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  • तमिलनाडुः 5 अगस्त को अपना पहला पूर्ण बजट पेश करेगी TVK सरकार…6 को आएगा कृषि बजट

    तमिलनाडुः 5 अगस्त को अपना पहला पूर्ण बजट पेश करेगी TVK सरकार…6 को आएगा कृषि बजट


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में टीवीके सरकार (TVK Government) अपना पहला पूर्ण बजट (First full Budget) पेश करने जा रही है। विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर (JCD Prabhakar) के अनुसार, पांच अगस्त को आम बजट पेश होगा। इसके ठीक अगले दिन 6 अगस्त को अलग से कृषि बजट पेश किया जाएगा। इस विशेष कृषि बजट में किसानों के लिए लक्षित सब्सिडी और नए विकास कार्यों का पूरा खाका तैयार किया जाएगा।

    क्या होगी अलग कृषि बजट की मुख्य रणनीति?
    कृषि मंत्री आर विनोद छह अगस्त को सदन में राज्य का पृथक कृषि बजट पेश करेंगे। सूत्रों की मानें तो इस बजट का पूरा ध्यान किसानों की सीधी आर्थिक मदद पर होगा। सरकार का मकसद खेती की लागत को घटाना है। इसके साथ ही कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए नई तकनीक और लक्षित सब्सिडी की योजना बनाई गई है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा।


    भारी कर्ज के बीच कृषि विकास के लिए पैसा कहां से आएगा?

    राज्य सरकार ने हाल ही में एक श्वेत पत्र जारी किया था। इसमें बताया गया कि तमिलनाडु पर करीब 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। राज्य की कुल देनदारियां 13.18 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं। इतने बड़े वित्तीय संकट के बावजूद, मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने साफ कर दिया है कि किसान कल्याण और जनकल्याण की योजनाएं किसी भी कीमत पर नहीं रुकेंगी। सरकार का दावा है कि भ्रष्टाचार रोककर बचाई गई राशि का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र के विकास में किया जाएगा।


    कृषि बजट से जुड़ी सात अहम बातें

    छह अगस्त को पेश होगा अलग कृषि बजट।
    किसानों के लिए जरूरत के मुताबिक लक्षित सब्सिडी की तैयारी।
    सिंचाई और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फंड मिलने की संभावना।
    विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जाएगा।
    बजट पर किसानों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी।
    चुनावी वादों को लागू करने की दिशा में नई योजनाओं का एलान संभव।
    आर्थिक दबाव के बावजूद किसान कल्याण योजनाएं जारी रखने का सरकार का दावा।


    मुख्यमंत्री विजय के सामने बड़ी परीक्षा

    टीवीके सरकार के लिए यह सिर्फ पहला कृषि बजट नहीं, बल्कि चुनावी वादों को जमीन पर उतारने की पहली बड़ी परीक्षा भी है। सत्ता में आने से पहले जोसेफ विजय ने पिछली सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप लगाए थे। अब लोगों की नजर इस बात पर होगी कि उनकी सरकार सीमित संसाधनों के बावजूद किसानों के लिए कितनी प्रभावी योजनाएं लेकर आती है।

  • गॉडजिला स्टार केली हॉटल का 18 साल की उम्र में निधन….सड़क हादसे में हुई मौत

    गॉडजिला स्टार केली हॉटल का 18 साल की उम्र में निधन….सड़क हादसे में हुई मौत


    नई दिल्ली।
    हॉलीवुड की फेमस फिल्म ‘गॉडजिला वर्सेस कॉन्ग’ (‘Godzilla vs Kong’) और ‘गॉडजिला एक्स कॉन्ग: द न्यू एम्पायर’ (‘Godzilla x Kong: The New Empire’) में जिया का किरदार निभाकर दुनियाभर में पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस केली हॉटल (Kaylee Hottle) का 18 साल की उम्र में निधन हो गया. उनकी मौत अमेरिका के मैरीलैंड में हुए एक सड़क हादसे में हुई।

    केली के पिता जोशुआ हॉटल ने अमेरिकन साइन लैंग्वेज (ASL) में फेसबुक लाइव के जरिए उनकी मौत की जानकारी दी. बाद में उन्होंने TMZ से भी इस दुखद खबर की पुष्टि की।


