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  • भोपाल में 40 साल पुरानी पाइपलाइन जर्जर, रसोई तक पहुंच रहा सीवेज का पानी

    भोपाल में 40 साल पुरानी पाइपलाइन जर्जर, रसोई तक पहुंच रहा सीवेज का पानी


    भोपाल। भोपाल नगर निगम ने शहर को स्मार्ट सिटी और सबसे स्वच्छ शहर बनाने के बड़े-बड़े दावे किए हैं लेकिन असलियत में शहर की जलापूर्ति और सीवेज व्यवस्था आज भी पुराने और जर्जर ढांचे पर निर्भर है। चार से पांच दशक पुरानी पाइपलाइनें कई इलाकों में सीवेज और पानी की पाइपलाइन के एक साथ होने के कारण दूषित पानी की समस्या बढ़ गई है।

    हाल ही में नगर निगम ने शहर के विभिन्न इलाकों से पानी के नमूने लिए थे। इन नमूनों का परीक्षण करने पर बुधवार को 250 नमूनों में से चार में बैक्टीरिया पाया गया। इनमें से दो सैंपल आदमपुर खंती के पास, एक बाजपेयी नगर के पास नलकूप और एक खानूगांव में कुएं से लिया गया था। यह साफ करता है कि पानी की गुणवत्ता में भारी कमी है और नागरिकों को दूषित पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

    पुराने शहर के कई इलाकों में सीवेज और पानी की पाइपलाइनें एक साथ बिछाई गई हैं, जिससे यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि रसोई तक पहुंचने वाला पानी पूरी तरह से साफ और सुरक्षित हो। यही कारण है कि भोपाल के नागरिक पेट से संबंधित बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। डाक्टरों का कहना है कि 80% बीमारियां दूषित पानी के कारण होती हैं, और यह समस्या भोपाल में दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

    इसके बावजूद केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत पेयजल और सीवरेज व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम अधूरा पड़ा हुआ है। राजधानी में दूषित पानी पीने से इंदौर में 20 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन भोपाल में इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है। नगर निगम लीकेज सुधार और सीवेज चैंबर की सफाई का दिखावा कर रहा है लेकिन असल में स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है।यह समस्या जितनी गंभीर है, उतनी ही उपेक्षित भी है, और यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो शहर में पानी की गुणवत्ता और नागरिकों के स्वास्थ्य पर और गंभीर संकट आ सकता है।

  • इंदौर एमजीएम मेडिकल कॉलेज में नर्स की लापरवाही से डेढ़ महीने के बच्चे का अंगूठा कटकर गिरा

    इंदौर एमजीएम मेडिकल कॉलेज में नर्स की लापरवाही से डेढ़ महीने के बच्चे का अंगूठा कटकर गिरा


    इंदौर । सरकारी अस्पतालों में इलाज की बेहतर सुविधाओं का दावा किया जाता है, लेकिन कभी-कभी यहां इलाज के दौरान लापरवाही के गंभीर मामले सामने आ जाते हैं। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के न्यू चेस्ट वार्ड में एक शर्मनाक घटना सामने आई जहां डेढ़ महीने के एक बच्चे का अंगूठा नर्स की लापरवाही से कटकर गिर गया।

    घटना तब घटी जब नर्स इंट्राकेथ बदलने के दौरान बच्चे का हाथ पकड़ रही थी और टैप को काटते समय उसने कैंची से बच्चे के अंगूठे को काट दिया। इसके परिणामस्वरूप बच्चे का अंगूठा कटकर जमीन पर गिर गया। इस घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यूनिट के डॉक्टरों ने अस्पताल के अधीक्षक को इस घटना की जानकारी नहीं दी जिससे यह लापरवाही छिपी रही।

