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  • रजत मुकुट और त्रिशूल के साथ महाकाल का दिव्य स्वरूप, रविवार की भस्म आरती में उमड़ा सैलाब

    रजत मुकुट और त्रिशूल के साथ महाकाल का दिव्य स्वरूप, रविवार की भस्म आरती में उमड़ा सैलाब


    मध्यप्रदेश। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान भव्य और दिव्य दृश्य देखने को मिला, जब सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही संपूर्ण गर्भगृह भक्तिभाव और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा।

    पट खुलने के बाद पंडे-पुजारियों ने सर्वप्रथम गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और पंचामृत दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से उनका अभिषेक कर विशेष पूजन-अर्चन संपन्न हुआ।

    इसके पश्चात भगवान महाकाल को भांग, त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू अर्पित कर उनका दिव्य श्रृंगार किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर पारंपरिक रूप से भस्म रमाई गई, जो भस्म आरती की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है।

    भस्म अर्पित होने के बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई। साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों से बनी आकर्षक मालाओं से उनका श्रृंगार किया गया। इसके बाद फल और मिष्ठान का भोग अर्पित कर राजा स्वरूप दर्शन को पूर्ण किया गया।

    इस अद्भुत भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और उन्होंने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे मंदिर परिसर में “हर हर महादेव” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

    मान्यता के अनुसार, भस्म आरती के दौरान जब भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है, तो वे निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसे अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।

    महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से भस्म अर्पण की परंपरा निभाई गई, जिससे यह आरती और भी विशेष और आध्यात्मिक महत्व की बन गई।

  • मंदिर पहुंची लेकिन दर्शन न कर सकी: उज्जैन में बुजुर्ग महिला की दर्दनाक मौत

    मंदिर पहुंची लेकिन दर्शन न कर सकी: उज्जैन में बुजुर्ग महिला की दर्दनाक मौत


    मध्यप्रदेश। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर के बाहर शनिवार को एक अत्यंत भावुक कर देने वाली घटना सामने आई, जहां नासिक से आई 50 वर्षीय बुजुर्ग महिला की दर्शन की अंतिम इच्छा अधूरी रह गई और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

    जानकारी के अनुसार, महिला सीमा अपने पति भेरू के साथ लंबे समय से बीमार चल रही थीं और अपनी अंतिम इच्छा के रूप में महाकालेश्वर भगवान के दर्शन करने उज्जैन पहुंची थीं। पति स्वयं भी अस्वस्थ थे, लेकिन इसके बावजूद वे पत्नी को ट्राइसाइकिल के सहारे मंदिर तक लेकर पहुंचे।

    दोनों पति-पत्नी किसी तरह संघर्ष करते हुए मंदिर के गेट तक पहुंचे, लेकिन जैसे ही वे प्रवेश द्वार के पास पहुंचे, महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। कुछ ही क्षणों में उनकी हालत गंभीर हो गई और उन्होंने वहीं दम तोड़ दिया।

    घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर समाजसेवी अनिल डागर तत्काल वहां पहुंचे और उन्होंने पीड़ित परिवार की मदद करते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं संभालीं।

    परिवार की स्थिति को देखते हुए अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी समाजसेवी की मदद से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पूरी कराई गई। इस घटना ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और हर किसी की आंखें नम हो गईं। महाकाल मंदिर परिसर के बाहर घटी यह घटना श्रद्धा, आस्था और जीवन की नश्वरता का गहरा संदेश छोड़ गई।

  • उज्जैन सड़क हादसा: अंधेरे और निर्माण कार्य के बीच कार पलटी, एक युवक की जान गई

    उज्जैन सड़क हादसा: अंधेरे और निर्माण कार्य के बीच कार पलटी, एक युवक की जान गई


    मध्यप्रदेश। उज्जैन जिले के बदनावर बायपास पर रविवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें इंदौर से सांवरिया सेठ दर्शन के लिए जा रहे युवकों की खुशियों से भरी यात्रा मातम में बदल गई। इस हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि 12वीं कक्षा के सात छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए।

