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  • मध्य प्रदेश में झमाझम बारिश का दौर जारी, 9 जिलों में अति भारी वर्षा की चेतावनी, कई रास्ते बंद

    मध्य प्रदेश में झमाझम बारिश का दौर जारी, 9 जिलों में अति भारी वर्षा की चेतावनी, कई रास्ते बंद


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में मानसून लगातार सक्रिय बना हुआ है और प्रदेश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश का सिलसिला जारी है। रविवार सुबह छिंदवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई जबकि दोपहर बाद उमरिया में तेज वर्षा दर्ज की गई। श्योपुर में महज आधे घंटे की बारिश से कई दुकानों में पानी भर गया और सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया। राजधानी भोपाल सहित इंदौर और अन्य शहरों में भी दिनभर बादल छाए रहे।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के आधे हिस्से में अति भारी और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। रतलाम धार बड़वानी शाजापुर बैतूल पांढुर्णा मंडला बालाघाट और डिंडौरी जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में अत्यधिक वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

    इसके अलावा नीमच मंदसौर आगर मालवा उज्जैन इंदौर खरगोन देवास खंडवा बुरहानपुर हरदा सीहोर नर्मदापुरम रायसेन छिंदवाड़ा सिवनी अनूपपुर कटनी पन्ना झाबुआ और अलीराजपुर समेत 20 से अधिक जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे के दौरान कई स्थानों पर चार से आठ इंच तक बारिश हो सकती है।

    ग्वालियर श्योपुर मुरैना भिंड दतिया शिवपुरी गुना अशोकनगर राजगढ़ विदिशा भोपाल सागर नरसिंहपुर जबलपुर उमरिया शहडोल रीवा मऊगंज सीधी सिंगरौली सतना छतरपुर टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है।

    बीते 24 घंटों के दौरान भी प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में बारिश दर्ज की गई। मंडला में सबसे अधिक करीब सवा दो इंच वर्षा रिकॉर्ड हुई जबकि बालाघाट में डेढ़ इंच बारिश हुई। पचमढ़ी में सवा इंच और जबलपुर में लगभग पौन इंच बारिश दर्ज की गई। राजगढ़ इंदौर खंडवा बैतूल दतिया और खरगोन में भी आधा इंच के आसपास वर्षा हुई। इसके अलावा भोपाल धार गुना नर्मदापुरम रायसेन रतलाम छिंदवाड़ा दमोह नरसिंहपुर सागर सिवनी श्योपुर शाजापुर देवास सीहोर विदिशा पन्ना और हरदा सहित कई जिलों में रुक रुककर बारिश होती रही।

    लगातार हो रही बारिश का असर जनजीवन पर भी दिखाई देने लगा है। हरदा जिले में तेज बारिश के कारण कई गांवों का संपर्क टूट गया। मांदला के पास कालीमाचक नदी का जलस्तर बढ़ने से नर्मदापुरम खंडवा हाईवे पर यातायात बाधित हो गया। वहीं खंडवा जिले के गरबड़ी गांव में नाले में बाढ़ आने से खिरकिया रोड बंद हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

    सीहोर जिले के आष्टा क्षेत्र के बापचा दोनिया गांव में दर्दनाक हादसे में दो मासूम बच्चों की डूबने से मौत हो गई। लगातार बारिश और उफनाते नदी नालों को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने की अपील की है। मौसम विभाग के अनुसार अगले चार दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

  • इंदौर में नवविवाहित युवक का संदिग्ध सुसाइड, पति-पत्नी के विवाद की जांच में जुटी पुलिस

    इंदौर में नवविवाहित युवक का संदिग्ध सुसाइड, पति-पत्नी के विवाद की जांच में जुटी पुलिस


    इंदौर । इंदौर के मल्हारगंज थाना क्षेत्र में एक 20 वर्षीय युवक द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। युवक ने करीब दो महीने पहले ही प्रेम विवाह किया था। शुरुआती जांच में पति-पत्नी के बीच घरेलू विवाद की बात सामने आई है, जबकि मृतक के परिजनों ने पूरे घटनाक्रम पर संदेह जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान हुजुरगंज निवासी राजू पुत्र भागीरथ वर्मा के रूप में हुई है। शनिवार शाम परिजनों को सूचना मिली कि राजू ने अपने घर में फांसी लगा ली है। सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।

