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  • बाइक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल करना गैरकानूनी: इंदौर हाईकोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश

    बाइक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल करना गैरकानूनी: इंदौर हाईकोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश


    इंदौर । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के इंदौर खंडपीठ से एक महत्वपूर्ण और दिशा-निर्देशात्मक फैसला सामने आया है, जिसमें बाइक का सार्वजनिक परिवहन जैसे उपयोग पर स्पष्ट रूप से रोक लगाई गई है। न्यायालय ने कहा है कि धारा 66 के तहत किसी भी वाहन को बिना परमिट सार्वजनिक परिवहन के लिए इस्तेमाल करना अवैध है और ऐसे उपयोग को रोकना राज्य सरकार और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है।

    मामला यह है कि इंदौर शहर सहित पूरे प्रदेश में ओला, उबर, रैपिडो जैसी ट्रांसपोर्ट एग्रीगेटर कंपनियां दो-पहिया वाहनों बाइक का उपयोग सार्वजनिक परिवहन की तरह कर रही हैं, जबकि इन वाहनों के पास किसी भी प्रकार का पब्लिक ट्रांसपोर्ट परमिट नहीं है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ऐसे प्रयोग से न केवल कानून का उल्लंघन होता है, बल्कि सड़क सुरक्षा और यात्री संरक्षण के मानकों को भी खतरा होता है।

    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे कानून के तहत परमिट नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और बिना वैध अनुमति वाले वाहनों को सार्वजनिक परिवहन के रूप में उपयोग से रोकें। आदेश में यह भी कहा गया कि परिवहन विभाग को नियमों के अनुरूप परमिट जारी करने, मॉनिटरिंग और अनुपालन की प्रक्रिया को सशक्त बनाना होगा, ताकि कानून का सही ढंग से पालन हो सके।

    दरअसल, मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधान स्पष्ट हैं कि सार्वजनिक परिवहन के लिए वाहन का उपयोग तभी किया जा सकता है जब वह वैध परिवहन परमिट/लाइसेंस धारक हो। बिना परमिट वाहन को जनता के आवागमन में शामिल करना गैरकानूनी और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरे से भरा माना जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निजी वाहनों का सार्वजनिक परिवहन की तरह उपयोग कानून के तहत स्वीकार्य नहीं है, चाहे वह तकनीकी प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही क्यों न होता हो।

    स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग को आदेश दिया गया है कि वे ऐसी गतिविधियों पर निगरानी रखें और किसी भी निजी वाहन के बिना परमिट पब्लिक ट्रांसपोर्ट संचालन को रोका जाए। अदालत का यह आदेश राज्य में सार्वजनिक परिवहन सुरक्षा के मानकों की पूर्ति और सड़कों पर नियम-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जारी किया गया है।

    विशेष रूप से हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म इस तरह के वाहनों को सार्वजनिक परिवहन के रूप में संचालित करने की अनुमति चाहता है, तो उसे परिवहन नियमों के अनुकूल वैध परमिट और लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इलेक्ट्रॉनिक और ऐप-आधारित मोबिलिटी सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। अदालत की यह टिप्पणी कानून-व्यवस्था और सड़क यातायात नियमों के स्पष्ट पालन को सुनिश्चित करने के प्रयासों का हिस्सा है।

  • महिला से मारपीट मामले को लेकर कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला: पीसी शर्मा बोले आरोपी बीजेपी के, सच छुपाने की कोशिश

    महिला से मारपीट मामले को लेकर कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला: पीसी शर्मा बोले आरोपी बीजेपी के, सच छुपाने की कोशिश


    भोपाल । मध्यप्रदेश के सीधी जिले में महिला के साथ मारपीट की घटना को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री श्री पीसी शर्मा ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी इस मामले में झूठ फैला रही है और वास्तविक आरोपियों को कांग्रेसी बताकर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।

