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  • ईडी का महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप केस में बड़ा एक्शन… 92 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क

    ईडी का महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप केस में बड़ा एक्शन… 92 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क


    रायपुर।
    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) (Enforcement Directorate – ED) ने बुधवार को बताया उसने छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में कार्रवाई को अंजाम देते हुए अवैध ‘महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी’ (‘Mahadev Online Betting’) ऐप के मुख्य प्रवर्तकों में से एक सौरभ चंद्राकर (Saurabh Chandrakar) सहित विभिन्न आरोपियों की लगभग 92 करोड़ रुपए की संपत्तियों को कुर्क किया है। जिसमें चल और अचल दोनों तरह की संपत्तियां शामिल हैं। इस कार्रवाई के दौरान ईडी ने PMLA के तहत एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट LLC और एक्जिम जनरल ट्रेडिंग- GZCO के नाम पर रखी गई 74.28 करोड़ रुपए से अधिक की बैंक जमा राशि को जब्त किया।


    दोनों कंपनियों से बड़े पैमाने पर बनाई अपराध की आय

    इस बारे में एक बयान जारी करते हुए ईडी ने बताया कि, ये दोनों कंपनियां सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपारिया की हैं, जिनका इस्तेमाल अपराध की आय (PoC) को छिपाने और बेदाग निवेश के रूप में दिखाने के लिए किया जाता था। इसके अलावा ईडी ने बताया कि साथ ही Skyexchange.com के मालिक हरि शंकर टिबरेवाल के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता की भी 17.5 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की गई है। इन जब्त की गई संपत्तियों में गगन गुप्ता के परिवार के सदस्यों के नाम पर रखी गई महंगी रियल एस्टेट और लिक्विड एसेट्स भी शामिल हैं, जिन्हें कैश से खरीदना पाया गया।


    अपराध की आय को बेनामी खातों के जरिए निकाला गया

    ईडी की जांच में पता चला है कि महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange.com आदि जैसे अवैध सट्टेबाजी ऐप्स ने भारी मात्रा में नगदी उत्पन्न की, जिसे बेनामी बैंक खातों के एक जटिल जाल के माध्यम से निकाला गया। यह भी पता चला है कि सौरभ चंद्राकर और अन्य ने महादेव ऑनलाइन बुक एप्लिकेशन नामक एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनता को धोखा दिया।


    सारे ग्राहक खो देते थे लगाए गई पूरी रकम

    इस दौरान इन अवैध सट्टेबाजी खेलों के ऐप्स/वेबसाइटों को इस तरह से तैयार किया गया था कि सभी ग्राहक अंततः पैसे खो देते थे। जिसके चलते इनके संचालकों के पास हजारों करोड़ रुपए का फंड इकट्ठा हो गया और पहले से तय प्रॉफिट-शेयरिंग तरीके से बांटा गया। इसके अलावा, बैंक अकाउंट खोलने के लिए जाली या चोरी किए गए KYC का भी इस्तेमाल किया गया और अवैध सट्टेबाजी से मिले पैसे को उनके सोर्स को छिपाने के लिए लेयरिंग की गई। इन सभी ट्रांजैक्शन का न तो हिसाब रखा गया और न ही उन्हें टैक्स नेट में लाया गया।


    FPI के नाम पर वापस भारत आया अपराध की कमाई का पैसा

    जांच में पता चला कि इन अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से कमाए गए पैसे को हवाला चैनलों, ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग ट्रांजैक्शन और क्रिप्टो-एसेट्स के इस्तेमाल से भारत के बाहर ट्रांसफर किया गया और बाद में विदेशी FPIs के नाम पर भारतीय स्टॉक मार्केट में वापस लाकर इन्वेस्ट किया गया। ED द्वारा की गई जांच में एक सोफिस्टिकेटेड कैशबैक स्कीम का भी पता चला, जिसमें ये FPI एंटिटी भारतीय लिस्टेड कंपनियों में भारी इन्वेस्ट करती थीं और बदले में, इन कंपनियों के प्रमोटरों को इन्वेस्टमेंट का 30% से 40% कैश में वापस देना होता था।


