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  • भोपाल के मोहम्मद कोनैन दाद भारतीय जूनियर हॉकी टीम में शामिल, बेल्जियम दौरे पर दिखाएंगे दम

    भोपाल के मोहम्मद कोनैन दाद भारतीय जूनियर हॉकी टीम में शामिल, बेल्जियम दौरे पर दिखाएंगे दम


    भोपाल । मध्यप्रदेश राज्य हॉकी अकादमी, भोपाल के प्रतिभाशाली खिलाड़ी मोहम्मद कोनैन दाद का चयन 5 से 18 जुलाई तक होने वाले भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम के बेल्जियम दौरे के लिए भारतीय टीम में हुआ है। इस दौरे के दौरान भारतीय जूनियर टीम बेल्जियम में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों में भाग लेते हुए अपनी तैयारियों को और मजबूत करेगी। मोहम्मद कोनैन डैड फॉरवर्ड खिलाड़ी के रूप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगे।

    अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की सशक्त उपस्थिति
    मोहम्मद कोनैन दाद का भारतीय जूनियर टीम में चयन मध्यप्रदेश राज्य हॉकी अकादमी में खिलाड़ियों को दिए जा रहे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, वैज्ञानिक खेल सुविधाओं एवं उत्कृष्ट कोचिंग व्यवस्था का परिणाम है। यह उपलब्धि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं के निरंतर उभरते स्तर को दर्शाती है तथा मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मानचित्र पर नई पहचान दिला रही है।

    मेहनत, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन का मिला प्रतिफल
    मोहम्मद कोनैन दाद ने विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन, तेज़ खेल कौशल एवं निरंतर मेहनत के बल पर भारतीय जूनियर टीम में स्थान बनाया है। उनका चयन उनके समर्पण, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रतिफल है। बेल्जियम दौरे के दौरान वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत और मध्यप्रदेश की प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

    प्रदेश के युवा हॉकी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा
    मोहम्मद कोनैन दाद की यह उपलब्धि प्रदेश के उभरते हॉकी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और दृढ़ संकल्प के साथ खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकते हैं। उनकी सफलता प्रदेश में हॉकी के प्रति युवाओं के उत्साह को और अधिक प्रोत्साहित करेगी।

    खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी शुभकामनाएँ
    खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मोहम्मद कोनैन दाद को भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम में चयनित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मोहम्मद कोनैन डैड बेल्जियम दौरे में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत और मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

  • मध्यप्रदेश सरकार ने की 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराने की शुरुआत

    मध्यप्रदेश सरकार ने की 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराने की शुरुआत


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार ने 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत कर दी है। मध्यप्रदेश, स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहा है। उन्होंने बताया कि दावोस में की गई घोषणा के अनुरूप प्रदेश, 24 घंटे हरित ऊर्जा देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा परियोजना के लिए, मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली में बुधवार को आयोजित प्री-बिड मीटिंग को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। नई दिल्ली में हुई बैठक में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव तथा विभिन्न कपंनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    मध्यप्रदेश का ट्रैक रिकॉर्ड सबसे बेहतर
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना ने देश में सबसे कम सौर टैरिफ स्थापित कर भारत को वैश्विक पहचान दिलाई। शाजापुर-नीमच सोलर पार्कों ने 2.14 रूपए प्रति यूनिट का प्रदेश में सबसे कम टैरिफ अर्जित किया। हाल ही में मुरैना की 4 घंटे की स्टोरेज प्लस परियोजना के लिए 2.70 रूपए प्रति यूनिट पर पीपीए हुआ, यह देश की सबसे प्रतिस्पर्धी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में से एक है।

    मध्यप्रदेश है देश का सबसे निवेश मित्र राज्य
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को पारदर्शी नीतियाँ, त्वरित निर्णय और उत्कृष्ट अधोसंरचना उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने देश-विदेश के निवेशकों से मध्यप्रदेश की ऊर्जा क्रांति के सहभागी बनने का अनुरोध किया।

    ऊर्जा में आत्मनिर्भरता है हमारा लक्ष्य
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केवल परियोजनाएँ स्थापित करना नहीं, बल्कि हरित ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाना राज्य सरकार का उद्देश्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना और सभी हितधारकों के संयुक्त प्रयास से 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास की दिशा में ऐतिहासिक सिद्ध होगी। नई दिल्ली की प्री-बिड मीटिंग में टाटा पॉवर, रिलायंस एनर्जी, टोरेंट पॉवर, जिंदल रिन्युएबल, एन.टी.पी.सी., अडानी ग्रीन्स, हिन्दुस्तान पॉवर, महिंद्रा सिस्टम आदि के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

