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  • स्वागत के नाम पर अव्यवस्था: भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष के आगमन से शहडोल की यातायात व्यवस्था चरमराई

    स्वागत के नाम पर अव्यवस्था: भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष के आगमन से शहडोल की यातायात व्यवस्था चरमराई


    शहडोल । संभागीय मुख्यालय शहडोल में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री श्याम टेलर के नगर आगमन के दौरान किए गए स्वागत इंतजामों ने शहर की यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर दिया। स्वागत के नाम पर शहर के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर भारी मशीनें खड़ी किए जाने से आमजन को असुविधा का सामना करना पड़ा और कई स्थानों पर जाम की स्थिति निर्मित हो गई।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत की तैयारियों के तहत शहर के विभिन्न हिस्सों में चार से छह जेसीबी मशीनों को सड़कों पर खड़ा किया गया था। इन मशीनों को फूलों एवं गुब्बारों से सजाया गया था तथा युवा मोर्चा के पदाधिकारी इन पर सवार होकर स्वागत की तैयारी करते देखे गए। भारी मशीनों के कारण मार्ग संकरे हो गए, जिससे यातायात का प्रवाह बाधित हुआ और देखते ही देखते प्रमुख सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

    इस अव्यवस्था का सबसे अधिक असर जिले की प्रमुख शैक्षणिक संस्था रघुराज स्कूल के सामने देखने को मिला। स्कूल समय के दौरान सड़क पर जाम की स्थिति बनी रही, जिससे विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को आवागमन में कठिनाई हुई। जाम में फंसे वाहनों में एंबुलेंस भी शामिल थीं, जिससे आपातकालीन सेवाओं की सुचारुता पर भी सवाल खड़े हो गए।

    स्थानीय नागरिकों ने बताया कि स्वागत की इस व्यवस्था में आम जनता की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी गई। दिनभर लोग जाम में फंसे रहे और दैनिक कार्यों के लिए निकलने वालों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। कई स्थानों पर यातायात पुलिस द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया, लेकिन सड़कों पर खड़ी भारी मशीनों के कारण यातायात को पूरी तरह सुचारू करना संभव नहीं हो सका।

    इस पूरे घटनाक्रम को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर जारी है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या सार्वजनिक मार्गों का इस प्रकार उपयोग करना उचित है। नागरिकों का कहना है कि राजनीतिक या संगठनात्मक आयोजनों के दौरान यातायात व्यवस्था और आपात सेवाओं को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है, ताकि आमजन को असुविधा न हो।

    मामले में शहडोल यातायात प्रभारी श्री संजय जायसवाल ने कहा कि वे वर्तमान में एक विभागीय बैठक में हैं, लेकिन यदि इस प्रकार से शहर में जाम की स्थिति बनी है तो इसकी जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

  • जबलपुर सर्राफा बाजार का विश्लेषण: 40 हजार की कीमत फिर भी कम डिमांड, क्या 9 कैरेट सोना सिर्फ एक दिखावा है?

    जबलपुर सर्राफा बाजार का विश्लेषण: 40 हजार की कीमत फिर भी कम डिमांड, क्या 9 कैरेट सोना सिर्फ एक दिखावा है?


    जबलपुर/ भारतीय समाज में सोना खरीदना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। यही कारण है कि जब भी सोने की बात आती है, तो शुद्धता प्योरिटी सबसे बड़ा पैमाना होती है। हाल के दिनों में बाजार में 9 कैरेट गोल्ड ज्वेलरी एक सस्ते विकल्प के रूप में उभरी है, लेकिन जबलपुर सहित देश के अन्य सर्राफा बाजारों में इसकी चमक फीकी पड़ती दिख रही है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए करीब 40 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम की आकर्षक कीमत होने के बावजूद, लोग इसे शादी-ब्याह और निवेश जैसे महत्वपूर्ण मौकों पर अपनाने से कतरा रहे हैं।

