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  • पीरियड्स में सावन और सोलह सोमवार का व्रत रखा जा सकता है या नहीं, धार्मिक मान्यताओं में क्या कहा गया

    पीरियड्स में सावन और सोलह सोमवार का व्रत रखा जा सकता है या नहीं, धार्मिक मान्यताओं में क्या कहा गया


    नई दिल्ली । सावन मास भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष सावन की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है, जबकि पहला सावन सोमवार 2 अगस्त को पड़ेगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना और सोमवार व्रत का पालन करते हैं। विशेष रूप से महिलाएं सावन सोमवार और सोलह सोमवार व्रत पूरे श्रद्धाभाव से रखती हैं। ऐसे में हर वर्ष एक सामान्य प्रश्न सामने आता है कि यदि व्रत के दिन मासिक धर्म यानी पीरियड्स शुरू हो जाएं, तो क्या व्रत जारी रखा जा सकता है और पूजा किस प्रकार करनी चाहिए। इस विषय पर धार्मिक मान्यताओं और धर्माचार्यों के विचार महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को मंदिर में प्रवेश, शिवलिंग का स्पर्श और प्रत्यक्ष पूजन से परहेज करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, अनेक धर्माचार्यों का मत है कि यदि किसी महिला ने पहले से सावन सोमवार या सोलह सोमवार व्रत का संकल्प लिया है, तो केवल पीरियड्स आने की वजह से व्रत छोड़ना आवश्यक नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में मानसिक रूप से भगवान शिव का स्मरण, मंत्र जाप और ध्यान के माध्यम से भी उपासना की जा सकती है।

    धर्मशास्त्रों में मानसिक पूजा को भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि ईश्वर के प्रति श्रद्धा, विश्वास और मन की पवित्रता बाहरी विधियों से अधिक महत्व रखती है। यदि किसी कारणवश प्रत्यक्ष पूजा संभव न हो, तो भक्त मन ही मन भगवान शिव का स्मरण कर सकते हैं। इसे भी भक्ति और आराधना का स्वीकार्य स्वरूप माना जाता है।

    धार्मिक विद्वानों का यह भी कहना है कि मासिक धर्म महिलाओं के जीवन की एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है। इसे अपवित्रता से जोड़कर देखने के बजाय स्वास्थ्य और विश्राम की आवश्यकता के रूप में समझा जाना चाहिए। इसी कारण कई परंपराओं में इस अवधि के दौरान महिलाओं को अधिक आराम करने की सलाह दी जाती है। यदि स्वास्थ्य सामान्य हो और व्रत रखने में कोई कठिनाई न हो, तो संकल्पित व्रत जारी रखा जा सकता है। वहीं यदि अत्यधिक कमजोरी, दर्द या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो, तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी उचित माना जाता है।

    यदि पीरियड्स के कारण मंदिर जाना या शिवलिंग पर जलाभिषेक करना संभव न हो, तो घर पर बैठकर भगवान शिव के मंत्रों का जाप, शिव चालीसा, शिव स्तुति या अन्य स्तोत्रों का पाठ किया जा सकता है। कई परिवारों में पूजा की सामग्री किसी अन्य सदस्य के माध्यम से अर्पित कराई जाती है, जबकि व्रत रखने वाली महिला स्वयं मानसिक रूप से पूजा में सहभागी रहती है। इस प्रकार श्रद्धा और संकल्प दोनों का पालन किया जा सकता है।

    सोलह सोमवार व्रत के संबंध में भी यही मान्यता प्रचलित है कि एक बार संकल्प लेने के बाद बिना उचित कारण व्रत को बीच में छोड़ना उचित नहीं माना जाता। हालांकि धर्माचार्य यह भी स्पष्ट करते हैं कि प्रत्येक परिवार की धार्मिक परंपराएं और रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने परिवार की परंपरा, गुरु या स्थानीय धर्माचार्य के मार्गदर्शन का भी सम्मान करना चाहिए। यदि किसी परंपरा में अलग नियम अपनाए जाते हैं, तो उनका पालन करना भी उचित माना जाता है।

    सावन सोमवार व्रत का मूल उद्देश्य भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, संयम और भक्ति व्यक्त करना है। इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परिस्थितियों के अनुरूप मानसिक पूजा, मंत्र जाप और ईश्वर का स्मरण भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। साथ ही यह भी सलाह दी जाती है कि व्रत और पूजा के दौरान स्वास्थ्य की अनदेखी न की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर विश्राम को प्राथमिकता दी जाए।

  • मानसून में बनाएं धार्मिक यात्रा का शानदार प्लान भारत के इन प्रसिद्ध मंदिरों में कम बजट में मिलेगा आध्यात्मिक सुकून

    मानसून में बनाएं धार्मिक यात्रा का शानदार प्लान भारत के इन प्रसिद्ध मंदिरों में कम बजट में मिलेगा आध्यात्मिक सुकून


