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  • अमेरिका-कनाडा व्यापार वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा तनाव, पीएम मार्क कार्नी ने अमेरिकी शुल्क का जवाब देने का ऐलान किया

    अमेरिका-कनाडा व्यापार वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा तनाव, पीएम मार्क कार्नी ने अमेरिकी शुल्क का जवाब देने का ऐलान किया


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। दोनों देशों के बीच नई व्यापारिक डील को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे व्यापारिक विवाद को और गहरा करने वाला माना जा रहा है।

    अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह शुल्क कनाडा के कुछ उत्पादों पर लगाया गया है और इसका उद्देश्य अमेरिकी व्यापारिक हितों के खिलाफ माने जा रहे कनाडाई कदमों का जवाब देना है। अमेरिका ने कनाडा पर अमेरिकी उत्पादों के साथ भेदभावपूर्ण व्यापारिक व्यवहार का आरोप लगाया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि कनाडा ने बातचीत के दौरान तय शर्तों के आधार पर समझौते को अंतिम रूप देने से इनकार कर दिया।

    टैरिफ लागू करने का फैसला अचानक नहीं हुआ। दोनों देशों के बीच कई सप्ताह से व्यापार समझौते को लेकर गहन बातचीत चल रही थी। अगस्त के मध्य में दोनों पक्षों के बीच प्रगति के संकेत मिले थे और अमेरिका ने नई टैरिफ व्यवस्था लागू करने की समयसीमा भी कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ाई थी। इसके बावजूद अंतिम चरण में दोनों सरकारें किसी साझा समझौते तक नहीं पहुंच सकीं।

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी कदम पर कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि बातचीत के दौरान कुछ महत्वपूर्ण प्रगति जरूर हुई थी, लेकिन अंतिम समय में अमेरिका की ओर से ऐसी शर्तें और बदलाव सामने आए जिन्हें कनाडा अपने हितों के अनुरूप नहीं मान सकता था। इसके बाद कनाडा ने व्यापार वार्ता को रोकने का फैसला किया है।

    कार्नी ने स्पष्ट किया है कि कनाडा अमेरिकी टैरिफ का जवाब डॉलर के बदले डॉलर के आधार पर देगा। इसका अर्थ है कि कनाडा अमेरिकी उत्पादों पर भी समान आर्थिक प्रभाव वाला शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है। कनाडाई सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य अपने श्रमिकों, किसानों और कारोबारियों के हितों की रक्षा करना है।

    अमेरिकी कदम से प्रभावित होने वाले सामान कनाडा के कुल अमेरिकी निर्यात का एक सीमित हिस्सा हैं। फिर भी इसका राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव व्यापक हो सकता है, क्योंकि अमेरिका और कनाडा लंबे समय से एक-दूसरे के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार रहे हैं। दोनों देशों के बीच हर वर्ष बड़े पैमाने पर वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार होता है।

    नए टैरिफ से हॉकी उपकरण, कुछ औद्योगिक उत्पाद, डेयरी और अन्य निर्धारित श्रेणियों के सामान प्रभावित हो सकते हैं। इससे कारोबारियों की लागत बढ़ने और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव आने की आशंका है। यदि कनाडा भी जवाबी शुल्क लागू करता है तो दोनों देशों के उत्पादों की कीमतों और व्यापारिक गतिविधियों पर अतिरिक्त असर पड़ सकता है।

    यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है जब दोनों देश उत्तर अमेरिकी व्यापार व्यवस्था को लेकर भविष्य की दिशा तय करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के बीच मौजूदा व्यापार समझौते की समीक्षा भी आगे महत्वपूर्ण विषय बनने वाली है। ऐसे में मौजूदा टैरिफ विवाद आने वाली व्यापार वार्ताओं को और जटिल कर सकता है।

    अमेरिका और कनाडा के बीच रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश सुरक्षा, रक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के मामलों में भी लंबे समय से साझेदार रहे हैं। इसलिए व्यापारिक टकराव का असर व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल दोनों पक्षों के रुख से साफ है कि तत्काल समझौते के बजाय आर्थिक दबाव और जवाबी कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।

  • जयंत चौधरी पर टिप्पणी से बढ़ा यूपी सियासी विवाद, अखिलेश यादव के खिलाफ केशव मौर्य और मायावती हुए मुखर

    जयंत चौधरी पर टिप्पणी से बढ़ा यूपी सियासी विवाद, अखिलेश यादव के खिलाफ केशव मौर्य और मायावती हुए मुखर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की एक टिप्पणी को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर की गई ‘चवन्नी से रुपया’ वाली टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव से जयंत चौधरी से माफी मांगने की मांग की है। वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने भी इस बयान को जाट समाज से जोड़ते हुए सपा प्रमुख पर निशाना साधा है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि जयंत चौधरी के खिलाफ की गई टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने सपा प्रमुख से अपने बयान के लिए माफी मांगने को कहा। मौर्य ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव राजनीतिक परेशानी के कारण अगड़े, पिछड़े और दलित समाज को लेकर भी ऐसी टिप्पणियां कर रहे हैं, जिन्हें उचित नहीं माना जा सकता।

