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  • ईरान का ट्रंप को साफ संदेश: ‘ना डरते हैं, ना किसी का हुक्म मानेंगे’

    ईरान का ट्रंप को साफ संदेश: ‘ना डरते हैं, ना किसी का हुक्म मानेंगे’


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, और फिलहाल युद्ध के खतरे को पूरी तरह टाला नहीं जा सका है। बातचीत की कोशिशों के बीच रविवार को ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना रुख फिर स्पष्ट कर दिया। ईरान ने कहा कि वह अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को किसी भी दबाव के बावजूद नहीं छोड़ेगा और किसी अन्य देश के आदेश में काम नहीं करेगा।

    तेहरान में एक सार्वजनिक मंच से बोलते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान अपनी परमाणु नीति किसी से डरकर नहीं बदलेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और दर्शकों के सामने कहा कि यूरेनियम संवर्धन उनके लिए गैर-समझौते वाला मुद्दा है।अराघची ने कहा, “हम संवर्धन क्यों करते हैं और इसे छोड़ने से इंकार क्यों करते हैं, भले ही युद्ध का खतरा हो? क्योंकि किसी को भी हम पर हुक्म चलाने का अधिकार नहीं है।”

    अमेरिका पर भरोसा नहीं

    ईरानी विदेश मंत्री ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को दबाव बनाने की कमजोर रणनीति बताया। अराघची ने कहा, “क्षेत्र में उनकी सैन्य तैनाती हमें डराती नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। अराघची ने बताया कि कुछ संकेत अमेरिकी गंभीरता दिखाते हैं, जबकि कई संकेत इसे झूठा साबित करते हैं। उनके मुताबिक, ईरान के खिलाफ जारी प्रतिबंध और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां अमेरिका की गंभीरता पर सवाल खड़े करती हैं।

    समझौते के लिए ईरान की शर्तें

    अराघची ने कहा कि ईरान सभी संकेतों का मूल्यांकन करेगा। उन्होंने उल्लेख किया कि अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत समझौते की राह खोल सकती है, लेकिन केवल तभी जब अमेरिकी मांगें वास्तविक और न्यायसंगत हों। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका का दृष्टिकोण सम्मानजनक और आपसी हितों पर आधारित होगा, तभी समझौता संभव है।”

  • MP में दो दिन पड़ेगी कंपकंपाती सर्दी, फिर चढ़ेगा पारा, जाने आगे कैसा रहेगा मौसम ?

    MP में दो दिन पड़ेगी कंपकंपाती सर्दी, फिर चढ़ेगा पारा, जाने आगे कैसा रहेगा मौसम ?


    भोपाल। मध्य प्रदेश में फिलहाल सर्दी का असर बरकरार रहेगा। अगले दो दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड महसूस की जाएगी। खासकर ग्वालियर-चंबल, रीवा और शहडोल संभाग के शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना रहेगा। इस समय प्रदेश में सबसे कम तापमान कटनी और शहडोल में दर्ज किया जा रहा है। वहीं, भोपाल और इंदौर में भी पारे में गिरावट आई है।

    बीती रात प्रदेश के 13 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे रिकॉर्ड किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 10.4 डिग्री, इंदौर में 10.6 डिग्री, ग्वालियर में 11.2 डिग्री, उज्जैन में 12 डिग्री और जबलपुर में 11.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।

    प्रदेश के सबसे ठंडे इलाके कटनी का करौंदी और शहडोल का कल्याणपुर रहे। करौंदी में न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री और कल्याणपुर में 6.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा पचमढ़ी, उमरिया और खजुराहो में 8.4 डिग्री, राजगढ़ में 8.5 डिग्री, शिवपुरी में 9 डिग्री, रीवा और मलाजखंड में 9.1 डिग्री, नौगांव में 9.5 डिग्री, मंडला में 9.6 डिग्री और दतिया में 9.8 डिग्री तापमान रहा।

