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  • राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बना सियासी तूफान, मुख्यमंत्री सरमा के आरोपों के केंद्र में सांसद गौरव गोगोई और उनकी पत्नी

    राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बना सियासी तूफान, मुख्यमंत्री सरमा के आरोपों के केंद्र में सांसद गौरव गोगोई और उनकी पत्नी


    गुवाहाटी। असम की राजनीति में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न से जुड़े गंभीर आरोपों को सार्वजनिक किया। गुवाहाटी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरमा ने दावा किया कि एलिजाबेथ कोलबर्न जो ब्रिटिश नागरिक हैं को एक पाकिस्तान आधारित फर्म ने नौकरी पर रखा था और उनकी सैलरी पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख के माध्यम से दी जाती थी। मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले को व्यक्तिगत नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया।

    दरअसल यह विवाद अचानक नहीं उभरा है इसकी जड़ें फरवरी 2025 में असम सरकार द्वारा गठित एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम SIT तक जाती हैं। इस टीम का गठन अली तौकीर शेख नामक पाकिस्तानी नागरिक की गतिविधियों की जांच के लिए किया गया था। सरकार के अनुसार शेख पर भारत विरोधी साजिश रचने और देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के आरोप थे। SIT ने करीब सात महीने तक जांच करने के बाद सितंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी।

    सरकार के मुताबिक रिपोर्ट में कुछ संवेदनशील जानकारियां थीं लेकिन राज्य पुलिस के अधिकार क्षेत्र और संसाधनों की सीमाओं को देखते हुए असम कैबिनेट ने निर्णय लिया कि इस मामले को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय MHA को भेजा जाए। अब संभावना जताई जा रही है कि आगे की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो IB या केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर इंटरपोल की मदद लेने की बात भी सामने आई है।

    मुख्यमंत्री सरमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि एलिजाबेथ कोलबर्न को मार्च 2011 से मार्च 2012 के बीच पाकिस्तान स्थित एक फर्म में नियुक्त किया गया था। बाद में उन्हें भारत ट्रांसफर किया गया। सरमा के अनुसार उनकी सैलरी अली तौकीर शेख के माध्यम से दी जाती थी जिसे उन्होंने “पाकिस्तानी एजेंट करार दिया। आरोप है कि भारत में रहने के दौरान एलिजाबेथ ने विभिन्न सामाजिक और सरकारी मुद्दों पर जानकारी एकत्र की और कथित तौर पर उसे शेख तक पहुंचाया।

    मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि अगस्त 2014 की एक रिपोर्ट में भारतीय खुफिया एजेंसी IB से जुड़ी कुछ गोपनीय सूचनाओं का उल्लेख था। साथ ही जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रोजेक्ट्स और सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर भी जानकारी साझा करने की बात कही गई। हालांकि इन दावों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत दस्तावेज पेश नहीं किए गए हैं और जांच अभी आगे की प्रक्रिया में है।

    अली तौकीर शेख को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कई तथ्य रखे। उनके अनुसार शेख 2010 से 2013 के बीच कम से कम 13 बार भारत आया था। उन पर आरोप है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ नैरेटिव बनाने और देश के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रहे थे। सरमा ने यह भी कहा कि जांच शुरू होने के बाद शेख ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स से कई पोस्ट हटा दिए जिसे उन्होंने सबूत मिटाने की कोशिश बताया।

    इस पूरे विवाद में एक और महत्वपूर्ण दावा मुख्यमंत्री ने सांसद गौरव गोगोई को लेकर किया। उन्होंने कहा कि गोगोई 2012 से 2016 के बीच पाकिस्तान गए थे और इन यात्राओं की जानकारी केंद्र सरकार को नहीं दी गई थी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस दौरान गोगोई सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थे। हालांकि मुख्यमंत्री ने यह स्वीकार किया कि फोन कॉल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं लेकिन एक व्यक्ति के पाकिस्तान जाने का सबूत मिलने की बात कही गई।

