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  • नीरज चोपड़ा का सिल्वर, यशवीर सिंह का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज; सीडब्ल्यूजी 2026 में भारत की पदकों की झड़ी

    नीरज चोपड़ा का सिल्वर, यशवीर सिंह का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज; सीडब्ल्यूजी 2026 में भारत की पदकों की झड़ी


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स ने एक बार फिर अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन किया। मेंस जैवलिन थ्रो स्पर्धा में भारत के दो खिलाड़ियों ने एक साथ पोडियम पर जगह बनाकर देश का गौरव बढ़ाया। ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के शानदार थ्रो के साथ रजत पदक अपने नाम किया जबकि युवा खिलाड़ी यशवीर सिंह ने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीत लिया। एक ही स्पर्धा में दो भारतीय खिलाड़ियों का पदक जीतना भारतीय एथलेटिक्स के लगातार मजबूत होते प्रदर्शन का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

    प्रतियोगिता की शुरुआत नीरज चोपड़ा ने 80.97 मीटर के थ्रो से की लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने 85.83 मीटर की दूरी तय कर मुकाबले में मजबूत दावेदारी पेश कर दी। इसके बाद भी उन्होंने लगातार स्थिर प्रदर्शन करते हुए 81.29 मीटर और 80.73 मीटर के थ्रो किए। हालांकि श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज ने 89.75 मीटर का शानदार थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया और नीरज को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इसके बावजूद नीरज का यह प्रदर्शन उनके मौजूदा सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा जिसने आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए उनके आत्मविश्वास को नई मजबूती दी।

    दूसरी ओर यशवीर सिंह ने शानदार संघर्ष का परिचय दिया। शुरुआती प्रयासों में वह पदक की दौड़ से कुछ पीछे दिखाई दे रहे थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में 78.55 मीटर और तीसरे प्रयास में 81.33 मीटर का थ्रो करने के बाद उन्होंने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर की दूरी तय कर मुकाबले का रुख बदल दिया। यह उनके करियर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा और इसी के दम पर उन्होंने कांस्य पदक जीतकर भारत को दोहरी खुशी दी। यशवीर का यह प्रदर्शन भारतीय जैवलिन थ्रो की नई पीढ़ी की क्षमता को भी साबित करता है।

    भारत के एक अन्य खिलाड़ी रोहित यादव भी फाइनल में उतरे और उन्होंने 81.56 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए सातवां स्थान हासिल किया। हालांकि वह पदक नहीं जीत सके लेकिन उनका प्रदर्शन भी संतोषजनक माना गया।

    इन दो पदकों के साथ भारत का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुल पदकों का आंकड़ा 23 तक पहुंच गया है। देश के खाते में अब 5 स्वर्ण 12 रजत और 6 कांस्य पदक दर्ज हो चुके हैं। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में भारत ने अब तक 11 पदक जीत लिए हैं जबकि वेटलिफ्टिंग में 8 पदक जूडो में 3 पदक और पैरा पावरलिफ्टिंग में 1 कांस्य पदक हासिल हुआ है।

    पदक तालिका में भारत फिलहाल दसवें स्थान पर बना हुआ है जबकि ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर कायम है। इंग्लैंड दूसरे और कनाडा तीसरे स्थान पर है। भारतीय खिलाड़ियों का लगातार बेहतर प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि आने वाले मुकाबलों में पदकों की संख्या और बढ़ सकती है। नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह की यह उपलब्धि न केवल भारतीय खेल इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ती है बल्कि युवा खिलाड़ियों को भी बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देती है।

  • अमेरिका-ईरान के बीच फिर गहराया तनाव, नए सैन्य हमले के संकेत, व्हाइट हाउस ने तेहरान को दी चेतावनी

    अमेरिका-ईरान के बीच फिर गहराया तनाव, नए सैन्य हमले के संकेत, व्हाइट हाउस ने तेहरान को दी चेतावनी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले किए जा सकते हैं। व्हाइट हाउस का आरोप है कि तेहरान ने युद्धविराम समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया और क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियां जारी रखीं।

    व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा पूरी तरह खोले और पिछले महीने हुए सीजफायर समझौते का सम्मान करे। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते पर हस्ताक्षर के बावजूद ईरान ने उस पर अमल नहीं किया, व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया और अमेरिकी सैनिकों की जान ली। उनके अनुसार, ऐसे कदम आतंकवादी गतिविधियों जैसे हैं और अमेरिका इसका जवाब देगा।