    श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। एक महिला को डंडों से पीटा जा रहा है और मौके पर मौजूद लोग ‘मारो-मारो’ के नारे लगा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की घटनाओं में शामिल लोग भाजपा से जुड़े हुए हैं, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए उन्हें जबरन कांग्रेस से जोड़ा जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि ‘लाड़ली बहन’ और ‘लाड़ला भैया’ जैसी योजनाओं के दावे करने वाली सरकार में महिलाओं के साथ खुलेआम मारपीट हो रही है, जो बेहद शर्मनाक है। कांग्रेस नेता ने सरकार से मांग की कि दोषियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए, उन्हें पार्टी से निष्कासित किया जाए और जेल भेजा जाए।

    पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में बलात्कार, मारपीट और अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। भाजपा केवल भ्रम फैलाने का काम कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि ऐसे अहंकारी और हिंसक नेता उसी पार्टी से जुड़े हुए हैं।

    नकल माफिया पर गंभीर आरोप

    पीसी शर्मा ने बोर्ड परीक्षाओं और नकल माफिया का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश में वर्षों से संगठित रूप से नकल कराई जा रही है। हर साल पेपर लीक होते हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने ग्वालियर-चंबल, विंध्य और निमाड़ अंचल को नकल माफिया का बड़ा केंद्र बताते हुए कहा कि इसका खामियाजा प्रदेश के छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।

    निगम-मंडल नियुक्तियों पर सवाल
    उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में निगम और मंडल के पद भ्रष्टाचार की राजनीति के लिए भरे जाते हैं। बिना लेन-देन के कोई नियुक्ति नहीं होती। जिला प्रभारियों की नियुक्ति भी संभावित नुकसान को नियंत्रित करने के उद्देश्य से की गई है। पार्टी के भीतर पदों को लेकर गुटबाजी और टकराव की स्थिति बनी हुई है, जिसमें असली कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है।

    विजय शाह प्रकरण पर बयान
    विजय शाह मामले को लेकर पीसी शर्मा ने कहा कि उन्हें न्यायालय से बड़ी उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है और उन्हें विश्वास है कि न्याय होगा। उन्होंने कहा कि चार बार माफी मांगने के बावजूद विजय शाह को अपने पद से हाथ धोना ही पड़ेगा।

    संघ और जनसंख्या बयान पर प्रतिक्रिया

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख के तीन बच्चों वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी चरम पर है, रोजगार के अवसर नहीं हैं और ऐसे समय में जनसंख्या बढ़ाने की बात करना चिंताजनक है। उन्होंने संघ की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए इसे असंवेदनशील बताया।

    BLO और SIR को लेकर आरोप

    पीसी शर्मा ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी की जा रही है। जबरन नाम काटे और जोड़े जा रहे हैं। BLO पर दबाव बनाया जा रहा है और उनका वेतन भी रोका जा रहा है। उन्होंने इसे भाजपा की सुनियोजित साजिश करार दिया। कांग्रेस ने इन सभी मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही तय करने और पारदर्शी कार्रवाई की मांग की है।

  • 8वें वेतन आयोग के नाम पर साइबर ठगी का नया जाल: APK फाइल से खाली हो सकते हैं खाते, पुलिस ने जारी की चेतावनी

    8वें वेतन आयोग के नाम पर साइबर ठगी का नया जाल: APK फाइल से खाली हो सकते हैं खाते, पुलिस ने जारी की चेतावनी


    इंदौर । मध्यप्रदेश में साइबर अपराध के मामलों में लगातार नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। जहां एक ओर पुलिस साइबर अपराधों को लेकर सतर्कता और जागरूकता बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर साइबर ठग भी सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाने के लिए नए हथकंडे अपना रहे हैं। ताजा मामला 8वें वेतन आयोग में वेतन वृद्धि के नाम पर की जा रही साइबर ठगी से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर इंदौर क्राइम ब्रांच पुलिस को विधिवत एडवाइजरी जारी करनी पड़ी है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों के मोबाइल फोन पर “8वें वेतन आयोग में आपकी सैलरी कितनी होगी” जैसे आकर्षक संदेश प्राप्त हो रहे हैं। इन संदेशों के साथ एक APK फाइल भी भेजी जा रही है। जैसे ही कोई व्यक्ति इस फाइल को डाउनलोड करता है, उसका मोबाइल फोन साइबर अपराधियों के नियंत्रण में आ सकता है, जिससे बैंक अकाउंट, यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों से पैसे निकाले जाने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाता है।

