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  • संसद की तस्वीर बनी सियासत का केंद्र, टीएमसी सांसद की मौजूदगी से ममता बनर्जी पर उठे सवाल

    संसद की तस्वीर बनी सियासत का केंद्र, टीएमसी सांसद की मौजूदगी से ममता बनर्जी पर उठे सवाल


    नई दिल्ली । संसद की कैंटीन में हुई एक सामान्य मुलाकात की तस्वीर ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय और आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ एक ही टेबल पर भोजन करते नजर आए। तस्वीर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में दोनों नेताओं के भाजपा से नजदीकियां बढ़ने और संभावित दलबदल की अटकलें शुरू हो गईं। हालांकि टीएमसी नेताओं ने इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए इसे संसद परिसर की सामान्य सामाजिक मुलाकात बताया है।

    तस्वीर वायरल होने के बाद सबसे पहले सौगत रॉय ने पूरे घटनाक्रम पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि संसद की कैंटीन में वे पहले से बैठे थे, बाद में अमित शाह और भाजपा के अन्य नेता उसी मेज पर आकर बैठे और कुछ ही देर में वहां से चले गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान किसी तरह की राजनीतिक बातचीत नहीं हुई। उनका कहना था कि भाजपा की ओर से संपर्क किए जाने की चर्चा निराधार है और वास्तविकता यह है कि उनकी पार्टी उन नेताओं से संपर्क कर रही है जो एनडीए में चले गए हैं, ताकि उन्हें वापस लाया जा सके।

    दूसरी ओर शत्रुघ्न सिन्हा ने भी तस्वीर को लेकर उठे विवाद को अनावश्यक बताया। उन्होंने कहा कि जेपी नड्डा उनके पुराने मित्र हैं और संसद में साथ बैठकर भोजन करना कोई असामान्य बात नहीं है। उन्होंने दोहराया कि इस मुलाकात का राजनीति या पार्टी बदलने जैसी किसी संभावना से कोई संबंध नहीं है।

    टीएमसी के अन्य नेताओं ने भी तस्वीरों को लेकर चल रही चर्चाओं को खारिज किया। सांसद कल्याण बनर्जी और विधायक कुणाल घोष ने कहा कि संसद या विधानसभा जैसे सार्वजनिक स्थानों पर अलग-अलग दलों के नेताओं का मिलना-जुलना सामान्य प्रक्रिया है। ऐसी तस्वीरों को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विचारधारा और राजनीतिक प्रतिबद्धता किसी तस्वीर से तय नहीं होती।

    हालांकि पार्टी के भीतर से अलग स्वर भी सुनाई दिए। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने तस्वीरों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने तस्वीरों को ध्यान से देखा है और संभव है कि इसके पीछे कोई रणनीति हो। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से उनका कोई संबंध नहीं है और राजनीति में इस तरह की गतिविधियां होती रहती हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हाल के दिनों में राज्य की राजनीति में कई नेताओं के दल बदलने और राजनीतिक समीकरण बदलने की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में संसद की कैंटीन में सामने आई यह तस्वीर भी चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि फिलहाल न तो सौगत रॉय और न ही शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा में शामिल होने जैसी किसी संभावना के संकेत दिए हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के भीतर अलग-अलग दलों के नेताओं के बीच सामाजिक संबंध और औपचारिक मुलाकातें लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा हैं। इसलिए केवल एक तस्वीर के आधार पर किसी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में यदि इस घटनाक्रम पर कोई नया राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है, तभी इन अटकलों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

  • 'कैप नंबर 278 अब यहीं तक': अजिंक्य रहाणे ने लिया संन्यास, भारतीय क्रिकेट का भरोसेमंद बल्लेबाज बोला अलविदा

