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  • पश्चिम एशिया संकट पर ईरान का पलटवार, अमेरिका-इजराइल को बताया जिम्‍मेदार, ट्रंप की सख्‍ती से बढ़ा तनाव

    पश्चिम एशिया संकट पर ईरान का पलटवार, अमेरिका-इजराइल को बताया जिम्‍मेदार, ट्रंप की सख्‍ती से बढ़ा तनाव

    वॉशिंगटन । पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई देशों में जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर असर पड़ा है। इस बीच ईरान ने इन हालात के लिए खुद को जिम्मेदार मानने से इनकार करते हुए अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई देशों में जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर असर पड़ा है। इस बीच ईरान ने इन हालात के लिए खुद को जिम्मेदार मानने से इनकार करते हुए अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि भारत समेत कई देशों में पैदा हुई मौजूदा स्थिति के लिए ईरान नहीं, बल्कि अमेरिका और इजराइल जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि यह संघर्ष ईरान पर थोपा गया है और देश इससे खुश नहीं है।

    “हमने नहीं शुरू की यह जंग”
    एक साक्षात्कार में बघाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका और इजराइल की भूमिका की जवाबदेही तय करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन देशों की कार्रवाई से ही मौजूदा हालात पैदा हुए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से प्रभावित देशों के सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले यह समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित था और हर देश के लिए खुला था।

    होर्मुज पर ईरान का दावा
    बघाई ने यह भी कहा कि ईरान ने जो भी कदम उठाए हैं, वे अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में हैं। उनका कहना है कि अमेरिका और इजराइल ने खाड़ी क्षेत्र के देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए किया, जिसके जवाब में ईरान को कार्रवाई करनी पड़ी। ईरान का कहना है कि वह खुद भी इस जलमार्ग पर निर्भर है, इसलिए उसकी प्राथमिकता इसकी सुरक्षा है।

    अमेरिका की सख्त नीति
    दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने वैश्विक बैंकों को ईरानी मनी लॉन्ड्रिंग और तेल नेटवर्क पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान शेल कंपनियों और क्रिप्टो नेटवर्क के जरिए प्रतिबंधित तेल का व्यापार कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ संघर्ष विराम “कमजोर स्थिति” में पहुंच चुका है और उन्होंने तेहरान के शांति प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।

    तेल कारोबार पर सख्ती
    अमेरिकी प्रशासन ने बैंकों से संदिग्ध कंपनियों की पहचान करने को कहा है, खासकर उन फर्मों पर नजर रखने के लिए जो अचानक बड़े वित्तीय लेनदेन कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2024 में ईरान से जुड़ी कंपनियों ने करीब 4 अरब डॉलर का तेल कारोबार किया है। अब अमेरिका इराक, यूएई और ओमान जैसे देशों पर भी दबाव बना रहा है ताकि ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

  • शुभेंदु अधिकारी के PA की हत्‍या के आरोपी राज को लेकर उनकी मां का भावुक बयान, गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

    शुभेंदु अधिकारी के PA की हत्‍या के आरोपी राज को लेकर उनकी मां का भावुक बयान, गिरफ्तारी पर उठाए सवाल


    बलिया। कोलकाता में बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) की हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए बलिया निवासी राज सिंह को लेकर नया मोड़ सामने आया है। आरोपी की मां जामवंती सिंह ने बेटे के समर्थन में सामने आकर पूरी घटना का क्रम बताया और उसकी बेगुनाही का दावा किया है।

    उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनका बेटा कई दिनों तक उनके साथ ही था और ऐसे में वह किसी वारदात में शामिल कैसे हो सकता है। मां का कहना है कि पूरा परिवार लखनऊ में एक शादी समारोह में शामिल होने गया था, जिसके बाद धार्मिक यात्रा भी की गई।

    शादी से लेकर अयोध्या दर्शन तक का सफर
    जामवंती सिंह के मुताबिक, 7 तारीख को राज लखनऊ में एक एमएलसी की बेटी की शादी में शामिल होने गया था। इसी दौरान परिवार ने भी साथ चलने की इच्छा जताई। इसके बाद पूरा परिवार राज, ड्राइवर, एक दोस्त, एक अन्य व्यक्ति और स्वयं मां लखनऊ पहुंचा और एक गेस्ट हाउस में रुका।

    रात में राज शादी समारोह में गया और बाद में वापस लौट आया। अगले दिन सुबह सभी लोग अंबेडकर नगर स्थित किछौछा शरीफ पहुंचे, जहां उन्होंने दरगाह पर चादर चढ़ाई। इसके बाद परिवार अयोध्या गया और वहां राम मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन किए। मां ने कहा कि पूरे दिन की यात्रा के बाद सभी ने रास्ते में भोजन किया और सामान्य रूप से समय बिताया।