    इंदौर क्राइम ब्रांच ने स्पष्ट किया है कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों की जिज्ञासा और वेतन वृद्धि की उम्मीद का दुरुपयोग किया जा रहा है। APK फाइल डाउनलोड होते ही मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारियां, जैसे बैंक डिटेल्स, ओटीपी और पासवर्ड साइबर अपराधियों तक पहुंच सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप पीड़ित का बैंक खाता पूरी तरह खाली हो सकता है।

    इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त एडिशनल डीसीपी श्री राजेश दंडोतिया ने बताया कि यह एक नया और खतरनाक साइबर फ्रॉड है, जिससे बचाव के लिए जनजागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान नंबर या स्रोत से प्राप्त APK फाइल को डाउनलोड न करें और न ही ऐसे संदेशों पर विश्वास करें।

    पुलिस द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि वेतन आयोग, वेतन वृद्धि या अन्य शासकीय लाभों से जुड़ी कोई भी आधिकारिक जानकारी केवल सक्षम शासकीय विभागों और अधिकृत पोर्टलों के माध्यम से ही साझा की जाती है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की फाइल या लिंक मोबाइल पर भेजे जाने की प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध मानी जानी चाहिए।

    क्राइम ब्रांच ने यह भी सलाह दी है कि यदि किसी व्यक्ति को इस प्रकार का संदेश प्राप्त होता है, तो वह तुरंत अपने नजदीकी पुलिस थाने या साइबर क्राइम सेल को इसकी सूचना दे। समय रहते सतर्कता बरतने से न केवल आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है, बल्कि साइबर अपराधियों तक पहुंचने में भी पुलिस को सहायता मिल सकती है। पुलिस प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे डिजिटल लेन-देन में सावधानी बरतें, किसी भी लालच भरे संदेश से दूर रहें और साइबर सुरक्षा नियमों का पालन कर स्वयं को सुरक्षित रखें।

  • सोने-चांदी के भाव में तेज उछाल भोपाल में आज के रेट में बड़ी बढ़त..

    सोने-चांदी के भाव में तेज उछाल भोपाल में आज के रेट में बड़ी बढ़त..


    नई दिल्ली :देशभर में सोने और चांदी के बाजार में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। खासकर इस शादी के सीजन में सोने और चांदी के भाव ने निवेशकों और खरीदारों की ध्यान खींचा है। पिछले दो हफ्तों में गोल्ड मार्केट ने ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की थी। इस गिरावट के दौरान सोने का भाव पिछले एक हफ्ते में 13 हजार रुपए सस्ता हुआ जबकि चांदी 94 हजार रुपए तक सस्ती हुई।

    इसी बीच आज बाजार खुलते ही सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आई है। भोपाल में आज 24 कैरेट सोने के दाम 157,610 रुपए प्रति 10 ग्राम दर्ज किए गए हैं। वहीं चांदी का भाव 261,380 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। यह बढ़त निवेशकों और खरीदारों के लिए राहत की खबर है क्योंकि पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद बाजार में हड़कंप मचा हुआ था।

    देशभर में आज सोने का भाव 157,530 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 260,040 रुपए प्रति किलो पर कारोबार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उतार-चढ़ाव वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव और घरेलू मांग में वृद्धि के कारण हो रहा है। निवेशक इस समय सोने और चांदी में तेजी से ट्रेडिंग कर रहे हैं और खरीदारी के लिए सावधानी बरत रहे हैं।

