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  • अफगानिस्तान क्रिकेट में बड़ा बदलाव वनडे कप्तानी से हटे हशमतुल्लाह शाहिदी नए कप्तान की तलाश हुई तेज

    अफगानिस्तान क्रिकेट में बड़ा बदलाव वनडे कप्तानी से हटे हशमतुल्लाह शाहिदी नए कप्तान की तलाश हुई तेज


    नई दिल्ली । अफगानिस्तान क्रिकेट टीम को वनडे प्रारूप में बड़ा झटका लगा है। टीम के अनुभवी बल्लेबाज और कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने वनडे कप्तानी छोड़ने का फैसला लेकर सभी को चौंका दिया है। वर्ष 2022 से टीम की कमान संभाल रहे शाहिदी ने अपने सोशल मीडिया के माध्यम से इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि यह फैसला उन्होंने पूरी इच्छा और सम्मान के साथ लिया है। उनके इस निर्णय के बाद अब अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के सामने नए कप्तान के चयन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है खासकर ऐसे समय में जब टीम 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों में जुटी हुई है।

    हशमतुल्लाह शाहिदी का कप्तानी कार्यकाल अफगानिस्तान क्रिकेट के सबसे सफल दौरों में गिना जाता है। उनकी अगुवाई में टीम ने न केवल लगातार बेहतर प्रदर्शन किया बल्कि दुनिया की कई बड़ी टीमों को हराकर अपनी अलग पहचान भी बनाई। उन्होंने एशिया कप वनडे विश्व कप 2023 और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 जैसे बड़े टूर्नामेंटों में टीम का नेतृत्व किया और अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

    विश्व कप 2023 में शाहिदी की कप्तानी में अफगानिस्तान ने पाकिस्तान इंग्लैंड श्रीलंका और नीदरलैंड्स जैसी मजबूत टीमों को हराकर क्रिकेट जगत को चौंका दिया था। टीम ने अंक तालिका में छठा स्थान हासिल किया और शानदार प्रदर्शन के दम पर चैंपियंस ट्रॉफी के लिए भी क्वालीफाई किया। यह उपलब्धि अफगानिस्तान क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय मानी जाती है।

    शाहिदी ने अपने भावुक संदेश में टीम के खिलाड़ियों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने लिखा कि कप्तान बनना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा और टीम की हर उपलब्धि पूरी टीम की मेहनत एकता और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने खिलाड़ियों कोचिंग स्टाफ अधिकारियों और क्रिकेट बोर्ड का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके सहयोग और विश्वास के बिना यह सफर संभव नहीं था।

    द्विपक्षीय सीरीज में भी शाहिदी का रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा। उनकी कप्तानी में अफगानिस्तान ने बांग्लादेश के खिलाफ तीन सीरीज जीती जबकि जिम्बाब्वे और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों के खिलाफ भी महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं। कप्तान के रूप में उन्होंने 27 वनडे मुकाबलों में टीम को जीत दिलाई और अपनी शांत नेतृत्व शैली से खिलाड़ियों का भरोसा जीता।

    बतौर बल्लेबाज भी शाहिदी का योगदान बेहद अहम रहा। उन्होंने कप्तानी के दौरान लगातार जिम्मेदारी निभाई और मध्यमक्रम को मजबूती दी। वनडे क्रिकेट में उनका एकमात्र शतक भारत के खिलाफ आया जब उन्होंने 131 गेंदों में शानदार 102 रन बनाकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। उनकी संयमित बल्लेबाजी और नेतृत्व कौशल ने अफगानिस्तान को कई यादगार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

    अब अफगानिस्तान को आयरलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज खेलनी है और इसके बाद टीम का पूरा ध्यान 2027 विश्व कप की तैयारियों पर रहेगा। ऐसे में नया कप्तान चुनना बोर्ड के लिए बेहद महत्वपूर्ण फैसला होगा। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि शाहिदी का इस्तीफा टीम के लिए चुनौती जरूर है लेकिन उनके द्वारा तैयार की गई मजबूत टीम भविष्य में भी शानदार प्रदर्शन करने की क्षमता रखती है।

  • केंसिंग्टन ओवल में कैरेबियाई तूफान हेटमायर और रदरफोर्ड ने पलटा मैच न्यूजीलैंड को अंतिम वनडे में मिली हार

    केंसिंग्टन ओवल में कैरेबियाई तूफान हेटमायर और रदरफोर्ड ने पलटा मैच न्यूजीलैंड को अंतिम वनडे में मिली हार


