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  • 'अब जाति नहीं मेरिट जरूरी', जनरल कैटेगरी के आरक्षण पर SC का बड़ा फैसला; किस पर पड़ेगा असर?

    'अब जाति नहीं मेरिट जरूरी', जनरल कैटेगरी के आरक्षण पर SC का बड़ा फैसला; किस पर पड़ेगा असर?


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया है, जिसका सीधा असर सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया और जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों पर पड़ता है। कोर्ट ने साफ किया है कि जनरल या ओपन कैटेगरी किसी जाति के लिए नहीं, बल्कि मेरिट के लिए होती है।

    अगर कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार बिना किसी छूट के जनरल कट-ऑफ से ज्यादा नंबर लाता है, तो उसे जनरल कैटेगरी की सीट पर ही माना जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने क्या साफ किया?

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ओपन या जनरल कैटेगरी सभी के लिए खुली होती है, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग का हो। अगर SC, OBC, MBC या EWS का उम्मीदवार बिना किसी रियायत के जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन करता है तो उसे जनरल लिस्ट में शामिल किया जाएगा, न कि उसकी आरक्षित कैटेगरी में बांधा जाएगा।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि कई बार भर्ती में देखा गया है कि आरक्षित वर्ग का कट-ऑफ जनरल से ज्यादा चला जाता है। ऐसी स्थिति में अगर आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार जनरल कट-ऑफ पार कर लेता है, तो उसे बाहर करना गलत है।

    ‘जनरल कैटेगरी किसी की निजी नहीं’

    कोर्ट ने दोहराया कि जनरल, ओपन या अनरिजर्व्ड शब्द का मतलब है- सभी के लिए खुला। यह किसी खास जाति, वर्ग या लिंग के लिए आरक्षित नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसलोंइंद्रा साहनी केस और सौरव यादव केस का हवाला देते हुए कहा, “ओपन कैटेगरी में आने की एक ही शर्त है- मेरिट। यह नहीं देखा जाएगा कि उम्मीदवार किस वर्ग से है।”

    ‘डबल फायदा’ वाला तर्क खारिज

    कोर्ट ने यह दलील भी खारिज कर दी कि ऐसे उम्मीदवारों को शामिल करने से उन्हें ‘डबल फायदा’ मिलेगा। साफ कहा गया कि अगर कोई रियायत नहीं ली गई है, तो यह कोई अतिरिक्त लाभ नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म में अपनी जाति लिख देना अपने आप में आरक्षित सीट पाने का अधिकार नहीं देता, बल्कि सिर्फ यह बताता है कि उम्मीदवार आरक्षित सूची में भी दावेदार हो सकता है।

    क्या था मामला?

    यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट की भर्ती से जुड़ा था। अगस्त 2022 में हाईकोर्ट ने 2756 पदों (जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II) के लिए भर्ती निकाली थी। लिखित परीक्षा के बाद मई 2023 में जब नतीजे आए तो SC, OBC, MBC और EWS का कट-ऑफ जनरल से ज्यादा निकल गया। कुछ आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने जनरल कट-ऑफ पार किया, लेकिन अपनी कैटेगरी का कट-ऑफ न होने के कारण उन्हें अगले राउंड से बाहर कर दिया गया।

    हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

    इन उम्मीदवारों ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने कहा कि पहले जनरल लिस्ट सिर्फ मेरिट के आधार पर बननी चाहिए और जो उसमें आ जाएं उन्हें अलग से आरक्षित लिस्ट में नहीं रखा जा सकता। अब दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी फैसले को सही ठहराते हुए राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन की अपील खारिज कर दी।

    इस फैसले का मतलब क्या है?

    जनरल कैटेगरी किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि मेरिट की कैटेगरी है
    आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार अगर बिना छूट जनरल कट-ऑफ पार करता है, तो वह जनरल सीट पर ही जाएगा
    इससे जनरल उम्मीदवारों के अधिकार नहीं छिने, बल्कि मेरिट का नियम मजबूत हुआ है