    सौभाग्य से बच्चे को तुरंत सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल भेजा गया जहां सर्जरी कर बच्चे के कटे हुए अंगूठे को जोड़ा गया। हालांकि इस घटना ने अस्पताल में इलाज की गुणवत्ता और नर्सिंग स्टाफ की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना न केवल अस्पताल की लापरवाही का प्रतीक बन गई, बल्कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर हो रही लापरवाही की ओर भी इशारा करती है। ऐसे मामलों में जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से मरीजों की जान बचाई जा सके।

  • UPI से जुड़ा नया नियम लागू… गलती पर यूजर्स को उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान

    UPI से जुड़ा नया नियम लागू… गलती पर यूजर्स को उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में डिजिटल पेमेंट (Digital payments.) का सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय माध्यम बन चुका UPI आज करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है। सब्ज़ी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग (Online shopping), बिजली बिल (Electricity bills), स्कूल फीस (School Fees) और ट्रैवल बुकिंग (Travel Bookings) तक हर जगह UPI का इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन अब इसी UPI को लेकर एक नया और सख्त नियम लागू किया गया है, जिसकी जानकारी न होने पर यूजर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।


    इस वजह से होता है UPI ब्लॉक

    इस नए नियम का सीधा असर UPI अकाउंट की सुरक्षा और वैधता से जुड़ा है। अगर कोई यूजर लापरवाही करता है, गलत या पुरानी जानकारी का इस्तेमाल करता है, या जरूरी अपडेट्स को नजरअंदाज करता है, तो उसका UPI अकाउंट अस्थायी या स्थायी रूप से ब्लॉक किया जा सकता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कई लोगों को तब तक इसका पता नहीं चलता, जब तक उनका पेमेंट अचानक फेल न होने लगे।


    UPI का नया नियम क्या है?

    UPI से जुड़े नए नियम के तहत यह जरूरी किया गया है कि हर UPI अकाउंट एक सक्रिय, वैध और सही मोबाइल नंबर से जुड़ा होना चाहिए। अगर किसी यूज़र का मोबाइल नंबर इनएक्टिव है, बंद हो चुका है, या लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं है, तो उस नंबर से जुड़ी UPI ID को जोखिम भरा माना जाएगा। इसके अलावा, अगर बैंक या UPI सिस्टम को यह लगता है कि किसी अकाउंट से जुड़ी जानकारी अपडेट नहीं है, पहचान वेरिफिकेशन अधूरा है या यूजर लंबे समय से इनएक्टिव है, तो उस अकाउंट पर पाबंदी लगाई जा सकती है।


    यह नियम क्यों लाया गया?

    इस नियम के पीछे सबसे बड़ा कारण है डिजिटल फ्रॉड और गलत लेन-देन को रोकना। कई मामलों में देखा गया है कि: – बंद मोबाइल नंबर किसी और को दोबारा मिल जाता है – उसी नंबर से जुड़ा UPI अकाउंट पुराना रहता है – नया यूजर अनजाने में पुराने बैंक अकाउंट से लिंक हो जाता है ऐसी स्थिति में धोखाधड़ी, गलत ट्रांजैक्शन और डेटा मिसयूज़ की संभावना बहुत बढ़ जाती है। इसीलिए UPI सिस्टम को साफ और सुरक्षित रखने के लिए यह नियम लाया गया है।


    आम यूजर पर इसका क्या असर पड़ेगा?

    इस नए नियम का असर सीधे तौर पर हर UPI यूजर पर पड़ता है। UPI पेमेंट अचानक बंद हो सकता है अगर आपका अकाउंट नियमों के अनुरूप नहीं है, तो पेमेंट करते समय ट्रांजैक्शन फेल हो सकता है।


    UPI अकाउंट ब्लॉक या सस्पेंड हो सकता है

    लगातार नियमों की अनदेखी करने पर UPI ID को अस्थायी या स्थायी रूप से ब्लॉक किया जा सकता है। Google Pay, PhonePe, Paytm सब पर असर यह नियम किसी एक ऐप तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी UPI प्लेटफॉर्म पर लागू होता है। रोजमर्रा के काम रुक सकते हैं बिल पेमेंट, पैसे ट्रांसफर, ऑनलाइन खरीदारी सब कुछ प्रभावित हो सकता है।


    UPI अकाउंट ब्लॉक होने से कैसे बचें?