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम केवल हरियाली और ठंडी फिजाओं का आनंद लेने का समय नहीं होता बल्कि यह धार्मिक यात्राओं के लिए भी बेहद खास माना जाता है। खासकर सावन के महीने में भगवान शिव और अन्य देवी देवताओं के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। यदि आप कम बजट में ऐसी यात्रा करना चाहते हैं जहां भक्ति के साथ प्राकृतिक सौंदर्य और मानसिक शांति भी मिले तो भारत में कई ऐसे प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां बहुत कम खर्च में यादगार धार्मिक यात्रा की जा सकती है।

    उत्तराखंड स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर सावन में भक्तों की पहली पसंद माना जाता है। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर मानसून में और भी आकर्षक दिखाई देता है। यहां पहुंचने के लिए हरिद्वार और ऋषिकेश से आसानी से बस और टैक्सी की सुविधा मिल जाती है जिससे यात्रा का खर्च भी काफी कम रहता है।

    वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर भी सावन के दौरान विशेष महत्व रखता है। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। गंगा आरती और मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण हर श्रद्धालु को एक अलग अनुभव देता है। यहां रहने और भोजन की व्यवस्था भी हर बजट के अनुसार आसानी से उपलब्ध हो जाती है।

    मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भी कम बजट में धार्मिक यात्रा के लिए बेहतरीन विकल्प है। सावन में यहां विशेष पूजा और भस्म आरती का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। उज्जैन में होटल और धर्मशालाएं कम कीमत में मिल जाती हैं जिससे पूरी यात्रा किफायती बन जाती है।

    ओडिशा का जगन्नाथ मंदिर भी मानसून में घूमने के लिए शानदार स्थान है। यदि आपकी यात्रा रथ यात्रा के समय होती है तो यहां का धार्मिक उत्साह देखने लायक होता है। पुरी समुद्र तट और मंदिर दोनों का आनंद एक साथ लिया जा सकता है।

    महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग और भीमाशंकर मंदिर भी प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। बारिश के मौसम में यहां की पहाड़ियां और हरियाली मन को मोह लेती हैं जबकि धार्मिक महत्व यात्रा को और अधिक यादगार बना देता है।

    अगर दक्षिण भारत की यात्रा करना चाहते हैं तो तमिलनाडु का रामेश्वरम मंदिर और आंध्रप्रदेश का तिरुपति बालाजी मंदिर भी अच्छे विकल्प हैं। पहले से योजना बनाकर यात्रा करने पर यहां भी कम खर्च में दर्शन किए जा सकते हैं।

    धार्मिक यात्रा पर निकलते समय मौसम की जानकारी पहले से जरूर लें। बारिश के कारण फिसलन वाले रास्तों पर सावधानी रखें। हल्के और आरामदायक कपड़े पहनें। छाता या रेनकोट साथ रखें और ऑनलाइन बुकिंग पहले से कर लें ताकि यात्रा अधिक सुविधाजनक और किफायती रहे।

    मानसून में मंदिरों की यात्रा केवल दर्शन तक सीमित नहीं रहती बल्कि यह प्रकृति के बीच आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव भी कराती है। कम बजट में यदि यादगार धार्मिक यात्रा का सपना देख रहे हैं तो भारत के ये प्रसिद्ध मंदिर आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं।

  • मूवी लवर्स हो जाएं तैयार अगस्त में रिलीज होंगी 12 बड़ी फिल्में सनी देओल से लेकर यश और श्रद्धा कपूर तक मचाएंगे धमाल

    मूवी लवर्स हो जाएं तैयार अगस्त में रिलीज होंगी 12 बड़ी फिल्में सनी देओल से लेकर यश और श्रद्धा कपूर तक मचाएंगे धमाल


    नई दिल्ली । अगर आप फिल्मों के शौकीन हैं तो अगस्त 2026 आपके लिए किसी फिल्मी उत्सव से कम नहीं होने वाला। पूरे महीने सिनेमाघरों में एक के बाद एक बड़ी फिल्में रिलीज होंगी जो हर तरह के दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार हैं। एक्शन रोमांस थ्रिलर बायोपिक फैमिली ड्रामा और कॉमेडी जैसी अलग अलग शैलियों की कुल 12 फिल्में बड़े पर्दे पर दस्तक देंगी। ऐसे में दर्शकों को हर सप्ताह नई और दमदार कहानियां देखने का मौका मिलेगा।

    महीने की शुरुआत 7 अगस्त से होगी जब एक साथ कई चर्चित फिल्में रिलीज होंगी। राजकुमार राव की बायोपिक फिल्म प्रहार द उज्ज्वल निकम स्टोरी सबसे ज्यादा चर्चा में है जिसमें उन्होंने मशहूर सरकारी वकील उज्ज्वल निकम का किरदार निभाया है। इसी दिन तमिल रोमांटिक एक्शन थ्रिलर डीसी भी रिलीज होगी जिसमें लोकेश कनगराज और वामिका गब्बी मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। आर माधवन की बहुप्रतीक्षित फिल्म जी डी एन भी इसी दिन सिनेमाघरों में आएगी जो महान आविष्कारक जी डी नायडू के जीवन पर आधारित है। वहीं मोहनलाल की मलयालम फिल्म थोडक्कम भी इसी तारीख को दर्शकों के बीच पहुंचेगी।

