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  • MP में मानसून टूरिज्म का जबरदस्त क्रेज! मांडू में 14 से 16 अगस्त तक नो रूम, दतिया में 95% कमरे बुक

    MP में मानसून टूरिज्म का जबरदस्त क्रेज! मांडू में 14 से 16 अगस्त तक नो रूम, दतिया में 95% कमरे बुक

    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून के साथ पर्यटन का रंग भी गहरा हो गया है। बारिश के बाद झरनों पहाड़ियों नदियों और ऐतिहासिक स्मारकों की खूबसूरती पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। वहीं सावन सोमवार और नागपंचमी जैसे धार्मिक आयोजनों ने उज्जैन और दूसरे धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ा दी है। पचमढ़ी मांडू महेश्वर उज्जैन दतिया नलखेड़ा और ओरछा जैसे प्रमुख पर्यटन और धार्मिक केंद्रों में वीकेंड के दौरान होटल और गेस्ट हाउस की बुकिंग तेजी से बढ़ रही है। कई जगहों पर कमरे पहले से बुक हो चुके हैं और जहां कमरे उपलब्ध हैं वहां बढ़ती मांग के कारण किराया भी सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ गया है।

    मांडू में बारिश के मौसम में ऐतिहासिक इमारतों और पहाड़ियों का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। यही वजह है कि 14 से 16 अगस्त के बीच यहां होटल पूरी तरह बुक बताए जा रहे हैं। मांडू में करीब 2 सरकारी और 20 निजी होटल के अलावा 2 धर्मशालाएं हैं। यहां लगभग 800 कमरों की उपलब्धता है। सामान्य तौर पर कमरों का किराया 500 रुपए से शुरू होकर 10 हजार रुपए तक पहुंचता है। धर्मशालाओं में करीब 2 हजार रुपए तक में ठहरने की सुविधा मिल सकती है। मांडू में जहाज महल रानी रूपमती महल बाज बहादुर महल अशरफी महल और होशंग शाह का मकबरा जैसे ऐतिहासिक स्थल पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण हैं।

    उज्जैन में स्थिति और ज्यादा खास है। सावन सोमवार और नागपंचमी एक साथ पड़ने के कारण श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। शनिवार और रविवार को करीब 3 से 4 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है जबकि सावन सोमवार और नागपंचमी के दिन यह संख्या 5 से 6 लाख तक पहुंच सकती है। इसके चलते शहर के अधिकांश होटल पहले ही बुक हो चुके हैं। बचे हुए कमरों के किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सामान्य दिनों में 1500 रुपए में मिलने वाला कमरा वीकेंड पर करीब 2000 रुपए तक पहुंच गया है। महाकाल लोक के आसपास छोटे होटलों में किराया लगभग दोगुना तक बढ़ा है जबकि बड़े होटल 15 से 35 प्रतिशत तक अधिक कीमत ले रहे हैं।

    नर्मदा किनारे बसे महेश्वर में भी पर्यटकों की अच्छी भीड़ है। यहां 120 से ज्यादा होटल होम स्टे रिजॉर्ट धर्मशालाएं और पर्यटन निगम के ठहरने के विकल्प मौजूद हैं। कमरे का शुरुआती किराया करीब 1200 रुपए है लेकिन हेरिटेज और लग्जरी प्रॉपर्टीज में रॉयल रूम की कीमत 60 हजार रुपए तक पहुंच रही है। महेश्वर आने वाले पर्यटक अक्सर ओंकारेश्वर उज्जैन और मांडू का भी रुख करते हैं। अहिल्याबाई होलकर की विरासत होलकर फोर्ट और नर्मदा के घाट यहां के प्रमुख आकर्षण हैं।

    आगर मालवा के नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के कारण हर शनिवार और रविवार श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ रहती है। शहर में करीब 45 होटल हैं और कमरों का किराया 500 से 4500 रुपए तक है। वीकेंड को देखते हुए यहां भी एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी है।

    ओरछा में राजा राम मंदिर के कारण धार्मिक पर्यटन लगातार बना रहता है। यहां करीब 15 बड़े और 50 छोटे होटल के साथ लगभग 20 होम स्टे हैं। कमरों का किराया 3 हजार से 15 हजार रुपए तक बताया जाता है। वहीं दतिया में पीतांबरा माता मंदिर के चलते श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। शहर के करीब 90 होटल और धर्मशालाओं में लगभग 95 प्रतिशत कमरे पहले ही बुक हो चुके हैं।

    खजुराहो में फिलहाल पर्यटन सीजन अपेक्षाकृत कमजोर बताया जा रहा है लेकिन वीकेंड पर यहां भी पर्यटकों की संख्या बढ़ती है। करीब 200 होटल होम स्टे और अन्य ठहरने के विकल्प मौजूद हैं। फाइव स्टार होटलों का टैरिफ 30 से 60 हजार रुपए तक जबकि थ्री स्टार होटलों में ऑफ सीजन में करीब 5 से 7 हजार और सीजन में 10 से 12 हजार रुपए तक किराया पहुंच सकता है।

