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  • JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, रांची में पुलिस ने कई बार बल प्रयोग किया

    JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, रांची में पुलिस ने कई बार बल प्रयोग किया


    नई दिल्ली । झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन सोमवार को विधानसभा मार्च तक पहुंच गया। राज्य के अलग अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में छात्र रांची पहुंचे और विधानसभा घेराव के लिए मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग के साथ वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी।

    सुबह से ही विधानसभा की ओर जाने वाले मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। पुलिस की ओर से छात्रों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए थे। प्रदर्शनकारी लगातार अपनी मांगों को लेकर नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। छात्रों का कहना था कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और वे सरकार पर अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाना चाहते हैं।

    प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पुलिस की बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश की। कुछ स्थानों पर बैरिकेड टूटने की स्थिति भी सामने आई। बताया गया कि प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड पार कर लिए और नई विधानसभा की दिशा में बढ़ने लगे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।

    वॉटर कैनन के इस्तेमाल के दौरान भी कुछ छात्रों ने विरोध जारी रखा। मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने नाचते और गाते हुए पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। कुछ समय बाद पुलिस और छात्रों के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लाठीचार्ज किया।

    लाठीचार्ज के बाद छात्रों में नाराजगी दिखाई दी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वे शांतिपूर्वक आगे बढ़ रहे थे और इसके बावजूद उन पर लाठियां बरसाई गईं। कुछ छात्रों ने दावा किया कि चोटें हाथ, सिर और चेहरे पर भी लगी हैं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की।

    पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। भारतीय जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राज्य सरकार पर निशाना साधा और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है।

    इस बीच डुमरी के विधायक जयराम महतो भी विधानसभा से बाहर निकलकर प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने छात्रों के समर्थन की बात कही और कहा कि उनकी आवाज को विधानसभा के भीतर और सड़क पर भी उठाया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने जयराम महतो का समर्थन करते हुए उन्हें अपने बीच शामिल किया।

    छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी विधानसभा मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और अब सरकार को उनकी शिकायतों पर स्पष्ट कार्रवाई करनी चाहिए। छात्रों ने यह भी कहा कि जब तक उनकी मांगों पर समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

    प्रदर्शन के दौरान छात्रों की ओर से यह भी कहा गया कि यदि पुलिस उन्हें विधानसभा जाने से रोकती है तो वे शांतिपूर्वक वहीं रुकने के लिए तैयार हैं। उनका कहना था कि बल प्रयोग की जरूरत नहीं है और वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी बीजेपी नेताओं ने कथित भर्ती अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कुछ बीजेपी नेताओं को हिरासत में लिया। इस तरह छात्रों के विधानसभा मार्च के साथ राजनीतिक विरोध भी तेज दिखाई दिया।

    फिलहाल रांची में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। छात्रों की मुख्य मांग JPSC-JSSC भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों पर कार्रवाई से जुड़ी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

  • रात की अधूरी नींद दिनभर बिगाड़ सकती है दिमाग की चाल, बढ़ सकता है तनाव और कई बीमारियों का खतरा

    रात की अधूरी नींद दिनभर बिगाड़ सकती है दिमाग की चाल, बढ़ सकता है तनाव और कई बीमारियों का खतरा


    नई दिल्ली । नींद हमारे शरीर और दिमाग को आराम देने के साथ अगले दिन बेहतर तरीके से काम करने के लिए तैयार करती है। यही वजह है कि पर्याप्त नींद को स्वस्थ जीवनशैली का बेहद जरूरी हिस्सा माना जाता है। अगर रात की नींद बार-बार अधूरी रह रही है तो इसका असर सिर्फ सुबह की थकान या दिनभर की सुस्ती तक सीमित नहीं रहता बल्कि धीरे-धीरे व्यक्ति के व्यवहार याददाश्त एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगता है। गुस्सा जल्दी आना छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन महसूस होना किसी काम पर ध्यान केंद्रित न कर पाना और जरूरी बातें भूल जाना कई बार नींद पूरी न होने से भी जुड़ा हो सकता है।

    एक रात नींद कम होने पर अगले दिन थकान सिरदर्द सुस्ती और काम करने में परेशानी महसूस होना सामान्य हो सकता है। कभी-कभार ऐसा होने पर आमतौर पर ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं होती लेकिन जब नींद की कमी लगातार बनी रहती है तो इसका असर रोजमर्रा की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। व्यक्ति को छोटे-छोटे फैसले लेने में भी परेशानी हो सकती है और पढ़ाई या काम के दौरान ध्यान भटकने की समस्या बढ़ सकती है। लंबे समय तक पर्याप्त नींद न मिलने की स्थिति में शरीर और दिमाग दोनों पर दबाव बढ़ता है।

