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  • FIFA World Cup 2026: टोरंटो में रंगारंग ओपनिंग सेरेमनी का जलवा, नोरा फतेही की धमाकेदार परफॉर्मेंस ने जीता दिल

    FIFA World Cup 2026: टोरंटो में रंगारंग ओपनिंग सेरेमनी का जलवा, नोरा फतेही की धमाकेदार परफॉर्मेंस ने जीता दिल


    नई दिल्ली। फीफा विश्व कप 2026 का रोमांच मैदान के साथ-साथ मंच पर भी देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को कनाडा के टोरंटो स्थित बीएमओ फील्ड में आयोजित टूर्नामेंट की दूसरी ओपनिंग सेरेमनी ने दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भव्य रोशनी, संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के शानदार प्रदर्शन ने इस आयोजन को विश्व कप के सबसे यादगार पलों में शामिल कर दिया।

    इस रंगारंग समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण बॉलीवुड अभिनेत्री और वैश्विक कलाकार नोरा फतेही रहीं। जैसे ही नोरा मंच पर पहुंचीं, पूरा स्टेडियम तालियों और उत्साह से गूंज उठा। उन्होंने फीफा विश्व कप 2026 के आधिकारिक गीत ‘Siir Siir’ पर दमदार प्रस्तुति दी। अपनी जबरदस्त ऊर्जा, आकर्षक डांस मूव्स और शानदार मंचीय उपस्थिति से नोरा ने हजारों दर्शकों का दिल जीत लिया। सोशल मीडिया पर भी उनकी परफॉर्मेंस के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं और प्रशंसक उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं।

    ‘Siir Siir’ गीत संगीत निर्माता संजॉय और फ्रांसीसी गायक वेगेड्रीम के सहयोग से तैयार किया गया है। यह गीत फीफा विश्व कप 2026 के आधिकारिक म्यूजिक प्रोजेक्ट का हिस्सा है और टूर्नामेंट के आधिकारिक एल्बम में भी शामिल किया गया है। नोरा की प्रस्तुति ने इस गीत को नई पहचान देने का काम किया और स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

    समारोह में कनाडा की सांस्कृतिक विविधता और विरासत को भी बेहद खूबसूरत अंदाज में प्रस्तुत किया गया। विश्व कप ट्रॉफी की विशाल मोजेक-शैली की प्रस्तुति ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। रोशनी और तकनीक के शानदार समन्वय ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने इस दृश्य का भरपूर आनंद लिया।

    कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध कनाडाई गायिका अलानिस मॉरिसेट ने राष्ट्रगान प्रस्तुत किया, जिसने माहौल को भावुक और गौरवपूर्ण बना दिया। वहीं हॉलीवुड अभिनेता विल अर्नेट ने दुनिया भर से आए फुटबॉल प्रशंसकों का स्वागत किया और विश्व कप के जश्न को नई ऊंचाई दी।

    ओपनिंग सेरेमनी में कई अन्य अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने भी अपने प्रदर्शन से समां बांधा। माइकल बब्ले, एलेसिया कारा, जेसी रेयेज, एलियाना और विलियम प्रिंस जैसे कलाकारों ने मंच पर शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीत, संस्कृति और खेल के इस अद्भुत संगम ने विश्व कप के उत्सव को और अधिक खास बना दिया।

    फीफा विश्व कप 2026 के कनाडाई चरण की यह ओपनिंग सेरेमनी न केवल खेल प्रेमियों बल्कि संगीत और मनोरंजन जगत के प्रशंसकों के लिए भी एक अविस्मरणीय अनुभव बन गई। नोरा फतेही की शानदार प्रस्तुति और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की मौजूदगी ने इस आयोजन को वैश्विक आकर्षण का केंद्र बना दिया।

  • MP: सतना के नागौद राजघराने में दो पत्नियों का विवाद….. दूसरी पत्नी ने पहली पर चलाई गोलियां, हालत गंभीर

    MP: सतना के नागौद राजघराने में दो पत्नियों का विवाद….. दूसरी पत्नी ने पहली पर चलाई गोलियां, हालत गंभीर


    सतना।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना जिले (Satna district) में नागौद राजघराने (Nagod Royal Family) से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां परसमनिया गढ़ी में लंबे समय से चल रहा पारिवारिक विवाद अचानक खूनी संघर्ष में बदल गया. विवाद में कथित तौर पर दूसरी पत्नी ने पहली पत्नी पर गोली चला दी, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया. यह मामला नागौद राजघराने से जुड़ा है. रूपेंद्र सिंह (Rupendra Singh) उर्फ बाबा राजा, जो पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक नागेंद्र सिंह के भतीजे बताए जाते हैं, उनकी पहली पत्नी सुनीता सिंह और दूसरी पत्नी योगिता सिंह के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था. दोनों के बीच पारिवारिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था।

