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  • सीमांकन के बाद फिर जोती जमीन, विरोध करने पहुंचे पिता-पुत्र पर हमला, 10-12 लोगों पर मारपीट का आरोप

    सीमांकन के बाद फिर जोती जमीन, विरोध करने पहुंचे पिता-पुत्र पर हमला, 10-12 लोगों पर मारपीट का आरोप


    शिवपुरी। जिले के तेंदुआ थाना क्षेत्र के लाड़करन गांव में कृषि भूमि के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। सीमांकन के बाद दोबारा खेत जोतने का विरोध करने पहुंचे पिता-पुत्र पर कथित तौर पर 10 से 12 लोगों ने लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल दोनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।

    जिला अस्पताल में भर्ती 32 वर्षीय संजीव परिहार ने बताया कि उनकी आठ बीघा कृषि भूमि पर खेरौना गांव के भरत रावत और हजारी रावत ने पहले कब्जा कर रखा था। करीब दो माह पहले राजस्व विभाग ने सीमांकन कराकर जमीन से कब्जा हटवाया था और उन्हें खेत का कब्जा दिलाया गया था।

    संजीव के मुताबिक तीन दिन पहले उन्होंने अपनी जमीन की जुताई कराई थी। गुरुवार शाम सूचना मिली कि भरत रावत और हजारी रावत दोबारा ट्रैक्टर से उनकी जमीन जोत रहे हैं। जानकारी मिलते ही वह अपने पिता राम सिंह परिहार के साथ खेत पहुंचे और इसका विरोध किया।

    आरोप है कि खेत पर पहले से मौजूद भरत रावत, हजारी रावत, राजेश रावत, बुद्धा, टिल्लू, बलवीर रावत समेत 10 से 12 लोगों ने एकजुट होकर दोनों पर हमला कर दिया। हमलावरों ने लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से पिता-पुत्र की बेरहमी से पिटाई की और उन्हें घायल अवस्था में छोड़कर मौके से फरार हो गए।

    घटना के बाद परिजन दोनों घायलों को तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों की निगरानी में दोनों की हालत पर नजर रखी जा रही है।

    तेंदुआ थाना प्रभारी नीतू सिंह धाकड़ ने बताया कि घायलों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने और बयानों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

  • 'हेरा फेरी 3' को लेकर नया विवाद, प्रियदर्शन का बड़ा खुलासा, बोले- निर्माता के व्यवहार से आहत होकर छोड़ी फिल्म, बड़े दावे भी किए

    'हेरा फेरी 3' को लेकर नया विवाद, प्रियदर्शन का बड़ा खुलासा, बोले- निर्माता के व्यवहार से आहत होकर छोड़ी फिल्म, बड़े दावे भी किए

    मुंबई। बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘हेरा फेरी 3’ एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। कलाकारों और निर्माण से जुड़े विवादों के बीच अब निर्देशक प्रियदर्शन ने पहली बार खुलकर बताया है कि उन्होंने इस फिल्म से खुद को अलग करने का फैसला क्यों लिया। उनके हालिया बयान ने फिल्म को लेकर चल रही चर्चाओं को और तेज कर दिया है। हालांकि, इस मामले में संबंधित पक्ष की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    प्रियदर्शन ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि फिल्म के निर्माता ने स्पष्ट रूप से यह शर्त रखी थी कि फिल्म का निर्माण तो उनके अधिकारों के तहत होगा, लेकिन निर्देशन उनके हाथों में नहीं होना चाहिए। निर्देशक के अनुसार, यह बात उनके लिए बेहद निराशाजनक थी और इसी कारण उन्होंने परियोजना से दूरी बनाने का फैसला किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अतीत में भी निर्माता की ओर से कई बार उनके प्रति सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया।

    निर्देशक ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2000 में रिलीज हुई ‘हेरा फेरी’ के समय भी उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। उनका दावा है कि फिल्म देखने के बाद निर्माता ने उसकी प्रस्तुति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। प्रियदर्शन के अनुसार, उस वक्त उन्हें फिल्म के लंबे संस्करण को काफी संपादित कर छोटा करना पड़ा, ताकि इसे निर्धारित प्रारूप में रिलीज किया जा सके।