    अगर आप चाहते हैं कि आपका UPI अकाउंट सुरक्षित रहे, तो इन बातों का खास ध्यान रखें:
    – बैंक अकाउंट से जुड़ा मोबाइल नंबर हमेशा एक्टिव रखें
    – मोबाइल नंबर बदला है तो तुरंत अपडेट करें
    – समय-समय पर UPI का इस्तेमाल करते रहें
    – UPI ऐप में प्रोफाइल और KYC पूरी रखें
    – किसी अनजान लिंक या कॉल से UPI जानकारी शेयर न करें


    कैसे पता करें कि आपका नंबर ब्लॉक हुआ है या नहीं?

    इस वक्त कोई सार्वजनिक लिस्ट नहीं है जिससे आप सीधे जान सकें कि आपका नंबर ब्लॉक हुआ है या नहीं। लेकिन अगर आप नीचे दिए गए लक्षण देख रहे हैं, तो सतर्क हो जाइए: लगातार UPI फेल हो रहा है, “Transaction under review” या “Could not process” जैसे मैसेज आ रहे हैं, QR कोड स्कैन करने पर भी पेमेंट नहीं हो पा रहा तो ऐसी स्थिति में अपने बैंक या UPI ऐप की हेल्पलाइन से संपर्क करें।

  • विदिशा 90 वर्षीय मां के रख-रखाव को लेकर चार बेटों में विवाद, पुलिस पंचायत ने किया समाधान

    विदिशा 90 वर्षीय मां के रख-रखाव को लेकर चार बेटों में विवाद, पुलिस पंचायत ने किया समाधान


    विदिशा । एक दिल को झकझोर देने वाली घटना बुधवार को पुलिस पंचायत में सामने आई, जहां 90 वर्षीय महिला ने अपने चार बेटों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। महिला ने बताया कि उसने अपनी जमा पूंजी से सभी बेटों को पांच-पांच लाख रुपये दिए थे, लेकिन अब जीवन के अंतिम पड़ाव पर कोई भी बेटा उसे अपने पास रखने को तैयार नहीं है।

    चारों बेटों के बीच पारिवारिक विवाद के कारण, उन्होंने तय किया था कि प्रत्येक बेटा एक-एक माह के लिए मां को रखेगा। लेकिन अब महिला का आरोप है कि पहले बेटे के एक माह पूरे होने के बाद दूसरा बेटा भी उन्हें रखने को तैयार नहीं है।

    इस गंभीर मामले को पुलिस पंचायत ने तुरंत संज्ञान में लिया और आदेश दिया कि एक बेटा अपनी मां को स्थाई रूप से रखेगा, जबकि बाकी तीन बेटे उन्हें हर माह एक-एक हजार रुपये खर्च के लिए देंगे। इस फैसले से महिला को कुछ राहत मिली है।

    पुलिस पंचायत में इस प्रकार के मामलों की सुनवाई नियमित रूप से होती है, और बुधवार को भी इस जैसे चार से पांच मामले सुने गए। एक अन्य मामले में दो सीनियर सिटीजन मित्रों के बीच भूमि किराए पर लेकर खेती करने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था, जिसका समाधान भी पंचायत ने किया।

  • संक्रांति के बाद BJP संगठन में बड़े बदलाव के आसार… राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं नितिन नबीन

    संक्रांति के बाद BJP संगठन में बड़े बदलाव के आसार… राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं नितिन नबीन


