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  • महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के बावजूद निखार क्यों नहीं आता? जानें 7 गलतियां जो आपके ग्लो को छीन रही हैं

    महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के बावजूद निखार क्यों नहीं आता? जानें 7 गलतियां जो आपके ग्लो को छीन रही हैं


    नई दिल्ली । हर महिला चाहती है कि उसकी स्किन खूबसूरत और जवां बनी रहेलेकिन कभी-कभी हम अनजाने में ऐसी गलतियाँ कर बैठते हैंजो हमारे स्किनकेयर रूटीन को नुकसान पहुंचाती हैं। ये छोटी सी दिखने वाली गलतियां हमारी त्वचा को समय से पहले बेजान और थकी-थकी बना देती हैं। आइएजानते हैं कि कौन सी वो 7 आम गलतियां हैंजो आपकी स्किन की चमक को खत्म कर रही हैं और इनसे कैसे बच सकते हैं।

    सनस्क्रीन का इस्तेमाल न करना

    बहुत सी महिलाएं सोचती हैं कि केवल धूप में बाहर जाने पर ही सनस्क्रीन लगानी चाहिए। जबकियूवी किरणें सिर्फ बाहर से ही नहींबल्कि घर के अंदर भी हमें नुकसान पहुंचा सकती हैं। घर या ऑफिस में भी दिनभर की यूवी एक्सपोजर से झुर्रियां और पिगमेंटेशन बढ़ सकते हैं।इसलिएसनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल बेहद जरूरी है। स्किन टाइप के हिसाब से प्रोडक्ट्स का चुनाव न करनकई बार महिलाएं अपनी स्किन टाइप को समझे बिना ही प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने लगती हैं। यह गलत चुनाव स्किन को और भी ज्यादा ड्राईऑयली या एक्ने-प्रोन बना सकता है। जब हम सही स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का चुनाव करते हैंतो स्किन की हेल्थ बेहतर रहती है और एजिंग के निशान भी देर से नजर आते हैं।

    चेहरे को ज्यादा रगड़ना या हार्श क्लेंजर का इस्तेमाल करना

    चेहरे को सही तरीके से साफ करना जरूरी हैलेकिन इसे ज्यादा रगड़ने से हमारी स्किन की नेचुरल नमी छीन जाती है। इसके अलावाहार्श क्लींजर स्किन के लिए हानिकारक हो सकते हैंजिससे ड्राईनेस और फाइन लाइन्स जल्दी दिखने लगती हैं। हमेशा हलके और सॉफ्ट क्लींजर का ही इस्तेमाल करें।

    हाइड्रेशन की अनदेखी करना

    त्वचा को हाइड्रेटेड रखना सबसे जरूरी है। अगर आप पर्याप्त पानी नहीं पीतीं और मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल नहीं करतींतो स्किन डल और बेजान हो सकती है। हाइड्रेशन न होने से त्वचा में जल्दी झुर्रियां और फाइन लाइन्स दिखने लगती हैं। सही मात्रा में पानी पीना और अच्छा मॉइस्चराइज़र लगाना स्किन को हेल्दी बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
    स्लीप रूटीन को नजरअंदाज करना नींद का सही रूटीन न होना स्किन के लिए हानिकारक हो सकता है। नींद के दौरान स्किन खुद को रिपेयर करती हैऔर अगर आपको पर्याप्त नींद नहीं मिलती तो इससे डार्क सर्कल्सपफी आईज़ और एजिंग की समस्या हो सकती है। एक अच्छा स्लीप रूटीन स्किन के लिए बेहद फायदेमंद है।

    स्ट्रेस और अनहेल्दी डाइट

    स्ट्रेस और अनहेल्दी डाइट स्किन को नुकसान पहुंचाने में महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं। जरूरत से ज्यादा स्ट्रेस से कोलेजन का उत्पादन कम हो सकता हैजिससे स्किन की इलास्टिसिटी घटने लगती है। इसके अलावाजंक फूडमीठा और तैलीय खाद्य पदार्थ स्किन की हेल्थ को नुकसान पहुंचाते हैं। हेल्दी डाइट और मानसिक शांति रखना त्वचा के लिए फायदेमंद है।