  • मध्यप्रदेश आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मध्यप्रदेश आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बड़वानी और निमाड़ की धरती संतों, संस्कृति और लोक परंपराओं से समृद्ध रही है। भारत की संत परंपरा ने सदैव समाज को सही दिशा दिखाई है, उनके मार्गदर्शन से समाज में सद्भाव, संयम और सेवा की भावना विकसित होती है। गरीबों, जरूरतमंदों और पीड़ितों की सेवा ही सच्ची भक्ति है, समाज तभी आगे बढ़ता है जब धर्म और सेवा साथ चलते हैं, यही भारतीय संस्कृति का मूल संदेश है। बड़वानी जिले के तलून में बनने वाला खाटू श्याम मंदिर इस गौरवशाली विरासत को मजबूत करेगा और आने वाली पीढ़ियां भी इस धरोहर से जुड़ेंगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को तलून में खाटू श्याम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और 21 कुंडीय महायज्ञ कार्यक्रम को मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे।

    बाबा श्री खाटू श्याम ने धर्म की रक्षा और लोक कल्याण के लिए त्याग किया

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज का अवसर केवल मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का पर्व है। बाबा श्री खाटू श्याम की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे। बाबा खाटू श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों के दु:ख हरने वाले देवता माने जाते हैं। बाबा खाटू श्याम को बर्बरीक का स्वरूप माना जाता है। महाभारत में उन्होंने धर्म की रक्षा और लोक कल्याण के लिए अपना शीश भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित कर दिया था। उनका यह अद्वितीय त्याग भारतीय संस्कृति में वीरता, विनम्रता और समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है। मां नर्मदा जी की परिक्रमा के बाद महंत शशि गिरि जी महाराज के मन में खाटू श्याम मंदिर बनाने का विचार आया और शहर के भक्तों के सहयोग से मंदिर का सपना साकार हुआ।

    राज्य सरकार प्राचीन धरोहरों के संरक्षण और विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य है। राज्य सरकार प्राचीन धरोहरों के संरक्षण और विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है। यह मंदिर भी उस यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा श्री खाटू श्याम से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य तथा प्रदेश के विकास और प्रदेशवासियों के कल्याण के लिए प्रार्थना की। कार्यक्रम में सांसद गजेन्द्र पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष बड़वानी बलवंत पटेल, महंत महामण्डलेश्वर हरि सुरेन्द्र गिरी जी महाराज, अध्यक्ष खाटू श्याम मंदिर बड़वानी शशि गिरि जी महाराज तथा अन्य संतगण, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

  • हीटवेव ने बढ़ाई ठंडी हवा की मांग, 80% घर अब भी बिना AC, फिर भी यूरोप में एयर कंडीशनर बाजार ने पकड़ी रिकॉर्ड रफ्तार

    हीटवेव ने बढ़ाई ठंडी हवा की मांग, 80% घर अब भी बिना AC, फिर भी यूरोप में एयर कंडीशनर बाजार ने पकड़ी रिकॉर्ड रफ्तार

    नई दिल्ली । लगातार बढ़ते तापमान और बार-बार पड़ रही भीषण हीटवेव ने यूरोप में रहने के तौर-तरीकों को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है। लंबे समय तक ऐसा माना जाता रहा कि यूरोप की जलवायु एयर कंडीशनर पर निर्भर रहने वाली नहीं है, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। रिकॉर्ड स्तर की गर्मी ने न केवल लोगों की दिनचर्या प्रभावित की है, बल्कि एयर कंडीशनिंग उद्योग के लिए भी नए अवसर पैदा कर दिए हैं। यही वजह है कि दुनिया के सबसे कम एसी उपयोग वाले क्षेत्रों में शामिल यूरोप अब सबसे तेज़ी से बढ़ते एयर कंडीशनर बाजार के रूप में उभर रहा है।

