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  • पॉकेट मनी अब बनेगा स्मार्ट: माता-पिता की निगरानी में टीनएजर्स को मिलेगा डिजिटल पेमेंट का नया तरीका

    पॉकेट मनी अब बनेगा स्मार्ट: माता-पिता की निगरानी में टीनएजर्स को मिलेगा डिजिटल पेमेंट का नया तरीका

    नई दिल्ली । डिजिटल भुगतान की बढ़ती दुनिया में अब किशोरों के लिए भी एक नई सुविधा सामने आई है, जो उनके रोजमर्रा के खर्च को आसान और सुरक्षित बनाने का दावा करती है। इस नई पहल के तहत टीनएजर्स को बिना बैंक खाता खोले ही यूपीआई आधारित भुगतान करने की सुविधा दी जा रही है, जिससे वे अपने छोटे-मोटे खर्च जैसे कि स्कूल की कैंटीन, बस किराया, मोबाइल रिचार्ज या दैनिक जरूरतों की खरीदारी आसानी से कर सकेंगे। यह बदलाव उन स्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है, जहां अक्सर बच्चे अपने माता-पिता के फोन या नकद पैसे पर निर्भर रहते हैं और कई बार भुगतान के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य किशोरों को डिजिटल भुगतान के अनुभव से जोड़ना है, लेकिन साथ ही उनके खर्च पर पूरा नियंत्रण माता-पिता के हाथ में रखना भी है। इस प्रणाली में माता-पिता अपने डिजिटल अकाउंट के माध्यम से बच्चों को सीमित एक्सेस प्रदान करेंगे, जिससे वे निर्धारित सीमा के भीतर ही भुगतान कर सकेंगे। इससे न केवल बच्चों को जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार सीखने में मदद मिलेगी, बल्कि परिवार के खर्च पर भी बेहतर निगरानी संभव होगी।

    इस फीचर की एक खास बात यह है कि इसमें खर्च की सीमा पहले से तय रहती है, जिससे अनियंत्रित खर्च की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। शुरुआत में ट्रांजैक्शन की एक छोटी सीमा तय की जाती है, जिसे बाद में आवश्यकता के अनुसार बढ़ाया या घटाया जा सकता है। इसके अलावा माता-पिता किसी भी समय इस सुविधा को रोकने या फिर से सक्रिय करने का विकल्प भी रखते हैं, जिससे सुरक्षा और नियंत्रण दोनों सुनिश्चित रहते हैं।

    डिजिटल भुगतान प्रणाली में यह बदलाव केवल सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों को वित्तीय समझ और जिम्मेदारी की ओर भी प्रेरित करता है। आज के समय में जब नकदी का उपयोग तेजी से कम हो रहा है, ऐसे में किशोरों को भी शुरुआती स्तर पर डिजिटल लेनदेन की आदत डालना आवश्यक माना जा रहा है। यह कदम उन्हें भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने में भी मदद कर सकता है, जहां अधिकतर लेनदेन पूरी तरह डिजिटल हो चुके होंगे।

    हालांकि इस तरह की सुविधा के साथ सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है ताकि किसी भी प्रकार के गलत उपयोग या अनावश्यक खर्च से बचा जा सके। माता-पिता को रियल टाइम में लेनदेन की जानकारी मिलती रहती है और वे हर खर्च पर नजर रख सकते हैं। इससे पारदर्शिता बनी रहती है और बच्चों को भी यह समझने का अवसर मिलता है कि पैसे का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए। कुल मिलाकर यह नई व्यवस्था डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और कदम मानी जा रही है, जो तकनीक और जिम्मेदारी दोनों को एक साथ जोड़ने का प्रयास करती है।

  • गुजरात में मिला बड़ा हाईवे कॉन्ट्रैक्ट, इंफ्रा कंपनी के शेयर में दिखी हलचल और निवेशकों में बढ़ा उत्साह

    गुजरात में मिला बड़ा हाईवे कॉन्ट्रैक्ट, इंफ्रा कंपनी के शेयर में दिखी हलचल और निवेशकों में बढ़ा उत्साह

    नई दिल्ली । इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की स्मॉल कैप कंपनी जीआर इन्फ्राप्रोजेक्ट्स एक बार फिर बड़े सरकारी प्रोजेक्ट के कारण चर्चा में आ गई है। कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई को गुजरात में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए 1453 करोड़ रुपए का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिला है। इस खबर के सामने आते ही बाजार में कंपनी के शेयरों में हलचल दिखाई दी और अंतिम कारोबारी घंटों में स्टॉक ने गिरावट से उबरते हुए मजबूती दर्ज की।