    नींद की कमी का सीधा असर व्यवहार पर भी दिखाई दे सकता है। पर्याप्त आराम न मिलने पर व्यक्ति सामान्य परिस्थितियों में भी ज्यादा चिड़चिड़ा हो सकता है और छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है। भावनाओं को नियंत्रित करना भी मुश्किल महसूस हो सकता है। यही समस्या अगर लंबे समय तक जारी रहे तो तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है। नींद और मानसिक स्वास्थ्य का संबंध काफी गहरा माना जाता है और लगातार नींद की समस्या रहने पर चिंता तथा अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।

    याददाश्त और एकाग्रता पर भी नींद की कमी का असर पड़ता है। रात में शरीर और दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिलने पर अगले दिन किसी काम पर ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है। चीजें याद रखने में दिक्कत हो सकती है और काम या पढ़ाई का प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। बच्चों और किशोरों के लिए पर्याप्त नींद विशेष रूप से जरूरी है क्योंकि नींद उनकी सीखने की क्षमता ध्यान याददाश्त और व्यवहार से जुड़ी होती है। इसलिए बच्चों में लगातार नींद की परेशानी को केवल आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    कम नींद का असर केवल मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक पर्याप्त नींद न लेने को वजन बढ़ने मधुमेह और हृदय स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों से भी जोड़ा जाता है। कुछ लोगों को रात में सोने में परेशानी होती है जबकि कुछ लोग पर्याप्त समय बिस्तर पर रहने के बाद भी सुबह तरोताजा महसूस नहीं करते। कुछ नींद संबंधी विकारों में रात के समय सांस लेने में रुकावट या सांस के अनियमित होने जैसी समस्या भी हो सकती है। ऐसे मामलों में व्यक्ति को पर्याप्त समय सोने के बावजूद अच्छी गुणवत्ता वाली नींद नहीं मिल पाती।

    कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। अगर गाड़ी चलाते समय बार-बार झपकी आने लगे टीवी देखते या किताब पढ़ते समय थोड़ी देर में ही नींद आने लगे दिन के समय बहुत ज्यादा नींद महसूस हो काम या पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाए या चीजें याद रखने में पहले से ज्यादा परेशानी होने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसी तरह छोटी-छोटी बातों पर भावनात्मक प्रतिक्रिया बढ़ना और काम करने की क्षमता में कमी आना भी लगातार खराब नींद के संकेत हो सकते हैं।

    इसलिए नींद को केवल आराम का समय समझने के बजाय स्वास्थ्य की बुनियादी जरूरत मानना जरूरी है। अगर रात में लगातार सोने में परेशानी हो रही है या पर्याप्त समय सोने के बाद भी दिनभर अत्यधिक नींद और थकान बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। समय रहते नींद से जुड़ी समस्या के कारणों की पहचान करने और जरूरी सुधार करने से रोजमर्रा की कार्यक्षमता मानसिक संतुलन और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

  • कुर्सी पर बैठे-बैठे गुजर रहा है पूरा दिन? सावधान! शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचा सकती है ऐसी आदत

    कुर्सी पर बैठे-बैठे गुजर रहा है पूरा दिन? सावधान! शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचा सकती है ऐसी आदत


    नई दिल्ली । अगर आपकी दिनचर्या का बड़ा हिस्सा ऑफिस की कुर्सी या घर के सोफे पर बैठकर गुजरता है और दिनभर शरीर को पर्याप्त मेहनत नहीं मिलती तो अब सावधान होने का समय है। लंबे समय तक शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना सिर्फ वजन बढ़ने की वजह नहीं बनता बल्कि धीरे-धीरे शरीर की कई जरूरी प्रणालियों पर असर डाल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्ष 2022 में दुनिया भर के करीब 31 प्रतिशत वयस्क पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं कर रहे थे। विशेषज्ञों के मुताबिक पर्याप्त सक्रिय न रहने वाले लोगों में समय से पहले मृत्यु का जोखिम सक्रिय लोगों की तुलना में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक पाया गया है। ऐसे में रोजाना कुछ समय शरीर को सक्रिय रखना स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा बन जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ रहने के लिए हर किसी के लिए जिम जाना जरूरी नहीं है। रोजाना तेज कदमों से चलना, साइकिल चलाना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और घर के सामान्य कामों में सक्रिय रहना भी शरीर के लिए फायदेमंद हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 से 300 मिनट तक मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि करने की सलाह देता है। इसका मतलब है कि दिनभर लगातार बैठे रहने के बजाय काम के बीच छोटे ब्रेक लेकर कुछ देर चलना भी आपकी दिनचर्या को बेहतर बना सकता है।

