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  • ईरान के यूरेनियम भंडार पर US की नजर…. ट्रंप बोले- उसके पास गए तो उड़ा दिए जाओगे

    ईरान के यूरेनियम भंडार पर US की नजर…. ट्रंप बोले- उसके पास गए तो उड़ा दिए जाओगे


    वाशिंगटन।
    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने रविवार को कहा कि अमेरिका (America) ईरान (Iran) के संवर्धित यूरेनियम भंडार (Enriched Uranium Reserves) पर सख्त नजर रखे हुए है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी उस स्थान के पास पहुंचने की कोशिश करता है तो वाशिंगटन को तुरंत पता चल जाएगा और उसे उड़ा दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि हमें वो किसी न किसी समय मिल ही जाएगा… हम उस पर नजर रख रहे हैं। मैंने ‘स्पेस फोर्स’ नाम की एक संस्था बनाई है और वे उस पर नजर रख रहे हैं। अगर कोई भी उस जगह के पास पहुंचा, तो हमें पता चल जाएगा और हम उसे उड़ा देंगे।

    शैरिल एटकिंसन के साथ बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि हमें वो किसी न किसी समय मिल ही जाएगा… हम उस पर नजर रख रहे हैं। मैंने ‘स्पेस फोर्स’ नाम की संस्था बनाई है और वे उस पर पूरी नजर रखे हुए हैं। अगर कोई भी उस जगह के पास पहुंचा तो हमें पता चल जाएगा और हम उसे उड़ा देंगे। उन्होंने आगे कहा कि स्पेस फोर्स इतना सक्षम है कि अगर कोई अंदर घुसा भी तो उसका नाम, पता और बैज नंबर तक बता सकता है।

    वहीं, ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष पर बोलते हुए ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पूरी तरह से सैन्य रूप से पराजित हो चुका है। उन्होंने कहा कि उनके पास न नौसेना बची है, न वायुसेना, न विमानरोधी हथियार और न ही कोई नेता। ट्रंप ने कहा कि ईरान लगातार समझौते करता और तोड़ता रहा, लेकिन अब सैन्य दृष्टि से वह पूरी तरह कमजोर हो गया है। इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका आज ईरान को अकेला छोड़ दे तो उसे अपने ढांचे को दोबारा खड़ा करने में करीब 20 साल लग जाएंगे।

    ईरान में जारी अमेरिकी सैन्य अभियान के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने बताया कि अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हम दो हफ्ते और अभियान जारी रख सकते हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने 70 प्रतिशत लक्ष्यों को नष्ट कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि यह तो बस अंतिम काम होगा… लेकिन अगर हम वह भी नहीं करते तो भी उन्हें पुनर्निर्माण में 20 साल लग जाएंगे।

    इस दौरान ट्रंप ने जोर देकर कहा कि वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की कभी अनुमति नहीं देंगे और इसे ‘पागलपन’ करार दिया। उन्होंने ओबामा प्रशासन द्वारा 2015 में हस्ताक्षरित संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) का जिक्र करते हुए कहा कि अगर उन्होंने उस समझौते को समाप्त नहीं किया होता तो ईरान अब तक इजराइल और पूरे मध्य पूर्व पर परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर चुका होता।

  • सप्ताह में 4 दिन काम…. 3 दिन आराम का रास्ता साफ… सरकार ने नोटिफाई किया नया लेबर कोड

    सप्ताह में 4 दिन काम…. 3 दिन आराम का रास्ता साफ… सरकार ने नोटिफाई किया नया लेबर कोड


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने चारों लेबर कोड (All four Labor Codes) के तहत नियमों को नोटिफाई कर दिया है। इन नए नियमों से कुछ चुनिंदा सेक्टरों में सप्ताह में चार दिन काम और 3 दिन की छुट्टी लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। नए केंद्रीय कोड ऑन वेज के अनुसार, किसी भी कर्मचारी के लिए साप्ताहिक काम के घंटे 48 घंटे से अधिक नहीं होंगे। यानी अब कंपनी और कर्मचारी चाहें तो इन 48 घंटों को केवल 4 दिनों में बांट सकते हैं यानी प्रतिदिन 12 घंटे काम करके। बदले में उन्हें 3 दिन की छुट्टी यानी सप्ताह में तीन रेस्ट डे मिल सकती है।

