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  • लोकसभा में राहुल गांधी के संबोधन पर हंगामा, किरेन रिजिजू ने असंसदीय भाषा के इस्तेमाल पर जताई कड़ी आपत्ति

    लोकसभा में राहुल गांधी के संबोधन पर हंगामा, किरेन रिजिजू ने असंसदीय भाषा के इस्तेमाल पर जताई कड़ी आपत्ति

    नई दिल्ली । लोकसभा में एंटी पेपर लीक विषय पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संबोधन पर बुधवार को सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। भाषण के दौरान इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों पर सत्तापक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष ने अपने संबोधन में असंसदीय भाषा का प्रयोग किया, जो संसदीय परंपराओं और नियमों के अनुरूप नहीं है।

    राहुल गांधी अपने संबोधन के दौरान एंटी पेपर लीक से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, जिन पर सत्तापक्ष के सांसदों ने आपत्ति दर्ज कराई। विरोध बढ़ने के साथ ही सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया और कई सदस्य अपनी सीटों से खड़े होकर विरोध जताने लगे।

    स्थिति को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि संसदीय नियमों के अनुसार किसी भी सदस्य को मर्यादित भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उनका कहना था कि सरकार विपक्ष की बात सुनने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन चर्चा के दौरान असंसदीय शब्दों का प्रयोग स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    रिजिजू ने नेता प्रतिपक्ष से आग्रह किया कि वे अपनी बात पूरी मजबूती से रखें, लेकिन संसदीय परंपराओं का पालन भी करें। उन्होंने कहा कि नियम सरकार ने नहीं बनाए हैं, बल्कि संसद की स्थापित प्रक्रियाओं के तहत सभी सदस्यों पर समान रूप से लागू होते हैं। उनके अनुसार किसी भी सदस्य को ऐसे शब्दों से बचना चाहिए, जिनसे सदन की कार्यवाही प्रभावित हो।

    इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए कथित असंसदीय शब्दों को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाया जाए। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने स्थिति पर संज्ञान लिया और सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। हंगामे के शांत होने के बाद अध्यक्ष ने राहुल गांधी को अपना भाषण आगे जारी रखने का अवसर भी दिया।

    चर्चा के दौरान किरेन रिजिजू ने यह भी कहा कि पहले भी कई अवसरों पर विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों के संबोधन के दौरान व्यवधान उत्पन्न किया गया था। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के समय हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि संसद में स्वस्थ और सार्थक बहस लोकतंत्र की पहचान है, लेकिन इसके लिए सभी पक्षों को संसदीय मर्यादाओं का सम्मान करना आवश्यक है।

    दूसरी ओर, विपक्ष एंटी पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरता रहा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा युवाओं के हितों से जुड़े सवाल उठाता रहा। इस विषय पर सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

    लोकसभा की कार्यवाही के दौरान हुए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर संसदीय भाषा, सदन की गरिमा और बहस के स्तर को लेकर चर्चा तेज कर दी है। अब आगे की कार्यवाही में अध्यक्ष के निर्णय और संसदीय नियमों के तहत उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • बारिश ने पकड़ी रफ्तार बालाघाट से ग्वालियर तक झमाझम बरसात 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट प्रशासन सतर्क

    बारिश ने पकड़ी रफ्तार बालाघाट से ग्वालियर तक झमाझम बरसात 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट प्रशासन सतर्क


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और प्रदेश के कई जिलों में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में सक्रिय मजबूत मानसूनी सिस्टम को देखते हुए 15 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। सबसे अधिक असर बालाघाट जिले में देखने को मिला जहां बीते 24 घंटे के दौरान करीब 3 इंच बारिश दर्ज की गई। लगातार हो रही वर्षा के कारण कई नदी नाले उफान पर पहुंच गए हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के कई संपर्क मार्ग बंद करने पड़े हैं। प्रशासन लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील कर रहा है।

