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  • गुना में अडाणी समूह की सीमेंट फैक्ट्री का शिलान्यास, सिंधिया बोले- युवाओं को रोजगार के लिए नहीं जाना पड़ेगा बाहर

    गुना में अडाणी समूह की सीमेंट फैक्ट्री का शिलान्यास, सिंधिया बोले- युवाओं को रोजगार के लिए नहीं जाना पड़ेगा बाहर


    भोपाल।
    केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार उद्योगों की स्थापना के लिए लगातार कार्य कर रही है, जिससे युवाओं को अन्य प्रांतों में रोजगार तलाशने नहीं जाना पड़ेगा। बहनों को भी लखपति दीदी बनाकर समृद्धि का लाभ दिलवाया जा रहा है।

    केन्द्रीय मंत्री सिंधिया रविवार को मध्य प्रदेश के गुना जिले में अडाणी समूह की अंम्बुजा सीमेंट फैक्ट्री के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के विकास के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव परिश्रम और निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। गुना के विकास के लिए नई दीप माला प्रज्ज्वलित हो रही है।

    सिंधिया ने कहा कि गुना क्षेत्र में सीमेंट इकाई की स्थापना एक ऐतिहासिक कदम है। यह कार्य बहुप्रतिक्षित था। उन्होंने लगभग सौ वर्ष पूर्व सिंधिया परिवार द्वारा इस क्षेत्र में किए गए औद्योगीकरण के प्रयासों का उल्लेख भी किया।

    उन्होंने कहा कि कोटा-बीना लाइन के दोहरीकरण, तात्या टोपे विश्वविद्यालय प्रारंभ करने की पहल, जल प्रदाय योजना और सिंचाई योजनाओं के क्रियान्वयन, गुना से देवास राष्ट्रीय राजमार्ग को चौड़ा बनाने के लिए 5 हजार करोड़ के व्यय, गुना के लिए 15 किलोमीटर लंबाई के बायपास जैसे कार्य आमजन को सुविधा प्रदान कर रहे हैं। कृषि क्षेत्र में गुना -चाचौड़ा- राघोगढ़ क्षेत्र के किसान पंजाब की तरह पहचान बना रहे हैं।

    इससे पहले केन्द्रीय मंत्री सिंधिया और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुना जिले में अंम्बुजा सीमेंट फैक्ट्री का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने औद्योगिक विकास, अधोसंरचनात्मक सुदृढ़ीकरण और रोजगार सृजन को नई गति देने के उद्देश्य से विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण भी किया।

    प्रदेश में सभी तरह के उद्योगों की स्थापना पर जोर, युवाओं के लिए रोजगार प्राथमिकता: मोहन यादव
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में सभी तरह के उद्योगों की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार युवाओं के लिए रोजगार को प्राथमिकता देते हुए किसानों, महिलाओं और गरीबों के साथ सभी वर्गों के कल्याण के लिए सक्रिय है। पर्यटन और पशुपालन के क्षेत्र में प्रदेश महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त करेगा। गुना क्षेत्र में सीमेंट निर्माण इकाई से डेढ़ हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। अडाणी समूह की ओर से 32 हैक्टेयर भूमि पर इस इकाई की स्थापना के फलस्वरूप 4 मिलीयन टन सीमेंट उत्पादन होगा।

    उन्होंने कहा कि इन विकास कार्यों से गुना जिले में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा तथा आमजन को बेहतर सेवाओं का लाभ मिलेगा। प्रदेश का ग्वालियर और चंबल अंचल कभी डकैतों की गोलियों से गूंजता था, अब यहां विकास का परचम लहरा रहा है। अब यहां दस्युओं के स्थान पर प्रगति पहचान का माध्यम बनी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश बदल रहा है। सरकार जनहित के लिए निरंतर कार्य कर रही है। गुना अंचल के लिए आज होली और दीपावली के त्यौहारों की तरह उल्लास का वातावरण है। इस क्षेत्र में सिंचाई, पानी, बिजली के साथ सभी नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया गया है, जो आगे भी जारी रहेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की महत्वपूर्ण घोषणाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक समय इस क्षेत्र के विकास के लिए सिंधिया परिवार द्वारा पहल की गई थी। अब केंद्र और राज्य सरकार मिलकर विकास को गति दे रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री सिंधिया द्वारा दिए गए सुझावों को मानते हुए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इनमें गुनिया नदी के पुनर्जीवन के लिए 80 करोड़ 22 लाख राशि का प्रस्ताव भारत सरकार की जल शक्ति योजना में भेजने, लक्ष्मण कोपरा से राम नगर टकोदिया तक पहुंच को आसान बनाने के लिए पार्वती नदी पर 42 करोड़ रुपये की लागत से ब्रिज निर्माण और गुना शहर के भुजारिया तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए 25 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करने की घोषणा शामिल है।

    मध्य प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र हो रहा सशक्त : प्रणव अदाणी