    सोने और चांदी के बाजार में निवेश करते समय हॉलमार्क पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। भारत में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स BIS हॉलमार्क निर्धारित करता है। हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि सोना शुद्ध और मिलावट रहित हो। 24 कैरेट सोने में विशेष अंक होते हैं जिन्हें देखकर खरीदार असली सोना पहचान सकते हैं। बिना हॉलमार्क की गहने खरीदना जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि इसमें मिलावट होने की संभावना रहती है।

    विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक या खरीदार बाजार की हलचल को देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें। सोने और चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव आम बात है और यह वैश्विक आर्थिक स्थिति, डॉलर के भाव और मांग पर निर्भर करता है। आज की बढ़त के बाद निवेशकों में थोड़ी राहत है और खरीदार सोने-चांदी की कीमतों को देखकर खरीदारी के अवसर तलाश रहे हैं।

    भोपाल में आज के रेट के अनुसार यदि आप सोने की खरीदी का विचार कर रहे हैं तो 24 कैरेट सोने का भाव 157,610 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 261,380 रुपए प्रति किलो है। यह कीमतें स्थानीय बाजार में थोड़ी अलग हो सकती हैं। इसके अलावा गहने खरीदते समय हमेशा हॉलमार्क जांचना और शुद्धता पर ध्यान देना जरूरी है।

    इस प्रकार इस समय सोने और चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है। निवेशक और खरीदार दोनों को सावधानी बरतते हुए बाजार की खबरों पर नजर रखनी चाहिए। खरीदारी करने से पहले कीमतों और शुद्धता की पुष्टि करना जरूरी है। बाजार में आज की तेजी ने निवेशकों के बीच नई उम्मीद जगाई है और खरीदारों को फैसला लेने के लिए अवसर दिया है।

  • इंदौर जिला न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला: गर्भस्थ शिशु को भी आश्रित मानते हुए मुआवजे का आदेश

    इंदौर जिला न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला: गर्भस्थ शिशु को भी आश्रित मानते हुए मुआवजे का आदेश

    इंदौर । इंदौर जिला न्यायालय ने सड़क दुर्घटना से संबंधित एक प्रकरण में अत्यंत संवेदनशील, मानवीय एवं दूरदर्शी निर्णय पारित करते हुए न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। न्यायालय ने आरक्षक की मृत्यु के उपरांत मुआवजा निर्धारण करते समय उसकी पत्नी के गर्भ में पल रहे अजन्मे शिशु को भी मृतक का आश्रित मानते हुए मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया है।

    यह मामला सीहोर जिले के जवरा थाना क्षेत्र में घटित एक भीषण सड़क दुर्घटना से संबंधित है। जानकारी के अनुसार आरक्षक सतीश, पिता कैलाश रुडेलें, जो उस समय झाबुआ जिले में पदस्थ थे, कार से यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार एवं लापरवाही से चल रहे एक ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। दुर्घटना की गंभीरता इतनी अधिक थी कि आरक्षक सतीश सहित एक अन्य व्यक्ति की मौके पर ही मृत्यु हो गई।

    दुर्घटना के समय मृतक की पत्नी रेखा सात माह की गर्भवती थीं। पति की असमय मृत्यु के बाद परिवार पर गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट उत्पन्न हो गया। इसके पश्चात पीड़ित परिवार की ओर से न्यायालय में मुआवजा प्राप्त करने हेतु दावा याचिका प्रस्तुत की् की गई।

    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस तथ्य को अत्यंत गंभीरता से लिया कि मृतक की पत्नी गर्भवती थी और गर्भ में पल रहा शिशु भी मृतक पर पूर्ण रूप से आश्रित माना जाना चाहिए। इस आधार पर न्यायालय ने गर्भस्थ शिशु को भी आश्रितों की श्रेणी में सम्मिलित करते हुए मुआवजे का निर्धारण किया।