    जानकारी के अनुसार, विवाद को सुलझाने के लिए योगिता सिंह दो दिन पहले अपने परिजनों के साथ परसमनिया गढ़ी पहुंची थीं. यहां दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही थी, लेकिन गुरुवार दोपहर करीब तीन बजे स्थिति अचानक बिगड़ गई और विवाद बढ़ गया. इसी दौरान आरोप है कि सुनीता सिंह ने अपनी लाइसेंसी 22 बोर राइफल उठा ली और कई राउंड फायरिंग कर दी. बताया जा रहा है कि करीब नौ राउंड गोलियां चलाई गईं. फायरिंग के दौरान एक गोली योगिता सिंह के पेट में जा लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ीं।

    घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायल महिला को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया. पहले उन्हें सतना में प्राथमिक इलाज दिया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर रीवा के विंध्य अस्पताल रेफर कर दिया गया. अस्पताल में डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर उनके पेट में फंसी गोली निकाल दी. फिलहाल योगिता सिंह आईसीयू में हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई. परसमनिया गढ़ी में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।


    संपत्ति और पारिवारिक विवाद के एंगल से भी हो रही पड़ताल

    पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी सुनीता सिंह को हिरासत में ले लिया है. साथ ही घटना में इस्तेमाल की गई लाइसेंसी राइफल भी जब्त कर ली गई है. सतना के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रेम लाल कुर्वे ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह विवाद लंबे समय से चल रहा था और मामला संपत्ति या पारिवारिक कारणों से जुड़ा हो सकता है. पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विवाद किस तरह इतना बढ़ गया कि गोली चलाने की नौबत आ गई।

  • ED ने अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार

    ED ने अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार


    मुंबई।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने शुक्रवार अनिल अंबानी (Anil Ambani) के करीबी और रिलायंस ग्रुप (Reliance Group) के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के वाइस-चेयरमैन सतीश सेठ (Satish Seth) को मुंबई में गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद उन्हें एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया है, जहां से ईडी को ट्रांजिट रिमांड मिल गई है. अब उन्हें दिल्ली लाया जा रहा है.

    एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को मुंबई में रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) के दो पूर्व अधिकारियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया।

    उन्होंने बताया कि गिरफ्तार के बाद सतीश को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया गया है. चूंकि ये मामले दिल्ली में दर्ज है तो जांच एजेंसी की टीम रिमांड अवधि में सतीश को दिल्ली लाकर अदालत में पेश करेगी और आगे की पूछताछ-जांच के लिए हिरासत की मांग करेगी।

    केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस साल मार्च महीने में ही सतीश सेठ और गौतम दोशी के खिलाफ मामला दर्ज किया था. सीबीआई की टीम ने इस जांच के हिस्से के रूप में दोनों अधिकारियों के परिसरों और ठिकानों पर छापेमारी भी की थी. सीबीआई की इसी शिकायत को आधार बनाकर ईडी ने दोनों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी जांच शुरू की है।

    सीबीआई के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) कुल 11 बैंकों के उस कंसोर्टियम (समूह) का एक प्रमुख सदस्य था, जिसने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को कुल 735 करोड़ रुपये की टर्म लोन सुविधा मंजूर की थी. इसी स्वीकृत लोन में से 114.98 करोड़ रुपये की राशि में भारी धोखाधड़ी और वित्तीय हेरफेर करने का गंभीर आरोप इन दोनों अधिकारियों पर लगा है।

    बता दें कि सतीश सेठ को लंबे समय तक अनिल अंबानी का बेहद करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता रहा है जो रिलायंस ग्रुप के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के वाइस-चेयरमैन के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. अब प्रवर्तन निदेशालय इस पूरे बैंक लोन फ्रॉड मामले में सतीश सेठ और गौतम दोशी दोनों की वास्तविक भूमिकाओं की गहराई से जांच कर रहा है।

  • महंगाई दर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी…. लगातार पांचवें माह बढ़कर 16 माह के उच्च स्तर तक पहुंची

    महंगाई दर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी…. लगातार पांचवें माह बढ़कर 16 माह के उच्च स्तर तक पहुंची


    नई दिल्ली। इ
    स तपती गर्मी में सिर्फ मौसम का पारा ही नहीं चढ़ रहा है, आपके घर का मासिक बजट (Monthly Budget) और रसोई का खर्च (Kitchen Expenses) भी बढ़ रहा है। शुक्रवार को जारी हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई (Consumer Price Index-based Inflation) के आधिकारिक आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि आम आदमी की जेब पर चौतरफा बोझ बढ़ रहा है।

    सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 16 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई। इसकी प्रमुख वजह चांदी और सोने के गहनों के साथ टमाटर एवं अदरक की कीमतों में तेल उछाल है। अगर खाद्य महंगाई के आंकड़े देखें, तो यह और भी डरावना है। खाद्य महंगाई बीते माह बढ़कर 4.78 फीसदी पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 4.20 फीसदी थी।


    महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह

    महंगाई बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा हाथ खाने-पीने की चीजों और व्यक्तिगत रखरखाव के खर्च का है। आंकड़ों के मुताबिक, व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और अन्य विविध वस्तुओं एवं सेवाओं की श्रेणी में महंगाई में सालाना आधार पर 18.46 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। रेस्टोरेंट-होटल जैसी सेवाएं 5.75 फीसदी और पान-तंबाकू 4.83 फीसदी महंगे हुए हैं, जिसने आम आदमी का खर्च बढ़ा दिया है।


    इन चीजों ने बढ़ाया संकट

    – चांदी के गहने : यहां महंगाई का विस्फोट हुआ है और कीमतें एक साल पहले की तुलना में 155.23 फीसदी महंगी हो चुकी हैं।
    – टमाटर : रसोई के राजा टमाटर के दाम 48.43 फीसदी चढ़ चुके हैं।
    – सोने, हीरे और प्लेटिनम के आभूषण : इनकी महंगाई दर भी 40.93 फीसदी पहुंच गई है।
    – अदरक : चाय का स्वाद कड़वा करते हुए यह 32.49 फीसदी महंगा।
    – किशमिश-मुनक्का : सूखे मेवे भी 21.97 फीसदी महंगे बिक रहे हैं।


    यहां राहत

    बढ़ती महंगाई के बीच आलू (-23.71%), हरी मटर (-11.47), मोटर कार एवं जीप (-7.19%), जीरा (-4.59%) और मोटर साइकिल-स्कूटर (-3.56%) की कीमतों में सालाना आधार पर गिरावट आई है।


    इन राज्यों में सर्वाधिक महंगाई दर
    राज्य – महंगाई दर

    तेलंगाना – 6.15%
    तमिलनाडु – 5.11%
    आंध्र प्रदेश – 4.90%
    कर्नाटक – 4.59%
    ओडिशा – 4.54%
    उत्तर प्रदेश – 3.97%
    पंजाब – 3.34%
    हरियाणा – 3.09%
    हिमाचल प्रदेश – 3.05%
    दिल्ली – 2.50%


    शहरों से ज्यादा गांवों में बढ़ी महंगाई

    बीते माह ग्रामीण महंगाई 4.25 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि शहरों में यह 3.53 फीसदी दर्ज की गई। खाद्य महंगाई के मामले में भी गांवों का आंकड़ा 4.85 फीसदी है, जबकि शहरों में 4.66 फीसदी। ग्रामीण महंगाई बढ़ने से कपड़े, जूते, बाइक, मोबाइल और रोजमर्रा के सामान की खरीदारी कम हेागी, जिससे कंपनियों की बिक्री-मुनाफे पर चोट पहुंचेगी।

  • तेजी से आगे बढ़ रहा मानसून…. 25 राज्यों में 18 जून तक आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट

    तेजी से आगे बढ़ रहा मानसून…. 25 राज्यों में 18 जून तक आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    तेजी से आगे बढ़ रहे दक्षिण्-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) और उत्तरी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से मौसम (Weather:) में व्यापक बदलाव आया है। पिछले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) से तटीय कर्नाटक तक गरज और चमक के साथ बारिश हुई है। साथ ही, अलग-अलग क्षेत्रों में 50-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान ने भी कहर बरपाया है। बिहार में बिजली गिरने से 10 लोगों की जान चली गई है, पंजाब में भी वर्षा जनित घटनाओं में 3 लोगों की जान चली गई है। मौसम में यह बदलाव कम से कम 18 जून तक जारी रहने की प्रबल संभावना है।

    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर, हापुड़, बिजनौर, शामली, मुरादाबाद, संभल, हाथरस और मथुरा में आंधी-तूफान और गरज के साथ बारिश हुई। हरियाणा के गोहाना, सोनीपत और रोहतक समेत कई जिलों में भी ऐसा ही हाल रहा। राजस्थान के डीग, भरतपुर, बयाना और धौलपुर में भी तेज हवाएं चलीं और छिटपुट बारिश दर्ज की गई। बिहार में बारिश के दौरान बिजली गिरने से खगड़िया में पांच लोगों की मौत हो गई और 7 लोग झुलस गए, जबकि भागलपुर, मधेपुरा, सहरसा और भोजपुर जिलों में भी वज्रपात से एक-एक लोगों की जान चली गई।

    जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, चंडीगढ़, पंजाब और छत्तीसगढ़ में भी व्यापक वर्षा हुई। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, झारखंड, ओडिशा और तटीय कर्नाटक में भारी बारिश दर्ज की गई। हिमाचल प्रदेश में रोहतांग सहित ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई। कुल्लू और लाहौल घाटी में झमाझम बारिश दर्ज की गई। केरल में कुछ जगहों पर 12-20 सेमी तक वर्षा रिकॉर्ड की गई। असम, बंगाल, त्रिपुरा और तमिलनाडु में कुछ जगहों पर 7-11 सेमी वर्षा हुई। मध्य प्रदेश, कोंकण, महाराष्ट्र और गुजरात में कुछ जगहों पर 40-60 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। उधर, विदर्भ में कई जगहों पर लू जैसी स्थिति रही और रातें गर्म रहीं।


    18 तक उत्तर-पश्चिम में बदला रहेगा मौसम

    मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम भारत में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 18 जून तक अलग-अलग स्थानों पर गरज और चमक के साथ बारिश होने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान जताया है। इस दौरान कुछ जगहों पर बिजली भी गिर सकती है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड, बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और पूर्वोत्तर भारत के असम समेत सभी राज्यों में भी अगले तीन से चार दिनों तक 40-50 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने और मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई है।


    बदरीनाथ हाईवे पांच घंटे बंद रहा

    उत्तराखंड में बदरीनाथ हाईवे पर भनेरपाणी में पहाड़ी से भूस्खलन होने पर करीब पांच घंटे तक वाहनों की आवाजाही ठप रही। इस दौरान हाईवे के दोनों ओर करीब 2,000 तीर्थयात्री फंसे रहे। बाद में कार्यदायी संस्था एनएचआईडीसीएल की जेसीबी ने मलबे का निस्तारण किया। इसके बाद शुक्रवार सुबह आठ बजे वाहनों की आवाजाही सुचारु हो पाई। भनेरपाणी में थोड़ी बारिश होने पर भी मलबा और पत्थर हाईवे पर गिर रहे हैं।


    पूर्वी उत्तर प्रदेश की दहलीज पर मानसून

    दक्षिण-पश्चिम मानसून पूर्वी-उत्तरी उत्तर प्रदेश की सीमा के करीब पहुंच गया है। आईएमडी के अनुसार, शुक्रवार को मानसून प. बंगाल और बिहार के कुछ और भागों एवं ओडिसा व झारखंड के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ गया है। अगले 2-3 दिनों में मानसून के मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाकी हिस्सों, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं। इस तरह, तीन दिन की देरी से केरल पहुंचा मानसून 9 दिनों के भीतर ही 19 राज्यों तक पहुंच गया है।


    अल नीनो का साया

    मौसम विभाग के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में इस समय अल नीनो की स्थितियां सक्रिय हैं। मौसम विभाग ने कहा कि समुद्र की सतह के बढ़ते तापमान का असर अब हमारे वायुमंडल पर भी दिखने लगा है। महासागर और वायुमंडल की यह साझा प्रणाली अब पूरी तरह से अल नीनो के लक्षणों को दर्शा रही है। आने वाले महीनों में अल नीनो का प्रभाव और अधिक गहराने की आशंका है। आमतौर पर अल नीनो के सक्रिय होने से भारत में कम बारिश या सूखे जैसे हालात पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। भारत में इससे पहले आखिरी बार अल नीनो की स्थितियां साल 2023 में देखी गई थीं।

  • जब सलमान खान ने बोनी कपूर के लिए मुफ्त में किया था काम, ‘सिर्फ तुम’ के कैमियो से जुड़ा दिलचस्प किस्सा आया सामने

    जब सलमान खान ने बोनी कपूर के लिए मुफ्त में किया था काम, ‘सिर्फ तुम’ के कैमियो से जुड़ा दिलचस्प किस्सा आया सामने


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में सलमान खान और फिल्म निर्माता बोनी कपूर के रिश्ते कभी बेहद मजबूत और दोस्ताना रहे हैं। दोनों के बीच की यही गहरी दोस्ती कई मौकों पर देखने को मिली और इसका एक दिलचस्प उदाहरण फिल्म ‘सिर्फ तुम’ से जुड़ा है। हाल ही में यह पुराना किस्सा एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जिसमें सलमान खान ने दोस्ती निभाने के लिए बोनी कपूर की फिल्म में बिना फीस लिए काम करने का फैसला किया था।

    यह घटना 1990 के दशक की बताई जाती है। उस समय बोनी कपूर अपनी फिल्म ‘जुदाई’ की शूटिंग के सिलसिले में हैदराबाद में थे। संयोग से सलमान खान भी उसी दौरान अपनी फिल्म ‘जुड़वा’ की शूटिंग के लिए हैदराबाद में मौजूद थे। दोनों एक ही होटल में ठहरे हुए थे। एक शाम सलमान खान, बोनी कपूर और अनिल कपूर के साथ बैठकर लंबी पार्टी में शामिल हुए। बोनी कपूर ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि वह सामान्य तौर पर बहुत कम शराब पीते थे, लेकिन उस रात सलमान के आग्रह पर पार्टी देर रात से लेकर सुबह तक चलती रही।