    उद्योगपति प्रणव अदाणी ने कहा कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से विकास को नई रफ्तार मिली है। अधोसंरचना, लॉजिस्टिक, ट्रांसपोर्ट और अन्य सुविधाओं से मध्य प्रदेश में उद्योग क्षेत्र की मजबूती सुनिश्चित की जा रही है। पीएम गति शक्ति मिशन से औद्योगिक क्षेत्र का वातावरण सशक्त हो रहा है। गत वर्ष भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने एक लाख हजार करोड़ से अधिक निवेश का संकल्प व्यक्त किया था, जिसे साकार करने के लिए सीमेंट इकाई की आधारशिला रखी जा रही है। प्रथम चरण में एक हजार 60 करोड़ का निवेश किया जा रहा है, जो आगामी चरणों में तीन गुना से अधिक होगा। श्री अदाणी ने मध्य प्रदेश में कटनी, कैमोर सहित अन्य क्षेत्रों में सीमेंट और अन्य इकाइयों की स्थापना की पहल की गई। समूह द्वारा ऊर्जा क्षेत्र में भी प्रोजेक्ट अमल में लाए जाएंगे।

    कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर जिले के विधायकगण और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

    रोड शो में हुआ भव्य स्वागत

    केन्द्रीय मंत्री सिंधिया और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम से पहले शहर में रोड शो किया। उनके गुना आगमन पर रोड-शो के दौरान नागरिकों ने पुष्पहारों से उनका भव्य स्वागत किया। जिनमें स्थानीय नागरिक, युवा, व्यापारी वर्ग, महिला समाज, सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।

  • प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में हुआ है खादी पुनर्जागरण का सूत्रपात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में हुआ है खादी पुनर्जागरण का सूत्रपात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि खादी केवल वस्त्र नहीं, बल्कि राष्ट्र की गौरवशाली पहचान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में खादी को “नए भारत की नई खादी” के रूप में नई पहचान मिली है, जिससे पूरे देश में खादी पुनर्जागरण का सूत्रपात हुआ है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को एक बयान में कहा कि आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश, युवाओं का सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। मप्र खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से खादी और ग्रामोद्योग राज्य की प्रगति का सशक्त स्तंभ बन रहे हैं। बुनकर मुद्रा योजना के तहत पिछले तीन वर्षों 2023-24 से 2025-26 में कुल 194 बुनकरों को 268.50 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया है। वर्ष 2023-24 में 44 बुनकरों को 21.40 लाख, 2024-25 में 147 बुनकरों को 231.80 लाख और 2025-26 में 3 बुनकरों को 15.30 लाख रुपये का ऋण दिया गया।

    उन्होंने कहा कि गांधीजी के ‘ग्राम स्वराज’ और ‘गाँव की ओर जाओ’ संदेश को साकार करते हुए बोर्ड ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, परंपरागत कारीगरी को आधुनिक नवाचार से जोड़ने और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ाने का कार्य कर रहा है।

    प्रदेश के कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के “आत्मनिर्भर भारत, भारत में बनाओ, स्वदेशी के लिए मुखर, स्टार्टअप इंडिया” जैसे अभियानों और “सबका साथ, सबका विकास” मंत्र ने खादी एवं ग्रामोद्योग को वैश्विक पहचान दिलाई है। “स्थानीय से वैश्विक” का दृष्टिकोण कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ रहा है।

    राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा 50 हजार से 5 लाख तक की ऋण सुविधा व्यक्तिगत बुनकर, उद्यमी, स्व-सहायता समूह, हथकरघा संगठन और सहकारी समितियों को दी जा रही है। बुनकरों की सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना में तीन वर्षों में 616 बुनकर और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में 840 बुनकर बीमित किए गए। प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना में 436 रुपये वार्षिक शुल्क पर 2 लाख का जीवन बीमा और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में मात्र 20 रुपये वार्षिक शुल्क पर 2 लाख का दुर्घटना बीमा मिल रहा है।

    राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा कि म.प्र. खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड सूती, ऊनी, रेशमी एवं पॉलीवस्त्र खादी के साथ मसाले, साबुन, जड़ी-बूटी उत्पाद एवं हस्तनिर्मित वस्तुओं को बढ़ावा दे रहा है। विपणन के लिए “विन्ध्या वैली” और “कबीरा” जैसे नाम स्थापित किए गए हैं जो गुणवत्ता और परंपरा के प्रतीक हैं। “अपना हाथ – अपना साथ” के मार्गदर्शन में महिला स्व-सहायता समूहों, कारीगरों और उद्यमियों को तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है।

    प्रबंध संचालक माल सिंह भयड़िया ने बताया कि महात्मा गांधी जी के “गाँव की ओर चलो” आह्वान से प्रेरित होकर मंडल ने ग्रामोद्योग को आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन का सशक्त साधन बनाया है। सुव्यवस्थित योजनाओं से ग्रामीण कारीगरों के उत्पादों को उचित बाजार मिल रहा है। बोर्ड की नई अंतरजाल साइट कारीगरों, उद्यमियों एवं समाज के बीच मजबूत सेतु का कार्य करेगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्रदर्शनियाँ प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित कर रही हैं।