    यूरोप के अधिकांश देशों में दशकों तक गर्मियों का मौसम अपेक्षाकृत हल्का रहा। इसी कारण यहां के घरों, कार्यालयों और सार्वजनिक भवनों का निर्माण ठंडी जलवायु को ध्यान में रखकर किया गया। मोटी दीवारें, सीमित वेंटिलेशन और गर्मी को भीतर रोकने वाली संरचनाएं पहले उपयोगी थीं, लेकिन बदलती जलवायु में यही डिज़ाइन अब बड़ी चुनौती बन गए हैं। लगातार बढ़ती गर्मी के बीच घरों के भीतर तापमान लंबे समय तक बना रहता है, जिससे लोगों के लिए सामान्य जीवन भी कठिन हो जाता है।

    यूरोप के करीब 80 प्रतिशत घरों में आज भी एयर कंडीशनर उपलब्ध नहीं हैं। इसके पीछे ऐतिहासिक जलवायु, ऊंची बिजली दरें, महंगा इंस्टॉलेशन, पुराने भवनों पर निर्माण संबंधी प्रतिबंध और पर्यावरण संरक्षण जैसी कई वजहें रही हैं। कई देशों में ऐतिहासिक इमारतों पर बाहरी एसी यूनिट लगाने की अनुमति भी नहीं मिलती, जिससे नई व्यवस्था स्थापित करना आसान नहीं होता।

    हालांकि पिछले कुछ वर्षों में लगातार रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने लोगों की सोच बदल दी है। फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली और ब्रिटेन जैसे देशों में गर्मियों के दौरान तापमान कई बार 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। ऐसे हालात में एयर कंडीशनर अब विलासिता नहीं बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकता के रूप में देखा जाने लगा है। इसी बदलाव ने पूरे यूरोप में एसी की मांग को नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया है।

    बाजार में इस परिवर्तन का असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। रिटेल स्टोर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां लगातार बढ़ती मांग का सामना कर रही हैं। कई स्थानों पर स्टॉक तेजी से समाप्त हो रहे हैं और पोर्टेबल एयर कंडीशनर, कूलिंग डिवाइस तथा पंखों की बिक्री में कई गुना वृद्धि दर्ज की जा रही है। निर्माताओं ने भी यूरोपीय बाजार के लिए विशेष मॉडल तैयार करने शुरू कर दिए हैं, ताकि बदलती जरूरतों के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध कराए जा सकें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा जलवायु रुझान जारी रहे तो आने वाले वर्षों में यूरोप में एयर कंडीशनर की संख्या कई गुना बढ़ सकती है। हालांकि इसके साथ ऊर्जा खपत, बिजली आपूर्ति और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर बहस भी तेज हो रही है। एक वर्ग का मानना है कि भीषण गर्मी से लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, जबकि दूसरा पक्ष ऊर्जा दक्ष भवनों और टिकाऊ कूलिंग तकनीकों को अधिक उपयुक्त समाधान मानता है।

    बदलते मौसम ने स्पष्ट कर दिया है कि यूरोप अब केवल ठंडी जलवायु वाला महाद्वीप नहीं रह गया है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों ने वहां रहने की परिस्थितियों को तेजी से बदला है और एयर कंडीशनर उद्योग को अभूतपूर्व विस्तार का अवसर दिया है। आने वाले वर्षों में कूलिंग तकनीक, ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ निर्माण मॉडल यूरोप की नई शहरी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की संभावना है।

  • भारत पर पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री का हमला, सिंधु जल संधि को लेकर हिना रब्बानी खार बोलीं— आक्रामक रुख से बढ़ सकता है तनाव

    भारत पर पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री का हमला, सिंधु जल संधि को लेकर हिना रब्बानी खार बोलीं— आक्रामक रुख से बढ़ सकता है तनाव

    नई दिल्ली । पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच दशकों से लागू यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता का महत्वपूर्ण आधार रहा है। इस्लामाबाद में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने भारत की नीतियों पर टिप्पणी करते हुए दावा किया कि हालिया घटनाक्रम दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा सकते हैं।

    अपने संबोधन में हिना रब्बानी खार ने कहा कि सिंधु जल संधि लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे की एक प्रभावी व्यवस्था के रूप में कार्य करती रही है। उनके अनुसार, यह समझौता कठिन परिस्थितियों और द्विपक्षीय तनाव के बावजूद कायम रहा तथा दोनों देशों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समझौतों की स्थिरता क्षेत्रीय शांति और विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