    नई दिल्ली।
    भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) में परिवर्तन की प्रक्रिया जोरों पर है। दिसंबर 2025 में बिहार के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नितिन नबीन (Nitin Nabin) (45 वर्ष) को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (National Executive Chairman) नियुक्त किया गया है। वे भाजपा के इतिहास में सबसे युवा नेता हैं जो इस शीर्ष संगठनात्मक पद तक पहुंचे हैं। नितिन नबीन बिहार की राजधानी पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार के विधायक हैं और नीतीश कुमार सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वे पार्टी के युवा मोर्चा में लंबे समय तक सक्रिय रहे तथा छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जनवरी 2020 से इस पद पर हैं। अब जनवरी 2026 के मध्य तक नितिन नबीन को औपचारिक रूप से भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन के चुनाव को भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अनुमोदित किया जाएगा, जो इस महीने के अंत तक होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद नितिन नबीन द्वारा अपनी नई टीम बनाने के लिए संगठनात्मक फेरबदल किए जाने की उम्मीद है, जो एक ‘समावेशी’ प्रक्रिया होगी। भाजपा के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा कि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम भाजपा और संघ परिवार के बीच तालमेल और समन्वय को दर्शाएगी।


    मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की उम्मीद

    एक रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के संगठनात्मक स्तरों में व्यापक फेरबदल से जुड़ी इस प्रक्रिया के कारण केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी फेरबदल हो सकता है। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने यह भी बताया कि जून 2024 में इसके गठन के बाद से इसमें कोई फेरबदल नहीं हुआ है। भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की समीक्षा कर रही है। जल्द ही मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की उम्मीद है, जिसमें युवा नेतृत्व के साथ-साथ जाट समुदाय के चेहरों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। सरकार और संगठन दोनों में जाट समुदाय का घटता प्रतिनिधित्व भी हमारे उच्च कमान के विचार-विमर्श के बिंदुओं में से एक है।


    सरकार और संगठन में आएंगे संघ परिवार से जुड़े लोग

    पार्टी सूत्रों ने कहा कि नबीन ने भाजपा और उसके वैचारिक मार्गदर्शक आरएसएस के बीच संबंधों और समन्वय को बेहतर बनाने के लिए पहले ही कदम उठाए हैं, इससे यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे केंद्र सरकार और पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के बीच ‘सक्रिय समन्वय’ सुनिश्चित करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा और आरएसएस पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के कामकाज की समीक्षा करने जा रहे हैं और संगठन तथा सरकारी या अर्ध-सरकारी निकायों, जिनमें विभिन्न आयोग भी शामिल हैं, में कई नई नियुक्तियों पर चर्चा करेंगे। एक पार्टी नेता ने कहा कि इससे राज्य के कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं के लिए केंद्रीय स्तर पर संगठनात्मक या सरकारी भूमिकाएं निभाने का रास्ता खुल जाएगा, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय से संघ परिवार से जुड़े हुए हैं।

    भाजपा नेता ने कहा कि ऐसे कई नेताओं को समायोजित किए जाने की संभावना है, जिनमें वे नेता भी शामिल हैं जो अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में पार्टी के साथ रहे हैं। ये नेता बिहार जैसे राज्यों के साथ-साथ उन राज्यों से भी होंगे जहां आने वाले महीनों में चुनाव होने हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा और आरएसएस की हालिया समन्वय बैठकों के दौरान, आरएसएस ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे नेताओं की पहचान की जानी चाहिए जो तीन-चार दशकों से संघ परिवार से जुड़े हुए हैं लेकिन संगठन, सरकार या किसी अन्य सार्वजनिक संस्था में उन्हें स्थान नहीं मिला है। नितिन नबीन उन वरिष्ठ भाजपा नेताओं के समूह में शामिल हैं जो इस प्रक्रिया का समन्वय कर रहे हैं।