    परिजनों ने बताया कि राजू ने करीब दो महीने पहले प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद दोनों परिवार से अलग रहकर अपना वैवाहिक जीवन बिता रहे थे। राजू एक प्रिंटिंग प्रेस में नौकरी करता था और परिवार के अनुसार सामान्य जीवन जी रहा था। हालांकि शादी के बाद पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होने की बात सामने आई है। परिवार के लोग कई बार दोनों के बीच समझौता कराने की कोशिश भी कर चुके थे।

    मृतक के भाई कुणाल वर्मा ने इस घटना को लेकर संदेह व्यक्त किया है। उनका कहना है कि पूरे मामले की गहराई से और निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए ताकि मौत की वास्तविक वजह सामने आ सके। परिजनों का कहना है कि केवल आत्महत्या मानकर मामले को बंद नहीं किया जाना चाहिए और सभी परिस्थितियों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

    पुलिस के मुताबिक घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। ऐसे में आत्महत्या के पीछे की वजह का पता लगाने के लिए परिजनों पत्नी और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है ताकि घटना से जुड़ी हर जानकारी जुटाई जा सके।

    मल्हारगंज थाना पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद मौत के कारणों को लेकर अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • 5,000 रुपए से 40,000 करोड़ तक का सफर: कैसे राकेश झुनझुनवाला बने भारतीय शेयर बाजार के 'बिग बुल' और निवेश की दुनिया के सबसे भरोसेमंद नाम

    5,000 रुपए से 40,000 करोड़ तक का सफर: कैसे राकेश झुनझुनवाला बने भारतीय शेयर बाजार के 'बिग बुल' और निवेश की दुनिया के सबसे भरोसेमंद नाम

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में राकेश झुनझुनवाला का नाम उन चुनिंदा निवेशकों में शामिल है, जिन्होंने अपनी दूरदर्शी सोच, मजबूत रणनीति और धैर्य के बल पर निवेश की दुनिया में असाधारण सफलता हासिल की। बेहद सीमित पूंजी से शुरुआत करने वाले झुनझुनवाला ने समय के साथ ऐसा निवेश साम्राज्य खड़ा किया, जिसने उन्हें देश का ‘बिग बुल’ और निवेश जगत का सबसे चर्चित चेहरा बना दिया। उनकी निवेश शैली आज भी नए और अनुभवी निवेशकों के लिए प्रेरणा का प्रमुख स्रोत मानी जाती है।

    5 जुलाई 1960 को मुंबई में जन्मे राकेश झुनझुनवाला का शुरुआती जीवन सामान्य रहा। उनके पिता आयकर विभाग में अधिकारी थे और घर में अक्सर अर्थव्यवस्था तथा शेयर बाजार से जुड़ी चर्चाएं होती थीं। इन्हीं चर्चाओं ने उनके भीतर पूंजी बाजार को समझने की रुचि विकसित की। उन्होंने कॉमर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट की उपाधि हासिल की, लेकिन उनका लक्ष्य केवल पेशेवर जीवन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने निवेश को अपने करियर का आधार बनाया।

    वर्ष 1985 में उन्होंने लगभग 5,000 रुपए की पूंजी के साथ शेयर बाजार में कदम रखा। शुरुआती दौर में परिवार और परिचितों से जुटाई गई पूंजी के सहारे उन्होंने कंपनियों का गहराई से अध्ययन करते हुए निवेश शुरू किया। उनकी पहली बड़ी सफलता टाटा टी के शेयरों में निवेश से मिली, जहां कुछ ही समय में उन्हें उल्लेखनीय लाभ हुआ। इस सफलता ने उन्हें बाजार में नई पहचान दिलाई और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी दिया।

    इसके बाद उन्होंने कई ऐसी कंपनियों में निवेश किया, जिन्हें उस समय बाजार में अधिक महत्व नहीं दिया जा रहा था। टाटा पावर, सेसा गोवा और प्राज इंडस्ट्रीज जैसे निवेशों ने उन्हें शानदार रिटर्न दिलाया। हालांकि उनके करियर का सबसे सफल निवेश टाइटन कंपनी में माना जाता है। जब अधिकांश निवेशक इस कंपनी को लेकर आशंकित थे, तब उन्होंने इसमें भरोसा जताया। आने वाले वर्षों में टाइटन के जबरदस्त प्रदर्शन ने उनकी संपत्ति में हजारों करोड़ रुपए का इजाफा किया और यह उनके पोर्टफोलियो का सबसे मूल्यवान निवेश बन गया।

