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  • टीम इंडिया का बड़ा उलटफेर आयरलैंड ने 2-0 से किया क्लीन स्वीप इतिहास में पहली बार भारत हारा टी20 सीरीज

    टीम इंडिया का बड़ा उलटफेर आयरलैंड ने 2-0 से किया क्लीन स्वीप इतिहास में पहली बार भारत हारा टी20 सीरीज


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम को बेलफास्ट में ऐसा झटका लगा जिसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की होगी। सिविल सर्विस क्रिकेट क्लब में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में आयरलैंड ने रोमांचक मुकाबले में भारत को महज 1 रन से हराकर दो मैचों की सीरीज 2-0 से अपने नाम कर ली। यह पहला मौका है जब भारत को टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आयरलैंड के खिलाफ सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले पहला मुकाबला भी आयरलैंड ने 34 रन से जीतकर भारत पर दबाव बना दिया था और दूसरे मैच में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी आयरलैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही। टीम ने 17 रन के स्कोर पर पहला विकेट गंवा दिया। इसके बाद रॉस अडायर और कप्तान लोर्कन टकर भी जल्दी पवेलियन लौट गए जिससे मेजबान टीम दबाव में नजर आई। हालांकि हैरी टेक्टर और बेंजामिन कैलिट्ज ने चौथे विकेट के लिए 65 रन जोड़कर पारी को संभाल लिया। टेक्टर ने संयमित बल्लेबाजी करते हुए 47 गेंदों में 53 रन बनाए जबकि कैलिट्ज ने सिर्फ 23 गेंदों पर 37 रन की तेजतर्रार पारी खेली। जॉर्ज डॉकरेल ने भी उपयोगी 19 रन जोड़े और आयरलैंड ने निर्धारित 20 ओवर में 8 विकेट पर 154 रन का प्रतिस्पर्धी स्कोर खड़ा किया।

    भारतीय गेंदबाजों में प्रिंस यादव सबसे सफल रहे जिन्होंने 3 विकेट हासिल किए। अर्शदीप सिंह और शिवम दुबे ने दो-दो विकेट लिए जबकि हर्षित राणा को एक सफलता मिली। गेंदबाजों ने वापसी जरूर कराई लेकिन बल्लेबाजों पर जिम्मेदारी आ गई।

    155 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। पहले ही ओवर में संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद कप्तान श्रेयस अय्यर भी केवल 10 रन बनाकर चलते बने जबकि ईशान किशन भी 12 रन से आगे नहीं बढ़ सके। शुरुआती चार विकेट जल्दी गिरने से भारत पूरी तरह दबाव में आ गया।

    इसके बाद अक्षर पटेल और तिलक वर्मा ने पारी संभालने की कोशिश की। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए अहम साझेदारी निभाई लेकिन अक्षर 14 रन बनाकर आउट हो गए। तिलक वर्मा ने एक छोर संभाले रखा और 46 गेंदों में 55 रन की संघर्षपूर्ण अर्धशतकीय पारी खेली। शिवम दुबे ने 20 रन और हर्षित राणा ने 21 रन बनाकर मैच को रोमांचक बनाया लेकिन आखिरी क्षणों में भारतीय टीम जीत से सिर्फ एक रन दूर रह गई। निर्धारित 20 ओवर में भारत 9 विकेट पर 153 रन ही बना सका।

    आयरलैंड की ओर से जय मूंदड़ा और मैथ्यू हॉलार्ड ने तीन-तीन विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। मैथ्यू हम्फ्रीज और हैरी टेक्टर ने भी एक-एक विकेट हासिल कर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।

    इस ऐतिहासिक जीत के साथ आयरलैंड ने न केवल पहली बार भारत के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज जीती बल्कि 2-0 से क्लीन स्वीप कर अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ दिया। दूसरी ओर भारतीय टीम के लिए यह हार कई सवाल छोड़ गई है खासकर शीर्ष क्रम की नाकामी और बल्लेबाजी में निरंतरता की कमी को लेकर। अब टीम इंडिया की नजर इंग्लैंड दौरे पर होगी जहां उसे पांच टी20 और तीन वनडे मैचों की चुनौती का सामना करना है।

  • इतिहास के शिखर पर दीप्ति शर्मा झूलन गोस्वामी का रिकॉर्ड तोड़ बनीं महिला क्रिकेट की नंबर-1 विकेट टेकर

    इतिहास के शिखर पर दीप्ति शर्मा झूलन गोस्वामी का रिकॉर्ड तोड़ बनीं महिला क्रिकेट की नंबर-1 विकेट टेकर


    नई दिल्ली । भारत की स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने महिला क्रिकेट के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया है। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए अहम मुकाबले के दौरान दीप्ति ने वह उपलब्धि हासिल की जिसका इंतजार भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को लंबे समय से था। उन्होंने दिग्गज तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी का वर्षों पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे अधिक विकेट लेने वाली गेंदबाज बनने का गौरव अपने नाम कर लिया।

    लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए इस मुकाबले से पहले दीप्ति शर्मा को रिकॉर्ड अपने नाम करने के लिए सिर्फ एक विकेट की जरूरत थी। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की अनुभवी बल्लेबाज बेथ मूनी को आउट करते ही इतिहास रच दिया। बेथ मूनी ने ऑफ स्पिनर दीप्ति की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की लेकिन गेंद सही तरह बल्ले पर नहीं आई और लॉन्ग ऑन पर राधा यादव ने आसान कैच लपक लिया। इस विकेट के साथ ही दीप्ति के इंटरनेशनल करियर में विकेटों की संख्या 356 पहुंच गई और उन्होंने झूलन गोस्वामी के 355 विकेटों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

    दीप्ति शर्मा का यह रिकॉर्ड इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने यह उपलब्धि महज 278 इंटरनेशनल मुकाबलों में हासिल की है। आगरा में जन्मी इस ऑलराउंडर ने तीनों प्रारूपों में लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम की जीत में अहम योगदान दिया है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 6 मैचों में 22 विकेट वनडे में 124 मुकाबलों में 166 विकेट और टी20 इंटरनेशनल में 148 मैचों में 168 विकेट हासिल किए हैं। उनकी निरंतरता और ऑलराउंड प्रदर्शन ने उन्हें महिला क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है।

    दीप्ति का शानदार फॉर्म पूरे टूर्नामेंट में देखने को मिला। इससे पहले पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने पांच विकेट लेकर विरोधी टीम की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी थी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी उन्होंने चार ओवर में 31 रन देकर एक अहम विकेट हासिल किया और इसी के साथ भारतीय क्रिकेट के लिए एक नया इतिहास लिख दिया।

    दीप्ति शर्मा ने जिस रिकॉर्ड को अपने नाम किया वह लंबे समय तक झूलन गोस्वामी के नाम दर्ज था। झूलन ने अपने शानदार करियर में 284 इंटरनेशनल मैच खेलते हुए 355 विकेट हासिल किए थे। उन्होंने टेस्ट में 44 वनडे में 255 और टी20 इंटरनेशनल में 56 विकेट लेकर भारतीय महिला क्रिकेट को नई पहचान दिलाई थी। अब दीप्ति ने उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है।

    महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाजों की सूची में अब दीप्ति शर्मा शीर्ष पर पहुंच गई हैं। उनके बाद झूलन गोस्वामी दूसरे स्थान पर हैं जबकि ऑस्ट्रेलिया की एलिस पेरी 336 विकेटों के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद हैं। इंग्लैंड की कैथरीन साइवर ब्रंट 335 विकेट सोफी एक्लेस्टोन 333 विकेट और दक्षिण अफ्रीका की शबनीम इस्माइल 323 विकेट के साथ इस सूची में शामिल हैं।

    हालांकि भारतीय टीम इस मुकाबले में जीत दर्ज नहीं कर सकी। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने चार विकेट पर 170 रन बनाए लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने 19 ओवर में चार विकेट रहते लक्ष्य हासिल कर लिया। टीम की हार के बावजूद दीप्ति शर्मा की ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण बन गई और उनका यह रिकॉर्ड आने वाले वर्षों तक प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

  • सहकारी समितियों और किसान समूहों के लिए डिजिटल बाजार का नया रास्ता, डिजीहाट ने शुरू किया 'सहकार से समृद्धि' अभियान

    सहकारी समितियों और किसान समूहों के लिए डिजिटल बाजार का नया रास्ता, डिजीहाट ने शुरू किया 'सहकार से समृद्धि' अभियान

    नई दिल्ली। देश के सहकारी क्षेत्र को डिजिटल बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए डिजीहाट ने ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) प्लेटफॉर्म पर ‘सहकार से समृद्धि’ स्टोर की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमों के उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर ग्राहकों तक पहुंचाना और डिजिटल कॉमर्स के माध्यम से उनकी आय बढ़ाने में मदद करना है।

    यह विशेष अभियान 29 जून से 6 जुलाई तक आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया गया है। अभियान के माध्यम से देशभर के उत्पादकों को एक साझा डिजिटल मंच उपलब्ध कराया गया है, जहां वे अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा सकेंगे। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिलने के साथ छोटे उत्पादकों की डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी भी मजबूत होगी।

    ‘सहकार से समृद्धि’ स्टोर के जरिए विभिन्न सहकारी संस्थाओं और सामुदायिक संगठनों के उत्पाद एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए गए हैं। ग्राहक अब देश के अलग-अलग राज्यों में तैयार किए गए उत्पादों की ऑनलाइन खरीदारी कर सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य बिचौलियों पर निर्भरता कम करना और उत्पादकों को सीधे बाजार से जोड़ना भी है।