    सरमा ने कहा कि इस मामले में तीन मुख्य किरदार हैं एक पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख एक ब्रिटिश नागरिक एलिजाबेथ कोलबर्न और एक भारतीय सांसद गौरव गोगोई। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ पहलुओं में धार्मिक परिवर्तन से जुड़े कोण की भी जांच हो सकती है हालांकि इस संबंध में कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। अब राजनीतिक हलकों में यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ जहां राज्य सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रही है वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा मान रहा है।

  • बांग्‍लादेश में चुनाव से पहले बिजली गुल होने का खड़ा हो गया संकट, अडानी ग्रुप का बकाया भुगतान पत्र

    बांग्‍लादेश में चुनाव से पहले बिजली गुल होने का खड़ा हो गया संकट, अडानी ग्रुप का बकाया भुगतान पत्र


    नई दिल्ली। बांग्लादेश में आगामी संसदीय चुनावों से ठीक पहले बिजली आपूर्ति और वित्तीय स्थिति को लेकर एक नया विवाद सामने आ गया है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल के अंतिम दौर में अडानी ग्रुप ने बकाया भुगतान को लेकर बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (PDB) को एक औपचारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के बाद दोनों पक्षों के बीच चल रहा वित्तीय विवाद फिर से चर्चा में आ गया है और देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, अडानी पावर लिमिटेड ने 29 जनवरी को पीडीबी के चेयरमैन को पत्र लिखकर तत्काल भुगतान की मांग की। कंपनी ने स्पष्ट किया कि पावर प्लांट का नियमित संचालन जारी रखने के लिए 112.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का तुरंत भुगतान आवश्यक है। यदि यह भुगतान नहीं किया गया, तो बिना बाधा बिजली आपूर्ति बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

    इस कुल बकाया में 53.2 मिलियन डॉलर की राशि पिछले वर्ष जून तक की देनदारी के रूप में शामिल है, जबकि 59.6 मिलियन डॉलर अक्टूबर तक दी गई बिजली सेवा का भुगतान है। कंपनी का कहना है कि कई बार आग्रह करने के बावजूद बांग्लादेश पावर बोर्ड इस रकम का पूरा भुगतान नहीं कर पाया है। ऐसे में बढ़ते बकाए का दबाव कंपनी के संचालन, मेंटेनेंस और इससे जुड़े साझेदारों पर पड़ने लगा है।

    पत्र में अडानी ग्रुप ने संकेत दिया है कि अगर भुगतान में और देरी होती है, तो बिजली उत्पादन और आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। हालांकि इसे औपचारिक चेतावनी नहीं कहा गया, लेकिन इस तरह की भाषा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थिति गंभीर होती जा रही है और दोनों पक्षों को जल्द समाधान निकालने की जरूरत है।

    यह पहला मौका नहीं है जब इस मुद्दे पर तनाव पैदा हुआ हो। पिछले साल भी अडानी ग्रुप ने बकाया भुगतान को लेकर बांग्लादेश को पत्र भेजा था और 10 नवंबर तक की समय सीमा तय की थी। उस समय कंपनी ने साफ कहा था कि अगर तय समय तक पैसे नहीं मिले, तो 11 नवंबर से बिजली आपूर्ति बंद करनी पड़ सकती है। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने उसी महीने करीब 100 मिलियन डॉलर का भुगतान किया था, जिससे तत्काल संकट टल गया था। लेकिन उसके बाद भी पुराने बकाए का पूरा भुगतान नहीं हो पाया और दिसंबर से फिर देनदारी बढ़ने लगी। अब एक बार फिर वही स्थिति बनती नजर आ रही है, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई जा रही है। बांग्लादेश जैसे देश के लिए, जहां ऊर्जा आपूर्ति आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ मानी जाती है, यह स्थिति काफी गंभीर मानी जा रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम का समय भी बेहद महत्वपूर्ण है। बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं और इसके साथ जनमत संग्रह भी प्रस्तावित है। चुनावी माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है और राजनीतिक दल पूरी ताकत से प्रचार में जुटे हैं। बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी जैसे दल मैदान में सक्रिय हैं, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे माहौल में अडानी ग्रुप का यह पत्र बांग्लादेश की आर्थिक और प्रशासनिक स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में वित्तीय अस्थिरता का असर सीधे आम जनता और उद्योगों पर पड़ सकता है। अगर बिजली आपूर्ति में बाधा आती है, तो इसका असर उद्योग, व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देगा। ऐसे में सरकार के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह ऊर्जा कंपनियों के साथ अपने वित्तीय दायित्वों को समय पर पूरा करे।