    तीन वर्षों की प्रगति एक नजर में

    – बुनकर मुद्रा योजना: 194 बुनकरों को 268.50 लाख रुपये का ऋण वितरित
    – प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना: 616 बुनकर बीमित
    – प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना: 840 बुनकर बीमित

  • एमपी में आज 8 जिलों में आंधी-बारिश की संभावना, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में बढ़ेगी गर्मी

    एमपी में आज 8 जिलों में आंधी-बारिश की संभावना, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में बढ़ेगी गर्मी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मौसम एक बार फिर बदलने वाला है। प्रदेश में दो टर्फ और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय होने की वजह से सोमवार को कई जिलों में आंधी और बारिश का असर देखने को मिलेगा। वहीं दूसरी ओर भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग के कई इलाकों में तेज गर्मी लोगों को परेशान करेगी।

    मौसम विभाग के अनुसार बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज आंधी चलने और बारिश होने की संभावना है।

    कई जिलों में बदला मौसम
    रविवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बदला रहा। इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर और शहडोल संभाग के करीब 18 जिलों में कहीं बादल छाए रहे तो कहीं हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई। मौसम विभाग ने भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, राजगढ़, नीमच, मंदसौर, छतरपुर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर और शाजापुर में तेज गर्मी पड़ने की संभावना जताई है।

    रतलाम सबसे गर्म
    रविवार को रतलाम प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मई महीने में पहली बार यहां पारा 45 डिग्री के पार पहुंचा है। इसके अलावा शाजापुर में 44 डिग्री, धार में 42.4 डिग्री, खंडवा में 42.1 डिग्री और नर्मदापुरम में 42 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। रायसेन, नरसिंहपुर, सागर और गुना में भी तापमान 40 डिग्री से ऊपर रहा। प्रदेश के बड़े शहरों में उज्जैन सबसे गर्म रहा, जहां 42.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। भोपाल में 40.4 डिग्री, इंदौर में 41.9 डिग्री, ग्वालियर में 38.4 डिग्री और जबलपुर में 38.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।

    12 मई से लू का असर
    मौसम विभाग ने 12 मई से प्रदेश में हीट वेव यानी लू चलने का अलर्ट जारी किया है। खासतौर पर इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों में गर्म हवाएं चल सकती हैं। प्रदेश में 30 अप्रैल से लगातार मौसम में बदलाव बना हुआ है। 10 मई तक कई जिलों में बारिश और आंधी का दौर जारी रहा। कभी वेस्टर्न डिस्टरबेंस तो कभी टर्फ और चक्रवाती सिस्टम के कारण मई के पहले सप्ताह में बारिश होती रही।

    लोगों के लिए एडवाइजरी जारी
    गर्मी बढ़ने के साथ मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। दिनभर पर्याप्त पानी पीने, शरीर को हाइड्रेट रखने और दोपहर की तेज धूप से बचने की अपील की गई है। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह भी दी गई है।

  • हीटवेव और बाढ़ से निपटने के लिए अमित शाह ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग… दिए ये निर्देश

    हीटवेव और बाढ़ से निपटने के लिए अमित शाह ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग… दिए ये निर्देश


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने रविवार को दिल्ली में एक हाई लेवल मीटिंग (High Level Meeting.) में देश में संभावित बाढ़ और हीट वेव (Floods and Heat Waves) से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमें ‘जीरो कैजुअल्टी डिजास्टर मैनेजमेंट’ के लिए काम करना होगा.

    मीटिंग में देश के हर राज्य में बाढ़ संकट प्रबंधन टीमों (FCMT) के गठन, हीटवेव से कृषि क्षेत्र को होने वाले नुकसान को न्यूनतम रखने और मौसम संबंधी योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर फोकस किया गया।

    इसके साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और सेंट्रल वाटर कमीशन के मौसम और बाढ़ संबंधी पूर्वानुमान के समय को 3 दिन से बढ़ाकर 7 दिन करने की बात भी कही गई।


    एनडीएमए के दिशानिर्देशों का पालन

    गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि आपदाओं को लेकर नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के पालन की राज्य, जिला और नगरपालिका स्तर पर नियमित समीक्षा की जानी चाहिए।

    जल संचय और चेक डैम परियोजनाओं के जरिए जलस्तर सुधारने और जल संरक्षण की संभावनाओं को बढ़ाने पर जोर दिया गया. इसके अलावा कैम्पा फंड का इस्तेमाल पर्यावरण संतुलन के लिए किए जा रहे प्रयासों को और प्रभावी बनाने के लिए कहा गया है.

    साथ ही, कम से कम 60 जोखिम वाली झीलों के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने की योजना पर काम करने के निर्देश दिए हैं. सभी राज्यों में स्टेट-लेवल इंटीग्रेटेड रिज़र्वॉयर ऑपरेशंस लागू करने पर भी जोर दिया गया. मौसम संबंधी पूर्वानुमानों और चेतावनियों का व्यापक और प्रभावी प्रचार-प्रसार की बात भी कही गई.