    अचानक गिरफ्तारी का आरोप
    राज की मां का कहना है कि जब वे अयोध्या से लौट रहे थे, तभी उनकी गाड़ी को पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद बेटे को हिरासत में ले लिया गया और परिवार को महिला थाने में बैठा दिया गया। उनके अनुसार, पूरी रात उन्हें मामले की जानकारी नहीं दी गई। अगले दिन थोड़ी देर के लिए बेटे से मुलाकात कराई गई, जिसके बाद पता चला कि कोलकाता पुलिस उसे अपने साथ ले जा रही है। मां ने रोते हुए कहा कि उन्हें अब तक नहीं पता कि उनका बेटा कहां है और उसे किस आधार पर ले जाया गया।

    CCTV और मोबाइल रिकॉर्ड का दावा
    जामवंती सिंह ने दावा किया कि उनके पास बेटे की मौजूदगी के कई सबूत हैं। उन्होंने कहा कि घर के CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड से यह साबित हो सकता है कि राज लगातार परिवार के साथ था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़े तो शादी समारोह, बाजार और यात्रा के सभी वीडियो और सबूत जांच एजेंसियों को दिए जा सकते हैं।

    आपराधिक रिकार्ड
    राज सिंह की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें वह यूपी सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह, बीजेपी विधायक प्रिंसू सिंह और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ नजर आ रहा है। पुलिस के अनुसार, राज का आपराधिक इतिहास भी रहा है। वर्ष 2020 में उस पर एक अंडा व्यवसायी की हत्या का आरोप लगा था और वह फिलहाल जमानत पर बाहर था।

    वहीं राज की मां ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सच सामने आना चाहिए और बिना ठोस सबूत के किसी को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।

  • अर्थव्यवस्था को बचाने की कवायद… जानें सोना और तेल के इस्तेमाल में कटौती की अपील का क्या है मकसद?

    अर्थव्यवस्था को बचाने की कवायद… जानें सोना और तेल के इस्तेमाल में कटौती की अपील का क्या है मकसद?


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में संघर्ष से वैश्विक आपूर्ति शृंखला (Global Supply Chain) में आई रुकावट और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) सुरक्षित रखने के लिए सोने, पेट्रोल-डीजल और खाने के तेल के इस्तेमाल में कटौती की पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अपील पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अपील का मुख्य मकसद डॉलर की मांग कम करना, रुपये को मजबूत करना और अर्थव्यवस्था को संभावित झटकों से बचाना है। विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ती आयात लागत और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव से दबाव लगातार बढ़ रहा है। भारत तेल का शुद्ध आयातक है और तेल की 89 फीसदी जरूरतें बाहरी स्रोतों से पूरी करता है और इसके लिए उसे अब ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।


    6 अरब डॉलर का सोना हर माह खरीदता है भारत

    भारत सोने का उत्पादक नहीं है। पिछले वर्ष अकेले सोने पर करीब 72 अरब डॉलर खर्च किए गए। यानी, हर माह छह अरब डॉलर। उपभोक्ता आयात और एक आरक्षित संपत्ति के रूप में सोने की दोहरी भूमिका स्थिति को और जटिल बना देती है। आरबीआई तेजी से सोना जमा कर रहा है। एक साल में उसने लंदन से 168 टन सोना खरीदा है, जिससे मार्च तक उसके पास 880 टन सोना हो गया है। भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की 16% हिस्सेदारी है, जो पिछले वर्ष के 10% से अधिक है। हालांकि, घरेलू सोने की खरीद का आर्थिक असर अलग होता है।

    आरबीआई के रिजर्व प्रबंधन कार्यों के विपरीत आयातित सोने की उपभोक्ता मांग अर्थव्यवस्था में डॉलर के प्रवाह को सीधे तौर पर बढ़ा देती है। इसलिए, बड़े पैमाने पर सोने के आयात से चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ सकता है और डॉलर की मांग बढ़ सकती है। इससे समय के साथ रुपया कमजोर पड़ सकता है। जैसे-जैसे डॉलर बाहर जाता है, रुपया कमजोर होता जाता है, सोना और भी महंगा हो जाता है। इससे दुष्चक्र पैदा हो जाता है, जिसमें भारतीय उपभोक्ता सोने के लिए अधिक रुपये चुकाता है, क्योंकि सोने की पिछली खरीद ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया होता है।


    आयात में बढ़ोतरी से बढ़ रहा दबाव

    थिंक टैंक वैश्विक व्यापार अनुसंधान पहल (जीटीआरआई) ने पीएम की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि सोने के आयात में हो रही भारी बढ़ोतरी विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल रही है और व्यापार असंतुलन को बढ़ा रही है। जीटीआरआई के अनुसार, भारत के गोल्ड बार का आयात 2022 में 36.5 अरब डॉलर था, जो 2025 में बढ़कर 58.9 अरब डॉलर हो गया। थिंक टैंक ने सरकार से आग्रह किया है कि विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रखने के लिए, भारत-यूएई मुक्त व्यापार समझौते के तहत कीमती धातुओं पर दी जाने वाली रियायतों की समीक्षा करे। हाल में सोने के आयात में हुई बढ़ोतरी में इसकी बड़ी भूमिका रही है। अमीरात से 2022 में जहां गोल्ड बार का आयात 2.9 अरब डॉलर था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 16.5 अरब डॉलर हो गया।