    'कैप नंबर 278 अब यहीं तक': अजिंक्य रहाणे ने लिया संन्यास, भारतीय क्रिकेट का भरोसेमंद बल्लेबाज बोला अलविदा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत, संयमित और भरोसेमंद खिलाड़ियों में गिने जाने वाले अजिंक्य रहाणे ने आखिरकार क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। 2020-21 की ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया की धरती पर टीम इंडिया को अविस्मरणीय जीत दिलाने वाले रहाणे ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए अपने दो दशक लंबे क्रिकेट सफर को विराम दिया। उनके इस फैसले के साथ भारतीय क्रिकेट का एक ऐसा अध्याय समाप्त हो गया, जिसे साहस, धैर्य और टीम भावना के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

    संन्यास की घोषणा करते हुए रहाणे ने लिखा कि कैप नंबर 278 अब यहीं तक है। उन्होंने अपने प्रशंसकों, साथियों और भारतीय क्रिकेट से जुड़े हर व्यक्ति का आभार जताते हुए कहा कि हर शुरुआत का एक अंत होता है और उन्हें लगता है कि अब आगे बढ़ने का यही सही समय है। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी में हमेशा सही टाइमिंग पर भरोसा किया और अब संन्यास लेने के लिए भी यही सही समय है।

    मुंबई के डोंबिवली से निकलकर भारतीय टीम तक का सफर तय करने वाले रहाणे ने कहा कि उनका बचपन सिर्फ एक सपना लेकर बीता कि एक दिन भारत की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने हमेशा देश और टीम को खुद से ऊपर रखा और पूरी ईमानदारी के साथ क्रिकेट खेला। उनका मानना रहा कि अगर नीयत साफ हो तो खेल हमेशा आपका साथ देता है।

    रहाणे के करियर का सबसे स्वर्णिम अध्याय 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया दौरा माना जाता है। एडिलेड टेस्ट में भारत के 36 रन पर ऑलआउट होने और विराट कोहली के स्वदेश लौटने के बाद टीम पूरी तरह दबाव में थी। ऐसे मुश्किल समय में रहाणे ने कप्तानी संभाली और मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर शानदार शतक लगाकर टीम में नया आत्मविश्वास भरा। उनकी कप्तानी में युवा और चोटों से जूझ रही भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में 2-1 से हराकर इतिहास रच दिया। यही वजह है कि उन्हें आज भी मेलबर्न का हीरो कहा जाता है।

    रहाणे लंबे समय तक विदेशी परिस्थितियों में भारत के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज रहे। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी-20 मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 5077 रन, 12 शतक और 26 अर्धशतक दर्ज हैं। वनडे में उन्होंने 2962 रन बनाए, जिसमें तीन शतक और 24 अर्धशतक शामिल रहे। टी-20 अंतरराष्ट्रीय में उन्होंने 375 रन बनाए। तीनों प्रारूपों को मिलाकर रहाणे ने भारत के लिए 8414 अंतरराष्ट्रीय रन बनाए और 15 शतक जड़े।

    वह 2015 विश्व कप में सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली भारतीय टीम का अहम हिस्सा रहे। इसके अलावा 2023 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप चक्र में भी उन्होंने भारत के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ आखिरी टेस्ट खेलने के बाद उन्हें टीम में दोबारा मौका नहीं मिला। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर वापसी की कोशिश की, लेकिन राष्ट्रीय टीम में वापसी का सपना पूरा नहीं हो सका।

    अपने विदाई संदेश में रहाणे ने कहा कि क्रिकेट ने उन्हें जीत भी दिखाई और हार भी, लेकिन एक जगह वह कभी नहीं हारे और वह था लोगों का प्यार। उन्होंने कहा कि अब वह अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों को अपने अनुभव और खेल से सीखे गए मूल्यों को देना चाहते हैं ताकि भारतीय क्रिकेट आगे भी नई ऊंचाइयों को छूता रहे।

    अजिंक्य रहाणे भले ही मैदान पर अब बल्लेबाजी करते नजर नहीं आएंगे, लेकिन उनकी शांत कप्तानी, कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी निभाने का जज्बा और मेलबर्न में खेली गई ऐतिहासिक पारी भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगी।

