस घटना से पुलिस महकमे में हलचल मच गई। एसपी Amit Kumar तुरंत अपने चेंबर से बाहर आए और पूर्व मंत्री को अंदर चलकर बात करने के लिए कहा।

    इसके बाद डीडी नगर थाना प्रभारी को भी मौके पर बुलाया गया और पूरे प्रकरण की जानकारी ली गई। एसपी ने संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए और मामले में आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।

    धरने के दौरान मीडिया से बातचीत में हिम्मत कोठारी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब एक जनप्रतिनिधि की बात नहीं सुनी जा रही है, तो आम जनता की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में अराजकता का माहौल बन गया है और जमीन कब्जे जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

    पूर्व मंत्री ने कहा, “यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो मैं पार्टी से अनुमति लेकर आमरण अनशन करूंगा। फिर भी सुनवाई नहीं हुई तो पार्टी छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”

    उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में जनप्रतिनिधि और नेता “गूंगे-बहरे” बन गए हैं और आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उनके अनुसार, यदि ऐसे मामलों में सख्ती नहीं हुई तो भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी की जमीन पर कब्जा कर सकता है।

    वहीं एसपी अमित कुमार ने मामले को लेकर कहा कि पूर्व मंत्री उनसे मिलने आए थे और संबंधित व्यक्ति को दस्तावेजों के साथ बुलाया गया था, लेकिन वह पूरे कागजात नहीं ला पाए। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और संबंधित थाना प्रभारी को नोटिस जारी किया जाएगा।

  • पाकिस्तान वायुसेना का ट्रेनिंग विमान क्रैश, हादसे से पहले पैराशूट से कूदे दोनों पायलट

    पाकिस्तान वायुसेना का ट्रेनिंग विमान क्रैश, हादसे से पहले पैराशूट से कूदे दोनों पायलट



    नई दिल्ली। Pakistan Air Force का एक ट्रेनिंग विमान बुधवार को बड़ा हादसे का शिकार हो गया। पाकिस्तान के मियांवाली क्षेत्र के पास एयरफोर्स का होंगडु K-8 ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट उड़ान के दौरान क्रैश हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और दूर तक धुएं का गुबार दिखाई दिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विमान में तकनीकी खराबी आने के संकेत मिले थे। हादसे से ठीक पहले दोनों पायलटों ने इमरजेंसी इजेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया और पैराशूट के जरिए सुरक्षित बाहर निकल गए। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में दोनों पायलटों को आसमान से नीचे उतरते हुए देखा गया।

    विमान जमीन पर गिरते ही उसमें जोरदार धमाका हुआ। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि दुर्घटना में जमीन पर किसी प्रकार का नुकसान या हताहत हुआ है या नहीं। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई हैं।

    पाकिस्तान वायुसेना की ओर से फिलहाल हादसे के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। शुरुआती आशंका तकनीकी खराबी की जताई जा रही है, लेकिन विस्तृत जांच के बाद ही दुर्घटना की असली वजह सामने आ सकेगी।

    होंगडु K-8 एक जेट ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट है, जिसका इस्तेमाल पायलटों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जाता है। पाकिस्तान वायुसेना लंबे समय से इस विमान का उपयोग ट्रेनिंग मिशनों में करती आ रही है।

  • राहुल गांधी के बयान से गरमाई राजनीति, पीएम मोदी और अमित शाह पर टिप्पणी के बाद BJP का जोरदार पलटवार

    राहुल गांधी के बयान से गरमाई राजनीति, पीएम मोदी और अमित शाह पर टिप्पणी के बाद BJP का जोरदार पलटवार

    नई दिल्ली /उत्तर प्रदेश के रायबरेली में एक जनसभा के दौरान दिए गए राहुल गांधी के बयान के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाते हुए तीखी टिप्पणी की, जिसके बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। उनके इस बयान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शब्दों की जंग तेज हो गई है।

    राहुल गांधी ने अपने भाषण में मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए महंगाई और आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि देश में आम जनता पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है और जरूरी वस्तुओं की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में देश को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है और आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

    अपने संबोधन में उन्होंने सरकार पर बड़े उद्योगपतियों के हित में काम करने का आरोप भी लगाया और देश की आर्थिक दिशा को लेकर सवाल खड़े किए। इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी और अमित शाह को लेकर जो टिप्पणी की, उसने राजनीतिक विवाद को और गहरा कर दिया।

