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  • गुजरात में इंसानों पर हमला करने वाले शेरों के लिए बनेगा विशेष प्रतिबंधित बाड़ा, प्राकृतिक माहौल में होगी निगरानी और सुरक्षा

    गुजरात में इंसानों पर हमला करने वाले शेरों के लिए बनेगा विशेष प्रतिबंधित बाड़ा, प्राकृतिक माहौल में होगी निगरानी और सुरक्षा


    नई दिल्ली ।
    गुजरात में एशियाई शेरों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। विभाग ने अमरेली जिले के धारी के पास स्थित आंबरडी सफारी पार्क में इंसानों पर हमला करने वाले शेरों को रखने के लिए लगभग 100 हेक्टेयर क्षेत्र में एक विशेष प्रतिबंधित बाड़ा विकसित करने का काम शुरू किया है। इस क्षेत्र को इस तरह तैयार किया जाएगा कि शेरों को उनके प्राकृतिक आवास जैसा वातावरण उपलब्ध हो सके और उनकी गतिविधियों पर सुरक्षित तरीके से निगरानी भी रखी जा सके। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य ऐसे शेरों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखते हुए उनके संरक्षण और प्रबंधन के बीच संतुलन कायम करना है।

    गुजरात सरकार के वन विभाग की ओर से यह कदम शेरों की बढ़ती आबादी के साथ मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ती संभावित टकराव की स्थिति को देखते हुए उठाया गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार शेरों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ा रही है। हर वर्ष 10 अगस्त को मनाया जाने वाला विश्व शेर दिवस भी शेरों की सुरक्षा, उनके संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।

    वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, आंबरडी सफारी पार्क में विशेष बाड़े के लिए तारबंदी और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का काम शुरू कर दिया गया है। इस क्षेत्र में ऐसे शेरों को रखा जाएगा जिनका व्यवहार इंसानों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर चुका है। उन्हें सामान्य वन क्षेत्र या आबादी के नजदीक छोड़ने के बजाय नियंत्रित क्षेत्र में रखा जाएगा, ताकि शेरों की सुरक्षा के साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके। प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध होने से इन जानवरों को लंबे समय तक अपेक्षाकृत बेहतर परिस्थितियों में रखने में मदद मिल सकती है।

    वन्यजीव प्रबंधन में स्थानांतरण एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया मानी जाती है। जब कोई जंगली जानवर भोजन, पानी या अन्य कारणों से आबादी वाले क्षेत्र में पहुंच जाता है, तो उसे सुरक्षित तरीके से पकड़कर उपयुक्त वन क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाता है। घायल या बीमार वन्यजीवों के उपचार, उनके लिए बेहतर आवास उपलब्ध कराने और कुछ परिस्थितियों में आबादी प्रबंधन के लिए भी स्थानांतरण किया जाता है। गुजरात में शेरों और तेंदुओं के अलावा मगरमच्छ जैसे वन्यजीवों को भी परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाता रहा है।

    आंबरडी सफारी पार्क इस पूरी योजना के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गिर के प्राकृतिक पर्यावरण से जुड़ा प्रमुख वन्यजीव पर्यटन केंद्र है। लगभग 365 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस पार्क में एशियाई शेरों के साथ तेंदुए, चीतल, नीलगाय, चिंकारा, मोर और कई अन्य पक्षियों को देखा जा सकता है। वर्ष 2017 में शुरू किए गए इस पार्क का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के साथ लोगों को प्राकृतिक पर्यावरण और जैव विविधता के प्रति जागरूक करना भी रहा है। यहां विकसित सफारी सुविधाओं के कारण पर्यटकों को गिर क्षेत्र के वन्यजीवन को करीब से समझने का अवसर मिलता है।

    नए प्रतिबंधित बाड़े के निर्माण से शेर संरक्षण की व्यवस्था को एक अतिरिक्त आधार मिलने की उम्मीद है। मानव बस्तियों में बार-बार पहुंचने या इंसानों पर हमला करने वाले शेरों को अलग और नियंत्रित वातावरण में रखने से संभावित संघर्ष को कम किया जा सकता है। साथ ही, वैज्ञानिक निगरानी के माध्यम से ऐसे शेरों के व्यवहार और स्वास्थ्य पर नजर रखना भी संभव होगा। गुजरात की यह पहल शेरों के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की सुरक्षा और वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • शेयर बाजार की शीर्ष कंपनियों में बड़ा बदलाव, एसबीआई की वैल्यूएशन में सबसे ज्यादा बढ़त

    शेयर बाजार की शीर्ष कंपनियों में बड़ा बदलाव, एसबीआई की वैल्यूएशन में सबसे ज्यादा बढ़त

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार की शीर्ष 10 सबसे अधिक मूल्यवान कंपनियों में बीते सप्ताह बाजार पूंजीकरण के स्तर पर मिला-जुला रुझान देखने को मिला। शीर्ष दस में शामिल चार कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यूएशन में 1.43 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई, जबकि छह कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण करीब 1.23 लाख करोड़ रुपये घट गया। इस दौरान भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई सबसे अधिक लाभ पाने वाली कंपनी रही।

    एसबीआई के बाजार पूंजीकरण में सप्ताह के दौरान 63,922.03 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही बैंक की कुल बाजार वैल्यूएशन बढ़कर 10,11,721.84 करोड़ रुपये हो गई। बैंक के वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन को इस बढ़त की प्रमुख वजहों में माना गया।

