Blog

  • मानसून की सुस्ती से बढ़ी कृषि क्षेत्र की चिंता, कपास-सोयाबीन की बुआई घटी, टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ सकता है असर

    मानसून की सुस्ती से बढ़ी कृषि क्षेत्र की चिंता, कपास-सोयाबीन की बुआई घटी, टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ सकता है असर

    नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की धीमी रफ्तार ने देश में खरीफ सीजन की तैयारियों पर असर डालना शुरू कर दिया है। अब तक सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश दर्ज होने के कारण कपास और सोयाबीन जैसी प्रमुख नकदी फसलों की बुआई अपेक्षा से काफी पीछे चल रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो इसका असर कृषि उत्पादन के साथ-साथ उद्योगों पर भी दिखाई दे सकता है।

    कृषि मंत्रालय के 19 जून तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में कपास की बुआई 17.13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 22.82 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार करीब 5.69 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में कपास बोई गई है। कपास के रकबे में आई यह गिरावट संकेत दे रही है कि किसान फिलहाल इस फसल की ओर कम रुझान दिखा रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि अगले कुछ सप्ताह में कपास की बुआई में तेजी नहीं आई तो कच्चे कपास और यार्न की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे वस्त्र उद्योग की लागत बढ़ने की आशंका है।

    सोयाबीन की सुस्ती से तिलहन क्षेत्र भी प्रभावित

    कपास के साथ-साथ तिलहन फसलों की बुआई भी दबाव में है। इसकी प्रमुख वजह सोयाबीन की धीमी बुआई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में सोयाबीन का रकबा 2.50 लाख हेक्टेयर था, जो इस बार घटकर 1.30 लाख हेक्टेयर रह गया है। यानी करीब 1.20 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है।

    सोयाबीन के कमजोर प्रदर्शन का असर कुल तिलहन क्षेत्र पर भी पड़ा है। पिछले साल जहां तिलहन फसलों का रकबा 8.11 लाख हेक्टेयर था, वहीं इस बार यह घटकर 7.24 लाख हेक्टेयर रह गया है। हालांकि मूंगफली और सूरजमुखी की खेती में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन वह सोयाबीन की कमी की भरपाई नहीं कर पा रही है।

    धान और बाजरा किसानों की पहली पसंद बने

    इसके विपरीत धान और मोटे अनाजों की बुआई में वृद्धि दर्ज की गई है। धान का रकबा 4.26 लाख हेक्टेयर बढ़कर 12.36 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। वहीं बाजरा सहित मोटे अनाजों का क्षेत्रफल 2.14 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.05 लाख हेक्टेयर हो गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि धान और मोटे अनाजों में सरकारी खरीद की मजबूत व्यवस्था और अपेक्षाकृत कम जोखिम किसानों को आकर्षित कर रहे हैं। दूसरी ओर कपास और सोयाबीन में वैश्विक बाजार की अनिश्चितता तथा कीट प्रकोप का खतरा किसानों को सतर्क बना रहा है।

    जल प्रबंधन व्यवस्था पर मूडीज की चिंता

    इस बीच, मूडीज रेटिंग्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत की जल प्रबंधन व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। एजेंसी का कहना है कि पानी के आवंटन, मूल्य निर्धारण और वितरण से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाएं देश के लिए वित्तीय और क्रेडिट जोखिम पैदा कर रही हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार यदि जल प्रबंधन ढांचे में समय रहते सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में राज्यों की वित्तीय स्थिति और उनकी क्रेडिट रेटिंग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    खेती में खप रहा 80 फीसदी ताजा पानी

    मूडीज के मुताबिक भारत में पानी की कीमतें विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के लिए अत्यधिक रियायती हैं। देश के कुल ताजे जल संसाधनों का लगभग 80 फीसदी हिस्सा खेती में उपयोग हो रहा है। सब्सिडी आधारित व्यवस्था के कारण पानी का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जिससे भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।

    एआई और डाटा सेंटर भी बढ़ा रहे दबाव

    रिपोर्ट में एक नए उभरते खतरे की ओर भी संकेत किया गया है। देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और क्लाउड कंप्यूटिंग के विस्तार के साथ बड़े पैमाने पर डाटा सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है।

    मूडीज का मानना है कि डाटा सेंटरों की बढ़ती जल मांग पहले से दबाव झेल रही जल आपूर्ति व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन सकती है। आने वाले वर्षों में सरकारों और यूटिलिटी कंपनियों को इस अतिरिक्त दबाव से निपटने के लिए प्रभावी रणनीति बनानी होगी।