    कंपनी की सहायक इकाई “नासरपोर मलोथा हाईवे प्राइवेट लिमिटेड” ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के साथ एक महत्वपूर्ण कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता गुजरात में नेशनल हाईवे-56 के एक बड़े हिस्से को फोरलेन हाईवे में अपग्रेड करने के लिए किया गया है। यह परियोजना राज्य के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

    जानकारी के अनुसार यह हाईवे परियोजना गुजरात के उमरपाड़ा तालुका स्थित नसारपोर गांव से लेकर व्यारा तालुका के मलोथा गांव तक लगभग 60.21 किलोमीटर लंबे हिस्से में विकसित की जाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल यानी HAM मॉडल के तहत तैयार किया जाएगा। इस मॉडल में निर्माण लागत का एक हिस्सा सरकारी एजेंसी द्वारा वहन किया जाता है, जबकि शेष निवेश कंपनी करती है। इससे परियोजना की फंडिंग और संचालन में संतुलन बना रहता है।

    परियोजना की कुल अनुमानित लागत 1453.57 करोड़ रुपए तय की गई है, जिसमें जीएसटी शामिल नहीं है। कंपनी को यह प्रोजेक्ट निर्धारित नियुक्ति तिथि से 910 दिनों के भीतर पूरा करना होगा। माना जा रहा है कि यह डील कंपनी के ऑर्डर बुक को और मजबूत करेगी तथा आने वाले समय में राजस्व वृद्धि में भी अहम योगदान दे सकती है।

    इस बड़ी परियोजना की घोषणा के बाद शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। कारोबारी सत्र के दौरान स्टॉक दबाव में दिखाई दे रहा था और करीब ढाई प्रतिशत तक कमजोर हो गया था, लेकिन अंतिम समय में खरीदारी बढ़ने से शेयर हरे निशान में बंद हुआ। बाजार बंद होने तक कंपनी का शेयर लगभग 940 रुपए के स्तर पर पहुंच गया। कंपनी का कुल मार्केट कैप 9000 करोड़ रुपए से अधिक बताया जा रहा है।

    हालांकि, पिछले कुछ समय से कंपनी के शेयरों पर दबाव बना हुआ था। वर्ष 2026 में अब तक स्टॉक में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वहीं, लंबी अवधि की बात करें तो पिछले तीन वर्षों में शेयर ने गिरावट का सामना किया है। ऐसे में यह नया प्रोजेक्ट निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    जीआर इन्फ्राप्रोजेक्ट्स देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में गिनी जाती है। कंपनी मुख्य रूप से सड़क, एक्सप्रेसवे, हाईवे और अन्य निर्माण परियोजनाओं के विकास में सक्रिय है। इसके अलावा कंपनी ब्रिज, रेलवे और अन्य इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स पर भी काम करती है। देशभर में कई बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स पर काम करने के कारण कंपनी ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में मजबूत पहचान बनाई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और सड़क निर्माण परियोजनाओं के कारण इस सेक्टर की कंपनियों के लिए आने वाले समय में नए अवसर बन सकते हैं। ऐसे में बड़े ऑर्डर मिलने से कंपनियों की वित्तीय स्थिति और बाजार में भरोसा दोनों मजबूत होते दिखाई दे सकते हैं।

  • निवेशकों की उम्मीदें चरम पर, Goldline Pharmaceutical IPO की लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में जबरदस्त उत्साह

    निवेशकों की उम्मीदें चरम पर, Goldline Pharmaceutical IPO की लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में जबरदस्त उत्साह


    नई दिल्ली ।
    फार्मास्युटिकल सेक्टर की उभरती कंपनी Goldline Pharmaceutical का आईपीओ बाजार में जबरदस्त चर्चा का विषय बना हुआ है। कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग से पहले ही निवेशकों के बीच उत्साह चरम पर पहुंच गया है। मजबूत ग्रे मार्केट प्रीमियम और रिकॉर्डतोड़ सब्सक्रिप्शन ने इस आईपीओ को निवेशकों के लिए सबसे चर्चित इश्यू में बदल दिया है। अब सभी की निगाहें कंपनी की लिस्टिंग पर टिकी हुई हैं, जहां निवेशकों को शानदार रिटर्न मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
    कंपनी का आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू के रूप में बाजार में आया था और इसका आकार लगभग 11.61 करोड़ रुपये रखा गया था। कंपनी ने अपने शेयरों का प्राइस बैंड 41 से 43 रुपये प्रति शेयर तय किया था। आईपीओ खुलते ही निवेशकों की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली और अंतिम दिन तक यह इश्यू कई गुना सब्सक्राइब हो गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे आकार के बावजूद कंपनी ने जिस तरह निवेशकों का विश्वास हासिल किया है, वह इसकी कारोबारी संभावनाओं को दर्शाता है।

    ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयरों को लेकर काफी सकारात्मक माहौल दिखाई दे रहा है। बाजार सूत्रों के अनुसार कंपनी का ग्रे मार्केट प्रीमियम करीब 15 रुपये तक पहुंच गया है, जो इसके ऊपरी प्राइस बैंड की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत अधिक माना जा रहा है। इसी आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि कंपनी के शेयर करीब 58 रुपये के आसपास लिस्ट हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो निवेशकों को पहले ही दिन मजबूत लिस्टिंग गेन हासिल हो सकता है। हालांकि बाजार जानकार यह भी मानते हैं कि ग्रे मार्केट केवल संकेत देता है और इसमें उतार-चढ़ाव तेजी से हो सकते हैं।

    इस आईपीओ की सबसे बड़ी खासियत इसका रिकॉर्ड सब्सक्रिप्शन रहा। रिटेल निवेशकों से लेकर संस्थागत निवेशकों तक सभी श्रेणियों में जबरदस्त मांग देखने को मिली। रिटेल कैटेगरी में भारी आवेदन आने से यह स्पष्ट हो गया कि छोटे निवेशकों को कंपनी की भविष्य की संभावनाओं पर मजबूत भरोसा है। वहीं गैर-संस्थागत निवेशकों और योग्य संस्थागत खरीदारों की तरफ से भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। बाजार में यह धारणा बन गई है कि कंपनी का कारोबार आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार कर सकता है।

    Goldline Pharmaceutical एसेट-लाइट बिजनेस मॉडल पर काम करती है। इस मॉडल के तहत कंपनी खुद उत्पादन इकाइयों में भारी निवेश करने के बजाय तीसरी पार्टियों से दवाइयों का निर्माण करवाती है और फिर अपने ब्रांड नाम से उन्हें बाजार में बेचती है। कंपनी कार्डियोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, पीडियाट्रिक्स, डायबिटीज केयर और क्रिटिकल केयर जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते मेडिकल क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी रखती है। यही कारण है कि निवेशकों को कंपनी के कारोबार में लंबी अवधि की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।

    वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने पिछले वर्षों में लगातार वृद्धि दर्ज की है। कंपनी की आय में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है, वहीं मुनाफे में भी मजबूत उछाल दर्ज किया गया है। यही सकारात्मक वित्तीय आंकड़े निवेशकों के भरोसे को और मजबूत कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी आने वाले समय में अपने कारोबार के विस्तार और वित्तीय प्रदर्शन को इसी तरह बनाए रखती है, तो यह निवेशकों के लिए लंबी अवधि में भी आकर्षक साबित हो सकती है।

  • फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में नई हलचल, उड़द और तुवर दाल कारोबार वाली कंपनी ला रही नया IPO

    फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में नई हलचल, उड़द और तुवर दाल कारोबार वाली कंपनी ला रही नया IPO

    नई दिल्ली । फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में तेजी से उभर रही एम आर मणिवेनी फूड्स अब शेयर बाजार में अपनी नई पहचान बनाने की तैयारी में है। कंपनी ने लगभग 27 करोड़ रुपये जुटाने के उद्देश्य से अपना SME IPO लाने का फैसला किया है। यह पूरा इश्यू फ्रेश शेयरों के जरिए जारी किया जाएगा, जिसके तहत करीब 52 लाख नए शेयर बाजार में उतारे जाएंगे। कंपनी का यह कदम उसके विस्तार की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    यह IPO 22 मई 2026 से निवेशकों के लिए खुलेगा और 26 मई तक इसमें आवेदन किए जा सकेंगे। कंपनी ने शेयरों का प्राइस बैंड 51 से 52 रुपये प्रति शेयर तय किया है। निवेशकों के बीच इस इश्यू को लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को लंबे समय से स्थिर और लगातार बढ़ने वाला कारोबार माना जाता है। खास तौर पर दाल जैसे रोजमर्रा के खाद्य उत्पादों की मांग देशभर में हमेशा बनी रहती है, जिससे इस बिजनेस मॉडल को मजबूत आधार मिलता है।

    रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम आवेदन 2,000 शेयरों का रखा गया है। अपर प्राइस बैंड के अनुसार इसमें निवेश करने के लिए लगभग 2.08 लाख रुपये की जरूरत होगी। वहीं हाई नेटवर्थ निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश राशि 3 लाख रुपये से अधिक रखी गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि SME प्लेटफॉर्म पर आने वाली ऐसी कंपनियां भविष्य में तेजी से विस्तार कर सकती हैं, खासकर तब जब उनका कारोबार दैनिक जरूरतों से जुड़ा हो।

    कंपनी वर्ष 2010 से फूड प्रोडक्ट्स की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और वितरण के क्षेत्र में काम कर रही है। फिलहाल इसका मुख्य कारोबार उड़द दाल और तुवर दाल पर केंद्रित है। कंपनी आधुनिक तकनीकों और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली के जरिए अपने उत्पादों को बेहतर बनाने पर लगातार काम कर रही है। इसके साथ ही मजबूत सप्लाई चेन और साफ-सुथरी पैकेजिंग को भी कंपनी अपनी बड़ी ताकत मानती है।

    वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो पिछले दो वर्षों में कंपनी ने तेज ग्रोथ दर्ज की है। वित्त वर्ष 2024 में कंपनी की कुल आय लगभग 155 करोड़ रुपये थी, जो अगले वित्त वर्ष में बढ़कर 203 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। वहीं कंपनी का मुनाफा भी लगभग दोगुना हुआ है। वित्त वर्ष 2024 में जहां कंपनी का प्रॉफिट करीब 2 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025 में यह बढ़कर 4 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया। यह बढ़ोतरी कंपनी के मजबूत बिजनेस मॉडल और बढ़ती बाजार मांग को दर्शाती है।

    IPO से जुटाई गई राशि का बड़ा हिस्सा कंपनी अपने विस्तार कार्यों में लगाएगी। नई फैक्ट्री के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि अत्याधुनिक प्लांट और मशीनरी खरीदने की भी तैयारी है। इसके अलावा कुछ राशि सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों और कारोबार को मजबूत बनाने में उपयोग की जाएगी।

    फूड सेक्टर में लगातार बढ़ती मांग और कंपनी की तेज वित्तीय प्रगति को देखते हुए निवेशकों की नजर अब इस IPO पर टिक गई है। बाजार में यह चर्चा भी तेज है कि आने वाले समय में ऐसी कंपनियां ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में अपनी मजबूत पकड़ बना सकती हैं। SME IPO सेगमेंट में यह इश्यू निवेशकों के लिए एक नया और दिलचस्प अवसर माना जा रहा है।

  • PM मोदी का करीबी बनकर करोड़ों की ठगी करने वाले आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, तीन साल जेल में बिताने के बाद मिली जमानत

    PM मोदी का करीबी बनकर करोड़ों की ठगी करने वाले आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, तीन साल जेल में बिताने के बाद मिली जमानत

    नई दिल्ली में सामने आए एक चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग और ठगी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी काशिफ को जमानत देकर बड़ी राहत प्रदान की है। आरोपी पर आरोप है कि उसने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों का करीबी बताकर लोगों को प्रभाव में लिया और सरकारी नौकरी, ठेके तथा सरकारी विभागों में मदद दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी की। यह मामला लंबे समय से जांच एजेंसियों की निगरानी में था और आरोपी बीते लगभग तीन वर्षों से जेल में बंद था। सुप्रीम कोर्ट ने इसी लंबी न्यायिक हिरासत को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर की है।

    सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी की जमानत याचिका पहले खारिज कर दी गई थी। अदालत ने माना कि आरोपी काफी लंबा समय जेल में गुजार चुका है और मामले की सुनवाई अभी जारी है। इसी आधार पर उसे सशर्त जमानत देने का फैसला लिया गया। हालांकि अदालत ने आरोपी को सख्त चेतावनी भी दी कि वह भविष्य में किसी भी संवैधानिक या सरकारी अधिकारी के नाम का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए नहीं करेगा।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है या जांच प्रक्रिया में सहयोग नहीं करता, तो प्रवर्तन निदेशालय उसकी जमानत रद्द कराने के लिए दोबारा अदालत का रुख कर सकता है। अदालत ने आरोपी को जांच और ट्रायल की हर प्रक्रिया में पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया है।