    ऐसे में अगर इस वीकेंड मध्य प्रदेश के किसी पर्यटन या धार्मिक स्थल पर घूमने का प्लान है तो होटल की एडवांस बुकिंग कराना समझदारी होगी। मानसून की खूबसूरती और धार्मिक आयोजनों के कारण इस समय कई लोकप्रिय जगहों पर आखिरी समय में कमरा मिलना मुश्किल हो सकता है।

  • MP: भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रपये की साइबर ठगी

    MP: भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रपये की साइबर ठगी


    कटनी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. राज्य के सबसे अमीर विधायकों में गिने जाने वाले और कटनी जिले (Katni district) के विजयराघवगढ़ (Vijayraghavgarh) से विधायक संजय पाठक (MLA Sanjay Pathak) की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रुपये की भारी-भरकम साइबर ठगी का मामला सामने आया है. शातिर साइबर ठगों ने कंपनी के सीनियर डायरेक्टर के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर अकाउंटेंट को चकमा दिया और बड़ी आसानी से पैसे ट्रांसफर करवा लिया।

    पूरी घटना बुधवार 12 अगस्त दोपहर करीब 2 बजे की है. विधायक संजय पाठक की कंपनी के सीनियर अकाउंटेंट शैलेश तिवारी के पास एक मैसेज आया. यह मैसेज कंपनी के ही एक सीनियर डायरेक्टर के मोबाइल नंबर से आया था, जिस पर उनकी फोटो भी लगी हुई थी. मैसेज में अकाउंटेंट को तुरंत किसी दूसरे बैंक खाते में डेढ़ करोड़ रुपये ट्रांसफर करने को कहा गया।

    चूंकि मैसेज सीधे सीनियर डायरेक्टर के नंबर और उनकी प्रोफाइल फोटो के साथ आया था, इसलिए अकाउंटेंट को किसी भी तरह का कोई शक नहीं हुआ. बिना देर किए अकाउंटेंट ने कंपनी के खाते से पैसे ट्रांसफर कर दिए. दो बार में ट्रांजेक्शन किए गए, जिसमें एक बार 1 करोड़ 16 लाख और दूसरी बार करीब 33 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए. इस तरह कुल मिलाकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये ठगों के खाते में चले गए।


    फ्लाइट से उतरते ही विधायक को मिली जानकारी

    दिलचस्प बात यह है कि जिस समय यह फ्रॉड हो रहा था, विधायक संजय पाठक फ्लाइट से यात्रा कर रहे थे. जैसे ही वह प्लेन से उतरे, उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक संजय पाठक ने तुरंत कटनी के पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा को पूरी घटना की जानकारी दी. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की. पुलिस ने कुछ राशि को होल्ड कराने के निर्देश दिए. कंपनी के अकाउंटेंट की शिकायत पर रंगनाथ नगर थाने में साइबर ठगी का मामला दर्ज कर लिया गया है।


    ‘बॉस स्कैम’ का शिकार हुई कंपनी

    कटनी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) कमल मौर्य ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि यह एक टिपिकल साइबर फ्रॉड है, जिसे ‘बॉस स्कैम’ कहा जाता है. इसमें ठग बड़े अधिकारियों की नकली प्रोफाइल बनाकर कर्मचारियों को झांसे में लेते हैं।

    एएसपी ने बताया कि साइबर ठगों ने मात्र दो-तीन घंटे के अंदर ही पूरी रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर साफ कर दिया. ठगी गई रकम को करीब 200 अलग-अलग जगहों पर डिस्ट्रीब्यूट किया गया, जिसे एटीएम और चेक के माध्यम से निकाला जा रहा है।

    पुलिस और साइबर सेल की टीम ने तुरंत ऐक्शन लेते हुए ठगों के खातों से अब तक करीब 23 लाख रुपये की राशि को होल्ड (फ्रीज) करवा लिया है. फिलहाल, साइबर सेल की टीम तकनीकी जांच में जुटी हुई है और ठगों के पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

  • NALSAR छात्रों को राहत: CJI सूर्यकांत के विरोध के बाद BCI ने एडवोकेट एनरोलमेंट पर रोक हटाई

    NALSAR छात्रों को राहत: CJI सूर्यकांत के विरोध के बाद BCI ने एडवोकेट एनरोलमेंट पर रोक हटाई


    नई दिल्ली। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों को बड़ी राहत दी है। BCI ने छात्रों के एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट पर लगाई गई रोक वापस ले ली है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच रिपोर्ट आने तक छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

    इससे पहले BCI ने सभी स्टेट बार काउंसिल को निर्देश दिया था कि NALSAR से 2026 में कानून की डिग्री हासिल करने वाले किसी भी छात्र का अगले आदेश तक एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट न किया जाए। यह विवाद यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने के विरोध से जुड़ा था।

    अब BCI ने अपने पहले आदेश की समीक्षा करते हुए पूरे 2026 बैच के एनरोलमेंट पर लगी रोक हटा दी है। साथ ही कहा है कि जांच रिपोर्ट मिलने से पहले इस मामले में छात्रों के खिलाफ कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा।