    जानकारी के अनुसार, सभी युवक इंदौर से एक स्कॉर्पियो वाहन में सवार होकर सांवरिया सेठ के दर्शन और जन्मदिन मनाने के लिए रवाना हुए थे। यात्रा के दौरान यह हादसा सुबह करीब 4 बजे हुआ, जब सड़क पर घना अंधेरा था और सामने एक मृत गाय पड़ी होने के साथ-साथ सड़क निर्माण कार्य भी चल रहा था।

    इसी दौरान चालक ने वाहन को साइड में लेने की कोशिश की, लेकिन सड़क की स्थिति खराब होने और संतुलन बिगड़ने के कारण स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी। अचानक हुए इस हादसे से मौके पर चीख-पुकार मच गई।

    हादसे में 18 वर्षीय विशाल परिहार की मौत हो गई, जो इंदौर के एक कैफे में शेफ के रूप में काम करता था। वह अपने दोस्तों के साथ जन्मदिन और धार्मिक यात्रा के लिए निकला था, लेकिन यह सफर उसके जीवन का अंतिम सफर साबित हुआ। मृतक अपने परिवार में एक बहन और बड़े भाई के साथ जुड़ा हुआ था, जबकि उसके पिता पचोर के रहने वाले हैं।

    हादसे में घायल हुए अन्य युवकों की पहचान निलेश, पीयूष, चंदन, जीवन, ओम, आयुष और मिलन के रूप में हुई है। इनमें से निलेश और पीयूष की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद इंदौर रेफर किया गया है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

    यह हादसा एक बार फिर रात के समय खराब सड़क व्यवस्था और लापरवाही से हो रहे हादसों की गंभीरता को उजागर करता है।

  • जिंदगी की जंग जीती नन्ही परी: 8 दिन की बच्ची की मुंबई में सफल हार्ट सर्जरी

    जिंदगी की जंग जीती नन्ही परी: 8 दिन की बच्ची की मुंबई में सफल हार्ट सर्जरी


    मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश के शहडोल जिले से एक भावुक कर देने वाली और राहत भरी खबर सामने आई है, जहां महज 8 दिन की नवजात बच्ची ने जिंदगी की जंग जीतनी शुरू कर दी है। बच्ची के दिल में जन्मजात छेद होने के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, जिसे देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल उच्च स्तरीय इलाज की आवश्यकता बताई।

    परिजन बच्ची को जबलपुर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां जांच के बाद पता चला कि स्थिति बेहद गंभीर है और तत्काल उन्नत कार्डियक सर्जरी की जरूरत है। इसके बाद राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई से बच्ची को एयर एम्बुलेंस के माध्यम से मुंबई स्थित नारायणा अस्पताल भेजा गया।

    इस पूरी प्रक्रिया को आरबीएसके योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क किया गया। करीब 1.60 लाख रुपये की लागत वाला यह इलाज पूरी तरह सरकारी सहायता से संभव हो पाया।

    डॉक्टरों के अनुसार, जन्म के कुछ ही दिनों बाद बच्ची की तबीयत तेजी से बिगड़ रही थी। जब उसे जबलपुर लाया गया, तब ऑक्सीजन स्तर केवल 30 से 50 के बीच रह गया था, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है। तत्काल उपचार शुरू कर उसे एचएनसीयू वार्ड में रखा गया।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की निगरानी में एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई। बच्ची के पिता विक्रम दाहिया और अन्य परिजन भी उसके साथ मुंबई पहुंचे, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया।

    मुंबई के नारायणा अस्पताल में पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रिया प्रधान और कार्डियक सर्जन डॉ. प्रदीप कौशिक की टीम ने शनिवार को सफल सर्जरी की। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की हालत अब स्थिर है और सभी अंग—ब्रेन, किडनी और लीवर—सही तरीके से काम कर रहे हैं।

    सर्जरी के बाद बच्ची को एचएनसीयू में निगरानी में रखा गया है और उसमें लगातार सुधार देखा जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर इसी तरह सुधार जारी रहा तो जल्द ही उसे पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया जा सकता है।

    यह मामला न केवल चिकित्सा क्षेत्र की सफलता को दर्शाता है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और समय पर लिए गए निर्णयों की अहमियत को भी उजागर करता है, जिससे एक मासूम की जान बचाई जा सकी।

