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  • UP : मुरादाबाद में मोमबत्ती गोदाम में लगी भीषण आग… 6 जिलों की दमकल मौके पर, खाली कराए आसपास के घर

    UP : मुरादाबाद में मोमबत्ती गोदाम में लगी भीषण आग… 6 जिलों की दमकल मौके पर, खाली कराए आसपास के घर


    मुरादाबाद।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुरादाबाद (Moradabad) के सागर सराय (Sagar Sarai) की कुटिया वाली गली में शिव मंदिर के पास शनिवार तड़के मोमबत्ती के गोदाम में भीषण आग (Massive fire Candle Warehouse) लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और गोदाम से ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं। आग की तपिश और धुआं आसपास के घरों तक पहुंचने लगा तो इलाके में अफरातफरी मच गई। लोगों में दहशत फैल गई और कई परिवार घरों से बाहर निकल आए।

    आग राजन अग्रवाल की मोमबत्ती की फैक्ट्रीऔर गोदाम में लगी । आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में पूरा गोदाम इसकी चपेट में आ गया। आसपास के मकानों में आग पहुंचने की आशंका को देखते हुए पुलिस और दमकल विभाग ने तत्काल बचाव कार्य शुरू कर दिया।

    आग की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आसपास के मकानों को खाली करा दिया। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया। घरों में रखे गैस सिलेंडरों को भी एहतियात के तौर पर बाहर निकलवाया गया, ताकि आग की लपटें वहां तक पहुंचने की स्थिति में कोई बड़ा हादसा न हो। कई लोग घरों से बाहर सड़क पर बैठे नजर आए। करीब तीन घंटे तक लोग आग बुझने का इंतजार करते रहे।

    आग पर काबू पाने के लिए मुरादाबाद के अलावा आसपास के जिलों से भी दमकल की गाड़ियां मंगाई गईं। रामपुर, संभल, अमरोहा, बिजनौर और बरेली से दमकल वाहन बुलाए गए। मुरादाबाद समेत अलग-अलग स्थानों से करीब 10 से 12 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में जुटीं। दमकल कर्मियों ने चारों ओर से पानी की बौछार कर आग को फैलने से रोकने का प्रयास किया।


    इलाके में पुलिस बल तैनात किया

    आग की सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। एसएसपी ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पुलिस और दमकल कर्मियों से जानकारी ली। आसपास के इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया, ताकि भीड़ को आग के नजदीक जाने से रोका जा सके और राहत एवं बचाव कार्य में कोई बाधा न आए।

    मोमबत्ती के गोदाम में लगी आग के कारण आसपास के लोग काफी देर तक दहशत में रहे। गोदाम में रखे ज्वलनशील सामान के कारण आग तेजी से फैलती रही। आग की लपटें और धुआं दूर तक दिखाई दे रहा था। आसपास के मकानों में रहने वाले लोग अपने परिवार और जरूरी सामान के साथ घरों से बाहर निकल आए। पुलिस ने लोगों को सुरक्षित दूरी पर रहने की हिदायत दी।

    करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर लगभग काबू पा लिया। इसके बाद भी गोदाम के अंदर अलग-अलग स्थानों पर आग और धुआं उठने की आशंका के चलते दमकल कर्मी लगातार पानी डालते रहे। आग लगने की वजह और नुकसान का आकलन आग पूरी तरह बुझने के बाद किया जाएगा।

  • सलमान खान का संजय दत्त के लिए खास पोस्ट, 'आई लव यू बाबा' लिख शेयर की इमोशनल फोटो

    सलमान खान का संजय दत्त के लिए खास पोस्ट, 'आई लव यू बाबा' लिख शेयर की इमोशनल फोटो


    नई दिल्ली।  बॉलीवुड में दोस्ती की कई मिसालें देखने को मिलती हैं, लेकिन सलमान खान और संजय दत्त की दोस्ती हमेशा सबसे खास रिश्तों में गिनी जाती है। दोनों सितारे वर्षों से एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी रहे हैं और कई मौकों पर एक-दूसरे के लिए खुलकर अपना सम्मान और स्नेह जाहिर करते रहे हैं। एक बार फिर यही गहरा रिश्ता उस समय चर्चा में आ गया, जब सलमान खान ने सोशल मीडिया पर संजय दत्त के साथ एक भावुक तस्वीर साझा करते हुए दिल छू लेने वाला संदेश लिखा।

    शुक्रवार देर रात साझा की गई इस तस्वीर में सलमान खान और संजय दत्त एक-दूसरे को गले लगाए नजर आ रहे हैं। तस्वीर में दोनों के चेहरे पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहे, लेकिन उनके बीच का अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव साफ महसूस किया जा सकता है। इस तस्वीर के साथ सलमान ने ऐसा संदेश लिखा जिसने उनके प्रशंसकों का दिल जीत लिया।