    यह मामला अप्रैल 2023 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा हुआ है, जिसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत गंभीर आरोप लगाए गए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी ने सोशल मीडिया पर अपनी कई एडिट और मॉर्फ की गई तस्वीरें साझा की थीं, जिनमें वह प्रधानमंत्री और कई बड़े नेताओं के साथ दिखाई दे रहा था। इन तस्वीरों के जरिए उसने लोगों के बीच यह संदेश देने की कोशिश की कि उसकी पहुंच सत्ता के सबसे ऊंचे स्तर तक है।

    जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने, बड़े सरकारी ठेके हासिल कराने और विभिन्न सरकारी विभागों में प्रभाव का इस्तेमाल कर काम करवाने का भरोसा देता था। इसके बदले वह लोगों से मोटी रकम वसूलता था। एजेंसियों का दावा है कि आरोपी ने अपनी फर्जी पहचान और प्रभाव का इस्तेमाल कर कई लोगों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाया।

    प्रवर्तन निदेशालय ने आरोपी से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी भी की थी, जहां से लगभग 1.10 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बरामद होने का दावा किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि यह रकम कथित तौर पर अपराध से अर्जित की गई कमाई का हिस्सा थी। मामले की जांच अभी भी जारी है और एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।

    इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए बनाई जा रही फर्जी छवि और प्रभाव के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने अपने आदेश के जरिए साफ संकेत दिया है कि कानून ऐसे मामलों को गंभीरता से देखता है, लेकिन लंबे समय तक जेल में रहने और ट्रायल में देरी जैसे पहलुओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

  • पाकिस्तान के आतंकी ने ही खोल दी ‘आतंकिस्तान’ की पोल, कश्मीर पहुंचते ही बदला लश्कर के खूंखार गुर्गे का इरादा

    पाकिस्तान के आतंकी ने ही खोल दी ‘आतंकिस्तान’ की पोल, कश्मीर पहुंचते ही बदला लश्कर के खूंखार गुर्गे का इरादा

    नई दिल्ली । पाकिस्तान द्वारा वर्षों से कश्मीर को लेकर फैलाए जा रहे प्रोपेगेंडा को इस बार किसी भारतीय एजेंसी या नेता ने नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तान से भेजे गए एक आतंकी ने ही कठघरे में खड़ा कर दिया। घाटी में आतंक फैलाने के मकसद से भेजा गया लश्कर-ए-तैयबा का प्रशिक्षित आतंकी मोहम्मद उस्मान जट्ट उर्फ ‘चाइनीज’ अब ऐसे खुलासे कर रहा है, जिसने पाकिस्तान के झूठे दावों की परतें उधेड़ दी हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस आतंकी को कश्मीर में हिंसा फैलाने की जिम्मेदारी दी गई थी, वही वहां की वास्तविक स्थिति देखकर अपना इरादा बदल बैठा।

    जांच एजेंसियों की गिरफ्त में आए मोहम्मद उस्मान जट्ट ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसे पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ट्रेनिंग कैंपों में कश्मीर को लेकर एक अलग तस्वीर दिखाई गई थी। उसे यह भरोसा दिलाया गया था कि घाटी में हालात बेहद खराब हैं और वहां के लोग भारत के खिलाफ खड़े हैं। लेकिन जब वह घुसपैठ के जरिए जम्मू-कश्मीर पहुंचा और उसने आम लोगों की जिंदगी को करीब से देखा, तो उसकी सोच पूरी तरह बदल गई। उसने माना कि उसे जो बताया गया था, वास्तविकता उससे बिल्कुल अलग थी।

    सूत्रों के मुताबिक, लाहौर निवासी यह आतंकी उत्तरी कश्मीर के रास्ते भारत में दाखिल हुआ था। उसे कई आतंकी हमलों को अंजाम देने के निर्देश दिए गए थे। शुरुआती दिनों में उसने कुछ संदिग्ध गतिविधियों में हिस्सा भी लिया, लेकिन धीरे-धीरे उसका फोकस बदलने लगा। घाटी में सामान्य जनजीवन, बाजारों की रौनक और लोगों की दिनचर्या देखने के बाद वह खुद दुविधा में पड़ गया। यही कारण था कि उसने अपने मिशन से दूरी बनानी शुरू कर दी।