  • IIFL कैपिटल का दावा: 2025 की बड़ी कटौती के बाद भी 50 बेसिस पॉइंट्स की गुंजाइश

    IIFL कैपिटल का दावा: 2025 की बड़ी कटौती के बाद भी 50 बेसिस पॉइंट्स की गुंजाइश


    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंकRBI साल 2026 में एक बार फिर ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। IIFL कैपिटल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में 1.25 प्रतिशत की बड़ी कटौती के बाद भी केंद्रीय बैंक के पास नीतिगत दरों को 0.50 प्रतिशत यानी 50 बेसिस पॉइंट्स तक और घटाने की गुंजाइश बनी हुई है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो होम लोन ऑटो लोन और पर्सनल लोन लेने वालों की EMI और सस्ती हो सकती है जिससे आम लोगों को सीधी राहत मिलेगी।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल रेपो रेट और कोर इन्फ्लेशन के बीच का अंतर करीब 2.8 प्रतिशत है जो पिछले सात वर्षों के औसत 1.1 प्रतिशत से कहीं ज्यादा है। जानकारों का मानना है कि महंगाई के नियंत्रण में रहने और इस बड़े अंतर के कारण RBI के पास तकनीकी और आर्थिक दोनों आधार मौजूद हैं जिनके सहारे वह ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है। यही वजह है कि 2026 में रेट कट की संभावना को बाजार पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर रहा है।गौरतलब है कि साल 2025 में RBI ने आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने के मकसद से ब्याज दरों में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की थी। दिसंबर 2025 में आखिरी बार 0.25 प्रतिशत की कटौती के बाद रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया था। अब बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 में रेपो रेट 5 प्रतिशत से नीचे या उसके आसपास पहुंच सकता है। यह स्तर कर्ज को और सस्ता बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    अगर 2026 में 0.50 प्रतिशत की अतिरिक्त कटौती होती है तो बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर लेंडिंग रेट घटाने का दबाव बढ़ेगा। इसका फायदा न सिर्फ नए लोन लेने वालों को मिलेगा बल्कि पहले से कर्ज चुका रहे लोगों की EMI भी कम हो सकती है। खासतौर पर होम लोन और कार लोन की मासिक किस्तें घटने से घरेलू बजट पर दबाव कम होगा। दूसरी ओर कंपनियों को सस्ता कर्ज मिलने से निवेश विस्तार और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि इसका दूसरा पहलू यह है कि फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने वालों को ब्याज दरों में मामूली गिरावट झेलनी पड़ सकती है।

    IIFL कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार ब्याज दरों में नरमी और सरकार के सुधारात्मक कदम मिलकर देश की GDP ग्रोथ को मजबूती दे सकते हैं। बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ बेहतर रहने और वित्तीय हालात मजबूत बने रहने की उम्मीद जताई गई है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने का अनुमान है जिससे महंगाई पर नियंत्रण बना रह सकता है। यह स्थिति RBI के लिए रेट कट के पक्ष में एक मजबूत कारक मानी जा रही है।

    निवेशकों के लिहाज से भी यह संकेत अहम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में संभावित कटौती से शेयर बाजार को सहारा मिल सकता है। बैंकिंग रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। कुछ विश्लेषक निफ्टी में मौजूदा स्तर से करीब 15 प्रतिशत तक रिटर्न की संभावना जता रहे हैं जबकि स्मॉल कैप शेयरों में भी धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं। कुल मिलाकर 2026 में ब्याज दरों में कटौती की संभावना आम लोगों कारोबार और बाजार—तीनों के लिए सकारात्मक मानी जा रही है।

  • भोपाल में सक्रिय हैं 6 ईरानी गैंग. चोरी-ठगी से लेकर नकली सोना खपाने तक के कारनामे

    भोपाल में सक्रिय हैं 6 ईरानी गैंग. चोरी-ठगी से लेकर नकली सोना खपाने तक के कारनामे

    भोपाल । भोपाल के ईरानी डेरे में अब तक की पुलिस जांच से यह खुलासा हुआ है कि यहां पर एक नहीं. बल्कि 6 से ज्यादा गैंग सक्रिय हैं। इन गैंग्स के पास अपनी-अपनी अपराधों की शृंखलाएँ हैं. और ये गैंग विभिन्न तरीकों से आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। इन गैंग्स का संचालन अलग-अलग लीडर्स करते हैं. लेकिन इन सभी गैंग्स के पीछे एक ही सरगना है राजू ईरानी. जो अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है
    ईरानी डेरे से पुलिस को एक बड़ी मात्रा में चोरी के सामान जैसे मोबाइल. लैपटॉप. सीपीयू. पैनड्राइव आदि मिले हैं. जिनका परीक्षण किया जा रहा है। माना जा रहा है कि ये गैंग चोरी के मोबाइलों का सिक्योरिटी लॉक तोड़ने के लिए इन डिवाइसों का इस्तेमाल करते थे।

    काला ईरानी का प्रॉपर्टी कारोबार

    इसके अलावा. पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि ‘काला ईरानी’. जो निशातपुरा इलाके में लंबे समय से प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़ा था. पर भी पुलिस की नजर है। काला ने जनता नगर कॉलोनी में कई प्लॉटों को हेरफेर कर बेचा और करोड़ों की संपत्ति बना ली। पुलिस अब उसकी संपत्ति की बारीकी से जांच कर रही है। काले ईरानी के करीबी रहीम पर भी पुलिस की विशेष नजर है।