  • राज कुमार की बेबाकी के आगे क्यों टिक गए ओम पुरी जानिए दिलचस्प किस्सा

    राज कुमार की बेबाकी के आगे क्यों टिक गए ओम पुरी जानिए दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कई कलाकार अपनी मजबूत पर्सनैलिटी और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते रहे हैं और राज कुमार उनमें सबसे अलग माने जाते थे। उनकी छवि ऐसे अभिनेता की थी जो सेट पर किसी से भी बिना झिझक अपनी बात कह देते थे और कई बार यह बात सीधे तौर पर किसी की बेइज्जती जैसी लगती थी। लेकिन इसी इंडस्ट्री में एक ऐसा भी किस्सा सामने आता है जिसमें उनके सामने एक ऐसे अभिनेता आए जिनके बारे में कहा जाता है कि राज कुमार भी उनके सामने कुछ कहने से बच गए।

    यह कहानी जुड़ी है ओम पुरी से जिनका शुरुआती फिल्मी सफर काफी संघर्षों से भरा रहा। ओम पुरी जब इंडस्ट्री में आए तो उन्हें अपने लुक्स और साधारण पृष्ठभूमि के कारण कई तरह की टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। उस दौर में शबाना आजमी ने भी उनके लुक्स को लेकर हल्का सा कमेंट किया था जिससे उन्हें यह अहसास हुआ कि फिल्म इंडस्ट्री में स्वीकार किए जाना आसान नहीं होता।

    इसी माहौल में ओम पुरी के मन में यह डर भी बैठ गया था कि जब वे राज कुमार जैसे सख्त और बेबाक अभिनेता के साथ काम करेंगे तो शायद उन्हें भी किसी तरह की तीखी टिप्पणी सुननी पड़ सकती है। इस डर की वजह से उन्होंने मन ही मन यह तय कर लिया था कि अगर शूटिंग के दौरान कुछ अपमानजनक हुआ तो वह फिल्म बीच में ही छोड़ देंगे।

    लेकिन वास्तविकता उनके डर से बिल्कुल अलग साबित हुई। ओम पुरी की एक्स वाइफ सीमा कपूर ने एक इंटरव्यू में बताया कि इंडस्ट्री में नए कलाकारों को कई बार उनके सीनियर्स द्वारा टारगेट किया जाता था और उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने की कोशिश भी होती थी। लेकिन ओम पुरी ने अपने करियर में आगे बढ़ते हुए कभी भी किसी जूनियर के साथ वैसा व्यवहार नहीं किया।

    सीमा कपूर के अनुसार जब ओम पुरी ने राज कुमार के साथ काम किया तो एक अलग ही स्थिति देखने को मिली। राज कुमार की पर्सनैलिटी और उनके अभिनय का स्तर इतना मजबूत था कि वह सामने वाले को अपने आप सम्मान देने पर मजबूर कर देता था। ओम पुरी को पूरा डर था कि शायद उनके साथ भी कुछ अपमानजनक व्यवहार होगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

    बताया जाता है कि राज कुमार ने ओम पुरी के साथ किसी तरह की बेइज्जती या तंज जैसी बात नहीं की। इसका कारण यह माना जाता है कि ओम पुरी का अभिनय और उनका गंभीर रवैया इतना प्रभावशाली था कि राज कुमार ने उनके प्रति एक अलग सम्मान बनाए रखा। यह वही दौर था जब ओम पुरी अपने काम को लेकर पूरी तरह समर्पित थे और उनकी एक्टिंग इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना रही थी।

    सीमा कपूर ने यह भी बताया कि उस समय फिल्म इंडस्ट्री में नए कलाकारों को कई तरह की मानसिक चुनौतियों से गुजरना पड़ता था लेकिन टैलेंट और आत्मविश्वास धीरे धीरे उन्हें मजबूत बनाता था। ओम पुरी ने भी इसी संघर्ष से सीखकर अपने करियर में आगे बढ़ते हुए कभी किसी के साथ गलत व्यवहार नहीं किया।

    यह किस्सा आज भी फिल्म इंडस्ट्री के उस दौर की झलक दिखाता है जब पर्सनैलिटी और टैलेंट दोनों ही किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ी ताकत होते थे।

  • फिल्मफेयर 1962 की वह रात जब दिलीप कुमार रह गए पीछे राज कपूर ने मारी बाजी

    फिल्मफेयर 1962 की वह रात जब दिलीप कुमार रह गए पीछे राज कपूर ने मारी बाजी


    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में कई ऐसे मौके आए जब दर्शकों की पसंद और अवॉर्ड के फैसलों में अंतर देखने को मिला। ऐसा ही एक यादगार किस्सा साल 1962 के फिल्मफेयर अवॉर्ड से जुड़ा है। उस समय दिलीप कुमार और राज कपूर दोनों ही अपने करियर के शिखर पर थे और दोनों की फिल्मों ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी थी। यह मुकाबला केवल दो कलाकारों के बीच नहीं था बल्कि दो अलग अलग तरह की फिल्मों और सोच के बीच भी था।