    जांच के दौरान सामने आई सबसे हैरान करने वाली जानकारी यह रही कि आतंकी ‘चाइनीज’ अपने पुराने शौक को पूरा करने में लग गया था। बताया जा रहा है कि वह श्रीनगर में हेयर ट्रांसप्लांट करवाने पहुंचा था, जहां सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया। एक तरफ जहां उसे बड़े आतंकी मिशन के लिए भेजा गया था, वहीं दूसरी तरफ वह अपनी निजी इच्छाओं में उलझ गया। इसी लापरवाही ने आखिरकार उसे जांच एजेंसियों के शिकंजे तक पहुंचा दिया।

    पूछताछ में आतंकी ने यह भी स्वीकार किया कि पाकिस्तान में युवाओं को कश्मीर के नाम पर भड़काया जाता है और उन्हें गलत सूचनाएं देकर आतंकी संगठनों में शामिल किया जाता है। उसने माना कि वास्तविकता देखने के बाद उसे महसूस हुआ कि घाटी के लोग शांति और सामान्य जिंदगी चाहते हैं, जबकि सीमा पार बैठे संगठन अपने फायदे के लिए युवाओं का इस्तेमाल करते हैं।

    इस पूरे मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई नेताओं ने इसे पाकिस्तान के झूठे नैरेटिव की सबसे बड़ी हार बताया। उनका कहना है कि जब खुद पाकिस्तान से भेजा गया आतंकी ही वहां के प्रोपेगेंडा को झूठा बता रहा है, तो यह पूरी दुनिया के सामने एक बड़ा संदेश है। फिलहाल जांच एजेंसियां आतंकी से जुड़े नेटवर्क, उसके संपर्कों और भारत में उसकी गतिविधियों को लेकर गहन पूछताछ कर रही हैं।

  • आंध्र प्रदेश की नई पॉपुलेशन पॉलिसी पर विवाद, महिलाओं की स्वायत्तता को लेकर सीपीएम का बड़ा सवाल

    आंध्र प्रदेश की नई पॉपुलेशन पॉलिसी पर विवाद, महिलाओं की स्वायत्तता को लेकर सीपीएम का बड़ा सवाल


    नई दिल्ली
    /आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा ज्यादा बच्चे पैदा करने पर कैश इंसेंटिव देने की नई योजना ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की इस घोषणा पर अब विपक्षी दलों ने खुलकर हमला बोलना शुरू कर दिया है। खासकर सीपीएम नेता बृंदा करात ने इस नीति को महिलाओं की स्वतंत्रता और निजी अधिकारों में हस्तक्षेप बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के निजी फैसलों पर प्रभाव डालने की कोशिश कर रही है, जो बेहद चिंताजनक है।

    दरअसल, राज्य सरकार ने तीसरे बच्चे के जन्म पर 30 हजार रुपये और चौथे बच्चे के जन्म पर 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि राज्य में लगातार गिर रही जनसंख्या वृद्धि दर को देखते हुए यह कदम जरूरी हो गया है। सरकार का उद्देश्य जनसंख्या संतुलन बनाए रखना और भविष्य में संभावित जनसांख्यिकीय चुनौतियों से निपटना बताया जा रहा है।

    हालांकि इस योजना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। बृंदा karat ने कहा कि महिलाओं के शरीर और मातृत्व से जुड़े फैसले पूरी तरह व्यक्तिगत होने चाहिए। सरकार द्वारा आर्थिक लालच देकर महिलाओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित करना उनकी स्वायत्तता पर सीधा हमला है। उनका कहना है कि गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में इस योजना का दबाव सबसे अधिक महिलाओं पर पड़ेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि कई परिवारों में महिलाएं दो बच्चों के बाद परिवार पूरा मानती हैं, लेकिन अतिरिक्त आर्थिक सहायता के लालच में उन पर तीसरे और चौथे बच्चे के लिए दबाव बनाया जा सकता है। ऐसे मामलों में निर्णय लेने की स्वतंत्रता महिलाओं के हाथ में नहीं रह जाती और परिवार या समाज का दबाव बढ़ जाता है। बृंदा करात ने आशंका जताई कि सरकार द्वारा दिए जाने वाले पैसों पर भी महिलाओं का वास्तविक नियंत्रण नहीं होगा।