  • दोस्ती बनी दुश्मनी: आपत्तिजनक हरकत के बाद गला दबाकर हत्या से हड़कंप

    दोस्ती बनी दुश्मनी: आपत्तिजनक हरकत के बाद गला दबाकर हत्या से हड़कंप


    मध्यप्रदेश। जबलपुर शहर के धनवंतरी नगर क्षेत्र में सामने आए सनसनीखेज हत्याकांड का पुलिस ने 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। इस मामले में 28 वर्षीय युवक सुरेंद्र सिंह उर्फ चिंगम की हत्या उसके ही खास दोस्त आयुष यादव (26) ने की थी, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

    पुलिस पूछताछ में आरोपी आयुष यादव ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसका कहना है कि वह पिछले लगभग दो वर्षों से मृतक सुरेंद्र के संपर्क में था, लेकिन इस दौरान सुरेंद्र अक्सर उसके साथ गलत तरीके से व्यवहार करता था और शराब के नशे में उसे परेशान करता था। आरोपी के अनुसार, कई बार मना करने के बावजूद वह लगातार उसे बुलाकर प्रताड़ित करता और मारपीट करता था।

    आयुष ने पुलिस को बताया कि घटना वाली रात भी सुरेंद्र ने उसे बुलाया और फिर कथित रूप से गलत हरकतें करने लगा। विरोध करने पर मारपीट हुई, जिससे वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गया। इसी तनाव और गुस्से में उसने हत्या करने का निर्णय ले लिया।

    पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पहले गमछे से गला दबाकर सुरेंद्र की हत्या की और बाद में मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए उसके बाएं हाथ की नस चाकू से काट दी। शव शुक्रवार सुबह उसके कमरे में मिला था, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई थी।

    प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि घटना से पहले सुरेंद्र का स्थानीय लोगों से विवाद हुआ था। वह शराब के नशे में गाली-गलौज कर रहा था, जिसके बाद वह अपने कमरे की ओर गया। कुछ ही समय बाद वहां विवाद और गिरने की आवाजें सुनी गई थीं। बाद में जब लोग पहुंचे तो आयुष वहां मौजूद था और उसने खुद को उसका दोस्त बताते हुए कहा कि वह ज्यादा शराब पीकर गिर गया है।

    इसके बाद दोनों अन्य लोगों ने उसे कमरे तक पहुंचाया, लेकिन अगली सुबह उसकी मौत की जानकारी मिली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट हुआ कि श्वासनली टूटने से गला घुटने के कारण उसकी मौत हुई है।

    एएसपी पल्लवी शुक्ला ने बताया कि मृतक सुरेंद्र के खिलाफ भी आधा दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। वहीं आरोपी आयुष ने पूछताछ में दावा किया कि वह लंबे समय से मानसिक रूप से परेशान था और लगातार प्रताड़ना से तंग आकर उसने यह कदम उठाया।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और कई नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

  • 4.72 करोड़ की मसूर खरीदी बनी विवाद: 6756 क्विंटल अमानक अनाज का मामला

    4.72 करोड़ की मसूर खरीदी बनी विवाद: 6756 क्विंटल अमानक अनाज का मामला


    मध्यप्रदेश। शिवपुरी जिले में समर्थन मूल्य खरीदी व्यवस्था के तहत बड़ी अनियमितता सामने आई है, जहां 4.72 करोड़ रुपये मूल्य की 6756 क्विंटल मसूर अमानक पाई गई है। उपार्जन केंद्रों से भंडारण के लिए भेजी गई इस मसूर में तय मानक से अधिक मात्रा में मिट्टी और कचरे की मौजूदगी पाई गई, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार, जिले में चना और मसूर की खरीदी मार्कफेड द्वारा की जा रही है, जबकि उपार्जन की जिम्मेदारी सेवा सहकारी संस्थाओं को सौंपी गई है। इन संस्थाओं ने निर्धारित गुणवत्ता मानकों की अनदेखी करते हुए भारी मात्रा में अमानक मसूर की खरीद कर ली। मानक के अनुसार उपज में अधिकतम 2 प्रतिशत तक ही कचरा और मिट्टी की अनुमति है, लेकिन जांच में 2.50 प्रतिशत से लेकर 5.50 प्रतिशत तक अशुद्धियां पाई गईं।