    मौसम विभाग के अनुसार बालाघाट सिवनी छिंदवाड़ा नर्मदापुरम और रायसेन जिलों में अति भारी बारिश की संभावना है। इन क्षेत्रों में अगले 24 घंटे के दौरान लगभग 4 इंच तक वर्षा हो सकती है। वहीं देवास सीहोर हरदा बैतूल पांढुर्णा सागर नरसिंहपुर दमोह जबलपुर और छतरपुर सहित अन्य जिलों में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। विभाग ने बिजली गिरने तेज हवाएं चलने और जलभराव जैसी स्थितियों को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के ऊपर सक्रिय मानसून ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से यह मजबूत मौसम प्रणाली बनी हुई है। यह सिस्टम ओडिशा दक्षिण झारखंड और उत्तर छत्तीसगढ़ से होते हुए मध्यप्रदेश के पूर्वी और मध्य हिस्सों को प्रभावित कर रहा है। आने वाले दिनों में इसके धीरे धीरे कमजोर होकर अवदाब और फिर निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना है लेकिन तब तक प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    बालाघाट में लगातार दो दिनों से हो रही बारिश के कारण दैतबर्रा मंगलेगांव पुल टोंडिया नाला और थानेगांव का नाला पूरी तरह उफान पर हैं। सुरक्षा के लिहाज से कई मार्गों पर यातायात रोक दिया गया है। इसके बावजूद कुछ लोग जान जोखिम में डालकर नालों को पार करते दिखाई दिए। टोंडिया नाले का पानी एक ढाबे तक पहुंच गया जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं बैहर परसवाड़ा मार्ग पर पेड़ गिरने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

    ग्वालियर में भी बुधवार सुबह हुई झमाझम बारिश ने कई दिनों से जारी उमस और गर्मी से लोगों को राहत दिलाई। वहीं भोपाल इंदौर उज्जैन रीवा सतना शहडोल धार खरगोन खंडवा बुरहानपुर रतलाम मंदसौर नीमच विदिशा राजगढ़ शिवपुरी मुरैना भिंड दतिया कटनी मंडला डिंडौरी सीधी सिंगरौली पन्ना टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत कई जिलों में भी हल्की से मध्यम और कहीं कहीं तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आगामी दिनों में तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। किसानों को खेतों में सावधानी बरतने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रदेश में औसतन 13.6 इंच बारिश दर्ज की गई है जबकि इस समय तक लगभग 16.5 इंच वर्षा होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अभी भी करीब 17 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान सक्रिय मानसूनी सिस्टम के चलते आगामी चार दिनों में अच्छी बारिश होने से यह कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान सिस्टम का प्रभाव 1 अगस्त तक बना रहेगा। इस दौरान कई जिलों में अत्यधिक वर्षा होने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से नदी नालों के पास जाने से बचने जलभराव वाले इलाकों में सावधानी बरतने और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।

  • अभिनेता संजय दत्त के 67वें जन्मदिन पर उनके उतार-चढ़ाव भरे जीवन और चार दशक लंबे फिल्मी सफर का लेखा-जोखा

    अभिनेता संजय दत्त के 67वें जन्मदिन पर उनके उतार-चढ़ाव भरे जीवन और चार दशक लंबे फिल्मी सफर का लेखा-जोखा

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में अपनी विशिष्ट अभिनय शैली और दमदार शख्सियत के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता संजय दत्त 29 जुलाई को अपना 67वां जन्मदिन मना रहे हैं। चार दशक से भी लंबे अपने करियर में लगभग 135 से अधिक फिल्मों में अभिनय करने वाले संजय दत्त का जीवन सफलताओं, व्यक्तिगत त्रासदियों, विवादों और कड़े संघर्षों की एक अनूठी दास्तान रहा है। फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद उनका जीवन कभी आसान नहीं रहा और उन्हें कई मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा।