    14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बॉक्स ऑफिस पर बड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। सनी देओल की देशभक्ति से जुड़ी फिल्म बंटवारा 1947 रिलीज होगी जिसमें प्रीति जिंटा शबाना आजमी करण देओल और अली फजल भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इसी दिन इमरान हाशमी अपनी चर्चित फिल्म आवारापन 2 के साथ वापसी करेंगे। इसके अलावा अभिनेता सूर्या की फैमिली ड्रामा फिल्म विश्वनाथ एंड संस भी इसी दिन सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

    20 अगस्त को मलयालम सिनेमा की दो बड़ी फिल्में दर्शकों के सामने आएंगी। दुलकर सलमान अभिनीत एक्शन थ्रिलर आई एम गेम और पृथ्वीराज सुकुमारन की फिल्म खलीफा दोनों से दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं। दोनों फिल्मों को लेकर पहले से ही जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।

    महीने के अंतिम सप्ताह में भी मनोरंजन का सिलसिला जारी रहेगा। 26 अगस्त को कन्नड़ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म टॉक्सिक रिलीज होगी। इस फिल्म में कियारा आडवाणी नयनतारा तारा सुतारिया रुक्मिणी वसंत और हुमा कुरैशी जैसे कई बड़े कलाकार नजर आएंगे। फिल्म अपने बड़े बजट और दमदार प्रस्तुति को लेकर पहले से चर्चा में है।

    इसके बाद 28 अगस्त को दो अलग अलग शैली की बड़ी फिल्में रिलीज होंगी। श्रद्धा कपूर की ईथा महाराष्ट्र की प्रसिद्ध तमाशा और लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर के जीवन पर आधारित है जिसमें रणदीप हुड्डा भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। वहीं लंबे समय से इंतजार कर रहे दर्शकों के लिए खोसला का घोसला 2 भी इसी दिन रिलीज होगी जिसमें अनुपम खेर बोमन ईरानी रणवीर शौरी रवि किशन और अन्य कलाकार एक बार फिर दर्शकों को हंसाने के लिए तैयार हैं।

    कुल मिलाकर अगस्त 2026 मनोरंजन के लिहाज से बेहद खास रहने वाला है। बड़े सितारों की मौजूदगी दमदार कहानियां और अलग अलग विषयों पर आधारित फिल्में दर्शकों को पूरे महीने सिनेमाघरों तक खींचने का दम रखती हैं। यदि आप नई फिल्मों का इंतजार कर रहे हैं तो अगस्त का कैलेंडर पहले से तैयार रखिए क्योंकि इस महीने हर सप्ताह कोई न कोई बड़ी फिल्म बड़े पर्दे पर दस्तक देने वाली है।

  • लॉक अप 2 में शिवांगी जोशी ने खोला जिंदगी का सबसे दर्दनाक राज बचपन में यौन शोषण की घटना सुनकर भावुक हुए फैंस

    लॉक अप 2 में शिवांगी जोशी ने खोला जिंदगी का सबसे दर्दनाक राज बचपन में यौन शोषण की घटना सुनकर भावुक हुए फैंस


    नई दिल्ली । टीवी अभिनेत्री शिवांगी जोशी ने रियलिटी शो लॉक अप 2 में अपनी जिंदगी का ऐसा दर्द साझा किया जिसे सुनकर हर कोई भावुक हो गया। आमतौर पर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चुप रहने वाली अभिनेत्री ने पहली बार बताया कि बचपन में वह यौन शोषण की कोशिश का शिकार हुई थीं। उन्होंने कहा कि यह घटना ऐसे व्यक्ति से जुड़ी थी जिसे वह परिवार का सदस्य मानती थीं और मामा जी कहकर बुलाती थीं। इस वजह से उनके लिए उस समय यह समझ पाना बेहद मुश्किल था कि उनके साथ जो हो रहा है वह गलत है।

    शिवांगी ने बताया कि यह घटना उस समय की है जब वह अभिनय के क्षेत्र में आने की तैयारी कर रही थीं। मां के मुंहबोले भाई ने उन्हें यह कहकर अपने पास बुलाया कि अगर मुंबई जाकर अभिनेत्री बनना है तो अभिनय की तैयारी करनी होगी। इसी बहाने उन्होंने अभिनेत्री के साथ अनुचित व्यवहार किया। शिवांगी ने कहा कि शुरुआत में उन्हें कुछ समझ नहीं आया लेकिन कुछ समय बाद उन्हें असहज महसूस होने लगा और उन्होंने खुद को वहां से अलग कर लिया।