    प्रियदर्शन ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में केवल अभिनेता अक्षय कुमार के आग्रह और विश्वास के कारण ‘हेरा फेरी 3’ का निर्देशन करने में रुचि दिखाई थी। उनका मानना था कि इस लोकप्रिय फ्रेंचाइजी को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे सफल कॉमेडी सीरीज में शामिल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें फिल्म बनाने का अवसर मिलता तो वह इसे और अधिक बड़े स्तर पर प्रस्तुत करते।

    निर्देशक के अनुसार, अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और परेश रावल तीनों चाहते थे कि वही फिल्म का निर्देशन करें। उन्होंने कहा कि कलाकारों का उन पर भरोसा उनके लिए महत्वपूर्ण था, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि परियोजना से अलग होना पड़ा। इस बयान के बाद फिल्म के निर्माण से जुड़े घटनाक्रम को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से ‘हेरा फेरी 3’ लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। पहले कलाकारों के फिल्म से जुड़ने और अलग होने की खबरें सामने आईं, वहीं अब निर्देशन और निर्माण को लेकर भी अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इससे फिल्म के भविष्य और निर्माण प्रक्रिया को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।

    फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि लोकप्रिय फ्रेंचाइजी की सफलता केवल कलाकारों पर ही नहीं, बल्कि मजबूत निर्देशन और टीमवर्क पर भी निर्भर करती है। ऐसे में निर्माण से जुड़े मतभेद किसी भी बड़े प्रोजेक्ट की गति को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल दर्शकों की नजर इस बात पर टिकी है कि फिल्म से जुड़े सभी विवादों के बीच ‘हेरा फेरी 3’ की आगे की दिशा क्या होगी और निर्माण प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी।

  • 'इंडियाज गॉट लेटेंट 2' को लेकर नया दावा, सुनील पाल बोले- ₹25 लाख का ऑफर ठुकराया; कहा- गाली-गलौज वाली कॉमेडी का हिस्सा नहीं बनूंगा

    'इंडियाज गॉट लेटेंट 2' को लेकर नया दावा, सुनील पाल बोले- ₹25 लाख का ऑफर ठुकराया; कहा- गाली-गलौज वाली कॉमेडी का हिस्सा नहीं बनूंगा


    नई दिल्ली ।
    कॉमेडी जगत में सुनील पाल और समय रैना के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। इस बार सुनील पाल ने दावा किया है कि उन्हें लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट 2’ का हिस्सा बनने के लिए 25 लाख रुपये का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि, उन्होंने यह ऑफर स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि वह अपनी कॉमेडी शैली और सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहते थे।

    सुनील पाल के अनुसार, शो की टीम ने उनसे संपर्क कर कार्यक्रम में शामिल होने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह मंच पर किसी भी प्रकार की गाली-गलौज या अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनका कहना है कि इसके जवाब में उन्हें बताया गया कि उन्हें स्वयं ऐसा करने की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन कार्यक्रम में अन्य प्रतिभागी अपनी शैली में प्रस्तुति देंगे। इसके बावजूद उन्होंने शो का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया।

    फिलहाल समय रैना या उनकी टीम की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में सुनील पाल के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। हालांकि, उनके इस बयान ने दोनों कॉमेडियनों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    यह पहली बार नहीं है जब सुनील पाल ने समय रैना या उनके शो की सार्वजनिक रूप से आलोचना की हो। इससे पहले भी वह कई अवसरों पर आधुनिक स्टैंड-अप कॉमेडी में बढ़ती अभद्र भाषा और विवादित कंटेंट पर सवाल उठा चुके हैं। उनका मानना रहा है कि हास्य का उद्देश्य स्वस्थ मनोरंजन होना चाहिए और मंच पर प्रस्तुत सामग्री समाज के लिए सकारात्मक संदेश देने वाली होनी चाहिए।

    इससे पहले शो के पहले सीजन को लेकर भी सुनील पाल ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर कहा था कि अश्लील भाषा और आपत्तिजनक प्रस्तुति को कॉमेडी का नाम देना उचित नहीं है। उनके अनुसार, ऐसे प्रयोग दर्शकों के बीच गलत संदेश पहुंचाते हैं और पारिवारिक मनोरंजन की परंपरा को प्रभावित करते हैं। उनके इन बयानों ने उस समय भी सोशल मीडिया पर व्यापक बहस को जन्म दिया था।