    89% तेल का आयात करता है भारत

    तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भी डॉलर के बाहर जाने में वृद्धि के रूप में सामने आता है। हालांकि पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रखी गई हैं, पर इसकी भरपाई सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने की है। इन कंपनियों को खुदरा कीमत और आयात कीमत के बीच के अंतर का सामना करना पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उछाल के कारण इन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) को एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर भी नुकसान हो रहा है, जिससे उन पर दबाव और बढ़ गया है। इसे देखते हुए कि सरकार ने ओएमसी को इन नुकसानों की भरपाई करने की कोई योजना नहीं होने का संकेत दिया है, कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद है और कंपनियां खुद भी इस तरह के बदलाव के लिए जोर दे रही हैं। हालांकि, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कुछ ही दिनों में पूरी आपूर्ति शृंखला में फैल जाती है।


    खाद्य तेल : विकल्प सीमित थाली की बढ़ती जा रही लागत

    भारत खाने के तेल की जरूरतों के लिए आयात पर बहुत निर्भर है, खासकर इंडोनेशिया और मलयेशिया से पाम तेल तथा रूस और यूक्रेन से सूरजमुखी का तेल मंगाता है। पीएम मोदी ने कहा था कि यदि हर घर खाने के तेल का इस्तेमाल कम कर दे, तो राष्ट्रीय खजाने के साथ परिवार की सेहत भी सुधरेगी। सोने की खरीद टाला जा सकता है या सैद्धांतिक रूप से ईंधन की बचत की जा सकती है, लेकिन खाने के तेल के विकल्प सीमित हैं। यह रोजमर्रा की आवश्यक चीज है। रुपये की गिरावट से यह समस्या और भी बढ़ गई है। कमजोर रुपया आयातित तेल के हर लीटर की कीमत बढ़ा देता है और खाने के तेल की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी आपूर्ति शृंखला के जरिये तेजी से उपभोक्ता की थाली तक पहुंच जाती है। घरेलू स्तर पर उपलब्ध सरसों के तेल जैसे विकल्प मौजूद हैं, लेकिन इनका उत्पादन इतनी तेजी से नहीं बढ़ाया जा सकता कि ये आयात की जगह ले सकें।


    रासायनिक उर्वरक : बढ़ रहीं कीमतें, खाने-पीने की वस्तुओं पर असर

    प. एशिया आपूर्ति मार्गों में भारी रुकावट की वजह से आयात किए गए यूरिया की कीमत फरवरी में 508 डॉलर से बढ़कर 935 डॉलर प्रति टन हो गई है। इसी तरह, डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) की कीमत पिछले साल के 680 डॉलर से बढ़कर 925 डॉलर प्रति टन होने की उम्मीद है। अमोनिया की कीमतें भी 435 डॉलर से बढ़कर 850–900 डॉलर प्रति टन हो गई हैं, जो दोगुनी से भी अधिक हैं। यूरिया आयात का लगभग 75% हिस्सा खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों से आता है।

    खाद के घरेलू उत्पादन को भी झटका लगा है। खाड़ी से एलएनजी की आपूर्ति में रुकावटों के कारण मार्च में यूरिया का उत्पादन 25 लाख टन की सामान्य मासिक दर के मुकाबले घटकर 15 लाख टन रह गया। जून में स्टॉक की पर्याप्त भरपाई नहीं हुई, तो खेती में इस्तेमाल चीजों की बढ़ी लागत का असर खाद्य वस्तुओं पर पड़ेगा।


    यूरिया आयात का 75% हिस्सा जीसीसी से आता है

    घरेलू यूरिया प्लांट फीडस्टॉक के तौर पर एलएनजी पर निर्भर रहते हैं, जिसका 60% से अधिक हिस्सा कतर, यूएई व ओमान से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात किया जाता है। इस मार्ग में बाधा ने उर्वरक आयात को प्रभावित किया। खरीफ मौसम के लिए 194 लाख टन यूरिया की जरूरत है, जबकि अप्रैल में स्टॉक केवल 55 लाख टन था।

  • Cannes Queen ऐश्वर्या राय ब्रांड वीडियो से गायब, आलिया भट्ट की एंट्री पर मचा बवाल

    Cannes Queen ऐश्वर्या राय ब्रांड वीडियो से गायब, आलिया भट्ट की एंट्री पर मचा बवाल

    नई दिल्ली  कान्स फिल्म फेस्टिवल हमेशा से भारत के लिए खास रहा है और इसमें ऐश्वर्या राय बच्चन को ‘कान्स क्वीन’ कहा जाता है। साल 2004 से वह लगातार लोरियल पेरिस की ग्लोबल एंबेसडर के रूप में रेड कार्पेट पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराती रही हैं। लेकिन इस बार फेस्टिवल से पहले ब्रांड द्वारा जारी एक प्रमोशनल वीडियो में उनकी गैरमौजूदगी ने फैंस को हैरान कर दिया है।