    बताया जाता है कि सुबह करीब सात बजे तक पार्टी का दौर चलता रहा। इसके बाद सलमान थोड़ी देर आराम करके अपनी शूटिंग पर निकल गए, जबकि बोनी कपूर पूरे दिन हैंगओवर से परेशान रहे। हालांकि इसी दौरान दोनों के बीच दोस्ती और मजबूत हो गई।

    बोनी कपूर के अनुसार, अगले दिन सलमान खान को यह महसूस हुआ कि उन्होंने सिर्फ उनके कहने पर पूरी रात पार्टी में साथ दिया था। तब सलमान ने उनसे कहा कि यदि भविष्य में कभी किसी काम की जरूरत पड़े तो वह जरूर मदद करेंगे। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह बात आगे चलकर एक फिल्मी किस्से का हिस्सा बन जाएगी।

    कुछ वर्षों बाद जब बोनी कपूर फिल्म ‘सिर्फ तुम’ का निर्माण कर रहे थे, तब उन्हें एक विशेष कैमियो रोल के लिए सलमान खान की जरूरत महसूस हुई। उन्होंने सलमान को फोन कर फिल्म में छोटी लेकिन अहम भूमिका निभाने का प्रस्ताव दिया। सलमान ने बिना देर किए प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, लेकिन इसके साथ एक शर्त भी रख दी।

    सलमान खान ने बोनी कपूर से कहा कि वह यह रोल जरूर करेंगे, लेकिन इसके लिए कोई फीस नहीं लेंगे। अभिनेता का मानना था कि यह उनकी दोस्ती और पुराने वादे को निभाने का अवसर है। सलमान की इस बात ने बोनी कपूर को हैरान भी किया और भावुक भी।

    फिल्म ‘सिर्फ तुम’ में सलमान खान का कैमियो भले ही छोटा था, लेकिन दर्शकों ने उसे खूब पसंद किया। फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और सलमान का यह विशेष किरदार लंबे समय तक याद किया गया। यह किस्सा आज भी बॉलीवुड में दोस्ती, भरोसे और रिश्तों की अहमियत का एक खूबसूरत उदाहरण माना जाता है।

  • MP: उज्जैन में महाकाल की सवारी से पहले हाई वॉल्टेज ड्रामा, हाथी' के ब्लड सैंपल देने से महावत का इनकार

    MP: उज्जैन में महाकाल की सवारी से पहले हाई वॉल्टेज ड्रामा, हाथी' के ब्लड सैंपल देने से महावत का इनकार


    उज्जैन।
    साल 2016 से बाबा महाकाल (Baba Mahakal) की सवारी में सेवा देने वाले हाथी को लेकर उज्जैन (Ujjain) में हाई वॉल्टेज ड्रामा (High-voltage drama) देखने को मिला. दरअसल डॉक्टर्स की एक टीम श्यामू हाथी (Shyamu Elephant) की जांच के लिए महावत के निवास पहुंची थी. टीम का मानना था कि श्यामू अब सवारी के लिए अनफिट है, लेकिन महावत का कहना था कि एक साजिश के तहत उसके हाथी को न सिर्फ सवारी से दूर किया जा रहा है, बल्कि उसे ‘वनतारा’ जू भेजने की तैयारी की जा रही है. महावत का कहना था कि उनका हाथी पूरी तरह से फिट है. उज्जैन का ये मामला गुरूवार को पूरे दिन सुर्खियों में रहा.

    दरअसल, डेढ़ माह बाद 30 जुलाई से पवित्र श्रावण मास शुरू होने वाला है, जिसमें विश्व विख्यात महाकाल बाबा की सवारी निकाली जाएगी. इस सवारी में हर वर्ष की तरह श्यामू हाथी भी शामिल होगा। हाथी मालिक के अनुसार, 2016 से 2025 तक हर सवारी में श्यामू शामिल रहा है और आगे भी चलेगा. लेकिन अब उसे अनफिट बताया जा रहा है।

    गुरुवार को पन्ना टाइगर रिजर्व के डॉ. संजय गुप्ता, इंदौर जू प्रभारी डॉ. उत्तम यादव और उज्जैन के पशु चिकित्सक डॉ. मुकेश जैन इंदौर रोड स्थित सांईधाम कॉलोनी पहुंचे. चिकित्सकों को हाथी के स्वास्थ्य की जांच के लिए ब्लड सैंपल लेना था, मगर महावत और उसके परिवार वाले इस बात के लिए तैयार नहीं थे.