    जबलपुर के अनुभवी सर्राफा व्यापारी अजीत जैन के अनुसार, 9 कैरेट सोने की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी संरचना में छिपी है। तकनीकी रूप से देखें तो 9 कैरेट गोल्ड का अर्थ है कि उस आभूषण में मात्र 37.5 प्रतिशत शुद्ध सोना है, जबकि शेष 62.5 प्रतिशत हिस्सा मिश्र धातु अलॉय का होता है। हालांकि, यह सोना भी अब BIS-हॉलमार्क के अंतर्गत आता है और सरकारी मानकों पर खरा उतरता है, लेकिन सोने की मात्रा इतनी कम होने के कारण यह पारंपरिक सोने 22K या 24K जैसा अनुभव नहीं दे पाता।

    व्यापारियों का कहना है कि 9 कैरेट गोल्ड के रंग और चमक को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें आ रही हैं। इसमें मिश्र धातु की मात्रा अधिक होने के कारण कुछ समय बाद इसका पीलापन हल्का पड़ने लगता है और यह दिखने में असली सोने जैसा नहीं लगता। यदि इसे ठीक से मेंटेन न किया जाए, तो यह काला भी पड़ सकता है। यही वजह है कि ग्राहक इसे खरीदने के बाद पछतावे से बचने के लिए अभी भी 22 या 18 कैरेट के आभूषणों पर ही भरोसा जता रहे हैं।

    निवेश के दृष्टिकोण से भी 9 कैरेट गोल्ड एक ‘फेल’ सौदा साबित हो रहा है। जब कोई व्यक्ति सोना खरीदता है, तो उसकी उम्मीद होती है कि भविष्य में उसे उस पर अच्छा रिटर्न मिलेगा। लेकिन 9 कैरेट सोने में शुद्ध सोने की मात्रा कम होने की वजह से री-सेल वैल्यू दोबारा बेचने पर मिलने वाली कीमत काफी कम होती है। लोग पूछते जरूर हैं, लेकिन जब उन्हें पता चलता है कि इसमें 60 फीसदी से ज्यादा अन्य धातुएं हैं, तो वे निवेश के लिए वापस 24 या 22 कैरेट की ओर मुड़ जाते हैं।

    वर्तमान में 9 कैरेट गोल्ड की मांग केवल बड़े शहरों में कुछ फैशनेबल और ‘डेली वियर’ ज्वेलरी तक सीमित है। शादियों और त्योहारों के सीजन में, जहाँ प्रतिष्ठा और शुद्धता का महत्व होता है, वहाँ यह सस्ता सोना अपनी जगह बनाने में नाकाम रहा है। अंततः, भारतीय ग्राहकों के लिए सोना आज भी वही है जो बरसों तक अपनी चमक और कीमत दोनों बरकरार रख सके।

  • मध्य प्रदेश में भाजपा नेताओं की गुंडागर्दी सीधी में महिला पिटाई अशोकनगर में युवक पर हमला कानून व्यवस्था पर सवाल

    मध्य प्रदेश में भाजपा नेताओं की गुंडागर्दी सीधी में महिला पिटाई अशोकनगर में युवक पर हमला कानून व्यवस्था पर सवाल


    मध्य प्रदेश में दो अलग अलग घटनाओं ने राज्य में कानून व्यवस्था और महिलाओं और युवाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीधी जिले के बहरी बाजार में स्थानीय भाजपा नेता और यूट्यूबर संतोष पाठक ने एक महिला को दुकान विवाद के कारण बेरहमी से पीटा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें पाठक महिला के बाल खींचते हुए उसे जमीन पर गिराकर लाठी से मारते नजर आए। पीड़िता का कहना है कि संतोष पाठक ने पहले उसकी दुकान हटवाई और अपनी जगह पर व्यापार शुरू कर दिया था। विवाद पुराना था लेकिन रविवार को आमने सामने होने पर हिंसा भड़क उठी। पुलिस ने महिला की शिकायत पर आईपीसी की धारा 323 294 और 506 के तहत मामला दर्ज किया है।

    इसी तरह अशोकनगर जिले के चंदेरी क्षेत्र के बड़ेरा गांव में भाजपा नेता और सरपंच बली सिंह लोधी ने 34 वर्षीय युवक बृजकिशोर यादव को जमीन पर पटककर लात और थप्पड़ मारे। वीडियो में लोधी युवक को लगातार पीटते दिख रहे हैं। युवक का कहना है कि वह चौराहे पर बैठा था तभी सरपंच ने गालियां दी और विरोध करने पर हमला कर दिया। घटना एक ढाबे के पास हुई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया लेकिन गिरफ्तारी में देरी पर सवाल उठ रहे हैं।