    मार्केटकैप में बढ़ोतरी के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज दूसरे प्रमुख लाभार्थियों में रही। कंपनी की बाजार वैल्यूएशन 32,816.4 करोड़ रुपये बढ़कर 18,01,925.19 करोड़ रुपये पहुंच गई। इससे कंपनी शीर्ष मूल्यवान कंपनियों की सूची में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल रही।

    सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के बाजार पूंजीकरण में भी अच्छी बढ़त दर्ज हुई। कंपनी की वैल्यूएशन 31,875.35 करोड़ रुपये बढ़कर 8,87,770.13 करोड़ रुपये हो गई। इंजीनियरिंग और निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो का मार्केटकैप भी 14,637.76 करोड़ रुपये बढ़ा और 5,56,482.45 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    दूसरी ओर, शीर्ष 10 कंपनियों में छह कंपनियों को बाजार पूंजीकरण के स्तर पर नुकसान उठाना पड़ा। इनमें सबसे बड़ी गिरावट भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी में रही। कंपनी की बाजार वैल्यूएशन 40,543.23 करोड़ रुपये कम होकर 4,96,891.82 करोड़ रुपये रह गई।

    बजाज फाइनेंस के बाजार पूंजीकरण में 37,168.96 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। इसके बाद कंपनी की कुल वैल्यूएशन 6,73,648.55 करोड़ रुपये रह गई। एचडीएफसी बैंक का मार्केटकैप भी 24,183.16 करोड़ रुपये घटकर 11,27,967.47 करोड़ रुपये पर आ गया।

    आईसीआईसीआई बैंक की बाजार वैल्यूएशन में 9,507.67 करोड़ रुपये की गिरावट आई और यह 10,20,370.63 करोड़ रुपये रह गई। भारती एयरटेल का बाजार पूंजीकरण 7,581.65 करोड़ रुपये घटकर 12,22,423.98 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    हिंदुस्तान यूनिलीवर भी उन कंपनियों में शामिल रही जिनके मार्केटकैप में गिरावट दर्ज की गई। कंपनी की बाजार वैल्यूएशन 4,793.16 करोड़ रुपये घटकर 4,88,808.97 करोड़ रुपये रह गई। इस तरह शीर्ष 10 कंपनियों के बीच सप्ताह के दौरान बाजार मूल्यांकन में स्पष्ट रूप से अलग-अलग दिशा देखने को मिली।

    इसी अवधि में भारतीय शेयर बाजार कुल मिलाकर बढ़त के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 404.53 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में 187.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। बाजार की इस तेजी के बीच कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ी, जबकि कई प्रमुख कंपनियों के मूल्यांकन में गिरावट रही।

    बाजार पूंजीकरण में हुए इस बदलाव से शीर्ष कंपनियों के बीच निवेशकों के रुझान में अंतर भी सामने आया। खास तौर पर एसबीआई की मजबूत बढ़त ने सप्ताह के दौरान उसके कुल बाजार मूल्यांकन को 10 लाख करोड़ रुपये के स्तर से ऊपर पहुंचा दिया। वहीं, कुछ अन्य बड़ी कंपनियों में गिरावट के कारण उनके बाजार पूंजीकरण में कमी दर्ज हुई।

  • तेजस्वी प्रकाश ने बताया क्यों एकता कपूर की लोकप्रियता आज भी कायम है, बदलाव की क्षमता को बताया सबसे बड़ी ताकत

    तेजस्वी प्रकाश ने बताया क्यों एकता कपूर की लोकप्रियता आज भी कायम है, बदलाव की क्षमता को बताया सबसे बड़ी ताकत

    नई दिल्ली । टेलीविजन और मनोरंजन की दुनिया में बदलते दर्शकों की पसंद के बीच अभिनेत्री तेजस्वी प्रकाश ने निर्माता एकता कपूर की कार्यशैली और बदलाव को अपनाने की क्षमता की सराहना की है। तेजस्वी का कहना है कि एकता कपूर ने खुद को केवल टेलीविजन सीरियल्स तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समय के साथ अपने काम और कंटेंट के तरीके में जरूरी बदलाव किए हैं। उनके मुताबिक लंबे समय से मनोरंजन उद्योग में सक्रिय रहने के बावजूद एकता कपूर की प्रासंगिकता बनी हुई है।

    तेजस्वी प्रकाश इन दिनों गेमिंग रियलिटी शो ‘प्लेग्राउंड’ के पांचवें सीजन को लेकर चर्चा में हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने एकता कपूर के काम और उनके व्यावसायिक नजरिए पर अपनी राय साझा की। तेजस्वी ने कहा कि एकता को केवल टेलीविजन की निर्माता के रूप में देखना उनके काम के व्यापक दायरे को सीमित करना होगा। उन्होंने एकता को एक कुशल रणनीतिकार और समझदार बिजनेसवुमन बताया।

    तेजस्वी के अनुसार, एकता कपूर को यह समझने की क्षमता है कि किसी समय दर्शकों के बीच किस तरह का कंटेंट पसंद किया जा रहा है। इसी समझ के आधार पर वह अपने काम की दिशा में बदलाव करती हैं। तेजस्वी ने कहा कि मनोरंजन उद्योग में दर्शकों की पसंद लगातार बदलती रहती है और ऐसे माहौल में पुराने तरीकों पर लगातार निर्भर रहने के बजाय बदलाव को स्वीकार करना जरूरी है।