    BCI का दावा- शिक्षकों और बाहरी लोगों ने छात्रों को उकसाया
    BCI ने आरोप लगाया है कि NALSAR के कुछ छात्रों को कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने विरोध के लिए उकसाया था। परिषद ने मामले की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    BCI ने इससे पहले NALSAR के वाइस चांसलर से पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी थी। परिषद का कहना था कि यदि रिपोर्ट में छात्रों की ओर से किसी तरह की अनुशासनहीनता सामने नहीं आती है तो उनके एनरोलमेंट की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

    शुरुआती फैसले की कानूनी जगत में हुई आलोचना
    BCI के शुरुआती फैसले की कानूनी जगत में आलोचना हुई थी। इसके बाद परिषद ने अपने आदेश की समीक्षा की। BCI का कहना है कि शुरुआती जानकारी में सामने आया कि विरोध के पीछे कुछ शिक्षक और चुनिंदा बाहरी लोग शामिल थे और उन्होंने छात्रों को कथित तौर पर उकसाया।

    परिषद का मानना है कि पूरे बैच को इस घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। BCI के अनुसार, ज्यादातर छात्र विवाद में शामिल नहीं थे और न ही वे इस अभियान का हिस्सा बनना चाहते थे। इसी आधार पर छात्रों के करियर को ध्यान में रखते हुए 2026 बैच के सभी छात्रों के एनरोलमेंट पर लगी रोक हटाने का फैसला लिया गया।

    जांच रिपोर्ट के बाद हो सकती है आगे की कार्रवाई
    हालांकि, BCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। परिषद अब NALSAR प्रशासन की जांच रिपोर्ट का इंतजार करेगी। यदि अंतिम रिपोर्ट में सामने आता है कि कुछ लोगों ने छात्रों को विरोध के लिए उकसाया या इस घटनाक्रम में उनकी प्रमुख भूमिका थी, तो उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जा सकता है।

    पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने उठाए थे सवाल
    भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल ने भी BCI के शुरुआती फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि छात्रों के एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट पर रोक लगाना ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून के शासन का उल्लंघन है। वेणुगोपाल ने यह भी कहा था कि BCI के पास छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने का अधिकार नहीं है।

    BCI के शुरुआती आदेश के बाद NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई थी। स्टेट बार काउंसिल में एनरोलमेंट वकालत के पेशे में प्रवेश की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। ऐसे में रोक जारी रहने पर उन छात्रों पर भी असर पड़ सकता था, जिन्हें प्लेसमेंट मिल चुका है या जो वकालत शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।

    CJI के दीक्षांत समारोह में आने का हुआ था विरोध
    पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब NALSAR ने अपने दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने कथित तौर पर उनके कार्यक्रम में शामिल होने का विरोध किया। इसी घटनाक्रम का BCI ने संज्ञान लिया था।

    BCI के ताजा आदेश के बाद 2026 बैच के छात्रों का एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट फिलहाल बहाल हो गया है। अब आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी। जांच में अनुशासनहीनता नहीं मिलने पर छात्रों के खिलाफ किसी कार्रवाई की संभावना कम हो सकती है।

  • Weather: मानसून फिर हुआ सक्रिय…. दिल्ली समेत देश के कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट

    Weather: मानसून फिर हुआ सक्रिय…. दिल्ली समेत देश के कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    मौसम विभाग (IMD) ने 14 अगस्त को उत्तर-पश्चिम (North-west), मध्य, पूर्व, पूर्वोत्तर, पश्चिम और दक्षिण भारत (South India) के कई इलाकों (Rain) में बारिश का अनुमान जताया है. इस दौरान कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy Rain) हो सकती है. वहीं, कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ मौसम खराब रहने की आशंका है।

    तटीय पश्चिम बंगाल (Coastal West Bengal) के ऊपर बना डिप्रेशन अगले 24 घंटे में उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए गंगीय पश्चिम बंगाल और झारखंड की ओर जा सकता है. इसके प्रभाव से पूर्वी भारत के कई हिस्सों में तेज बारिश हो सकती है. मॉनसून ट्रफ भी सक्रिय है और अपनी सामान्य स्थिति के आसपास बनी हुई है।


    दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत में बारिश

    दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में 14 अगस्त को ज्यादातर इलाकों में बारिश होने का अनुमान है. हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में दिनभर रुक-रुककर बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है. आने वाले दिनों में भी इन इलाकों में बारिश का दौर जारी रह सकता है.


    यूपी में 14 से 18 अगस्त तक होगी बारिश

    उत्तर प्रदेश में भी मानसून सक्रिय रहेगा. पूर्वी यूपी में 14 से 18 अगस्त तक ज्यादातर इलाकों में बारिश का अनुमान है, जबकि पश्चिमी यूपी में 15 और 16 अगस्त को कई जगहों पर बारिश हो सकती है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 अगस्त तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है. पश्चिमी यूपी में 14 से 18 अगस्त के बीच भी कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. कई इलाकों में गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा.