    मालिक का बड़ा आरोप

    महावत का कहना था कि हाथी पूरी तरह से फिट है, एक साजिश के तहत उसे बीते 9 महीने से परेशान किया जा रहा है. ये लोग हाथी को अनफिट बताकर उसे वनतारा जू भेजने की तैयारी में लगे हैं, इस बात से वे बहुत परेशान हैं। हाथी की जांच को लेकर दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक कहासुनी होती रही. अंत में डॉक्टर्स की टीम को पीछे हटना पड़ा. बाद में समझाइश पर महावत परिवार ने हाथी का मल-मूत्र डाक्टर्स को सौंपा, जिसके आधार पर टीम इस बात का पता लगाएगी कि श्यामू हाथी कितना फिट है.

    वैसे डाक्टर्स का कहना था कि हाथी के पैर अंदर की तरफ मुड़ने लगे हैं, जिससे वह ज्यादा चलने योग्य नहीं है, हो सकता है कहीं पर जानवर गिर जाए और हादसे की नौबत आ जाए. श्यामू हाथी को लेकर सिंतबर 2025 से विवाद चला आ रहा है. हालांकि, महाकाल मंदिर प्रशासन ने अभी तक ये स्पष्ट नहीं किया है कि सवारी में श्यामू शामिल होगा या नहीं।

    बता दें कि महाकाल सवारी के दौरान हाथी की पीठ पर बाबा महाकाल का एक विग्रह बैठाया जाता है, जिसे संभालने के लिए महावत के अलावा एक या दो पंडित भी हाथी पर सवार रहते हैं. भारी भीड़ के बीच हाथी भी पांच से छह किलामीटर का सफर तय करता है।

  • TMC के 20वें सांसद के भी बगावत के चर्चे…. बागी गुट ने पार्टी सिंबल पर ठोका अपना दावा

    TMC के 20वें सांसद के भी बगावत के चर्चे…. बागी गुट ने पार्टी सिंबल पर ठोका अपना दावा


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों (West Bengal Assembly elections) में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress- TMC) की करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर मची बगावत अब दिल्ली दरबार तक पहुंच गई है। टीएमसी के बागी गुट ने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र भेजकर संसद में खुद को असली टीएमसी के रूप में मान्यता देने और पार्टी सिंबल पर अपना दावा ठोका है। इस चिट्ठी के सामने के बाद 20वें सांसद के बगावत की भी चर्चा तेज हो गई है।

    सूत्रों के मुताबिक, यह पत्र 18 मई का है जिस पर टीएमसी के 19 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर हैं। दिलचस्प बात यह है कि पत्र में हस्ताक्षर करने वालों के सीरियल नंबर 1 से 20 तक हैं, लेकिन 13वें नंबर के आगे किसी का हस्ताक्षर नहीं है। इससे यह राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं कि टीएमसी का कोई अन्य कद्दावर सांसद भी इस बागी गुट के संपर्क में है और सही समय पर सामने आ सकता है।

    बागी गुट की वरिष्ठ नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, “हां, मैंने पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और हमने इसे काफी समय पहले ही स्पीकर को भेज दिया था।” वहीं, सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने कहा कि इस पत्र से यह साफ हो जाता है कि लोकसभा में असली टीएमसी हम ही हैं।


    इन 19 सांसदों के हस्ताक्षर

    शुक्रवार को सामने आई चिट्ठी में जिन सांसदों के हस्ताक्षर हैं उनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हालदार, शर्मिला सरकार, प्रसून बंदोपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सयानी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी (देव), जून मालिया और पार्थ भौमिक जैसे नाम शामिल हैं।


    बागी गुट के सामने क्या विकल्प

    लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। इनमें ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी भी शामिल हैं, जो इस समय बागियों के मुख्य निशाने पर हैं। दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए बागी गुट के पास दो मुख्य रास्ते हैं। बागी गुट खुद को मूल पार्टी बताकर चुनाव आयोग (EC) के पास जा सकता है। इसके लिए उन्हें विधायी बहुमत साबित करना होगा। दलबदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है। 28 सांसदों का दो-तिहाई यानी 19 होता है। यही वजह है कि बागी गुट 19 सांसदों के साथ सुरक्षित होने का दावा कर रहा है।

    हाल ही में अप्रैल में आम आदमी पार्टी (AAP) के 10 राज्यसभा सांसदों ने इसी तरह दो-तिहाई बहुमत के साथ भाजपा में अपना विलय कर लिया था। यदि टीएमसी के ये 19 सांसद भी भाजपा या एनडीए में सीधे विलय करते हैं, तो उनकी सदस्यता बची रहेगी।

    टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इस पर पलटवार करते हुए एक्स लिखा, “गद्दार टीएमसी सांसदों को कानून नहीं पता। 2003 के 91वें संविधान संशोधन ने पार्टी में विभाजन या अलग ब्लॉक के प्रावधान को खत्म कर दिया है। सांसदों की संख्या मायने नहीं रखती, मूल राजनीतिक दल के 2/3 हिस्से का किसी अन्य दल में विलय होना जरूरी है। इन सभी 19 गद्दारों को इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ना चाहिए।”

    भाजपा इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है, लेकिन वह फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही है। राज्यसभा के नवनिर्वाचित सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इसे टीएमसी का आंतरिक विस्फोट और उनके पापों का नतीजा बताया है। सूत्रों के अनुसार, बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने इस हफ्ते दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके आवास पर मुलाकात की थी। भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, “हमने टीएमसी को नहीं तोड़ा, वे खुद एनडीए और राष्ट्रवादी विचारधारा का समर्थन करने के लिए हमारे पास आए हैं। अब यह उन्हें तय करना है कि वे एकनाथ शिंदे या अजीत पवार का रास्ता चुनते हैं या नहीं।”

    हालांकि, इस कूटनीतिक बढ़त के बीच बंगाल भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में थोड़ा असंतोष भी है। भाजपा का एक धड़ा इन टीएमसी बागियों को पार्टी में शामिल करने और भविष्य में एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री पद दिए जाने की संभावना का खुलकर विरोध कर रहा है।


    केंद्र सरकार को क्या होगा फायदा?

    भले ही स्थानीय स्तर पर मतभेद हों, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए के लिए यह बहुत बड़ी राहत होगी। लोकसभा में इन 19 सांसदों का समर्थन मिलने से मोदी सरकार को परिसीमन विधेयक और ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे बड़े और कड़े नीतिगत कानूनों को आसानी से पारित कराने में भारी मदद मिलेगी। वहीं राज्यसभा में भी टीएमसी के 3 सांसदों सुखेन्दु शेखर, सुष्मिता देव और प्रकाश बड़ाईक के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीटों को भाजपा विधानसभा में बहुमत के दम पर आसानी से जीत लेगी।

  • Maldives में खसरे का प्रकोप….. मुसीबत में फिर संकटमोचक बना भारत…. वैक्सीन-दवाएं भेजी

    Maldives में खसरे का प्रकोप….. मुसीबत में फिर संकटमोचक बना भारत…. वैक्सीन-दवाएं भेजी


    माले।
    भारत (India) ने अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति (‘Neighbourhood First’ policy) को दोहराते हुए, मालदीव (Maldives) में फैले खसरे (Measles) के प्रकोप से निपटने के लिए उसे बड़ी मात्रा में चिकित्सा सहायता (Medical Assistance) भेजी है। भारत ने मालदीव में खसरे के बढ़ते मामलों से निपटने और वहां टीकाकरण को मजबूत करने में मदद के लिए खसरे के टीके की 20,000 खुराक और लगभग तीन टन मेडिकल आपूर्ति भेजी है।

    विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस बात की पुष्टि की है कि भारत सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा और टीकाकरण को मजबूत करने के लिए मालदीव की मदद कर रही है। भेजी गई सहायता में शामिल हैं:

    – 20,000 एमआर (Measles-Rubella) वैक्सीन की खुराकें: ताकि बीमारी के प्रसार को तुरंत रोका जा सके।
    – 3 टन का मेडिकल कंसाइनमेंट: इसमें आवश्यक दवाइयां, सिरिंज, डायग्नोस्टिक किट और अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सा सामग्री शामिल हैं।
    – विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह समय पर दी गई सहायता मालदीव सरकार को खसरे के बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने और उनकी प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने में काफी मदद करेगी।


    कूटनीतिक संबंध और ‘विजन महासागर’

    मालदीव का भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और ‘विजन महासागर’ में एक विशेष और महत्वपूर्ण स्थान है। दोनों देशों के लोगों के आपसी लाभ और साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए भारत, मालदीव सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए हमेशा तत्पर रहा है। संकट के समय में सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाना भारत की इसी विदेश नीति का एक अहम हिस्सा है।


    मालदीव में खसरे की वापसी: एक चिंता का विषय

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2021 में इस बात की पुष्टि की थी कि मालदीव ने खसरे का पूरी तरह से उन्मूलन कर दिया है। एक बार बीमारी को खत्म करने के बाद, देश में इस नए प्रकोप का सामने आना एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता है, जिससे निपटने के लिए अब तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।


    खसरा क्या है और इसके लक्षण क्या हैं?