    अधिवक्ता श्री राजेश खंडेलवाल के अनुसार, न्यायालय ने मृतक की पत्नी, दो नाबालिग बच्चों, माता, गर्भस्थ शिशु तथा साथ रहने वाले छोटे भाई को आश्रित मानते हुए कुल 50 लाख 88 हजार रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया है। इसके अतिरिक्त 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज जोड़ने पर यह राशि लगभग 60 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

    कानूनी विशेषज्ञों ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह फैसला गर्भस्थ शिशु के अधिकारों को न्यायिक मान्यता देने की दिशा में एक सशक्त कदम है। यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा। वहीं पीड़ित परिवार ने न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय उनके जीवन को पुनः स्थिरता देने में सहायक सिद्ध होगा। यह फैसला न केवल न्याय की भावना को सुदृढ़ करता है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में स्थापित हुआ है।

  • 350 करोड़ का मास्टरप्लान: इंदौर को मिलने जा रहा है नया एलिवेटेड कॉरिडोर 15 फरवरी से रखी जाएगी नींव जानिए क्या है पूरा रूट मैप

    350 करोड़ का मास्टरप्लान: इंदौर को मिलने जा रहा है नया एलिवेटेड कॉरिडोर 15 फरवरी से रखी जाएगी नींव जानिए क्या है पूरा रूट मैप


    नई दिल्ली। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की ‘लाइफलाइन’ कहे जाने वाले एबी रोड पर रोजाना सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों में शुमार पलासिया, गीता भवन और नवलखा जैसे क्षेत्रों में लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम और लंबे सिग्नलों से अब जल्द ही मुक्ति मिलने वाली है। इंदौर के बुनियादी ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है, जिसके तहत LIG चौराहे से लेकर नवलखा तक लगभग 7 किलोमीटर लंबा एक भव्य एलिवेटेड कॉरिडोर आकार लेने जा रहा है। करीब 350 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही शहर की रफ्तार को एक नई दिशा मिलेगी।

    इस कॉरिडोर की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में राजीव गांधी चौराहे से LIG तक का जो सफर भारी ट्रैफिक के कारण 40 से 45 मिनट ले लेता है, इस कॉरिडोर के बनने के बाद वह महज 15 मिनट में सिमट जाएगा। यह न केवल लोगों के कीमती समय की बचत करेगा, बल्कि ईंधन की खपत और प्रदूषण को कम करने में भी मील का पत्थर साबित होगा। यह प्रस्तावित कॉरिडोर LIG चौराहे से शुरू होकर गिटार चौराहा, पलासिया, गीता भवन, शिवाजी वाटिका और GPO जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों के ऊपर से होते हुए सीधे नवलखा तक पहुंचेगा।

    प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं पर गौर करें तो इस पूरे रूट पर तीन विशाल रोटरी बनाई जाएंगी, जो ट्रैफिक के सुगम प्रबंधन के लिए LIG, शिवाजी वाटिका और नवलखा पर स्थित होंगी। इसके अलावा, गिटार चौराहा और व्हाइट चर्च रोड जैसे महत्वपूर्ण जंक्शनों पर कनेक्टिंग आर्म्स (रैम्प) दिए जाएंगे, ताकि आसपास की कॉलोनियों और अंदरूनी सड़कों से आने वाला ट्रैफिक भी बिना किसी बाधा के सीधे कॉरिडोर पर चढ़ सके। हालांकि, पहले इसे 6 लेन बनाने का विचार था, लेकिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद इसे 4 लेन करने का निर्णय लिया गया है।

    दिलचस्प बात यह है कि यह प्रोजेक्ट पिछले करीब 4 सालों से फाइलों और तकनीकी उलझनों में अटका हुआ था। साल 2009 में केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद कई बाधाएं आईं, लेकिन अब पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग ने इसे धरातल पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली है। वर्तमान में प्रस्तावित रूट पर मिट्टी की जांच (Soil Testing) का काम तेजी से चल रहा है और 15 फरवरी से कॉरिडोर की नींव रखने का मुख्य काम शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस विशाल निर्माण कार्य के दौरान ट्रैफिक को व्यवस्थित रखने के लिए विशेष मैनेजमेंट प्लान भी तैयार किया गया है।

    सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो अगले 2 सालों के भीतर यह कॉरिडोर बनकर तैयार हो जाएगा। इंदौर के विकास में यह एलिवेटेड रोड न केवल एक नई पहचान जोड़ेगी, बल्कि शहर के बढ़ते विस्तार और भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को पूरा करने में रीढ़ की हड्डी साबित होगी।

  • कलयुगी पति का खौफनाक चेहरा: कुल्हाड़ी से पत्नी की निर्मम हत्या, शव झाड़ियों में फेंककर फरार

    कलयुगी पति का खौफनाक चेहरा: कुल्हाड़ी से पत्नी की निर्मम हत्या, शव झाड़ियों में फेंककर फरार


    पन्ना । मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। शाहनगर थाना अंतर्गत ग्राम खमतरा में एक कलयुगी पति ने अपनी ही पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी। इस जघन्य हत्याकांड के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।

    घटना ग्राम खमतरा के रामपुर खजुरी हार क्षेत्र की बताई जा रही है। यहां 40 वर्षीय मीरा बाई का शव 8 फरवरी को झाड़ियों में संदिग्ध अवस्था में मिला था। सूचना मिलते ही शाहनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि महिला की हत्या धारदार हथियार से की गई है।

    पुलिस जांच आगे बढ़ी तो चौंकाने वाला सच सामने आया। मृतका की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उसके पति निर्भय सिंह राठौर ने ही की थी। आरोपी ने आपसी विवाद के चलते कुल्हाड़ी से पत्नी पर ताबड़तोड़ वार किए, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी ने साक्ष्य मिटाने के इरादे से शव को झाड़ियों में फेंक दिया और फरार हो गया।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वंदना सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी पति निर्भय सिंह राठौर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक तौर पर हत्या का कारण आपसी कलह बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं से मामले की गहन जांच कर रही है।

    इस निर्मम हत्या की खबर सामने आने के बाद से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी का व्यवहार पहले भी अक्सर आक्रामक रहता था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि वह इस हद तक चला जाएगा। पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ जारी है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। यह घटना एक बार फिर घरेलू हिंसा और रिश्तों में बढ़ती असहिष्णुता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

  • ग्वालियर में रेबीज का कहर 6 साल के मासूम समेत तीन की मौत अधूरा इलाज और बढ़ते आवारा कुत्ते चिंता का सबब

    ग्वालियर में रेबीज का कहर 6 साल के मासूम समेत तीन की मौत अधूरा इलाज और बढ़ते आवारा कुत्ते चिंता का सबब


    ग्वालियर: में रेबीज का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है फरवरी 2026 के शुरुआती दिनों में ही छह साल के मासूम समेत तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इन मौतों का कारण अधूरा इलाज गलत मेडिकल सलाह और आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को बताया जा रहा है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि समय पर पूरा वैक्सीनेशन लेने से रेबीज जैसी घातक बीमारी को रोका जा सकता है।

    दतिया जिले के हंस प्रजापति का मामला सबसे दुखद है। छह वर्षीय हंस को कुत्ते ने काटा था। कमला राजा शासकीय अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन के तीन डोज लगाए जा चुके थे। डॉक्टरों ने चौथा डोज अस्पताल में ही कराने की सलाह दी थी। परिजन बच्चे को घर ले गए और कुछ ही समय बाद उसकी हालत बिगड़ गई। स्कूल से लौटने के बाद उसके मुंह से लार बहने लगी, जो रेबीज का गंभीर लक्षण है। इसके बाद मासूम की मौत हो गई।

