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‘धुरंधर 2’ का बॉक्स ऑफिस धमाका, फिर भी ‘कांतारा’ का रिकॉर्ड बरकरार
नई दिल्ली। बॉक्स ऑफिस पर इन दिनों रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2’ और ऋषभ शेट्टी की ‘कांतारा’ को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है। जहां ‘धुरंधर 2’ ने कमाई के मामले में कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं, वहीं मुनाफे और रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट यानी ROI के मामले में ‘कांतारा’ अब भी सबसे आगे बनी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘कांतारा’ ने ‘धुरंधर 2’ की तुलना में करीब 130 प्रतिशत ज्यादा रिटर्न दिया है, जिसने फिल्म इंडस्ट्री में एक नई बहस छेड़ दी है।ऋषभ शेट्टी की ‘कांतारा’ को बेहद सीमित बजट में तैयार किया गया था, लेकिन रिलीज के बाद फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा धमाका किया कि सभी हैरान रह गए। खासतौर पर हिंदी वर्जन ने अकेले करीब 81 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। कम लागत में बनी इस फिल्म ने लगभग 981 प्रतिशत ROI हासिल किया, जो भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे शानदार रिटर्न में गिना जा रहा है। यही वजह है कि ‘कांतारा’ आज भी कंटेंट और प्रॉफिट दोनों के मामले में मिसाल मानी जाती है।दूसरी तरफ रणवीर सिंह स्टारर ‘धुरंधर 2’ बड़े बजट और हाई-ऑक्टेन एक्शन के साथ सिनेमाघरों में उतरी थी। फिल्म ने दुनियाभर में शानदार प्रदर्शन करते हुए करीब 950 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया। रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म का ROI लगभग 400 प्रतिशत के आसपास रहा। कमाई के लिहाज से यह एक बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई, लेकिन प्रतिशत के हिसाब से ‘कांतारा’ ने इसे काफी पीछे छोड़ दिया।हालांकि, जब दोनों फिल्मों की पूरी फ्रेंचाइजी की तुलना की जाती है, तो मुकाबला थोड़ा दिलचस्प हो जाता है। ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ की कुल कमाई और रिटर्न को मिलाकर देखा जाए तो रणवीर सिंह की फ्रेंचाइजी ने ‘कांतारा’ सीरीज को मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी का कुल ROI करीब 360 प्रतिशत रहा, जबकि ‘कांतारा’ फ्रेंचाइजी लगभग 353 प्रतिशत तक पहुंची।सोशल मीडिया पर भी दोनों फिल्मों को लेकर जबरदस्त बहस देखने को मिल रही है। कई यूजर्स का कहना है कि ‘कांतारा’ ने यह साबित कर दिया कि मजबूत कंटेंट और दमदार कहानी बड़े बजट से ज्यादा असरदार हो सकती है। वहीं रणवीर सिंह के फैंस ‘धुरंधर 2’ को भारत की सबसे बड़ी एक्शन फ्रेंचाइजी बता रहे हैं।फिलहाल बॉक्स ऑफिस की इस जंग में एक बात साफ है कि कम बजट की फिल्में भी सही कंटेंट के दम पर बड़े रिकॉर्ड बना सकती हैं। ‘कांतारा’ और ‘धुरंधर 2’ दोनों ने अपने-अपने अंदाज में दर्शकों का दिल जीता है और भारतीय सिनेमा में नई मिसाल कायम की है। -

Shukrawar Upay: शुक्रवार के ये 5 आसान उपाय बदल सकते हैं किस्मत, मां लक्ष्मी करेंगी धन की वर्षा
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और कुछ विशेष उपाय करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं। अगर लंबे समय से घर में पैसों की कमी या रुकावट बनी हुई है, तो शुक्रवार के ये उपाय बेहद लाभकारी माने जाते हैं।1. मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें
शुक्रवार को सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनकर मां लक्ष्मी की पूजा करें। उन्हें कमल का फूल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। साथ ही सफेद मिठाइयों जैसे खीर, मिश्री, बताशे या मखाने का भोग लगाएं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा भी करने से विशेष फल मिलता है, क्योंकि लक्ष्मी-नारायण की कृपा से धन और स्थिरता दोनों प्राप्त होते हैं।2. सफेद वस्तुओं का दान करें
