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  • शिवपुरी में बड़ा घोटाला: 71 लाख की मशीन बनी 4.32 करोड़ का बोझ, EOW की सर्जिकल स्ट्राइक जारी

    शिवपुरी में बड़ा घोटाला: 71 लाख की मशीन बनी 4.32 करोड़ का बोझ, EOW की सर्जिकल स्ट्राइक जारी


    नई दिल्ली। शिवपुरी नगर पालिका में वर्ष 2015 के दौरान की गई स्वच्छता मशीनों की खरीद अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। उस समय लगभग 71.69 लाख रुपये की मशीनें खरीदी गई थीं लेकिन नियमों को दरकिनार कर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। आरोप है कि ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया को अनदेखा करते हुए एक ही दिन में सभी कार्यादेश जारी कर दिए गए और भुगतान भी तत्काल कर दिया गया। इस पूरे मामले में एक निजी फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाने की बात सामने आई है। जांच में यह भी पता चला है कि जिन आठ मशीनों का भुगतान किया गया उनमें से चार मशीनें नगर पालिका को कभी प्राप्त ही नहीं हुईं।

    दूसरा भाग करोड़ों की रिकवरी और कानूनी पेच
    मामला आगे बढ़ते हुए एमएसएमई काउंसिल तक पहुंचा जहां मूल राशि पर भारी ब्याज जोड़ते हुए कुल 4.32 करोड़ रुपये की रिकवरी तय की गई है। यह राशि मूल खरीद से कई गुना अधिक हो चुकी है जिससे नगर पालिका पर बड़ा वित्तीय बोझ खड़ा हो गया है। दूसरी ओर संबंधित कंपनी ने हाई कोर्ट में नगर पालिका के खिलाफ अवमानना याचिकाएं दायर कर दी हैं जिससे मामला और उलझ गया है। आगामी 11 मई 2026 को इस प्रकरण की महत्वपूर्ण सुनवाई तय की गई है। नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि यह पूरा मामला फर्जी दस्तावेजों और गलत आदेशों के आधार पर किया गया भुगतान है जिससे संस्था को भारी नुकसान हुआ है।

    तीसरा भाग ईओडब्ल्यू की जांच और संभावित एफआईआर
    इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ग्वालियर ने जांच शुरू कर दी है। ईओडब्ल्यू ने नगर पालिका से संबंधित सभी दस्तावेज तलब कर लिए हैं और अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग और स्टोर शाखा से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। एजेंसी जल्द ही एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। वर्तमान प्रशासन का मानना है कि यह एक सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का मामला है जिसमें जनता के धन का दुरुपयोग हुआ है। अब यह पूरा मामला न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि कानूनी रूप से भी बड़ा रूप ले चुका है और आने वाले समय में कई और खुलासे संभव हैं।

    तीसरा भाग ईओडब्ल्यू की जांच और संभावित एफआईआर

    इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ग्वालियर ने जांच शुरू कर दी है। ईओडब्ल्यू ने नगर पालिका से संबंधित सभी दस्तावेज तलब कर लिए हैं और अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग और स्टोर शाखा से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। एजेंसी जल्द ही एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। वर्तमान प्रशासन का मानना है कि यह एक सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का मामला है जिसमें जनता के धन का दुरुपयोग हुआ है। अब यह पूरा मामला न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि कानूनी रूप से भी बड़ा रूप ले चुका है और आने वाले समय में कई और खुलासे संभव हैं।
  • योगी का मास्टरस्ट्रोक: कैबिनेट विस्तार से PDA पर वार, 2027 चुनाव से पहले बदला पूरा सियासी गेम!

    योगी का मास्टरस्ट्रोक: कैबिनेट विस्तार से PDA पर वार, 2027 चुनाव से पहले बदला पूरा सियासी गेम!