    देश में वर्तमान समय में 8.5 लाख से अधिक पंजीकृत सहकारी समितियां कार्यरत हैं, जिनसे लगभग 29 करोड़ सदस्य जुड़े हुए हैं। ये संस्थाएं कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, हथकरघा, हस्तशिल्प, ग्रामीण उद्योग और वित्तीय सेवाओं जैसे अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में सहकारी संस्थाओं और किसान समूहों को राष्ट्रीय ई-कॉमर्स बाजार तक पहुंच बनाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नया डिजिटल मंच इस अंतर को कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    डिजीहाट का कहना है कि ओएनडीसी आधारित यह व्यवस्था सहकारी समितियों, एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों को देशभर के उपभोक्ताओं तक पहुंचने का अवसर देगी। इससे उनकी डिजिटल पहचान मजबूत होगी और उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। साथ ही छोटे और स्थानीय उत्पादकों को प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का बेहतर मंच मिलेगा।

    अभियान के दौरान ऑर्गेनिक खाद्य उत्पाद, किराना सामग्री, हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं और घरेलू जरूरत का सामान प्रमुख रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विशेष ऑफर, चयनित उत्पाद संग्रह और विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र के योगदान को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल कॉमर्स के विस्तार के साथ सहकारी संस्थाओं को नए बाजार मिलेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस तरह की पहल किसानों, कारीगरों और छोटे उद्यमों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी गति प्रदान कर सकती है।

  • एफआईएच प्रो लीग का शानदार अंत भारत ने शूटआउट में इंग्लैंड को हराया वर्ल्ड कप से पहले बढ़ाया आत्मविश्वास

    एफआईएच प्रो लीग का शानदार अंत भारत ने शूटआउट में इंग्लैंड को हराया वर्ल्ड कप से पहले बढ़ाया आत्मविश्वास


    नई दिल्ली । एफआईएच प्रो लीग के अपने अंतिम मुकाबले में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने शानदार जुझारूपन और मजबूत डिफेंस का प्रदर्शन करते हुए मेजबान इंग्लैंड को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हरा दिया। लंदन के ली वैली हॉकी एंड टेनिस सेंटर में खेले गए इस मुकाबले के निर्धारित 60 मिनट तक दोनों टीमें एक भी गोल नहीं कर सकीं और स्कोर 0-0 रहा। इसके बाद मैच का फैसला शूटआउट से हुआ जिसमें भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन संयम दिखाते हुए जीत अपने नाम कर ली। यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि हॉकी विश्व कप से पहले भारत का यह आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला था और टीम ने शानदार प्रदर्शन के साथ अपना आत्मविश्वास बढ़ाया।

    पूरे मुकाबले में इंग्लैंड ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और पहले क्वार्टर में कई बार भारतीय गोल पर दबाव बनाया। शुरुआती पेनल्टी कॉर्नर पर इंग्लैंड के पास बढ़त लेने का अच्छा मौका था लेकिन भारतीय गोलकीपर मोहित शशिकुमार ने शानदार बचाव करते हुए टीम को शुरुआती झटका नहीं लगने दिया। उन्होंने पूरे मुकाबले में कई महत्वपूर्ण सेव किए और विपक्षी खिलाड़ियों को गोल करने का कोई मौका नहीं दिया। भारत की ओर से भी अभिषेक को पहले क्वार्टर में बेहतरीन अवसर मिला लेकिन वह उसे गोल में नहीं बदल सके।

    दूसरे क्वार्टर में भी मुकाबला पूरी तरह संतुलित रहा। इंग्लैंड ने लगातार भारतीय डी में प्रवेश करने की कोशिश की लेकिन भारतीय डिफेंस चट्टान की तरह खड़ा रहा। दूसरी ओर भारत ने भी जवाबी हमले किए। जरमनप्रीत सिंह ने शानदार मूव बनाते हुए गोल का प्रयास किया लेकिन इंग्लैंड के गोलकीपर ने बेहतरीन बचाव कर स्कोर बराबर बनाए रखा। पहले हाफ के अंत तक दोनों टीमें गोल करने में नाकाम रहीं।

    तीसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने आक्रमण की रफ्तार बढ़ा दी। कप्तान हार्दिक सिंह ने मिडफील्ड से शानदार दौड़ लगाकर कई मौके बनाए और टीम को पेनल्टी कॉर्नर भी दिलाया लेकिन अमनदीप लाकड़ा इस अवसर का फायदा नहीं उठा सके। इसी क्वार्टर में इंग्लैंड को पेनल्टी स्ट्रोक मिला लेकिन भारत ने वीडियो रेफरल लिया। रिप्ले में साफ हुआ कि भारतीय खिलाड़ी का टैकल पूरी तरह सही था जिसके बाद अंपायर ने अपना फैसला बदल दिया। यह पल मैच का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ क्योंकि भारत ने संभावित गोल से खुद को बचा लिया।

    चौथे क्वार्टर में दोनों टीमों ने जीत के लिए पूरा दम लगा दिया। भारतीय गोलकीपर सूरज करकेरा ने भी कई शानदार बचाव किए और इंग्लैंड को बढ़त लेने का मौका नहीं दिया। भारत को भी लगातार पेनल्टी कॉर्नर मिले लेकिन मेजबान टीम का डिफेंस मजबूत रहा। आखिरकार निर्धारित समय तक कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी और मुकाबला शूटआउट तक पहुंच गया।