    रविवार सुबह ग्वालियर-चंबल अंचल में हल्का कोहरा देखने को मिला। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल कोहरा और बारिश की कोई संभावना नहीं है। दिन के समय तेज धूप खिलेगी, लेकिन भोपाल, सीहोर, गुना, ग्वालियर, भिंड, मुरैना सहित कई जिलों में सर्द हवाएं चलती रहेंगी। देर रात और तड़के ठंड का असर ज्यादा रहेगा।

    आगे कैसा रहेगा मौसम

    10 फरवरी: हल्का कोहरा रहेगा। बारिश का कोई अलर्ट नहीं, लेकिन ठंड का असर ज्यादा बना रहेगा। 11 फरवरी: कई जिलों में हल्के से मध्यम स्तर का कोहरा छा सकता है। इस दिन भी बारिश की संभावना नहीं है। 12 फरवरी से बदलेगा मिज़ाज मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 9 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है, जिसका असर मध्य प्रदेश में भी देखने को मिलेगा। 12 फरवरी से मावठा गिरने का अनुमान है। हालांकि, अगले पांच दिनों तक प्रदेश में बारिश या ओलावृष्टि की संभावना नहीं जताई गई है।

  • महाशिवरात्रि 2026: महादेव क्यों पहनते हैं सांपों की माला? वासुकी नाग से जुड़ी कथा और ज्योतिषीय मान्यता

    महाशिवरात्रि 2026: महादेव क्यों पहनते हैं सांपों की माला? वासुकी नाग से जुड़ी कथा और ज्योतिषीय मान्यता


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना के लिए शुभ होता है और मान्यता है कि इस दिन शिव पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है तथा घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।भगवान शिव का स्वरूप रहस्यमयी और अलौकिक है। जहां अन्य देवता स्वर्ण आभूषण धारण करते हैं, वहीं महादेव भस्म, रुद्राक्ष और सांप को अपने आभूषण के रूप में अपनाते हैं। इसी कारण शिव को ‘नागेश्वर’ भी कहा जाता है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, नागराज वासुकी भगवान शिव के परम भक्त थे और हमेशा उनके समीप रहना चाहते थे। समुद्र मंथन के दौरान जब देवताओं और असुरों ने समुद्र से अमृत और कई रत्नों के साथ-साथ हलाहल विष निकाला, तो उसका प्रभाव पृथ्वी पर भारी पड़ने लगा। इस विष को खत्म करने के लिए भगवान शिव ने अपने कंठ में हलाहल विष पी लिया, जिससे उनका शरीर जलने लगा। इस संकट की घड़ी में वासुकी ने भी महादेव का साथ दिया और विष के प्रभाव को सहने में उनकी मदद की। वासुकी की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें अपने गले में धारण करने का वरदान दिया और तभी से वासुकी अमर हो गए। यही कारण है कि भगवान शिव अपने गले में सांपों की माला धारण करते हैं।

    शिव और नाग के इस संबंध का उल्लेख शिव पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। इन ग्रंथों में शिव-नाग की कथा का विस्तार से वर्णन है और इसे भक्तों के लिए प्रेरणास्रोत माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शिव के साथ नाग की पूजा करने से कालसर्प दोष और पितृ दोष से राहत मिलती है। खासकर महाशिवरात्रि या सोमवार के दिन चांदी के नाग-नागिन की जोड़ी अर्पित करने से राहु-केतु शांत होते हैं और जीवन में बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

    महाशिवरात्रि के दिन भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, और बेलपत्र अर्पित करते हैं। वहीं नाग-नागिन की पूजा भी विशेष रूप से की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इससे जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सुरक्षा बनी रहती है। इस महापर्व के दिन भक्त विशेष व्रत रखते हैं और रात भर जागरण करके शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। महाशिवरात्रि के दौरान शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और शिव-प्रसाद का आयोजन होता है, जिससे भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।

  • Aamlaki Ekadashi 2026 : फरवरी में आमलकी एकादशी कब? ये हर पाप से मुक्ति का दिन, काशी के पंडित से जानें तरीका

    Aamlaki Ekadashi 2026 : फरवरी में आमलकी एकादशी कब? ये हर पाप से मुक्ति का दिन, काशी के पंडित से जानें तरीका