    मौर्य ने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह ने सैफई परिवार के लिए काफी कुछ किया था और परिवार पर उनका बड़ा एहसान रहा है। मौर्य के मुताबिक, ऐसे राजनीतिक और पारिवारिक संबंधों की पृष्ठभूमि में जयंत चौधरी को लेकर की गई टिप्पणी पर अखिलेश यादव को विचार करना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए।

    उपमुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की आगामी विधानसभा राजनीति का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता समाजवादी पार्टी को सत्ता से दूर रखेगी। मौर्य ने कहा कि भाजपा के साथ अगड़े, पिछड़े और दलित समाज के लोग खड़े हैं। उनके इस बयान को आगामी चुनाव के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इसी विवाद के बीच बसपा प्रमुख मायावती ने भी अखिलेश यादव की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। मायावती ने कहा कि ‘चवन्नी से रुपया’ बनाने वाली टिप्पणी जाट समाज को पसंद नहीं आई है। उन्होंने अखिलेश यादव पर राजनीतिक अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा प्रमुख को अपने बयान के लिए जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए।

    जयंत चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभाव रखने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और उनका राजनीतिक आधार मुख्य रूप से जाट समुदाय से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में उनके खिलाफ किसी टिप्पणी को लेकर सामाजिक प्रतिक्रिया का मुद्दा बनना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही वजह है कि भाजपा और बसपा दोनों ने अखिलेश यादव के बयान को लेकर उन्हें घेरने का प्रयास किया है।

    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार तेज हो रहे हैं। विभिन्न दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे समय में नेताओं के बयानों पर होने वाली राजनीतिक प्रतिक्रिया चुनावी माहौल को प्रभावित करने वाले मुद्दों का रूप ले सकती है।

    फिलहाल विवाद का केंद्र अखिलेश यादव की जयंत चौधरी को लेकर की गई टिप्पणी है। केशव मौर्य और मायावती दोनों ने अलग-अलग तरीके से इस बयान की आलोचना करते हुए माफी की मांग की है। अब राजनीतिक चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि अखिलेश यादव इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या उनकी ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने आता है।

  • बड़वानी से भोपाल तक IAS काजल जावला का सफर, 29 महीने के कार्यकाल में छोड़ी खास छाप; अब नई जिम्मेदारी के साथ नई पारी

    बड़वानी से भोपाल तक IAS काजल जावला का सफर, 29 महीने के कार्यकाल में छोड़ी खास छाप; अब नई जिम्मेदारी के साथ नई पारी


    बड़वानी। मध्यप्रदेश में हुए प्रशासनिक फेरबदल के बीच जिला पंचायत बड़वानी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी IAS काजल जावला का तबादला कर दिया गया है। करीब 29 महीने तक बड़वानी में जिम्मेदारी संभालने के बाद अब उन्हें अपर मिशन संचालक राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। बड़वानी में उनका कार्यकाल योजनाओं के क्रियान्वयन से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर बदलाव और कई उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए जाना जाएगा। जल संरक्षण पंचायत विकास शिक्षा महिला आजीविका और ग्रामीण योजनाओं की लगातार निगरानी ने उनके कार्यकाल को अलग पहचान दी।
    काजल जावला की कार्यशैली में मैदानी स्तर पर योजनाओं की स्थिति की समीक्षा और अधिकारियों कर्मचारियों के साथ लगातार समन्वय प्रमुख रहा। उन्होंने सरकारी योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय उनके वास्तविक क्रियान्वयन पर जोर दिया। इसी का असर कई योजनाओं के प्रदर्शन में दिखाई दिया। जल संरक्षण के क्षेत्र में बड़वानी ने उनके कार्यकाल के दौरान प्रदेश स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की। जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 में जिला प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में 5666 जल संरक्षण कार्य पूरे किए गए। इनमें खेत तालाब कंटूर ट्रेंच डगवेल रिचार्ज और सामुदायिक तालाब जैसे काम शामिल रहे।

    जल संचय जन भागीदारी अभियान 2.0 में भी जिले ने उल्लेखनीय काम किया। जनसहयोग से 30155 कंटूर गड्ढे बनाए गए जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 41957 जल संरक्षण कार्य पूरे किए गए। इस अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरचनाओं को मजबूत करने के साथ जल संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को भी बढ़ावा दिया।

    महिलाओं की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने वाले एक बगिया मां के नाम अभियान में भी बड़वानी प्रदेश में तीसरे स्थान पर रहा। जिले में 732 बगिया स्वीकृत हुईं। कानपुरी बोरलाय और मतराला ग्राम पंचायतों को बेहतर प्रदर्शन के कारण प्रदेश की टॉप 10 पंचायतों में स्थान मिला। पंचायत स्तर की उपलब्धियों में भी जिले का प्रदर्शन मजबूत रहा। पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स में मलफा और मोरतलाई ग्राम पंचायतों ने प्रदेश में क्रमशः पहला और दूसरा स्थान हासिल किया।