    साल 1961 में दिलीप कुमार की फिल्म गंगा जमुना ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की। इस फिल्म में उन्होंने न सिर्फ मुख्य भूमिका निभाई बल्कि इसकी कहानी और पटकथा में भी योगदान दिया। यह फिल्म ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित थी और इसमें भाईचारे सामाजिक संघर्ष और पारिवारिक भावनाओं को गहराई से दिखाया गया था। दिलीप कुमार ने गंगा नाम के किरदार में ऐसा अभिनय किया जिसे आज भी उनके सबसे मजबूत प्रदर्शनों में गिना जाता है। वैजयंती माला ने भी इस फिल्म में अहम भूमिका निभाई और कहानी को और प्रभावशाली बनाया। यह फिल्म उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही और इसे आलोचकों की भी खूब सराहना मिली।

    इसी दौरान राज कपूर की फिल्म जिस देश में गंगा बहती है भी चर्चा में थी। इस फिल्म में राज कपूर ने राजू नाम के एक ऐसे युवक का किरदार निभाया था जो अनाथ होता है और बाद में डाकुओं के समूह में पहुंच जाता है। कहानी में वह देखता है कि यह समूह अमीरों से लूटकर गरीबों की मदद करता है। धीरे धीरे उसका नजरिया बदलता है और वह अहिंसा और सुधार की राह पर चलता है। इस फिल्म का सामाजिक संदेश बहुत मजबूत था और यह आम जनता के बीच बेहद लोकप्रिय हुई।

    जब फिल्मफेयर अवॉर्ड 1962 में घोषणा हुई तो सभी को उम्मीद थी कि बेस्ट एक्टर का पुरस्कार दिलीप कुमार को मिलेगा क्योंकि गंगा जमुना को एक मास्टरपीस माना जा रहा था। लेकिन नतीजा चौंकाने वाला रहा और यह अवॉर्ड राज कपूर को मिल गया। उनके किरदार की सामाजिक न्याय की भावना और बदलाव की कहानी को निर्णायक माना गया। उस समय जूरी ने माना कि राज कपूर का किरदार समाज में सकारात्मक संदेश देने वाला था और यही उन्हें बढ़त दिला गया।

    इस फैसले ने फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक चर्चा पैदा की। एक तरफ दिलीप कुमार की गहरी भावनात्मक अभिनय शैली थी और दूसरी तरफ राज कपूर का सामाजिक संदेश से भरा चरित्र था। अंत में पुरस्कार उस किरदार को मिला जिसने सामाजिक बदलाव की सोच को दर्शाया।

    यह घटना आज भी बॉलीवुड इतिहास में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में याद की जाती है जब कला की श्रेष्ठता केवल अभिनय से नहीं बल्कि उसके सामाजिक प्रभाव से भी तय हुई।

  • फिलाडेल्फिया में फ्रांस का जलवा एम्बाप्पे के दो गोल से नॉकआउट में एंट्री

    फिलाडेल्फिया में फ्रांस का जलवा एम्बाप्पे के दो गोल से नॉकआउट में एंट्री


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस ने एक बार फिर अपना दमखम दिखाते हुए इराक को 3 0 से हराकर नॉकआउट राउंड में जगह पक्की कर ली। फिलाडेल्फिया में खेले गए इस मुकाबले में बारिश और खराब मौसम भी खेल का रोमांच कम नहीं कर सके और पूरे मैच में फ्रांस का दबदबा बना रहा। इस जीत के सबसे बड़े हीरो रहे Kylian Mbappé जिन्होंने दो गोल दागकर टीम को आसान जीत दिलाई।

    मैच की शुरुआत से ही फ्रांस ने आक्रामक खेल दिखाया। एम्बाप्पे ने 14वें मिनट में पहला गोल कर टीम को बढ़त दिला दी। इसके बाद इराक की टीम संभलने की कोशिश करती रही लेकिन फ्रांस का दबाव लगातार बढ़ता गया। दूसरे हाफ में 54वें मिनट में एम्बाप्पे ने एक और गोल कर स्कोर 2 0 कर दिया। यह गोल इराकी डिफेंडर की गलती का फायदा उठाकर किया गया, जिसमें एम्बाप्पे ने अपनी तेज रफ्तार और सटीक फिनिशिंग का बेहतरीन प्रदर्शन किया।

