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  • बदलते दौर में बिना शादी के बच्चे पैदा करना कई देशों में हुआ सामान्य … कई जगह अब भी सामाजिक कलंक!

    बदलते दौर में बिना शादी के बच्चे पैदा करना कई देशों में हुआ सामान्य … कई जगह अब भी सामाजिक कलंक!


    नई दिल्ली।
    शादी, परिवार और संतान… जिन्हें कभी समाज की स्थायी नींव माना जाता था, लेकिन बदलते समय (Changing Times) में दुनिया के कई हिस्सों में ये अवधारणाएं नए सिरे से परिभाषित हो रही हैं। बदलती जीवनशैली (Changing Lifestyle), कानूनी व्यवस्था (Legal System) और सामाजिक स्वीकृति (Social Acceptance) के कारण विवाह (Marriage) के बाहर बच्चों का जन्म कुछ देशों में सामान्य हो चुका है, जबकि कहीं यह अभी भी सामाजिक कलंक बना हुआ है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, कई देशों में विवाह के बाहर बच्चों का जन्म अब आम बात हो गई है। हालांकि, एशिया और कुछ अन्य क्षेत्रों में यह प्रवृत्ति अभी भी बहुत कम है। ये बदलाव सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े हैं, जहां विवाह हर जगह संतान प्राप्ति की शर्त नहीं रहा। यूं कहें तो बिना शादी के परिवार बसाना कई जगहों पर ‘न्यू नॉर्मल’ बन गया है। ओईसीडी (OECD) के नए आंकड़ों के अनुसार, विश्व के कई देशों में औसतन लगभग 43% बच्चे विवाह के बाहर पैदा हो रहे हैं। यानी बिना शादी के महिलाएं मां बन रही हैं। आइए जानते हैं कि इस मामले में कौन-से देश सबसे आगे हैं…


    सबसे आगे लैटिन अमेरिका

    लैटिन अमेरिकी देश इस मामले में सबसे आगे हैं। कोलंबिया में 87% बच्चे विवाह के बाहर जन्म ले रहे हैं। इसके बाद चिली (78.1%), कोस्टा रिका (74%) और मैक्सिको (73.7%) का नंबर आता है। यहां लिव-इन रिलेशनशिप लंबे समय से सामाजिक और कानूनी रूप से स्वीकार्य है, जिससे औपचारिक शादी की जरूरत कम हो गई है। ऐतिहासिक असमानता और कानूनी पहुंच की कमी ने भी इन बदलावों को बढ़ावा दिया है।


    नॉर्डिक देशों में कल्याण व्यवस्था के साथ हाई रेशियो

    नॉर्डिक देशों ने परिवार के मानदंडों को नए सिरे से परिभाषित किया है। आइसलैंड में 69.4%, नॉर्वे में 61.2%, स्वीडन में 58% (लगभग) और डेनमार्क में 55% के आसपास बच्चे विवाह के बाहर पैदा हो रहे हैं। यहां मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों को माता-पिता की वैवाहिक स्थिति से अलग कानूनी संरक्षण मिलने से विवाह अब व्यक्तिगत चुनाव बन गया है। लिव इन में रहने वाले जोड़ों को विवाहित जोड़ों के बराबर अधिकार प्राप्त हैं।


    एशिया और पूर्वी भूमध्यसागरीय में न्यूनतम दरें

    दूसरी ओर एशिया के कई देशों में स्थिति बिल्कुल उलट है। जापान में सिर्फ 2.4%, दक्षिण कोरिया में 4.7%, तुर्की में 3.1%, इजरायल में 8.6% और ग्रीस में 9.7% बच्चे विवाह के बाहर जन्म लेते हैं। यहां सांस्कृतिक मूल्य, धार्मिक परंपराएं और सख्त कानूनी ढांचा विवाह को संतान से जोड़े रखते हैं। एकल माता-पिता को सामाजिक कलंक और कम सहायता मिलने से यह प्रवृत्ति दबाव में रहती है।


    ओईसीडी

    भारत जैसे देशों में भी विवाह के बाहर जन्म की दर बहुत कम बनी हुई है। यही विवाद के बाहर बच्चों की जन्म दर एक फीसदी से भी कम है। भारत के पड़ोसी देशों और एशिया में भी यही स्थिति है, जहां सांस्कृतिक और सामाजिक मानदंड विवाह को प्राथमिकता देते हैं।


