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  • सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सीजेपी ने दिया दो दिनों में दूसरा अल्टीमेटम

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सीजेपी ने दिया दो दिनों में दूसरा अल्टीमेटम


    नई दिल्ली ।
    देश में पेपर लीक मामले को लेकर पिछले दिनों चले बड़े जनांदोलन के बाद एक बार फिर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन की आहट तेज हो गई है। जंतर-मंतर से संसद तक चले प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने केंद्र सरकार को दो दिनों के भीतर दूसरी बार कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है। संगठन का साफ कहना है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज पुलिस मुकदमे तुरंत वापस नहीं लिए गए, तो वे एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।

    इस पूरे विवाद की ताजा वजह सुप्रीम कोर्ट में हुई हालिया सुनवाई बनी है। शीर्ष अदालत की चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग से जुड़ी याचिकाओं पर विचार करते हुए पुलिस को मौजूदा प्राथमिकियों की जांच जारी रखने की इजाजत दी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन युवाओं का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिन्होंने केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी और हिरासत में लिए गए ऐसे निर्दोष लोगों को रिहा किया जाए।

    अदालत के इस रुख के सामने आते ही सीजेपी ने केंद्र सरकार पर अपनी सहमति और लिखित आश्वासनों से पीछे हटने का बड़ा आरोप लगाया है। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि पच्चीस जुलाई को सरकार के साथ हुई वार्ता के दौरान यह लिखित भरोसा दिया गया था कि सभी प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले पूरी तरह रद्द किए जाएंगे और किसी भी छात्र के खिलाफ आगे कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। इसी ठोस आश्वासन के आधार पर ही राष्ट्रव्यापी आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया गया था।

    संगठन का आरोप है कि अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी तंत्र ने प्राथमिकियों को बनाए रखने का कड़ा विरोध नहीं किया, जिससे अब भाजपा शासित राज्यों की पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर शिकंजा कसने का रास्ता मिल गया है। अगर सरकार की मंशा साफ होती, तो वह अपने प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकती थी। सरकार का यह ढुलमुल रवैया लाखों युवाओं के भविष्य और सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

    उल्लेखनीय है कि जून महीने में नई दिल्ली में शुरू हुआ यह आंदोलन जुलाई के मध्य तक बेहद उग्र रूप ले चुका था। संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भारी झड़प में कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। स्थिति बिगड़ती देख सरकार ने दो दौर की द्विपक्षीय बातचीत की थी, जिसके बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके अलावा मृतक छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अभयदान देने का समझौता हुआ था। अब उस समझौते के टूटने की आशंका ने एक बार फिर देश के युवाओं और छात्रों को उद्वेलित कर दिया है।

  • राजधानी भोपाल बना किसान आंदोलन का केंद्र सड़क पर हवन भोजन और अर्धनग्न प्रदर्शन सीएम हाउस की सुरक्षा कड़ी कई रास्ते बंद

    राजधानी भोपाल बना किसान आंदोलन का केंद्र सड़क पर हवन भोजन और अर्धनग्न प्रदर्शन सीएम हाउस की सुरक्षा कड़ी कई रास्ते बंद


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर किसान आंदोलन का केंद्र बन गई है। मूंग की सरकारी खरीदी ई टोकन व्यवस्था में सुधार न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और अन्य कृषि संबंधी मांगों को लेकर हजारों किसान दूसरे दिन भी आंदोलन पर डटे हुए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे इस प्रदर्शन ने अब और उग्र रूप ले लिया है। सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचने के लिए कई किसान अर्धनग्न होकर धरने पर बैठे हैं जबकि प्रदर्शन स्थल पर सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन कर सरकार से किसानों के हित में निर्णय लेने की प्रार्थना भी की गई।

    किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई खेती की बढ़ती लागत और फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। मूंग की पूरी सरकारी खरीदी सुनिश्चित करने ई टोकन प्रणाली को पारदर्शी बनाने और सभी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ दिलाने की मांग लंबे समय से की जा रही है लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इसी वजह से किसानों ने राजधानी में डेरा डालकर आंदोलन को निर्णायक रूप देने का फैसला किया है।