    वीडियो में आलिया भट्ट की मौजूदगी, ऐश्वर्या गायब
    इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो में कान्स के मशहूर मार्टिनेज होटल की झलक दिखाई गई, जहां ब्रांड से जुड़ी कई इंटरनेशनल और भारतीय सेलिब्रिटीज के पोस्टर नजर आए। इनमें आलिया भट्ट का पोस्टर भी शामिल था।
    हालांकि, लंबे समय से कान्स की पहचान बन चुकी ऐश्वर्या राय बच्चन का कोई पोस्टर या जिक्र नहीं दिखा, जिससे फैंस काफी निराश हो गए।

    सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्स
    वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर फैंस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि ऐश्वर्या राय को क्यों शामिल नहीं किया गया। एक यूजर ने लिखा कि “ऐश्वर्या को कोई रिप्लेस नहीं कर सकता।”
    दूसरे ने पूछा “कान्स की असली क्वीन कहां हैं? वहीं कई फैंस ने ब्रांड पर भारत में ऐश्वर्या की लोकप्रियता को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

     ऐश्वर्या राय और कान्स का पुराना रिश्ता
    ऐश्वर्या राय बच्चन लंबे समय से कान्स रेड कार्पेट की सबसे चर्चित भारतीय चेहरों में से एक रही हैं। उनके लुक्स, गाउन स्टाइल और बोल्ड मेकअप हर साल सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे हैं। उनकी उपस्थिति को अक्सर भारत की ग्लोबल फैशन पहचान से जोड़ा जाता है।

     ब्रांड की चुप्पी बनी चर्चा का विष
    अब तक लोरियल पेरिस की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसी वजह से फैंस की नाराजगी और सवाल और बढ़ते जा रहे हैं।

     

    =कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 से पहले यह विवाद सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। जहां एक तरफ आलिया भट्ट की मौजूदगी को लेकर चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐश्वर्या राय बच्चन की गैरमौजूदगी ने फैंस को निराश कर दिया है।

  • तमिलनाडुः CM विजय का एक और बड़ा एक्शन.. मंदिरों और स्कूलों के आसपास के शराब ठेके तत्काल बंद करने के आदेश

    तमिलनाडुः CM विजय का एक और बड़ा एक्शन.. मंदिरों और स्कूलों के आसपास के शराब ठेके तत्काल बंद करने के आदेश


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद की शपथ लेते ही सी जोसेफ विजय (C Joseph Vijay) ऐक्शन मोड में हैं। उन्होंने बड़ा आदेश देते हुए कहा है कि पूजा के स्थलों, स्कूलों और बस अड्डों के आसपास 500 मीटर के दायरे में सभी शराब की सरकारी दुकानें तत्काल बंद कर दी जाएं। सख्त आदेश जारी करते हुए विजय ने कहा है कि यह फैसला दो हफ्ते के अंदर ही लागू होगा।

    बता दें कि मुख्यमंत्री बनते ही मंच पर ही उन्होंने अपने वादों को पूरा करने के लिए तीन फैसलों पर साइन कर दिए थे। पहला आदेश 200 यूनिट फ्री बिजली देने को लेकर था। दूसरा आदेश महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने और तीसरा नशे की सस्या से निपटने के लिए हर जिले में विशेष फोर्स का गठन करना था।

    सोमवार को ही सीएम विजय समेत सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने विधानसभा में शपथ ली है। सबसे पहले मुख्यमंत्री विजय ने विधायक के रूप में शपथ ली और मंत्रियों में एन आनंद, आधव अर्जुन, केजी अरुणराज, केए सेनगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, आर निर्मलकुमार, राजमोहन और टीके प्रभु ने भी शपथ ली। इसके बाद द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) विधायक दल के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन, पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और ओ. पनीरसेल्वम तथा अन्य विधायकों ने पद की शपथ ली।

    विजय, उदयनिधि और पनीरसेल्वम उन विधायकों में शामिल थे जिन्होंने “पूर्ण निष्ठा” के नाम पर शपथ ली। पलानीस्वामी और पीएमके की सौम्या अंबुमणि उन विधायकों में शामिल थीं, जिन्होंने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। महिला मंत्री कीर्तना शुरुआत में अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र पेश नहीं कर सकीं और उन्हें इसे लाने के लिए वापस जाना पड़ा।

    जब विधानसभा के प्रधान सचिव के. श्रीनिवासन ने माइक पर कीर्तना का नाम शपथ लेने के लिए पुकारा, तो वह मुख्यमंत्री की कुर्सी के सामने बने मंच की ओर बढ़ीं। विधानसभा की परंपरा के अनुसार, शपथ लेने वाले विधायक कार्यवाहक अध्यक्ष की ओर मुख करके खड़े होते हैं। जैसे ही कीर्तना मंच के पास पहुंचीं, सचिव श्रीनिवासन ने हाथ उठाकर उनसे निर्वाचन प्रमाण-पत्र मांगा। हालांकि, वह प्रमाण-पत्र पेश नहीं कर सकीं। श्रीनिवासन को उन्होंने क्या जवाब दिया, यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है।