    नाइट केयर रूटीन स्किप करना

    रात के समय स्किन को रिपेयर करने का सबसे अच्छा मौका मिलता है। लेकिन जब महिलाएं दिनभर की थकान के बाद बिना चेहरे को ठीक से साफ किए सो जाती हैंतो स्किन का नेचुरल रीजेनरेशन प्रोसेस प्रभावित होता है। नाइट क्रीम और सीरम का नियमित इस्तेमाल त्वचा के लिए बेहद लाभकारी है। इन सात सामान्य स्किनकेयर गलतियों से बचकर आप अपनी त्वचा को स्वस्थचमकदार और जवां रख सकती हैं। सही प्रोडक्ट्सहाइड्रेशनपर्याप्त नींद और हेल्दी लाइफस्टाइल स्किन को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तोअगली बार जब आप स्किनकेयर रूटीन अपनाएंगीतो इन बातों का ध्यान रखें और अपनी त्वचा को पूरी तरह से पोषण दें!

  • हिटलर से बच निकली थी एनी फ्रैंक की बहन, 96 साल की उम्र में निधन

    हिटलर से बच निकली थी एनी फ्रैंक की बहन, 96 साल की उम्र में निधन

    पोलैंड। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान हिटलर ने यहूदियों का जिस तरह से नरसंहार किया और उन्हें यातनाएं दीं, उसकी कहानी जाकर भी रूह कांप उठती है। दूसरे विश्वयुद्ध की प्रसिद्ध घटनाओं में से एक है जिसे ‘एनी फ्रैंक का धोखा’ नाम से जाना जाता है। एनी फ्रैंक होलोकॉस्ट में सबसे चर्चित पीड़ित थीं। उनके एक करीबी ने ही फ्रैंक को परिवार सहित धोखा देकर पकड़वा दिया था। उन्होंने एक डायरी लिखी जिसको बाद में ‘द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल’ के नाम से प्रकाशित किया गया । मात्र 15 साल की उम्र में ही एनी की मौत हो गई। उनकी एक सौतेली बहन इवा स्क्लॉस की 96 साल की उम्र में सोमवार को मौत हो गई है। इवा स्क्लॉस भी लंबे समय तक हिटलर के बनाए ऑस्त्विच यातना शिविर में रहीं। हालांकि रूस के हमले के बाद वह बच गईं।

    मौत का दरवाजा
    जानकारी के मुताबिक दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड में नाजियों के यातना शिविरों में करीब 10 लाख लोगों की मौत हो गई थी जिनमें से ज्यादातर यहूदी ही थे। ऑस्त्विच के यातना शिविर को ‘मौत का दरवाजा कहा जाता है। कहा जाता है कि नाजी लोग जब बंदियों को यातना शिविर में ले जाते थे तो उनके बाल तक काट लेते थे ताकि वे किसी भी तरीके से कपड़े ना बना सकें।

    एनी फ्रैंक की सौतेली बहन इवा लंदन में एनी फ्रैंक ट्रस्ट चलाती थीं। ब्रिटेन के महाराज किंग चार्ल्स थर्ड ने इस ट्रस्ट को बनाने में मदद की थी। हिटलर के यातना शिविर से बचने के बाद इवा ने ठान लिया था कि बाकी बचा हुआ जीवन वह लोगों की मदद करने और ऐसा काम करने में बिताएंगी जिससे नफरत कम हो और प्रेम को बल मिले।

    इवा का जन्म 1929 में विएना में हुआ था। ऑस्ट्रिया पर नाजियों के कब्जे के बाद वे भागकर ऐम्सटर्डम चले गए। वहीं इवा की दोस्ती एी से हुई थी। फ्रैंक की तरह इवा का परिवार भी दो साल तक यातना शिविर में रहा। 1945 में जब रूस की सेना ने शिविर से बंदियों को छुड़वाया तो इवा और उनकी मां की जान बच गई। उनके परिवार के बाकी लोग यातना शिविर में मारे गए थे। इवा के पिता भी ऑस्त्विच में ही मारे गए थे। 1953 में इवा की मां फ्रिजी ने एनी फ्रैंक के पिता से शादी कर ली। एनी फ्रैंक की मौत बेलसन बेलसन कैंप में पहले ही हो चुकी थी।