  • तमिलनाडु नए सीएम के शपथ समारोह में राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान के बजा राज्य गीत, मचा सियासी संग्राम

    तमिलनाडु नए सीएम के शपथ समारोह में राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान के बजा राज्य गीत, मचा सियासी संग्राम


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) के नए मुख्यमंत्री (New Chief Minister) और टीवीके चीफ जोसेफ विजय (TVK Chief Joseph Vijay) के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान तमिलनाडु के राज्य गीत ‘तमिल थाई वजथु’ (Tamil Thai Vazhthu) को देश के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बाद तीसरे स्थान पर गाए जाने को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. तमिलनाडु की राजनीति में भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता हमेशा से बेहद संवेदनशील मुद्दे रहे हैं, ऐसे में इस घटनाक्रम ने राज्य के सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

    चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में रविवार को आयोजित भव्य समारोह में टीवीके प्रमुख जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण समारोह के शुरुआत में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया गया, जबकि परंपरागत रूप से राज्य के सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में गाए जाने वाले ‘तमिल थाई वजथु’ को वरीयता क्रम में तीसरे स्थान पर रखा गया।

    इसी बात को लेकर विपक्षी दलों और टीवीके को समर्थन देने वाले सहयोगी दलों ने कड़ी नाराजगी जताई है. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के तमिलनाडु राज्य सचिव एम वीरपांडियन ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि ‘तमिल थाई वजथु’ को हमेशा सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में सम्मानपूर्वक गाया जाता रहा है और उसे उसका उचित स्थान मिलना चाहिए. उन्होंने टीवीके प्रमुख विजय के नेतृत्व वाली नई सरकार से इस मामले में स्पष्टीकरण की मांग करते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए।


    TVK के सहयोगी दलों ने जताई नाराजगी

    सीपीआई के साथ-साथ सीपीएम, वीसीके और आईयूएमएल जैसी पार्टियों ने भी टीवीके सरकार को समर्थन दिया है, इसलिए सहयोगी दलों की ओर से उठी यह नाराजगी राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है. पीएमके संस्थापक एस रामदास ने भी बयान जारी कर कहा कि राज्य सरकार को सभी सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वजथु’ को उचित सम्मान और प्राथमिकता सुनिश्चित करनी चाहिए. वहीं वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि तमिल पहचान और संस्कृति से जुड़े प्रतीकों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।

    विवाद यहीं तक सीमित नहीं रहा. टीवीके विधायक एम वी करुप्पैया के प्रोटेम स्पीकर के रूप में शपथ ग्रहण समारोह में भी ‘तमिल थाई वजथु’ को वरीयता क्रम में तीसरे स्थान पर रखा गया था. इसके बाद यह मुद्दा और ज्यादा तूल पकड़ने लगा है. तमिलनाडु की राजनीति में भाषा और सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा लंबे समय से बेहद संवेदनशील रहा है. द्रविड़ राजनीति की पूरी विचारधारा ही तमिल भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता के इर्द-गिर्द विकसित हुई है. ऐसे में मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह में राज्य गीत ‘तमिल थाई वजथु’ को प्राथमिकता नहीं दिए जाने को विपक्ष और सहयोगी दल तमिल पहचान की उपेक्षा के तौर पर पेश कर रहे हैं।


    विवाद पर टीवीके सरकार ने दी सफाई

    हालांकि, विवाद बढ़ने पर टीवीके सरकार में मंत्री आधव अर्जुन स्पष्टीकरण जारी किया. उन्होंने कहा, ‘नीरारुम कदलुथुदा… से शुरू होने वाला तमिल वंदना गीत तमिल समाज की 100 साल से अधिक पुरानी सांस्कृतिक विरासत और गौरव का प्रतीक है. तमिलनाडु सरकार ने इसे राज्य गीत का दर्जा दिया है और परंपरा के अनुसार राज्य के सभी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत इसी गीत से होती है, जबकि अंत में राष्ट्रगान बजाया जाता है. हालांकि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण समारोह में पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम्, फिर राष्ट्रगान जन मन गण और उसके बाद तमिल थाई वजथु प्रस्तुत किया गया।

    आधव अर्जुन ने आगे कहा, ‘टीवीके सरकार इस नई व्यवस्था से सहमत नहीं है. राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर की ओर से बताया गया कि केंद्र सरकार के नए सर्कुलर के कारण ऐसा करना पड़ा. टीवीके सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में पुरानी परंपरा ही लागू रहेगी, यानी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत ‘तमिल थाई वजथु’ से होगी और अंत राष्ट्रगान से किया जाएगा. पार्टी ने यह भी कहा कि देश के सभी राज्यों में राज्य भाषा के वंदना गीत को कार्यक्रम की शुरुआत में सम्मानपूर्वक स्थान मिलना चाहिए।

  • फैमिली ट्रिप के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन, अहमदाबाद की ये 6 जगहें बना देंगी सफर यादगार

    फैमिली ट्रिप के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन, अहमदाबाद की ये 6 जगहें बना देंगी सफर यादगार