    हाल के महीनों में दोनों कलाकार एक डिजिटल मनोरंजन कार्यक्रम में भी साथ दिखाई दिए थे। उस दौरान मंच पर दोनों ने एक-दूसरे पर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणियां की थीं, लेकिन दर्शकों ने इसे उनके पुराने विवाद से जोड़कर देखा। इसके बाद भी समय-समय पर दोनों के बयानों ने यह संकेत दिया कि उनके विचारों में मतभेद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।

    कॉमेडी की बदलती शैली और अभिव्यक्ति की सीमाओं को लेकर मनोरंजन जगत में लगातार चर्चा होती रही है। एक ओर कुछ कलाकार प्रयोगधर्मी और बेबाक प्रस्तुति को आधुनिक दर्शकों की पसंद बताते हैं, वहीं दूसरी ओर कई वरिष्ठ कलाकार मर्यादित और पारिवारिक हास्य को अधिक उपयुक्त मानते हैं। सुनील पाल का ताजा बयान भी इसी बहस को एक बार फिर सामने लेकर आया है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर रहेगी कि समय रैना या उनकी टीम इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं।

  • 6 वर्षीय बच्चे पर कुल्हाड़ी से हमले का आरोप, कार्रवाई की मांग को लेकर एसपी कार्यालय पहुंचे परिजन

    6 वर्षीय बच्चे पर कुल्हाड़ी से हमले का आरोप, कार्रवाई की मांग को लेकर एसपी कार्यालय पहुंचे परिजन

    शिवपुरी। जिले के बदरवास थाना क्षेत्र में छह वर्षीय मासूम के साथ कथित बर्बरता का मामला सामने आया है। बच्चे के पिता ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर आरोप लगाया है कि पुरानी रंजिश के चलते गांव के दो लोगों ने उनके बेटे के बाएं हाथ का अंगूठा और एक उंगली कुल्हाड़ी से काट दी। मामले में मारपीट, जान से मारने की धमकी और झूठा केस दर्ज कराने के भी आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल पुलिस ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है।

    शिकायत के अनुसार बदरवास थाना क्षेत्र के ग्राम मदनपुर निवासी रामवीर गुर्जर का छह वर्षीय बेटा सचिन बुधवार शाम करीब चार बजे घर के पास खेल रहा था। आरोप है कि गांव के आनंद गुर्जर और उदयभान गुर्जर उसे अपने घर ले गए, जहां पुरानी रंजिश के चलते कुल्हाड़ी से उसके बाएं हाथ का अंगूठा और एक उंगली काट दी गई। हमले में उसकी तीसरी उंगली भी गंभीर रूप से घायल हो गई।

    घायल बच्चा किसी तरह रोते-बिलखते घर पहुंचा और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायतकर्ता का कहना है कि घटना के प्रत्यक्षदर्शी भी मौजूद हैं। जब परिवार ने आरोपियों से इस बारे में विरोध जताया तो उन्होंने गाली-गलौज करते हुए पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी।

    रामवीर गुर्जर का कहना है कि गांव के कुछ लोगों ने समझौते का भरोसा देकर उन्हें तत्काल पुलिस में शिकायत करने से रोक दिया। बाद में जब परिवार इलाज और बातचीत के लिए आरोपियों के घर पहुंचा तो आरोपित पक्ष के कई लोग लाठी-डंडे लेकर उनके घर आ गए और मारपीट की। इस दौरान उनके सिर पर लाठी मारकर घायल करने का भी आरोप लगाया गया है।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपित पक्ष ने खुद अपनी मां को चोट पहुंचाकर उनके परिवार के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी उनके पास मौजूद है।

    पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि डायल-112 पर सूचना देने के बावजूद पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। उनका यह भी कहना है कि बदरवास थाने में उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई, जबकि दूसरे पक्ष की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई कर दी गई।

    पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में रामवीर गुर्जर ने बच्चे का मेडिकल परीक्षण कराने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

    वहीं बदरवास थाना प्रभारी नवीन यादव ने बताया कि दोनों पक्षों को थाने बुलाया गया था। उनके अनुसार शिकायतकर्ता बच्चे को साथ लेकर नहीं आया था। पुलिस ने बच्चे के साथ दोबारा थाने आने के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि मेडिकल परीक्षण, पूछताछ और जांच के बाद दोनों पक्षों के तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • 'अल्फा' की रिलीज के साथ सोशल मीडिया पर बंटी दर्शकों की राय, ऋतिक रोशन का कैमियो छाया, आलिया-शरवरी के एक्शन पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया

    'अल्फा' की रिलीज के साथ सोशल मीडिया पर बंटी दर्शकों की राय, ऋतिक रोशन का कैमियो छाया, आलिया-शरवरी के एक्शन पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया

    नई दिल्ली । यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की नई फिल्म ‘अल्फा’ सिनेमाघरों में रिलीज होते ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। आलिया भट्ट और शरवरी की मुख्य भूमिकाओं वाली इस स्पाई थ्रिलर को लेकर सोशल मीडिया पर शुरुआती प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। दर्शकों की राय पूरी तरह एक जैसी नहीं है। जहां फिल्म के कुछ पहलुओं की खुलकर सराहना की जा रही है, वहीं कहानी, प्रस्तुति और कुछ किरदारों को लेकर अलग-अलग मत देखने को मिल रहे हैं।

    फिल्म में महिला केंद्रित स्पाई कहानी को लेकर दर्शकों के एक वर्ग ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनका मानना है कि बड़े पैमाने पर एक्शन और जासूसी की दुनिया में महिला किरदारों को केंद्र में रखकर बनाई गई फिल्में हिंदी सिनेमा में अपेक्षाकृत कम देखने को मिलती हैं। ऐसे में ‘अल्फा’ इस दिशा में एक अलग प्रयास करती नजर आती है। कई दर्शकों ने आलिया भट्ट और शरवरी की स्क्रीन प्रेजेंस तथा दोनों के बीच की केमिस्ट्री को फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी बताया है।

    हालांकि फिल्म की कहानी को लेकर प्रतिक्रियाएं मिश्रित रही हैं। कुछ दर्शकों का कहना है कि शुरुआत काफी प्रभावशाली है और फिल्म उत्सुकता बनाए रखती है, लेकिन आगे बढ़ने के साथ इसकी कहानी अपेक्षित गहराई नहीं दे पाती। उनके अनुसार फिल्म कई स्थानों पर पारंपरिक स्पाई थ्रिलर के ढांचे में सिमट जाती है, जिससे नया अनुभव मिलने की उम्मीद पूरी तरह पूरी नहीं होती।

    आलिया भट्ट के अभिनय को लेकर भी दर्शकों की राय बंटी हुई दिखाई दी। कई लोगों ने उनके प्रदर्शन और गंभीर दृश्यों की सराहना की, जबकि कुछ दर्शकों का मानना है कि एक्शन प्रधान किरदार में उनकी मौजूदगी उतनी प्रभावशाली नहीं लगी, जितनी उम्मीद की जा रही थी। कुछ प्रतिक्रियाओं में उनके एक्शन दृश्यों और भाव-भंगिमाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

    शरवरी के अभिनय को भी मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है। कई दर्शकों ने माना कि उन्होंने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया है और एक्शन दृश्यों में उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि कहानी की सीमाओं के कारण उनका किरदार भी पूरी क्षमता के साथ उभर नहीं पाया।

    फिल्म में ऋतिक रोशन का कैमियो सोशल मीडिया पर सबसे अधिक चर्चा में है। बड़ी संख्या में दर्शकों ने उनके विशेष प्रवेश को फिल्म का सबसे यादगार क्षण बताया है। उनका मानना है कि कैमियो ने फिल्म में अतिरिक्त रोमांच जोड़ा और स्पाई यूनिवर्स के भविष्य को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी। हालांकि कुछ दर्शकों ने इसे अनावश्यक या कम प्रभावी भी बताया, जिससे इस हिस्से को लेकर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

    रिलीज के साथ ही फिल्म की तुलना अन्य स्पाई और एक्शन फिल्मों से भी होने लगी है। कुछ दर्शकों ने इसे हाल की अन्य फिल्मों की तुलना में कमजोर बताया, जबकि कई लोगों का कहना है कि फिल्म अपनी अलग पहचान बनाने का प्रयास करती है। कुछ प्रतिक्रियाओं में यह भी कहा गया कि कहानी कई जगह अंतरराष्ट्रीय स्पाई फिल्मों से प्रेरित महसूस होती है, जबकि भावनात्मक रिश्तों और पारिवारिक संघर्षों पर अपेक्षाकृत अधिक ध्यान दिया गया है।

