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  • राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव में 50% टिकट 50 साल से कम उम्र के नेताओं को देगी कांग्रेस

    राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव में 50% टिकट 50 साल से कम उम्र के नेताओं को देगी कांग्रेस


    जयपुर। राजस्थान में होने वाले निकाय और पंचायत चुनावों से पहले कांग्रेस ने युवाओं को आगे बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने घोषणा की कि पार्टी शहरी निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में 50 वर्ष से कम आयु के उम्मीदवारों को 50 प्रतिशत टिकट देगी।

    पार्टी मुख्यालय में शहरी निकाय चुनावों की तैयारियों की समीक्षा बैठक के दौरान डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें नेतृत्व का अवसर देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

    उन्होंने टिकट के दावेदारों को यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि केवल आवेदन करने से टिकट की गारंटी नहीं होगी। उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय परिस्थितियों, संगठन की जरूरतों और जीत की संभावनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

    डोटासरा ने वार्ड बदलकर टिकट मांगने की प्रवृत्ति पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि एक वार्ड से दूसरे वार्ड में जाकर दावेदारी करने को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। टिकट वितरण पूरी तरह संगठनात्मक मानकों और स्थानीय समीकरणों के आधार पर होगा।

    राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, पंचायत चुनावों की अधिसूचना 23 सितंबर के आसपास जारी होने की संभावना है। मतदान 13 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच विभिन्न चरणों में कराया जा सकता है, जबकि मतगणना 12 नवंबर तक पूरी होने की उम्मीद है।

    वहीं, शहरी निकाय चुनावों की घोषणा 17 अगस्त के आसपास होने की संभावना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 6 और 9 सितंबर को मतदान तथा 11 सितंबर को मतगणना कराई जा सकती है। हालांकि, अंतिम कार्यक्रम चुनाव आयोग की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही तय होगा।

  • अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अगले सप्ताह अपनी पहली स्पेसवॉक करेंगे

    अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अगले सप्ताह अपनी पहली स्पेसवॉक करेंगे

    नई दिल्ली । वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय मूल के वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों की बढ़ती साख के बीच नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अगले सप्ताह अपने करियर की पहली स्पेसवॉक करने के लिए तैयार हैं। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन परिसर के बाहर संचालित होने वाले इस महत्वपूर्ण अभियान के दौरान वे ऊर्जा प्रणालियों के संवर्धन और संचार नेटवर्क को अत्याधुनिक बनाने से जुड़े कई जटिल तकनीकी कार्यों को पूरा करेंगे। इस मिशन को अंतरिक्ष स्टेशन की कार्यप्रणाली को दीर्घकालिक और सुरक्षित बनाए रखने के दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार छह अगस्त से शुरू हो रहे इस अभियान में अनिल मेनन अपनी सहयोगी अंतरिक्ष यात्री के साथ कक्षीय प्रयोगशाला के बाहर जाकर विशेष रोल-आउट सोलर एरे स्थापित करने की पूर्व-तैयारियां करेंगे। यह नई सौर ऊर्जा प्रणाली अंतरिक्ष स्टेशन को अतिरिक्त बिजली की आपूर्ति प्रदान करेगी, जो भविष्य में प्रयोगशाला के नियंत्रित संचालन और शोध गतिविधियों के लिए आवश्यक है। इसके बाद अगस्त के मध्य में प्रस्तावित दूसरी स्पेसवॉक के दौरान पृथ्वी स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर और अंतरिक्ष स्टेशन के बीच उच्च-गति डेटा ट्रांसमिशन सुनिश्चित करने वाले मुख्य संचार एंटीना को बदला जाएगा।