    नई दिल्ली । बारबाडोस के केंसिंग्टन ओवल मैदान पर खेले गए पांचवें और अंतिम वनडे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को दो विकेट से हराकर सीरीज का समापन जीत के साथ किया। हालांकि इस हार के बावजूद न्यूजीलैंड ने पांच मैचों की वनडे सीरीज 3-2 से अपने नाम करने में सफलता हासिल की। मुकाबले में कैरेबियाई बल्लेबाजों ने दबाव के क्षणों में संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए 269 रन के लक्ष्य को 47.3 ओवर में आठ विकेट खोकर हासिल कर लिया।

    लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज को अकीम ऑगस्टे और जस्टिन ग्रीव्स ने तेज शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 57 रन जोड़कर मजबूत आधार तैयार किया। ग्रीव्स ने 22 रन बनाए जबकि ऑगस्टे ने आक्रामक अंदाज में 34 रन की पारी खेली। इसके बाद कीसी कार्टि और कप्तान शाई होप ने अच्छी शुरुआत तो की लेकिन बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हो सके। एक समय वेस्टइंडीज का स्कोर 123 रन पर चार विकेट था और टीम मुश्किल में दिखाई दे रही थी।

    ऐसे समय में शेरफेन रदरफोर्ड और शिमरॉन हेटमायर ने जिम्मेदारी संभाली। दोनों बल्लेबाजों ने पांचवें विकेट के लिए 95 रन की अहम साझेदारी कर मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। रदरफोर्ड ने 64 गेंदों पर 61 रन बनाए जिसमें दो चौके और पांच शानदार छक्के शामिल रहे। दूसरी ओर हेटमायर ने बेहद परिपक्व और आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 64 गेंदों पर नाबाद 69 रन बनाए। उनकी पारी में दो चौके और चार लंबे छक्के शामिल रहे। अंत तक क्रीज पर डटे रहकर उन्होंने टीम को यादगार जीत दिलाई।

    न्यूजीलैंड की ओर से जैकब डफी और जेडन लेनोक्स ने तीन तीन विकेट लेकर मुकाबले को रोमांचक बनाए रखा लेकिन अंतिम क्षणों में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने कोई गलती नहीं की।

    इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही और शुरुआती विकेट जल्दी गिर गया। इसके बाद विल यंग और निक केली ने पारी को संभालते हुए दूसरे विकेट के लिए 86 रन जोड़े। विल यंग ने 56 रन जबकि निक केली ने 64 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। मध्यक्रम में टॉम लाथम ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 69 रन बनाए और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड ने निर्धारित 50 ओवर में नौ विकेट पर 268 रन बनाए।

    वेस्टइंडीज की ओर से 19 वर्षीय युवा गेंदबाज विटेल लॉव्स ने प्रभावित किया और दो विकेट अपने नाम किए। अनुभवी तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ ने भी दो सफलताएं हासिल कर न्यूजीलैंड की रन गति पर अंकुश लगाया।

    भले ही अंतिम मुकाबले में जीत वेस्टइंडीज के हिस्से आई लेकिन पूरी सीरीज में लगातार बेहतर प्रदर्शन के दम पर न्यूजीलैंड ने 3-2 से ट्रॉफी अपने नाम की। अंतिम मैच ने दोनों टीमों के संघर्ष और रोमांचक क्रिकेट का शानदार उदाहरण पेश किया।

  • IND vs ZIM टी20 सीरीज से पहले जिम्बाब्वे का बड़ा दांव नए विकेटकीपर त्सिगा की एंट्री अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी

    IND vs ZIM टी20 सीरीज से पहले जिम्बाब्वे का बड़ा दांव नए विकेटकीपर त्सिगा की एंट्री अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी


    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच 23 जुलाई से शुरू होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज से पहले मेजबान टीम ने अपने 15 सदस्यीय स्क्वॉड का ऐलान कर दिया है। टीम चयन में कई अहम बदलाव किए गए हैं जिनका उद्देश्य भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ संतुलित और प्रतिस्पर्धी संयोजन तैयार करना है। सबसे बड़ी चर्चा विकेटकीपर बल्लेबाज तफादजवा त्सिगा को पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में शामिल किए जाने की है। टेस्ट क्रिकेट में अपनी उपयोगिता साबित कर चुके त्सिगा अब सफेद गेंद के प्रारूप में भी देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं।

    जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड ने इस बार युवा खिलाड़ियों और अनुभवी चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। ऑलराउंडर वेस्ली मधेवेरे और तेज गेंदबाज न्यूमैन न्यामहुरी की भी टीम में वापसी हुई है। मधेवेरे लगभग एक वर्ष बाद टी20 टीम में लौटे हैं और उनके पास 79 अंतरराष्ट्रीय टी20 मैचों का अनुभव है। वहीं न्यामहुरी चोट से उबरने के बाद फिर से टीम का हिस्सा बने हैं जिससे गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    इन खिलाड़ियों की वापसी के साथ क्लाइव मडेंडे टिनोटेंडा मापोसा और ताशिंगा मुसेकिवा को इस बार टीम से बाहर रखा गया है। चयनकर्ताओं का मानना है कि भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ अनुभव और संतुलन दोनों की जरूरत होगी।

    टीम की कप्तानी एक बार फिर अनुभवी ऑलराउंडर सिकंदर रजा के हाथों में रहेगी। हाल के महीनों में उनकी कप्तानी में जिम्बाब्वे ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। बांग्लादेश के खिलाफ टीम ने टेस्ट और वनडे सीरीज अपने नाम की थी हालांकि टी20 सीरीज में उसे 1-2 से हार झेलनी पड़ी थी। इसके बावजूद टीम का आत्मविश्वास मजबूत माना जा रहा है।

    भारत की बात करें तो टीम हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी20 मुकाबलों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी थी। ऐसे में यह दौरा भारतीय टीम के लिए लय हासिल करने का अच्छा अवसर माना जा रहा है। दूसरी ओर जिम्बाब्वे भी घरेलू परिस्थितियों का पूरा फायदा उठाकर उलटफेर करने की कोशिश करेगा।

    दोनों टीमों के बीच पिछली टी20 भिड़ंत 2026 टी20 विश्व कप के सुपर 8 चरण में हुई थी जिसमें भारत ने 72 रन से शानदार जीत दर्ज की थी। हालांकि इस बार जिम्बाब्वे अपनी घरेलू परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने के इरादे से मैदान पर उतरेगा। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि हरारे की पिच पर शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को मदद मिल सकती है जिससे मुकाबले और भी रोमांचक होने की संभावना है।

    तीनों मुकाबले हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले जाएंगे। पहला मैच 23 जुलाई दूसरा 25 जुलाई और अंतिम मुकाबला 26 जुलाई को होगा। दोनों टीमों के पास युवा खिलाड़ियों को परखने और आगामी बड़े टूर्नामेंटों की तैयारी का यह अहम अवसर होगा।

    भारत के खिलाफ जिम्बाब्वे टी20 टीम
    सिकंदर रजा कप्तान ब्रायन बेनेट रयान बर्ल तनाका चिवांगा बेन करन ब्रैड इवांस वेस्ली मधेवेरे तदीवानाशे मारुमानी वेलिंगटन मसाकाद्जा ब्लेसिंग मुजारबानी डियोन मायर्स रिचर्ड नगारवा न्यूमैन न्यामहुरी मिल्टन शुम्बा और तफादजवा त्सिगा।

  • बॉलीवुड स्टार जॉन अब्राहम ने मुंबई में बढ़ाया प्रॉपर्टी पोर्टफोलियो 84 करोड़ का शानदार बंगला खरीदा

    बॉलीवुड स्टार जॉन अब्राहम ने मुंबई में बढ़ाया प्रॉपर्टी पोर्टफोलियो 84 करोड़ का शानदार बंगला खरीदा


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता जॉन अब्राहम ने एक बार फिर अपने बड़े रियल एस्टेट निवेश से सुर्खियां बटोर ली हैं। फिल्मों के साथ कारोबार और निवेश में भी सक्रिय रहने वाले जॉन ने मुंबई के प्रतिष्ठित बांद्रा वेस्ट इलाके में लगभग 84 करोड़ रुपये की कीमत का एक शानदार बंगला खरीदा है। इस खरीद के साथ उनका रियल एस्टेट पोर्टफोलियो और भी मजबूत हो गया है। मुंबई के सबसे प्रीमियम रिहायशी क्षेत्रों में गिने जाने वाले इस इलाके में संपत्ति खरीदना लंबे समय के निवेश के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