    स्कूल ने भी दी मौत की पुष्टि

    केली टेक्सास स्कूल फॉर द डेफ (Texas School for the Deaf) की सीनियर स्टूडेंट थीं. स्कूल ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर उनके निधन पर गहरा दुख जताया।

    स्कूल ने लिखा- हमें बेहद दुख के साथ बताना पड़ रहा है कि हमारी सीनियर छात्रा केली हॉटल का मैरीलैंड के फ्रेडरिक में एक कार दुर्घटना में निधन हो गया. इस मुश्किल समय में हमारी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और सभी चाहने वालों के साथ हैं।

    साथ ही स्कूल ने लोगों से अपील की कि हादसे को लेकर किसी तरह की अफवाह या अटकलें न लगाएं और परिवार की निजता का सम्मान करें।


    ‘गॉडजिला’ फिल्मों से मिली थी पहचान

    केली हॉटल ने 2021 की फिल्म ‘Godzilla vs. Kong’ में जिया का किरदार निभाया था. जिया एक मूक-बधिर अनाथ बच्ची थी, जिसका किंग कॉन्ग से बेहद खास रिश्ता दिखाया गया था. बाद में वह 2024 में आई ‘Godzilla x Kong: The New Empire’ में भी इसी किरदार में नजर आईं।

    इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए उन्हें सैटर्न अवॉर्ड में बेस्ट परफॉर्मेंस बाय अ यंगर एक्टर कैटेगरी में भी नामांकन मिला था।


    साइन लैंग्वेज में एक्टिंग करना था सबसे बड़ा चैलेंज

    2021 में The Daily Moth को दिए इंटरव्यू में केली ने बताया था कि उनके लिए डायलॉग याद करना मुश्किल नहीं था, लेकिन उन्हें अमेरिकन साइन लैंग्वेज (ASL) के हिसाब से संवादों को ढालना काफी चुनौतीपूर्ण था।

    उन्होंने कहा था कि कई बार डायरेक्टर-प्रोड्यूसर चाहते थे कि वह स्क्रिप्ट के शब्दों के मुताबिक साइन करें, लेकिन ASL में एक ही बात को अलग तरीके से व्यक्त किया जाता है. इसी वजह से सेट पर कुछ गलतफहमियां भी हुईं, हालांकि बाद में टीम ने उनकी बात समझ ली थी।

    केली हॉटल के अचानक निधन से हॉलीवुड और उनके फैंस को गहरा सदमा लगा है. महज 18 साल की उम्र में उन्होंने अपनी प्रतिभा से दुनिया भर के दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली थी।

  • चारधाम यात्रा में उमड़ रहा जनसैलाब…. 94 दिन में दर्शन करने वालों की संख्या 45 लाख पार

    चारधाम यात्रा में उमड़ रहा जनसैलाब…. 94 दिन में दर्शन करने वालों की संख्या 45 लाख पार


    देहरादून।
    प्रदेश में संचालित चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra) इस बार भी नया रिकॉर्ड (New record) बना रही है। 94 दिन की यात्रा में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं (Devotees) की संख्या 45 लाख पार हो चुकी है जबकि बीते वर्ष इसी अवधि में कुल 41 लाख 47 हजार 540 श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे थे। पिछले वर्ष की तुलना में 3.52 लाख यात्री अधिक पहुंचे हैं।

    अभी तक सर्वाधिक 15 लाख 27 हजार 936 श्रद्धालु भगवान बदरीविशाल (Lord Badrivishal) के दर्शन को पहुंच चुके हैं, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 12 लाख 19 हजार 744 था। इस प्रकार यहां भी श्रद्धालुओं की संख्या 03 लाख 08 हजार 192 अधिक रही है।

    प्रदेश सरकार की ओर से मानसून सीजन को देखते हुए सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं आपदा प्रबंधन पर पूरी नजर रखे हुए हैं।