    शूटआउट में भारत की ओर से अभिषेक शिलानंद लाकड़ा और कप्तान हार्दिक सिंह ने शानदार गोल किए जबकि भारतीय गोलकीपरों ने विपक्षी खिलाड़ियों को रोकते हुए टीम को 3-2 से जीत दिलाई। पूरे मुकाबले में शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन करने वाले संजय को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उनकी सूझबूझ भरी डिफेंडिंग और दबाव के क्षणों में शांत प्रदर्शन ने भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।

    विश्व कप से पहले मिली यह जीत भारतीय टीम के लिए मनोबल बढ़ाने वाली साबित होगी। मजबूत डिफेंस शानदार गोलकीपिंग और दबाव में संयम बनाए रखने की क्षमता ने यह संकेत दिया है कि टीम बड़े टूर्नामेंट के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • 2029 तक भारत के एयरपोर्ट सेक्टर में 4.2 लाख करोड़ रुपये निवेश की उम्मीद, हवाई यात्रा को मिलेगा बड़ा विस्तार

    2029 तक भारत के एयरपोर्ट सेक्टर में 4.2 लाख करोड़ रुपये निवेश की उम्मीद, हवाई यात्रा को मिलेगा बड़ा विस्तार

    नई दिल्ली। भारत का विमानन क्षेत्र आने वाले वर्षों में बड़े विस्तार की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2029 तक देश के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में करीब 4.2 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश होने की संभावना है। इस निवेश का बड़ा हिस्सा पहले से घोषित परियोजनाओं और आगामी वर्षों में शुरू होने वाली नई योजनाओं पर खर्च किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती घरेलू हवाई यात्रा और सरकार की बुनियादी ढांचा विकास नीति इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर निवेश पहले से जारी है, जबकि आने वाले वर्षों में नई ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं और विस्तार योजनाओं के लिए भी अतिरिक्त पूंजी निवेश की उम्मीद है। इससे देश के विमानन नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य की बढ़ती यात्री मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।

    घरेलू हवाई यात्रा में लगातार बढ़ोतरी एयरपोर्ट सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है। रिकॉर्ड यात्री संख्या और एयरपोर्ट सेवाओं से होने वाली आय में वृद्धि के कारण ऑपरेटरों की आय में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आगामी वित्त वर्ष में भी घरेलू यात्री यातायात में लगातार वृद्धि बनी रहेगी, जिससे एयरपोर्ट कंपनियों के राजस्व और परिचालन क्षमता में और सुधार होगा।

    देशभर में कई मौजूदा एयरपोर्टों के विस्तार के साथ-साथ नए टर्मिनलों का निर्माण तेज गति से किया जा रहा है। इसके अलावा टियर-2 और टियर-3 शहरों में हवाई सेवाओं का विस्तार भी प्राथमिकता पर है। नवी मुंबई और जेवर जैसे नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट शुरू होने के बाद देश की विमानन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

    हालांकि अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र अभी कुछ चुनौतियों का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ईंधन की बढ़ती कीमतें और कुछ अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर परिचालन संबंधी प्रतिबंधों के कारण विदेशी हवाई यात्रा की रफ्तार धीमी हुई है। चूंकि भारत की बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पश्चिम एशिया से जुड़ी हैं, इसलिए इस क्षेत्र की स्थिति का सीधा प्रभाव विमानन उद्योग पर पड़ रहा है। इसके बावजूद घरेलू बाजार की मजबूत मांग इन चुनौतियों की भरपाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में नए एयरपोर्ट पूरी क्षमता से संचालित होने और शीतकालीन उड़ानों के विस्तार के साथ यात्री संख्या में और तेजी आ सकती है। इससे एयरपोर्ट ऑपरेटरों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। नए टर्मिनलों के शुरू होने से रिटेल स्टोर, व्यावसायिक सेवाओं और एयरपोर्ट शुल्क से होने वाली कमाई में भी इजाफा होने की संभावना है।

    रिपोर्ट में एयरपोर्ट सेक्टर का दीर्घकालिक परिदृश्य सकारात्मक बताया गया है। सरकार की क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना, एयरपोर्ट विकास कार्यक्रमों और ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति से इस क्षेत्र को अतिरिक्त गति मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत निवेश, आधुनिक बुनियादी ढांचे और बढ़ती यात्री मांग के कारण भारत का एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकता है।

  • इंजरी टाइम में कप्तान का गोल बना इतिहास कनाडा ने साउथ अफ्रीका को हराकर राउंड ऑफ 16 का टिकट कटाया

    इंजरी टाइम में कप्तान का गोल बना इतिहास कनाडा ने साउथ अफ्रीका को हराकर राउंड ऑफ 16 का टिकट कटाया