    पहली मौत 4 फरवरी को दर्ज की गई। ग्वालियर के बगिया इलाके के 48 वर्षीय किरण लालवानी को जनवरी में आवारा कुत्ते ने काटा था। परिजनों के अनुसार स्थानीय क्लीनिक में डॉक्टर ने केवल टिटनेस का इंजेक्शन लगाया और एंटी-रेबीज वैक्सीन देने से मना कर दिया। लगभग एक महीने बाद किरण में रेबीज के क्लासिक लक्षण सामने आए। न्यू जेएएच में भर्ती कराने के दौरान उनकी मौत हो गई। इस मामले में डॉक्टर के खिलाफ लापरवाही का केस भी दर्ज किया गया।

    दूसरी मौत टीकमगढ़ जिले की 65 वर्षीय महिला की हुई, जिसे सियार ने काटा था। समय पर एंटी-रेबीज इलाज न मिलने के कारण संक्रमण तेजी से फैला। गंभीर हालत में महिला को ग्वालियर रेफर किया गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और रेफरल सिस्टम की कमजोरी को उजागर किया।

    हालिया तीन मौतों ने ग्वालियर में डॉग बाइट मामलों की गंभीरता को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहर में हर साल हजारों डॉग बाइट केस सामने आते हैं लेकिन स्ट्रीट डॉग कंट्रोल, स्टरलाइजेशन और जन-जागरूकता की रफ्तार धीमी है। रेबीज एक बार फैलने के बाद 100 प्रतिशत घातक है लेकिन समय पर पूरा वैक्सीनेशन लेने से इसे रोका जा सकता है। विशेषज्ञों ने आम जनता को कुत्ते या किसी भी संदिग्ध जानवर के काटने के बाद घाव को साबुन और पानी से तुरंत धोने अस्पताल पहुंचने और एंटी-रेबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स लेने की सलाह दी है। बच्चों को अकेले बाहर न छोड़ने और लापरवाही न करने की चेतावनी भी दी गई है।

    मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों और प्रशासन की उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सिस्टम और समाज दोनों नहीं सतर्क हुए तो रेबीज और ज्यादा जानें ले सकता है। लोगों में जागरूकता और समय पर इलाज की समझ ही इस जानलेवा बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।

  • ट्रेन में मारपीट मामले में सीटीआई निलंबित, अलग घटना में रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर पर चाकू से हमला

    ट्रेन में मारपीट मामले में सीटीआई निलंबित, अलग घटना में रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर पर चाकू से हमला


    जबलपुर । मध्यप्रदेश में रेलवे व्यवस्था से जुड़े दो गंभीर घटनाक्रम सामने आए हैं। पहली घटना ट्रेन में खानपान की गुणवत्ता को लेकर हुए विवाद से संबंधित है जिसमें जांच के बाद सीटीआई को निलंबित कर दिया गया है। वहीं दूसरी घटना में रेलवे के एक सीनियर सेक्शन इंजीनियर पर सार्वजनिक स्थान पर चाकू से हमला किए जाने का मामला दर्ज किया गया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार बांद्रा पटना एक्सप्रेस के एम-2 कोच में खानपान की सामग्री की गुणवत्ता को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। यह घटना नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन के समीप की बताई जा रही है। ड्यूटी पर तैनात सीटीआई भगवान सिंह ठाकुर ने पेंट्री कार में उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता पर आपत्ति दर्ज की थी। इस दौरान पेंट्री कार मैनेजर अंशु सिंह के साथ विवाद बढ़ गया जो बाद में मारपीट में तब्दील हो गया।

    घटना की शिकायत के बाद जबलपुर जीआरपी द्वारा मामला पंजीबद्ध कर जांच प्रारंभ की गई। जांच में डिप्टी सीटीआई भगवान सिंह ठाकुर को दोषी पाया गया जिसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वहीं पेंट्री कार संचालक मैनेजर अंशु सिंह पर भी नियमानुसार कार्रवाई करते हुए 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा और मर्यादित आचरण से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    इधर एक अन्य घटना में रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर पर दिनदहाड़े चाकू से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। यह घटना बाजार क्षेत्र स्थित विधा मार्केट में हुई जहां अज्ञात आरोपी ने शराब पीने के लिए पैसे नहीं देने पर अधिकारी पर चाकू से हमला कर दिया। पूरी वारदात वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    हमले में घायल सीनियर सेक्शन इंजीनियर को उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की तलाश की जा रही है। अपर पुलिस अधीक्षक श्री सूर्यकांत शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