    19 अप्रैल को शुरू हुई चारधाम यात्रा मंगलवार को 94 दिन पूर्ण कर चुकी है। इस अवधि में बद्रीनाथ में सर्वाधिक 15,27, 936 श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे हैं। जबकि केदारनाथ में 14,11,861, गंगोत्री में 7,03,064 और यमुनोत्री धाम में 6,47,447 तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। हेमकुंड साहिब में भी यात्रियों की संख्या 2,10,896 पहुंच चुकी है।

    चारधाम यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। मौसम खराब होने के बावजूद चारों धामों में यात्रियों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। मानसून को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर पुलिस जवानों की तैनाती की गई है।
    -पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

  • राम मंदिर में चंदा चुराने वालों को दुनिया की कोई चीज नहीं कर सकती शर्मिंदा : HC

    राम मंदिर में चंदा चुराने वालों को दुनिया की कोई चीज नहीं कर सकती शर्मिंदा : HC


    प्रयागराज।
    अयोध्या के राम मंदिर (Ayodhya’s Ram Mandir) में चंदे की हेराफेरी के मामले पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने बेहद सख्त टिप्पणी की है। जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कहा है कि जो लोग राम मंदिर में चंदे की चोरी जैसी घटना से भी बेपरवाह और बेफिक्र हैं, उन्हें अब दुनिया की कोई चीज शर्मिंदा नहीं कर सकती। यही नहीं जस्टिस श्रीधरन ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाए जाने वालों को मौत की सजा देने का भी सुझाव दिया है।

    उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) के बुलडोजर एक्शन पर अपनी राय रखते हुए जस्टिस श्रीधरन ने भारत के कई संस्थानों में गहराई तक फैले भ्रष्टाचार की कड़े शब्दों में आलोचना की। राम मंदिर में दान की चोरी के मामले का जिक्र करते हुए जस्टिस के. एस. श्रीधरन ने कहा, “राम मंदिर में दान की चोरी का मामला तो हद ही पार कर गया। अगर राम मंदिर जैसी पवित्र जगह पर हुई चोरी भी लोगों को शर्मिंदा नहीं कर सकती, तो फिर शायद कोई भी घटना उन्हें शर्मिंदा नहीं कर सकती। यह दिखाता है कि ईमानदारी का स्तर कितना गिर चुका है।”

    ‘भ्रष्टाचार हो गया है सामान्य’
    जस्टिस श्रीधरन ने कहा कि भारत के लोगों ने भ्रष्टाचार को सामान्य मान लिया है और जब तक कोई पकड़ा नहीं जाता, तब तक इसे गलत नहीं मानता। उन्होंने कहा कि ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 2025 रिपोर्ट में 182 देशों की सूची में भारत 91वें स्थान पर है लेकिन यह तथ्य भी हमें शर्मिंदा नहीं करता। समाज में भ्रष्टाचार को लेकर चिंता जताते हुए HC ने सुझाव दिया कि अगर राज्य सरकार सचमुच भ्रष्टाचार को खत्म करना चाहती है, तो उसे ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988’ में संशोधन कर दोषियों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान करने पर विचार करना चाहिए।

    जस्टिस श्रीधरन ने चेतावनी दी कि देश में बेलगाम भ्रष्टाचार से कुछ ही लोगों के हाथों में बेहिसाब पैसा होगा। इससे अमीर और गरीब के बीच की खाई चौड़ी होगी। यह स्थिति आने वाले दिनों में देश में अशांति और असंतोष की कहानी लिख रही है। जस्टिस श्रीधरन ने ये टिप्पणियां 51 पन्नों के अपने एक फैसले में की। यह मामला सरकार के बुलडोजर एक्शन से जुड़ा था। इस मामले में अदालत के दो जजों की राय अलग-अलग थी।

    बुलडोजर जस्टिस’ की आदत?
    जस्टिस श्रीधरन ने अपने फैसले में कहा कि किसी अपराध के तुरंत बाद मकान को ढहा देना ‘बुलडोजर जस्टिस’ की आदत से पकी समाज की ‘खून की प्यास’ को शांत करने के लिए किया जाता है। उन्होंने जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बावजूद बिना किसी डर के तोड़फोड़ जारी है। इससे ऐसा लगता है, मानो ये फैसले अस्तित्व में ही नहीं हैं या राज्य को यकीन है कि सुप्रीम कोर्ट के नियमों की अवहेलना का उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