    बाद में, कीर्तना प्रमाण-पत्र सदन में लेकर आईं और अधिकारी को सौंप दिया तथा ईश्वर के नाम पर शपथ ली। वेलाचेरी से ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (टीवीके) के विधायक आर. कुमार जब अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र जमा करने के बाद शपथ लेने ही वाले थे, तभी अधिकारी श्रीनिवासन ने उन्हें रोक दिया। श्रीनिवासन ने कुमार का ध्यान इस ओर दिलाया कि उनके द्वारा जमा किए गए प्रमाण-पत्र पर किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज है।

  • पश्चिम एशिया संकट के बीच 15 मई को यूरोप और यूएई के टूर पर जाएंगे PM मोदी, इन मुद्दों पर रहेगा फोकस

    पश्चिम एशिया संकट के बीच 15 मई को यूरोप और यूएई के टूर पर जाएंगे PM मोदी, इन मुद्दों पर रहेगा फोकस


    नई दिल्ली।
    ईरान और अमेरिका (Iran and America) में तनाव के बीच दुनियाभर में पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) 15 से 20 मई तक यूरोप और यूएई की यात्रा पर जाने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक इस यात्रा के दौरन वह ऊर्जा सहयोग और व्यापार को बढ़ाने को लेकर कई समझौते कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) यूएई (UAE) और इटली (Italy) में रुकेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी , नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे का भी दौरा करेंगे। वह 15 मई को सबसे पहले यूएई पहुचेंगे और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे।


    किन मुद्दों पर होगा फोकस

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी इस यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर वैश्विक नेताओं से चर्चा करेंगे। इसके अलावा यूरोप के देशों के साथ सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक साझेदारी को बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। जानकारी के मुताबिक यात्रा के दौरान सभी देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर भी चर्चा की जाएगी।


    यूएई के बाद की यात्रा

    बता दें कि यूएई भारत का बड़ा एनर्जी पार्टनर है। इसके अलावा भी निवेश के मामले में वह भारत का सातवां सबसे बड़ा स्रोत है। यहां 45 लाख से ज्यादा भारतीय भी रहते हैं। यूएई के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड पहुंचेंगे और पीएम रॉब जेटेन से मुलकात करेंगे। वह 17 मई तक नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इसके बाद वह स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टनर्स के न्योते पर 17 से 18 मई तक के लिए स्वीडन के गोथेनबर्ग पहुंचेंगे। चौथे चरण में प्रधानमंत्री नॉर्वे पहुंचेंगे और भारत-नॉर्डिक शिखऱ सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। वर्ष 1983 के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली यात्रा होगी।

    इस मुद्दे को लेकर हो सकती है अहम बात
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड दूसरी बार जा रहे हैं। यहां वह पीएम विलियम- अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मिलेंगे। पीएम मोदी इस यात्रा के दौरान रक्षा, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और नवाचार के मामलों को आगे बढ़ाने के लिए चर्चा करेंगे। यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली जाएंगे और यहां प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात करेंगे।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा रक्षा, सुरक्षा, नवाचार, हरित हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और जल पर रणनीतिक साझेदारी सहित विभिन्न क्षेत्रों में उच्च स्तरीय बैठकों और घनिष्ठ सहयोग की गति को और मजबूत करेगी। मंत्रालय ने कहा कि उनकी यह यात्रा बहुआयामी साझेदारी को और गहरा और विस्तारित करने का अवसर प्रदान करेगी। अपनी वार्ता में दोनों पक्ष हरित परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), उभरती प्रौद्योगिकियों, स्टार्टअप, सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं, रक्षा, अंतरिक्ष, लोगों का लोगों से संबंध और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

  • Cannes Queen’ ऐश्वर्या राय ब्रांड वीडियो से गायब, फैंस भड़के – आलिया भट्ट की मौजूदगी पर चर्चा तेज

    Cannes Queen’ ऐश्वर्या राय ब्रांड वीडियो से गायब, फैंस भड़के – आलिया भट्ट की मौजूदगी पर चर्चा तेज


    नई दिल्ली  कान्स फिल्म फेस्टिवल हमेशा से भारत के लिए खास रहा है और इसमें ऐश्वर्या राय बच्चन को ‘कान्स क्वीन’ कहा जाता है। साल 2004 से वह लगातार लोरियल पेरिस की ग्लोबल एंबेसडर के रूप में रेड कार्पेट पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराती रही हैं। लेकिन इस बार फेस्टिवल से पहले ब्रांड द्वारा जारी एक प्रमोशनल वीडियो में उनकी गैरमौजूदगी ने फैंस को हैरान कर दिया है।