    शारीरिक गतिविधि की कमी का असर सबसे पहले हृदय और मेटाबॉलिज्म पर दिखाई दे सकता है। नियमित व्यायाम शरीर को सक्रिय रखने के साथ हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करता है। वहीं लगातार बैठे रहने और शरीर को पर्याप्त गतिविधि न मिलने से लंबे समय में कई गैर-संचारी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए अगर काम की वजह से घंटों कुर्सी पर बैठना मजबूरी है तो बीच बीच में उठकर कुछ कदम चलना और शरीर को स्ट्रेच करना उपयोगी आदत हो सकती है।

    निष्क्रिय जीवनशैली का एक बड़ा खतरा टाइप-2 डायबिटीज से भी जुड़ा है। नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर को ग्लूकोज का बेहतर इस्तेमाल करने और वजन नियंत्रित रखने में मदद करती है। इसके विपरीत लंबे समय तक बैठे रहने वाली दिनचर्या वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं की संभावना को बढ़ा सकती है। इसलिए डायबिटीज से बचाव के लिए केवल खानपान पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि रोजाना की शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    दिनभर कम चलने फिरने का सीधा असर वजन पर भी पड़ सकता है। जब शरीर कम ऊर्जा खर्च करता है और खानपान से मिलने वाली कैलोरी अधिक रहती है तो धीरे धीरे वजन बढ़ने लगता है। बढ़ता वजन आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर में गड़बड़ी और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में संतुलित आहार के साथ रोजमर्रा की गतिविधियों को बढ़ाना जरूरी है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि शारीरिक सक्रियता को किसी एक कठिन व्यायाम तक सीमित न समझें। छोटी दूरी के लिए पैदल जाना, लिफ्ट की जगह सीढ़ियां लेना, काम के बीच कुछ मिनट चलना और रोजाना वॉक की आदत बनाना शुरुआत के आसान तरीके हो सकते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है या व्यायाम शुरू करने में परेशानी महसूस होती है तो डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। शरीर को सक्रिय रखना केवल फिट दिखने के लिए नहीं बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ और बेहतर जीवन जीने के लिए भी जरूरी है।

  • खाना खाते ही सुस्ती और नींद का कारण क्या है दोपहर में ज्यादा असर क्यों होता है जानें पूरी वजह

    खाना खाते ही सुस्ती और नींद का कारण क्या है दोपहर में ज्यादा असर क्यों होता है जानें पूरी वजह


    नई दिल्ली । दोपहर में खाना खाने के बाद अचानक आंखों का भारी होना और काम के दौरान सुस्ती महसूस करना बहुत से लोगों के लिए सामान्य अनुभव है। कई बार लंच खत्म करने के कुछ ही देर बाद ऐसा लगता है कि बस थोड़ी देर आंखें बंद कर ली जाएं। इस स्थिति को Post Meal Sleepiness कहा जाता है। आमतौर पर यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती बल्कि शरीर की प्राकृतिक घड़ी खाने की मात्रा और भोजन में मौजूद पोषक तत्वों के साथ कई शारीरिक प्रक्रियाओं के कारण ऐसा हो सकता है।

    सबसे पहले शरीर की प्राकृतिक घड़ी यानी Circadian Rhythm को समझना जरूरी है। हमारा शरीर लगभग 24 घंटे के एक चक्र के अनुसार नींद और जागने से जुड़े बदलाव करता है। दोपहर के समय शरीर में जागने और सतर्क रहने का संकेत कुछ कम हो सकता है। इसी वजह से बिना खाना खाए भी कई लोगों को दोपहर के वक्त हल्की सुस्ती महसूस होती है। जब इसी समय खाना खाया जाता है तो यह असर और अधिक महसूस हो सकता है।

    खाने की मात्रा भी दोपहर की नींद को प्रभावित करती है। अगर लंच बहुत ज्यादा मात्रा में किया गया है तो खाना खाने के बाद भारीपन और सुस्ती अधिक महसूस हो सकती है। बहुत ज्यादा कैलोरी वाला भोजन तली हुई चीजें अत्यधिक मीठा भोजन या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाना कुछ लोगों में खाने के बाद ऊर्जा और सतर्कता में बदलाव ला सकता है। वहीं संतुलित मात्रा में प्रोटीन फाइबर और अन्य पोषक तत्वों वाला भोजन लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    खाना खाने के बाद शरीर में पाचन की प्रक्रिया शुरू होती है। इस दौरान हार्मोन और तंत्रिका तंत्र से जुड़े कई संकेत बदलते हैं। भोजन से मिलने वाले ग्लूकोज और अन्य पोषक तत्वों के स्तर में बदलाव होता है और शरीर पाचन से जुड़ी गतिविधियों को सक्रिय करता है। इन सभी प्रक्रियाओं का संयुक्त प्रभाव कुछ लोगों में नींद या सुस्ती जैसा एहसास पैदा कर सकता है।