    अभिनेत्री ने शो में एक और घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक दिन जब उनके माता पिता घर पर नहीं थे तब एक अन्य व्यक्ति उनके घर आया। उसने उन्हें समझाने के बहाने पास बुलाया और फिल्म इंडस्ट्री का हवाला देते हुए अनुचित बातें करने लगा। उसने कहा कि अभिनय की दुनिया में ऐसे हालात का सामना करना पड़ता है और इसी बहाने उनके साथ गलत हरकत करने की कोशिश की।

    शिवांगी ने बताया कि जैसे ही उस व्यक्ति ने उन्हें पकड़ने और किस करने की कोशिश की उन्होंने तुरंत उसे धक्का दे दिया। इसके बाद वह व्यक्ति गुस्से में आ गया और उन्हें नीचे गिरा दिया। सौभाग्य से उसी समय उनके माता पिता घर लौट आए और पूरी घटना देखकर उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति को घर से बाहर निकाल दिया। इस घटना के बाद परिवार ने उनका पूरा साथ दिया और उन्हें हर तरह का भावनात्मक सहारा दिया।

    अभिनेत्री ने कहा कि इन घटनाओं का असर उनके बचपन और मानसिक स्थिति पर लंबे समय तक रहा। वह कई दिनों तक स्कूल भी नहीं जा सकीं और लोगों पर भरोसा करने में कठिनाई महसूस करने लगीं। हालांकि परिवार के सहयोग और समय के साथ उन्होंने खुद को संभाला और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ती रहीं।

    शिवांगी ने यह भी कहा कि वह इस अनुभव को साझा इसलिए कर रही हैं ताकि ऐसे लोग जो किसी तरह के शोषण का सामना कर चुके हैं वे खुद को अकेला न समझें। उन्होंने माना कि चुप रहने से समस्या खत्म नहीं होती बल्कि सही समय पर आवाज उठाना और भरोसेमंद लोगों से मदद लेना बेहद जरूरी होता है।

    उनके इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने उनका समर्थन किया। कई प्रशंसकों ने उनकी हिम्मत की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की बातें सामने आने से समाज में जागरूकता बढ़ती है और पीड़ितों को अपनी बात कहने का साहस मिलता है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बच्चों को गुड टच और बैड टच की जानकारी देना परिवार और स्कूल दोनों की जिम्मेदारी है ताकि वे किसी भी गलत व्यवहार को पहचान सकें और समय रहते अपने अभिभावकों को बता सकें।

  • Flu Vaccine Alert: फ्लू को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी हर साल वैक्सीन लगवाकर खुद और परिवार को रखें सुरक्षित

    Flu Vaccine Alert: फ्लू को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी हर साल वैक्सीन लगवाकर खुद और परिवार को रखें सुरक्षित


    नई दिल्ली । मौसम बदलते ही सर्दी खांसी और बुखार जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। अधिकतर लोग इन्हें सामान्य वायरल संक्रमण मानकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन कई बार यही फ्लू गंभीर रूप ले सकता है। खासकर बुजुर्ग छोटे बच्चे गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए फ्लू खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ हर साल फ्लू वैक्सीन लगवाने की सलाह देते हैं ताकि संक्रमण का खतरा कम किया जा सके और गंभीर जटिलताओं से बचाव हो सके।

    फ्लू इन्फ्लुएंजा वायरस के कारण होने वाला संक्रमण है जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने छींकने या उसके संपर्क में आने से तेजी से फैलता है। इसके सामान्य लक्षणों में तेज बुखार शरीर में दर्द सिरदर्द गले में खराश खांसी कमजोरी और थकान शामिल हैं। कई मामलों में यह संक्रमण निमोनिया फेफड़ों के संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने जैसी गंभीर स्थिति भी पैदा कर सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लू वायरस समय के साथ अपना स्वरूप बदलता रहता है। यही कारण है कि हर साल नई वैक्सीन तैयार की जाती है ताकि उस समय सक्रिय वायरस से बेहतर सुरक्षा मिल सके। पिछले साल लगवाई गई वैक्सीन अगले साल पूरी तरह प्रभावी नहीं मानी जाती इसलिए हर वर्ष नया टीका लगवाना जरूरी होता है।

    फ्लू वैक्सीन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है। यदि वैक्सीन लगवाने के बाद भी संक्रमण हो जाए तो बीमारी की गंभीरता काफी कम रहती है और मरीज जल्दी ठीक हो जाता है। इससे अस्पताल में भर्ती होने और जानलेवा जटिलताओं का खतरा भी घट जाता है।

    डॉक्टरों के अनुसार छह महीने से अधिक उम्र के लगभग सभी लोगों को फ्लू वैक्सीन लगवानी चाहिए। हालांकि बुजुर्ग गर्भवती महिलाएं मधुमेह हृदय रोग अस्थमा किडनी और लिवर की बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए यह टीका विशेष रूप से जरूरी माना जाता है। स्वास्थ्यकर्मी और ऐसे लोग जो रोज बड़ी संख्या में लोगों के संपर्क में रहते हैं उन्हें भी हर साल फ्लू वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए।