    इवा ने लगभग एक दशक तक यातना शिविर के बारे में किसी से बात ही नहीं की। वह युद्ध की उस विभीषिका से बाहर ही नहीं आ पा रही थीं। ऐसे में वह ज्यादातर चुप ही रहती थीं। 1986 में एनी फ्रैंक एग्जिबिशन शुरू होने के बाद उन्होंने फैसला किया कि वह नई पीढञी को नाजियों के अत्याचार के बारे में बताएँगी। इसके बाद उन्होंने यातना शिविर के बारे में बताना शुरू किया। इवा ने पूरा जीवन लोगों की सेवा में लगा दिया।

  • सोनिया गांधी की तबियत, सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती, हेल्थ अपडेट का इंतजार

    सोनिया गांधी की तबियत, सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती, हेल्थ अपडेट का इंतजार



    नई दिल्ली।
    सोनिया गांधी दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती हुईं हैं. बीते कुछ दिनों से सोनिया गांधी की तबीयत खराब चल रही थी, इसलिए बीती रात उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. बताया जा रहा है कि थोड़ी देर में अस्पताल की तरफ से आधिकारिक जानकारी दी जाएगी.

    सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को यहां सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उन्होंने बताया कि उनकी हालत ठीक है और उन्हें चेस्ट फिजिशियन की देखरेख में रखा गया है. अस्पताल के एक सूत्र ने PTI को बताया कि यह एक रूटीन एडमिशन है, लेकिन उन्हें पुरानी खांसी की समस्या है.

    बताया गया कि सोनिया गांधी खासकर शहर में प्रदूषण के कारण चेक-अप के लिए आती रहती हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें सोमवार शाम को भर्ती कराया गया था. सोनिया गांधी दिसंबर 2025 में 79 साल की हो गई थीं.

  • यूक्रेन के खुफिया विभाग में क्यों मची उथल-पुथल? जेलेंस्की ने करीबी से ही छीन लिया पद

    यूक्रेन के खुफिया विभाग में क्यों मची उथल-पुथल? जेलेंस्की ने करीबी से ही छीन लिया पद

    कीव। यूक्रेन में इन दिनों सेना और खुफिया विभाग में काफी उलटफेर हो रहे हैं। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने देश के खुफिया चीफ को ही बर्खास्त कर दिया है। जेलेंस्की ने ही बतायाकि वासिल मैलिउक अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। बता दें कि रूस के खिलाफ कई सफल अभियानों को लेकर मैलिउक की काफी तारीफ की गई थी। जेलेंस्की ने कहा कि उन्होंने मैलिउक से मुलाकात की और उन्हें अबतक की शानदार सेवा के लिए धन्यवाद दिया।

    मैलिउक ने कहा कि वह अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं लेकिन वह एसबीयू सिस्टम का हिस्सा बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दुश्मन के खिलाफ अभियानों में भी वह ऐक्टिव रह सकते हैं। बीते एक महीने से ही मैलिउक के हटाए जाने की खबरें चल रही थीं। सेना के भी कई अधिकारी उनके समर्थन में उतर गए थे। उनकी अगुआई में एसबीयू ने रूस के खिलाफ कई सफल अभियान चलाए थे और कई बार रूसी सेना में घुसकर हमले किए थे।

    रूस के बड़े सैन्य अधिकारी की हत्या

    मैलिउक की ही अगुआई में मॉस्को में पुतिन के केमिकल वेपन डिवीजन के चीफ की हत्या करवा दी गई थी। जून 2025 में एसबीयू ने ऑपरेशन स्पाइडरवेब चलाया था। यूक्रेन की सेना ने रूस के अंदर घुसकर परमाणु क्षमता वाले बॉम्बर विमानों पर ड्रोन अटैक किया था। पिछले ही सप्ताह जेलेंस्की ने यूक्रेन के मिलिट्री इंटेलिजेंस चीफ किरिलो बुदानोव को राष्ट्रपति कार्यालय का चीफ बना दिया था उन्होंने यह भी कहा था कि वह रक्षा मंत्री भी बदलने वाले हैं।

    जेलेंस्की ने सोमवर को ही येवगेनी खमारा को एसबीयू डिवीजन का चीफ बना दिया है। जब तक इस पद पर कोई स्थायी नियुक्ति नहीं होती तब तक वह डिपार्टमेंट का कार्यभार संभालेंगे। बीते दिनों रूस में व्लादिमीर पुतिन के आवास पर भी यूक्रेनी हमले की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने भी यूक्रेन पर नाराजगी जताई थी। हालांकि यूक्रेन ने सफाई देते हुए कहा था कि उसने ऐसा कोई हमला नहीं किया है। अब डोनाल्ड ट्रंप भी कहने लगे हैं कि यूक्रेन ने पुतिन के आवास पर हमला नहीं करवाया था।