    अडानी ग्रुप का बांग्लादेश में बिजली उत्पादन से जुड़ा प्रोजेक्ट वहां की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस वजह से बकाया भुगतान का मुद्दा केवल एक कारोबारी विवाद नहीं, बल्कि एक बड़े ऊर्जा और आर्थिक सवाल के रूप में देखा जा रहा है। यदि इस पर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह चुनावी माहौल में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। इस मामले ने बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल खड़े किए हैं। लगातार बढ़ते बकाए और भुगतान में देरी यह संकेत देते हैं कि सरकार वित्तीय दबाव का सामना कर रही है। चुनाव से पहले इस तरह की खबरें राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती हैं।

    फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड इस बकाया भुगतान को लेकर क्या कदम उठाता है और क्या दोनों पक्षों के बीच कोई समाधान निकल पाता है। अगर भुगतान समय पर हो जाता है, तो बिजली आपूर्ति सामान्य बनी रह सकती है। लेकिन अगर विवाद लंबा खिंचता है, तो इसका असर बांग्लादेश की ऊर्जा व्यवस्था और राजनीतिक माहौल दोनों पर पड़ सकता है।

  • मलेशिया में पीएम मोदी का संबोधन: भारत मलेशिया संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाना हमारी प्राथमिकता

    मलेशिया में पीएम मोदी का संबोधन: भारत मलेशिया संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाना हमारी प्राथमिकता


    नई दिल्ली । मलेशिया की राजधानी में प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में दोनों देशों के बीच गहरे और गतिशील संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने अनवर इब्राहिम के स्वागत के लिए हृदय से आभार जताया और कहा कि मलेशिया ने अपनी परंपराओं और जीवन शैली को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया जो उन्हें हमेशा याद रहेगा। उन्होंने मित्रता की ऊँचाई और गहराई का अनुभव करने की बात कही और इस विशेष स्वागत के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

    पीएम मोदी ने कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें तीसरी बार मलेशिया आने का अवसर मिला है और अनवर इब्राहिम के कार्यकाल में उन्हें चौथी बार मिलने का मौका मिल रहा है। यह दोनों देशों के बीच बढ़ती सक्रियता और सहयोग की गति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों ने जो गति और गहराई हासिल की है वह प्रेरणादायक है और इसके लिए उन्होंने मलेशिया के प्रधानमंत्री के योगदान को सराहा।

    संबोधन में उन्होंने कहा कि आज भारत और मलेशिया का सहयोग कृषि विनिर्माण क्लीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गहरा हुआ है। इसके साथ ही स्किल डेवलपमेंट और क्षमता निर्माण कैपेसिटी बिल्डिंग में भी दोनों देश अहम साझेदार बन चुके हैं। रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी लगातार मजबूत हो रहा है जो क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

    पीएम मोदी ने मलेशिया को आसियान की सफल अध्यक्षता के लिए बधाई दी और कहा कि मलेशिया के सहयोग से भारत आसियान संबंध और अधिक गहरे होंगे और विस्तार पाएंगे। उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों की असली ताकत पीपल टू पीपल टाई को बताया। भारतीय मूल के लगभग 30 लाख मलेशियाई नागरिक दोनों देशों के बीच एक जीवंत पुल लिविंग ब्रिज हैं। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें मलेशिया में डाइस्पोरा से मिलने का अवसर मिला जहां उन्होंने देखा कि लोगों का प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और प्रेम कितना गहरा है जो उनके लिए गर्व का विषय था।

    सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मित्र देशों का साथ महत्वपूर्ण है यह भी उन्होंने कहा। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत और मलेशिया दोनों मेरिटाइम नेबर्स हैं और उन्हें अपने संबंधों की पूरी क्षमता का उपयोग करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा का मूल संदेश यही है कि भारत मलेशिया के साथ मिलकर द्विपक्षीय संबंधों को नए स्तर पर ले जाना चाहता है और हर क्षेत्र में सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ बनाना चाहता है। अंत में उन्होंने एक बार फिर स्वागत के लिए मलेशियाई प्रधानमंत्री और उनकी टीम का आभार व्यक्त किया।

  • मुंबई में 2047 का संकल्प और सामाजिक समरसता का संदेश दिया संघ प्रमुख डॉ. भागवत ने

    मुंबई में 2047 का संकल्प और सामाजिक समरसता का संदेश दिया संघ प्रमुख डॉ. भागवत ने


    नई दिल्ली। /मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित नए क्षितिज कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि आज का भारत 1947 का भारत नहीं है और अब देश को तोड़ने की सोच रखने वाली शक्तियां खुद ही टूट जाएंगी। उनके अनुसार, वर्ष 2047 जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा तब अखंड भारत के उदय की कल्पना एक राष्ट्रीय संकल्प के रूप में की जानी चाहिए।

    उल्‍लेखनीय है कि डॉ. भागवत का यह वक्तव्य सांस्कृतिक और सामाजिक एकता के आधार पर भारत की एक व्यापक परिकल्पना को दर्शाता है। उन्होंने समाज की सजगता और एकजुटता को राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी पूरे समाज का दोष नहीं होती, बल्कि समाज की जागरूकता से विघटनकारी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

    अपने संबोधन में खून और संस्कृति का गहरा रिश्ता बताते हुए भागवत बोले कि केशधारी और सहजधारियों के बीच रोटी-बेटी का संबंध भी रहा है और गुरु ग्रंथ साहिब में केवल सिख संतों की ही नहीं, बल्कि पूरे देश के संतों की वाणी शामिल है। इस संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों समुदायों को अलग-अलग बताना गलत है, क्योंकि मूल रूप से वे एक ही सांस्कृतिक परंपरा के हिस्से हैं।

    समाज में समानता और समरसता के मुद्दे पर भी संघ प्रमुख ने अपनी बात खुलकर रखी। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुरूप जो भी आरक्षण व्यवस्था है, संघ उसका समर्थन करता है। उन्होंने जातिगत भेदभाव को समाज की एक बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि इसे पूरी तरह समाप्त होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने सदियों तक विषमता का सामना किया है, उनके उत्थान के लिए यदि समाज को लंबे समय तक प्रयास करना पड़े तो वह भी स्वीकार्य होना चाहिए।

    उनका मानना था कि समाज में समरसता आने पर राजनीति में भी जाति आधारित सोच स्वतः समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जाति अब व्यवस्था नहीं, बल्कि एक अव्यवस्था बन चुकी है और यह भावना धीरे-धीरे समाप्त हो रही है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि इसे सहज तरीके से खत्म करने का प्रयास किया जाए।

    भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी उन्होंने स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि संघ शुद्धाचार का समर्थक है और मानता है कि भ्रष्टाचार केवल कानून और सजा से समाप्त नहीं होगा, बल्कि संस्कारों के माध्यम से ही इसका समाधान संभव है। उन्होंने चाणक्य के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे पानी में मछली कब पानी पी जाती है, यह पता नहीं चलता, वैसे ही भ्रष्टाचार कब और कैसे हो जाता है, यह समझना मुश्किल होता है। इसलिए समाज में नैतिक मूल्यों और संस्कारों का विकास सबसे जरूरी है।