    अवैध निर्माणों पर राय देते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी मकान रातों-रात खड़ा नहीं हो जाता। बिल्डर को संरक्षण मिलने और रिश्वतखोरी के कारण जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंद लेते हैं। इसका खामियाजा दशकों बाद उस आम खरीदार को भुगतना पड़ता है जिसे अचानक बेदखली का सामना करना पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी अवैध बिल्डिंगों को पानी और बिजली जैसी सरकारी सुविधाएं देकर सरकार भी इस अपराध में बराबर का भागीदार बन जाती है।

  • Chip पैकेजिंग का नया ग्लोबल हब बनेगा भारत…. सरकार ने बनाया चीन को मात देने का मेगा प्लान

    Chip पैकेजिंग का नया ग्लोबल हब बनेगा भारत…. सरकार ने बनाया चीन को मात देने का मेगा प्लान


    नई दिल्ली।
    वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन (Global Electronics Supply Chain) में चीन (China) का विकल्प बनने के लिए भारत (India) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। देश जल्द ही चिप पैकेजिंग (Chip Packaging) के वैश्विक केंद्र के तौर पर उभरेगा। निर्माताओं को भारत में चिप निर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए आकर्षित करने के प्रयास किए जाएंगे।

    सरकार कंपनियों को यूनिट लगाने पर पूंजीगत व्यय का 35 फीसदी तक वित्तीय सहायता देगी। पारंपरिक पैकेजिंग इकाइयों को यह सहायता 25 फीसदी तक होगी। इससे वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की स्थिति मजबूत होगी। सरकार का मानना है कि केवल चिप निर्माण ही नहीं, बल्कि उनकी टेस्टिंग और पैकेजिंग भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


    नई रणनीति से यूं आएगा बदलाव

    नई रणनीति के तहत विश्व-स्तरीय अग्रणी कंपनियां जैसे इंटेल, लॉकहीड मार्टिन और एप्लाइड मैटेरियल्स ने भारत में निवेश में रुचि दिखाई है। नई पैकेजिंग और टेस्टिंग इकाइयां शुरू होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, हार्डवेयर और इंजीनियरिंग क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे। ऑटोमोबाइल, स्मार्टफोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली चिप्स के लिए भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी।

    सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में एटीएमपी यानी असेंबली, टेस्टिंग, पैकेजिंग यूनिट व ओएसएटी यानी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर, असेंबली टेस्ट इकाइयों को स्वीकृति मिल गई है। सेमिकॉन 2.0 के तहत कम्प्यूटिंग, मेमोरी, पावर, नेटवर्किंग व सेंसर जैसे निर्माण खंडों की पहचान की गई है। देश की पहली फैब यूनिट 2028 में शुरू होने की उम्मीद है। पहली कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट और पहली थ्री डी ग्लास सब्सट्रेट पैकेजिंग सुविधा स्थापित की जा रही है। अगली पीढ़ी की पैकेजिंग तकनीक आकर्षित करने के लिए सब्सिडी की व्यवस्था की गई है, ताकि दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनियां भारत में निवेश के लिए आकर्षित हों।

  • ट्रंप का बड़ा फैसला…. जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ लगाएगा अमेरिका

    ट्रंप का बड़ा फैसला…. जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ लगाएगा अमेरिका


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बुधवार को घोषणा की कि अमेरिका (America) अगस्त 2028 से विदेश से आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं (Generic medicines) पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) (Hefty Import Duties- Tariffs) लगाएगा। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद जेनेरिक दवाओं का उत्पादन अमेरिका के भीतर कराना है। इस फैसले का असर भारत पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है।

    ट्रंप ने ट्रथु सोशल प्लेटफॉर्म पर कहा कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो साल तक टैरिफ शून्य फीसदी रहेगा। इसके बाद एक साल के लिए इसे 100 फीसदी कर दिया जाएगा। उसके बाद यह बढ़ाकर 200 फीसदी कर दिया जाएगा।


    ट्रंप ने क्या कहा?