    दोनों घटनाओं ने मध्य प्रदेश में महिलाओं और युवाओं की सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। सीधी की पीड़िता हेमा सिंह स्टॉल चलाती हैं और उनकी आजीविका खतरे में है। संतोष पाठक ने सफाई देते हुए कहा कि महिला ने पहले उन पर चप्पल से हमला किया था लेकिन वायरल वीडियो में हमला असंतुलित लगता है। अशोकनगर में बृजकिशोर यादव ने मेडिकल जांच कराई और चोटों की रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी। लोधी की राजनीतिक हैसियत के कारण स्थानीय लोग डर का माहौल बता रहे हैं।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इन घटनाओं को जोड़कर लाडली बहना और बेटी बचाओ योजनाओं को खोखला बताया। उन्होंने तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। एनसीआरबी के आंकड़े दिखाते हैं कि एमपी में महिला अपराधों में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। समाजसेवी संगठन निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि राजनीतिक दबाव न पड़े। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में छोटे विवाद अक्सर हिंसक रूप ले लेते हैं और कानून की पहुंच सीमित होती है।

    सीधी में बहरी बाजार विवाद महीनों पुराना था। प्रशासन को शिकायतें मिलीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई जिससे हिंसा भड़की। अशोकनगर में लोधी की सरपंची के कारण गांव में दबदबा है और युवक की पिटाई से महिलाएं और युवा असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। दोनों जगहों पर वीडियो वायरल होने से आक्रोश फैला और सोशल मीडिया पर #JusticeForMPVictims ट्रेंड कर रहा है।

    पुलिस ने दोनों मामलों में चोट अपशब्द और धमकी की धाराओं में FIR दर्ज की है। दोनों पीड़ितों ने मेडिकल जांच कराई लेकिन गिरफ्तारी में देरी के कारण राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लग रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वीडियो मजबूत सबूत हैं लेकिन जांच में देरी न्याय को कमजोर करती है। कांग्रेस ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया है और पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकार में महिलाएं असुरक्षित हैं। भाजपा ने इसे व्यक्तिगत विवाद बताया। यह मामला राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते हिंसक विवादों पर गंभीर प्रश्न उठाता है।

  • मौतों के बाद भी लापरवाह सिस्टम: IDA दफ्तर में परोसा जा रहा दो साल पुराना एक्सपायरी पानी

    मौतों के बाद भी लापरवाह सिस्टम: IDA दफ्तर में परोसा जा रहा दो साल पुराना एक्सपायरी पानी


    इंदौर । भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अभी लोगों की स्मृति से मिटा भी नहीं था कि शहर के एक प्रमुख सरकारी कार्यालय से चौंकाने वाली लापरवाही सामने आ गई है। शहर के विकास की जिम्मेदारी संभालने वाला इंदौर विकास प्राधिकरण IDA स्वयं स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी करता पाया गया है। IDA कार्यालय में आगंतुकों आम नागरिकों और बैठकों में शामिल लोगों को एक्सपायरी आरओ पानी परोसे जाने का मामला उजागर हुआ है।

    जानकारी के अनुसार IDA कार्यालय में रखी पानी की बोतलों पर पैकेजिंग तिथि 23 नवंबर 2024 अंकित है। बोतलों पर स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यह पानी निर्माण तिथि से 90 दिनों तक ही उपयोग योग्य है। इस आधार पर पानी फरवरी 2025 के बाद पीने योग्य नहीं था लेकिन हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2026 में भी यही बोतलें कार्यालय में रखी गई हैं और उपयोग में लाई जा रही हैं।

    इस पूरे मामले में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया है कि IDA के अधिकारी स्वयं इस पानी को पीने से परहेज करते हैं। विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अधिकारी घर से अपना निजी पानी लेकर आते हैं जबकि यह एक्सपायरी बोतलबंद पानी मीटिंग आगंतुकों और वीआईपी के लिए रखा जाता है। आवश्यकता पड़ने पर एजेंट को फोन कर पेटियां मंगवा ली जाती हैं लेकिन उनकी गुणवत्ता या वैधता की कोई जांच नहीं की जाती।