    जनसंख्या संतुलन के विषय पर भी उन्होंने विचार रखे। उनका कहना रहा कि समाज के स्वास्थ्य और संतुलन के लिए परिवार व्यवस्था पर विचार होना चाहिए। साथ ही उन्होंने मतांतरण और घुसपैठ को जनसंख्या असंतुलन के प्रमुख कारणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन लालच या दबाव में होने वाले मतांतरण को रोकना जरूरी है और घर वापसी को इसका उपाय बताया।

    इसके साथ ही उन्होंने रोजगार और नई तकनीक के विषय पर भी संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकें आने से रोजगार कम नहीं होने देना चाहिए। तकनीक का विरोध करने के बजाय हमें ऐसा आर्थिक तंत्र विकसित करना चाहिए जिससे हाथ से काम करने वालों की प्रतिष्ठा बढ़े और सभी को रोजगार मिले। उन्होंने कहा कि देश में काम करने वाले हाथ अधिक हैं, इसलिए उन्हें काम देना जरूरी है, अन्यथा बेरोजगारी से नक्सलवाद, हिंसा और सामाजिक समस्याएं बढ़ती हैं।

    उन्होंने अर्थव्यवस्था के विकेंद्रीकरण पर भी जोर दिया और कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने से समाज में स्थिरता और सुरक्षा बढ़ेगी। पारंपरिक व्यवसायों और महिला सशक्तीकरण के लिए एक जिला, एक उत्पाद जैसे अभियानों को उन्होंने प्रभावी बताया। कृषि के विषय में उन्होंने जैविक खेती को भविष्य का रास्ता बताते हुए कहा कि इससे खेती की लागत कम होती है और किसान आत्मनिर्भर बनता है। यदि किसानों को भंडारण और प्रसंस्करण की बेहतर सुविधाएं मिलें तो उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और कर्ज की आवश्यकता भी कम पड़ेगी। उन्होंने इस दिशा में सरकार और समाज दोनों के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता बताई।

    उन्होंने जीडीपी को देश की आर्थिक स्थिति का एक अपूर्ण मापक बताते हुए कहा कि इसमें महिलाओं के श्रम और घरेलू योगदान का समुचित आकलन नहीं होता। उनके अनुसार, देश की वास्तविक आर्थिक ताकत का मूल्यांकन करने के लिए ऐसे मापदंड विकसित करने होंगे जो समाज के हर वर्ग के योगदान को पहचान सकें।इस कार्यक्रम में फिल्म जगत और प्रशासनिक सेवा से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियां भी उपस्थित रहीं, जिनमें अनन्या पांडे, करण जौहर, जैकी श्रॉफ, मिलिंद और मनीषा शामिल थे।

  • आईएनएस सुदर्शिनी ने लोकायन 26 से पहले पोर्ट कॉल पूरा किया, भारत ओमान समुद्री संबंधों को दी नई मजबूती

    आईएनएस सुदर्शिनी ने लोकायन 26 से पहले पोर्ट कॉल पूरा किया, भारत ओमान समुद्री संबंधों को दी नई मजबूती


    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना की सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी ने 05 फरवरी 2026 को ओमान के शहर सलालाह में अपना पहला पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक पूरा किया। यह कदम जहाज की दस महीने लंबी महासागरीय यात्रा लोकायन 26 में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इस यात्रा का उद्देश्य भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को प्रदर्शित करना और वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत के माध्यम से विश्व परिवार के साथ सद्भावना को बढ़ावा देना है।

    पोर्ट कॉल के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने ओमान की रॉयल नेवी के साउदर्न नेवल एरिया कमांडर कैप्टन मोहम्मद अल ग़ैलेनी और रॉयल नेवी ऑफ़ ओमान के जहाज अल मोज़ेर के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन मोहम्मद अल महारी से बातचीत की। इन वार्ताओं में दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक समुद्री संबंधों और साझा हितों पर चर्चा हुई। साथ ही दोनों नौसेनाओं के बीच मित्रता और पेशेवर सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसके बाद रॉयल नेवी ऑफ़ ओमान के अधिकारियों के लिए भी आईएनएस सुदर्शिनी ने एक यात्रा का आयोजन किया, जिससे आपसी समझ और साझेदारी और गहरी हुई।