    गगन गुप्ता ने दो कंपनियों से लिया 98 करोड़ का फायदा

    जांच के दौरान एक आरोपी गगन गुप्ता को सालासर टेक्नो इंजीनियरिंग लिमिटेड और टाइगर लॉजिस्टिक लिमिटेड जैसी एंटिटी से जुड़े ऐसे ट्रांजैक्शन से कम से कम 98 करोड़ रुपए का लाभ मिलना पाया गया। बता दें कि अब तक इस मामले की जांच के दौरान ED ने 175 से ज़्यादा जगहों पर तलाशी ली है। साथ ही जांच के दौरान लगभग 2,600 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्ति जब्त, फ्रीज या अटैच भी की है। इसके अलावा, ED ने इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, और अब तक दायर की गई पांच प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में 74 लोगों को आरोपी बनाया गया है। महादेव ऐप का प्रचार सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल ने किया था। ये दोनों छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। उनका विदेश से प्रत्यर्पण कराने की कोशिश की जा रही है। उनके संयुक्त अरब अमीरात में होने का पता चला था।

  • इंदौर में ई-रिक्शा संचालन में बदलाव: सात सेक्टर में बांटकर शुरू होगी नई व्यवस्था

    इंदौर में ई-रिक्शा संचालन में बदलाव: सात सेक्टर में बांटकर शुरू होगी नई व्यवस्था


    इंदौर । शहर में ई-रिक्शा के बढ़ते संचालन को नियंत्रित करने के लिए अब नई व्यवस्था लागू की जा रही है। शहर को सात सेक्टरों में बांटा जाएगा, और हर ई-रिक्शा के लिए एक सीमित क्षेत्र निर्धारित मार्ग और रंग आधारित पहचान लागू की जाएगी। इस बदलाव का उद्देश्य ई-रिक्शा के संचालन को व्यवस्थित सुरक्षित और सुगम बनाना है।

    पुलिस उपायुक्त यातायात, आनंद कलादगी की अध्यक्षता में बुधवार को पलासिया स्थित पुलिस कंट्रोल रूम में एक बैठक हुई जिसमें इस योजना के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि सेक्टरों में ई-रिक्शा के संचालन के लिए 30 दिन की तैयारी अवधि होगी जिसके बाद एक महीने का ट्रायल रन शुरू होगा। ट्रायल के दौरान यदि किसी भी तरह की समस्या उत्पन्न होती है तो आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

    ई-रिक्शा चालकों को अपनी गाड़ी से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर, सेक्टर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए अगले दो दिनों में विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। शिविर में पंजीकरण प्रक्रिया पहले आएं पहले पाएं नीति के तहत होगी और इसमें चालकों को उनके इलाके के अनुसार सेक्टर का चयन करने का अवसर मिलेगा। पंजीकरण के बाद चालकों को सीरियल नंबर वाला स्टीकर दिया जाएगा जिस पर सेक्टर का नाम वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर और सीरियल नंबर अंकित होगा।

    नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक सेक्टर में 20 से 25 किमी तक के रूट निर्धारित किए जाएंगे और स्टैंड भी तय किए जाएंगे। ई-रिक्शा की पहचान को और सरल बनाने के लिए प्रत्येक वाहन के आगे-पीछे एक विशेष स्टीकर लगाया जाएगा जो सवारी और निगरानी के लिए मददगार होगा। साथ ही हर सेक्टर के लिए सात अलग-अलग रंगों का कोड होगा जिससे पहचान में आसानी होगी।

    इस योजना के बारे में इंदौर बैटरी रिक्शा चालक महासंघ के संस्थापक राजेश बिड़कर ने असंतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि कुछ कार्यकर्ता इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं और 12 जनवरी को ई-रिक्शा बंद करने की घोषणा की है। वे सुबह 11 बजे गांधी हाल परिसर में एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।आगामी 15 दिनों में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, और फिर अगले 10 दिनों में सेक्टर और स्टीकर वितरण की प्रक्रिया की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो भविष्य में सेक्टर व्यवस्था में सुधार किए जा सकते हैं।

  • ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर बांग्लादेश… तनाव के बावजूद खरीदेगा एक लाख 80 हजार टन डीजल

    ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर बांग्लादेश… तनाव के बावजूद खरीदेगा एक लाख 80 हजार टन डीजल


    गुवाहाटी।
    भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) के बीच चल रहे राजनीतिक तनाव के बावजूद, बांग्लादेश (Bangladesh) अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर है। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (Bangladesh Petroleum Corporation- BPC) ने भारत की सरकारी तेल कंपनी नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (Numaligarh Refinery Limited- NRL) से 180,000 मीट्रिक टन डीजल आयात करने का फैसला किया है। इस आयात की कुल लागत लगभग 14.62 अरब टका होगी जो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ बदल सकती है। यह सौदा 2026 के लिए हुआ है।