    अगस्त के अंतिम सप्ताह में आयोजित होने वाली तीसरी और अंतिम स्पेसवॉक में पावर केबल, डेटा रिले प्रणालियों को जोड़ने तथा अंतरिक्ष यान की सुरक्षित डॉकिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले नेविगेशन उपकरणों को अद्यतन करने का कार्य किया जाएगा। अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ा यह बहुस्तरीय तकनीकी अभियान आने वाले वर्षों में वैज्ञानिक प्रयोगों और विभिन्न अभियानों के सुचारू संचालन में अहम भूमिका निभाएगा। पिछले माह अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचे मेनन वहां लगभग आठ महीने का समय बिताएंगे और इस दौरान विभिन्न वैश्विक शोध परियोजनाओं में भाग लेंगे।

    अनिल मेनन द्वारा की जाने वाली यह चहलकदमी न केवल नासा के भावी अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए आधार तैयार करेगी, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान में भारतवंशी विशेषज्ञों की बढ़ती भागीदारी को भी रेखांकित करती है। इस संपूर्ण मिशन के सफलतापूर्वक पूरे होने से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की परिचालन दक्षता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी और वैज्ञानिक डेटा के त्वरित आदान-प्रदान में मदद मिलेगी। इस ऐतिहासिक मिशन की ओर पूरी दुनिया के अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थानों की निगाहें टिकी हुई हैं।

  • सरकारी खजाने पर डाका इंदौर में 8 करोड़ के गबन मामले में नया खुलासा आरोपी के खाते में पहुंचे थे 13.72 लाख रुपए

    सरकारी खजाने पर डाका इंदौर में 8 करोड़ के गबन मामले में नया खुलासा आरोपी के खाते में पहुंचे थे 13.72 लाख रुपए


    इंदौर । इंदौर में करीब 8 करोड़ रुपए के शासकीय धन के गबन से जुड़े बहुचर्चित मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। रावजी बाजार थाना पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत से तीन दिन की पुलिस रिमांड हासिल की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी के बैंक खाते में शासकीय मद से 13 लाख 72 हजार रुपए ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम का इस्तेमाल कहां और किस तरह किया गया तथा इस पूरे घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

    यह मामला मार्च 2023 में सामने आया था जब तत्कालीन संयुक्त कलेक्टर मुनीष सिंह सिकरवार की शिकायत के आधार पर रावजी बाजार थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने मिलाप चौहान रंजीत करोड़ मनीषा चौहान राहुल चौहान सहित कई लोगों को आरोपी बनाया था। इसके बाद लगातार जांच का दायरा बढ़ता गया और कई अहम जानकारियां सामने आईं।

    पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के बैंक खातों से जुड़ी जानकारी का दुरुपयोग किया। जिन खातों में तकनीकी कारणों से भुगतान नहीं हो पाया था उन खातों की जानकारी हासिल कर आरोपियों ने फर्जी स्वीकृति आदेश तैयार किए। इसके बाद वास्तविक हितग्राहियों के बैंक खातों की जगह अपने परिजनों दोस्तों और परिचितों के बैंक खातों की जानकारी दर्ज कर दी गई। इसी फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी राशि दोबारा जनरेट कर अलग-अलग निजी खातों में ट्रांसफर की जाती रही।

    जांच एजेंसियों के अनुसार इसी तरीके से लगभग 8 करोड़ रुपए की शासकीय राशि का गबन किया गया। यह मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की थी। अब तक कई आरोपियों की भूमिका सामने आ चुकी है और लगातार नए तथ्य भी उजागर हो रहे हैं।

    इसी कड़ी में पुलिस ने सोमवार को सर्वहारा नगर परदेशीपुरा निवासी मनोज उर्फ हल्लू को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि सह आरोपी रंजीत करोड़ ने सरकारी मद से मनोज के बैंक खाते में 13 लाख 72 हजार रुपए ट्रांसफर किए थे। पुलिस का दावा है कि इस रकम का उपयोग आरोपी और उसके सहयोगियों ने विभिन्न कार्यों में किया। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस राशि का कितना हिस्सा निकाला गया कितना खर्च हुआ और क्या इसे आगे अन्य खातों में भी भेजा गया।

    पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में इस पूरे घोटाले से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि सरकारी धन के गबन की इस साजिश में किसकी क्या भूमिका थी और किन लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा बैंक खातों में राशि ट्रांसफर कराने में मदद की।

    यह मामला सरकारी वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रशासन का कहना है कि पूरे प्रकरण की गहन जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का उद्देश्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है बल्कि गबन की पूरी राशि का हिसाब जुटाना और सरकारी धन की रिकवरी सुनिश्चित करना भी है।

  • कोविड महामारी के दौरान मिले केंद्रीय कोष और उपकरणों के अप्रयुक्त रहने तथा वित्तीय अनियमितताओं पर विपक्षी दल ने जताई आपत्ति

    कोविड महामारी के दौरान मिले केंद्रीय कोष और उपकरणों के अप्रयुक्त रहने तथा वित्तीय अनियमितताओं पर विपक्षी दल ने जताई आपत्ति

    नई दिल्ली । राज्य विधानमंडल में प्रस्तुत की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नवीनतम रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। प्रतिवेदन में स्वास्थ्य सेवाओं, प्राकृतिक आपदा राहत वितरण तथा बजटीय आवंटन के निष्पादन में कई स्तरों पर पाई गई कमियों को रेखांकित किया गया है। महामारी के संवेदनशील दौर में उपलब्ध कराए गए संसाधनों के पूर्ण उपयोग न होने और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में अनुपालन की अनिमितताओं पर विपक्षी दलों ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है।

    लेखा परीक्षा रिपोर्ट के मुख्य अंशों के अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में आवंटित बजट का एक बड़ा हिस्सा निर्धारित समय सीमा तक अप्रयुक्त पड़ा रहा। वैश्विक महामारी के समय उपलब्ध कराए गए महत्वपूर्ण चिकित्सा संसाधनों, जैसे ऑक्सीजन संयंत्रों और सघन चिकित्सा इकाई उपकरणों के कई केंद्रों पर चालू न होने का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त, गंभीर प्राकृतिक आपदाओं के उपरांत राहत राशि के पुनरावृत्त वितरण के मामले भी सामने आए हैं, जिससे राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा। इन निष्कर्षों ने आपदा प्रबंधन और लाभार्थी सत्यापन प्रणालियों की दक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्रतिवेदन में औद्योगिक विकास हेतु भूमि आवंटन और विभिन्न राज्य स्तरीय कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में भी प्रक्रियागत त्रुटियों की ओर संकेत किया गया है। निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन न होने से हुए वित्तीय नुकसान के साथ-साथ राज्य के समग्र राजकोषीय घाटे और बढ़ते ऋण भार को लेकर चिंता जताई गई है। बजट के एक बड़े हिस्से का वर्ष के अंत तक बिना खर्च हुए रह जाना और अतिरिक्त व्यय के लिए आवश्यक विधायी स्वीकृतियों के लंबित रहने को वित्तीय अनुशासन के दृष्टिकोण से गंभीर माना जा रहा है।

    संसदीय पटल पर रिपोर्ट की प्रति रखे जाने के उपरांत मुख्य विपक्षी दल ने इन निष्कर्षों को प्रशासनिक विफलता करार देते हुए कड़े दंडात्मक कदमों की मांग की है। विपक्षी प्रतिनिधियों का कहना है कि जनकल्याणकारी योजनाओं में पाई गई यह ढिलाई राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक विकास को प्रभावित करती है। दूसरी ओर, प्रशासनिक सूत्रों का तर्क है कि ऑडिट रिपोर्ट में उठाए गए अधिकांश बिंदु प्रक्रियागत और तकनीकी प्रकृति के हैं, जिन पर विभागीय समीक्षा के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जाएगी। फिलहाल, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य के प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

  • आरक्षण नीति पर डिजिटल मंचों पर छिड़ी नई बहस के बीच सोशल मीडिया अभियान तेजी से युवा आबादी को कर रहा आकर्षित