    हिमाचल और उत्तराखंड के लिए भी अलर्ट

    हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 19 अगस्त तक कई से ज्यादातर इलाकों में बारिश होने का अनुमान है. 14 अगस्त को दोनों राज्यों में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. हिमाचल प्रदेश में बहुत भारी बारिश की भी आशंका है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी मौसम गीला रहने की संभावना है. 14 अगस्त को यहां कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. पूर्वी राजस्थान में भी भारी बारिश का अनुमान है, जबकि पश्चिमी राजस्थान में छिटपुट बारिश हो सकती है.


    मध्य भारत में भी भारी बारिश का दौर

    छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मॉनसून का असर तेज रहेगा. 14 अगस्त को छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में ज्यादातर जगहों पर बारिश हो सकती है. पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई इलाकों में बारिश का अनुमान है. पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. छत्तीसगढ़ में स्थिति ज्यादा गंभीर रह सकती है. यहां भारी से बहुत भारी बारिश और कुछ जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका है. लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।


    बंगाल, झारखंड और ओडिशा में बारिश

    पूर्वी भारत में गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा 14 अगस्त को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रह सकते हैं. इन राज्यों में कई से ज्यादातर स्थानों पर बारिश होने और कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है. तटीय पश्चिम बंगाल के ऊपर बना डिप्रेशन उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए गंगीय पश्चिम बंगाल और झारखंड को प्रभावित कर सकता है. इन इलाकों में बारिश के साथ गरज, बिजली और तेज झोंके वाली हवाएं चल सकती हैं. गंगीय पश्चिम बंगाल में थंडरस्क्वॉल की स्थिति भी बन सकती है, जहां हवा की रफ्तार 50-60 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है.


    पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत में भी बारिश

    पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई से ज्यादातर इलाकों में बारिश हो सकती है. अरुणाचल प्रदेश तथा असम और मेघालय में कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना है. नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी भारी बारिश हो सकती है. कई स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा रहेगा. पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा तथा मध्य महाराष्ट्र में कई इलाकों में बारिश हो सकती है. गुजरात क्षेत्र में भी ज्यादातर स्थानों पर बारिश का अनुमान है और कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. मराठवाड़ा तथा सौराष्ट्र और कच्छ में छिटपुट से कुछ इलाकों में बारिश होने की संभावना है।


    दक्षिण भारत में भी खूब बरसेगा मॉनसून

    दक्षिण भारत में तटीय कर्नाटक और केरल में कई से ज्यादातर इलाकों में बारिश होने का अनुमान है. केरल और तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के कुछ हिस्सों में गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने की आशंका है. आईएमडी के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 40-50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है।

    बंगाल की खाड़ी में समुद्र में रहेगा हलचल
    बंगाल की खाड़ी में भी मौसम खराब रहने की संभावना है. 14 अगस्त की सुबह तक उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और इससे लगे ओडिशा, पश्चिम बंगाल तथा उत्तर आंध्र प्रदेश के तटों पर 45-55 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. हवा के झोंकों की रफ्तार 65 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. इन क्षेत्रों के आसपास समुद्र के उग्र रहने की आशंका को देखते हुए आईएमडी ने मछुआरों को उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा उत्तर आंध्र प्रदेश के तटों के पास या समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है।

  • Maharashtra: नासिक में सुबह-सुबह महसूस किए गए भूकंप के झटके… तीव्रता 3.4 रही

    Maharashtra: नासिक में सुबह-सुबह महसूस किए गए भूकंप के झटके… तीव्रता 3.4 रही


    नासिक।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) के नासिक (Nashik) में शुक्रवार सुबह-सुबह भूकंप के झटके (Earthquake tremors) महसूस किए गए। जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 5 बजकर 32 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता 3.4 बताई जा रही है.

    इससे पहले महाराष्ट्र के पालघर में भी सोमवार रात करीब एक घंटे के अंदर भूकंप के दो झटके महसूस किए गए. दोनों झटकों की तीव्रता 3.4 रही थी। महाराष्ट्र के पालघर में पहला झटका रात 10:04 बजे महसूस किया गया. करीब 56 मिनट बाद 11 बजे फिर भूकंप आया. दोनों की तीव्रता 3.4 मापी गई।

    बता दें, भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है. 7.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप को खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है. वहीं, 2.0 या उससे कम तीव्रता वाले भूकंप माइक्रो भूकंप कहते हैं, जिन्हें अधिकांश लोग महसूस भी नहीं कर पाते. दूसरी ओर, 4.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप इमारतों और घरों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है।

    इस बीच, लद्दाख के लेह में भी गुरुवार को सुबह-सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, सुबह 6:05 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.5 दर्ज की गई।


    कैसे आता है भूकंप?