    अभिनेत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने आसपास कई ऐसे लोगों को देखा है, जो काम करने के पुराने तरीकों को बदलने के लिए तैयार नहीं होते। चाहे उनका तरीका प्रभावी रहे या नहीं, वे उसी दिशा में काम करते रहते हैं। तेजस्वी के मुताबिक ऐसी सोच विकास की संभावनाओं को सीमित कर सकती है। उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने के लिए यह समझना जरूरी है कि कब अपने तरीके में बदलाव किया जाना चाहिए।

    तेजस्वी ने एकता कपूर के संदर्भ में कहा कि उन्होंने अपने काम के दौरान हुई गलतियों को समझा और उनसे सीख लेकर आवश्यक बदलाव किए। उनके अनुसार, अपनी गलतियों से सीखना और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण है। यही क्षमता एकता कपूर के लंबे करियर में भी दिखाई देती है।

    तेजस्वी प्रकाश का एकता कपूर के साथ काम करने का अनुभव भी रहा है। वह चर्चित टेलीविजन शो ‘नागिन 6’ में नजर आई थीं। इस दौरान उन्हें एकता कपूर के प्रोडक्शन से जुड़े काम को करीब से देखने का अवसर मिला। तेजस्वी ने अपने अनुभव के आधार पर एकता की कार्यशैली को लेकर सकारात्मक बात कही।

    उन्होंने रियलिटी शो ‘लॉक अप’ को लेकर भी एकता कपूर की टीम की प्रशंसा की। तेजस्वी ने कहा कि शो के दूसरे सीजन की सफलता से उन्हें खुशी और गर्व महसूस हुआ। वह खुद भी ‘लॉक अप’ का हिस्सा रह चुकी हैं और उन्होंने बताया कि शो से उनका जुड़ाव भले ही सीमित स्तर पर रहा हो, लेकिन उसके मंच का हिस्सा बनना उनके लिए अच्छा अनुभव था।

    तेजस्वी ने यह भी कहा कि एकता कपूर की पहचान केवल टेलीविजन तक सीमित नहीं है। वह फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं और आने वाले समय में उनके कई नए प्रोजेक्ट्स हैं। तेजस्वी का मानना है कि एकता कपूर ने बदलते मनोरंजन बाजार के अनुरूप अपनी भूमिका और काम के दायरे को लगातार विस्तार दिया है। इसी कारण उन्हें लगता है कि एकता कपूर की लोकप्रियता और चमक अभी भी कायम है।

  • चीन में डॉल्फिन तूफान का खतरा, 1400 उड़ानें रद्द और हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए

    चीन में डॉल्फिन तूफान का खतरा, 1400 उड़ानें रद्द और हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए

    नई दिल्ली । चीन के पूर्वी तट पर टाइफून डॉल्फिन के संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक स्तर पर एहतियाती कदम उठाए हैं। रविवार को तूफान के पहुंचने की आशंका के बीच शंघाई आने-जाने वाली करीब 1400 उड़ानें रद्द कर दी गईं। इसके अलावा हांगझोउ हवाई अड्डे से संचालित होने वाली 270 उड़ानों को भी रद्द किया गया। प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा के लिए उन्हें संवेदनशील क्षेत्रों से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

    तूफान के रविवार देर रात या सोमवार सुबह चीन के झेजियांग अथवा पड़ोसी फुजियान प्रांत के तटीय क्षेत्र में पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसके मद्देनजर रविवार सुबह रेड टाइफून अलर्ट जारी किया गया। यह तूफान से संबंधित सबसे गंभीर चेतावनी का स्तर है। झेजियांग के मध्य और पूर्वी हिस्सों में बेहद भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार शंघाई के अलावा फुजियान, अनहुई और जिआंग्सू प्रांतों के कुछ हिस्सों में सोमवार दोपहर तक भारी बारिश जारी रह सकती है। जमीन से टकराने के बाद तूफान के धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना है। इसके बाद इसके पूर्वी चीन में उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ने का अनुमान है।

    टाइफून डॉल्फिन का असर चीन पहुंचने से पहले जापान के ओकिनावा क्षेत्र में भी देखा गया। वहां भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण सात लोगों को मामूली चोटें आईं। घायलों में 100 साल से अधिक उम्र का एक व्यक्ति भी शामिल है, जो तेज हवाओं की चपेट में आकर गिर गया और उसके सिर में चोट लगी। रविवार दोपहर तक ओकिनावा में करीब 5,290 घरों की बिजली आपूर्ति बाधित थी।

    ताइवान में भी तूफान के प्रभाव के कारण रविवार को द्वीप के उत्तरी हिस्से में तेज हवाओं और भारी बारिश की स्थिति बनी रही। खराब मौसम के चलते दर्जनों फेरी सेवाएं रोक दी गईं, जबकि 180 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। समुद्री और हवाई परिवहन पर पड़े इस असर से यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    चीन में तूफान के संभावित प्रभाव वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। फुजियान में शनिवार शाम तक करीब 99 हजार लोगों को जोखिम वाले इलाकों से हटाया गया। झेजियांग और फुजियान में 200 से अधिक फेरी मार्गों पर सेवाएं रोक दी गई हैं।