    पूर्व विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि यदि किसी भी स्तर पर इस संधि को कमजोर करने या उसके क्रियान्वयन में अनिश्चितता पैदा करने का प्रयास किया जाता है, तो उसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों का सम्मान और उनका निरंतर पालन वैश्विक कूटनीतिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। उनके अनुसार, ऐसे विषयों पर सभी पक्षों को जिम्मेदारी और संतुलन के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

    हिना रब्बानी खार ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि सिंधु जल संधि केवल जल बंटवारे का दस्तावेज नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से बने एक संस्थागत ढांचे का प्रतीक भी है। उन्होंने क्षेत्रीय सहयोग और संवाद को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विवादों का समाधान बातचीत और स्थापित प्रक्रियाओं के माध्यम से ही संभव है।

    सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच संपन्न एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसके तहत सिंधु नदी प्रणाली से संबंधित जल संसाधनों के उपयोग और बंटवारे के लिए विस्तृत प्रावधान निर्धारित किए गए थे। पिछले कई दशकों में दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मतभेदों के बावजूद यह संधि प्रभावी बनी रही है और समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर इसकी समीक्षा और व्याख्या को लेकर चर्चा होती रही है।

    हिना रब्बानी खार का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। ऐसे माहौल में उनके वक्तव्य ने एक बार फिर सिंधु जल संधि, क्षेत्रीय कूटनीति और जल सहयोग को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। राजनीतिक और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक बयान दोनों देशों के बीच चल रहे संवाद और भविष्य की रणनीतियों पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जल संसाधनों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते केवल तकनीकी विषय नहीं होते, बल्कि उनका सीधा संबंध क्षेत्रीय स्थिरता, विकास और द्विपक्षीय विश्वास से भी होता है। ऐसे में इस प्रकार के मुद्दों पर दोनों देशों के लिए संवाद, कानूनी प्रावधानों और स्थापित कूटनीतिक प्रक्रियाओं के दायरे में आगे बढ़ना महत्वपूर्ण माना जाता है। फिलहाल हिना रब्बानी खार के बयान के बाद सिंधु जल संधि और भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर राजनीतिक एवं कूटनीतिक चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं।

  • देशभर में लागू हुई नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था, 300 रुपये से कम नहीं मिलेगी मजदूरी, रोजगार गारंटी भी बढ़कर 125 दिन हुई

    देशभर में लागू हुई नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था, 300 रुपये से कम नहीं मिलेगी मजदूरी, रोजगार गारंटी भी बढ़कर 125 दिन हुई

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार और आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 1 जुलाई 2026 से VB-G RAM G एक्ट 2025 को पूरे देश में लागू कर दिया है। नई व्यवस्था के लागू होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी दरों का संशोधन प्रभावी हो गया है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाना, रोजगार के अवसरों का विस्तार करना और विभिन्न राज्यों के बीच मजदूरी में मौजूद असमानता को कम करना है। इस बदलाव को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

    नई व्यवस्था के तहत अब देश में इस योजना के अंतर्गत कार्य करने वाले किसी भी पात्र मजदूर को 300 रुपये प्रतिदिन से कम मजदूरी नहीं मिलेगी। जिन राज्यों में पहले मजदूरी दर इस स्तर से नीचे थी, वहां नई दरें लागू कर दी गई हैं। इससे विशेष रूप से उन राज्यों के श्रमिकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, जहां अब तक अपेक्षाकृत कम मजदूरी मिलती थी। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण श्रमिकों की आमदनी में सुधार होगा और जीवन स्तर बेहतर बनेगा।

    इस कानून के तहत रोजगार गारंटी की अवधि भी बढ़ा दी गई है। पहले जहां पात्र ग्रामीण परिवारों को सीमित अवधि तक रोजगार की गारंटी मिलती थी, वहीं अब उन्हें वर्ष में 125 दिनों तक मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि अतिरिक्त रोजगार के अवसर मिलने से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और गांवों में रोजगार की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

    नई मजदूरी व्यवस्था लागू होने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर औसत दैनिक मजदूरी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पहले की तुलना में औसत मजदूरी बढ़ने से लाखों श्रमिकों की मासिक आय में सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय शक्ति बढ़ेगी, स्थानीय बाजारों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