    यह फैसला 6 जनवरी को ढाका में हुई सरकारी खरीद सलाहकार समिति की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद ने की। सरकार संचालित बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसी) इस डीजल का आयात करेगी। भुगतान का कुछ हिस्सा बीपीसी अपने बजट से करेगी, जबकि शेष राशि बैंक लोन के माध्यम से जुटाई जाएगी।

    सूत्रों के अनुसार, आयात लागत एनआरएल के साथ बातचीत के बाद तय की गई है। असम स्थित एनआरएल ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) की सहायक कंपनी है। इस सौदे की कुल वैल्यू 119.13 मिलियन डॉलर तय की गई है, जो 83.22 डॉलर प्रति बैरल की बेस कीमत पर 5.50 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर आधारित है। अंतिम लागत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के अनुसार बदलती रहेगी।

    पत्रकारों के सवालों के जवाब में बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन सलाहकार मुहम्मद फौजुल कबीर खान ने कहा कि यह आयात पिछले सरकार के कार्यकाल में हस्ताक्षरित 15 वर्षीय दीर्घकालिक समझौते के तहत किया जा रहा है।

    एनआरएल की रिफाइनरी असम राज्य में स्थित है। डीजल को पहले सिलीगुड़ी तक ले जाया जाता है और फिर भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के माध्यम से बांग्लादेश पहुंचाया जाता है। यह पाइपलाइन 2022-23 में चालू हुई थी, जिससे परिवहन लागत और समय में काफी बचत हुई है। इससे पहले डीजल रेलवे वैगनों से आयात किया जाता था। यह आयात बांग्लादेश की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को मजबूत किया है।

    हालांकि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, अल्पसंख्यकों पर हमले और अन्य मुद्दों पर तनाव बना हुआ है, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग जारी है। बांग्लादेश की सालाना डीजल मांग का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है और भारत इसका विश्वसनीय स्रोत बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक जरूरतें राजनीतिक तनाव से ऊपर हैं, जिससे ऐसे समझौते बरकरार रहते हैं।

  • बड़ा खुलासा… मप्र के गांवों में मिल रहा पानी लोगों के इस्तेमाल के लायक नहीं

    बड़ा खुलासा… मप्र के गांवों में मिल रहा पानी लोगों के इस्तेमाल के लायक नहीं


    भोपाल।
    इंदौर के भागीरथपुरा (Bhagirathpura, Indore) में काल बने पीने के पानी ने अब तक 20 लोगों की जिंदगियां लील ली हैं और जो इससे बच गए, उनका अस्पताल में इलाज जारी है। सरकार कटघरे में है तो विपक्ष भी इस मुद्दे पर हावी है। इस बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गांवों (Villages) में पीने के पानी (Drinking water) पर आई एक रिपोर्ट आपको भी हैरान कर देगी। केंद्र सरकार के ‘जल जीवन मिशन’ (‘Jal Jeevan Mission’) की एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में एक-तिहाई से अधिक पीने का पानी इंसानों के इस्तेमाल के लायक नहीं है, जिससे लाखों लोग अनदेखे लेकिन जानलेवा खतरों की चपेट में हैं।


    रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े

    4 जनवरी 2026 को जारी ‘फंक्शनैलिटी असेसमेंट रिपोर्ट’ (कार्यक्षमता मूल्यांकन रिपोर्ट) के अनुसार मध्य प्रदेश में पानी के केवल 63.3% नमूने ही गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 76% है। इसका मतलब है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में 36.7% पानी के नमूने असुरक्षित पाए गए हैं। इनमें हानिकारक बैक्टीरिया (कीटाणु) या रासायनिक मिलावट पाई गई है। ये नमूने सितंबर-अक्टूबर 2024 के दौरान मध्य प्रदेश के 15,000 से अधिक ग्रामीण घरों से इकट्ठा किए गए थे।

    यह स्थिति उन जगहों पर और भी अधिक चिंताजनक है जो सुरक्षा और इलाज के लिए बनी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में पानी के केवल 12% नमूने ही सूक्ष्मजीवविज्ञानी (microbiological) सुरक्षा जांच में पास हो पाए, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 83.1% है। इसका मतलब है कि मध्य प्रदेश के लगभग 88% अस्पतालों में मरीजों को असुरक्षित पानी दिया जा रहा है। स्कूलों में 26.7% नमूने माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट में फेल हो गए, जिससे बच्चे हर दिन दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।


    इन जिलों की हालत सबसे खराब

    अनूपपुर और डिंडोरी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में स्थिति सबसे खराब है, जहां एक भी पानी का नमूना सुरक्षित नहीं पाया गया। बालाघाट, बैतुल और छिंदवाड़ा में 50% से अधिक पानी के नमूने दूषित मिले हैं। मध्य प्रदेश में केवल 31.5% घरों में नल के कनेक्शन हैं, जो कि 70.9% के राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है। जहां पाइपलाइन बिछी भी है, वहां व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है; राज्य के 99.1% गांवों में पाइप से जलापूर्ति की व्यवस्था तो है, लेकिन केवल 76.6% घरों में ही चालू हालत में नल लगे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि हर चौथे घर में या तो नल खराब है या पानी ही नहीं आता।


    नल से पानी आने का मतलब सुरक्षित पानी होना नहीं….