    तटीय और समुद्री गतिविधियों पर भी व्यापक रोक लगाई गई है। शुक्रवार सुबह तक 474 निर्माण जहाजों को बंदरगाहों पर वापस बुला लिया गया था। ऑफशोर परियोजनाओं पर काम रोक दिया गया है। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में कुछ ट्रेन सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद की गई हैं।

    डॉल्फिन से करीब दो सप्ताह पहले दक्षिणी ग्वांगडोंग प्रांत में टाइफून नौल ने दस्तक दी थी। उस समय इसे इस साल चीन में पहुंचा सबसे शक्तिशाली तूफान बताया गया था। चीन पहुंचने से पहले नौल ने फिलीपींस में भी भारी असर डाला था, जहां तीन लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों घर क्षतिग्रस्त हुए थे। ऐसे में डॉल्फिन के संभावित प्रभाव को देखते हुए चीन के तटीय प्रशासन ने परिवहन, निकासी और आपदा प्रबंधन से जुड़े उपायों को प्राथमिकता दी है।

  • बारिश शुरू होते ही बदल जाती है बिहार की खूबसूरती करकटगढ़ से राजगीर तक ये जगहें जरूर करें एक्सप्लोर

    बारिश शुरू होते ही बदल जाती है बिहार की खूबसूरती करकटगढ़ से राजगीर तक ये जगहें जरूर करें एक्सप्लोर


    नई दिल्ली। बारिश का मौसम आते ही प्रकृति का रंग पूरी तरह बदल जाता है। सूखे और सामान्य दिखाई देने वाले पहाड़ हरियाली की चादर ओढ़ लेते हैं और छोटे बड़े झरने पानी से लबालब होकर अपनी खूबसूरती बिखेरने लगते हैं। ऐसे मौसम में अगर आप भी परिवार दोस्तों या अपने पार्टनर के साथ किसी ऐसी जगह जाने का प्लान बना रहे हैं जहां प्रकृति के बीच सुकून के पल बिताए जा सकें तो बिहार आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। बिहार को अक्सर ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है लेकिन मानसून के दौरान यहां के प्राकृतिक नजारे भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। राज्य में कई ऐसी जगहें हैं जहां बारिश के मौसम में हरियाली पहाड़ झरने और बादलों से घिरे दृश्य किसी खूबसूरत तस्वीर की तरह नजर आते हैं।

    रोहतास जिले में स्थित करमचट डैम मानसून के दौरान घूमने के लिए बेहद आकर्षक जगह बन जाता है। चेनारी के पास मौजूद यह डैम सासाराम से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बारिश के बाद आसपास की हरियाली और पानी से भरा डैम पूरे इलाके की खूबसूरती बढ़ा देता है। यहां सुबह सूर्योदय और शाम के समय सूर्यास्त का नजारा देखने लायक होता है। शांत वातावरण के कारण यह जगह परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए भी अच्छी मानी जाती है।

    अगर आपको झरने और पहाड़ों के बीच घूमना पसंद है तो कैमूर का करकटगढ़ वॉटरफॉल आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होना चाहिए। कैमूर वाइल्डलाइफ सेंचुरी के क्षेत्र में मौजूद यह झरना मानसून में अपने पूरे वेग के साथ बहता दिखाई देता है। करीब 100 फीट ऊंचा और लगभग 300 फीट चौड़ा यह जलप्रपात आसपास की हरियाली और जंगल के बीच बेहद आकर्षक नजर आता है। बारिश के दिनों में झरने की आवाज और पहाड़ी वातावरण यहां आने वाले लोगों को प्रकृति के करीब होने का अहसास कराता है।

    कैमूर की पहाड़ियां भी प्रकृति प्रेमियों के लिए शानदार जगह हैं। यहां घने जंगल गहरी घाटियां प्राकृतिक गुफाएं और कई छोटे बड़े झरने मौजूद हैं। मानसून के दौरान पहाड़ियों पर हरियाली बढ़ जाती है और मौसम भी सुहावना हो जाता है। प्रकृति के साथ इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यहां मौजूद प्राचीन शैलचित्र और ऐतिहासिक अवशेष भी आकर्षण का केंद्र हैं।

    राजगीर का विश्व शांति स्तूप भी मानसून में बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। रत्नागिरी पहाड़ी पर ऊंचाई पर स्थित यह सफेद स्तूप बादलों और हरियाली से घिरा नजर आता है। यहां पहुंचने के लिए रोपवे की सुविधा उपलब्ध है। रोपवे से सफर करते समय आसपास की पहाड़ियों और प्राकृतिक वातावरण का शानदार दृश्य देखने को मिलता है। शांत वातावरण के कारण यह स्थान पर्यटन के साथ आध्यात्मिक अनुभव भी देता है।

    गया जिले के पास स्थित गुरपा हिल भी बारिश के मौसम में घूमने के लिए खास जगह हो सकती है। बिहार और झारखंड की सीमा के आसपास मौजूद यह क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता के साथ धार्मिक महत्व भी रखता है। मानसून में यहां के जंगल पहाड़ और झरने और अधिक खूबसूरत हो जाते हैं। पहाड़ी की ऊंचाई से आसपास का दृश्य बेहद मनमोहक दिखाई देता है और यहां मौजूद धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करते हैं।