    हालांकि, यह सुविधा सभी के लिए समान नहीं है। दिहाड़ी मजदूरों के लिए एक सामान्य कार्य दिवस 8 घंटे का ही रहेगा, इससे अधिक काम पर ओवरटाइम मिलेगा। साथ ही, ओवरटाइम की दर अब सामान्य दर की दोगुनी कर दी गई है।

    नए श्रम कानून कर्मचारियों को अधिक लचीलापन और बेहतर सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। हालांकि यह चार-दिवसीय कार्य सप्ताह अभी शुरुआती चरण में है और केवल चुनिंदा सेक्टरों में ही संभव है, फिर भी यह भारत में कामकाज के भविष्य का एक नया मॉडल पेश करता है।


    किन क्षेत्रों में 4 डे वर्क वीक की संभावना?

    बिजनेस स्टैंडर्ड की खबरे के अनुसार, जिन क्षेत्रों में शिफ्ट-बेस्ड या प्रोजेक्ट-ड्रिवन काम होता है, वहां इसे आसानी से लागू किया जा सकता है। जैसे, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, IT और शेयर्ड सर्विसेज।

    हालांकि, जिन सेक्टरों में ग्राहकों की तत्काल जरूरतें और रियल-टाइम डिलीवरी की उम्मीद होती है, जैसे कुछ बैंकिंग, रिटेल या कस्टमर सपोर्ट, उनके लिए यह व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


    अंतिम नियमों में बड़े बदलाव

    गौरतलब है कि सरकार ने शुक्रवार (10 मई, 2026) को सभी चार लेबर कोड के अंतिम नियम जारी किए। इनमें शामिल हैं। इनमें इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020, कोड ऑन वेज 2019, सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 और ऑक्यूपेशन सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड 2020 शामिल हैं।

    संसद द्वारा ये कानून पारित किए लगभग 6 साल बाद, 30 से अधिक गजेट नोटिफिकेशन के जरिए इन नियमों को अंतिम रूप दिया गया। दिसंबर 2025 में जो ड्राफ्ट जारी किया गया था, उसमें न्यूनतम वेतन तय करने के लिए कैलोरी इनटेक, कपड़े, किराया, ईंधन खर्च आदि के मानदंड थे। लेकिन अंतिम नियमों में इन्हें हटा दिया गया है। अब सरकार बाद में अलग से आदेश जारी करेगी।


    कर्मचारियों पर क्या क्या होगा असर?

    कंपनी या संस्थान को अनिवार्य नियुक्ति पत्र हर कर्मचारी को देना होगा। ओवरटाइम भुगतान के स्पष्ट प्रावधान होगा। वर्कर रिस्किलिंग फंड में योगदान करना होगा। एक साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी देनी होगी। इस नए कोड में आश्रित माता-पिता के लिए मासिक आय सीमा ₹9,000 से बढ़ाकर ₹14,000 कर दी गई है।


    कंपनियों के लिए क्या हैं चुनौतियां

    कंपनियों को अब ओवरटाइम भुगतान और रिस्किलिंग योगदान के कारण लागत में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, उन्हें एचआर प्रथाओं को औपचारिक रूप देना होगा, काम के घंटे ट्रैक करने होंगे और अनिवार्य स्वास्थ्य लाभ देने होंगे।

  • हंगरी में 16 साल बाद बदली सत्ता… नया PM के शपथ समारोह में सहयोगी सांसदों ने जमकर किया डांस

    हंगरी में 16 साल बाद बदली सत्ता… नया PM के शपथ समारोह में सहयोगी सांसदों ने जमकर किया डांस


    बुडापेस्ट।
    हंगरी (Hungary) के नए प्रधानमंत्री पीटर माग्यार (New Prime Minister Peter Magyar) ने शनिवार को पद की शपथ ली। नई संसद के उद्घाटन सत्र में हुए मतदान के बाद उन्होंने देश की व्यवस्था बदलने का संकल्प लिया। शपथ ग्रहण समारोह (Swearing Ceremony) के दौरान उनके सहयोगी सांसद और ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ ज्सोल्ट हेगेदुस ने अलग अंदाज में डांस कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, 45 वर्षीय पीटर माग्यार ने औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री पद संभाल लिया, जिसके साथ ही विक्टर ओर्बन (Viktor Orban) का 16 साल लंबा शासन समाप्त हो गया। माग्यार की तिस्जा पार्टी ने 12 अप्रैल को हुए संसदीय चुनाव में भारी जीत दर्ज की थी और 199 सीटों वाली संसद में 141 सीटें हासिल की है।