    राकेश झुनझुनवाला केवल सफल निवेशक ही नहीं थे, बल्कि एक सक्रिय उद्यमी भी थे। अपनी निवेश कंपनी के माध्यम से उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में निवेश किया और कई कंपनियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षा, मीडिया और विमानन जैसे क्षेत्रों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही। वर्ष 2022 में उन्होंने विमानन क्षेत्र में प्रवेश करते हुए आकासा एयर की शुरुआत की, जिसे उनके सबसे महत्वाकांक्षी व्यावसायिक कदमों में गिना गया।

    14 अगस्त 2022 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनका निवेश दर्शन आज भी उतना ही प्रासंगिक माना जाता है। उनका विश्वास था कि शेयर बाजार में सफलता किसी एक दिन का परिणाम नहीं होती, बल्कि सही कंपनियों का चयन, लगातार अध्ययन और लंबी अवधि तक धैर्य बनाए रखने से मिलती है। वे हमेशा कहते थे कि बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है और निवेशकों को छोटी अवधि की अस्थिरता से घबराने के बजाय मजबूत कंपनियों पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।

    झुनझुनवाला का मानना था कि किसी भी निवेश से पहले कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति, प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं का गंभीर विश्लेषण जरूरी है। वे भीड़ का अनुसरण करने के बजाय स्वतंत्र रिसर्च पर भरोसा करने और विविध क्षेत्रों में निवेश कर जोखिम को संतुलित रखने की सलाह देते थे। उनकी यही सोच और अनुशासित निवेश रणनीति उन्हें भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में हमेशा एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करती रहेगी।

  • भारत-यूके व्यापक व्यापार समझौते के नियम जारी, 15 जुलाई से शुरू होगा नया कारोबारी दौर, कंपनियों और निर्यातकों को मिलेंगी नई सुविधाएं

    भारत-यूके व्यापक व्यापार समझौते के नियम जारी, 15 जुलाई से शुरू होगा नया कारोबारी दौर, कंपनियों और निर्यातकों को मिलेंगी नई सुविधाएं


    नई दिल्ली। भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुए व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने इससे जुड़े नियमों को अधिसूचित कर दिया है। यह नया ढांचा 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा और इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों के लिए नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलेगी।

    वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, समझौते के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि किसी उत्पाद को भारत या यूनाइटेड किंगडम में निर्मित तभी माना जाएगा, जब वह पूरी तरह संबंधित देश में तैयार किया गया हो, स्थानीय सामग्री से निर्मित हो या फिर निर्धारित उत्पाद-विशिष्ट मूल नियमों का पालन करते हुए तैयार किया गया हो। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यापारिक रियायतों का लाभ केवल पात्र उत्पादों को ही प्राप्त हो।

    केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा जारी नियमों में उन शर्तों का भी विस्तृत उल्लेख किया गया है, जिनके आधार पर किसी उत्पाद को टैरिफ रियायतों के लिए योग्य माना जाएगा। साथ ही आयातकों और निर्यातकों के लिए आवश्यक अनुपालन प्रक्रियाएं भी निर्धारित की गई हैं। इन नियमों के लागू होने से सीमा शुल्क प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

    नए प्रावधानों के तहत दोनों देशों के बीच निर्मित उत्पादों के लिए ‘क्यूमुलेशन’ यानी मिला-जुला उत्पादन व्यवस्था को भी मान्यता दी गई है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी उत्पाद के निर्माण में दोनों साझेदार देशों की सामग्री या उत्पादन प्रक्रिया का उपयोग किया गया है, तो निर्धारित शर्तों के तहत उसे मूल उत्पाद का दर्जा दिया जा सकेगा। इससे दोनों देशों की कंपनियों के बीच औद्योगिक सहयोग और संयुक्त विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल साधारण रीपैकेजिंग, रीलेबलिंग, धुलाई, छंटाई, पॉलिशिंग, साधारण असेंबली अथवा अन्य सामान्य प्रक्रियाओं के आधार पर किसी उत्पाद को मूल उत्पाद का दर्जा नहीं मिलेगा। सीमा शुल्क अधिकारियों को ऐसे मामलों की जांच करने तथा नियमों का पालन नहीं करने वाले उत्पादों को व्यापारिक रियायतों से वंचित रखने का अधिकार भी दिया गया है। इससे समझौते के दुरुपयोग की संभावना को कम करने का प्रयास किया गया है।