    मानसून में बिहार घूमने का अनुभव इन जगहों की वजह से और खास हो सकता है। हालांकि बारिश के दौरान पहाड़ी और झरने वाले क्षेत्रों में फिसलन और अचानक बढ़ते पानी का खतरा हो सकता है। इसलिए यात्रा से पहले मौसम और स्थानीय प्रशासन की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है। सुरक्षित तरीके से घूमते हुए इन प्राकृतिक जगहों की खूबसूरती का आनंद लिया जाए तो बिहार का मानसून ट्रिप लंबे समय तक याद रह सकता है।

  • निफ्टी-सेंसेक्स की तेजी के बाद अगले हफ्ते निवेशकों की नजर कच्चे तेल और घरेलू आंकड़ों पर रहेगी

    निफ्टी-सेंसेक्स की तेजी के बाद अगले हफ्ते निवेशकों की नजर कच्चे तेल और घरेलू आंकड़ों पर रहेगी

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार के लिए 10 से 14 अगस्त के बीच आने वाला कारोबारी सप्ताह कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के कारण अहम माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, घरेलू महंगाई के आंकड़े और कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजे निवेशकों के रुख को प्रभावित कर सकते हैं। बाजार की दिशा तय करने में इन सभी कारकों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।

    अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव पर निवेशकों की विशेष नजर रहेगी। फिलहाल दोनों देशों के बीच हमले रुके हुए हैं और इसी वजह से कच्चे तेल की कीमत करीब 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। तेल की कीमतों में किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर दिखाई दे सकता है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।

    घरेलू मोर्चे पर खुदरा और थोक महंगाई के आंकड़े अगले सप्ताह जारी किए जाएंगे। महंगाई के आंकड़े अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के दबाव के साथ मांग और आपूर्ति की स्थिति का संकेत देते हैं। ऐसे में निवेशक इन आंकड़ों का विश्लेषण करके बाजार की आगे की दिशा को लेकर अपनी रणनीति तय कर सकते हैं।

    इसके अलावा कई सूचीबद्ध कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे भी बाजार की गतिविधियों को प्रभावित करेंगे। 10 से 14 अगस्त के बीच स्काईगोल्ड, बॉश, बॉम्बे डाइंग, डॉलर, डीबीएल, आईटीडीसी, वोडाफोन आइडिया, आइडियाफोर्ज, हिंदुस्तान कॉपर, लिंडे इंडिया, वीगार्ड, जी, बाटा इंडिया, ईपैक, ईपीएल, आईएफसीआई और जेएनके इंडिया समेत कई कंपनियों के नतीजे सामने आने हैं।

    बीते कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार में कुल मिलाकर मजबूती देखने को मिली। निफ्टी 187.05 अंक यानी 0.77 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,570.65 पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स में 404.53 अंक यानी 0.52 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 78,499.17 के स्तर पर बंद हुआ।

    बाजार में व्यापक तेजी का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 548.25 अंक यानी 0.87 प्रतिशत बढ़कर 63,463.55 पर पहुंच गया। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 528.15 अंक यानी 2.73 प्रतिशत की मजबूत तेजी दर्ज हुई और यह 19,867.80 पर बंद हुआ।

    सेक्टर आधारित प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सूचकांक रहा और इसमें 5.01 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई। निफ्टी इंडिया डिफेंस 4.30 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 3.70 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 3.14 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 2.73 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।

    इसी तरह निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग में 2.04 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज में 1.32 प्रतिशत, निफ्टी इंफ्रा में 1.01 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी में 0.64 प्रतिशत की मजबूती रही। दूसरी ओर निफ्टी मीडिया 3.94 प्रतिशत गिरा। निफ्टी रियल्टी में 1.72 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.48 प्रतिशत की कमजोरी रही। निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.47 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.28 प्रतिशत नीचे रहे।

    कुल मिलाकर अगले सप्ताह बाजार की निगाह घरेलू आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के प्रदर्शन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर रहेगी। कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका-ईरान तनाव और महंगाई के आंकड़ों में होने वाले बदलाव निवेशकों के लिए प्रमुख संकेतक रहेंगे। तिमाही नतीजों से कंपनियों के कारोबार और कमाई की तस्वीर भी स्पष्ट होगी, जिससे अलग-अलग शेयरों और क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

  • राजनाथ सिंह बोले, ऑपरेशन सिंदूर से आतंकियों और उनके सरपरस्तों को दिया करारा जवाब

    राजनाथ सिंह बोले, ऑपरेशन सिंदूर से आतंकियों और उनके सरपरस्तों को दिया करारा जवाब


    नई दिल्ली । 
    रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि पहलगाम में धर्म पूछकर निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाए जाने के बाद भारतीय सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों तथा उनके सरपरस्तों के खिलाफ कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि इस अभियान के जरिए भारत ने स्पष्ट किया कि अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

    राजनाथ सिंह दिल्ली कैंट स्थित सेना के बेस अस्पताल में आयोजित विशेष रक्तदान शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया कि देश की नारी शक्ति के सिंदूर की रक्षा के लिए भी भारत किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है।