    शपथ ग्रहण के बाद माग्यार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि हंगरी की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह। हंगेरियन होना इतना सुखद कभी नहीं रहा। समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैं हंगरी पर शासन नहीं करूंगा, बल्कि अपने देश की सेवा करूंगा। उन्होंने हंगरी के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू करने और ऐसी सरकार बनाने का वादा किया जो न सिर्फ सत्ता बल्कि पूरी व्यवस्था को बदल दे।

    इस दौरान मग्यार ने कहा कि मैं यहां इसलिए नहीं खड़ा हूं क्योंकि मैं देश में किसी और से अलग हूं। मैं यहां इसलिए खड़ा हूं क्योंकि लाखों हंगरीवासियों ने बदलाव लाने का फैसला किया है। हमें जो विश्वास मिला है, वह हमारे लिए सम्मान और नैतिक दायित्व दोनों है, लेकिन साथ ही एक अद्भुत एहसास भी है।

    हालांकि माग्यार का भाषण पूरी तरह राजनीतिक था, लेकिन सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा स्वास्थ्य मंत्री पद की दावेदारी रखने वाले ज्सोल्ट हेगेदुस के डांस की हो रही है। अप्रैल में तिस्जा पार्टी की चुनावी रैली में उनके जोशीले नृत्य का वीडियो पहले ही वायरल हो चुका था। शनिवार को उन्होंने संसद की सीढ़ियों पर और डेन्यूब नदी किनारे जमा हजारों समर्थकों के सामने फिर से अपना डांस दोहराया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में माग्यार अन्य सांसदों के साथ तालियां बजाते नजर आ रहे हैं।

    दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि हंगरी में मग्यार की सरकार आने से हंगरी के यूरोपीय संघ के साथ राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आएगा। दरअसल, पूर्व प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण निर्णयों पर बार-बार वीटो किया है, जिनमें हाल में पड़ोसी यूक्रेन को समर्थन देने से संबंधित निर्णय को वीटो करना शामिल है।

  • गर्मियों का मीठा स्वाद: पारंपरिक आमरस से घर में लाएं ठंडक और ताजगी का आनंद

    गर्मियों का मीठा स्वाद: पारंपरिक आमरस से घर में लाएं ठंडक और ताजगी का आनंद


    नई दिल्ली ।
    गर्मी का मौसम आते ही आम की मिठास हर घर में अपनी खास जगह बना लेती है। इसी मौसम में बनने वाला पारंपरिक व्यंजन आमरस लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो जाता है। ठंडा, गाढ़ा और प्राकृतिक मिठास से भरपूर आमरस न केवल स्वाद में लाजवाब होता है बल्कि यह शरीर को ठंडक और ताजगी भी प्रदान करता है। यही कारण है कि इसे गर्मियों के भोजन का खास हिस्सा माना जाता है।

    आमरस का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यह स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन बनाए रखता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को ऊर्जा देने के साथ इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करने में मदद करते हैं। गर्म मौसम में यह शरीर को अंदर से ठंडक देने का काम करता है, जिससे थकान और कमजोरी कम महसूस होती है।

    इस पारंपरिक डिश को बनाना बेहद आसान है और इसके लिए सीमित सामग्री की जरूरत होती है। सबसे पहले पके और मीठे आमों का चयन किया जाता है, क्योंकि स्वाद का पूरा आधार आम की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। आमों को अच्छी तरह धोकर उनका छिलका हटाया जाता है और गूदा अलग कर लिया जाता है।

    इसके बाद आम के गूदे को मिक्सर में डालकर अच्छी तरह पीसा जाता है। इसमें स्वादानुसार थोड़ी चीनी मिलाई जाती है ताकि मिठास संतुलित रहे। मिश्रण को तब तक ब्लेंड किया जाता है जब तक यह एक स्मूद और क्रीमी रूप न ले ले। कुछ लोग इसे हल्का पतला करने के लिए ठंडा दूध या पानी भी मिलाते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी निखर जाता है।