    एंग्लो-अमेरिकी और पश्चिमी यूरोप

    संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और ज्यादातर पश्चिमी यूरोपीय देश बीचों बीच खड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में लगभग 40 प्रतिशत बच्चे विवाह के बाहर पैदा होते हैं, जो ऑस्ट्रिया और इटली के स्तर के करीब है। इन आंकड़ों से साफ है कि विवाह के बाहर बच्चों का जन्म सिर्फ सामाजिक बदलाव नहीं, बल्कि कानूनी संरचना, कल्याणकारी नीतियों और सांस्कृतिक स्वीकार्यता का संयुक्त परिणाम है। आने वाले वर्षों में यह अंतर और बढ़ सकता है, जिसका असर भारत समेत अन्य एशियाई देशों पर भी पड़ सकता है।

  • रूस ने फिर दिखाई दोस्ती, विदेश मंत्री बोले- भारत की अध्यक्षता में BRICS का हम करेंगे समर्थन

    रूस ने फिर दिखाई दोस्ती, विदेश मंत्री बोले- भारत की अध्यक्षता में BRICS का हम करेंगे समर्थन


    मास्को।
    रूस (Russia) के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Foreign Minister Sergei Lavrov) ने सोमवार को कहा कि भारत (India) की अध्यक्षता में हम ब्रिक्स (BRICS) और उनके एजेंडे का पूरा समर्थन करेंगे। एक इंटरव्यू में लावरोव ने कहा कि आज के समय को देखते हुए भारत का एजेंडा बेहद प्रासंगिक, तार्किक है। वह आतंकवाद (Terrorism) और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) से जुड़ा है। लावरोव ने कहा कि मेरी राय में भारत की अध्यक्षता में जो एजेंडा प्रस्तुत किया जा रहा है, वह भविष्य की तैयारी और वर्तमान चुनौतियों का समाधान करता है। हम इसका सक्रिय रूप से समर्थन करेंगे।

    रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का जोर आतंकवाद विरोधी गतिविधियों पर है जो बेहद जरूरी भी है। क्योंकि इस समय विश्व के कई हिस्से आतंकवाद प्रभावित हैं। अफगानिस्तान सीमा, भारत-पाकिस्तान-अफगानिस्तान गलियारे के साथ-साथ अन्य जगहों पर आतंकी गतिविधियां देखी जा रही है।

    यह प्राथमिकता हमारे लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर जब हम संयुक्त राष्ट्र में भारत के साथ मिलकर एक वैश्विक आतंकवाद विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इसका मसौदा पहले ही तैयार हो चुका है, हालांकि अभी तक आम सहमति नहीं बन पाई है।

    लावरोव ने कहा, भारत की अध्यक्षता खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दों, सूचना प्रौद्योगिकी, को प्राथमिकता देती है। भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें रूस को आमंत्रित किया गया है, और हम एजेंडे में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।

  • अमेरिकी राजदूत ने की भारत-US के बीच बढ़ती साझेदारी की जमकर तारीफ, ट्रेड डील को लेकर कही ये बात

    अमेरिकी राजदूत ने की भारत-US के बीच बढ़ती साझेदारी की जमकर तारीफ, ट्रेड डील को लेकर कही ये बात


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच ट्रेड डील (Trade Deal) को लेकर अंतरिम समझौते पर सहमति बनने के बाद अमेरिका (America) की ओर से बड़ा बयान आया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (US Ambassador Sergio Gor) ने सोमवार को भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती साझेदारी की जमकर तारीफ की। इस दौरान गोर की तरफ से इस ट्रेड डील का क्रेडिट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ((American President Donald Trump) ) के अच्छे संबंधों को दिया गया। अमेरिकी राजदूत ने कहा है कि पिछले हफ्ते घोषित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क के पूरा होने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की दोस्ती को जाता है।

    अमेरिकी राजदूत नेवयहां नई दिल्ली में उनके आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह बातें कही हैं। कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी शामिल हुए। रिसेप्शन के दौरान गोर ने कहा कि वाइट हाउस में ट्रंप प्रशासन भारत को ध्यान में रख रहा है। गोर ने कहा, “मुझे यहां आए हुए अभी एक महीने से थोड़ा ज्यादा हुआ है, और हमने आते ही काम शुरू कर दिया। वाइट हाउस भारत को ध्यान में रख रहा है।” ट्रंप के दूत ने आगे कहा, “हमारे राष्ट्रपति भारत को तवज्जो दे रहे हैं। और राष्ट्रपति ट्रंप की प्रधानमंत्री मोदी के साथ दोस्ती की वजह से, हम आखिरकार एक व्यापार समझौता कर पाए।” बता दें कि गोर ने बीते 14 जनवरी को अपना पदभार संभाला था, जिसके बाद वह भारत में अमेरिका के 27वें राजदूत बन गए।


    अंतरिम व्यापार समझौते में क्या-क्या?