    आरक्षण नीति पर डिजिटल मंचों पर छिड़ी नई बहस के बीच सोशल मीडिया अभियान तेजी से युवा आबादी को कर रहा आकर्षित

    नई दिल्ली । परीक्षा प्रणालियों में सुधार की मांगों के बाद अब युवाओं ने देश की मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया मंचों पर एक नया व्यापक अभियान छेड़ दिया है। डिजिटल माध्यमों से शुरू हुई इस पहल को महज दो दिनों के भीतर लाखों की संख्या में युवाओं का समर्थन मिला है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बने विशेष पेज ने बहुत ही कम समय में रिकॉर्ड फॉलोअर्स जुटाकर इस विषय को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है। इस डिजिटल गोलबंदी को केवल ऑनलाइन तक सीमित न रखते हुए आयोजकों ने अब इसे राजधानी के जंतर-मंतर पर प्रत्यक्ष प्रदर्शन में बदलने की तैयारी शुरू कर दी है।

    इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य मौजूदा जातिगत आरक्षण प्रणाली के स्थान पर पूर्णतः योग्यता और आर्थिक स्थिति पर आधारित चयन प्रक्रिया को लागू कराना है। अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों का तर्क है कि प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों में निष्पक्ष अवसरों के लिए पारदर्शी नीतियां आवश्यक हैं। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए एक समर्पित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वेबसाइट तैयार की गई है, जिसके माध्यम से युवाओं को संगठित किया जा रहा है। अलग-अलग राज्यों से जुड़ रहे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र इस मंच पर खुलकर अपनी प्रतिक्रियाएं और अनुभव साझा कर रहे हैं।

    दूसरी ओर, इस ऑनलाइन पहल के सामने आते ही सोशल मीडिया पर नीति के पक्षधर समूहों की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं दर्ज की जा रही हैं। आरक्षण व्यवस्था का समर्थन करने वाले वर्गों का कहना है कि जब तक समाज से सामाजिक विषमताएं पूरी तरह समाप्त नहीं हो जातीं, तब तक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए यह संवैधानिक ढांचा अनिवार्य है। इसके जवाब में कई नए पेज और ऑनलाइन समूह भी सक्रिय हो गए हैं जो मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के सामाजिक महत्व को रेखांकित कर रहे हैं। इस प्रकार डिजिटल स्पेस में दोनों पक्षों के बीच विचारों का तीखा आदान-प्रदान देखने को मिल रहा है।

    युवाओं के इस तेजी से बढ़ते रुख को देखते हुए सामाजिक और नीतिगत विश्लेषक इसे नए दौर का डिजिटल जनआंदोलन मान रहे हैं। अभियान के आयोजक अब इस ऑनलाइन समर्थन को एक संगठित ढांचा देने के लिए ऑनलाइन सदस्यता और देशव्यापी नेटवर्किंग पर बल दे रहे हैं। आने वाले समय में यदि यह अभियान दिल्ली की सड़कों तक पहुंचता है, तो यह प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों के लिए एक नई चुनौती पेश कर सकता है। फिलहाल, डिजिटल मंचों पर यह विषय शीर्ष रुझानों में बना हुआ है और युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।

  • बर्फीले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक स्मार्ट वर्दी विकसित करने की दिशा में रक्षा अनुसंधान संस्थान का बड़ा कदम

    बर्फीले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक स्मार्ट वर्दी विकसित करने की दिशा में रक्षा अनुसंधान संस्थान का बड़ा कदम

    नई दिल्ली । अत्यधिक ऊंचाई और शून्य से नीचे के तापमान वाले सीमावर्ती बर्फीले क्षेत्रों में तैनात भारतीय सैनिकों की सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक विशेष तकनीक पर काम शुरू किया गया है। हिमस्खलन और बर्फीले तूफानों जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जवानों की स्थिति का सटीक पता लगाने के लिए अत्याधुनिक स्मार्ट वर्दी का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत रक्षा अनुसंधान से जुड़ी कानपुर स्थित प्रयोगशाला और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी संस्थान ने संयुक्त रूप से शोध और अनुसंधान की प्रक्रिया शुरू की है। यह नई व्यवस्था विषम परिस्थितियों में राहत और बचाव कार्यों को अत्यधिक तीव्र और सटीक बनाने में मददगार साबित होगी।