    पारंपरिक स्वाद को और बढ़ाने के लिए इसमें इलायची पाउडर डाला जाता है, जो एक खास खुशबू और स्वाद प्रदान करता है। कई लोग इसमें केसर भी मिलाते हैं, जिससे इसका रंग और सुगंध दोनों और आकर्षक हो जाते हैं। तैयार मिश्रण को कुछ समय के लिए फ्रिज में रखकर ठंडा किया जाता है ताकि इसका स्वाद और भी ताजगी भरा हो जाए।

    ठंडा होने के बाद आमरस को पूड़ी, पराठा या रोटी के साथ परोसा जाता है। यह संयोजन भारतीय घरों में खास पसंद किया जाता है और अक्सर पारिवारिक भोजन का हिस्सा बनता है। कुछ लोग इसे सीधे डेजर्ट की तरह भी खाते हैं और इसमें बर्फ के टुकड़े डालकर इसे और ज्यादा ठंडा और रिफ्रेशिंग बना लेते हैं।

    भारतीय परंपरा में आमरस सिर्फ एक व्यंजन नहीं बल्कि गर्मियों की संस्कृति का हिस्सा माना जाता है। यह पीढ़ियों से चला आ रहा स्वाद है, जो हर उम्र के लोगों को जोड़ता है। परिवार के साथ बैठकर आमरस का आनंद लेना एक अलग ही अनुभव देता है।

    आज के समय में जब लोग प्राकृतिक और घर के बने भोजन को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं, ऐसे में आमरस एक आदर्श विकल्प बनकर सामने आता है। यह न केवल स्वादिष्ट है बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद लाभदायक माना जाता है। गर्मियों में यह डिश शरीर को ठंडक, ऊर्जा और ताजगी देने का बेहतरीन माध्यम बन जाती है।

  • चश्मे के स्क्रैच ने बिगाड़ी नजर? इन आसान तरीकों से लौट सकती है लेंस की साफ चमक

    चश्मे के स्क्रैच ने बिगाड़ी नजर? इन आसान तरीकों से लौट सकती है लेंस की साफ चमक

    नई दिल्ली ।
    रोजमर्रा की जिंदगी में चश्मा इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए लेंस पर स्क्रैच आ जाना एक आम समस्या है। शुरुआत में यह छोटे निशान केवल देखने में मामूली लगते हैं, लेकिन समय के साथ ये देखने की क्षमता को प्रभावित करने लगते हैं। धुंधली दृष्टि, आंखों में थकान और स्पष्टता में कमी जैसी परेशानियां अक्सर स्क्रैच वाले लेंस के कारण सामने आती हैं। यही वजह है कि चश्मे की सही देखभाल बेहद जरूरी मानी जाती है।

    हालांकि अच्छी बात यह है कि हल्के स्क्रैच को कुछ आसान घरेलू तरीकों से काफी हद तक कम किया जा सकता है। इन उपायों की मदद से चश्मे को फिर से साफ और बेहतर दिखने लायक बनाया जा सकता है, जिससे उसे कुछ समय और इस्तेमाल किया जा सके।

    एक आम तरीका बेकिंग सोडा का उपयोग है, जिसमें हल्के सफाई करने वाले गुण होते हैं। इसे पानी में मिलाकर एक पेस्ट तैयार किया जाता है और बहुत हल्के हाथों से लेंस पर लगाया जाता है। इसके बाद इसे साफ पानी से धो देने पर छोटे स्क्रैच कम दिखाई देने लगते हैं।

    इसी तरह नॉन-जेल टूथपेस्ट का भी उपयोग किया जाता है। इसे मुलायम कपड़े से लेंस पर हल्के-हल्के रगड़ने से सतह पर मौजूद हल्के निशान कुछ हद तक कम हो सकते हैं। लेकिन ध्यान रखना जरूरी है कि अधिक दबाव न डाला जाए, क्योंकि इससे लेंस को नुकसान हो सकता है।

    कुछ लोग बेबी ऑयल या हल्के मिनरल ऑयल का भी इस्तेमाल करते हैं। इसकी कुछ बूंदें लेंस पर लगाने के बाद माइक्रोफाइबर कपड़े से साफ करने पर स्क्रैच कम नजर आने लगते हैं और लेंस थोड़े साफ और चमकदार दिख सकते हैं। हालांकि यह तरीका स्क्रैच को पूरी तरह खत्म नहीं करता, लेकिन उन्हें छिपाने में मदद करता है।