    इससे पहले भारत और अमेरिका ने बीते शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर पहुंचने की घोषणा की थी जिसके तहत दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे। अमेरिका, भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को मौजूदा 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। वहीं भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत शृंखला पर आयात शुल्क समाप्त या कम करेगा। इनमें सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट शामिल हैं।


    अमेरिका ने हटाया अतिरिक्त आयात शुल्क

    दोनों देशों के एक संयुक्त बयान के मुताबिक, भारत ने अगले पांच साल में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान कलपुर्जे, कीमती धातु, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा जताया है। बयान के मुताबिक, ”अमेरिका और भारत को पारस्परिक और द्विपक्षीय रूप से लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते के लिए रूपरेखा तैयार करने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।” इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से रूसी तेल की खरीद पर पिछले वर्ष अगस्त में भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क को हटा दिया है।

    निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अंतरिम समझौते से भारतीय निर्यातकों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), किसानों और मछुआरों के लिए 30,000 अरब अमेरिकी डॉलर का बाजार खुलेगा। शुल्क में कमी से वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, जैविक रसायन, गृह सज्जा, हस्तशिल्प उत्पाद जैसे भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों और कुछ मशीनरी के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, जेनेरिक दवाइयों, रत्नों और हीरों, तथा विमान के कल-पुर्जों सहित कई प्रकार की वस्तुओं पर शुल्क शून्य हो जाएगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धी क्षमता और ‘मेक इन इंडिया’ को और बढ़ावा मिलेगा।

  • इजरायल की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ 8 मुस्लिम देशों ने खोला मोर्चा… दी कड़ी चेतावनी

    इजरायल की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ 8 मुस्लिम देशों ने खोला मोर्चा… दी कड़ी चेतावनी


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) समेत आठ मुस्लिम देशों (Eight Muslim Countries) ने सोमवार (9 फरवरी) को एक संयुक्त बयान जारी कर कब्जे वाले पश्चिमी तट (वेस्ट बैंक) में इज़रायल (Israel) की “लगातार विस्तारवादी नीतियों” के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। इन देशों ने इज़रायल पर अवैध तरीके से संप्रभुता थोपने, यहूदी बस्तियों के विस्तार और फ़िलिस्तीनी जनता को विस्थापित करने का आरोप लगाया है। इस संयुक्त बयान पर पाकिस्तान, मिस्र, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इंडोनेशिया, तुर्किये, सऊदी अरब और कतर के विदेश मंत्रियों के हस्ताक्षर हैं। बयान में कहा गया कि इज़रायल द्वारा लिए जा रहे फैसले पश्चिमी तट को अवैध रूप से अपने में मिलाने की प्रक्रिया को तेज कर रहे हैं।

    यह बयान ऐसे समय में आया है, जब इज़रायल की सुरक्षा कैबिनेट ने हाल ही में कुछ ऐसे कदमों को मंजूरी दी है, जिनसे पश्चिमी तट में यहूदी बसने वालों के लिए जमीन खरीदना आसान हो जाएगा और फ़िलिस्तीनियों पर इज़रायली प्रशासन के प्रवर्तन अधिकार बढ़ जाएंगे। इज़रायली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दशकों पुराने उन नियमों को हटाने का भी फैसला किया गया है, जो यहूदी नागरिकों को निजी तौर पर पश्चिमी तट में जमीन खरीदने से रोकते थे।


    इजरायल को चेतावनी

    ऐसी स्थिति में आठों मुस्लिम देशों ने दो टूक कहा कि इजरायल का कब्जे वाले फिलस्तीनी इलाकों पर कोई संप्रभु अधिकार नहीं है। बयान में चेतावनी दी गई है कि पश्चिमी तट में अपनाई जा रही नीतियाँ क्षेत्र में हिंसा और संघर्ष को और भड़का रही हैं। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने इजरायल की कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा कि ये कदम दो-राष्ट्र समाधान को कमजोर करते हैं और फ़िलिस्तीनी जनता के स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के अधिकार पर सीधा हमला हैं।


    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का भी हवाला

    बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2334 का भी हवाला दिया गया है, जिसमें 1967 के बाद कब्जे वाले फ़िलिस्तीनी इलाक़ों की जनसांख्यिकी, स्वरूप और स्थिति बदलने के किसी भी प्रयास की निंदा की गई है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) की 2024 की सलाहकारी राय का उल्लेख करते हुए कहा गया कि अदालत ने इजरायल की मौजूदगी और नीतियों को अवैध करार दिया है। विदेश मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह अपनी क़ानूनी और नैतिक ज़िम्मेदारियाँ निभाए और इज़रायल को पश्चिमी तट में खतरनाक तनाव बढ़ाने और उसके नेताओं के भड़काऊ बयानों पर रोक लगाने के लिए मजबूर करे।


