Blog

  • अरुणाचल सीमा पर चीनी सैनिकों से आमना-सामना, ITBP ने तैयार कीं शौर्य कमांडो टीमें..

    अरुणाचल सीमा पर चीनी सैनिकों से आमना-सामना, ITBP ने तैयार कीं शौर्य कमांडो टीमें..

    नई दिल्ली । भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव की स्थिति को लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि राज्य के कई सीमावर्ती स्थानों पर भारतीय जवानों और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की स्थिति बनी है। इनमें से कुछ स्थानों पर ऐसी परिस्थितियां अब भी जारी हैं। उन्होंने बल के जवानों को संबोधित करते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात ‘शौर्य कमांडो’ टीमों के प्रदर्शन की सराहना की।

    यह जानकारी आईटीबीपी के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित ‘हिमवीर सम्मान समारोह’ के दौरान सामने आई। कपूर ने कहा कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में जवानों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। इन स्थितियों में तैनात शौर्य कमांडो टीमों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार सतर्कता बनाए रखने और कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए बल अपनी परिचालन क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।

    आईटीबीपी प्रमुख के अनुसार, बल की प्रत्येक बटालियन में कमांडो टीम तैयार की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त दो और टीमें गठित करने की प्रक्रिया चल रही है। दीर्घकालिक लक्ष्य हर बटालियन में एक पूर्ण कमांडो कंपनी तैयार करना है। इसके साथ ही विशेष अभियानों के संचालन के लिए एक अलग कमांडो बटालियन बनाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इन इकाइयों को विशेष रूप से पहाड़ी और अधिक ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में काम करने के लिए तैयार किया जा रहा है, जहां मौसम, भौगोलिक परिस्थितियां और सीमित पहुंच जवानों के सामने चुनौतियां पैदा करती हैं।

    सीमा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए आईटीबीपी आधुनिक तकनीक पर भी ध्यान दे रही है। कपूर ने कहा कि ड्रोन ने युद्ध के पारंपरिक तरीकों में बदलाव किया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और अन्य उन्नत तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए बल ड्रोन संचालन, पायलटों के प्रशिक्षण और ड्रोन निर्माण की अपनी क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है।

    ड्रोन के साथ-साथ एंटी-ड्रोन प्रणालियों के विकास और इस्तेमाल की तैयारी भी की जा रही है। इन तकनीकों का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन से पैदा होने वाले संभावित खतरों का मुकाबला करना और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाना है। बल की आधुनिकीकरण योजना में ड्रोन तथा एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये निर्धारित करने की बात कही गई है। इसके अलावा वाहनों, उपकरणों और गोला-बारूद को आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    दुर्गम सीमावर्ती इलाकों में तेजी से आवाजाही और प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष वाहनों, स्वचालित जमीनी वाहनों और क्विक रिएक्शन व्हीकल को भी योजना में शामिल किया गया है। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की तैयारी है। इन कदमों का उद्देश्य जरूरत पड़ने पर जवानों और उपकरणों की तैनाती को अधिक प्रभावी बनाना है।

    भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी मुद्दों पर सैन्य स्तर पर बातचीत भी जारी रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 6 सितंबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में वाचा-दमाई बॉर्डर पर्सनल मीटिंग पॉइंट पर कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई थी। सीमा पर दोनों देशों की अलग-अलग धारणाओं के कारण कुछ क्षेत्रों में गश्त के दौरान आमने-सामने की स्थिति बनती रही है।

    आईटीबीपी प्रमुख का बयान बताता है कि सीमा पर सतर्कता बनाए रखने के साथ-साथ बल अपनी विशेष इकाइयों, निगरानी प्रणालियों और आधुनिक उपकरणों को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश में जिन स्थानों पर आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है, उनके बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

  • यूपी पुलिस के तीन कर्मियों पर गिरी गाज, कारोबारी ने लगाए हिरासत में मारपीट और 4.72 लाख रुपये लेने के आरोप

    यूपी पुलिस के तीन कर्मियों पर गिरी गाज, कारोबारी ने लगाए हिरासत में मारपीट और 4.72 लाख रुपये लेने के आरोप


    मेरठ । उत्तर प्रदेश के मेरठ और मुजफ्फरनगर में पुलिसकर्मियों पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप सामने आए हैं। नोएडा के फर्नीचर कारोबारी शाहिद चौधरी की शिकायत के बाद मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने में तैनात दरोगा अंकित सागर और मुख्य आरक्षी नीरज कुमार को निलंबित कर दिया गया है। वहीं मुजफ्फरनगर के पमनावली चौकी प्रभारी आरिफ अली को भी निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। कारोबारी का आरोप है कि बैंक खाता खुलवाने और फ्रीज खाते को दोबारा चालू कराने के नाम पर उनसे कुल 4.72 लाख रुपये वसूले गए। पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    गौतमबुद्धनगर के गेझा सेक्टर-93 निवासी शाहिद चौधरी फर्नीचर का कारोबार करते हैं। उनकी शिकायत के मुताबिक दो अगस्त को लिसाड़ी गेट थाने में तैनात दरोगा अंकित सागर और मुख्य आरक्षी नीरज कुमार ने दानिश नाम के युवक की शिकायत के आधार पर उन्हें थाने बुलाया था। शाहिद का आरोप है कि थाने में उनके साथ अभद्रता की गई और उन्हें हिरासत में रखकर मारपीट की गई। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान उनका आईफोन घड़ी और बेल्ट भी अपने कब्जे में ले ली गई।