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने कहा कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में लाई जाने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो साल तक शून्य फीसदी आयात शुल्क रहेगा। इसके बाद एक साल के लिए यह 100 फीसदी होगा और उसके बाद 200 फीसदी कर दिया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया है, ताकि जेनेरिक दवाओं का उत्पादन फिर से अमेरिका में शुरू हो। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां तय समय के भीतर अमेरिका में कारखाने और जरूरी उपकरण नहीं लगाएंगे, उन्हें इस नीति के तहत दंड का सामना करना पड़ेगा।


    नई नीति में क्या बदलेगा?

    राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस नीति का मकसद अमेरिका के लोगों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पेटेंट वाली, ब्रांडेड और नई दवाओं से जुड़ी मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और वह पहले की तरह जारी रहेगी।

    भारत का अमेरिका को दवाओं का कितना निर्यात है?
    ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब अमेरिकी डॉलर की दवाओं का निर्यात किया। यह भारत के कुल वैश्विक दवा निर्यात 25.8 अरब अमेरिकी डॉलर का 36 प्रतिशत था।


    जेनेरिक दवाओं का इस्तेमाल कहां होता है?

    भारत में बनी जेनेरिक दवाएं उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर, संक्रामक रोगों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियों के इलाज में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जाती हैं।

  • पहले शादी टालने की थी साजिश, फिर बना हत्या का प्लान; सिया-चेतन केस में जांच के नए खुलासे

    पहले शादी टालने की थी साजिश, फिर बना हत्या का प्लान; सिया-चेतन केस में जांच के नए खुलासे


    मुंबई। केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में रोज नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने शुरुआत में हत्या की योजना नहीं बनाई थी। दोनों पहले ऐसी घटना करवाना चाहते थे जिससे केतन घायल हो जाए और शादी टल जाए। लेकिन बाद में उन्होंने इस योजना को छोड़कर हत्या की साजिश रची।

    घायल करने की योजना क्यों बदली?

    जांच अधिकारियों के अनुसार, सिया अपने परिवार की बदनामी नहीं चाहती थी और न ही वह घर छोड़कर चेतन के साथ शादी करना चाहती थी।

    ऐसे में दोनों ने पहले किसी दुर्घटना के जरिए केतन को घायल करने का विचार बनाया, ताकि विवाह टल सके। हालांकि बाद में उन्हें लगा कि इस योजना में पकड़े जाने का खतरा ज्यादा है, इसलिए उन्होंने हत्या की योजना पर काम शुरू कर दिया।

    इंटरनेट और फिल्मों से जुटाई जानकारी

    पुलिस की जांच में सामने आया है कि दोनों ने वारदात को दुर्घटना का रूप देने के कई विकल्पों पर विचार किया। इसके लिए उन्होंने कथित तौर पर सस्पेंस फिल्मों से तरीके समझने की कोशिश की और इंटरनेट पर भी काफी खोजबीन की। आखिरकार दोनों इस नतीजे पर पहुंचे कि ऊंचाई से धक्का देकर हत्या करना सबसे आसान तरीका हो सकता है।

    कई जगहों की रेकी के बाद चुना लोहागढ़ किला

    जांच में यह भी पता चला है कि लोहागढ़ किला पहली पसंद नहीं था। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने लोनावला के टाइगर प्वाइंट, विसापुर किले और अन्य ऊंचाई वाले इलाकों का भी निरीक्षण किया। वे एक-दूसरे को इन स्थानों की तस्वीरें भेजते रहे और आखिर में पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले को वारदात के लिए चुना। जांच एजेंसियों का मानना है कि उनकी कोशिश ऐसी जगह चुनने की थी, जहां घटना के बाद सबूत मिलना मुश्किल हो।

    रिश्ते में बाधा बना केतन

    पुलिस का दावा है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी अपने रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहते थे। उन्हें आशंका थी कि यदि सिया की शादी केतन अग्रवाल से हो गई तो दोनों का संबंध हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। इसी वजह से उन्होंने कथित तौर पर केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची।