    इन नियमों में उन आयातकों को भी राहत प्रदान की गई है जो आयात के समय किसी कारणवश टैरिफ लाभ का दावा नहीं कर पाए थे। निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऐसे मामलों में बाद में भी पात्रता के आधार पर रियायत प्राप्त करने का अवसर उपलब्ध रहेगा। इससे व्यापारिक समुदाय को अधिक लचीलापन और सुविधा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूके सीईटीए केवल व्यापारिक शुल्कों में राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग, नवाचार, विनिर्माण और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा करेगा। दोनों देशों के उद्योगों के बीच साझेदारी बढ़ने से निर्यात क्षमता मजबूत होगी और भारतीय कंपनियों को विकसित अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी। 15 जुलाई से नियम लागू होने के साथ ही भारत और यूनाइटेड किंगडम के आर्थिक संबंधों में एक नए चरण की शुरुआत होने की उम्मीद है।

  • इंदौर में सनसनी, CHMO कार्यालय के पीछे मिला युवक का शव, सिर पर पत्थर से हमले के निशान

    इंदौर में सनसनी, CHMO कार्यालय के पीछे मिला युवक का शव, सिर पर पत्थर से हमले के निशान


    इंदौर । इंदौर के सेंट्रल कोतवाली थाना क्षेत्र में रविवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के पीछे एक अज्ञात युवक का शव बरामद हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में युवक के सिर पर गंभीर चोट के निशान मिलने के बाद पुलिस हत्या की आशंका के तहत मामले की जांच कर रही है।

    घटना पालिका प्लाजा के पीछे स्थित मंदिर के ओटले की है जहां सुबह स्थानीय लोगों ने करीब 45 वर्षीय एक व्यक्ति को मृत अवस्था में पड़ा देखा। लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मृतक के सिर पर पत्थर जैसी किसी भारी वस्तु से वार किए जाने के स्पष्ट निशान मिले हैं। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि युवक की कहीं और हत्या करने के बाद शव को इस स्थान पर लाकर फेंका गया हो सकता है। हालांकि पुलिस फिलहाल सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।

    मृतक की अब तक पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस आसपास के थाना क्षेत्रों से गुमशुदा व्यक्तियों की जानकारी जुटा रही है और मृतक की शिनाख्त कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। पहचान होने के बाद ही हत्या के पीछे की वजह और मृतक के संबंधों के बारे में अहम जानकारी सामने आ सकेगी।

    घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी पुलिस ने खंगालना शुरू कर दिया है। जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि देर रात या तड़के किसी संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधि कैमरों में कैद हुई है या नहीं। पुलिस को उम्मीद है कि फुटेज से आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

    शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारण और घटना के समय का पता चल सकेगा। इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस हत्या की आशंका को ध्यान में रखते हुए तकनीकी साक्ष्यों और घटनास्थल से मिले सुरागों के आधार पर मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।

  • स्वास्थ्य क्षेत्र में अदाणी ग्रुप का बड़ा निवेश, न्यू टाउन में 2,000 बेड के मेगा हॉस्पिटल की तैयारी, 1,000 बेड आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए होंगे समर्पित

    स्वास्थ्य क्षेत्र में अदाणी ग्रुप का बड़ा निवेश, न्यू टाउन में 2,000 बेड के मेगा हॉस्पिटल की तैयारी, 1,000 बेड आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए होंगे समर्पित

    नई दिल्ली । देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश को नई दिशा देने की दिशा में अदाणी ग्रुप ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के न्यू टाउन क्षेत्र में 2,000 बेड क्षमता वाले अत्याधुनिक अस्पताल की स्थापना की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह होगी कि अस्पताल के कुल 2,000 बेड में से 1,000 बेड आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद मरीजों के निःशुल्क उपचार के लिए आरक्षित रखे जाएंगे। वहीं शेष 1,000 बेड का उपयोग व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए किया जाएगा।