    सरकारी कार्यालय में हर वर्ष बोतलबंद पानी की खरीद पर बड़ी राशि खर्च की जाती है इसके बावजूद न तो स्टॉक की नियमित जांच की जा रही है और न ही एक्सपायरी डेट पर कोई निगरानी है। यह स्थिति न केवल वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करती है बल्कि सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एक्सपायरी पानी का सेवन फूड पॉइजनिंग पेट संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। ऐसे में यदि यह पानी किसी बुजुर्ग बीमार व्यक्ति या बच्चे को परोसा जाए तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

    भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद प्रशासन ने जांच और सुधार के दावे किए थे लेकिन IDA कार्यालय की यह स्थिति दर्शाती है कि सिस्टम ने उन घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया। सरकारी दफ्तरों में आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं की जा सकी है।

    अब यह सवाल उठना लाजमी है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी पानी सप्लाई करने वाले ठेकेदार के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे और क्या पूरे स्टॉक की जांच कर दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

  • उमंग सिंघार का बड़ा आरोप सिंगरौली में AI फोटो से फर्जी मनरेगा मजदूर भुगतान मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग

    उमंग सिंघार का बड़ा आरोप सिंगरौली में AI फोटो से फर्जी मनरेगा मजदूर भुगतान मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग


    सिंगरौली /विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सिंगरौली जिले में मनरेगा योजना के तहत चल रहे फर्जीवाड़े को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट कर आरोप लगाया कि AI जनरेटेड फर्जी मजदूरों की तस्वीरें अपलोड कर उनके नाम पर भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसमें कमीशन की मांग भी शामिल है और सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।

    सिंघार ने कहा कि सिंगरौली में 120 से अधिक मजदूरों के नाम AI द्वारा बनाई गई फर्जी तस्वीरों के माध्यम से भुगतान किया गया है। इसके बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जी-रामजी योजना का उद्देश्य मजदूरों के सम्मान और उनकी आर्थिक सुरक्षा होना चाहिए न कि सरकारी धन की लूट का साधन। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मामले का संज्ञान लेकर उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की।

    सिंघार ने अपने ट्वीट में यह भी कहा कि भाजपा केवल नाम बदलने की राजनीति कर रही है जबकि योजनाओं के धरातलीय कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार हो रहा है और गरीब मजदूरों के हक को मारा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामले न केवल योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं बल्कि आम नागरिकों में सरकार और प्रशासन के प्रति असंतोष बढ़ाते हैं।

    नेता प्रतिपक्ष ने इस अवसर पर चंदेरी की घटना को भी लेकर सरकार पर निशाना साधा। अशोकनगर जिले के चंदेरी में भाजपा नेता और सरपंच द्वारा एक युवक की कथित पिटाई का वीडियो साझा करते हुए उन्होंने इसे कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल बताया। सिंघार ने कहा कि सत्ता से जुड़े लोग जब कानून हाथ में ले लेते हैं तो आम नागरिक कैसे सुरक्षित रह सकता है। उन्होंने इसे सत्ता का दुरुपयोग और प्रशासन की विफलता करार दिया।

    सिंघार ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह न केवल फर्जीवाड़ों की जांच करे बल्कि कानून के उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे मामलों को नजरअंदाज किया गया तो समाज में कानून और व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होगा और भ्रष्टाचार और गुंडाराज बढ़ेगा।

    इस पूरे मामले ने प्रदेश में भाजपा सरकार के कार्यान्वयन और प्रशासनिक नियंत्रण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दल लगातार ऐसे मामलों को उजागर कर जनता और सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार दोषियों पर कार्रवाई करती है या इन फर्जीवाड़ों और हिंसक घटनाओं को अनदेखा करती रहती है।

  • भारत सेशेल्स साझेदारी को नई ऊँचाई 175 मिलियन डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा

    भारत सेशेल्स साझेदारी को नई ऊँचाई 175 मिलियन डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रपति श्री अर्मिनी और उनके प्रतिनिधिमंडल का भारत आगमन पर हार्दिक स्वागत किया तथा राष्ट्रपति चुने जाने पर 140 करोड़ भारतवासियों की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति अर्मिनी की यह पहली भारत यात्रा ऐसे महत्वपूर्ण वर्ष में हो रही है जब सेशेल्स अपना 50वां स्वतंत्रता दिवस तथा भारत सेशेल्स राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ मना रहा है जो दोनों देशों की मित्रता की गहराई को दर्शाता है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और सेशेल्स के संबंध केवल राजनयिक दायरे तक सीमित नहीं हैं बल्कि हिंद महासागर के माध्यम से सदियों पुराने ऐतिहासिक सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों पर आधारित हैं। एक समुद्री पड़ोसी और विश्वसनीय साझेदार के रूप में सेशेल्स भारत के ‘महासागर विज़न’ का अभिन्न हिस्सा है।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि आज की वार्ताओं में आर्थिक सहयोग को और सुदृढ़ करने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने फिनटेक और डिजिटल समाधान के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। विकास साझेदारी को भारत सेशेल्स संबंधों की मजबूत नींव बताते हुए उन्होंने सेशेल्स की प्राथमिकताओं के अनुरूप 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की। यह पैकेज सामाजिक आवास ई-मोबिलिटी व्यावसायिक प्रशिक्षण स्वास्थ्य रक्षा तथा समुद्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में परियोजनाओं को समर्थन देगा जिससे युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर सृजित होंगे।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि सेशेल्स की क्षमता निर्माण में भारत के आईटीईसी कार्यक्रम की अहम भूमिका रही है। इस दिशा में सेशेल्स के सिविल सेवकों के प्रशिक्षण हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके साथ ही डिजिटल परिवर्तन स्वास्थ्य सहयोग किफायती औषधियों की आपूर्ति नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु अनुकूल समाधानों में सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति बनी है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्लू इकोनॉमी समुद्री अनुसंधान क्षमता निर्माण और डेटा साझाकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग स्वाभाविक है। रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा को साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए उन्होंने कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन में पूर्ण सदस्य के रूप में सेशेल्स के शामिल होने का स्वागत किया।

    प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के संबंधों को सबसे बड़ी ताकत बताते हुए पर्यटन शिक्षा संस्कृति और खेल के माध्यम से युवा आदान-प्रदान बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज जारी किया जा रहा भारत सेशेल्स संयुक्त दृष्टि-पत्र आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय सहयोग का मार्गदर्शक बनेगा।

  • श्रद्धा की भूल या घातक लापरवाही? भोपाल में 12वीं की छात्रा ने भभूत समझकर खाई चूहामार दवा, बोर्ड परीक्षा से पहले बुझ गया घर का चिराग

    श्रद्धा की भूल या घातक लापरवाही? भोपाल में 12वीं की छात्रा ने भभूत समझकर खाई चूहामार दवा, बोर्ड परीक्षा से पहले बुझ गया घर का चिराग

    ईटखेड़ी /राजधानी भोपाल के ईटखेड़ी इलाके से एक ऐसी खबर आई है जिसने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि सुरक्षा और सावधानी को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ लांबाखेड़ा निवासी 17 वर्षीय वैष्णवी सेन, जो कि 12वीं कक्षा की छात्रा थी, एक भयावह दुर्घटना का शिकार हो गई। घर के मंदिर में जिसे वह श्रद्धावश ‘भभूत’ (पवित्र राख) समझकर खा रही थी, वह वास्तव में चूहों को मारने वाला घातक जहर था। नियति का क्रूर खेल देखिए कि जिस मंदिर में परिवार सुख-शांति की प्रार्थना करता था, वहीं अनजाने में रखी गई एक दवा ने जवान बेटी की जान ले ली।

    घटना की शुरुआत 26 जनवरी को हुई थी। जानकारी के अनुसार, वैष्णवी की मां घर में चूहों के उत्पात से परेशान थीं और उन्होंने चूहों को भगाने के उद्देश्य से पाउडरनुमा चूहामार दवा मंदिर के पास रख दी थी। इसी बीच वैष्णवी पूजा करने पहुँची और उसने अनजाने में उस पाउडर को मंदिर की भभूत समझ लिया। भक्ति और विश्वास के वशीभूत होकर उसने उस जहरीले पाउडर का सेवन कर लिया। उस समय उसे जरा भी आभास नहीं था कि यह कदम उसके जीवन का आखिरी कदम साबित होगा।