    गोदामों में भंडारण से पहले जब मार्कफेड सर्वेयरों ने सैंपल जांच की, तो बड़ी मात्रा में गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद 6756 क्विंटल मसूर को अमानक घोषित कर अलग स्टेक में सुरक्षित रखवा दिया गया है। साथ ही संबंधित संस्थाओं को पत्र जारी कर इस मसूर की अपग्रेडिंग यानी सफाई और सुधार की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, अपग्रेडिंग पूरी होने तक इस मसूर के खिलाफ कोई भुगतान जारी नहीं किया जाएगा। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है, क्योंकि कुल लगभग 4.72 करोड़ रुपये का भुगतान फिलहाल अटक गया है। कई मामलों में यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कौन सी अमानक उपज किन किसानों से संबंधित है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।

    जिले में अब तक 2316 किसानों से 64,529 क्विंटल मसूर और 356 किसानों से 8,885 क्विंटल चना की खरीदी की जा चुकी है। कुल 31.60 करोड़ रुपये मूल्य की उपज में से 21.62 करोड़ रुपये के ईपीओ जारी किए गए हैं, जिनमें से 15.09 करोड़ रुपये किसानों के खातों में पहुंच चुके हैं।

    हालांकि, 10 प्रतिशत से अधिक मसूर अमानक पाए जाने के कारण किसानों के भुगतान पर संकट गहराता जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जब तक पूरी उपज को मानक के अनुरूप अपग्रेड नहीं किया जाता, तब तक भुगतान प्रक्रिया रुकी रहेगी। वहीं चना और मसूर की खरीद 28 मई तक जारी रहने की जानकारी भी दी गई है।

    यह मामला न केवल खरीद प्रक्रिया की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि किसानों के भुगतान में देरी की गंभीर समस्या को भी उजागर करता है।

  • 10 फीट गड्ढे में फंसा सांड, नगर परिषद की टीम ने ऐसे निकाला बाहर

    10 फीट गड्ढे में फंसा सांड, नगर परिषद की टीम ने ऐसे निकाला बाहर


    मध्यप्रदेश। शिवपुरी जिले के कोलारस कस्बे में उस समय राहत भरी खबर सामने आई जब दो दिनों से 10 फीट गहरे गड्ढे में फंसे एक सांड को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यह सांड नवीन सब्जी मंडी क्षेत्र स्थित आईटीआई कॉलेज के पास बनी पानी की टंकी के गड्ढे में गिर गया था, जिससे वह बाहर नहीं निकल पा रहा था।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, सांड करीब दो दिनों से उसी गड्ढे में फंसा हुआ था। लगातार कोशिशों के बावजूद वह बाहर नहीं निकल सका, जिसके बाद मामले की सूचना नगर परिषद और संबंधित संगठनों को दी गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत रेस्क्यू टीम सक्रिय हुई।

    सूचना मिलते ही विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और नगर परिषद के कर्मचारियों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। पहले सांड को सुरक्षित तरीके से शांत करने का प्रयास किया गया, ताकि उसे बिना किसी चोट के बाहर निकाला जा सके।

    इसके बाद जेसीबी और अन्य संसाधनों की मदद से गड्ढे के आसपास की स्थिति को नियंत्रित किया गया। काफी मशक्कत और सावधानीपूर्वक प्रयासों के बाद आखिरकार सांड को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिल गई। पूरे ऑपरेशन के दौरान स्थानीय लोगों की भारी भीड़ मौके पर मौजूद रही और राहत की सांस ली गई।

    यह रेस्क्यू अभियान लगभग दो दिनों तक चला, जिसमें सभी टीमों ने मिलकर धैर्य और सूझबूझ के साथ काम किया। सफल रेस्क्यू के बाद सांड को सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया गया।

    इस घटना ने स्थानीय स्तर पर राहत का माहौल बनाया और यह भी दिखाया कि आपसी सहयोग से मुश्किल से मुश्किल स्थिति को भी नियंत्रित किया जा सकता है।

  • असम में बकरीद पर बड़ा सामाजिक संदेश: गो-कुर्बानी से परहेज की स्वैच्छिक पहल, भाईचारे की नई मिसाल

    असम में बकरीद पर बड़ा सामाजिक संदेश: गो-कुर्बानी से परहेज की स्वैच्छिक पहल, भाईचारे की नई मिसाल