    आदि कर्मयोगी अभियान के तहत जिले के 529 गांव चयनित हुए और सभी गांवों के विलेज एक्शन प्लान तैयार करने में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बड़वानी प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा। इस उपलब्धि पर जिले को राष्ट्रपति स्तर पर सम्मान भी मिला। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के क्रियान्वयन में भी बड़वानी लगातार दूसरे स्थान पर रहा।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी काजल जावला के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण काम हुए। कायाकल्प अभियान के तहत करीब 600 सरकारी स्कूलों का कायाकल्प किया गया। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिली। प्रधानमंत्री पोषण अभियान और मध्यान्ह भोजन योजना की निगरानी से खाद्यान्न उठाव और एसएमएस मॉनिटरिंग का प्रदर्शन 44 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंचा और लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही। जनसहयोग से पांच स्कूलों में सरस्वती प्रसादम अभियान भी संचालित हुआ जिसमें बच्चों को भोजन के अलावा फल दही मिठाई और शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई गई।

    किसानों और महिलाओं की आय बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड कार्यक्रम के तहत चार सब्जी क्लस्टर विकसित किए गए जिससे करीब 450 किसान सब्जी उत्पादन से जुड़े। मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 10 तालाबों का निर्माण कराया गया। पाटी विकासखंड में स्वयं सहायता समूहों को रिवॉल्विंग फंड उपलब्ध कराने और आजीविका कैफे तथा कियोस्क के जरिए महिला समूहों की आय बढ़ाने के प्रयास भी किए गए।

    जनता की शिकायतों के निराकरण में भी बड़वानी का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा। सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए लगातार मॉनिटरिंग की गई और जिला टॉप तीन में बना रहा। अब करीब 29 महीने बाद काजल जावला बड़वानी से विदा हो रही हैं। उनके तबादले के साथ जिम्मेदारी जरूर बदली है लेकिन जल संरक्षण पंचायत विकास शिक्षा और महिला आजीविका के क्षेत्र में किए गए काम उनके कार्यकाल की पहचान बने रहेंगे। अब भोपाल में नई जिम्मेदारी के साथ उनके प्रशासनिक अनुभव का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।

  • कांवड़ यात्रा के चलते भोपाल-इंदौर मार्ग पर बड़ा ट्रैफिक बदलाव, 23 अगस्त से भारी वाहनों की एंट्री पर रोक; जानें पूरा डायवर्जन

    कांवड़ यात्रा के चलते भोपाल-इंदौर मार्ग पर बड़ा ट्रैफिक बदलाव, 23 अगस्त से भारी वाहनों की एंट्री पर रोक; जानें पूरा डायवर्जन


    भोपाल। पंडित प्रदीप मिश्रा की कांवड़ यात्रा को देखते हुए भोपाल और इंदौर के बीच यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए 23 अगस्त की सुबह से 25 अगस्त की शाम तक मुख्य मार्ग पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेगा। इस दौरान भोपाल से इंदौर और इंदौर से भोपाल के बीच सफर करने वाले वाहन चालकों को निर्धारित वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करना होगा। ऐसे में अगले तीन दिनों तक इस रूट पर यात्रा करने वाले लोगों के लिए पहले से अपनी यात्रा की योजना बनाना जरूरी होगा।

    कांवड़ यात्रा सीहोर क्षेत्र से होकर गुजरेगी। यात्रा के चलते भोपाल-इंदौर हाईवे पर सामान्य यातायात और भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित रहेगी। प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से निकालने की व्यवस्था की है। इसके तहत भोपाल से इंदौर जाने वाले सभी वाहनों को ब्यावरा होकर भेजा जाएगा। इसी तरह इंदौर से भोपाल की ओर आने वाले वाहनों को भी भोपाल-ब्यावरा-इंदौर मार्ग के जरिए आवागमन करना होगा। इस बदलाव के कारण वाहन चालकों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी।

    यातायात डायवर्जन 23 अगस्त की सुबह से प्रभावी होगा और 25 अगस्त की शाम तक लागू रहेगा। इस दौरान भोपाल-इंदौर के बीच नियमित रूप से सफर करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। खासकर उन लोगों को अतिरिक्त समय लेकर निकलना चाहिए जिन्हें तय समय पर भोपाल या इंदौर पहुंचना जरूरी है। ब्यावरा होकर वैकल्पिक मार्ग अपनाने के कारण यात्रा की दूरी बढ़ेगी और सामान्य समय की तुलना में करीब डेढ़ से दो घंटे अतिरिक्त लग सकते हैं। ऐसे में यात्रियों को अपने सफर का समय उसी हिसाब से तय करने की सलाह दी गई है।

    कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के कारण मुख्य मार्ग पर यातायात का दबाव भी बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए वाहन चालकों से अपील की गई है कि वे यात्रा मार्ग पर अनावश्यक रूप से वाहन न रोकें और यातायात व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें। विशेष रूप से भारी वाहनों के चालकों को डायवर्जन व्यवस्था का पालन करना होगा ताकि यात्रा मार्ग पर किसी तरह की अव्यवस्था या जाम की स्थिति पैदा न हो।

    यात्रियों के लिए सीहोर और देवास क्षेत्र के प्रमुख मार्गों पर भी अतिरिक्त सतर्कता जरूरी होगी। यदि संभव हो तो इन क्षेत्रों के व्यस्त मार्गों पर जाने से बचने और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। स्थानीय प्रशासन की ओर से समय समय पर जारी होने वाली यातायात एडवाइजरी पर भी नजर रखना जरूरी होगा। कुल मिलाकर 23 से 25 अगस्त तक भोपाल-इंदौर के बीच यात्रा करने वालों को सामान्य रूट के बजाय ब्यावरा होकर सफर करना होगा। ऐसे में वाहन चालक घर से निकलने से पहले रूट की जानकारी लें और अतिरिक्त समय के साथ यात्रा शुरू करें ताकि कांवड़ यात्रा के कारण होने वाले ट्रैफिक बदलाव का असर उनकी यात्रा पर कम से कम पड़े।