    खसरा एक बेहद संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से बच्चों को अपना शिकार बनाती है। यह संक्रमित व्यक्ति की नाक, मुंह या गले से निकलने वाली बूंदों के जरिए हवा में फैलता है। संक्रमण के 10-12 दिन बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं। इनमें तेज बुखार, नाक बहना, आंखें लाल होना और मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे पड़ना शामिल हैं। कुछ दिनों के बाद शरीर पर लाल दाने उभरने लगते हैं, जो चेहरे और ऊपरी गर्दन से शुरू होकर धीरे-धीरे पूरे शरीर में नीचे की ओर फैल जाते हैं।


    खसरा उन्मूलन का वैश्विक महत्व

    WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, खसरे के उन्मूलन से व्यापक स्तर पर जीवन रक्षक प्रभाव पड़ते हैं। इस क्षेत्र में उन्मूलन रणनीतियों से हर साल खसरे के कम से कम 11 लाख मामलों को रोका जा सकता है। रोके गए हर एक मामले से व्यक्ति के लगभग 2 सप्ताह के ‘विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष’ (DALYs) को बचाया जा सकता है।


    मृत्यु दर में कमी

    2020-2023 के दौरान विभिन्न रणनीतियों के संयोजन से खसरे के कारण होने वाली लगभग 11 लाख मौतों को टाला गया है। प्रति मृत्यु को टालने के लिए औसत खर्च मात्र 1,373 अमेरिकी डॉलर आंका गया है, जो इस बीमारी के खिलाफ टीकाकरण को सबसे प्रभावी और जरूरी स्वास्थ्य निवेश बनाता है।

  • LS में ताकत बढ़ाने की तैयारी में NDA…. टारगेट- दो तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचना

    LS में ताकत बढ़ाने की तैयारी में NDA…. टारगेट- दो तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचना


    नई दिल्ली।
    केंद्र की सत्ता पर काबिज एनडीए (NDA) गठबंधन लोकसभा (Lok Sabha) में अपना कुनबा और ताकत बढ़ाने की तैयारी में है। टीएमसी (TMC) के बागी गुट द्वारा 19 सांसदों के समर्थन का दावा किए जाने के बाद, अब विपक्षी खेमे की एक और बड़ी पार्टी में फूट की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों की मानें तो अगला नंबर उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी (Shiv Sena – UBT)) का हो सकता है। बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए लोकसभा (Lok Sabha) में दो-तिहाई बहुमत (Two-thirds majority) के आंकड़े के करीब पहुंचने के लिए विपक्ष के कई सांसदों को अपने पाले में लाने की जुगत में लगा हुआ है।


    शिवसेना (UBT) के 6 सांसद कर सकते हैं पाला-बदल

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एनडीए की एकतरफा जीत के बाद से ही उद्धव गुट में बगावत की अटकलें चल रही थीं, लेकिन अब इन चर्चाओं ने काफी जोर पकड़ लिया है। लोकसभा में फिलहाल उद्धव ठाकरे की पार्टी के कुल 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत सदस्यता जाने से बचने के लिए इनमें से कम से कम 6 सांसदों को एक साथ पार्टी छोड़नी होगी और किसी अन्य दल में विलय करना होगा। माना जा रहा है कि इन बागी सांसदों के लिए सबसे मुफीद विकल्प महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना ही होगी।


    मुंबई तक सिमट रहा उद्धव ठाकरे का प्रभाव?

    एकनाथ शिंदे अपनी मजबूत जमीनी पकड़ और आसानी से लोगों के बीच उपलब्ध रहने की छवि के कारण राज्य के बड़े हिस्से में अपने विरोधी गुट को कमजोर करने में सफल रहे हैं। शिंदे ने ठाकरे गुट के कई प्रभावशाली नेताओं को अपने पाले में कर लिया है, जिसके चलते माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे का प्रभाव अब मुख्य रूप से केवल मुंबई तक ही सीमित रह गया है।


    लोकसभा में 360 का आंकड़ा छूने पर NDA की नजर

    संसद में अपने गठबंधन का संख्याबल बढ़ाने की बीजेपी की इस सियासी कवायद के पीछे सबसे बड़ा लक्ष्य दो-तिहाई बहुमत हासिल करना है। फिलहाल लोकसभा में 540 सांसद मौजूद हैं और तीन सीटें खाली हैं। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की नजर किसी भी तरह सदन में दो-तिहाई यानी 360 सांसदों का जादुई आंकड़ा हासिल करने पर है।


    टीएमसी में भी हलचल

    इस मुहिम को तब बल मिला, जब हाल ही में टीएमसी के बागी गुट ने दावा किया कि उनके पास 19 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जो एनडीए सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। सूत्रों का कहना है कि संसद में संख्याबल बढ़ाने की बीजेपी की यह पूरी मुहिम अंततः इस बात पर भी निर्भर करेगी कि मौजूदा लोकसभा में 360 के जादुई आंकड़े को पार करने का उनका यह मास्टरप्लान जमीनी स्तर पर कितना व्यावहारिक साबित होता है।