शुक्रवार के दिन दूध, दही, चीनी, चावल या सफेद वस्त्र का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। जरूरतमंद महिलाओं या कन्याओं को भोजन कराना भी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।3. घर की साफ-सफाई और स्वच्छता रखें
मां लक्ष्मी वहीं वास करती हैं जहां स्वच्छता और सकारात्मक वातावरण होता है। इसलिए शुक्रवार के दिन घर, खासकर मुख्य द्वार और उत्तर-पूर्व दिशा को साफ रखें। साफ कपड़े पहनना और घर में गंदगी न रहने देना भी बेहद जरूरी माना जाता है।4. मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं
शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी का प्रवेश होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। यह उपाय दरिद्रता को खत्म करने में सहायक माना जाता है।5. लक्ष्मी मंत्र का जाप करें
शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के मंत्र “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः” का जाप करना बहुत प्रभावी माना गया है। श्रद्धा के साथ किया गया मंत्र जाप धन, समृद्धि और मानसिक शांति देता है।इन बातों का रखें विशेष ध्यान
शुक्रवार को किसी को उधार पैसा देने से बचना चाहिए
घर की महिलाओं का सम्मान करना बेहद शुभ माना जाता है
पीली कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखना धन वृद्धि का संकेत माना जाता हैशुक्रवार के ये सरल उपाय न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि सकारात्मक सोच और अनुशासन के साथ अपनाने पर जीवन में आर्थिक स्थिरता और समृद्धि भी ला सकते हैं।
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चीन में भ्रष्टाचार पर ‘ड्रैगन’ का बड़ा वार, दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा; रिश्वतखोरी ने छीनी सत्ता और सम्मान
नई दिल्ली। चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को बड़ा झटका लगा है। चीनी सैन्य अदालत ने पूर्व रक्षा मंत्री वेई फेंगहे और ली शांगफू को भ्रष्टाचार के मामले में मौत की सजा सुनाई है। हालांकि दोनों को दो साल की मोहलत भी दी गई है।सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक वेई फेंगहे को रिश्वत लेने का दोषी पाया गया, जबकि ली शांगफू पर रिश्वत लेने और देने दोनों के आरोप साबित हुए। दोनों नेताओं को पहले ही 2024 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित किया जा चुका था।
शी जिनपिंग के करीबी रहे दोनों नेता
रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों पूर्व मंत्री चीन की शक्तिशाली केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य रह चुके हैं। वेई फेंगहे ने 2018 से 2023 तक रक्षा मंत्री के तौर पर काम किया था, जबकि ली शांगफू ने उनके बाद यह जिम्मेदारी संभाली थी। दोनों नेताओं का संबंध चीन की रणनीतिक पीपल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फ़ोर्स से भी रहा है, जिसे राष्ट्रपति जिनपिंग के सैन्य सुधार कार्यक्रम के तहत मजबूत किया गया था।भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई
2012 में सत्ता संभालने के बाद से शी जिनपिंग लगातार भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चला रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान के तहत अब तक लाखों अधिकारियों और कई वरिष्ठ सैन्य अफसरों पर कार्रवाई की जा चुकी है।विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सेना और कम्युनिस्ट पार्टी में बढ़ते भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए यह कार्रवाई एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।
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मई में पार्टनर संग घूमने के लिए बेस्ट रोमांटिक डेस्टिनेशंस, जहां यादगार बन जाएगा हर पल
