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  • सरकारी स्कूलों की सच्चाई दिखाती है Adarsh Baal Vidyalaya, दमदार अभिनय ने जीता दिल, जानें कैसी है सीरीज

    सरकारी स्कूलों की सच्चाई दिखाती है Adarsh Baal Vidyalaya, दमदार अभिनय ने जीता दिल, जानें कैसी है सीरीज


    नई दिल्ली । ओटीटी पर रिलीज हुई वेब सीरीज Adarsh Baal Vidyalaya केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती बल्कि शिक्षा व्यवस्था की उन सच्चाइयों को भी सामने लाती है जिनसे आम लोग अक्सर रूबरू होते हैं। हास्य, व्यंग्य और भावनात्मक घटनाओं के सहारे यह सीरीज सरकारी स्कूलों की चुनौतियों, शिक्षकों की परेशानियों और बच्चों के भविष्य से जुड़े कई गंभीर सवाल उठाती है। निर्देशक हिमांक गौर ने सात एपिसोड की इस सीरीज में सामाजिक मुद्दे को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करने की कोशिश की है, जिससे कहानी बोझिल होने के बजाय दर्शकों को जोड़कर रखती है।

    सीरीज की कहानी दिल्ली के एक सरकारी स्कूल आदर्श बाल विद्यालय के इर्द-गिर्द घूमती है। सरकार की ओर से एक योजना शुरू की जाती है जिसके तहत बोर्ड परीक्षा में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले स्कूल के प्रधानाचार्य को कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय जाने का अवसर मिलेगा। यह खबर मिलते ही स्कूल के प्रधानाचार्य ज्ञानेश्वर त्रिपाठी अपने स्कूल को सर्वश्रेष्ठ बनाने की पूरी कोशिश में जुट जाते हैं। इसके बाद शुरू होता है संघर्ष, हास्य, चुनौतियों और कई भावनात्मक मोड़ों से भरा सफर जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखता है।

    प्रधानाचार्य ज्ञानेश्वर त्रिपाठी के किरदार में केके मेनन एक बार फिर अपनी अभिनय क्षमता का शानदार परिचय देते हैं। उनका संतुलित अभिनय इस किरदार को पूरी तरह जीवंत बना देता है। अर्चना पूरन सिंह भी एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में प्रभाव छोड़ती हैं और अपने अनुभव से कहानी को मजबूती देती हैं। देवेन भोजानी, नवीन कस्तूरिया, अभिमन्यु सिंह और प्रसन्ना बिष्ट जैसे कलाकार भी अपने-अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय करते हैं। खास बात यह है कि बाल कलाकारों का अभिनय भी बेहद स्वाभाविक है और कई दृश्यों में वे अनुभवी कलाकारों के बराबर प्रभाव छोड़ते हैं।

    निर्देशन के स्तर पर हिमांक गौर ने शुरुआत बेहद प्रभावशाली रखी है। पहले तीन एपिसोड हास्य, व्यंग्य और दिलचस्प घटनाओं से भरपूर हैं जो दर्शकों को लगातार बांधे रखते हैं। हालांकि इसके बाद कहानी की गति कुछ धीमी पड़ती दिखाई देती है। कुछ उपकथाएं ऐसी लगती हैं जिनकी आवश्यकता नहीं थी और कुछ दृश्य अनावश्यक रूप से लंबे महसूस होते हैं। इसके बावजूद अंतिम एपिसोड में कहानी फिर से पटरी पर लौटती है और एक संतोषजनक समापन की ओर बढ़ती है, हालांकि क्लाइमैक्स कुछ दर्शकों की अपेक्षाओं से अलग हो सकता है।

    इस सीरीज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह शिक्षा व्यवस्था की कमियों को सीधे भाषण देने के बजाय मनोरंजक अंदाज में सामने लाती है। सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी, शिक्षा की गुणवत्ता, अभिभावकों की उम्मीदें और बच्चों पर पड़ने वाला मानसिक दबाव जैसे मुद्दों को सहज तरीके से प्रस्तुत किया गया है। यही वजह है कि गंभीर विषय होने के बावजूद कहानी कहीं भी भारी नहीं लगती।

    यदि आप ऐसी वेब सीरीज देखना पसंद करते हैं जो मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश भी दे, तो Adarsh Baal Vidyalaya एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है। बीच के कुछ एपिसोड थोड़े धीमे जरूर लगते हैं लेकिन मजबूत अभिनय, प्रभावशाली संवाद और शिक्षा व्यवस्था पर सार्थक टिप्पणी इसे देखने लायक बनाती है। परिवार के साथ देखी जाने वाली यह सीरीज हंसाती भी है, सोचने पर मजबूर भी करती है और अंत में एक सकारात्मक संदेश छोड़ जाती है।

  • ग्लासगो के आसमान में उड़ता दिखा 'ड्रैगन', लोग रह गए हैरान; बाद में सामने आई वायरल वीडियो की असली कहानी

    ग्लासगो के आसमान में उड़ता दिखा 'ड्रैगन', लोग रह गए हैरान; बाद में सामने आई वायरल वीडियो की असली कहानी