    इस परियोजना को राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस यह अस्पताल न्यू टाउन और आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों से आने वाले मरीजों को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बड़े स्तर पर उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं और आधुनिक तकनीक से सुसज्जित स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण यह संस्थान क्षेत्र के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में शामिल हो सकता है।

    गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए आधी क्षमता आरक्षित रखने की योजना इस परियोजना को सामाजिक दृष्टि से भी विशेष बनाती है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही निजी और सामाजिक स्वास्थ्य सेवाओं के संतुलित मॉडल के रूप में यह परियोजना भविष्य की स्वास्थ्य योजनाओं के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।

    अदाणी ग्रुप पिछले कुछ वर्षों से स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी सामाजिक भागीदारी का लगातार विस्तार कर रहा है। इसी क्रम में समूह ने हाल ही में बिहार में अखंड ज्योति हॉस्पिटल और अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से आंखों के उपचार और अनुसंधान को समर्पित एक विशेष केंद्र स्थापित करने की पहल की थी। इस संस्थान का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक सुलभ और किफायती नेत्र चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना है, ताकि गुणवत्तापूर्ण उपचार अधिक से अधिक लोगों तक उपलब्ध हो सके।

    इसी पहल के अंतर्गत नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञों, प्रशिक्षु चिकित्सकों और महिला स्वास्थ्यकर्मियों को आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान करने की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य भविष्य में देशभर में नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपचार के साथ-साथ चिकित्सा प्रशिक्षण पर दिया जा रहा यह जोर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।

    अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भी स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा केवल इलाज तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह लोगों के जीवन में विश्वास, सम्मान और नई उम्मीद लौटाने का माध्यम भी बनती है। समूह का मानना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश समाज के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

    इससे पहले भी समूह विभिन्न सामाजिक स्वास्थ्य परियोजनाओं के माध्यम से सार्वजनिक चिकित्सा ढांचे को सहयोग देता रहा है। राजधानी दिल्ली में गुर्दा रोग उपचार सुविधाओं के विस्तार सहित कई स्वास्थ्य संबंधी पहलों में उसकी भागीदारी रही है। कोलकाता में प्रस्तावित यह नया अस्पताल भी उसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करते हुए जरूरतमंद वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद राज्य के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलने के साथ हजारों मरीजों को उन्नत और सुलभ उपचार की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

  • ई20 पेट्रोल को लेकर फैली अफवाहों पर केंद्र का बड़ा स्पष्टीकरण, भूटान को निर्यात के दावे खारिज, सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की अपील

    ई20 पेट्रोल को लेकर फैली अफवाहों पर केंद्र का बड़ा स्पष्टीकरण, भूटान को निर्यात के दावे खारिज, सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की अपील


    नई दिल्ली। भारत और भूटान के बीच ई20 पेट्रोल के निर्यात को लेकर सामने आई चर्चाओं पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट और आधिकारिक रुख अपनाते हुए उन सभी दावों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि भूटान ने भारत से ई20 पेट्रोल आयात करने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। सरकार ने साफ किया कि इस तरह का कोई प्रस्ताव भूटान को भेजा ही नहीं गया था, इसलिए उसे ठुकराने का सवाल ही नहीं उठता। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों से सावधान रहने की अपील भी की गई है।

    सरकार के अनुसार, भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से भूटान को ई20 पेट्रोल निर्यात करने का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया गया है। ऐसे में यह दावा पूरी तरह तथ्यहीन है कि पड़ोसी देश ने भारत के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। केंद्र ने कहा कि इस प्रकार की अपुष्ट खबरें लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं और वास्तविक तथ्यों से उनका कोई संबंध नहीं है।

    हाल के दिनों में कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि भूटान ने ई20 पेट्रोल को अपनाने से इनकार कर दिया है। इन रिपोर्ट्स में स्टोरेज से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों को इसकी वजह बताया गया था। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसा कोई आधिकारिक संवाद या प्रस्ताव ही नहीं हुआ, इसलिए इन दावों को सही नहीं माना जा सकता।