    सफर में होना और अपराधों का फैलाव

    ईरानी डेरे के अपराधी. जिनकी संख्या सैकड़ों में है. लंबे समय तक दूसरे शहरों और राज्यों में रहते हैं. ताकि वे विभिन्न आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे सकें। इस समय को गैंग “सफर में होना” कहते हैं। इसमें कबीले के युवा विभिन्न अपराधों को अंजाम देते हैं और पकड़े जाने पर माल को कबीले तक सुरक्षित रूप से पहुंचाने के लिए दो अन्य लोग जिम्मेदार होते हैं। ये लोग बड़ी दूरी तय करने के लिए लग्जरी कार और बाइक का इस्तेमाल करते हैं।

    रिश्तेदारी का नेटवर्क और अपराध का फैलाव

    गैंग के कई सदस्य आपस में रिश्तेदार हैं. और इन रिश्तों के कारण उनका नेटवर्क महाराष्ट्र और राजस्थान तक फैला हुआ है। इस रिश्तेदारी का लाभ उठाते हुए यह गैंग दिल्ली. मुंबई. आंध्र प्रदेश. छत्तीसगढ़. राजस्थान. तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में आपराधिक गतिविधियाँ कर रहा है। ईरानी डेरा भोपाल में चोरों. ठगों और लुटेरों का पनाहगार बन चुका है। इस डेरा में रहने वाले करीब 70 परिवारों में हर परिवार में किसी न किसी का क्रिमिनल रिकॉर्ड है। यह गैंग न केवल मध्य प्रदेश में. बल्कि देश के 12 राज्यों में भी आपराधिक वारदातें अंजाम देता रहा है। वे गिरोह बनाकर दूसरे राज्यों में स्पेशल 26 फिल्म की तर्ज पर नकली सेल टैक्स. कस्टम. सीबीआई और पुलिस अधिकारी बनकर लूट और ठगी की घटनाओं को अंजाम देते हैं।

    पुलिस पर हमला और हिंसा का सामना

    हाल ही में. भोपाल में पुलिस ने एक हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने के लिए दबिश दी. तो स्थानीय महिलाओं ने पुलिस का रास्ता रोका और बाद में पुरुषों के साथ मिलकर पुलिस जवानों से झूमाझटकी की। इस बवाल के बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज किया और हंगामे को काबू किया। पुलिस ने इस हिंसक घटना में 24 पुरुषों और 10 महिलाओं को गिरफ्तार किया। भोपाल का ईरानी डेरा अब अपराधियों के लिए एक कुख्यात ठिकाना बन चुका है. जहां से पूरे देश में आपराधिक गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं। पुलिस द्वारा की जा रही जांच और दबिश के बावजूद. इस गैंग का सरगना राजू ईरानी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगातार उग्र विरोध और हिंसा भी हो रही है. लेकिन यह गैंग अब तक अपनी पकड़ बनाए हुए है।

  • मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का असरदिल्ली से आने वाली ट्रेनें लेट. स्कूलों में छुट्टी जारी

    मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का असरदिल्ली से आने वाली ट्रेनें लेट. स्कूलों में छुट्टी जारी


    भोपाल । मध्यप्रदेश में इस समय कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे का प्रभाव बहुत गहरा है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में रात का तापमान 10 डिग्री से नीचे चला गया है. और कई इलाकों में यह और भी नीचे पहुंच चुका है। उमरिया में तापमान 3.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. जबकि राजगढ़. खजुराहो और शिवपुरी में 4.5 से 5 डिग्री सेल्सियस तक तापमान गिरा है। वहीं. रीवा में भी 5.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    बुधवार की सुबह कोहरे के कारण प्रदेश के आधे हिस्से में दृश्यता कम रही। विशेष रूप से सतना. दतिया. गुना. रीवा. ग्वालियर. राजगढ़. खजुराहो. नौगांव और सीधी जैसे इलाकों में कोहरे का असर सबसे ज्यादा रहा। इस कारण दिल्ली से आने वाली एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनें लेट हो गई हैं. जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    इसके साथ ही. इंदौर. रायसेन. ग्वालियर. मऊगंज. धार और नर्मदापुरम जिलों के स्कूलों में भी बुधवार को छुट्टी घोषित कर दी गई है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में कोल्ड वेव और शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। इससे पहले भी शाजापुर. शहडोल. सिवनी. मंदसौर. सीहोर में शीतलहर का असर देखा गया था. और भोपाल-राजगढ़ में तीव्र शीतलहर भी चली थी।

    प्रदेश में पिछले तीन दिन से लगातार कड़ाके की सर्दी पड़ रही है. जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। इस सर्दी की वजह से ही इंदौर. उज्जैन. मंदसौर. शाजापुर. विदिशा. ग्वालियर. अशोकनगर. रायसेन. आगर-मालवा. भिंड. टीकमगढ़. हरदा. नीमच. रतलाम. राजगढ़. मंडला. जबलपुर. दमोह. डिंडौरी. नर्मदापुरम. झाबुआ. छतरपुर. सीधी. बैतूल और कई अन्य जिलों में स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है।