  • बांग्लादेश में अब हिंदू विधवा के साथ गैंगरेप; पेड़ से बांधकर बाल काटे, बनाया वीडियो

    बांग्लादेश में अब हिंदू विधवा के साथ गैंगरेप; पेड़ से बांधकर बाल काटे, बनाया वीडियो


    ढाका। बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से ही हिंदू अल्पसंख्यक कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। हाल ही में दीपू चंद्र दास की नृशंस हत्या ने सारे हिंदू समुदाय और इंसानियत में विश्वास रखने वाले लोगों को हिलाकर रख दिया।
    अब बांग्लादेश के कालीगंज से दरिदंगी की एक और घटना सामने आई है। यहां एक 40 साल की विधवा महिला के साथ दो लोगों ने गैंगरेप किया और फिर उसे पेड़ से बांधकर उसके बाल काट डाले। आरोपियों ने महिला को बेइज्जत करने का वीडियो भी बना लिया और सोशल मीडिया पर डाल दिया।

    पुलिस के पास दर्ज करवाई गई शिकायत में महिला ने बताया कि उसने शाहीन उसके भाई से दो कट्ठे जमीन और एक दो मंजिला मकान खरीदा था। इसके लिए उसने उन्हें 20 लाख टका अदा किए थे। इसके कुछ दिन बाद ही शाहीन और उसका भाई और पैसे मांगने लगे। जब इस अवैध वसूली के खिलाफ महिला ने आवाज उठाई तो वे उसे धमकी देने लगे।

    स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार की शाम को शाहीन और उसका साथी हसन अचानक महिला के घर में घुस गए और उसके साथ रेप किया। इसके बाद वे विधवा महिला से 50 हजार टका यानी करीब 37 हजार रुपये की मांग करने लगे।

    पीड़िता के घर पर उस दिन कुछ मेहमान भी आए थे। आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की।
    पेड़ से बांधकर काट डाले बाल

    शिकायत के मुताबिक महिला ने जब चीखने चिल्लाने की कोशिश की तो उसे पेड़ से बांध दिया गया। आरोपियों ने इसका भी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपी उसे तब तक पीटते रहे जबतक की वह बेहोश नहीं हो गई। बाद में स्थानीय लोगों ने उसे छुड़ाया और पास के अस्पताल में भर्ती करवाया।

    अस्पताल प्रशासन ने बताया कि पहले तो महिला ने रेप की बात नहीं बताई हालांकि मेडिकल एग्जामिनेश में यौन उत्पीड़न की बात सामने आई।

    होश आने के बाद पीड़िता ने कालीगंज पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस अधिकारी ने बताया, हमने पीड़िता को थाने बुलाया था और उसकी शिकायत दर्ज की है। जांच के बाद पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई करेगी।

    महिला के साथ दरिंदगी की घठना वाले दिन ही शरीयतपुर जिले में एक हिंदू शख्स को भीड़ने बुरी तरह पीटा। इसके बाद उसे आग लगा दी गई। जान बचाने के लिए वह तालाब में कूद गया लेकिन बुरी तरह घायल होने की वजह से उसकी मौत हो गई। वहीं एक अन्य घटना में 24 दिसंबर को अमृत मंडल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की लिंचिंग के बाद उनके शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई थी।

  • विशाल रिसर्च में खुलासा: टाइप-2 डायबिटीज़ की दवा बीटा सेल्स पर करती असर, बीमारी बिगाड़ सकती है!

    विशाल रिसर्च में खुलासा: टाइप-2 डायबिटीज़ की दवा बीटा सेल्स पर करती असर, बीमारी बिगाड़ सकती है!