    अक्सर यह कहा जाता है कि खाना खाने के बाद शरीर का पूरा खून पेट की ओर चला जाता है और इसी कारण दिमाग में खून कम पहुंचने से नींद आती है। हालांकि यह इस घटना की पूरी और सही व्याख्या नहीं मानी जाती। शरीर में रक्त का प्रवाह इस तरह अचानक दिमाग से हटकर केवल पाचन तंत्र की ओर नहीं चला जाता कि उससे सामान्य तौर पर दिमाग को पर्याप्त रक्त न मिले। खाने के बाद आने वाली नींद कई शारीरिक बदलावों के संयुक्त प्रभाव से जुड़ी होती है।

    दोपहर के भोजन के बाद नींद अधिक महसूस होने की एक बड़ी वजह रात की अधूरी नींद भी हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति ने पिछली रात पर्याप्त नींद नहीं ली है तो दिनभर जागे रहने के साथ शरीर में नींद की जरूरत बढ़ती जाती है। ऐसे में दोपहर का प्राकृतिक सुस्ती वाला समय आते ही थकान और नींद ज्यादा महसूस हो सकती है।

    लंच के बाद सुस्ती कम करने के लिए बहुत भारी भोजन करने से बचना उपयोगी हो सकता है। भोजन की मात्रा जरूरत के अनुसार रखें और खाने में प्रोटीन फाइबर तथा पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। भोजन के बाद कुछ देर हल्की चाल से चलना भी शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। पर्याप्त पानी पीना और रात में नियमित रूप से अच्छी नींद लेना भी बेहद जरूरी है।

    हालांकि अगर रोजाना खाना खाने के बाद अत्यधिक नींद आती है और इसके साथ चक्कर कमजोरी या दूसरे लक्षण भी दिखाई देते हैं या दिनभर की सामान्य गतिविधियां प्रभावित होने लगती हैं तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है क्योंकि लगातार अत्यधिक नींद कभी कभी नींद से जुड़ी समस्या खून की कमी थायरॉइड या ब्लड शुगर से संबंधित परेशानी के साथ भी देखी जा सकती है।

  • सावन शिवरात्रि के अगले दिन लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, रात 9:04 बजे शुरू होगा अद्भुत खगोलीय नजारा

    सावन शिवरात्रि के अगले दिन लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, रात 9:04 बजे शुरू होगा अद्भुत खगोलीय नजारा


    नई दिल्ली । साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगने जा रहा है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और खगोलीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह सूर्य ग्रहण सावन शिवरात्रि के ठीक अगले दिन पड़ेगा। इसके साथ ही इसी दिन श्रावण मास की हरियाली अमावस्या भी रहेगी। ऐसे में धार्मिक और खगोलीय दोनों नजरिए से 12 अगस्त की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि भारत में रहने वाले लोगों को इस ग्रहण का प्रत्यक्ष नजारा देखने को नहीं मिलेगा क्योंकि ग्रहण के समय भारत में रात होगी।

    भारतीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और इसका समापन 13 अगस्त की देर रात 1 बजकर 27 मिनट पर होगा। ग्रहण अपने चरम यानी पीक पर रात करीब 11 बजकर 17 मिनट पर पहुंचेगा। चूंकि उस समय भारत के अधिकांश हिस्सों में रात होगी इसलिए यहां से सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। खगोलीय गणना के अनुसार पूर्ण सूर्य ग्रहण का मुख्य नजारा उत्तरी गोलार्ध के कई क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। ग्रीनलैंड आइसलैंड स्पेन रूस और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण का प्रभाव देखा जा सकेगा। इसके अलावा यूरोप के अधिकांश हिस्सों उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों और अफ्रीका के उत्तर पश्चिमी भागों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में नजर आएगा।

    अब सवाल यह है कि जब भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा तो क्या यहां सूतक काल भी माना जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से करीब 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है लेकिन यह नियम सामान्य तौर पर उन्हीं स्थानों पर लागू माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका मतलब यह है कि मंदिरों के कपाट बंद करने या धार्मिक और मांगलिक कार्य रोकने जैसी परंपराएं यहां लागू नहीं होंगी और सामान्य पूजा पाठ किया जा सकेगा।

    ज्योतिषीय नजरिए से भी इस सूर्य ग्रहण को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ग्रहण के समय ग्रहों की विशेष स्थिति का प्रभाव अलग अलग राशियों पर पड़ सकता है। ज्योतिषियों के मुताबिक सिंह कुंभ मेष और मकर राशि के जातकों को वाणी निवेश और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। वहीं मिथुन तुला और धनु राशि के लिए यह समय करियर और आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव के संकेत देने वाला माना जा रहा है। हालांकि ज्योतिषीय प्रभाव धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होते हैं और इन्हें वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं माना जाता।