    सामाजिक संपर्क और जनसंपर्क के उद्देश्य से आईएनएस सुदर्शिनी को जनता के लिए खुला रखा गया। इस दौरान 600 से अधिक आगंतुकों ने तीन-मास्टेड बार्क जहाज का भ्रमण किया। इनमें स्कूल के बच्चे भी शामिल थे, जिन्हें समुद्री यात्रा और नौकायन की बारीकियों का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया। इस प्रकार पोर्ट कॉल ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ समुद्री संस्कृति और शिक्षा को भी बढ़ावा दिया।

    अब आईएनएस सुदर्शिनी लोकायन 26 के अगले चरण की ओर बढ़ रही है। यह यात्रा भारत की समुद्री विरासत को विश्व स्तर पर फैलाने के साथ-साथ मित्रता, उत्कृष्टता और समुद्री सद्भावना का संदेश देती रहेगी। पाल फहराए और उत्साह बनाये रखते हुए यह शिप समुद्री उत्कृष्टता का प्रतीक बनकर अपने मिशन को जारी रखेगी।

  • शबरी जयंती पर CM डॉ. मोहन यादव ने दी शुभकामनाएं, मां शबरी को भक्ति की मिसाल बताया

    शबरी जयंती पर CM डॉ. मोहन यादव ने दी शुभकामनाएं, मां शबरी को भक्ति की मिसाल बताया


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मां शबरी जयंती के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम की परम भक्त मां शबरी ने आस्था, श्रद्धा और भक्ति को जीवन का सर्वोच्च मार्ग बताया। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि मां शबरी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा है और उनके आदर्शों को आत्मसात करना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मां शबरी ने अपनी साधना और भक्ति के माध्यम से यह सिखाया कि सच्ची भक्ति में जाति, वर्ग या सामाजिक स्थिति का कोई महत्व नहीं होता। उन्होंने कहा कि मां शबरी का जीवन संदेश है कि श्रद्धा और समर्पण से हर मुश्किल आसान हो जाती है। मुख्यमंत्री ने मां से प्रार्थना की कि उनकी कृपा सभी पर बनी रहे और देश-समाज में शांति, समृद्धि और सुख-शांति बनी रहे।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शबरी जयंती का पर्व हमें प्रेम, धैर्य और सेवा की भावना से प्रेरित करता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस पावन दिन पर भगवान श्रीराम और मां शबरी की भक्ति में लीन होकर अपने जीवन को सकारात्मक बनाएं और समाज में भाईचारे का संदेश फैलाएं।

  • CIBIL स्कोर खराब है तो क्या नहीं मिलेगा नया क्रेडिट कार्ड? जानिए क्या कहता है नियम

    CIBIL स्कोर खराब है तो क्या नहीं मिलेगा नया क्रेडिट कार्ड? जानिए क्या कहता है नियम


    नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग करनी हो फ्लाइट टिकट बुक करनी हो या अचानक आई जरूरत आज के दौर में क्रेडिट कार्ड केवल सुविधा नहीं बल्कि फाइनेंशियल लाइफ का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति नया क्रेडिट कार्ड अप्लाई करता है सबसे पहले जिस चीज की जांच होती है वह है उसका CIBIL स्कोर। ऐसे में जिन लोगों का सिबिल स्कोर खराब है उनके मन में यही सवाल उठता है कि क्या अब उन्हें कभी नया क्रेडिट कार्ड नहीं मिलेगा? चलिए जानते हैं।
    क्या है CIBIL स्कोर?
    CIBIL स्कोर एक तीन अंकों की संख्या होती है जो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को दर्शाती है। यह स्कोर 300 से 900 के बीच होता है। आमतौर पर 750 या उससे ज्यादा स्कोर को बैंक अच्छा मानते हैं। वहीं 600 से नीचे का स्कोर यह संकेत देता है कि आपने पहले लोन या क्रेडिट कार्ड के भुगतान में लापरवाही की है। ऐसे में बैंक आपको ‘हाई रिस्क कस्टमर’ मान लेते हैं।