    नई दिल्ली । इस एकादशी पर व्रत से सभी पापों का नाश होता है. आंवले के पेड़ की पूजा का विधान है. आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जानते हैं. लोकल 18 ने इस बारे में काशी के पंडित संजय उपाध्याय से बात की. वे बताते हैं कि भगवान विष्णु की पूजा के दौरान उन्हें आंवले का फल भी जरूर अर्पण करना चाहिए. इससे मनोवांछित मुराद पूरी होती है. आमलकी एकादशी व्रत विधि वाराणसी. सनातन धर्म में एकादशी के व्रत का विशेष महत्त्व है. हर महीने में दो एकादशी का व्रत होता है पहला कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है. फरवरी महीने में भी दो एकादशी के व्रत हैं

    . इसी महीने में आमलकी एकादशी भी पड़ रही है. इस एकादशी के व्रत से सभी पापों का नाश होता है. फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जानते हैं. आमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का निवास होता है. इसलिए इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा से भगवान विष्णु के पूजन का फल मिलता है. आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जानते हैं. लोकल 18 से बात करते हुए काशी के ज्योतिषाचार्य पंडित संजय उपाध्याय बताते हैं कि 26 फरवरी को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा.


    क्या है पूजा का शुभ समय
    आमलकी एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए. उसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए. सनातन वैदिक पंचांग के अनुसार, इस दिन पूजा के लिए सुबह 6 बजकर 15 मिनट से लेकर 9 बजकर 40 मिनट तक का समय बेहद शुभ है. इस समय में भगवान विष्णु की पूजा के दौरान उन्हें आंवले का फल भी जरूर अर्पण करना चाहिए. इससे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.
    बाघ को मनुष्य योनी
    पंडित संजय उपाध्याय बताते हैं कि इस व्रत के प्रभाव से दैवत्य की प्राप्ति होती है. कथाओं के मुताबिक, इस व्रत के प्रभाव से ही व्याघ्र (बाघ) को मनुष्य की योनि प्राप्त हुई थी. इस व्रत से मनुष्य की आर्थिक समस्याएं भी दूर होती हैं और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद उन्हें मिलता है. रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ माता गौरा का गवना कराते हैं. इस दौरान बाबा विश्वनाथ अपने भक्तों के साथ जमकर होली खेलते हैं. काशी में इस दिन से शुरू हुआ रंगोत्सव होली तक चलता है. सदियों से यह परम्परा चली आ रही है.
  • होली पर यात्रियों को बड़ी सौगात, मध्य प्रदेश से चलेंगी स्पेशल ट्रेनें; इंदौर-दिल्ली ट्रेन हिसार तक बढ़ी

    होली पर यात्रियों को बड़ी सौगात, मध्य प्रदेश से चलेंगी स्पेशल ट्रेनें; इंदौर-दिल्ली ट्रेन हिसार तक बढ़ी


    नई दिल्ली। होली के त्योहार पर बढ़ती यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को बड़ी राहत दी है। मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों से अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों का संचालन करने का फैसला लिया गया है, जिससे हजारों यात्रियों को आसानी से सफर करने का मौका मिलेगा। खासतौर पर रानी कमलापति (भोपाल) और रीवा के बीच 4 जोड़ी होली स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसके साथ ही रानी कमलापति–दानापुर के बीच द्वि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन भी शुरू की जा रही है। इन ट्रेनों से सतना, कटनी, सागर, बीना सहित कई जिलों के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।

    रेलवे ने जानकारी दी है कि रानी कमलापति से दानापुर के बीच चलने वाली स्पेशल ट्रेन (01667) 27 फरवरी और 2 मार्च 2026 को दोपहर 2:25 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 8:45 बजे दानापुर पहुंचेगी। वहीं वापसी में गाड़ी संख्या 01668 दानापुर से 28 फरवरी और 3 मार्च को सुबह 11:15 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह 8:55 बजे भोपाल पहुंचेगी। यह ट्रेन नर्मदापुरम, इटारसी, गाडरवारा, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर और आरा जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी।