    नई दिल्ली ।
    अहमदाबाद, गुजरात का एक प्रमुख और ऐतिहासिक शहर, अपनी समृद्ध संस्कृति, विरासत और आधुनिक जीवनशैली के कारण देशभर के यात्रियों के बीच खास पहचान रखता है। यह शहर केवल व्यापार और उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि घूमने-फिरने और फैमिली ट्रिप के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। यहां की हर जगह अपने आप में एक अलग कहानी और अनुभव समेटे हुए है, जो किसी भी यात्रा को यादगार बना देती है।

    परिवार के साथ घूमने के लिए अहमदाबाद में कई ऐसी जगहें हैं, जहां इतिहास, अध्यात्म और मनोरंजन का शानदार मिश्रण देखने को मिलता है। यह शहर हर उम्र के लोगों के लिए कुछ न कुछ खास लेकर आता है, जिससे यात्रा का अनुभव और भी समृद्ध हो जाता है।

    साबरमती नदी के किनारे स्थित साबरमती आश्रम शहर की सबसे शांत और ऐतिहासिक जगहों में से एक है। यह स्थान महात्मा गांधी के जीवन और उनके विचारों से गहराई से जुड़ा हुआ है। यहां का वातावरण बेहद शांत और प्रेरणादायक होता है, जो यात्रियों को एक अलग ही अनुभव देता है। परिवार के साथ यहां समय बिताना न केवल सुकून देता है बल्कि इतिहास से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करता है।

    इसके बाद कांकड़िया लेक एक ऐसा स्थान है जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए आकर्षण का केंद्र है। यह एक लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट है जहां बोटिंग, टॉय ट्रेन और मनोरंजन की कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। शाम के समय यहां का दृश्य बेहद खूबसूरत हो जाता है और यह जगह परिवार के साथ समय बिताने के लिए आदर्श मानी जाती है।

    अहमदाबाद का अक्षरधाम मंदिर अपनी भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की वास्तुकला देखने योग्य है और यहां का शांत माहौल मन को सुकून प्रदान करता है। लाइट और साउंड शो इस स्थान को और भी आकर्षक बना देता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।

    इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए अडालज बावड़ी एक अनोखी जगह है। यह बावड़ी अपनी जटिल नक्काशी और वास्तुकला के लिए जानी जाती है। यह स्थान पुराने समय की कला और निर्माण शैली को बेहद सुंदर तरीके से प्रस्तुत करता है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह जगह काफी खास मानी जाती है।

    विज्ञान और तकनीक में रुचि रखने वाले लोगों के लिए साइंस सिटी एक शानदार विकल्प है। यहां विज्ञान से जुड़ी कई रोचक प्रदर्शनी और गतिविधियां देखने को मिलती हैं, जो बच्चों और युवाओं के लिए ज्ञानवर्धक और मनोरंजक दोनों होती हैं। यह जगह सीखने और समझने का एक बेहतरीन माध्यम बन जाती है।

    इसके अलावा लॉ गार्डन नाइट मार्केट शॉपिंग और खाने-पीने के शौकीनों के लिए एक खास स्थान है। यहां गुजराती हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्तुएं और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड का आनंद लिया जा सकता है। रात के समय यहां की रौनक और भी बढ़ जाती है, जो पर्यटकों को आकर्षित करती है।

    कुल मिलाकर अहमदाबाद एक ऐसा शहर है जहां हर कोना कुछ नया अनुभव कराता है। यह शहर इतिहास, संस्कृति और आधुनिकता का ऐसा संगम है, जो इसे फैमिली ट्रिप के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन बनाता है। यहां की यात्रा न केवल मनोरंजक होती है बल्कि यादों में हमेशा के लिए बस जाने वाली भी बन जाती है।

  • आज का धार्मिक योग: 11 मई को भगवान शिव की आराधना का खास महत्व

    आज का धार्मिक योग: 11 मई को भगवान शिव की आराधना का खास महत्व


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दिन शिव आराधना का विशेष महत्व होता है। 11 मई, सोमवार को ऐसा ही एक अत्यंत शुभ और पावन संयोग बन रहा है, जिसे धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद फलदायी बताया जा रहा है। इस दिन श्रद्धालुओं द्वारा की जाने वाली शिव पूजा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली मानी जा रही है।

    मान्यता है कि भगवान शिव अत्यंत भोले और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं। सोमवार के दिन यदि सच्चे मन से उनकी आराधना की जाए तो सभी प्रकार के दुख, रोग और बाधाओं का नाश होता है। 11 मई का यह विशेष दिन भक्तों के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति भी शिव भक्ति के अनुकूल मानी जा रही है, जिससे पूजा का फल कई गुना बढ़ सकता है।

    शिव मंदिरों में इस दिन सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ने की संभावना है। लोग जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, भस्म और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव को प्रसन्न करने का प्रयास करेंगे। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप इस दिन विशेष रूप से लाभकारी बताया जा रहा है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग का अभिषेक करते हैं, उनके जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही विवाह, नौकरी, व्यापार और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में भी राहत मिलने के योग बनते हैं।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सोमवार और शिव आराधना का यह संयोग मानसिक शांति और आत्मिक बल को बढ़ाने वाला होता है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो लंबे समय से किसी परेशानी या बाधा से जूझ रहे हैं।

    भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शिवलिंग पर जल, दूध एवं पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद ध्यान और मंत्र जाप के माध्यम से भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करें।

    कुल मिलाकर 11 मई का यह सोमवार धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ अवसर लेकर आ रहा है, जो भक्तों के जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करने वाला माना जा रहा है।

  • योगी कैबिनेट विस्तार में दिखा सामाजिक संतुलन.. अगले चुनाव के लिए पॉलिटिकल टोन सेट

    योगी कैबिनेट विस्तार में दिखा सामाजिक संतुलन.. अगले चुनाव के लिए पॉलिटिकल टोन सेट


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) के तीसरे और आखिरी मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expansion) के साथ ही बीजेपी (BJP) ने अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) के लिए पॉलिटिकल टोन सेट कर दिया है. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार को लखनऊ के लोक भवन में 6 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई और दो मौजूदा मंत्रियों का प्रमोशन किया. जिन 6 नए मंत्रियों ने शपथ ली उनमें से 5 दलित और ओबीसी समुदाय से हैं, जबकि एक मंत्री ब्राह्मण बिरादरी से.

    यह मंत्रिमंडल विस्तार किसी नए प्रयोग के बजाय स्पष्ट तौर पर ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की रणनीति के तहत तैयार किया गया है. बीजेपी ने जातीय संतुलन साधने के लिए बेहद संतुलित और सोच-समझकर नए मंत्रियों के चुनाव किए हैं. पार्टी का फोकस ब्राह्मण, जाट, दलित, पासी, वाल्मीकि, लोध और अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाली अन्य जाति समुदायों पर रहा है, ताकि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक और सामाजिक पकड़ को और मजबूत किया जा सके. यही कारण रहा कि मंत्रियों के नामों को अंतिम रूप देने से पहले लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में देर रात तक बीजेपी नेताओं का मंथन और बैठकों का दौर चला।

    इस दौरान पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ पिछड़े और दलित वर्गों के प्रमुख समुदायों को प्रतिनिधित्व देने पर विशेष ध्यान दिया गया. भाजपा ने 2027 चुनाव से पहले इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए सामाजिक और जातीय समीकरण साधने और अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की काट खोजने की कोशिश की है. मार्च 2022 में जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में योगी 2.0 सरकार बनी थी, तब कुल 52 मंत्रियों ने शपथ ली थी।


    कैबिनेट में 22 सवर्ण, 25 OBC और 10 दलित मंत्री

    उस समय मंत्रिमंडल में 21 सवर्ण, 20 ओबीसी और 8 दलित नेताओं को जगह दी गई थी. इसके अलावा 1 आदिवासी, 1 मुस्लिम और 1 सिख चेहरे को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था. उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य संख्या के लिहाज से राज्य के मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत कुल 60 मंत्री हो सकते हैं. अब तीसरे और अंतिम मंत्रिमंडल विस्तार के बाद योगी सरकार के सभी 60 मंत्री पद भर चुके हैं. मौजूदा मंत्रिमंडल में 22 सवर्ण, 25 ओबीसी और 10 दलित मंत्री हैं. इसके अलावा 1 आदिवासी, 1 मुस्लिम और 1 सिख मंत्री भी शामिल हैं।


    सवर्ण समीकरण में ब्राह्मण और ठाकुर चेहरे अहम

    यूपी कैबिनेट में 2022 में सवर्ण वर्ग से बनाए गए मंत्रियों में 7 ब्राह्मण, 8 ठाकुर, 3 वैश्य, 2 भूमिहार और 1 कायस्थ नेता शामिल थे. बीजेपी ने उस समय ब्राह्मण संतुलन साधने के लिए ब्रजेश पाठक को डिप्टी सीएम बनाया था, जबकि जितिन प्रसाद को कैबिनेट मंत्री बनाकर पीडब्ल्यूडी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. साल 2024 में योगी मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार किया गया था, जिसमें 4 नए मंत्रियों को शामिल किया गया. इनमें 2 ओबीसी, 1 दलित और 1 ब्राह्मण नेता को जगह मिली थी।

    उस दौरान समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन तोड़कर बीजेपी के साथ आए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) प्रमुख ओम प्रकाश राजभर, सपा से बीजेपी में वासपी करने वाले दारा सिंह चौहान, राष्ट्रीय लोकदल (RLD) से अनिल कुमार और साहिबाबाद से बीजेपी विधायक सुनील कुमार शर्मा को मंत्री बनाया गया था. उस विस्तार के बाद मंत्रिमंडल की संख्या 52 से बढ़कर 56 हो गई थी।


    विधायकों के सांसद चुने जाने के बाद खाली हुईं सीटें

    लोकसभा चुनाव 2024 के बाद योगी सरकार के दो मंत्री जितिन प्रसाद और अनूप वाल्मीकि संसद पहुंच गए. दोनों ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. जितिन प्रसाद शाहजहांपुर से सांसद बनने के बाद केंद्र सरकार में मंत्री बनाए गए, जबकि दलित चेहरा अनूप वाल्मीकि हाथरस से सांसद चुने गए. इन इस्तीफों के बाद योगी मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या 56 से घटकर 54 हो गई थी।