    सुप्रसिद्ध अभिनेता सुनील दत्त और अभिनेत्री नरगिस के घर जन्मे संजय दत्त ने महज बारह वर्ष की उम्र में कव्वाली गायक के रूप में एक छोटी सी भूमिका से अपनी अभिनय यात्रा की शुरुआत की थी। इसके बाद वर्ष 1981 में उन्होंने मुख्य अभिनेता के तौर पर अपनी पहली फिल्म ‘रॉकी’ से बॉलीवुड में औपचारिक कदम रखा। हालांकि फिल्म के प्रदर्शन से ठीक तीन दिन पहले उनकी मां का निधन हो गया, जिसने उनके जीवन पर गहरा मानसिक प्रभाव डाला। इसके बाद वे गंभीर नशे की लत में फंस गए, जिससे उबरने के लिए उन्हें लंबा वक्त लगा।

    अमेरिका स्थित पुनर्वास केंद्र से लौटने के बाद उन्होंने अपनी शारीरिक फिटनेस और अभिनय पर ध्यान केंद्रित किया और 80 व 90 के दशक में एक प्रमुख एक्शन और रोमांटिक हीरो के रूप में खुद को स्थापित किया। इस दौरान उन्होंने कई ब्लॉकबस्टर और यादगार फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। हालांकि वर्ष 1993 में आए मुंबई बम धमाकों के मामले में कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी के बाद उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन में एक बार फिर गंभीर उथल-पुथल देखने को मिली।

    व्यक्तिगत जीवन में संजय दत्त को कई बार अपनों को खोने का दर्द सहना पड़ा। उनकी पहली पत्नी का कम उम्र में ही गंभीर बीमारी के चलते निधन हो गया था। बाद के वर्षों में विभिन्न उतार-चढ़ावों से गुजरने के बाद उन्होंने मान्यता दत्त से विवाह किया। कई कानूनी लड़ाइयों, जेल की सजा और निजी असफलताओं के बावजूद वे हर बार एक मजबूत वापसी करने में सफल रहे। वर्ष 2018 में उनके संघर्षपूर्ण जीवन पर आधारित एक बायोपिक फिल्म का भी निर्माण किया गया था, जिसे दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया गया।

    वर्तमान समय में संजय दत्त हिंदी सिनेमा के साथ-साथ दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी बेहद सक्रिय हैं और नकारात्मक व मुख्य भूमिकाओं में अपनी छाप छोड़ रहे हैं। एक्शन, कॉमेडी, ड्रामा और थ्रिलर जैसे विभिन्न शैलियों की फिल्मों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के बाद अब वे अपनी आने वाली नई फिल्मों की तैयारियों में जुटे हुए हैं। चार दशक बाद भी उनका स्टारडम और प्रशंसकों के बीच उनकी लोकप्रियता लगातार बनी हुई है।

  • संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए चलाए जाएंगे राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम

    संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए चलाए जाएंगे राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम

    नई दिल्ली । संत गुरु रविदास महाराज के समता, सेवा और सामाजिक न्याय के संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने एक राष्ट्रव्यापी पहल की शुरुआत की है। जमशेदपुर में एक औपचारिक घोषणा के दौरान इस ‘समरसता संकल्प अभियान’ की विस्तृत रूपरेखा साझा की गई। यह व्यापक अभियान आषाढ़ पूर्णिमा से प्रारंभ होकर माघ पूर्णिमा तक चलेगा, जिसमें राष्ट्रीय, राज्य, जिला, मंडल और ग्राम स्तर तक विविध सांस्कृतिक व सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