    सुरक्षा और ट्रैकिंग प्रणाली को मजबूत करने के लिए तैयार की जा रही इस वर्दी में विशेष कंडक्टिव इंक की मदद से इलेक्ट्रॉनिक सर्किट प्रिंट किए जा रहे हैं। इन परिपथों को माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक चिप, जीपीएस मॉड्यूल और विभिन्न प्रकार के संवेदनशील सेंसरों से जोड़ा जा रहा है। पूरी तकनीकी व्यवस्था को कपड़े की परतों के भीतर ही इस तरह समाहित किया जाएगा कि सैनिक को अतिरिक्त वजन का अहसास न हो। इस पहनावे को मोड़ने, धुलाई करने या दैनिक उपयोग में लाने पर भी इसकी कार्यक्षमता और सर्किट की गुणवत्ता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा, जिससे सैनिक हर स्थिति में जुड़े रहेंगे।

    आपात स्थिति में यदि कोई जवान ग्लेशियर या भारी बर्फ की परतों के नीचे दब जाता है, तो वर्दी में मौजूद प्रणाली सक्रिय होकर बचाव दल को लगातार लोकेशन सिग्नल भेजती रहेगी। इससे रेस्क्यू टीम को विस्तृत और अनिश्चित इलाके में समय गंवाने के बजाय सीधे लक्षित स्थान तक पहुंचने में सफलता मिलेगी। पूर्व की घटनाओं में बर्फ में फंसे जवानों तक पहुंचने में कई बार काफी समय लग जाता था, लेकिन इस नई व्यवस्था से खोज अभियान की गति कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे जान-माल के नुकसान को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकेगा।

    तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार प्रारंभिक चरण में प्राथमिक ध्यान सटीक लोकेशन ट्रैकिंग पर केंद्रित किया गया है। हालांकि भविष्य के अनुसंधान चरण में इसमें शरीर का तापमान, हृदय गति और अन्य महत्वपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य संकेतकों को मापने की सुविधाएं जोड़ने की योजना भी शामिल है। सियाचिन, लद्दाख और पूर्वोत्तर के अति-ऊंचे क्षेत्रों में तैनात सैन्य बलों के लिए यह तकनीकी विकास एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। दोनों संस्थानों द्वारा इस तकनीक का प्रोटोटाइप परीक्षण सफल रहने के बाद इसे व्यापक स्तर पर अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।

  • हेलमेट न पहनने पर छह हजार रुपये का चालान कटने से आक्रोशित बिजली कर्मियों ने सरकारी बकाये को आधार बनाकर पुलिस परिसरों की बत्ती गुल की

    हेलमेट न पहनने पर छह हजार रुपये का चालान कटने से आक्रोशित बिजली कर्मियों ने सरकारी बकाये को आधार बनाकर पुलिस परिसरों की बत्ती गुल की

    नई दिल्ली । राजधानी के सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्र में यातायात पुलिस और विद्युत विभाग के कर्मियों के बीच हुआ विवाद अचानक एक बड़े प्रशासनिक संकट में बदल गया। समेसी उपकेंद्र में कार्यरत संविदा कर्मचारियों का वाहन जांच के दौरान अनुपालन न करने पर छह हजार रुपये का चालान काट दिया गया था। इस कार्रवाई से नाराज विद्युत कर्मचारियों ने विभागीय बकाये के दस्तावेजों की तुरंत समीक्षा की और प्रक्रियागत नियमों का हवाला देते हुए संबंधित पुलिस परिसरों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी। इस अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और कई घंटों तक थाने तथा आसपास की चौकियों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा।