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट विस्तार के जरिए एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। इस विस्तार को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका सीधा टारगेट समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूला (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को कमजोर करना माना जा रहा है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार नए मंत्रिमंडल में 6 नए चेहरों को शामिल किया गया है, जिसमें तीन OBC, दो दलित और एक ब्राह्मण नेता को जगह दी गई है। इसके साथ ही कुछ नेताओं को प्रमोशन भी दिया गया है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधकर अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

    इस विस्तार में खास ध्यान उन समुदायों पर दिया गया है, जो लोकसभा चुनावों के दौरान बीजेपी से कुछ हद तक दूर माने जा रहे थे। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जातीय समूहों को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि हर वर्ग को सरकार में हिस्सेदारी दी जा रही है।

    विशेष रूप से ओबीसी और दलित समुदाय के छोटे-छोटे जातीय समूहों को शामिल कर बीजेपी ने अपनी “सोशल इंजीनियरिंग” को और मजबूत किया है। वहीं एक ब्राह्मण नेता को शामिल कर उच्च जातियों के संतुलन को भी बनाए रखने की कोशिश की गई है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि पूरी तरह चुनावी रणनीति है, जिसका उद्देश्य 2027 से पहले सपा के PDA फॉर्मूला नैरेटिव को कमजोर करना है।

    हालांकि, विपक्ष का कहना है कि यह बदलाव चुनावी फायदा लेने की कोशिश है, जबकि बीजेपी का दावा है कि यह सामाजिक प्रतिनिधित्व और विकास आधारित प्रशासन का हिस्सा है।

    कुल मिलाकर यह कैबिनेट विस्तार उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले समय के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, जहां जातीय समीकरण और वोट बैंक की राजनीति एक बार फिर निर्णायक भूमिका निभाने वाली है।

  • गिरते Smallcap बाजार में भी चमक रही हैं ये 15 मजबूत कंपनियां, VST, Medicare और UNO Minda में दिख रहा 38% तक का अपसाइड, निवेशकों के लिए बड़ा संकेत

    गिरते Smallcap बाजार में भी चमक रही हैं ये 15 मजबूत कंपनियां, VST, Medicare और UNO Minda में दिख रहा 38% तक का अपसाइड, निवेशकों के लिए बड़ा संकेत

    नई दिल्ली ।
    बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और ऐसे समय में छोटे शेयरों यानी Smallcap सेगमेंट पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिलता है। जब भी बाजार में गिरावट आती है, निवेशकों के बीच यह डर बढ़ जाता है कि छोटे शेयर कमजोर हो सकते हैं या उनका बिजनेस प्रभावित हो सकता है। लेकिन हर गिरता हुआ स्टॉक कमजोर कंपनी का संकेत नहीं होता। कई बार पूरा सेक्टर या बाजार का सेंटीमेंट दबाव में आ जाता है, जबकि कंपनी का असली बिजनेस और उसकी बुनियाद पहले जैसी मजबूत बनी रहती है। यही वजह है कि निवेशकों के लिए सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि कंपनी की क्वालिटी और मैनेजमेंट को समझना ज्यादा जरूरी हो जाता है।

    वर्तमान स्थिति में कुछ Smallcap और Midcap कंपनियां ऐसी हैं जो गिरते बाजार के बावजूद अपने मजबूत प्रदर्शन और स्थिर मैनेजमेंट के कारण चर्चा में बनी हुई हैं। इनमें कई ऐसी कंपनियां शामिल हैं जिनका बिजनेस मॉडल मजबूत है और जिनके भविष्य में बेहतर प्रदर्शन की संभावना मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में मौजूदा दबाव का असर इन कंपनियों की लंबी अवधि की ग्रोथ पर नहीं पड़ता, बल्कि यह निवेश के नए अवसर भी पैदा कर सकता है।

    VST Industries, Rainbow Children’s Medicare और UNO Minda जैसी कंपनियों को बाजार में मजबूत स्थिति वाली कंपनियों के रूप में देखा जा रहा है। इन कंपनियों के बिजनेस मॉडल स्थिर हैं और इनके मैनेजमेंट को भी अनुभवी माना जाता है। इसी वजह से इन पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में इनमें करीब 38 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिल सकती है, हालांकि यह पूरी तरह बाजार की स्थिति और कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