    इसके बाद उस्मान डेम्बेले ने तीसरा गोल कर फ्रांस की जीत पर मुहर लगा दी। इस जीत के साथ फ्रांस ने न केवल नॉकआउट राउंड में जगह बनाई बल्कि यह भी साबित कर दिया कि वह इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत दावेदार टीमों में शामिल है।

    यह मुकाबला मौसम की वजह से भी चर्चा में रहा। पहले हाफ के बाद तेज बारिश और तूफान की चेतावनी के चलते मैच को करीब दो घंटे तक रोकना पड़ा। मैदान पर पानी भर जाने के कारण खेल दोबारा शुरू कराना चुनौतीपूर्ण रहा लेकिन ग्राउंड स्टाफ की मेहनत के बाद मैच फिर से शुरू हुआ और फ्रांस ने अपनी लय बनाए रखी।

    इस मुकाबले में एम्बाप्पे के लिए यह और भी खास रहा क्योंकि यह उनका 100वां अंतरराष्ट्रीय मैच था। अपने करियर के इस अहम पड़ाव पर उन्होंने दो गोल कर इसे यादगार बना दिया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने विश्व कप में अपने गोलों की संख्या 16 तक पहुंचा दी और कई दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया।

    एम्बाप्पे ने इस उपलब्धि के साथ जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोज की बराबरी कर ली और ब्राजील के दिग्गज रोनाल्डो को पीछे छोड़ दिया। अब उनसे आगे केवल अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी हैं जिनके नाम 18 विश्व कप गोल दर्ज हैं।

    इराक की टीम के लिए यह मैच निराशाजनक रहा। टीम के प्रमुख स्ट्राइकर अयमेन हुसैन चोट के कारण मैदान छोड़ने को मजबूर हुए जिससे टीम की आक्रामक क्षमता कमजोर पड़ गई। इराक के लिए यह विश्व कप में सिर्फ दूसरा ही मौका था और इस हार के बाद उनका आगे का सफर काफी मुश्किल हो गया है।

    दूसरी ओर ग्रुप I से नॉर्वे ने भी नॉकआउट में जगह बना ली है। इस ग्रुप में मुकाबला बेहद रोमांचक रहा जिसमें नॉर्वे ने सेनेगल को 3 2 से हराया। नॉर्वे की जीत में एर्लिंग हालैंड ने दो गोल दागे जबकि मार्कस पेडरसन ने एक गोल किया। सेनेगल की ओर से इस्माइला सार ने दोनों गोल किए।

    इस तरह फ्रांस और नॉर्वे दोनों ने नॉकआउट में प्रवेश कर लिया है और अब आगे के मुकाबलों में खिताब की दौड़ और भी दिलचस्प हो गई है।

  • एमपी में मानसून की रफ्तार सुस्त, 48 जिले बारिश में पिछड़े, आज 30 जिलों में वर्षा और 4 जिलों में लू का अलर्ट

    एमपी में मानसून की रफ्तार सुस्त, 48 जिले बारिश में पिछड़े, आज 30 जिलों में वर्षा और 4 जिलों में लू का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की देरी का असर साफ दिखाई दे रहा है। जून के अधिकांश दिन सूखे गुजरने से प्रदेश में अब तक सामान्य से 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 70.9 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जबकि केवल 34.3 मिमी वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर सहित 48 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है।

    मानसून में देरी बनी कम बारिश की बड़ी वजह

    प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार तय समय से 8 दिन बाद भी मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। मौसम विभाग ने अगले दो से तीन दिनों में मानसून के आगमन की संभावना जताई है। आमतौर पर मानसून के जल्द सक्रिय होने पर तेज बारिश का दौर शुरू हो जाता है, जिससे वर्षा के आंकड़ों में तेजी आती है।

    हालांकि पूरे जून माह में प्री-मानसूनी गतिविधियां जारी हैं, फिर भी पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों में औसत से 71 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में औसत से 33 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    इन जिलों में बारिश सामान्य से कम

    अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, बुरहानपुर, दतिया, देवास, धार, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, सीहोर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।

    इन जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा

    भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, गुना, मंदसौर, नीमच और श्योपुर ऐसे जिले रहे जहां औसत से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।

    प्री-मानसून सक्रिय, कई जिलों में बरसे बादल

    सोमवार को प्रदेश में प्री-मानसूनी गतिविधियां तेज रहीं। धार में करीब 2 इंच और भोपाल में लगभग पौन इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा इंदौर, खंडवा, रायसेन, राजगढ़, उज्जैन, छिंदवाड़ा, जबलपुर, खजुराहो, सागर, सतना, सिवनी, बड़वानी, शाजापुर और सीहोर समेत कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर देखने को मिला।