    रक्षामंत्री ने इस अवसर पर आयोजित रक्तदान कार्यक्रम को ‘सिंदूर’ महारक्तदान यात्रा का नाम दिए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह नाम अपने भीतर एक प्रतीकात्मक संदेश रखता है और रक्तदान का आयोजन मानवता, सहृदयता तथा राष्ट्रप्रेम से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है।

    उन्होंने कहा कि रक्त का निर्माण किसी कारखाने या प्रयोगशाला में नहीं किया जा सकता। यह स्वस्थ मानव शरीर में ही बनता है और एक व्यक्ति ही दूसरे जरूरतमंद व्यक्ति को रक्त देकर उसकी सहायता कर सकता है। इसी वजह से रक्तदान को जीवनदान और महादान के रूप में देखा जाता है।

    राजनाथ सिंह ने बताया कि इस अभियान में सांगली से आए सैकड़ों खिलाड़ी भी रक्तदान कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस पहल के माध्यम से एक ऐसा रक्त भंडार तैयार होगा, जो भविष्य में जरूरत पड़ने पर सेना के जवानों और उनके परिवारों के लिए उपयोगी साबित होगा।

    रक्षामंत्री ने रक्तदान करने वाले खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि एथलीटों की पहचान उनकी शारीरिक क्षमता से होती है, लेकिन इस अवसर पर उन्होंने करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी की शक्ति का भी परिचय दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय नागरिकों और जवानों के परिवारों के साथ खड़ा होना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    इस आयोजन में एथलीटों और अन्य प्रतिभागियों की ओर से करीब एक हजार यूनिट रक्तदान किया गया। राजनाथ सिंह ने इसे भारतीय सेना के जवानों और उनके परिवारों के प्रति भरोसे का संदेश बताया। उन्होंने कहा कि जरूरत के समय राष्ट्र उनके साथ खड़ा रहेगा और इससे बड़ी राष्ट्रसेवा की भावना का उदाहरण मुश्किल है।

    रक्षामंत्री ने देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं से रक्तदान को केवल किसी विशेष कार्यक्रम तक सीमित न रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसे समाज की नियमित संस्कृति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि 2047 में भारत की स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने पर लक्ष्य केवल विकसित अर्थव्यवस्था बनना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा संवेदनशील समाज भी होना चाहिए जहां लोग स्वस्थ और सुरक्षित रहें।

    राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री की ओर से फिटनेस को लेकर दिए गए संदेश और खेलो इंडिया तथा फिटनेस से जुड़े अभियानों का उल्लेख किया। उन्होंने युवाओं से स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि नागरिक जितने अधिक फिट रहेंगे, उतना ही वे समाज के लिए उपयोगी साबित होंगे और रक्तदान जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यों में भी योगदान दे सकेंगे।

  • महेश बाबू के 51वें जन्मदिन पर ‘वाराणसी’ से उनके किरदार रुद्र का नया लुक सामने आया है।

    महेश बाबू के 51वें जन्मदिन पर ‘वाराणसी’ से उनके किरदार रुद्र का नया लुक सामने आया है।

    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के सुपरस्टार महेश बाबू ने अपने 51वें जन्मदिन के मौके पर फैंस को खास तोहफा दिया है। 9 अगस्त को जन्मदिन मना रहे अभिनेता ने अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘वाराणसी’ से अपने किरदार रुद्र का नया लुक साझा किया। फिल्म को लेकर लंबे समय से दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है और महेश बाबू की नई तस्वीरों ने इस उत्साह को और बढ़ा दिया है।

    जन्मदिन के अवसर पर जारी की गई तस्वीरों में महेश बाबू का अंदाज पहले से काफी अलग नजर आ रहा है। अभिनेता गंभीर और रहस्यमयी लुक में दिखाई दे रहे हैं। उनका स्टाइल और व्यक्तित्व फिल्म के बड़े स्तर की ओर संकेत करता है। तस्वीरों में वह अफ्रीका की प्राकृतिक खूबसूरती के बीच नजर आते हैं, जहां फिल्म की शूटिंग भी की गई है।

    ‘वाराणसी’ की शूटिंग अफ्रीका की चर्चित लोकेशन्स किलिमंजारो और मसाई मारा में हुई है। सामने आई तस्वीरों में महेश बाबू कभी विशाल प्राकृतिक दृश्यों को निहारते दिखाई देते हैं तो कभी शांत अंदाज में नजर आते हैं। बैकग्राउंड में मौजूद वन्यजीवन और प्राकृतिक दृश्य फिल्म की भव्य दुनिया को और आकर्षक बनाते हैं।

    फिल्म का निर्देशन एसएस राजामौली कर रहे हैं। ऐसे में महेश बाबू और राजामौली की पहली साझेदारी को लेकर दर्शकों में खास दिलचस्पी है। सामने आए लुक से यह संकेत मिलता है कि रुद्र के किरदार को बड़े पैमाने पर तैयार किया गया है। हालांकि फिल्म की कहानी से जुड़ी अधिकांश जानकारी अभी गोपनीय रखी गई है।

    कहानी को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार फिल्म की घटनाएं वर्ष 2027 की पृष्ठभूमि में दिखाई जा सकती हैं। कथानक में ‘शाम्भवी’ नाम के एक एस्टेरॉयड का जिक्र है, जो वाराणसी की ओर बढ़ रहा होता है। इसके कारण पूरी दुनिया के सामने एक बड़ा खतरा पैदा होने की स्थिति बनती है। हालांकि फिल्म की आधिकारिक कहानी को लेकर अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।