    सरकार ने इस अवसर पर ई20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अन्य भ्रामक जानकारियों पर भी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय का कहना है कि ई20 ईंधन को लेकर यह प्रचार किया जा रहा है कि इससे वाहन खराब हो सकते हैं, इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, प्रदूषण बढ़ता है या एथेनॉल उत्पादन में अत्यधिक पानी की खपत होती है। सरकार ने इन सभी दावों को वैज्ञानिक तथ्यों से परे और पूरी तरह निराधार बताया है।

    केंद्र के अनुसार, ई20 ईंधन पर देश के प्रमुख ऑटोमोटिव अनुसंधान संस्थानों द्वारा व्यापक तकनीकी अध्ययन किए जा चुके हैं। इन अध्ययनों में कहीं भी यह निष्कर्ष सामने नहीं आया कि ई20 पेट्रोल वाहनों के लिए हानिकारक है। सरकार का कहना है कि तकनीकी परीक्षणों और विशेषज्ञों की रिपोर्टों के आधार पर ही देश में चरणबद्ध तरीके से एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ई20 पेट्रोल का उद्देश्य केवल पारंपरिक पेट्रोल पर निर्भरता कम करना ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना भी है। एथेनॉल जैविक स्रोतों से तैयार होने वाला ईंधन है, जिसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिलती है। इससे वातावरण में शुद्ध कार्बन उत्सर्जन का स्तर घटाने की दिशा में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    केंद्र सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि ई20 पेट्रोल या उससे जुड़े किसी भी विषय पर केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के प्रसारित होने वाली खबरें भ्रम पैदा कर सकती हैं और सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए किसी भी जानकारी को सही मानने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की पुष्टि करना आवश्यक है। सरकार ने दोहराया कि ई20 ईंधन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम का वास्तविक तथ्यों और वैज्ञानिक अध्ययनों से कोई संबंध नहीं है तथा इस संबंध में सभी निर्णय स्थापित तकनीकी मानकों और परीक्षणों के आधार पर ही लिए जा रहे हैं।

  • ईपीएफओ ने यूएएन से जुड़े नियमों में किया बड़ा बदलाव, अब पोर्टल पर नहीं मिलेगी एक्टिवेशन की सुविधा, पीएफ खाताधारकों के लिए बदली पूरी प्रक्रिया

    ईपीएफओ ने यूएएन से जुड़े नियमों में किया बड़ा बदलाव, अब पोर्टल पर नहीं मिलेगी एक्टिवेशन की सुविधा, पीएफ खाताधारकों के लिए बदली पूरी प्रक्रिया

    नई दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि से जुड़े करोड़ों खाताधारकों के लिए यूएएन सेवाओं की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए गए हैं। यूनिफाइड मेंबर पोर्टल के तकनीकी उन्नयन के बाद अब यूएएन एक्टिवेशन और नया यूएएन जारी करने की सुविधा पहले की तरह पोर्टल पर उपलब्ध नहीं रहेगी। इन सेवाओं को नई डिजिटल व्यवस्था के तहत स्थानांतरित किया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, तेज और तकनीक आधारित बनाई जा सके।

    नए बदलाव के तहत यूएएन को सक्रिय करने और नया यूएएन प्राप्त करने के लिए आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य पहचान सत्यापन को अधिक मजबूत बनाना और फर्जीवाड़े की संभावनाओं को कम करना है। नई प्रणाली के लागू होने के बाद सदस्यों को अपनी पहचान की पुष्टि डिजिटल माध्यम से करनी होगी, जिसके बाद ही संबंधित सेवा उपलब्ध होगी।

    तकनीकी अपग्रेड के साथ यूनिफाइड मेंबर पोर्टल के इंटरफेस और प्रोसेसिंग सिस्टम में भी सुधार किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार यूएएन एक्टिवेशन, नया यूएएन जारी करने और पहली बार यूएएन प्राप्त करने जैसी सेवाओं की प्रक्रिया पूरी तरह नई डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संचालित होगी। इससे डेटाबेस का बेहतर एकीकरण होगा और सेवाओं की गति तथा सुरक्षा दोनों में सुधार आने की उम्मीद है।

    जिन कर्मचारियों का यूएएन अभी तक सक्रिय नहीं हुआ है, उन्हें नई प्रक्रिया के तहत अपनी पहचान का डिजिटल सत्यापन कराना होगा। वहीं जिन कर्मचारियों को पहली बार यूएएन जारी किया जाना है, उनके लिए भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सफल सत्यापन के बाद नया यूएएन संबंधित कर्मचारी के भविष्य निधि खाते से जोड़ दिया जाएगा, जिससे आगे की सभी ऑनलाइन सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।