    पिछले कुछ समय से बाजार लगातार उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है। वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय तनाव जैसे कारणों ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर शेयर बाजार के छोटे और मध्यम वर्ग के शेयरों पर देखने को मिला है, जहां अक्सर तेज गिरावट दर्ज की जाती है।

    इसके बावजूद कुछ कंपनियां ऐसी हैं जो अपने मजबूत बिजनेस स्ट्रक्चर के कारण बाजार के दबाव को बेहतर तरीके से संभाल रही हैं। JSW Infra और APL Apollo Tubes जैसी कंपनियां भी इसी श्रेणी में आती हैं, जो अपने सेक्टर में मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। इन कंपनियों की खासियत यह है कि इनके पास लंबे समय का विजन और स्थिर मैनेजमेंट टीम मौजूद है, जो कठिन परिस्थितियों में भी बिजनेस को संभालने की क्षमता रखती है।

    निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में निवेशकों को केवल गिरते शेयर देखकर घबराना नहीं चाहिए, बल्कि कंपनी के फंडामेंटल्स को समझकर निर्णय लेना चाहिए। बाजार में अस्थिरता हमेशा अवसर भी लेकर आती है, और जो निवेशक सही कंपनियों की पहचान कर लेते हैं, उन्हें लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।

    कुल मिलाकर, मौजूदा बाजार स्थिति यह संकेत देती है कि हर गिरता हुआ Smallcap कमजोर नहीं होता। कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं जो गिरावट के बावजूद अपनी मजबूती बनाए रखती हैं और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे सतर्कता के साथ सही कंपनियों का चयन करें और केवल डर के आधार पर निर्णय न लें।

  • महिलाओं के लिए राहतकारी उपाय: पीरियड्स क्रैम्प्स में फायदेमंद सौंफ की चाय

    महिलाओं के लिए राहतकारी उपाय: पीरियड्स क्रैम्प्स में फायदेमंद सौंफ की चाय


    नई दिल्ली । पीरियड्स के दौरान ज्यादातर महिलाओं को पेट में ऐंठन, सूजन, गैस और भारीपन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति कई बार इतनी असहज हो जाती है कि रोजमर्रा के काम भी प्रभावित होने लगते हैं। ऐसे समय में दवाओं के बजाय कुछ प्राकृतिक और घरेलू उपाय शरीर को आराम देने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में एक सरल और प्रभावी उपाय है सौंफ की चाय।

    सौंफ की चाय क्यों है इतनी फायदेमंद?

    सौंफ को आयुर्वेद में एक प्राकृतिक पाचन सहायक माना गया है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और दर्द निवारक गुण शरीर को कई तरह से राहत देते हैं।

    सौंफ की चाय पीरियड्स के दौरान होने वाली पेट की ऐंठन, ब्लोटिंग और गैस को कम करने में मदद करती है। यह पाचन तंत्र को शांत करती है और शरीर में जमा अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में सहायक होती है, जिससे सूजन में राहत मिलती है।

     पीरियड्स के दर्द में कैसे काम करती है सौंफ?

    सौंफ की चाय शरीर के पाचन तंत्र को संतुलित करती है और आंतों की मांसपेशियों को रिलैक्स करती है। इससे पेट की ऐंठन धीरे-धीरे कम होने लगती है।

    इसके नियमित सेवन से न सिर्फ पीरियड्स का दर्द कम होता है, बल्कि थकान और भारीपन भी दूर होता है, जिससे शरीर हल्का और आरामदायक महसूस करता है।

     सिर्फ दर्द ही नहीं, कई और फायदे भी
    सौंफ की चाय केवल पीरियड्स दर्द में ही नहीं, बल्कि कई अन्य समस्याओं में भी लाभकारी है-

    पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है
    गैस और कब्ज की समस्या कम करती है
    शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करती है
    हार्मोन बैलेंस को सपोर्ट करती है
    त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाती है