    फ्लू से बचाव केवल वैक्सीन तक सीमित नहीं है। नियमित रूप से हाथ धोना भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी रखना खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढंकना तथा बीमार व्यक्ति से दूरी बनाए रखना भी संक्रमण रोकने में मदद करता है। संतुलित आहार पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम से भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है।

    कई लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि फ्लू वैक्सीन लगाने से फ्लू हो जाता है जबकि यह पूरी तरह गलत धारणा है। वैक्सीन केवल शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को वायरस से लड़ने के लिए तैयार करती है। कुछ लोगों को इंजेक्शन वाली जगह हल्का दर्द या एक दो दिन तक मामूली बुखार महसूस हो सकता है लेकिन यह सामान्य प्रतिक्रिया होती है और जल्द ठीक हो जाती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लू को सामान्य बीमारी समझकर अनदेखा करना सही नहीं है। समय पर वैक्सीन लगवाकर और जरूरी सावधानियां अपनाकर न केवल खुद को बल्कि अपने परिवार और समाज को भी संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सकता है। हर साल फ्लू वैक्सीन लगवाना स्वस्थ जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

  • रणबीर कपूर की रामायण का इंतजार खत्म इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में आएगा सबसे बहुप्रतीक्षित ट्रेलर

    रणबीर कपूर की रामायण का इंतजार खत्म इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में आएगा सबसे बहुप्रतीक्षित ट्रेलर


    नई दिल्ली । रणबीर कपूर की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण का इंतजार कर रहे करोड़ों प्रशंसकों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। फिल्म के ट्रेलर की नई रिलीज डेट का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। पहले ट्रेलर को 24 जुलाई को दुनिया भर में रिलीज किया जाना था लेकिन अंतिम समय में इसे स्थगित कर दिया गया था। अब मेकर्स ने नई तारीख तय करते हुए इसे आध्यात्मिक महत्व से जुड़े ब्रह्म मुहूर्त में रिलीज करने का फैसला लिया है।

    मेकर्स के अनुसार रामायण का ट्रेलर 30 जुलाई की सुबह 4 बजकर 15 मिनट पर रिलीज किया जाएगा। इस घोषणा के साथ फिल्म का नया पोस्टर भी जारी किया गया है। पोस्टर के साथ लिखा गया है कि शुभ ब्रह्म मुहूर्त में रामायण के दिव्य उदय का स्वागत किया जाएगा। इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर उत्साह और भी बढ़ गया है।

    ब्रह्म मुहूर्त को हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पवित्र समय माना जाता है। यह सूर्योदय से लगभग एक घंटा छत्तीस मिनट पहले शुरू होता है और करीब अड़तालीस मिनट तक रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय ध्यान पूजा जप और आध्यात्मिक साधना करने से विशेष पुण्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है। संभवतः इसी आध्यात्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए मेकर्स ने ट्रेलर रिलीज के लिए इस समय का चयन किया है।

    हाल ही में फिल्म के कुछ ट्रेलर फुटेज सोशल मीडिया पर लीक होने की खबरें भी सामने आई थीं। बताया गया कि दिल्ली में आयोजित विशेष स्क्रीनिंग के दौरान कुछ दृश्य इंटरनेट पर पहुंच गए थे। इसके बाद निर्माता नमित मल्होत्रा और पूरी टीम ने एंटी पाइरेसी अभियान शुरू किया ताकि फिल्म की गोपनीयता और गुणवत्ता सुरक्षित रखी जा सके।

    फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी कर रहे हैं और इसकी स्टारकास्ट भी काफी दमदार है। रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे हैं जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। रवि दुबे लक्ष्मण और सुपरस्टार यश रावण की भूमिका में दिखाई देंगे। इसके अलावा अरुण गोविल लारा दत्ता विवेक ओबेरॉय कुणाल कपूर और रकुल प्रीत सिंह भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।

    रामायण भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में गिनी जा रही है। निर्माता नमित मल्होत्रा के अनुसार इस मेगा प्रोजेक्ट का बजट लगभग 4000 करोड़ रुपये है। फिल्म को दो भागों में रिलीज किया जाएगा। पहला भाग इस वर्ष दिवाली के अवसर पर सिनेमाघरों में आएगा जबकि दूसरा भाग अगले वर्ष दिवाली पर रिलीज किया जाएगा।

    रणबीर कपूर ने भी एक इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआत में वह भगवान श्रीराम का किरदार निभाने को लेकर आश्वस्त नहीं थे। उन्हें लगता था कि वह इस महान चरित्र के साथ पूरी तरह न्याय नहीं कर पाएंगे। लेकिन बेटी राहा के जन्म के बाद उनकी सोच बदली और उन्होंने इस फिल्म को अपने जीवन का सबसे खास अवसर माना।