  • विजय शाह विवाद सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा बोले मंत्री पद से हाथ धोना पड़ेगा

    विजय शाह विवाद सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा बोले मंत्री पद से हाथ धोना पड़ेगा


    मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उनका विवादित बयान कर्नल सोफिया कुरैशी पर 2025 में दिया गया था और अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। आज सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अहम सुनवाई हो रही है। यह विवाद ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शाह द्वारा कथित आपत्तिजनक बयान देने से शुरू हुआ था। आरोप है कि यह बयान सेना अधिकारी की गरिमा को ठेस पहुंचाने और सांप्रदायिक घृणा फैलाने वाला था।

    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पहले FIR दर्ज करने का आदेश दिया था जिसे शाह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने SIT गठित की और अगस्त 2025 में जांच पूरी हुई। जनवरी 2026 में कोर्ट ने सरकार को दो हफ्ते में अभियोजन मंजूरी पर फैसला लेने को कहा था लेकिन अब तक मंजूरी लंबित है। कोर्ट ने पहले ही शाह की माफी को देर से देने के कारण खारिज कर दिया था और कहा कि अब मामले में राहत मिलना मुश्किल है।

    पूर्व कानून मंत्री और कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने सुनवाई से पहले बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि विजय शाह को अब मंत्री पद से हाथ धोना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि शाह ने चार बार माफी मांगी लेकिन कोर्ट अब राहत नहीं देगी। पीसी शर्मा ने इस मामले को केवल राजनीतिक नहीं बल्कि महिलाओं की गरिमा और सेना अधिकारी के सम्मान का मुद्दा बताया। उनका कहना था कि सरकार के मंत्री द्वारा दिया गया बयान महिलाओं और सेना के सम्मान के खिलाफ था और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।

    सिंह ने कहा कि कांग्रेस इसे महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा का मुद्दा बनाकर जनता तक पहुंचाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार योजनाओं के नाम पर केवल राजनीतिक दावे कर रही है लेकिन वास्तविकता में अपने मंत्री को बचा रही है। कांग्रेस नेता इसे लाडली बहना जैसी योजनाओं की पोल खोलने का अवसर मान रहे हैं।

    SIT रिपोर्ट में धारा 196 BNS के तहत केस मजबूत पाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चाहे सरकार मंजूरी दे या न दे, केस आगे बढ़ेगा। CJI की बेंच ने सरकार से त्वरित फैसला लेने को कहा है। इससे भाजपा सरकार पर दबाव बढ़ गया है। यदि अभियोजन मंजूरी मिलती है तो शाह पर मुकदमा चलेगा और यह उनके राजनीतिक करियर को प्रभावित करेगा। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में उनके प्रभाव को देखते हुए BJP सतर्क है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट की सख्ती से सरकार को अब निर्णय लेना अनिवार्य होगा।

    राजनीतिक स्तर पर यह मामला विपक्ष को अवसर प्रदान कर रहा है। कांग्रेस इसे चुनावी मुद्दा बना सकती है और महिला सम्मान तथा सेना की गरिमा का संदेश जनता तक पहुंचा सकती है। वहीं भाजपा के लिए यह चुनौती बनी हुई है कि वह मंत्री को बचाने की कोशिश में राजनीतिक दबाव और न्यायिक प्रक्रिया में संतुलन बनाए।आज की सुनवाई इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इसका नतीजा न केवल विजय शाह के राजनीतिक भविष्य पर प्रभाव डालेगा बल्कि मध्य प्रदेश में महिला सुरक्षा, सेना सम्मान और राजनीतिक नैतिकता को लेकर बहस को भी नया मोड़ देगा।