    धरती के अंदर 7 प्लेट्स ऐसी होती हैं जो लगातार घूम रही हैं. ये प्लेट्स जिन जगहों पर ज्यादा टकराती हैं, उसे फॉल्ट लाइन जोन कहते हैं. बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं. जब प्रेशर ज्यादा बनने लगता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं. इन प्लेट्स के टूटने के कारण अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है. इस डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।

  • राहु का धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश: अप्रैल 2027 तक 3 राशियों की बदलेगी किस्मत, बन रहे लाभ के योग

    राहु का धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश: अप्रैल 2027 तक 3 राशियों की बदलेगी किस्मत, बन रहे लाभ के योग


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में राहु को मायावी और रहस्यमयी ग्रह माना जाता है। राहु ने 1 अगस्त को मंगल के स्वामित्व वाले धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश किया है और अप्रैल 2027 तक इसी नक्षत्र में संचरण करेंगे। धनिष्ठा नक्षत्र को धन, समृद्धि, संगीत और प्रसिद्धि से जोड़कर देखा जाता है।

    ज्योतिष के अनुसार, मंगल के नक्षत्र में राहु का यह लंबा प्रवास कई राशियों के जीवन में सकारात्मक और बड़े बदलाव ला सकता है। इनमें मेष, मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है।

    मेष राशि: अटकी योजनाओं को मिलेगी रफ्तार
    मेष राशि के स्वामी मंगल हैं। ऐसे में राहु का मंगल के नक्षत्र में गोचर मेष राशि वालों के लिए शुभ माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में साहस और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ सकती है। लंबे समय से अटकी योजनाओं को गति मिलने के साथ नया कारोबार शुरू करने के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है। अचानक धन लाभ के योग बन सकते हैं। लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना भी है।

    मकर राशि: तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे
    धनिष्ठा नक्षत्र का संबंध मकर और कुंभ राशि से माना जाता है। मकर राशि वालों के लिए राहु का यह गोचर करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर ला सकता है। समाज और कार्यस्थल पर प्रभाव बढ़ेगा। पदोन्नति और नई जिम्मेदारियां मिलने के प्रबल योग बन सकते हैं। प्रॉपर्टी, मकान या वाहन खरीदने की इच्छा पूरी होने की संभावना है। निवेश से भी बड़ा फायदा मिलने के संकेत हैं।

    कुंभ राशि: आय के कई स्रोत बन सकते हैं
    कुंभ राशि के जातकों के लिए अप्रैल 2027 तक का समय आर्थिक मामलों में बड़ा बदलाव ला सकता है। आय के एक से अधिक स्रोत बनने के योग हैं। विदेश से जुड़े कारोबार या विदेशी कंपनियों में काम करने वाले लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है। प्रभावशाली लोगों से संपर्क बढ़ेंगे, जो करियर में आगे बढ़ने में मददगार साबित हो सकते हैं।

    राहु के शुभ प्रभाव के लिए करें ये उपाय
    – शनिवार को किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को सरसों का तेल या काले तिल का दान करें।
    – राहु के शुभ प्रभाव को बढ़ाने के लिए भगवान काल भैरव या भगवान शिव की आराधना करें।
    – नियमित रूप से ‘ॐ रां राहवे नमः’ मंत्र का जाप करें।

  • MP Board : कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का टाइम-टेबल जारी….

    MP Board : कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का टाइम-टेबल जारी….


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के लाखों छात्रों का यह इंतजार अब खत्म हो गया है। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (Madhya Pradesh Board of Secondary Education- MPBSE) ने साल 2027 की हाईस्कूल (High School) यानी कक्षा 10वीं और हायर सेकेंडरी (Higher Secondary) यानी कक्षा 12वीं की मुख्य परीक्षाओं का पूरा टाइम टेबल (Main Examinations – Full Timetable) जारी कर दिया है। इसके साथ साथ बोर्ड ने जून में होने वाली सप्लीमेंट्री यानी दूसरी परीक्षा का शेड्यूल भी सामने रख दिया है, ताकि छात्र समय रहते अपनी तैयारी का खाका खींच सकें। बोर्ड की तरफ से जारी जानकारी के मुताबिक कक्षा 12वीं की मुख्य परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होकर 19 मार्च 2027 तक चलेंगी। वहीं कक्षा 10वीं के छात्रों की परीक्षाएं 24 फरवरी से शुरू होंगी और 18 मार्च 2027 को खत्म होंगी।


    परीक्षा के दिन कैसा रहेगा शेड्यूल?

    दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक एक ही पाली में आयोजित होंगी। लेकिन असली मशक्कत परीक्षा शुरू होने से पहले ही शुरू हो जाती है। छात्रों को सेंटर पर सुबह 8 बजे तक पहुंचना अनिवार्य होगा, जबकि 8:30 बजे तक अपनी तय सीट पर बैठना होगा। जो छात्र 8:45 बजे के बाद पहुंचेंगे, उन्हें अंदर घुसने ही नहीं दिया जाएगा, यानी देरी की कोई गुंजाइश नहीं। प्रश्न पत्र सुबह 8:45 बजे बांटा जाएगा और उत्तर पुस्तिका 8:55 बजे दी जाएगी, जिसके बाद ठीक 9 बजे से परीक्षा शुरू हो जाएगी।