    इससे भी बदतर बात यह है कि नल से पानी आने का मतलब सुरक्षित पानी होना नहीं है। इंदौर जिला, जिसे आधिकारिक तौर पर 100% नल कनेक्शन वाला घोषित किया गया है, वहां भी केवल 33% घरों को ही सुरक्षित पीने का पानी मिल रहा है। पूरे राज्य में 33% पानी के नमूने गुणवत्ता जांच में फेल हो गए, जो इस बात की पुष्टि करता है कि संकट केवल पानी की पहुंच का नहीं, बल्कि ‘जहरीली सप्लाई’ का है। केंद्र सरकार ने इस स्थिति को “सिस्टम की ओर से पैदा की गई आपदा” करार दिया है और चेतावनी दी है कि यदि पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो इस साल फंड (बजट) में कटौती की जा सकती है।

    यह चेतावनी एक बड़ी त्रासदी के बाद आई है। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत हो गई। 429 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिनमें से 16 आईसीयू (ICU) में हैं और तीन वेंटिलेटर पर हैं। अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने औपचारिक रूप से इस संकट को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ (सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल) घोषित कर दिया है। अपने आदेश में अदालत ने कहा कि “अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में साफ पीने का पानी पाने का अधिकार भी शामिल है” और वर्तमान स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के दायरे में आती है।

  • स्मार्ट वेलनेस रूटीन: सुबह की हल्की एक्सरसाइज और मेडिटेशन से जीवन में संतुलन

    स्मार्ट वेलनेस रूटीन: सुबह की हल्की एक्सरसाइज और मेडिटेशन से जीवन में संतुलन

    Smart wellness
    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार और भागदौड़ भरी जिंदगी में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बढ़ते काम का दबावस्क्रीन टाइम और अनियमित दिनचर्या लोगों को तनावथकान और बीमारियों की ओर धकेल रही है। ऐसे में विशेषज्ञ स्मार्ट वेलनेस रूटीन अपनाने की सलाह दे रहे हैंजिसमें सुबह की हल्की एक्सरसाइजमेडिटेशन और हेल्दी नाश्ता को प्राथमिकता दी जाती है।

    विशेषज्ञों के अनुसारसुबह की शुरुआत अगर हल्की एक्सरसाइज से की जाए तो इसका असर पूरे दिन दिखाई देता है। स्ट्रेचिंगवॉकयोग या हल्की फ्री-हैंड एक्सरसाइज मांसपेशियों को सक्रिय बनाती है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करती है। इससे न केवल शरीर में फुर्ती आती हैबल्कि दिनभर ऊर्जा बनी रहती है और थकान की समस्या कम होती है। नियमित रूप से की गई हल्की एक्सरसाइज दिल की सेहतवजन नियंत्रण और इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाती है।शारीरिक लाभों के साथ-साथ हल्की एक्सरसाइज मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करती है और मूड को बेहतर बनाती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि सुबह की ताजी हवा में की गई वॉक या योग दिमाग को शांत करता है और दिनभर सकारात्मक सोच बनाए रखने में सहायक होता है।

    स्मार्ट वेलनेस रूटीन का दूसरा अहम हिस्सा मेडिटेशन है। रोजाना 10 से 15 मिनट का ध्यान मन को स्थिरता और शांति प्रदान करता है। मेडिटेशन से न केवल मानसिक तनाव कम होता हैबल्कि एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ध्यान करने से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और भावनात्मक संतुलन बना रहता है।हेल्दी नाश्ता भी स्मार्ट वेलनेस रूटीन की बुनियाद है। सुबह का नाश्ता शरीर को दिनभर की ऊर्जा देता है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसारनाश्ते में प्रोटीनफाइबर और विटामिन का संतुलन होना चाहिए। अंडादलियाओट्सफलनट्स या स्मूदी जैसे विकल्प शरीर को लंबे समय तक ऊर्जावान बनाए रखते हैं और बार-बार भूख लगने से बचाते हैं।

    इसके साथ ही आज के डिजिटल युग में तकनीक का संतुलित इस्तेमाल भी जरूरी है। मोबाइललैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस का अत्यधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य और नींद को प्रभावित कर सकता है। स्मार्ट वेलनेस रूटीन में डिजिटल डिटॉक्स और स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट को शामिल करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि वेलनेस के लिए बड़े और कठिन बदलाव जरूरी नहीं हैं। रोज सुबह 10 मिनट वॉक10 मिनट मेडिटेशन और एक संतुलित नाश्ता जैसे छोटे कदम भी जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। यह रूटीन न केवल शरीर को स्वस्थ रखता हैबल्कि मन को भी शांत और संतुलित बनाता है।

  • माइक्रो स्पेस लिविंग का बढ़ता क्रेज: छोटे घरों में स्मार्ट डिजाइन और स्टाइलिश जीवन का नया दौर

    माइक्रो स्पेस लिविंग का बढ़ता क्रेज: छोटे घरों में स्मार्ट डिजाइन और स्टाइलिश जीवन का नया दौर


    नई दिल्ली । तेजी से बढ़ते शहरीकरण और सीमित जगह के कारण बड़े घरों का सपना अब हर किसी के लिए संभव नहीं रह गया है। महानगरों में बढ़ती जनसंख्या और महंगे रियल एस्टेट के बीच छोटे घरों यानी माइक्रो स्पेस लिविंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रो स्पेस लिविंग केवल मजबूरी नहीं बल्कि स्मार्ट और स्टाइलिश जीवनशैली का नया विकल्प बन चुका है।

    माइक्रो स्पेस लिविंग का मूल विचार है-कम जगह में अधिक सुविधा और आराम। छोटे घरों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि हर कोना उपयोगी बने। मल्टीफंक्शनल फर्नीचर इस ट्रेंड की सबसे बड़ी खासियत है। सोफा-बेड फोल्डिंग डाइनिंग टेबल वॉल-माउंटेड डेस्क और स्टोरेज-बेड जैसी चीजें न केवल जगह बचाती हैं बल्कि घर को व्यवस्थित और आधुनिक लुक भी देती हैं।मिनिमल डेकोर माइक्रो स्पेस लिविंग का अहम हिस्सा बन गया है। भारी फर्नीचर और ज्यादा सजावट की जगह हल्के रंग सिंपल डिजाइन और कम लेकिन उपयोगी चीजों को प्राथमिकता दी जा रही है। हल्के रंगों की दीवारें और बड़ी खिड़कियां घर को खुला और बड़ा महसूस कराती हैं। सही लाइटिंग खासकर नेचुरल और स्मार्ट लाइट्स छोटे घरों को आरामदायक और आकर्षक बनाती हैं।

    स्मार्ट होम टेक्नोलॉजी ने माइक्रो स्पेस लिविंग को और आसान बना दिया है। स्मार्ट लाइटिंग ऑटोमेटेड क्लाइमेट कंट्रोल वॉइस-एक्टिवेटेड डिवाइस और स्मार्ट सिक्योरिटी सिस्टम छोटे घरों में ज्यादा सुविधा प्रदान करते हैं। ये तकनीकें न केवल समय और ऊर्जा की बचत करती हैं बल्कि घर को भविष्य-अनुकूल भी बनाती हैं।छोटे घरों में काम और आराम के बीच संतुलन बनाना भी एक चुनौती होती है जिसे स्मार्ट डिजाइन के जरिए हल किया जा रहा है। मल्टीफंक्शनल वर्क डेस्क फोल्डिंग कुर्सियां और छुपा हुआ स्टोरेज कम जगह में होम ऑफिस और रिलैक्सेशन दोनों के लिए जगह तैयार करते हैं। इससे वर्क-फ्रॉम-होम करने वालों को भी सुविधा मिलती है।

    माइक्रो स्पेस लिविंग का एक बड़ा फायदा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली है। छोटे घरों में बिजली पानी और संसाधनों की खपत कम होती है जिससे यह ट्रेंड सस्टेनेबल लिविंग को बढ़ावा देता है। कम जगह कम सामान और स्मार्ट उपयोग से कार्बन फुटप्रिंट भी घटता है।युवाओं सिंगल प्रोफेशनल्स और छोटे परिवारों के बीच माइक्रो स्पेस लिविंग तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में स्मार्ट डिजाइन तकनीक और सस्टेनेबिलिटी के मेल से छोटे घरों का यह ट्रेंड और मजबूत होगा। माइक्रो स्पेस लिविंग यह साबित कर रहा है कि घर का आकार नहीं बल्कि उसकी समझदारी से की गई प्लानिंग जीवन को बेहतर बनाती है।

  • हिजाब विवाद खत्म, नुसरत परवीन ने 23 दिन बाद जॉइन की नौकरी, CM ने जॉइनिंग लेटर देते वक्त हटाया था नकाब

    हिजाब विवाद खत्म, नुसरत परवीन ने 23 दिन बाद जॉइन की नौकरी, CM ने जॉइनिंग लेटर देते वक्त हटाया था नकाब


    नई दिल्ली।  हिजाब विवाद में फंसी आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन ने 23 दिन की देरी के बाद आखिरकार अपनी नौकरी जॉइन कर ली है। नुसरत ने अधिकारियों के दबाव के बावजूद सिविल सर्जन के पास जाने की औपचारिकता को छोड़कर सीधे विभाग में जॉइनिंग की।

    नुसरत की जॉइनिंग की आखिरी तारीख कई बार बढ़ाई गई। मूल रूप से 20 दिसंबर को जॉइनिंग की लास्ट डेट थी, जिसे 31 दिसंबर और फिर 7 जनवरी तक बढ़ाया गया।

    7 जनवरी को नुसरत ने अंतिम मौका लेकर अपना CHC जॉइनिंग पूरा किया।

    15 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांटते समय नुसरत का हिजाब हटाया था, जिसके बाद से उनकी लोकेशन और जॉइनिंग को लेकर अफसरों में भी सवाल उठ रहे थे।

    आयुष डॉक्टर की जॉइनिंग प्रोसेस:
    आयुष विभाग नियुक्ति पत्र जारी करता है। इसे लेकर कैंडिडेट को सिविल सर्जन के ऑफिस जाना होता है, जहां डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और बेसिक जानकारी ली जाती है। इसके बाद सिविल सर्जन जॉइनिंग लेटर जारी करते हैं, जिसे कैंडिडेट संबंधित CHC में दिखाकर जॉइन करता है।

    झारखंड ऑफर बनाम बिहार सैलरी:
    हिजाब विवाद के दौरान झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने नुसरत को 3 लाख रुपए मासिक वेतन, सरकारी फ्लैट और मनचाही पोस्टिंग का ऑफर दिया। वहीं बिहार में उनकी सैलरी 32 हजार रुपए प्रति माह तय है। मंत्री ने कहा कि झारखंड में डॉक्टरों, विशेषकर महिलाओं के मान-सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाता।

    हिजाब विवाद की झलक:
    15 दिसंबर को CM नीतीश कुमार ने नुसरत को नियुक्ति पत्र थमाते हुए हिजाब पर सवाल उठाया और खुद अपने हाथ से नकाब हटाया। इस दौरान डिप्टी CM सम्राट चौधरी भी नुसरत को रोकने की कोशिश में लगे। नुसरत थोड़ी देर असहज हुईं, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें नियुक्ति पत्र थमाया और जाने का इशारा किया।

    इस प्रकार, नुसरत परवीन ने विवादों के बीच अपनी नौकरी जॉइन कर भारत में महिला डॉक्टरों के लिए पेशेवर अधिकार और सम्मान की मिसाल कायम की है।

  • प्रेमानंद महाराज की जीवन शिक्षाएं: सत्य, करुणा और ईश्वर-भक्ति से परम आनंद का मार्ग

    प्रेमानंद महाराज की जीवन शिक्षाएं: सत्य, करुणा और ईश्वर-भक्ति से परम आनंद का मार्ग


    नई दिल्ली
    प्रेमानंद महाराज का जीवन और उनके विचार आज के दौर में मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन की मिसाल बन गए हैं। उनके जीवन के सूत्र सरल हैं जटिल नहीं। वे मानते हैं कि जीवन का वास्तविक आनंद भौतिक सुखों में नहीं बल्कि मन की स्थिरता सही आचरण और ईश्वर के प्रति भावनात्मक जुड़ाव में छिपा है।

    महाराज का मूल संदेश सत्य और ईमानदारी पर आधारित है। उनका मानना है कि व्यक्ति तभी संतुष्ट और आत्मविश्वासी बन सकता है जब वह अपने शब्द और कर्म में सच्चा रहे। उनके अनुसार ईमानदारी केवल नैतिक मूल्य नहीं बल्कि आत्मिक शांति और जीवन की स्थिरता का आधार है। जब हम सच के मार्ग पर चलते हैं तो जीवन की उलझनें सरल हो जाती हैं और मन हल्का महसूस करता है।

    करुणा और प्रेम को महाराज जीवन का असली आभूषण मानते हैं। दूसरों के प्रति संवेदनशीलता और मदद की भावना केवल समाज के लिए नहीं बल्कि अपने मन को भी प्रसन्नता और समृद्धि देती है। छोटे-छोटे अच्छे कर्म चाहे किसी की मदद करना हो या समय पर किसी का साथ देना जीवन को अर्थपूर्ण और सुखद बनाते हैं।मन पर नियंत्रण यानी क्रोध चिंता और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहना महाराज के जीवन मंत्रों का अहम हिस्सा है। उनका कहना है कि धैर्य संयम और आत्म-अनुशासन से ही व्यक्ति मुश्किल परिस्थितियों में भी स्थिर रह सकता है। जब हम अपने विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करना सीख जाते हैं तब जीवन सहज और संतुलित हो जाता है।

    समय और कर्म के महत्व को भी वे हमेशा रेखांकित करते हैं। समय का सम्मान करना और सही दिशा में लगातार प्रयास करना ही जीवन को सार्थक बनाता है। आलस्य और टालमटोल से बचकर किया गया नियमित और शांत कर्म न केवल परिणाम देता है बल्कि आत्मसंतोष भी प्रदान करता है।भौतिक सुख की तुलना में आंतरिक खुशी को वे अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं। जो व्यक्ति वर्तमान में अपनी उपलब्धियों और जीवन में प्राप्त चीजों के लिए कृतज्ञ रहता है वही वास्तव में आनंदित और संतुष्ट होता है। बाहरी उपलब्धियां क्षणिक हो सकती हैं लेकिन आंतरिक संतोष स्थायी और स्थिर रहता है।

    नाम-जप को वे जीवन का सबसे सरल और प्रभावी साधन बताते हैं। ईश्वर के नाम का स्मरण मन को स्थिर करता है और कठिन समय में मार्गदर्शन देता है। निस्वार्थ सेवा को महाराज भक्ति का सर्वोत्तम रूप मानते हैं जिसमें बिना किसी अपेक्षा के किए गए कर्म मन को हल्का और जीवन को सार्थक बनाते हैं।प्रेमानंद महाराज के जीवन के मंत्र यह संदेश देते हैं कि सादगी संयम और कोमल भाव के साथ जिया गया जीवन ही वास्तविक शांति संतुलन और आनंद प्रदान करता है। उनके विचार हमें दिखाते हैं कि बाहरी सुखों के पीछे भागने की बजाय सरल जीवन सही कर्म और ईश्वर-भक्ति ही परम आनंद का मार्ग हैं।

  • पेनकिलर को कहें बाय-बाय जानें क्यों फटता है आपका सिर? ये 5 गलतियां हैं जिम्मेदार

    पेनकिलर को कहें बाय-बाय जानें क्यों फटता है आपका सिर? ये 5 गलतियां हैं जिम्मेदार


    नई दिल्ली । आजकल की व्यस्त जीवनशैली में सिरदर्द एक आम समस्या बन चुकी है जिसे हम अक्सर पेनकिलर लेकर दबा देते हैं। हालांकि बार-बार होने वाला सिरदर्द हमारी रोजमर्रा की आदतों और लाइफस्टाइल से जुड़ा होता है। यदि हम इसके मूल कारणों को समझें तो दवाओं के दुष्प्रभाव से बच सकते हैं। आइए जानते हैं कुछ प्रमुख कारणों के बारे में जिनकी वजह से सिरदर्द हो सकता है।

    ब्रेकफास्ट स्किप करना

    रातभर के अंतराल के बाद शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अगर सुबह का नाश्ता नहीं करते तो ब्लड शुगर का लेवल गिर सकता है जिससे दिमाग की नसों में खिंचाव आ सकता है और परिणामस्वरूप तेज सिरदर्द हो सकता है। खासकर जब शरीर को जरूरी कैलोरी और पोषण नहीं मिल पाता तो इससे सिर में दर्द शुरू हो जाता है। इसलिए सुबह का नाश्ता कभी न छोड़ें!