    बाली ट्रिप ने बढ़ाई जल्दबाजी

    जांच के मुताबिक जून में प्रस्तावित बाली यात्रा नजदीक आने के साथ ही दोनों ने अपनी योजना को जल्द अंजाम देने का फैसला किया। पुलिस को संदेह है कि 14 जून को लोहागढ़ किले पर हत्या का एक प्रयास पहले भी किया गया था, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया।

    18 जून को हुई थी गिरफ्तारी

    पुलिस ने 18 जून को रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत के मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि दोनों ने पूर्व नियोजित साजिश के तहत लोहागढ़ किले की चट्टान से धक्का देकर केतन की हत्या कर दी। जांच एजेंसियों का कहना है कि अब तक की पड़ताल में सुपारी देकर हत्या कराए जाने जैसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है।

    फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और पुणे की यरवडा केंद्रीय जेल में बंद हैं। मामले की जांच जारी है।

  • ट्रंप के नए वीजा नियम ने बढ़ाई चिंता… भारतीय छात्रों को 54 दिन के भीतर लौटना होगा अमेरिका

    ट्रंप के नए वीजा नियम ने बढ़ाई चिंता… भारतीय छात्रों को 54 दिन के भीतर लौटना होगा अमेरिका


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका (America) में आव्रजन नियमों (Immigration rules) में एक बड़े बदलाव के चलते भारतीय छात्रों (Indian students) समेत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को लौटने की सलाह दी गई है। विश्वविद्यालयों ने सलाह दी है कि अगर वे मौजूदा आव्रजन व्यवस्था का लाभ बनाए रखना चाहते हैं तो 15 सितंबर से पहले अमेरिका लौट आएं। यह सलाह उन छात्रों के लिए है जो शैक्षणिक अवकाश के दौरान अपने देश आए हुए हैं और एफ-1 या जे-1 वीजा पर पढ़ाई कर रहे हैं।

    यह सलाह अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के नए “अंतिम नियम” के लागू होने से पहले दी गई है। यह नियम लंबे समय से लागू “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस यानी डी/एस व्यवस्था” की जगह लेगा।


    15 सितंबर से लागू होगा नया नियम

    नए नियम के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका में अधिकतम चार वर्ष की निश्चित अवधि के लिए ही प्रवेश मिलेगा। मौजूदा व्यवस्था में एफ-1 वीजा धारक छात्र तब तक अमेरिका में रह सकते हैं, जब तक वे अपने शैक्षणिक कार्यक्रम की शर्तों का पालन करते रहते हैं। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने अपने नोटिस में कहा, “इस अंतिम नियम को लागू करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। हम सभी छात्रों को सलाह देते हैं कि वे 8 सितंबर, 2026 से शुरू होने वाली कक्षाओं से पहले न्यूयॉर्क लौट आएं।”


    क्या-क्या बदलेगा?

    – डीएचएस ने एफ-1 छात्र वीजा, जे-1 एक्सचेंज विजिटर वीजा और विदेशी पत्रकारों के लिए आई वीजा पर अधिकतम चार वर्ष की अवधि तय कर दी है।
    – नए नियम के तहत पढ़ाई पूरी होने के बाद अमेरिका में रहने की छूट 60 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी जाएगी।
    – अगर किसी छात्र को अपनी अवधि बढ़ानी होगी तो उसे अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) से फॉर्म आई-539 के माध्यम से मंजूरी लेनी होगी।


    किन छात्रों पर लागू नहीं होगा नया नियम?

    डीएचएस के अनुसार, जो छात्र 15 सितंबर को पहले से अमेरिका में “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” के तहत मौजूद होंगे, वे अपने फॉर्म आई-20 में दर्ज कार्यक्रम पूरा होने तक या स्वीकृत ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी/एसटीईएम ओपीटी) की अवधि तक अमेरिका में रह सकेंगे। हालांकि, यह छूट भी नए नियम के लागू होने की तारीख से अधिकतम चार वर्ष तक ही मान्य होगी और किसी भी स्थिति में 14 नवंबर, 2030 के बाद लागू नहीं रहेगी। इसमें देश छोड़ने के लिए मिलने वाली अवधि भी शामिल होगी।