    इस अभियान का मुख्य ध्येय संत रविदास द्वारा प्रतिपादित ‘बेगमपुरा’ के उस दर्शन को साकार करना है, जो शोषण और भेदभाव से मुक्त समाज की परिकल्पना पर आधारित है। संगठन का मानना है कि विकसित भारत के निर्माण में समाज के सभी वर्गों की समान सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज के प्रत्येक स्तर पर सद्भाव और समरसता का वातावरण तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    अभियान के तहत कई बड़े कार्यक्रमों की योजना तैयार की गई है। इसके शुरुआती चरण में शाम को दीप महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसके साथ ही वाराणसी स्थित पवित्र स्थल की पावन मिट्टी से भरे कलश देश भर के विभिन्न क्षेत्रों में भेजे जाएंगे। इसके अलावा पंजाब के जालंधर से वाराणसी तक एक भव्य समरसता यात्रा भी निकाली जाएगी। एक महीने तक चलने वाली इस यात्रा के माध्यम से आम जनमानस को संत रविदास के विचारों से जोड़ने का प्रयास होगा।

    सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए पूरे अभियान के दौरान संत संपर्क, छात्रावास संपर्क, समरसता संवाद, भजन-कीर्तन और विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला चलेगी। इसके तहत समाज के प्रबुद्ध जनों और संतों से सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर इन सभी गतिविधियों के सुचारू संचालन और समन्वय के लिए जिला और मंडल स्तर पर विशेष आयोजन समितियों का गठन भी शुरू कर दिया गया है।

  • नीट धांधली के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने का पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

    नीट धांधली के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने का पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली । नीट परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितताओं को लेकर देश भर में जारी उथल-पुथल के बीच राज्य सरकारों का रुख बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि आंदोलन में भाग लेने वाले सामान्य और निर्दोष छात्रों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या कठोर प्रशासनिक कदम नहीं उठाया जाएगा। हालांकि राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी आधिकारिक रुख में यह भी साफ कर दिया गया है कि आपराधिक इतिहास रखने वाले या हिंसा में संलिप्त लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

    राज्य सरकार द्वारा जारी औपचारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि नीट परीक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रमों और छात्र असंतोष पर काफी गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया है। गहन समीक्षा के बाद प्रशासन ने यह तय किया है कि जो युवा या विद्यार्थी केवल अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरे थे, उनके खिलाफ कोई नई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और न ही उन्हें बेवजह परेशान किया जाएगा। लेकिन इस सुरक्षा का दायरा केवल निर्दोष विद्यार्थियों तक ही सीमित रहेगा और पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रखने वाले तत्वों पर कानून का शिकंजा कसता रहेगा।

    प्रशासनिक स्तर पर यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के हालिया दिशानिर्देशों और न्यायिक टिप्पणियों के अनुरूप उठाया गया है। शीर्ष अदालत ने भी हाल ही में विभिन्न याचिकाओं पर विचार करते हुए साफ कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए, जबकि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर जांच एजेंसियां नियमानुसार कार्रवाई जारी रख सकती हैं। इसी के तहत राज्य के गृह विभाग ने अपने पुलिस बलों को निर्देश दिए हैं कि वे पुराने दर्ज मामलों की समीक्षा करें और छात्रों की पहचान सुनिश्चित करके ही आगे की प्रक्रिया बढ़ाएं।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कोलकाता और राज्य के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों और अव्यवस्था के सिलसिले में पुलिस में मामला दर्ज किया गया था। इस दर्ज मुकदमे की कड़ी में जांच एजेंसियों ने व्यापक छानबीन की है और अब तक कई संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने प्रदर्शन की आड़ में हिंसा भड़काने या पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों पर हमला करने का प्रयास किया था।

    उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल से पहले पूर्वोत्तर राज्य असम और पड़ोसी राज्य बिहार की सरकारों ने भी इसी तरह का उदार रुख अपनाया था। दोनों राज्यों ने घोषणा की थी कि परीक्षा में धांधली के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों और आम नागरिकों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकारों का मानना है कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किए गए प्रदर्शनों पर दंडात्मक रुख अपनाना उचित नहीं है, बशर्ते उसमें किसी असामाजिक तत्व की साजिश शामिल न हो।