    नई दिल्ली। स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में सुबह का एक सामान्य दिन अचानक चर्चा का विषय बन गया, जब लोगों ने नदी के ऊपर एक विशाल पंखों वाले ड्रैगन जैसी आकृति को उड़ते देखा। कुछ देर के लिए लोगों को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ। कई लोगों ने इसे किसी फिल्म की शूटिंग समझा, तो कुछ ने किसी हाई-टेक ड्रोन शो का हिस्सा माना। देखते ही देखते इस रहस्यमयी उड़ान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
    रेडियो प्रेजेंटर ने सबसे पहले रिकॉर्ड किया वीडियो

    बताया जा रहा है कि इस अनोखे दृश्य को सबसे पहले एसटीवी रेडियो के प्रेजेंटर इवेन कैमरून ने अपने कैमरे में कैद किया। वह सुबह करीब 5:45 बजे काम पर जा रहे थे, तभी रिवर क्लाइड और OVO हाइड्रो एरीना के पास उन्होंने आसमान में उड़ती विशाल आकृति देखी।

    उन्होंने वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद कुछ ही घंटों में लाखों लोग इसे देख चुके थे। वीडियो वायरल होते ही लोगों ने तरह-तरह के कयास लगाने शुरू कर दिए।

    सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। किसी ने मजाक में लिखा कि “ड्रैगन आखिरकार धरती पर लौट आए हैं”, तो कुछ लोगों ने इसे लोकप्रिय फिल्मों और गेम्स से जोड़कर देखा। कई यूजर्स ने माना कि पहली नजर में यह आकृति बिल्कुल किसी असली उड़ने वाले जीव जैसी दिखाई दे रही थी।

    क्या था इस उड़ते ड्रैगन का सच?

    बाद में खुलासा हुआ कि यह कोई असली ड्रैगन नहीं, बल्कि लोकप्रिय टीवी सीरीज ‘हाउस ऑफ द ड्रैगन’ के मशहूर ड्रैगन सायरैक्स (Syrax) का उड़ने वाला मॉडल था। इसे सीरीज के प्रचार अभियान के तहत तैयार किया गया था।

    इस मॉडल की डिजाइन इतनी वास्तविक बनाई गई कि दूर से देखने पर यह किसी जीवित ड्रैगन जैसा नजर आता है।

    जर्मन कंपनी ने तैयार किया हाई-टेक मॉडल

    इस विशेष मॉडल को जर्मनी की AirStage कंपनी ने विकसित किया है। इसे कार्बन फाइबर, हल्के फोम और छोटे इलेक्ट्रिक इंजनों की मदद से तैयार किया गया है। करीब 13 किलोग्राम वजनी इस मॉडल में 23 मूविंग पार्ट्स लगाए गए हैं, जो उड़ान के दौरान पंख, पूंछ और शरीर को वास्तविक जीव की तरह हिलने-डुलने में सक्षम बनाते हैं।

    उड़ान के दौरान दिखती है असली जैसी हरकत

    ड्रैगन के पंख लगातार फड़फड़ाते हैं, जबकि उसकी पूंछ संतुलन बनाए रखती है। शरीर के अलग-अलग हिस्सों की समन्वित गतिविधि इसे बेहद प्राकृतिक रूप देती है।

    इसके छोटे इंजन इस तरह छिपाए गए हैं कि दूर से देखने पर उनका पता नहीं चलता, जिससे भ्रम और भी बढ़ जाता है।

    पायलट ने बताया चुनौतीपूर्ण अनुभव

    इस मॉडल को उड़ाने वाले पायलट डेनिस गुटोव्स्की के अनुसार, इसे नियंत्रित करना सामान्य रिमोट कंट्रोल विमान उड़ाने से कहीं अधिक कठिन है। उन्होंने बताया कि मॉडल के कई हिस्से एक साथ चलते हैं, इसलिए संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण और अभ्यास की जरूरत होती है।

    पहले भी हो चुका है प्रदर्शन

    यह पहली बार नहीं है जब इस ड्रैगन मॉडल ने लोगों को चौंकाया हो। इससे पहले भी इसे लंदन में ‘हाउस ऑफ द ड्रैगन’ के प्रमोशनल अभियान के दौरान उड़ाया गया था। हर बार इसकी वास्तविक जैसी उड़ान लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती है।

    महीनों की रिसर्च के बाद तैयार हुई तकनीक

    कंपनी के अनुसार, इस मॉडल को तैयार करने में कई महीने लगे।

    डिजाइन टीम ने पक्षियों और चमगादड़ों की उड़ान का अध्ययन किया, फिर कंप्यूटर मॉडल विकसित कर कई चरणों में परीक्षण किए। लंबे प्रयोगों के बाद ऐसा मॉडल तैयार किया गया, जो हवा में बेहद वास्तविक दिखाई देता है।

    ग्लासगो में वायरल हुआ यह वीडियो अब दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे आधुनिक इंजीनियरिंग, एनीमेशन और रचनात्मक तकनीक का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

  • ऑफिस ड्रेस कोड के साथ चुनें सही जूते, जानिए फॉर्मल शूज़ और स्नीकर्स में कौन है बेहतर विकल्प