नई दिल्ली। गर्मियों की शुरुआत होते ही लोग छुट्टियों का प्लान बनाने लगते हैं। खासकर कपल्स ऐसी जगहों की तलाश में रहते हैं जहां सुकून भरा माहौल, खूबसूरत नजारे और रोमांटिक पल एक साथ मिल सकें। अगर आप भी मई के महीने में अपने पार्टनर के साथ किसी खास डेस्टिनेशन पर घूमने का सोच रहे हैं, तो देश की कुछ बेहद खूबसूरत जगहें आपके ट्रिप को यादगार बना सकती हैं। यहां आप प्रकृति के बीच क्वालिटी टाइम बिताने के साथ शानदार तस्वीरें भी कैमरे में कैद कर सकते हैं।केरल का अलेप्पी कपल्स के लिए सबसे पसंदीदा रोमांटिक डेस्टिनेशंस में गिना जाता है। समुद्र, बैकवॉटर और हाउस बोट का अनुभव यहां की सबसे बड़ी खासियत है। शांत पानी के बीच तैरती हाउस बोट में पार्टनर के साथ बिताया गया समय किसी फिल्मी सफर से कम नहीं लगता। नारियल के पेड़ों और ठंडी हवाओं के बीच यहां का माहौल बेहद सुकून देने वाला होता है। यही वजह है कि अलेप्पी को “पूरब का वेनिस” भी कहा जाता है।
अगर आप पहाड़ों और प्रकृति के करीब समय बिताना चाहते हैं, तो उत्तराखंड का चोपता आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। बुरांश के फूलों से ढकी घाटियां और तुंगनाथ मंदिर तक का ट्रेक सफर को खास बना देता है। आसपास मौजूद औली की बर्फीली चोटियां और रोप-वे राइड रोमांच के साथ रोमांस का शानदार अनुभव देती हैं। मई के महीने में यहां का मौसम काफी सुहावना रहता है।हिमाचल प्रदेश का मनाली हमेशा से हनीमून और कपल ट्रिप्स के लिए मशहूर रहा है। मई-जून की गर्मियों में भी यहां हल्की ठंड का एहसास बना रहता है। रोहतांग पास की बर्फ, हरी-भरी वादियां और खूबसूरत कैफे कपल्स को बेहद आकर्षित करते हैं। मनाली के आसपास सोलंग वैली और अटल टनल जैसी जगहें भी घूमने लायक हैं, जहां आप एडवेंचर और रोमांस दोनों का मजा ले सकते हैं।भीड़-भाड़ से दूर शांत माहौल पसंद करने वाले कपल्स के लिए डलहौज़ी एक शानदार विकल्प है। देवदार के जंगल, झरने और ठंडी हवाएं यहां के माहौल को बेहद रोमांटिक बना देती हैं। खज्जियार, पंचपुला और सतधारा जैसी जगहें यहां आने वाले पर्यटकों को खूब पसंद आती हैं। मई में यहां का मौसम बेहद आरामदायक रहता है, जिससे यह कपल्स के लिए परफेक्ट समर डेस्टिनेशन बन जाता है।वहीं जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत यूसमार्ग घाटी भी कपल्स के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। हरे-भरे मैदान, बर्फ से ढकी चोटियां और शांत वातावरण इस जगह को खास बनाते हैं। यहां ट्रेकिंग और हाइकिंग जैसी एक्टिविटीज का मजा भी लिया जा सकता है। मई में यहां का मौसम काफी खुशनुमा रहता है, जो रोमांटिक ट्रिप के लिए बिल्कुल परफेक्ट माना जाता है।अगर आप इस गर्मी अपने पार्टनर के साथ कुछ खास और यादगार पल बिताना चाहते हैं, तो ये डेस्टिनेशंस आपके ट्रैवल प्लान को शानदार बना सकते हैं। -

इंजीनियरिंग युवाओं के लिए बड़ा मौका, DRDO देगा 12,300 रुपये स्टाइपेंड
नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO में नौकरी करने का सपना देख रहे युवाओं के लिए शानदार अवसर सामने आया है। डीआरडीओ की रक्षा जीव अभियांत्रिकी तथा चिकित्सा इलेक्ट्रॉनिकी प्रयोगशाला (DEBEL) ने ग्रेजुएट अप्रेंटिस के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। यह भर्ती एक साल की अवधि के लिए संविदा आधार पर की जाएगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि से पहले ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।जारी अधिसूचना के अनुसार कुल 28 पदों पर भर्ती की जाएगी। इनमें मैकेनिकल इंजीनियरिंग के 7 पद, इलेक्ट्रॉनिक्स/ईसीई/ई एंड आई के 6 पद, कंप्यूटर साइंस और सूचना प्रौद्योगिकी के 3 पद, केमिकल इंजीनियरिंग और रसायन विज्ञान के 4 पद तथा बायो-मेडिकल इंजीनियरिंग के 4 पद शामिल हैं। इसके अलावा टेक्सटाइल इंजीनियरिंग, लाइब्रेरी साइंस, फिजिक्स और अकाउंट्स के लिए भी एक-एक पद निर्धारित किए गए हैं।
इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 23 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है। उम्मीदवार 20 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में BE, BTech, BSc, BLib, BLISc या BCom की डिग्री होना जरूरी है।
भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों का चयन मेरिट के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के जरिए किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को हर महीने 12,300 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाएगा। वहीं चयनित अभ्यर्थियों की संभावित ज्वाइनिंग डेट 1 जुलाई 2026 तय की गई है।
ऑनलाइन आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को राष्ट्रीय शिक्षुता प्रशिक्षण योजना यानी NATS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा। इसके बाद उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। आवेदन फॉर्म भरते समय सभी जरूरी दस्तावेज सही फॉर्मेट और साइज में अपलोड करने होंगे। फाइनल सबमिशन से पहले आवेदन पत्र की जांच जरूर करें और भविष्य के लिए उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।
डीआरडीओ जैसी प्रतिष्ठित संस्था में काम करने का यह मौका युवाओं के लिए करियर की मजबूत शुरुआत साबित हो सकता है। खासकर इंजीनियरिंग और साइंस बैकग्राउंड के उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती काफी अहम मानी जा रही है।
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EPF और EPS में क्या है अंतर? रिटायरमेंट से पहले समझ लें पूरा गणित
नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों की सैलरी स्लिप में हर महीने PF यानी प्रोविडेंट फंड की कटौती जरूर दिखाई देती है, लेकिन ज्यादातर कर्मचारियों को यह नहीं पता होता कि यह पैसा आखिर कहां जमा होता है और रिटायरमेंट के समय इससे कितना फायदा मिलता है। दरअसल, PF केवल एक सेविंग स्कीम नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा और पेंशन का मजबूत आधार है। यही वजह है कि लंबे समय तक नौकरी करने वालों के लिए EPF और EPS दोनों बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और डीए का 12 प्रतिशत हिस्सा हर महीने PF के रूप में काटा जाता है। इतनी ही राशि कंपनी की ओर से भी जमा की जाती है। हालांकि, कंपनी का पूरा 12 प्रतिशत सीधे EPF खाते में नहीं जाता। यही वह हिस्सा है जिसे लेकर अधिकांश कर्मचारियों के मन में भ्रम रहता है।
कर्मचारी के योगदान का पूरा 12 प्रतिशत Employees’ Provident Fund यानी EPF खाते में जमा होता है। वहीं कंपनी के 12 प्रतिशत योगदान में से केवल 3.67 प्रतिशत EPF में जाता है, जबकि 8.33 प्रतिशत हिस्सा Employees’ Pension Scheme यानी EPS में ट्रांसफर कर दिया जाता है। EPS का मकसद कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन उपलब्ध कराना होता है।
अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 25 हजार रुपये है, तो कर्मचारी की ओर से हर महीने 3 हजार रुपये EPF में जमा होंगे। कंपनी भी 3 हजार रुपये देगी, लेकिन इसमें से करीब 1,250 रुपये EPS में चले जाएंगे और बाकी राशि EPF खाते में जुड़ जाएगी। यानी कर्मचारी के EPF अकाउंट में हर महीने कर्मचारी और कंपनी दोनों के हिस्से मिलाकर रकम जमा होती रहती है, जिस पर सालाना ब्याज भी मिलता है।
फिलहाल EPFO कर्मचारियों के EPF बैलेंस पर करीब 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दे रहा है। यही वजह है कि लंबे समय तक लगातार नौकरी करने पर PF का फंड लाखों से बढ़कर करोड़ों तक पहुंच सकता है। कंपाउंडिंग का फायदा इसमें सबसे बड़ा रोल निभाता है।
वहीं EPS में जमा राशि पर ब्याज नहीं मिलता, क्योंकि यह पेंशन स्कीम के तहत संचालित होती है। हालांकि, 10 साल या उससे अधिक नौकरी करने वाले कर्मचारियों को 58 साल की उम्र के बाद मासिक पेंशन का लाभ मिलता है। पेंशन की राशि नौकरी की अवधि और सैलरी के आधार पर तय की जाती है।
आजकल सोशल मीडिया और Reddit जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी लोग EPS को लेकर सवाल पूछते नजर आते हैं। कई कर्मचारियों को लगता है कि उनका EPS बैलेंस दिखाई क्यों नहीं देता। विशेषज्ञों के मुताबिक EPS राशि सीधे पेंशन फंड में मैनेज होती है, इसलिए यह सामान्य EPF बैलेंस की तरह अलग से नहीं दिखती।