    धरना स्थल पर किसानों का जीवन भी संघर्ष की मिसाल बन गया है। कई किसान पूरी रात खुले आसमान के नीचे रहे और सुबह जहां जगह मिली वहीं आराम करते नजर आए। दोपहर होते ही कई समूहों ने सड़क किनारे चूल्हे जलाए और दाल बाटी बनाकर सामूहिक भोजन किया। किसानों का कहना है कि वे लंबी लड़ाई के लिए तैयार होकर आए हैं और मांगें पूरी होने तक वापस नहीं लौटेंगे। उन्होंने प्रदेश के जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के नेताओं को भी प्रदर्शन स्थल पर आकर उनके साथ भोजन करने और उनकी समस्याएं सुनने का निमंत्रण दिया।

    आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। बड़ी संख्या में महिलाएं प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं और हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लिखे। उन्होंने किसानों के संघर्ष को परिवार और समाज की लड़ाई बताते हुए आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

    सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए किसानों ने सद्बुद्धि यज्ञ भी किया। यज्ञ के माध्यम से उन्होंने प्रार्थना की कि सरकार किसानों की पीड़ा को समझे और उनकी जायज मांगों को जल्द स्वीकार करे। कई किसानों ने अपनी आर्थिक बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है और यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।

    किसानों के मुख्यमंत्री आवास घेराव के ऐलान को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। एम्स के पास वीर सावरकर सेतु सहित कई संवेदनशील स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और यातायात को दूसरे रास्तों से मोड़ा जा रहा है। इसके कारण होशंगाबाद रोड एम्स बंसल प्लाजा कटारा हिल्स और आसपास के क्षेत्रों में दिनभर जाम जैसी स्थिति बनी रही जिससे आम लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने नर्मदापुरम रोड क्षेत्र के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और यातायात पर दबाव कम हो।

    फिलहाल राजधानी में आंदोलन और प्रशासन दोनों आमने सामने की स्थिति में हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है। अब प्रदेश की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार किसानों से बातचीत कर कोई समाधान निकालती है या आंदोलन और तेज होता है।

  • बुधवार को भगवान श्री गणेश और बुध ग्रह के मंत्रों का जाप जीवन के कष्टों से दिलाएगा मुक्ति..

    बुधवार को भगवान श्री गणेश और बुध ग्रह के मंत्रों का जाप जीवन के कष्टों से दिलाएगा मुक्ति..

    नई दिल्ली । सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता और नवग्रहों की साधना के लिए विशेष रूप से निर्धारित किया गया है। इसी क्रम में बुधवार का दिन प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की आराधना और सौरमंडल के महत्वपूर्ण ग्रह बुध देव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गणेश जी के साथ बुध ग्रह के मंत्रों का जाप करने से जीवन की अनेक कठिनाइयों का निवारण होता है।

    ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्क शक्ति और व्यापार का कारक माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति कमजोर होती है, तो उसे व्यापार में हानि, संवाद क्षमता में कमी और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बुधवार के दिन विशेष मंत्र साधना के माध्यम से बुध ग्रह को मजबूत किया जा सकता है, जिससे व्यापारिक सफलता और निर्णय क्षमता में सुधार होता है।

    शास्त्रों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है, जिनकी कृपा से किसी भी कार्य में आने वाली रुकावटें स्वतः समाप्त हो जाती हैं। बुधवार की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर गणेश जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा और मोदक अर्पित करने के साथ उनके प्रभावशाली मंत्रों का जाप करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और कार्यक्षेत्र में निरंतर प्रगति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।

    भगवान गणेश की आराधना के पश्चात बुध ग्रह के वैदिक, पौराणिक और तांत्रिक मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी माना गया है। नियमित और श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले इस जाप से व्यक्ति की वाणी में मधुरता और आकर्षण का समावेश होता है। इसके साथ ही बौद्धिक क्षमताओं का विकास होता है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं और व्यावसायिक जीवन में सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगते हैं।

    धार्मिक विद्वानों का मानना है कि इस दिन गणेश गायत्री मंत्र और बुध ग्रह के नाम मंत्रों का मानसिक या स्पष्ट उच्चारण करते हुए स्मरण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। यह साधना न केवल आर्थिक स्थिरता लाती है, बल्कि साधक को हर प्रकार के मानसिक और व्यावहारिक संकटों से बचाकर जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग सुलभ करती है।

  • बंटवारा 1947 के भावुक ट्रेलर लॉन्च पर शबाना आजमी ने कठिन सीन के दौरान सनी देओल की संवेदनशीलता को सराहा