    नई दिल्ली। डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए जो दवाएं सालों से दी जा रही हैं, वही बीमारी को धीरे-धीरे और गंभीर बना सकती हैं। स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ बार्सिलोना की एक नई स्टडी में टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सल्फोनिल्यूरिया कैटेगरी की दवाओं को लेकर चौंकाने वाली चेतावनी दी गई है। रिसर्च के मुताबिक, ये दवाएं शुरुआत में ब्लड शुगर कंट्रोल करती हैं, लेकिन लंबे समय में उल्टा असर डाल सकती हैं।

    डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। खासतौर पर टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता। इंसुलिन अग्न्याशय की बीटा कोशिकाएं बनाती हैं, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन हालिया रिसर्च बताती है कि इन्हीं बीटा कोशिकाओं पर कुछ दवाओं का नकारात्मक असर पड़ सकता है।

    क्या कहती है रिसर्च?
    जर्नल Diabetes, Obesity and Metabolism में प्रकाशित इस स्टडी के अनुसार, सल्फोनिल्यूरिया दवाएं जैसे ग्लिबेनक्लामाइड बीटा कोशिकाओं को ज्यादा इंसुलिन रिलीज करने के लिए मजबूर करती हैं। स्टडी के लीड प्रोफेसर एडुआर्ड मोंटान्या ने बताया कि ये दवाएं कई दशकों से टाइप 2 डायबिटीज में दी जा रही हैं और कई देशों में जेनरिक रूप में आसानी से उपलब्ध हैं। हालांकि, लंबे समय तक इनके इस्तेमाल से बीटा कोशिकाओं की सेहत और उनकी पहचान पर बुरा असर पड़ सकता है।

    बीटा कोशिकाएं क्यों हो रही हैं कमजोर?
    रिसर्च में सामने आया कि ये कोशिकाएं मरती नहीं हैं, बल्कि अपनी पहचान खोने लगती हैं। लंबे समय तक ग्लिबेनक्लामाइड लेने से उन जीन की एक्टिविटी कम हो जाती है जो इंसुलिन बनाने के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा, दवाएं कोशिकाओं के अंदर मौजूद एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम में तनाव पैदा करती हैं, जिससे बीटा कोशिकाएं सही तरह से काम नहीं कर पातीं।

    दवा क्यों हो जाती है बेअसर?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, कई मरीजों में देखा गया है कि जो दवाएं शुरुआत में असरदार होती हैं, वही कुछ साल बाद कम प्रभावी हो जाती हैं। इसकी वजह बीटा कोशिकाओं की पहचान का धीरे-धीरे खत्म होना है। इससे ब्लड शुगर कंट्रोल कमजोर पड़ने लगता है और शुगर लेवल फिर बढ़ने लगता है। अच्छी बात यह है कि यह स्थिति स्थायी नहीं होती और सही इलाज से कोशिकाओं की क्षमता दोबारा लौट सकती है।

    मरीजों के लिए क्या है चेतावनी?
    डॉक्टरों का कहना है कि मरीज बिना सलाह के दवा बंद न करें। हालांकि यह स्टडी बताती है कि लंबे समय तक सल्फोनिल्यूरिया दवाओं के इस्तेमाल से समय के साथ डोज बढ़ाने या नई दवाएं जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ती है। इसलिए डायबिटीज के इलाज में नियमित जांच और सही मेडिकल गाइडेंस बेहद जरूरी है।

  • एलन मस्क की संपत्ति में एक दिन में 32.5 अरब डॉलर का इजाफा, अडानी-अंबानी को बड़ा झटका

    एलन मस्क की संपत्ति में एक दिन में 32.5 अरब डॉलर का इजाफा, अडानी-अंबानी को बड़ा झटका


    वाशिंगटन।
    साल 2025 के सबसे बड़े गेनर और दुनिया के सबसे रईस शख्स एलन मस्क (World’s richest man, Elon Musk) का जलवा नए साल में भी बरकरार है। मस्क की संपत्ति में सोमवार को 32.5 अरब डॉलर का बंपर उछाल दर्ज की गई। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स (Bloomberg Billionaires Index) के मुताबकि मस्क का नेटवर्थ 644 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। जबकि, एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी को 1.04 अरब डॉलर और अडानी को 607 मिलियन डॉलर का झटका लगा है।

    दुनिया के टॉप-10 अरबपतियों में से 3 को छोड़ सभी की संपत्ति में बढ़त दर्ज की गई है। एलन मस्क के साथ ही लैरी पेज, सर्गेई ब्रिन, जेफ बेजोस, मार्क जुकरबर्ग की दौलत में इजाफा हुआ है।