    मकर संक्रांति के बाद फेरबदल की संभावना

    भाजपा सूत्रों ने बताया कि हमारा ध्यान उन लोगों को महत्वपूर्ण भूमिकाएं देने पर है जिन्होंने अपना पूरा जीवन भाजपा और संघ के लिए समर्पित कर दिया है। यह प्रक्रिया जारी है, लेकिन घोषणाओं के लिए सीमित अवसर ही उपलब्ध होंगे। सूत्रों ने बताया कि अधिकांश महत्वपूर्ण नियुक्तियां मकर संक्रांति के बाद से लेकर बजट सत्र के प्रारंभ होने तक होने की उम्मीद है, जो फरवरी की शुरुआत से शुरू होगा। इस प्रक्रिया के लिए एक और समयसीमा आगामी राज्य चुनावों की घोषणा से पहले होने की संभावना है।

  • GDP केवल आंकड़ों का खेल नहीं… लोगों की जिंदगी पर पड़ता है इसका सीधा असर

    GDP केवल आंकड़ों का खेल नहीं… लोगों की जिंदगी पर पड़ता है इसका सीधा असर


    नई दिल्ली।
    जीडीपी (GDP) किसी देश की सीमाओं के भीतर एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष या तिमाही) में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य है। यह अर्थव्यवस्था (Economy) के आकार और स्वास्थ्य को दर्शाती है। जीडीपी सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं होता। इसका सीधा और अप्रत्यक्ष असर नौकरी (Jobs), महंगाई (Inflation), आमदनी (Income), कर्ज (Debt), टैक्स (Taxes) और सरकारी सुविधाओं (Government services) पर पड़ता है।


    1. रोजगार और नौकरी के मौके

    ऊंची जीडीपी ग्रोथ (7% या उससे ज्यादा) का मतलब है कि अर्थव्यवस्था में गतिविधियां तेज हैं। इससे नई नौकरियां बनती हैं, खासकर निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी और सर्विस सेक्टर में। कम ग्रोथ होने पर कंपनियां भर्ती रोकती हैं या छंटनी करती हैं। नौकरी मिलने की संभावना बढ़ती है, वेतन वृद्धि बेहतर हो सकती है।


    2. महंगाई और खर्च

    तेज जीडीपी से मांग बढ़ती है, जिससे कभी-कभी महंगाई का दबाव भी आता है। अगर विकास दर संतुलित रहे, तो आपूर्ति बढ़ने से महंगाई काबू में रहती है। आम आदमी के लिए बहुत तेज विकास दर का मतलब महंगाई का खतरा होती है वहीं इसकी धीमी रफ्तार से आमदनी पर असर होता है। इसका मध्यम और स्थिर विकास सबसे बेहतर होता है।


    3. आपकी आमदनी और व्यापार

    अच्छी जीडीपी दर से छोटे कारोबार, दुकानदार, ट्रांसपोर्ट, होटल और सर्विस सेक्टर को फायदा होता है। ग्रामीण इलाकों में बेहतर विकास का मतलब कृषि से जुड़े रोजगार और आमदनी में सुधार होता है। आम आदमी के लिए बेहतर है काम-धंधा चलता है, आमदनी बढ़ने की उम्मीद बनती है।


    4. कर्ज, ईएमआई और ब्याज दर

    अगर जीडीपी दर मजबूत और महंगाई काबू में हो, तो आरबीआई ब्याज दरें घटा सकता है। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन सस्ते होते हैं। ईएमआई कम हो सकती है, नया कर्ज लेना आसान होता है।


    5. सरकार की कमाई और योजनाएं

    ज्यादा जीडीपी दर से सरकार को ज्यादा टैक्स राजस्व मिलता है। इससे सड़क, अस्पताल, स्कूल, सब्सिडी और सामाजिक योजनाओं पर खर्च बढ़ सकता है। आम आदमी के लिए बेहतर सरकारी सेवाएं तैयार होती हैं और योजनाओं का लाभ मिलता है।


    6. शेयर बाजार और निवेश

    अच्छी जीडीपी दर के अनुमान से शेयर बाजार में तेजी आती है। म्यूचुअल फंड, पीएफ और रिटायरमेंट फंड पर सकारात्मक असर पड़ता है। आम आदमी के लिए निवेश से बेहतर रिटर्न की संभावनाएं बनती हैं।