    रियल एस्टेट से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार यह बंगला बांद्रा के सेंट मार्टिन रोड पर स्थित है। पूरी संपत्ति करीब 1017.60 वर्ग मीटर के बड़े प्लॉट पर बनी हुई है। इसमें लगभग 193.12 वर्ग मीटर का निर्मित बंगला मौजूद है जबकि परिसर में करीब 31.50 वर्ग मीटर का एक अलग आउटहाउस भी बनाया गया है। विशाल खुला परिसर और प्रीमियम लोकेशन इस प्रॉपर्टी को बेहद खास बनाते हैं।

    बताया गया है कि इस सौदे की रजिस्ट्री 14 जुलाई 2026 को पूरी की गई। इस खरीद के लिए जॉन अब्राहम ने करीब 5.04 करोड़ रुपये की स्टाम्प ड्यूटी भी अदा की है। यह सौदा मुंबई के इस वर्ष के चर्चित हाई वैल्यू रियल एस्टेट लेनदेन में शामिल माना जा रहा है।

    यह पहली बार नहीं है जब जॉन अब्राहम ने मुंबई में करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी खरीदी हो। इससे पहले वर्ष 2023 में उन्होंने खार इलाके में करीब 70.83 करोड़ रुपये का एक शानदार बंगला खरीदा था। उस संपत्ति में बड़ा प्लॉट और विशाल निर्मित क्षेत्र शामिल था। लगातार हो रहे इन निवेशों से साफ है कि जॉन केवल फिल्मों तक सीमित नहीं हैं बल्कि रियल एस्टेट को भी भविष्य के मजबूत निवेश के रूप में देख रहे हैं।

    फिल्मों के अलावा जॉन अब्राहम खेल जगत में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं। हाल ही में वह यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग की फ्रेंचाइजी रॉटरडैम डॉकर्स के सह मालिक बने हैं। इस टीम के प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कई बड़े नाम भी शामिल हैं। इससे साफ है कि अभिनेता मनोरंजन उद्योग के साथ खेल और व्यवसाय में भी अपनी पहचान लगातार मजबूत कर रहे हैं।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो जॉन अब्राहम जल्द ही निर्देशक रोहित शेट्टी की नई बायोपिक फिल्म में मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त राकेश मारिया की भूमिका निभाते नजर आएंगे। इसके अलावा उनकी लोकप्रिय एक्शन फ्रेंचाइजी फोर्स का अगला भाग भी दर्शकों के बीच आने की तैयारी में है जिसमें वह एक बार फिर एसीपी यशवर्धन सिंह के दमदार किरदार में दिखाई देंगे।

    लगातार बड़े निवेश और नए प्रोजेक्ट यह साबित करते हैं कि जॉन अब्राहम अभिनय के साथ कारोबार और संपत्ति निर्माण के क्षेत्र में भी लंबी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। मुंबई के सबसे महंगे इलाकों में की गई यह नई खरीद उनके बढ़ते निवेश साम्राज्य का एक और मजबूत अध्याय मानी जा रही है।

  • जिम्बाब्वे कप्तान सिकंदर रजा का भारत को खुला चैलेंज बोले एकतरफा नहीं होगी सीरीज रोमांच तय

    जिम्बाब्वे कप्तान सिकंदर रजा का भारत को खुला चैलेंज बोले एकतरफा नहीं होगी सीरीज रोमांच तय


    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच 24 जुलाई से शुरू होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज से पहले मेजबान टीम के कप्तान सिकंदर रजा ने बड़ा बयान देकर मुकाबले का रोमांच और बढ़ा दिया है। रजा ने भारत को सीरीज का प्रबल दावेदार मानने से साफ इनकार करते हुए कहा कि यह मुकाबला पूरी तरह संतुलित रहेगा और दोनों टीमों के पास जीत हासिल करने का समान अवसर होगा। उनका मानना है कि क्रिकेट में नाम से नहीं बल्कि मैदान पर प्रदर्शन से नतीजे तय होते हैं।

    हरारे स्पोर्ट्स क्लब में होने वाली इस टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 24 जुलाई को खेला जाएगा जबकि बाकी दो मैच 25 और 26 जुलाई को इसी मैदान पर आयोजित होंगे। भारतीय टीम हालिया सीमित ओवरों की सीरीज में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी है और अब वह नई शुरुआत की तलाश में जिम्बाब्वे पहुंची है। दूसरी ओर मेजबान टीम अपने घरेलू मैदान का पूरा फायदा उठाने की तैयारी में है।

    सिकंदर रजा ने कहा कि भारतीय टीम इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है लेकिन जिम्बाब्वे भी युवा खिलाड़ियों के साथ नई टीम तैयार कर रहा है। ऐसे में किसी एक टीम को पहले से विजेता घोषित करना सही नहीं होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देशों के खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे और दर्शकों को रोमांचक क्रिकेट देखने को मिलेगा।