    देशव्यापी स्तर पर नीट परीक्षा को लेकर मचा बवाल जुलाई के अंतिम सप्ताह में केंद्रीय स्तर पर हुए बड़े घटनाक्रमों के बाद थमता नजर आया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद त्यागने के बाद विभिन्न संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के दो दौर की सकारात्मक बातचीत हुई थी। उस वार्ता के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों ने यह सहमति व्यक्त की थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को निरस्त किया जाएगा, पुलिसिया उत्पीड़न रोका जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कानून लाया जाएगा। अब राज्य सरकारें उसी समझौते और न्यायिक आदेशों का क्रियान्वयन कर रही हैं।

  • सरकारी अधिकारियों द्वारा वाहनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने लागू की 'वन ऑफिसर, वन कार' नीति

    सरकारी अधिकारियों द्वारा वाहनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने लागू की 'वन ऑफिसर, वन कार' नीति

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने अपने मंत्रालयों और विभिन्न विभागों में पदस्थ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सरकारी वाहनों के बेजा इस्तेमाल को रोकने के लिए नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत ‘वन ऑफिसर, वन कार’ यानी एक अधिकारी को केवल एक ही सरकारी वाहन आवंटित करने की नीति को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए गए हैं। इस नए कदम से सरकारी तंत्र में अतिरिक्त गाड़ियों के अनधिकृत उपयोग पर पूरी तरह विराम लगने की उम्मीद है।

    नवीनतम सर्कुलर के अनुसार, सरकारी वाहन की पात्रता रखने वाले किसी भी अधिकारी को एक से अधिक कार आवंटित नहीं की जाएगी। यदि किसी अफसर को अपने मूल पद के साथ किसी अन्य मंत्रालय, विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या स्वायत्त निकाय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा जाता है, तब भी वह केवल एक ही आधिकारिक वाहन का उपयोग करने का हकदार होगा। अतिरिक्त दायित्व के आधार पर दूसरी गाड़ी हासिल करने की व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केंद्र के अधीन कार्यरत अधिकारी सार्वजनिक उपक्रमों या स्वायत्त संस्थाओं के बेड़े में शामिल वाहनों को अपने दैनिक या नियमित इस्तेमाल के लिए अपने पास नहीं रख सकेंगे। इस तरह की कार्यप्रणाली पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है। हालांकि, अंतर-राज्यीय या विभागीय आधिकारिक दौरों के दौरान आवश्यकता पड़ने पर अधिकारियों को इन संस्थाओं के वाहनों का उपयोग करने की विशेष छूट दी जाएगी, ताकि शासकीय कार्यों में कोई बाधा न आए।

    नए परिपत्र में सभी मंत्रालयों और विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इस्तेमाल में न आ रहे या अधिशेष वाहनों को तुरंत सुरक्षित कस्टडी में लिया जाए। यह निर्देश पूर्व में जारी उन नियमों को और मजबूती प्रदान करता है, जिनमें अधिकारियों द्वारा तय शुल्क देकर सीमित दायरे में सरकारी गाड़ी के निजी उपयोग की अनुमति दी गई थी। सरकार के इस कड़े रुख से जहां एक तरफ वाहनों के दुरुपयोग पर अंकुश लगेगा, वहीं दूसरी तरफ सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अनावश्यक वित्तीय बोझ में भी बड़ी कमी आएगी।

  • मेकेदातु डैम विवाद: राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री के बयान से भड़के सीएम विजय, पीएम मोदी को पत्र लिख की सीधे हस्तक्षेप की मांग

    मेकेदातु डैम विवाद: राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री के बयान से भड़के सीएम विजय, पीएम मोदी को पत्र लिख की सीधे हस्तक्षेप की मांग


    नई दिल्ली ।
    कावेरी नदी पर बनने वाले प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच का अंतर-राज्यीय जल विवाद एक बार फिर गहरा गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर केंद्रीय हस्तक्षेप की मांग की है। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया है कि जब तक यह परियोजना कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और उच्चतम न्यायालय के फैसलों के पूरी तरह अनुरूप न हो, तब तक इसे किसी भी प्रकार की वैधानिक या प्रशासनिक स्वीकृति न दी जाए।