  • भाजपा युवा मोर्चा में संगठन विस्तार की रफ्तार तेज, 12 जिलाध्यक्षों का ऐलान; अभी भी कई जिलों में नियुक्तियां बाकी

    भाजपा युवा मोर्चा में संगठन विस्तार की रफ्तार तेज, 12 जिलाध्यक्षों का ऐलान; अभी भी कई जिलों में नियुक्तियां बाकी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में भाजपा युवा मोर्चा के संगठनात्मक विस्तार की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। पार्टी ने युवा मोर्चा के 12 और जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही अब तक प्रदेश के 27 जिलों में युवा मोर्चा के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति हो चुकी है। हालांकि प्रदेश के बाकी जिलों में अभी नियुक्तियों का इंतजार बना हुआ है। नई नियुक्तियों के साथ संगठन ने कई जिलों में युवा नेतृत्व को जिम्मेदारी सौंपते हुए जिला स्तर पर अपनी टीम को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। खास बात यह है कि नई सूची में 9 जिलों के जिला महामंत्रियों के नाम भी घोषित किए गए हैं।

    भाजपा युवा मोर्चा की ओर से जारी नई नियुक्तियों में भोपाल ग्रामीण ग्वालियर ग्रामीण मऊगंज सतना कटनी पांढुर्णा धार ग्रामीण बुरहानपुर देवास विदिशा उज्जैन ग्रामीण और शाजापुर शामिल हैं। इससे पहले जुलाई में 15 जिलाध्यक्षों की घोषणा की गई थी। इस तरह करीब एक महीने के अंतराल में पार्टी ने 12 और जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ति की है। लगातार हो रही इन नियुक्तियों को संगठन में नई टीम को सक्रिय करने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

    भोपाल ग्रामीण में वीरेंद्र सिंह राजपूत को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी पत्नी रूमा राजपूत भोपाल शहर के वार्ड 85 की पार्षद हैं। वहीं ग्वालियर ग्रामीण में शिवराज यादव को जिलाध्यक्ष और मनोज गुर्जर को जिला महामंत्री बनाया गया है। मऊगंज में प्रवीण सिंह को जिलाध्यक्ष तथा विवेक तिवारी को महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। सतना में यश यादव जिलाध्यक्ष और शुभम परिहार महामंत्री बनाए गए हैं।

    कटनी में पारस जैन को जिलाध्यक्ष और देवांश श्रीवास्तव को जिला महामंत्री नियुक्त किया गया है। पांढुर्णा में विवेक रामचाकले को जिलाध्यक्ष तथा पंकज बंजारी को महामंत्री बनाया गया है। धार ग्रामीण में उज्ज्वल सोलंकी को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बुरहानपुर में भरत रावल जिलाध्यक्ष और अमित वास्कले जिला महामंत्री बने हैं।

    इसी तरह देवास में रजत पाल सिंह को जिलाध्यक्ष तथा मोहित जाट को जिला महामंत्री बनाया गया है। विदिशा में अनुज मित्तल को जिलाध्यक्ष और शिवेन्द्र सिंह राजपूत को महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। उज्जैन ग्रामीण में हरजीत सिंह जिलाध्यक्ष और राहुल धाकड़ जिला महामंत्री बनाए गए हैं। शाजापुर में हर्षवर्धन मंडलोई को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    नई नियुक्तियों के बाद युवा मोर्चा के संगठनात्मक ढांचे को लेकर गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है। जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी केवल संगठन विस्तार तक सीमित नहीं होगी बल्कि युवाओं को पार्टी से जोड़ने संगठनात्मक कार्यक्रमों को गति देने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। हालांकि अभी भी कई जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में भाजपा की ओर से शेष जिलों को लेकर भी फैसले सामने आने की संभावना है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी बाकी जिलों में किन नए चेहरों पर भरोसा जताती है और युवा मोर्चा की पूरी टीम कब तक आकार लेती है।

  • कर्नाटक सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगाई, अब तय मानकों वाला दूध से बना पनीर ही बिकेगा

    कर्नाटक सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगाई, अब तय मानकों वाला दूध से बना पनीर ही बिकेगा

    नई दिल्ली । कर्नाटक सरकार ने पनीर की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए एनालॉग पनीर की बिक्री पर बड़ा फैसला लिया है। राज्य में दूध से तैयार नहीं होने वाले ऐसे पनीर उत्पादों की बिक्री, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगा दी गई है। यह आदेश 17 अगस्त 2026 से प्रभावी हो चुका है। अब कर्नाटक में पनीर के नाम से वही उत्पाद बेचा जा सकेगा, जो निर्धारित खाद्य मानकों के अनुसार दूध से तैयार किया गया हो।

    सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब बाजार में पारंपरिक डेयरी पनीर के अलावा कई तरह के नॉन-डेयरी और एनालॉग उत्पाद भी उपलब्ध हैं। अधिकारियों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं को सही जानकारी के साथ उत्पाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। जांच के दौरान लिए गए कुछ नमूनों में मिलावट नहीं पाए जाने के बावजूद नॉन-डेयरी पनीर के स्वरूप और उसकी बिक्री को लेकर नियामकीय स्तर पर यह कार्रवाई की गई है।

    एनालॉग पनीर और सामान्य पनीर में मुख्य अंतर उनके इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का है। पारंपरिक पनीर मुख्य रूप से दूध से तैयार किया जाता है, जिसमें दूध के प्रोटीन और वसा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दूसरी ओर, एनालॉग पनीर बनाने में दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति तेल, वनस्पति वसा और अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पादों को पनीर के नाम से बाजार में बेचे जाने पर अब कर्नाटक में रोक रहेगी।

    नए नियम के तहत खाद्य कारोबारियों, दुकानदारों और अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों को ऐसे एनालॉग पनीर को बेचने के साथ-साथ उसका भंडारण, वितरण, आपूर्ति या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा, जो गैर-डेयरी सामग्री से तैयार पनीर जैसे उत्पादों को सामान्य पनीर के तौर पर बाजार में उपलब्ध कराते हैं।

    हालांकि, सरकार की ओर से लगाई गई यह रोक हर तरह के नॉन-डेयरी खाद्य उत्पाद पर लागू नहीं होगी। जिन उत्पादों के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई की ओर से पहले से अलग खाद्य मानक निर्धारित हैं, वे इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रहेंगे। इनमें फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन वस्तुओं को उनके निर्धारित मानकों और लेबलिंग नियमों के तहत बेचा जा सकेगा।

    इस फैसले के बाद कर्नाटक में खाद्य कारोबारियों के लिए उत्पाद की सही पहचान और लेबलिंग का महत्व और बढ़ गया है। पनीर के नाम पर ऐसे उत्पादों की बिक्री नहीं की जा सकेगी, जो निर्धारित दूध आधारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। सरकार का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर स्पष्टता बढ़ाना और उपभोक्ताओं को वास्तविक उत्पाद की जानकारी उपलब्ध कराना है।

    राज्य में यह प्रतिबंध फिलहाल एक वर्ष के लिए लागू किया गया है। इस दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी और जांच के जरिए नियमों के पालन पर नजर रखी जाएगी। कर्नाटक का यह कदम ऐसे उत्पादों को लेकर बढ़ती नियामकीय सख्ती का संकेत माना जा रहा है, जिनके नाम और स्वरूप को लेकर उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

  • विदेश यात्रा में पेपरलेस होगी इमिग्रेशन प्रक्रिया, सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ई-बोर्डिंग पास से आसान होगा यात्रियों का सफर

    विदेश यात्रा में पेपरलेस होगी इमिग्रेशन प्रक्रिया, सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ई-बोर्डिंग पास से आसान होगा यात्रियों का सफर

    नई दिल्ली । विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए 1 सितंबर 2026 से इमिग्रेशन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर इमिग्रेशन क्लियरेंस के लिए कागज पर प्रिंट किए गए बोर्डिंग पास को अनिवार्य नहीं रखा जाएगा। यात्री अपने मोबाइल फोन में उपलब्ध ई-बोर्डिंग पास दिखाकर निर्धारित इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे नियमित रूप से विदेश यात्रा करने वाले लोगों को दस्तावेज संभालने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    नई व्यवस्था देश के सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर लागू की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों और एयरपोर्ट ऑपरेटरों को आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों को भी डिजिटल बोर्डिंग पास के आधार पर यात्रियों की प्रक्रिया संचालित करने के लिए तैयार किया जा रहा है। व्यवस्था लागू होने के बाद इमिग्रेशन काउंटर पर यात्रियों को अपने मोबाइल में मौजूद वैध ई-बोर्डिंग पास प्रस्तुत करने की सुविधा मिलेगी।

    अब तक कई अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को बोर्डिंग पास की प्रिंटेड कॉपी अपने साथ रखनी पड़ती थी। यात्रा के दौरान इस कागजी दस्तावेज की जरूरत अलग-अलग चरणों में पड़ सकती थी। नई व्यवस्था के बाद यात्रियों के लिए मोबाइल में बोर्डिंग पास रखना पर्याप्त होगा। इससे प्रिंट निकालने और उसे सुरक्षित रखने की अतिरिक्त जरूरत कम होगी।

    ई-बोर्डिंग पास के इस्तेमाल से इमिग्रेशन प्रक्रिया के दौरान कागज पर मुहर लगाने की व्यवस्था भी समाप्त हो जाएगी। यानी डिजिटल बोर्डिंग पास दिखाकर प्रक्रिया पूरी करने वाले यात्रियों को अपने पास पर इमिग्रेशन की स्टांप लगवाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह बदलाव हवाई यात्रा को अधिक डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

    हालांकि, जिन यात्रियों के पास पहले से प्रिंट किया हुआ बोर्डिंग पास मौजूद है, उनके लिए भी यात्रा की सुविधा बनी रहेगी। उन्हें कागजी बोर्डिंग पास रखने के कारण रोका नहीं जाएगा। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे भौतिक बोर्डिंग पास पर इमिग्रेशन की मुहर नहीं लगाई जाएगी। यात्रियों के लिए डिजिटल माध्यम को सुविधाजनक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा।