    इंदौर. रायसेन. ग्वालियर और नर्मदापुरम में बुधवार को भी स्कूलों की छुट्टियां जारी रही। वहीं. भोपाल. धार. सीहोर. अनूपपुर. बड़वानी. मुरैना और खरगोन में स्कूल सुबह 9 बजे के बाद ही खोले गए हैं। इस कड़ाके की ठंड ने बच्चों को स्कूलों तक पहुंचने में दिक्कतें दी हैं. खासकर छोटे बच्चों को सुबह-सुबह ठंड में स्कूल पहुंचने में काफी परेशानी हो रही है।

    इस बार कड़ाके की ठंड का असर खास रहा है। नवंबर और दिसंबर के महीनों में प्रदेश में कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी थी. और दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है। जनवरी के पहले सप्ताह में भी प्रदेश में माइनस तापमान की स्थिति देखने को मिली।

    सर्दी का यह मौसम क्यों खास है

    मौसम विभाग के मुताबिक. दिसंबर और जनवरी में उत्तर भारत से सर्द हवाएं प्रदेश की ओर आती हैं. जिसके कारण इन महीनों में कड़ाके की ठंड होती है। इन दो महीनों में खासतौर पर शीतलहर और कोल्ड वेव जैसी स्थितियां बनती हैं। पिछले 10 सालों में ऐसे ही ट्रेंड देखे गए हैं. और इस बार भी जनवरी में मावठा हल्की बारिश का असर कुछ जिलों में देखा गया है।

    प्रदेश के प्रमुख शहरों में जनवरी के मौसम का ट्रेंड भी बहुत दिलचस्प है

    भोपाल18 जनवरी 1935 को यहां का रात का तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका था। 26 जनवरी 2009 को दिन का तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।इंदौरजनवरी में माइनस तापमान का रिकॉर्ड 16 जनवरी 1935 को माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस था।उज्जैन22 जनवरी 1962 को यहां पारा 0 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका था।

    अंत में. मध्यप्रदेश में इस बार सर्दी और कोहरे का असर अत्यधिक देखा जा रहा है. जिससे न सिर्फ आम जनजीवन प्रभावित हुआ है. बल्कि स्कूलों और ट्रेनों की समय सारणी भी गड़बड़ाई है। ठंड और कोहरे के कारण कई ट्रेनें लेट हो रही हैं. और छोटे बच्चों को स्कूल पहुंचने में परेशानी हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार. यह स्थिति आने वाले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।

  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्‍याचार जारी, चोरी के शक में नहर में छलांग लगाने से मौत

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्‍याचार जारी, चोरी के शक में नहर में छलांग लगाने से मौत

    ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर लक्षित हमलों की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। चोरी के संदेह में भीड़ के पीछा करने से बचने के लिए 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार ने नहर में छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार दोपहर भंडारपुर गांव के निवासी मिथुन का शव बरामद किया।
    यह घटना पड़ोसी देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा में तीव्र वृद्धि के बीच हुई है। मिथुन सरकार की मौत पिछले कुछ दिनों में सामने आई क्रूर हमलों की श्रृंखला में यह नई घटना है।

    हिंदू, बौद्ध और ईसाई एकता परिषद ने एक बयान जारी कर दिसंबर महीने में कम से कम 51 लक्षित घटनाओं का खुलासा किया है, जिनमें 10 हत्याएं शामिल हैं। परिषद ने आगजनी, बलात्कार और लूटपाट के मामलों का विस्तृत विवरण देते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की है कि ये अत्याचार 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले अल्पसंख्यकों को डराने-धमकाने का एक सुनियोजित प्रयास प्रतीत होते हैं।

    परिषद की रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश ने पहले भी राजनीतिक उथल-पुथल का सामना किया है, लेकिन वर्तमान समय में संस्थागत कमजोरी और बढ़ती सांप्रदायिक चिंता का खतरनाक संयोजन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ये सब उस समय हो रहा जब देश 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि शेख हसीना सरकार के 2024 में गिरने के बाद अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों पर हमलों में तेजी आई है।

    वहीं, मानवाधिकार पर्यवेक्षकों का मानना है कि हालिया हत्याएं कोई छिटपुट त्रासदी नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की अपने सबसे कमजोर नागरिकों की रक्षा करने की क्षमता में आई व्यापक विफलता के संकेत हैं। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अंतरिम प्रशासन की स्थिरता को लेकर चिंता व्यक्त की है।

  • दूषित पानी पर हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार, इंदौर की ‘स्वच्छ’ छवि पर लगे दाग से कोर्ट चिंतित