    नई दिल्ली। बकरीद के अवसर पर असम से सामने आई एक सामाजिक और प्रशासनिक रूप से संवेदनशील पहल ने देशभर में आपसी सौहार्द, कानून के पालन और धार्मिक समन्वय को लेकर नई चर्चा को जन्म दिया है। राज्य के धुबरी, होजाई, बोंगाईगांव और उधारबंद सहित कई क्षेत्रों की ईदगाह और कब्रिस्तान कमेटियों ने इस वर्ष बकरीद के दौरान गो-वध से स्वैच्छिक रूप से दूरी बनाए रखने का निर्णय लेते हुए समुदाय से औपचारिक अपील जारी की है। इस निर्णय को केवल धार्मिक परंपरा के बदलाव के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे सामाजिक शांति, कानूनी अनुपालन और सामुदायिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक व्यावहारिक प्रयास माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह कदम विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और भरोसे को बढ़ाने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।

    असम में लागू मवेशी संरक्षण कानून के तहत गाय के वध पर सख्त प्रतिबंध है और इसके उल्लंघन पर कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इस कानून के अनुसार दोषी पाए जाने पर कारावास और आर्थिक दंड जैसी सजा दी जा सकती है। इसी कानूनी ढांचे को ध्यान में रखते हुए ईदगाह कमेटियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि से बचना आवश्यक है जो कानून का उल्लंघन बने या जिससे अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न हो। कमेटियों का कहना है कि धार्मिक परंपराओं को निभाते हुए भी कानून का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है, और इसी संतुलन के साथ समाज में शांति बनाए रखी जा सकती है।

    धार्मिक दृष्टिकोण से जारी संदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस्लाम में कुर्बानी का मूल उद्देश्य आस्था, समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है, न कि किसी विशेष पशु तक सीमित परंपरा। इसी कारण समुदाय से आग्रह किया गया है कि वे वैध विकल्पों के माध्यम से धार्मिक कर्तव्यों का पालन करें, जिससे किसी भी प्रकार की धार्मिक या सामाजिक भावना प्रभावित न हो। यह पहल इस विचार को भी सामने लाती है कि धार्मिक आस्था और सामाजिक संवेदनशीलता एक साथ आगे बढ़ सकती हैं, बशर्ते संवाद और समझ का मार्ग अपनाया जाए।

    कमेटियों ने अपने अपील पत्र में यह भी कहा है कि भारत जैसे विविधता वाले देश में विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच आपसी भाईचारा, शांति और सद्भाव बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसी संदर्भ में यह भी अनुरोध किया गया है कि कोई भी ऐसा कार्य न किया जाए जिससे किसी अन्य समुदाय की भावनाएं आहत हों या सामाजिक वातावरण में तनाव पैदा हो। पिछले वर्ष कुछ क्षेत्रों में उत्पन्न हुई अप्रिय घटनाओं का उल्लेख करते हुए इस बार विशेष सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ त्योहार मनाने की अपील की गई है ताकि ऐसी स्थितियों की पुनरावृत्ति न हो।

    डिजिटल युग में सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए यह भी निर्देश दिया गया है कि कुर्बानी से संबंधित किसी भी प्रकार की तस्वीर या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न की जाए। इस अपील का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनावश्यक विवाद या गलतफहमी की स्थिति न बने और समाज में शांति और सद्भाव का वातावरण बना रहे। यह कदम आधुनिक संचार माध्यमों के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए एक सावधानीपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

    इस पूरे मामले पर राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। मुख्यमंत्री ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक एकता और आपसी सम्मान को मजबूत करने वाला कदम बताया है। प्रशासन की ओर से भी बकरीद के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और केवल निर्धारित स्थानों पर ही धार्मिक गतिविधियों को अनुमति देने पर जोर दिया गया है।

    कुल मिलाकर असम की यह पहल इस बात का संकेत देती है कि यदि समाज स्वेच्छा से संवाद, समझ और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़े, तो धार्मिक परंपराएं और सामाजिक व्यवस्था एक-दूसरे के पूरक बन सकती हैं। यह उदाहरण यह भी दर्शाता है कि विविधता भरे समाज में संतुलन और शांति बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास कितने महत्वपूर्ण होते हैं।

  • जैक खिसका और खत्म हो गई जिंदगी: वेयरहाउस के पास ट्रक ड्राइवर की दर्दनाक मौत

    जैक खिसका और खत्म हो गई जिंदगी: वेयरहाउस के पास ट्रक ड्राइवर की दर्दनाक मौत


    मध्यप्रदेश। शिवपुरी जिले के अमोला थाना क्षेत्र अंतर्गत सिरसौद गांव के पास शनिवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया, जिसमें एक ट्रक चालक की जान चली गई। यह हादसा उस समय हुआ जब सरकारी गेहूं से लदा ट्रक वेयरहाउस के पास पहुंचा हुआ था और उसी दौरान वाहन के टायर में तकनीकी खराबी आ गई।

    जानकारी के अनुसार, ट्रक चालक सुरेंद्र पाल, जो गजऊआ गांव (थाना बैराड़) का निवासी था, टायर बदलने का कार्य कर रहा था। इसी दौरान उसने ट्रक को जैक के सहारे खड़ा कर टायर में हवा भरने की कोशिश की, लेकिन अचानक जैक खिसक गया। इसी लापरवाही और असंतुलन के चलते भारी-भरकम ट्रक आगे की ओर सरक गया और चालक सीधे उसके नीचे दब गया।

    ट्रक स्टाफ के सदस्य भगवान सिंह पाल ने बताया कि टायर बदलने के दौरान सुरक्षा के लिए कोई अतिरिक्त सपोर्ट या ओट नहीं लगाई गई थी, जिसके कारण वाहन असंतुलित होकर आगे बढ़ गया और यह बड़ा हादसा हो गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल घायल चालक को बाहर निकालने की कोशिश की।

    गंभीर रूप से घायल सुरेंद्र पाल को आनन-फानन में एंबुलेंस के माध्यम से जिला अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। बताया गया कि शिवपुरी शहर पहुंचने से पहले ही चालक ने रास्ते में दम तोड़ दिया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    घटना की जानकारी मिलते ही जिला अस्पताल चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मर्ग कायम कर लिया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और यह पता लगाया जा रहा है कि सुरक्षा मानकों में कहां चूक हुई। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर भारी वाहनों के रखरखाव और सुरक्षा उपायों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • कड़ी सुरक्षा और जैमर के बीच परीक्षा, मोबाइल-बैग सहित इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर पूरी पाबंदी

    कड़ी सुरक्षा और जैमर के बीच परीक्षा, मोबाइल-बैग सहित इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर पूरी पाबंदी


    मध्यप्रदेश। ग्वालियर शहर में रविवार को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच शुरू हुआ। शहर के कुल 21 परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा आयोजित की जा रही है, जिसमें 6652 अभ्यर्थी अपने भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक में शामिल हो रहे हैं।

    सुबह से ही परीक्षा केंद्रों के बाहर अभ्यर्थियों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। सभी परीक्षार्थियों को सख्त चेकिंग प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही परीक्षा हॉल में प्रवेश दिया गया। प्रशासन ने परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक व्यवस्था की है।

    परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, बैग, जूते और किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। यहां तक कि परीक्षा हॉल में जूते-मोजे पहनकर प्रवेश भी वर्जित किया गया है, जबकि अभ्यर्थियों को केवल चप्पल पहनकर अंदर जाने की अनुमति दी गई है। साथ ही पारदर्शी पानी की बोतल ले जाने की अनुमति दी गई है।

    परीक्षा को दो सत्रों में आयोजित किया जा रहा है। पहला सत्र सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक और दूसरा सत्र दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक संपन्न होगा। सभी परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक नकल या संचार की संभावना को रोका जा सके।

    प्रशासन ने कलेक्टर कार्यालय के कक्ष क्रमांक-113 में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जो परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए लगातार सक्रिय रहेगा। यह कंट्रोल रूम सुबह 7 बजे से लेकर परीक्षा समाप्ति तक कार्यरत रहेगा।

    इसके अलावा परीक्षा से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत या सुझाव के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं, जिससे अभ्यर्थी और उनके परिजन संपर्क कर सकते हैं। परीक्षा के पर्यवेक्षण के लिए संघ लोक सेवा आयोग द्वारा दो अधिकारियों को विशेष पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है।

    कड़े अनुशासन और सुरक्षा के बीच चल रही यह परीक्षा अभ्यर्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, और प्रशासन इसे पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए सतर्क नजर रखे हुए है।