    कई बार लेंस पर दिखने वाले निशान वास्तव में गंदगी या धूल की परत भी हो सकते हैं। ऐसे में हल्के गुनगुने पानी और माइल्ड साबुन से सफाई करना सबसे आसान और सुरक्षित तरीका होता है। इसके बाद साफ और मुलायम कपड़े से लेंस को धीरे-धीरे पोंछना चाहिए।

    विशेषज्ञ हमेशा माइक्रोफाइबर कपड़े के उपयोग की सलाह देते हैं, क्योंकि यह लेंस को बिना नुकसान पहुंचाए साफ करता है। इसके विपरीत कागज, टिश्यू या खुरदरे कपड़े से लेंस पर नए स्क्रैच पड़ सकते हैं, जो स्थिति को और खराब कर देते हैं।

    अगर लेंस पर गहरे स्क्रैच आ गए हैं, तो घरेलू उपायों के बजाय प्रोफेशनल मदद लेना बेहतर होता है। ऐसे मामलों में पॉलिशिंग या नए लेंस लगवाना ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

    चश्मे की सही देखभाल से उसकी उम्र बढ़ाई जा सकती है। उसे हमेशा केस में रखना, साफ करते समय सही कपड़े का उपयोग करना और कठोर सतह से बचाना जैसे छोटे कदम लेंस को लंबे समय तक नया जैसा बनाए रखने में मदद करते हैं।

  • थाली में जितने ज्यादा रंग, उतनी बेहतर सेहत, विशेषज्ञों ने बताया गर्भावस्था में संतुलित और पौष्टिक आहार का सबसे आसान तरीका

    थाली में जितने ज्यादा रंग, उतनी बेहतर सेहत, विशेषज्ञों ने बताया गर्भावस्था में संतुलित और पौष्टिक आहार का सबसे आसान तरीका

    नई दिल्ली ।
    गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपने खान-पान पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है क्योंकि इस समय लिया गया भोजन केवल मां ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत को भी प्रभावित करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरान संतुलित और पोषण से भरपूर आहार बेहद जरूरी होता है और इसी कारण ‘सतरंगी थाली’ को सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। सतरंगी थाली का मतलब है भोजन में अलग-अलग रंगों के फल, सब्जियां, अनाज और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना, जिससे शरीर को हर जरूरी पोषक तत्व मिल सके।

    विशेषज्ञों का कहना है कि हर रंग के खाद्य पदार्थ में अलग-अलग पोषण तत्व मौजूद होते हैं। जब भोजन में कई रंग शामिल होते हैं, तो शरीर को विटामिन, मिनरल्स, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स और प्रोटीन संतुलित मात्रा में मिलते हैं। यही कारण है कि केवल एक जैसे भोजन पर निर्भर रहने के बजाय विविधता वाला भोजन ज्यादा लाभकारी माना जाता है।

    गर्भवती महिलाओं के लिए यह और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है क्योंकि इस समय शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा और पोषण की आवश्यकता होती है। सही खान-पान से गर्भ में बच्चे का विकास बेहतर होता है और मां की सेहत भी मजबूत बनी रहती है। इसके अलावा संतुलित आहार प्रसव के बाद शरीर की रिकवरी में भी मदद करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है।

    हरे रंग की सब्जियां जैसे पालक और अन्य पत्तेदार सब्जियां आयरन और फोलिक एसिड का अच्छा स्रोत मानी जाती हैं, जो खून की कमी को दूर करने में मदद करती हैं। लाल रंग के खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन प्रदान करते हैं, जबकि पीले और नारंगी रंग के फल विटामिन सी और पोटैशियम से भरपूर होते हैं। इसी तरह बैंगनी रंग के खाद्य पदार्थ शरीर में सूजन कम करने और कोशिकाओं की सुरक्षा में मददगार माने जाते हैं।

    डाइट एक्सपर्ट्स का मानना है कि गर्भावस्था में एक जैसा भोजन बार-बार खाने से शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। ऐसे में भोजन में रंगों और स्वाद की विविधता होना जरूरी है। इससे न केवल खाने का स्वाद बढ़ता है बल्कि भूख भी अच्छी लगती है और शरीर को संपूर्ण पोषण प्राप्त होता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, स्वस्थ मां ही स्वस्थ बच्चे को जन्म देती है और इसकी शुरुआत सही खान-पान से होती है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान रोजाना की थाली में अलग-अलग रंगों के मौसमी फल और सब्जियां शामिल करना बेहद जरूरी माना जाता है। सतरंगी थाली केवल देखने में आकर्षक नहीं होती, बल्कि यह बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित मातृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