    दो-राष्ट्र समाधान के जरिये ही शांति संभव

    उन्होंने जोर देकर कहा कि फ़िलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय और स्टेटहुड के अधिकार की पूर्ति ही स्थायी समाधान है, जो अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों और अरब शांति पहल के अनुरूप दो-राष्ट्र समाधान के जरिये ही संभव है। ग़ौरतलब है कि यही आठ देश पिछले वर्ष अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के साथ गाज़ा में युद्ध और कथित नरसंहार को समाप्त करने की योजना पर भी काम कर चुके हैं। इस महीने की शुरुआत में इन देशों ने गाज़ा में संघर्ष विराम के बार-बार उल्लंघन को लेकर भी इजरायल की निंदा की थी।

  • Income Tax व्यवस्था में होने जा रहा सबसे बड़ा बदलाव… एक अप्रैल से लागू होंगे नए नियम

    Income Tax व्यवस्था में होने जा रहा सबसे बड़ा बदलाव… एक अप्रैल से लागू होंगे नए नियम



    नई दिल्ली।
    एक अप्रैल से आयकर व्यवस्था (Income Tax Regime) में सबसे अहम बदलाव होने जा रहा है। इनकम टैक्स रिटर्न की प्रक्रिया (Income Tax Return Process) को सरल बनाने के लिए फॉर्म-16 को भी पहले की तुलना में आधे पेजों को किया जा रहा है। इस बदलाव के तहत आयकर के नियम 511 से घटकर 333 रह जाएंगे। जबकि कर फॉर्म की संख्या 399 से घटकर 190 हो जाएगी। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की तरफ कहा गया है कि आयकर नियम-2026 और फॉर्मों को मार्च के पहले सप्ताह तक अधिसूचित कर दिया जाएगा, लेकिन उससे पहले आम लोगों और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे गए हैं।


    एक अप्रैल से लागू होंगे: नए नियम

    आयकर अधिनियम 2025 के अनुसार बनाए गए हैं, जो 1 अप्रैल से लागू होंगे। नई व्यवस्था के तहत आईटीआर फॉर्म पहले से भरा होगा। बस फॉर्म भरते वक्त करदाता को देखना होगा कि कहीं कोई संशोधन तो नहीं करना है। अगर करदाता को लगता है कि फॉर्म में दी जा रही जानकारी अधूरी है या फिर कोई बदलाव की जरूरत है तो उसमें संशोधन करके ऑनलाइन सब्मिट कर सकेगा।

    सूत्रों के अनुसार, नए ढांचे में नौकरी से मिलने वाले अतिरिक्त लाभ से जुड़े बदलाव पुराने और नए यानी दोनों कर व्यवस्थाओं में लागू होंगे। इससे सभी तरह के करदाताओं को राहत मिलेगी। ड्राफ्ट नियम और फॉर्म 15 दिनों तक (22 फरवरी) सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेंगे। इस दौरान आम लोग और विशेषज्ञ अपनी राय और सुझाव दे सकते हैं।


    प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की कोशिश :

    विभाग का कहना है कि इससे नियम बनाने की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। नए नियमों की भाषा को आसान बनाया गया है। समझ बढ़ाने के लिए कई जगह फॉर्मूले और टेबल जोड़े गए हैं और पुराने नियमों में मौजूद बेवजह की दोहराव वाली बातों को हटाया गया है। कर फॉर्म को भी सरल बनाया गया है, जिससे करदाताओं पर बोझ कम हो। सभी फॉर्म में एक जैसी जानकारी को मानक बनाया गया है, जिससे बार-बार जानकारी भरने की जरूरत न पड़े। नए स्मार्ट फॉर्म में ऑटोमैटिक मिलान और भरी हुई जानकारी की सुविधा होगी।


    करदाता संख्या बढ़ाना उद्देश्य :

    सीबीडीटी के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि नए कानून और नियमों का मुख्य उद्देश्य कर भरने वाले लोगों की बढ़ाना और कर भरने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। फिलहाल देश में करीब 9 करोड़ लोग आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं, जबकि करीब 12 करोड़ लोग अलग-अलग तरीकों से कर देते हैं। इससे पता चलता है कि कई लोग अभी भी नियमित रूप से रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे हैं। इसलिए हमारा लक्ष्य यह है कि धीरे-धीरे ज्यादा लोगों को रिटर्न फाइलिंग से जोड़ा जाए। नए व्यवस्था में फॉर्म को इसी लिए आसान बनाया गया है।