    भारतीय छात्रों में बढ़ी चिंता

    नए नियम के बाद भारतीय छात्रों और पेशेवरों के बीच चिंता बढ़ गई है। उन्हें आशंका है कि इसका असर उनकी पढ़ाई और करियर की योजनाओं पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है, “चार वर्ष की सीमा आधुनिक डिग्री पाठ्यक्रमों के अनुरूप नहीं है। स्नातक की डिग्री पूरी करने में औसतन 52 महीने और पीएचडी पूरी करने में लगभग 5.7 वर्ष लगते हैं। यूएससीआईएस के पास पहले से ही 1.1 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं और उनके निपटारे में करीब एक वर्ष लग रहा है।”

    विशेषज्ञों का कहना है, “छात्रों को पढ़ाई या शोध के बीच में ही अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इससे प्रयोगशालाओं को प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं का नुकसान होगा और अमेरिका अपनी नवाचार क्षमता अपने प्रतिस्पर्धी देशों के हाथों सौंप देगा।” एफआईआईडीएस के अनुसार, शोध आधारित कई पाठ्यक्रम, विशेषकर पीएचडी और चिकित्सा शिक्षा, सामान्य तौर पर चार वर्ष से अधिक समय लेते हैं। वहीं, जे-1 श्रेणी के शोधकर्ता और चिकित्सकों को अपना कार्यक्रम पूरा करने में अक्सर पांच से सात वर्ष तक लग जाते हैं।

  • NEET विवाद पर कांग्रेस ने बदली रणनीति, छात्र आंदोलन में बढ़ाई सक्रियता; सरकार पर संसद से सड़क तक बनाया दबाव

    NEET विवाद पर कांग्रेस ने बदली रणनीति, छात्र आंदोलन में बढ़ाई सक्रियता; सरकार पर संसद से सड़क तक बनाया दबाव


    नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। शुरुआत में आंदोलन से सीमित दूरी बनाए रखने वाली पार्टी अब खुलकर छात्रों के समर्थन में उतर आई है। संसद के भीतर से लेकर सड़क तक कांग्रेस ने सरकार को घेरने की तैयारी तेज कर दी है, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक मुकाबला और तीखा हो गया है।

    शुरुआत में दूरी, बाद में बदला रुख

    पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस ने देशभर में छात्रों से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत तो की, लेकिन जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन से खुद को अलग रखा। पार्टी के भीतर यह धारणा थी कि सीजेपी का आंदोलन राजनीतिक रूप से भाजपा को लाभ पहुंचाने वाला हो सकता है। हालांकि, सीजेपी की अपील पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा जंतर-मंतर पहुंचे, लेकिन उन्होंने केवल भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात की।

    पार्टी ने औपचारिक रूप से आंदोलन का समर्थन नहीं किया।

    छात्र जुटे तो कांग्रेस ने बदली रणनीति

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संसद मार्च के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी और पूरे दिन चले विरोध प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि युवाओं में सरकार के खिलाफ व्यापक असंतोष है। इसके बाद पार्टी ने आंदोलन को अधिक सक्रियता से आगे बढ़ाने का फैसला किया।

    रणनीति बदलने के साथ ही लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद के भीतर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। राहुल गांधी ने सदन में इस मामले पर चर्चा कराने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात की।

    कानूनी सहायता का भी ऐलान

    कांग्रेस ने प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए छात्रों और युवाओं को कानूनी मदद उपलब्ध कराने की घोषणा भी की है।

    पार्टी का कहना है कि आंदोलन के दौरान किसी भी छात्र के साथ अन्याय होने पर उसकी हरसंभव सहायता की जाएगी। इससे संकेत मिलता है कि कांग्रेस अब इस आंदोलन में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के पक्ष में है।

    धरना, हिरासत और फिर रिहाई

    मंगलवार को राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास के निकट निषेधाज्ञा वाले क्षेत्र में धरने पर बैठ गए। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। कुछ घंटों तक हिरासत में रखने के बाद रात में सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया।

    राजनीतिक मुकाबला हुआ तेज

    NEET पेपर लीक विवाद अब केवल शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह विपक्ष और सरकार के बीच बड़ा राजनीतिक संघर्ष बनता जा रहा है। कांग्रेस की सक्रियता के बाद संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे पर सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना मानी जा रही है।