    राहुल गांधी के इस बयान के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने उनके बयान को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि यह न केवल प्रधानमंत्री का बल्कि देश की जनता का भी अपमान है। बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी की भाषा और सोच पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीति से प्रेरित और निराशा से भरा बयान करार दिया।

    बीजेपी ने अपने जवाब में कहा कि देश के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले सुरक्षा और विकास के प्रयासों को गलत ठहराना उचित नहीं है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार ने आतंकवाद, नक्सलवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर मजबूत कदम उठाए हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी माहौल या राजनीतिक तनाव के बीच ऐसे बयान अक्सर विवाद को बढ़ा देते हैं और जनता के बीच भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं। वहीं, बीजेपी ने इस मुद्दे को लेकर राहुल गांधी पर लगातार हमले तेज कर दिए हैं और इसे आगामी राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा बताया है।

  • धूप में परेशान हुए हितग्राही: सर्वर डाउन बताकर रोका गया राशन, अफसरों पर सवाल

    धूप में परेशान हुए हितग्राही: सर्वर डाउन बताकर रोका गया राशन, अफसरों पर सवाल

    बुरहानपुर (मध्यप्रदेश)। जिले के सिरपुर स्थित एक शासकीय उचित मूल्य दुकान पर बुधवार सुबह राशन वितरण में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया। दुकान संचालक ने “सर्वर डाउन” का हवाला देकर करीब तीन घंटे तक उपभोक्ताओं को राशन नहीं दिया, जिससे बड़ी संख्या में लोग धूप में खड़े होकर परेशान होते रहे।

    सुबह से ही दुकान के बाहर लंबी कतारें लग गई थीं। कई उपभोक्ता अपने घरों से थैलियां लेकर पहुंचे थे और घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें अनाज नहीं मिला। तेज धूप और भीड़ के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    SDM ने मौके पर पहुंचकर लगाई फटकार
    इसी दौरान नेपानगर एसडीएम भागीरथ वाखला सिरपुर क्षेत्र से गुजर रहे थे। उन्होंने दुकान के बाहर भारी भीड़ देखकर गाड़ी रोक दी और स्थिति का जायजा लिया। एसडीएम ने मौके पर दुकान संचालक से देरी का कारण पूछा।

    संचालक ने सफाई दी कि तकनीकी कारणों से सर्वर डाउन है, जिसके चलते राशन वितरण नहीं हो पा रहा है। इस पर एसडीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे लापरवाही माना और तत्काल प्रभाव से वितरण शुरू करने के निर्देश दिए। एसडीएम की सख्ती के बाद दुकान पर राशन वितरण तुरंत शुरू कर दिया गया और लोगों को अनाज मिलना प्रारंभ हो गया।

    पोर्टेबिलिटी बंद होने से बढ़ी परेशानी
    स्थानीय जानकारी के अनुसार, सिरपुर की यह शासकीय राशन दुकान आसपास के कई क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को अनाज उपलब्ध कराती है। इस बार पोर्टेबिलिटी सुविधा बंद होने के कारण उपभोक्ताओं को केवल अपनी निर्धारित (पंजीकृत) दुकान से ही राशन लेना पड़ रहा है।

    पहले उपभोक्ता किसी भी नजदीकी उचित मूल्य दुकान से राशन प्राप्त कर सकते थे, लेकिन अब यह सुविधा बंद होने से एक ही दुकान पर दबाव बढ़ गया है। इसके चलते भीड़ और लंबी कतारों की स्थिति लगातार बन रही है।

  • बिहार में मिड-डे मील खाने से 60 से ज्यादा बच्चे बीमार, स्कूल में मची अफरा-तफरी

    बिहार में मिड-डे मील खाने से 60 से ज्यादा बच्चे बीमार, स्कूल में मची अफरा-तफरी



    नालंदा । Bihar के नालंदा जिले में मिड-डे मील खाने के बाद 60 से ज्यादा स्कूली बच्चों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। यह मामला नगरनौसा प्रखंड के मध्य विद्यालय कैला का है, जहां बुधवार को बच्चों को दोपहर के भोजन में चावल और छोले परोसे गए थे। खाना खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों को तेज पेट दर्द, उल्टी, दस्त और चक्कर आने लगे। कई बच्चे स्कूल परिसर में ही बेहोश होकर गिर पड़े, जिससे स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    स्थिति गंभीर होते ही स्कूल प्रशासन ने आनन-फानन में सभी बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगरनौसा और चंडी रेफरल अस्पताल पहुंचाया। एक छात्रा की हालत ज्यादा खराब होने पर उसे बिहारशरीफ सदर अस्पताल रेफर किया गया। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक अस्पताल पहुंच गए। बच्चों की हालत देखकर कई परिजन रोते-बिलखते नजर आए।