    इस बदलाव को लागू करने की जिम्मेदारी से जुड़े विभागों और एयरपोर्ट संचालकों के बीच तैयारी शुरू कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर डिजिटल प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को अपडेट किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यात्रियों की आवाजाही के दौरान अनावश्यक कागजी प्रक्रिया को कम करना और इमिग्रेशन क्लियरेंस को डिजिटल माध्यम से अधिक सुविधाजनक बनाना है।

    यात्रियों के लिए यह जरूरी होगा कि वे अपने मोबाइल फोन में वैध ई-बोर्डिंग पास आसानी से उपलब्ध रखें। विदेश यात्रा से पहले बोर्डिंग पास डाउनलोड करने और फोन की बैटरी पर्याप्त रखने जैसी सामान्य सावधानियां उपयोगी रहेंगी। साथ ही यात्रियों को एयरलाइन की ओर से मिलने वाले यात्रा संबंधी निर्देशों का पालन करना होगा।

    नई व्यवस्था का सीधा लाभ उन यात्रियों को मिल सकता है जो लगातार अंतरराष्ट्रीय यात्राएं करते हैं और हर यात्रा में दस्तावेजों की प्रिंटेड प्रतियां संभालते हैं। मोबाइल आधारित बोर्डिंग पास के इस्तेमाल से यात्रा प्रक्रिया में कागज पर निर्भरता घटेगी। 1 सितंबर से लागू होने वाला यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में डिजिटल सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

  • US Open 2026 से दुनिया के नंबर एक जैनिक सिनर बाहर, घुटने की चोट के कारण नहीं खेल पाएंगे साल का आखिरी ग्रैंड स्लैम

    US Open 2026 से दुनिया के नंबर एक जैनिक सिनर बाहर, घुटने की चोट के कारण नहीं खेल पाएंगे साल का आखिरी ग्रैंड स्लैम

    नई दिल्ली ।साल के आखिरी ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन 2026 से पहले पुरुष टेनिस जगत को बड़ा झटका लगा है। दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी जैनिक सिनर ने दाएं घुटने की चोट के कारण टूर्नामेंट से अपना नाम वापस ले लिया है। 25 वर्षीय इटैलियन स्टार ने बताया कि वह 30 अगस्त से शुरू होने वाले मुख्य ड्रॉ तक पूरी तरह फिट नहीं हो पाएंगे।

    सिनर पिछले कुछ समय से चोट से उबरने पर ध्यान दे रहे थे। उन्होंने अपनी टीम और मेडिकल स्टाफ के साथ लगातार रिकवरी की कोशिश की और मोंटे कार्लो में अभ्यास के लिए कोर्ट पर भी वापसी की। हालांकि, अभ्यास के बाद उन्हें महसूस हुआ कि घुटने को पूरी तरह ठीक होने के लिए अभी और समय की जरूरत है।

    यूएस ओपन से हटने का फैसला सिनर के लिए आसान नहीं था। न्यूयॉर्क का यह ग्रैंड स्लैम उनके करियर में खास महत्व रखता है और यहां प्रशंसकों के सामने खेलने को लेकर वह उत्साहित थे। चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर होना उनके लिए निराशाजनक है, लेकिन उन्होंने फिटनेस को प्राथमिकता देने का फैसला किया।

    सिनर ने जुलाई में विंबलडन का खिताब अपने नाम किया था। फाइनल मुकाबले में उन्होंने अलेक्जेंडर ज्वेरेव को हराकर लगातार दूसरी बार ऑल इंग्लैंड क्लब की ट्रॉफी जीती। इस जीत के साथ उनके करियर के ग्रैंड स्लैम खिताबों की संख्या पांच हो गई। विंबलडन के बाद से वह किसी प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट में नहीं उतरे हैं।

    घुटने की समस्या के कारण सिनर ने मॉन्ट्रियल और सिनसिनाटी में आयोजित हार्ड कोर्ट प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा नहीं लिया। यूएस ओपन से पहले इन टूर्नामेंटों को खिलाड़ियों के लिए तैयारी का अहम हिस्सा माना जाता है। लगातार मुकाबलों से दूर रहने के बाद सिनर की फिटनेस को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी, लेकिन अब उन्होंने न्यूयॉर्क में नहीं खेलने का निर्णय ले लिया है।

    2026 का सत्र सिनर के लिए शानदार रहा है। उन्होंने मियामी, मोंटे कार्लो, मैड्रिड और रोम सहित कई महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों में खिताब जीते। फ्रेंच ओपन में उन्हें दूसरे दौर में जुआन मैनुअल सेरुंडोलो के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने वापसी करते हुए विंबलडन में शानदार प्रदर्शन किया और चैंपियन बने।

    सिनर के हटने से यूएस ओपन के खिताबी समीकरण में बड़ा बदलाव आया है। कार्लोस अल्कारेज, नोवाक जोकोविच और अलेक्जेंडर ज्वेरेव जैसे शीर्ष खिलाड़ियों के लिए अब खिताब की दौड़ में आगे बढ़ने का अवसर और मजबूत हुआ है। खासतौर पर सिनर और अल्कारेज के बीच संभावित मुकाबले का इंतजार कर रहे दर्शकों को इस बार यह टक्कर देखने को नहीं मिलेगी।