    वीडियो में आलिया भट्ट की मौजूदगी, ऐश्वर्या गायब
    इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो में कान्स के मशहूर मार्टिनेज होटल की झलक दिखाई गई, जहां ब्रांड से जुड़ी कई इंटरनेशनल और भारतीय सेलिब्रिटीज के पोस्टर नजर आए। इनमें आलिया भट्ट का पोस्टर भी शामिल था।
    हालांकि, लंबे समय से कान्स की पहचान बन चुकी ऐश्वर्या राय बच्चन का कोई पोस्टर या जिक्र नहीं दिखा, जिससे फैंस काफी निराश हो गए।

    सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्स
    वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर फैंस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि ऐश्वर्या राय को क्यों शामिल नहीं किया गया। एक यूजर ने लिखा कि “ऐश्वर्या को कोई रिप्लेस नहीं कर सकता।”
    दूसरे ने पूछा “कान्स की असली क्वीन कहां हैं? वहीं कई फैंस ने ब्रांड पर भारत में ऐश्वर्या की लोकप्रियता को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

     ऐश्वर्या राय और कान्स का पुराना रिश्ता
    ऐश्वर्या राय बच्चन लंबे समय से कान्स रेड कार्पेट की सबसे चर्चित भारतीय चेहरों में से एक रही हैं। उनके लुक्स, गाउन स्टाइल और बोल्ड मेकअप हर साल सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे हैं। उनकी उपस्थिति को अक्सर भारत की ग्लोबल फैशन पहचान से जोड़ा जाता है।

     ब्रांड की चुप्पी बनी चर्चा का विष
    अब तक लोरियल पेरिस की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसी वजह से फैंस की नाराजगी और सवाल और बढ़ते जा रहे हैं।

    कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 से पहले यह विवाद सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। जहां एक तरफ आलिया भट्ट की मौजूदगी को लेकर चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐश्वर्या राय बच्चन की गैरमौजूदगी ने फैंस को निराश कर दिया है।

  • ब्रिक्स बैठक में होर्मुज स्ट्रेट भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर चर्चा करेंगे भारत और ईरान

    ब्रिक्स बैठक में होर्मुज स्ट्रेट भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर चर्चा करेंगे भारत और ईरान


    नई दिल्ली।
    भारत और ईरान (India and Iran) इस सप्ताह नई दिल्ली (New Delhi) में हो रहे ब्रिक्स शेरपा (BRICS Sherpa) और विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर चर्चा करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल युद्ध के बाद से भारतीय टैंकरों को इस रास्ते से गुजरने में भारी दिक्कतें आ रही हैं। द्विपक्षीय वार्ताएं अब तक पूरी तरह सफल नहीं हुई हैं, जिसके चलते भारत अब ब्रिक्स मंच का उपयोग करके मुद्दे का समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है। इस स्ट्रेट से भारत का लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल और 90 प्रतिशत एलपीजी आयात होता है।

    फिलहाल 13 भारतीय जहाज अभी भी फंसे हुए हैं, जबकि 11 जहाजों को कूटनीतिक प्रयासों से निकाला जा चुका है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की कि ईरानी अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है। इस संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ब्रेंट क्रूड का भाव 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि डब्ल्यूटीआई 100 डॉलर के करीब है।


    भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर स्थिति

    सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि अगर हार्मुज से शिपिंग कुछ हफ्तों से ज्यादा समय तक बाधित रही तो बाजार 2027 तक सामान्य नहीं होंगे। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर है। ब्रिक्स बैठक में ईरान के उप विदेश मंत्री भाग लेंगे, जो विदेश मंत्रियों की बैठक में भी प्रतिनिधित्व कर सकते हैं अगर विदेश मंत्री सेय्यद अब्बास अरागची नहीं पहुंच पाए। यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार ईरान और UAE के उप विदेश मंत्री एक ही मंच पर होंगे, जहां पश्चिम एशिया के मुद्दे पर सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।

    ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच शांति वार्ता भी विफल हो गई है। ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। ईरान ने कुछ यूरेनियम तीसरे देश को सौंपने की पेशकश की लेकिन परमाणु सुविधाओं को तोड़ने से इनकार कर दिया। इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को पूरी तरह समाप्त किए बिना युद्ध समाप्त नहीं होगा। इस बीच पर्सियन गल्फ में जहाजों पर ड्रोन हमले की घटनाएं भी हुई हैं, जिससे शिपिंग कंपनियां और अधिक सतर्क हो गई हैं। भारत इस पूरे संकट में अपने नागरिकों और आर्थिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कूटनीति चला रहा है।

  • बंगाल में BJP सरकार का एक्शन.. ममता शासन के कई फैसले पर चली कलम, कई अफसरों को किया बाहर

    बंगाल में BJP सरकार का एक्शन.. ममता शासन के कई फैसले पर चली कलम, कई अफसरों को किया बाहर