    सलमान खान ने अपने पोस्ट में लिखा कि “बाबा हमेशा के लिए बाबा हैं। बाबा, बाबा होता है। संजू बाबा हैं। हम सबके बाबा और अब अपने बच्चों के भी बाबा हैं। मेरे बड़े भाई संजय दत्त को अल्लाह, भगवान और जीसस हमेशा खुश रखें। आई लव यू बाबा।” सलमान के इस संदेश में दोस्ती के साथ-साथ सम्मान, अपनापन और दुआओं का भाव भी साफ नजर आया।

    सलमान और संजय दत्त की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। फैंस ने दोनों की दोस्ती की जमकर तारीफ की और कमेंट सेक्शन में उन्हें बॉलीवुड की सबसे मजबूत दोस्ती बताया। कई प्रशंसकों ने लिखा कि फिल्म इंडस्ट्री में बदलते रिश्तों के बीच सलमान और संजय की दोस्ती आज भी पहले जैसी मजबूत बनी हुई है। वहीं कुछ लोगों ने इसे “भाईचारे की सबसे खूबसूरत तस्वीर” करार दिया।

    इस तस्वीर में दोनों कलाकारों का सिंपल लुक भी लोगों को पसंद आया। सलमान खान टी-शर्ट और जींस में नजर आए, जबकि उन्होंने अपनी नई हेयरस्टाइल को कैप से ढक रखा था। दूसरी ओर संजय दत्त भी साधारण शर्ट और जींस में दिखाई दिए। बिना किसी दिखावे के दोनों की यह तस्वीर उनके रिश्ते की सादगी और मजबूती को बयां करती नजर आई।

    सलमान खान और संजय दत्त कई फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं और ऑफ स्क्रीन भी दोनों की अच्छी बॉन्डिंग रही है। दोनों कलाकार अक्सर एक-दूसरे के बारे में सम्मान से बात करते हैं और मुश्किल समय में भी एक-दूसरे के साथ खड़े दिखाई दिए हैं। यही वजह है कि उनकी दोस्ती को बॉलीवुड की सबसे चर्चित और मजबूत दोस्तियों में गिना जाता है।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो सलमान खान जल्द ही अपनी आगामी फिल्म ‘मातृभूमि’ में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म में वह एक आर्मी ऑफिसर की भूमिका निभाते दिखाई देंगे। फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह मुख्य भूमिका में हैं। वहीं संजय दत्त भी कई बड़े प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं और लगातार अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में दमदार भूमिकाएं निभा रहे हैं।

    सलमान खान की यह पोस्ट सिर्फ एक तस्वीर नहीं बल्कि दो दिग्गज सितारों की वर्षों पुरानी दोस्ती, भरोसे और सम्मान का खूबसूरत उदाहरण बन गई है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है और फैंस इसे बॉलीवुड की सबसे दिल छू लेने वाली तस्वीरों में से एक बता रहे हैं।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर का ऐतिहासिक कारनामा, डेकाथलॉन में भारत को मिला पहला पदक

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर का ऐतिहासिक कारनामा, डेकाथलॉन में भारत को मिला पहला पदक


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने ऐसा इतिहास रचा है, जिसने भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दिला दी है। पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में 7976 अंक हासिल कर उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया और राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में इस कठिन स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि डेकाथलॉन को ट्रैक एंड फील्ड की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिताओं में गिना जाता है, जिसमें खिलाड़ी की ताकत, गति, तकनीक, सहनशक्ति और मानसिक मजबूती सभी की एक साथ परीक्षा होती है।

    इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक ग्रेनाडा के लिंडन विक्टर ने 8096 अंकों के साथ जीता, जबकि कनाडा के अनुभवी एथलीट डेमियन वार्नर 8036 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। तेजस्विन शंकर ने दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया और भारत के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक सुनिश्चित किया।

    तेजस्विन की शुरुआत 100 मीटर दौड़ में सातवें स्थान से हुई थी, लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की। लंबी कूद में दूसरे स्थान पर रहते हुए उन्होंने अंकतालिका में सुधार किया। हाई जंप में 2.15 मीटर की शानदार छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया और कुल रैंकिंग में दूसरे स्थान पर पहुंच गए। पहले दिन के अंत तक उन्होंने खुद को पदक की दौड़ में मजबूती से बनाए रखा।

    दूसरे दिन भी तेजस्विन ने दमदार प्रदर्शन जारी रखा। 110 मीटर बाधा दौड़ और डिस्कस थ्रो में उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया। हालांकि पोल वॉल्ट और भाला फेंक में उन्हें उम्मीद के मुताबिक अंक नहीं मिले, जिससे वह तीसरे स्थान पर खिसक गए। इसके बावजूद अंतिम इवेंट 1500 मीटर दौड़ में उन्होंने संयम बनाए रखा और कुल 7976 अंक के साथ कांस्य पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया।