    हालांकि बीती रात ईरान पर कोई अमेरिकी हमला नहीं हुआ, लेकिन ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो और तेल टैंकरों को निशाना बनाया। वहीं कुवैत ने भी अपने हवाई क्षेत्र में घुसे ड्रोन को मार गिराने की जानकारी दी।

    ‘ईरान को कीमत चुकानी होगी’
    कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ऐसी गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं करेंगे। उनका कहना था कि जब तक ईरान अमेरिका की शर्तों के अनुसार बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तब तक उसे अपने कदमों की कीमत चुकानी पड़ेगी।

    ट्रंप बोले- जोरदार कार्रवाई करेंगे
    मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने भी ईरान पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर “बहुत जोरदार हमला” करेगा और अंततः ईरान को पीछे हटना पड़ेगा। ट्रंप ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल जीत हासिल करना है।

    भारत-पाकिस्तान का भी किया जिक्र
    बातचीत के दौरान ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान तनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों के बीच संघर्ष रुकवाने में भूमिका निभाई और टैरिफ का हवाला देकर संभावित परमाणु टकराव टालने की बात कही। हालांकि भारत सरकार पहले भी ट्रंप के इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज कर चुकी है।

  • शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करने की परंपरा क्यों है जानिए इसके पीछे छिपे आध्यात्मिक रहस्य और लाभ

    शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करने की परंपरा क्यों है जानिए इसके पीछे छिपे आध्यात्मिक रहस्य और लाभ


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में शनिवार का दिन न्याय के देवता भगवान शनि को समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु विशेष रूप से शनि मंदिरों में जाकर सरसों का तेल अर्पित करते हैं और शनि देव की पूजा आराधना करते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शनि पूजा व्यक्ति के जीवन में आने वाली अनेक कठिनाइयों को कम करने में सहायक होती है। यही कारण है कि देशभर के शनि मंदिरों में शनिवार के दिन बड़ी संख्या में भक्त दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव कर्मों के आधार पर फल देने वाले देवता हैं। वे किसी के साथ पक्षपात नहीं करते बल्कि अच्छे कर्म करने वालों को सफलता सम्मान और उन्नति प्रदान करते हैं जबकि बुरे कर्म करने वालों को उनके कर्मों के अनुसार दंड भी देते हैं। इसलिए शनि देव की पूजा का सबसे बड़ा संदेश यह माना जाता है कि व्यक्ति सदैव सत्य ईमानदारी और अच्छे आचरण का पालन करे।

    शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा के पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार जब भगवान हनुमान ने शनि देव को रावण की कैद से मुक्त कराया था तब युद्ध के दौरान शनि देव को गंभीर चोटें आई थीं। उस समय उनके शरीर पर तेल लगाया गया जिससे उन्हें आराम मिला। तभी से शनि देव को तेल अर्पित करने की परंपरा शुरू हुई और माना जाने लगा कि तेल चढ़ाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं तथा अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।

    एक अन्य मान्यता यह भी है कि सरसों का तेल नकारात्मक ऊर्जा और अशुभ प्रभावों को दूर करने का प्रतीक माना जाता है। शनिवार के दिन श्रद्धालु शनि देव की प्रतिमा पर सरसों का तेल अर्पित करते हैं दीपक जलाते हैं काले तिल उड़द और नीले या काले वस्त्र अर्पित करते हैं। इसके साथ ही शनि स्तोत्र शनि चालीसा और शनि मंत्रों का जाप करने से भी विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती ढैया या प्रतिकूल दशा चल रही हो वे शनिवार के दिन विधि विधान से शनि पूजा करें तो मानसिक तनाव आर्थिक कठिनाइयों और जीवन की बाधाओं में कमी आ सकती है। हालांकि केवल तेल चढ़ाना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि अपने व्यवहार और कर्मों में भी सुधार करना आवश्यक बताया गया है क्योंकि शनि देव सबसे अधिक कर्म और न्याय को महत्व देते हैं।

    शनिवार के दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना काले तिल दान करना गरीबों की सहायता करना गौ सेवा करना और पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। इन कार्यों को शनि कृपा प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम माना गया है। साथ ही किसी का अपमान न करना झूठ छल कपट और अन्याय से दूर रहना भी शनि पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    धार्मिक विद्वानों का मानना है कि शनि देव को तेल अर्पित करने का वास्तविक उद्देश्य केवल पूजा करना नहीं बल्कि जीवन में संयम धैर्य अनुशासन और अच्छे कर्मों को अपनाना है। जब व्यक्ति श्रद्धा के साथ पूजा के साथ-साथ अपने आचरण को भी बेहतर बनाता है तभी शनि देव की वास्तविक कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख शांति समृद्धि तथा सफलता के नए मार्ग खुलते हैं।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में भारत का कमाल, राष्ट्रपति ने स्वर्ण विजेताओं अस्मिता डे और हर्ष सिंह को सराहा

    कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में भारत का कमाल, राष्ट्रपति ने स्वर्ण विजेताओं अस्मिता डे और हर्ष सिंह को सराहा


    नई दिल्ली। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जूडो में नया इतिहास रच दिया है। भारतीय खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर पूरे देश में खुशी की लहर है। महिलाओं की 48 किलोग्राम स्पर्धा में अस्मिता डे और पुरुषों की 60 किलोग्राम स्पर्धा में हर्ष सिंह ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। इन दोनों खिलाड़ियों की ऐतिहासिक सफलता पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी मेहनत समर्पण और उत्कृष्ट प्रदर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संदेश में कहा कि अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला जूडो खिलाड़ी बनकर इतिहास रचा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं बल्कि पूरे देश के खेल जगत के लिए गर्व का विषय है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि अस्मिता आगे भी इसी तरह शानदार प्रदर्शन करती रहेंगी और भारत का नाम दुनिया भर में ऊंचा करेंगी।

    अस्मिता डे ने महिलाओं की 48 किलोग्राम जूडो स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में कनाडा की हेइडी क्वैच को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह जीत इसलिए भी विशेष रही क्योंकि पहली बार किसी भारतीय महिला जूडो खिलाड़ी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल हासिल किया है। उनकी तकनीक आत्मविश्वास और संयम ने पूरे मुकाबले में दर्शकों का दिल जीत लिया।

    अस्मिता की ऐतिहासिक जीत के कुछ ही समय बाद हर्ष सिंह ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 60 किलोग्राम स्पर्धा के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया। इसके साथ ही हर्ष सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय जूडो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

    राष्ट्रपति मुर्मु ने हर्ष सिंह को भी बधाई देते हुए कहा कि उनका धैर्य अनुशासन और खेल कौशल भारत के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने आशा जताई कि हर्ष भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए ऐसे ही गौरवशाली प्रदर्शन करते रहेंगे।

    भारत के लिए जूडो में यह दिन इसलिए भी यादगार रहा क्योंकि यामिनी मौर्य ने महिलाओं की 57 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश की पदक संख्या में महत्वपूर्ण योगदान दिया। फाइनल मुकाबले में उन्हें इंग्लैंड की एसेलिया टोपराक के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा लेकिन उनका प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में सराहनीय रहा।

    जूडो में दो स्वर्ण और एक रजत पदक भारत के लिए इस बात का संकेत है कि देश अब इस खेल में भी लगातार मजबूत होता जा रहा है। खिलाड़ियों की मेहनत आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर खेल सुविधाओं का सकारात्मक परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई देने लगा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह खिलाड़ियों को अवसर और संसाधन मिलते रहे तो आने वाले वर्षों में भारत जूडो सहित कई अन्य खेलों में भी विश्व स्तर पर बड़ी ताकत बन सकता है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन देश के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है। अस्मिता डे हर्ष सिंह और यामिनी मौर्य ने यह साबित कर दिया कि समर्पण कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी सफलता पूरे देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनकर लंबे समय तक याद की जाएगी।

  • जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू, पूरे इलाके की घेराबंदी

    जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू, पूरे इलाके की घेराबंदी


    श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेरकर व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। केल्लाम क्षेत्र में शुक्रवार रात हुए इस हमले में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। एक श्रमिक ने घटनास्थल के बाद अस्पताल में दम तोड़ा, जबकि दूसरे घायल मजदूर की शनिवार को उपचार के दौरान मौत हो गई।

    बताया गया कि शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे आतंकियों ने केल्लाम इलाके में मजदूरों को निशाना बनाकर गोलीबारी की। हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर खुफिया सूचनाओं के आधार पर बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

    मृतकों की पहचान छत्तीसगढ़ निवासी 24 वर्षीय दीपक रात्रे और 28 वर्षीय भोपिंदर के रूप में हुई है। दीपक की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल भोपिंदर को इलाज के लिए शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। चिकित्सकों के अनुसार, उनके सीने के दाहिने हिस्से में गोली लगी थी।

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे कायराना हरकत बताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी।

    वहीं, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी घटना की निंदा करते हुए पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने सुरक्षा बलों को अभियान और तेज करने तथा हमले में शामिल आतंकियों के खिलाफ शीघ्र और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

  • अगस्त के पहले सप्ताह में 3 राशियों को रहना होगा सतर्क! चंद्रमा के अशुभ योग बढ़ा सकते हैं मुश्किलें