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में सह मेजबान कनाडा ने अपने फुटबॉल इतिहास का सबसे यादगार अध्याय लिखते हुए पहली बार विश्व कप के अंतिम 16 में जगह बना ली है। लॉस एंजिलिस स्टेडियम में खेले गए राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में कनाडा ने साउथ अफ्रीका को 1 0 से हराकर न केवल ऐतिहासिक जीत दर्ज की बल्कि अपने घरेलू प्रशंसकों को भी जश्न मनाने का बड़ा मौका दिया। इस हार के साथ साउथ अफ्रीका का टूर्नामेंट में सफर समाप्त हो गया।

    मुकाबले की शुरुआत में साउथ अफ्रीका ने आक्रामक खेल दिखाया और लगातार कनाडा के डिफेंस पर दबाव बनाया। शुरुआती मिनटों में अफ्रीकी टीम ने कई अच्छे मूव तैयार किए लेकिन अंतिम क्षणों में फिनिशिंग की कमी के कारण गोल नहीं कर सकी। कनाडा की रक्षापंक्ति ने धैर्य के साथ खेलते हुए सभी हमलों को नाकाम कर दिया।

    पहले हाफ के अंतिम चरण में कनाडा ने भी जवाबी हमला बोला और गोल करने के दो शानदार मौके बनाए। मोइज बॉम्बिटो का दमदार हेडर लगभग गोल में तब्दील होने ही वाला था लेकिन साउथ अफ्रीका के डिफेंडर ऑब्रे मॉडिबा ने गोललाइन से शानदार क्लियरेंस कर अपनी टीम को बचा लिया। इसके बाद ताजोन बुकानन ने जोरदार शॉट लगाया लेकिन गोलकीपर रोनवेन विलियम्स ने बेहतरीन बचाव करते हुए स्कोर बराबर बनाए रखा। पहले हाफ की समाप्ति तक दोनों टीमें गोल करने में असफल रहीं।

    दूसरे हाफ में कनाडा ने अपने खेल की रफ्तार बढ़ा दी और लगातार साउथ अफ्रीका के गोल पर हमले किए। हालांकि मजबूत डिफेंस और शानदार गोलकीपिंग की बदौलत साउथ अफ्रीका लंबे समय तक मुकाबले में बना रहा। मैच के 75वें मिनट में कनाडा ने बड़ा दांव खेलते हुए अपने स्टार खिलाड़ी अल्फोंसो डेविस को मैदान पर उतारा। डेविस के आने के बाद कनाडा के आक्रमण में नई जान आ गई। उनकी तेज रफ्तार और शानदार ड्रिब्लिंग ने विरोधी टीम की रक्षापंक्ति को लगातार दबाव में रखा।

    जब मुकाबला अतिरिक्त समय की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था तब इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में कनाडा को वह पल मिला जिसका पूरे देश को इंतजार था। कप्तान स्टीफन यूस्टाक्वियो ने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाया जो सीधे गोलपोस्ट में जाकर समा गया। इस शानदार गोल ने स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों को खुशी से झूमने पर मजबूर कर दिया और कनाडा ने 1 0 की यादगार जीत अपने नाम कर ली।

    यह जीत कनाडा के फुटबॉल इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई। इससे पहले टीम 1986 और 2022 के फीफा विश्व कप में हिस्सा ले चुकी थी लेकिन दोनों बार ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी थी। इस बार टीम ने इतिहास बदलते हुए पहली बार अंतिम 16 में प्रवेश किया और विश्व फुटबॉल में अपनी नई पहचान दर्ज कराई।

    अब कनाडा की नजर अगले मुकाबले में जीत हासिल कर क्वार्टर फाइनल में पहुंचने पर होगी जबकि साउथ अफ्रीका को टूर्नामेंट से बाहर होने की निराशा के साथ घर लौटना पड़ेगा। इस ऐतिहासिक जीत ने साबित कर दिया कि कनाडा अब विश्व फुटबॉल में उभरती हुई ताकत बन चुका है।

  • रोच और सील्स की घातक गेंदबाजी से वेस्टइंडीज का धमाका श्रीलंका को पारी और 217 रन से हराकर सीरीज में बनाई बढ़त

    रोच और सील्स की घातक गेंदबाजी से वेस्टइंडीज का धमाका श्रीलंका को पारी और 217 रन से हराकर सीरीज में बनाई बढ़त


    नई दिल्ली । एंटीगुआ के विवियन रिचर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए पहले टेस्ट मैच में वेस्टइंडीज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका को एक पारी और 217 रन के विशाल अंतर से हराकर दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 1 0 की बढ़त बना ली। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में कैरेबियाई टीम पूरी तरह हावी रही। खास तौर पर केमार रोच और जेयडन सील्स की धारदार गेंदबाजी ने श्रीलंका की दूसरी पारी को पूरी तरह तहस नहस कर दिया।