    ऑफिस ड्रेस कोड के साथ चुनें सही जूते, जानिए फॉर्मल शूज़ और स्नीकर्स में कौन है बेहतर विकल्प

    नई दिल्ली। बदलते कॉर्पोरेट माहौल के साथ ऑफिस संस्कृति में भी तेजी से बदलाव आया है। पहले जहां अधिकांश संस्थानों में सख्त फॉर्मल ड्रेस कोड लागू होता था, वहीं अब कई कंपनियां बिजनेस कैजुअल और स्मार्ट कैजुअल पहनावे को बढ़ावा दे रही हैं। ऐसे में कर्मचारियों के सामने यह सवाल अक्सर रहता है कि ऑफिस के लिए फॉर्मल शूज़ पहनना बेहतर रहेगा या स्नीकर्स। विशेषज्ञों का मानना है कि सही फुटवियर का चुनाव केवल आपके व्यक्तित्व को निखारता ही नहीं, बल्कि पूरे दिन की कार्यक्षमता और आराम पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।

    यदि आपका कार्यक्षेत्र बैंकिंग, सरकारी कार्यालय, वित्तीय संस्थान, कानूनी सेवाओं या पारंपरिक कॉर्पोरेट सेक्टर से जुड़ा है, जहां प्रोफेशनल ड्रेस कोड का पालन अनिवार्य होता है, तो फॉर्मल शूज़ सबसे उपयुक्त विकल्प माने जाते हैं। क्लाइंट मीटिंग, इंटरव्यू, बिजनेस प्रेजेंटेशन या किसी आधिकारिक कार्यक्रम में फॉर्मल शूज़ आपकी पेशेवर छवि को मजबूत बनाते हैं और आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। साफ-सुथरे और अच्छी गुणवत्ता वाले फॉर्मल शूज़ आज भी प्रोफेशनल लुक का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं।

    दूसरी ओर, यदि आप सूचना प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप, मीडिया, डिजिटल मार्केटिंग, डिजाइन या किसी रचनात्मक क्षेत्र में कार्यरत हैं, तो स्नीकर्स भी एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं। कई आधुनिक कंपनियां कर्मचारियों को आरामदायक और स्मार्ट कैजुअल फुटवियर पहनने की अनुमति देती हैं। साधारण और सादे डिजाइन वाले स्नीकर्स स्टाइलिश दिखने के साथ-साथ लंबे समय तक आराम भी प्रदान करते हैं। ऐसे जूते उन लोगों के लिए अधिक उपयोगी साबित होते हैं जिन्हें दिनभर ऑफिस परिसर में अधिक चलना-फिरना पड़ता है।

    आराम के लिहाज से स्नीकर्स को अक्सर बेहतर माना जाता है क्योंकि इनमें बेहतर कुशनिंग, हल्का वजन और पैरों को पर्याप्त सपोर्ट मिलता है। लंबे समय तक खड़े रहने या लगातार चलने वाले कर्मचारियों के लिए यह थकान कम करने में मददगार हो सकते हैं। हालांकि अब बाजार में ऐसे आधुनिक फॉर्मल शूज़ भी उपलब्ध हैं जिनमें मेमोरी फोम, कुशन सोल और सॉफ्ट इनसोल जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। इससे पारंपरिक फॉर्मल शूज़ भी पहले की तुलना में अधिक आरामदायक हो गए हैं।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जूते खरीदते समय केवल ब्रांड या डिजाइन पर ध्यान न दें। सही आकार, मजबूत सोल, अच्छी ग्रिप, टिकाऊ सामग्री और आरामदायक फिटिंग को प्राथमिकता देना अधिक जरूरी है। गलत आकार के जूते पैरों में दर्द, छाले और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इसलिए फुटवियर का चयन हमेशा अपनी जरूरत, कार्यस्थल के वातावरण और दैनिक गतिविधियों को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

    यदि संभव हो तो अलमारी में फॉर्मल शूज़ और स्नीकर्स दोनों रखना सबसे व्यावहारिक विकल्प माना जाता है। महत्वपूर्ण बैठकों, आधिकारिक कार्यक्रमों और औपचारिक अवसरों पर फॉर्मल शूज़ पहने जा सकते हैं, जबकि सामान्य कार्यदिवस, कैजुअल ऑफिस माहौल या अधिक गतिविधि वाले दिनों में स्नीकर्स बेहतर साबित हो सकते हैं। सही अवसर के अनुसार फुटवियर का चुनाव न केवल आपकी पेशेवर छवि को मजबूत करता है, बल्कि पूरे दिन आराम और आत्मविश्वास भी बनाए रखता है।

  • फैंस को करना होगा थोड़ा और इंतजार, रामायण का ट्रेलर नहीं हुआ रिलीज, सामने आई वजह