    बंटवारा 1947 के भावुक ट्रेलर लॉन्च पर शबाना आजमी ने कठिन सीन के दौरान सनी देओल की संवेदनशीलता को सराहा

    नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा के इतिहास में विभाजन की विभीषिका पर कई फिल्में बनी हैं, लेकिन कुछ फिल्में अपनी कहानी के साथ-साथ सेट पर बने मानवीय संबंधों के कारण विशेष चर्चा में आ जाती हैं। निर्देशक राजकुमार संतोषी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के ट्रेलर रिलीज के दौरान कुछ ऐसा ही भावनात्मक नजारा देखने को मिला, जब फिल्म के मुख्य कलाकारों ने शूटिंग के दौरान के अपने अनुभव साझा किए।

    इस खास मौके पर अनुभवी अभिनेत्री शबाना आजमी और अभिनेता सनी देओल बेहद भावुक नजर आए। फिल्म के एक बेहद कठिन और संवेदनशील दृश्य की शूटिंग को याद करते हुए शबाना आजमी ने बताया कि एक कलाकार के तौर पर उस पल को जीना उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण और असहज करने वाला था। दृश्य की मांग के अनुसार जब खलनायक द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा था, तब वे खुद को बेहद असहाय महसूस कर रही थीं।

    शबाना आजमी ने भावुक होकर बताया कि उस कठिन परिस्थिति में सनी देओल ने जिस तरह आगे बढ़कर उन्हें सहारा दिया, उसने अभिनय के दायरे को लांघकर वास्तविक जीवन की संवेदनशीलता को दर्शाया। सीन पूरा होते ही सनी देओल ने उन्हें दुपट्टे से ढका और एक रक्षक की भूमिका निभाई। इस पल ने पर्दे के पीछे के कलात्मक रिश्ते को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया, जिसे अभिनेत्री ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया।

    सनी देओल ने भी इस सहयोग पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि शबाना आजमी के साथ काम करना एक अद्भुत अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान दोनों के बीच किसी पेशेवर अदाकारी से इतर एक वास्तविक और प्रगाढ़ रिश्ता महसूस हुआ। अभिनेता ने इस फिल्म को दुनिया की सभी माताओं को समर्पित करते हुए सिनेमा के माध्यम से रिश्तों की गहराई को उजागर करने की बात कही।

    वहीं, इस महत्वाकांक्षी सिनेमाई परियोजना के पीछे के लंबे संघर्ष पर बात करते हुए निर्देशक राजकुमार संतोषी ने बताया कि इस कहानी को बड़े पर्दे तक लाने में दो दशक से भी अधिक समय लग गया। साल 2009 में एक नाटक से प्रेरित इस विषय पर फिल्म बनाने का प्रयास 2010 से लगातार जारी था, लेकिन वित्तीय और संरचनात्मक सहयोग न मिल पाने के कारण इसमें लगातार विलंब होता रहा।

    फिल्म निर्माण की इस लंबी यात्रा में अंततः आमिर खान के सहयोग से इस परियोजना को गति मिली। कहानी की गहराई और ऐतिहासिक संदर्भ को समझते हुए निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया, जिससे यह वर्षों पुरानी परिकल्पना साकार हो सकी। राजकुमार संतोषी और सनी देओल की जोड़ी ने अतीत में भी कई यादगार फिल्में दी हैं और इस नई फिल्म के जरिए उन्होंने एक बार फिर अपनी रचनात्मक साझेदारी को साबित किया है।

    ट्रेलर लॉन्च के इस अवसर पर फिल्म की पूरी स्टारकास्ट उपस्थित रही, जहां ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित इस थ्रिलर और ड्रामा फिल्म की मेकिंग से जुड़े कई अनदेखे पहलुओं पर चर्चा की गई। दर्शकों के बीच इस फिल्म को लेकर उत्सुकता बनी हुई है, क्योंकि इसमें इतिहास के एक दर्दनाक दौर को भावनात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

  • गुरु पूर्णिमा 2026 आज ब्रह्म मुहूर्त से लेकर अबूझ मुहूर्त तक करें भगवान विष्णु और गुरु की आराधना जानें संपूर्ण पूजा विधि

    गुरु पूर्णिमा 2026 आज ब्रह्म मुहूर्त से लेकर अबूझ मुहूर्त तक करें भगवान विष्णु और गुरु की आराधना जानें संपूर्ण पूजा विधि