    तमिलनाडु सरकार की यह तीखी प्रतिक्रिया राज्यसभा में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री द्वारा दिए गए एक हालिया बयान के बाद सामने आई है। संसद में एक सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा था कि सर्वोच्च अदालत के फैसले में ऐसा स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि नदी पर कोई ढांचा खड़ा करने से पहले ऊपरी राज्य को निचले तटीय राज्यों की पूर्व सहमति लेना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री विजय ने केंद्रीय मंत्री के इस तर्क को बेहद निराशाजनक और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग उठाई है।

    प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कानूनी और तकनीकी पहलुओं का हवाला देते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने पूर्व के फैसलों का विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने अलमट्टी डैम मामले में शीर्ष अदालत की संविधान पीठ के फैसले का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में निचले राज्यों की सहमति और केंद्र की मंजूरी पूरी तरह अनिवार्य है। इसके अलावा न्यायाधिकरण की विभिन्न धाराओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ऊपरी राज्य बिना आपसी सहमति के ऐसा कोई कदम नहीं उठा सकता जिससे निचले राज्यों के तय पानी के शेड्यूल पर विपरीत प्रभाव पड़े।

    मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मेकेदातु परियोजना केवल एक साधारण इंजीनियरिंग प्रस्ताव भर नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के लाखों किसानों की आजीविका और जीवनरेखा से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। कावेरी नदी दक्षिण भारत के बड़े भूभाग के लिए पानी का मुख्य स्रोत है। यही वजह है कि केंद्रीय जल आयोग ने पूर्व में विस्तृत रिपोर्ट को न्यायाधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाने के लिए वापस भेज दिया था। तमिलनाडु सरकार ने केंद्र से मांग की है कि निचले राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए ही आगे कोई कदम उठाया जाए।

  • IRCTC का शानदार लद्दाख टूर पैकेज कम खर्च में फ्लाइट होटल और घूमने की पूरी सुविधा के साथ पूरा करें ड्रीम ट्रिप

    IRCTC का शानदार लद्दाख टूर पैकेज कम खर्च में फ्लाइट होटल और घूमने की पूरी सुविधा के साथ पूरा करें ड्रीम ट्रिप


    नई दिल्ली । अगर आप इस साल किसी यादगार और रोमांच से भरपूर यात्रा की योजना बना रहे हैं तो लद्दाख आपके लिए बेहतरीन डेस्टिनेशन साबित हो सकता है। बर्फ से ढके पहाड़ नीला आसमान शांत झीलें और मनमोहक प्राकृतिक दृश्य हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। अब ए यात्रियों को फ्लाइट होटल भोजन और स्थानीय पर्यटन जैसी कई सुविधाएं एक साथ मिल जाती हैं जिससे पूरी यात्रा सुविधाजनक और तनावमुक्त बन जाती है।

    आईआरसीटीसी का यह टूर पैकेज उन लोगों के लिए खास है जो बिना किसी झंझट के लद्दाख की खूबसूरती का आनंद लेना चाहते हैं। यात्रा की योजना बनाने से लेकर होटल बुकिंग और स्थानीय परिवहन तक की जिम्मेदारी आईआरसीटीसी संभालती है। इससे यात्रियों को अलग अलग बुकिंग कराने की जरूरत नहीं पड़ती और समय के साथ खर्च की भी बचत होती है।

    इस पैकेज में हवाई यात्रा की सुविधा शामिल रहती है जिससे लंबी और थकाऊ यात्रा से बचा जा सकता है। लेह पहुंचने के बाद आरामदायक होटल में ठहरने की व्यवस्था की जाती है। कई पैकेजों में नाश्ता और रात्रि भोजन जैसी सुविधाएं भी शामिल होती हैं जिससे यात्रियों को अतिरिक्त व्यवस्था करने की चिंता नहीं रहती।