    कुल मिलाकर ‘अल्फा’ को लेकर शुरुआती दर्शक प्रतिक्रियाएं मिश्रित हैं। एक ओर फिल्म के एक्शन, महिला प्रधान कहानी और ऋतिक रोशन के कैमियो की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर पटकथा, कुछ किरदारों की प्रस्तुति और कहानी की नवीनता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन और व्यापक दर्शक प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।

  • 77 की उम्र में महेश भट्ट ने निर्देशन को कहा अंतिम अलविदा, रचनात्मक स्वतंत्रता में कमी को बताया फैसले की सबसे बड़ी वजह

    77 की उम्र में महेश भट्ट ने निर्देशन को कहा अंतिम अलविदा, रचनात्मक स्वतंत्रता में कमी को बताया फैसले की सबसे बड़ी वजह

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज फिल्मकार महेश भट्ट ने आधिकारिक रूप से निर्देशन की दुनिया से खुद को अलग करने का फैसला किया है। 77 वर्ष की आयु में उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अब वह भविष्य में किसी भी फिल्म का निर्देशन नहीं करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माण और थिएटर से जुड़े रचनात्मक कार्यों में उनकी सक्रियता आगे भी बनी रहेगी, लेकिन निर्देशक के रूप में वापसी की संभावना अब नहीं है। उनके इस फैसले ने फिल्म उद्योग में लंबे समय से चली आ रही उनकी रचनात्मक यात्रा पर एक महत्वपूर्ण विराम लगा दिया है।

    महेश भट्ट ने अपने निर्णय के पीछे बदलते फिल्मी माहौल और रचनात्मक प्रक्रिया में आए बदलावों को प्रमुख कारण बताया। उनका कहना है कि आज अधिकांश फिल्मों का स्वरूप पहले से तय रहता है, जिससे निर्देशक और कलाकार के लिए अपनी कल्पनाशीलता तथा स्वतंत्र सोच को पूरी तरह अभिव्यक्त करना पहले जैसा संभव नहीं रह गया है। उनके अनुसार कला का वास्तविक स्वरूप तभी सामने आता है, जब रचनाकार को प्रयोग करने और अपने दृष्टिकोण को खुलकर प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता मिले।

    उन्होंने कहा कि जब किसी फिल्म का लगभग हर पहलू पहले से निर्धारित हो और रचनात्मक निर्णयों की गुंजाइश सीमित हो जाए, तब निर्देशक की भूमिका भी पहले जैसी प्रभावी नहीं रह जाती। उनका मानना है कि किसी भी कलाकार की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति होती है और यदि वही सीमित हो जाए तो रचनात्मक संतुष्टि भी कम होने लगती है। इसी सोच ने उन्हें निर्देशन से स्थायी रूप से दूरी बनाने का निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।

    महेश भट्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्देशन छोड़ने का अर्थ सिनेमा से पूरी तरह अलग होना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह बतौर निर्माता और थिएटर से जुड़े प्रोजेक्ट्स में अपनी भागीदारी जारी रखेंगे। उनका उद्देश्य नए विचारों और प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना है, लेकिन कैमरे के पीछे निर्देशक की भूमिका निभाने की अब उनकी कोई इच्छा नहीं है।

    महेश भट्ट का फिल्मी सफर चार दशकों से भी अधिक समय तक फैला रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1974 में की थी। शुरुआती दौर में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन बाद के वर्षों में उन्होंने ऐसी कई फिल्में बनाई, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। संवेदनशील विषयों, मानवीय रिश्तों और सामाजिक मुद्दों पर आधारित उनकी फिल्मों ने उन्हें एक विशिष्ट निर्देशक के रूप में स्थापित किया।

    उनके निर्देशन में बनी कई फिल्मों को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा। उन्होंने ऐसी कहानियों को बड़े पर्दे पर उतारा, जिन्होंने मनोरंजन के साथ-साथ समाज और मानवीय भावनाओं पर भी गहरी छाप छोड़ी। लेखक के रूप में भी उन्होंने कई सफल फिल्मों में महत्वपूर्ण योगदान दिया और अपनी अलग रचनात्मक शैली विकसित की।