    नई दिल्ली । आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के दिन मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है। यह दिन केवल गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर नहीं बल्कि आत्मचिंतन ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति का भी पर्व माना जाता है। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई की शाम से प्रारंभ होकर 29 जुलाई की रात्रि तक रहेगी इसलिए उदया तिथि के आधार पर आज गुरु पूर्णिमा का व्रत और पूजन किया जा रहा है।

    धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का अवतरण हुआ था। उन्होंने वेदों का संकलन किया और महाभारत सहित अनेक महान ग्रंथों की रचना की। इसी कारण गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन अपने गुरु माता पिता शिक्षकों और जीवन में मार्गदर्शन देने वाले सभी लोगों का सम्मान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

    इस बार गुरु पूर्णिमा पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं जिन्हें अत्यंत फलदायी माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि में विराजमान हैं जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे शुभ संयोग में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से सुख समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

    गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थान को शुद्ध करें और भगवान विष्णु मां लक्ष्मी तथा अपने गुरु का स्मरण करें। यदि गुरु प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित हों तो उनका आशीर्वाद लें। यदि संभव न हो तो उनके चित्र के समक्ष दीपक जलाकर पुष्प अर्पित करें और श्रद्धा के साथ प्रणाम करें। इसके बाद भगवान विष्णु को पीले पुष्प तुलसी दल फल और पंचामृत अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम अथवा ॐ नमो नारायणाय मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

    इस दिन दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र फल छाता जल पात्र या धार्मिक ग्रंथों का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। ब्राह्मणों और गुरुजनों का सम्मान कर उन्हें दक्षिणा देना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा और सेवा से जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं दूर होती हैं तथा ज्ञान और विवेक का प्रकाश मिलता है।

    गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है बल्कि यह हमें जीवन में मार्गदर्शन देने वाले हर व्यक्ति के प्रति आभार व्यक्त करने की प्रेरणा देती है। माता पिता शिक्षक आध्यात्मिक गुरु और वे सभी लोग जिन्होंने कठिन समय में सही दिशा दिखाई उन्हें सम्मान देना ही इस पर्व का वास्तविक संदेश है।

    धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से की गई पूजा साधना जप तप और दान का कई गुना फल प्राप्त होता है। इसलिए आज के दिन अहंकार त्यागकर विनम्रता अपनाएं गुरु का आशीर्वाद लें और भगवान श्रीहरि की आराधना कर जीवन में सुख शांति समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करें।

  • मिडिल ईस्ट से यूक्रेन तक बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दांव नेतन्याहू और जेलेंस्की संग बंद कमरे में हुई अहम वार्ता

    मिडिल ईस्ट से यूक्रेन तक बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दांव नेतन्याहू और जेलेंस्की संग बंद कमरे में हुई अहम वार्ता


    नई दिल्ली । दुनिया इस समय एक साथ कई बड़े भू राजनीतिक संकटों का सामना कर रही है। एक ओर मध्य पूर्व में इजरायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है तो दूसरी ओर रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने वैश्विक सुरक्षा को नई चुनौती दी है। ऐसे माहौल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से अलग अलग बंद कमरे में मुलाकात कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इन बैठकों को अमेरिका की भविष्य की रणनीति तय करने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार दोनों बैठकें पूरी तरह बंद कमरे में हुईं और उनकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। हालांकि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इन्हें सकारात्मक और रचनात्मक बताया। माना जा रहा है कि इन चर्चाओं में अमेरिका की सुरक्षा नीति सहयोगी देशों के साथ रणनीतिक तालमेल और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से विचार किया गया।

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई बैठक में ईरान सबसे प्रमुख मुद्दा रहा। हाल के महीनों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर अमेरिका और इजरायल लगातार चिंतित रहे हैं। बैठक से पहले ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक बयान में कहा था कि उन्हें इजरायल की ओर से किसी विशेष ब्रीफिंग की आवश्यकता नहीं है और उन्होंने संकेत दिया था कि नेतन्याहू चाहते हैं कि अमेरिका इस पूरे मामले में सक्रिय भूमिका निभाता रहे। हालांकि बाद में ओवल ऑफिस से जारी तस्वीरों में दोनों नेता बेहद सकारात्मक माहौल में नजर आए। बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी मौजूद रहे।