    रजा ने कहा कि उनकी टीम का आत्मविश्वास हाल के प्रदर्शन से काफी बढ़ा है। जिम्बाब्वे ने इस वर्ष कई मजबूत टीमों के खिलाफ प्रभावशाली खेल दिखाया है और महत्वपूर्ण मुकाबलों में जीत दर्ज कर अपनी क्षमता साबित की है। यही कारण है कि टीम भारतीय चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    हालांकि भारत का टी20 क्रिकेट में रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है लेकिन हाल के विदेशी दौरों में मिली हार ने टीम पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में कप्तान श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में भारतीय खिलाड़ी वापसी की कोशिश करेंगे। वहीं जिम्बाब्वे की नजर घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर एक और बड़ी जीत दर्ज करने पर होगी।

    गौरतलब है कि पिछले दौरे पर भारतीय टीम ने शुरुआती हार के बाद शानदार वापसी करते हुए सीरीज अपने नाम की थी लेकिन इस बार मेजबान टीम पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेगी। सिकंदर रजा का मानना है कि इस बार मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा कड़ा होगा और परिणाम आखिरी क्षणों तक तय नहीं होगा।

    दोनों टीमों के हालिया प्रदर्शन और युवा खिलाड़ियों की मौजूदगी को देखते हुए क्रिकेट प्रेमियों को एक रोमांचक और प्रतिस्पर्धी टी20 सीरीज की उम्मीद रहेगी जहां हर मुकाबले में कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।

  • नसीरुद्दीन शाह का सरकार पर तीखा हमला बोले छात्रों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं सब याद रखा जाएगा

    नसीरुद्दीन शाह का सरकार पर तीखा हमला बोले छात्रों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं सब याद रखा जाएगा


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों के प्रदर्शन और उनके साथ हुई कार्रवाई को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में उन्होंने छात्रों के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि देश की युवा पीढ़ी से उन्हें हमेशा उम्मीद रही है और आज भी वही उम्मीद उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

    नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया ने उन्हें जीवन में बहुत कुछ सिखाया है। उन्होंने कहा कि अभिनय की दुनिया में जो अनुभव उन्होंने हासिल किया उसका बड़ा हिस्सा विद्यार्थियों के साथ काम करते हुए मिला। इसी कारण वह छात्रों के संघर्ष और उनकी भावनाओं को गंभीरता से समझते हैं।

    उन्होंने अपने संदेश में कहा कि छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार देखने को मिला उससे उनका मन बेहद व्यथित है। उन्होंने कहा कि वह इस पूरी घटना से भावुक भी हैं और भीतर से आक्रोश भी महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की आवाज को सम्मान मिलना चाहिए और उनकी बात सुनी जानी चाहिए।

    नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि वे हिम्मत न हारें और अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखें। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो छात्रों की भावनाओं को समझते हैं और उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि युवा पीढ़ी देश के भविष्य को बेहतर बनाने की क्षमता रखती है और यही उम्मीद उन्हें सकारात्मक सोच बनाए रखने की प्रेरणा देती है।

    अपने संबोधन में अभिनेता ने सरकार की भी आलोचना की और कहा कि समय हर घटना का साक्षी बनता है। उन्होंने कहा कि जो कुछ आज हो रहा है उसे लोग भूलेंगे नहीं और इतिहास हर बात को याद रखता है। उनका मानना है कि सत्ता में बैठे लोगों को भी यह समझना चाहिए कि जनता की भावनाओं और युवाओं की उम्मीदों का सम्मान करना लोकतंत्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

    इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ जिसमें दावा किया गया कि नसीरुद्दीन शाह अपने बेटों के साथ दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए थे। हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि यह वीडियो किसी विरोध प्रदर्शन का नहीं बल्कि मुंबई में आयोजित एक फिल्म स्क्रीनिंग का था और इसे गलत संदर्भ में साझा किया गया।

    नसीरुद्दीन शाह का यह बयान ऐसे समय आया है जब छात्र आंदोलनों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। अभिनेता का संदेश युवाओं के समर्थन और लोकतांत्रिक संवाद की आवश्यकता पर केंद्रित रहा।

  • अनुपम खेर ने सुनाया करियर का सबसे बड़ा अफसोस बोले अमरीश पुरी से टैलेंट की वजह से होती थी जलन