  • बारिश का नया दौर शुरू 31 जुलाई को कैसा रहेगा मौसम जानिए किन राज्यों में बरसेंगे बादल और कहां रहेगा बाढ़ जैसा खतरा

    बारिश का नया दौर शुरू 31 जुलाई को कैसा रहेगा मौसम जानिए किन राज्यों में बरसेंगे बादल और कहां रहेगा बाढ़ जैसा खतरा


    मध्य प्रदेश । 31 जुलाई को देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार कई राज्यों में भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। मध्य प्रदेश राजस्थान गुजरात महाराष्ट्र छत्तीसगढ़ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित कई इलाकों में तेज बारिश के साथ गरज चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है।

    मध्य प्रदेश में लगातार सक्रिय मानसून के कारण बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। प्रदेश में मानसून ट्रफ साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन जैसे तीन मजबूत मौसम तंत्र सक्रिय हैं जिनके प्रभाव से भोपाल इंदौर उज्जैन नर्मदापुरम हरदा धार देवास बैतूल सीहोर रायसेन सागर छिंदवाड़ा और आसपास के जिलों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। कई स्थानों पर जलभराव और नदी नालों के उफान पर आने की आशंका भी जताई गई है।

    राजस्थान के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में भी तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। कोटा उदयपुर झालावाड़ और बारां जैसे क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। गुजरात के दक्षिणी हिस्सों और सौराष्ट्र क्षेत्र में भी तेज बारिश के आसार हैं जबकि महाराष्ट्र के कोंकण विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र में भी बादल जमकर बरस सकते हैं।

    उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा बना हुआ है। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वहीं जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

    उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भी मध्यम से भारी बारिश की संभावना है। दिल्ली एनसीआर में दिनभर बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है जिससे लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।

    मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है क्योंकि पश्चिमी तट पर तेज हवाओं के साथ समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं। इसके अलावा निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति से सतर्क रहने को कहा गया है। बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए खुले मैदानों पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने की सलाह भी दी गई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय रहेगा और कई राज्यों में अच्छी बारिश दर्ज की जा सकती है। किसानों के लिए यह बारिश खरीफ फसलों के लिहाज से लाभदायक मानी जा रही है लेकिन अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी होगा। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने और आपदा प्रबंधन टीमों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत कार्य शुरू किया जा सके।

  • 'रामायण' से पहले रणबीर कपूर को सलाह, 'महाभारत' के कृष्ण बोले- अपनी भाषा और आचरण का रखें ख्याल

    'रामायण' से पहले रणबीर कपूर को सलाह, 'महाभारत' के कृष्ण बोले- अपनी भाषा और आचरण का रखें ख्याल


    नई दिल्ली । नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण का ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेज हो गई है। ट्रेलर को लेकर दर्शकों और फिल्मी हस्तियों की ओर से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच टीवी के चर्चित धारावाहिक महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण का किरदार निभाकर घर-घर पहचान बनाने वाले अभिनेता नितीश भारद्वाज ने भी फिल्म और इसकी स्टारकास्ट को लेकर अपनी राय साझा की है। उन्होंने फिल्म की भव्यता की तारीफ करते हुए रणबीर कपूर को एक खास सलाह भी दी।

    नितीश भारद्वाज ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लंबा संदेश लिखते हुए कहा कि रामायण भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है। उन्होंने निर्देशक नितेश तिवारी की प्रशंसा करते हुए लिखा कि यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना सकती है और प्रोडक्शन डिजाइन, सिनेमैटोग्राफी तथा तकनीकी प्रस्तुति के लिए कई पुरस्कार जीतने की क्षमता रखती है। उन्होंने फिल्म में संगीतकार हैंस जिमर के जुड़ने को भी भारतीय सिनेमा के लिए महत्वपूर्ण बताया।