    रीवा और रानी कमलापति के बीच भी साप्ताहिक और द्वि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। गाड़ी संख्या 02192, 28 फरवरी को दोपहर 12:30 बजे रीवा से चलकर रात 9:15 बजे रानी कमलापति पहुंचेगी। वापसी में 02191 उसी रात 10:15 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 7:30 बजे रीवा पहुंचेगी। इसी तरह द्वि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन (02186/02185) 2 और 3 मार्च को चलेगी। इन ट्रेनों का ठहराव सतना, मैहर, कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, बीना और विदिशा स्टेशनों पर रहेगा।

    इसके अलावा भोपाल से रीवा के बीच भी एक विशेष ट्रेन चलाई जाएगी। गाड़ी संख्या 01704, 5 मार्च को सुबह 10:30 बजे भोपाल से रवाना होकर रात 8:45 बजे रीवा पहुंचेगी। वापसी में 01703 उसी दिन रात 10:20 बजे रीवा से चलकर अगले दिन सुबह 9:05 बजे भोपाल पहुंचेगी। इस ट्रेन का ठहराव भी प्रमुख मध्य प्रदेश के स्टेशनों पर रहेगा।

    रेल यात्रियों के लिए एक और बड़ी खबर यह है कि इंदौर से नई दिल्ली के बीच चलने वाली इंदौर-नई दिल्ली सुपरफास्ट एक्सप्रेस (20957/20958) का मार्ग बढ़ाकर हरियाणा के हिसार तक कर दिया गया है। यह बदलाव 11 मार्च 2026 से लागू होगा। इसके बाद यह ट्रेन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की जगह दिल्ली सफदरजंग होते हुए हिसार तक जाएगी। पुराने रूट के लिए बुकिंग 5 मार्च 2026 तक ही उपलब्ध रहेगी, जबकि नए रूट की बुकिंग जल्द ही आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर शुरू की जाएगी।

    नए शेड्यूल के अनुसार गाड़ी संख्या 20957 इंदौर से प्रत्येक बुधवार, शुक्रवार और रविवार को शाम 4:45 बजे रवाना होगी, अगले दिन सुबह 4:52 बजे दिल्ली सफदरजंग और सुबह 9:20 बजे हिसार पहुंचेगी। वहीं गाड़ी संख्या 20958 हिसार से 12 मार्च 2026 से प्रत्येक सोमवार, गुरुवार और शनिवार को दोपहर 1:20 बजे चलेगी, शाम 6:15 बजे दिल्ली सफदरजंग पहुंचेगी और अगले दिन सुबह 6:45 बजे इंदौर पहुंचेगी। यह ट्रेन शकूर बस्ती, रोहतक, महम और हांसी स्टेशनों पर भी रुकेगी, जबकि कोटा, सवाई माधोपुर, भरतपुर और मथुरा जैसे पुराने स्टॉपेज पहले की तरह बने रहेंगे।

    इसी बीच अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए उधना-अयोध्या कैंट-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन (09093/09094) चलाने का भी निर्णय लिया गया है। यह ट्रेन 13 फरवरी से 27 मार्च 2026 तक हर शुक्रवार को उधना से सुबह 7:25 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 10:30 बजे अयोध्या कैंट पहुंचेगी। वापसी में यह ट्रेन 14 फरवरी से 28 मार्च तक हर शनिवार को दोपहर 2:45 बजे अयोध्या से चलकर अगले दिन शाम 5:15 बजे उधना पहुंचेगी।

    यह ट्रेन भरूच, वडोदरा, गोधरा, रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, सीहोर, संत हिरदाराम नगर, बीना, झांसी, उरई, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ और बाराबंकी जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी। इससे भोपाल और सागर संभाग के यात्रियों को भी विशेष सुविधा मिलेगी।

  • महाशिवरात्रि के बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण, तीन राशियों के लिए सावधानी का संकेत

    महाशिवरात्रि के बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण, तीन राशियों के लिए सावधानी का संकेत