    फैंस को करना होगा थोड़ा और इंतजार, रामायण का ट्रेलर नहीं हुआ रिलीज, सामने आई वजह


    नई दिल्ली । रणबीर कपूर और यश स्टारर मेगा बजट फिल्म रामायण का ट्रेलर देखने का इंतजार कर रहे प्रशंसकों को फिलहाल थोड़ा और धैर्य रखना होगा। 24 जुलाई को रिलीज होने वाला बहुप्रतीक्षित ट्रेलर अंतिम समय पर स्थगित कर दिया गया है। हालांकि इस फैसले से फैंस जरूर निराश हुए हैं लेकिन फिल्म के निर्माताओं का कहना है कि यह फैसला एक बड़ी वैश्विक रणनीति का हिस्सा है और इसका उद्देश्य फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भव्य तरीके से प्रस्तुत करना है।

    फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा ने सोशल मीडिया के माध्यम से ट्रेलर लॉन्च टलने की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी लंबे समय से यह इच्छा थी कि रामायण केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के दर्शकों तक पहुंचे। अब यह सपना साकार होने जा रहा है क्योंकि फिल्म के लिए सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट के साथ वैश्विक साझेदारी हुई है। इसी वजह से ट्रेलर को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक साथ रिलीज करने का निर्णय लिया गया है ताकि दुनिया भर के दर्शकों को एक साथ इस फिल्म की पहली झलक मिल सके।

    नमित मल्होत्रा ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय सिनेमा के सौ वर्ष से अधिक लंबे इतिहास में यह एक गौरवपूर्ण क्षण होगा। उनका मानना है कि रामायण जैसी भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को अब एक बड़े वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा जिससे दुनिया भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं को और करीब से जान सकेगी। उन्होंने फिल्म पर भरोसा जताने वाले सभी प्रशंसकों का आभार भी व्यक्त किया और देश के युवाओं को भारत का भविष्य बताते हुए सकारात्मक संदेश दिया।

    इससे पहले पिछले सप्ताह नई दिल्ली के भारत मंडपम में फिल्म का ट्रेलर चुनिंदा मीडिया प्रतिनिधियों और कुछ प्रशंसकों को विशेष स्क्रीनिंग के दौरान दिखाया गया था। इसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि 24 जुलाई को इसे आधिकारिक तौर पर सभी के लिए जारी कर दिया जाएगा। इसी बीच सैन डिएगो कॉमिक कॉन में रणबीर कपूर यश निर्देशक नितेश तिवारी और निर्माता नमित मल्होत्रा ने एक विशेष पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। माना जा रहा था कि इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के बाद ट्रेलर रिलीज होगा लेकिन बाद में मेकर्स ने इसे आगे बढ़ाने का फैसला लिया।

    रामायण भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में गिनी जा रही है। यह फिल्म दो भागों में रिलीज होगी। पहले भाग को दिवाली 2026 के अवसर पर सिनेमाघरों में लाया जाएगा जबकि दूसरा भाग अगले वर्ष दिवाली 2027 पर रिलीज किया जाएगा। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। दक्षिण भारतीय सुपरस्टार यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं जिसे लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है।

    फिल्म की स्टार कास्ट भी बेहद मजबूत है। इसमें सनी देओल हनुमान रवि दुबे लक्ष्मण अरुण गोविल दशरथ लारा दत्ता रकुल प्रीत सिंह विवेक ओबेरॉय कुणाल कपूर और अन्य कई कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। बड़े बजट अत्याधुनिक विजुअल इफेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक के साथ तैयार हो रही इस फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं।

    फिलहाल मेकर्स ने ट्रेलर की नई रिलीज तारीख का ऐलान नहीं किया है लेकिन उनका कहना है कि इंतजार जल्द खत्म होगा और ट्रेलर को दुनिया भर में एक साथ भव्य अंदाज में पेश किया जाएगा। ऐसे में अब प्रशंसकों की निगाहें फिल्म के अगले आधिकारिक अपडेट पर टिकी हैं।

  • NEET आंदोलन पर टूटी बॉलीवुड की चुप्पी, सलमान से आलिया तक कई सितारों ने छात्रों का किया समर्थन

    NEET आंदोलन पर टूटी बॉलीवुड की चुप्पी, सलमान से आलिया तक कई सितारों ने छात्रों का किया समर्थन



    नई दिल्ली । NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच अब बॉलीवुड की चुप्पी भी टूटती नजर आ रही है। शुरुआत में जहां फिल्म उद्योग के चुनिंदा कलाकार ही इस मुद्दे पर अपनी राय रख रहे थे वहीं अब कई बड़े सितारे खुलकर छात्रों के समर्थन में सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा तेज है कि क्या सलमान खान की प्रतिक्रिया के बाद बॉलीवुड के अन्य कलाकारों ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी या फिर यह छात्रों के बढ़ते आंदोलन का असर है।

    सबसे पहले अभिनेता सलमान खान ने NEET पेपर लीक को गंभीर मुद्दा बताते हुए छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसा कायम रहना बेहद जरूरी है। बाद में उन्होंने छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की और सरकार की कार्रवाई पर भरोसा जताते हुए आंदोलन समाप्त करने का भी आग्रह किया।

    सलमान खान की प्रतिक्रिया के बाद अभिनेत्री आलिया भट्ट ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हर छात्र के पीछे एक सपना और एक परिवार की उम्मीद जुड़ी होती है। उनके अनुसार नई पीढ़ी की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बनाए रखना जरूरी है।