    पहली पारी में 318 रन से पिछड़ने के बाद दूसरी बार बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने शुरुआती विकेट जल्दी गंवा दिए और किसी भी बल्लेबाज को बड़ी साझेदारी बनाने का मौका नहीं मिला। पथुम निसांका केवल 3 रन बनाकर आउट हो गए जबकि निशान मदुष्का भी सिर्फ 2 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। कसुन राजिथा और कामिंदु मेंडिस भी सस्ते में आउट हो गए जिससे टीम गहरे संकट में पहुंच गई।

    पहली पारी में शानदार शतक लगाने वाले धनंजय डी सिल्वा दूसरी पारी में खाता भी नहीं खोल सके। उनके जल्दी आउट होने से श्रीलंका की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं। मध्यक्रम भी पूरी तरह विफल रहा और विकेट लगातार गिरते रहे।

    ऐसे मुश्किल समय में दिनेश चांदीमल ने अकेले संघर्ष करने की कोशिश की। उन्होंने 60 गेंदों में 43 रन की जुझारू पारी खेली और कुछ आकर्षक चौके भी लगाए लेकिन दूसरे छोर से उन्हें किसी बल्लेबाज का साथ नहीं मिला। कुशल मेंडिस केवल 8 रन बनाकर आउट हुए जबकि मिलन प्रियनाथ रत्नायके और असिथा फर्नांडो बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। सोनल दिनुशा 12 रन बनाकर नाबाद रहे लेकिन पूरी टीम केवल 101 रन पर सिमट गई।

    वेस्टइंडीज की ओर से अनुभवी तेज गेंदबाज केमार रोच ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 विकेट झटके। जेयडन सील्स ने भी अपनी तेज और सटीक गेंदबाजी से 3 विकेट हासिल किए। शेमार जोसेफ ने 2 जबकि अल्जारी जोसेफ ने 1 विकेट लेकर श्रीलंका की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।

    इससे पहले श्रीलंका ने पहली पारी में 308 रन बनाए थे। कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने 120 रन की शानदार शतकीय पारी खेली थी जबकि दिनेश चांदीमल ने 54 रन का अहम योगदान दिया था। हालांकि बाकी बल्लेबाज बड़ी पारियां खेलने में नाकाम रहे।

    जवाब में वेस्टइंडीज ने पहली पारी में बल्लेबाजी का शानदार प्रदर्शन किया और 9 विकेट पर 626 रन बनाकर अपनी पारी घोषित कर दी। आमिर जांगू ने 233 रन की यादगार पारी खेली जबकि कप्तान रोस्टन चेज 194 रन बनाकर टीम को विशाल स्कोर तक पहुंचाने में सफल रहे। इन दोनों बल्लेबाजों की दमदार पारियों की बदौलत वेस्टइंडीज ने पहली पारी में 318 रन की बड़ी बढ़त हासिल की जो अंततः मैच का निर्णायक अंतर साबित हुई।

    इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने न सिर्फ सीरीज में बढ़त बना ली बल्कि अपने गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बेहतरीन संतुलन का भी शानदार प्रदर्शन किया। अब कैरेबियाई टीम की नजर दूसरे टेस्ट में जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने पर होगी जबकि श्रीलंका वापसी के इरादे से अगले मुकाबले में उतरेगा।

  • विश्व कप से शर्मनाक विदाई के बाद साउथ कोरिया में बड़ा फैसला हेड कोच होंग म्युंगबो ने दिया इस्तीफा

    विश्व कप से शर्मनाक विदाई के बाद साउथ कोरिया में बड़ा फैसला हेड कोच होंग म्युंगबो ने दिया इस्तीफा


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में ग्रुप स्टेज से बाहर होने के बाद साउथ कोरिया की फुटबॉल टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। टीम के अनुभवी हेड कोच होंग म्युंगबो ने अपने पद से इस्तीफा देकर विश्व कप में मिली निराशाजनक हार की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। उन्होंने साफ कहा कि राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच के रूप में अंतिम परिणाम ही सबसे महत्वपूर्ण होता है और जब वह देश की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके तो पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।

    साउथ कोरिया ने टूर्नामेंट की शुरुआत शानदार अंदाज में की थी। पहले मुकाबले में टीम ने चेकिया को 2 1 से हराकर अपने अभियान की बेहतरीन शुरुआत की थी। इस जीत के बाद माना जा रहा था कि टीम आसानी से नॉकआउट चरण में पहुंच जाएगी। लेकिन अगले दो मुकाबलों में पूरी तस्वीर बदल गई। मेक्सिको और साउथ अफ्रीका के खिलाफ लगातार 1 0 से मिली हार ने टीम की मुश्किलें बढ़ा दीं। अंक तालिका में तीसरे स्थान पर रहने के बावजूद साउथ कोरिया सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली आठ टीमों में भी जगह नहीं बना सका और ग्रुप चरण से ही टूर्नामेंट से बाहर हो गया।

    विश्व कप से बाहर होने के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में 57 वर्षीय होंग म्युंगबो भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि देश के लाखों फुटबॉल प्रशंसकों ने टीम पर भरोसा जताया था लेकिन वह उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ जिम्मेदारी निभाने की कोशिश की लेकिन टीम को अपेक्षित सफलता नहीं दिला पाए। इसी कारण उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला लिया है।