    नई दिल्ली। फरवरी का महीना धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से हमेशा खास माना जाता है। इस दौरान कई व्रत, त्योहार और पूजा-अनुष्ठान होते हैं, जो लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आस्था का संचार करते हैं। इस बार भी महाशिवरात्रि के तुरंत बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण पड़ने जा रहा है, जिसने लोगों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का समय केवल खगोलीय घटना ही नहीं, बल्कि जीवन पर प्रभाव डालने वाला महत्वपूर्ण काल भी माना जाता है।

    सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों के मन में हमेशा कई तरह के सवाल रहते हैं, क्या इसका असर जीवन पर पड़ेगा, क्या सावधानी रखनी चाहिए और किन राशियों पर इसका प्रभाव ज्यादा होगा। ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार का सूर्य ग्रहण कुछ राशियों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण समय लेकर आ सकता है, इसलिए उन्हें विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या के दिन लगेगा। भारतीय समय के मुताबिक यह ग्रहण शाम 5 बजकर 31 मिनट पर शुरू होकर लगभग रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। जब ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, तो उसका सूतक काल मान्य नहीं माना जाता। इसका मतलब है कि मंदिरों के कपाट बंद करने या पूजा-पाठ रोकने जैसी परंपराएं लागू नहीं होंगी।

    फिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की स्थिति का प्रभाव राशियों पर देखा जाता है। इस बार सूर्य ग्रहण शनि की राशि कुंभ में लग रहा है और इसी राशि में बुध और शुक्र की मौजूदगी भी बताई जा रही है। यही कारण है कि इसे सामान्य ग्रहण की तुलना में थोड़ा अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है।

    ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है। इस दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं, जिससे कुछ समय के लिए सूर्य का प्रकाश ढक जाता है। मान्यता है कि इस समय ग्रहों की ऊर्जा का प्रभाव मन, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता पर पड़ सकता है। कई लोगों को इस दौरान मानसिक अस्थिरता, उलझन या थकान का अनुभव हो सकता है, इसलिए इस समय शांत रहकर सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।

    इस बार सभी 12 राशियों पर ग्रहण का अलग-अलग प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन कर्क, सिंह और कुंभ राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई जा रही है।

    कर्क राशि के लोगों के लिए यह समय मानसिक रूप से थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है। निर्णय लेने में दुविधा की स्थिति बन सकती है। स्वास्थ्य के मामले में भी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि कोई पुरानी बीमारी दोबारा परेशान कर सकती है। खानपान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा। वाहन चलाते समय भी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

    सिंह राशि वालों के लिए यह ग्रहण करियर और आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने का संकेत दे रहा है। इस समय जल्दबाजी में लिया गया फैसला आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकता है। व्यापार या निवेश से जुड़े लोगों को नई डील या बड़ा निवेश फिलहाल टाल देना बेहतर रहेगा। कार्यक्षेत्र में भी संयम और धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा, ताकि अनावश्यक विवाद से बचा जा सके।

    कुंभ राशि में ही यह सूर्य ग्रहण लग रहा है, इसलिए इसका प्रभाव इस राशि के जातकों पर ज्यादा देखा जा सकता है। बुध और शुक्र की मौजूदगी के कारण मन में भ्रम और असमंजस की स्थिति बन सकती है। आर्थिक मामलों में भी सावधानी जरूरी है, क्योंकि गलत निवेश या जल्दबाजी में किया गया लेन-देन नुकसान दे सकता है। मानसिक थकान और तनाव महसूस हो सकता है, ऐसे में योग, ध्यान और परिवार के साथ समय बिताना फायदेमंद साबित हो सकता है।

  • शिवनवरात्रि उत्सव: महाकाल का दिव्य श्रृंगार, 15 फरवरी तक अलग-अलग स्वरूपों में होंगे दर्शन

    शिवनवरात्रि उत्सव: महाकाल का दिव्य श्रृंगार, 15 फरवरी तक अलग-अलग स्वरूपों में होंगे दर्शन