    अनुपम खेर ने सुनाया करियर का सबसे बड़ा अफसोस बोले अमरीश पुरी से टैलेंट की वजह से होती थी जलन


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में सैकड़ों यादगार भूमिकाएं निभाई हैं लेकिन एक ऐसा किरदार भी था जो उनके हाथ में आने के बाद उनसे छिन गया। यह किरदार था फिल्म मिस्टर इंडिया के मशहूर खलनायक मोगैंबो का जिसे बाद में अमरीश पुरी ने निभाकर भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार विलेन में शामिल कर दिया।

    अनुपम खेर ने एक पॉडकास्ट में इस घटना को याद करते हुए बताया कि शुरुआत में मोगैंबो की भूमिका के लिए उनका चयन किया गया था। फिल्म के निर्देशक शेखर कपूर इस किरदार पर काम कर रहे थे और शुरुआती तैयारी भी हो चुकी थी। लेकिन कुछ समय बाद निर्माता बोनी कपूर और अभिनेता अनिल कपूर को लगा कि जिस तरह के दमदार और प्रभावशाली खलनायक की कल्पना की गई थी उसमें अनुपम खेर पूरी तरह फिट नहीं बैठ रहे हैं।

    इसके बाद फिल्म निर्माताओं ने अमरीश पुरी को इस भूमिका के लिए चुना। जब अनुपम खेर को यह पता चला तो उन्हें बेहद दुख हुआ। उन्होंने स्वीकार किया कि इस घटना के बाद उनके मन में अमरीश पुरी के प्रति जलन पैदा हो गई थी। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि यह जलन किसी व्यक्तिगत दुश्मनी की नहीं बल्कि अभिनय प्रतिभा की वजह से थी।

    अनुपम खेर के अनुसार उन्हें यह महसूस होता था कि अमरीश पुरी उसी किरदार को उनसे कहीं बेहतर तरीके से निभा रहे थे। यही बात उन्हें सबसे अधिक परेशान करती थी। उन्होंने कहा कि कलाकारों के बीच ऐसी सकारात्मक प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक होती है और कई बार यही भावना व्यक्ति को बेहतर काम करने की प्रेरणा भी देती है।

    बाद में अनुपम खेर ने निर्देशक शेखर कपूर के फैसले को पूरी तरह सही माना। उनका कहना था कि वह मोगैंबो के किरदार को एक चतुर धूर्त और राजनीतिक दांवपेंच समझने वाले खलनायक के रूप में निभाना चाहते थे जबकि निर्देशक की कल्पना इससे बिल्कुल अलग थी। शेखर कपूर एक ऐसे भव्य कॉमिक बुक शैली के विलेन की तलाश में थे जिसकी स्क्रीन मौजूदगी बेहद प्रभावशाली हो और जिसे बच्चे भी याद रखें।

    अमरीश पुरी ने मोगैंबो के रूप में जिस अंदाज से अभिनय किया वह भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर हो गया। उनका संवाद मोगैंबो खुश हुआ आज भी लोगों की जुबान पर है और यह किरदार हिंदी फिल्मों के सबसे प्रतिष्ठित खलनायकों में गिना जाता है।

    अनुपम खेर का यह अनुभव इस बात का उदाहरण है कि फिल्मी दुनिया में कई बार बड़े अवसर आखिरी समय पर हाथ से निकल जाते हैं लेकिन एक सच्चा कलाकार अपनी भावनाओं को स्वीकार करते हुए उनसे सीख भी लेता है। यही कारण है कि अनुपम खेर आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में गिने जाते हैं।

  • ICU और सर्जरी वाली पोस्ट पर बिग बी ने दिया बड़ा बयान बताया आखिर किस संदर्भ में लिखी थी बात

    ICU और सर्जरी वाली पोस्ट पर बिग बी ने दिया बड़ा बयान बताया आखिर किस संदर्भ में लिखी थी बात


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन की एक ब्लॉग पोस्ट ने उनके प्रशंसकों की चिंता बढ़ा दी थी। ब्लॉग में सर्जरी ICU और रिकवरी का जिक्र होने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी सेहत को लेकर कई तरह की अटकलें लगने लगीं। हालांकि अब खुद अमिताभ बच्चन ने सामने आकर पूरी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि उनकी कोई सर्जरी नहीं हुई है और लोग उनकी बात का अर्थ गलत समझ बैठे।