    कारोबारी के मुताबिक जब उनके भाई थाने पहुंचे तो उनसे रकम की मांग की गई। शाहिद ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि चार अगस्त को 1.20 लाख रुपये शादाब राव के खाते में ट्रांसफर कराए गए। इसके बाद 2.80 लाख रुपये नकद दिए गए। उनका दावा है कि रकम मिलने के बाद आईफोन वापस कर दिया गया लेकिन घड़ी और बेल्ट नहीं लौटाई गईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अगले दिन पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारी को देने के नाम पर सोफा मांगा और इसके लिए तस्वीरें तथा क्यूआर कोड भेजे गए। बाद में दो अन्य खातों में 36-36 हजार रुपये भेजने के लिए कहा गया। कारोबारी के अनुसार इन लेनदेन और बातचीत से संबंधित साक्ष्य उन्होंने अधिकारियों को देने की बात कही है।

    शाहिद ने डीआईजी कलानिधि नैथानी को तीन पन्नों की शिकायत देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की थी। शिकायत में उन्होंने शादाब राव उर्फ शालू पर भी पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर रकम वसूलने का आरोप लगाया है। कारोबारी का दावा है कि शादाब थाने के सामने जनसुविधा केंद्र चलाता है और पुलिसकर्मियों के संपर्क में रहता है। उन्होंने बैंक ट्रांजैक्शन कॉल डिटेल और अन्य दस्तावेजों के जरिए आरोपों की जांच कराने की मांग की है।

    मेरठ पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार लिसाड़ी गेट थाने में तैनात उपनिरीक्षक अंकित सागर और मुख्य आरक्षी नीरज कुमार को साइबर अपराध से जुड़े पीड़ित के साथ अनुचित आचरण करने और पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने के मामले में तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। दोनों के खिलाफ विभागीय जांच एसपी सिटी विनायक गोपाल भोंसले को सौंपी गई है। मामले की जांच सीओ साइबर क्राइम सौम्या अस्थाना को भी दी गई है।

    इस मामले में शुरुआती जांच को लेकर भी सवाल उठे हैं। डीआईजी के मुताबिक सीओ कोतवाली संग्राम सिंह ने कथित तौर पर पीड़ित से बात किए बिना जांच पूरी कर दी थी। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्हें अंतिम चेतावनी दी गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच में लापरवाही या गलत आचरण सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।

    शाहिद ने मुजफ्फरनगर के खतौली क्षेत्र में तैनात रहे दरोगा आरिफ अली पर भी आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार उनकी पत्नी का बैंक खाता कथित धोखाधड़ी के मामले में फ्रीज किया गया था। कारोबारी का दावा है कि खाते को दोबारा चालू कराने के नाम पर उनके भाई से एक लाख रुपये लिए गए। उन्होंने इस भुगतान से संबंधित वीडियो साक्ष्य होने की बात भी कही है। मुजफ्फरनगर के एसएसपी सूरज राय के अनुसार पमनावली चौकी प्रभारी आरिफ अली को निलंबित कर दिया गया है और मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है।

    फिलहाल तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और विभागीय जांच की प्रक्रिया जारी है। कारोबारी की ओर से लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

  • आजम खान के समर्थन में उतरे अखिलेश यादव, जेल में मुलाकात के बाद दिया बड़ा बयान, पत्रकारों के सवाल पर दिखे नाराज

    आजम खान के समर्थन में उतरे अखिलेश यादव, जेल में मुलाकात के बाद दिया बड़ा बयान, पत्रकारों के सवाल पर दिखे नाराज


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को रामपुर जेल पहुंचकर पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने आजम खान के समर्थन में बयान देते हुए कहा कि आजम खान पहले भी आजम थे आज भी आजम हैं और आगे भी आजम रहेंगे। उन्होंने कहा कि फर्जी मुकदमों में इतनी ताकत नहीं है कि आजम खान को लंबे समय तक जेल में रखा जा सके। अखिलेश के इस बयान को आजम खान के प्रति पार्टी के समर्थन और राजनीतिक एकजुटता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    जेल से बाहर निकलने के बाद अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने आजम खान के साथ अपनी मुलाकात को लेकर प्रतिक्रिया दी। हालांकि जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि आजम खान से मिलने आने में करीब 11 महीने का समय क्यों लग गया तो वह सवाल पर नाराज होते दिखाई दिए। इस दौरान बातचीत का वीडियो भी सामने आया है। मुलाकात के बाद उनके बयान और सवाल पर उनकी प्रतिक्रिया राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई।

    आजम खान समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और रामपुर की राजनीति में उनका लंबे समय से प्रभाव रहा है। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों और जेल में रहने को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार बहस होती रही है। समाजवादी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देखती रही है जबकि आरोपों और कानूनी मामलों का फैसला अदालतों की प्रक्रिया के तहत होता है। अखिलेश यादव का ताजा बयान इसी राजनीतिक संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

    अखिलेश यादव ने अपने बयान में आजम खान के राजनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्हें फर्जी मुकदमों के जरिए दबाया नहीं जा सकता। समाजवादी पार्टी लंबे समय से आजम खान और उनके परिवार से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कानूनी कार्रवाई के नाम पर उनके वरिष्ठ नेता को निशाना बनाया गया है। हालांकि किसी मुकदमे को फर्जी या सही मानने का अंतिम फैसला संबंधित अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है।