    डेकाथलॉन को एथलेटिक्स की सबसे कठिन स्पर्धाओं में से एक माना जाता है। यह प्रतियोगिता दो दिनों तक चलती है और इसमें कुल 10 अलग-अलग इवेंट शामिल होते हैं। पहले दिन खिलाड़ियों को 100 मीटर दौड़, लंबी कूद, शॉटपुट, हाई जंप और 400 मीटर दौड़ में हिस्सा लेना होता है। दूसरे दिन 110 मीटर बाधा दौड़, डिस्कस थ्रो, पोल वॉल्ट, भाला फेंक और 1500 मीटर दौड़ आयोजित की जाती है। हर स्पर्धा में प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाते हैं और अंत में सभी 10 इवेंट्स के अंकों को जोड़कर अंतिम परिणाम तय किया जाता है।

    समय आधारित प्रतियोगिताओं जैसे 100 मीटर, 400 मीटर और 1500 मीटर में कम समय लेने वाले खिलाड़ी को अधिक अंक मिलते हैं। वहीं लंबी कूद, हाई जंप, पोल वॉल्ट, शॉटपुट, डिस्कस और भाला फेंक जैसी फील्ड स्पर्धाओं में जितनी अधिक दूरी या ऊंचाई हासिल होती है, उतने अधिक अंक दिए जाते हैं। इसके लिए विश्व एथलेटिक्स द्वारा निर्धारित आधिकारिक स्कोरिंग प्रणाली लागू होती है।

    तेजस्विन शंकर का यह कांस्य पदक केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए मील का पत्थर है। लगातार दो दिनों तक दस अलग-अलग स्पर्धाओं में उच्च स्तर का प्रदर्शन करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में इस कठिन प्रतियोगिता में भारत का पहला पदक जीतकर तेजस्विन ने साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी अब बहु-इवेंट एथलेटिक्स में भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उनकी यह ऐतिहासिक सफलता आने वाली पीढ़ी के एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और भारतीय एथलेटिक्स के भविष्य को नई दिशा देगी।

  • महंगे हेयर प्रोडक्ट नहीं सही देखभाल है जरूरी इन घरेलू उपायों से बाल बनेंगे मजबूत लंबे और चमकदार

    महंगे हेयर प्रोडक्ट नहीं सही देखभाल है जरूरी इन घरेलू उपायों से बाल बनेंगे मजबूत लंबे और चमकदार


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली बढ़ता प्रदूषण तनाव अनियमित खानपान और केमिकल युक्त उत्पादों का अधिक इस्तेमाल बालों की सेहत पर सीधा असर डालता है। यही वजह है कि कम उम्र में ही बाल झड़ना रूखे होना दोमुंहे बाल डैंड्रफ और समय से पहले सफेद होने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। यदि बालों की सही समय पर देखभाल की जाए और प्राकृतिक उपायों को अपनाया जाए तो इन परेशानियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।

    बालों की अच्छी सेहत की शुरुआत संतुलित आहार से होती है। शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन आयरन बायोटिन जिंक और विटामिन ए सी डी तथा ई मिलने पर बालों की जड़ें मजबूत रहती हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां मौसमी फल दालें अंडे दूध मेवे और बीजों को भोजन में शामिल करना लाभदायक माना जाता है। साथ ही दिनभर पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है क्योंकि शरीर में पानी की कमी का असर सबसे पहले त्वचा और बालों पर दिखाई देता है।

    बालों की सफाई भी उतनी ही जरूरी है। सप्ताह में दो से तीन बार हल्के और सल्फेट मुक्त शैंपू से बाल धोना बेहतर रहता है। बहुत ज्यादा गर्म पानी से बाल धोने से बालों की प्राकृतिक नमी खत्म हो सकती है इसलिए हमेशा सामान्य या हल्के गुनगुने पानी का उपयोग करें। शैंपू के बाद कंडीशनर लगाने से बाल मुलायम रहते हैं और टूटने की संभावना कम होती है।

    प्राकृतिक तेलों से नियमित मालिश बालों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। नारियल तेल बादाम तेल तिल का तेल या आंवला तेल हल्का गुनगुना करके सप्ताह में एक या दो बार सिर की मालिश करने से रक्त संचार बेहतर होता है और बालों की जड़ों को पोषण मिलता है। इससे बाल मजबूत होने के साथ उनकी चमक भी बढ़ती है।

    घरेलू हेयर मास्क भी बालों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दही और मेथी का मिश्रण रूखे बालों के लिए लाभकारी माना जाता है। एलोवेरा जेल बालों को नमी देता है जबकि आंवला और भृंगराज का उपयोग बालों को मजबूत बनाने में मदद करता है। हालांकि किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले त्वचा पर छोटा पैच टेस्ट करना बेहतर होता है ताकि किसी प्रकार की एलर्जी की संभावना को परखा जा सके।