    सौंफ की चाय बनाने का आसान तरीक
    इस घरेलू चाय को बनाना बेहद आसान है-
    एक कप पानी में एक चम्मच सौंफ डालें और इसे 5–10 मिनट तक उबालें। इसके बाद इसे छानकर गर्मागर्म पिएं। स्वाद बढ़ाने के लिए चाहें तो थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं। इसे भोजन के बाद या जब भी पेट में असहजता महसूस हो, तब पीना अधिक फायदेमंद होता है।

     सावधानियां भी जरूरी हैं

    हालांकि सौंफ की चाय सामान्य मात्रा में सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में भी विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है।

    छोटा उपाय, बड़ा आराम

    सौंफ की चाय एक सरल, सस्ता और प्राकृतिक घरेलू उपाय है जो पीरियड्स के दौरान होने वाली पेट की ऐंठन और सूजन में काफी राहत देता है। इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करके महिलाएं बिना दवाओं के भी अपने शरीर को आराम दे सकती हैं।

  • SBI स्टॉक में लगातार दबाव, Q4 नतीजों के बाद 10% की गिरावट, ब्रोकरेज ने घटाए अनुमान और बढ़ाए रिस्क संकेत

    SBI स्टॉक में लगातार दबाव, Q4 नतीजों के बाद 10% की गिरावट, ब्रोकरेज ने घटाए अनुमान और बढ़ाए रिस्क संकेत

    नई दिल्ली ।
    देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक के शेयरों में हाल के दिनों में तेज गिरावट देखने को मिली है। यह दबाव खास तौर पर कंपनी के तिमाही नतीजों के बाद बढ़ा है, जहां प्रदर्शन बाजार की उम्मीदों के अनुरूप नहीं माना गया। नतीजों के बाद निवेशकों की धारणा कमजोर हुई और इसका सीधा असर शेयर की कीमत पर दिखाई दिया। लगातार दो कारोबारी सत्रों में स्टॉक करीब दस प्रतिशत तक गिर चुका है, जिससे बाजार में इस बैंकिंग दिग्गज को लेकर चिंता का माहौल बन गया है।

    शेयर में आई इस गिरावट के बीच कई प्रमुख संस्थागत विश्लेषकों ने अपने अनुमान में बदलाव किया है। कुछ ने स्टॉक की रेटिंग को घटाते हुए इसे लेकर अधिक सतर्क रुख अपनाया है। उनका मानना है कि आने वाले समय में बैंक के रिटर्न प्रोफाइल पर दबाव देखा जा सकता है, खासकर तब जब क्रेडिट कॉस्ट में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा, नए अकाउंटिंग नियमों के प्रभाव से भी बैंक के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    एक प्रमुख वैश्विक विश्लेषण संस्था ने अपने पहले के सकारात्मक रुख को बदलते हुए अब इसे स्थिर दृष्टिकोण में रखा है। साथ ही शेयर के लिए तय किए गए मूल्य लक्ष्य को भी घटा दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा स्तरों पर वैल्यूएशन में बड़े सुधार की गुंजाइश सीमित दिख रही है। अनुमान यह भी लगाया गया है कि बैंक की संपत्ति पर रिटर्न भविष्य में कुछ दबाव में रह सकता है, जिससे निवेशकों की उम्मीदें थोड़ी कम हो सकती हैं।

    वहीं दूसरी ओर, कुछ अन्य विश्लेषक अभी भी इस स्टॉक को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए हुए हैं। उनका मानना है कि बैंक की मजबूत लोन ग्रोथ आगे चलकर स्थिति को संतुलित कर सकती है। हालांकि, वे यह भी स्वीकार करते हैं कि निकट भविष्य में मार्जिन और क्रेडिट कॉस्ट जैसे कारक चुनौती पेश कर सकते हैं। उनके अनुसार, बैंक की एसेट क्वालिटी फिलहाल स्थिर बनी हुई है, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो ताजा नतीजों के बाद इस बैंकिंग शेयर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। एक तरफ जहां कुछ विशेषज्ञ आगे दबाव की आशंका जता रहे हैं, वहीं कुछ इसे लंबी अवधि के नजरिए से स्थिर निवेश मान रहे हैं। फिलहाल बाजार की नजर आने वाले तिमाही प्रदर्शन और आर्थिक संकेतकों पर टिकी हुई है, जो इस स्टॉक की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • शनि जयंती से पहले शुक्र-बुध का बड़ा राशि परिवर्तन, इन राशियों पर बरसेगी धन और तरक्की की कृपा