    अब ट्रेलर रिलीज की तारीख सामने आने के बाद दर्शकों का उत्साह चरम पर है। सभी की नजरें 30 जुलाई की सुबह पर टिकी हैं जब रामायण की पहली झलक दुनिया के सामने आएगी।

  • बॉलीवुड में शोक की लहर देव आनंद के बेटे सुनील आनंद ने दुनिया को कहा अलविदा नवकेतन परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

    बॉलीवुड में शोक की लहर देव आनंद के बेटे सुनील आनंद ने दुनिया को कहा अलविदा नवकेतन परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के महान अभिनेता और सदाबहार स्टार देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का 70 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत और उनके चाहने वालों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। बताया जा रहा है कि लंदन में हार्ट अटैक आने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। परिवार ने इस दुखद समाचार की पुष्टि करते हुए सभी से इस कठिन समय में उनकी निजता का सम्मान करने की अपील की है।

    सुनील आनंद के निधन की जानकारी उनकी भतीजी और देव आनंद की पोती जीना नारंग ने एक भावुक बयान के माध्यम से साझा की। उन्होंने कहा कि भारी मन से परिवार यह दुखद सूचना दे रहा है। साथ ही उन्होंने लोगों से मिली संवेदनाओं और प्रार्थनाओं के लिए आभार व्यक्त किया और परिवार को इस कठिन समय में एकांत देने की अपील की।

    सुनील आनंद हिंदी सिनेमा के प्रतिष्ठित अभिनेता देव आनंद और अभिनेत्री कल्पना कार्तिक के पुत्र थे। उनका जन्म स्विट्जरलैंड में हुआ था। फिल्मी परिवार से होने के बावजूद उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की। वर्ष 1984 में उन्होंने फिल्म आनंद और आनंद से बॉलीवुड में कदम रखा। इस फिल्म में उनके पिता देव आनंद भी नजर आए थे। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी और सुनील को अपेक्षित पहचान नहीं मिली।

    इसके बाद उन्होंने कार थीफ और मैं तेरे लिए जैसी फिल्मों में भी काम किया लेकिन ये फिल्में भी दर्शकों का दिल जीतने में सफल नहीं रहीं। लगातार असफलताओं के बाद उन्होंने अभिनय से दूरी बना ली और निर्देशन के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया। वर्ष 2001 में उन्होंने मास्टर नामक फिल्म का निर्देशन किया लेकिन यह फिल्म भी खास सफलता हासिल नहीं कर सकी।

    फिल्मों में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद सुनील आनंद ने अपने पिता के प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउस नवकेतन फिल्म्स की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने लंबे समय तक इस बैनर की विरासत को आगे बढ़ाने का काम किया। वर्ष 2008 में उन्होंने देव आनंद की क्लासिक फिल्म गाइड को कान फिल्म फेस्टिवल तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह उनके पिता की सिनेमाई विरासत को दुनिया तक पहुंचाने की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

    पिछले कई वर्षों से सुनील आनंद सार्वजनिक जीवन से दूर रह रहे थे और मीडिया की चकाचौंध से भी दूरी बनाए हुए थे। उनके निधन से न केवल परिवार बल्कि हिंदी फिल्म उद्योग ने भी एक ऐसा चेहरा खो दिया है जो भारतीय सिनेमा की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा हुआ था।

    देव आनंद भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने लंबे करियर में अनेक यादगार फिल्में दीं और नवकेतन फिल्म्स के जरिए हिंदी सिनेमा को नई दिशा दी। अब उनके बेटे सुनील आनंद के निधन के साथ इस प्रतिष्ठित फिल्मी परिवार पर एक और बड़ा दुख आ गया है।

    सोशल मीडिया पर फिल्म जगत की कई हस्तियों और प्रशंसकों ने सुनील आनंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उनकी सादगी और अपने पिता की विरासत के प्रति समर्पण को हमेशा याद किया जाएगा।

  • PoK हिंसा पर पाक रक्षा मंत्री का विवादित बयान, बोले- 'प्रदर्शनकारी भी भारत की तरह हमारे दुश्मन'

    PoK हिंसा पर पाक रक्षा मंत्री का विवादित बयान, बोले- 'प्रदर्शनकारी भी भारत की तरह हमारे दुश्मन'


    नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का विवादित बयान सामने आया है। उन्होंने इस्लामाबाद के खिलाफ आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों की तुलना भारत से करते हुए उन्हें भी पाकिस्तान का “दुश्मन” बताया। साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ किसी भी तरह की बातचीत की संभावना से भी इनकार कर दिया।

    एक स्थानीय टीवी चैनल से बातचीत में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि जो लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं, उन्हें वह भारत की तरह ही पाकिस्तान का विरोधी मानते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पीओके में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव को लेकर तनाव बना हुआ है।