    शून्य टीडीएस और सैलरी वाला टीडीएस फार्म अलग :

    टीडीएस से जुड़े कई फॉर्म्स की नंबरिंग भी बदली गई है। अब कम या शून्य टीडीएस के लिए आवेदन फॉर्म 128 में किया जाएगा, जबकि सैलरी से जुड़ा टीडीएस सर्टिफिकेट अब फॉर्म 130 कहलाएगा। इसके साथ ही, टीडीएस रिटर्न के पुराने फॉर्म 24क्यू, 26क्यू और 27क्यू को भी नया नंबर दिया गया है।

    सालाना कर विवरण यानी 26एएस का नाम अब फार्म 168 : सालाना टैक्स स्टेटमेंट, जिसे आमतौर पर फॉर्म 26एएस कहा जाता है, अब फॉर्म 168 के नाम से जाना जाएगा। इसी तरह, वित्तीय लेनदेन की जानकारी देने वाला फॉर्म 61ए अब फॉर्म 165 हो जाएगा। इसके साथ ही विदेश भेजे जाने वाले पैसों से जुड़े फॉर्म्स में भी बदलाव किया गया है।


    ऑडिट और अंतरराष्ट्रीय टैक्स फॉर्म को जोड़ा गया

    कई ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ऑडिट और अंतरराष्ट्रीय टैक्स फॉर्म्स को एक साथ जोड़ा गया है या उनका नंबर बदल दिया गया है। अब टैक्स ऑडिट रिपोर्ट, जो पहले 3सीए, 3सीबी और 3सीडी फॉर्म में भरी जाती थी, वह अब एक ही फॉर्म 26 में दी जाएगी। ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़ी ऑडिट रिपोर्ट अब फॉर्म 3सीईबी की जगह फॉर्म 48 में दी जाएगी। वहीं, मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (एमएटी) से जुड़ा सर्टिफिकेट अब फॉर्म 29बी की जगह फॉर्म 66 में जमा किया जाएगा। टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट के लिए फॉर्म 10एफए की जगह फॉर्म 42 का इस्तेमाल करना होगा।


    ड्राफ्ट के साथ नए फॉर्म टेम्पलेट भी जारी

    इस ड्राफ्ट के साथ नए फॉर्म टेम्पलेट भी जारी किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक इस्तेमाल हो रहे पुराने फॉर्म नंबर कई दशकों में बदलते-बदलते काफी जटिल हो गए थे। नई नंबरिंग से टैक्स फाइल करते समय होने वाली उलझन कम होगी। नई व्यवस्था से टैक्स से जुड़ी जानकारी को डिजिटल सिस्टम के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा। इससे रीयल-टाइम डेटा मिलान और जांच में मदद मिलेगी। हालांकि, इसके कारण नियोक्ताओं, टैक्स सलाहकारों, रजिस्ट्रार और कंपनियों को अपने सिस्टम में जल्दी बदलाव करना होगा।


    एचआरए की श्रेणी-1 में बेंगलुरु समेत तीन और शहर

    मसौदा नियम में आवास किराया भत्ते का दावा करने के मकसद से बेंगलुरु, पुणे, अहमदाबाद और हैदराबाद को शामिल करने के लिए श्रेणी-1 महानगरों की सूची का विस्तार किया गया है। इस सूची में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई शामिल हैं। मसौदे में क्रिप्टो एक्सचेंज के लिए कर विभाग के साथ जानकारी साझा करना अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव है। इसमें केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के स्वीकृत तरीके के तौर पर भी शामिल किया गया है। मसौदा नियमों में क्रिप्टो-संपत्ति सेवा प्रदाताओं के लिए विस्तृत रिपोर्टिंग और जांच-पड़ताल की जिम्मेदारियों का भी प्रस्ताव है।

  • वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत के पास कितना है पेट्रोल भंडार? मंत्री पुरी ने दी जानकारी

    वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत के पास कितना है पेट्रोल भंडार? मंत्री पुरी ने दी जानकारी


    नई दिल्ली। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में जानकारी दी कि वैश्विक उथल-पुथल की स्थिति में भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार लगभग 74 दिन तक देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। पुरी ने कहा कि तेजी से विकास कर रहे भारत के लिए सुरक्षित और व्यवहार्य तेल भंडार बेहद जरूरी है, ताकि वैश्विक संकट की स्थिति में देश कमजोर न पड़े। उन्होंने बताया कि भारत के पश्चिमी और पूर्वी तट दोनों पर तेलशोधक संयंत्र मौजूद हैं, जो आपूर्ति बनाए रखने में मदद करते हैं।