    रामपुर जेल में हुई इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खास तौर पर इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि अखिलेश यादव ने लंबे अंतराल के बाद आजम खान से मुलाकात की। पत्रकारों ने इसी अवधि को लेकर सवाल किया था। सवाल के जवाब में अखिलेश की नाराजगी ने इस मुलाकात को और चर्चा में ला दिया। हालांकि उपलब्ध जानकारी में मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का विस्तृत ब्यौरा सामने नहीं आया है।

    आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख मुस्लिम नेता के रूप में पहचाने जाते हैं और रामपुर से उनका गहरा राजनीतिक जुड़ाव रहा है। उनके जेल में रहने और कानूनी मामलों को लेकर समाजवादी पार्टी के समर्थक लगातार प्रतिक्रिया देते रहे हैं। अखिलेश यादव का यह दौरा पार्टी के भीतर आजम खान के महत्व को दोहराने वाला कदम माना जा रहा है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि समाजवादी पार्टी नेतृत्व अपने वरिष्ठ नेता के साथ खड़े होने का संदेश देना चाहता है।

    फिलहाल इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव के बयान और पत्रकारों के सवाल पर उनकी प्रतिक्रिया चर्चा में है। आजम खान से मिलने के बाद उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आजम खान का राजनीतिक प्रभाव खत्म नहीं हुआ है। वहीं मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई और आगे पार्टी इस मामले को लेकर क्या रणनीति अपनाएगी इस पर अभी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

  • भारत मंडपम में पीएम मोदी ने किया चिन्मय अमृत महोत्सव सम्मेलन का उद्घाटन, युवा शक्ति को बताया मजबूत भारत की आधारशिला

    भारत मंडपम में पीएम मोदी ने किया चिन्मय अमृत महोत्सव सम्मेलन का उद्घाटन, युवा शक्ति को बताया मजबूत भारत की आधारशिला

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने युवा शक्ति को मजबूत और सक्षम भारत के निर्माण का आधार बताया। प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपनी मुलाकात और उनसे मिले आशीर्वाद को याद करते हुए कहा कि युवाओं की क्षमता का विकास देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। इस वैश्विक सम्मेलन में भारत और विदेशों से 9,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

    कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम को देखने और उनसे बातचीत का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि यह उनके लिए भावुक क्षण था, जिसने उन्हें वर्ष 1993 में वडोदरा में हुई मुलाकात की याद दिला दी। उस समय स्वामी चिन्मयानंद के साथ हुई बातचीत, उनका स्नेह और आशीर्वाद आज भी उनके स्मरण में हैं। प्रधानमंत्री ने इस अनुभव को संभव बनाने के लिए चिन्मय मिशन के सदस्यों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद के साथ उनकी बातचीत में युवा शक्ति के विकास और उसके माध्यम से मजबूत भारत के निर्माण का विषय प्रमुख रहा था। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने से लेकर सरकार के मुखिया के तौर पर काम करने तक गुरुदेव का आशीर्वाद उनके साथ रहा है। उनके संबोधन में युवाओं को देश की प्रगति और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर विशेष जोर दिखाई दिया।

    मोदी ने कहा कि युवाओं को सक्षम बनाने, उनकी प्रतिभा को निखारने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने से भारत मजबूत बन सकता है। युवाओं की ऊर्जा और क्षमता का सही उपयोग देश को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद कर सकता है। उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं को राष्ट्र निर्माण में भागीदारी के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी नीतियों के केंद्र में देश के युवा हैं।

    प्रधानमंत्री ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि यह पड़ाव केवल विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने का अवसर नहीं था, बल्कि भारत की उस ज्ञान परंपरा को दुनिया के सामने रखने का भी मौका था, जो प्राचीन विचारों और अनुभवों के माध्यम से संपूर्ण मानवता के कल्याण की बात करती है।

    उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारत के प्राचीन विचारों और अनुभवों को वर्तमान समय के संदर्भ में समझना तथा उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी इस विरासत को आगे बढ़ाने का हिस्सा है।

    चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है। यह चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में साल भर आयोजित कार्यक्रमों का समापन है। चिन्मय मिशन की स्थापना स्वामी चिन्मयानंद ने वर्ष 1951 में की थी। मिशन का प्रमुख उद्देश्य वेदांत और भगवद गीता के ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।

    समय के साथ चिन्मय मिशन ने आध्यात्मिक शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, युवा सशक्तिकरण और सामुदायिक सेवा जैसे क्षेत्रों में भी काम किया है। सम्मेलन के माध्यम से आध्यात्मिक विचारों, भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन समाज में उनके महत्व पर चर्चा की जा रही है। प्रधानमंत्री का संबोधन भी युवा शक्ति, सांस्कृतिक मूल्यों और विकसित भारत के लक्ष्य के बीच संबंध को रेखांकित करने पर केंद्रित रहा।

  • गाजीपुर में सिपाही और नाबालिग छात्रा के आरोपों से मामला गरमाया, शादी का झांसा और ब्लैकमेलिंग के दावों की जांच की मांग

    गाजीपुर में सिपाही और नाबालिग छात्रा के आरोपों से मामला गरमाया, शादी का झांसा और ब्लैकमेलिंग के दावों की जांच की मांग