  • Rahu-Ketu Yuti 2026: 11 मई से बनेगा कालसर्प योग, इन 4 राशियों पर बढ़ सकता है संकट

    Rahu-Ketu Yuti 2026: 11 मई से बनेगा कालसर्प योग, इन 4 राशियों पर बढ़ सकता है संकट


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मई 2026 में राहु और केतु की विशेष स्थिति कई राशियों के जीवन में उतार-चढ़ाव ला सकती है। द्रिक पंचांग के मुताबिक 11 मई 2026 को राहु कुंभ राशि और केतु सिंह राशि में रहेंगे, जिससे कालसर्प योग का निर्माण होगा। यह योग 26 मई 2026 तक प्रभावी माना जा रहा है। ज्योतिष मान्यताओं में कालसर्प योग को मानसिक तनाव, कार्यों में रुकावट, आर्थिक अस्थिरता और पारिवारिक परेशानियों से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में कुछ राशियों को इस दौरान बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    वृषभ राशि वालों के लिए यह समय चुनौतियों से भरा रह सकता है। नौकरी और कारोबार में विरोधियों की सक्रियता बढ़ सकती है, इसलिए किसी पर आंख बंद करके भरोसा करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। मेहनत का पूरा फल मिलने में देरी होने से मानसिक दबाव बढ़ सकता है। आर्थिक मामलों में भी सतर्कता जरूरी रहेगी। अनावश्यक खर्च और जोखिम भरे निवेश से दूरी बनाकर रखना बेहतर होगा। परिवार में बच्चों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

    कर्क राशि के जातकों को इस दौरान मानसिक अस्थिरता और तनाव का सामना करना पड़ सकता है। छोटी-छोटी बातों पर चिंता हावी रह सकती है, जिससे कामकाज और रिश्तों पर असर पड़ने की आशंका है। कार्यस्थल या व्यापार में विवाद की स्थिति बन सकती है, इसलिए गुस्से पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। परिवार में सामंजस्य बनाए रखने के लिए सोच-समझकर बोलना फायदेमंद रहेगा।

    वृश्चिक राशि वालों को इस अवधि में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी गई है। घर-परिवार और निजी जीवन से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेना जरूरी होगा, क्योंकि जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बाद में परेशानी का कारण बन सकता है। अचानक बढ़ते खर्च आर्थिक संतुलन बिगाड़ सकते हैं। यात्रा और वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। साथ ही अनजान लोगों पर भरोसा करना नुकसानदायक साबित हो सकता है।

    कुंभ राशि के लोगों के लिए भी यह समय सतर्कता का संकेत दे रहा है। आर्थिक मामलों में छोटी गलतियां भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती हैं। कामकाज में अचानक रुकावटें आने से तनाव बढ़ सकता है, लेकिन धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा। निवेश करने से पहले पूरी जानकारी लेना फायदेमंद रहेगा। स्वास्थ्य के मामले में पेट और गले से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार राहु-केतु के इस प्रभाव के दौरान धैर्य, सकारात्मक सोच और सावधानी बेहद जरूरी है। धार्मिक कार्य, ध्यान और नियमित पूजा-पाठ मानसिक शांति बनाए रखने में मददगार साबित हो सकते हैं।