    दूषित पानी पर हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार, इंदौर की ‘स्वच्छ’ छवि पर लगे दाग से कोर्ट चिंतित


     इंदौर।  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और इंदौर नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस गंभीर लापरवाही ने न सिर्फ आम नागरिकों की जान ली, बल्कि ‘देश के सबसे स्वच्छ शहर’ के रूप में पहचान बना चुके इंदौर की छवि को भी गहरा आघात पहुंचाया है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी स्तर पर की गई लापरवाही अस्वीकार्य है। यदि जरूरत पड़ी तो दोषी अधिकारियों की सिविल के साथ-साथ आपराधिक जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

    हाईकोर्ट में दूषित पेयजल से संबंधित पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी संकेत दिया कि पीड़ित परिवारों को दिया गया मुआवजा यदि अपर्याप्त पाया गया, तो उसे बढ़ाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। अदालत ने राज्य सरकार और नगर निगम से विस्तृत जवाब के साथ नई और अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे क्या कार्ययोजना है।कोर्ट ने अपने आदेश में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि जीवन के अधिकार में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का अधिकार भी शामिल है। इस अधिकार की अनदेखी को अदालत ने गंभीर अपराध की श्रेणी में माना। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को निर्धारित की गई है, जिसमें राज्य के मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। इससे साफ है कि कोर्ट इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

    स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए, जिनमें से 6 मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुल 110 मरीज फिलहाल विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। अब तक 421 मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे, जिनमें से 311 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि 15 मरीज अभी भी आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि 31 दिसंबर को ही हाईकोर्ट ने स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, इसके बावजूद प्रभावित इलाकों में दूषित पानी की सप्लाई जारी रही। वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि यदि समय रहते शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई होती, तो यह जनहानि रोकी जा सकती थी।अदालत के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि वर्ष 2022 में नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पास किया गया था लेकिन फंड जारी न होने के कारण काम शुरू ही नहीं हो सका। इसके अलावा 2017-18 में लिए गए 60 जल नमूनों में से 59 नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट सामने होने के बावजूद ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, जिससे हालात लगातार बिगड़ते चले गए।

  • इंदौर दूषित पानी से न केवल जानें गईं. छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी भी प्रभावित

    इंदौर दूषित पानी से न केवल जानें गईं. छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी भी प्रभावित


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है. और सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं. इस भयावह स्थिति का असर केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं. बल्कि यहां के छोटे कारोबारों पर भी गहरा पड़ा है। दूषित पानी के कारण लोग बाहर का खाना खाने से बचने लगे हैं. जिसके कारण फास्ट फूड. चाय-नाश्ता और ठेले-खोमचों पर ग्राहकी पूरी तरह से ठप हो गई है।

    राजवीर सिंह कुशवाह. जो भागीरथपुरा में बर्गर. पिज्जा और चायनीज आइटम बेचते थे. बताते हैं कि नए साल की छुट्टियों में उनके कारोबार की सबसे ज्यादा कमाई होती थी। 31 दिसंबर और 1 जनवरी के बीच उनका बिजनेस बहुत अच्छा चलता था. लेकिन इस बार 28 दिसंबर से 5 जनवरी तक दुकान पूरी तरह बंद रही। “हमारे फास्ट फूड आइटम्स में पानी का इस्तेमाल होता है. और खराब पानी के कारण हमें दुकान बंद रखनी पड़ी। अब दुकान तो खोली है. लेकिन ग्राहक बिल्कुल नहीं आ रहेउन्होंने कहा।

    इसी तरह. महेश हार्डिया. जो पानीपुरी और चाट बेचते हैं. बताते हैं कि 8-10 दिनों से उनका ठेला बंद है। पानी की गंदगी के कारण प्रशासन ने ठेला बंद करने का आदेश दिया था। “हम रोज 700-800 रुपये कमाते थे. लेकिन अब काम नहीं हो रहा। अब तक जितनी सेविंग्स हैं. उससे काम चल रहा है। जब तक पानी की समस्या ठीक नहीं होती. काम में सुधार की उम्मीद कम हैमहेश ने कहा।नाश्ते की दुकान चलाने वाली सीमा सिकरवार भी परेशान हैं। दूषित पानी के कारण ग्राहक बहुत कम हो गए हैं। पहले की तरह ज्यादा ग्राहक नहीं आ रहे हैं। अब बोरिंग का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इससे भी ज्यादा समस्या हो रही है सीमा ने बताया।