    इसके अलावा कई अन्य कलाकारों ने भी आंदोलन को लेकर अपनी राय सार्वजनिक की। रिपोर्टों के अनुसार शबाना आजमी हुमा कुरैशी और अन्य फिल्मी हस्तियों ने भी छात्रों के साथ एकजुटता जताते हुए निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की। कुछ कलाकारों ने यह भी कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक बहस से अलग रखते हुए छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    फिल्म जगत के कई लोगों का मानना है कि छात्रों का शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। वहीं कुछ कलाकारों ने यह भी अपील की कि आंदोलन का उद्देश्य शिक्षा सुधार बना रहे और किसी भी तरह की हिंसा या भटकाव से बचा जाए।

    सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग मान रहे हैं कि सलमान खान की टिप्पणी के बाद बॉलीवुड के अन्य सितारों का भी इस मुद्दे पर खुलकर सामने आना शुरू हुआ है जबकि कुछ का कहना है कि लगातार बढ़ते छात्र आंदोलन और जनसमर्थन ने कलाकारों को अपनी राय रखने के लिए प्रेरित किया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि किसी एक अभिनेता की प्रतिक्रिया ही बाकी सितारों के बोलने का कारण बनी।

    फिलहाल NEET पेपर लीक विवाद और उससे जुड़े विरोध प्रदर्शन राष्ट्रीय बहस का विषय बने हुए हैं। छात्रों की मांग है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसी बीच फिल्म जगत से मिल रहे समर्थन ने इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

  • त्वचा को बनाना है साफ चमकदार और स्वस्थ तो अपनाएं बेसन का घरेलू नुस्खा मिलेंगे कई जबरदस्त फायदे

    त्वचा को बनाना है साफ चमकदार और स्वस्थ तो अपनाएं बेसन का घरेलू नुस्खा मिलेंगे कई जबरदस्त फायदे


    नई दिल्ली । प्राकृतिक सुंदरता पाने के लिए आज भी घरेलू नुस्खों पर लोगों का भरोसा कायम है। इन्हीं पारंपरिक उपायों में बेसन का नाम सबसे पहले लिया जाता है। रसोई में आसानी से मिलने वाला बेसन केवल स्वादिष्ट व्यंजन बनाने के लिए ही नहीं बल्कि त्वचा की देखभाल के लिए भी बेहद उपयोगी माना जाता है। वर्षों से भारतीय घरों में बेसन का इस्तेमाल चेहरे की सफाई रंगत निखारने और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है। इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण त्वचा की गहराई से सफाई करने के साथ उसे मुलायम और चमकदार बनाने में मदद करते हैं।

    बेसन प्राकृतिक क्लींजर की तरह काम करता है। दिनभर धूल मिट्टी प्रदूषण और अतिरिक्त तेल त्वचा पर जमा हो जाता है जिससे चेहरे की चमक कम होने लगती है। ऐसे में बेसन से चेहरा साफ करने पर त्वचा के रोमछिद्रों में जमी गंदगी निकल जाती है और चेहरा ताजा तथा साफ दिखाई देने लगता है। नियमित रूप से इसका उपयोग करने पर त्वचा अधिक स्वस्थ और तरोताजा महसूस होती है।

    तैलीय त्वचा वाले लोगों के लिए भी बेसन बेहद लाभकारी माना जाता है। यह त्वचा पर मौजूद अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करने में मदद करता है जिससे मुंहासों और ब्लैकहेड्स की समस्या कम हो सकती है। यदि बेसन में गुलाब जल या दही मिलाकर फेस पैक तैयार किया जाए तो त्वचा को ठंडक मिलने के साथ प्राकृतिक नमी भी बनी रहती है। वहीं सूखी त्वचा वाले लोग इसमें दूध या मलाई मिलाकर इसका उपयोग कर सकते हैं जिससे त्वचा को पोषण मिलता है और रूखापन कम होता है।

    त्वचा की रंगत निखारने में भी बेसन की अहम भूमिका मानी जाती है। हल्दी और बेसन का मिश्रण लंबे समय से पारंपरिक उबटन के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। यह त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है और नई चमक लेकर आता है। शादी विवाह और विशेष अवसरों पर भी बेसन का उबटन लगाने की परंपरा इसी कारण आज भी प्रचलित है।

    यदि चेहरे पर हल्की टैनिंग हो गई है तो बेसन में दही और नींबू का रस मिलाकर तैयार किया गया पैक उपयोगी माना जाता है। यह त्वचा को ताजगी देने के साथ उसकी रंगत को भी बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। हालांकि संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को किसी भी घरेलू नुस्खे का इस्तेमाल करने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहता है।

    बेसन त्वचा की हल्की एक्सफोलिएशन भी करता है। जब इसे हल्के हाथों से चेहरे पर लगाया जाता है तो यह मृत त्वचा को हटाकर त्वचा को मुलायम बनाने में मदद करता है। इससे चेहरा साफ और अधिक चमकदार दिखाई देता है। नियमित देखभाल के साथ संतुलित खानपान पर्याप्त पानी और अच्छी नींद भी स्वस्थ त्वचा के लिए उतने ही जरूरी हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक उपाय तभी असर दिखाते हैं जब उनका उपयोग सही तरीके और नियमितता के साथ किया जाए। बेसन त्वचा की सामान्य देखभाल में सहायक हो सकता है लेकिन यदि त्वचा पर लगातार एलर्जी जलन गंभीर मुंहासे या किसी प्रकार की समस्या हो तो स्वयं उपचार करने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