    निर्देशन से उनका पहला लंबा विराम वर्ष 1999 के बाद शुरू हुआ था। इसके करीब दो दशक बाद उन्होंने एक फिल्म के जरिए फिर से निर्देशन में वापसी की, लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह वापसी अंतिम थी। उनके ताजा बयान के बाद यह लगभग तय हो गया है कि हिंदी सिनेमा को अब उनकी नई निर्देशित फिल्म देखने का अवसर नहीं मिलेगा। हालांकि फिल्म निर्माण और रचनात्मक परियोजनाओं में उनकी उपस्थिति आगे भी बनी रहेगी और उनके अनुभव का लाभ नई पीढ़ी के कलाकारों तथा फिल्मकारों को मिलता रहेगा।

  • ऋतिक-सुजैन के तलाक पर वर्षों बाद टूटी चुप्पी, 400 करोड़ एलिमनी की चर्चाओं पर परिवार ने बताई पूरी सच्चाई

    ऋतिक-सुजैन के तलाक पर वर्षों बाद टूटी चुप्पी, 400 करोड़ एलिमनी की चर्चाओं पर परिवार ने बताई पूरी सच्चाई

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन और उनकी पूर्व पत्नी सुजैन खान के तलाक से जुड़ी वर्षों पुरानी चर्चाएं एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लंबे समय से यह दावा किया जाता रहा कि दोनों के तलाक के दौरान सुजैन खान ने सैकड़ों करोड़ रुपये की एलिमनी ली थी। अब इस पूरे मामले पर पहली बार परिवार की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार बताया गया है।

    सुजैन खान की बहन और जानी-मानी ज्वेलरी डिजाइनर फराह खान अली ने एक साक्षात्कार में कहा कि तलाक के दौरान 400 करोड़ रुपये की एलिमनी दिए जाने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं थी। उनके अनुसार वर्षों से सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर इस तरह की बातें दोहराई जाती रही हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की अफवाहों ने बिना किसी तथ्य के लोगों के बीच गलत धारणा बना दी।

    फराह खान अली ने स्पष्ट किया कि उनकी बहन को आर्थिक लाभ के लिए विवाह या तलाक से जोड़कर देखना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि सुजैन खान एक सम्मानित परिवार से आती हैं और उन्होंने हमेशा अपने व्यक्तिगत जीवन को गरिमा और संतुलन के साथ आगे बढ़ाया है। उनके अनुसार तलाक के बाद भी दोनों परिवारों के बीच आपसी सम्मान और अच्छे संबंध बने हुए हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि उनके रिश्ते में किसी प्रकार का आर्थिक विवाद प्रमुख कारण नहीं था।

    उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों ने सोशल मीडिया पर सुजैन खान को लेकर अनुचित टिप्पणियां कीं और उन्हें बिना आधार के ‘गोल्ड डिगर’ जैसे शब्दों से संबोधित किया। फराह के अनुसार यह पूरी तरह गलत और दुर्भाग्यपूर्ण था, क्योंकि वास्तविक घटनाओं से इन आरोपों का कोई संबंध नहीं था। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रिश्तों को लेकर इस प्रकार की अटकलें किसी भी व्यक्ति की छवि को प्रभावित करती हैं।

    फराह ने यह भी बताया कि उन्होंने कई बार अपनी बहन को सार्वजनिक रूप से इन अफवाहों का खंडन करने की सलाह दी थी, लेकिन सुजैन खान ने कभी ऐसा आवश्यक नहीं समझा। उनका मानना था कि लोगों की राय से अधिक महत्वपूर्ण उनका आत्मसम्मान और निजी जीवन है। उन्होंने हमेशा अपने परिवार, बच्चों और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी तथा सार्वजनिक विवादों से दूरी बनाए रखी।

    ऋतिक रोशन और सुजैन खान की दोस्ती बचपन से रही थी। दोनों ने वर्ष 2000 में विवाह किया और उनके दो बेटे हैं। कई वर्षों तक साथ रहने के बाद दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया और वर्ष 2014 में उनका तलाक कानूनी रूप से पूरा हुआ। अलग होने के बावजूद दोनों ने अपने रिश्ते में सम्मान बनाए रखा और बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी मिलकर निभाई।

    तलाक के बाद भी दोनों कई पारिवारिक अवसरों और बच्चों से जुड़े कार्यक्रमों में साथ दिखाई देते रहे हैं। यही कारण है कि उनके संबंधों को अक्सर परिपक्व और सौहार्दपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जाता है। परिवार की ओर से आए ताजा बयान ने वर्षों से चली आ रही एलिमनी संबंधी चर्चाओं पर नई स्पष्टता प्रदान की है।

    यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों के बारे में बिना प्रमाण फैलने वाली खबरें लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहती हैं। ऐसे मामलों में आधिकारिक या प्रत्यक्ष पक्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाती है।

  • बारिश में टपकने लगा जिला अस्पताल का ICU, मरीजों के बेड तक पहुंचा पानी, बढ़ी संक्रमण और शॉर्ट सर्किट की आशंका

    बारिश में टपकने लगा जिला अस्पताल का ICU, मरीजों के बेड तक पहुंचा पानी, बढ़ी संक्रमण और शॉर्ट सर्किट की आशंका


    सीहोर। मूसलाधार बारिश ने सीहोर जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। अस्पताल के सबसे संवेदनशील आईसीयू वार्ड में एसी और छत से पानी टपकने लगा, जिससे गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिन मरीजों को अत्याधुनिक उपचार और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए, उनके बेड तक बारिश का पानी पहुंच रहा है।

    जानकारी के अनुसार आईसीयू में लगा एयर कंडीशनर पूरी तरह फेल हो गया है। ठंडी हवा देने की बजाय उससे लगातार पानी रिस रहा है। छत और पाइपलाइन से भी पानी टपकने के कारण वार्ड में जगह-जगह सीलन और जलभराव की स्थिति बन गई है। आईसीयू में वेंटिलेटर और अन्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर भर्ती मरीजों के लिए यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

    मरीजों के परिजनों का आरोप है कि कई बार अस्पताल प्रबंधन और ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों को इस समस्या की जानकारी दी गई, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। पानी लगातार बेड के आसपास टपकता रहा और मरीजों को असुविधा झेलनी पड़ी।

    विशेषज्ञों के अनुसार आईसीयू जैसे वार्ड में नमी और पानी का रिसाव संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है। इसके अलावा वार्ड में लगी जीवन रक्षक मशीनें और अन्य चिकित्सा उपकरण बिजली से संचालित होते हैं। ऐसे में लगातार पानी टपकने से शॉर्ट सर्किट या किसी बड़े विद्युत हादसे की आशंका भी बनी हुई है।

    करोड़ों रुपये के बजट और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच जिला अस्पताल की यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। मरीजों और उनके परिजनों ने आईसीयू की तत्काल मरम्मत, एसी सिस्टम को दुरुस्त करने और सुरक्षित उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

    स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मामले की जानकारी मिलने के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं मरीजों के परिजन उम्मीद जता रहे हैं कि आईसीयू जैसे अति संवेदनशील वार्ड की खामियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी मरीज की जान जोखिम में न पड़े।

  • रंजिश बनी हत्या की वजह, रेहटी पुलिस ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार

    रंजिश बनी हत्या की वजह, रेहटी पुलिस ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार


    सीहोर। जिले के रेहटी थाना पुलिस ने युवक की हत्या के सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। बुदनी एसडीओपी रवि शर्मा के निर्देशन में गठित पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हत्या के आरोपियों को पकड़ लिया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने पुरानी रंजिश के चलते वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की है।

    पुलिस के अनुसार 2 जुलाई को महागांवजदीद निवासी रमाबाई ने रेहटी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि संदीप, विनीत और उनके दो साथियों ने उनके भाई सुनील यदुवंशी के साथ डंडों से बेरहमी से मारपीट की, जिससे उसकी मौत हो गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

    जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी संदीप यदुवंशी और विनीत यदुवंशी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनका सुनील यदुवंशी से लंबे समय से विवाद और आपसी रंजिश चल रही थी।

    आरोपियों के अनुसार 1 जुलाई की रात संदीप अपने चचेरे भाई विनीत यदुवंशी तथा दोस्तों मोहित धनवारे और प्रदीप यदुवंशी के साथ कार से महागांवजदीद जा रहा था। विनीत को उसके घर छोड़ने के दौरान संदीप के घर के सामने सड़क पर एक स्कूटी खड़ी थी। रास्ता साफ कराने के लिए विनीत ने कार का हॉर्न बजाया।

    हॉर्न की आवाज सुनकर सुनील यदुवंशी घर से बाहर आया और दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर संदीप, विनीत, मोहित धनवारे और प्रदीप कार से उतर गए और अपने पास मौजूद डंडों से सुनील पर हमला कर दिया। हमले में सुनील गंभीर रूप से घायल हो गया।