    प्राप्त विवरण के अनुसार विद्युत उपकेंद्र पर तैनात कर्मचारी शाम के समय उच्च तनाव लाइन की नियमित गश्त के लिए निकले थे। इसी दौरान मार्ग पर चलाए जा रहे जांच अभियान के तहत ड्यूटी पर तैनात उपनिरीक्षक ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते वाहन चालक कर्मचारी का भारी जुर्माना जमा करने का चालान जारी कर दिया। कर्मचारियों ने विभागीय परिचय पत्र देने का प्रयास किया लेकिन नियमों का हवाला देते हुए चालान की प्रति सौंप दी गई। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद कर्मचारियों ने दफ्तर पहुंचकर राजस्व बकाये की सूची निकाली जिसमें स्थानीय थाने और दो पुलिस बूथों पर लाखों रुपये का बिजली बिल लंबित पाया गया।

    विभाग के पुराने बकाये के आंकड़ों का आधार बनाकर शाम के समय ही नगराम थाने के साथ-साथ दो प्रमुख पुलिस चौकियों का बिजली कनेक्शन काट दिया गया। थाने पर साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक और दोनों चौकियों पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये का राजस्व बिल बकाया दर्ज था। अचानक बिजली जाने और बैकअप व्यवस्था सीमित होने के कारण पुलिस परिसरों में अंधेरा छा गया। विभागीय कार्यों के निष्पादन में आ रही परेशानियों को देखते हुए पुलिस के उच्च अधिकारियों को तत्काल पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित उपनिरीक्षक को फटकार लगाई गई और जारी किए गए चालान को नियमानुसार वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद संबंधित कर्मियों ने अपने संपर्क माध्यम बंद कर दिए थे, जिससे संवाद स्थापित करने में अधिकारियों को काफी समय लगा। प्रशासनिक स्तर पर वार्ता के बाद विद्युत उपकेंद्र से दूसरी तकनीकी टीम को मौके पर भेजा गया, जिसने देर रात करीब साढ़े नौ बजे आपूर्ति बहाल कराई। लखनऊ में अंतर-विभागीय बकाये और चालान को लेकर इस तरह का तनाव पहले भी कई मौकों पर देखा गया है, जहां यातायात दंडात्मक कार्रवाई के जवाब में विद्युत बकाये पर तत्काल कनेक्शन काटने जैसे कदम उठाए गए। अधिकारियों ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के निर्देश जारी किए हैं।

  • इंदौर में दो दर्दनाक घटनाएं ई रिक्शा चालक ने इलाज के दौरान तोड़ा दम मासूम की मौत के मामले में ठेकेदार पर कसा शिकंजा

    इंदौर में दो दर्दनाक घटनाएं ई रिक्शा चालक ने इलाज के दौरान तोड़ा दम मासूम की मौत के मामले में ठेकेदार पर कसा शिकंजा


    इंदौर । इंदौर में दो अलग-अलग घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और निर्माण स्थलों पर बरती जाने वाली लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सड़क हादसे में घायल ई रिक्शा चालक ने कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद अस्पताल में दम तोड़ दिया तो दूसरी ओर चार साल के मासूम की निर्माणाधीन मकान की खुली पानी की टंकी में डूबकर हुई मौत के मामले में पुलिस ने ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। दोनों घटनाओं ने शहरवासियों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

    पहली घटना बाणगंगा थाना क्षेत्र की है जहां पंचम की फेल निवासी 38 वर्षीय कपिल रमनवाल बीते 24 जुलाई की शाम अपने ई रिक्शा से गुजर रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रहे दूसरे वाहन को बचाने के प्रयास में उनका ई रिक्शा असंतुलित होकर पलट गया। हादसा इतना गंभीर था कि कपिल के सिर हाथ और पैर में गहरी चोटें आईं। राहगीरों और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तत्काल एमवाय अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा था। कई दिनों तक इलाज के बाद सोमवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली।