    बीमार बच्चों में अमृता कुमारी, अंकुश कुमार, अनुराधा कुमारी, तमन्ना, निशु, मुस्कान, कृति, ऋषि, आरती, सिमरन, खुशी, आदित्य, प्रियांशु, प्रिय, दीपक, प्रीति, डॉली, सौरभ और किरण समेत कई छात्र-छात्राएं शामिल हैं।

    छात्राओं ने आरोप लगाया कि मिड-डे मील में परोसी गई सब्जी में दवा जैसी संदिग्ध गोली दिखाई दी थी। बच्चों का कहना है कि रोज की तरह इस बार भोजन परोसने से पहले शिक्षकों ने टेस्टिंग भी नहीं की थी। हालांकि, बच्चों की हालत बिगड़ने के बाद एक शिक्षक अमरेश ने खुद खाना चखकर जांच करने की कोशिश की, लेकिन कुछ देर बाद उनकी भी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें भी अस्पताल ले जाना पड़ा।

    घटना के बाद मिड-डे मील सप्लाई करने वाली संस्था Ekta Foundation पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों ने संस्था पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया गया है।

    स्कूल की प्रधानाध्यापिका रजनी कुमारी ने बताया कि भोजन शुरू होने के कुछ मिनट बाद ही बच्चों की तबीयत खराब होने लगी थी। हालात बिगड़ते देख तुरंत स्वास्थ्य विभाग और अधिकारियों को सूचना दी गई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • नशीली दवा बिक्री के विरोध में उबाल: बुरहानपुर में 500 मेडिकल स्टोर्स बंद

    नशीली दवा बिक्री के विरोध में उबाल: बुरहानपुर में 500 मेडिकल स्टोर्स बंद


    बुरहानपुर/मध्यप्रदेश। जिले में ऑनलाइन दवा बिक्री और कथित नशीली दवाओं की अवैध सप्लाई के विरोध में बुधवार को बड़ा आंदोलन देखने को मिला। ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर बुरहानपुर जिले में 500 से अधिक मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे, जिससे आम जनता को दवाइयों के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    सुबह से ही कई क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर बंद रहे और मरीज दवा के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। दोपहर होते-होते बड़ी संख्या में दवा विक्रेता बाइक रैली के रूप में एकजुट होकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने एसडीएम अजमेर सिंह गौड़ को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

    दवा विक्रेताओं ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए दवाओं की अनियंत्रित बिक्री हो रही है, जिससे न केवल छोटे व्यापारियों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है, बल्कि जन स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। एसोसिएशन के सचिव शरद जैन ने बताया कि जिले की सभी प्रमुख दवा दुकानें बंद रहीं और यह विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।

    ज्ञापन में केमिस्टों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू जीएसआर 817(E) और जीएसआर 220(E) नियमों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इनका दुरुपयोग हो रहा है। उनका कहना है कि इन प्रावधानों के चलते ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवाओं की निगरानी कमजोर पड़ रही है और इसी का फायदा उठाकर कुछ अवैध गतिविधियां बढ़ रही हैं।

    केमिस्टों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि नशीली दवाओं की अवैध बिक्री और गर्भपात किट (अबॉर्शन किट) की अनियंत्रित सप्लाई बढ़ रही है, जिससे युवा वर्ग में नशे की लत और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऑनलाइन दवा सप्लाई पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और मौजूदा नियमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए।

    इसी तरह नेपानगर क्षेत्र में भी अखिल भारतीय दवा विक्रेता संघ के आह्वान पर मेडिकल स्टोर बंद रहे। वहां के दवा विक्रेताओं ने भी एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग की।

    नेपा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद चौहान ने कहा कि बिना नियंत्रण के हो रही ऑनलाइन दवा बिक्री से मरीजों को गलत या कम गुणवत्ता वाली दवाएं मिल रही हैं, जिससे इलाज पर विपरीत असर पड़ रहा है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।

    हालांकि, इस पूरे आंदोलन का सबसे बड़ा असर आम मरीजों पर पड़ा, जिन्हें दिनभर दवाओं के लिए परेशान होना पड़ा। ग्रामीण और जरूरतमंद मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आए।