    होंग म्युंगबो ने अपने सहयोगी कोचों और सपोर्ट स्टाफ का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि पूरी टीम ने कठिन परिस्थितियों में भी पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम किया लेकिन कई बार प्रयासों के बावजूद परिणाम आपके पक्ष में नहीं आते। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व करना उनके लिए हमेशा गर्व की बात रही है।

    होंग म्युंगबो ने वर्ष 2024 में दूसरी बार साउथ कोरिया की राष्ट्रीय टीम की कमान संभाली थी। उनके दूसरे कार्यकाल में टीम ने कुल 26 मुकाबले खेले जिनमें 15 मैच जीते जबकि 6 में हार का सामना करना पड़ा और 5 मुकाबले ड्रॉ रहे। इससे पहले भी वह 2013 और 2014 के दौरान राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच रह चुके हैं।

    कोच बनने से पहले होंग म्युंगबो साउथ कोरिया के सबसे सफल फुटबॉल खिलाड़ियों में गिने जाते थे। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में देश के लिए 136 मुकाबले खेले और लंबे समय तक टीम के प्रमुख डिफेंडर रहे। वर्ष 2009 में उन्होंने अपने कोचिंग करियर की शुरुआत की और बाद में राष्ट्रीय टीम के साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

    अपने विदाई संदेश में होंग म्युंगबो ने कहा कि भले ही वह मुख्य कोच का पद छोड़ रहे हों लेकिन साउथ कोरिया के फुटबॉल के प्रति उनका समर्पण और प्यार कभी कम नहीं होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि मौजूदा टीम भविष्य में मजबूत वापसी करेगी और आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में बेहतर प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि अब वह एक समर्थक के रूप में हमेशा अपनी राष्ट्रीय टीम का हौसला बढ़ाते रहेंगे और उम्मीद करेंगे कि कोरियाई फुटबॉल फिर नई ऊंचाइयों को छुए।

  • किसान सारथी बना किसानों का डिजिटल साथी, 13 भाषाओं में विशेषज्ञ सलाह और 610 सरकारी योजनाओं की जानकारी

    किसान सारथी बना किसानों का डिजिटल साथी, 13 भाषाओं में विशेषज्ञ सलाह और 610 सरकारी योजनाओं की जानकारी

    नई दिल्ली। देश में कृषि क्षेत्र को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में किसान सारथी प्लेटफॉर्म तेजी से किसानों का भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरा है। केंद्र सरकार के अनुसार इस मंच से अब तक करीब 2.95 करोड़ किसान जुड़ चुके हैं, जिनमें 56 लाख से अधिक महिला किसान भी शामिल हैं। कृषि विशेषज्ञों से सीधे संवाद, स्थानीय भाषा में सलाह और सरकारी योजनाओं की जानकारी जैसी सुविधाओं के कारण यह प्लेटफॉर्म किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    सरकार ने बताया कि इस डिजिटल कृषि परामर्श मंच की शुरुआत वर्ष 2021 में किसानों को एकीकृत और वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म से 4,767 कृषि वैज्ञानिक और 113 कृषि अनुसंधान संस्थान जुड़े हुए हैं। इन विशेषज्ञों के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है और खेती से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी सीधे खेत तक पहुंचाई जा रही है।

    अब तक इस मंच पर 19 लाख से अधिक कृषि संबंधी सवालों का समाधान किया जा चुका है। इसके अलावा विभिन्न फसलों और कृषि गतिविधियों से जुड़ी 21 हजार से अधिक वैज्ञानिक सलाह भी किसानों तक पहुंचाई गई हैं। इन सलाहों का उद्देश्य किसानों को मौसम, फसल प्रबंधन, कीट नियंत्रण, उर्वरक उपयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में समय पर जानकारी देना है।

    अधिकांश किसानों ने अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराया है। इसके अलावा कॉल सेंटर, मोबाइल एप, वेब पोर्टल और कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए भी बड़ी संख्या में किसान इससे जुड़े हैं। सरकार का कहना है कि इस बहु-स्तरीय व्यवस्था से दूर-दराज के क्षेत्रों के किसानों को भी डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल रहा है।

    किसान सारथी की पहुंच देश के 37 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, 768 जिलों तथा 6.63 लाख से अधिक गांवों तक हो चुकी है। यह प्लेटफॉर्म आधुनिक इंटरैक्टिव सूचना प्रणाली के माध्यम से किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच दो-तरफा संवाद स्थापित करता है। इससे किसानों को अपनी समस्याओं का समाधान सीधे विशेषज्ञों से प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