    प्राकृतिक गुणों से भरपूर बेसन आज भी त्वचा की देखभाल का एक भरोसेमंद घरेलू उपाय माना जाता है। यदि इसे अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार सही सामग्री के साथ इस्तेमाल किया जाए तो यह चेहरे की सफाई चमक और कोमलता बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है।

  • रामायण को लेकर दीपिका चिखलिया की दो टूक, बोलीं साई पल्लवी शानदार कलाकार लेकिन सीता के रूप में फिल्म बताएगी सच

    रामायण को लेकर दीपिका चिखलिया की दो टूक, बोलीं साई पल्लवी शानदार कलाकार लेकिन सीता के रूप में फिल्म बताएगी सच


    नई दिल्ली । नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह बना हुआ है। इसी बीच रामानंद सागर की लोकप्रिय टीवी श्रृंखला में माता सीता का अमर किरदार निभाने वाली अभिनेत्री दीपिका चिखलिया ने नई फिल्म और उसकी स्टार कास्ट को लेकर अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने साई पल्लवी रणबीर कपूर और यश जैसे कलाकारों की प्रतिभा की सराहना की लेकिन साथ ही यह भी कहा कि दशकों पुरानी रामायण की यादें आज भी लोगों के दिलों में उतनी ही ताजा हैं और उन्हें भुलाना आसान नहीं होगा।

    एक बातचीत के दौरान दीपिका चिखलिया ने कहा कि उन्होंने साई पल्लवी का अभिनय देखा है और वह बेहद प्रतिभाशाली अभिनेत्री हैं। हालांकि उनके अनुसार अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि वह माता सीता के किरदार में कितनी प्रभावशाली नजर आएंगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल फिल्म देखने के बाद ही किया जा सकता है। दीपिका ने धार्मिक ग्रंथों में माता सीता के स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि तुलसीदास की रामायण में उनके व्यक्तित्व का विस्तृत वर्णन मिलता है और उसी आधार पर रामानंद सागर ने कलाकारों का चयन किया था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कहीं भी सीता के घुंघराले बालों का उल्लेख याद नहीं है।

    दीपिका ने यह भी माना कि यदि कलाकार अपने किरदार के अनुरूप पूरी ईमानदारी से अभिनय करते हैं तो दर्शक उन्हें स्वीकार करते हैं। उन्होंने नई फिल्म की पूरी टीम को प्रतिभाशाली बताते हुए उम्मीद जताई कि दर्शक इस फिल्म को जरूर पसंद करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पीढ़ी की रामायण का भावनात्मक प्रभाव आज भी लोगों के मन में गहराई से मौजूद है और नई फिल्म की तुलना उससे होना स्वाभाविक है।

    उन्होंने कहा कि कोरोना काल में जब रामानंद सागर की रामायण का दोबारा प्रसारण हुआ तब नई पीढ़ी ने भी उसे बड़े उत्साह से देखा। यही कारण है कि पुरानी रामायण आज भी लोगों की यादों में जीवित है। उनके अनुसार किसी भी नई प्रस्तुति के सामने सबसे बड़ी चुनौती दर्शकों की उन्हीं यादों और भावनाओं पर खरी उतरना होगी।

    दीपिका चिखलिया ने अपने करियर के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि सीता के किरदार ने उन्हें अपार लोकप्रियता दी लेकिन यही पहचान उनके लिए चुनौती भी बन गई। रामायण के बाद उन्हें अलग तरह के किरदार मिलने लगभग बंद हो गए क्योंकि दर्शक उन्हें हमेशा सीता के रूप में ही देखना चाहते थे। उन्होंने कहा कि आज भी कई लोग उन्हें उनके असली नाम से कम और सीता के नाम से ज्यादा पहचानते हैं। इसी कारण उन्हें बाद में प्रोडक्शन की दिशा में भी कदम बढ़ाना पड़ा।

    रावण के किरदार में अभिनेता यश को लेकर दीपिका ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने यश का काम देखा है और उन्हें विश्वास है कि वह रावण के रूप में दमदार नजर आएंगे। लेकिन उन्होंने दोहराया कि दर्शकों के मन में पुरानी रामायण की छवि इतनी मजबूत है कि उसकी तुलना से बच पाना किसी भी नई प्रस्तुति के लिए आसान नहीं होगा।

    दीपिका ने निर्देशक नितेश तिवारी और पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि फिल्म से जुड़े सभी कलाकार बेहद सक्षम हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह फिल्म दर्शकों को आकर्षित करेगी और लोग इसे बड़े पर्दे पर देखने जरूर जाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि रामानंद सागर की रामायण की सबसे बड़ी ताकत उसकी सटीक कास्टिंग और रविंद्र जैन का कालजयी संगीत था जिसने उसे अमर बना दिया।

    नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही रामायण दो भागों में रिलीज होगी। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा सनी देओल रवि दुबे अरुण गोविल लारा दत्ता रकुल प्रीत सिंह कुणाल कपूर शीबा चड्ढा और आदिनाथ कोठारे भी अहम किरदारों में नजर आएंगे। फिल्म का संगीत हांस जिमर और ए आर रहमान ने तैयार किया है। पहला भाग दिवाली 2026 और दूसरा भाग दिवाली 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा।

  • बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल सिर्फ प्रीमियम ग्रेड में, E0-E10 की वापसी पर सरकार ने दिया स्‍पष्‍ट जवाब

    बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल सिर्फ प्रीमियम ग्रेड में, E0-E10 की वापसी पर सरकार ने दिया स्‍पष्‍ट जवाब


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल देश में E0 (बिना एथेनॉल) और E10 (10% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल की दोबारा सप्लाई शुरू करने की कोई योजना नहीं है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी तेल कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले प्रीमियम पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट नहीं की जाती और फिलहाल पेट्रोल में 20 फीसदी से अधिक एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

    लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि इंडियन ऑयल का XP100, हिंदुस्तान पेट्रोलियम का poWer100 और भारत पेट्रोलियम का Speed100 जैसे प्रीमियम पेट्रोल पूरी तरह एथेनॉल मुक्त हैं। इनमें बेहतर प्रदर्शन के लिए विशेष एडिटिव्स का उपयोग किया जाता है। हालांकि, इनकी बिक्री देश में कुल पेट्रोल खपत का लगभग 0.5 प्रतिशत ही है।

    प्रीमियम पेट्रोल की कीमत कितनी?
    सरकार के मुताबिक, बिना एथेनॉल वाले इन प्रीमियम फ्यूल की कीमत करीब 160 रुपये प्रति लीटर है, जबकि सामान्य पेट्रोल की कीमत लगभग 102.12 रुपये प्रति लीटर है। मौजूदा समय में सामान्य पेट्रोल में अधिकतम 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रित किया जा रहा है।

    E20 पर सरकार का भरोसा
    सरकार ने कहा कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलाने का फैसला तभी लिया जाएगा, जब विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन पूरे होंगे। इस प्रक्रिया में वाहन निर्माता कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों और शोध संस्थानों से भी सलाह ली जाएगी।

    सरकार ने यह भी बताया कि 1 अप्रैल 2026 से देशभर में न्यूनतम 95 रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) वाले E20 पेट्रोल को अधिसूचित किया गया है और सभी सार्वजनिक एवं निजी तेल कंपनियों को इसे उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    इंजन पर नहीं पड़ा कोई बड़ा असर
    सरकार के अनुसार, E20 पेट्रोल के कारण इंजन खराब होने या वाहन की उम्र घटने जैसी कोई व्यापक और प्रमाणित शिकायत सामने नहीं आई है। प्रयोगशाला परीक्षणों, फील्ड ट्रायल और वास्तविक परिचालन के आंकड़ों में भी इसके नकारात्मक प्रभाव के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं।

    मंत्री ने बताया कि वर्तमान में देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल कर रही हैं और बड़े पैमाने पर इंजन संबंधी कोई समस्या दर्ज नहीं हुई है।

    E0 और E10 दोबारा क्यों नहीं आएंगे?
    सरकार ने कहा कि E0, E10 और E20 तीनों तरह के पेट्रोल की अलग-अलग आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखना व्यावहारिक नहीं है। देशभर के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग भंडारण, परिवहन और वितरण प्रणाली तैयार करने से लागत और संचालन संबंधी चुनौतियां काफी बढ़ जाएंगी।

    सरकार का कहना है कि उसकी प्राथमिकता स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना है। इसी नीति के तहत E20 को व्यापक परीक्षणों के बाद लागू किया गया है और ऑटोमोबाइल उद्योग ने भी इसे स्वीकार किया है।

  • पेट्रोल के बाद अब खाद्य तेल ने बढ़ाई महंगाई, आयात बिल 1.75 लाख करोड़ पार होने का अनुमान, रसोई का बजट फिर बिगड़ने के आसार

    पेट्रोल के बाद अब खाद्य तेल ने बढ़ाई महंगाई, आयात बिल 1.75 लाख करोड़ पार होने का अनुमान, रसोई का बजट फिर बिगड़ने के आसार

    नई दिल्ली। पेट्रोल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के बीच अब खाद्य तेलों की महंगाई ने आम लोगों की रसोई का बजट भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। सरसों, सोयाबीन, मूंगफली और अन्य खाद्य तेलों की कीमतों में हाल के दिनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की कमजोरी, आयात लागत में बढ़ोतरी और घरेलू उत्पादन की सीमित उपलब्धता के कारण खाद्य तेलों की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। आगामी त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की संभावना के चलते कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    देश में खाद्य तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है। उद्योग से जुड़े संगठनों के अनुसार पिछले वर्ष भारत का खाद्य तेल आयात बिल लगभग 1.61 लाख करोड़ रुपये रहा था, जबकि मौजूदा वित्तीय वर्ष में इसके बढ़कर 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आयात पर अत्यधिक निर्भरता देश के लिए आर्थिक चुनौती बनती जा रही है और इस स्थिति से निपटने के लिए घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देना आवश्यक है।