    सूत्रों के अनुसार इस दौरान लेबनान सीमा पर बढ़ते तनाव हिज्बुल्लाह की गतिविधियों और अब्राहम समझौते के भविष्य जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। इन मुद्दों को मध्य पूर्व की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ हुई बैठक का मुख्य फोकस रूस के खिलाफ जारी युद्ध और यूक्रेन की रक्षा जरूरतें रहीं। जेलेंस्की ने ट्रंप के साथ हुई बातचीत को रचनात्मक बताते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। खास तौर पर पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों के लाइसेंस और एयर डिफेंस सहयोग को लेकर विचार विमर्श हुआ। रूस की ओर से लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यूक्रेन इन रक्षा प्रणालियों को अपनी सुरक्षा के लिए बेहद अहम मानता है।

    बैठक में ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और रूस के साथ संभावित शांति प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। इसके बाद जेलेंस्की अमेरिकी सांसदों से मुलाकात के लिए कैपिटल हिल पहुंचे जहां यूक्रेन को भविष्य में सैन्य सहायता जारी रखने पर भी विचार किया गया।

    इन बैठकों से पहले ट्रंप नेतन्याहू और जेलेंस्की ने दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी हिस्सा लिया। ग्राहम अमेरिका में इजरायल और यूक्रेन दोनों के प्रबल समर्थक माने जाते थे और उनकी विदेश नीति पर गहरी पकड़ थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब दुनिया कई मोर्चों पर अस्थिरता का सामना कर रही है तब ट्रंप की ये कूटनीतिक बैठकें आने वाले दिनों में अमेरिका की विदेश नीति और वैश्विक शक्ति संतुलन को नई दिशा दे सकती हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि इन अहम बैठकों के बाद अमेरिका कौन से रणनीतिक फैसले लेता है।

  • रणबीर कपूर की रामायण ने रिलीज से पहले जीता बड़ा मुकाबला 75 करोड़ की म्यूजिक डील से बनाया नया कीर्तिमान

    रणबीर कपूर की रामायण ने रिलीज से पहले जीता बड़ा मुकाबला 75 करोड़ की म्यूजिक डील से बनाया नया कीर्तिमान


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में शामिल रामायण अपनी रिलीज से पहले ही लगातार नए रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही है। करीब 4000 करोड़ रुपये के संयुक्त बजट में तैयार हो रही इस मेगा प्रोजेक्ट ने अब म्यूजिक राइट्स के मामले में भी इतिहास रच दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म के म्यूजिक राइट्स टी सीरीज ने 75 करोड़ रुपये में खरीद लिए हैं। हालांकि इस डील की आधिकारिक पुष्टि अभी फिल्म के निर्माताओं की ओर से नहीं की गई है लेकिन इंडस्ट्री में इसे हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी म्यूजिक डील में से एक माना जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि इस डील के लिए टी सीरीज और सोनी म्यूजिक के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। रिपोर्ट्स के मुताबिक सोनी म्यूजिक ने 70 करोड़ रुपये की पेशकश की थी जबकि टी सीरीज ने 75 करोड़ रुपये का ऑफर देकर बाजी अपने नाम कर ली। चर्चा यह भी है कि निर्माता नमित मल्होत्रा फिल्म के म्यूजिक राइट्स के लिए 100 करोड़ रुपये तक की डील चाहते थे लेकिन 75 करोड़ रुपये का सौदा भी अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है।

    रामायण का निर्माण बड़े स्तर पर किया जा रहा है और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य फिल्मों में गिना जा रहा है। फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी कर रहे हैं जबकि निर्माता नमित मल्होत्रा हैं। फिल्म दो भागों में रिलीज होगी। पहला भाग इस साल दिवाली पर सिनेमाघरों में आएगा जबकि दूसरा भाग अगले वर्ष दिवाली पर रिलीज किया जाएगा। मेकर्स का लक्ष्य भारतीय पौराणिक कथा को वैश्विक स्तर पर आधुनिक तकनीक और शानदार विजुअल इफेक्ट्स के साथ प्रस्तुत करना है।