    टेस्ला के शेयरों में तेजी

    एलन मस्क की कंपनी टेस्ला के शेयरों में सोमवार को 3.10 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसका असर दुनिया के सबसे रईस शख्स एलन मस्क के नेटवर्थ पर भी पड़ा और उनकी संपत्ति 32.5 अरब डॉलर बढ़कर 644 अरब डॉलर पर पहुंच गई।


    जेफ बेजोस की बढ़ी दौलत

    दूसरे सबसे बड़े गेनर जेफ बेजोस रहे। इनकी संपत्ति में 5.89 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। अब इनके पास 255 अरब डॉलर का नेटवर्थ है। बेजोस दुनिया के तीसरे सबसे अमीर हैं। दुनिया दूसरे सबसे रईस शख्स लैरी पेज को 1.40 अरब डॉलर का फायदा हुआ है। अब इनके पास 272 अरब डॉलर की संपत्ति है।

    सर्गेई ब्रिन को 1.29 अरब डॉलर का फायदा हुआ और अब वह 253 अरब डॉलर के साथ चौथे नंबर पर हैं। पांचवे पर काबिज लैरी एलिसन को 2.36 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। उनकी संपत्ति अब 245 अरब डॉलर रह गई है।


    जुकरबर्ग को भी फायदा

    जुकरबर्ग दुनिया के अमीरों की लिस्ट में अब छठे स्थान पर हैं। उनकी संपत्ति में 2.90 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। अब इनकी कुल संपत्ति 233 अरब डॉलर हो गई है। इस टॉप-10 की लिस्ट में अकेले गैर-अमेरिकी हैं फ्रांस के बर्नार्ड अर्नाल्ट। टेक से नहीं होने के बावजूद उन्हें 443 मिलियन डॉलर का फायदा हुआ। अब 207 अरब डॉलर के साथ 7वें स्थान पर हैं।

    स्टीव बाल्मर को 3.73 मिलियन डॉलर की चोट पहुंची। अब इनकी संपत्ति 165 अरब डॉलर है। जेनसेन हुआंग 156 अरब डॉलर के साथ ब्लूमबर्ग इंडेक्स में 9वें स्थान पर हैं। इन्हें 568 मिलियन डॉलर की चोट पहुंची है। 10वें स्थान पर वॉरेन बफेट हैं। इनकी कुल संपत्ति 713 मिलियन डॉलर बढ़कर 150 अरब डॉलर हो गई है।


    अडानी-अंबानी को नुकसान

    अडानी 607 मिलियन डॉलर गंवाने के बाद 85.7 अरब डॉलर के साथ 20वें स्थान पर हैं। अंबानी 18वें स्थान पर काबिज हैं। इनकी संपत्ति में सोमवार को 1.04 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई और अब उनके पास 108 अरब डॉलर का नेटवर्थ है।

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रूसी तेल खरीदने के आरोपों को बताया पूरी तरह झूठ, दी सफाई

    रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रूसी तेल खरीदने के आरोपों को बताया पूरी तरह झूठ, दी सफाई


    नई दिल्ली।
    रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries- RIL) ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें दावा किया गया था कि रूसी तेल (Russian oil) से लदे तीन जहाज उसकी जामनगर रिफाइनरी (Jamnagar Refinery) की ओर जा रहे हैं। RIL ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस रिपोर्ट को “पूरी तरह से झूठा” बताते हुए कहा कि पिछले लगभग तीन हफ्तों में उसकी रिफाइनरी को रूसी तेल का कोई कार्गो नहीं मिला है और न ही जनवरी में कोई रूसी कच्चे तेल की डिलीवरी होने वाली है।


    पत्रकारिता पर नाराजगी

    कंपनी ने आगे कहा, “हमें गहरा दुख है कि जो लोग निष्पक्ष पत्रकारिता के अग्रणी होने का दावा करते हैं, उन्होंने RIL के इस खंडन की अनदेखी की कि वह जनवरी में डिलीवरी के लिए कोई रूसी तेल नहीं खरीद रही है। उन्होंने हमारी छवि को धूमिल करने वाली एक गलत रिपोर्ट प्रकाशित की।”


    क्या आरोप लगाया गया था?