  • रायबरेली में राहुल गांधी का तीखा हमला, संविधान को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप

    रायबरेली में राहुल गांधी का तीखा हमला, संविधान को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप

    नई दिल्ली। रायबरेली के लोधवारी में आयोजित बहुजन स्वाभिमान सभा और अन्य कार्यक्रमों में Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार, Bharatiya Janata Party और Rashtriya Swayamsevak Sangh पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने संविधान को देश की आत्मा बताते हुए आरोप लगाया कि इसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है। राहुल गांधी ने संविधान की प्रति हाथ में लेकर कहा कि यह केवल किताब नहीं बल्कि देश के महान नेताओं के त्याग और बलिदान का प्रतीक है।

    राहुल गांधी ने दावा किया कि देश में आर्थिक संकट गहराने वाला है और आने वाले समय में आम जनता पर महंगाई का भारी असर पड़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर देश के साथ धोखा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि नीतियों के कारण किसानों और गरीबों की स्थिति प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है और विश्वविद्यालयों तक में प्रभाव देखा जा रहा है।

    सभा के दौरान राहुल गांधी ने सामाजिक न्याय और पिछड़ों के अधिकारों की बात करते हुए वीरा पासी जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की ताकत संविधान है और इसे बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। अपने संबोधन में उन्होंने उद्योगपतियों का जिक्र करते हुए किसानों की समस्याओं पर सरकार की अनदेखी का आरोप लगाया।

    एक अन्य कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कांग्रेस के दिवंगत नेता योगेंद्र मिश्र के परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की और पार्टी की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस परिवार हर परिस्थिति में अपने साथियों और उनके परिवारों के साथ खड़ी है।

     राहुल गांधी ने अमेठी से अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए कार्यकर्ताओं का आभार भी व्यक्त किया और भविष्य में फिर आने की बात कही।

  • आजीविका पर संकट का आरोप: ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का प्रदर्शन

    आजीविका पर संकट का आरोप: ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का प्रदर्शन


    मध्यप्रदेश। देशभर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में केमिस्ट संगठनों के आह्वान पर बुधवार को कई जिलों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यप्रदेश के झाबुआ और आलीराजपुर जिलों में देखने को मिला, जहां सुबह से ही दवा दुकानों के शटर गिरे रहे और मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा।

    झाबुआ जिले के झाबुआ, थांदला और पेटलावद सहित कई क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। केमिस्टों का कहना है कि ई-फार्मेसी के बढ़ते चलन से छोटे दवा व्यापारियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना पर्याप्त निगरानी के दवाओं की बिक्री हो रही है, जिससे न सिर्फ कारोबार प्रभावित हो रहा है बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    झाबुआ में शिवम मेडिकल के संचालक महेंद्र प्रताप सिंह राठौर ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण स्थानीय दुकानदारों की आजीविका पर गंभीर संकट आ गया है। उन्होंने सरकार से इस पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

    वहीं प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की है। जिला प्रशासन ने कुछ सरकारी और निजी अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोरों को चालू रखने का निर्णय लिया, ताकि जरूरी दवाइयों की उपलब्धता बनी रहे। इनमें जिला अस्पताल परिसर स्थित जन औषधि केंद्र सहित कई निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर शामिल रहे।

    इसी तरह आलीराजपुर जिले में भी मेडिकल स्टोर बंद रहे। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर हुई इस हड़ताल का असर पूरे जिले में दिखा। सुबह से ही मरीज और उनके परिजन दवाइयों के लिए परेशान नजर आए। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग पर्चे लेकर बंद दुकानों के बाहर खड़े रहे, लेकिन उन्हें दवा नहीं मिल सकी।

    ग्राम बड़ा गुड़ा निवासी राजू ने बताया कि वे इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन दवा न मिलने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इसी तरह बुजुर्ग मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के परिजनों को भी सबसे ज्यादा कठिनाई का सामना करना पड़ा।

    दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे मेडिकल स्टोर बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। उनका आरोप है कि यह व्यवस्था बिना पर्याप्त नियंत्रण के चल रही है, जो आने वाले समय में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

    हालांकि, दिनभर की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी आम मरीजों और ग्रामीण परिवारों को झेलनी पड़ी। कई लोगों का कहना है कि इस तरह के विरोध प्रदर्शनों का सीधा असर जरूरतमंद मरीजों पर पड़ता है, जिन्हें समय पर दवा नहीं मिल पाती।