    12वीं की डेटशीट पर एक नजर
    कक्षा 12वीं की परीक्षा की शुरुआत जैव प्रौद्योगिकी, गायन वादन और तबला पखावज जैसे विषयों से होगी। इसके बाद 23 फरवरी को हिंदी, 26 फरवरी को अंग्रेजी और 16 मार्च को गणित की परीक्षा होगी। भौतिकी और अर्थशास्त्र सहित कई विषयों का पेपर 4 मार्च को है, जबकि रसायन विज्ञान, इतिहास और बिजनेस स्टडीज जैसे विषय 13 मार्च को रखे गए हैं। जीव विज्ञान 8 मार्च को और राजनीति विज्ञान 11 मार्च को होगा। परीक्षा का समापन 19 मार्च को भूगोल सहित अन्य विषयों के साथ होगा।

    12वीं की परीक्षाओं का पूरा शेड्यूल

    17 फरवरी – जैव प्रौद्योगिकी, गायन वादन, तबला पखावज
    18 फरवरी – उर्दू, मराठी
    20 फरवरी – संस्कृत
    22 फरवरी – एनएसक्यूएफ विषय, शारीरिक शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
    23 फरवरी – हिंदी
    24 फरवरी – ड्राइंग एंड डिजाइनिंग
    25 फरवरी – मनोविज्ञान
    26 फरवरी – अंग्रेजी
    1 मार्च – इंफॉर्मेटिक प्रैक्टिस
    3 मार्च – समाजशास्त्र
    4 मार्च – भौतिकी, अर्थशास्त्र सहित अन्य विषय
    8 मार्च – जीव विज्ञान
    11 मार्च – राजनीति विज्ञान
    13 मार्च – रसायन विज्ञान, इतिहास, बिजनेस स्टडीज सहित अन्य विषय
    16 मार्च – गणित
    17 मार्च – कृषि, गृह विज्ञान, अकाउंटेंसी
    19 मार्च – भूगोल सहित अन्य विषय


    10वीं की डेटशीट में क्या खास?

    कक्षा 10वीं की परीक्षा 24 फरवरी को मराठी, गुजराती, पंजाबी, सिंधी, पेंटिंग और कंप्यूटर जैसे विषयों से शुरू होगी। इसके बाद 2 मार्च को हिंदी, 5 मार्च को गणित (स्टैंडर्ड और बेसिक दोनों), 9 मार्च को अंग्रेजी और 12 मार्च को संस्कृत की परीक्षा होगी। विज्ञान का पेपर 15 मार्च को और सामाजिक विज्ञान का पेपर 18 मार्च को होगा, जो 10वीं की परीक्षा का आखिरी दिन भी है।


    10वीं की परीक्षाओं का पूरा शेड्यूल

    24 फरवरी- मराठी, गुजराती, पंजाबी, सिंधी, पेंटिंग, गायन वादन, तबला पखावज, कंप्यूटर
    25 फरवरी- एनएसक्यूएफ विषय, एआई
    27 फरवरी- उर्दू
    2 मार्च – हिंदी
    5 मार्च – गणित स्टैंडर्ड और बेसिक
    9 मार्च – अंग्रेजी
    12 मार्च – संस्कृत
    15 मार्च – विज्ञान
    18 मार्च – सामाजिक विज्ञान


    दूसरी यानी सप्लीमेंट्री परीक्षा कब?

    जो छात्र किसी कारणवश मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हो पाते या बेहतर स्कोर की उम्मीद रखते हैं, उनके लिए बोर्ड ने जून 2027 में दूसरे मौके का भी इंतजाम किया है। कक्षा 12वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा 11 जून से 30 जून 2027 तक होगी, जबकि कक्षा 10वीं की परीक्षा 15 जून से 30 जून 2027 के बीच आयोजित की जाएगी।


    प्रैक्टिकल एग्जाम का क्या शेड्यूल है?

    नियमित छात्रों के प्रैक्टिकल एग्जाम उन्हीं के स्कूल में होंगे, जबकि निजी छात्रों को इसके लिए तय किए गए अलग केंद्रों पर जाना होगा। मुख्य परीक्षा से जुड़े प्रैक्टिकल 1 फरवरी से 19 मार्च 2027 के बीच होंगे, वहीं जून की सप्लीमेंट्री परीक्षा के प्रैक्टिकल 11 जून से 30 जून 2027 तक चलेंगे। सटीक तारीख और समय जानने के लिए छात्रों को अपने स्कूल प्राचार्य या केंद्र अधीक्षक से संपर्क करना चाहिए।

    छात्रों के लिए जरूरी निर्देश
    बोर्ड ने साफ कर दिया है कि परीक्षा के दौरान अगर किसी दिन स्थानीय या सार्वजनिक अवकाश घोषित हो जाता है, तब भी परीक्षा की तारीख नहीं बदली जाएगी और तय टाइम टेबल के मुताबिक ही एग्जाम होगा। हालांकि जरूरत पड़ने पर बोर्ड परीक्षा की तारीख या समय में बदलाव कर सकता है, और ऐसी स्थिति में छात्रों को उचित माध्यमों से सूचित किया जाएगा। दिव्यांग छात्रों के लिए भी नियमानुसार विशेष सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। सलाह यही है कि छात्र अभी से टाइम टेबल को सामने रखकर पढ़ाई का शेड्यूल बना लें, ताकि आखिरी वक्त की भागदौड़ से बचा जा सके।