    संगठन ने यूएएन भूल जाने वाले सदस्यों के लिए रिकवरी प्रक्रिया को भी पहले की तुलना में अधिक सरल बनाया है। अब पंजीकृत मोबाइल नंबर के सत्यापन, आवश्यक व्यक्तिगत जानकारी और पहचान संबंधी दस्तावेजों की पुष्टि के बाद सदस्य अपना यूएएन दोबारा प्राप्त कर सकेंगे। इससे ऐसे कर्मचारियों को राहत मिलेगी जिन्हें लंबे समय बाद अपने खाते की जानकारी प्राप्त करनी होती है।

    हालांकि यूएएन से जुड़ी अधिकांश सेवाओं की प्रक्रिया नई व्यवस्था के अंतर्गत स्थानांतरित कर दी गई है, लेकिन ऑनलाइन डेथ क्लेम दाखिल करने की सुविधा पहले की तरह यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। इसके लिए आधार से जुड़े मोबाइल नंबर, बैंक खाते का विवरण, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में अपलोड करने होंगे। दस्तावेजों का आकार और फाइल प्रारूप भी तय मानकों के अनुरूप होना आवश्यक होगा।

    तकनीकी उन्नयन के बाद शुरुआती दिनों में ऑनलाइन क्लेम और अन्य अनुरोधों के निपटारे में सामान्य से थोड़ा अधिक समय लग सकता है। अतिरिक्त सत्यापन और सिस्टम जांच के कारण यह स्थिति अस्थायी मानी जा रही है। सदस्यों को सलाह दी गई है कि एक ही अनुरोध को बार-बार जमा करने या अनावश्यक रूप से बार-बार लॉगिन करने से बचें, ताकि सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और सभी उपयोगकर्ताओं को सुचारु सेवाएं मिल सकें।

    नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य भविष्य निधि सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना है। फेस ऑथेंटिकेशन आधारित सत्यापन प्रणाली लागू होने से पहचान संबंधी धोखाधड़ी की संभावना कम होगी और खाताधारकों को भविष्य में तेज, विश्वसनीय और अधिक सुरक्षित ऑनलाइन सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

  • भोपाल कार लूट केस में बड़ा खुलासा, FIR पर उठे सवाल, वारदात के दो घंटे बाद साथ बैठे मिले आरोपी और फरियादी

    भोपाल कार लूट केस में बड़ा खुलासा, FIR पर उठे सवाल, वारदात के दो घंटे बाद साथ बैठे मिले आरोपी और फरियादी


    भोपाल । भोपाल के कोहेफिजा थाना क्षेत्र में दर्ज कार लूट के चर्चित मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। शुरुआती तौर पर लूट की वारदात के रूप में दर्ज इस मामले में पुलिस जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं जिन्होंने पूरे घटनाक्रम पर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस को फरियादी और मुख्य आरोपी के बीच पैसों के लेनदेन से जुड़ी चैट मिली है। इसके साथ ही एक ऐसा सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है जिसमें एफआईआर में दर्ज लूट के समय से करीब दो घंटे बाद आरोपी और फरियादी एक ही ढाबे पर साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं।

    पुलिस के अनुसार पंचवटी कॉलोनी निवासी 27 वर्षीय सौरव सीतलानी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके परिचित आदित्य शर्मा उर्फ छोटू ने उसे परवलिया स्थित एक ढाबे पर बुलाया था। वहां आदित्य के साथ बाबर उर्फ मंडी मुईन और बुशरान भी मौजूद थे। खाना खाने के बाद सभी लोग सौरव की टाटा टियागो कार से भोपाल लौट रहे थे। आरोप है कि मनुआभान टेकरी के पास आदित्य ने दोस्त से मिलने का बहाना बनाकर कार रुकवाई और इसके बाद चारों ने मारपीट कर कार लूट ली।

    हालांकि जांच के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने इस कहानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फुटेज के अनुसार लूट की कथित वारदात के लगभग दो घंटे बाद सभी लोग परवलिया रोड स्थित उसी ढाबे पर एक साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि सीसीटीवी में दर्ज समय सही है या किसी तकनीकी कारण से उसमें गड़बड़ी है। इसके लिए ढाबा संचालक से भी पूछताछ की जाएगी।