कुल मिलाकर, PF केवल सैलरी से होने वाली कटौती नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद आर्थिक मजबूती का बड़ा सहारा है। सही जानकारी और लंबी अवधि तक नियमित निवेश से यही छोटी कटौती भविष्य में बड़ी वित्तीय सुरक्षा में बदल सकती है।
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इंदौर को बड़ी राहत, सरवटे–गंगवाल रोड प्रोजेक्ट फिर शुरू, अब 80 नहीं बल्कि 60 फीट चौड़ी बनेगी सड़क
इंदौर शहर में लंबे समय से अटकी पड़ी एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना अब फिर से शुरू होने जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरवटे से गंगवाल बस स्टैंड के बीच बनने वाली यह सड़क पिछले कई महीनों से विवाद और तकनीकी कारणों के चलते अधूरी पड़ी थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने पर सहमति बन गई है।शुरुआत में इस सड़क को 80 फीट चौड़ा करने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन स्थानीय निवासियों की आपत्तियों और लगातार चल रहे विरोध के बाद इसमें बदलाव किया गया है। अब यह सड़क 60 फीट चौड़ाई के साथ विकसित की जाएगी। इस निर्णय के बाद परियोजना को मंजूरी मिल गई है और निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है।
यह सड़क निर्माण कार्य स्मार्ट सिटी योजना के तहत शुरू किया गया था, लेकिन बीच में फंडिंग और तकनीकी अड़चनों के कारण काम रुक गया। इसके अलावा बाधक निर्माणों को हटाने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई थी, जिससे परियोजना लंबे समय तक अधर में लटकी रही।
स्थानीय स्तर पर इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए गए और बजट की व्यवस्था भी की गई, लेकिन निर्माण कार्य फिर भी शुरू नहीं हो सका। अब नए वर्क ऑर्डर और संशोधित चौड़ाई के साथ इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
चौड़ाई कम करने के फैसले के बाद स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच सहमति बन गई है, जिससे अब विवाद की स्थिति समाप्त हो गई है। माना जा रहा है कि इस सड़क के बनने से क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और रोजमर्रा की आवाजाही आसान हो जाएगी।
यह परियोजना पूरी होने के बाद सरवटे से गंगवाल बस स्टैंड के बीच का इलाका अधिक व्यवस्थित और सुगम बन सकेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सालभर से रुकी यह योजना कितनी तेजी से पूरी होती है और लोगों को इसका वास्तविक लाभ कब तक मिलता है।
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डेटा सुरक्षा और एआई विस्तार पर बड़ा कदम, भारत में तैयार होगा आईबीएम-योट्टा का नया क्लाउड प्लेटफॉर्म
नई दिल्ली।
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ा कदम सामने आया है, जहां आईबीएम और योट्टा डेटा सर्विसेज ने मिलकर एक नए एजेंटिक एआई प्लेटफॉर्म को विकसित करने की योजना बनाई है। यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह भारत स्थित क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित होगा और इसका उद्देश्य देश की कंपनियों और सरकारी संस्थानों को सुरक्षित, नियंत्रित और आधुनिक एआई समाधान उपलब्ध कराना है।इस पहल के तहत आईबीएम की उन्नत एआई तकनीक को योट्टा के स्वदेशी क्लाउड सिस्टम के साथ जोड़ा जाएगा। इससे एक ऐसा डिजिटल ढांचा तैयार होगा जो डेटा सुरक्षा, नियामकीय अनुपालन और स्थानीय डेटा स्टोरेज की जरूरतों को पूरा करेगा। इस प्लेटफॉर्म के जरिए संगठन अपने विभिन्न विभागों जैसे आईटी सेवाएं, मानव संसाधन, वित्त, खरीद और ग्राहक सेवा में एआई आधारित एजेंट्स का उपयोग कर सकेंगे।
कंपनियों में अब एआई को केवल प्रयोग के स्तर से आगे बढ़ाकर वास्तविक संचालन में शामिल करने की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है, जिससे कारोबारी प्रक्रियाएं अधिक तेज, सुरक्षित और व्यवस्थित हो सकें। इसके साथ ही यह प्रणाली कंपनियों को यह सुविधा भी देगी कि वे एआई का उपयोग अपने नियंत्रण और अनुपालन मानकों के अनुसार कर सकें।