  • MP के पूर्वी हिस्से में आज तेज बारिश के आसार, जबलपुर-रीवा, शहडोल-सागर संभाग में अलर्ट

    MP के पूर्वी हिस्से में आज तेज बारिश के आसार, जबलपुर-रीवा, शहडोल-सागर संभाग में अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय हो गया है। शुक्रवार को जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, सागर, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, कटनी, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच या इससे ज्यादा बारिश हो सकती है।

    वहीं भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, मैहर, उमरिया, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है।

    बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम, MP में बढ़ी बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में 12 अगस्त की सुबह लो प्रेशर एरिया यानी निम्न दबाव क्षेत्र बना था। यह 13 अगस्त की सुबह डिप्रेशन में बदल गया। फिलहाल यह सिस्टम उत्तर-पश्चिम दिशा में पश्चिम बंगाल और झारखंड की ओर बढ़ रहा है।

    इसके प्रभाव से मानसून ट्रफ सक्रिय रहेगी। इससे मध्य प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। खासकर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

    MP में अब तक 20.7 इंच बारिश
    मौसम केंद्र के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक 524.8 मिमी यानी 20.7 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। यह सामान्य बारिश 23.5 इंच यानी 597 मिमी से 2.8 इंच कम है। इस तरह प्रदेश में अब तक कुल मिलाकर 12% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 20% और पश्चिमी हिस्से में 5% कम बारिश दर्ज की गई है।

    पूर्वी MP के कई जिलों में 53% तक कम बारिश
    जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अब तक 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में सामान्य से 5% से 53% तक कम पानी गिरा है।

    वहीं पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 3% से 47% तक कम बारिश हुई है।

    इन 12 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के 12 जिलों में अब तक औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल, गुना, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, अनूपपुर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, बड़वानी, खंडवा और खरगोन शामिल हैं।

  • चमोली की जिस टनल में हुआ हादसा, आखिर किस प्रोजेक्ट का है हिस्सा? जानें 444 MW की विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना के 5 बड़े फायदे

    चमोली की जिस टनल में हुआ हादसा, आखिर किस प्रोजेक्ट का है हिस्सा? जानें 444 MW की विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना के 5 बड़े फायदे


    चमोली।
    उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में गुरुवार शाम निर्माणाधीन सुरंग में मलबा और पानी घुसने से बड़ा हादसा हो गया। अचानक टनल में पानी और मलबा आने के कारण कई मजदूर अंदर फंस गए। राहत और बचाव दल ने करीब 13 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि बाकी मजदूरों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ NDRF, SDRF और मेडिकल टीम भी मौजूद है।

    हादसे के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर पहाड़ के भीतर इतनी बड़ी सुरंग क्यों बनाई जा रही थी? दरअसल, यह कोई सामान्य सड़क या आवाजाही की सुरंग नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की एक बड़ी जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है।

    यह सुरंग 444 मेगावाट की विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना (VPHEP) के तहत बनाई जा रही है। आइए जानते हैं इस प्रोजेक्ट की खासियत और इससे होने वाले फायदे।

    क्या है विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना?

    विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर विकसित की जा रही एक महत्वपूर्ण रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजना है।

    इस परियोजना में अलकनंदा नदी के तेज बहाव और करीब 237 मीटर के हेड का इस्तेमाल कर बिजली पैदा की जाएगी। यह परियोजना ऋषिकेश से लगभग 225 किलोमीटर दूर NH-58 पर स्थित है।

    परियोजना का निर्माण THDC इंडिया लिमिटेड कर रहा है, जबकि सुरंग निर्माण का काम HCC को दिया गया है। इसकी कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 444 मेगावाट है, जिसे 111-111 मेगावाट की चार यूनिट के जरिए हासिल किया जाएगा।

    कैसे काम करेगा पूरा प्रोजेक्ट?

    विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना को मुख्य रूप से तीन बड़े हिस्सों में समझा जा सकता है।

    1. 65 मीटर ऊंचा डायवर्जन डैम

    अलकनंदा नदी के पानी को परियोजना की दिशा में मोड़ने के लिए करीब 65 मीटर ऊंचे कंक्रीट डायवर्जन डैम का निर्माण किया जा रहा है।

    2. 13.4 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल

    यह परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण सुरंगों में से एक है। करीब 13.4 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल के जरिए नदी का पानी बिजली उत्पादन के लिए टर्बाइन तक पहुंचाया जाएगा।

    3. 3.04 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल

    टर्बाइन से बिजली पैदा होने के बाद पानी को दोबारा अलकनंदा नदी में छोड़ने के लिए करीब 3.04 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल बनाई जा रही है।

    पीपलकोटी में हुआ ताजा हादसा इसी जलविद्युत परियोजना के टनल निर्माण कार्य के दौरान हुआ है।