    तनाव भी बाल झड़ने का एक बड़ा कारण माना जाता है। पर्याप्त नींद नियमित योग ध्यान और हल्की एक्सरसाइज मानसिक तनाव को कम करने में मदद करती है जिसका सकारात्मक असर बालों की सेहत पर भी दिखाई देता है। इसके अलावा गीले बालों में जोर से कंघी करने हेयर ड्रायर स्ट्रेटनर और केमिकल ट्रीटमेंट का बार बार इस्तेमाल करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे बाल कमजोर हो सकते हैं।

    यदि लंबे समय तक अत्यधिक बाल झड़ने सिर में लगातार खुजली संक्रमण या अचानक गंजेपन जैसी समस्या दिखाई दे तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। सही समय पर जांच और उपचार से समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है।

    स्वस्थ और सुंदर बाल किसी महंगे उत्पाद से नहीं बल्कि नियमित देखभाल संतुलित खानपान और स्वस्थ जीवनशैली से मिलते हैं। यदि रोजमर्रा की छोटी छोटी अच्छी आदतों को अपनाया जाए तो लंबे समय तक बाल मजबूत घने और चमकदार बनाए रखे जा सकते हैं।

  • बिना सोचे-समझे निवेश पड़ सकता है भारी, जानिए शेयर बाजार में सफलता के गोल्डन रूल्स

    बिना सोचे-समझे निवेश पड़ सकता है भारी, जानिए शेयर बाजार में सफलता के गोल्डन रूल्स


    नई दिल्ली । शेयर बाजार आज के समय में निवेश का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। पहले जहां लोग केवल बैंक एफडी सोना या जमीन में निवेश को सुरक्षित मानते थे वहीं अब बड़ी संख्या में युवा और नौकरीपेशा लोग भी शेयर बाजार की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि शेयर बाजार जितना मुनाफा देने की क्षमता रखता है उतना ही जोखिम भी इसमें मौजूद रहता है। इसलिए बिना जानकारी के निवेश करना कई बार भारी नुकसान का कारण बन सकता है।

    शेयर बाजार में सफल होने का सबसे पहला नियम है कि किसी भी कंपनी में पैसा लगाने से पहले उसके कारोबार वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं को अच्छी तरह समझें। केवल किसी दोस्त रिश्तेदार या सोशल मीडिया पर मिली सलाह के आधार पर निवेश करना सही फैसला नहीं माना जाता। कंपनी के पिछले प्रदर्शन मुनाफे कर्ज और बाजार में उसकी स्थिति का विश्लेषण करना जरूरी होता है।

    निवेश करते समय धैर्य सबसे बड़ी ताकत होती है। शेयर बाजार में हर दिन उतार चढ़ाव आता है लेकिन अनुभवी निवेशक छोटी गिरावट से घबराते नहीं हैं। वे लंबी अवधि की रणनीति अपनाते हैं और मजबूत कंपनियों में निवेश बनाए रखते हैं। समय के साथ अच्छे शेयर अक्सर बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपनी पूरी पूंजी कभी भी एक ही कंपनी या एक ही सेक्टर में निवेश नहीं करनी चाहिए। अलग अलग क्षेत्रों की कंपनियों में निवेश करने से जोखिम कम हो जाता है। इसे निवेश का विविधीकरण कहा जाता है। यदि किसी एक सेक्टर में गिरावट आती है तो दूसरे सेक्टर का प्रदर्शन नुकसान की भरपाई करने में मदद कर सकता है।

    शेयर बाजार में भावनाओं के आधार पर फैसला लेना भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। कई निवेशक तेजी देखकर बिना सोचे समझे शेयर खरीद लेते हैं और गिरावट आते ही घबराकर बेच देते हैं। इस तरह वे नुकसान उठा लेते हैं। सही रणनीति यही है कि निवेश तय योजना के अनुसार किया जाए और बाजार की हर हलचल पर जल्दबाजी में निर्णय न लिया जाए।

    यदि आप शेयर बाजार में नए हैं तो शुरुआत छोटी राशि से करें। पहले बाजार की कार्यप्रणाली को समझें और धीरे धीरे अनुभव बढ़ाएं। जरूरत पड़ने पर किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की मदद भी ली जा सकती है। म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प भी उन लोगों के लिए बेहतर हो सकते हैं जो सीधे शेयर चुनने का अनुभव नहीं रखते।

    नियमित निवेश की आदत भी लंबे समय में बेहतर परिणाम देती है। एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय समय समय पर निवेश करने से बाजार के उतार चढ़ाव का असर कम हो सकता है। साथ ही अपने निवेश की समय समय पर समीक्षा करना भी जरूरी है ताकि जरूरत पड़ने पर पोर्टफोलियो में बदलाव किया जा सके।