    फिल्म की स्टारकास्ट भी इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे हैं जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में दिखाई देंगी। कन्नड़ सुपरस्टार यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं और वह इस फिल्म के सह निर्माता भी हैं। इसके अलावा रवि दुबे लक्ष्मण तथा सनी देओल भगवान हनुमान के किरदार में नजर आएंगे। इस दमदार स्टारकास्ट ने दर्शकों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है।

    फिल्म के संगीत पर भी खास ध्यान दिया गया है। ऑस्कर विजेता संगीतकार ए आर रहमान और हॉलीवुड के दिग्गज हांस जिमर पहली बार किसी भारतीय फिल्म के लिए साथ काम कर रहे हैं। हांस जिमर ने दुनिया की कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में यादगार संगीत दिया है जबकि ए आर रहमान भारतीय सिनेमा के सबसे सफल संगीतकारों में शामिल हैं। ऐसे में दर्शकों को इस फिल्म के संगीत से भी बड़ी उम्मीदें हैं।

    रामायण केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में बड़े स्तर पर रिलीज की जाएगी। इसके लिए मेकर्स ने अंतरराष्ट्रीय वितरण को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सोनी पिक्चर्स के साथ साझेदारी की है। यही वजह है कि इस फिल्म को भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा ग्लोबल प्रोजेक्ट माना जा रहा है। ट्रेलर को लेकर भी जबरदस्त उत्साह बना हुआ है और माना जा रहा है कि इसकी रिलीज के बाद फिल्म को लेकर चर्चा और तेज हो जाएगी।

    अगर 75 करोड़ रुपये की म्यूजिक डील की रिपोर्ट आधिकारिक रूप से सही साबित होती है तो यह हिंदी फिल्म उद्योग के इतिहास की सबसे बड़ी ऑडियो डील में शामिल होगी। रिलीज से पहले ही रामायण ने जिस तरह कारोबार और लोकप्रियता के नए रिकॉर्ड बनाने शुरू कर दिए हैं उससे साफ है कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने की तैयारी में है।

  • ममता और भक्ति का अद्भुत संगम 90 वर्षीय सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पदयात्रा कर रहीं काजल चौधरी

    ममता और भक्ति का अद्भुत संगम 90 वर्षीय सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पदयात्रा कर रहीं काजल चौधरी


    नई दिल्ली । सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना और कांवड़ यात्रा के लिए विशेष माना जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं और भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इस बार भी श्रद्धालुओं का सैलाब सड़कों पर दिखाई दे रहा है लेकिन इन्हीं हजारों कांवड़ियों के बीच एक ऐसी कांवड़ लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई है जिसने सेवा समर्पण और पारिवारिक संस्कार की नई मिसाल पेश कर दी है। दिल्ली के शाहदरा की रहने वाली काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास चंद्रिदेवी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पैदल यात्रा कर रही हैं। यह दृश्य जिसने भी देखा उसकी आंखें नम हो गईं और हर किसी ने उनकी सराहना की।

    काजल चौधरी पेशे से लोक गायिका हैं और अपने भजन तथा देहाती रागनी के कारण सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं। उन्होंने इस वर्ष अपनी सास को कंधों पर बैठाकर कांवड़ यात्रा शुरू की है। खास बात यह है कि उनके साथ 71 किलो गंगाजल भी है जिसे वह भगवान शिव को अर्पित करेंगी। पूरी यात्रा के दौरान उनका परिवार भी उनके साथ चल रहा है और सभी मिलकर सेवा और श्रद्धा का संदेश दे रहे हैं।

    यह पहली बार नहीं है जब काजल चौधरी ने ऐसा किया हो। पिछले वर्ष भी उन्होंने अपनी सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक की यात्रा पूरी की थी। इसके अलावा इसी वर्ष उन्होंने अपनी सास के साथ 84 कोस की परिक्रमा भी की थी। लगातार दूसरी बार इस तरह की यात्रा कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि बुजुर्गों की सेवा केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि सबसे बड़ा धर्म भी है।

    काजल चौधरी का कहना है कि माता पिता और सास ससुर की सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता। उनका मानना है कि जब तक बुजुर्ग हमारे साथ हैं तब तक उनकी हर इच्छा का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि अपने माता पिता और बुजुर्गों की सेवा पूरे मन से करें ताकि उनका आशीर्वाद जीवनभर साथ बना रहे।