    ग्रहण के दौरान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का मानसिक जाप करना शुभ माना जाता है। हरियाली अमावस्या के संयोग को देखते हुए जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र तिल या धन का दान करने की परंपरा भी बताई गई है। इसके अलावा इस अवसर पर पौधारोपण करना भी शुभ माना जाता है। इस तरह 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण खगोलीय घटना होने के साथ धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय चर्चाओं के कारण भी लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना रहेगा।

  • जमशेदपुर के बाटालुका गांव में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली पुलिस टीम को ग्रामीणों ने बनाया बंधक

    जमशेदपुर के बाटालुका गांव में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली पुलिस टीम को ग्रामीणों ने बनाया बंधक

    नई दिल्ली । झारखंड के जमशेदपुर अंतर्गत पटमदा थाना क्षेत्र स्थित बाटालुका गांव में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों को स्थानीय ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। शनिवार तड़के सर्च ऑपरेशन पर निकली पुलिस और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम को आक्रोशित ग्रामीणों ने लगभग पांच घंटे तक बंधक बनाए रखा। ग्रामीणों द्वारा एक परिवार के सदस्यों को हिरासत में लिए जाने का विरोध किया जा रहा था, जिसके बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप से मामला शांत हो सका।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटमदा थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस और कोबरा बटालियन के जवानों की टीम दलमा रेंज के तराई इलाकों में बड़े नक्सली कमांडरों की तलाश में उतरी थी। सुरक्षा बल एक करोड़ के इनामी भाकपा माओवादी आकाश और 15 लाख के इनामी रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन समेत अन्य संदिग्धों की तलाश में विभिन्न गांवों में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। इस दौरान पुलिस टीम जब बाटालुका गांव पहुंची तो एक स्थानीय निवासी और उसकी दो पत्नियों को पूछताछ के लिए साथ ले जाने लगी।

    संदेह के आधार पर की जा रही इस कार्रवाई के दौरान घर में मौजूद बालिका के रोने पर आसपास के ग्रामीण एकत्र हो गए। देखते ही देखते लाठी-डंडों से लैस सैकड़ों ग्रामीणों ने पुलिस टीम को चारों तरफ से घेर लिया। ग्रामीणों की मांग थी कि हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा किया जाए और पूर्व से पुलिस हिरासत में रखे गए एक अन्य ग्रामीण को भी मुक्त किया जाए। बारिश के बीच सुबह पांच बजे से दस बजे तक सुरक्षा बल गांव में फंसे रहे और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का इंतजार करते रहे।

    घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक और राजनीतिक प्रयास शुरू हुए। स्थानीय जिला पार्षद के हस्तक्षेप और मध्यस्थता के बाद पूर्व में हिरासत में लिए गए व्यक्ति को मौके पर लाया गया। इसके पश्चात ग्रामीणों और पुलिस के बीच बातचीत के जरिए सहमति बनी और हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने के बाद ग्रामीणों ने सुरक्षा बलों को वहां से जाने दिया। लगभग पांच घंटे के भारी तनाव के बाद क्षेत्र में स्थिति सामान्य हो सकी।

    उल्लेखनीय है कि बाटालुका और आसपास के तराई क्षेत्र लंबे समय से नक्सल विरोधी अभियानों के केंद्र में रहे हैं। भौगोलिक दृष्टि से यह इलाका जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जिसका फायदा उठाकर असामाजिक तत्व आवाजाही करते रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस क्षेत्र में लगातार निगरानी बनाए रखती हैं ताकि नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

    झारखंड की इस घटना के बाद सीमावर्ती राज्यों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात पुलिस और सुरक्षा बल इस प्रकार के अभियानों के दौरान स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद और प्रोटोकॉल को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। पुलिस प्रशासन अब पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में इस तरह के गतिरोध से बचा जा सके।

  • कौन बनेगा करोड़पति 18 में लागू हुए नए नियम, सोचना पड़ेगा थीम के साथ शुरू हुआ नया सीजन

    कौन बनेगा करोड़पति 18 में लागू हुए नए नियम, सोचना पड़ेगा थीम के साथ शुरू हुआ नया सीजन

    नई दिल्ली ।भारतीय टेलिविजन के सबसे लोकप्रिय क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ का 18वां सीजन कई नए और अनोखे बदलावों के साथ शुरू होने जा रहा है। तकनीक और सूचना के इस आधुनिक दौर को ध्यान में रखते हुए इस बार शो के गेमप्ले और प्रारूप में काफी फेरबदल किए गए हैं। अमर उजाला को दिए एक विशेष साक्षात्कार में शो के निर्देशक अरुण शेषकुमार ने बताया कि अब केवल सामान्य ज्ञान और सही उत्तर देना ही काफी नहीं होगा, बल्कि प्रतिभागियों को हर कदम पर ठोस रणनीति बनानी होगी।