    ध्यान रखें कि शेयर बाजार में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। सही जानकारी अनुशासन धैर्य और लंबी अवधि की सोच ही निवेश को सफल बनाती है। यदि समझदारी से निवेश किया जाए तो शेयर बाजार भविष्य की आर्थिक मजबूती और संपत्ति निर्माण का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

  • ईरान के सत्ता गलियारों में बढ़ी हलचल, मोजतबा खामेनेई की लोकेशन पर सस्पेंस बरकरार

    ईरान के सत्ता गलियारों में बढ़ी हलचल, मोजतबा खामेनेई की लोकेशन पर सस्पेंस बरकरार


    नई दिल्ली। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई पिछले कई महीनों से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं और इसी वजह से उनकी मौजूदगी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चाएं तेज हो गई हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और विश्लेषणों में दावा किया जा रहा है कि उनकी लोकेशन को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं लेकिन अब तक कोई आधिकारिक और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी सामने नहीं आई है। यही कारण है कि यह मामला दुनिया की सबसे चर्चित भू राजनीतिक पहेलियों में शामिल होता जा रहा है।

    रिपोर्टों के अनुसार मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद से उन्होंने कुछ लिखित संदेश जरूर जारी किए हैं लेकिन किसी सार्वजनिक कार्यक्रम टेलीविजन संबोधन या आधिकारिक समारोह में दिखाई नहीं दिए। उनकी अनुपस्थिति ने अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

    कई विदेशी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल की खुफिया एजेंसियां उनकी गतिविधियों पर नजर रखने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि मोजतबा खामेनेई आधुनिक डिजिटल माध्यमों का बहुत सीमित उपयोग करते हैं या उनसे पूरी तरह दूरी बनाए हुए हैं। यदि ऐसा है तो इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के जरिए उनकी लोकेशन का पता लगाना स्वाभाविक रूप से अधिक कठिन हो सकता है।

    उनकी गैरमौजूदगी को लेकर अलग अलग तरह की अटकलें भी सामने आती रही हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि वह सुरक्षा कारणों से किसी सुरक्षित स्थान पर रह रहे हैं जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में उनके स्वास्थ्य को लेकर भी दावे किए गए हैं। हालांकि इन दावों की पुष्टि ईरानी सरकार या किसी विश्वसनीय आधिकारिक स्रोत की ओर से नहीं की गई है। इसलिए इन खबरों को केवल अपुष्ट रिपोर्टों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चुनौतियों के बीच किसी भी शीर्ष नेतृत्व के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाया जाना असामान्य नहीं है। ईरान लंबे समय से पश्चिमी देशों और इजरायल के साथ तनावपूर्ण संबंधों का सामना करता रहा है। ऐसे माहौल में शीर्ष नेतृत्व की सार्वजनिक गतिविधियों को सीमित करना सुरक्षा रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। हालांकि इसके पीछे वास्तविक कारण क्या हैं इसका स्पष्ट उत्तर फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान की सरकार अपने प्रशासनिक और राजनीतिक कामकाज को सामान्य रूप से जारी रखने का दावा करती रही है। कुछ सरकारी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि सर्वोच्च नेतृत्व आवश्यक निर्णय ले रहा है लेकिन उनके सार्वजनिक कार्यक्रम सीमित हैं। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार इस विषय पर नजर बनाए हुए हैं और किसी आधिकारिक तस्वीर या सार्वजनिक उपस्थिति का इंतजार कर रहे हैं।

    फिलहाल मोजतबा खामेनेई की मौजूदगी को लेकर कई तरह की चर्चाएं जरूर हैं लेकिन उनके ठिकाने या स्वास्थ्य संबंधी किसी भी दावे की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस मामले को लेकर सामने आ रही अपुष्ट जानकारियों के बजाय आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय स्रोतों पर ही भरोसा करना उचित होगा। आने वाले समय में यदि ईरान की ओर से कोई सार्वजनिक उपस्थिति या आधिकारिक जानकारी जारी की जाती है तो इस रहस्य से जुड़ी कई अटकलों पर विराम लग सकता है।

  • 'PR कम कीजिए और शिक्षा सुधारिए', पीएम मोदी के वीडियो पर विशाल ददलानी का बयान वायरल

    'PR कम कीजिए और शिक्षा सुधारिए', पीएम मोदी के वीडियो पर विशाल ददलानी का बयान वायरल


    नई दिल्ली। प्रसिद्ध गायक और संगीतकार विशाल ददलानी एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में हैं। सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने वाले विशाल ने इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हालिया वीडियो पर प्रतिक्रिया दी है। इस वीडियो में प्रधानमंत्री ने जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी मां के खिलाफ इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा पर चिंता जताई थी। इसके बाद विशाल ददलानी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी और शिक्षा व्यवस्था समेत कई मुद्दों पर सरकार को सलाह दी।