    सिनर और अल्कारेज की प्रतिद्वंद्विता पिछले कुछ वर्षों में पुरुष टेनिस की सबसे चर्चित प्रतिद्वंद्विताओं में शामिल रही है। दोनों कई बड़े मुकाबलों में आमने-सामने आ चुके हैं। यूएस ओपन से सिनर के हटने के बाद इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अल्कारेज पर भी निगाहें रहेंगी।

    सिनर के लिए यह फैसला एक और वजह से महत्वपूर्ण है। 2019 में ग्रैंड स्लैम स्तर पर शुरुआत करने के बाद वह लगातार मेजर टूर्नामेंटों में हिस्सा लेते रहे हैं। चोट के कारण यूएस ओपन 2026 से बाहर होने के साथ उनका यह लगातार ग्रैंड स्लैम खेलने का सिलसिला पहली बार टूट जाएगा।

    फिलहाल सिनर का ध्यान पूरी तरह स्वस्थ होने और सुरक्षित तरीके से प्रतिस्पर्धी टेनिस में लौटने पर है। यूएस ओपन में उनकी गैरमौजूदगी से टूर्नामेंट की प्रतिस्पर्धा जरूर बदली है, लेकिन अब बाकी शीर्ष खिलाड़ियों के पास न्यूयॉर्क में खिताब हासिल करने का बड़ा मौका होगा।

  • धर्मेंद्र के निधन के बाद फिल्मों में वापसी पर हेमा मालिनी ने दिया जवाब, बताया अब किन जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं अभिनेत्री

    धर्मेंद्र के निधन के बाद फिल्मों में वापसी पर हेमा मालिनी ने दिया जवाब, बताया अब किन जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं अभिनेत्री

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी लंबे समय से बड़े पर्दे से दूर हैं, लेकिन उनके प्रशंसकों के बीच आज भी फिल्मों में वापसी को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। हाल ही में उनसे पूछा गया कि क्या वह दोबारा फिल्मों में नजर आने की तैयारी कर रही हैं। अभिनेत्री ने इस सवाल पर स्पष्ट संकेत दिया कि फिलहाल उनका ध्यान अभिनय में वापसी से ज्यादा अपनी वर्तमान जिम्मेदारियों और परिवार पर है।

    हेमा मालिनी ने बताया कि इस समय वह अपने राजनीतिक दायित्वों में व्यस्त हैं और अपने क्षेत्र के लोगों के लिए काम करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके साथ ही वह अपने बच्चों और नाती-पोतों के साथ भी समय बिताती हैं। उनके अनुसार, परिवार को इस समय उनकी जरूरत है और यही उनकी वर्तमान जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    अभिनेत्री ने धर्मेंद्र की यादों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह उनकी यादों के साथ जीवन आगे बढ़ा रही हैं। धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की जोड़ी हिंदी सिनेमा की चर्चित जोड़ियों में रही है। दोनों ने लंबे समय तक साथ जीवन बिताया और उनकी निजी जिंदगी हमेशा प्रशंसकों की दिलचस्पी का विषय रही है।

    हेमा मालिनी का फिल्मी करियर कई दशकों तक फैला रहा है। उन्होंने शादी और परिवार की जिम्मेदारियों के बाद भी पूरी तरह काम करना बंद नहीं किया। हालांकि समय के साथ फिल्मों में उनकी सक्रियता कम होती गई। उनकी आखिरी फिल्मों में 2020 में आई शिमला मिर्ची शामिल है। इसके बाद उनका ज्यादा ध्यान सार्वजनिक जीवन और राजनीति से जुड़े कामों पर रहा।

    अभिनेत्री ने यह भी बताया कि शादी और बच्चों की योजना बनाने के बाद उन्होंने फिल्मों की संख्या कम कर दी थी, लेकिन उनका रचनात्मक काम जारी रहा। उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में भी काम किया और टेलीविजन से जुड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनीं। उन्होंने दिल आशना है का निर्देशन किया था, जबकि टेलीविजन के लिए भी काम किया।

    हेमा मालिनी का कला से जुड़ाव सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। वह लंबे समय से शास्त्रीय नृत्य से जुड़ी हुई हैं और उन्होंने कई नृत्य प्रस्तुतियां तथा बैले तैयार किए। इनमें दुर्गा, महालक्ष्मी, राधा कृष्ण और द्रौपदी जैसे पौराणिक विषयों पर आधारित कार्यक्रम शामिल रहे हैं। अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने मंच पर फिल्मी गीतों के बजाय शास्त्रीय नृत्य को प्राथमिकता दी।

    उनके मुताबिक शास्त्रीय नृत्य से आर्थिक लाभ फिल्मी प्रस्तुतियों की तुलना में कम हो सकता है, लेकिन उन्होंने इसे अपनी पसंद और कला के प्रति प्रतिबद्धता के कारण जारी रखा। इससे उनके अभिनय के अलावा नृत्य के क्षेत्र में उनकी अलग पहचान भी बनी।