इस परियोजना के तहत आईबीएम का सॉवरेन कोर सिस्टम भी योट्टा के क्लाउड प्लेटफॉर्म पर होस्ट किया जाएगा, जिससे एक मजबूत और स्वदेशी डिजिटल वातावरण तैयार होगा। यह व्यवस्था कंपनियों को डेटा सुरक्षा, ऑडिट ट्रैकिंग और नियंत्रित एआई संचालन जैसी सुविधाएं प्रदान करेगी, जिससे नियामकीय आवश्यकताओं का पालन आसान हो जाएगा।
इस साझेदारी का एक प्रमुख उद्देश्य भारतीय कंपनियों को आत्मनिर्भर एआई इकोसिस्टम प्रदान करना है, जहां वे बिना किसी बाहरी निर्भरता के अपने डेटा और तकनीकी प्रक्रियाओं को नियंत्रित कर सकें। योट्टा का क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और आईबीएम की एआई क्षमताएं मिलकर एक ऐसा समाधान तैयार करेंगी, जो बड़े पैमाने पर एआई अपनाने को सरल और सुरक्षित बनाएगा।
कुल मिलाकर यह पहल भारत में एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर संकेत करती है, जो आने वाले समय में डिजिटल इनोवेशन को नई दिशा दे सकती है।
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ममता बनर्जी से मुलाकात में अखिलेश यादव का बड़ा बयान, बोले-दीदी आप हारी नहीं हैं, आपको हराया गया है
नई दिल्ली।
पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी की हार के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। इसी बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव कोलकाता पहुंचे, जहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी से मुलाकात की। यह मुलाकात राजनीतिक तौर पर काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसे विपक्षी एकजुटता को फिर से मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।मुलाकात के दौरान माहौल काफी भावनात्मक और सौहार्दपूर्ण बताया गया। सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि यह चुनावी परिणाम उनकी हार नहीं है, बल्कि उन्हें हराया गया है। उनके इस बयान को विपक्षी राजनीति में एक बड़े समर्थन संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। इसी मुलाकात में अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी के बीच भी गर्मजोशी देखने को मिली, जहां दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया।
बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान तीनों नेताओं के बीच चुनावी स्थिति, राजनीतिक हालात और आगे की रणनीति को लेकर चर्चा हुई। ममता बनर्जी ने हाल के चुनाव परिणामों और राज्य की राजनीतिक स्थिति को लेकर अपनी बात रखी, वहीं अखिलेश यादव ने टीएमसी के संघर्ष और चुनावी लड़ाई की सराहना की।
इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब भी चुनाव निष्पक्ष होते हैं, तब ममता बनर्जी को जनता का समर्थन मिलता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई तरह की अनियमितताओं की बातें सामने आई हैं, जिसने परिणामों को प्रभावित किया है। उनके अनुसार, विपक्षी दलों को एकजुट होकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करनी होगी।
सूत्रों के अनुसार, यह भी चर्चा हुई कि चुनाव के बाद की स्थिति और राजनीतिक दबावों को लेकर कानूनी और संगठनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। अभिषेक बनर्जी ने भी बैठक में पार्टी कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने और जनता के बीच सक्रिय रहने की सलाह दी।
इस पूरी राजनीतिक हलचल के बीच यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हाल के समय में विपक्षी दलों के बीच संपर्क और संवाद बढ़ा है। इससे पहले भी कई विपक्षी नेता ममता बनर्जी से संपर्क कर चुके हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि चुनावी हार के बाद भी राजनीतिक समीकरणों को फिर से साधने की कोशिशें जारी हैं।
कोलकाता में हुई यह मुलाकात केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि इसे आने वाले समय में विपक्षी राजनीति की दिशा तय करने वाले एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है।