    जांच में फरियादी और मुख्य आरोपी के बीच हुई चैट भी पुलिस के हाथ लगी है जिसमें पैसों के लेनदेन का जिक्र है। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि मामला केवल कार लूट का नहीं बल्कि आर्थिक विवाद से भी जुड़ा हो सकता है। पुलिस अब इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है।

    जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। पुलिस के अनुसार फरियादी पहले एक मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा संचालन से जुड़ा रहा है और इस मामले में उसे राजस्थान पुलिस पहले गिरफ्तार भी कर चुकी है। पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि आरोपी भी उसी नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। इसी वजह से अब पूरे मामले में सट्टा कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस ने दो आरोपियों बुशरान और मुईन को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है जबकि मुख्य आरोपी आदित्य समेत अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। लूटी गई टाटा टियागो कार भी अभी तक बरामद नहीं हो सकी है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों मोबाइल चैट सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।

    कोहेफिजा थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह ठाकुर का कहना है कि फरियादी का पुराना रिकॉर्ड सामने आया है लेकिन शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि उसके साथ मारपीट हुई और कार भी छीनी गई। उन्होंने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है और सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • MP के 70 हजार शिक्षकों को TET से राहत दिलाने सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, स्कूल शिक्षा विभाग की नई कानूनी तैयारी

    MP के 70 हजार शिक्षकों को TET से राहत दिलाने सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, स्कूल शिक्षा विभाग की नई कानूनी तैयारी


    भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी से राहत दिलाने के लिए एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है। स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों ने पहले ही सरकारी चयन परीक्षा पास कर अपनी नियुक्ति हासिल की थी। ऐसे में उन्हें दोबारा शिक्षक पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं होगा। इसी आधार पर राज्य सरकार जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर करने की तैयारी कर रही है।

    सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2025 के फैसले के बाद प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया था। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने अप्रैल में निर्देश जारी करते हुए जुलाई और अगस्त में पात्रता परीक्षा आयोजित कराने की प्रक्रिया शुरू की। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से कम बची है उन्हें परीक्षा से छूट मिलेगी जबकि अन्य सभी शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य रहेगा। परीक्षा पास नहीं करने वाले शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अदालत ने राहत देते हुए परीक्षा पास करने की अंतिम समय सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ा दी है।

    अब स्कूल शिक्षा विभाग का पूरा जोर वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त हुए करीब 70 हजार शिक्षकों को राहत दिलाने पर है। विभाग का तर्क है कि इन शिक्षकों की भर्ती व्यापम के माध्यम से आयोजित प्रतियोगी परीक्षा के आधार पर हुई थी और चयन प्रक्रिया पूरी तरह सरकारी नियमों के अनुसार संपन्न हुई थी। इसलिए उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देना आवश्यक नहीं माना जाना चाहिए।

    सूत्रों के अनुसार विधि विभाग और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कानूनी सलाह लेने के बाद एक सप्ताह के भीतर नई याचिका दाखिल की जा सकती है। इसमें अदालत से अनुरोध किया जाएगा कि इन शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जाए क्योंकि वे पहले ही चयन प्रक्रिया पूरी कर नियमित नियुक्ति प्राप्त कर चुके हैं।

    हालांकि विभागीय अधिकारियों का यह भी मानना है कि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने की संभावना बहुत अधिक नहीं है क्योंकि अदालत पहले ही इस विषय पर अपना स्पष्ट रुख जाहिर कर चुकी है। इसके बावजूद शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार यह कानूनी प्रयास कर रही है। यदि अदालत राहत देती है तो पात्रता परीक्षा के दायरे में आने वाले लगभग आधे शिक्षकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

    गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही टीईटी को लेकर 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर चुका है। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी शिक्षकों का न्यूनतम शैक्षणिक मानकों को पूरा करना आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार कानून और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के मानकों के अनुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

    अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की नई याचिका और सुप्रीम कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं। यदि अदालत सरकार की दलीलों से सहमत होती है तो हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं यदि याचिका खारिज होती है तो वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को भी निर्धारित समय सीमा के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।