    गाजीपुर । उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली 17 वर्षीय छात्रा ने एक पुलिस कांस्टेबल पर शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने और निजी तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रा का कहना है कि सिपाही मोहित यादव ने उससे शादी करने का वादा किया था लेकिन अब उसकी शादी कहीं और तय हो गई है। दूसरी ओर सिपाही ने छात्रा के आरोपों को गलत बताते हुए दावा किया है कि उसे फंसाया जा रहा है। दोनों पक्षों के विरोधाभासी बयानों के बीच मामला जांच का विषय बना हुआ है।

    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार छात्रा ने 20 अक्टूबर को एक वीडियो जारी कर अपने साथ कथित शोषण की बात कही थी। उसने आरोप लगाया कि सिपाही से उसकी मुलाकात तीन मई 2026 को ट्रेन में हुई थी। वह अपनी बुआ के साथ लखनऊ घूमने गई थी और वापस लौटते समय ट्रेन में मोहित यादव से बातचीत शुरू हुई। छात्रा के अनुसार मोहित ने खुद को पुलिसकर्मी बताया और अपना मोबाइल नंबर दिया। इसके बाद दोनों के बीच फोन पर बातचीत होने लगी और धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ गईं।

    छात्रा का आरोप है कि मोहित ने उससे शादी करने का भरोसा दिलाया और उसे होटल ले जाने लगा। इसी दौरान उसकी निजी तस्वीरें और वीडियो बनाए गए। छात्रा के मुताबिक बाद में सिपाही ने उस पर दूसरे लोगों से मिलने का दबाव बनाया और कथित तौर पर निजी तस्वीरों के जरिए उसे डराया। उसने यह भी दावा किया कि कुछ लोगों के पास उसे भेजा गया और उसके साथ गलत काम हुआ। ये सभी आरोप छात्रा की ओर से लगाए गए हैं। इनकी पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।

    छात्रा का कहना है कि अब मोहित की शादी कहीं और तय हो गई है। उसने आरोप लगाया कि शिकायत करने के बाद उस पर अपना बयान बदलने का दबाव बनाया गया। उसके मुताबिक सिपाही ने फोन पर उससे कहा कि वह बालिग होने के बाद शादी कर सकता है और उसे शिकायत में लगाए गए आरोप वापस लेने चाहिए। छात्रा ने यह भी कहा कि उसके परिवार पर बदनामी के डर से मामला खत्म करने का दबाव है और उसे न्याय पाने के लिए अलग-अलग अधिकारियों के पास जाना पड़ रहा है। उसने चेतावनी दी कि यदि उसे या उसके परिवार को कोई नुकसान होता है तो इसके लिए मोहित जिम्मेदार होगा। इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    दूसरी ओर सिपाही मोहित यादव ने छात्रा के आरोपों से इनकार किया है। उसका कहना है कि ट्रेन में पहली बार छात्रा से मुलाकात हुई थी। उसके मुताबिक किसी व्यक्ति द्वारा छात्रा का वीडियो बनाए जाने पर उसने मदद की थी और बाद में छात्रा ने खुद उसका नंबर मांगा था। मोहित ने स्वीकार किया कि दोनों की बातचीत होती थी और वे मिलते भी थे लेकिन उसने यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग के आरोपों को गलत बताया। उसने छात्रा पर लोगों को फंसाकर पैसे वसूलने का आरोप भी लगाया है। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण रिपोर्ट में सामने नहीं रखा गया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक मोहित यादव वर्ष 2025 बैच का सिपाही है और उसकी तैनाती गाजीपुर के गहमर थाने की भदौरा चौकी पर है। छात्रा दिलदार नगर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली है। छात्रा ने पांच अक्टूबर को पुलिस अधीक्षक के पास शिकायत लेकर जाने की बात कही है। इसके बाद 17 अक्टूबर को जमानिया के क्षेत्राधिकारी के समक्ष उसका बयान दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। छात्रा का आरोप है कि इसके बाद भी उसे दबाव का सामना करना पड़ा।

    मामले में एक पक्ष ने यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग के आरोप लगाए हैं जबकि दूसरे पक्ष ने उन्हें निराधार बताया है। चूंकि शिकायतकर्ता नाबालिग है इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच और उसकी सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। पुलिस को आरोपों से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और दोनों पक्षों के बयानों की जांच करनी होगी ताकि वास्तविक घटनाक्रम सामने आ सके। फिलहाल किसी भी पक्ष के दावे को जांच के निष्कर्ष या अदालत में साबित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

  • शिवा शर्मा की मौत के मामले में चर्चा में श्रद्धा दुबे की पुरानी जिंदगी, बचपन के दोस्तों ने किए कई दावे

    शिवा शर्मा की मौत के मामले में चर्चा में श्रद्धा दुबे की पुरानी जिंदगी, बचपन के दोस्तों ने किए कई दावे


    लखनऊ । लखनऊ में होटल कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के मामले में आरोपी मॉडल श्रद्धा दुबे की जिंदगी से जुड़े पुराने किस्से सामने आ रहे हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और इसी बीच मीडिया रिपोर्ट में श्रद्धा के बचपन के दोस्तों के हवाले से उसके स्कूल के दिनों और निजी जीवन को लेकर कई दावे किए गए हैं। दोस्तों के मुताबिक श्रद्धा रायबरेली में पढ़ाई के दौरान काफी लोकप्रिय थी और कई लड़के उससे दोस्ती करना चाहते थे। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें जांच में साबित हुए तथ्यों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    रिपोर्ट के अनुसार श्रद्धा की शुरुआती पढ़ाई रायबरेली के मालिकमऊ कॉलोनी स्थित मदर टेरेसा इंटर कॉलेज में हुई थी। उसके साथ सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक दोस्त ने बताया कि वह बातचीत करने में अच्छी थी और स्कूल में कई बच्चों से उसकी दोस्ती थी। दोस्त के मुताबिक पढ़ाई में उसकी खास रुचि नहीं थी। वहीं नौवीं कक्षा में साथ पढ़ चुके एक अन्य दोस्त ने दावा किया कि उस समय श्रद्धा के कई लड़कों से संपर्क थे और वह उनसे फोन पर बातचीत करती थी।