    मजदूरी दरों के पुनर्निर्धारण में विशेष रूप से उन राज्यों को प्राथमिकता दी गई है, जहां पहले मजदूरी अपेक्षाकृत कम थी। पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तराखंड और त्रिपुरा जैसे राज्यों में मजदूरी दरों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। वहीं जिन राज्यों में पहले से अपेक्षाकृत अधिक मजदूरी मिल रही थी, वहां भी नई दरों के अनुरूप संशोधन किया गया है ताकि सभी क्षेत्रों में संतुलित व्यवस्था बनी रहे।

    सरकार के अनुसार नई मजदूरी दरें वैज्ञानिक और पारदर्शी मानकों के आधार पर निर्धारित की गई हैं। इसमें महंगाई, वार्षिक समीक्षा, क्षेत्रीय परिस्थितियों और आर्थिक संकेतकों को ध्यान में रखते हुए मजदूरी तय की गई है। इससे श्रमिकों को न्यायसंगत भुगतान सुनिश्चित करने के साथ-साथ रोजगार व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।

    सरकार का विश्वास है कि VB-G RAM G एक्ट ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता को नई दिशा देगा। बढ़ी हुई मजदूरी, विस्तारित रोजगार गारंटी और समान अवसरों की व्यवस्था से ग्रामीण परिवारों की आय में स्थायी सुधार होने की उम्मीद है। साथ ही यह कदम गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने और समावेशी विकास के लक्ष्य को गति देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • जेट फ्यूल हुआ सस्ता, एयरलाइंस को राहत, आने वाले दिनों में हवाई किराए घटने की उम्मीद

    जेट फ्यूल हुआ सस्ता, एयरलाइंस को राहत, आने वाले दिनों में हवाई किराए घटने की उम्मीद


    नई दिल्ली। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 1 जुलाई से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) यानी जेट फ्यूल की कीमतों में कटौती कर दी है। नई दरों के अनुसार राजधानी दिल्ली में जेट फ्यूल का दाम करीब 5 रुपये प्रति लीटर घटकर 115 रुपये से 110 रुपये प्रति लीटर रह गया है। वहीं, थोक (बल्क) दर 1.15 लाख रुपये प्रति किलोलीटर से घटाकर 1.10 लाख रुपये प्रति किलोलीटर कर दी गई है।

    जेट फ्यूल की कीमत में आई इस कमी से घरेलू एयरलाइंस कंपनियों को परिचालन लागत (ऑपरेटिंग कॉस्ट) में राहत मिलने की उम्मीद है। ऐसे में यदि यह राहत आगे भी बनी रहती है, तो आने वाले समय में हवाई यात्रियों को किराए में भी कुछ कमी देखने को मिल सकती है।

    जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद एटीएफ के दाम घटाए गए हैं। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के दौरान जेट फ्यूल की कीमत रिकॉर्ड स्तर 1.15 लाख रुपये प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई थी। उसके बाद पहली बार इसमें कटौती की गई है।

    आमतौर पर हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के औसत भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर के आधार पर एटीएफ की कीमतों में संशोधन किया जाता है। हालांकि, किसी आपात या विशेष परिस्थिति में कीमतों में बीच महीने भी बदलाव किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत में सबसे बड़ा हिस्सा जेट फ्यूल का होता है। ऐसे में एटीएफ सस्ता होने से कंपनियों का खर्च कम होगा, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों तक भी पहुंच सकता है।

    टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) तारकेश्वर नाथ वैष्णव के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य होने से वैश्विक बाजार में अनिश्चितता घटी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत तक गिरावट आई है और फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 70 से 73 डॉलर प्रति बैरल के बीच कारोबार कर रहा है।

    उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी करीब 10 डॉलर प्रति बैरल तक की गिरावट आती है, तो जेट फ्यूल के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी कटौती की संभावना बन सकती है।

    वैष्णव ने बताया कि निजी क्षेत्र की नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की शुरुआत कर दी है। अब बाजार की नजर सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) पर है। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नरम बनी रहती हैं, तो ये कंपनियां भी पेट्रोल और डीजल के दाम घटाने का फैसला ले सकती हैं।

  • प्रवासन नीति को मिली नई दिशा, 26 देशों से 28 साझेदारी समझौते कर भारत ने बढ़ाया वैश्विक सहयोग, जयशंकर ने बताया दीर्घकालिक विजन

    प्रवासन नीति को मिली नई दिशा, 26 देशों से 28 साझेदारी समझौते कर भारत ने बढ़ाया वैश्विक सहयोग, जयशंकर ने बताया दीर्घकालिक विजन