    वहीं सरकार का पक्ष इससे बिल्कुल अलग है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का कहना है कि दक्षिणी राज्यों में जनसंख्या वृद्धि दर लगातार घट रही है, जिसका असर भविष्य में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आर्थिक संतुलन पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में कामकाजी आबादी घटने से आर्थिक गतिविधियों और विकास पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से राज्य सरकार लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केवल जनसंख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे भविष्य के परिसीमन और संसदीय सीटों के संतुलन को लेकर भी चिंताएं जुड़ी हुई हैं। दक्षिणी राज्यों में लंबे समय से यह आशंका जताई जाती रही है कि कम जनसंख्या वृद्धि के कारण भविष्य में उनकी संसदीय सीटों का अनुपात प्रभावित हो सकता है।

    फिलहाल इस योजना ने देशभर में नई बहस को जन्म दे दिया है। एक तरफ सरकार इसे जनसंख्या संतुलन बनाए रखने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे महिलाओं के अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता में दखल करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और ज्यादा गर्मा सकता है।

  • मुख्यमंत्री योगी का जनता से सीधा संवाद, फरियादियों को दिया भरोसा- हर पीड़ित को मिलेगा न्याय

    मुख्यमंत्री योगी का जनता से सीधा संवाद, फरियादियों को दिया भरोसा- हर पीड़ित को मिलेगा न्याय

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर अपनी जनसुनवाई व्यवस्था ‘जनता दर्शन’ के माध्यम से आम लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया। व्यस्त सरकारी कार्यक्रमों के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने हर व्यक्ति की बात गंभीरता से सुनी और भरोसा दिलाया कि सरकार जनता की सेवा, सुरक्षा और सुशासन के संकल्प के साथ पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का संवेदनशील और सहज व्यवहार लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

    जनता दर्शन में पहुंचे फरियादियों ने भूमि विवाद, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी शिकायतों का तय समय सीमा के भीतर निष्पक्ष और प्रभावी समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी पीड़ित व्यक्ति को न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ना चाहिए और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि हर जरूरतमंद तक राहत पहुंचे। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को व्यक्तिगत रूप से मामलों की निगरानी करने के निर्देश भी दिए।

    कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा भावुक क्षण भी सामने आया जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। बिहार से आई एक महिला मुख्यमंत्री से मिलने पहुंची थीं। जब मुख्यमंत्री उनके पास पहुंचे और उनकी समस्या के बारे में पूछा तो महिला ने बताया कि उन्हें कोई परेशानी नहीं है, वह केवल मुख्यमंत्री के दर्शन करने आई हैं। महिला की इस बात पर मुख्यमंत्री मुस्कुराए और आत्मीयता के साथ उनका अभिवादन किया। इसके बाद उन्होंने महिला और वहां मौजूद अन्य लोगों से भीषण गर्मी में सावधानी बरतने और अपने परिवार का विशेष ध्यान रखने की अपील की। मुख्यमंत्री का यह सहज व्यवहार कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि गरीबों, जरूरतमंदों और पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के पहुंचना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से भूमि कब्जाने वाले भू-माफियाओं और दबंग तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक मशीनरी का उद्देश्य केवल फाइलों का निस्तारण नहीं बल्कि लोगों को वास्तविक राहत पहुंचाना होना चाहिए।

    जनता दर्शन कार्यक्रम लंबे समय से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली का अहम हिस्सा रहा है। इस मंच के जरिए आम नागरिक सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचा पाते हैं। कार्यक्रम में अक्सर ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं जहां लोग अपनी समस्याओं के साथ-साथ मुख्यमंत्री के प्रति विश्वास और समर्थन भी व्यक्त करते हैं। यही कारण है कि जनता दर्शन केवल शिकायत सुनने का मंच नहीं बल्कि सरकार और जनता के बीच संवाद का एक मजबूत माध्यम बन चुका है।

    सोमवार को आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सरकार प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बनाए रखने के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को भी प्राथमिकता दे रही है। जनता की समस्याओं के समाधान के साथ मुख्यमंत्री का सहज व्यवहार और संवेदनशील संवाद लोगों के बीच सकारात्मक संदेश छोड़ गया।

  • हाईटेंशन लाइन के नीचे शिफ्टिंग का विरोध, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बंगले पहुंचे रहवासी

    हाईटेंशन लाइन के नीचे शिफ्टिंग का विरोध, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बंगले पहुंचे रहवासी