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद नई बीजेपी सरकार (New BJP Government) ने तेज और आक्रामक शुरुआत की है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Shubhendu Adhikari) की पहली कैबिनेट बैठक में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) शासनकाल के कई फैसलों पर CM अधिकारी की कलम तेजी से चली. ममता सरकार द्वारा नियुक्त कई रिटायर्ड IAS-IPS अधिकारियों को सरकारी दफ्तरों से बाहर करने का फैसला लिया गया, जबकि पुरानी नीतियों को पलटते हुए नई दिशा दी गई।

    एक अहम फैसले में अधिकारी सरकार ने BSF को बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए 600 एकड़ जमीन तुरंत ट्रांसफर करने का फैसला किया है. इसके अलावा सरकार ने जनगणना शुरू करने, ममता काल की IAS-IPS ट्रेनिंग नीति को बदलने और भारतीय न्याय संहिता (BNS) को तुरंत लागू करने जैसे बड़े फैसले लिए।

    नए CM शुभेंदु अधिकारी ने साफ संदेश दिया कि अफसरों को ‘येस मैन’ बनने की जरूरत नहीं है और वहीं करें जो ‘राष्ट्र और राज्य हित’ के लिए सर्वोपरि हो. दरअसल ममता राज के ‘मोहरों’ पर चल रही CM अधिकारी की कलम अब बदलाव की नई इबारत लिख रही है।

    मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सुशासन, सुरक्षा और डबल इंजन सरकार का नया सफर देश भर के दूसरे BJP शासित राज्यों में चले विकास के उसी रास्ते पर आगे बढ़ेगा।


    बंगाल सरकार ने सोमवार को पहली कैबिनेट में क्या क्या फैसले लिए.

    1. बंगाल में आयुष्मान भारत योजना लागू की जाएगी. इसके साथ ही कई अन्य केंद्रीय कल्याणकारी परियोजनाएं भी इसमें शामिल होंगी. जैसे पीएम जन आरोग्य योजना, किसानों के लिए फसल बीमा देने वाली पीएम फसल बीमा योजना, सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करने के लिए पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम एसएचआरआई) योजना, कारीगरों और शिल्पकारों की मदद करने वाली पीएम विश्वकर्मा योजना, महिलाओं की शिक्षा और सशक्तीकरण के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना और सब्सिडी वाले रसोई गैस कनेक्शन के लिए उज्ज्वला 3.0 योजना. ममता बनर्जी ने इन योजनाओं को राज्य में लागू नहीं किया था।

    2. आज से बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लागू हो जाएगा. सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने संविधान का उल्लंघन करते हुए बीएनएस लागू नहीं किया था. आईपीसी और सीआरपीसी पर ही काम हो रहा था।

    3. भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए केंद्र को जमीन का ट्रांसफर प्रोसेस तुरंत शुरू होगा. कैबिनेट ने चीफ सेक्रेटरी और राज्य के लैंड और लैंड रेवेन्यू डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी को अगले 45 दिनों के अंदर प्रोसेस पूरा करने का अधिकार दिया है.”

    4. बीजेपी के जिन 321 कार्यकर्ताओं ने बंगाल में जान गंवाई, उनके परिवारों की पूरी जिम्मेदारी सरकार लेगी. बीजेपी का दावा है कि बंगाल में ममता सरकार के दौरान उसके 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा में हत्या हुई।

    5.पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य सरकार के अधीन गैर-सांविधिक निकायों, बोर्डों, संगठनों और सार्वजनिक उपक्रमों में नियुक्त सभी मनोनीत सदस्यों, निदेशकों और अध्यक्षों के कार्यकाल को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्देश जारी किया. इसके साथ ही राज्य सरकार ने 60 वर्ष की सामान्य सेवानिवृत्ति आयु के बाद एक्सटेंशन या री-अपॉइंटमेंट पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है।

    6. विधानसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर रहे मनोज अग्रवाल को शुभेंदु अधिकारी की BJP सरकार में राज्य का नया चीफ सेक्रेटरी बनाया गया है. सोमवार को जारी एक ऑफिशियल ऑर्डर के मुताबिक वर्तमान चीफ सेक्रेटरी दुष्यंत नरियाला को नई दिल्ली में प्रिंसिपल रेजिडेंट कमिश्नर नियुक्त किया गया है. इसके अलावा एडमिनिस्ट्रेटिव सुधारों के तहत, राज्य के IAS अधिकारी अब दूसरे राज्यों की तरह केंद्र सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेंगे।

    7. पश्चिम बंगाल सरकार ने 1 जून से बसों में महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा की शुरुआत की है. ये बीजेपी के चुनावी वादे का हिस्सा था।

    8. CM शुभेंदु ने सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में बैठने वाले उम्मीदवारों के लिए ऊपरी उम्र सीमा में पांच साल की छूट की घोषणा की है. इस घोषणा से अब जनरल कैटेगरी के आवेदकों को मौजूदा उम्र सीमा 40 से 45 साल तक की छूट मिलेगी, और SC, ST और OBC कैटेगरी के लोग मौजूदा उम्र सीमा 43 से 48 साल तक नौकरियों के लिए अप्लाई कर सकेंगे।