    क्या RBI ने खराब स्कोर वालों पर रोक लगाई है?
    यह जानना जरूरी है कि भारतीय रिजर्व बैंक RBIने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है जो खराब CIBIL स्कोर वाले व्यक्ति को क्रेडिट कार्ड देने से रोकता हो। दरअसल क्रेडिट कार्ड जारी करना पूरी तरह बैंकों और कार्ड जारी करने वाली कंपनियों की नीति पर निर्भर करता है। बैंक अपने रिस्क को देखते हुए शर्तें तय करते हैं।

    खराब CIBIL स्कोर वालों के लिए कोई ऑप्शन?
    अगर आपका स्कोर कम है तब भी कुछ रास्ते खुले हैं। सबसे सेफ ऑप्शन है सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड। इसमें आपको बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट FDकरानी होती है और उसी के बदले कार्ड मिलता है। इसके अलावा परिवार के किसी सदस्य के कार्ड पर ऐड-ऑन कार्ड भी लिया जा सकता है। कुछ फिनटेक कंपनियां और NBFC सीमित क्रेडिट लिमिट के साथ कार्ड ऑफर करती हैं ताकि यूजर धीरे-धीरे अपनी साख सुधार सके।

    क्रेडिट कार्ड से कैसे सुधरेगा सिबिल स्कोर?
    सही तरीके से इस्तेमाल किया गया क्रेडिट कार्ड आपके खराब CIBIL स्कोर को सुधारने में मदद कर सकता है। समय पर बिल भुगतान लिमिट से कम खर्च और नियमित उपयोग से 6 से 12 महीनों में स्कोर में अच्छा सुधार देखा जा सकता है। एक बार स्कोर बेहतर होते ही अनसिक्योर्ड यानी बिना FD वाले क्रेडिट कार्ड के रास्ते भी खुल जाते हैं।

  • पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन की जयंती पर CM मोहन यादव ने किया स्मरण, शिक्षा और गरीब कल्याण को बताया जीवन लक्ष्य

    पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन की जयंती पर CM मोहन यादव ने किया स्मरण, शिक्षा और गरीब कल्याण को बताया जीवन लक्ष्य


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. जाकिर हुसैन का जीवन शिक्षा, सामाजिक न्याय और गरीब कल्याण के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि डॉ. जाकिर हुसैन ने देश के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए जो योगदान दिया, वह सदैव याद रखा जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि डॉ. जाकिर हुसैन शिक्षा के क्षेत्र में विशेष रूप से सक्रिय रहे और उन्होंने शिक्षा को समाज के विकास का मूलाधार माना। उनकी सोच में शिक्षा को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता साफ झलकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी शिक्षा और सामाजिक कल्याण के लिए की गई मेहनत और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि डॉ. जाकिर हुसैन का जीवन हमें यह संदेश देता है कि देश की प्रगति में शिक्षा और सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि हम सभी को उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की आवश्यकता है और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास करने चाहिए।

  • सात फेरों का खूनी अंत: शराबी पति ने पत्नी पर दागीं 3 गोलियां, मासूम बच्चों के सिर से उठा मां का साया।

    सात फेरों का खूनी अंत: शराबी पति ने पत्नी पर दागीं 3 गोलियां, मासूम बच्चों के सिर से उठा मां का साया।

    ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र स्थित दर्पण कॉलोनी उस वक्त दहल उठी जब शनिवार रात करीब 10 बजे गोलियों की तड़तड़ाहट से सन्नाटा चीर गया। यह आवाज किसी बाहरी हमले की नहीं बल्कि घर के भीतर पनप रहे उस गुस्से की थी जिसने एक सुहागिन का सुहाग ही कातिल बना दिया। सोनू तोमर नाम के युवक ने अपनी पत्नी रुचि तोमर के साथ हुए मामूली विवाद के बाद आपा खो दिया और अपनी पिस्टल से एक के बाद एक आधा दर्जन राउंड फायर झोंक दिए। रुचि के शरीर में तीन गोलियां लगीं और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

    घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में कोहराम मच गया। जब परिजन कमरे की ओर भागे तो वहां का मंजर खौफनाक था। रुचि खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थी और आरोपी सोनू मौके से फरार हो चुका था। मृतका के ससुर ने तत्काल पुलिस को सूचना दी जिसके बाद एफएसएल (FSL) की टीम और पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपी सोनू तोमर शराब की लत का शिकार था और कोई काम-धंधा नहीं करता था। घर का खर्च उसके पिता की पेंशन और किराये की आय से चलता था।

    आरोपी ने पुलिस पूछताछ में जो दलील दी वह चौंकाने वाली है। उसका कहना था कि घर में आए दिन कलेश होता था और उसे खुद खाना बनाने से लेकर साफ-सफाई तक का काम करना पड़ता था। शनिवार की रात भी खाना बनाने की बात को लेकर शुरू हुआ विवाद धक्का-मुक्की तक जा पहुंचा और अंततः हत्या में बदल गया। हालांकि पुलिस इस थ्योरी की गहनता से जांच कर रही है क्योंकि हत्या के पीछे की असल वजह अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

    इस वारदात ने दो मासूम बच्चों के सिर से मां का साया छीन लिया है। 11 साल का आदित्य और 14 साल की राधिका अब उस सदमे में हैं जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को घर के पास से ही गिरफ्तार कर लिया है लेकिन वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्टल अभी बरामद होना बाकी है। ग्वालियर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है।

  • इंदौर: शादी का झांसा देकर युवती से कई बार दुष्कर्म, आरोपी रितिक कुशवाह गिरफ्तार; पॉक्सो एक्ट में भी केस दर्ज

    इंदौर: शादी का झांसा देकर युवती से कई बार दुष्कर्म, आरोपी रितिक कुशवाह गिरफ्तार; पॉक्सो एक्ट में भी केस दर्ज


    इंदौर । मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के तेजाजी नगर थाना क्षेत्र से सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने दोस्ती का फायदा उठाते हुए एक युवती को शादी का झांसा दिया और उसके साथ कई बार दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया है।

    तेजाजी नगर थाना प्रभारी देवेंद्र मरकाम के अनुसार पीड़िता शनिवार को अपनी मां के साथ थाने पहुंची थी और आपबीती सुनाई। शिकायत के मुताबिक आरोपी रितिक कुशवाह की पहचान युवती से साल 2022 में हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और आरोपी ने युवती को प्रेम जाल में फंसाकर शादी करने का वादा किया। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने उस समय भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे जब वह नाबालिग थी इसी आधार पर पुलिस ने मामले में दुष्कर्म की धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो ) एक्ट भी जोड़ा है।

    घटनाक्रम के विवरण के अनुसार आरोपी रितिक ने जुलाई 2025 में पीड़िता को अपने दोस्त रमन के कमरे पर ले जाकर पहली बार दुष्कर्म किया। इसके बाद नवंबर माह में उसने लिबोंदी क्षेत्र में अपने एक अन्य दोस्त के घर पर भी युवती के साथ गलत काम किया। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर करीब 6 बार उसके साथ बलात्कार किया। जब भी युवती ने शादी का दबाव बनाया आरोपी टालमटोल करने लगा और अंततः मुकर गया।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने रितिक कुशवाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस अपराध में उसके दोस्तों की क्या भूमिका थी। इंदौर पुलिस का कहना है कि महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोई भी कोताही नहीं बरती जाएगी और आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।