    दवा खाने के कुछ देर बाद वैष्णवी सामान्य रूप से अपनी कोचिंग चली गई, लेकिन वहां उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। घर लौटने पर जब उसे लगातार उल्टियां होने लगीं, तब परिजनों ने उससे पूछताछ की। वैष्णवी ने मासूमियत से जवाब दिया कि उसने मंदिर में रखी भभूत खाई है। यह सुनते ही मां के पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि उन्हें पता था कि वह भभूत नहीं बल्कि जहर था। आनन-फानन में उसे भानपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया।

    परिजनों को लगा कि खतरा टल गया है, लेकिन जहर अपना असर दिखा चुका था। कुछ दिनों बाद वैष्णवी की हालत दोबारा गंभीर होने लगी। उसे तुरंत हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद सोमवार सुबह उसने अंतिम सांस ली। वैष्णवी के पिता मनोज सेन और पूरा परिवार इस समय गहरे सदमे में है। सबसे दुखद पहलू यह है कि वैष्णवी की 10 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली थीं। वह भविष्य के सपने बुन रही थी और अपनी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी थी, लेकिन एक छोटी सी गलतफहमी ने सब कुछ खत्म कर दिया।

    पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। एएसआई एस.के. बाजपेयी के अनुसार, शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि घर में कीटनाशक या जहरीले पदार्थों को रखते समय अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिए, विशेषकर उन जगहों पर जहाँ भ्रम की स्थिति पैदा हो सके। वैष्णवी की मौत ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है।

  • परीक्षा पे चर्चा 2026 एपिसोड 2 कोयंबटूर से गुवाहाटी तक छात्रों से संवाद, जीवन परीक्षा के गुर दे गए प्रधानमंत्री

    परीक्षा पे चर्चा 2026 एपिसोड 2 कोयंबटूर से गुवाहाटी तक छात्रों से संवाद, जीवन परीक्षा के गुर दे गए प्रधानमंत्री


    नई दिल्ली । परीक्षा पे चर्चा 2026 के एपिसोड 2 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के छात्रों से सीधे संवाद कर यह संदेश दिया कि यह कार्यक्रम सिखाने से ज्यादा सीखने का मंच है। इस बार चर्चा स्टूडियो तक सीमित न रहकर देश के अलग अलग हिस्सों में पहुंची जहां प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों के बीच बैठकर उनकी जिज्ञासाएं सुनीं और सरल उदाहरणों से समाधान सुझाए।

    तमिलनाडु के कोयंबटूर से शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने छात्रों के सवालों पर स्टार्टअप पैशन और पढ़ाई के संतुलन विकसित भारत 2047 और अनुशासन के महत्व पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप के लिए उम्र नहीं स्पष्ट सोच और टीमवर्क जरूरी है। पढ़ाई और रुचि को विरोधी न मानते हुए दोनों को साथ साथ आगे बढ़ाने की सलाह दी। विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए उन्होंने नागरिक कर्तव्यों स्वच्छता नियमों का पालन और ‘वोकल फॉर लोकल को अहम बताया।

    छात्रों द्वारा पूछे गए एआई और भविष्य के करियर से जुड़े सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक से डरने की जरूरत नहीं बल्कि उसे समझकर अपने काम में वैल्यू एडिशन करना चाहिए। अनुशासन को प्रेरणा से भी अधिक जरूरी बताते हुए उन्होंने कहा कि बिना डिसिप्लिन के इंस्पिरेशन भी बोझ बन जाता है।

    इसके बाद चर्चा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंची जहां संवाद के साथ साथ स्थानीय व्यंजनों और संस्कृति का भी रंग देखने को मिला। प्रधानमंत्री ने छात्रों को भारत भ्रमण की सलाह देते हुए कहा कि छात्र जीवन में साधारण साधनों से यात्रा करने से जीवन के वास्तविक अनुभव मिलते हैं। परीक्षा के तनाव पर उन्होंने रिवीजन प्रैक्टिस अच्छी नींद और आत्मविश्वास को सबसे कारगर उपाय बताया। खेल और पढ़ाई के संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा और खेल दोनों जीवन के लिए आवश्यक हैं।