    शनि जयंती से पहले शुक्र-बुध का बड़ा राशि परिवर्तन, इन राशियों पर बरसेगी धन और तरक्की की कृपा

    नई दिल्ली । इस बार शनि जयंती और शनैश्चरी अमावस्या से पहले ग्रहों की चाल खास संयोग बना रही है। 14 मई को शुक्र ग्रह वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे, जबकि 15 मई को बुध ग्रह भी वृषभ राशि में गोचर करेंगे। 16 मई को मनाई जाने वाली शनि जयंती पर इन दोनों ग्रहों का प्रभाव कई राशियों के लिए शुभ परिणाम लेकर आ सकता है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र को सुख-सुविधा, वैभव, प्रेम और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है, जबकि बुध बुद्धिमत्ता, व्यापार, वाणी और निर्णय क्षमता से जुड़ा ग्रह है। ऐसे में दोनों ग्रहों का एक ही राशि में आना कई लोगों के करियर, आर्थिक स्थिति और रिश्तों पर सकारात्मक असर डाल सकता है।

    वृषभ राश
    वृषभ राशि वालों के लिए यह समय बेहद लाभकारी माना जा रहा है। शुक्र अपनी ही राशि में रहेंगे और बुध के साथ उनका संयोग आर्थिक उन्नति, करियर में सफलता और आकर्षण बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। नौकरी में प्रमोशन और नए अवसर मिलने के योग हैं।

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के जातकों को अचानक लाभ मिल सकता है। विदेश से जुड़े कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है। नई योजनाएं शुरू करने के लिए भी समय अनुकूल रहेगा।

    कर्क राशि
    कर्क राशि वालों की आय में वृद्धि के संकेत हैं। मित्रों और संपर्कों से फायदा मिल सकता है। निवेश से भी अच्छा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    सिंह राशि
    सिंह राशि के लोगों को करियर में प्रगति मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में मेहनत की सराहना होगी और नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। सामाजिक मान-सम्मान भी बढ़ेगा।

    कन्या राश
    कन्या राशि वालों के लिए भाग्य मजबूत रहेगा। लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं। शिक्षा, यात्रा और नई शुरुआत के मामलों में भी सफलता मिलने के संकेत हैं।

  • IPL 2026: चेन्नई सुपर किंग्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स को 5 विकेट से हराया, LSG प्लेऑफ की दौड़ से लगभग बाहर

    IPL 2026: चेन्नई सुपर किंग्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स को 5 विकेट से हराया, LSG प्लेऑफ की दौड़ से लगभग बाहर

    नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) के 53वें मुकाबले में रविवार (10 मई) को चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) को रोमांचक मैच में 5 विकेट से हरा दिया। चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में लखनऊ ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 204 रनों का बड़ा लक्ष्य रखा, जिसे चेन्नई ने चार गेंद शेष रहते हासिल कर लिया। इस हार के साथ लखनऊ की प्लेऑफ की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं।

    लखनऊ की दमदार शुरुआत, इंग्लिस का तूफान
    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए लखनऊ सुपर जायंट्स की शुरुआत शानदार रही। जोश इंग्लिस और मिचेल मार्श ने पहले विकेट के लिए 77 रनों की तेज साझेदारी की। मिचेल मार्श 10 रन बनाकर आउट हुए, जबकि निकोलस पूरन सिर्फ 1 रन ही बना सके।