    दोस्तों ने यह भी दावा किया कि स्कूल के दिनों में श्रद्धा को लेकर लड़कों के बीच कई बार विवाद हुए थे। उनके अनुसार अलग-अलग समय पर तीन लड़कों ने कथित तौर पर जहर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी। एक दोस्त ने यह भी कहा कि एक लड़का अपना हाथ काटने की बात कर रहा था लेकिन उसके साथियों ने उसे रोक लिया। इन घटनाओं को लेकर रिपोर्ट में दोस्तों के बयान दिए गए हैं लेकिन इनकी पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र जानकारी सामने नहीं रखी गई है। इसलिए इन दावों को सावधानी से देखने की जरूरत है।

    रिपोर्ट में श्रद्धा के किशोरावस्था के दिनों से जुड़ा एक और दावा किया गया है। उसके एक पुराने दोस्त के अनुसार जब वह ग्यारहवीं कक्षा में थी तो स्कूल के एक परिचित के भाई के साथ मुंबई चली गई थी। वह करीब 20 से 25 दिन वहां रही और फिर घर लौट आई। दोस्त के मुताबिक श्रद्धा ने बताया था कि युवक ने उसे अभिनेत्री बनाने का वादा किया था। बाद में श्रद्धा ने फैशन और मॉडलिंग की दिशा में काम करना शुरू किया।

    परिवार से जुड़े घटनाक्रम के बारे में रिपोर्ट में बताया गया है कि श्रद्धा बाद में लखनऊ में एक रिश्तेदार के यहां रहने लगी थी। इसके बाद परिवार ने उसकी शादी प्रतापगढ़ निवासी लोकेश पांडेय से कराई। लोकेश हैदराबाद की एक आईटी कंपनी में काम करते थे और शादी के बाद श्रद्धा उनके साथ हैदराबाद चली गई। वहां उसने फैशन और मॉडलिंग से संबंधित कोर्स किया और एक बेटे को जन्म दिया। बाद में दोनों के बीच मतभेद हुए और साल 2022 में उनका तलाक हो गया। इसके बाद श्रद्धा लखनऊ लौट आई और फैशन ब्लॉगर तथा मॉडल के रूप में काम करने लगी। सोशल मीडिया पर भी उसके फॉलोअर्स बढ़े।

    रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 में श्रद्धा की मुलाकात लखनऊ के होटल कारोबारी शिवा शर्मा से हुई। दोनों हजरतगंज स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। नौ अक्टूबर की रात शिवा की अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई। मामले में शिवा की मां रंजना शर्मा ने श्रद्धा और अन्य लोगों पर प्रताड़ना तथा हत्या में शामिल होने के आरोप लगाए। पुलिस ने मामले में श्रद्धा की बहन समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। ये आरोप हैं और मामले में दोष तय होना न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    घटना के बाद श्रद्धा के फरार होने और अलग-अलग स्थानों पर जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। बाद में उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने उसे नागपुर से गिरफ्तार किया। खबर के अनुसार गिरफ्तारी के बाद उसे लखनऊ लाया गया और अदालत के आदेश पर पुलिस हिरासत में भेजा गया। अब जांच एजेंसियां शिवा की मौत से जुड़े घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। श्रद्धा के पुराने दोस्तों के दावों के बीच इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि नौ अक्टूबर की रात वास्तव में क्या हुआ था और जांच में सामने आए साक्ष्य किस निष्कर्ष तक पहुंचते हैं।

  • यूपी विधान परिषद चुनाव में फर्जी वोटिंग के आरोपों से गरमाया माहौल, दोपहर 12 बजे तक 24 फीसदी मतदान

    यूपी विधान परिषद चुनाव में फर्जी वोटिंग के आरोपों से गरमाया माहौल, दोपहर 12 बजे तक 24 फीसदी मतदान


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर हो रहे चुनाव के दौरान शुक्रवार को कई जगह हंगामे और मारपीट की घटनाएं सामने आईं। मुजफ्फरनगर में राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल के सामने समाजवादी पार्टी और भाजपा के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। फतेहपुर में दोनों दलों के समर्थकों के बीच जमकर मारपीट हुई। वहीं गोरखपुर में सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के साथ धक्का-मुक्की किए जाने का आरोप लगा है। चुनाव के दौरान फर्जी वोटिंग और मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले।

    मुजफ्फरनगर में विवाद उस समय बढ़ गया जब राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल के सामने सपा और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी मारपीट में बदल गई। सपा समर्थकों का आरोप था कि मंत्री वोट डालने के दौरान कई लोगों को लेकर मतदान केंद्र के अंदर गए। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    फतेहपुर में खागा तहसील क्षेत्र के विजयीपुर ब्लॉक परिसर के बाहर शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे हंगामा हुआ। सपा कार्यकर्ताओं ने भाजपा नेताओं पर फर्जी वोटिंग कराने का आरोप लगाया। इसके बाद दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे को दौड़ाकर पीटने लगे। करीब आधे घंटे तक चले विवाद के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को शांत कराया। इस घटना ने चुनाव के दौरान सुरक्षा और मतदान केंद्रों के आसपास व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