    गोलीबारी में 14 लोगों की मौत का दावा
    हाल ही में प्रतिबंधित ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में निकाले गए विरोध मार्च के दौरान सुरक्षा बलों पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया गया है। संगठन का दावा है कि इस कार्रवाई में कम से कम 14 कार्यकर्ताओं की मौत हुई, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए।

    मंगलवार को रावलकोट से मुजफ्फराबाद की ओर निकाले गए मार्च में हजारों लोग शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारी पीओके विधानसभा में कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहे थे। JAAC का कहना है कि यह व्यवस्था स्थानीय लोगों के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करती है और इस्लामाबाद समर्थित दलों को अनुचित लाभ पहुंचाती है।

    सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के अलग-अलग दावे
    JAAC के मुताबिक, लगभग 5,000 लोग शांतिपूर्ण मार्च में शामिल थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के गोलीबारी कर दी। संगठन का दावा है कि मृतकों में उसके संस्थापक सदस्य उमर नजीर के छोटे भाई उस्मान नजीर भी शामिल हैं।

    वहीं, पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों के पास आधुनिक हथियार थे और उन्होंने पहले सुरक्षा बलों पर हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    कई सप्ताह से जारी है विरोध प्रदर्शन
    पीओके में कई सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, 5 जून से शुरू हुए आंदोलन और उसके बाद हुई हिंसा तथा सुरक्षा कार्रवाई में अब तक 80 से अधिक लोगों की मौत होने का दावा किया जा चुका है। इससे पहले 40 लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं, जिनमें 34 प्रदर्शनकारी और छह सुरक्षाकर्मी शामिल बताए गए थे।

    भारत ने चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
    इस घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान ने पीओके में तथाकथित विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई है। कई क्षेत्रों में झड़पों और मतपेटियां लूटे जाने जैसी घटनाओं की खबरें सामने आई हैं। विपक्षी दलों ने चुनाव में धांधली और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान कराने पर सवाल उठाए हैं।

    भारत ने इन चुनावों को पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैध ठहराने की कोशिश बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह पूरी चुनावी प्रक्रिया केवल दिखावटी कवायद है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघनों और अवैध कब्जे को छिपाना है।

    उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा केंद्र शासित प्रदेश, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। साथ ही उन्होंने कहा कि पीओके में जारी विरोध प्रदर्शन वहां के लोगों के आर्थिक शोषण, अधिकारों से वंचित किए जाने और प्रशासनिक दमन का परिणाम हैं।

  • 30 जुलाई से होगी सावन की शुरुआत, जानें शिव पूजा, उपवास और सोमवार व्रत के जरूरी नियम

    30 जुलाई से होगी सावन की शुरुआत, जानें शिव पूजा, उपवास और सोमवार व्रत के जरूरी नियम


    नई दिल्ली। भगवान शिव को समर्पित पवित्र श्रावण मास का शुभारंभ 30 जुलाई, गुरुवार से आयुष्मान योग और श्रवण नक्षत्र में होगा। इस दिन चंद्रमा मकर राशि और सूर्य कर्क राशि में रहेंगे। श्रावण कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रात 9:30 बजे तक रहेगी। इस वर्ष सावन 31 दिनों का होगा और इसका समापन 28 अगस्त को होगा। पूरे माह में श्रद्धालु शिव कृपा प्राप्त करने के लिए सोमवार व्रत, प्रदोष व्रत, सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत का पालन करेंगे।

    पहली बार व्रत रखने वालों के लिए शुरुआत कैसे करें?
    जो श्रद्धालु पहली बार सावन का व्रत रखना चाहते हैं, वे 3 अगस्त से पहले सावन सोमवार व्रत का संकल्प ले सकते हैं। इस वर्ष कुल चार सावन सोमवार और चार मंगला गौरी व्रत पड़ेंगे।

    सावन सोमवार की तिथियां
    3 अगस्त – पहला सोमवार
    10 अगस्त – दूसरा सोमवार
    17 अगस्त – तीसरा सोमवार
    24 अगस्त – चौथा सोमवार

    मंगला गौरी व्रत
    4 अगस्त
    11 अगस्त
    18 अगस्त
    25 अगस्त

    अन्य प्रमुख व्रत
    10 अगस्त – प्रदोष व्रत
    11 अगस्त – सावन शिवरात्रि
    25 अगस्त – प्रदोष व्रत

    व्रत का संकल्प और उद्यापन जरूरी
    यदि आप सावन सोमवार व्रत शुरू कर रहे हैं तो 3 अगस्त से संकल्प लेकर चारों सोमवार व्रत करें और 24 अगस्त को विधि-विधान से उद्यापन करें। कुछ परंपराओं में भाद्रपद के पहले सोमवार को पांचवां व्रत रखकर उद्यापन करने की भी मान्यता है। वहीं 16 सोमवार व्रत करने वाले श्रद्धालु भी इसकी शुरुआत पहले सावन सोमवार से करते हैं।