    उज्जैन । उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि उत्सव धूमधाम और श्रद्धा-उल्लास के साथ जारी है। शनिवार को शिवनवरात्रि के दूसरे दिन मंदिर प्रांगण में कोटितीर्थ के तट पर सुबह 8 बजे से ही भक्तों का तांता लगा रहा। इस अवसर पर सुबह श्री गणेश पूजन के साथ ही श्री कोटेश्वर महादेव का विशेष पूजन, अभिषेक और आरती संपन्न हुई।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों द्वारा भगवान महाकाल का अभिषेक एकादश-एकादशनी रुद्रपाठ के साथ विधिवत रूप से किया गया। अभिषेक में भक्तों की आस्था के अनुसार विशेष विधियों का पालन किया गया और मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान की पवित्रता बनी रही।

    दोपहर तीन बजे के बाद संध्या पूजन के पश्चात भगवान श्री महाकालेश्वर का विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान भगवान को नवीन वस्त्रों से सजा कर मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंड-माला, छत्र आदि से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही भांग, चंदन और सूखे मेवों से दिव्य श्रृंगार कर भगवान को नारंगी माला और मुंड-माला अर्पित की गई। भगवान महाकाल का यह श्रृंगार भक्तों के लिए अत्यंत आकर्षण का केंद्र बना।

    शिवनवरात्रि के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। हर समय भक्तों का उत्साह देखने लायक है और लोग भगवान के दर्शन के लिए कतार में लगे रहते हैं। मंदिर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि भक्तों को बिना किसी असुविधा के दर्शन-पूजन का अवसर मिल सके।

    विशेष रूप से यह बताया गया है कि भगवान श्री महाकालेश्वर 15 फरवरी तक प्रतिदिन सायंकाल अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देंगे। शिवनवरात्रि के इन दिनों में महाकालेश्वर का श्रृंगार और विशेष पूजा-आराधना का क्रम जारी रहेगा, जिससे भक्तों को भक्ति और आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

    शिवनवरात्रि उत्सव का यह दूसरा दिन भक्तों के लिए विशेष रूप से यादगार रहा। मंदिर के पवित्र वातावरण में सुबह से शाम तक चलने वाले अनुष्ठान और श्रृंगार ने भक्तों के मन में एक अलग ही ऊर्जा और श्रद्धा का संचार किया।

  • कौन बन सकता है RSS चीफ… मोहन भागवत ने चुनाव प्रक्रिया और उम्मीदवारी को लेकर की खुलकर बात

    कौन बन सकता है RSS चीफ… मोहन भागवत ने चुनाव प्रक्रिया और उम्मीदवारी को लेकर की खुलकर बात


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh- RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने अपने रिटायरमेंट को लेकर जारी अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि 75 वर्ष का होने के बाद भी संघ ने उनसे काम जारी रखने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि संघ के कहने पर वह काम छोड़ सकते हैं पर काम से रिटायर नहीं होंगे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने संघ प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया और उम्मीदवारी पर भी बात की।


    कैसे होता है चुनाव

    भागवत ने यह भी कहा कि संघ का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति हमेशा एक हिंदू ही होगा, चाहे उसकी जाति कुछ भी हो और शीर्ष पद सबसे योग्य उम्मीदवार को ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘RSS प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए।’


    RSS में कैसे होता है प्रमोशन

    भागवत ने कहा कि RSS में समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व नहीं है और स्वयंसेवक अपने काम के आधार पर प्रमोशन पाते हैं। उन्होंने बताया कि जब RSS की स्थापना हुई थी, तब इसका काम ब्राह्मण-बहुल समुदाय में शुरू हुआ था और इसलिए इसके अधिकांश संस्थापक ब्राह्मण थे, जिसके कारण उस समय संगठन को ब्राह्मण संगठन के रूप में जाना जाता था। उन्होंने कहा कि लोग हमेशा ऐसे संगठन की तलाश करते हैं जिसमें उनके समुदाय के प्रतिनिधि हों।


    SC-ST से होगा प्रमुख?