    नई दिल्ली ।
    भारत ने वैश्विक स्तर पर सुरक्षित और व्यवस्थित प्रवासन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 26 देशों के साथ 28 प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी समझौते किए हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि इन समझौतों का उद्देश्य कानूनी और सुरक्षित आवागमन को बढ़ावा देना, कौशल आधारित वैश्विक अवसरों का विस्तार करना तथा अवैध प्रवासन और मानव तस्करी जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कई अन्य देशों के साथ इसी प्रकार के समझौतों पर बातचीत जारी है।

    मानव संसाधन गतिशीलता से जुड़े एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में मानव संसाधनों की सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग में मानव गतिशीलता को एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानता है और इसी सोच के अनुरूप विभिन्न देशों के साथ साझेदारी को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

    जयशंकर ने कहा कि प्रवासन एवं गतिशीलता संबंधी समझौते केवल लोगों के आवागमन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका उद्देश्य प्रतिभा को अवसरों से जोड़ना और देशों की आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराना भी है। उनके अनुसार यदि इन व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन किया जाए तो इससे मूल देश, गंतव्य देश, नियोक्ता, कामगार और स्थानीय समुदाय सभी को समान रूप से लाभ मिलता है।

    विदेश मंत्री ने सुरक्षित, नियमित और कानूनी प्रवास की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि इसके लिए द्विपक्षीय सहयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रवासन व्यवस्था को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाए रखने के लिए देशों के बीच समन्वय बढ़ाना समय की जरूरत है। इसी उद्देश्य से भारत विभिन्न देशों के साथ दीर्घकालिक और संतुलित साझेदारी विकसित कर रहा है।

    उन्होंने अवैध प्रवासन, धोखाधड़ी करने वाले एजेंटों, शोषणकारी तौर-तरीकों और मानव तस्करी को वैश्विक स्तर की गंभीर चुनौती बताया। उनके अनुसार इस प्रकार की गतिविधियां न केवल कानूनी प्रवासन व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं, बल्कि हजारों लोगों को गंभीर जोखिम में भी डाल देती हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी देशों की साझा जिम्मेदारी और समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।

    जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रही है। विभिन्न क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना बदल रही है, जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑटोमेशन, डिजिटलीकरण और हरित प्रौद्योगिकी जैसी नई तकनीकें रोजगार और कौशल की मांग को तेजी से बदल रही हैं। ऐसे परिवर्तनों के बीच वैश्विक श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करना और उनकी सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय आवाजाही सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य, विनिर्माण, निर्माण, कृषि और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आज भी कुशल कार्यबल की मांग बनी हुई है। ऐसे में मानव संसाधन गतिशीलता केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक सहयोग और साझा विकास का प्रभावी साधन बन सकती है। विदेश मंत्री के अनुसार भारत की नीति प्रतिभा को वैश्विक अवसरों से जोड़ने, सुरक्षित प्रवासन को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है, जिससे आने वाले वर्षों में रोजगार, कौशल विकास और आर्थिक साझेदारी के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।

  • भारत-पाक शांति पहल पर सियासत तेज, मोदी-शहबाज को लिखे खुले पत्र पर बीजेपी का पलटवार; आतंकवाद खत्म होने तक बातचीत से इनकार

    भारत-पाक शांति पहल पर सियासत तेज, मोदी-शहबाज को लिखे खुले पत्र पर बीजेपी का पलटवार; आतंकवाद खत्म होने तक बातचीत से इनकार

    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की मांग को लेकर दोनों देशों के प्रमुख नागरिकों द्वारा जारी संयुक्त शांति पहल अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संबोधित खुले पत्र के सार्वजनिक होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इस पहल पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक किसी भी प्रकार की औपचारिक बातचीत का सवाल नहीं उठता।

    बीजेपी प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की नीति पहले से स्पष्ट है और इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती पर सक्रिय आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देना बंद नहीं करता, तब तक दोनों देशों के बीच बातचीत की कोई संभावना नहीं है।

    उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर कुछ समूह भारत और पाकिस्तान के बीच शांति और संवाद की पहल करते हैं, लेकिन ऐसे प्रयास तब तक व्यावहारिक नहीं हो सकते जब तक सीमा पार से आतंकवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। उनका कहना था कि स्थायी शांति के लिए सबसे पहले आतंकवाद के ढांचे को खत्म करना आवश्यक है।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस की ओर से दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को एक खुला पत्र भेजा गया। पत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंधों की पूर्ण बहाली, संवाद प्रक्रिया दोबारा शुरू करने तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की अपील की गई है। इसके साथ ही धार्मिक, सांस्कृतिक और मानवीय आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करने की मांग की गई है, ताकि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का माहौल तैयार हो सके।