    अपने संदेश में उन्होंने अभिनेता यश की भी सराहना करते हुए कहा कि उनका काम वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने वाला है। वहीं रणबीर कपूर की अभिनय क्षमता की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि अब राम का किरदार निभाने के बाद उनकी जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

    नितीश भारद्वाज ने रणबीर कपूर को सलाह देते हुए लिखा कि भारत की संस्कृति, परंपरा और मूल्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले किरदार निभाने के बाद उन्हें भविष्य में अपनी फिल्मों के चयन पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब उन्हें ‘एनिमल’ जैसी फिल्मों से दूरी बनानी चाहिए, चाहे कितना भी बड़ा प्रस्ताव क्यों न मिले। साथ ही उन्होंने रणबीर से अपनी भाषा और सार्वजनिक छवि का भी ध्यान रखने की अपील की।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत में ऐसी अनेक कहानियां हैं जो एक अभिनेता की प्रतिभा को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती हैं। इसलिए सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए ऐसे विषयों को प्राथमिकता देना बेहतर होगा।

    नितीश भारद्वाज ने फिल्म में सीता की भूमिका निभा रहीं साई पल्लवी को लेकर भी उम्मीद जताई कि दर्शक उन्हें इस किरदार में स्वीकार करेंगे। उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि फिल्म में तुलसीदास की चौपाइयों और पारंपरिक संगीत का भी प्रभावशाली उपयोग देखने को मिले, क्योंकि यही भारतीय समाज की सांस्कृतिक स्मृतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    उन्होंने अंत में कहा कि फिल्म बनाने में पूरी टीम ने जिस स्तर की मेहनत की है, उसके सम्मान में वह रामायण को कम से कम पांच बार सिनेमाघरों में देखना चाहेंगे।

    बता दें कि नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी रामायण भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में गिनी जा रही है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा सनी देओल, रवि दुबे, विवेक ओबेरॉय, रकुल प्रीत सिंह और सौरभ सचदेवा भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का पहला भाग दिवाली 2026 पर रिलीज होगा, जबकि दूसरा भाग 2027 में सिनेमाघरों में आने की योजना है।

  • पंचक काल की शुरुआत, शनि की राशि में चंद्रमा का गोचर; इन राशियों को रहना होगा सतर्क

    पंचक काल की शुरुआत, शनि की राशि में चंद्रमा का गोचर; इन राशियों को रहना होगा सतर्क


    नई दिल्ली । 31 जुलाई 2026 की सुबह 6:37 बजे चंद्रमा ने शनि की राशि कुंभ में प्रवेश किया, जिसके साथ ही पंचक काल की शुरुआत हो गई। हिंदू ज्योतिष में पंचक को विशेष महत्व दिया जाता है और इसे कुछ कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता। इस बार पंचक शुक्रवार से शुरू होने के कारण इसे चोर पंचक कहा जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह पंचक 2 अगस्त तक चंद्रमा के कुंभ राशि में रहने के दौरान कुछ राशियों के लिए अधिक सतर्कता का संकेत दे रहा है।

    धर्म और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरते हुए कुंभ और मीन राशि में रहता है, तब पंचक काल बनता है। यह अवधि लगभग पांच दिनों की होती है और हर महीने आती है। इस दौरान कई लोग शुभ कार्यों को टालने और विशेष सावधानी बरतने की परंपरा का पालन करते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार पंचक के शुरुआती तीन दिन विशेष रूप से कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों के लिए चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं।

    कर्क राशि के लोगों को इस दौरान आर्थिक और व्यावसायिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है। किसी भी नई डील या निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल करना बेहतर माना गया है। कार्यस्थल पर सहकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संयमित व्यवहार रखने की जरूरत है। छोटी-छोटी बातों पर विवाद या गुस्सा रिश्तों और काम दोनों को प्रभावित कर सकता है।