    बाजार में विभिन्न खाद्य तेलों की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई है। सरसों तेल के भाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि सोयाबीन तेल, मूंगफली तेल और अन्य खाद्य तेलों के दाम भी ऊपर गए हैं। कारोबारियों के अनुसार सरसों की मांग बढ़ने और मंडियों में सीमित आवक के कारण कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना है। वहीं सोयाबीन की आवक में कमी आने से उससे जुड़े उत्पाद भी महंगे हुए हैं। इसका सीधा असर खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

    उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को दीर्घकालिक समाधान के रूप में तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा। इसके लिए बेहतर बीज, आधुनिक खेती, प्रसंस्करण क्षमता और किसानों को प्रोत्साहन देने जैसी योजनाओं को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि घरेलू उत्पादन बढ़ता है तो आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और उपभोक्ताओं को कीमतों में स्थिरता का लाभ मिलेगा।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि वैश्विक बाजार में कच्चे खाद्य तेलों की कीमतों, शिपिंग लागत और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने से आयातित खाद्य तेल और महंगे हो जाते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करती हैं।

    हालांकि बाजार विश्लेषकों का कहना है कि भविष्य में कीमतों की दिशा घरेलू उत्पादन, वैश्विक आपूर्ति, मौसम और सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगी। यदि तिलहन की अच्छी पैदावार होती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें स्थिर रहती हैं तो खाद्य तेलों की महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण संभव है। फिलहाल उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है और आने वाले महीनों में बाजार की स्थिति पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • शेयर बाजार में शुक्रवार को कैसा रहेगा माहौल किन सेक्टरों पर रहेंगी निगाहें और निवेशकों के लिए क्या है रणनीति

    शेयर बाजार में शुक्रवार को कैसा रहेगा माहौल किन सेक्टरों पर रहेंगी निगाहें और निवेशकों के लिए क्या है रणनीति

    नई दिल्ली । सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की चाल कई घरेलू और वैश्विक कारकों पर निर्भर रहने की संभावना है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की नजर सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुख पर रहेगी। यदि अमेरिका और एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार भी मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत कर सकता है। वहीं यदि वैश्विक स्तर पर दबाव बना रहता है तो घरेलू बाजार में भी उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    इस समय निवेशकों का सबसे अधिक ध्यान कंपनियों के तिमाही नतीजों पर है। जिन कंपनियों के वित्तीय परिणाम उम्मीद से बेहतर आएंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजे देने वाली कंपनियों पर बिकवाली का दबाव बन सकता है। यही कारण है कि बाजार में सेक्टर आधारित गतिविधियां अधिक देखने को मिल सकती हैं और हर क्षेत्र का प्रदर्शन अलग अलग रह सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद और बिक्री भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यदि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में लगातार निवेश जारी रखते हैं तो इससे सेंटीमेंट मजबूत होगा। दूसरी ओर यदि बड़े स्तर पर बिकवाली होती है तो बाजार में दबाव बढ़ सकता है।

    बैंकिंग सूचना प्रौद्योगिकी ऑटोमोबाइल फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर पर निवेशकों की विशेष नजर रहने की संभावना है। बैंकिंग शेयरों में स्थिरता रहने पर प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिल सकती है जबकि आईटी कंपनियों पर वैश्विक मांग और डॉलर की चाल का असर दिखाई देगा। ऑटो और फार्मा सेक्टर भी अपने तिमाही प्रदर्शन और मांग के आधार पर बाजार को दिशा दे सकते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में फिलहाल तेजी और मुनाफावसूली दोनों की संभावना बनी हुई है। ऐसे में छोटे निवेशकों को किसी भी खबर के आधार पर जल्दबाजी में निवेश करने से बचना चाहिए। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों में ही लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना अधिक सुरक्षित माना जा रहा है। अल्पकालिक कारोबार करने वाले निवेशकों को स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए ताकि अचानक आने वाली गिरावट से नुकसान सीमित रखा जा सके।

    वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें अमेरिकी डॉलर की स्थिति और प्रमुख देशों के आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा प्रभावित करेंगे। यदि इन मोर्चों पर राहत भरे संकेत मिलते हैं तो निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। इसके विपरीत किसी नकारात्मक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

    कुल मिलाकर शुक्रवार का कारोबार उतार चढ़ाव से भरा रह सकता है। हालांकि मजबूत कंपनियों में निवेश और संतुलित रणनीति अपनाने वाले निवेशकों के लिए अवसर भी मौजूद रहेंगे। विशेषज्ञों की सलाह है कि अफवाहों के बजाय आधिकारिक जानकारी और बाजार के मूलभूत संकेतों के आधार पर ही निवेश का निर्णय लें ताकि जोखिम कम हो और बेहतर रिटर्न की संभावना बनी रहे।