    इस नए सीजन की मुख्य थीम ‘सोचना पड़ेगा’ रखी गई है, जो यह संदेश देती है कि जानकारी के इस दौर में ज्ञान के सही इस्तेमाल और सोच का महत्व सबसे अधिक है। निर्देशक के अनुसार, इस बार फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट राउंड में भी ट्विस्ट लाया गया है ताकि हॉट सीट तक पहुंचने का रास्ता पहले से थोड़ा सहज हो सके। हालांकि, मुख्य खेल में प्रवेश करने के बाद प्रतियोगियों को मिलने वाली लाइफलाइन्स पाने के लिए भी प्रतिस्पर्धा करनी होगी और उन्हें हासिल करना पड़ेगा।

    नियमों में बदलाव के बावजूद शो के मूल स्वरूप से कोई समझौता नहीं किया गया है। प्रतिभागियों के सामने पहले की तरह ही 16 सवाल रखे जाएंगे और अंतिम प्रश्न की धनराशि 7 करोड़ रुपये ही बनी रहेगी। शो में पहुंचने वाले प्रतियोगियों का चयन कई कठिन चरणों, लिखित परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान के परीक्षण के बाद किया जाता है, जिससे केवल योग्य और प्रतिभाशाली लोग ही मुख्य मंच तक पहुंच पाते हैं।

    मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों और कस्बों से भी हर साल कई मेधावी प्रतियोगी अपनी प्रतिभा और ज्ञान के बल पर इस मंच तक पहुंचते रहे हैं। राज्य के युवाओं और छात्र-छात्राओं के बीच इस कार्यक्रम का खासा प्रभाव देखने को मिलता है, जहां लोग इसे न केवल मनोरंजन बल्कि प्रेरणा और ज्ञानवर्धन के एक प्रमुख माध्यम के रूप में देखते हैं।

    शो के निर्देशक ने अमिताभ बच्चन के समर्पण और कार्यशैली की सराहना करते हुए उन्हें इस कार्यक्रम की वास्तविक आत्मा करार दिया। उन्होंने बताया कि शो की शुरुआत और अंत के अलावा अधिकांश बातचीत पूरी तरह से स्वाभाविक होती है। अमिताभ बच्चन प्रत्येक प्रतियोगी की पृष्ठभूमि को समझते हैं और उनके साथ संवेदनशीलता से संवाद स्थापित करते हैं, जिससे प्रतिभागियों को सहज महसूस होता है।

    डिजिटल युग और सोशल मीडिया के दौर में भी ‘कौन बनेगा करोड़पति’ अपनी प्रासंगिकता और विश्वसनीयता बनाए रखने में सफल रहा है। हर नए सीजन के साथ इसमें किए जाने वाले बदलाव नई पीढ़ी को जोड़ने के साथ-साथ पुराने दर्शकों के अनुभव को भी नयापन प्रदान करते हैं।

  • हजार कमल लेकर पहुंचे थे विष्णु जी, शिव ने छिपा दिया एक फूल तो चढ़ा दिया अपना कमलनयन, फिर मिला दिव्य वरदान

    हजार कमल लेकर पहुंचे थे विष्णु जी, शिव ने छिपा दिया एक फूल तो चढ़ा दिया अपना कमलनयन, फिर मिला दिव्य वरदान



    नई दिल्ली । सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दौरान महादेव की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। सावन के सोमवार पर श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और भगवान शिव से सुख शांति समृद्धि तथा मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। शिव पुराण में भगवान शिव से जुड़ी ऐसी अनेक कथाओं का वर्णन मिलता है जिनमें उनकी करुणा के साथ साथ भक्तों की परीक्षा लेने वाली लीलाओं का भी उल्लेख है। ऐसी ही एक कथा भगवान विष्णु से जुड़ी है जिसमें भगवान शिव ने उनकी भक्ति की कठिन परीक्षा ली और अंत में प्रसन्न होकर उन्हें दिव्य सुदर्शन चक्र प्रदान किया।

    पौराणिक कथा के अनुसार एक समय दानवों और दैत्यों का अत्याचार बहुत बढ़ गया था। उनके बढ़ते प्रभाव से देवता चिंतित हो गए और उन्होंने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने भगवान शिव को प्रसन्न करने का संकल्प लिया। इसके बाद उन्होंने कैलाश पर्वत पर पहुंचकर महादेव की विधि विधान से आराधना शुरू की। भगवान विष्णु ने शिव की स्तुति करते हुए उनके एक हजार नामों का स्मरण किया और प्रत्येक नाम के साथ भगवान शिव को एक कमल पुष्प अर्पित करने का संकल्प लिया।