    इस मंच के जरिए किसानों को केवल कृषि सलाह ही नहीं बल्कि मौसम पूर्वानुमान, सरकारी योजनाओं की जानकारी, कृषि अनुसंधान से जुड़े नवीनतम अपडेट और विशेषज्ञों से लाइव परामर्श जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्लेटफॉर्म 13 क्षेत्रीय भाषाओं में संवाद की सुविधा देता है, जिससे अलग-अलग राज्यों के किसान अपनी भाषा में सवाल पूछकर समाधान प्राप्त कर सकते हैं।

    सरकार के अनुसार किसान सारथी को कई राष्ट्रीय सेवाओं के साथ एकीकृत किया गया है। इसके माध्यम से किसानों को 610 सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध होती है, जिनमें केंद्र सरकार की 102 प्रमुख योजनाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा यह मंच अनाज, दलहन, तिलहन, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, पोल्ट्री और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों से जुड़ी उपयोगी जानकारी भी प्रदान करता है।

    सरकार का मानना है कि किसान सारथी प्लेटफॉर्म कृषि अनुसंधान और किसानों के बीच की दूरी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से वैज्ञानिक सलाह को सीधे किसानों तक पहुंचाने से खेती अधिक वैज्ञानिक, उत्पादक और लाभकारी बनने की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

  • रचिन और मिचेल का कमाल फिर गेंदबाजों का वार इंग्लैंड पर हार का खतरा मंडराया

    रचिन और मिचेल का कमाल फिर गेंदबाजों का वार इंग्लैंड पर हार का खतरा मंडराया


    नई दिल्ली । इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच ट्रेंट ब्रिज में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट मैच का चौथा दिन पूरी तरह मेहमान टीम के नाम रहा। न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी में मजबूत बढ़त हासिल की और फिर गेंदबाजों के दम पर इंग्लैंड के शीर्ष क्रम को झटके देकर मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। चौथे दिन का खेल समाप्त होने तक इंग्लैंड ने दूसरी पारी में चार विकेट खोकर 103 रन बनाए हैं। अब अंतिम दिन मेजबान टीम को जीत के लिए 270 रन की जरूरत है जबकि उसके केवल छह विकेट शेष हैं।

    373 रन के कठिन लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड को कप्तान बेन स्टोक्स और बेन डकेट ने तेज शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 50 रन जोड़कर टीम को सकारात्मक शुरुआत दी। स्टोक्स ने शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी की और केवल 20 गेंदों में 30 रन बना डाले लेकिन बड़ी पारी खेलने से पहले ही उनका विकेट गिर गया। उनके आउट होते ही इंग्लैंड की पारी लड़खड़ा गई।

    स्टोक्स के बाद बल्लेबाजी करने आए जैकब बेथेल बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गए। न्यूजीलैंड के गेंदबाज जैकरी फाउल्क्स ने उन्हें एलबीडब्ल्यू आउट कर इंग्लैंड पर दबाव और बढ़ा दिया। इसके बाद हैरी ब्रूक ने कुछ आकर्षक शॉट लगाए और केवल नौ गेंदों में 21 रन बनाए लेकिन उनकी पारी भी ज्यादा देर नहीं चल सकी। दूसरी ओर बेन डकेट ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए 42 गेंदों में 36 रन बनाए लेकिन वह भी टीम को मजबूत स्थिति में नहीं पहुंचा सके।

    दिन का खेल समाप्त होने तक अनुभवी बल्लेबाज जो रूट नौ रन और एमिलियो गे छह रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे। अब इंग्लैंड की सारी उम्मीदें इन दोनों बल्लेबाजों पर टिकी होंगी। अगर अंतिम दिन टीम को जीत हासिल करनी है तो इन दोनों को लंबी साझेदारी निभानी होगी।

    इससे पहले न्यूजीलैंड ने अपनी दूसरी पारी नौ विकेट पर 288 रन बनाकर घोषित की। टीम की ओर से रचिन रविंद्र और डेरिल मिचेल ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 129 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर इंग्लैंड के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य खड़ा किया। रचिन रविंद्र शतक से चूक गए और 149 गेंदों में 94 रन बनाकर आउट हुए जबकि डेरिल मिचेल ने नाबाद 100 रन की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी ने न्यूजीलैंड की बढ़त को निर्णायक बना दिया।

    इंग्लैंड की ओर से जोफ्रा आर्चर ने सबसे प्रभावी गेंदबाजी करते हुए 53 रन देकर चार विकेट झटके। गस एटकिंसन और कप्तान बेन स्टोक्स ने दो दो विकेट अपने नाम किए लेकिन न्यूजीलैंड तब तक मजबूत बढ़त हासिल कर चुका था।

    पहली पारी में न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड के 354 रन के जवाब में 438 रन बनाकर 84 रन की बढ़त बनाई थी। दूसरी पारी में 288 रन जोड़ने के बाद उसने इंग्लैंड के सामने 373 रन का मुश्किल लक्ष्य रखा। अब अंतिम दिन मुकाबला पूरी तरह रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है। इंग्लैंड को जीत के लिए 270 रन बनाने हैं जबकि न्यूजीलैंड को सीरीज में अहम बढ़त लेने के लिए केवल छह विकेट की जरूरत है।