    जोश इंग्लिस ने 33 गेंदों पर 85 रनों की तूफानी पारी खेली, जिसमें 10 चौके और 6 छक्के शामिल थे। कप्तान ऋषभ पंत भी 15 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। अंत में शाहबाज अहमद (43* रन) की नाबाद पारी की बदौलत लखनऊ ने 203/8 का स्कोर खड़ा किया। सीएसके की ओर से जेमी ओवर्टन ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट लिए।

    चेन्नई की जवाबी पारी, उर्विल पटेल का धमाका
    204 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी चेन्नई सुपर किंग्स की शुरुआत तेज रही। संजू सैमसन और ऋतुराज गायकवाड़ ने 22 गेंदों में 45 रन जोड़े। इसके बाद उर्विल पटेल ने मैदान पर आते ही आक्रामक बल्लेबाजी की और सिर्फ 13 गेंदों में फिफ्टी पूरी कर ली। उन्होंने कुल 23 गेंदों में 63 रन बनाए, जिसमें 8 छक्के शामिल थे। हालांकि वह शाहबाज अहमद की गेंद पर आउट हो गए। ऋतुराज गायकवाड़ ने 42 रनों की पारी खेली, लेकिन उनके आउट होते ही सीएसके ने कुछ विकेट जल्दी गंवा दिए।

    अंत में दुबे और वीर ने दिलाई जीत
    आखिरी ओवरों में शिवम दुबे (15*) और प्रशांत वीर (18*) ने संयम से खेलते हुए टीम को जीत दिलाई। चेन्नई ने 19.2 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया।

    पॉइंट्स टेबल पर असर
    इस जीत के साथ चेन्नई सुपर किंग्स ने 11 मैचों में 12 अंक हासिल कर लिए हैं, जबकि लखनऊ सुपर जायंट्स 11 मैचों में सिर्फ 3 जीत के साथ 6 अंकों पर ही सिमट गई है और प्लेऑफ की दौड़ से लगभग बाहर हो गई है।

    हेड-टू-हेड रिकॉर्ड
    दोनों टीमों के बीच अब तक 7 मुकाबले हुए हैं, जिनमें चेन्नई और लखनऊ ने 3-3 मैच जीते हैं, जबकि 1 मैच बेनतीजा रहा है।

  • CM बनने की चर्चा के बीच बड़ा धमाका: क्या रिलीज होगी विजय की ‘जना नायकन’?

    CM बनने की चर्चा के बीच बड़ा धमाका: क्या रिलीज होगी विजय की ‘जना नायकन’?


    नई दिल्ली। तमिल सुपरस्टार और राजनीतिक पारी की ओर बढ़ रहे विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर फैंस लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। अब इस इंतजार पर जल्द ही विराम लग सकता है।
    फिल्म के प्रोड्यूसर वेंकट के नारायण ने संकेत दिया है कि अगर सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो फिल्म अगले 14 दिनों के भीतर सिनेमाघरों में रिलीज हो सकती है।

     CBFC प्रक्रिया में अंतिम चरण, तेजी से हो रहा काम
    प्रोड्यूसर के अनुसार फिल्म फिलहाल सेंसर सर्टिफिकेशन (CBFC) की अंतिम प्रक्रिया में है।
    टीम लगातार बोर्ड के संपर्क में है ताकि सभी औपचारिकताएं जल्द पूरी की जा सकें। निर्माताओं का कहना है कि वे फिल्म को जल्द से जल्द दर्शकों तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।


    विजय की राजनीतिक पारी और फिल्म का खास कनेक्श
    फिल्म ‘जन नायकन’ सिर्फ एक एंटरटेनमेंट प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि विजय के राजनीतिक सफर से भी जुड़ी मानी जा रही है। प्रोड्यूसर के मुताबिक, फिल्म का टाइटल “जनता का नायक” उनके वास्तविक जीवन और तमिलनाडु की राजनीति में उनकी नई भूमिका से मेल खाता है। इसी वजह से इसे उनकी राजनीति में सक्रिय होने से पहले आखिरी फिल्म भी माना जा रहा है।

    सेट पर विजय की अनुशासन की तारीफ
    प्रोड्यूसर वेंकट के नारायण ने विजय के साथ काम करने के अनुभव को साझा करते हुए उनकी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि विजय बेहद अनुशासित और कमिटेड अभिनेता हैं, जो अपने हर वादे को पूरी जिम्मेदारी से निभाते हैं। फिल्म की शूटिंग के दौरान उनका प्रोफेशनल रवैया टीम के लिए प्रेरणादायक रहा।

    लीक विवाद और चुनौतियों के बावजूद मजबूत टीम
    फिल्म का सफर आसान नहीं रहा। पिछले समय में इसे ऑनलाइन लीक होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी। इसके बावजूद फिल्म की टीम ने हार नहीं मानी और अब पूरी फोकस ग्रैंड थिएट्रिकल रिलीज पर है।

    ‘जन नायकन’ को लेकर बनी हलचल साफ दिखाती है कि यह फिल्म सिर्फ एक रिलीज नहीं, बल्कि विजय के करियर और राजनीतिक सफर का अहम मोड़ मानी जा रही है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो अगले 2 हफ्तों में यह फिल्म बड़े पर्दे पर धमाका कर सकती है।

  • पहाड़ों के बीच बसा रहस्य: अफगानिस्तान में मौजूद प्राचीन हिंदू मंदिर बना टूरिस्ट्स का आकर्षण

    पहाड़ों के बीच बसा रहस्य: अफगानिस्तान में मौजूद प्राचीन हिंदू मंदिर बना टूरिस्ट्स का आकर्षण


    नई दिल्ली। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के ऊंचे पहाड़ी इलाके में स्थित आसामाई मंदिर सदियों पुराना धार्मिक स्थल माना जाता है। यह मंदिर मां दुर्गा के स्वरूप को समर्पित है और कहा जाता है कि यह लगभग 2000 साल पुराना है। पहाड़ों के बीच स्थित यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अफगानिस्तान के प्राचीन सांस्कृतिक इतिहास की भी झलक दिखाता है।

    2. कुषाण काल से जुड़ता इतिहास, कई बार हुआ पुनर्निर्माण

    इतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर की जड़ें संभवतः कुषाण काल तक जाती हैं। माना जाता है कि प्राचीन समय में भारत और अफगानिस्तान के बीच मजबूत सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध थे, जिनका प्रभाव इस मंदिर के निर्माण में भी दिखता है। समय-समय पर युद्ध और हमलों में मंदिर को नुकसान पहुंचा, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण कर इसे संरक्षित किया गया।

    3. युद्ध और बदलाव के बीच भी कायम रही पहचान

    अफगानिस्तान में दशकों से चले संघर्षों और खासकर तालिबान शासन के बाद वहां हिंदू और सिख समुदाय की संख्या बेहद कम हो गई। कई परिवारों को देश छोड़ना पड़ा, लेकिन आसामाई मंदिर आज भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। यह मंदिर उन गिने-चुने स्थानों में से है जहां हिंदू परंपरा की झलक अब भी जीवित है।

    4. रहस्यमयी पहाड़ और आध्यात्मिक मान्यताएं

    स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंदिर जिस पहाड़ पर स्थित है, वह रहस्यमयी ऊर्जा से जुड़ा हुआ माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थनाएं पूरी होती हैं। नवरात्रि के समय यहां विशेष पूजा का आयोजन भी किया जाता था, हालांकि अब भक्तों की संख्या काफी कम हो गई है।

     5. अफगानिस्तान की ऐतिहासिक धरोहर और विदेशी आकर्षण

    आसामाई मंदिर काबुल शहर का एक ऊंचाई से दिखने वाला महत्वपूर्ण स्थल है, जहां से पूरा शहर नजर आता है। यह मंदिर विदेशी पर्यटकों और इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा है। यह भारत और अफगानिस्तान के पुराने सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है।