    कथा के अनुसार भगवान विष्णु की भक्ति और उनके संकल्प की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव ने एक लीला रची। उन्होंने भगवान विष्णु द्वारा पूजा के लिए लाए गए एक हजार कमल पुष्पों में से एक कमल को छिपा दिया। भगवान विष्णु को इसकी जानकारी नहीं थी। जब पूजा के दौरान उन्होंने कमल गिनने शुरू किए तो एक पुष्प कम मिला। उन्होंने काफी खोज की लेकिन वह कमल कहीं नहीं मिला।

    भगवान विष्णु को कमलनयन भी कहा जाता है। जब उन्हें लगा कि उनकी पूजा एक कमल के अभाव में अधूरी रह जाएगी तो उन्होंने अपनी भक्ति को पूरा करने के लिए अद्भुत त्याग का निर्णय लिया। उन्होंने अपने एक नेत्र को कमल के समान मानकर उसे भगवान शिव को अर्पित करने का संकल्प किया। जैसे ही भगवान विष्णु अपना नेत्र अर्पित करने के लिए आगे बढ़े उसी समय भगवान शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर प्रकट हो गए।

    भगवान शिव ने भगवान विष्णु को रोक दिया और उनकी आंख को पहले जैसा कर दिया। महादेव ने विष्णु जी की अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा। तब भगवान विष्णु ने किसी व्यक्तिगत सुख की मांग नहीं की बल्कि दानवों और दैत्यों के अत्याचार से सृष्टि की रक्षा करने के लिए एक ऐसे दिव्य और अजेय अस्त्र की इच्छा जताई जिससे अधर्म का नाश किया जा सके।

    भगवान शिव ने उनकी इच्छा पूरी करते हुए उन्हें दिव्य सुदर्शन चक्र प्रदान किया। यही सुदर्शन चक्र आगे चलकर भगवान विष्णु के प्रमुख अस्त्रों में शामिल हुआ। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने इसी दिव्य अस्त्र की शक्ति से दैत्यों का संहार किया और सृष्टि की रक्षा की। इस तरह भगवान शिव और भगवान विष्णु के बीच भक्ति तथा आशीर्वाद का यह प्रसंग हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखता है।

    सावन में इस कथा का स्मरण भक्तों को भक्ति के साथ समर्पण और निस्वार्थ भाव का संदेश भी देता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं। सावन के दौरान श्रद्धालु जलाभिषेक रुद्राभिषेक बेलपत्र अर्पित करने और शिव मंत्रों का जाप करने जैसी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं। मान्यता के अनुसार सच्चे मन से की गई शिव आराधना से मन को शांति मिलती है और भक्त के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि इन धार्मिक मान्यताओं को आस्था और पौराणिक परंपरा के संदर्भ में ही देखा जाता है।

    भगवान शिव और भगवान विष्णु की यह कथा इस बात का प्रतीक मानी जाती है कि सच्ची भक्ति में केवल पूजा की विधि नहीं बल्कि श्रद्धा त्याग और समर्पण का भाव भी महत्वपूर्ण होता है। सावन के पावन महीने में इस कथा का स्मरण भक्तों को अपनी आस्था को और मजबूत करने तथा जीवन में सत्य धर्म और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

  • ट्रेकिंग पर गए इंदौर निवासी अद्वैत की तलाश में जुटी बेंगलुरु पुलिस, परिजनों ने जताई अनहोनी की आशंका

    ट्रेकिंग पर गए इंदौर निवासी अद्वैत की तलाश में जुटी बेंगलुरु पुलिस, परिजनों ने जताई अनहोनी की आशंका

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित शिवगंगे पहाड़ियों से मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी एक युवक के अचानक लापता होने का मामला सामने आया है। लापता युवक की पहचान 31 वर्षीय अद्वैत उपाध्याय के रूप में हुई है, जो बेंगलुरु के बेगुर क्षेत्र में रहकर एक निजी फाइनेंस कंपनी में कार्यरत है। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की टीमों ने घने पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी और बचाव अभियान प्रारंभ कर दिया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, अद्वैत उपाध्याय ने शुक्रवार को सुबह ट्रेकिंग पर जाने से पूर्व अपनी मंगेतर को अपनी इस यात्रा की जानकारी दी थी। इसके बाद उसने आवागमन के लिए एक दुपहिया वाहन किराए पर लिया और शिवगंगे पहाड़ी की तलहटी में पहुंचा। सुबह लगभग साढ़े छह बजे उसने अपना वाहन पार्क किया और पहाड़ी की ओर चढ़ना शुरू किया। तलहटी के समीप स्थापित सीसीटीवी कैमरों में उसे अकेले पहाड़ी की ओर जाते हुए देखा गया है।

    पहाड़ी पर चढ़ने के कुछ समय बाद से ही अद्वैत का कोई संपर्क नहीं हो सका है और उसका मोबाइल फोन भी लगातार बंद आ रहा है। लंबे समय तक सुराग न मिलने पर परिजनों ने किसी अनहोनी या राहजनी की आशंका व्यक्त की है। परिजनों को संदेह है कि सुनसान इलाका होने के कारण किसी आपराधिक तत्व ने उसे निशाना बनाया हो सकता है।