    हेमा मालिनी ने अपने फिल्मी करियर से जुड़े कुछ पुराने फैसलों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि राज कपूर की सत्यम शिवम सुंदरम में काम करने का प्रस्ताव उन्हें मिला था, लेकिन उन्होंने भूमिका स्वीकार नहीं की। अभिनेत्री के अनुसार, वह राज कपूर के साथ फिर काम करना चाहती थीं, लेकिन इस विशेष फिल्म को करने के लिए तैयार नहीं थीं।

    फिलहाल हेमा मालिनी ने फिल्मों में वापसी की कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। उनके बयान से यही संकेत मिलता है कि राजनीति, परिवार, नृत्य और धर्मेंद्र की यादों से जुड़ी उनकी वर्तमान जिंदगी में अभिनय की वापसी अभी प्राथमिकता नहीं है। हालांकि भविष्य में कोई उपयुक्त भूमिका मिलने पर उनका फैसला क्या होगा, इस पर उन्होंने कोई निश्चित घोषणा नहीं की है।

  • दीया मिर्जा ने बताया क्यों 20 साल से फिल्म सेट पर आईना और मॉनिटर देखने से जानबूझकर रहती हैं दूर

    दीया मिर्जा ने बताया क्यों 20 साल से फिल्म सेट पर आईना और मॉनिटर देखने से जानबूझकर रहती हैं दूर

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री दीया मिर्जा ने अपने फिल्मी करियर से जुड़ी एक ऐसी आदत के बारे में बताया है, जो लंबे समय से उनकी कार्यशैली का हिस्सा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि वह करीब 20 वर्षों से फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट पर अपना चेहरा आईने में नहीं देखतीं। इतना ही नहीं, वह शॉट पूरा होने के बाद मॉनिटर पर अपनी परफॉर्मेंस और लुक को चेक करने की आदत से भी दूर रहती हैं।

    दीया के मुताबिक, उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर में ही महसूस कर लिया था कि शूटिंग के दौरान अपने लुक पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देना उनके लिए सही नहीं है। इसके बाद उन्होंने अपने लिए ऐसी कार्यशैली विकसित की, जिसमें कैमरे के सामने अपनी उपस्थिति देखने के बजाय किरदार और उस पल की भावनाओं को समझने पर अधिक ध्यान दिया जाए।

    अभिनेत्री का मानना है कि किसी कलाकार के लिए सिर्फ यह देखना महत्वपूर्ण नहीं होना चाहिए कि वह कैमरे पर कैसा दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, अभिनय करते समय दृश्य की भावना, किरदार की स्थिति और कहानी के उस खास पल को समझना अधिक जरूरी है। इसी सोच के कारण वह शॉट के बाद मॉनिटर देखने से भी बचती हैं।

    दीया ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म में कलाकार की दृश्य पहचान को लेकर वह लापरवाह नहीं रहतीं। बाल, मेकअप, कपड़े और दूसरे लुक से जुड़े पहलुओं को फिल्म निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं। उनके अनुसार, किसी किरदार की दृश्य पहचान पहले से सोच-समझकर तैयार की जाती है और वह उस पूरी प्रक्रिया का सम्मान करती हैं।

    अभिनेत्री को अपने किरदार के कपड़ों और उनकी तैयारी में विशेष रुचि रहती है। वह इस बात पर ध्यान देती हैं कि किरदार के लिए किस तरह के कपड़े चुने गए हैं, उनका कपड़ा या फैब्रिक कैसा है और उनकी बनावट तथा रंग किस तरह किरदार की पहचान से मेल खाते हैं। हालांकि, एक बार यह तैयारी पूरी हो जाने के बाद वह अपने चेहरे और लुक को लेकर लगातार निगरानी रखने के बजाय अभिनय की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करती हैं।

    दीया का कहना है कि अपने रूप-रंग को लेकर लगातार चिंता करने से कलाकार का मानसिक ध्यान प्रभावित हो सकता है। उनका मानना है कि दिखावे को लेकर जरूरत से ज्यादा सजग रहने की एक कीमत होती है और वह अपनी मानसिक शांति को उस कीमत के रूप में खर्च नहीं करना चाहतीं। उनके लिए शूटिंग के दौरान सहज रहना और किरदार में पूरी तरह शामिल होना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    दीया मिर्जा ने अपनी इस सोच को युवा लड़कियों के संदर्भ में भी जोड़ा। उनका कहना है कि महिलाओं और खासकर युवा लड़कियों पर अपने रूप-रंग को लेकर लगातार दबाव बनाया जाता है। उन्हें कई बार यह महसूस कराया जाता है कि उनका वर्तमान रूप पर्याप्त अच्छा नहीं है और उन्हें किसी तरह के कॉस्मेटिक बदलाव की जरूरत है।

    अभिनेत्री चाहती हैं कि उनकी सोच युवा महिलाओं को अपने शरीर और रूप-रंग के साथ बेहतर और स्वस्थ रिश्ता बनाने के लिए प्रेरित करे। उनका संदेश है कि किसी व्यक्ति का आत्मविश्वास केवल उसके बाहरी रूप पर निर्भर नहीं होना चाहिए। दीया की यह कार्यशैली उनके लंबे अभिनय अनुभव और कैमरे के सामने अपनी प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण को दर्शाती है।