    सुनील को बचाने के लिए उसकी बहन रमाबाई और जीजा सबर सिंह बीच-बचाव करने पहुंचे, लेकिन आरोपियों ने उन पर भी हमला कर दिया। आरोप है कि संदीप ने डंडे से सबर सिंह के सिर पर वार किया। गांव के पूनम यदुवंशी ने भी बीच-बचाव का प्रयास किया, लेकिन आरोपियों ने उसके साथ भी मारपीट कर उसे वहां से भगा दिया।

    वारदात को अंजाम देने के बाद चारों आरोपी नीले रंग की कार से मौके से फरार हो गए। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।

  • विंबलडन पहुंचीं दीप्ति शर्मा, धोनी और जोकोविच की मानसिक मजबूती को बताया एक जैसा

    विंबलडन पहुंचीं दीप्ति शर्मा, धोनी और जोकोविच की मानसिक मजबूती को बताया एक जैसा


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा इन दिनों विंबलडन का रोमांच करीब से देख रही हैं। इस दौरान उन्होंने टेनिस के महान खिलाड़ी नोवाक जोकोविच और भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की तुलना करते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों की सबसे बड़ी ताकत कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर मुकाबले का रुख बदलने की क्षमता है।

    जियो हॉटस्टार से बातचीत में दीप्ति ने कहा कि जब भी नोवाक जोकोविच का नाम आता है तो सबसे पहले उनकी मानसिक मजबूती की चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि जोकोविच कभी हार नहीं मानते और चाहे हालात कितने भी चुनौतीपूर्ण हों, उनका आत्मविश्वास और संयम हमेशा कायम रहता है। यही गुण उन्हें दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में शामिल करता है।

    दीप्ति ने कहा कि क्रिकेट में अगर किसी खिलाड़ी की तुलना जोकोविच से की जा सकती है तो वह महेंद्र सिंह धोनी हैं। उनके अनुसार धोनी मैदान पर हमेशा बेहद शांत दिखाई देते हैं और दबाव की स्थिति में भी उनके चेहरे पर घबराहट नहीं दिखती। यही कारण है कि उन्होंने अपने करियर में कई मुश्किल मुकाबलों में टीम इंडिया को जीत दिलाई। उन्होंने कहा कि दोनों दिग्गज खिलाड़ियों से यह सीख मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और मानसिक संतुलन बनाए रखना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

    भारतीय ऑलराउंडर ने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा समय में नोवाक जोकोविच उनके पसंदीदा टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा कि वह बचपन से रोजर फेडरर और राफेल नडाल जैसे दिग्गजों को खेलते हुए देखती आई हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जोकोविच की जुझारू मानसिकता और कभी हार न मानने वाले रवैये ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया है। अब वह उनके लगभग हर मुकाबले को फॉलो करती हैं।

    दीप्ति ने विंबलडन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह उनका लंबे समय से देखा गया सपना था। उन्होंने कहा कि वर्षों तक टीवी पर इस प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम को देखने के बाद पहली बार यहां लाइव मुकाबले देखने का अनुभव बेहद खास है। स्टेडियम का माहौल, दर्शकों का उत्साह और प्रतियोगिता का वातावरण उन्हें बेहद रोमांचित कर रहा है।

    जब उनसे पूछा गया कि यदि उन्हें विंबलडन में किसी तीन भारतीय खेल हस्तियों के साथ मैच देखने का मौका मिले तो वह किन्हें चुनेंगी, तो उन्होंने सचिन तेंदुलकर, रवि शास्त्री और सुनील गावस्कर का नाम लिया। दीप्ति का मानना है कि इन तीनों दिग्गजों के साथ बैठकर मैच देखने और खेल पर उनकी राय सुनना अपने आप में यादगार अनुभव होगा।

    दीप्ति शर्मा का यह बयान खेल जगत के दो महान खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती और नेतृत्व क्षमता को लेकर उनकी गहरी समझ को भी दर्शाता है। उन्होंने यह संदेश दिया कि किसी भी खेल में प्रतिभा के साथ मानसिक दृढ़ता और दबाव में सही फैसले लेने की क्षमता ही महान खिलाड़ियों की पहचान होती है।