    कैबिनेट में जितिन प्रसाद का रिप्लेसमेंट मनोज पांडे
    जितिन प्रसाद के केंद्र की राजनीति में जाने के बाद योगी मंत्रिमंडल में ब्राह्मण मंत्रियों की संख्या 8 से घटकर 7 रह गई थी. अब हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में रायबरेली जिले के ऊंचाहार से सपा के बागी विधायक मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर बीजेपी ने एक बार फिर ब्राह्मण संतुलन साधने की कोशिश की है. मनोज पांडेय के बागी होने के बाद सपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था और वर्तमान में वह निर्दलीय विधायक के रूप में विधानसभा के सदस्य हैं. मनोज पांडे को योगी कैबिनेट में काफी हद तक जितिन प्रसाद के रिप्लेसमेंट के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी ने दो साल बाद ही सही, लेकिन योगी कैबिनेट में फिर एक बड़ा ब्राह्मण चेहरा शामिल कर सामाजिक और जातीय समीकरणों को संतुलित करने का संदेश दिया है।


    मंत्रिमंडल विस्तार के केंद्र में है जातिगत समीकरण

    मंत्रिमंडल में शामिल किए गए नए सदस्यों में कन्नौज की तिर्वा विधानसभा सीट से विधायक कैलाश राजपूत और अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर शामिल हैं. वाल्मीकि समुदाय से आने वाले सुरेंद्र दिलेर को भाजपा द्वारा दलित मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जबकि कैलाश राजपूत को मंत्री बनाकर पार्टी ने लोध मतदाताओं के बीच अपने समर्थन को मजबूत करने की कोशिश की है. शपथ लेने वाले अन्य मंत्रियों में पासी समुदाय से आने वाले फतेहपुर की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान और वाराणसी के एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा शामिल हैं, जिन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के करीबी माना जाता है।

    हंसराज विश्वकर्मा को शामिल कर बीजेपी ने पूर्वांचल में गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को साधने का स्पष्ट संदेश दिया है. हंसराज 34 वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं. उन्होंने 1989 में बूथ स्तर से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था और राम मंदिर आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी. वहीं, कृष्णा पासवान के जरिए पार्टी ने गैर-जाटव दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की है. कृष्णा पासवान ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी. वह चार बार की विधायक हैं और दो बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं. वह भाजपा की प्रमुख दलित महिला चेहरा मानी जाती हैं।


    भूपेंद्र चौधरी करेंगे वेस्ट यूपी व जाटों का प्रतिनिधित्व

    इसके अलावा बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी की कैबिनेट में वापसी पश्चिमी यूपी में जाट प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की कोशिश मानी जा रही है. उत्तर प्रदेश के प्रमुख जाट नेताओं में शामिल भूपेंद्र चौधरी मुरादाबाद के रहने वाले हैं और लंबे समय तक संघ और भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं. चौधरी वर्ष 2016 में पहली बार विधान परिषद सदस्य बने. 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें पंचायती राज राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया और 2019 में कैबिनेट मंत्री, पंचायती राज की जिम्मेदारी मिली. उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने के पीछे की वजह सरकार और संगठन के बीच सामंजस्य बनाए रखना है।


    दो मंत्रियों को प्रमोशन देने में छिपा है सियासी संदेश

    सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल को मिली जिम्मेदारियां इस बात का संकेत हैं कि सरकार बदलाव के साथ निरंतरता बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है. सोमेंद्र तोमर मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक और ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत राज्य मंत्री ​थे, सरकार में उनका कद बढ़ाकर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कर दिया गया है. इसी तरह कानपुर देहात की सिकंदरा विधानसभा सीट से विधायक अजीत पाल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री थे. उनका भी प्रमोशन करके राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  • चीता माताओं के संघर्ष कहानी…. विदेशी धरती से आकर कूनो में बढाया वंश…. मदर्स डे पर शॉर्ट फिल्म रिलीज

    चीता माताओं के संघर्ष कहानी…. विदेशी धरती से आकर कूनो में बढाया वंश…. मदर्स डे पर शॉर्ट फिल्म रिलीज


    श्योपुर।
    मदर्स-डे (Mother’s Day) के मौके पर कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन (Kuno National Park Management) ने चीता माताओं (Cheetah Mothers) के संघर्ष और मातृत्व को समर्पित एक शॉर्ट फिल्म जारी की, जो भारतीय जंगलों में चीतों की नई पीढ़ी को बसाने में उनकी भूमिका को दर्शाती है. इसमें बताया गया कि प्रोजेक्ट चीता के तहत पिछले साढ़े तीन सालों में भारत में चीतों का कुनबा बढ़कर अब 57 हो गया है. इस प्रोजेक्ट की सफलता में मादा चीतों का योगदान सबसे अहम रहा है।

    नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से आईं 6 मादा चीतों में से 5 ने शावकों को जन्म दिया है. भारत में जन्मी 2 मादा चीतों ने भी सफलतापूर्वक प्रजनन कर शावकों को जन्म दिया है. पिछले साढ़े तीन वर्षों में कुल 49 शावकों का जन्म हुआ, जिनमें से 37 पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित हैं।

    कूनो पार्क की इन माताओं ने न सिर्फ खुद को भारत के माहौल में ढाला, बल्कि अपने शावकों को भी शिकार और सुरक्षा के उपाय सिखाए. वर्तमान में चीते कूनो और उसके आसपास के करीब 5 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं।


    फिल्म में चीता मदर्स और उनके शावकों के संघर्ष की दिखी झलक.