    2 जनवरी को, ब्लूमबर्ग ने खबर दी कि कम से कम तीन टैंकर, जिनमें 2.2 मिलियन बैरल यूरल्स (रूसी कच्चा तेल) भरा हुआ था, आरआईएल के जामनगर रिफाइनरी की ओर जा रहे थे और संभवतः इसी महीने (जनवरी) में पहुंचने वाले थे।

    इसने एनालिटिक्स फर्म ‘कपलर’ के डेटा का हवाला दिया, जो कप्तानों द्वारा भेजे गए अपने वर्तमान स्थान और आगामी डिस्चार्ज बंदरगाहों के विवरण वाले लाइव सिग्नल के आधार पर जहाजों की आवाजाही पर नज़र रखती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अंतिम गंतव्य बदल सकते हैं ,क्योंकि जहाज भारत के पास पहुंचते हैं।

    कंपनी के प्रवक्ता ने क्या कहा
    एक रिलायंस प्रवक्ता ने यह स्पष्ट किया कि कार्गो कंपनी द्वारा खरीदे गए थे और यह भी कहा कि जनवरी में डिलीवरी के लिए रूसी कच्चे तेल की कोई प्रतिबद्ध शिपमेंट नहीं है। शुरुआत में अमेरिका द्वारा रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाने के बाद दूर हटने के बाद, रिलायंस ने नवंबर में घोषणा की कि वह अपनी रिफाइनरी के निर्यात-केंद्रित हिस्से में रूसी कच्चे तेल का उपयोग बंद कर देगा। तब से इसने घरेलू उपयोग के लिए गैर-प्रतिबंधित रूसी उत्पादकों से तेल की आपूर्ति शुरू कर दी है। रोसनेफ्ट पहले इस रिफाइनरी का रूसी तेल का सबसे बड़ा स्रोत था, जो प्रति दिन 5,00,000 बैरल आपूर्ति के एक दीर्घकालिक समझौते पर आधारित था।


    रुसी तेल पर ट्रंप की नजर तिरछी

    हाल के वर्षों में ओपेक उत्पादक से तेल के लिए एक प्रमुख गंतव्य रहे भारत को, रूस के साथ अपने व्यापार के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के प्रमुख सदस्यों की कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ा है। ऐसी आलोचना, जिसका जवाब सार्वजनिक रूप से अवज्ञा से मिला है। इस अनिश्चितता के कारण देश की रिफाइनरियों ने अपनी खरीद कम कर दी है, और पिछले महीने आयात तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गया।


    दुनिया की शीर्ष खरीदार थी रिलायंस

    अरबपति मुकेश अंबानी के नियंत्रण वाली रिलायंस, कपलर के आंकड़ों के अनुसार, 2024 से 2025 के अधिकांश समय तक रूसी कच्चे तेल का दुनिया की शीर्ष खरीदार थी। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी परिसर को रूसी तेल की डिलीवरी पिछले साल जनवरी से नवंबर की अवधि में प्लांट के आयात का 40% से अधिक थी।

    कपलर के डेटा के अनुसार, इन कार्गो पर व्यापारिक कंपनियों अलगफ मरीन डीएमसीसी, रेडवुड ग्लोबल सप्लाई एफजेड एलएलसी, रसएक्सपोर्ट और एथोस एनर्जी द्वारा आपूर्ति किए जाने का निशान लगा है। अलगफ मरीन और रेडवुड ग्लोबल पर यूके द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है, और पूर्व लुकोइल की ट्रेडिंग इकाई लिटास्को की मध्य पूर्वी शाखा की उत्तराधिकारी कंपनी है।

    रिलायंस एकमात्र भारतीय रिफाइनर नहीं है, जो रूसी कच्चा तेल ले रहा है, राज्य स्वामित्व वाली इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन भी गैर-प्रतिबंधित विक्रेताओं से कार्गो उठा रहे हैं। उन्हें भारी छूट, कम रिफाइनिंग मार्जिन और वाशिंगटन के साथ व्यापार वार्ता की स्थिति में अनिश्चितता ने आकर्षित किया है।

  • ईरान में होने वाला कुछ बड़ा…. भारत सरकार ने लोगों को दी गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह

    ईरान में होने वाला कुछ बड़ा…. भारत सरकार ने लोगों को दी गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह


    नई दिल्ली।
    तेहरान (Tehran) में बढ़ते सत्ता विरोधी प्रदर्शनों और हालिया वैश्विक घटनाओं को देखते हुए भारत सरकार (Government of India) ने नागरिकों को ईरान की गैर-जरूरी यात्रा (Iran Non-essential travel) से बचने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी निर्देश में कहा गया कि भारतीय नागरिकों को अगले आदेश तक इस्लामिक रिपब्लिक ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

    मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया, “ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोग पूरी सावधानी बरतें। किसी भी विरोध-प्रदर्शन या धरना स्थलों से दूर रहें और समाचार के साथ-साथ तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क बनाकर रखें। ईरान में रेजिडेंज वीजा पर रह रहे भारतीय नागरिको को, यदि उन्होंने पहले से ऐसा नहीं किया है तो भारतीय दूतावास में अपना पंजीकरण कराने की सलाह दी जाती है।”

    गौरतलब है कि ईरान में पिछले कुछ समय से खामनेई और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की शुरुआत पहले महंगाई और उससे जुड़े मुद्दों से हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे इनका रुख मानवाधिकार की तरफ बढ़ गया।

    मामला उस वक्त और बिगड़ गया, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामनेई को धमकी देते हुए कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बरती गई तो अमेरिका उनकी रक्षा के लिए वहां आएगा। इसका जवाब देते हुए खामनेई ने कहा कि अगर अमेरिका ऐसा करता है तो फिर तबाही आएगी। दूसरी तरफ इजरायल ने भी ईरान में जारी प्रदर्शनों को अपना समर्थन दिया है। हालांकि ईरान सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया है कि इन प्रदर्शनों से सख्ती के साथ निपटा जाएगा।

  • MP: ग्वालियर में BJP पार्षद ने गंदे पानी की आपूर्ति के विरोध में निकाली दंडवत यात्रा, दी ये चेतावनी

    MP: ग्वालियर में BJP पार्षद ने गंदे पानी की आपूर्ति के विरोध में निकाली दंडवत यात्रा, दी ये चेतावनी


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर शहर (Gwalior City) में गंदे पानी की आपूर्ति (Contaminated Water Supply) और विभिन्न अव्यवस्थाओं के विरोध में भाजपा पार्षद बृजेश श्रीवास (BJP councilor Brijesh Shriwas) ने सोमवार को दंडवत यात्रा निकालकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। इस यात्रा का उद्देश्य महापौर और नगर निगम प्रशासन का ध्यान नागरिकों की समस्याओं की ओर आकर्षित करना था।

    दंडवत यात्रा श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा से शुरू होकर परिषद कार्यालय तक पहुंची। इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में “स्वच्छ पानी दो”, “गंदे पानी से परेशान जनता” और “जल समस्या का समाधान करो” जैसे नारे लिखी तख्तियां थीं।

    प्रदर्शनकारियों का कहना था कि क्षेत्र में पीने योग्य पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। गंदे और बदबूदार पानी के कारण लोगों को गंभीर बीमारियों का खतरा बना हुआ है, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। यात्रा के दौरान लगाए गए बैनरों में केवल जल संकट ही नहीं, बल्कि शहर की बदहाल स्थिति को भी दर्शाया गया। इनमें टूटी सड़कें, खराब सफाई व्यवस्था, उफनते सीवर और कॉलोनियों में अंधेरे जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह मार्च नगर सरकार और महापौर को “जगाने” के लिए किया गया है।

    इस मौके पर पार्षद बृजेश श्रीवास ने कहा कि यह आंदोलन जनता की पीड़ा और नाराजगी को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द ठोस कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, हालांकि लोगों में गहरी नाराजगी साफ नजर आई।

    महापौर शोभा सिकरवार का कहना था कि यह सब सिर्फ मीडिया में आने की स्टंटबाजी है। इंदौर में जो घटनाक्रम हुआ वहां बीजेपी के महापौर हैं, जो खुद कह रहे हैं कि अधिकारी उनकी सुनते नहीं हैं। जब सत्ता सरकार में होने के बाद भी बीजेपी महापौर की बात नहीं सुनी जाती तो यहां गलती महापौर की कैसे हो सकती है। इस तरह के स्टंट से विपक्ष के पार्षद सिर्फ ध्यान भटकाने का प्रयास करते हैं। यहां सब मिलकर काम कर रहे हैं और समस्या का समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं।