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  • July Bank Holiday 2026: जुलाई में 12 दिन बंद रहेंगे बैंक, छुट्टियों की पूरी लिस्ट देखकर ही करें जरूरी काम की प्लानिंग

    July Bank Holiday 2026: जुलाई में 12 दिन बंद रहेंगे बैंक, छुट्टियों की पूरी लिस्ट देखकर ही करें जरूरी काम की प्लानिंग

    नई दिल्ली। जुलाई 2026 की शुरुआत के साथ ही बैंक ग्राहकों के लिए छुट्टियों का कैलेंडर जानना जरूरी हो गया है। यदि आपको बैंक शाखा में जाकर नकदी जमा करनी है, चेक क्लियर कराना है, डिमांड ड्राफ्ट बनवाना है या किसी अन्य बैंकिंग सेवा का लाभ लेना है, तो पहले अपने शहर की अवकाश सूची जरूर देख लें। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी बैंक अवकाश कैलेंडर के अनुसार, जुलाई महीने में विभिन्न राज्यों में स्थानीय पर्व, सांस्कृतिक आयोजनों और नियमित साप्ताहिक अवकाश को मिलाकर कुल 12 दिन बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहेगा।

    हालांकि, यह समझना भी जरूरी है कि सभी छुट्टियां पूरे देश में एक साथ लागू नहीं होंगी। बैंक अवकाश की व्यवस्था राज्यवार और स्थानीय त्योहारों के आधार पर तय होती है। इसका मतलब है कि जिस दिन किसी राज्य में बैंक बंद रहेंगे, उसी दिन दूसरे राज्यों में बैंक सामान्य रूप से खुले भी रह सकते हैं। इसलिए ग्राहकों को अपने शहर और राज्य के अनुसार बैंक अवकाश की जानकारी पहले से प्राप्त कर लेनी चाहिए।

    महीने की शुरुआत में 5 जुलाई को रविवार होने के कारण देशभर में बैंक बंद रहेंगे। इसके बाद 6 जुलाई को मिजोरम की राजधानी आइजोल में एमएचआईपी डे के अवसर पर स्थानीय बैंक शाखाओं में अवकाश रहेगा। 9 जुलाई को मेघालय के शिलॉन्ग में बेह देइंखलाम पर्व के कारण बैंक बंद रहेंगे। वहीं 11 जुलाई को दूसरे शनिवार और 12 जुलाई को रविवार के कारण देशभर के सभी सरकारी और निजी बैंक शाखाओं में नियमित अवकाश रहेगा।

    जुलाई के मध्य में भी कई राज्यों में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहेंगी। 16 जुलाई को रथ यात्रा, कांग रथयात्रा और हरेला पर्व के अवसर पर भुवनेश्वर, देहरादून, इम्फाल और शिलॉन्ग में बैंक बंद रहेंगे। इसके अगले दिन 17 जुलाई को शिलॉन्ग में यू तिरोत सिंह की पुण्यतिथि पर स्थानीय अवकाश रहेगा। 18 जुलाई को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में द्रुकपा त्शे-जी पर्व के अवसर पर बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। 19 जुलाई को रविवार होने से पूरे देश में बैंकिंग अवकाश रहेगा।

    महीने के अंतिम सप्ताह में भी कुछ स्थानों पर बैंक बंद रहेंगे। 22 जुलाई को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में खर्ची पूजा के अवसर पर बैंक शाखाओं में अवकाश रहेगा। इसके अलावा 25 जुलाई को चौथा शनिवार और 26 जुलाई को रविवार होने के कारण पूरे देश में सभी बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। ऐसे में ग्राहकों को अपने जरूरी बैंकिंग कार्य इन तिथियों को ध्यान में रखकर पहले ही पूरे कर लेने चाहिए।

    बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों की डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड जैसी सभी ऑनलाइन सुविधाएं पहले की तरह चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेंगी। ग्राहक धन हस्तांतरण, बिल भुगतान, ऑनलाइन खरीदारी और नकदी निकासी जैसे अधिकांश कार्य बिना किसी रुकावट के कर सकेंगे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक शाखा में जाकर किए जाने वाले कार्यों की योजना पहले से बना लेने पर अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकता है। खासतौर पर व्यापारियों, वेतनभोगी कर्मचारियों और ऐसे ग्राहकों के लिए, जिन्हें शाखा आधारित सेवाओं की आवश्यकता होती है, बैंक अवकाश की जानकारी पहले से होना बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

  • Gold Price Today: सोने की कीमतों में फिर आई बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक टूटे भाव; शहरवार देखें नए रेट

    Gold Price Today: सोने की कीमतों में फिर आई बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक टूटे भाव; शहरवार देखें नए रेट

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते उतार-चढ़ाव और निवेशकों की बदली रणनीति का असर सोमवार को घरेलू सर्राफा बाजार में भी देखने को मिला। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोने की कीमतों में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई, जिससे लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कीमती धातु दबाव में रही। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और सुरक्षित निवेश की मांग में आई कमी के कारण सोने के भाव नरम बने हुए हैं। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है, जहां 24 कैरेट से लेकर 10 कैरेट तक लगभग सभी श्रेणियों के सोने की कीमतों में कमी दर्ज की गई।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 24 कैरेट सोने के वायदा भाव में लगभग 0.94 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान प्रति 10 ग्राम कीमत में 1,300 रुपये से अधिक की कमी देखने को मिली। वहीं सर्राफा बाजार में भी सोने की कीमतें दबाव में रहीं। दिनभर के कारोबार में भावों में उतार-चढ़ाव देखने के बाद शाम तक कीमतें सुबह के मुकाबले नीचे रहीं। इससे स्पष्ट है कि बाजार में फिलहाल खरीदारी की गति कमजोर बनी हुई है।

    शुद्धता के आधार पर देखें तो 24 कैरेट सोना करीब 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता रहा, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत लगभग 1.31 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रही। 18 कैरेट सोने के दाम भी एक लाख रुपये से ऊपर बने रहे। इसके अलावा 20, 16, 14, 12 और 10 कैरेट श्रेणियों में भी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसका लाभ उन उपभोक्ताओं को मिल सकता है जो निकट भविष्य में आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में समान रुख देखने को मिला। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, जयपुर, पटना, इंदौर, अहमदाबाद, पुणे, हैदराबाद और बेंगलुरु सहित अधिकांश शहरों में 24 कैरेट सोने के भाव में नरमी रही। हालांकि विभिन्न शहरों में स्थानीय करों और बाजार की परिस्थितियों के कारण कीमतों में मामूली अंतर बना रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों का असर फिलहाल सोने की चाल पर सबसे अधिक दिखाई दे रहा है। अमेरिकी डॉलर में मजबूती, अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों की बदलती धारणा और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में नरमी के कारण सोने में सुरक्षित निवेश की मांग कुछ कम हुई है। इसी वजह से वैश्विक बाजार में भी सोना दबाव में बना हुआ है, जिसका प्रभाव भारतीय बाजार पर लगातार पड़ रहा है।

    इंडियन बुलियन बाजार में दिनभर के दौरान भी कीमतों में कई बार बदलाव दर्ज किया गया। सुबह के मुकाबले दोपहर में कुछ तेजी दिखाई दी, लेकिन कारोबार समाप्त होने तक फिर गिरावट दर्ज हो गई। इससे साफ है कि बाजार अभी भी अस्थिर बना हुआ है और निवेशक नई आर्थिक परिस्थितियों का इंतजार कर रहे हैं।

    पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में भी सोने के भाव में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना भी महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया, जिससे घरेलू बाजार पर दबाव और बढ़ गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, डॉलर की चाल, वैश्विक ब्याज दरों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के आधार पर सोने की दिशा तय होगी। ऐसे में निवेशकों और आभूषण खरीदारों को बाजार की चाल पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • सिर्फ गर्मी नहीं स्कैल्प का पसीना भी पहुंचा सकता है बालों को नुकसान एक्सपर्ट्स ने बताए बचाव के असरदार तरीके

    सिर्फ गर्मी नहीं स्कैल्प का पसीना भी पहुंचा सकता है बालों को नुकसान एक्सपर्ट्स ने बताए बचाव के असरदार तरीके


    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम अपने साथ तेज धूप उमस और पसीने की समस्या लेकर आता है। शरीर का पसीना आना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में मदद करती है लेकिन जब यही पसीना लंबे समय तक सिर की त्वचा यानी स्कैल्प पर जमा रहता है तो यह बालों की सेहत के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। यही वजह है कि गर्मियों में कई लोगों को बाल झड़ने डैंड्रफ खुजली और स्कैल्प से बदबू आने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार स्कैल्प पर लगातार नमी बनी रहने से वहां बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपने लगते हैं। पसीना तेल और धूल मिलकर रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं जिससे बालों की जड़ों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते। इसका सीधा असर बालों की मजबूती पर पड़ता है और धीरे धीरे बाल कमजोर होकर टूटने लगते हैं। यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए तो हेयर फॉल तेजी से बढ़ सकता है।

    वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो पसीने में पानी के साथ नमक और लैक्टिक एसिड भी मौजूद होता है। जब यह लंबे समय तक स्कैल्प पर बना रहता है तो सिर की त्वचा का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने लगता है। इससे बालों की बाहरी परत कमजोर हो जाती है और बाल रूखे बेजान तथा दोमुंहे दिखाई देने लगते हैं। कई बार स्कैल्प में जलन और खुजली भी शुरू हो जाती है जो आगे चलकर डैंड्रफ का रूप ले सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में बालों की देखभाल के लिए सबसे पहले स्कैल्प की सफाई पर ध्यान देना चाहिए। यदि ज्यादा पसीना आता है तो जरूरत के अनुसार हल्के और सौम्य शैंपू से बाल धोना फायदेमंद रहता है। इससे अतिरिक्त तेल धूल और पसीना साफ हो जाता है तथा रोमछिद्र खुले रहते हैं। हालांकि जरूरत से ज्यादा शैंपू करने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे स्कैल्प का प्राकृतिक तेल कम हो सकता है।

    हल्की तेल मालिश भी स्कैल्प को स्वस्थ रखने में मदद करती है। आंवला नारियल या अन्य प्राकृतिक तेलों से हल्के हाथों से मालिश करने से रक्त संचार बेहतर होता है और बालों की जड़ों तक पोषण आसानी से पहुंचता है। आंवला में मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट बालों को मजबूत बनाने में सहायक माने जाते हैं।

    पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी बालों की अच्छी सेहत के लिए बेहद जरूरी है। शरीर में पानी की कमी होने पर स्कैल्प का संतुलन बिगड़ सकता है। पर्याप्त हाइड्रेशन शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है और त्वचा के साथ साथ स्कैल्प को भी स्वस्थ बनाए रखता है।

    एलोवेरा जेल गर्मियों में स्कैल्प को ठंडक देने का एक प्राकृतिक उपाय माना जाता है। इसे सीधे सिर की त्वचा पर लगाने से खुजली और जलन में राहत मिल सकती है। वहीं गुलाब जल का हल्का स्प्रे स्कैल्प को ताजगी देता है और पसीने की बदबू कम करने में मदद करता है। कुछ विशेषज्ञ पानी में मिलाकर ऐप्पल साइडर विनेगर का सीमित उपयोग भी स्कैल्प का पीएच संतुलित रखने के लिए लाभदायक मानते हैं।

    इसके अलावा बहुत टाइट हेयर स्टाइल बनाने और बार बार हेयर ड्रायर या हीट स्टाइलिंग उपकरणों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। ढीले हेयर स्टाइल अपनाने से हवा आसानी से स्कैल्प तक पहुंचती है और पसीना जल्दी सूख जाता है।

    स्वस्थ बालों के लिए संतुलित खानपान भी उतना ही जरूरी है। हरी सब्जियां मौसमी फल मेवे बीज और पर्याप्त प्रोटीन युक्त भोजन बालों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं जबकि अधिक मसालेदार भोजन जंक फूड और जरूरत से ज्यादा चाय कॉफी शरीर की गर्मी बढ़ाकर पसीना बढ़ा सकते हैं।

    यदि बालों का झड़ना लगातार बढ़ रहा हो डैंड्रफ लंबे समय तक बना रहे या स्कैल्प में संक्रमण के लक्षण दिखाई दें तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प है।

  • हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा केस के आरोपी परिवार के घर चोरों का धावा, बड़ी वारदात नाकाम, CCTV के सहारे तलाश तेज

    हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा केस के आरोपी परिवार के घर चोरों का धावा, बड़ी वारदात नाकाम, CCTV के सहारे तलाश तेज

     मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा हत्याकांड से जुड़े एक और घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था और जांच को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। मामले की मुख्य आरोपी और पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के कटारा हिल्स स्थित आवास पर देर रात चोरी का प्रयास किया गया। हालांकि पुलिस की समय पर हुई गश्त के कारण बदमाश अपनी योजना को पूरा नहीं कर सके और मौके पर ही कीमती सामान छोड़कर फरार हो गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है तथा आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार घटना देर रात करीब दो बजे की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुल छह बदमाश चोरी की नीयत से घर पहुंचे थे। इनमें से चार लोग मकान के पिछले हिस्से से पहली मंजिल तक पहुंचे और घर के भीतर प्रवेश कर गए, जबकि दो अन्य बाहर निगरानी करते रहे। घर के अंदर घुसने के बाद आरोपियों ने अलमारियों की तलाशी ली और सोने का हार, चांदी के कुछ सामान तथा अन्य वस्तुओं को एक झोले में भर लिया।

    इसी दौरान क्षेत्र में नियमित गश्त कर रही पुलिस की नाइट पेट्रोलिंग टीम वहां पहुंच गई। सन्नाटे में पुलिस वाहन का सायरन सुनते ही बदमाश घबरा गए और जल्दबाजी में चोरी का सामान वहीं छोड़कर भाग निकले। पुलिसकर्मियों ने संदिग्ध गतिविधि देखते ही उनका पीछा भी किया, लेकिन अंधेरे और संकरी गलियों का फायदा उठाकर सभी आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहे। पुलिस ने घटनास्थल से बरामद झोले को अपने कब्जे में लेकर उसमें रखे सोने के आभूषण, चांदी के सामान और अन्य वस्तुओं को सुरक्षित जब्त कर लिया है।

    घटना के समय घर के एक हिस्से में पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के भाई और सेवानिवृत्त कर्नल रणवीर सिंह भदौरिया मौजूद थे। उन्हें सुबह चोरी के प्रयास की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    यह मकान पहले से ही चर्चित ट्विशा शर्मा मृत्यु प्रकरण के कारण संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में घटना के बाद यह चर्चा भी शुरू हो गई कि कहीं मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज या कानूनी रिकॉर्ड चोरी तो नहीं हुए। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की केस फाइल, दस्तावेज या जांच से संबंधित सामग्री गायब नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार यह केवल चोरी का प्रयास था और इसका जांच से जुड़े रिकॉर्ड से कोई संबंध सामने नहीं आया है।

    गौरतलब है कि इसी मकान में 12 मई को 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। मृतका के परिजनों ने इसे हत्या बताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की जांच के दौरान पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके पुत्र समर्थ सिंह को गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान में दोनों न्यायिक हिरासत में हैं और पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण एजेंसी कर रही है।

    पुलिस का कहना है कि घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की जा रही है। फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान और उनकी गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की उम्मीद है। फिलहाल चोरी के प्रयास और उससे जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जांच जारी है।

  • ट्रंप ने दोहा बैठक का किया ऐलान, तेहरान ने कहा- कोई कार्यक्रम तय नहीं, अमेरिका-ईरान रिश्तों में नई कूटनीतिक उलझन

    ट्रंप ने दोहा बैठक का किया ऐलान, तेहरान ने कहा- कोई कार्यक्रम तय नहीं, अमेरिका-ईरान रिश्तों में नई कूटनीतिक उलझन


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक असमंजस की स्थिति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने बातचीत का अनुरोध किया है और दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच अगले दिन कतर की राजधानी दोहा में बैठक होगी। हालांकि, ट्रंप के इस बयान के कुछ ही समय बाद ईरान ने ऐसी किसी भी प्रस्तावित बैठक से साफ इनकार कर दिया। दोनों देशों के विपरीत दावों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है और यह संकेत दिया है कि दोनों पक्षों के बीच संवाद की प्रक्रिया अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर एक संक्षिप्त संदेश जारी करते हुए कहा कि ईरान की ओर से बैठक का अनुरोध किया गया है और यह बातचीत दोहा में आयोजित होगी। उनके इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना गया जब पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों के बाद क्षेत्रीय तनाव लगातार बना हुआ है और कई देश किसी भी संभावित कूटनीतिक पहल पर नजर बनाए हुए हैं।

    दूसरी ओर, ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने स्पष्ट किया कि इस सप्ताह कतर में अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी तकनीकी स्तर की बैठक की कोई योजना तय नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि विभिन्न मध्यस्थ देशों के माध्यम से बातचीत की प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी है, लेकिन जिन बैठकों की चर्चा मीडिया में की जा रही है, उनकी पुष्टि नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, किसी भी औपचारिक तकनीकी वार्ता से पहले समय, स्थान और अन्य आवश्यक शर्तों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनना जरूरी होगा।

    ईरानी पक्ष के इस बयान से स्पष्ट संकेत मिला कि बैकचैनल संपर्क और औपचारिक वार्ता के बीच अभी भी अंतर बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में दोनों देश सार्वजनिक बयानों और वास्तविक कूटनीतिक प्रयासों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में आधिकारिक घोषणा से पहले किसी भी संभावित बैठक को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है।

    हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव, समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे प्रभाव ने अमेरिका और ईरान के बीच संवाद की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चाहता है कि दोनों देशों के बीच किसी प्रकार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संवाद जारी रहे ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सके। हालांकि दोनों पक्ष अब भी कई प्रमुख मुद्दों पर अलग-अलग रुख अपनाए हुए हैं।

    इसी बीच ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। 4 से 9 जुलाई के बीच आयोजित होने वाले राजकीय कार्यक्रम में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन इस अवसर पर देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। इसे भारत और ईरान के बीच जारी राजनयिक संपर्कों के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

    फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। एक ओर ट्रंप का सार्वजनिक दावा है तो दूसरी ओर तेहरान का आधिकारिक खंडन। ऐसे में अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच वास्तव में कोई औपचारिक बैठक होती है या कूटनीतिक संपर्क केवल मध्यस्थ देशों के माध्यम से ही आगे बढ़ता है।

  • मीठा खाने का भी होता है सही समय वरना बढ़ सकता है ब्लड शुगर और वजन का खतरा जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स

    मीठा खाने का भी होता है सही समय वरना बढ़ सकता है ब्लड शुगर और वजन का खतरा जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स


    नई दिल्ली । त्योहार हो जन्मदिन हो शादी का जश्न हो या फिर कोई छोटी सी खुशी भारत में हर खास मौके की शुरुआत मीठे से होती है। मिठाई हमारे खानपान और संस्कृति का अहम हिस्सा है लेकिन क्या आप जानते हैं कि मीठा सिर्फ कितनी मात्रा में खाया जाए यह ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि उसे किस समय खाया जाए यह भी आपकी सेहत पर बड़ा असर डालता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गलत समय पर मीठा खाने की आदत धीरे धीरे ब्लड शुगर बढ़ने वजन बढ़ने और भविष्य में डायबिटीज जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है।

    अक्सर लोग सुबह उठते ही चाय के साथ बिस्कुट मिठाई चॉकलेट या अन्य मीठी चीजें खा लेते हैं। कुछ लोग खाली पेट ही मीठे से दिन की शुरुआत करते हैं। डॉक्टरों के अनुसार यह आदत शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। खाली पेट मीठा खाने पर उसमें मौजूद शुगर तेजी से खून में पहुंचती है जिससे ब्लड ग्लूकोज का स्तर अचानक बढ़ जाता है। इसके कुछ समय बाद शुगर तेजी से नीचे भी आ जाती है जिससे कमजोरी थकान और बार बार भूख लगने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। यही वजह है कि दिनभर मीठा खाने की इच्छा भी बढ़ जाती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि मीठा खाना ही है तो उसे मुख्य भोजन के बाद सीमित मात्रा में खाना ज्यादा बेहतर विकल्प माना जाता है। जब हम पहले दाल रोटी सब्जी चावल सलाद या अन्य पौष्टिक भोजन खाते हैं तब शरीर को फाइबर प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्व मिल जाते हैं। ये तत्व मीठे में मौजूद चीनी को धीरे धीरे अवशोषित होने में मदद करते हैं जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता और शरीर पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ता। यही कारण है कि डॉक्टर भोजन के तुरंत बाद थोड़ी मात्रा में मिठाई खाने की सलाह देते हैं।

    दिन और रात के समय का अंतर भी इस मामले में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। रात में शरीर आराम की अवस्था में पहुंचने लगता है और ऊर्जा की जरूरत भी कम हो जाती है। ऐसे समय अधिक मात्रा में मीठा खाने से अतिरिक्त कैलोरी शरीर में जमा होने लगती है जिससे वजन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। लगातार रात में मीठा खाने की आदत भविष्य में मोटापा इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज जैसी समस्याओं की आशंका को भी बढ़ा सकती है।

    यदि मीठा खाना हो तो दोपहर के भोजन के बाद सीमित मात्रा में खाना अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है क्योंकि दिन के समय शरीर अधिक सक्रिय रहता है और अतिरिक्त ऊर्जा का उपयोग आसानी से कर लेता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि दिनभर मनचाहा मीठा खाया जाए। मात्रा पर नियंत्रण रखना हर स्थिति में जरूरी है।

    डॉक्टर यह भी कहते हैं कि केवल केक पेस्ट्री चॉकलेट या मीठे पेय पदार्थों के सहारे भूख मिटाना सही आदत नहीं है। इससे शरीर को आवश्यक विटामिन मिनरल्स और प्रोटीन नहीं मिल पाते। संतुलित भोजन के साथ ही मीठे का सेवन करना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

    जिन लोगों को डायबिटीज प्री डायबिटीज मोटापा या ब्लड शुगर से जुड़ी कोई समस्या है उन्हें मीठा खाने से पहले अपने डॉक्टर या डाइट विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। सही समय सही मात्रा और संतुलित खानपान अपनाकर मीठे का आनंद भी लिया जा सकता है और स्वास्थ्य भी बेहतर बनाए रखा जा सकता है।

  • दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा जल्द होगा शुरू, वडोदरा से मुंबई सिर्फ 4 घंटे में पहुंचेंगे यात्री

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा जल्द होगा शुरू, वडोदरा से मुंबई सिर्फ 4 घंटे में पहुंचेंगे यात्री

    नई दिल्ली: देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का वडोदरा-मुंबई सेक्शन 31 अगस्त 2026 तक यातायात के लिए खोले जाने की संभावना है। इस हिस्से के शुरू होने के बाद वडोदरा और मुंबई के बीच यात्रा का समय लगभग 8 घंटे से घटकर करीब 4 घंटे रह जाएगा। इससे यात्रियों के साथ-साथ उद्योग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    निर्माण कार्य की समीक्षा के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर परियोजना पूरी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं करने पर जोर दिया गया है, ताकि एक्सप्रेसवे सुरक्षित और टिकाऊ बन सके।

    करीब 1,400 किलोमीटर लंबा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश का सबसे लंबा एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है। यह हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र को जोड़ता है। इस परियोजना पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इसका उद्देश्य दिल्ली और मुंबई के बीच तेज, सुरक्षित और निर्बाध सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देना भी है।

    वडोदरा-मुंबई कॉरिडोर का महाराष्ट्र वाला हिस्सा लगभग 157 किलोमीटर लंबा है, जिसका निर्माण करीब 24 हजार करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। इस सेक्शन को सात निर्माण पैकेजों में विभाजित किया गया है। इनमें से पांच पैकेज का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष दो पैकेज अगस्त के अंत तक पूरे होने की उम्मीद है। इनके चालू होने के बाद इस पूरे सेक्शन पर निर्बाध यातायात संभव हो सकेगा।

    इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ माल ढुलाई क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है। एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद उत्तर भारत से आने वाला माल मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक पहुंचने के लिए भीड़भाड़ वाले मार्गों से नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे परिवहन में लगने वाला समय कम होगा, ईंधन की बचत होगी और लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आएगी। इसका सीधा फायदा निर्यात और औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से उत्तर और पश्चिम भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही नए उद्योगों की स्थापना और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। तेज और आधुनिक परिवहन नेटवर्क देश की आर्थिक गतिविधियों को गति देने के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिस्पर्धा को भी मजबूत करेगा।

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का यह नया सेक्शन केवल यात्रा का समय कम करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के सड़क परिवहन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक आधुनिक, तेज और किफायती बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • शानदार शुरुआत के बाद शेयर बाजार में बिकवाली, IT और ऑटो शेयरों की कमजोरी से सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद

    शानदार शुरुआत के बाद शेयर बाजार में बिकवाली, IT और ऑटो शेयरों की कमजोरी से सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद

    नई दिल्ली । सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की, लेकिन कारोबार के अंतिम चरण में तेज बिकवाली के चलते प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशकों की मुनाफावसूली, आईटी और ऑटो शेयरों में कमजोरी तथा बाजार में बढ़ी अस्थिरता ने दिनभर की बढ़त को पूरी तरह खत्म कर दिया।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 372.10 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,728.37 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 109.75 अंक यानी 0.46 प्रतिशत टूटकर 23,946.25 अंक पर आ गया। दिनभर के कारोबार में गिरावट वाले शेयरों की संख्या बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों से अधिक रही, जिससे बाजार में व्यापक बिकवाली का संकेत मिला।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में लगातार तेजी देखने को मिली थी। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और विदेशी निवेशकों की संभावित खरीदारी से बाजार पहले ही ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका था। ऐसे में निवेशकों ने ऊंचे भाव पर मुनाफावसूली करना उचित समझा, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया।

    दिन की गिरावट में आईटी और ऑटो सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान रहा। प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली, जबकि ऑटो सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों के शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। दूसरी ओर फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में खरीदारी का रुख बना रहा, लेकिन यह तेजी पूरे बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही।

    तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए 24,100 से 24,250 अंक का दायरा फिलहाल मजबूत प्रतिरोध स्तर बना हुआ है। बाजार इस स्तर को पार करने में सफल नहीं हो सका, जिसके बाद बिकवाली तेज हो गई। अब 24,000 और 23,800 अंक के स्तर को निकट भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है।

    इस दौरान बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX भी करीब 6 प्रतिशत बढ़कर 13.88 के आसपास पहुंच गया। आमतौर पर VIX में बढ़ोतरी आने वाले समय में बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव की संभावना का संकेत देती है। यही वजह रही कि कई निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए अपने निवेश में मुनाफावसूली की।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निफ्टी 24,100 के ऊपर मजबूती से टिकने में सफल नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के रुख, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर बनी रहेगी।

  • भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 10 साल में 56 गुना बढ़ा, ब्रह्मोस समेत स्वदेशी हथियारों की वैश्विक मांग तेज

    भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 10 साल में 56 गुना बढ़ा, ब्रह्मोस समेत स्वदेशी हथियारों की वैश्विक मांग तेज

    नई दिल्ली: भारत वैश्विक रक्षा बाजार में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। पिछले 10 वर्षों में देश का रक्षा निर्यात 56 गुना बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। अब भारत में बने रक्षा उपकरण और हथियार 80 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं, जबकि 145 से ज्यादा भारतीय कंपनियां रक्षा निर्यात के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

    वित्त वर्ष 2013-14 में भारत का रक्षा निर्यात केवल 686 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस तेज वृद्धि में सरकारी रक्षा उपक्रमों के साथ-साथ निजी कंपनियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहल ने घरेलू रक्षा उत्पादन को नई गति दी है।

    भारतीय रक्षा निर्यात में सबसे अधिक चर्चा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की हो रही है। फिलीपींस के बाद वियतनाम ने भी ब्रह्मोस खरीदने के लिए समझौता किया है, जबकि इंडोनेशिया के साथ बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है। इसके अलावा आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, एटीएजीएस तोप और आधुनिक रडार सिस्टम जैसे स्वदेशी रक्षा उपकरण भी कई देशों की पहली पसंद बन रहे हैं। आर्मेनिया जैसे देशों ने इन प्रणालियों का इस्तेमाल भी शुरू कर दिया है।

    भारतीय हथियारों की बढ़ती स्वीकार्यता के पीछे उनकी आधुनिक तकनीक, विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धी कीमत को प्रमुख कारण माना जा रहा है। हाल के वर्षों में भारतीय रक्षा प्रणालियों के सफल प्रदर्शन ने भी वैश्विक स्तर पर इनकी विश्वसनीयता को मजबूत किया है। इससे कई नए देशों ने भारतीय रक्षा उत्पादों में रुचि दिखाई है।

    रक्षा क्षेत्र में बढ़ते निर्यात का सीधा लाभ भारतीय उद्योग, रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी मिल रहा है। रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ने के साथ नई तकनीकों का विकास और निजी कंपनियों की भागीदारी भी लगातार मजबूत हो रही है। इससे भारत धीरे-धीरे रक्षा आयातक देश की छवि से बाहर निकलकर एक प्रमुख रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित हो रहा है।

    सरकार ने आने वाले वर्षों में रक्षा निर्यात को और बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। वित्त वर्ष 2029-30 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा गति बरकरार रहती है तो भारत वैश्विक रक्षा निर्यात बाजार में अपनी स्थिति और अधिक मजबूत करेगा तथा स्वदेशी रक्षा उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

  • पुशी पेरेंटिंग से बचें बच्चों की सफलता नहीं बल्कि आत्मविश्वास भी छीन सकता है जरूरत से ज्यादा दबाव

    पुशी पेरेंटिंग से बचें बच्चों की सफलता नहीं बल्कि आत्मविश्वास भी छीन सकता है जरूरत से ज्यादा दबाव


    नई दिल्ली । आज के प्रतिस्पर्धी दौर में लगभग हर माता पिता अपने बच्चों को जीवन के हर क्षेत्र में सफल देखना चाहते हैं। अच्छी पढ़ाई बेहतर करियर और हर गतिविधि में उत्कृष्ट प्रदर्शन की इच्छा स्वाभाविक है लेकिन जब यही अपेक्षाएं बच्चों पर दबाव बनकर थोप दी जाती हैं तब यह उनके मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। मनोविज्ञान में इस व्यवहार को पुशी पेरेंटिंग कहा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पालन पोषण का ऐसा तरीका है जिसमें बच्चों से हमेशा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है और उनकी व्यक्तिगत रुचियों भावनाओं तथा सीमाओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

    मनोवैज्ञानिकों के अनुसार पुशी पेरेंटिंग में माता पिता अक्सर अपने अधूरे सपनों और महत्वाकांक्षाओं को बच्चों के माध्यम से पूरा करने की कोशिश करते हैं। बच्चे पर हमेशा बेहतर अंक लाने हर प्रतियोगिता में जीतने और हर क्षेत्र में सबसे आगे रहने का दबाव बनाया जाता है। बाहर से यह अनुशासन और सफलता की तैयारी जैसा दिखाई देता है लेकिन भीतर ही भीतर बच्चा लगातार तनाव और असुरक्षा की भावना से जूझता रहता है। वह पढ़ाई और गतिविधियों का आनंद लेने के बजाय केवल प्रदर्शन और परिणामों के बारे में सोचने लगता है।

    ऐसे माहौल में यदि बच्चा अच्छे अंक भी हासिल कर ले लेकिन प्रथम स्थान न ला पाए तो उसकी उपलब्धि की सराहना करने के बजाय उसे डांट या निराशा का सामना करना पड़ता है। धीरे धीरे उसके मन में यह भावना घर करने लगती है कि उसकी मेहनत की कोई अहमियत नहीं है और उसे तभी स्वीकार किया जाएगा जब वह दूसरों की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा उतरे। इससे बच्चों में असफलता का डर बढ़ता है और उनका आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है।

    पुशी पेरेंटिंग का एक और बड़ा नुकसान यह है कि बच्चों की अपनी पसंद और रुचियों को महत्व नहीं दिया जाता। कई बच्चों की रुचि खेल संगीत चित्रकला या अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में होती है लेकिन माता पिता उन्हें अपनी पसंद के विषय या करियर की ओर धकेल देते हैं। लगातार ऐसा होने पर बच्चा अपनी इच्छाओं को दबा देता है और केवल दूसरों को खुश करने के लिए जीवन जीने लगता है। इससे उसकी रचनात्मकता और आत्मसंतुष्टि दोनों प्रभावित होती हैं।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि बच्चों की लगातार दूसरों से तुलना करना उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालता है। जब बार बार किसी दूसरे बच्चे की उपलब्धियों का उदाहरण दिया जाता है तो बच्चा खुद को कमतर समझने लगता है। उसके भीतर हीन भावना पैदा होती है और धीरे धीरे वह अपनी क्षमताओं पर भरोसा खोने लगता है। यह स्थिति आगे चलकर चिंता अवसाद और आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है।

    कई परिवारों में माता पिता बच्चों के हर छोटे बड़े फैसले स्वयं लेने लगते हैं। क्या पहनना है क्या खाना है किससे दोस्ती करनी है या भविष्य में कौन सा विषय चुनना है जैसे निर्णय भी बच्चों को लेने का अवसर नहीं मिलता। इससे बच्चे में निर्णय लेने की क्षमता विकसित नहीं हो पाती और वह बड़े होने के बाद भी हर बात के लिए दूसरों पर निर्भर रहने लगता है।

    मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों को सही दिशा देना और अनुशासन सिखाना जरूरी है लेकिन उनकी भावनाओं इच्छाओं और क्षमताओं का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है। बच्चों को अपनी गलतियों से सीखने का अवसर देना चाहिए और उनकी सफलता के साथ साथ उनके प्रयासों की भी सराहना करनी चाहिए। सकारात्मक प्रोत्साहन और भरोसे का माहौल ही बच्चों के आत्मविश्वास मानसिक संतुलन और स्वस्थ व्यक्तित्व के विकास की मजबूत नींव बनता है।