    वृश्चिक राशि के जातकों को स्वास्थ्य और वित्तीय मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अनावश्यक खर्चों से बचने, निवेश सोच-समझकर करने और कार्यस्थल पर बहस या अहंकार से दूर रहने की आवश्यकता बताई जाती है। परिवार के साथ संतुलन बनाए रखना भी इस समय महत्वपूर्ण माना गया है।

    मीन राशि के लोगों के लिए भी यह समय आर्थिक मामलों में सतर्कता बरतने का संकेत देता है। बड़े लेन-देन, उधार या किसी नए वित्तीय समझौते में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है। कार्यस्थल पर गोपनीय जानकारी साझा करने में सावधानी बरतना और पारिवारिक जीवन में संवाद बनाए रखना लाभदायक माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक काल में शुभ कार्यों, निर्माण कार्यों या कुछ विशेष मांगलिक गतिविधियों को टालने की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराएं हैं तथा इनके समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इन्हें व्यक्तिगत आस्था और विश्वास के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी ज्योतिषीय योग या पंचक के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात धैर्य, संयम और सोच-समझकर निर्णय लेना है। सकारात्मक सोच, नियमित पूजा-पाठ और अपने दायित्वों का ईमानदारी से पालन करना हर परिस्थिति में लाभदायक माना जाता है।

  • अमेरिका ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार पर दबाव

    अमेरिका ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार पर दबाव


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। इसी दबाव के बीच घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।

    बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले करीब 250 से 300 अंकों की कमजोरी के साथ खुला जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 80 से 100 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती घंटों में निवेशकों ने नई खरीदारी से दूरी बनाई और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया जिससे बाजार में दबाव बना रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय वैश्विक घटनाक्रम भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी भारत जैसे आयात आधारित देशों के लिए चिंता का विषय बन गई है क्योंकि इससे महंगाई और व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है।

    एशियाई बाजारों का प्रदर्शन भी मिला जुला रहा। जापान के निक्केई और टॉपिक्स सूचकांक दबाव में रहे जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती गिरावट के बाद संभलता नजर आया। हांगकांग के हैंगसेंग फ्यूचर्स में हल्की मजबूती देखने को मिली लेकिन कुल मिलाकर एशियाई बाजारों में सतर्कता का माहौल बना रहा। निवेशक फिलहाल किसी बड़े फैसले से पहले वैश्विक घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।

    वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। डॉव जोन्स एसएंडपी 500 और नैस्डैक तीनों प्रमुख सूचकांक दबाव में बंद हुए। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने के बावजूद भू राजनीतिक तनाव ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। हालांकि बाद में अमेरिकी फ्यूचर्स में हल्की रिकवरी देखने को मिली लेकिन उसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर नहीं दिखाई दिया।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश फैसले लेने से बचना चाहिए। वैश्विक हालात सामान्य होने तक बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है जबकि अल्पकालिक निवेशकों को जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है और विदेशी बाजारों में स्थिरता लौटती है तो भारतीय शेयर बाजार में भी सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक हर नए संकेत पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

  • सावन में व्रत रखने वाले जरूर जानें, सेंधा नमक खाने की धार्मिक परंपरा और वैज्ञानिक कारण

    सावन में व्रत रखने वाले जरूर जानें, सेंधा नमक खाने की धार्मिक परंपरा और वैज्ञानिक कारण


    नई दिल्ली । सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना, उपवास और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु सावन सोमवार, शिवरात्रि, तीज और अन्य व्रत रखते हैं। व्रत के दौरान भोजन को लेकर विशेष नियमों का पालन किया जाता है और इन्हीं नियमों में एक महत्वपूर्ण परंपरा है कि सामान्य नमक की जगह केवल सेंधा नमक का ही सेवन किया जाए। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण भी बताए जाते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग करना नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि करना भी होता है। इसलिए व्रत में ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है जो प्राकृतिक, सात्विक और कम से कम प्रसंस्कृत हों। सेंधा नमक प्राकृतिक रूप से चट्टानों से प्राप्त होता है और इसे बड़े स्तर की रासायनिक प्रक्रिया से नहीं गुजारा जाता। इसी कारण इसे शुद्ध और सात्विक माना जाता है, जबकि सामान्य नमक फैक्ट्रियों में प्रसंस्करण के बाद तैयार होता है और उसमें आयोडीन सहित अन्य तत्व मिलाए जाते हैं। धार्मिक परंपराओं में इसी वजह से सामान्य नमक की बजाय सेंधा नमक को व्रत के लिए उपयुक्त माना गया है।