    संयुक्त शांति प्रस्ताव पर भारत और पाकिस्तान के कुल 117 प्रमुख लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। भारत की ओर से विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई प्रमुख नाम इस पहल का हिस्सा बताए गए हैं। पत्र में दोनों सरकारों से आग्रह किया गया है कि क्षेत्रीय स्थिरता और शांति को ध्यान में रखते हुए संवाद के रास्ते फिर से खोले जाएं तथा लोगों के बीच संपर्क को आसान बनाया जाए।

    इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के हालिया बयान की भी चर्चा हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ संवाद के सभी रास्ते पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि आतंकवाद के प्रति भारत की सख्त नीति में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।

    भारत और पाकिस्तान के संबंध पिछले कई वर्षों से सीमा पार आतंकवाद, सुरक्षा चुनौतियों और राजनयिक तनाव के कारण प्रभावित रहे हैं। ऐसे में शांति पहल को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से यही रुख दोहराया जा रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की ठोस कार्रवाई किसी भी संभावित संवाद की पहली और अनिवार्य शर्त है।

  • कैबिनेट की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मंजूरी, दिल्ली में बनेगी 6 लेन द्वारका टनल, कानपुर-कबरई फोरलेन हाईवे से बुंदेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार

    कैबिनेट की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मंजूरी, दिल्ली में बनेगी 6 लेन द्वारका टनल, कानपुर-कबरई फोरलेन हाईवे से बुंदेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश की सड़क अवसंरचना को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। केंद्रीय कैबिनेट के फैसले के तहत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छह लेन वाली द्वारका टनल तथा उत्तर प्रदेश के कानपुर से कबरई तक चार लेन हाईवे का निर्माण किया जाएगा। इन दोनों परियोजनाओं से यातायात व्यवस्था में सुधार, यात्रा समय में कमी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    कैबिनेट के निर्णय के अनुसार दिल्ली में करीब आठ किलोमीटर लंबी छह लेन द्वारका टनल का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 6,970 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। प्रस्तावित टनल शिवमूर्ति क्षेत्र से शुरू होकर वसंत कुंज के रास्ते बारापुला के निकट तक विकसित की जाएगी। परियोजना को लगभग पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    इस टनल के निर्माण से दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में लंबे समय से बनी ट्रैफिक समस्या को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही हवाई अड्डे, द्वारका, गुरुग्राम और दक्षिण दिल्ली के बीच यात्रा अधिक सुगम और तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होगा और ईंधन की बचत के साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी।

    कैबिनेट ने दूसरी बड़ी परियोजना के रूप में उत्तर प्रदेश के कानपुर से कबरई तक लगभग 242 किलोमीटर लंबे फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग को भी मंजूरी प्रदान की है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 7,145 करोड़ रुपये होगी और इसे लगभग ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मार्ग आगे चलकर मध्य प्रदेश की दिशा में बेहतर सड़क संपर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा और बुंदेलखंड क्षेत्र को नई विकास संभावनाओं से जोड़ेगा।

    नई सड़क बनने के बाद कानपुर से कबरई के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने का अनुमान है। वर्तमान में इस मार्ग को तय करने में लगभग साढ़े तीन घंटे का समय लगता है, जबकि परियोजना पूरी होने के बाद यही दूरी करीब डेढ़ घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों के साथ-साथ व्यावसायिक परिवहन को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक गतिविधियों, कृषि उत्पादों के परिवहन और क्षेत्रीय व्यापार को नई गति मिलेगी। बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से बेहतर कनेक्टिविटी की मांग करता रहा है और यह परियोजना निवेश तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है। सड़क नेटवर्क मजबूत होने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आने और विभिन्न शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की भी संभावना है।

    केंद्र सरकार का उद्देश्य आधुनिक, सुरक्षित और तेज परिवहन नेटवर्क विकसित करना है, ताकि देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क और अधिक सशक्त हो सके। हाल के वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और सुरंग परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया है। नई स्वीकृत दोनों परियोजनाएं इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।