    पुलिस ने बताया कि कपिल पिछले कई वर्षों से ई रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। उनके परिवार में माता पिता दो बच्चे और एक भाई हैं। उनकी असमय मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने मर्ग कायम कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें किसी अन्य वाहन की भी भूमिका थी।

    दूसरी घटना कनाड़िया क्षेत्र की है जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया। यहां चार वर्षीय रुद्र चौहान की निर्माणाधीन मकान परिसर में बनी खुली पानी की टंकी में गिरने से मौत हो गई थी। घटना 10 जुलाई की बताई गई है। पुलिस जांच में सामने आया कि बच्चे के पिता गोलू काम पर गए हुए थे जबकि मां पूजा घर पर दोनों बच्चों के साथ मौजूद थीं। खेलते खेलते रुद्र घर से निकलकर पास के निर्माणाधीन मकान तक पहुंच गया जहां सुरक्षा के कोई पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। खुली पानी की टंकी में गिरने से उसकी मौत हो गई।

    घटना के बाद परिजनों ने बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार राजेश पवैया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। जांच में यह सामने आया कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था जिससे यह दुखद हादसा हुआ।

    दोनों घटनाएं यह संकेत देती हैं कि सड़क पर सावधानी और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय लोगों ने भी मांग की है कि शहर में निर्माण स्थलों पर सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • MP: मंदसौर में फसल बीमा राशि बहुत कम मिलने से किसानों में आक्रोश… किया प्रदर्शन

    MP: मंदसौर में फसल बीमा राशि बहुत कम मिलने से किसानों में आक्रोश… किया प्रदर्शन


    मंदसौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मंदसौर जिले (Mandsaur district) की दलौदा तहसील में सोमवार शाम खरीफ 2025 की फसल बीमा राशि (Crop Insurance Amount) को लेकर किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि उन्हें फसल नुकसान के बदले मात्र 55 से 60 रुपए प्रति बीघा तक की बीमा राशि मिली है, जो बेहद कम है। सैकड़ों किसानों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर बीमा कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

    किसानों ने बताया कि उन्हें फसल नुकसान के बाद उचित मुआवजे की उम्मीद थी, लेकिन इतनी कम राशि मिलने से वे ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बीमा कंपनी के अधिकारियों के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए बीमा राशि का दोबारा मूल्यांकन कर उचित भुगतान करने की मांग की।

    प्रदर्शन के दौरान ग्राम बेहपुर के किसानों ने एक अलग ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदसौर जिले के अधिकांश गांवों में खरीफ 2025 की फसल बीमा राशि वितरित हो चुकी है, लेकिन बेहपुर के किसानों को अब तक कोई राशि नहीं मिली है।

    बेहपुर के किसानों के अनुसार, वर्ष 2025 में उनके गांव में खरीफ फसल को भारी नुकसान हुआ था। उनके आसपास के गांवों के किसानों को बीमा राशि मिल गई है, लेकिन बेहपुर के किसानों को इस लाभ से वंचित रखा गया है, जिससे उनमें गहरा आक्रोश है।

    मुख्यमंत्री के नाम दिए गए ज्ञापन में किसानों ने मांग की है कि बीमा कंपनी को निर्देश दिए जाएं कि ग्राम बेहपुर सहित जिन किसानों को अब तक फसल बीमा राशि नहीं मिली है, उन्हें जल्द से जल्द पात्रता के अनुसार भुगतान किया जाए। साथ ही, जिन किसानों को बेहद कम राशि मिली है, उनके मामलों की पुनः जांच कर उचित मुआवजा दिया जाए। इस संबंध में तहसीलदार बृजेश मालवीय ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनके ज्ञापन को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।

  • स्वच्छता के बाद अब अंगदान में भी देश का सिरमौर बना इंदौर 26वीं बार ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचा धड़कता दिल

    स्वच्छता के बाद अब अंगदान में भी देश का सिरमौर बना इंदौर 26वीं बार ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचा धड़कता दिल