    लद्दाख यात्रा के दौरान पर्यटक कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों का आनंद ले सकते हैं। पैंगोंग झील अपनी नीली चमक और बदलते रंगों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। नुब्रा घाटी के रेत के टीले और दो कूबड़ वाले ऊंट पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं। इसके अलावा मैग्नेटिक हिल शांति स्तूप लेह पैलेस और प्राचीन बौद्ध मठ भी इस यात्रा को यादगार बना देते हैं। प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह यात्रा किसी स्वर्ग से कम नहीं मानी जाती।

    आईआरसीटीसी के टूर पैकेज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सुरक्षा और सुविधा दोनों का विशेष ध्यान रखा जाता है। अनुभवी टूर मैनेजर स्थानीय परिवहन और तय कार्यक्रम के अनुसार भ्रमण की व्यवस्था करते हैं जिससे यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। परिवार दोस्तों या अकेले यात्रा करने वाले लोगों के लिए भी यह पैकेज उपयुक्त माना जाता है।

    लद्दाख की यात्रा पर जाने से पहले मौसम के अनुसार गर्म कपड़े जरूरी दवाइयां पहचान पत्र और आरामदायक जूते साथ रखना चाहिए। ऊंचाई वाले क्षेत्र में ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण पहले दिन आराम करना और पर्याप्त पानी पीना भी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है।

    यदि आप प्राकृतिक सौंदर्य रोमांच और सुकून से भरी छुट्टियों का आनंद लेना चाहते हैं तो आईआरसीटीसी का यह लद्दाख टूर पैकेज एक शानदार विकल्प बन सकता है। एक ही पैकेज में यात्रा रहने और घूमने की सुविधाएं मिलने से आपकी ट्रिप न केवल आसान बल्कि यादगार भी बन सकती है।

  • पहले टेस्ट में वेस्टइंडीज के सामने नतमस्तक हुआ पाकिस्तान, 90 रनों की करारी शिकस्त के साथ बाबर आजम की कप्तानी का खराब आगाज

    पहले टेस्ट में वेस्टइंडीज के सामने नतमस्तक हुआ पाकिस्तान, 90 रनों की करारी शिकस्त के साथ बाबर आजम की कप्तानी का खराब आगाज

    नई दिल्ली । कैरेबियाई धरती पर खेले जा रहे दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला के पहले मुकाबले में मेहमान पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को बेहद शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है। कप्तानी की कमान दोबारा संभालते ही बाबर आजम की अगुवाई वाली टीम खेल के चौथे दिन ही वेस्टइंडीज के सामने पूरी तरह धराशाई हो गई। दो सौ ग्यारह रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पूरी पाकिस्तानी टीम दूसरी पारी में महज एक सौ बीस रनों पर ही सिमट गई, जिसके चलते वेस्टइंडीज ने यह मुकाबला नब्बे रनों के विशाल अंतर से अपने नाम कर लिया।

    चौथी पारी में छोटे लक्ष्य का पीछा करने मैदान में उतरी पाकिस्तानी टीम की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। मेजबान गेंदबाजों की सधी हुई और धारदार गेंदबाजी के सामने मेहमान टीम के बल्लेबाज ताश के पत्तों की तरह ढह गए। कप्तान बाबर आजम ने एक छोर संभालते हुए सबसे ज्यादा अट्ठावन रनों की संघर्षपूर्ण पारी खेली, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से किसी भी बल्लेबाज का सहयोग नहीं मिला। टीम के केवल तीन बल्लेबाज ही दहाई का आंकड़ा छू सके, जिससे पाकिस्तान की हार काफी पहले ही तय नजर आने लगी थी।