    विशाल ददलानी ने अपने वीडियो में कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान युवाओं में आक्रोश दिखाई दे रहा है तो उसके पीछे मौजूद कारणों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन के दौरान टियर गैस चलने डंडे बरसने और हिंसा जैसी घटनाओं पर अपेक्षित चर्चा नहीं होती लेकिन गाली गलौज के मुद्दे पर अधिक ध्यान दिया जाता है। उनके अनुसार युवाओं के गुस्से की असली वजहों को समझना ज्यादा जरूरी है।

    उन्होंने यह भी कहा कि बहुत से छात्रों और उनके परिवारों ने प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी परेशानियों का सामना किया है। विशाल ने अपने बयान में परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन समस्याओं के समाधान पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक यदि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और छात्रों को पारदर्शी अवसर मिलेंगे तो स्वाभाविक रूप से उनके भीतर का असंतोष भी कम होगा।

    विशाल ददलानी ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि जरूरत जनसंपर्क गतिविधियों से अधिक वास्तविक काम करने की है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को शिक्षा क्षेत्र में सुधार पर प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि युवाओं की समस्याओं का समाधान किया जाएगा तो वही छात्र सरकार की उपलब्धियों की सराहना भी करेंगे। उन्होंने अपने वीडियो में यह भी कहा कि लोगों से वास्तविक संवाद और भरोसे का रिश्ता बनाना किसी भी जनसंपर्क अभियान से अधिक प्रभावी होता है।

    अपने सोशल मीडिया पोस्ट में विशाल ने शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए हैशटैग भी साझा किए। उनका यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया तो कुछ ने उनके बयान पर असहमति जताई। सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर बहस भी तेज हो गई और विभिन्न पक्षों ने अपनी अपनी राय रखी।

    विशाल ददलानी पहले भी कई सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर खुलकर अपनी बात रखते रहे हैं। उनके बयान अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं और सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। इस बार भी उनका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे लेकर अलग अलग दृष्टिकोण सामने रख रहे हैं।

    हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह स्पष्ट है कि शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दे देश में लगातार चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। परीक्षा प्रणाली पारदर्शिता रोजगार और छात्रों के भविष्य जैसे विषयों पर बहस जारी है। ऐसे में विशाल ददलानी का यह बयान भी उसी व्यापक सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन गया है जहां अलग अलग पक्ष अपनी राय रख रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सार्वजनिक हस्तियों और नागरिकों द्वारा व्यक्त विचारों पर स्वस्थ संवाद होना सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है और अंतिम निष्कर्ष तथ्यों तथा नीतिगत निर्णयों के आधार पर ही तय होते हैं।

  • भक्ति और संगीत का अद्भुत संगम, तीन मुस्लिम कलाकारों की रचना 'मन तड़पत हरि दर्शन को' आज भी लोगों की पहली पसंद

    भक्ति और संगीत का अद्भुत संगम, तीन मुस्लिम कलाकारों की रचना 'मन तड़पत हरि दर्शन को' आज भी लोगों की पहली पसंद


    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी खूबसूरती उसकी सांस्कृतिक विविधता और साझा विरासत रही है। हिंदी फिल्मों में ऐसे कई भजन बने हैं जो केवल धार्मिक आस्था का माध्यम नहीं बल्कि संगीत और कला की अमूल्य धरोहर भी बन गए। इन्हीं कालजयी रचनाओं में फिल्म बैजू बावरा का प्रसिद्ध भजन मन तड़पत हरि दर्शन को आज भी विशेष स्थान प्राप्त है। यह भजन दशकों बाद भी उतनी ही श्रद्धा और भावनाओं के साथ सुना जाता है जितना अपनी रिलीज के समय सुना गया था। खास बात यह है कि इस अमर भजन को साकार करने में तीन महान मुस्लिम कलाकारों का योगदान रहा जिनकी कला ने इसे इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज कर दिया।

    इस भजन को अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज मोहम्मद रफी ने दी थी। संगीत की रचना महान संगीतकार नौशाद ने की जबकि इसके शब्द प्रसिद्ध गीतकार शकील बदायूंनी ने लिखे थे। इन तीनों दिग्गजों की प्रतिभा और समर्पण ने भगवान कृष्ण की भक्ति को संगीत के माध्यम से ऐसा रूप दिया जो आज भी करोड़ों लोगों के दिलों को छू लेता है। यह गीत केवल एक फिल्मी भजन नहीं बल्कि भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर माना जाता है।

    फिल्म बैजू बावरा अपने संगीत के कारण हिंदी सिनेमा के इतिहास में विशेष स्थान रखती है। इस फिल्म ने शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय सिनेमा के माध्यम से घर घर तक पहुंचाया। कहा जाता है कि इस फिल्म का संगीत तैयार करते समय नौशाद ने हर धुन को बेहद गंभीरता और समर्पण के साथ तैयार किया था। कई चर्चित किस्सों के अनुसार उन्होंने इस भजन की रिकॉर्डिंग से पहले पूरी टीम से पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ स्टूडियो आने का आग्रह किया था ताकि गीत की भावना पूरी तरह जीवंत हो सके। हालांकि ऐसे प्रसंग लोककथाओं और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में प्रचलित हैं जिनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    मन तड़पत हरि दर्शन को केवल संगीत प्रेमियों ने ही नहीं बल्कि भक्ति संगीत के श्रोताओं ने भी भरपूर प्यार दिया। मोहम्मद रफी की आवाज में छिपी भावनाएं और शकील बदायूंनी के सरल लेकिन प्रभावशाली शब्द इस भजन को कालजयी बना देते हैं। यही वजह है कि आज भी मंदिरों धार्मिक आयोजनों और संगीत कार्यक्रमों में यह भजन पूरे सम्मान के साथ गाया और सुना जाता है।

    बैजू बावरा में भरत भूषण और मीना कुमारी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म को अपने समय की बड़ी सफल फिल्मों में गिना जाता है। इसके गीतों ने न केवल व्यावसायिक सफलता दिलाई बल्कि भारतीय फिल्म संगीत को नई दिशा भी दी। नौशाद को इस फिल्म के संगीत के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला था और इसे उनके करियर की सबसे यादगार उपलब्धियों में शामिल किया जाता है।

    यह भजन भारतीय संस्कृति की उस खूबसूरत परंपरा का प्रतीक भी है जहां कला और संगीत किसी धर्म या समुदाय की सीमाओं में बंधे नहीं रहते। अलग अलग पृष्ठभूमि से आए कलाकारों ने मिलकर ऐसी रचना तैयार की जिसने पीढ़ियों तक लोगों को भक्ति और संगीत से जोड़कर रखा। यही भारतीय सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी पहचान है जहां प्रतिभा आस्था और कला मिलकर ऐसी अमर कृतियों को जन्म देती हैं जो समय के साथ और भी अधिक सम्मान प्राप्त करती हैं।

  • 'रामायण' का ट्रेलर बना ग्लोबल सेंसेशन, पाकिस्तानी यूट्यूबर्स बोले- साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर

    'रामायण' का ट्रेलर बना ग्लोबल सेंसेशन, पाकिस्तानी यूट्यूबर्स बोले- साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर


    नई दिल्ली। रणबीर कपूर साई पल्लवी और यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण का ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गया है। भारत में दर्शकों के बीच इसे लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी इस ट्रेलर की खूब चर्चा हो रही है। कई पाकिस्तानी यूट्यूबर्स और कंटेंट क्रिएटर्स ने फिल्म के ट्रेलर पर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा की हैं और इसकी भव्यता विजुअल इफेक्ट्स तथा कलाकारों के अभिनय की खुलकर सराहना की है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई रिएक्शन वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं जिनमें फिल्म को बड़े पर्दे का शानदार अनुभव बताया जा रहा है।

    पाकिस्तान की चर्चित कंटेंट क्रिएटर माविया उमर फारूकी ने ट्रेलर देखने के बाद कहा कि फिल्म का हर दृश्य बेहद शानदार दिखाई देता है और इसे बनाने में बड़े स्तर पर मेहनत की गई है। उनके अनुसार विजुअल इफेक्ट्स अंतरराष्ट्रीय स्तर के नजर आते हैं और पूरी फिल्म का प्रस्तुतिकरण काफी भव्य महसूस होता है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रेलर देखकर साफ लगता है कि निर्माताओं ने किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया है।

    माविया ने विशेष रूप से रणबीर कपूर और यश की स्क्रीन प्रेजेंस की तारीफ की। उनके अनुसार दोनों कलाकार अपने किरदारों में प्रभावशाली दिखाई देते हैं और ट्रेलर का हर दृश्य दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहता है। उन्होंने कैमरा वर्क बैकग्राउंड डिजाइन और एक्शन सीक्वेंस को भी फिल्म की बड़ी ताकत बताया। उनका मानना है कि बड़े पर्दे पर यह फिल्म दर्शकों के लिए यादगार अनुभव साबित हो सकती है।

    एक अन्य पाकिस्तानी यूट्यूबर हसनात खान ने भी ट्रेलर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विशेष रूप से रावण के किरदार और उसके प्रस्तुतीकरण की सराहना की। उनके अनुसार फिल्म में दिखाए गए युद्ध दृश्य एक्शन और ग्राफिक्स बेहद प्रभावशाली हैं। ट्रेलर देखते समय उन्होंने कई बार इसकी भव्यता की प्रशंसा की और कहा कि फिल्म तकनीकी रूप से काफी मजबूत दिखाई देती है।

    रिएक्शन बाय सुलेमान नामक यूट्यूब चैनल ने भी फिल्म के ट्रेलर की तारीफ करते हुए कहा कि रणबीर कपूर और यश की स्क्रीन प्रेजेंस दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ती है। उन्होंने साई पल्लवी के सीता रूप की भी सराहना की और कहा कि उनका शांत और गरिमामय व्यक्तित्व इस किरदार के अनुरूप दिखाई देता है। उनका अनुमान है कि फिल्म रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल कर सकती है।

    ईमान मोअज्जम एंटरटेनमेंट नाम के एक अन्य चैनल ने भी फिल्म के बैकग्राउंड म्यूजिक स्पेशल इफेक्ट्स और पारंपरिक प्रस्तुति की प्रशंसा की। उनका कहना था कि पौराणिक कथा को आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास आकर्षक लगता है और इससे नई पीढ़ी भी इस कहानी से जुड़ सकती है।

    हालांकि सोशल मीडिया पर सामने आए ये रिएक्शन अलग अलग कंटेंट क्रिएटर्स की व्यक्तिगत राय हैं और इन्हें दर्शकों की व्यापक प्रतिक्रिया नहीं माना जा सकता। फिल्म की वास्तविक सफलता का आकलन इसकी रिलीज के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया और बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन से ही होगा।

    रामायण दिवाली 2026 के अवसर पर सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। भव्य स्टारकास्ट आधुनिक तकनीक और पौराणिक कथा के संयोजन के कारण यह फिल्म पहले ही चर्चा का केंद्र बन चुकी है। अब सभी की नजर इसकी रिलीज और दर्शकों की अंतिम प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

  • E20 पेट्रोल पर छिड़ेगा सियासी संग्राम, आज केजरीवाल का नेशनल टाउनहॉल, तहसीन पूनावाला करेंगे भूख हड़ताल

    E20 पेट्रोल पर छिड़ेगा सियासी संग्राम, आज केजरीवाल का नेशनल टाउनहॉल, तहसीन पूनावाला करेंगे भूख हड़ताल


    नई दिल्ली। इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर देश में नया राजनीतिक और जनआंदोलन शुरू होने जा रहा है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल शनिवार (1 अगस्त) से इस मुद्दे पर राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत करेंगे। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला भी मौन मार्च और भूख हड़ताल के जरिए विरोध प्रदर्शन तेज करेंगे।

    अभियान शुरू होने से एक दिन पहले अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि शनिवार को आयोजित ‘E20 के खिलाफ नेशनल टाउनहॉल’ में देश की एक प्रमुख हस्ती भी शामिल होगी, जो लोगों की शिकायतें सुनेगी और इस मुद्दे पर अपनी बात रखेगी। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लोगों से अपील की और ऑनलाइन जुड़ने वालों के लिए व्हाट्सएप नंबर भी साझा किया।

    पूनावाला का मौन मार्च और अनशन
    E20 नीति के खिलाफ विरोध की शुरुआत सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने 5 जुलाई को की थी। अब उन्होंने घोषणा की है कि वह गांधी स्मृति तक मौन मार्च निकालेंगे और उसके बाद भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उनका कहना है कि यह आंदोलन इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से जुड़ी आम लोगों की समस्याओं को लेकर है।

    ‘सरकार को समाधान निकालना चाहिए’
    27 जुलाई को पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने कहा था कि हालिया छात्र आंदोलन की तरह इस मुद्दे पर भी जनता अपनी आवाज बुलंद कर रही है। उन्होंने दावा किया कि E20 पेट्रोल से लोगों को वाहन खराब होने और माइलेज कम मिलने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस नीति की समीक्षा कर समाधान निकालने की मांग की।

    आज दोपहर होगा कार्यक्रम
    आम आदमी पार्टी के अनुसार, यह राष्ट्रीय टाउनहॉल शनिवार दोपहर 12 बजे नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित होगा। प्रतिभागियों से सुबह 11:30 बजे तक पहुंचने का अनुरोध किया गया है। पार्टी का दावा है कि कार्यक्रम में हजारों लोग प्रत्यक्ष और ऑनलाइन माध्यम से शामिल होंगे।

    ऑनलाइन भी जुड़ सकेंगे लोग
    जो लोग कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाएंगे, वे व्हाट्सएप के माध्यम से वर्चुअल रूप से जुड़ सकेंगे। पार्टी ने इसके लिए 8588833212 नंबर जारी किया है, जहां संदेश भेजने पर कार्यक्रम का लिंक उपलब्ध कराया जाएगा।

    E20 नीति पर बढ़ रहा विरोध
    केंद्र सरकार की 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) नीति को लेकर विभिन्न संगठनों और कुछ विशेषज्ञों ने भी सवाल उठाए हैं। आम आदमी पार्टी के अलावा तहसीन पूनावाला की टीम और दिल्ली टैक्सी एंड ट्रांसपोर्ट ओनर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने भी इस नीति के खिलाफ आंदोलन का समर्थन करने की घोषणा की है।