    अगस्त के पहले सप्ताह में 3 राशियों को रहना होगा सतर्क! चंद्रमा के अशुभ योग बढ़ा सकते हैं मुश्किलें


    नई दिल्ली। अगस्त 2026 का पहला सप्ताह ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान चंद्रमा की चाल में होने वाले बदलाव से विष योग और ग्रहण प्रभाव जैसी अशुभ स्थितियां बनने की संभावना है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इन योगों का असर सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन मिथुन, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    क्या है विष योग और ग्रहण प्रभाव?
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा का संबंध शनि जैसे क्रूर ग्रह से बनता है, तब विष योग का निर्माण होता है। इसे मानसिक तनाव, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और कार्यों में बाधा का कारण माना जाता है। वहीं, राहु या केतु के प्रभाव में चंद्रमा आने पर निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है और आर्थिक व पारिवारिक चुनौतियां बढ़ने की आशंका रहती है।

    इन 3 राशियों को रहना होगा सतर्क

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के लोगों के लिए अगस्त का पहला सप्ताह मानसिक तनाव और चिड़चिड़ेपन वाला हो सकता है। कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा। कारोबार में जोखिम भरे फैसलों से बचें। स्वास्थ्य के लिहाज से सिरदर्द या पेट संबंधी समस्याएं परेशान कर सकती हैं।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि के जातकों के खर्च अचानक बढ़ सकते हैं। परिवार में किसी बात को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है, इसलिए वाणी पर संयम रखें। कानूनी मामलों में देरी संभव है। वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    मीन राशि
    मीन राशि वालों के लिए इस दौरान कार्यों में रुकावट और मानसिक दबाव बढ़ सकता है। विरोधी सक्रिय रह सकते हैं, इसलिए सतर्क रहें। आर्थिक मामलों में किसी पर भी बिना जांच-पड़ताल भरोसा न करें और निवेश सोच-समझकर करें।

    अशुभ प्रभाव कम करने के उपाय
    – प्रतिदिन भगवान शिव का जलाभिषेक कर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
    – शनिवार को काली उड़द, सरसों का तेल या काले वस्त्र का दान करें।
    – बड़े आर्थिक फैसले या संपत्ति से जुड़े सौदे जल्दबाजी में न लें।
    – महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले परिवार के वरिष्ठ सदस्यों की सलाह लेना लाभकारी माना गया है।

  • वास्तु शास्त्र के आसान टिप्स, जो आपके घर में ला सकते हैं सुख, शांति और समृद्धि

    वास्तु शास्त्र के आसान टिप्स, जो आपके घर में ला सकते हैं सुख, शांति और समृद्धि


    नई दिल्ली । हर व्यक्ति चाहता है कि उसके घर में हमेशा सुख शांति समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। भारतीय परंपरा में वास्तु शास्त्र को घर के निर्माण और व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। मान्यता है कि यदि घर में दिशाओं और ऊर्जा के संतुलन का ध्यान रखा जाए तो परिवार के सदस्यों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है तथा आर्थिक और सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। हालांकि वास्तु को आस्था और परंपरा का विषय माना जाता है इसलिए इसे व्यक्तिगत विश्वास के अनुसार अपनाया जा सकता है।

    घर का मुख्य द्वार सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहीं से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। मुख्य दरवाजे के आसपास हमेशा साफ सफाई बनाए रखें और अनावश्यक सामान जमा न होने दें। प्रवेश द्वार पर पर्याप्त रोशनी रहने से घर आकर्षक दिखाई देता है और स्वागत का सकारात्मक वातावरण बनता है।

    पूजा घर को घर के शांत और स्वच्छ हिस्से में रखना बेहतर माना जाता है। पूजा स्थल पर नियमित सफाई और दीपक या धूप जलाने से आध्यात्मिक वातावरण बना रहता है। पूजा स्थान के आसपास जूते चप्पल या गंदगी रखने से बचना चाहिए ताकि स्थान की पवित्रता बनी रहे।

    रसोई को परिवार की समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। रसोई हमेशा साफ और व्यवस्थित होनी चाहिए। भोजन बनाने के स्थान पर स्वच्छता बनाए रखना स्वास्थ्य की दृष्टि से भी आवश्यक है। गैस चूल्हा और पानी की व्यवस्था अलग अलग रखने की सलाह दी जाती है ताकि कार्य आसान और सुरक्षित बना रहे।

    शयनकक्ष ऐसा होना चाहिए जहां पर्याप्त हवा और प्राकृतिक रोशनी आती हो। कमरे में अनावश्यक सामान जमा करने से बचें क्योंकि इससे अव्यवस्था बढ़ती है और मानसिक तनाव भी महसूस हो सकता है। अच्छी नींद के लिए शांत वातावरण और नियमित सफाई बेहद जरूरी मानी जाती है।

    घर में पौधे लगाने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। हरे भरे पौधे वातावरण को ताजगी देने के साथ घर की सुंदरता भी बढ़ाते हैं। तुलसी जैसे पौधों को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी शुभ माना जाता है। सूखे या मुरझाए पौधों को लंबे समय तक घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि वे घर की सुंदरता कम कर देते हैं।

    घर में टूटी हुई वस्तुएं खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान या लंबे समय से बेकार पड़े सामान को समय समय पर हटाते रहना चाहिए। इससे घर व्यवस्थित रहता है और जगह का बेहतर उपयोग हो पाता है। साफ और खुला वातावरण मानसिक सुकून देने में भी मदद करता है।

    वास्तु के अनुसार घर में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का आना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। खिड़कियां नियमित रूप से खोलने से घर में ताजगी बनी रहती है और बंद वातावरण की समस्या नहीं होती। इसके साथ ही रोजाना सफाई और स्वच्छता पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है।

    ध्यान रहे कि केवल वास्तु नियम अपनाने से जीवन की सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। सफलता के लिए मेहनत सकारात्मक सोच अनुशासित जीवनशैली और परिवार के बीच आपसी प्रेम और सम्मान सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इन मूल्यों के साथ घर की स्वच्छता और व्यवस्थित व्यवस्था पर ध्यान दिया जाए तो घर का वातावरण स्वाभाविक रूप से सुखद और सकारात्मक बन सकता है।

  • 'मैं रावण का वध करूंगा' Ramayana के ट्रेलर में दिखे संवाद पर विवाद, क्या श्रीराम ने लिया था ऐसा प्रण?

    'मैं रावण का वध करूंगा' Ramayana के ट्रेलर में दिखे संवाद पर विवाद, क्या श्रीराम ने लिया था ऐसा प्रण?


    नई दिल्‍ली । रामायण फिल्म (रामायणा) का ट्रेलर आए दो दिन हो चुके है. निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी की मच अवेटेड इस फिल्म के फर्स्ट लुक और इंप्रेशन को लेकर पब्लिक डोमेन में काफी बज है. ट्रेलर को मिक्स रेस्पांस मिल रहे हैं और इसमें जितने भी किरदारों की झलकियां दिखाई दे रही हैं, सभी के लुक, उनकी स्क्रीन प्रजेंस, कॉस्ट्यूम, डॉयलॉग डिलिवरी, एक्शन और एक्सप्रेशन पर खूब बातें हो रही हैं.

    इन तमाम चर्चाओं के बीच एक बात पर निगाह जाकर टिक जाती है. ट्रेलर के एक हिस्से में श्रीराम बने रणबीर कपूर बहुत गुस्से में धनुष उठाते हुए प्रण करते हैं कि ‘वह रावण का तीनों लोकों के सामने वध करेंगे.’ इस सीन को देखने के बाद सोशल मीडिया पर इस बात की चर्चा भी चल पड़ी है कि श्रीराम ने कब ऐसा प्रण लिया कि वह रावण का वध करेंगे? क्या उन्होंने कभी बहुत गुस्से में ऐसा कुछ कहा था? क्या पौराणिक ग्रंथों और किताबों में कहीं ऐसा जिक्र मिलता है?

    श्रीराम को रामायण-रामचरित मानस और अन्य पौराणिक ग्रंथों में भी युद्ध में भी स्थिर रहने वाला, कभी विचलित न होने वाला, भुवन मोहिनी मुस्कान वाला, कोमल और सौम्य वाणी बोलने वाला, महावीर और हर कौशल में निपुण होने के बावजूद अतिविनम्र और दीनदयालु बताया गया है. बल्कि बड़े-बड़े निशाचरों का भी वध उन्होंने कभी क्रोध में नहीं किया. उन्हें अंतिम से अंतिम समय तक मौका देने की कोशिश की.

    ताड़का वध में भी नहीं दिखा था श्रीराम का क्रोध
    श्रीराम ने सबसे पहले ताड़का वध किया था. इस वध में भी उनके क्रोध और भुजाओं के फड़कने-गर्जने का कहीं जिक्र नहीं है. रामचरित मानस में तो संत तुलसी लिखते हैं कि वन के मार्ग में जब ताड़का हमला करने के लिए दौड़ी आई तो विश्वामित्र के इशारे पर श्रीराम ने एक ही बाण से उसके प्राण हर लिए और फिर उसे मरने से पहले दीन मानकर अपना देवस्वरूप भी दिखा दिया.

    चले जात मुनि दीन्हि देखाई। सुनि ताड़का क्रोध करि धाई॥
    एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा। दीन जानि तेहि निज पद दीन्हा॥3॥ (ताड़का वध, बालकांड)

    महर्षि वाल्मीकि इसी बात को श्लोक में लिखते हैं कि

    स तया ताडितो बाणैर्मर्मज्ञो मर्मभेदिभिः।
    पपात भुवि ताडका सा प्राणैः संपरिवर्जिता।।

    अर्थ: श्रीराम द्वारा मर्मभेदी बाणों से घायल होने पर, ताड़का धरती पर गिर पड़ी और उसके प्राण पखेरू उड़ गए.

    कहने का मतलब है कि श्रीराम ने राक्षसों का वध करते हुए कहीं भी क्रोध, क्षोभ, अनावश्यक बल प्रदर्शन, गर्जना आदि काम नहीं किए. उन्होंने सावधान करने के लिए चेताया जरूर, लेकिन किसी का वध करने जैसा प्रण नहीं लिया और रावण के वध का प्रण उन्होंने लिया हो, ऐसा भी जिक्र नहीं आता है.

    श्रीराम ने प्रण भी करुणा में लिया था, क्रोध में नहीं
    अरण्य कांड में एक जगह जिक्र आता है, जहां श्रीराम राक्षसों और पापियों से धरती की मुक्ति का प्रण लेते हैं. लेकिन यहां भी ‘वध’ शब्द नहीं आता है. जब श्रीराम वन में बिखरे हड्डियों और कंकालों को देखकर पूछते हैं कि ये किसके हैं तो डरे हुए ऋषि-मुनि बताते हैं कि राक्षसों ने जिन मुनियों को खा डाला है यह उनके ही कंकाल हैं. श्रीराम यह सब देखकर करुणा से भर उठते हैं. तब संत तुलसी एक दोहे में उनका प्रण बताते हैं –

    ‘निसिचर हीन करउँ महि भुज उठाइ पन कीन्ह।
    सकल मुनिन्ह के आश्रमन्हि जाइ जाइ सुख दीन्ह॥9॥’ (अरण्य कांड)

    भाव: श्री रामजी ने भुजा उठाकर प्रण किया कि मैं पृथ्वी को राक्षसों से रहित कर दूंगा. फिर समस्त मुनियों के आश्रमों में जा-जाकर उनको (दर्शन एवं सम्भाषण का) सुख दिया.

    इसी तरह वाल्मीकि रामायण में भी ऐसा स्पष्ट जिक्र नहीं मिलता है कि श्रीराम ने सीधे रावण वध की बात की हो. लेकिन उन्होंने शरणागत की हर प्रकार से रक्षा और ऋषि-मुनि व संत समाज की हर प्रकार से रक्षा-सुरक्षा का वचन कई जगह लिया.

    जैसे जब विभीषण के आने की खबर उन्हें लगती है तो वह स्पष्ट कहते हैं कि ‘जो मेरी शरण में आ गया तो मैं उसे अभय देता हूं. यही मेरा व्रत है. फिर अगले श्लोक में वह कहते हैं कि “हे सुग्रीव! उसे यहां ले आओ. वह विभीषण हो या खुद रावण ही क्यों न हो, मैंने उसे अभय दे दिया है.’

    सकृदेव प्रपन्नाय तवास्मीति च याचते।
    अभयं सर्वभूतेभ्यो ददाम्येतद् व्रतं मम॥
    (युद्धकाण्ड, सर्ग 18, श्लोक 33 – गीता प्रेस)

    आनयैनं हरिश्रेष्ठ दत्तमस्याभयं मया।
    विभीषणो वा सुग्रीव यदि वा रावणः स्वयम्॥ (युद्धकाण्ड, सर्ग 18, श्लोक 34 – गीता प्रेस)

    सुग्रीव के आपा खोने और क्रोधित होने का है जिक्र
    मचरित मानस और रामायण दोनों में ही ऐसा जिक्र मिलता है कि सुग्रीव जरूर क्रोध में आकर ऐसा कहते हैं कि वह रावण का वध करेंगे या राक्षस कुल का समूल नाश कर देंगे. बल्कि जब सुग्रीव पहली बार रावण को देखते हैं तो आपा खो देते हैं और बिना युद्ध की घोषणा के ही रावण पर हमला कर देते हैं. तब श्रीराम इसे मर्यादा के विपरीत बताते हैं और भविष्य में कभी भी ऐसा न करने के लिए कहते हैं.

    वाल्मीकि रामायण में सुग्रीव, श्रीराम के साथ मित्रता करते हुए संकल्प लेते हैं और कहते हैं कि हे रघुनन्दन! आपकी कृपा से मैं अपहृत हुई माता सीता को ठीक उसी तरह वापस लेकर आऊंगा, जैसे खोए हुए वेदों को वापस लाया गया था.मैं संपूर्ण लोक को पीड़ित करने वाले उस कांटे रूपी रावण का उसके पूरे दल-बल (वंश) सहित विनाश करने में आपका पूर्ण साथ दूंगा,

    अहं तद् रघुनन्दन।
    आनयिष्यामि तां सीतां नष्टां वेदश्रुतीमिव ॥
    प्रसादात् तव राघव।
    हनिष्यामि सगणं रावणं लोककण्टकम् ॥

    रामचरित मानस के किष्किंधा कांड में यही बात सुग्रीव ऐसे कहते हैं-

    कह सुग्रीव सुनहु रघुबीरा। तजहु सोच मन आनहु धीरा॥
    सब प्रकार करिहउं सेवकाई। जेहि बिधि मिलिहि जानकी आई॥

    भाव- सुग्रीव ने कहा- हे रघुवीर! सुनिए, आप शोक का त्याग कर दीजिए और मन में धैर्य धारण कीजिए. मैं सब प्रकार से आपकी सेवा करूंगा और वह हर उपाय करूंगा जिससे जानकी जी (माता सीता) आपको वापस मिल जाएं.

    कुल मिलाकर बात ये है कि ट्रेलर में रणबीर कपूर श्रीराम के किरदार के रूप में जो प्रण ले रहे हैं, उसका ठीक-ठीक जिक्र या वर्णन प्रचलित ग्रंथ परंपरा में नहीं दिखता है. हालांकि रामकथा के कई तरह के वर्जन हैं. सबमें लेखकों ने अपने-अपने अनुसार रचनात्मक स्वतंत्रता ली है. लेकिन नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी ने किस वर्जन से ये प्रसंग चुना होगा, इसे ठीक-ठीक समझना अभी तो मुश्किल है.

  • ग्लोइंग और हेल्दी स्किन का आसान राज प्राकृतिक चीजों से करें त्वचा की देखभाल और पाएं निखरी हुई खूबसूरती

    ग्लोइंग और हेल्दी स्किन का आसान राज प्राकृतिक चीजों से करें त्वचा की देखभाल और पाएं निखरी हुई खूबसूरती


    नई दिल्ली । आज के समय में हर कोई साफ चमकदार और स्वस्थ त्वचा चाहता है। इसके लिए लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और केमिकल युक्त कॉस्मेटिक्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कई बार इनका असर अस्थायी होता है और लंबे समय तक उपयोग करने पर त्वचा को नुकसान भी पहुंच सकता है। ऐसे में प्राकृतिक चीजों से त्वचा की देखभाल करना सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका माना जाता है। प्रकृति में मौजूद कई ऐसे तत्व हैं जो बिना किसी साइड इफेक्ट के त्वचा को पोषण देते हैं और उसकी प्राकृतिक चमक बनाए रखने में मदद करते हैं।

    त्वचा की अच्छी सेहत की शुरुआत सही खानपान से होती है। अगर शरीर को पर्याप्त विटामिन मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं तो उसका असर चेहरे पर भी साफ दिखाई देता है। मौसमी फल हरी सब्जियां सूखे मेवे और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से त्वचा अंदर से हाइड्रेट रहती है और उसकी नमी बनी रहती है। शरीर में पानी की कमी होने पर त्वचा रूखी और बेजान नजर आने लगती है इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी है।

    एलोवेरा त्वचा के लिए सबसे उपयोगी प्राकृतिक चीजों में से एक माना जाता है। इसका जेल त्वचा को ठंडक देता है नमी बनाए रखता है और छोटे दाग धब्बों को कम करने में मदद करता है। नियमित रूप से एलोवेरा जेल लगाने से त्वचा मुलायम और ताजा महसूस होती है। इसी तरह शहद भी एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर है जो त्वचा को पोषण देने के साथ उसे मुलायम बनाए रखने में मदद करता है।

    दही और बेसन का मिश्रण भी त्वचा की सफाई के लिए काफी लोकप्रिय घरेलू उपाय है। यह मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है और त्वचा को प्राकृतिक निखार देता है। हल्दी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को संक्रमण से बचाने के साथ उसकी चमक बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं। हालांकि हल्दी का उपयोग सीमित मात्रा में करना चाहिए ताकि त्वचा पर पीलेपन की समस्या न हो।