    इंदौर । इंदौर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यह शहर केवल स्वच्छता के लिए ही नहीं बल्कि संवेदनशीलता और मानवता के लिए भी पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना चुका है। ब्रेन डेड डोनर गौरव दवे के परिवार ने कठिन समय में ऐसा निर्णय लिया जिसने कई लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी। गौरव का हृदय ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अहमदाबाद भेजा गया जहां जरूरतमंद मरीज को नया जीवन देने के लिए उसका प्रत्यारोपण किया जाएगा। इसके साथ ही इंदौर से 26वीं बार किसी ब्रेन डेड डोनर का हृदय दूसरे शहर भेजा गया है।

    अंगदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा मानी जाती है। किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन को खोने का दुख असहनीय होता है लेकिन उसी कठिन घड़ी में लिया गया अंगदान का निर्णय कई अन्य परिवारों की खुशियां वापस लौटा सकता है। यही कारण है कि अंगदान को महादान कहा जाता है। एक ब्रेन डेड व्यक्ति के हृदय लिवर किडनी कॉर्निया और अन्य अंग कई मरीजों को नया जीवन दे सकते हैं।

    इंदौर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान अंगदान को लेकर लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां ब्रेन डेथ और अंगदान को लेकर लोगों में संकोच और भ्रम रहता था वहीं अब जागरूकता लगातार बढ़ रही है। परिवार स्वयं आगे आकर अंगदान के लिए सहमति दे रहे हैं जिससे कई गंभीर मरीजों को जीवनदान मिल रहा है।

    अंगदान की इस पूरी प्रक्रिया में ग्रीन कॉरिडोर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जैसे ही अंगदान की स्वीकृति मिलती है प्रशासन पुलिस और चिकित्सा संस्थानों की टीम समय के खिलाफ दौड़ शुरू कर देती है। विशेष यातायात व्यवस्था बनाकर अंगों को कम से कम समय में दूसरे शहर के अस्पताल तक पहुंचाया जाता है ताकि प्रत्यारोपण सफल हो सके। हर बार सायरन की आवाज और खाली सड़कों के बीच दौड़ता एंबुलेंस केवल एक वाहन नहीं बल्कि किसी की नई जिंदगी की उम्मीद लेकर आगे बढ़ता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि हर हार्ट ट्रांसप्लांट केवल एक मेडिकल ऑपरेशन नहीं बल्कि दो परिवारों की भावनाओं से जुड़ी कहानी होती है। एक ओर जहां एक परिवार अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देता है वहीं दूसरी ओर वही धड़कन किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में जीवन की नई शुरुआत बन जाती है। यही अंगदान की सबसे बड़ी शक्ति है जो मृत्यु के बाद भी जीवन का संदेश देती है।

    अंगदान के क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञों के अनुसार इंदौर ने वर्ष 2015 से अब तक 26 सफल हार्ट डोनेशन किए हैं। इन सभी मामलों में पुरुष और महिला दोनों प्रकार के डोनर शामिल रहे हैं। हर सफल अंगदान यह संदेश देता है कि समाज में जागरूकता बढ़ रही है और लोग मानवता के इस सबसे बड़े कार्य को समझने लगे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि देश में आज भी ऐसे हजारों मरीज हैं जो केवल अंग उपलब्ध नहीं होने के कारण जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। यदि अधिक से अधिक लोग अंगदान के प्रति जागरूक होंगे तो अनेक परिवारों को नई जिंदगी मिल सकेगी। इंदौर ने लगातार सफल अंगदान के माध्यम से पूरे देश को यह संदेश दिया है कि इंसान की सबसे बड़ी विरासत उसकी संपत्ति नहीं बल्कि वह जीवन है जो वह अपने जाने के बाद भी किसी दूसरे को दे सकता है। यही भावना इंदौर को स्वच्छता के साथ साथ संवेदनाओं और मानवता की राजधानी भी बना रही है।