    गोरखपुर में सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के साथ धक्का-मुक्की किए जाने का आरोप सामने आया। बताया गया कि वह मतदान केंद्र के बाहर मीडिया को बयान दे रहे थे। इसी दौरान उनके साथ विवाद हुआ। उधर अलीगढ़ में राज्यमंत्री सुरेंद्र दिलेर के मतदान केंद्र के अंदर जाने को लेकर सपा समर्थकों और एजेंटों ने आपत्ति जताई। यहां भाजपा प्रत्याशी के एजेंट बनकर पहुंचे दो युवकों को पकड़े जाने की भी जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं को लेकर संबंधित पक्षों के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    वाराणसी में मछलीशहर से सपा विधायक रागिनी सोनकर ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक यानी डीआईओएस पर धमकी देने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि स्कूलों की मान्यता रद्द करने और शिक्षकों की नौकरी खत्म करने जैसी बातें कही जा रही हैं। दूसरी ओर इटावा के सैफई में सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने अपनी पत्नी सरला यादव के साथ मतदान किया। उन्होंने मतदाता सूची में गड़बड़ी और कुछ मतदाताओं के वोट नहीं पड़ पाने का मुद्दा उठाया। शिवपाल ने कहा कि जहां भी अनियमितता हुई है वहां जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी के बयान को भी अनुशासनहीनता के दायरे में बताया और कहा कि इस पर फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष करेंगे।

    उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक खंड की छह और स्नातक खंड की पांच सीटों पर कुल 152 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इन सीटों के लिए 14.28 लाख मतदाता पंजीकृत हैं और मतदान कराने के लिए 2697 केंद्र बनाए गए हैं। शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक 24.09 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। बरेली-मुरादाबाद क्षेत्र में मतदान का स्तर अपेक्षाकृत अधिक बताया गया जबकि लखनऊ और वाराणसी समेत कई क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत इससे कम रहा। मतदान शाम चार बजे तक निर्धारित है और मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। कानपुर कानपुर देहात और उन्नाव में इस चरण में मतदान नहीं हो रहा है। इन क्षेत्रों में चुनाव वर्ष 2029 में प्रस्तावित है। चुनावी प्रक्रिया के बीच सामने आए विवादों के कारण अब प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है।

  • पीयूष गोयल की यूरोप को चेतावनी, सीबीएएम और 50 प्रतिशत स्टील शुल्क से उद्योगों की प्रतिस्पर्धा पर पड़ेगा असर

    पीयूष गोयल की यूरोप को चेतावनी, सीबीएएम और 50 प्रतिशत स्टील शुल्क से उद्योगों की प्रतिस्पर्धा पर पड़ेगा असर


    नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय देशों को आगाह किया है कि कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) और स्टील आयात पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाने जैसे कदम यूरोप की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसलों से जीवनयापन की लागत बढ़ सकती है, उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव पड़ सकता है और यूरोपीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। गोयल ने वैश्विक व्यापार में भरोसे को सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि मजबूत आर्थिक संबंधों के लिए विश्वास बनाए रखना जरूरी है।

    बर्लिन ग्लोबल डायलॉग 2026 के प्रश्नोत्तर सत्र में गोयल ने कहा कि व्यापारिक बाधाएं बढ़ाने से संबंधित देशों के सामने भी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। उनके मुताबिक, सीबीएएम और स्टील पर भारी आयात शुल्क जैसे उपायों का असर केवल विदेशी उत्पादकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यूरोप के उद्योगों और आम उपभोक्ताओं को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने भारत और यूरोपीय संघ के बीच विश्वास, प्रतिस्पर्धात्मकता और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं पर आधारित आर्थिक साझेदारी विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    जर्मनी में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में गोयल ने भारत और जर्मनी के द्विपक्षीय व्यापार को लेकर बड़ी संभावना जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार लगभग 31 अरब यूरो से बढ़कर 310 अरब यूरो तक पहुंच सकता है। इसके लिए दोनों देशों को अपनी औद्योगिक क्षमताओं का बेहतर उपयोग करना होगा और नई तकनीकों तथा उत्पादों के विकास में मिलकर काम करना होगा। हालांकि, उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई।

    गोयल 22 से 27 अक्टूबर तक जर्मनी और नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा पर हैं। उनके साथ करीब 100 भारतीय उद्योगों और स्टार्टअप्स का प्रतिनिधिमंडल भी गया है। इस यात्रा का उद्देश्य व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने, निवेश की संभावनाएं बढ़ाने और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना है।

    जर्मनी की आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीचे ने भी दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ाने के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने लालफीताशाही कम करने और संयुक्त परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने पर जोर देते हुए कहा कि भारत-जर्मनी व्यापार को मौजूदा स्तर से दोगुना किया जा सकता है।

    भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता भी चर्चा का प्रमुख विषय रहा। गोयल ने उम्मीद जताई कि इस समझौते पर वर्ष 2026 के अंत तक हस्ताक्षर हो सकते हैं और अगले चार से पांच महीनों में इसे लागू किया जा सकता है। हालांकि, यह समयसीमा समझौते की वार्ता, औपचारिक प्रक्रियाओं और संबंधित पक्षों की मंजूरी पर निर्भर करेगी।