    वैज्ञानिक दृष्टि से भी सेंधा नमक कई मामलों में लाभकारी माना जाता है। उपवास के दौरान लंबे समय तक सामान्य भोजन न लेने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन प्रभावित हो सकता है। सेंधा नमक इस संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है और थकान तथा कमजोरी को कम करने में सहायक माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार सेंधा नमक में सामान्य नमक की तुलना में सोडियम अपेक्षाकृत कम और पोटेशियम, मैग्नीशियम जैसे खनिज अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि इसे पाचन तंत्र के लिए अपेक्षाकृत हल्का माना जाता है। व्रत के दौरान साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, दही, फल और अन्य फलाहारी व्यंजनों में सेंधा नमक का उपयोग इसलिए किया जाता है ताकि शरीर को आवश्यक खनिज भी मिलते रहें।

    सेंधा नमक की तासीर भी अपेक्षाकृत ठंडी मानी जाती है। मान्यता है कि यह शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने, पाचन को बेहतर रखने और लंबे समय तक उपवास के दौरान होने वाली थकान को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि सेंधा नमक हो या सामान्य नमक, दोनों का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।

    विशेष परिस्थितियों जैसे गर्भावस्था, अधिक उम्र या किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए लंबे समय तक खाली पेट रहना उचित नहीं माना जाता। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार संतुलित फलाहार और आवश्यक मात्रा में सेंधा नमक का सेवन करना चाहिए, ताकि शरीर में कमजोरी या इलेक्ट्रोलाइट की कमी न हो।

    धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक दृष्टिकोण दोनों ही यह बताते हैं कि व्रत के दौरान सेंधा नमक का उपयोग केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि शरीर की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अपनाई गई एक संतुलित व्यवस्था भी है। हालांकि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या की स्थिति में उपवास और खानपान से जुड़ा निर्णय चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए।

  • राजस्थान कांग्रेस में उभरे संगठनात्मक मतभेद, BAP नेताओं की एंट्री पर छिड़ा विवाद

    राजस्थान कांग्रेस में उभरे संगठनात्मक मतभेद, BAP नेताओं की एंट्री पर छिड़ा विवाद


    नई दिल्ली। पंजाब में गुटबाजी की चुनौती से जूझ रही कांग्रेस के सामने अब राजस्थान में भी संगठनात्मक मतभेद उभरते दिखाई दे रहे हैं। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के करीब 300 नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रदेश इकाई के भीतर नए विवाद ने जन्म ले लिया है। यह कार्यक्रम पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी में आयोजित हुआ, जिस पर प्रदेश नेतृत्व ने अप्रसन्नता जताई है।

    BAP नेताओं की जॉइनिंग बनी विवाद की वजह
    जानकारी के अनुसार, पूर्व मंत्री महेंद्र मालवीय के नेतृत्व में बड़ी संख्या में BAP नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अशोक गहलोत भी मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम की जानकारी प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को पहले से नहीं दी गई थी, जिसके चलते विवाद खड़ा हो गया।

    डोटासरा ने साधा परोक्ष निशाना
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि यदि कोई अपनी व्यक्तिगत छवि बनाने के लिए काम कर रहा है तो उन्हें शुभकामनाएं, लेकिन उनकी प्राथमिकता केवल कांग्रेस पार्टी है। उन्होंने कहा कि उनकी निष्ठा हमेशा संगठन के प्रति रही है और वे किसी व्यक्ति विशेष की ब्रांडिंग के लिए काम नहीं करेंगे।