    अमिताभ बच्चन ने कहा कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनकी तबीयत को लेकर फैल रही खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने बताया कि ब्लॉग में उन्होंने सर्जरी और ICU का उल्लेख केवल एक उदाहरण के रूप में किया था। उनका उद्देश्य यह बताना था कि किसी भी व्यक्ति के लिए कठिन दौर के बाद सामान्य जीवन में लौटना सबसे चुनौतीपूर्ण समय होता है।

    उन्होंने समझाया कि जब कोई व्यक्ति सर्जरी या गंभीर बीमारी के बाद ICU से घर लौटता है तो उसके सामने शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनने की बड़ी चुनौती होती है। इसी तरह जब कोई चैंपियन हार का सामना करता है तो उसके लिए भी सबसे कठिन समय वही होता है जब उसे खुद को फिर से संभालना पड़ता है। उनका कहना था कि इसी भाव को समझाने के लिए उन्होंने यह उदाहरण दिया था लेकिन लोगों ने इसे उनकी निजी स्वास्थ्य स्थिति से जोड़ लिया।

    अमिताभ बच्चन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी ब्लॉग पोस्ट का संबंध उनकी सेहत से नहीं बल्कि हाल ही में हुए फीफा विश्व कप फाइनल से था। उन्होंने बताया कि वह अर्जेंटीना की हार और एक चैंपियन खिलाड़ी के रूप में लियोनेल मेसी की भावनात्मक स्थिति का जिक्र कर रहे थे। उनका उद्देश्य यह समझाना था कि हार के बाद किसी भी विजेता के लिए मानसिक रूप से खुद को संभालना कितना कठिन होता है।

    उन्होंने कहा कि उनकी बात को संदर्भ से अलग करके देखा गया जिसके कारण यह गलतफहमी फैल गई कि उनकी सर्जरी हुई है या वह अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने अपने प्रशंसकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी चिंता और शुभकामनाएं उनके लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रही हैं।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो अमिताभ बच्चन जल्द ही फिल्म कल्कि 2898 एडी के सीक्वल में नजर आएंगे। इसके अलावा वह लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति के नए सीजन की मेजबानी भी करते दिखाई देंगे। लंबे समय से सक्रिय अमिताभ बच्चन आज भी फिल्मों और टेलीविजन दोनों माध्यमों में लगातार काम कर रहे हैं।

    अमिताभ बच्चन का फिल्मी सफर भी संघर्षों से भरा रहा है। शुरुआती दौर में लगातार कई फिल्मों की असफलता के बाद उन्होंने अभिनय छोड़ने का विचार बना लिया था। लेकिन वर्ष 1973 में आई फिल्म जंजीर ने उनके करियर की दिशा बदल दी और इसके बाद उन्होंने सफलता की ऐसी कहानी लिखी जो आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में मिसाल मानी जाती है।

  • रोशनी पड़ते ही सोने सा चमकने लगता है यह अनोखा पौधा जानिए श्रीलंका की अशोक वाटिका का रहस्य और वैज्ञानिक वजह

    रोशनी पड़ते ही सोने सा चमकने लगता है यह अनोखा पौधा जानिए श्रीलंका की अशोक वाटिका का रहस्य और वैज्ञानिक वजह


    नई दिल्ली । रामायण से जुड़े स्थलों और उनसे जुड़ी कथाओं को लेकर लोगों में हमेशा गहरी आस्था और जिज्ञासा रही है। श्रीलंका का नाम आते ही रावण माता सीता और अशोक वाटिका की स्मृतियां ताजा हो जाती हैं। माना जाता है कि यही वह स्थान था जहां रावण ने माता सीता को रखा था। आज भी श्रीलंका के मध्य पर्वतीय क्षेत्र में स्थित नुवारा एलिया के आसपास कई ऐसे स्थान हैं जिन्हें स्थानीय परंपराओं में रामायण से जोड़ा जाता है। इन्हीं स्थानों में एक ऐसा दुर्लभ पौधा भी चर्चा का विषय बना हुआ है जिसकी पत्तियां प्रकाश पड़ते ही सुनहरे रंग की तरह चमकने लगती हैं।

    यह पौधा सामान्य परिस्थितियों में किसी साधारण वनस्पति जैसा ही दिखाई देता है लेकिन जैसे ही इस पर सूर्य की किरणें या तेज रोशनी पड़ती है इसकी पत्तियां सुनहरी आभा बिखेरने लगती हैं। घने जंगल या हल्के अंधेरे में इसकी चमक और अधिक स्पष्ट दिखाई देती है जिससे इसे देखने वाले लोग पहली नजर में चकित रह जाते हैं। यही विशेषता इसे दुनिया के अलग अलग हिस्सों से आने वाले पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाती है।