  • क्रिप्टोकरेंसी पर रोक जरूरी… आयकर विभाग ने किया RBI के रूख का समर्थन

    क्रिप्टोकरेंसी पर रोक जरूरी… आयकर विभाग ने किया RBI के रूख का समर्थन


    नई दिल्ली।
    आयकर विभाग (Income Tax Department) ने बुधवार को क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों (Virtual digital assets Cryptocurrencies) से जुड़े बड़े रिस्क की ओर ध्यान खींचा है। इसके साथ ही विभाग ने भारतीय रिजर्व बैंक के रुख का समर्थन करते हुए इन वित्तीय साधनों के प्रवेश का विरोध किया है। सूत्रों के मुताबिक, वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति के समक्ष एक प्रस्तुति में टैक्स अफसरों ने बताया कि कैसे गुमनाम, सीमा रहित और तत्काल धन हस्तांतरण की सुविधा से बिना किसी विनियमित वित्तीय मध्यस्थ के फंड्स को सिस्टम के जरिए भेजना संभव हो पाता है।

    इसके अलावा, विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंज, निजी वॉलेट और विकेंद्रीकृत प्लेटफॉर्म के कारण अधिकारियों के लिए टैक्सेबल इनकम का पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इनमें संपत्ति का असली मालिक भी आसानी से पता नहीं चल पाता।


    अंतरराष्ट्रीय पहलू और चुनौतियां

    विदेशों में होने वाली वर्चुअल डिजिटल संपत्ति की गतिविधियों में अधिकार क्षेत्र की सीमाओं को भी एक समस्या बताया गया। इसमें कई देशों के नियम शामिल हो सकते हैं, जिससे फंड फ्लो को जांचना, टैक्स लायबिलिटी की पुष्टि करना और वसूली करना लगभग असंभव हो जाता है। हाल के महीनों में सूचना साझा करने के प्रयास होने के बावजूद, यह प्रक्रिया अब भी कठिन बनी हुई है। इससे कर अधिकारियों को लेन-देन की श्रृंखला का सही आकलन और पुनर्निर्माण करने की क्षमता प्रभावित होती है।


    भारत की स्थिति और सुरक्षा उपाय

    भारत उन देशों में शामिल है जो जोरदार लॉबिंग और कुछ सरकारों के दबाव के बावजूद अब तक क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन को मंजूरी देने में हिचकिचा रहे हैं। इससे पहले, कई मौकों पर आरबीआई ने अपनी चिंताएं जताई हैं, जिनमें किसी भी अंतर्निहित परिसंपत्ति की कमी होना शामिल है, जो इसे निवेशकों के लिए जोखिम भरा बनाती है। यहां तक कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां भी खासतौर पर सावधान हैं क्योंकि वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण के लिए किया जा सकता है।

    आयकर विभाग ने कहा कि चूंकि क्रिप्टो प्लेटफॉर्म विदेशों में काम करते हैं, इसलिए समन जारी करना या टीडीएस वसूलना जैसी कानूनी कार्रवाई करना कठिन हो सकता है। कई एक्सचेंज फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट के साथ भी रजिस्टर्ड नहीं हैं और कर विभाग की पहुंच से बाहर हैं। भारतीय कर अधिकारियों ने लाभार्थियों को ट्रैक करने के लिए टीडीएस जैसे सुरक्षा उपाय बनाने की कोशिश की है और क्रिप्टो तथा अन्य वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों में कारोबार करने वाली इकाइयों के पंजीकरण को भी अनिवार्य किया है।

  • Bihar:हिजाब हटाने के विवाद में 23 दिन बाद डॉ. नुसरत परवीन ने ज्वाइन की नौकरी..