    महेश बाबू फिल्म में एक आर्कियोलॉजिस्ट की भूमिका निभा रहे हैं। उनके किरदार का नाम रुद्र बताया गया है। कहानी में उनका सामना एक ऐसे घटनाक्रम से होता है, जिसका संबंध इतिहास, रोमांच और वैश्विक खतरे से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से फिल्म को सामान्य एक्शन कहानी से अलग पैमाने पर तैयार किए जाने की चर्चा है।

    फिल्म में प्रियंका चोपड़ा भी महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई देंगी। वह मंदाकिनी नाम की महिला किरदार निभा रही हैं, जिसे एक हिस्टोरियन और कुशल शूटर के रूप में पेश किए जाने की जानकारी है। महेश बाबू और प्रियंका चोपड़ा की जोड़ी भी फिल्म के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है।

    वहीं पृथ्वीराज सुकुमारन फिल्म में नकारात्मक भूमिका में नजर आएंगे। उनके किरदार को लेकर भी अभी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में महेश बाबू के रुद्र, प्रियंका चोपड़ा के मंदाकिनी और पृथ्वीराज सुकुमारन के किरदार के बीच कहानी किस तरह आगे बढ़ेगी, इसे लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है।

    फिल्म के विशाल स्तर, अंतरराष्ट्रीय लोकेशन्स और बड़े कलाकारों की मौजूदगी के कारण ‘वाराणसी’ पर खास नजर है। जन्मदिन के मौके पर जारी महेश बाबू का नया लुक फिल्म की चर्चा को और तेज कर रहा है। हालांकि कहानी के कई अहम पहलुओं पर अभी पर्दा पड़ा हुआ है, लेकिन रुद्र का नया अंदाज फिल्म की दुनिया और किरदार की गंभीरता की झलक जरूर देता है।

  • दक्षिण चीन सागर में फिर आमने-सामने चीन और फिलीपींस, अमेरिका के रुख से बढ़ी पूरे विवाद की अहमियत

    दक्षिण चीन सागर में फिर आमने-सामने चीन और फिलीपींस, अमेरिका के रुख से बढ़ी पूरे विवाद की अहमियत


    नई दिल्ली ।दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच लंबे समय से जारी विवाद एक बार फिर चर्चा में है। स्कारबोरो रीफ को लेकर चीन की ओर से उठाए गए नए कदम पर अमेरिका ने आपत्ति जताई है। अमेरिका ने चीन द्वारा इस क्षेत्र को राष्ट्रीय प्रकृति क्षेत्र के रूप में विकसित करने के फैसले का विरोध करते हुए फिलीपींस के साथ खड़े रहने की बात कही है।

    स्कारबोरो रीफ दक्षिण चीन सागर में स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है, जिस पर चीन और फिलीपींस दोनों अपना दावा करते रहे हैं। इस इलाके में मछली पकड़ने और समुद्री गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। फिलीपींस के मछुआरे इस क्षेत्र में लंबे समय से मछली पकड़ते रहे हैं और नए नियमों के बाद उनके सामने संभावित परेशानियों को लेकर चिंता जताई जा रही है।

    चीन ने एक अगस्त को स्कारबोरो रीफ से जुड़े नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों में क्षेत्र की देखभाल, निगरानी और सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है। इसके तहत चीन के कई सरकारी विभाग मिलकर इस समुद्री क्षेत्र की निगरानी और प्रबंधन करेंगे। चीन का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य संबंधित सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और क्षेत्र की सुरक्षा तथा संरक्षण को व्यवस्थित करना है।

    चीन ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय प्रकृति क्षेत्र के रूप में विकसित करने की मंजूरी सितंबर 2024 में दी थी। अब नए नियमों के जरिए वहां प्रशासनिक और निगरानी व्यवस्था को अधिक स्पष्ट किया गया है। हालांकि, फिलीपींस को आशंका है कि इन व्यवस्थाओं का असर उसके मछुआरों की गतिविधियों पर पड़ सकता है।

    अमेरिका ने चीन के इस कदम पर गंभीर आपत्ति जताई है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि नए नियमों से फिलीपींस के उन मछुआरों के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में मछली पकड़ते रहे हैं। अमेरिका ने चीन से क्षेत्र के आसपास मौजूद देशों के अधिकारों और हितों को ध्यान में रखने की अपील की है।

    अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में फिलीपींस के साथ है। इसके साथ ही उसने खुले और स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के समर्थन की बात दोहराई है। इससे दक्षिण चीन सागर के विवाद में अमेरिका की रणनीतिक भूमिका एक बार फिर सामने आई है।

    स्कारबोरो रीफ को लेकर विवाद की पृष्ठभूमि काफी पुरानी है। वर्ष 2016 में समुद्री कानून से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय न्यायिक पैनल ने दक्षिण चीन सागर में चीन के व्यापक समुद्री दावों को कानूनी आधार नहीं माना था। फिलीपींस ने इस फैसले का समर्थन किया था, जबकि चीन ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