    भारत की वैश्विक स्थिति

    अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। देश के पास विश्व की चौथी सबसे बड़ी शोधन क्षमता है, जो वर्तमान में लगभग 26 करोड़ मीट्रिक टन प्रति वर्ष है और बढ़कर 32 करोड़ मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो जाएगी। भारत दुनिया में पेट्रोलियम उत्पादों का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक भी है।

    पुरी ने बताया कि रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक स्तर पर किसी भी उथल-पुथल की स्थिति में देश अपनी जरूरतों को पूरा कर सके। आईईए के मुताबिक, आदर्श रूप से 90 दिनों का भंडार होना चाहिए।

    वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजना

    पुरी ने कहा कि वर्तमान में भारत के कुल भंडार लगभग 74 दिन तक पर्याप्त हैं। उन्होंने कहा, “मंत्री के रूप में मैं 74 दिनों के भंडार के साथ सुरक्षित महसूस करता हूं, लेकिन भविष्य में इसे और बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।

    पुरी ने यह भी बताया कि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड के तहत तीन जगहों पर 53.3 लाख मीट्रिक टन की कुल क्षमता वाले भंडार स्थापित किए गए हैं, जिनमें उपलब्ध कच्चे तेल की मात्रा बाजार की स्थितियों के अनुसार बदलती रहती है। पुरी ने जोर देकर कहा कि रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार न केवल ऊर्जा सुरक्षा बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता का भी अहम घटक है।

  • 300 साल बाद महाशिवरात्रि पर दुर्लभ ज्योतिष संयोग: 15 फरवरी को भगवान शिव से आपकी हर मनोकामना हो सकती है पूरी

    300 साल बाद महाशिवरात्रि पर दुर्लभ ज्योतिष संयोग: 15 फरवरी को भगवान शिव से आपकी हर मनोकामना हो सकती है पूरी


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र पर्व महाशिवरात्रि इस बार 15 फरवरी, 2026 को मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन तथा शिव के भक्ति, साधना और उपवास से जुड़े अनगिनत धार्मिक महत्वों से संपन्न है। इस वर्ष महाशिवरात्रि को ज्योतिषीय दृष्टि से भी एक दुर्लभ और शक्तिशाली संयोग के साथ जोड़ा जा रहा है, जिसे करीब 300 साल बाद बन रहा शुभ योग माना जा रहा है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन कई प्रमुख ग्रहों की चाल में बदलाव देखने को मिलेगा, जिसमें सूर्य, बुध और शुक्र के संयोग जैसे दुर्लभ ग्रह-योग शामिल हैं, जो जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालने वाले बताए जा रहे हैं। इसी के साथ चंद्रमा का मकर राशि में गोचर, बुध का शतभिषा से पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश और मंगल का श्रवण से धनिष्ठा नक्षत्र में जाना भी इसी दिन विशेष शुभ माना जा रहा है।

    आधिकारिक पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि तिथि 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे से आरंभ होकर 16 फरवरी को शाम 05:34 बजे तक रहेगी, और इस दिन भक्त शिवलिंग पर विधिवत पूजा, रुद्राभिषेक और निशीथ-काल में जागरण कर भोलेनाथ का आह्वान करते हैं। इस रात को शिव के तत्त्वों का प्रभाप्रवाह बढ़ा हुआ माना जाता है, जिससे शिवभक्ति, ध्यान और मंत्र जाप का विशेष फल प्राप्त होता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र का संयोग भी विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि यह नक्षत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इसका प्रभाव साधक के जीवन में दिव्य ऊर्जा को प्रेरित कर सकता है। इस संयोग को सर्वार्थ सिद्धि योग भी कहा जा रहा है, जिसमें साधना, पूजा, व्रत और दान-पुण्य का असर असाधारण फल प्रदान कर सकता है।

    शास्त्रों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक, दूध-दही-गंगा जल का समर्पण, बेलपत्र-धतूरा चढ़ाना, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और ध्यान करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है। इससे कष्टों का निवारण, मनोकामना की सिद्धि, मानसिक शांति, जीवन में सकारात्मक बदलाव और समृद्धि की संभावनाओं में वृद्धि होती है।

    विशेष रूप से यह माना जाता है कि महाशिवरात्रि पर जो साधक श्रद्धा, भक्ति और संतुलित साधना के साथ पूजा-अर्चना करता है, उसे भगवान शिव की आशीर्वाद से आध्यात्मिक उन्नति, कठिनाइयों से मुक्ति तथा जीवन की हर मनोकामना की पूर्ति के मार्ग खुलते दिखाई देते हैं। यह दिन केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, कर्म-निवृति और शिव-तत्त्व से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है।

  • चंद्रमा का वृश्चिक गोचर बढ़ाएगा मानसिक दबाव जानिए किन राशियों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव

    चंद्रमा का वृश्चिक गोचर बढ़ाएगा मानसिक दबाव जानिए किन राशियों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव


    नई दिल्ली :ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन और भावनाओं का सबसे बड़ा कारक माना गया है। चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति की मानसिक अवस्था से लेकर सेहत और निर्णय क्षमता तक को प्रभावित करती है। यही कारण है कि चंद्रमा के गोचर को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। चंद्रमा सबसे तेज गति से चलने वाले ग्रह हैं और लगभग ढाई दिन में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश कर जाते हैं। इस बार चंद्रमा का गोचर कुछ राशियों के लिए चिंता और चुनौतियां लेकर आ रहा है।

    ज्योतिषियों के अनुसार वर्तमान समय में चंद्रमा तुला राशि में विराजमान हैं और 10 फरवरी को देर रात 1 बजकर 11 मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। वृश्चिक राशि चंद्रमा की नीच राशि मानी जाती है। नीच अवस्था में चंद्रमा का प्रभाव मन को अस्थिर कर सकता है। इससे तनाव बढ़ता है और व्यक्ति छोटी छोटी बातों को लेकर भी मानसिक दबाव महसूस करता है। ऐसे में कुछ राशि वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह गोचर मानसिक तनाव को बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। बीती बातों को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकता है। मन अशांत रहेगा और स्वयं को थका हुआ महसूस कर सकते हैं। इस समय किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना आवश्यक होगा। पारिवारिक या कार्यस्थल से जुड़ी किसी बात पर बहस की स्थिति बन सकती है। प्रेम संबंधों में भी संयम बरतने की आवश्यकता रहेगी। धैर्य और समझदारी से काम लेना इस समय सबसे जरूरी होगा।

    मिथुन राशि वालों के लिए चंद्रमा का यह गोचर कुछ उलझनें लेकर आ सकता है। किसी नए रिश्ते में जल्दबाजी करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे मतभेद बढ़ सकते हैं। नौकरी परिवर्तन या यात्रा को लेकर मन में असमंजस बना रह सकता है। स्वास्थ्य के लिहाज से मौसमी बीमारियां परेशान कर सकती हैं इसलिए खानपान और दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी होगा। कला और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को किसी बात को लेकर मानसिक दबाव महसूस हो सकता है।

    धनु राशि के जातकों को इस समय सेहत के प्रति विशेष सतर्कता बरतनी होगी। थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है जिससे रोजमर्रा के कार्य प्रभावित हो सकते हैं। मनचाहे परिणाम पाने के लिए अपेक्षा से अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना जरूरी होगा और अहंकार से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। मानसिक बेचैनी और अनावश्यक चिंताएं परेशान कर सकती हैं। किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले सोच विचार करना लाभकारी रहेगा।

    ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि चंद्रमा का यह गोचर स्थायी प्रभाव नहीं डालेगा लेकिन इन कुछ दिनों में मानसिक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। ध्यान योग और सकारात्मक सोच से इस प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सही निर्णय और संयम से इन चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है।

  • विजया एकादशी 2026: तुलसी के विशेष उपाय से दूर होंगी दरिद्रता, घर में आएगी मां लक्ष्मी की कृपा

    विजया एकादशी 2026: तुलसी के विशेष उपाय से दूर होंगी दरिद्रता, घर में आएगी मां लक्ष्मी की कृपा


    नई दिल्ली ।  हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह की विजया एकादशी 13 फरवरी, 2026 को मनाई जाएगी, जो कृष्ण पक्ष की ग्यारस तिथि पर पड़ती है। विजया शब्द का अर्थ ही विजय है और इस पावन दिन का महत्व प्राचीन धर्मग्रंथों में भी वर्णित है। कहा जाता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने लंका-यात्रा से पूर्व उसी एकादशी का व्रत रखकर विजय प्राप्त की थी, इसी से इस दिन का नाम विजया एकादशी पड़ा।

    धार्मिक मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत कर लेने से जीवन में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं, मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आंतरिक विजय प्राप्त होती है। भक्त सुबह स्नान, भगवान विष्णु की पूजा और व्रत कथा सुनकर दिनभर साधना में लीन रहते हैं। पारण व्रत समाप्ति 14 फरवरी को द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय में किया जाता है, जो विशेष मान्यता रखता है।