    गुजरात के आदिवासी क्षेत्र में पहुंचे प्रधानमंत्री ने शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास की कुंजी बताया। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा संस्थानों के विस्तार से बड़ा बदलाव संभव हुआ। तनाव प्रबंधन पर उन्होंने कहा कि लगातार अभ्यास लिखने की आदत और पर्याप्त नींद तनाव को दूर करती है। करियर चयन पर प्रधानमंत्री ने छात्रों को सपनों के अनुरूप जीवन बनाने और शोर नहीं बल्कि सफलता को बोलने देने की सीख दी।

    अंत में असम के गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र के तट पर हुई चर्चा में आत्मविश्वास स्वास्थ्य खान पान और तुलना की मानसिकता पर खुलकर संवाद हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मविश्वास का अर्थ है स्वयं पर विश्वास और अपनी क्षमता को पहचानना। उन्होंने छात्रों को दूसरों से नहीं खुद से प्रतिस्पर्धा करने की सलाह दी।

    एपिसोड 2 का सार यही रहा कि परीक्षा केवल अंकों की नहीं बल्कि जीवन को समझने की प्रक्रिया है। अलग अलग स्थान अलग अलग छात्र लेकिन एक ही उद्देश्य छात्रों को सुनना समझना और उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देना।

  • नीमच कंट्रोल रूम में दर्दनाक आत्महत्या हेड कॉन्स्टेबल ने सुसाइड नोट में खोले सिस्टम के राज

    नीमच कंट्रोल रूम में दर्दनाक आत्महत्या हेड कॉन्स्टेबल ने सुसाइड नोट में खोले सिस्टम के राज


    नीमच  /मध्यप्रदेश के नीमच जिले से पुलिस विभाग को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है जहां एक हेड कॉन्स्टेबल ने ड्यूटी पर रहते हुए जहर खाकर आत्महत्या कर ली। यह दर्दनाक घटना रविवार आठ फरवरी की बताई जा रही है। मृतक हेड कॉन्स्टेबल ने मरने से पहले चार पेज का सुसाइड नोट लिखा है जिसमें उसने अपने ही विभाग के एक आरआई पर गंभीर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। इस घटना के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और आला अधिकारी मामले की हर पहलू से जांच की बात कह रहे हैं।

    मृतक हेड कॉन्स्टेबल होशियार सिंह उम्र पचास वर्ष नीमच पुलिस लाइन कनावटी में रहते थे। जानकारी के अनुसार वह पिछले पांच दिनों से स्वास्थ्य कारणों के चलते अवकाश पर थे और सोमवार से दोबारा ड्यूटी जॉइन करने वाले थे। इसी बीच रविवार सुबह वह पुलिस लाइन पहुंचे और शाम के समय जिला पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचे। यहीं उन्होंने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया जिससे उनकी हालत अचानक बिगड़ गई।कंट्रोल रूम में मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। सूचना मिलते ही नीमच कैंट थाना प्रभारी नीलेश अवस्थी अन्य पुलिस स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचे और होशियार सिंह को तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि हेड कॉन्स्टेबल के पास से चार पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ है जो अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह सुसाइड नोट स्वयं होशियार सिंह ने लिखा था। इस पत्र में उन्होंने अपने विभाग के एक आरआई पर लगातार मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया है। पत्र में लिखा गया है कि उन्हें लंबे समय से दबाव अपमान और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा था जिससे वे पूरी तरह टूट चुके थे।

    सूत्रों के अनुसार विभागीय स्तर पर यह भी सामने आया है कि होशियार सिंह को पूर्व में एक बार सेवा से पृथक किया जा चुका था। इसके अलावा उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान चार बार विभागीय सजा भी दी गई थी। बताया जा रहा है कि अधिकतर सजाएं बिना सूचना लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और अन्य अनुशासनात्मक कारणों से जुड़ी थीं। पुलिस अब इस पहलू की भी गंभीरता से जांच कर रही है कि क्या इन्हीं कारणों से उन पर अतिरिक्त दबाव बनाया जा रहा था।

    नीमच के पुलिस अधीक्षक अंकित जायसवाल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जहर खाने से हालत बिगड़ने पर प्रधान आरक्षक को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों सहित पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच कराई जाएगी।इस घटना ने एक बार फिर पुलिस विभाग के भीतर कार्यरत कर्मचारियों के मानसिक दबाव और आंतरिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें जांच पर टिकी हैं कि सच्चाई क्या सामने आती है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।