    अलग-अलग देशों से लाए गए चीतों के कारण आनुवंशिक विविधता मजबूत हुई है, जिससे इनब्रीडिंग का खतरा टल गया है. दूसरी पीढ़ी (एफ-2 जेनरेशन) के शावकों का आना इस बात का सबूत है कि भारत में चीतों की आबादी अब धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बन रही है।

    कूनो प्रबंधन अब नए क्षेत्रों में भी चीतों को बसाने की तैयारी कर रहा है,जहां दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और भारत में जन्मे चीतों का एक मिला-जुला समूह रखा जाएगा. इस विशेष मौके पर कूनो के फील्ड स्टाफ, डॉक्टरों और वन अधिकारियों की मेहनत को भी सराहा गया, जिनकी दिन-रात की निगरानी की वजह से यह अभियान आज इस मुकाम पर पहुंचा है।

    प्रोजेक्ट चीता के डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि कूनो पार्क में चीता प्रोजेक्ट सफलता के नए आयाम गढ़ रहा है. विदेशी धरती से चीते लाकर बसाए गए जिन्होंने यहां नई पीढ़ी को जन्म देकर चीता प्रोजेक्ट को सफल बनाया है. 10 मई को मदर्स-डे है, लिहाजा हमने मां के रूप में मादा चीताओं और उनके शावकों की ममत्वमयी तस्वीर पेश करने का प्रयास किया है।

  • PM मोदी की देशवासियों से अपील… बोले- एक साल तक सोना खरीदने से बचें….

    PM मोदी की देशवासियों से अपील… बोले- एक साल तक सोना खरीदने से बचें….


    नई दिल्ली।
    पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार को देशवासियों से 1 साल तक सोना ना खरीदने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने लोगों से विदेश यात्रा (Foreign travel) को आगे बढ़ाने की भी बात कही। प्रधानमंत्री ने यह अपील ऐसे समय में की है जब युद्ध की वजह से दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। पीएम मोदी की इस अपील के पीछे की वजह फॉरेन एक्सचेंज (foreign exchange) की बचत को माना जा रहा है।

    ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US war) की वजह से दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें सातवें आसमान पर हैं। साथ पूरी सप्लाई चेन तहस-नहस हो गई है। जिससे भारत जैसे आयात करने वाले देश अधिक प्रभावित हुए हैं। बता दें, पीएम मोदी अपनी अपील के जरिए फॉरेन एक्सचेंज आउटफ्लो को कम करना चाहते हैं।

    पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी अपील को देशभक्ति के साथ जोड़ा है। उन्होंने तेल की बचत करने का भी आग्रह किया है। पीएम ने लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट, वर्क फ्रॉम होम सिस्टम, नेचुरल फार्मिंग और स्वदेशी प्रोडक्ट्स का उपयोग करने की सलाह दी है।


    क्यों है गोल्ड का आयात इतना महत्वपूर्ण? (Why Gold matters)

    भारत दुनिया का सबसे अधिक गोल्ड आयात करने वाले देशों में से एक है। भारत का घरेलू मांग विदेशी आयात पर निर्भर करता है। क्योंकि भारत से खरीदे गए गोल्ड के लिए डॉलर में भुगतान करना होता है इसलिए यह भारत जैसे देशों पर अतिरिक्त दबाव बनाता है। इससे इंपोर्ट बिल बढ़ता है। फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व लगातार घटता है।

    यह चिंता मौजूदा परिस्थितियों में और बढ़ जाती है। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत तेल इंपोर्ट करता है। ऐसे में कच्चे तेल का बढ़ता रेट भी अतिरिक्त दबाव बना रहा है। बता दें, तेल और खाद के खर्च की वजह से डॉलर की निकासी पर दबाव बढ़ रहा है।

    ऐसे में अगर देश कम सोना खरीदता है तो वह रुपये की सेहत के लिए भी अच्छा रहेगा। वहीं, इससे ट्रेड बैलेंस भी बेहतर होगा।


    भारत का फॉरेक्स रिजर्व मजबूत (India forex reserves)

    फॉरेक्स रिजर्व के मोर्चे पर अभी घबराने की कोई जरूरत नहीं है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार भारत का फॉरेक्स रिजर्व 691.11 अरब डॉलर है। जोकि 11 महीने के इंपोर्ट के लिए काफी है। रिपोर्ट के अनुसार भारत का फॉरेक्स रिजर्व में गोल्ड का शेयर मार्च 2026 तक बढ़कर 16.70 प्रतिशत हो गया है। सितंबर 2025 तक यह 13.92 प्रतिशत था।