    2016 के बाद भी दोनों देशों के बीच इस समुद्री क्षेत्र को लेकर मतभेद खत्म नहीं हुए। समय-समय पर समुद्री गतिविधियों, मछली पकड़ने और क्षेत्रीय अधिकारों को लेकर तनाव सामने आता रहा है। स्कारबोरो रीफ पर चीन की नई प्रशासनिक व्यवस्था ने इसी पुराने विवाद को फिर से सक्रिय कर दिया है।

    मौजूदा घटनाक्रम में चीन अपने नए नियमों को क्षेत्र के संरक्षण और निगरानी से जुड़ी व्यवस्था के तौर पर पेश कर रहा है, जबकि फिलीपींस इसे अपने मछुआरों और समुद्री अधिकारों के संदर्भ में देख रहा है। अमेरिका के खुलकर फिलीपींस का समर्थन करने से इस विवाद का कूटनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।

    फिलहाल दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। स्कारबोरो रीफ पर लागू किए गए नए नियमों को लेकर दोनों पक्षों के रुख में अंतर साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों और दोनों देशों की प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी।

  • UPI Payment पर MDR की चर्चा के बीच सरकार ने साफ किया पूरा गणित, जानिए किसे देना पड़ सकता है शुल्क

    UPI Payment पर MDR की चर्चा के बीच सरकार ने साफ किया पूरा गणित, जानिए किसे देना पड़ सकता है शुल्क

    नई दिल्ली ।यूपीआई से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के बीच पिछले कुछ दिनों से मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर सवाल उठ रहे थे। खासतौर पर 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं के कारण यह आशंका बनी हुई थी कि आने वाले समय में डिजिटल भुगतान महंगा हो सकता है। अब सरकार ने इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

    लोकसभा में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 से संबंधित विधेयक पारित होने के बाद सरकार ने यूपीआई भुगतान व्यवस्था और संभावित MDR को लेकर अपना रुख सामने रखा है। सरकार के मुताबिक, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। ऐसे में रोजमर्रा के व्यक्तिगत लेनदेन करने वाले ग्राहकों पर प्रस्तावित व्यवस्था का सीधा असर नहीं पड़ेगा।

    MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट उस शुल्क को कहा जाता है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी या दुकानदार की ओर से बैंक अथवा भुगतान सेवा उपलब्ध कराने वाली संस्था को दिया जाता है। यह डिजिटल भुगतान की सुविधा से जुड़ी लागत का हिस्सा होता है। इसलिए इसे सीधे ग्राहक पर लगाया जाने वाला शुल्क नहीं माना जाता है।

    सरकार ने कहा है कि यदि भविष्य में यूपीआई लेनदेन पर MDR लागू किया जाता है तो उसका दायरा सीमित रखा जाएगा। सभी तरह के यूपीआई भुगतान पर एक समान शुल्क लगाने की कोई योजना नहीं बताई गई है। व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले लेनदेन इससे बाहर रहेंगे और अधिकांश छोटे दुकानदारों तथा कारोबारियों पर भी इसका बड़ा असर नहीं पड़ने की बात कही गई है।

    संभावित व्यवस्था के तहत तय सीमा से अधिक मूल्य वाले कुछ चुनिंदा मर्चेंट भुगतान पर MDR लगाया जा सकता है। सरकार के अनुसार, ऐसी स्थिति में शुल्क की राशि काफी कम रखी जा सकती है। यह शुल्क कार्ड के जरिए होने वाले डिजिटल भुगतान पर लगने वाले शुल्क की तुलना में भी कम हो सकता है।

    सरकार ने संभावित MDR की जरूरत के पीछे यूपीआई के लगातार बढ़ते इस्तेमाल को प्रमुख कारण बताया है। डिजिटल भुगतान का दायरा बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने और भुगतान प्रणाली को सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार खर्च की आवश्यकता होती है। इसी वजह से डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत और उसके प्रबंधन को लेकर चर्चा चल रही है।

    हालांकि, अभी यूपीआई पर MDR लागू करने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। वित्त मंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो उसका भुगतान व्यापारी करेंगे, ग्राहकों से सीधे शुल्क लेने की व्यवस्था नहीं होगी। इससे व्यक्तिगत यूपीआई भुगतान करने वाले लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका फिलहाल नहीं है।

    भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा भी इस विषय में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालने से बचने की बात कह चुके हैं। भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अभी बातचीत जारी है। अंतिम नीति तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन श्रेणियों के मर्चेंट भुगतान को संभावित शुल्क के दायरे में रखा जा सकता है।

    इस बीच वित्त मंत्रालय ने उन दावों को भी गलत बताया है, जिनमें कहा गया था कि किसी बाहरी दबाव के कारण यूपीआई से जुड़ी नीति में बदलाव किया जा रहा है। सरकार का मौजूदा रुख स्पष्ट है कि व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा और यदि भविष्य में MDR की व्यवस्था लागू होती है तो उसका दायरा सीमित रखा जाएगा।

    इसलिए फिलहाल सामान्य यूपीआई उपयोगकर्ताओं के लिए राहत की स्थिति है। छोटे व्यक्तिगत भुगतान करने वालों को किसी नए शुल्क की चिंता करने की जरूरत नहीं है। दूसरी ओर, व्यापारिक लेनदेन को लेकर अंतिम नियम आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संभावित MDR किन भुगतान श्रेणियों पर लागू होगा और उसकी वास्तविक दर कितनी होगी।