    लंबे समय तक भूखे रहना

    वजन घटाने के प्रयास या व्रत के कारण अगर आप लंबे समय तक भूखे रहते हैं तो शरीर में एसिडिटी और गैस बनने लगती है। यह गैस सिर के ऊपर की ओर चढ़कर भारीपन और दर्द का कारण बनती है। हेल्थ स्पेशलिस्ट्स का कहना है कि लंबे समय तक भूखा रहने की बजाय थोड़ा-थोड़ा करके हल्का खाना खाना बेहतर होता है जिससे पेट में गैस बनने की संभावना कम हो जाती है और सिरदर्द से भी बचा जा सकता है।

    मानसिक तनाव

    आजकल का जीवन इतना तेज़ और व्यस्त है कि मानसिक तनाव एक सामान्य समस्या बन चुकी है। काम का बढ़ा हुआ बोझ और भविष्य की चिंता मांसपेशियों में खिंचाव पैदा करती है जिसे ‘टेंशन हेडेक’ कहा जाता है। तनाव की वजह से दिमाग की नसें थक जाती हैं जो धीरे-धीरे गंभीर सिरदर्द का रूप ले सकती हैं। इसे कम करने के लिए नियमित रूप से योग मेडिटेशन या हल्की एक्सरसाइज करना फायदेमंद हो सकता है।

    डिहाइड्रेशन

    शरीर में पानी की कमी होने पर ऊतक सिकुड़ने लगते हैं और नसों पर दबाव बढ़ने लगता है। अगर आप पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं तो सिरदर्द की समस्या और भी बढ़ सकती है। खासकर जब आप झुकते हैं या चलने की कोशिश करते हैं तो यह दबाव सिर में दर्द का कारण बन सकता है। डॉक्टर भी यह सलाह देते हैं कि दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और सिरदर्द से बचा जा सके।

    आंखों की थकावट

    लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने या मोबाइल और कंप्यूटर का ज्यादा इस्तेमाल करने से आंखों में थकावट हो सकती है जो सिर में दर्द का कारण बनती है। अगर आप देर तक कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करते हैं तो आंखों के सामने पिघलते हुए धब्बे या धुंधला दिखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं जो सिरदर्द में बदल जाती हैं। इसके लिए स्क्रीन ब्रेक्स लेना और आंखों को आराम देना महत्वपूर्ण है।

    अगर सिरदर्द की समस्या लगातार बनी रहती है तो इसे पेनकिलर से दबाने की बजाय अपनी आदतों और लाइफस्टाइल में बदलाव लाएं। नियमित रूप से पानी पीना मानसिक तनाव को कम करना सही समय पर भोजन करना और आंखों को आराम देना आपके सिरदर्द को कम कर सकता है। अगर फिर भी समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

  • मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग

    मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग




    मुरैना।
    वकील मृत्युंजय चौहान के सुसाइड केस में नया मोड़ आया है। बुधवार को मृतक वकील की मां, शिवकुमारी जादौन, मुरैना एसपी समीर सौरभ से मिलने पहुंचीं और भावुक होकर बोलीं कि उनके बेटे के साथ जो अत्याचार हुआ, उसकी न्यायिक कार्रवाई सिर्फ ग्वालियर में नहीं, बल्कि मुरैना में भी हो। उन्होंने कहा, “मुझे भी यहीं मार डालो, मेरा बेटा तो चला ही गया।

    मृत्युंजय की मां ने आरोप लगाया कि मुरैना पुलिस अब तक किसी ठोस कार्रवाई में नहीं जुटी है।

    12 दिसंबर को मुरैना सिविल लाइन की महिला एसआई प्रीति जादौन और कॉन्स्टेबल अराफात खान ने मृत्युंजय के साथ मारपीट की थी। इसी के चलते मृत्युंजय ने 15 दिसंबर को ग्वालियर में अपने किराए के मकान में फांसी लगाई। उन्होंने मांग की कि आरोपी महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी एफआईआर दर्ज की जाए, अवैध पिस्टल जब्त की जाए और दोनों को जिले से बाहर अटैच किया जाए क्योंकि वे परिवार को धमका रहे हैं।

    ग्वालियर पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन से पुष्टि हुई कि घटना वाले दिन आरोपी और वकील साथ थे।

    जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला एसआई ने शादी का दबाव बनाया, पूर्व पत्नी से तलाक, जमीन-जायदाद और जेवरात हड़पने की कोशिश की। इस मामले में ग्वालियर पुलिस ने बीएनएस की धारा 108 और 3(5) के तहत महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    एसपी ने कहा कि जांच जारी है और जैसे ही ग्वालियर पुलिस का एफआईआर प्रतिवेदन मिलेगा, दोनों आरोपियों को पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया जाएगा। शिवकुमारी जादौन की यह मांग न्यायपालिका और पुलिस पर दबाव डालती है कि किसी भी तरह की अवहेलना या विलंब न्याय में बाधक न बने।

    इस पूरे मामले ने मुरैना और ग्वालियर में पुलिस और न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक वकील के परिवार ने स्पष्ट किया कि केवल ग्वालियर में कार्रवाई से संतोष नहीं होगा, बल्कि मुरैना में भी एफआईआर दर्ज होना जरूरी है ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।