    भोपाल ।
    भोपाल के बावड़ियाकलां स्थित दीपक नगर झुग्गी बस्ती से 35 परिवारों को बाग मुगालिया एक्सटेंशन में शिफ्ट किए जाने का मामला अब विवादों में घिर गया है। नई जगह पर पुनर्वास का विरोध करते हुए सोमवार को स्थानीय रहवासी नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बंगले पहुंचे और उन्हें ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।

    रहवासियों और स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि जिन परिवारों को बाग मुगालिया एक्सटेंशन में बसाया गया है, वह क्षेत्र ग्रीन बेल्ट के अंतर्गत आता है। इसके अलावा वहां से हाईटेंशन बिजली लाइन भी गुजर रही है, जिससे लोगों की सुरक्षा को लेकर खतरा बना हुआ है।

    पर्यावरणविद् उमाशंकर तिवारी ने कहा कि इस तरह की शिफ्टिंग से न केवल हरियाली को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि वहां रहने वाले परिवारों की जिंदगी भी जोखिम में पड़ सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित और बेहतर स्थान पर पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।

    मामले को लेकर रहवासियों ने भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा से भी शिकायत की है। लोगों का कहना है कि बिना उचित सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था के परिवारों को वहां बसाना सही नहीं है।

    रहवासियों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से अपील की है कि पुनर्वास नीति को मानवीय और सुरक्षित तरीके से लागू किया जाए, ताकि लोगों को मूलभूत सुविधाओं के साथ सुरक्षित आवास मिल सके और शहर की हरियाली भी प्रभावित न हो।

  • गोल्ड खरीदारी को लेकर बदल रही सोच: सर्वे में सामने आया पीएम मोदी की अपील का प्रभाव

    गोल्ड खरीदारी को लेकर बदल रही सोच: सर्वे में सामने आया पीएम मोदी की अपील का प्रभाव

    नई दिल्ली । देश में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने की खरीदारी को लेकर लोगों की सोच में बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुए एक सर्वे में यह सामने आया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर अब आम लोगों के व्यवहार पर भी दिखाई देने लगा है। बड़ी संख्या में भारतीयों ने अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की बात कही है।

    कुछ समय पहले प्रधानमंत्री ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और अनावश्यक सोने की खरीद पर नियंत्रण रखने की अपील की थी। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करना बताया गया था। अब एक सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि लोगों ने इस अपील को गंभीरता से लिया है और अपनी खरीदारी की आदतों पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है।

    सर्वे में शामिल लोगों में से लगभग 61 प्रतिशत ने कहा कि वे अगले एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने का प्रयास करेंगे। इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जो नियमित रूप से सोना खरीदते रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के चलते लोग अब खर्च को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं।

    भारत में सोने की खरीदारी केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सांस्कृतिक और पारिवारिक महत्व भी काफी गहरा है। शादियों, त्योहारों और पारंपरिक आयोजनों में सोना खरीदना लंबे समय से भारतीय समाज का हिस्सा रहा है। इसके बावजूद सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों का सोना खरीदने को लेकर संयम दिखाना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बीते वित्तीय वर्ष में भारत का सोना आयात बिल काफी बढ़ गया। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में तेज उछाल के कारण आयात की कुल लागत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। हालांकि आयात की मात्रा में बहुत ज्यादा वृद्धि नहीं हुई, लेकिन ऊंची कीमतों ने विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पैदा किया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग गैर-जरूरी सोना खरीदने में कमी करते हैं तो इससे देश की आर्थिक स्थिति को कुछ हद तक राहत मिल सकती है। विदेशी मुद्रा की बचत होने से आयात संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और आर्थिक दबाव कम किया जा सकेगा।

    हालांकि सर्वे में यह भी सामने आया कि सभी लोग अपनी पारंपरिक आदतें बदलने के लिए तैयार नहीं हैं। करीब 19 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे शादियों और पारिवारिक जरूरतों के लिए सोना खरीदना जारी रखेंगे। कई लोगों का यह भी मानना है कि आर्थिक अस्थिरता के दौर में सोना अब भी सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक है।

    इस सर्वे ने यह साफ कर दिया है कि देश में आर्थिक मुद्दों को लेकर लोगों की जागरूकता बढ़ रही है और सरकारी अपीलों का असर अब आम नागरिकों की सोच और फैसलों में भी दिखाई देने लगा है।