    भागवत ने कहा कि वह इस बारे में कोई निश्चित जवाब नहीं दे सकते कि संघ प्रमुख अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति पृष्ठभूमि से होगा या नहीं क्योंकि यह निर्णय संघ प्रमुख की नियुक्ति करने वालों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से होना अयोग्यता नहीं है, और न ही ब्राह्मण होना संघ प्रमुख बनने की योग्यता है।


    मोहन भागवत ने बताई अपनी नियुक्ति की कहानी

    उन्होंने कहा, ‘अगर मुझे किसी प्रमुख का चयन करना होता, तो मैं ‘सबसे योग्य उम्मीदवार’ के मानदंड को अपनाता। जब मुझे RSS प्रमुख नियुक्त किया गया था, तब कई योग्य उम्मीदवार थे लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। मैं ही वह व्यक्ति था जिसे कार्यभार से मुक्त किया जा सकता था और नियुक्त किया जा सकता था।’ भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन ‘अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है’। उन्होंने दावा किया कि RSS के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो।

  • MP: खरगोन में शख्स ने 20 साल की उम्र में चुराया था 100 रु का गेहूं, पुलिस ने 45 साल बाद किया गिरफ्तार

    MP: खरगोन में शख्स ने 20 साल की उम्र में चुराया था 100 रु का गेहूं, पुलिस ने 45 साल बाद किया गिरफ्तार


    खरगोन।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के खरगोन जिले (Khargone district) से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, क्योंकि यहां पर पुलिस ने एक बार फिर यह साबित करके दिखा दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे (Law Arm too Long) होते हैं और अपराधी चाहकर भी उसके चंगुल से नहीं बच सकता है। दरअसल यहां पर पुलिस 65 वर्षीय एक बुजुर्ग को उस अपराध के मामले में गिरफ्तार किया है, जो उसने 45 साल पहले किया था और जिस समय उसकी उम्र मात्र 20 साल थी। आरोपी की पहचान सलीम के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक सलीम की गिरफ्तारी साल 1980 में दर्ज गेहूं चोरी के एक मामले को लेकर हुई है।


    1980 में चुराया था 100 रुपए का गेहूं

    मंडलेश्वर की अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (SDOP) श्वेता शुक्ला ने मामले की जानकारी देते हुए रविवार को बताया कि सलीम और उसके छह अन्य साथियों ने साल 1980 में बालसमुंद के काकड़ इलाके में खेतों से गेहूं चुराया था। आरोपियों ने वारदात के वक्त जो गेहूं चोरी किया था, वह करीब एक क्विंटल यानी 100 किलोग्राम था और उस समय उसकी कीमत लगभग 100 रुपए थी। क्योंकि तब अच्छी गुणवत्ता वाले गेहूं की कीमत करीब 1.15 रुपए प्रति किलोग्राम थी।


    किराने की दुकान चला रहा था आरोपी

    SDOP ने आगे बताया कि बलकवाड़ा थाना क्षेत्र के बलखड गांव का रहने वाला सलीम चोरी की उस घटना के बाद भाग गया था और पड़ोसी धार जिले के बाग कस्बे में जाकर अपने बेटे के साथ किराने की दुकान चलाने लगा। उन्होंने कहा कि यह मामला अदालतों में लंबित रहा इस दौरान सलीम के खिलाफ कई बार वारंट भी जारी किया गया था।


    पुलिस को यूं मिला आरोपी का सुराग

    खलटका थाने के प्रभारी मिथुन चौहान ने बताया कि एक अन्य आरोपी को तलाश करने के दौरान पुलिस को पता चला कि सलीम किराने की दुकान के जरिए जीवन यापन चला रहा है। उन्होंने कहा कि पहचान की पुष्टि होने के बाद उसे शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस अधिकारी श्वेता शुक्ला ने कहा कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसका मानना था कि इतने सालों के बाद मामले को भुला दिया गया होगा और वह कानूनी कार्रवाई से बच गया है। हालांकि उसका ये अनुमान पूरी तरह गलत साबित हो गया। चौहान ने बताया कि सलीम को यहां एक अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।