    गोयल और रीचे के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण और ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण खनिजों, हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं के विकास की संभावनाओं पर भी विचार किया। भारत के औद्योगिक और डिजिटल तंत्र में निवेश बढ़ाना भी बातचीत का हिस्सा रहा।

    गोयल ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को दोनों पक्षों के कारोबार के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनके अनुसार, इससे भारतीय और जर्मन कंपनियों को अपनी क्षमताओं का विस्तार करने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। व्यापारिक सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ भरोसे और प्रतिस्पर्धा को महत्व देना इस साझेदारी को मजबूत करने के लिए जरूरी होगा।

  • एक्टर से प्रोड्यूसर बनीं श्वेता त्रिपाठी, बर्लिन के बाद टोरंटो में भी दिखाई जाएगी फिल्म और अब दर्शकों तक पहुंचने पर नजर

    एक्टर से प्रोड्यूसर बनीं श्वेता त्रिपाठी, बर्लिन के बाद टोरंटो में भी दिखाई जाएगी फिल्म और अब दर्शकों तक पहुंचने पर नजर


    नई दिल्ली। एक्ट्रेस श्वेता त्रिपाठी इन दिनों अपनी फिल्म मुझे जान ना कहो मेरी जान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। बतौर प्रोड्यूसर उनकी पहली फीचर फिल्म ने इस साल की शुरुआत में बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल से अपना सफर शुरू किया था और अब यह टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल यानी टीआईएफएफ 2026 तक पहुंच गई है। श्वेता के लिए यह सफर इसलिए भी खास है क्योंकि इसने उन्हें फिल्म निर्माण और कहानी कहने की प्रक्रिया को एक नए नजरिए से समझने का मौका दिया है।

    श्वेता त्रिपाठी का कहना है कि प्रोड्यूसर बनने के बाद फिल्मों को देखने और उनके भविष्य के बारे में सोचने का उनका नजरिया बदल गया है। पहले एक एक्टर के रूप में उनका ध्यान मुख्य रूप से किरदार और कहानी को पर्दे पर जीवंत करने पर रहता था। लेकिन अब वह इस बात पर भी विचार करती हैं कि फिल्म बनने के बाद उसका सफर किस दिशा में जाएगा और वह किन दर्शकों तक पहुंचेगी। उनके लिए फिल्म बनाना केवल शूटिंग और अभिनय तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह समझना भी जरूरी हो गया है कि कहानी लोगों के बीच किस तरह की बातचीत शुरू कर सकती है।

    श्वेता के मुताबिक जिस फिल्म पर आप भरोसा करते हैं उसे किसी अंतरराष्ट्रीय मंच तक लेकर जाना अपने आप में एक महत्वपूर्ण अनुभव है। खासकर तब जब वह बतौर प्रोड्यूसर आपकी पहली फीचर फिल्म हो। बर्लिन से टोरंटो तक का सफर उनके लिए सीखने और नई संभावनाओं को समझने का अवसर रहा है। इन फिल्म समारोहों के जरिए उन्हें अपनी फिल्म को अलग-अलग लोगों के सामने पेश करने और इसके लिए नए रास्ते तलाशने का मौका मिल रहा है।

    उन्होंने बताया कि प्रोड्यूसर की भूमिका में आने के बाद कहानी कहने की जिम्मेदारी को वह पहले से ज्यादा व्यापक रूप में देखने लगी हैं। एक अभिनेता के तौर पर किसी किरदार की भावनाओं और उसके अनुभवों को समझना जरूरी होता है। वहीं प्रोड्यूसर के रूप में फिल्म के निर्माण से लेकर उसके दर्शकों तक पहुंचने की संभावनाओं पर भी ध्यान देना पड़ता है। इसमें ऐसे लोगों से जुड़ना भी शामिल है जो फिल्म के सफर को आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। श्वेता मानती हैं कि अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल और मार्केट इस तरह के अवसर उपलब्ध कराते हैं जहां फिल्मकारों और उद्योग से जुड़े लोगों के बीच नए सहयोग की संभावनाएं बन सकती हैं।

    नेशनल अवॉर्ड जीत चुके फिल्ममेकर संजय नाग के निर्देशन में बनी मुझे जान ना कहो मेरी जान में तिलोत्तमा शोम और श्वेता त्रिपाठी नजर आएंगी। यह एक क्वीर लव स्टोरी है जिसमें प्यार और इंसानी रिश्तों को संवेदनशीलता और बारीकी के साथ दिखाने की कोशिश की गई है। फिल्म की कहानी रिश्तों के उन पहलुओं को सामने लाने का प्रयास करती है जिन्हें समझने के लिए भावनाओं और मानवीय अनुभवों को करीब से देखना जरूरी है।

    श्वेता त्रिपाठी का बतौर प्रोड्यूसर सफर थिएटर से शुरू हुआ था। साल 2010 में उन्होंने अपनी थिएटर प्रोडक्शन कंपनी ऑलमाइटी की शुरुआत की थी। उनकी शुरुआती प्रस्तुतियों में ब्रिटिश नाटककार माइक बार्टलेट का क्वीर ड्रामा कॉक भी शामिल था। माइक बार्टलेट ओलिवियर अवॉर्ड जीत चुके हैं। थिएटर से शुरू हुआ श्वेता का यह सफर अब अंतरराष्ट्रीय फिल्म मंचों तक पहुंच चुका है। उनकी पहली फीचर फिल्म का बर्लिन से टोरंटो तक पहुंचना उनके लिए एक अहम पड़ाव है और अब उनकी नजर इस बात पर है कि फिल्म आगे कितने दर्शकों तक पहुंचती है और किस तरह की चर्चा को जन्म देती है।