  • सोमवार का विशेष नियम: इन खाद्य पदार्थों से दूरी नहीं तो बिगड़ सकती कुंडली

    सोमवार का विशेष नियम: इन खाद्य पदार्थों से दूरी नहीं तो बिगड़ सकती कुंडली


    नई दिल्ली । सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दिन व्रत-उपासना का विशेष महत्व होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोमवार का संबंध चंद्रमा से माना जाता है, जो मन, भावनाओं और मानसिक संतुलन को नियंत्रित करता है। ऐसे में इस दिन खान-पान को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, क्योंकि गलत आहार से चंद्र दोष बढ़ सकता है और मानसिक अशांति, तनाव और क्रोध जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
    ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार सोमवार के दिन कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन वर्जित माना गया है, क्योंकि ये शरीर और मन दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
    सबसे पहले बैंगन का सेवन सोमवार को नहीं करना चाहिए। इसे तामसिक भोजन माना जाता है, जो व्यक्ति के विचारों में भारीपन और आलस्य पैदा कर सकता है। इससे मन शांत नहीं रहता और ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है।
    इसके अलावा काले तिल का सेवन भी इस दिन वर्जित माना जाता है। काले तिल का संबंध शनि ग्रह से जोड़ा जाता है और इसे सोमवार को खाने से मानसिक बोझ या बेचैनी महसूस हो सकती है।
    लहसुन और प्याज को भी इस दिन तामसिक भोजन माना गया है। इनका सेवन मन को उत्तेजित करता है और एकाग्रता को प्रभावित करता है, जिससे ध्यान और मानसिक शांति में बाधा आती है।
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोमवार के दिन अत्यधिक कड़वे या कसैले पदार्थ जैसे नीम और करेला का सेवन भी नहीं करना चाहिए। इनसे शरीर में कफ और पित्त का असंतुलन बढ़ सकता है, जिससे चिड़चिड़ापन और नकारात्मकता बढ़ने की संभावना रहती है।
    इसके साथ ही मांसाहार और शराब का सेवन सोमवार के दिन पूरी तरह वर्जित माना गया है। इसे न केवल धार्मिक दृष्टि से गलत माना जाता है, बल्कि यह मानसिक अस्थिरता और भावनात्मक असंतुलन का कारण भी बन सकता है।
    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोमवार के दिन सात्विक भोजन और संयमित जीवनशैली अपनाई जाए तो मन शांत रहता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने के साथ-साथ मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन भी बना रहता है।
  • PM Fasal Bima Yojana: अब जंगली जानवरों से बर्बाद फसल पर भी मिलेगा मुआवजा, किसानों को बड़ी राहत

    PM Fasal Bima Yojana: अब जंगली जानवरों से बर्बाद फसल पर भी मिलेगा मुआवजा, किसानों को बड़ी राहत


    नई दिल्ली। खेती-किसानी में मौसम के साथ-साथ जंगली जानवरों का खतरा भी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन चुका है। कई बार खेतों में घुसकर नीलगाय, जंगली सूअर और दूसरे वन्य जीव पूरी फसल बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। अब किसानों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव करते हुए जंगली जानवरों और जलभराव से खराब होने वाली फसलों को भी बीमा कवर में शामिल करने का फैसला किया है।

    केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने जानकारी दी कि खरीफ 2026 सीजन से यह नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत अगर किसी किसान की फसल जंगली जानवरों द्वारा नुकसान पहुंचाने या भारी बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से खराब होती है, तो उसे भी बीमा योजना के तहत मुआवजा दिया जाएगा। लंबे समय से किसान इस तरह के नुकसान को योजना में शामिल करने की मांग कर रहे थे।

    सरकार के मुताबिक, नई व्यवस्था का फायदा देशभर के हजारों किसानों को मिलेगा। अब तक फसल बीमा योजना में प्राकृतिक आपदाओं और मौसम से होने वाले नुकसान को ही प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब खेती को प्रभावित करने वाले दूसरे बड़े जोखिमों को भी शामिल किया जा रहा है। इससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

    कैसे मिलेगा बीमा क्लेम?
    नई गाइडलाइन के अनुसार, फसल खराब होने की स्थिति में किसान को 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना देनी होगी। किसान मोबाइल ऐप या संबंधित पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज कर सकेंगे। इसके साथ खेत की जियो-टैग फोटो भी अपलोड करनी होगी, ताकि नुकसान की पुष्टि की जा सके। इसके बाद अधिकारी मौके पर जांच करेंगे और रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा जारी किया जाएगा।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किन जंगली जानवरों से हुए नुकसान को योजना में शामिल किया जाएगा और किन जिलों में यह सुविधा लागू होगी, इसका फैसला संबंधित राज्य सरकारें करेंगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है, जो हर साल जंगली जानवरों या जलभराव के कारण भारी नुकसान झेलते हैं। सरकार का कहना है कि खेती को सुरक्षित और किसानों की आय को मजबूत बनाने के लिए योजनाओं में लगातार सुधार किए जा रहे हैं और यह कदम उसी दिशा में अहम माना जा रहा है।

  • Astrology: इन राशियों के लोगों की रगों में बहती है कला, जन्म से ही होते हैं क्रिएटिव और टैलेंटेड

    Astrology: इन राशियों के लोगों की रगों में बहती है कला, जन्म से ही होते हैं क्रिएटिव और टैलेंटेड


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों और राशियों का असर केवल स्वभाव या भाग्य तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि यह व्यक्ति की प्रतिभा, सोच और रचनात्मक क्षमता को भी प्रभावित करता है। कहा जाता है कि कुछ लोग मेहनत से कलाकार बनते हैं, जबकि कुछ लोग जन्म से ही कला का वरदान लेकर आते हैं। उनकी सोच, कल्पनाशक्ति और सौंदर्य को देखने का नजरिया उन्हें भीड़ से अलग बना देता है।

    ज्योतिष के अनुसार शुक्र और चंद्रमा ऐसे ग्रह हैं, जो इंसान के भीतर कला, संगीत, भावनाएं और रचनात्मकता पैदा करते हैं। जिन लोगों की कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है, वे अक्सर संगीत, लेखन, अभिनय, डिजाइनिंग, पेंटिंग या फैशन जैसे क्षेत्रों में खास पहचान बनाते हैं। खास तौर पर वृषभ, कर्क और तुला राशि के लोगों को जन्मजात कलाकार माना जाता है।

    वृषभ राशि: सुंदरता और संगीत के दीवाने
    वृषभ राशि का स्वामी शुक्र ग्रह होता है, जिसे कला, आकर्षण और विलासिता का कारक माना गया है। इस राशि के लोग स्वभाव से बेहद क्रिएटिव और सौंदर्य प्रेमी होते हैं। इन्हें संगीत, गायन, पेंटिंग और डिजाइनिंग जैसी चीजों में खास रुचि रहती है।

    इनकी आवाज में स्वाभाविक मिठास होती है, जिसकी वजह से कई लोग अच्छे गायक या संगीतकार बनते हैं। इसके अलावा रंगों और सजावट की गहरी समझ इन्हें फैशन, इंटीरियर डिजाइन और कुकिंग जैसे क्षेत्रों में भी सफलता दिलाती है। वृषभ राशि के लोग धैर्य के साथ काम करते हैं और छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर अपने हुनर को निखारते हैं।

    कर्क राशि: भावनाओं से जन्म लेती है इनकी कला
    कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है, जो मन, भावनाओं और कल्पनाओं का प्रतीक माना जाता है। इस राशि के लोग बेहद संवेदनशील और भावुक होते हैं और यही गुण उनकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।

    इनकी कल्पनाशक्ति बहुत तेज होती है, इसलिए ये लेखन, कविता, अभिनय और कहानी कहने जैसी विधाओं में शानदार प्रदर्शन करते हैं। कर्क राशि के लोग दूसरों की भावनाओं को गहराई से समझते हैं, इसलिए इनके काम में एक अलग ही भावनात्मक जुड़ाव दिखाई देता है। यही कारण है कि इनके द्वारा लिखा गया शब्द या निभाया गया किरदार सीधे लोगों के दिल तक पहुंच जाता है।

    तुला राशि: स्टाइल, ग्रेस और परफेक्शन का मेल
    तुला राशि पर भी शुक्र ग्रह का प्रभाव रहता है, लेकिन यहां यह प्रभाव स्टाइल, संतुलन और खूबसूरती के रूप में दिखाई देता है। तुला राशि के लोगों का फैशन सेंस बेहद शानदार माना जाता है।

    इन्हें कपड़ों, रंगों, डिजाइन और ट्रेंड्स की अच्छी समझ होती है। यही वजह है कि ये लोग फैशन डिजाइनिंग, आर्किटेक्चर, मेकअप, स्टाइलिंग और सजावट जैसे क्षेत्रों में बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं। इनके काम में एक खास तरह की क्लास और रॉयल फील दिखाई देती है। तुला राशि के लोग हर चीज को परफेक्ट बनाने की कोशिश करते हैं और जब तक काम खूबसूरत न लगे, इन्हें संतुष्टि नहीं मिलती।

    ज्योतिष शास्त्र मानता है कि कला केवल सीखी नहीं जाती, कई बार यह इंसान के भीतर जन्म से मौजूद होती है। वृषभ, कर्क और तुला राशि के लोग इसी प्राकृतिक रचनात्मकता और कलात्मक सोच की वजह से भीड़ में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहते हैं।