    6. यात्रा और वर्तमान स्थिति

    जो लोग इस मंदिर को देखना चाहते हैं उन्हें काबुल पहुंचना होता है। वहां से स्थानीय वाहन के जरिए मंदिर तक जाया जा सकता है। हालांकि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए यात्रा से पहले सरकारी एडवाइजरी और सुरक्षा जानकारी लेना बेहद जरूरी है।

    आसामाई मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और संघर्ष की कहानी है। हजारों साल पुराना यह मंदिर आज भी अफगानिस्तान की पहाड़ियों में खड़ा होकर बीते युग की याद दिलाता है और यह साबित करता है कि संस्कृति और आस्था समय के साथ मिटती नहीं, बल्कि बदलते हालात में भी जीवित रहती है।

  • डर + हंसी का कॉम्बो: लिस्ट में एक जबरदस्त हॉरर-कॉमेडी फिल्म भी शामिल!

    डर + हंसी का कॉम्बो: लिस्ट में एक जबरदस्त हॉरर-कॉमेडी फिल्म भी शामिल!


    नई दिल्ली। इस हफ्ते की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है “पति पत्नी और वो दो”, जिसमें आयुष्मान खुराना, सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और वामिका गब्बी मुख्य भूमिकाओं में हैं। कहानी एक ईमानदार फॉरेस्ट ऑफिसर के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिंदगी एक छोटी-सी मदद के बाद पूरी तरह उलझ जाती है। तीन महिलाओं के बीच फंसकर उसकी स्थिति हास्यास्पद और भावनात्मक दोनों बन जाती है। फिल्म में रोमांस और कॉमेडी का जबरदस्त मिश्रण देखने को मिलेगा।

     2. ऐतिहासिक सफर: आखिरी सवाल
    संजय दत्त और अमित साध स्टारर यह फिल्म “आखिरी सवाल” एक ऐतिहासिक ड्रामा है, जो एक विचारधारा और संगठन के 100 साल के सफर को दिखाने का दावा करती है। फिल्म भारत के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास के कुछ अहम मोड़ों को सिनेमाई अंदाज में पेश करती है। दमदार अभिनय और गंभीर विषय इसे खास बनाते हैं।

     3. हॉरर-कॉमेडी का ट्विस्ट: I.I.Z  Indian Institute of Zombies
    अगर आप हॉरर और कॉमेडी के फैन हैं, तो यह फिल्म आपके लिए है। कहानी एक बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज में अचानक फैलने वाले ज़ॉम्बी संक्रमण की है। छात्र पढ़ाई के दबाव और ज़ॉम्बी अटैक दोनों से जूझते हैं। फिल्म में डर के साथ हंसी का भी जबरदस्त डोज मिलेगा।

     4. साइकोलॉजिकल थ्रिलर: नवगुंजर
    “नवगुंजर” एक क्राइम-थ्रिलर फिल्म है जिसमें शहर में हो रही रहस्यमयी हत्याएं पुलिस को चौंका देती हैं। सबसे बड़ा रहस्य यह है कि पकड़े गए अपराधियों को अपने जुर्म की याद ही नहीं रहती। माइंड कंट्रोल और साजिशों पर आधारित यह फिल्म दर्शकों को अंत तक उलझाए रखेगी।

     5. म्यूजिकल एक्सपीरियंस: Billie Eilish  Hit Me Hard and Soft The Tour
    यह फिल्म एक 3D कंसर्ट अनुभव है जिसमें दुनिया की मशहूर पॉप सिंगर बिली आयलिश के वर्ल्ड टूर को बड़े पर्दे पर दिखाया गया है। जेम्स कैमरून के निर्देशन में बनी यह फिल्म संगीत प्रेमियों के लिए एक विजुअल ट्रीट साबित हो सकती है।

    इस हफ्ते का बॉक्स ऑफिस लाइनअप बेहद विविध है जहां एक तरफ रोमांस और कॉमेडी है, वहीं दूसरी ओर थ्रिलर, हॉरर और म्यूजिकल एक्सपीरियंस भी मौजूद हैं। हर उम्र और हर स्वाद के दर्शकों के लिए कुछ न कुछ खास जरूर है।