    पचमढ़ी रहा सबसे ठंडा, दतिया सबसे गर्म

    सोमवार को पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। धार में 32.9, सिवनी में 34.2, रायसेन में 35.4 और शाजापुर में 35.7 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। वहीं दतिया सबसे गर्म रहा, जहां पारा 42.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सीधी, खजुराहो, टीकमगढ़-नौगांव और नरसिंहपुर में भी तापमान 40 डिग्री या उससे अधिक रहा। प्रदेश के प्रमुख शहरों में इंदौर का तापमान 34.7 डिग्री, उज्जैन 35 डिग्री, भोपाल 35.2 डिग्री, जबलपुर 36 डिग्री और ग्वालियर 40.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    आज का मौसम: 4 जिलों में लू, 30 जिलों में बारिश की संभावना

    मौसम विभाग ने मंगलवार को जबलपुर, मंडला, दमोह और उमरिया जिलों में हीटवेव (लू) का अलर्ट जारी किया है। वहीं ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, भोपाल, सीहोर, हरदा, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, इंदौर, धार, बड़वानी, आलीराजपुर और झाबुआ में तेज आंधी के साथ बारिश होने की संभावना है।

    इसके अलावा नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, कटनी, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गर्मी का असर बना रह सकता है।

  • ऑस्ट्रिया पर जीत के साथ मेसी ने रचा इतिहास वर्ल्ड कप के सर्वाधिक गोल का नया कीर्तिमान

    ऑस्ट्रिया पर जीत के साथ मेसी ने रचा इतिहास वर्ल्ड कप के सर्वाधिक गोल का नया कीर्तिमान


    नई दिल्ली। डलास में खेले गए फीफा वर्ल्ड कप मुकाबले में अर्जेंटीना ने ऑस्ट्रिया को 2 0 से हराकर नॉकआउट चरण में अपनी जगह पक्की कर ली। इस मुकाबले में सबसे बड़ा आकर्षण लियोनेल मेसी रहे जिन्होंने दो गोल करके इतिहास रच दिया। इसी प्रदर्शन के साथ Lionel Messi ने वर्ल्ड कप इतिहास में सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

    मैच की शुरुआत में अर्जेंटीना को पेनल्टी का मौका मिला। लॉटारो मार्टिनेज को बॉक्स के अंदर फाउल किया गया था। पूरे स्टेडियम में उम्मीद थी कि मेसी इस मौके को गोल में बदल देंगे लेकिन उनकी किक गोल पोस्ट से बाहर चली गई। इस चूक के बाद कुछ पल के लिए मैच का माहौल बदल गया और ऑस्ट्रिया की टीम को राहत मिली।

    हालांकि मेसी का खेल यहां से और खतरनाक हो गया। उन्होंने पहले हाफ के अंत से ठीक पहले गेंद को बॉक्स के किनारे लिया और शानदार नियंत्रण के साथ गोलकीपर के ऊपर से गेंद को नेट में पहुंचा दिया। यह गोल न केवल खूबसूरत था बल्कि ऐतिहासिक भी था क्योंकि इसी के साथ उन्होंने वर्ल्ड कप में सर्वाधिक गोल का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

    इस मैच में अर्जेंटीना की टीम ने मजबूत संतुलन दिखाया। मिडफील्ड में लगातार पासिंग और तेज मूवमेंट से टीम ने ऑस्ट्रिया पर दबाव बनाए रखा। ऑस्ट्रिया ने भी कुछ आक्रामक प्रयास किए लेकिन अर्जेंटीना के डिफेंस और गोलकीपर ने उन्हें सफल नहीं होने दिया।

    दूसरे हाफ में ऑस्ट्रिया ने वापसी की कोशिश की। फ्री किक और तेज काउंटर अटैक से उन्होंने अर्जेंटीना की रक्षा को चुनौती दी। लेकिन कप्तान मेसी लगातार टीम को आगे बढ़ाते रहे और मैच पर पकड़ बनाए रखी।

    स्टॉपेज टाइम में मेसी ने अपना दूसरा गोल भी दाग दिया। इस बार उन्होंने राइट साइड से अंदर की ओर ड्रिबल करते हुए गेंद को गोल की ओर भेजा। पहले शॉट को उनके साथी खिलाड़ी जूलियन अल्वारेज पूरा नहीं कर सके लेकिन गेंद रिबाउंड हुई और मेसी ने तुरंत मौके का फायदा उठाकर उसे नेट में डाल दिया। यह उनका इस टूर्नामेंट में दूसरा गोल था और कुल मिलाकर वर्ल्ड कप में 18वां गोल भी बन गया।

    मैच खत्म होते ही स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने मेसी के नाम के नारे लगाए। अर्जेंटीना की यह लगातार दूसरी जीत थी जिससे टीम ने बिना किसी हार के नॉकआउट में प्रवेश किया। इस प्रदर्शन के बाद टीम को टूर्नामेंट की सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल माना जा रहा है।

    अर्जेंटीना अब अपना अगला ग्रुप मैच 27 जून को जॉर्डन के खिलाफ खेलेगा। टीम का लक्ष्य लगातार जीत के साथ आगे बढ़ते हुए खिताब बचाने का है।

  • वेलकम टू द जंगल में सेंसर की बड़ी कार्रवाई, अक्षय कुमार की फिल्म में लगे 18 कट, बना अनोखा रिकॉर्ड

    वेलकम टू द जंगल में सेंसर की बड़ी कार्रवाई, अक्षय कुमार की फिल्म में लगे 18 कट, बना अनोखा रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की आगामी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ रिलीज से पहले ही चर्चा में आ गई है। इस फिल्म में सेंसर बोर्ड ने कुल 18 बदलाव किए हैं, जिसके बाद यह अक्षय कुमार के करियर की अब तक की सबसे ज्यादा सेंसर की गई फैमिली कॉमेडी फिल्म बन गई है। फिल्म में किए गए ये बदलाव डायलॉग्स से लेकर कुछ दृश्यों तक फैले हुए हैं।

    रिपोर्ट्स के अनुसार सेंसर बोर्ड ने फिल्म में मौजूद कई डबल मीनिंग डायलॉग्स को हटाने या बदलने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा कुछ संवेदनशील संदर्भ, जिनमें कश्मीर से जुड़े जिक्र भी शामिल बताए जा रहे हैं, उन्हें भी संशोधित किया गया है। फिल्म के कुछ हिस्सों में अभिनेत्री दिशा पाटनी और जैकलीन फर्नांडिस के बिकिनी सीन्स पर भी सेंसर की नजर पड़ी है, जहां क्लोजअप शॉट्स को हटाया गया या एडिट किया गया है।

    यह पहली बार नहीं है जब अक्षय कुमार की फिल्मों पर सेंसर बोर्ड की कैंची चली हो। इससे पहले उनकी फिल्म ‘ओह माय गॉड 2’ में भी 27 कट लगाए गए थे। उस फिल्म को ए सर्टिफिकेट मिला था और बाद में यह बॉक्स ऑफिस पर सफल रही थी। वहीं ‘भूत बंगला’ में भी 5 कट किए गए थे, जिनमें कुछ एडल्ट या डबल मीनिंग कंटेंट शामिल थे।

    इसके अलावा ‘बच्चन पांडे’ और ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ जैसी फिल्मों में भी मामूली स्तर पर कट्स किए गए थे, लेकिन ‘वेलकम टू द जंगल’ इस मामले में खास इसलिए बन गई है क्योंकि इसमें सबसे ज्यादा 18 बदलाव दर्ज किए गए हैं।

    फिल्म के निर्देशक अहमद खान हैं और यह फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। पहले ही फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता को देखते हुए फिल्म से काफी उम्मीदें जुड़ी हैं। हालांकि सेंसर बोर्ड द्वारा किए गए इन बदलावों का असर फिल्म की कहानी और प्रस्तुति पर कितना पड़ेगा, यह रिलीज के बाद ही साफ हो सकेगा।

    फिलहाल यह फिल्म सिर्फ अपनी स्टारकास्ट या कॉमेडी के लिए नहीं, बल्कि सेंसर रिकॉर्ड के कारण भी सुर्खियों में बनी हुई है।

  • IND vs ENG: टी20 सीरीज के लिए इंग्लैंड टीम घोषित, अनकैप्ड ऑलराउंडर जेम्स कोल्स की एंट्री से बढ़ी चर्चा

    IND vs ENG: टी20 सीरीज के लिए इंग्लैंड टीम घोषित, अनकैप्ड ऑलराउंडर जेम्स कोल्स की एंट्री से बढ़ी चर्चा


    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाली पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए इंग्लैंड क्रिकेट टीम का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। यह सीरीज 1 जुलाई से शुरू होगी, जिसका पहला मुकाबला चेस्टर ले स्ट्रीट में खेला जाएगा। वहीं सीरीज का अंतिम मैच 11 जुलाई को साउथम्प्टन में आयोजित होगा। इसके बाद दोनों टीमों के बीच वनडे सीरीज भी खेली जाएगी।

    इंग्लैंड की कमान इस बार हैरी ब्रूक के हाथों में होगी। चयनकर्ताओं ने सीमित ओवरों के प्रारूप में उन पर भरोसा जताते हुए कप्तानी की जिम्मेदारी बरकरार रखी है। ब्रूक इससे पहले टेस्ट टीम की कप्तानी नहीं कर पाए थे, लेकिन टी20 प्रारूप में वह टीम का नेतृत्व करेंगे।

    इस स्क्वॉड में सबसे बड़ी चर्चा 22 वर्षीय अनकैप्ड ऑलराउंडर जेम्स कोल्स की एंट्री को लेकर है। ससेक्स के इस युवा खिलाड़ी ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम में जगह बनाई है। हाल ही में उन्होंने काउंटी चैम्पियनशिप में ग्लेमॉर्गन के खिलाफ नाबाद 224 रनों की बेहतरीन पारी खेली थी, जो उनके फर्स्ट क्लास करियर का सर्वोच्च स्कोर है। टी20 ब्लास्ट में भी उन्होंने अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को प्रभावित किया था।

    टीम चयन में कुछ प्रमुख बदलाव भी देखने को मिले हैं। बेन डकेट को इस टी20 स्क्वॉड में शामिल नहीं किया गया है, जबकि जॉर्डन कॉक्स, सोनी बेकर और साकिब महमूद की वापसी हुई है। चोटों के कारण ब्रायडन कार्स और जेमी ओवर्टन जैसे खिलाड़ी चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे, जिसके चलते चयनकर्ताओं ने अपेक्षाकृत बड़ा 17 सदस्यीय स्क्वॉड चुना है।

    इंग्लैंड के चयनकर्ता मार्कस नॉर्थ ने कहा कि जेम्स कोल्स ने अपने प्रदर्शन के दम पर यह अवसर अर्जित किया है। उन्होंने यह भी बताया कि न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के तुरंत बाद भारत के खिलाफ टी20 सीरीज शुरू होने के कारण टीम में अतिरिक्त विकल्प रखना जरूरी था।

    भारत और इंग्लैंड के बीच यह टी20 सीरीज बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है, खासकर तब जब भारत की युवा बल्लेबाजी लाइनअप और इंग्लैंड की नई रणनीति आमने-सामने होंगी। इसके बाद वनडे सीरीज भी खेली जाएगी, जो दोनों टीमों के लिए आगामी ICC टूर्नामेंट्स की तैयारी का अहम हिस्सा मानी जा रही है।

  • भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी मजबूत: 482 मिलियन डॉलर का सपोर्ट पैकेज, अपाचे और M777 की बढ़ेगी ताकत

    भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी मजबूत: 482 मिलियन डॉलर का सपोर्ट पैकेज, अपाचे और M777 की बढ़ेगी ताकत


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को एक और बड़ा बढ़ावा मिला है। अमेरिका ने भारत के लिए 482.2 मिलियन डॉलर यानी लगभग 4,555 करोड़ रुपये के सैन्य सहायता पैकेज को मंजूरी दी है। यह प्रस्तावित डील भारत के पास मौजूद AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और M777A2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के लिए सपोर्ट सर्विसेज से जुड़ी है। इस डील के तहत किसी नए हथियार की खरीद नहीं की जा रही है, बल्कि मौजूदा सिस्टम की ऑपरेशनल क्षमता को बनाए रखने और मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

    अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी यानी DSCA ने 17 जून को इस प्रस्ताव की औपचारिक सूचना फेडरल रजिस्टर में जारी की। इसके बाद इसे भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह सहायता पैकेज भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करेगा और मौजूदा एवं संभावित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की क्षमता को बेहतर बनाएगा।

    इस पैकेज में अपाचे हेलीकॉप्टरों और M777 हॉवित्जर तोपों के लिए तकनीकी सहायता, स्पेयर पार्ट्स, मेंटेनेंस सपोर्ट, लॉजिस्टिक सेवाएं और प्रशिक्षण शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ये दोनों अत्याधुनिक हथियार प्रणाली हमेशा युद्ध के लिए तैयार स्थिति में रहें।

    भारत पहले ही अमेरिका से M777A2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपें खरीद चुका है, जिन्हें विशेष रूप से ऊंचाई वाले और दुर्गम इलाकों में तैनात करने के लिए डिजाइन किया गया है। इनका इस्तेमाल भारतीय सेना की आर्टिलरी क्षमता को मजबूत करने के लिए किया जाता है, खासकर सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में।