    दूसरी ओर. इस संकट का असर अब परिवारों पर भी पड़ने लगा है। रोशनी कोरी. जो कपड़े की दुकान पर काम करती थीं. ने बताया कि उनके परिवार ने भागीरथपुरा छोड़ने का फैसला किया है।मेरे बेटे की तबीयत खराब हो गई थी. अब ठीक हो गया है. लेकिन इस गंदे पानी के कारण हम सागर लौटने का सोच रहे हैं। हम यहां 8-9 महीने से किराए पर रह रहे थे. लेकिन अब हमें यहां से पलायन करना पड़ रहा हैउन्होंने कहा।इस क्षेत्र में दूषित पानी का असर गहरा है और इससे छोटे व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि जब तक पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं होती. उनका कारोबार ठीक से नहीं चल पाएगा।

    वहीं. कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर लगातार हालात का जायजा ले रहे हैं और पानी की सप्लाई को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन जब तक लोग भरोसा नहीं करते. व्यापारियों की स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं दिख रही है।इंदौर में हुई इस जलसंकट की घटना ने ना सिर्फ स्वास्थ्य को प्रभावित किया है. बल्कि रोजी-रोटी के संकट को भी जन्म दिया है। इस गंभीर स्थिति में छोटे कारोबारी अपनी दिक्कतें साझा कर रहे हैं. और प्रशासन से जल्द सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है. और सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं. इस भयावह स्थिति का असर केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं. बल्कि यहां के छोटे कारोबारों पर भी गहरा पड़ा है।
    दूषित पानी के कारण लोग बाहर का खाना खाने से बचने लगे हैं. जिसके कारण फास्ट फूड. चाय-नाश्ता और ठेले-खोमचों पर ग्राहकी पूरी तरह से ठप हो गई है।राजवीर सिंह कुशवाह. जो भागीरथपुरा में बर्गर. पिज्जा और चायनीज आइटम बेचते थे. बताते हैं कि नए साल की छुट्टियों में उनके कारोबार की सबसे ज्यादा कमाई होती थी। 31 दिसंबर और 1 जनवरी के बीच उनका बिजनेस बहुत अच्छा चलता था. लेकिन इस बार 28 दिसंबर से 5 जनवरी तक दुकान पूरी तरह बंद रही। “हमारे फास्ट फूड आइटम्स में पानी का इस्तेमाल होता है. और खराब पानी के कारण हमें दुकान बंद रखनी पड़ी। अब दुकान तो खोली है. लेकिन ग्राहक बिल्कुल नहीं आ रहेउन्होंने कहा।
    इसी तरह. महेश हार्डिया. जो पानीपुरी और चाट बेचते हैं. बताते हैं कि 8-10 दिनों से उनका ठेला बंद है। पानी की गंदगी के कारण प्रशासन ने ठेला बंद करने का आदेश दिया था। हम रोज 700-800 रुपये कमाते थे. लेकिन अब काम नहीं हो रहा। अब तक जितनी सेविंग्स हैं. उससे काम चल रहा है। जब तक पानी की समस्या ठीक नहीं होती. काम में सुधार की उम्मीद कम हैमहेश ने कहा।नाश्ते की दुकान चलाने वाली सीमा सिकरवार भी परेशान हैं।दूषित पानी के कारण ग्राहक बहुत कम हो गए हैं। पहले की तरह ज्यादा ग्राहक नहीं आ रहे हैं। अब बोरिंग का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इससे भी ज्यादा समस्या हो रही है सीमा ने बताया।दूसरी ओर. इस संकट का असर अब परिवारों पर भी पड़ने लगा है।
    रोशनी कोरी. जो कपड़े की दुकान पर काम करती थीं. ने बताया कि उनके परिवार ने भागीरथपुरा छोड़ने का फैसला किया है। मेरे बेटे की तबीयत खराब हो गई थी. अब ठीक हो गया है. लेकिन इस गंदे पानी के कारण हम सागर लौटने का सोच रहे हैं। हम यहां 8-9 महीने से किराए पर रह रहे थे. लेकिन अब हमें यहां से पलायन करना पड़ रहा हैउन्होंने कहा।इस क्षेत्र में दूषित पानी का असर गहरा है और इससे छोटे व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि जब तक पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं होती. उनका कारोबार ठीक से नहीं चल पाएगा।
    वहीं. कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर लगातार हालात का जायजा ले रहे हैं और पानी की सप्लाई को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन जब तक लोग भरोसा नहीं करते. व्यापारियों की स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं दिख रही है। इंदौर में हुई इस जलसंकट की घटना ने ना सिर्फ स्वास्थ्य को प्रभावित किया है. बल्कि रोजी-रोटी के संकट को भी जन्म दिया है। इस गंभीर स्थिति में छोटे कारोबारी अपनी दिक्कतें साझा कर रहे हैं. और प्रशासन से जल्द सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

  • इस साल मकर संक्रांति पर सूर्यदेव होंगे उत्तरायण, इन राशिवालों के लिए शुभ फलदायी