    इस यात्रा के दौरान काजल चौधरी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी भावुक अपील की है। उन्होंने बताया कि उनकी सास की इच्छा मुख्यमंत्री से मिलने की है और वे उन्हें अपने हाथों से एक भेंट देना चाहती हैं। काजल ने उम्मीद जताई कि उनकी सास की यह इच्छा भी जल्द पूरी होगी।

    मुजफ्फरनगर से गुजर रही यह अनोखी कांवड़ अब लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। रास्ते में जहां भी यह कांवड़ पहुंचती है लोग रुककर काजल और उनकी सास का अभिवादन करते हैं। कई श्रद्धालु उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं तो कई लोग उन्हें आधुनिक समय का श्रवण कुमार कहकर सम्मान दे रहे हैं। हालांकि काजल कहती हैं कि उन्होंने केवल अपना पारिवारिक कर्तव्य निभाया है और हर बेटे बहू को अपने बुजुर्गों के प्रति यही भावना रखनी चाहिए।

    आज जब भागदौड़ भरी जिंदगी में परिवारों के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं तब काजल चौधरी की यह यात्रा समाज को यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति केवल मंदिरों में पूजा करने से नहीं बल्कि अपने बुजुर्गों की सेवा और सम्मान करने से भी पूरी होती है। यही संस्कार भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान हैं और यही भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं।

  • गौतम गंभीर की टीम में बड़ा बदलाव रयान टेन डोशेट ने छोड़ा असिस्टेंट कोच का पद फील्डिंग कोच टी दिलीप का कार्यकाल भी खत्म

    गौतम गंभीर की टीम में बड़ा बदलाव रयान टेन डोशेट ने छोड़ा असिस्टेंट कोच का पद फील्डिंग कोच टी दिलीप का कार्यकाल भी खत्म


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम को श्रीलंका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम इंडिया के असिस्टेंट कोच रयान टेन डोशेट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही फील्डिंग कोच टी दिलीप का कार्यकाल भी समाप्त हो गया है और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने उनके अनुबंध का नवीनीकरण नहीं करने का फैसला लिया है। इस बदलाव ने मुख्य कोच गौतम गंभीर के नेतृत्व वाले सपोर्ट स्टाफ में महत्वपूर्ण परिवर्तन कर दिया है।

    रयान टेन डोशेट पिछले दो वर्षों से भारतीय टीम के साथ जुड़े हुए थे। इस दौरान उन्होंने बल्लेबाजी और रणनीतिक तैयारियों में अहम भूमिका निभाई। गौतम गंभीर के करीबी सहयोगियों में शामिल टेन डोशेट ने इंग्लैंड दौरे के दौरान ही अपने इस्तीफे की जानकारी बीसीसीआई को दे दी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार अब वह दोबारा नाइट राइडर्स समूह के साथ नई जिम्मेदारी निभा सकते हैं।

    बीसीसीआई ने फील्डिंग कोच टी दिलीप का अनुबंध भी आगे नहीं बढ़ाया है। उनके स्थान पर सुभदीप घोष को नया फील्डिंग कोच नियुक्त किया गया है। बोर्ड का मानना है कि नए विश्व टेस्ट चक्र और आगामी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों को देखते हुए सपोर्ट स्टाफ में बदलाव जरूरी था।

    रयान टेन डोशेट का कार्यकाल भारतीय क्रिकेट के लिए कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों और कुछ चुनौतीपूर्ण दौर का गवाह रहा। उनके कार्यकाल में भारत ने सीमित ओवरों के क्रिकेट में उल्लेखनीय सफलता हासिल की लेकिन टेस्ट क्रिकेट में टीम को कुछ कठिन दौर से भी गुजरना पड़ा। इसके बावजूद डोशेट को खिलाड़ियों के साथ बेहतर तालमेल और रणनीतिक सोच के लिए जाना जाता रहा।

    अब भारतीय टीम की नजर 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज पर है। इस दौरे पर शुभमन गिल टीम की कप्तानी करेंगे जबकि कोचिंग स्टाफ में हुए बदलावों के बीच खिलाड़ियों के सामने नई परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की चुनौती भी होगी।

    बीसीसीआई और टीम प्रबंधन को उम्मीद है कि नए सपोर्ट स्टाफ के साथ टीम अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखेगी। श्रीलंका दौरा नए कोचिंग संयोजन की पहली बड़ी परीक्षा होगा और क्रिकेट प्रेमियों की नजरें इस बात पर रहेंगी कि इन बदलावों का टीम के प्रदर्शन पर कितना प्रभाव पड़ता है।