    9. अधिकारी सरकार ने पश्चिम बंगाल में तुरंत जनगणना शुरू करने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार जनगणना प्रक्रिया के बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय के 16 जून, 2025 के निर्देश को लागू करने में नाकाम रही थी. मौजूदा सरकार ने पेंडिंग एडमिनिस्ट्रेटिव सर्कुलर को तुरंत लागू कर दिया है।

    10. सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि उनकी सरकार ममता शासन की किसी भी योजना को बंद नहीं करेगी. हालांकि मुख्यमंत्री ने कहा कि हम उन लोगों की पहचान करेंगे और उन्हें हटाएंगे जो इस देश के लोगों के लिए बनी वेलफेयर मदद पाने के हकदार नहीं हैं, जैसे मरे हुए लोग और गैर-भारतीय।

    सीएम अधिकारी ने कहा कि यह सरकार घमंड पर नहीं चलेगी, बल्कि यह सरकार सिद्धांतों पर चलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “डर बाहर, भरोसा अंदर” के संदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नई सरकार पश्चिम बंगाल के लोगों की सुरक्षा, भरोसा और विकास पक्का करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • मिनी गोवा का एहसास अब उत्तर प्रदेश में, गढ़मुक्तेश्वर बना नया हॉलिडे स्पॉट

    मिनी गोवा का एहसास अब उत्तर प्रदेश में, गढ़मुक्तेश्वर बना नया हॉलिडे स्पॉट


    नई दिल्ली। अगर आप हर बार गोवा या मनाली घूमने का सपना देखते हैं, लेकिन समय और बजट की कमी आड़े आ जाती है, तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में स्थित गढ़मुक्तेश्वर इन दिनों लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसे अब लोग प्यार से “यूपी का मिनी गोवा” कहने लगे हैं। दिल्ली-एनसीआर से कुछ ही घंटों की दूरी पर मौजूद यह जगह वीकेंड ट्रिप के लिए परफेक्ट बनती जा रही है। यहां पहुंचते ही गंगा किनारे फैली रेत और शांत बहता पानी लोगों को किसी बीच का एहसास कराता है।

     रेत, पानी और सुकून – बीच जैसा अनुभव
    गढ़मुक्तेश्वर में गंगा नदी के किनारे फैली सफेद रेत और ठंडी हवा पर्यटकों को आकर्षित करती है। खासकर शाम के समय यहां का नजारा बेहद खूबसूरत हो जाता है। लोग घंटों बैठकर पानी को निहारते हैं, फोटो-वीडियो बनाते हैं और नाव की सवारी का आनंद लेते हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यहां की तस्वीरें और रील्स तेजी से वायरल हो रही हैं।

     दिल्ली-एनसीआर वालों के लिए परफेक्ट वीकेंड स्पॉट
    दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद से यहां आना बेहद आसान है। कम दूरी और कम खर्च की वजह से यह जगह युवाओं और फैमिली ट्रैवलर्स दोनों की पसंद बनती जा रही है। लोग सुबह निकलकर शाम तक वापस लौट आते हैं, जिससे यह एक “क्विक गेटवे” के रूप में मशहूर हो रहा है।

     धार्मिक महत्व भी है खास
    गढ़मुक्तेश्वर सिर्फ घूमने की जगह नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक महत्व भी गहरा है। यहां स्थित गंगा घाट और प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र हैं। रोजाना बड़ी संख्या में लोग गंगा स्नान और पूजा के लिए यहां पहुंचते हैं।
    शाम की गंगा आरती यहां का सबसे आकर्षक दृश्य होता है, जहां दीपों की रोशनी और घंटियों की आवाज माहौल को दिव्य बना देती है।

    सोशल मीडिया ने बढ़ाई लोकप्रियता
    इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल हो रहे वीडियो ने गढ़मुक्तेश्वर को नई पहचान दी है। ट्रैवल ब्लॉगर्स इसे “Hidden Beach” और “Mini Goa” जैसे नामों से प्रमोट कर रहे हैं। बारिश के मौसम में यहां का नजारा और भी ज्यादा आकर्षक हो जाता है।

     मेले और त्योहारों में लगता है विशाल मेला
    कार्तिक पूर्णिमा और गंगा मेले के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। उस समय पूरा इलाका रोशनी, भीड़ और आस्था से भर जाता है। घाटों पर अलग ही उत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है।

     कम बजट में बेहतरीन अनुभव
    आज के समय में जहां ट्रिप्स महंगे होते जा रहे हैं, वहीं गढ़मुक्तेश्वर कम बजट में शानदार अनुभव देता है। शांति, प्रकृति और धार्मिकता का यह मिश्रण इसे उत्तर भारत का उभरता हुआ टूरिस्ट स्पॉट बना रहा है।

    अगर आप भी गोवा जैसी बीच वाली फीलिंग चाहते हैं, तो गढ़मुक्तेश्वर आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। दिल्ली के पास ही मौजूद यह जगह अब धीरे-धीरे एक पॉपुलर वीकेंड डेस्टिनेशन बन चुकी है।