    घटना के संबंध में कडुगोडी पुलिस थाने में औपचारिक गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिवगंगे की कठिन और दुर्गम पहाड़ियों में पुलिसकर्मियों की विशेष टीमों के साथ डॉग स्क्वायड को भी तैनात किया गया है। पुलिस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दुर्घटना, राहजनी और अपहरण समेत सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर गहन छानबीन कर रही है।

    मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से जुड़े इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी कर्नाटक पुलिस के संपर्क में हैं। मध्य प्रदेश में अद्वैत के परिवारजन और रिश्तेदार उसकी सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं। राज्य के गृह विभाग द्वारा भी इस संबंध में आवश्यक समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि तलाशी अभियान में तेजी लाई जा सके।

    बेंगलुरु पुलिस ने आसपास के ग्रामीणों और पर्यटकों से भी पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल नेटवर्क लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सुराग जुटाने के प्रयास निरंतर जारी हैं। प्रशासन ने जल्द ही स्थिति स्पष्ट होने और युवक को सुरक्षित ढूंढ निकालने का आश्वासन दिया है।

  • मध्य प्रदेश के गुना में भतीजे की करतूत की सजा मिलने और अपमानजनक होने से पीड़ित की मौत

    मध्य प्रदेश के गुना में भतीजे की करतूत की सजा मिलने और अपमानजनक होने से पीड़ित की मौत

    मध्य प्रदेश।  के गुना जिले से इंसानियत और सामाजिक ताने-बाने को तार-तार कर देने वाली एक दुखद घटना सामने आई है। जिले के राघौगढ़ क्षेत्र में एक युवक द्वारा शादीशुदा महिला को भगा ले जाने के बाद पीड़ित परिवार और गांव के लोगों ने आरोपी युवक के चाचा को बंधक बनाकर अमानवीय यातनाएं दीं। करीब सवा महीने पुराने इस घटनाक्रम का वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पीड़ित व्यक्ति गहरे मानसिक सदमे में चला गया, जिससे उसकी दुखद मृत्यु हो गई।

    घटना के संदर्भ में प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमरपुरा गांव निवासी 45 वर्षीय अजोड़ सिंह बंजारा के भतीजे पर आरोप था कि वह पड़ोसी गांव की एक विवाहित महिला को अपने साथ ले गया था। इस बात से आक्रोशित होकर महिला के ससुराल पक्ष के लोगों ने अजोड़ सिंह को धोखे से पकड़ लिया और उन्हें बंधक बना लिया। आरोपियों ने पीड़ित के हाथ-पैर बांधकर उनके साथ जमकर मारपीट की और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के लिए उनके गले में जूते-चप्पलों की माला डालकर गांव में घुमाया।

    उस समय घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित व्यक्ति को आरोपियों के चंगुल से मुक्त कराया था। पीड़ित परिजनों का कहना है कि इस गंभीर और अपमानजनक घटना के संबंध में पुलिस प्रशासन और जनसुनवाई के माध्यम से उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी गई थीं। परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रशासनिक स्तर पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की गई होती, तो यह अनहोनी टाली जा सकती थी।

    घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब शुक्रवार को पीड़ित किसी कार्यवश समीपस्थ कस्बे में गए थे। वहां एक परिचित व्यक्ति ने उनके मोबाइल पर उसी पुरानी घटना का वायरल वीडियो दिखा दिया। वीडियो में खुद को बंधा हुआ और गले में जूतों की माला पहने देखकर पीड़ित बेहद आहत हुए। घर लौटने के बाद उन्होंने परिजनों से अपनी पीड़ा व्यक्त की कि लोग अब इस वीडियो के जरिए उनका उपहास उड़ा रहे हैं। इसके तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया।

    मृतक अपने पीछे पत्नी, पांच बेटियों और एक मासूम बेटे का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गए हैं। इस घटना के बाद से पूरे अमरपुरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मातम का माहौल है। घटना की भयावहता को देखते हुए स्थानीय पुलिस चौकी और वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। पुलिस प्रशासन अब वायरल वीडियो, पूर्व में हुई मारपीट और पीड़ित की मृत्यु के कारणों की व्यापक स्तर पर जांच कर रहा है।

    कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक विचारकों का मानना है कि किसी अन्य व्यक्ति के अपराध की सजा किसी रिश्तेदार को देना और फिर सोशल मीडिया पर अपमानजनक सामग्री प्रसारित करना एक गंभीर अपराध है। गुना जिले की इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि साइबर अपराध और सामाजिक लिंचिंग के बढ़ते मामले किस प्रकार बेकसूर लोगों की जान ले रहे हैं।