  • पलक तिवारी की लव लाइफ पर बोले राजा चौधरी इब्राहिम संग रिश्ते की खबरों पर दिया बेबाक जवाब श्वेता तिवारी का भी किया जिक्र

    पलक तिवारी की लव लाइफ पर बोले राजा चौधरी इब्राहिम संग रिश्ते की खबरों पर दिया बेबाक जवाब श्वेता तिवारी का भी किया जिक्र


    नई दिल्ली । अभिनेत्री पलक तिवारी और इब्राहिम अली खान के रिश्ते को लेकर लंबे समय से चर्चाएं चल रही हैं। दोनों को कई मौकों पर एक साथ देखा गया है जिसके बाद उनके डेटिंग की खबरें लगातार सुर्खियां बटोरती रही हैं। हालांकि दोनों कलाकारों ने अब तक अपने रिश्ते को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अब इन चर्चाओं के बीच पलक के पिता और अभिनेता राजा चौधरी ने पहली बार इस पूरे मामले पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

    एक इंटरव्यू के दौरान राजा चौधरी से पलक तिवारी की पेशेवर सफलता और सलमान खान के साथ काम करने को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी बेटी की मौजूदा जिंदगी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्हें यह भी नहीं मालूम कि पलक कहां रहती हैं किसके साथ काम कर रही हैं या अपनी निजी जिंदगी में क्या कर रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि जब तक पलक खुद आकर उन्हें कुछ नहीं बताएंगी तब तक वह उसकी निजी जिंदगी में दखल देना उचित नहीं समझते। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर कभी बेटी को उनकी जरूरत होगी तो वह हर समय उसके साथ खड़े मिलेंगे।

    जब बातचीत के दौरान पलक तिवारी और इब्राहिम अली खान की डेटिंग की खबरों का जिक्र हुआ तो राजा चौधरी ने बेहद शांत और स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर दोनों साथ हैं या नहीं हैं तो इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उनके मुताबिक सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनकी बेटी सुरक्षित और खुश रहे। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का अधिकार है और वह अपनी बेटी के निजी फैसलों का सम्मान करते हैं।

    राजा चौधरी ने इस दौरान अपने और पलक के रिश्ते पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा यह महसूस कराया गया कि वह केवल जैविक पिता हैं और बेटी की परवरिश तथा उसके जीवन से जुड़े अधिकतर फैसले उसकी मां के साथ जुड़े रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को पलक की निजी जिंदगी के बारे में ज्यादा जानकारी चाहिए तो उसकी मां से पूछना ज्यादा उचित होगा क्योंकि वही उसके सबसे करीब हैं।

    बातचीत के दौरान राजा चौधरी ने अपनी पूर्व पत्नी और अभिनेत्री श्वेता तिवारी के साथ पुराने रिश्ते का भी जिक्र किया। गौरतलब है कि दोनों की शादी वर्ष 1998 में हुई थी और साल 2000 में उनकी बेटी पलक का जन्म हुआ। बाद में दोनों के रिश्तों में तनाव बढ़ा और वर्ष 2007 में श्वेता तिवारी ने तलाक की अर्जी दाखिल की। इसके बाद वर्ष 2012 में दोनों का कानूनी रूप से तलाक हो गया। अतीत में श्वेता ने घरेलू हिंसा और शराब की लत जैसे गंभीर आरोप लगाए थे जबकि हाल के इंटरव्यू में राजा चौधरी ने इन आरोपों से इनकार किया है।

    इस बीच पलक तिवारी लगातार अपने फिल्मी करियर पर ध्यान दे रही हैं और मनोरंजन जगत में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। वहीं इब्राहिम अली खान भी अपने अभिनय करियर को लेकर चर्चा में हैं। दोनों की डेटिंग की खबरें भले ही सोशल मीडिया पर लगातार वायरल होती रही हों लेकिन अब तक दोनों ने अपने रिश्ते को लेकर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।

    राजा चौधरी के ताजा बयान से इतना जरूर साफ हो गया है कि वह अपनी बेटी के निजी फैसलों में दखल देने के बजाय उसकी स्वतंत्रता और पसंद का सम्मान करना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर एक पिता के रूप में वह हमेशा अपनी बेटी के साथ खड़े रहेंगे।