    स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यह पौधा रामायण काल की वनस्पतियों का अवशेष है और इसका संबंध अशोक वाटिका से जुड़ी प्राचीन मान्यताओं से है। कई श्रद्धालु इसे दिव्य वनस्पति मानते हैं और इसकी चमक को आध्यात्मिक महत्व से जोड़ते हैं। हालांकि इन धार्मिक मान्यताओं की स्वतंत्र ऐतिहासिक या वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    दूसरी ओर वनस्पति वैज्ञानिक इस पौधे की चमक को प्राकृतिक संरचना का परिणाम मानते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी पत्तियों की सतह पर मौजूद सूक्ष्म कोशिकीय संरचना और प्राकृतिक रंजक प्रकाश को विशेष तरीके से परावर्तित करते हैं। इसी कारण सूर्य का प्रकाश पड़ने पर पत्तियां सुनहरी दिखाई देती हैं। इसे प्रकाश परावर्तन की एक प्राकृतिक प्रक्रिया माना जाता है जो कुछ अन्य दुर्लभ पौधों में भी अलग अलग रूप में देखने को मिलती है।

    श्रीलंका का यह क्षेत्र अपनी जैव विविधता के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां अनेक दुर्लभ औषधीय पौधे और वनस्पतियां पाई जाती हैं जिन पर लगातार शोध किए जा रहे हैं। कई वनस्पतियां ऐसी हैं जो भारत में बहुत कम या बिल्कुल नहीं मिलतीं। यही कारण है कि दुनिया भर के शोधकर्ता यहां की वनस्पति संपदा का अध्ययन करने पहुंचते हैं।

    रामायण से जुड़े स्थलों की ऐतिहासिकता और उनसे संबंधित वनस्पतियों को लेकर अलग अलग मत हैं। आस्था रखने वाले लोग इन्हें पौराणिक इतिहास का हिस्सा मानते हैं जबकि वैज्ञानिक इनके प्राकृतिक गुणों का अध्ययन कर रहे हैं। फिलहाल इस बात का कोई प्रमाणित वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है कि यह विशेष पौधा वास्तव में रामायण काल का ही है। फिर भी इसकी अनोखी चमक और स्थानीय परंपराओं से जुड़ाव इसे बेहद रोचक और आकर्षक बनाता है।

    आस्था और विज्ञान के इस अनूठे संगम ने श्रीलंका के इस रहस्यमयी पौधे को दुनिया भर में विशेष पहचान दिलाई है। यही वजह है कि यह स्थान धार्मिक पर्यटन के साथ साथ प्रकृति और विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी एक खास आकर्षण बना हुआ है।

  • छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

    छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज


    नई दिल्ली । देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर मंगलवार को राजनीतिक माहौल बेहद गरम रहा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी सहित कई सांसदों और नेताओं को हिरासत में लिया। कुछ घंटों बाद सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और संसद में इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग दोहराई।

    रिहाई के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सुबह लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर छात्रों के साथ हुई घटना पर संसद में चर्चा कराने का अनुरोध किया था। उनके अनुसार अध्यक्ष ने कहा कि इसके लिए सरकार की सहमति आवश्यक होगी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर बहस कराने में रुचि नहीं रखती इसलिए विपक्ष ने लोकतांत्रिक तरीके से प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।

    राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा संसद मार्च के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार करने वालों पर कार्रवाई तथा छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेना शामिल है। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष चाहता है कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो ताकि छात्रों की चिंताओं का समाधान निकल सके।

    दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने रिहाई के बाद कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। प्रियंका गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए संसद में कानून लाने की आवश्यकता बताई।

    वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी छात्रों का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं और छात्रों के हित में लगातार काम कर रही है और केवल राजनीतिक बयानबाजी से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

    भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन को अनुचित बताते हुए राहुल गांधी के आचरण की आलोचना की और कहा कि विरोध प्रदर्शन की भी एक मर्यादा होती है। भाजपा का कहना है कि संसद के भीतर सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार तैयार है लेकिन अराजकता फैलाने की राजनीति उचित नहीं है।

    दिनभर चले इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी और अन्य हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा कर दिया। इसके बावजूद छात्रों के मुद्दे को लेकर राजनीतिक टकराव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष लगातार संसद में चर्चा और सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है जबकि सरकार अपने रुख पर कायम है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।