    वेस्टइंडीज की ओर से दूसरी पारी में तेज गेंदबाज जेडन सील्स ने घातक गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए पांच विकेट झटके। उनके साथ ही अनुभवी गेंदबाज केमार रोच और जस्टिन ग्रीव्स ने दो-दो सफलताएं हासिल कर पाकिस्तानी बल्लेबाजी क्रम की रीढ़ तोड़ दी। पूरे मैच में अपने ऑलराउंड प्रदर्शन और सात विकेट चटकाने के लिए जस्टिन ग्रीव्स को मैन ऑफ द मैच के पुरस्कार से नवाजा गया। पहली पारी में भी ग्रीव्स ने लगातार पांच मेडन ओवरों में पांच विकेट लेकर पाकिस्तान को बैकफुट पर धकेल दिया था।

    इससे पहले मैच की शुरुआत में वेस्टइंडीज ने अपनी पहली पारी में तीन सौ ग्यारह रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया था। मेजबान टीम की ओर से शाई होप ने शानदार बांवे रन और कावेम हॉज ने बिरासी रनों का अहम योगदान दिया था। इसके जवाब में पाकिस्तान की पहली पारी दो सौ बयासी रनों पर ही सिमट गई थी। इस जीत के साथ ही वेस्टइंडीज ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में एक-शून्य की निर्णायक बढ़त बना ली है, जबकि पाकिस्तानी टीम पर अब सीरीज गंवाने का संकट मंडराने लगा है।

  • भीषण बाढ़ की तबाही से कराहते असम के लिए आगे आए बॉलीवुड सितारे, आलिया भट्ट और सलमान खान ने संभाला राहत मोर्चा

    भीषण बाढ़ की तबाही से कराहते असम के लिए आगे आए बॉलीवुड सितारे, आलिया भट्ट और सलमान खान ने संभाला राहत मोर्चा

    नई दिल्ली । पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख राज्य असम इन दिनों विनाशकारी बाढ़ की चपेट में है, जिससे व्यापक स्तर पर जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच फिल्म जगत की हस्तियों ने प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए मदद के प्रयास तेज कर दिए हैं। अभिनेत्री आलिया भट्ट ने सोशल मीडिया के जरिए आम जनता से आगे आकर राहत कार्यों में योगदान देने की अपील की है, वहीं अभिनेता सलमान खान की संस्था जमीनी स्तर पर राहत सामग्री पहुंचाने के काम में जुट गई है।

    असम में बने हालात पर गहरी चिंता जताते हुए आलिया भट्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक भावुक संदेश साझा किया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ की वजह से अब तक साठ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होने को मजबूर हुए हैं। हर साल असम को इस भीषण त्रासदी का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद बुनियादी स्तर पर तैयारियां नाकाफी नजर आती हैं। उन्होंने आपदा प्रभावितों को तत्काल और दीर्घकालिक पुनर्वास सहायता देने की जरूरत पर जोर दिया।

    अभिनेत्री ने स्पष्ट किया है कि वह जल्द ही जमीनी स्तर पर कार्य कर रही प्रामाणिक संस्थाओं का विवरण साझा करेंगी, ताकि लोग सही माध्यमों से आर्थिक या सामग्री के रूप में योगदान दे सकें। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों का सहारा बनने की गुजारिश की है। कई परिवारों द्वारा अपने प्रियजनों, मवेशियों और आजीविका के साधनों को खो देने की घटना बेहद पीड़ादायक है।

    दूसरी ओर, अभिनेता सलमान खान ने अपने धर्मार्थ संगठन और स्थानीय प्रशंसक समूहों के माध्यम से राहत अभियान शुरू कर दिया है। गुवाहाटी से राहत सामग्री जुटाकर बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में पहुंचाई जा रही है। विशेषकर शिवसागर जिले के ग्रामीण इलाकों में जलभराव से जूझ रहे परिवारों को तत्काल राहत के रूप में भोजन के पैकेट और दैनिक आवश्यकता का सामान वितरित किया जा रहा है।

    आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के कई प्रमुख जिलों में जलस्तर खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट, कामरूप समेत सात से अधिक जिलों के सैकड़ों गांव पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न होने से फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है। ऐसे विकट समय में सामाजिक संगठनों और मशहूर हस्तियों की ओर से की जा रही पहल से राहत कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।