    Bihar:हिजाब हटाने के विवाद में 23 दिन बाद डॉ. नुसरत परवीन ने ज्वाइन की नौकरी..


    पटना।
    बिहार ( Bihar) की आयुष चिकित्सक डॉ. नुसरत परवीन (Ayush physician Dr. Nusrat Parveen) ने आखिरकार 23 दिनों के बाद नौकरी ज्वाइन कर ली है। गर्दनीबाग स्थित सिविल सर्जन कार्यालय में उन्होंने मंगलवार को योगदान दे दिया। इस बाबत सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार ने बताया कि उनकी तैनाती सदर पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) में की गई है। उन्होंने योगदान के लिए आवेदन दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

    डॉ. नुसरत परवीन को संविदा पर यह नौकरी मिली है। पहले उन्हें 31 दिसंबर तक ही योगदान करना था। डॉ. नुसरत परवीन उस समय चर्चा में आई थी, जब 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री सचिवालय में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान हिजाब हटाए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। डॉ. नुसरत परवीन पटना स्थित राजकीय तिब्बी कॉलेज से एमडी पीजी की पढ़ाई कर रही हैं।

    राजकीय तिब्बी कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य महफूज-उर-रहमान ने बताया कि डॉक्टर नुसरत परवीन ने अंतिम तिथि पर ड्यूटी ‘ज्वाइन’ कर ली। उन्होंने कहा, “आज सेवा में शामिल होने की अंतिम तिथि थी और नुसरत ने पटना सिविल सर्जन कार्यालय में ड्यूटी के लिए रिपोर्ट कर दिया। सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा उन्हें उपयुक्त स्थान पर पदस्थापित किया जाएगा।”

    प्राचार्य ने बताया कि सेवा में शामिल होने की अंतिम तिथि पहले 31 दिसंबर तक बढ़ाई गई थी और फिर इसे सात जनवरी तक विस्तार दिया गया था। नुसरत परवीन उसी कॉलेज की छात्रा रह चुकी हैं, जिसके रहमान प्राचार्य हैं। इससे पहले कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि नुसरत ने शुरुआत में “नाराजगी” के चलते सेवा में शामिल होने से इनकार कर दिया था। हालांकि कॉलेज प्रशासन ने इस दावे को खारिज किया था।

    पिछले महीने, जब नुसरत तय समय सीमा के भीतर ड्यूटी के लिए रिपोर्ट नहीं कर पाई थीं, तब प्राचार्य ने कहा था, “उनके परिवार ने बताया था कि वे मीडिया कवरेज से बचना चाहती हैं और वह दोबारा विचार करेंगी कि उन्हें सेवा में शामिल होना है या नहीं।”

  • वेनेजुएला अब अमेरिका में बने उत्पाद ही खरीद सकता है … ट्रंप ने जारी किया नया फरमान

    वेनेजुएला अब अमेरिका में बने उत्पाद ही खरीद सकता है … ट्रंप ने जारी किया नया फरमान


    वॉशिंग्टन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बुधवार को बड़ी घोषणा करते हुए वेनेजुएला (Venezuela) के लिए नया फरमान जारी कर दिया है। ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला अब नए तेल सौदे से मिलने वाले पैसे से सिर्फ अमेरिकी-निर्मित उत्पाद (American-Made Products) ही खरीदेगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने देश के राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं देश की उपराष्ट्रपति ने फिलहाल यह जिम्मेदारी संभालते हुए अमेरिका के साथ सहयोग की बात कही है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, “मुझे अभी-अभी बताया गया है कि वेनेजुएला हमारे साथ हुए नए तेल सौदे से मिलने वाले पैसे से सिर्फ अमेरिकी-निर्मित उत्पाद खरीदने जा रहा है। इनमें अमेरिकी कृषि उत्पाद, अमेरिका में बनीं दवाएं, मेडिकल उपकरण, और वेनेजुएला के इलेक्ट्रिक ग्रिड और ऊर्जा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए उपकरण शामिल होंगे।”

    ट्रंप ने आगे कहा, “दूसरे शब्दों में वेनेजुएला अमेरिका को अपना मुख्य भागीदार बनाकर व्यापार करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह एक समझदारी भरा फैसला है और वेनेजुएला और अमेरिका के लोगों के लिए बहुत अच्छी बात। इस मामले पर आपके ध्यान के लिए धन्यवाद!”