    व्रत के दौरान रखें इन नियमों का ध्यान
    सावन शुरू होने से पहले ही यह संकल्प लें कि पूरे महीने मांस, मदिरा, धूम्रपान और अन्य तामसिक पदार्थों से दूरी बनाए रखेंगे। इस दौरान ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करना भी शुभ माना गया है। व्रत वाले दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और जल हाथ में लेकर भगवान शिव की पूजा तथा व्रत का संकल्प लें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत तभी फलदायी होता है जब व्यक्ति मन, वचन और कर्म से पवित्र रहे। छल, कपट, क्रोध और घृणा जैसे भावों से दूर रहकर शिव भक्ति करना अधिक महत्वपूर्ण माना गया है।

    ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
    हर सोमवार या व्रत वाले दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करें। पूजन में बेलपत्र, अक्षत, कच्चा दूध, शहद, चंदन, पुष्प, भांग, धतूरा और शमी के पत्ते अर्पित किए जा सकते हैं। पुरुष श्रद्धालु ‘ॐ नमः शिवाय’ तथा महिलाएं ‘नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें। इसके साथ शिव चालीसा का पाठ और आरती करें। शाम के समय शिवलिंग के समीप दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।

    पूरे सावन में करें शिव आराधना
    जिन दिनों व्रत न हो, उन दिनों भी भगवान शिव का जलाभिषेक और नियमित पूजा करना शुभ माना गया है। यदि संभव हो तो किसी एक व्रत के दिन रुद्राभिषेक भी कराया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शिव उपासना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

  • ब्रिटेन के 21 पोर्ट पर अडानी की नजर! ABP में हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी, वैश्विक विस्तार को मिलेगी रफ्तार

    ब्रिटेन के 21 पोर्ट पर अडानी की नजर! ABP में हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी, वैश्विक विस्तार को मिलेगी रफ्तार


    नई दिल्ली। अडानी समूह की प्रमुख कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) ब्रिटेन के सबसे बड़े पोर्ट ऑपरेटर एसोसिएटेड ब्रिटिश पोर्ट्स (ABP) में हिस्सेदारी खरीदने की संभावनाएं तलाश रही है। यदि यह सौदा सफल होता है, तो अडानी समूह का बंदरगाह कारोबार भारत से आगे बढ़कर ब्रिटेन तक पहुंच जाएगा और वैश्विक स्तर पर उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी।

    63.9% हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध
    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ABP की 63.9% नियंत्रक हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध है। यह हिस्सेदारी कनाडा के दो प्रमुख पेंशन फंड—कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) और ओंटारियो म्युनिसिपल एम्प्लॉइज़ रिटायरमेंट सिस्टम (OMERS)—के पास है। दोनों निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया के लिए बैंकर नियुक्त किए हैं।

    21 बंदरगाहों का संचालन करती है ABP
    ABP इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में फैले 21 प्रमुख बंदरगाहों का संचालन करती है। इनमें इमिंघम, जो ब्रिटेन का सबसे बड़ा बंदरगाह है, और साउथेम्प्टन, जो देश का प्रमुख आयात केंद्र माना जाता है, शामिल हैं। कंपनी के पोर्ट ब्रिटेन के कुल समुद्री व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत संभालते हैं।

    वर्ष 2025 में ABP ने 42.5 मिलियन टन बल्क कार्गो और 3.1 मिलियन कंटेनर एवं रोल-ऑन/रोल-ऑफ यूनिट्स का संचालन किया। इस दौरान कंपनी का राजस्व 819.8 मिलियन पाउंड और परिचालन लाभ 586.5 मिलियन पाउंड रहा।

    अडानी के लिए क्यों अहम है यह सौदा?
    विशेषज्ञों के अनुसार, ABP की आय का बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक ग्राहक अनुबंधों और पायलटेज सेवाओं से आता है, जिससे कंपनी को स्थिर राजस्व मिलता है। यही वजह है कि इसे अडानी पोर्ट्स के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण निवेश माना जा रहा है।

    पहले से कई देशों में मौजूद है अडानी पोर्ट्स
    अडानी पोर्ट्स फिलहाल भारत में 15 बंदरगाहों का संचालन करती है, जिनकी कुल क्षमता 653 मिलियन टन है। इसके अलावा कंपनी इज़रायल, तंजानिया, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया में भी पोर्ट कारोबार से जुड़ी हुई है।

    वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 501 मिलियन टन कार्गो का संचालन किया। अडानी पोर्ट्स का लक्ष्य 2030 तक अपनी कार्गो हैंडलिंग क्षमता 1 अरब टन तक पहुंचाने का है। इसके लिए अगले पांच वर्षों में ₹1 लाख करोड़ तक निवेश की योजना बनाई गई है, जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर विस्तार पर जोर रहेगा।

    कंपनी ने क्या कहा?
    अडानी पोर्ट्स के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी अपनी दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप नए निवेश अवसरों का लगातार मूल्यांकन करती रहती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बाजार में चल रही अटकलों या संभावित सौदों पर कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की जाएगी।