    खीरा और गुलाब जल भी त्वचा की देखभाल में अहम भूमिका निभाते हैं। खीरा त्वचा को ठंडक पहुंचाता है और आंखों के आसपास की सूजन कम करने में मदद करता है जबकि गुलाब जल त्वचा को ताजगी देने के साथ उसके पीएच संतुलन को बनाए रखने में सहायक माना जाता है। चेहरे की नियमित सफाई और सोने से पहले मेकअप पूरी तरह हटाना भी स्वस्थ त्वचा के लिए जरूरी आदत है।

    धूप से बचाव भी त्वचा की सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। तेज धूप में लंबे समय तक रहने से त्वचा पर टैनिंग समय से पहले झुर्रियां और पिगमेंटेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बाहर निकलते समय चेहरे को ढकना और जरूरत के अनुसार सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना त्वचा को नुकसान से बचा सकता है।

    सिर्फ बाहरी देखभाल ही नहीं बल्कि पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी भी त्वचा की खूबसूरती बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाती है। अच्छी नींद के दौरान त्वचा खुद को रिपेयर करती है और नई कोशिकाओं का निर्माण होता है। नियमित योग ध्यान और हल्का व्यायाम रक्त संचार बेहतर बनाते हैं जिससे त्वचा में प्राकृतिक चमक बनी रहती है।

    ध्यान रखें कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले उसे त्वचा के छोटे हिस्से पर आजमाना बेहतर होता है। यदि किसी प्रकार की एलर्जी जलन या गंभीर त्वचा संबंधी समस्या हो तो त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है। प्राकृतिक चीजों के साथ नियमित देखभाल संतुलित जीवनशैली और स्वस्थ भोजन अपनाकर लंबे समय तक सुंदर स्वस्थ और दमकती त्वचा पाई जा सकती है।

  • शनिवार के उपाय और सावधानियां, शनि पूजा के इन नियमों से चमक सकती है किस्मत

    शनिवार के उपाय और सावधानियां, शनि पूजा के इन नियमों से चमक सकती है किस्मत


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में शनिवार का दिन न्याय के देवता भगवान शनि को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। इसलिए उनकी पूजा केवल भय से नहीं बल्कि श्रद्धा और सद्कर्म के भाव से करनी चाहिए। कहा जाता है कि जो व्यक्ति शनि पूजा के नियमों का पालन करता है उसके जीवन की कई बाधाएं धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं और आर्थिक परेशानियों से लेकर मानसिक तनाव तक में राहत मिलने लगती है।

    शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा से पहले भगवान गणेश का स्मरण करें और फिर शनि देव की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। तिल के तेल का दीपक जलाना विशेष शुभ माना जाता है। इसके बाद काले तिल सरसों का तेल उड़द की दाल और नीले या काले पुष्प अर्पित करें। श्रद्धा के साथ शनि मंत्र अथवा शनि स्तोत्र का पाठ करें। हनुमान चालीसा का पाठ भी शनिवार के दिन विशेष लाभदायक माना जाता है क्योंकि भगवान हनुमान की कृपा से शनि दोष का प्रभाव कम होने की मान्यता है।

    शनि पूजा के दौरान संयम और सादगी का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना गरीबों को भोजन कराना काले तिल कंबल या लोहे का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। शनि देव कर्म और न्याय के प्रतीक हैं इसलिए ईमानदारी सत्य और अनुशासन का पालन करना भी उनकी आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    शनिवार के दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। किसी का अपमान करने झूठ बोलने क्रोध करने या किसी को कष्ट पहुंचाने से बचना चाहिए। बिना वजह पेड़ पौधों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए और पशु पक्षियों के प्रति भी दया का भाव रखना चाहिए। कई लोग इस दिन पीपल के वृक्ष के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं जिसे शुभ माना जाता है।

    जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती ढैया या शनि से जुड़ी अन्य स्थितियां चल रही हों उनके लिए शनिवार का व्रत और नियमित पूजा लाभकारी मानी जाती है। हालांकि किसी भी ज्योतिषीय उपाय को अपनाने से पहले योग्य विद्वान की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव केवल दंड देने वाले देवता नहीं बल्कि कर्म के अनुसार न्याय करने वाले देव हैं। इसलिए यदि व्यक्ति अच्छे कर्म करता है दूसरों की मदद करता है और जीवन में ईमानदारी बनाए रखता है तो शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। श्रद्धा भक्ति और सकारात्मक सोच के साथ किए गए पूजा पाठ का फल भी अधिक शुभ माना जाता है।