    अमेरिका ही लेगा फैसले

    वहीं बुधवार को वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिना लेविट ने एक ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला के अंतरिम नेताओं के साथ संपर्क में है। लेविट ने बताया, “ट्रंप सरकार वेनेजुएला में अंतरिम अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। अभी वेनेजुएला में अंतरिम अधिकारियों पर हमारा सबसे ज्यादा कंट्रोल है… उनके फैसले अमेरिका ही लेगा।”


    5 करोड़ बैरल तेल खरीदेगा अमेरिका

    इससे पहले मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अमेरिका को बाजार मूल्य पर तीन से पांच करोड़ बैरल ‘उच्च गुणवत्ता’ वाला तेल उपलब्ध कराएगा। ट्रंप ने लिखा था कि तेल जहाजों द्वारा सीधे अमेरिका पहुंचाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि राष्ट्रपति के रूप में इस पैसे पर उनका नियंत्रण होगा लेकिन इसका उपयोग वेनेजुएला और अमेरिका के लोगों की भलाई के लिए किया जाएगा।

  • MP: शिवपुरी में हैंडपंप के पानी से बीमार हुआ व्यक्ति.. समाधान के बजाए नोटिस चिपकाकर निकल गए अधिकारी

    MP: शिवपुरी में हैंडपंप के पानी से बीमार हुआ व्यक्ति.. समाधान के बजाए नोटिस चिपकाकर निकल गए अधिकारी


    शिवपुरी।
    इंदौर के भागीरथपुरा (Indore Bhagirathpura) में दूषित पानी (Contaminated Water) से मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शिवपुरी (Shivpuri) से दूषित पानी पीने से एक युवक के बीमार पड़ने का मामला सामने आया है। शिवपुरी जिले के पोहरी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत भटनावार के मठ गांव में हैंडपंप (Handpump) के दूषित पानी से एक युवक की तबीयत खराब हो गई। इसके बाद विभाग की लापरवाही देखिए, जब ग्रामीणों ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सूचना दी, तो विभागीय अमला मौके पर पहुंचा, लेकिन समाधान के बजाय हैंडपंप पर केवल “पानी पीने योग्य नहीं है” लिखकर लौट गया।

    इसके बावजूद ग्रामीणों को मजबूरी में उसी दूषित पानी को छानकर पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पानी का कोई दूसरा विकल्प उपलब्ध नहीं है, ऐसे में रोक के बाद भी उन्हें इसी हैंडपंप के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में पेयजल का एकमात्र स्रोत यही हैंडपंप था। इसी का पानी पीने से रोहित पुरी गोस्वामी बीमार हुए थे। अब हैंडपंप के उपयोग पर रोक लगने और वैकल्पिक व्यवस्था न होने से लोग पीने के पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों को सिर्फ चेतावनी देने के बजाय शुद्ध पानी की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

    दुलारा पंचायत के सरपंच दिनेश धाकड़ ने विभाग पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि पूरी पंचायत में कई हैंडपंप खराब पड़े हैं। कुछ हैंडपंपों में पाइप बढ़ाने से पानी निकल सकता है, लेकिन इस संबंध में दी गई कई लिखित शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मामले में PHE विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम गुप्ता ने कहा कि दुलारा पंचायत और मठ गांव में जांच के लिए एसडीओ को भेजा जाएगा। जांच के बाद पेयजल समस्या के समाधान के लिए व्यावहारिक विकल्पों पर विचार कर ग्रामीणों को राहत दी जाएगी।