  • भारत की कारोबारी गतिविधियां अक्टूबर में चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंचीं, घरेलू मांग और निर्यात से मिली मजबूती

    भारत की कारोबारी गतिविधियां अक्टूबर में चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंचीं, घरेलू मांग और निर्यात से मिली मजबूती

    नई दिल्ली । भारत के निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में अक्टूबर 2026 के दौरान तेजी दर्ज की गई है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में नए ऑर्डरों की बढ़ोतरी, घरेलू मांग में मजबूती और विदेशी बाजारों से मिले बेहतर कारोबार के कारण गतिविधियां चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गईं। अक्टूबर के शुरुआती सर्वेक्षण आंकड़ों के अनुसार, कंपनियों को बाजार की परिस्थितियों में सुधार का लाभ मिला। इसके साथ ही उत्पादन लागत और बिक्री कीमतों पर पड़ने वाले दबाव में भी नरमी दर्ज की गई, जबकि रोजगार वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी रही।

    अक्टूबर में एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स बढ़कर 56.7 पर पहुंच गया, जबकि सितंबर में यह 55.9 था। यह सूचकांक विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की संयुक्त कारोबारी गतिविधियों का आकलन करता है। पीएमआई में 50 से ऊपर का स्तर गतिविधियों में विस्तार का संकेत देता है, जबकि इससे नीचे का स्तर संकुचन को दर्शाता है। अक्टूबर का आंकड़ा जून के बाद कारोबारी गतिविधियों में सबसे तेज वृद्धि का संकेत देता है।

    सर्वेक्षण के मुताबिक, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने नए ऑर्डरों में बढ़ोतरी और कारोबारी परिस्थितियों में सुधार की जानकारी दी। घरेलू बाजार से मिलने वाली मांग के साथ विदेशी ग्राहकों की ओर से भी ऑर्डर बढ़े। विशेष रूप से निर्यात ऑर्डरों में पिछले छह महीनों की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। इससे भारतीय कंपनियों को उत्पादन और सेवाओं से जुड़ी गतिविधियों में तेजी बनाए रखने में मदद मिली।

    विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन और नए ऑर्डरों की वृद्धि सितंबर के आसपास बनी रही, लेकिन निर्यात मांग में तेजी अक्टूबर की प्रमुख विशेषता रही। भारत की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, जून 2025 के बाद पहली बार निर्यात ऑर्डरों में इतनी मजबूत बढ़ोतरी देखी गई है। विदेशी बाजारों से मिले बेहतर संकेतों के बीच निर्माताओं ने कच्चे माल और तैयार उत्पादों का भंडार भी बढ़ाया। कंपनियों की यह गतिविधि बढ़ती मांग को पूरा करने की तैयारी के रूप में देखी जा सकती है।

    महंगाई के मोर्चे पर भी आंकड़ों में राहत के संकेत मिले हैं। उत्पादन लागत और बिक्री कीमतों पर दबाव लगातार कम होने की जानकारी सामने आई। लागत संबंधी दबाव में नरमी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उत्पादन और बिक्री से जुड़े फैसलों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े यह नहीं बताते कि आने वाले महीनों में महंगाई किस स्तर पर रहेगी। फिलहाल सर्वेक्षण अक्टूबर के दौरान लागत और कीमतों से जुड़े दबावों में कमी का संकेत देता है।

    रोजगार के मामले में स्थिति अपेक्षाकृत मिश्रित रही। निजी क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या बढ़ने की गति धीमी हुई। सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने लगातार नौ महीनों तक भर्ती बढ़ाने के बाद अक्टूबर में नई नियुक्तियों को लगभग रोक दिया। कंपनियों का मानना था कि मौजूदा कर्मचारियों की संख्या से कामकाज की जरूरतें पूरी हो रही हैं। वहीं, विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार बढ़ा, लेकिन इसकी रफ्तार सीमित रही। इससे स्पष्ट होता है कि कारोबारी गतिविधियों में तेजी के बावजूद भर्ती में समान स्तर का विस्तार नहीं हुआ।

    सर्वेक्षण में लंबित कार्यभार में भी गिरावट दर्ज की गई। कंपनियों के पास पहले से जमा काम का स्तर लगातार तीसरी बार घटा और यह संयुक्त रूप से पिछले साढ़े छह वर्षों की सबसे तेज गिरावट रही। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां लंबित काम को अपेक्षाकृत तेजी से पूरा कर पा रही हैं। अक्टूबर में विनिर्माण पीएमआई 54.9 दर्ज किया गया, जो इस क्षेत्र में लगातार विस्तार को दर्शाता है।

    कुल मिलाकर, अक्टूबर के शुरुआती पीएमआई आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था के निजी क्षेत्र में मजबूत कारोबारी गति का संकेत देते हैं। घरेलू मांग, निर्यात ऑर्डरों और विनिर्माण गतिविधियों से विस्तार को सहारा मिला है। हालांकि, रोजगार वृद्धि की धीमी रफ्तार यह बताती है कि कारोबार में तेजी का लाभ सभी क्षेत्रों में नई नियुक्तियों के रूप में समान रूप से दिखाई नहीं दिया है।