    मामला दिल्ली तक पहुंचने की चर्चा
    सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व तक भी पहुंचाई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस संबंध में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें के.सी. वेणुगोपाल का नाम भी शामिल है, से चर्चा की गई है। हालांकि, इस पर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    महेंद्र मालवीय को लेकर भी टिप्पणी
    डोटासरा ने पूर्व मंत्री महेंद्र मालवीय का नाम लिए बिना कहा कि जो नेता कांग्रेस छोड़कर गए थे, उन्हें चुनाव में सफलता नहीं मिली और बाद में उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पार्टी में वापसी की। उन्होंने कहा कि पार्टी में लौटने वालों का स्वागत है, लेकिन यदि कोई कांग्रेस के हितों के खिलाफ काम करेगा तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    चार खेमों की चर्चा, कांग्रेस का इनकार
    मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि राजस्थान कांग्रेस एक बार फिर अलग-अलग गुटों में बंटी हुई दिखाई दे रही है। इन चर्चाओं में अशोक गहलोत, सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के अलग-अलग प्रभाव क्षेत्रों का जिक्र किया जा रहा है। हालांकि, पार्टी के किसी भी वरिष्ठ नेता ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। डोटासरा का कहना है कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और सभी नेता मिलकर संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।

  • 'टॉक्सिक' को लेकर कियारा आडवाणी का बड़ा बयान, बोलीं- यह किरदार मुझे पूरी तरह बदल गया

    'टॉक्सिक' को लेकर कियारा आडवाणी का बड़ा बयान, बोलीं- यह किरदार मुझे पूरी तरह बदल गया


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री कियारा आडवाणी जल्द ही सुपरस्टार यश के साथ बहुप्रतीक्षित फिल्म टॉक्सिक: अ फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स में नजर आने वाली हैं। फिल्म के टीजर, पोस्टर और अब तक सामने आए प्रमोशनल मटेरियल में कियारा का पहले से बिल्कुल अलग और बोल्ड अंदाज देखने को मिला है। इसे उनके करियर की सबसे बोल्ड फिल्म माना जा रहा है। हालांकि अभिनेत्री का कहना है कि उन्होंने यह फिल्म बोल्ड दृश्यों की वजह से नहीं बल्कि अपने किरदार की गहराई और चुनौती के कारण स्वीकार की।

    हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कियारा आडवाणी ने बताया कि जब उन्होंने फिल्म की कहानी सुनी तो वह अपने किरदार से तुरंत जुड़ गईं। उनके मुताबिक इस भूमिका में एक कलाकार के लिए वह सब कुछ मौजूद था जिसकी तलाश हर अभिनेता करता है। उन्होंने कहा कि अब वह अपने करियर के ऐसे मुकाम पर हैं जहां उन्हें इस तरह के जटिल और चुनौतीपूर्ण किरदार निभाने का आत्मविश्वास है।

    कियारा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी भी महिला किरदार को केवल पारंपरिक सोच या तय दायरे में सीमित देखना पसंद नहीं करतीं। उनका मानना है कि महिलाएं बहुआयामी व्यक्तित्व रखती हैं और फिल्मों में भी उनके किरदार उतने ही मजबूत, वास्तविक और जटिल होने चाहिए। अभिनेत्री के अनुसार वह ऐसे किरदार चुनना चाहती हैं जो दर्शकों को कुछ नया देखने का अवसर दें और उनके अभिनय की नई परतें सामने लाएं।

    फिल्म के शुरुआती प्रोमो और गानों में यश और कियारा के बीच कई इंटीमेट और रोमांटिक दृश्य देखने को मिले हैं, जिनकी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई। कुछ लोगों ने इन दृश्यों की सराहना की, जबकि कुछ ने इन्हें जरूरत से ज्यादा बोल्ड बताया। हालांकि कियारा ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उनके लिए किसी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत उसकी कहानी और किरदार होता है, न कि केवल उसका ग्लैमर या बोल्डनेस।