    इस पावन दिन तुलसी के साथ किए गए उपायों को भी बेहद शुभ माना जाता है। तुलसी का पौधा भगवान विष्णु का प्रिय माना जाता है और पूजा में उसकी महिमा वर्णित है। धार्मिक परंपरा के अनुसार विजया एकादशी के दिन तुलसी के पास दीपक जलाना, फल-भोग अर्पित करना और परिक्रमा करना विशेष फलदायी होता है। तुलसी के पास घी का दीपक प्रज्वलित करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा मिटती है और सुख-शांति तथा धन-समृद्धि में वृद्धि होती है।

    भक्त भगवान विष्णु को भोग में फल और मिठाई अर्पित करते हैं और उसमें तुलसी के कुछ पत्थर भी शामिल करते हैं। ऐसा करने से भगवान विष्णु के साक्षात आशीर्वाद की प्राप्ति होती है, जिससे जीवन में विजय-आत्मबल और बाधा-उन्मूलन की मान्यता जुड़ी हुई है।

    पौराणिक आस्था के अनुसार विजया एकादशी के दिन तुलसी की पूजा के समय तुलसी के 7 या 11 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। इस दौरान तुलसी के मंत्रों का जप और अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करना चाहिए। ऐसा करने से कहा जाता है कि मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और इच्छित फल मिलने में सहायता मिलती है।

    विजया एकादशी का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म-शुद्धि, भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा के आराधना का एक अवसर भी है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु और तुलसी की पूजा कर अपने जीवन में धन, समृद्धि, भय मोचन और मानसिक स्थिरता प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
    धार्मिक परंपरा में यह भी कहा जाता है कि तुलसी को जल न देना चाहिए क्योंकि एकादशी के दिन तुलसी स्वयम् निर्जला व्रत करती हैं, इसलिए तुलसी को जल देना वर्जित माना जाता है। पूजा के दौरान तुलसी को छूना भी वर्जित बताया जाता है, और आसपास की जगह को स्वच्छ रखना अत्यंत आवश्यक होता है ताकि पवित्रता बनी रहे और व्रत के शुभ फल प्राप्त हों

  • मध्य प्रदेश में अगले 2 दिन गर्माहट बढ़ाएगी राहत, फिर पहाड़ों में बर्फ पिघलते ही लौटेगी ठिठुरन

    मध्य प्रदेश में अगले 2 दिन गर्माहट बढ़ाएगी राहत, फिर पहाड़ों में बर्फ पिघलते ही लौटेगी ठिठुरन


    भोपाल। मध्य प्रदेश के मौसम में अगले दो दिनों तक आम नागरिकों को सर्दी से कुछ राहत मिल सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 3-4 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने का अनुमान है। हालांकि, पहाड़ों से गुजरने वाले साइक्लोनिक सर्कुलेशन और बर्फ पिघलने के बाद ठंडी हवाओं के लौटने से फिर से ठिठुरन बढ़ सकती है।

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, फरवरी महीने में तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा। फिलहाल प्रदेश में बारिश की संभावना कम है। मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन और पहाड़ों में बर्फबारी तथा बारिश की वजह से अगले दो दिन तक प्रदेश में तापमान बढ़ेगा। भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत कई हिस्सों में सोमवार को तेज धूप रही, जिससे दिन का तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया। रात और अलसुबह ठंड का असर अभी भी महसूस होगा।

    आगे बदलेगा मौसम

    मौसम विभाग ने बताया कि जब साइक्लोनिक सिस्टम गुजर जाएगा और पहाड़ों की बर्फ पिघलेगी, तो 13, 14 और 15 फरवरी को ठंड का असर फिर से बढ़ेगा। इस दौरान उत्तर से ठंडी हवाओं का प्रभाव भी महसूस होगा।

    13 शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री से कम

    रविवार और सोमवार की रात में प्रदेश के 13 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। सबसे ठंडा स्थान कटनी का करौंदी रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.9 डिग्री सेल्सियस था। अन्य ठंडे स्थानों में शहडोल (6.4), पचमढ़ी (7.4), अमरकंटक (7.8), दतिया (8.1), रीवा (8.3), राजगढ़ (8.6), उमरिया (8.8), शिवपुरी (9), मंडला (9.4), मलाजखंड (9.5) और नौगांव (9.8) डिग्री सेल्सियस दर्ज किए गए। पांच प्रमुख शहरों में न्यूनतम तापमान इस प्रकार रहा: भोपाल 10.2, इंदौर 11.2, ग्वालियर 10.6, उज्जैन 12.4 और जबलपुर 11.4 डिग्री सेल्सियस।

    अगले 2 दिन मौसम का हाल

    11 फरवरी: दिन में तेज धूप और तापमान में बढ़ोतरी, रात और सुबह ठंड महसूस होगी।
    12 फरवरी: तापमान 3-4 डिग्री तक बढ़ेगा, दिन में धूप जारी रहेगी।