    इस साल मकर संक्रांति पर सूर्यदेव होंगे उत्तरायण, इन राशिवालों के लिए शुभ फलदायी

    उज्‍जैन। इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी दिन बुधवार को है. इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इसके साथ ही सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण होंगे, जिससे देवताओं का दिन प्रारंभ होगा. उत्तरायण को देवताओं का दिन का जाता है और दक्षिणायन को देवताओं का रात होता है. मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव का प्रभाव बढ़ता है. मकर संक्रांति के अवसर पर 5 राशिवालों पर सूर्य देव की कृपा होगा. सूर्य देव की कृपा होने से नौकरी, मान, सम्मान, पद आ​दि में बढ़ोत्तरी होती है, वहीं पिता का सहयोग मिलता है. सरकार, शासन, सत्ता से लाभ की स्थितियां बनती हैं.
    आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति किन 5 राशिवालों के लिए शुभ फलदायी है?
    मकर संक्रांति का राशिफल
    मेष: मकर संक्रांति का दिन मेष राशि के लोगों के लिए शुभ फलदायी होने वाला है. इस दिन आपको कोई खुशखबरी मिल सकती है. जो लोग नौकरी ​की तलाश कर रहे हैं या जॉब बदलना चाहते हैं, उन लोगों के लिए मकर संक्रांति शुभ होगी. यह आपके जीवन में कुछ अच्छे बदलाव लेकर आ रहा है. मकर संक्रांति पर आपके धन और संपत्ति में भी वृद्धि होगी. बिजनेस करने वालों को मुनाफा होगा.
    वृषभ: मकर संक्रांति के अवसर पर वृषभ राशि के लोगों की आमदनी में बढ़ोत्तरी के संकेत हैं. आय के नए स्रोतों से आपको धन लाभ होगा या अचानक धन लाभ मिल सकता है. फंसा हुआ पैसा वापस मिलने से खुशी होगी. इस दिन निवेश से आपको मुनाफे की उम्मीद है. नौकरीपेशा लोगों को नई जॉब या पद में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव मिल सकता है
    कर्क: मकर संक्रांति कर्क राशिवालों के धन में बढ़ोत्तरी करने वाली है. आपका बैंक बैलेंस बढ़ सकता है या आप पहले से अधिक बचत करने में सफल हो सकते हैं. सूर्य देव की कृपा से आप स्वस्थ रहेंगे और आपको रोगों से छुटकारा मिलेगा. इस दिन आप अपने काम को और बढ़ाने की सोच सकते हैं. बिजनेस करने वालों के लिए दिन शुभ रहेगा.
    सिंह: आपकी राशि के स्वामी ग्रह सूर्य हैं और मकर संक्रांति आपके लिए उन्नतिदायक होगी. नौकरीपेशा लोगों के लिए लाभ की स्थितियां बनेंगी. नई जॉब का प्रस्ताव मिल सकता है, लेकिन सोच समझकर फैसला करें. आप पर माता लक्ष्मी की कृपा रहेगी. धन का संकट नहीं होगा. आपका मनोबल मजबूत रहेगा. घर में पिता और कार्यस्थल पर वरिष्ठों का सहयोग प्राप्त होगा.
    मीन: मकर संक्रांति मीन राशिवालों के लिए भी लाभकारी है. जो लोग सरकारी नौकरी करते हैं या सरकार से जुड़े कार्य करते हैं, उनको लाभ होगा. इससे आपकी उन्नति की राह आसान होगी. आपके धन और धान्य में बढ़ोत्तरी होगी. सूर्य देव की कृपा से बेरोजगार लोगों को काम मिल सकता है. आपको अपने पिता या बड़े भाई से सुझाव लेना चाहिए.
  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले जारी; चोरी के शक में पीछा, नहर में छलांग लगाने से गई जान

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले जारी; चोरी के शक में पीछा, नहर में छलांग लगाने से गई जान

    बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर लक्षित हमलों की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। चोरी के संदेह में भीड़ के पीछा करने से बचने के लिए 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार ने नहर में छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई।

    पुलिस ने मंगलवार दोपहर भंडारपुर गांव के निवासी मिथुन का शव बरामद किया। यह घटना पड़ोसी देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा में तीव्र वृद्धि के बीच हुई है। मिथुन सरकार की मौत पिछले कुछ दिनों में सामने आई क्रूर हमलों की श्रृंखला में यह नई घटना है।

    हिंदू, बौद्ध और ईसाई एकता परिषद ने एक बयान जारी कर दिसंबर महीने में कम से कम 51 लक्षित घटनाओं का खुलासा किया है, जिनमें 10 हत्याएं शामिल हैं। परिषद ने आगजनी, बलात्कार और लूटपाट के मामलों का विस्तृत विवरण देते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की है कि ये अत्याचार 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले अल्पसंख्यकों को डराने-धमकाने का एक सुनियोजित प्रयास प्रतीत होते हैं।