    परियोजना के 5 बड़े फायदे

    1. 444 मेगावाट बिजली का उत्पादन

    परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि 444 मेगावाट बिजली उत्पादन होगी। इससे उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

    2. नदी के बहाव से बिजली

    यह रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है। यानी बिजली उत्पादन के लिए नदी के प्राकृतिक बहाव और ऊंचाई के अंतर का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तरह बड़े पैमाने पर पानी को लंबे समय तक रोककर रखने की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है।

    3. स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा

    जलविद्युत को नवीकरणीय ऊर्जा के प्रमुख स्रोतों में गिना जाता है। परियोजना से बिजली उत्पादन बढ़ने पर कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    4. राज्य की ऊर्जा जरूरतों में मदद

    444 मेगावाट की क्षमता वाली परियोजना उत्तराखंड की ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत कर सकती है। इससे राज्य को बिजली की उपलब्धता बढ़ाने और ऊर्जा क्षेत्र में अपनी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।


    5. स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियां

    इतनी बड़ी परियोजना के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। इसके साथ ही निर्माण कार्य, परिवहन, स्थानीय सेवाओं और दूसरे कारोबारों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

    हादसे के बाद रेस्क्यू पर नजर

    पीपलकोटी टनल हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में बड़े निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल प्राथमिकता टनल के अंदर फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। NDRF, SDRF और अन्य बचाव दल मौके पर जुटे हैं और ऑपरेशन लगातार जारी है।

    हालांकि यह परियोजना उत्तराखंड की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन चमोली जैसे संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र में सुरंग निर्माण के दौरान मजदूरों की सुरक्षा, भूगर्भीय जोखिम और आपातकालीन बचाव व्यवस्था भी उतनी ही अहम हो जाती है।

  • उज्जैन सिंहस्थ की तैयारियों में तेजी के संकेत, भाजपा नेता जगदीश अग्रवाल को मेला प्राधिकरण की अध्यक्षता की जिम्मेदारी मिली

    उज्जैन सिंहस्थ की तैयारियों में तेजी के संकेत, भाजपा नेता जगदीश अग्रवाल को मेला प्राधिकरण की अध्यक्षता की जिम्मेदारी मिली

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों को लेकर राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण नियुक्ति की है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उज्जैन विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल को सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। शासन की ओर से देर शाम नियुक्ति संबंधी आदेश जारी किया गया।

    जगदीश अग्रवाल लंबे समय से उज्जैन की राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के पूर्व नगर अध्यक्ष के साथ प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य भी रह चुके हैं। इसके अलावा वह उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक और विकास संबंधी कार्यों से उनके जुड़ाव को देखते हुए सिंहस्थ से संबंधित जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    सिंहस्थ 2028 उज्जैन के लिए बड़े धार्मिक और प्रशासनिक आयोजनों में शामिल है। इस आयोजन में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में मेला क्षेत्र का विकास, यातायात व्यवस्था, मूलभूत सुविधाएं, सुरक्षा, स्वच्छता और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को समय रहते तैयार करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी।

    अब तक सिंहस्थ की पूर्व तैयारियों और प्रशासनिक समन्वय से जुड़े कामों की कमान संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह तथा स्थानीय प्रशासन के स्तर पर चल रही थी। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, निर्माण कार्यों की प्रगति और प्रस्तावित योजनाओं को लेकर लगातार बैठकें की जा रही हैं।

    मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद सिंहस्थ से जुड़े कार्यों में शासन और प्रशासन के बीच समन्वय को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। अध्यक्ष के स्तर पर मेला आयोजन से संबंधित विभिन्न विषयों को लेकर विभागों और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होगी।

    सिंहस्थ की तैयारियों में उज्जैन शहर के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जाता है। श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए सड़क, परिवहन और पार्किंग व्यवस्था के साथ पेयजल, बिजली, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करना भी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

    जगदीश अग्रवाल को उज्जैन विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष के रूप में शहर के विकास से जुड़े विषयों का अनुभव रहा है। इसी वजह से सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन में उनकी भूमिका को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि आगामी तैयारियों में विभिन्न विभागों और प्रशासनिक एजेंसियों के साथ सामूहिक समन्वय सबसे अहम रहेगा।

    सिंहस्थ 2028 को लेकर राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से कई स्तरों पर तैयारियां पहले से जारी हैं। मेला क्षेत्र के विकास से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक विभिन्न प्रस्तावों पर काम किया जा रहा है। आने वाले समय में इन योजनाओं के क्रियान्वयन और समयसीमा तय करने की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है।

    अध्यक्ष की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर आधारभूत व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है। मेला प्राधिकरण के स्तर पर होने वाले निर्णयों और विभागीय समन्वय से आगामी महीनों में तैयारियों की गति और स्वरूप स्पष्ट होगा।

    उज्जैन में होने वाला सिंहस्थ धार्मिक आस्था के साथ शहर की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर होता है। इसलिए आयोजन की तैयारियों में प्रशासनिक व्यवस्था के साथ स्थायी विकास कार्यों पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। जगदीश अग्रवाल की नियुक्ति के बाद अब सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से जुड़े कामों को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।