  • डिनर में बनाएं जीरा राइस और कढ़ी पकोड़ा, पारंपरिक स्वाद के साथ मिलेगा घर जैसा लाजवाब जायका

    डिनर में बनाएं जीरा राइस और कढ़ी पकोड़ा, पारंपरिक स्वाद के साथ मिलेगा घर जैसा लाजवाब जायका

    नई दिल्ली । अगर रोज़ाना एक जैसा भोजन खाकर ऊब महसूस होने लगी है, तो डिनर में जीरा राइस और कढ़ी पकोड़ा का पारंपरिक संयोजन स्वाद में नया बदलाव ला सकता है। हल्के मसालों की खुशबू से भरपूर जीरा राइस और खट्टे-तीखे स्वाद वाली क्रीमी कढ़ी के साथ नरम पकोड़े भारतीय भोजन की सबसे पसंदीदा डिशों में शामिल हैं। यह व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि घर में उपलब्ध सामान्य सामग्री से आसानी से तैयार भी किया जा सकता है।

    कढ़ी बनाने के लिए सबसे पहले एक कप खट्टे दही में तीन बड़े चम्मच बेसन, हल्दी, नमक और लगभग तीन कप पानी मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें। ध्यान रखें कि मिश्रण में किसी प्रकार की गांठ न रहे। इसके बाद एक कड़ाही में तेल या घी गर्म करें और उसमें जीरा, राई, मेथी दाना, हींग, करी पत्ता तथा साबुत लाल मिर्च डालकर सुगंधित तड़का तैयार करें। अब दही और बेसन का मिश्रण इसमें डालें और धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए लगभग 20 से 25 मिनट तक पकाएं, ताकि कढ़ी अच्छी तरह गाढ़ी और स्वादिष्ट बन सके।

    इस बीच पकोड़े तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए एक बर्तन में बेसन, बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया और स्वादानुसार नमक मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार करें। चाहें तो हल्के और मुलायम पकोड़ों के लिए इसमें एक चुटकी बेकिंग सोडा भी मिला सकते हैं। गर्म तेल में छोटे-छोटे पकोड़े सुनहरे होने तक तल लें। जब कढ़ी अच्छी तरह पक जाए, तब इन पकोड़ों को उसमें डालकर लगभग आठ से दस मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं, ताकि उनमें कढ़ी का स्वाद पूरी तरह समा जाए।

    जीरा राइस इस डिश का स्वाद और बढ़ा देते हैं। इसके लिए पके हुए चावल में घी या तेल गर्म कर जीरा भूनें और फिर उसमें चावल डालकर हल्का सा मिला लें। चाहें तो इसमें थोड़ा हरा धनिया भी डाल सकते हैं। जीरे की खुशबू चावल को अलग स्वाद देती है और कढ़ी के साथ इसका मेल बेहद संतुलित लगता है।

    बेहतरीन कढ़ी बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। हमेशा हल्का खट्टा दही इस्तेमाल करें, क्योंकि इससे कढ़ी का स्वाद अधिक संतुलित और पारंपरिक बनता है। कढ़ी को तेज आंच पर पकाने के बजाय धीमी आंच पर पकाएं, ताकि बेसन अच्छी तरह पक जाए और स्वाद में कच्चापन न रहे। वहीं पकोड़ों को बहुत ज्यादा सख्त न तलें, ताकि वे कढ़ी में डालने के बाद मुलायम बने रहें।

    करी पत्ता, मेथी दाना और हींग का तड़का कढ़ी की खुशबू और स्वाद को और बेहतर बना देता है। यदि चाहें तो ऊपर से थोड़ा लाल मिर्च पाउडर घी में भूनकर डाल सकते हैं, जिससे डिश का रंग और स्वाद दोनों आकर्षक हो जाते हैं। गर्मागर्म कढ़ी पकोड़ा को जीरा राइस, पापड़, अचार और सलाद के साथ परोसकर परिवार के साथ पारंपरिक भारतीय भोजन का आनंद लिया जा सकता है।