    परिषद की रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश ने पहले भी राजनीतिक उथल-पुथल का सामना किया है, लेकिन वर्तमान समय में संस्थागत कमजोरी और बढ़ती सांप्रदायिक चिंता का खतरनाक संयोजन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ये सब उस समय हो रहा जब देश 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि शेख हसीना सरकार के 2024 में गिरने के बाद अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों पर हमलों में तेजी आई है।

    पिछले कुछ दिनों में हुई अन्य घटनाएं…

    5 जनवरी को जेसोर जिले में हिंदू व्यापारी और समाचार पत्र के कार्यवाहक संपादक राणा कांति बैरागी की गोली मारकर हत्या
    5 जनवरी को ही नरसिंगदी में किराने की दुकान मालिक मोनी चक्रवर्ती की धारदार हथियारों से हमला कर हत्या
    3 जनवरी को शरियतपुर जिले में खोकोन चंद्र दास पर हमला, इलाज के दौरान अस्पताल में मौत
    इससे पहले दिसंबर में राजबारी में अमृत मंडल की पीट-पीटकर हत्या और मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीटकर हत्या कर शव जलाने की घटनाएं सामने आई थीं।
    वहीं, मानवाधिकार पर्यवेक्षकों का मानना है कि हालिया हत्याएं कोई छिटपुट त्रासदी नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की अपने सबसे कमजोर नागरिकों की रक्षा करने की क्षमता में आई व्यापक विफलता के संकेत हैं। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अंतरिम प्रशासन की स्थिरता को लेकर चिंता व्यक्त की है।

  • विधानसभा चुनावों से पहले DMK से तकरार और TVK से इकरार? 32 पर कांग्रेस नहीं तैयार

    विधानसभा चुनावों से पहले DMK से तकरार और TVK से इकरार? 32 पर कांग्रेस नहीं तैयार


    चैन्‍नई।
    तमिलनाडु में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले वहां सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की अगुवाई वाली सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने सहयोगी पार्टी कांग्रेस को 234 सदस्यों वाली विधानसभा में मात्र 32 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है। इससे कांग्रेस नाराज हो गई है। कांग्रेस नेता अब अन्य विकल्पों की तलाश में जुट गए हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि तमिलनाडु कांग्रेस के कुछ नेता शीर्ष नेतृत्व खासकर राहुल गांधी से आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके से गठबंधन की संभानवाएं तलाशने का अनुरोध करने की तैयारी में हैं।

    यह स्थिति सीएम स्टालिन के लिए टेंशन दे सकती है।

    दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने अपने आंतरिक सर्वे के हिसाब से 40 सीटों का टारगेट सेट किया था लेकिन DMK ने उसे महज 32 सीटें ऑफर की हैं। अब ऐसी तनातनी के बाद कांग्रेस 38 सीटों तक पहुंच पाई है लेकिन स्टालिन की पार्टी टस से मस नहीं हो रही। लिहाजा, कांग्रेस ने दूसरे विकल्पों की तलाश तेज कर दी है। इसी कड़ी में कांग्रेस के कुछ नेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) से संभावित गठबंधन का मुद्दा पार्टी नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी के सामने रखने की तैयारी में हैं।
    सत्ता में हिस्सेदारी की भी मांग

    कांग्रेस सांसद माणिक्कम टैगोर ने सोमवार को साफ कहा कि पार्टी सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अगर गठबंधन सत्ता में आता है तो सरकार में हिस्सेदारी भी चाहती है। उनके इस बयान को पार्टी कार्यकर्ताओं के दबाव और चुनाव से पहले रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

    TVK ने कांग्रेस को बताया ‘स्वाभाविक सहयोगी’

    टैगोर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK ने कांग्रेस को अपना ‘प्राकृतिक सहयोगी’ बताया है। इससे तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज़ हो गई है। TVK के प्रवक्ता फेलिक्स जेराल्ड ने कहा कि विजय और राहुल गांधी के बीच दोस्ताना संबंध हैं और कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना काफ़ी अधिक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु कांग्रेस के अंदरूनी हितों के कारण बातचीत में देरी हो सकती है।

    फैसला विजय करेंगे

    इस बीच TVK नेता निर्मल कुमार ने कहा कि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी प्रमुख विजय ही करेंगे। उन्होंने कहा, “हमारे नेता सभी से सलाह-मशविरा कर गठबंधन को लेकर घोषणा करेंगे। चुनाव में अभी करीब दो महीने का समय है।” कुल मिलाकर, डीएमके के साथ सीट बंटवारे को लेकर असमंजस, सत्ता में हिस्सेदारी की मांग और TVK के साथ संभावित गठबंधन,इन सबने तमिलनाडु की राजनीति को चुनाव से पहले और दिलचस्प बना दिया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कांग्रेस किस रास्ते पर आगे बढ़ती है।