    इससे पहले अपने फर्स्ट लुक पोस्टर के साथ भी कियारा ने इस फिल्म को लेकर भावुक पोस्ट साझा किया था। उन्होंने लिखा था कि यह ऐसा किरदार है जिसने उनसे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से बहुत कुछ मांगा। महीनों की मेहनत के बाद तैयार हुआ यह रोल उनके करियर का अब तक का सबसे कठिन अनुभव रहा और दर्शकों से मिले प्यार ने उनकी मेहनत को सार्थक बना दिया।

    टॉक्सिक का निर्देशन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्ममेकर गीतू मोहनदास ने किया है। फिल्म की कहानी भी उन्होंने यश के साथ मिलकर लिखी है। इसकी शूटिंग अंग्रेजी और कन्नड़ भाषा में एक साथ की गई है, जबकि इसे हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम समेत कई भाषाओं में रिलीज किया जाएगा।

    फिल्म का निर्माण केवीएन प्रोडक्शंस और मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स के बैनर तले वेंकट के. नारायण और यश ने किया है। यश और कियारा आडवाणी के अलावा फिल्म में नयनतारा, तारा सुतारिया, हुमा कुरैशी और रुक्मिणी वसंत भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। रिलीज से पहले ही फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह बना हुआ है।

  • अभिजीत दीपके से मिलने पहुंचे शिंदे सेना के नेता, आंदोलन की सराहना की, सुरक्षा देने की भी उठाई मांग

    अभिजीत दीपके से मिलने पहुंचे शिंदे सेना के नेता, आंदोलन की सराहना की, सुरक्षा देने की भी उठाई मांग


    नई दिल्ली। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके से मिलने नेताओं का सिलसिला जारी है। गुरुवार को शिवसेना (शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य (MLC) बच्चू कडू ने छत्रपति संभाजीनगर पहुंचकर उनसे मुलाकात की और उनके आंदोलन की सराहना की। इससे पहले राज्य सरकार में मंत्री संजय शिरसाट भी दीपके और उनके परिवार से मिल चुके हैं।

    बच्चू कडू ने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दल या सरकार के प्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि एक आंदोलनकारी के तौर पर अभिजीत दीपके से मिलने पहुंचे हैं। उन्होंने कहा, “मैं यहां एक आंदोलनकारी के रूप में दूसरे आंदोलनकारी से मिलने आया हूं।” उन्होंने जंतर-मंतर पर किए गए प्रदर्शन के लिए दीपके को बधाई भी दी।

    धमकियों पर जताई चिंता
    अभिजीत दीपके को कथित तौर पर मिल रही धमकियों के सवाल पर बच्चू कडू ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को उन लोगों से बात करनी चाहिए जो ऐसी धमकियां दे रहे हैं और अनुचित व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक का अधिकार है और इसे अपराध नहीं माना जाना चाहिए।

    संजय शिरसाट ने भी की थी मुलाकात
    इससे पहले महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने भी दीपके के परिवार से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें अपने क्षेत्र के निवासी अभिजीत दीपके पर गर्व है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। शिरसाट ने कहा कि वह इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात करेंगे।

    आंदोलन की खुलकर की तारीफ
    संजय शिरसाट ने बताया कि अभिजीत दीपके को अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय में पढ़ाई के बाद नौकरी का अवसर मिला था, लेकिन उन्होंने छात्रों के हितों के लिए काम करने का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि दीपके ने किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं को लेकर आंदोलन किया और उनकी सफलता में समाज के व्यापक समर्थन की बड़ी भूमिका रही। मंत्री ने यह भी कहा कि आंदोलन के बाद छात्रों की प्रमुख मांगों पर कार्रवाई हुई और इस पहल ने राज्य ही नहीं, देशभर में चर्चा बटोरी।