    इसी तरह, भारतीय सेना और वायुसेना के पास AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर भी मौजूद हैं, जिन्हें दुनिया के सबसे उन्नत कॉम्बैट हेलीकॉप्टरों में गिना जाता है। ये हेलीकॉप्टर सटीक हमलों और युद्ध के मैदान में समर्थन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को और गहरा करता है। उन्होंने कहा कि दोनों देश लगातार रक्षा क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं और यह सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन के लिए भी अहम है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील केवल तकनीकी सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच रणनीतिक भरोसे और दीर्घकालिक सैन्य सहयोग को भी दर्शाती है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सुरक्षा हालात के बीच यह साझेदारी भारत की सैन्य तैयारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    इस तरह यह 482 मिलियन डॉलर का पैकेज भारतीय सेना की मौजूदा क्षमता को बनाए रखने के साथ-साथ उसकी परिचालन दक्षता को भी बढ़ाएगा, जिससे अपाचे हेलीकॉप्टर और M777 हॉवित्जर सिस्टम और अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सकेंगे।

  • कॉलेजियम पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: सिर्फ वरिष्ठता से नहीं मिलता जज बनने का अधिकार

    कॉलेजियम पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: सिर्फ वरिष्ठता से नहीं मिलता जज बनने का अधिकार


    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि केवल वरिष्ठता किसी अधिकारी को हाईकोर्ट का जज बनने का अधिकार नहीं देती। अदालत ने दोहराया कि जजों के चयन की प्रक्रिया में उम्मीदवार की उपयुक्तता योग्यता और समग्र मूल्यांकन को प्राथमिकता दी जाती है। साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा लिए गए निर्णय न्यायिक समीक्षा और सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे से बाहर हैं।

    यह टिप्पणी हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी अरविंद मल्होत्रा की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। मल्होत्रा ने दावा किया था कि उनकी उम्मीदवारी को उचित तरीके से नहीं देखा गया और उनसे जूनियर अधिकारियों को हाईकोर्ट जज के पद के लिए आगे बढ़ा दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाईकोर्ट कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया।

    मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि कॉलेजियम के निर्णयों में दखल देना उचित नहीं होगा क्योंकि इससे पूरी चयन प्रक्रिया पर अनावश्यक विवाद खड़ा हो सकता है। पीठ ने कहा कि किसी भी उम्मीदवार का चयन व्यापक विचार विमर्श और मूल्यांकन के बाद किया जाता है तथा केवल वरिष्ठता के आधार पर किसी को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि पहले दिए गए एक आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने चयन प्रक्रिया को अधिक सामूहिक और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता जताई थी। हालांकि अदालत ने माना कि कॉलेजियम की प्रक्रिया अपने निर्धारित मानकों और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर संचालित होती है तथा इसमें उम्मीदवारों की उपयुक्तता का मूल्यांकन सबसे महत्वपूर्ण तत्व होता है।

    पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी जूनियर अधिकारी की सिफारिश की जाती है तो इससे वरिष्ठ अधिकारी को स्वतः कानूनी चुनौती देने का अधिकार नहीं मिल जाता। अदालत के अनुसार कॉलेजियम का निर्णय उसकी संतुष्टि और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित होता है और उस संतुष्टि को न्यायिक मंच पर चुनौती नहीं दी जा सकती। यही कारण है कि कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिशों को न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर माना गया है।

    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश से तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम हाईकोर्ट जज के रूप में मंजूर किए थे। अदालत ने कहा कि इन नामों पर विचार करते समय सभी संबंधित दस्तावेजों सूचनाओं और रिपोर्टों का अध्ययन किया गया था। इसलिए एक बार कॉलेजियम द्वारा निर्णय ले लिए जाने के बाद अदालत उसके सही या गलत होने पर न्यायिक स्तर पर पुनर्विचार नहीं कर सकती।

    पीठ ने अरविंद मल्होत्रा को सलाह देते हुए कहा कि वे अभी अपेक्षाकृत युवा हैं और उन्हें धैर्य रखना चाहिए। साथ ही उन्हें यह स्वतंत्रता भी दी गई कि यदि उनके खिलाफ कोई लंबित जांच या प्रशासनिक प्रक्रिया है तो उसके शीघ्र निपटारे के लिए वे संबंधित हाईकोर्ट के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं।

    इस फैसले के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायपालिका में नियुक्ति की प्रक्रिया केवल वरिष्ठता पर आधारित नहीं है बल्कि योग्यता क्षमता निष्पक्षता और समग्र उपयुक्तता जैसे कई महत्वपूर्ण मानकों पर निर्भर करती है। अदालत का यह रुख भविष्य में जज नियुक्ति से जुड़े विवादों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक माना जा रहा है।